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डियर जिंदगीः उबाउ स्क्रिप्ट कर सकती है दर्शकों को दूर

बॉलीवुड में इस बात की उम्मीद करना मूर्खता ही कही जाएगी कि जिस निर्देशक ने अपने करियर की पहली फिल्म बेहतर सफल फिल्म दी है, वह दूसरी फिल्म भी अच्छी बनाएगा. अब तक बॉलीवुड में अधिकांश निर्देशक पहली फिल्म के बाद दूसरी फिल्म में बुरी तरह से असफल होते आए हैं.

यह बात फिल्म ‘डियर जिंदगी’ देखने के बाद दिमाग में ताजा हो जाती है. चार वर्ष पहले बेहतरीन फिल्म ‘इंग्लिश विंग्लिश’ की निर्देशक गौरी शिंदे की दूसरी फिल्म ‘डियर जिंदगी’ देखना जान लेवा अनुभव से गुजरने जैसा है. नारीवाद व नारी स्वतंत्रता के नाम पर अतिघटिया कहानी, अति उबाउ और इंसानी मनोविज्ञान के विकृत रूप का नाम है, फिल्म ‘डियर जिंदगी’. इतना ही नहीं इंसान युवा होकर जो कुछ बनता है, उसकी नींव बचपन में ही रखी जाती है, इस मुद्दे को लेखक व निर्देशक सही ढंग से फिल्म में पिरोने में असफल रहती हैं.

यह कहानी है परफेक्ट जिंदगी व जीवनसाथी की तलाश कर रही एक उभरती मुंबई फिल्म नगरी की सिनेमैटोग्राफर कायरा (आलिया भट्ट) की, जिसे अपने गोवा में रह रहे माता पिता के साथ रहने में समस्या नजर आती है. उसकी तमन्ना अपनी फिल्म निर्देशित करने की है. एक विज्ञापन फिल्म की शूटिंग के दौरान उसके अभिनेता रघुवेंद्र (कुणाल कपूर) के साथ वह हमबिस्तर हो जाती है. मगर उसके साथ जिंदगी गुजारने का वादा नहीं करती है, तो रघुवेंद्र किसी अन्य लड़की से सगाई कर लेता है, यह बात आलिया को पसंद नहीं आती. जबकि रघुवेंद्र, कायरा को न्यूयार्क में फिल्मायी जाने वाली एक फिल्म में कैमरामैन के रूप में काम करने का मौका दिला रहा है. वह एक काफी बड़े रेस्टारेंट के मालिक सिड (अंगद बेदी) के साथ भी जुड़ी हई है. मगर जैसे ही वह सिड को बताती है कि वह रघुवेंद्र के साथ एक बार हमबिस्तर हो चुकी है, सिड कायरा से दूर चला जाता है.

न्यूयार्क की फिल्म शुरू होने में एक माह का समय है, तो वह मुंबई से अपने माता पिता के पास गोवा आ जाती है, पर दूसरे ही दिन गोवा में अपनी सहायक जैकी के घर जाकर रहने लगती है. कायरा के पिता उसे गोवा के एक होटल की प्रचार फिल्म की शूटिंग करने का काम दिला देते हैं. इस फिल्म की शूटिंग के दौरान उसी होटल में चल रही मनोचिकित्सकों की बैठक में कायरा की मुलाकात दिमाग के डाक्टर यानीकि मनोचिकित्सक डां. जहांगीर खान उर्फ जग (शाहरुख खान) से होती है. फिर वह अक्सर डॉक्टर जग के पास अपने दिमागी हालात को सुधारने के जाना शुरू करती है, जहां जग और उसके बीच जिंदगी, प्रेमी आदि को लेकर लंबी लंबी बातें हुआ करती है. डॉ. जहांगीर खान, कायरा को जिंदगी जीने का नया नजरिया सिखाते हैं. वह कायरा की सोच व जिंगदी जीने के ढंग को सही करने का प्रयास करते रहते हैं.

उधर डॉ. जहांगीर खान उसे समझाते हैं कि जीवन साथी की तलाश करते हुए वह सही कुर्सी की तलाश में जिस तरह अलग अलग कुर्सियों पर बैठकर अपने लिए उपयुक्त कुर्सी का चयन कर खरीदती है, उसी तरह वह अलग अलग प्रेमियों को भी परख सकती है. फिर एक दिन कायरा की मुलाकात एक गायक रूमी (अली जफर) से होती है, पर रूमी का संगीत में डूबा रहना कायरा को रास नहीं आता.

डॉ. जग व कायरा की मुलाकातें बढ़ती है. इसी बीच कायरा का भाई विदेश से पढ़ाई करके आता है, तो वह अपने माता पिता के घर आती है. रात्रिभोज के वक्त कायरा दूसरे पारिवारिक रिश्तेदारों के सामने अपने माता पिता को बहुत बुरा भला कहती है. वह कहती है कि उन्हें पैरेंटिंग करना नहीं आता, तो फिर बच्चे पैदा करने का निर्णय क्यों लिया था. वगैरह वगैरह. उसके बाद वह डॉ. जहांगीर को बताती है कि बचपन में उसके माता पिता ने उसके साथ क्या व्यवहार किया था.

