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गीता फोगट की शादी में शामिल हुए आमिर खान

फिल्म के प्रचार के लिए जो न करना पड़े, वह कम है. जी हां! आमिर खान अभिनीत फिल्म ‘दंगल’ दिसंबर में प्रदर्शित होनी है जो कि अपने समय के मशहूर कुश्तीबाज महावीर सिंह फोगट व उनकी बेटियों की जीवनगाथा पर आधारित है.

इस फिल्म में आमिर खान ने महावीर सिंह फोगट का किरदार निभाया है. इसी के चलते आमिर खान, महावीर सिंह फोगट की बेटी गीता फोगट की शादी के अवसर पर न सिर्फ कुछ उपहार खरीदा बल्कि खुद भी गीता फोगट की शादी में शामिल होने के लिए 20 नवंबर को महावीर सिंह के गांव बलाली, हरियाणा भी गए.

मजेदार बात यह है कि आमिर खान ने पंद्रह दिन पहले से ही प्रचारित करना शुरू किया था कि वह गीता की शादी में शादी का जोड़ा लेकर जाएंगे. आमिर खान ने तो यहां तक प्रचारित करा दिया था कि वह गीता की शादी का जोड़ा खरीद चुके हैं. मगर अंततः वह शादी का जोड़ा लेकर नहीं गए.

इस पर अपनी सफाई देते हुए महावीर सिंह फोगट के गांव में पत्रकारों के सामने आमिर खान ने कहा, ‘‘हम शादी का जोड़ा लेकर आने वाले थे, पर बाद में हमें बताया गया कि इनके यहां रिवाज है कि शादी का जोड़ा मामा के घर से आता है, इसलिए हम शादी का जोड़ा लेकर नहीं आए. पर कुछ उपहार लेकर आए हैं, जो कि फोगट परिवार के लिए प्यार का इजहार है. मगर हम दिसंबर माह में फोगट परिवार को फिल्म ‘दंगल’ दिखाएंगे, उनके लिए हमारी तरफ से ‘दंगल’ ही असली तोहफा होगा.’’ यानी कि आमिर खान अपनी फिल्म ‘दंगल’ का ही प्रचार कर रहे थे.

सूत्रों के अनुसार इस मौके पर वह मुंबई से अपनी पीआर टीम व अपने खास फोटोग्राफर को ले जाना नहीं भूले. यहां तक कि दिल्ली से कुछ पत्रकारों को भी साथ ले गए. जब मामला फिल्म ‘दंगल’ से जुड़ा हो, तो स्वाभाविक तौर पर आमिर खान अकेले कैसे जाते. उनके साथ फिल्म ‘दंगल’ के निर्देशक नितेश तिवारी और फिल्म ‘दंगल’ में आमिर खान के साथ अभिनय करने वाली साक्षी तंवर और सान्या मल्होत्रा भी थीं.

वैसे आमिर खान का दावा है कि वह फिल्म ‘दंगल’ की शूटिंग व उसकी तैयारी के चलते पिछले दो साल में महवीर सिंह फोगट व उनकी बेटियों गीता फोगट बबिता फोगट के काफी करीब आ गए हैं. उनके लिए गीता का वह बहुत भावनात्मक अवसर था और वह चाहते थे कि गीता की जिंदगी के इस नए कदम पर वह अपना आशिर्वाद उसे दें. इस अवसर पर आमिर खान ने शेरवानी के उपर काले रंग की जैकट और लाल रंग की पगड़ी भी पहनी थी.

इस अवसर पर आमिर खान ने महावीर सिंह फोगट के परिवार के करीबन दो सौ लोगों से मुलाकात करने के साथ ही उनके परिवार के लोगों के साथ बैठकर मख्खन लगी मकई की रोटी और सरसों के साग का सेवन भी किया. बाद में गाजर का हलवा खाकर मुंह मीठा किया.

अजित और शरद ने नोटबंदी को माना अदूरदर्शी फैसला

नोटबंदी ने भाजपा सरकार के खिलाफ विपक्ष को एकजुट होने का मौका दे दिया है. जनता की परेशानियां नोटबंदी के 13 दिन बाद भी कम होने का नाम नहीं ले रही है. सरकार रोज रोज जिस तरह से नये नये प्रयास कर जनता की परेशानियां कम करने की कोशिश कर रही है वह भी नाकाफी साबित होती जा रही है.

