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महागठबंधन की राह में मुलायम बाधा

ताकतवर की ही समाज और राजनीति में जगह होती है. उसी के फैसले माने जाते हैं. मुलायम सिंह यादव और कांग्रेस से गठबंधन का तालमेल बनता न देखकर लोकदल और जनता दल युनाइटेड ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में छोटे दलों का महागठबंधन बनाने का काम शुरू कर दिया है.

पिछड़ी जातियों का प्रतिनिधित्व करने वाले इन दलों के साथ दलितों को जोड़ने का काम आरके चौधरी की पार्टी बीएसफोर भी करेगी. राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश कार्यालय में लोकदल प्रमुख चौधरी अजित सिंह, जदयू के अध्यक्ष शरद यादव और महासचिव केसी त्यागी ने उत्तर प्रदेश के विधानसभा में महागठबंधन की नींव रखी.

शरद यादव ने कहा कि हमने बिहार के विधानसभा चुनावो में महागठबंधन टूटने के बाद भी उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में साम्प्रदायिक ताकतों के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने का फैसला किया. सपा नेता मुलायम सिंह यादव ने इसमें अपनी सहमति दी. सबने इसको आगे बढ़ने का काम किया. तब बिहार की ही तरह उत्तर प्रदेश के मुद्दे पर भी मुलायम पीछे हट गये. वह बोले की जिसको साथ चलना है वह सपा में विलय कर ले. शरद यादव कहते है बिहार चुनाव में हमने विलय ही कर लिया था. सभी दल सपा के साथ खड़े थे उसके बाद भी गठबंधन नहीं हो सका.

महागठबंधन क्यो नहीं हुआ इस बारे में महासचिव केसी त्यागी ने कहा, यह बात तो सपा के नेताओं के बयानों से ही साफ हो चुका है कि बिहार गठबंधन क्यों टूटा. उत्तर प्रदेश का अंदाजा भी उसी बात से लग सकता हैं. लोकदल प्रमुख अजित सिंह ने कहा हम अभी और दलों को भी एकजुट करने के प्रयास में है. अभी हमने कांग्रेस से कोई बात नहीं की है.

असल बात यह है कि लोकदल और जदयू का उत्तर प्रदेश में कोई बड़ा जनाधार नहीं है. समाजवादी पार्टी को पता है कि विधानसभा चुनावों के बाद अगर इन दलों के विधायक जीत कर आयेंगे तो जरूरत पड़ने पर अपने पक्ष में किया जा सकता है. लोकदल 2003 में मुलायम सरकार के साथ सरकार में रह चुकी है. लोकदल की अनुराधा चौधरी मुलायम सरकार में मंत्री बनी थीं. जदयू के पास ऐसा अवसर नहीं आया. मौका पड़ने पर वह भी सपा के साथ होगी.

जदयू और सपा के रिश्तों में लालू प्रसाद यादव का अहम रोल होता है. बिहार में लालू और जदयू साथ है पर दोनो दलों के बीच आपसी मतभेद भी है. लालू मुलायम के रिश्तेदार हैं. अब वह मुजालम के ही साथ रहेंगे. इस बात की घोषणा वह कर चुके है. लालू प्रसाद यादव की पार्टी सपा के खिलाफ उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव भी नहीं लड़ेगी. ऐसे में सपा और जदयू के रिश्ते जुड़ नहीं पायेंगे.

लोकदल के नेता अजित सिंह को मुलायम ने हमेशा जरूरत के हिसाब से ही इस्तेमाल किया है. मुलायम अजित को भरोसेमंद नेता नहीं मानते. इन वजहों से सपा लोकदल-जदयू के महागठबंधन में शामिल नहीं हुई. बिहार की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी महागठबंधन को बिना सपा के ही चुनावी सफर तय करना होगा. यहां लालू प्रसाद भी उनके साथ नहीं होंगे.

ब्लैक होल में फंसे तो..

अगर आप ब्लैक होल में गिर जाएं तो क्या होगा? कभी आप ने सोचा है. यह फ्री फौल जैसा होगा. आप इस में गिरेंगे तो बिना झटके के गिरते ही चले जाएंगे. यह एक अंतहीन यात्रा होगी. फ्री फौल को आइंस्टाइन ने हैप्पीएस्ट थौट कहा था. हां, अगर ब्लैक होल का आकार छोटा हुआ तो आप को दिक्कत हो सकती है. गुरुत्वाकर्षण का बल तब आप के पैरों में ज्यादा महसूस होगा. लेकिन अगर यह ब्लैक होल सूर्य से भी काफी बड़ा है तो एक हकीकत यह भी है कि इस में आप अपना पूरा जीवन बिता सकते हैं. वैसे यह कितना सामान्य होगा, यह सोचने की बात है, क्योंकि इस में स्पेस और टाइम का कोई मतलब नहीं होगा. यहां आप की कोई इच्छा काम नहीं करेगी और आप पीछे मुड़ कर देख भी नहीं सकेंगे.

मशहूर भौतिकविज्ञानी स्टीफन हौकिंग का कहना है कि ब्लैक होल की गहरी खाई से निकल पाना संभव है. स्टीफन हौकिंग ने ब्लैक होल के बारे में यह नई जानकारी दे कर सभी को चौंका दिया है. अभी तक तो सभी यही जानते थे कि ब्लैक होल से निकलना असंभव है. ब्लैक होल ऐसी खगोलीय चीज है जिस का गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र इतना शक्तिशाली होता है कि प्रकाश तक भी इस के खिंचाव से नहीं बच सकता. इस में एक तरफ की सतह होती है जिसे घटना क्षितिज कहा जाता है. अब तक माना जाता था कि इस के आगोश में आई वस्तुएं बाहर नहीं निकल सकतीं, लेकिन स्टीफन हौकिंग ने अपने नए शोध से यह जानकारी दी है कि इस से बाहर निकल पाना संभव है.