वास्तव में आर्थिक हालात अच्छे नहीं थे, इसलिए कायरा को उसके नाना नानी के पास छोड़कर छोटे बेटे के साथ कायरा के माता पिता विदेश चले गए थे. कुछ वर्ष बाद वहां भी हालात नहीं सुधरे, तो वापस भारत आ गए थे. गोवा वापस आते ही वह कायरा को अपने साथ रखने लगे थे, कायरा को गम है कि उसके माता पिता जब विदेश में उसके छोटे भाई को ले गए थे, तो उसे नाना नानी के पास क्यों छोड़ गए थे. जबकि खुद कायरा बताती है कि उसकी मां ने उसके नाना से कहा था कि उनकी आर्थिक हालात ऐसे नही हैं कि वह दो दो बच्चों के साथ दर दर भटक सकें. फिर भी कायरा को अपने माता पिता से नफरत है.

इस पर डॉ. जहांगीर खान, कायरा को समझाते हैं कि वह उससे अपने माता पिता को माफ करने के लिए नहीं कहेंगे. पर वह माता पिता से सॉरी बोल सकती है, उनसे अच्छे ढंग से बात कर सकती है. क्योंकि बचपन में हम भले ही अपने माता पिता की बातों को न समझ सकें, पर बड़े होने पर उनकी कठिनाई को समझ सकते हैं. उसके बाद कायरा, डॉ जहांगीर के साथ जिंदगी बिताना चाहती है, पर डॉ. जग कह देते हैं कि वह तो उनका ईलाज कर रहे थे, जो कि अब खत्म हो गया. फिर कायरा गोवा के 1703 के इतिहास पर एक लघु फिल्म बनाती है, जिसके प्रदर्शन पर पूरा परिवार इकट्ठा होता है.

फिल्म की कहानी शुरू होने पर कायरा जिस तरह से अपनी सहायक के साथ व्यवहार करती है, उससे लगता है कि वह क्रांतिकारी कदम उठाने वाली है. दर्शकों के मन में उत्सुकता पैदा होती है कि आखिर कायरा अब क्या करना चाहती है. लेकिन कुछ मिनटों में ही लेखक व निर्देशक गौरी शिंदे अपनी कहानी से भटक जाती हैं. दर्शक खुद को ठगा हुआ या साजिश का शिकार महसूस करने लगता है. फिल्म की गति रूक जाती है. दर्शक वही हजारों फिल्मों में देख चुके मसाले देखने पर मजबूर हो जाता है.

इतना ही नहीं कायरा का चरित्र डरी, सहमी, बचपन के आघात व परित्याग के मुद्दों से निपटने वाली लड़की के रूप में उभरती है. कायरा व डॉ. जहांगीर खान के बीच ज्ञान बांटने वाले लंबे लंबे संवाद दर्शक को फिल्म से दूर ही ले जाते हैं. फिल्म में एक संवाद है, ‘‘जीनियस इज एबाउट नोंइग व्हेन टू स्टॉप.” यानी कि बुद्धिमान वह होता है, जिसे पता होता है कि उसे कहां रूकना चाहिए. पर खुद लेखक व निर्देशक गौरी शिंदे इस संवाद से कुछ नही सीख पायी. 

जहां तक अभिनय का सवाल है, तो फिल्म की स्क्रिप्ट में दम न होने की वजह से कलाकारों को खुलकर परफॉर्म करने का अवसर नहीं मिला. वैसे इस फिल्म में आलिया भट्ट के अभिनय में दोहराव नजर आता है. शाहरुख खान की उम्र साफ तौर पर झलकती है. अब आलिया भट्ट व शाहरुख खान का आकर्षण इस फिल्म को कितनी सफलता दिलाएगा, यह तो वक्त बताएगा. पर हमें नहीं लगता कि सिंगल स्क्रीन के दर्शक इस फिल्म को पसंद करेंगे.

फिल्म को अच्छी लोकेशन पर फिल्माया गया है, जो कि आंखो को सुकून देता है. इसके लिए कैमरामैन लक्ष्मण उतेकर भी बधाई के पात्र हैं. पर फिल्म के एडीटर अपने काम को सही ढंग से अंजाम नहीं दे पाए. फिल्म का गीत संगीत ज्यादा उत्साहित नहीं करता.