शरद यादव ने कहा कि रेल हादसे में दी गई सहायता में बंद हो चुके बड़े नोटों को देने की घटना से पता चलता है कि नोटबंदी करने के पहले किसी भी तरह की योजना तैयार नहीं की गई थी. वह कहते हैं विपक्ष जनता की मुसीबतों को देखकर चुप नहीं रह सकता. ऐसे में वह नोटबंदी के मुददे पर एकजुट है. पूरा देश काम धंधा छोड़कर लाइन में खड़ा है. जिससे देश का काम ठप्प पड़ गया है.

लोकदल नेता अजित सिंह ने कहा कि नोट काला सफेद नहीं होता धंधा काला होता है. इस सरकार ने काला धंधा बंद करने की कोशिश नहीं की. बिना योजना के नोट बंद करने से देश आर्थिक संकट के दौर में पहुंच गया है. मोदी सरकार ने बिना किसी तैयारी के नोटबंदी का फैसला अदूरदर्शी फैसला है.

नोटबंदी करने के समय यह सोंचा ही नहीं गया कि इससे होने वाली परेशानी से कैसे निपट जायेगा. जदयू नेता शरद यादव ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से कहा कि वह नोटबंदी से परेशान हो रही जनता की परेशानी की बात लोगों के बीच उठाये जिससे उनको मदद मिल सके.

विदेशी सीरियल के भारतीयकरण पर बढ़ रहा जोर

बौलीवुड के साथ साथ अब धीरे धीरे टीवी इंडस्ट्री में भी मौलिक काम की बजाय सफल विदेशी सीरियलों की नकल परोसने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है. यह प्रवृत्ति सेटेलाइट चैनलों से जुड़े निर्माताओं में बड़ी तेजी से फैल रही है.

यह सभी किसी न किसी विदेशी सीरियल का भारतीयकरण करने पर ही जोर देने लगे हैं. कालांतर में इस तरह के कई सीरियल प्रसारित हो चुके हैं.

इन दिनों जहां एक तरफ ‘‘स्टार प्लस’’ पर ही अमरीकन सीरियल ‘‘रिवेंज’’ पर आधारित हिंदी सीरियल ‘‘एक हसीना थी’’ का दूसरा सीजन लाने की तैयारी हो रही है, वहीं दूसरी तरफ ‘‘स्टार प्लस’’ के लिए ‘‘दिया और बाती हम’’ जैसे अति लोकप्रिय सीरियल का निर्माण कर चुकी प्रोडक्शन कंपनी ‘‘शशि सुमित मित्तल प्रोडक्शन’’ इस बार भी ‘‘स्टार प्लस’’ के लिए ही लोकप्रिय अमरीकन टीवी सीरियल ‘‘द लास्ट मैन स्टैंडिंग’’ पर आधारित एक हिंदी सीरियल का निर्माण करने जा रहे हैं.

अब फ्लिपकार्ट से करिए ग्रोसरी शापिंग

देश की दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट ग्रॉसरी के बिजनेस में उतरने की तैयारी कर रही है. इतना ही नहीं वह ऑनलाइन फर्नीचर बिजनेस के लिए भी अहम योजना बना रही है. दरअसल, फ्लिपकार्ट अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो के विस्तार से अमेजन को टक्कर देना चाहती है.

फ्लिपकार्ट के चीफ एग्जेक्यूटिव बिन्नी बंसल ने बताया, ‘हम ग्रोसरी सेल की योजना बना रहे हैं और अगले तीन वर्षों में अपने ऑपरेशन को बढ़ा देंगे.’ अमेजन ने चुनिंदा शहरों में ग्रॉसरी सेल के लिए पायलट प्रोजक्ट शुरु कर दिया है. 1.2 बिलियन आबादी वाले देश में ज्यादातर लोग ऑनलाइन खरीदारी करना पसंद कर रहे हैं. इसी को देखते हुए देश का ई-कॉमर्स बाजार दुनिया में तेजी से बढ़ रहा है.

एक अमरिकी बैंकर के मुताबिक भारत में ऑनलाइन बिक्री वर्ष 2025 तक 10 गुना बढ़कर 188 बिलियन डॉलर हो सकती है. बंसल का कहना है कि फ्लिपकार्ट की बेस्ट सेलिंग श्रेणी फैशन ही रहेगी, लेकिन मुझे लगता है कि ऑनलाइन ग्रॉसरी में भी अगले 6 से 8 वर्षों के भीतर फैशन व इलेक्ट्रॉनिक श्रेणी की तरह बड़ा बनने की क्षमता है. वहीं फ्लिपकार्ट का यह भी कहना है कि कंपनी अपना आईपीओ लाने पर भी विचार कर रही है.