हौकिंग का यह शोधपत्र, फिजिकल रिव्यू लैटर्स में प्रकाशित हुआ है. इस में हौकिंग ने लिखा है कि जैसा पहले ब्लैक होल के बारे में सोचा गया था कि यह अंतहीन कैदखाना है, वैसा यह है नहीं. अगर आप को लगे कि आप ब्लैक होल में फंस गए हैं तो हार मत मानें. वहां से बच निकलने का रास्ता है. हौकिंग द्वारा दी गई यह नई जानकारी न केवल ब्लैक होल की परिभाषा को बदल देगी बल्कि इस बात से भी परदा हट जाएगा कि ब्लैक होल द्वारा निगल ली गई वस्तुओं और जानकारियों का आखिर हुआ क्या?

मुंह पसारता ब्लैक होल

इस नए शोध से पहले हौकिंग भी यह मानते थे कि ब्लैक होल में समा गई सारी वस्तुएं खो जाती हैं लेकिन अपनी समझदारी को विकसित करते हुए उन्होंने इस शोध में बताया है कि ब्लैक होल के भीतर समा गई जानकारी के बारे में फिर से पता लगाना संभव है. अब तक वैज्ञानिकों का मानना था कि ब्लैक होल सपाट होते हैं, लेकिन हौकिंग का कहना है कि ब्लैक होल असल में मुलायम बालों सरीखे आभामंडल से घिरे रहते हैं. ये रोएं उन सभी चीजों की जानकारी संजो कर रखते हैं जो ब्लैक होल में जा समाती हैं.

हौकिंग के इस दावे का यह मतलब कतई न निकालें कि आप ब्लैक होल में गोता लगाएं और दूसरी तरफ से जिंदा बच कर निकल जाएं. दरअसल, इस का मतलब यह है कि आप के शरीर के बजाय आप की जानकारी वहां सुरक्षित रहेगी, जिस का बाहर रिसाव संभव है.

अगर आप ब्लैक होल में गिर जाएं तो क्या होगा? शायद आप सोचते हों कि आप की मौत हो जाएगी. ऐसा संभव तो है लेकिन आप के साथ इस से अलग कई और चीजें भी वहां हो सकती हैं. ब्लैक होल अंतरिक्ष में वह जगह है जहां भौतिक विज्ञान का कोई नियम काम नहीं करता, क्योंकि इस का गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र बहुत शक्तिशाली होता है. इस के खिंचाव से कुछ भी नहीं बच सकता. प्रकाश भी यहां प्रवेश करने के बाद बाहर नहीं निकल पाता है. यह अपने ऊपर पड़ने वाले सारे प्रकाश को अवशोषित कर लेता है. इसलिए यह एक अंधकारमय गुफा की तरह होता है जिस में अनंत वस्तुएं विलीन हो जाती हैं.

ब्लैक होल की चपेट में आ गए तो क्या होगा

मान लीजिए आप किसी दूसरे ग्रह पर जीवन की तलाश में निकले हों और तभी ब्लैक होल की चपेट में आ जाएं, तो क्या होगा? आप ऐसा सोचते होंगे कि ब्लैक होल आप को कुचल देगा. डरिए नहीं, ऐसा नहीं होगा. अगर आप ब्लैक होल की चपेट में आए तो आप के साथ दो बातें हो सकती हैं या तो आप तुरंत जल कर राख हो जाएंगे या फिर बिना कोई नुकसान झेले ब्लैक होल में फंस जाएंगे. फिर उस से आप का निकलना नामुमकिन हो जाएगा. जैसे जब कोई विशाल तारा अपने अंत की ओर पहुंचता है तो वह अपने में ही सिमटने लगता है. धीरेधीरे वह फिर भारीभरकम ब्लैक होल बन जाता है और सबकुछ अपने में समेटने लगता है.

ब्लैक होल के बाहरी हिस्से को इवैंट हौरिजन कहते हैं. क्वांटम प्रभाव के कारण इस से गरम कण टूट कर ब्रह्मांड में फैलने लगते हैं. स्टीफन हौकिंग की खोज के मुताबिक हौकिंग रेडिएशन के चलते एक दिन ब्लैक होल पूरी तरह द्रव्यमान मुक्त हो कर गायब हो जाता है. जब आप ब्लैक होल के अंदर पहुंचते हैं तो इस का केंद्र असीम घुमावदार होता है, जिस में आप फंस कर रह जाएंगे. वहां आ कर समय और स्पेस दोनों अपना अर्थ खो देते हैं और भौतिक विज्ञान का कोई नियम काम नहीं करता. यहां पहुंचने के बाद क्या होगा, यह कोई नहीं जानता, क्योंकि वहां कोई भी नहीं पहुंच सका है. क्या कोई दूसरा यूनिवर्स आ जाएगा या फिर आप सबकुछ भूल कर नई दुनिया में पहुंच जाएंगे. यह रहस्य अभी तक बना हुआ है.