2:29 मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘डियर जिंदगी’ का निर्माण गौरी खान, करण जोहर व गौरी शिंदे ने ‘रेड चिल्ली इंटरटेनमेट’, ‘धर्मा प्रोडक्शन’ और ‘होप फिल्मस’ के बैनर तले किया गया है. गौरी शिंदे फिल्म की लेखक व निर्देशक हैं, अमित त्रिवेदी संगीतकार, और लक्ष्मण उतेकर कैमरामैन हैं. शाहरुख खान, आलिया भट्ट, कुणाल कपूर, आदित्य रॉय कपूर, अंगद बेदी, अली जफर, ईरा दुबे फिल्म के कलाकार हैं.

आखिर क्यों दम तोड़ रहा है रिलायंस जियो?

रिलायंस जियो 4जी सर्विस के तमाम मोबाइल कंपनियों के साथ फ्री सिम और सर्विस का करार किये जाने के बाद अब ग्राहकों के बढ़ते बोझ का असर दिखने लगा है. 31 दिसंबर तक फ्री अनलिमिटेड 4G डेटा, लाइफटाइम फ्री कॉलिंग और रोमिंग जैसी सर्विस के बाद भी रिलायंस जियो आखिर पिछड़ क्यों रहा है. यह सवाल हैरानी भरा है.

लेकिन रिसर्च के मुताबिक मुकेश अंबनी की कंपनी रिलायंस जियो इनफोकॉम दो महीने तक लोगों को फ्री डेटा और कॉलिंग देने के बाद भी दूसरे भारतीय टेलीकॉम कंपनियों को टक्कर देने में नाकामयाब दिख रही है. और शायद यही वजह है कि कंपनी अपने वेलकम ऑफर को तीन महीने और एक्सटेंड कर सकती है.

प्रतिद्वंदी कंपनियां कर रही हैं अच्छा बिजनेस

सिटी रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक रिलायंस जियो के आने के बावजूद एयरटेल, आईडिया और वोडाफोन के यूजरबेस में पिछले छह महीनों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

21 नवंबर को जारी की गई सिटी रिसर्च की एक रिपोर्ट में कहा गया है, 'मौजूदा सब डेटा देखते हुए ऐसा नहीं लगता है कि रिलायंस जियो के ऑफर ने अपने लॉन्च से दूसरे महीने मे दूसरी कंपनियों पर कोई खास असर डाला है. एयरटेल, वोडाफोन और आईडिया के सब डेटा में पिछले छह महीने के दौरान अक्टूबर में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई है'

विश्लेषकों के मुताबिक टेलीकॉम दिग्गज भारती एयरटेल अभी भी टॉप पर बनी हुई है. सेल्यूलर ऑपरेशन्स असोसिएशन ऑफ इंडिया के मताबिक अक्टूबर में एयरटेल के कस्टमर्स में सबसे ज्यादा 2.33 मिलियन की बढ़ोतरी हुई. इसके अलावा आईडिया और वोडाफोन में क्रमशः 1.43 मिलियन और 1.12 मिलियन की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

दिसंबर तक 100 मिलियन कस्टमर्स के टारगेट से काफी दूर

गौरतलब है कि हाल ही में रिलायंस जियो ने 100 मिलियन कस्टमर्स का टार्गेट हासिल करने के लिए सिम की होम डिलिवरी शुरू की है. देश में शायद यह पहली बार है जब कोई कंपनी पिज्जा की तरह घर घर सिम पहुंचा रही है.

लेकिन रिपोर्ट्स का मानें तो दिसंबर के आखिर तक कंपनी 100 मिलियन कस्टमर्स जुटाने में फेल हो सकती है. इसकी वजह ये है कि जियो की ग्रोथ रेट में 50 फीसदी की गिरावट हुई है.

जियो के फेल होने के पीछे ये वजहें हो सकती हैं

– फ्री कॉलिंग तो है, लेकिन कॉल कनेक्ट हो जाए इसकी गारंटी नहीं. आम तौर पर जियो से जियो कॉलिंग काफी आसान है. लेकिन जियो से दूसरे नेटवर्क पर कॉलिंग में दिक्कते आ रही हैं.

– बिना 4G हैंडसेट के रिलायंस जियो यूज नहीं कर सकते. गांवों में अभी भी 4जी स्मार्टफोन दूर की कौड़ी साबित होता है. इसके अलावा लोगों के पास पहले से महंगे स्मार्टफोन है तो वो फिर से एक 4जी स्मार्टफोन लेने में हिचकते तो जरूर हैं.

– फ्री सर्विस तो मिल रही है, लेकिन 4G डेटा की स्पीड में लागातार गिरावट भी दर्ज की जा रही है. चाहे स्पीड टेस्ट की वेबसाइट हो या फिर TRAI का स्पीड टेस्ट पोर्टल. इन सभी ने आंकड़ों के जरिए यह बताया है कि लॉन्च होने के बाद से इसकी स्पीड में लगातार कमी हो रही है. ऐसे में जाहिर है कस्टमर्स निराश होंगे ही.