तलवार लहरा कर सपा में एकता का एलान

समाजवादी लोग आपस में लड़ते हैं दूसरो को नहीं लड़ाते’. बिहार के नेता लालू प्रसाद यादव ने यह बात समाजवादी पार्टी के 25 वें स्थापना दिवस के मौके पर लखनऊ में कही. लखनऊ के जनेश्वर मिश्र पार्क में सपा के स्थापना दिवस में बड़े नेताओं ने मुलायम परिवार के बीच चले विवाद में सुलह कराई. लालू प्रसाद यादव का यह बयान उसी संदर्भ में था.

स्थापना दिवस के समारोह में लालू प्रसाद ने अखिलेश यादव को चाचा शिवपाल यादव के पैर छूने को कहा तो मुलायम के जन्मदिन पर लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस हाइवे के उद्घाटन समारोह में प्रोफेसर रामगोपाल यादव के पैर छू कर शिवपाल यादव ने परिवार में विवाद के पूर्ण विराम का एलान कर दिया. मंच पर जुटे सपा के नेताओं ने तलवार लहराकर एकता का एलान कर कहा कि अब वह एकजुट होकर विरोधियों से लड़ेंगे.

असल में सपा का विवाद खत्म होने के अवसर के बाद भी सब कुछ पहले जैसा नहीं हो पाया है. विवाद के पहले शिवपाल यादव अखिलेश मंत्रिमंडल के सबसे ताकतवर मंत्री होते थे अब वह नहीं हैं.

एक कार्यक्रम के अवसर पर खुद शिवपाल यादव ने कहा कि लोग कुर्सी के साथ होते थे. शिवपाल इस बात का जिक्र कर रहे थे कि उनके मंत्रीपद से हटने के बाद अब अफसर उनके पास नहीं दिखते. असल में परिवार के विवाद में सबसे अधिक नुकसान शिवपाल यादव को ही उठाना पड़ा है. वह मंत्री पद से हटे हैं. पार्टी में भी वह कमजोर पड़े हैं. प्रोफेसर रामगोपाल की पार्टी में वापसी के साथ मुलायम ने उन नेताओं को भी पार्टी में वापस लाने के संकेत दे दिये हैं जिनको शिवपाल ने हटाया था.

शिवपाल ने खुद किसी भी तरह के बयानों से खुद को अलग रखा है. पार्टी में वह सपा मुखिया मुलायम की रबर स्टैंप बन कर रह गये हैं. मुलायम ने जिस तरह से बाकी लोगों की बातों को तवज्जों दी उस तरह से शिवपाल का वापस अखिलेश मंत्रिमंडल में सम्मानजनक जगह नहीं दिला सके.ऐसे में शिवपाल को अपनी ताकत का अहसास हो चुका है. अघोषित तौर पर सपा में यह साफ हो चुका है कि पार्टी अखिलेश के चेहरे के साथ ही चुनाव लड़ेगी. चुनाव के बाद अखिलेश ही पार्टी के मुख्यमंत्री पद के दावेदार होंगे. इस बात से किसी का कोई विरोध नहीं है.

राजनीति में विरोध हमेशा ताकत के साथ किया जाता है. ऐसे में हर दांव सही ताकत मिलने के बाद ही चला जाता है. सपा ने जिन तलवारों को लहराकर विरोधियों को डराने का काम किया है यह तलवारें आपस में न खिच जाये इस बात का ख्याल रखना पड़ेगा. जिससे लालू की बात एक बार फिर सही साबित हो जाये कि समाजवादी लोग आपस में लड़ते हैं दूसरो को नहीं लड़ाते’.                     

संजीदा-वत्सल छोटे पर्दे पर फिर आयेंगे एक साथ

अमरीकन टीवी सीरीज ‘‘रिवेंज’’ पर आधारित भारतीय सीरियल ‘‘एक हसीना थी’’ को काफी लोकप्रियता मिली थी. यह सीरियल अपराध के साथ साथ बदले पर आधारित रोमांचक सीरियल था. इस सीरियल में दुर्गा के किरदार में संजीदा शेख तथा शौर्य के किरदार में वत्सल सेठ थे. इस सीरियल में दोनों एक दूसरे के खिलाफ थे.