आईफोन भी फेल हो जाएगा

मान लीजिए आप के साथ अंतरिक्ष के सफर में एक साथी रिचा भी है. वह बाहर से खड़ी हो कर ब्लैक होल के अंदर आप को जाते हुए देख रही है. अगर आप इवैंट हौरिजन की ओर आते हैं तो रिचा को ऐसा लगेगा जैसे वह आप को किसी मैग्नीफाइंग ग्लास से देख रही हो. आप उसे स्लो मोशन में नजर आएंगे. उसे आप आवाज दे कर भी कुछ नहीं बता सकते, क्योंकि वहां न तो हवा है और न पानी. अगर आप अपने आईफोन से किसी ऐप के जरिए संदेश भेजें तो भी उसे जल्द नहीं मिलेगा, क्योंकि आप के शब्द तो वहां बहुत देर से पहुंच रहे होंगे. इस का कारण यह है कि ब्लैक होल के अंदर फ्रीक्वैंसी लगातार कम होती जाएगी जो आप को सुनाई ही नहीं देगी. जब आप हौरिजन तक पहुंचेंगे तब रिचा आप को फ्रीज हुआ पाएगी. ऐसा लगेगा मानो किसी ने आप का पौज बटन दबा दिया हो. आप में कोई गति नहीं होगी और आप हौरिजन की भीषण गरमी की चपेट में आ चुके होंगे. हौकिंग रेडिएशन के चलते ब्लैक होल के अंधकार तक पहुंचने से पहले ही आप राख में तबदील हो जाएंगे.

कैसे जन्मा ब्लैक होल

आप को ऐसा लगता होगा कि ब्लैक होल वास्तव में कोई काला बड़ा छेद होगा, ऐसा नहीं है. यह तो मरे हुए तारों के अवशेष हैं. जब तारे मरते हैं तो ब्लैक होल पैदा होते हैं. करोड़ोंअरबों साल के बाद किसी तारे की जिंदगी खत्म होती है और ब्लैक होल का जन्म होता है. यह तेज और चमकते सूरज या किसी दूसरे तारे के जीवन का आखिरी पल होता है और तब इसे सुपरनोवा कहा जाता है. जब किसी तारे में विशाल धमाका होता है तो वह तबाह हो जाता है. उस के पदार्थ अंतरिक्ष में फैल जाते हैं. इन पलों की चमक, किसी गैलेक्सी जैसी होती है. मरने वाले तारे में इतना आकर्षण होता है कि उस का सारा पदार्थ आपस में बहुत गहनता से सिमट जाता है और एक छोटे, काले बौल की आकृति ले लेता है. यही ब्लैक होल होता है. इस का कोई आयतन नहीं होता लेकिन घनत्व अनंत होता है. यह घनत्व इतना ज्यादा है कि आप इस की कल्पना भी नहीं कर सकते. ऐसे ब्लैक होल ग्रह,चांद, सूरज समेत सभी अंतरिक्षीय पिंडों को अपनी ओर खींचने लगते हैं. जितने ज्यादा पदार्थ इस के अंदर आते हैं इस का आकर्षण और भी बढ़ता जाता है. यहां तक कि यह आसपास के प्रकाश को भी सोख लेता है, जिस के चारों ओर घना अंधकार होता है.      

सिक्वअल फिल्मों का हुआ बेड़ा गर्क

पिछले सप्ताह प्रदर्शित ‘रॉक ऑन’ की सिक्वअल फिल्म ‘रॉक ऑन 2’ वीकेंड में बॉक्स आफिस पर बामुश्किल 7 करोड़ ही कमा पायी थी. बॉक्स आफिस पर इतनी बुरी दुर्गति के लिए फिल्म ‘रॉक ऑन 2’ के मुख्य अभिनेता व फिल्म के निर्माता फरहान अख्तर ने सारा दोष नोटबंदी के सिर मढ़ गंगा नहा लिया. जबकि कटु सत्य यह है कि यदि नोटबंदी न हुई होती, तो भी इस फिल्म को बॉक्स आफिस पर कुछ खास फायदा नहीं होता.

बहरहाल, इस सप्ताह 2 सिक्वअल फिल्में प्रदर्शित हुई और इन दोनो ही फिल्मों ने अपनी पहली फिल्मों के मुकाबले इस बार बहुत कम सफलता पायी है. एक फिल्म ‘फोर्स’ की सिक्वअल ‘फोर्स 2’ है. ‘फोर्स 2’ वीकंड यानी कि 3 दिन में बॉक्स आफिस पर महज 18 करोड़ 62 लाख रूपए ही कमा पायी है. तो वहीं दूसरी फिल्म 2001 की सफलतम फिल्म ‘तुम बिन’ का सिक्वअल ‘तुम बिन 2’ है. ‘तुम बिन’ ने वीकंड पर यानी कि 3 दिन में महज 1 करोड़ 91 लाख रूपए यानी कि ‘रॉक ऑन 2’ से भी कम कमा पाई है. वैसे ‘रॉक ऑन 2’, ‘फोर्स 2’ और ‘तुम बिन 2’ की लागत में भी काफी अंतर है.

यदि लागत के हिसाब से देखा जाए, तो ‘रॉक ऑन 2’ तथा ‘फोर्स 2’ ने तो स्टूडियो व वितरकों की कमर ही तोड़ी है. इन तीनों ही फिल्मों में काफी गड़बड़ियां रही हैं, पर फिल्मकार अपनी गलती कबूल करने की बजाय सारा दोष नोटबंदी को ही दे रहे हैं. इन तीनों फिल्मों के बॉक्स आफिस की कमायी से यह बात साफ हो जाती है कि फिल्मकारों की अपनी गलतियों के चलते सिक्वअल फिल्मों का बेड़ा गर्क हो चुका है. अब इसका असर ‘कहानी 2’ पर क्या पड़ेगा, यह देने वाली बात है.