– डुअल सिम स्मार्टफोन होने की वजह से लोग रिलायंस जियो का सिम के साथ पहले वाला भी नंबर यूज कर रहे हैं. क्योंकि जाहिर है वेलकम ऑफर के बाद पैसे देने होंगे और जगह जगह जियो की सर्विस स्लो हो रही है.

कई कंपनियों ने रिलायंस पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया है. बहरहाल जिस तेजी से ग्राहक रिलायंस 4जी सर्विस के लिए उतावले हो रहे थे, उससे उलट सर्विस लेने के बाद उतनी ही तेजी से गायब भी हो रहे हैं.

बेकार हो गया 1000 का नोट

बंद हो चुके पुराने 500 रुपए के नोटों का उपयोग करने के लिए सरकार ने आम जनता को बड़ी राहत दी है. अब 15 दिसंबर तक सरकारी अस्पतालों, मेडिकल स्‍टोर, पेट्रोल पंप, बिजली-पानी बिल, ट्रेन, हवाई जहाज और मेट्रो टिकट, रेलवे कैटरिंग और स्मारकों के टिकट, दूध केंद्र, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, शवदाह गृह और कब्रिस्तान, स्थानीय निकायों के पेंडिंग बिल या टैक्स, कोर्ट फीस और सहकारी स्टोर पर बंद हो चुके 500 रुपए के पुराने नोट चला सकते हैं.

1000 रुपए के पुराने नोट 24 नवंबर की आधी रात से चलने बंद हो गए हैं. अब ऐसे नोटों को अब केवल बैंकों और पोस्‍ट ऑफिस के अकाउंट में जमा करवाया जा सकता है. पुराने नोटों के इस्तेमाल के लिए मिली छूट की किसी भी श्रेणी में 1000 का नोट अब स्वीकार नहीं किया जाएगा.

बैंकों से भी नहीं मिलेगा कैश

सरकार ने स्‍पष्‍ट किया है कि 24 नवंबर के बाद से बैंकों में अब पुराने नोट एक्‍सचेंज नहीं किए जा सकेंगे. अभी तक कोई भी व्‍यक्ति किसी भी बैंक में जाकर 4,500 रुपए तक के पुराने नोट बदलवा सकता था. जिन लोगों के बैंक अकाउंट नहीं है उन्‍हें नए खाते खुलवाने को प्रोत्‍साहित करने के लिए सरकार ने एक्‍सचेंज पर रोक लगाई है. अब नोट एकस्चेंज करने पर पैसे अकाउंट में ट्रांसफर किए जायेंगे.

यहां भी मिली सुविधा

विदेशी नागरिक हर हफ्ते 5,000 रुपए तक की राशि एक्‍सचेंज करवा सकेंगे. प्रीपेड मोबाइल के टॉप अप के लिए भी 500 का पुराना नोट इस्तेमाल किया जा सकता है. टोल प्‍लाजा पर 3 दिसंबर से 15 दिसंबर तक स्‍वीकार किए जाएंगे 500 के पुराने नोट.

ये सुविधाएं जारी रहेंगी

पेट्रोल पंप पर लगे एसबीआई के पीओएस मशीनों से हर दिन 2000 रुपए मिलते रहेंगे. बिग बाजार में डेबिट कार्ड से हर दिन 2000 रुपए मिलते रहेंगे. किसान 500 रुपए के पुराने नोटों से बीज अब भी खरीद सकेंगे. शादी के लिए 2.5 लाख रुपए निकाल पाने की सुविधा बनी रहेगी. एयरपोर्ट्स पर पार्किंग चार्ज से छूट 28 नवंबर तक बनी रहेगी.

डाकघर के बचत खातों में जमा करा सकेंगे 500 और 1000 के पुराने नोट

वित्त मंत्रालय ने कहा है कि बंद किए जा चुके 500 और 1000 रुपए के पुराने नोटों को डाकघर के बचत खातों में जमा कराया जा सकता है. मंत्रालय ने मंगलवार को कहा था कि पुराने 500 रुपए और 1000 रुपए के नोटों का इस्तेमाल लघु बचत योजनाओं में जमा करने के लिए नहीं किया जा सकता है.

स्टीवन जीरार्ड ने फुटबॉल से लिया संन्यास

इंग्लैंड फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान और लीवरपूल के दिग्गज स्टीवन जीरार्ड ने सभी तरह के फुटबॉल फॉर्मेट से संन्यास लेने की घोषणा कर दी है. 36 साल के जीरार्ड ने अमेरिकी क्लब लॉस एजेंलिस गैलेक्सी के साथ अपने करार की समाप्ति के साथ ही अपने 19 साल के करियर पर विराम लगा दिया.

इससे पहले वह लीवरपूल के लिए खेलते थे. लीवरपूल के लिए गेरार्ड ने कुल 710 मैच खेले और आठ प्रमुख ट्रॉफियां जीतीं. इसमें चैम्पियंस लीग भी शामिल है. इंग्लैंड के लिए जीरार्ड ने 114 मैच खेले. जीरार्ड ने बीते साल गेलेक्सी के साथ करार किया था.