अब यदि संजीदा शेख की इंस्टाग्राम पर पोस्ट की गयी तस्वीर के आधार पर विचार किया जाए, तो एक बार फिर बदले पर आधारित अपराध व रोमांचक सीरियल ‘‘एक हसीना थी’’ के दूसरे सीजन के शुरू होने के संकेत मिलते हैं. इसकी दो मूल वजहें हैं. पहली वजह यह है कि जब ‘एक हसीना थी’ बंद हुआ था,तो अंतिम दृश्य में दुर्गा, देव के साथ खुश होती है, तभी दुर्गा के मोबाइल फोन की घंटी बजती है और मोबाइल पर नाम चमकता है- शौर्य का.

दूसरी वजह यह है कि संजीदा शेख इंस्टाग्राम पर काफी तस्वीरें पोस्ट करती रहती हैं. मगर यह सारी तस्वीरें उनकी व उनके पति आमीर अली अथवा पार्टी या किसी जश्न की होती हैं. मगर एक सप्ताह की चुप्पी के बाद अब संजीदा शेख ने इंस्टाग्राम पर जो तस्वीर पोस्ट की है, उसमें संजीदा शेख के साथ वत्सल सेठ हैं. इससे यह बात चर्चा का विषय बन गयी कि क ‘एक हसीना थी’ के दूसरे सीजन के साथ ही छोटे परदे पर एक बार फिर संजीदा शेख व वत्सल सेठ की जोड़ी की वापसी होने जा रही है.

संजीदा शेख कुछ भी कबूल करने को तैयार नहीं हैं. वह कहती हैं कि कुछ चीजों को कुछ समय के लिए राज में रहने देने का अपना मजा है. जबकि वत्सल सेठ चुप रहना चाहते हैं.

किसान पुराने नोटों से खरीद सकेंगे बीज

खेती के सीजन में सरकार ने किसानों को एक और बड़ी राहत दी है. अब किसान 500 रुपये के पुराने नोटों से फसलों के बीज खरीद सकते हैं. सरकार के नए निर्देश के मुताबिक, किसान केंद्र तथा राज्य सरकार के विभिन्न केंद्रों एवं दुकानों में 500 रुपये के पुराने नोट देकर बीज ले सकते हैं.

इनके अलावा किसानों को पीएसयू, राष्ट्रीय या राज्य बीज निगमों, केंद्रीय या राज्य कृषि विश्वविद्यालयों और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) से भी पुराने नोट देकर बीज खरीदने की अनुमति मिल गई है. जिन किसानों को 500 रुपये के पुराने नोटों से बीज खरीदना है, उन्हें अपना पहचान पत्र संबंधित संस्था में जमा करना पड़ेगा.

गौरतलब है कि 500 और 1000 रुपये के नोट बंद करने की घोषणा के बाद पैदा हुई मुसीबतों के मुताबिक सरकार लगातार राहत भरे कदमों का ऐलान कर रही है. इसके तहत सोमवार को सरकार ने किसानों को दूसरी बार राहत देने की घोषणा की. इससे पहले किसानों को एक सप्ताह में 25 हजार रुपये तक निकालने की अनुमति दी गई थी. वहीं, सरकार ने शादी-ब्याह वाले घरों में भी परेशानी कम करने की कोशिश की और उन्हें 2.5 लाख रुपये तक निकालने की अनुमति दी गई.

मिस्बाह पर लगा एक टेस्ट मैच का बैन

इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) ने न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टेस्ट मैच के दौरान धीमे ओवर रेट के लिए पाकिस्तान के कप्तान मिस्बाह उल हक पर एक टेस्ट मैच का बैन लगा दिया है. इसके अलावा उन पर मैच फीस के 40 फीसदी का भी जुर्माना लगाया है.

मैच के मैदानी अंपायर इयान गोल्ड और एस रवि ने पाया कि पाकिस्तान टीम ने निर्धारित समय सीमा से दो ओवर कम फेंके जिससे मिस्बाह पर यह जुर्माना लगाया गया. जबकि पूरी पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर मैच फीस का 20 फीसदी जुर्माना लगाया गया है. आईसीसी की आचार संहिता के मुताबिक निर्धारित समय में प्रति ओवर कम फेंकने पर मैच फीस का दस फीसदी और टीम के कप्तान पर उसका दोगुना जुर्माना लगाने का प्रावधान है.