गगनजीत ने जीता इंडोनेशिया ओपन गोल्फ खिताब

भारतीय खिलाड़ी गगनजीत भुल्लर ने करियर में दूसरी बार तीन लाख डॉलर इनामी राशि वाला इंडोनेशिया ओपन गोल्फ टूर्नामेंट अपने नाम किया. अनुभवी गगनजीत पांचवें गोल्फर हैं, जिन्होंने दो बार यह खिताब जीता है.

गगनजीत से पहले थाईलैंड के थावोर्न विराचांट, न्यूजीलैंड के फ्रैंक नोबिलो, फिलीपींस के फ्रैंकी मिनोजा और चीनी ताइपे के लू सी चुएन ने दो बार खिताब जीते हैं.

उन्होंने सातवीं बार एशियाई टूर खिताब जीता. यह उनका इस सत्र में दूसरा खिताब भी है. पोनडोक इन्दाह गोल्फ कोर्स में अन्य भारतीय गोल्फर और दो बार के एशियाई टूर नंबर वन जीव मिल्खा सिंह संयुक्त दूसरे स्थान पर रहे. यह मिल्खा का 2012 के बाद सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है.

बीसीसीआई से बड़े अधिकारियों को हटाया जाएः लोढा कमेटी

बीसीसीआई और लोढ़ा कमेटी एक बार फिर से आमने-सामने हैं. लोढ़ा पैनल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि बीसीसीआई के सभी अधिकारियों को हटाकर पूर्व ग्रह सचिव जीके पिल्लई को ऑबजर्बर बना देना चाहिए.

रिपोर्ट में कमेटी ने बीसीसीआई के कामकाज को पारदर्शी बनाने के लिए कई नई सिफारिशें की हैं. इसके पहले कमेटी ने सिफारिश की थी कि 70 साल से ज्यादा उम्र के व्यक्ति को बीसीसीआई में शामिल नहीं किया जाए साथ ही हर राज्य के पास एक ही वोट हो उससे ज्यादा नहीं.

लोढ़ा पैनल और बीसीसीआई आमने सामने

पिछले लंबे समय से बीसीसीआई और लोढ़ा पैनल में खींच तान मची हुई है. बोर्ड लोढ़ा पैनल की सिफारिशें पूरी तरीके से लागू करने को तैयार नहीं है और ढीला रवैया अपना रहा है. सुप्रीम कोर्ट पहले ही आदेश दे चुका है कि सिफारिशों को पूरी तरह लागू करे. लेकिन बावजूद इसके बीसीसीआई अपनी अलग दलील रखता रहा है.

बीसीसीआई को लोढ़ा कमिटी की 70 साल से ज्यादा उम्र के पदाधिकारियों की छुट्टी, एक व्यक्ति के पास एक से ज्यादा पद ना हो, एक राज्य का एक से ज्यादा वोट ना हो, चयन समिति में तीन सदस्य हों, पदाधिकारियों के नौ साल या तीन कार्यकाल और पदाधिकारियों का कार्यकाल लगातार ना हो जैसी सिफारिशों पर एतराज करता रहा है.

बोर्ड ने नौ सिफारिशों को माना है

बीसीसीआई ने लोढ़ा कमिटी की 9 अहम सिफारिशें स्वीकार की हैं जिसमें अपेक्स काउंसिल बनाना, अपेक्स काउसिंल में सीएजी का सदस्य होना, आईपीएल गवर्निंग काउंसिल में सीएजी का प्रतिनिधित्व और खिलाड़ियों का संगठन बनाने जैसी सिफारिशों शामिल हैं.

शादी के नकली कार्ड दिखाकर नहीं ले सकेंगे पैसे

आरबीआई ने शादी-विवाह के लिए बैंक खातों से 2.50 लाख रुपये तक कैश निकासी के लिए कड़ी शर्तें लागु कर दी हैं. आरबीआई ने कहा कि यह पैसा 8 नवंबर को खातों में रहे क्रेडिट बैलेंस से ही निकाला जा सकता है. 8 नवंबर को पीएम नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 रुपये के नोटों को रद्द करने का फरमान देश को सुनाया था.

नियमों को नोटिफाई करते हुए आरबीआई ने कहा कि निकाली गई रकम का इस्तेमाल केवल उन लोगों को पेमेंट करने में किया जा सकता है, जिनके पास बैंक खाते न हों. आरबीआई ने कहा कि पैसा पाने वाले ऐसे लोगों का नाम भी कैश विदड्रॉल के एप्लिकेशन में लिखना होगा. आरबीआई ने कहा कि विदड्रॉल एप्लिकेशन में वर-वधू के नाम, उनके आइडेंटिटी प्रूफ, पते और शादी की तारीख की जानकारी देनी होगी.

शादी-विवाह के लिए ढाई लाख रुपये तक रकम तभी निकाली जा सकेगी, जब शादी की तारीख 30 दिसंबर 2016 को या इससे पहले हो. आरबीआई ने एक नोटिफिकेशन में कहा कि लोगों को उनके बच्चों की शादियों में सहूलियत देने के लिए तय किया गया है कि उन्हें उनके बैंक डिपॉजिट एकाउंट्स से ज्यादा कैश निकालने की इजाजत दी जाए. शादी समारोह होने का सबूत, इनविटेशन कार्ड, मैरेज हॉल बुकिंग और कैटरर्स को किए गए एडवांस पेमेंट्स जैसे अग्रिम भुगतानों की रसीदों की प्रतियां भी विदड्रॉल एप्लिकेशन के साथ लगानी होंगी.