जीरार्ड ने कहा, “मैं खुशनसीब हूं कि अपने करियर के दौरान मैंने कई शानदार उपलब्धियां हासिल कीं. मैं लीवरपूल, इंग्लैंड और गैलेक्सी को अच्छे अनुभवों और शानदार उपलब्धियों के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं.”

मोदी-नीतीशः मिले सुर मेरा तुम्हारा…

‘‘नोटबंदी देश की माली हालत में सुधार लाने वाला कदम है. इससे शुरू में कुछ दिन लोगों को परेशानी होगी पर आगे चल कर इससे देश को फायदा होगा. 1000 और 500 के नोट पर प्रतिबंध लगाना जरूरी था. इसे कारगर तरीके से लागू करना चाहिए, ताकि गरीबों, किसानों और महिलाओं को परेशानी नहीं हो.’’

‘‘भारतीय सेना ने नियंत्राण रेखा पर आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक किया, इसके लिए भारतीय सेना को बधाई. सेना की बहादुरी की तारीफ करनी चाहिए.’’

‘‘आतंकवाद के खिलाफ केंद्र सरकार को कड़ी करारवाई करनी चाहिए, मैं उनके साथ हूं. आतंकवाद आरोप-प्रत्यारोप का मामला नहीं है, इसके खिलाफ समूचे देश को एकजुट होना चाहिए.’’

‘‘जीएसटी का मैं हमेशा समर्थन करता रहा हूं. इससे देश और राज्यों को फायदा होगा.’’

‘‘प्रधनमंत्री की अचानक पाकिस्तान यात्रा में राजनीति नहीं ढूंढनी चाहिए. प्रधनमंत्री के पाकिस्तानी प्रधनमंत्री के घर जाने में कुछ भी गलत नहीं है. पाकिस्तान में लोकतांत्रिक ताकत को मजबूती मिलने से भारत को फायदा मिलेगा. क्रांति का माहौल बनेगा.’’

‘‘बेनामी संपति के ममाले में केंद्र सरकार को जल्द से जल्द हमला बोलना चाहिए. आम आदमी की मेहनत की कमाई पर कुछ लोग कुडली मार कर बैठ जाते हैं, इसलिए ऐसे लोगों के खिलाफ कारवाई होना बहुत जरूरी है.’’       

यह सारी बातें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गाहे-बगाहे कही है. सभी में खास बात यह है कि नीतीश प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन करते नजर आते हैं. भाजपा के विरोधी होने के बाद भी इन मसलों पर नीतीश प्रधनमंत्री के साथ खड़े दिखते हैं. नोटबंदी को लेकर देश भर में उपजी अफरातफरी के ताजा मामले में भी नीतीश कुमार नरेंद्र मोदी का साथ दे रहे हैं और नोटबंदी को सही करार दे रहे हैं. इन मामले में मोदी का साथ देकर नीतीश ने अपने दल के कुछ नेताओं समेत सहयोगी दल कांग्रेस और राजद को भी नाराज कर लिया है.

3 तालाक के मसले पर ही नीतीश ने मोदी को कठघरे में खड़ा किया था, लेकिन जीएसटी, सर्जिकज स्ट्राइक, नोटबंदी और बेनामी संपति के मामले में नीतीश ने खुल कर मोदी के सुर में सुर मिलाया. इन मामलों में नीतीश ने बिना लाग-लपेट के मोदी का साथ दिया है. नीतीश ने मोदी का समर्थन करते समय यह भूल गए कि बिहार में उनकी सरकार के सहयोगी राजद और कांग्रेस नोटबंदी के विरोध में हैं और जमकर आंदोलन चला रहे हैं. इसके बाबजूद नीतीश को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा है.

कांग्रेस, राजद, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, बहुजन समाजवादी पार्टी नोटबंदी के मामले में केंद्र सरकार पर जमकर हमला कर रहे हैं और इसे गरीब और आम आदमी के खिलापफ फैसला बताने की जुगत में लगे हुए हैं. ऐसे में नीतीश का मोदी के समर्थन में बोलना कहीं नए राजनीतिक समीकरण के संकेत तो नहीं हैं?

नीतीश ने शराबबंदी लागू करने के बाद नरेंद्र मोदी के जुमले की तर्ज पर कहा था कि ‘न पीएंगे, न पीने देंगे’ मोदी ने प्रधनमंत्री बनने के बाद भ्रष्टाचार को खत्म करने का ऐलान करते हुए ‘न खाएंगे, न खाने देंगे’ का नारा दिया था.