मिस्बाह पर आईसीसी द्वारा यह दूसरी बार जुर्माना लगाया गया है. इससे पहले उन पर इस साल अगस्त में ओवल में इंग्लैंड के खिलाफ मैच में जुर्माना लगा था. हालांकि मिस्बाह दूसरे टेस्ट में वैसे भी खेलने वाले नहीं हैं क्योंकि उनके एक रिश्तेदार का निधन हो गया था और वह पाकिस्तान के लिए रवाना हो गए थे.

पाकिस्तान क्राइस्टचर्च में पहला टेस्ट मैच तीन दिन के अंदर ही आठ विकेट से हार चुका है. अगला मैच 25 नवम्बर से हेमिल्टन में होगा.

फ्रीडा पिंटो की हिंदी फिल्म ‘लव सोनिया’

भारतीय मूल की ब्रिटिश अदाकारा फ्रीडा पिंटो सबसे पहले उस वक्त चर्चा में आयी थीं, जब उन्होने ऑस्कर विजेता फिल्म ‘स्लमडॉग मिलेनियर’ में अभिनय किया था. उसके बाद उन्होंने कई विदेशी कलाकारों के अलावा भारतीय मूल के ही ब्रिटिश अभिनेता देव पटेल के साथ भी अंग्रेजी भाषा की कई फिल्में की. पर इन दिनों वह भारतीय फिल्मकार तबरेज नूरानी निर्देशित हिंदी फिल्म ‘लव सोनिया’ को लेकर चर्चा में हैं, जिसमें उनके साथ अनुपम खेर और आदिल हुसैन ने भी अभिनय किया है. फ्रीडा पिंटो की यह पहली हिंदी फिल्म है.

फिल्म के बारे में फ्रीडा पिंटो कहती हैं, ‘‘मुझे हिंदी फिल्मों से परहेज नहीं है, बशर्ते कहानी व पटकथा अच्छी हो. मुझे जब तबरेज नूरानी ने ‘लव सोनिया’ की पटकथा सुनायी, तो मुझे कहानी भा गयी और मैंने यह हिंदी फिल्म की. इसमें मैंने एक ऐसी भारतीय व गांव की लड़की का किरदार निभाया है, जिसकी जिंदगी अंतर्राष्ट्रीय सेक्स व्यापार के जाल में फंसने पर बदल जाती है. इसमें मैं हिंदी बोलते हुए नजर आउंगी. इसके बाद भी अच्छी हिंदी फिल्में करना चाहूंगी. मैंने इससे पहले ‘तृष्णा’ नामक मारवाड़ी फिल्म में भी अभिनय किया है. और उस वक्त मैंने मारवाडी भी सीखी थी.’’

 

10 नायाब साईफाई औफिस

दुनिया में कई बड़ीबड़ी कंपनियों ने अलगअलग तरह के साईफाई औफिस बना कर सब को सकते में डाल दिया है. ये औफिस दिखने में खूबसूरत तो हैं ही साथ ही इन में काम करने का मजा भी दोगुना है. जानिए कैसे हैं ये नायाब औफिस.

अब वह जमाना गया जब दफ्तर के नाम पर लोगों को लकड़ी की कुरसीमेज और छत पर लटके खड़खड़ की आवाज करते पंखों को झेलना पड़ता था. अब तो कई सरकारी दफ्तर भी चमकदमक और रोशनी से भरे आधुनिक स्टाइल में नजर आते हैं. अपने देश के शहरों में पोस्ट औफिस और सरकारी बैंकों के औफिसों को भी हाल के वर्षों में काफी चमकाया गया है, पर जब बात निजी कंपनियों, खासतौर से इंटरनैट के कामकाज से जुड़ी कंपनियों के दफ्तर की हो, तो इस मामले में वे सब से आगे हैं. हाल यह है कि कई नामीगिरामी कंपनियों ने अपने प्रमुख दफ्तरों को कुछ देशों की संस्कृतियों और पर्यावरण की झलक देने के हिसाब से डिजाइन किया है. कुछ उन के जरिए अंतरिक्ष तक की झलक देने का प्रयास कर रही हैं. ऐसी कंपनियों में इंटरनैट कंपनी गूगल सब से आगे है.