सावधान, आपके ई-वालेट की ताक में साइबर चोर

मोदी सरकार के बराए मेहरबानी आजकल हमारे-आपके जेब में राशनिंग थोप दी गयी है. नोट बैन के बाद सरकार का जोर है 'कैशलेस' लेनदेन पर. एक सीमा से अधिक कोई जेब में नकद रख ही नहीं सकता. जाहिर है बाजार में नकदी की किल्लत है और इसके चलते देर-सबेर लोग ई-वालेट पर निर्भर होने को मजबूर हैं. पेटीएम, ई-वालेट, ई-ऑक्सीजन, आईसीआईसीआई बैंक का आई-मोबाइल, पॉकेट्स, स्टेट बैंक बडी, ई-पेमेंट, सिटरस वालेट, पेयूमनी, रुपे और जाने किस-किस  की बाजार में सक्रियता बढ़ गयी. जेब में पैसे न होने से लोग ई-वालेट का रूख कर वर्च्युअल पेमेंट कर रहे हैं. इस वर्च्युअल वालेट से एक अलग किस्म का खतरा खड़ा हो गया है.

लेकिन यह सोच लेना कि जनता के जेब में पैसे नहीं हैं तो चोरों और जेबकतरों का बाजार मंदा चल रहा है. वो कहावत है न- चोर चोरी से जाए, पर हेराफेरी से न जाए- इन दिनों यह कहावत खरी उतर रही है. चोर ही डिजिटल हो गए हैं. इनकी चोरी की गिनती साइबर क्राइम के तहत होती है. साइबर विशेषज्ञों की माने तो आजकल डिजिटल चोर पूरे देश में सक्रिय हो गए हैं. इनकी नजर ई-वालेट पर है. ये हमारे-आपके वर्च्युअल वालेट हैक करने की फिराक में हैं. साइबर क्राइम के जानकार पुलिस अधिकारी असित घोष का कहना है कि यह काम इतनी चालाकी से हो रहा है कि आपको कानोंकान खबर नहीं होगी. जब खबर होगी तब तक लोग लुट-पिट चुके होंगे.

वर्च्युअल चोरी या साइबर अपराध का दायरा बढ़ रहा है और साइबर पुलिस के लिए यह एक नई चुनौती के रूप में सामने आया है. पुलिस अधिकारी घोष कहते हैं कि जब हम बैंक के माध्यम से लेनदेन करते हैं तो आज हर बैंक में केवाईसी यानि नो योर कस्टमर फार्म भरना पड़ता है. इसके सपोर्ट में कई दस्तावेज बैंक में जमा करना होता है. लेकिन ई-वालेट के मामले में ऐसा कोई फार्म भरने की बाध्यता नहीं होती. इसी का फायदा मिलता है डिजिटल चोरों को. बड़ी आसानी से ई-वालेट खोल कर वर्च्युअल पैसे उड़ा लेते हैं. ऐसी चोरी की जांच में पुलिस को कई तरह की दिक्कतें पेश आती है.

पता चला दक्षिण 24 परगना में एक व्यक्ति ने अचानक पाया कि उसके एकाउंट से एक बड़ी रकम ऑनलाइन के जरिए गायब हो गयी है. इसकी खबर उसे कुछ दिनों के बाद मिल पायी. पुलिस में इसकी शिकायत की गयी. जांच में पुलिस ने पाया कि उस व्यक्ति के एकाउंट से जो रकम गायब हुई वह ऑनलाइन वालेट के जरिए गायब की गयी थी. उसके ई-वालेट से हजारों रुपए का मोबाइल और डीटीएच रिचार्ज कराया गया था. इसके अलावा मोटे रकम की ऑनलाइन खरीदारी भी की गयी थी.

कोलकाता पुलिस में साइबर क्राइम के एक अन्य अधिकारी का कहना है फर्जी डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड तैयार कर लेने या एकाउंट हैक करने की शुरूआत बीत कुछ सालों पहले ही शुरू हो गयी थी. पिन नंबर की चोरी से इस तरह की चोरी को अंजाम दिया जाता रहा है. किसी एकाउंट से बड़ी रकम किसी दूसरे या चोर अपने एकाउंट में ट्रांसफर कर लेता रहा है. लेकिन अब तो वर्च्युअल तरीके से नकदी चोरी हो रही है.

साइबर कानून के जानकार विभास चटर्जी का कहना है कि बैंक में एकाउंट खोलने का काम रिजर्व बैंक के दिशानिर्देश के तहत होता है. जिस किसीको एकाउंट खोलना है, उसे उपयुक्त दस्तावेजों के साथ आवेदन करना पड़ता है. लेकिन ई-वालेट के लिए किसी दस्तावेज की जरूरत नहीं पड़ती है. वर्च्युअल चोरी के मामले में पाया गया है कि झांसा देनेवाला या ठगी करनेवाला कुछ समय के लिए ग्राहक का वर्च्युअल पैसा अपने ई-वालेट में रख कर उसका इस्तेमाल कर सकता है. इसे एक गेटवे की तरह इस्तेमाल करता है. ऐसी ठगी पर रोक लगाने के लिए ई-वालेट एकाउंट खोलने के मामले में कुछ खास तरह का नियंत्रण लगाना भी जरूरी है.