पिछले 12 मार्च को प्रधनमंत्री हाजीपुर में दीघा-सोनपुर और मुंगेर रेल सह सड़क पुल का शिलान्यास करने और पटना हाई कोर्ट के शताब्दी समारोह में शिरकत करने बिहार पहुंचे थे. दोनों समारोहों में मोदी और नीतीश कुमार साथ-साथ मौजूद थे. दोनों समारोहो में मोदी ने नीतीश की जम कर तारीफ की. मोदी ने खुल कर कहा कि गांवों में बिजली पहुंचाने की योजना को तेज रफ्रतार देने के लिए नीतीश ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है.

मोदी ने पिछले दिनों एक रैली में इतना ही कहा कि रूपयों की जमाखोरी और नकली नोट के खिलापफ मुहिम के बाद अब वह बेनामी संपत्ति पर हमला करेंगे तो नीतीश ने अपनी पार्टी लाइन से आगे बढ़ कर मोदी के सुर में सुर मिला दिया. जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव लगातार नोटबंदी के खिलापफ हल्ला बोल रहे हैं और नीतीश उनके उलट मोदी के साथ खड़े दिख रहे हैं. ऐसे में जदयू के भीतर ही असमंजस की स्थिति बनने लगी है. शरद, केसी त्यागी जैसे जदयू के सीनियर नेता नोटबंदी के खिलापफ दिल्ली में धरना दे रहे हैं और लोक सभा एवं राज्य सभा में हंगामा कर रहे हैं वहीं नीतीश नोटबंदी के मामले में मोदी की बोली बोल रहे हैं.

जदयू के सूत्रों की मानें तो कई मसलों पर मोदी के समर्थन में बोलना नीतीश की राजद और कांग्रेस पर दबाब की राजनीति का हिस्सा भर है. इससे ऐसा नहीं समझना चाहिए कि नीतीश मोदी के साथ खड़े हैं. वहीं राजनीति हलकों में यह अटकलें भी लगाई जा रही कि मोदी का सुर में सुर मिला कर नीतीश एक तीर से दो शिकार कर रहे हैं. एक तो अपने सहयोगी दलों पर प्रेशर बनाए रखना चरहते हैं वहीं दूसरी ओर भाजपा से दुबारा दोस्ती का रास्ता भी खुला रखना चाहते हैं.

गौरतलब है कि नीतीश भाजपामुक्त सरकार की रट बार-बार लगाते रहे हैं, वहीं कई मामलों पर भाजपा सरकार का समर्थन करते भी नजर आते हैं. वह यह भी कहते रहे हैं कि मिट्टी में मिल जाऊंगा पर फिर कभी भाजपा से हाथ नहीं मिलाऊंगा. इसके बाद भी कई राष्ट्रीय मसलों पर भाजपा का साथ दे रहे हैं. राष्ट्रीय मसलों पर अपनी बात कह कर वह मिशन-2019 की तैयारी ही कर रहे हैं. वह खुद को इलाकाई मसलों से उपर दिखाने की चाह और कवायद में लगे हुए हैं. खास बात यह है कि उनकी आवाज देश भर में सुनी जाती है.

पिछले कई सालों से वह बिहार को स्पेशल स्टेटस दिलने का राग आलापते रहे थे, पर अब वह बिहार की पिछड़े सभी राज्यों को भी स्पेशल स्टेटस देने की बात कहने लगे हैं. बिहार में शराबबंदी लागू करने के बाद वह दूसरे राज्यों समेत पूरे देश में शराबबंदी की मुहिम चला रहे हैं. राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भी शराबबंदी की मांग उठने लगी है. इन सब मसलों को उठा कर नीतीश खुद को नेशनल लेबल के लीडर के तौर पर स्थापित करना चाहते हैं. वह अपने प्रोफाइल से इलाकाई लीडर का नाम हटा कर नेशनल लीडर लिखवाने की कवायद में जोर-शोर से लगे हुए हैं.

जदयू के प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह कहते हैं कि नीतीश राष्ट्रीय कद के नेता हैं और उनकी सोच भी राष्ट्रीय है. कालाधन और भ्रष्टाचार के खिलापफ काररवाई की बात कह कर केंद्र सरकार नीतीश की नीति को ही आगे बढ़ा रही है. विपक्ष में होने का मतजब यह नहीं हैं कि सरकार का हर बात पर केवल विरोध ही किया जाए? देशहित के मसलों पर पार्टी हित से उपर उठ कर सोचना और करना जरूरी है.

कुछ मामलों में मोदी का समर्थन करने और नेशनल लीडर बनने की कवायद में नीतीश महागठबंधन में शामिल कांग्रेस और राजद को नाराज कर दिया है. नीतीश की पार्टी जदयू के भी कई नेता नीतीश की सोच से अलग बयान दे रहे हैं. जदयू के पहले के अध्यक्ष और सांसद शरद यादव कहते हैं कि जिस तरह से नसबंदी ने कांग्रेस को सत्ता से बाहर किया था, उसी तरह नोटबंदी भाजपा को उखाड़ फेंकेगी. केंद्र सरकार ने हड़बड़ी में और बगैर कुछ सोचे-समझे नोट बंदी का फैसला लिया है. इससे गरीबों को कापफी परेशानी हुई है.