सब कुछ खोजते गूगल के दफ्तर

गूगल की खासीयत यह है कि जिन देशों में उस के दफ्तर हैं, उन में से हरेक कुछ हट कर है. हर औफिस किसी न किसी थीम पर बनाया गया है. जैसे एम्सटर्डम स्थित इस के मुख्यालय के औफिस का डिजाइन नीदरलैंड्स की संस्कृति पर आधारित है. इस में एक विशाल कमरा मैडिटेशन के लिए बनाया हुआ है. इस में 70 सीटों वाला एक औडिटोरियम है. दफ्तर में इस बात का खास खयाल रखा गया है कि वहां भरपूर प्रकाश और हवा रहे, साथ ही कर्मचारियों को भी व्यायाम और आराम करने के लिए पर्याप्त स्पेस मिल सके.

गूगल का लंदन स्थित दफ्तर किसी स्पेस स्टेशन की थीम पर बना हुआ है, जो पृथ्वी पर ही अंतरिक्ष में उपस्थिति का एहसास कराता है. इसी प्रकार कुछ अन्य देशों में बने गूगल के दफ्तर पर्यावरण से नजदीकी दर्शाते हैं, जैसे डबलिन हैडक्वार्टर जंगल की थीम पर डिजाइन किया गया है. तेल अवीव स्थित इस के एक अन्य मुख्यालय में भूमध्यसागर का शानदार नजारा देखने को मिलता है.

स्पेस से एप्पल का लगाव

कंप्यूटर और मोबाइल फोन बनाने वाली दुनिया की नंबर वन कंपनी एप्पल कैलिफोर्निया (अमेरिका) के कुपरटिनो में 175 एकड़ जमीन पर जो विशालकाय औफिस बना रही है, उसे ‘स्पेसशिप प्रोजैक्ट’ नाम से पहचाना जा रहा है. इसे दुनिया में अब तक का सर्वाधिक पर्यावरण हितैषी प्रोजैक्ट भी कहा जा रहा है. उड़नतश्तरी की तरह दिखने वाली औफिस की यह इमारत कुल मिला कर 28 लाख वर्गफुट क्षेत्रफल में फैली होगी. इस भीमकाय कैंपस में13 हजार लोग एकसाथ काम कर सकेंगे. इस की मुख्य इमारत एक मील के दायरे में फैली होगी. इस इमारत में करीब 3 लाख वर्गफुट की जगह शोध संबंधी कार्य और पार्किंग के लिए छोड़ी जा रही है.

फेसबुक में तकनीक का बेजोड़ मेल

कैलिफोर्निया में ही फेसबुक कंपनी भी अपने खास दफ्तर के लिए पहचानी जाती है. इस औफिस में कर्मचारियों को काम करने के लिए काफी खुली जगह उपलब्ध कराई गई है. सिर्फ काम ही नहीं बल्कि आराम करने के लिए भी यहां बाकायदा स्पेस बनाया गया है. इस बिल्डिंग में कर्मचारियों को स्केटरिंग और डीजे तक की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है. कैलिफोर्निया के अलावा फेसबुक का मेनलो पार्क स्थित मुख्यालय भी आधुनिक कला और शहरी तकनीक का बेजोड़ नमूना है. फेसबुक का ध्येय अपने दफ्तरों की डिजाइन के जरिए यह संदेश देना है कि कर्मचारियों और वहां आनेजाने वालों को यह एहसास हो कि वे फेसबुक से संबंधित जगह पर हैं. साथ ही स्थानीय वातावरण का भी खयाल रखा जाता है,जैसे हैदराबाद स्थित फेसबुक के दफ्तर में चारमीनार की पेंटिंग प्रमुखता से लगाई गई है.

पेंटहाउस औफिस

नीदरलैंड्स स्थित यह दफ्तर नक्काशीदार कांच का बना है. इस दोमंजिला इमारत से आप मास नदी के अलावा शहर के खूबसूरत तटों का नजारा भी देख सकते हैं.