इसके अलावा और भी कई तरीके हैं ई-वालेट से चोरी या ठगी हो सकती है. ई-वालेट के लिए स्मार्टफोन और उसका फोन नंबर काफी है. कभी फोन चोरी होने पर या फोन हैक कर लिये जाने पर इस तरह को चोरी आसान हो जाती है. फोन हैक भर कर लेने से फोन के जरिए आपका सब कुछ साइबर चोर के हाथों में पड़ जाता है.इंडियन स्कूल औफ एथिकल हैकिंग के संदीप सेनगुप्ता का कहना है कि आज भी बहुत सारे लोग हैं जो अपने स्मार्टफोन में एंटीवायरस नहीं लगा कर रखते हैं. बगैर एंटीवायरस के विभिन्न तरह के वेबसाइट पर अपने फोन के जरिए जाते हैं. ऑनलाइन खरीदारी भी करते हैं. फोन पर असुरक्षित ब्राउज के कारण ट्रोजन या मैलवायर फोन पर पहुंचा दिया जाता है. इन ट्रोजन और मैलवायर के जरिए फोन हैक हो जाता है. एक बार फोन हैक हो गया तो फोन के जरिए तमाम निजी जानकारी हैकर के हाथ लग जाती है. जाहिर है फोन के साथ ई-वालेट भी हैकर के हाथ लग ही जाता है. इसीलिए सावधान! साइबर चोर आपके ई-वालेट की ताक में हैं.

मोबाइल गेम्स में कैरियर

मोबाइल ऐप्स की दुनिया में ‘पोकेमौन गो’ नाम के नए मोबाइल गेम ने जिस तरह तहलका मचाया है उस से जाहिर है कि जैसेजैसे टैक्नोलौजी आगे बढ़ रही है, मोबाइल और कंप्यूटर पर खेले जाने वाले गेम्स का के्रज भी बढ़ता जा रहा है. स्मार्टफोन पर पिछले कुछ वर्षों में सबवे सर्फर, कैंडी क्रश, टैंपल रन और एंग्री बर्ड्स जैसे गेम्स छाए हुए थे, पर अब पोकेमौन गो के साथ यह दीवानगी और बढ़ती नजर आ रही है.

लेकिन जिस तरह तेज और पहेलीनुमा गेम्स की चाहत बढ़ रही है, उसी तरह इन गेम्स को बनाने वालों की मांग में भी इजाफा हो रहा है.

गेम्स डिजाइनिंग में कैरियर

कैरियर और जौब के लिहाज से कंप्यूटर मोबाइल गेम्स नौकरी देने वाला एक उम्दा क्षेत्र बन गया है. मोबाइल पर जैसेजैसे इनडोर के साथ आउटडोर गेम्स की चाहत बढ़ रही है, वैसेवैसे इन हाईटैक गेम्स को बनाने वालों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं. खासतौर से स्मार्टफोन की संख्या बढ़ने के साथ जिस रफ्तार से मोबाइल गेम्स की मांग बढ़ी है, कहा जा सकता है कि मोबाइल गेम्स डैवलपिंग और डिजाइनिंग में भी नौकरी के बेशुमार मौके पैदा होंगे. मोबाइल गेमिंग की इस दुनिया में अलगअलग तरह के रोजगार हैं, इसलिए इन का चुनाव योग्यता के अलावा अपने रुझान के मुताबिक करना चाहिए. इस का आशय यह है कि अगर किसी का मन नई तरह की डिजाइनिंग में लगता है, तो उसे गेम डिजाइनर बनना चाहिए न कि एनिमेटर. इस फील्ड में सब से ज्यादा मांग ऐसे गेम डैवलपर्स की है, जिसे कंप्यूटर के क्षेत्र में जावा, C, C++, 2डी व 3डी गेम डैवलपिंग तकनीक की अच्छी जानकारी हो. गेमिंग की दुनिया में जो अलगअलग रोजगार उपलब्ध हैं, वे इस प्रकार हैं :

कंप्यूटर गेम प्रोड्यूसर

मोबाइल व कंप्यूटर गेमिंग में सब से ज्यादा अवसर कंप्यूटर या औडियोवीडियो गेम प्रोड्यूसर के रूप में उपलब्ध हैं. इन नौकरियों को हासिल करने के लिए युवाओं को डिजाइनिंग की अच्छी जानकारी के साथसाथ 2डी व 3डी मौड्यूलिंग सौफ्टवेयर का इस्तेमाल करना भी आना चाहिए. इस सैक्टर में कुछ पद औडियो प्रोड्यूसर इंजीनियर के रूप में उपलब्ध होते हैं, पर इस के लिए युवाओं को विभिन्न कंप्यूटर लैंग्वेज की जानकारी के साथ साउंड इंजीनियरिंग और C++ जैसी कंप्यूटर लैंग्वेज की जानकारी भी होनी चाहिए. डिजाइन आर्ट और गेमकंट्रोल टीम के साथ मिल कर काम करने के मौके भी गेम प्रोड्यूसरों को मिलते हैं, जिस से उन की काबिलीयत साबित होती है.

एनिमेटर

एक ओर जहां कंप्यूटर विशेषज्ञ गेम की तकनीक, जरूरतों और बारीकियों को समझते हुए उन के तकनीकी समाधान प्रस्तुत करते हैं, वहीं दूसरी ओर एनिमेटर किसी गेम विशेष के कार्टून कैरेक्टर्स के हर पहलू पर काम करते हैं. एनिमेटर ही किसी गेम के कार्टून कैरेक्टर को विकसित करता है और उसे ऐसा चेहरामुहरा व भावभंगिमाएं प्रदान करता है, जिस से वह कैरेक्टर लोगों में मशहूर हो जाता है. कंप्यूटर प्रोग्रामर और सीनियर आर्टिस्टों के साथ काम करने के इच्छुक एनिमेटर को 2डी व 3डी मौड्यूल्स के साथ कार्टून कैरेक्टर के 2डी व 3डी टैक्स्चर मैप तैयार करने में महारत हासिल होनी चाहिए, तभी वह किसी गेम के पात्रों को सही ढंग से डैवलप कर पाता है.