वहीं बिहार प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष और राज्य के शिक्षा मंत्री अशोक कुमार चैधरी कहते हैं कि भले ही प्रदेश कांग्रेस नीतीश कुमार की अगुवाई वाली महागठबंधन सरकार का हिस्सा हो, लेकिन वह पार्टी अलग होकर कोई कदम नहीं उठा सकती है. अगर आलाकमान कहे कि उन्हें महागठबंधन या सरकार से अलग होना है तो प्रदेश कांग्रेस को उस पर अमल करना ही पड़ेगा. 24 नबंबर को नोटबंदी के खिलाफ विरोध मार्च करने पटना की सड़कों पर उतरी कांग्रेस ने कई विवादों को जन्म दे दिया.

नीतीश नोटबंदी के समर्थन में बोल रहे हैं और उनकी सरकार की सहयोगी कांग्रेस ने अलग राग छेड़ते हुए नोटबंदी के खिलाफ नारा बुलंद करने में लगे हुए हैं. इसके जबाब में सफाई देते हुए चैधरी ने कहा कि बिहार में कांग्रेस महागठबंध्न में शामिल है, पर वह अखिल भारतीय कांग्रेस के प्रति जबाबदेह है. हर पार्टी की अपनी अपनी नीति और सोच होती है. प्रदेश कांग्रेस ने नोटबंदी के खिलाफ प्रधनमंत्री का पुतला जलाया.

कांग्रेस के इस रवैयो से खिन्न बशिष्ठ नारायण सिंह कहते हैं कि अपनी जरूरतों और राजनीति हालातों से महागठबंधन बनता है. कांग्रेस पार्टी को अपने विवेक का इस्तेमाल कर कोई भी फैसला लेने के लिए आजाद है. महागठबंधन किसी भी तरह के दबाब में नहीं बल्कि आपसी तालमेल से काम करता है.

आपके हेडफोन से हैकर्स कर सकते हैं जासूसी

अगर आप सोंचते हैं कि हेडफोन्स का इस्तेमाल सिर्फ गाने सुनने या बात करने के लिए किया जा सकता है तो आप भारी भूल कर रहे हैं. सच्चाई ये है कि आपके हेडफोन को आपकी जासूसी करने में भी इस्तेमाल किया जा सकता है. यह बात एक नई स्टडी में पता चली है. एक रिपोर्ट के मुताबिक इजरायल की बेन-गुरियन यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने एक नया कोड डिवेलप किया है. इस तरह के कोड की मदद से हैकर्स हेडफोन्स को माइक्रोफोन में तब्दील करके चुपके से ऑडियो रिकॉर्ड कर सकते हैं.

शोध में साफ हुआ है कि हेडफोन की मदद से जासूसी का यह काम तब भी किया जा सकता है, जब आपने कंप्यूटर के इंटरनल माइक को डिसेबल कर दिया हो. दरअसल हेडफोन को ठीक उन्हीं इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिद्धांतों पर बनाया जाता है, जिन पर माइक्रोफोन बनते हैं. इसलिए हेडफोन्स को माइक के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है.

रिसर्च में साबित किया गया है कि डेस्कटॉप या लैपटॉप के ऑडियो ड्राइवर की कोडिंग को बदलने का यह काम यूजर को पता लगाए बिना किया जा सकता है. इससे कंप्यूटर से जुड़े रह गए हेडफोन्स (जिसमें माइक न हो) की मदद से भी ऑडियो रिकॉर्डिंग की जा सकती है. रिसर्चर्स ने पाया है कि 20 फुट दूर की आवाजें भी इस तरीके से रिकॉर्ड की जा सकती हैं.

हेड रिसर्चर मोरदेचाइ गुरी ने कहा, 'आज के सभी कंप्यूटर्स इस तरह के अटैक के शिकार हो सकते हैं.' फिलहाल इस खतरे को रियलटेक की चिप को हटाकर ही दूर किया जा सकता है. यह टीम अब चेक कर रही है कि स्मार्टफोन की चिप्स या ऑडियो कोडिंग को भी इस तरह से बदला जा सकता है या नहीं.

..तो इसलिए जहीर नहीं बने गेंदबाजी कोच

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने टीम इंडिया के पूर्व तेज गेंदबाज जहीर खान को टीम इंडिया का गेंदबाजी कोच नियुक्त करने की योजना बना ली थी, भारतीय टीम के हेड कोच अनिल कुंबले ने जहीर के लिए इसकी मंजूरी भी दे दी थी. लेकिन जहीर खान की दो शर्तों के चलते ऐसा नहीं हो सका.