ड्रौपबौक्स की अंदरूनी सजावट

अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में ड्रौपबौक्स कंपनी का मुख्यालय है. मुख्यालय की इस इमारत की खास बात यह है कि इस की अंदरूनी साजसज्जा कर्मचारियों के मूड के हिसाब से डिजाइन की गई है. इमारत का एक हिस्सा इटैलियन ओपेरा हाउस जैसा बनाया गया है, तो दूसरे हिस्से में जापानी कंपनियों के बोर्डरूम जैसी सज्जा की गई है. खास बात यह है कि इमारत को डिजाइन करने से पहले कंपनी ने अपने कर्मचारियों से हर घंटे के हिसाब से अपना अनुभव और जरूरतें बताने को कहा. इस तरह जो सुझाव मिले, उन्हें इमारत को डिजाइन करते वक्त ध्यान में रखा गया. इस तरह यह दफ्तर किसी सिटी प्लाजा जैसा नजर आता है, जिस में एक ही वक्त में लोगों को सार्वजनिक और निजी उपस्थिति, दोनों अनुभव एकसाथ हो जाते हैं.

एयर बीएनबी, पूरी दुनिया के अनुभव

अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को स्थित कंपनी के इस दफ्तर में दुनिया के कई स्थानों और घटनाओं की झलक देने की कोशिश की गई है. जैसे इस का मुख्य कौन्फरेंस रूम किसी जंग की तैयारियों का एहसास कराने वाले वार रूम की थीम पर बना है, जबकि इस के कैफे और हौटस्पौट मुंबई और काहिरा जैसे शहरों की झलक देते हैं.

सेलगस केनो

म्यूनिख स्थित इस का दफ्तर आधा जमीन के अंदर है. यह स्पेन के एक जंगल के बीचोंबीच स्थित है और यहां से प्रकृति का शानदार नजारा देखने को मिलता है.  

बानहोफ्स डाटा सैंटर, युद्धक्षेत्र की मिसाल

इस बहुराष्ट्रीय कंपनी ने स्वीडन की राजधानी स्टौकहोम में अपना भूमिगत डाटा सैंटर बनाया है. डाटा सैंटर में ग्रीनहाउस से ले कर झरने तक बनाए गए हैं. यहां जरमन पनडुब्बी के इंजन भी रखे हुए हैं, जो बिजली न होने की स्थिति में बैकअप पावर भी मुहैया कराते हैं,पर सब से खास बात यह है कि इस की इमारत में बैठे कर्मचारी हाइड्रोजन बम के हमले से भी सुरक्षित बच सकते हैं. इस की एक वजह है, असल में शीतयुद्ध के दौरान इस जगह को एक सैनिक अड्डे और ऐसे बंकर के रूप में विकसित किया गया था ताकि परमाणु हमले से बचा जा सके. जमीन से 30 मीटर नीचे स्थित इस दफ्तर में एक वक्त में 15 कर्मचारी और एक अधिकारी ही काम कर सकता है. इस दफ्तर को चूंकि युद्धशैली में विकसित किया गया था, इसलिए इस जगह को जेम्स बौंड फिल्मों के खलनायक के लिए भी मुफीद जगह बताया जाता है. इस दफ्तर में प्रवेश करने का दरवाजा 40 सैंटीमीटर (करीब 16 इंच) मोटी कंक्रीट का बना है, जो किसी भी हमले से सुरक्षित बचा सकता है.

नामी कंपनियों के हाईफाई दफ्तरों की लिस्ट में कुछ और नाम भी शामिल हैं, जिन्होंने औफिस के रूप में बेहतरीन नमूने पेश किए हैं. इन में कंपनी आर्कटिया का मुख्यालय सब से ऊपर आता है.

पानी में तैरता हैडक्वार्टर

फिनलैंड स्थित शिपिंग कंपनी आर्कटिया का हैडक्वार्टर पानी में तैरता हुआ है. यह हेलसिंकी हार्बर पर कंपनी के जहाजी बेड़े के पास ही बना है. यह इमारत पानी में तैरते ढांचे पर खड़ी है.

एडिडाज ‘लेसेज’

जरमनी स्थित कंपनी का यह कौंप्लैक्स दूर से देखने में ऐसे लगता है मानो जमीन से ऊपर टंगा हुआ हो. इस का बाहरी डिजाइन ब्लैक ऐंड व्हाइट स्ट्रैप्स से बना है, जो थर्मल कंट्रोल्ड ऐन्वायरमैंट देता है. बिल्डिंग के अलगअलग हिस्सों को जोड़ने वाले रास्ते ऐसे बनाए गए हैं जैसे वे लेसेज हों और पूरी बिल्डिंग को आपस में बांधे रखते हों.                      

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