गेम डिजाइनर

किसी मौलिक कंप्यूटर या मोबाइल गेम की शुरुआती परिकल्पना गेम डिजाइनर ही करता है. वह नए गेम की डिजाइनिंग की कल्पना करता है, उन्हें पेश करने के तौरतरीके सुझाता है, गेम से जुड़े कैरेक्टर क्या और कैसे काम करेंगे और कैसे दिखेंगे, इस की भी तैयारी करता है और कैसे कोई गेम मजेदार हो सकता है, यह भी बताता है. गेम डिजाइनर से अपेक्षा की जाती है कि वह गेम की राइटिंग और डायग्राम का जिम्मा ले, लेकिन इस के लिए जरूरी है कि उसे आधुनिक गेमिंग तकनीक के साथसाथ गेमिंग आर्ट के विभिन्न पहलुओं की भी जानकारी हो.

ग्राफिक और औडियो प्रोग्रामर

ग्राफिक और औडियो के स्पैशल इफैक्ट के बिना कोई भी कंप्यूटर, मोबाइल गेम अधूरा है. ग्राफिक और औडियो प्रोग्रामर असल में गेम की पृष्ठभूमि में आने वाली विशेष आवाज और संगीत के साथसाथ उन्हें स्क्रीन पर रोचक ढंग से पेश करने का जिम्मा लेते हैं. किसी गेम को ग्राफिक सपोर्ट देने के लिए ग्राफिक प्रोग्रामर को C, C++, डायरैक्ट ऐक्स, ओपन जीएल, विंडो प्रोग्रामिंग, 3डी पैकेज की अच्छी जानकारी होनी चाहिए. इसी तरह औडियो प्रोग्रामर या साउंड इंजीनियर को गेम में आवाज से स्पैशल इफैक्ट पैदा करने वाली तकनीक की जानकारी होनी चाहिए. कुल मिला कर कई तरह के जौब मोबाइल गेमिंग के फील्ड में उपलब्ध हैं जो इस प्रकार हैं : गेम डिजाइनर, सीनियर लैवल डिजाइनर, जूनियर लैवल डिजाइनर, एनिमेटर, गेम प्रोग्रामर, प्रोग्रामर, नैटवर्क प्रोग्रामर, ग्राफिक्स प्रोग्रामर, औडियो प्रोग्रामर, गेम प्रोड्यूसर और क्वालिटी एश्योरैंस.

बेशक डिजिटल गेम्स की दुनिया में रोजगार की असीमित संभावनाएं हैं, पर यहां हर किसी को वह मुकाम नहीं मिल सकता जिस से उस की अलग पहचान बन सके. इस के लिए उस में कई खासीयतों की जरूरत होती है, जैसे इस की पहली योग्यता यह है कि इस फील्ड में पैशन रखने वाला शख्स ही आगे बढ़ सकता है.

शैक्षणिक योग्यताओं के साथसाथ यह भी जरूरी है कि युवा नएनए कंप्यूटर और मोबाइल गेम्स सीखने व खेलने के शौकीन हो . गेम्स को समझना, उस के सभी लैवल पार करना और उस की पहेलीनुमा जटिलताएं सुलझाना आदि पर गेमिंग वर्ल्ड में उस की कामयाबी तय होती है.

इसी तरह कला की बारीकियां समझना यानी आर्ट स्किल से लैस होना इस फील्ड में बहुत जरूरी है. इन खूबियों के साथ अगर आप में लीडरशिप की क्षमता है और आप का विश्वास टीमवर्क में है, तो गेमिंग की दुनिया में आप का निश्चय ही स्वागत होगा.

कोई भी शख्स अकेले दम पर गेम की डिजाइनिंग, एनिमेशन, आर्ट स्किल और कंप्यूटर प्रोग्रामिंग आदि सभी काम नहीं कर सकता. अत: उसे टीम के अन्य सदस्यों पर निर्भर रहना पड़ेगा. ऐसे में टीम को साथ ले कर चलने वाला व्यक्ति गेमिंग के क्षेत्र में अच्छा रोजगार पा सकता है.

वैसे कंप्यूटर मोबाइल गेमिंग के क्षेत्र में जाने के लिए कुछ खास कोर्स भी मददगार साबित हो सकते हैं, जैसे, बैचलर औफ फाइन आर्ट्स यानी बीएफए. डिजिटल डिजाइन नामक 3 साल का डिग्री कोर्स इस में मददगार साबित होता है. यह कोर्स 12वीं के बाद किया जा सकता है.

इस के अलावा कुछ और डिप्लोमा व सर्टिफिकेट कोर्स हैं, जिन की सहायता से गेमिंग की दुनिया में कदम रखा जा सकता है. ये कोर्स हैं :

–  प्रोफैशनल डिप्लोमा इन गेम आर्ट, जो कि एक साल का डिप्लोमा कोर्स है –  प्रोफैशनल डिप्लोमा इन डिजिटल आर्ट ऐंड डिजाइन, यह भी एक साल का डिप्लोमा कोर्स है –  प्रोफैशनल डिप्लोमा इन एनिमेशन, इस कोर्स की अवधि भी एक साल है

–  डिप्लोमा इन गेम आर्ट, इस कोर्स की अवधि 9 महीने है

–  सर्टिफिकेट इन 3डी विजुलाइजेशन, यह 4 महीने का कोर्स है –  सर्टिफिकेट इन गेम ऐन्वायरमैंट, यह भी 4 महीने का कोर्स है. इन में से ज्यादातर डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्सों के लिए शैक्षिक योग्यता 12वीं पास होना है.                      

यहां हैं रोजगार

वैसे तो गेमिंग ऐक्सपर्ट्स के लिए आज पूरी दुनिया में रोजगार के अवसर पैदा हो गए हैं, लेकिन देश में भी मोबाइल व कंप्यूटर गेम्स बनाने के लिए कुछ संस्थानों में ऐसे अवसर मिल सकते हैं. मोटे तौर पर शुरुआत में ढाई लाख रुपए सालाना की नौकरी देश की इन शीर्ष गेम्स डैवलपर कंपनियों में मिल सकती है, डिजिटल चौकोलेट, बेंगलुरु, इंडिया गेम्स, मुंबई, जंप गेम्स, मुंबई.

विदेशों में गेमिंग कंपनियों में काम करने वाले सीनियर सौफ्टवेयर इंजीनियर/डैवलपर/प्रोग्रामर को 1 लाख 20 हजार डौलर तक की सैलरी मिल जाती है. वहीं डिजाइन स्पैशलिस्ट का सालाना वेतन 108,000 डौलर तक हो सकता है. ग्राफिक आर्टिस्ट भी 88 हजार डौलर सालाना कमा लेते हैं, जबकि शुरुआत में गेम टैस्टर जैसे पद पर काम करने वाले व्यक्ति की सैलरी 44 हजार डौलर सालाना तक होती है. कुछ कंपनियों में गेम टैस्टर को 7 से 10 डौलर प्रति घंटे के हिसाब से सैलरी दी जाती है.

यहां से करें गेमिंग की पढ़ाई

–       डीएसके सुपिन्फोकोम

–       एशियाई इंस्टिट्यूट औफ गेमिंग ऐंड एनिमेशन

–       इंस्टिट्यूट औफ गेमिंग ऐंड एनिमेशन

–       आईसीएटी डेसिंग ऐंड मीडिया कालेज

इन के अलावा गेमिंग से जुड़े पाठ्यक्रमों में अध्ययन की सुविधा इंडस्ट्रियल डिजाइन सैंटर, आईआईटी, पवई (मुंबई) और नैशनल इंस्टिट्यूट औफ डिजाइन, अहमदाबाद में भी

कुछ इस तरह करें गर्लफ्रैंड की तारीफ

अपनी तारीफ सुनना हर किसी को पसंद होता हैं खासकर लड़कियों को. किसी भी लड़की को अपने पार्टनर से अपनी तारीफ सुनना बहुत अच्छा लगता है. ऐसा करने से रिश्तें में प्यार बना रहता है. अगर आप भी रिलेशनशिप में है तो अपनी गर्लफ्रैंड की तारीफ करना कभी न भूलें. जब भी मौका मिले उनकी तारीफ करें. आज हम आपको कुछ तरीके बताएंगे, जिससे आप अपने गर्लफ्रैंड की तारीफ कर सकते हैं.

1. खूबसूरती की तारीफ

अपनी गर्लफ्रैंड को जरूर अहसास दिलाएं कि वो कितनी खूबसूरत हैं. उसकी तारीफ करने से उसका मूड अच्छी रहता है और वो खुद को काफी स्पेशल समझती है.

2. म्यूजिक के जरिए

अपनी गर्लफ्रैंड की तारीफ करने के लिए गानों की प्लेलिस्ट तैयार कर लें. इस प्लेलिस्ट में उनकी आंखों, बालों और होंठ की तारीफ के गानें ही हो. इसे सुनने के बाद वो बहुत ही खुश होगी.

3. सहेलियों से ज्यादा खूबसूरत

अक्सर लड़कियों को यह डर लगा रहता है कि कहीं वो अपनी सहेलियों से कम तो नहीं नजर आ रही. ऐसे में उनको अहसास दिलाएं कि वो उनकी सहेलियों से ज्यादा खूबसूरत है.

4. व्यवहार

उनके व्यवहार के बारे में उनकी तारीफ करें. उन्हें बताए कि उनका दूसरों से बात करने का तरीका कितना खूबसूरत है.

5. विश्वास के साथ करें तारीफ

अपनी गर्लफ्रैंड की तारीफ में आप जो भी कहें आत्मविश्वास से कहें. एेसा न हो कि उनको आपकी तारीफ झूठी लगे.

चेहरे को हरदम ताजा रखेगा खीरे का स्प्रे

खीरे का इस्तेमाल हम लोग सलाद के रूप में करते हैं और इसके स्वास्थ्य और ब्यूटी फायदों के बारे में सभी जानते हैं, लेकिन क्या आपको पता है खीरा सेहत और ब्यूटी के लिए ही नहीं, बल्कि फ्रेशनेस के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है. जी हां, खीरे से आप स्प्रे बना सकते हैं. खीरे से बना स्प्रे आपको पूरा दिन फ्रैश रखेगा. आइए जानते है खीरे से स्प्रे बनाने की विधि…

 सामग्री

– आधा या एक खीरा

– 1 चम्मच नींबू

– 1 चम्मच गुलाबजल

– 1 चम्मच एलोवेरा

स्प्रे बनाने की विधि

सबसे पहले खीरे का साइज देखते हुए खीरा लें. इसे काटकर अच्छी तरह से ब्लेंडर में पीस लें. जब इसका पेस्ट बना जाए तो इसे निचोड़कर इसका रस निकाल लें. अब इस रस में नींबू का रस, 1 चम्मच गुलाबजल और एलोवेरा जेल अच्छी तरह से मिला लें.

इस्तेमाल करने का तरीका

अब इसे किसी स्प्रे बॉटल में डालकर कूलिंग स्प्रे तैयार करें. इसे अपने पास हमेशा रखें. आप इसको अपने चेहरे और बॉडी पर हल्का स्प्रे करें. इससे चेहरा फ्रेश लगेंगा.

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