जहीर ने रखी ये दो शर्तें

बीसीसीआई जहीर को पूर्णकालिक तेज गेंदबाजी कोच नियुक्त करना चाहता था, लेकिन बाएं हाथ का यह पूर्व तेज गेंदबाज पूर्णकालिक तौर पर टीम के साथ जुड़ने को राजी नहीं था. इसके अलावा जहीर ने साल में 100 दिन के कार्यकाल के लिए 4 करोड़ रुपए की भारी भरकम रकम की मांग की थी. बोर्ड के अनुसार ये डील बहुत महंगी थी. इसके चलते बीसीसीआई ने जहीर को अनुबंधित करने की योजना ठंडे बस्ते में डाल दी.

92 टेस्ट और 200 वन-डे खेल चुके जहीर ने पिछले सत्र में आईपीएल में दिल्ली डेयरडेविल्स की कमान संभाली थी. वे इसके अलावा टीम के गेंदबाजी मेंटर भी थे. जहीर इस भूमिका को 2017 में भी जारी रखना चाहते हैं, इसके चलते वे बीसीसीआई में पूर्णकालिक दायित्व संभालने को तैयार नहीं हैं.

अपनाएं ये तकनीक, सेकेंड्स में चार्ज होगा फोन

जल्द ही आप अपना स्मार्टफोन कुछ ही सेकेंडों में चार्ज कर सकेंगे. शोधकर्ताओं ने ऐसा एक लचीला सुपर कैपसिटर विकसित किया है, जिसे 30 हजार से भी अधिक बार चार्ज किया जा सकता है. इन शोधकर्ताओं में एक भारतवंशी भी शामिल है.

अमूमन बैटरियां डेढ़ साल बाद खराब होने लगती हैं. तब स्मार्टफोन कम समय तक चार्ज रह पाता है. समय बीतने के साथ उसके चार्ज रहने का समय और कम होता जाता है. इस समस्या को ध्यान में रखकर अमेरिका की सेंट्रल फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक नया सुपर कैपसिटर बनाया है. यह मोबाइल फोन और इलेक्ट्रिक वाहनों की तकनीक में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है.

शोधकर्ता नितिन चौधरी ने कहा, मौजूदा बैटरियों की जगह अगर इस सुपर कैपसिटर को लगाया जा सका तो मोबाइल फोन को केवल कुछ ही सेकेंड में चार्ज किया जा सकेगा. एक बार चार्ज करने के बाद इसे एक सप्ताह तक चार्ज करने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

2डी पदार्थों का इस्तेमाल:

शोधकर्ताओं ने नए कैपसिटर में हाल में खोजे गए 2डी पदार्थों का इस्तेमाल किया है. ये पदार्थ केवल कुछेक परमाणुओं के बराबर मोटे होते हैं. उन्होंने लाखों सूक्ष्म तारों पर 2डी पदार्थों की परत चढ़ाकर यह कैपसिटर बनाया. इसका अंदरूनी हिस्सा बेहद सुचालक है जो इलेक्ट्रानों को काफी तेजी से स्थानांतरित करने में मददगार है. इस कारण यह पलक झपकते चार्ज हो जाता है. जबकि इसकी 2डी परत ऊर्जा को भंडारित करके रखने में काफी सक्षम होती है.

शोधकर्ता येवोनवुंग जुंग ने कहा, इन द्विआयामी पदार्थों को मौजूदा फोन प्रणालियों में शामिल करने में समस्याएं थीं. ऐसे में हमने एक सामान्य रासायनिक उपाय अपनाया. हमने मौजूदा पदार्थों पर हाल में खोजे गए द्विआयामी पदार्थों की परत चढ़ाई, जिससे कैपसिटर को ज्यादा सक्षम बनाना संभव हो सका. यह अध्ययन ‘एसीएस नैनो’ जर्नल में छपा है.

पाक संग नहीं खेलने पर कटे अंक, बिफरा बीसीसीआई

भारतीय महिला क्रिकेट टीम के पाकिस्तान के साथ एक अगस्त से 31 अक्‍टूबर तक द्विपक्षीय सीरीज नहीं खेलने के कारण छह अंक काट दिए जाने से भारतीय क्रिकेट बोर्ड के शशांक मनोहर की अगुवाई वाली आईसीसी के साथ संबंध और कड़वे हो गए हैं. महिला क्रिकेटरों को नियमों का हवाला देकर ‘आसान निशाना’ बनाए जाने के विरोध में संभावना है कि भारत की पुरुष टीम अगले साल इंग्लैंड में होने वाली चैंपियन्स ट्रॉफी में नहीं खेले.

आईसीसी के रवैये से बीसीसीआई नाराज है और और उसने इस वैश्विक संस्था में विरोध दर्ज कराया जो इस बात से अच्छी तरह वाकिफ है कि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में पाकिस्तान के खिलाफ किसी भी द्विपक्षीय सीरीज के लिए सरकर की मंजूरी जरूरी होती है. आईसीसी के भारतीय चेयरमैन इस बात को अच्छी तरह से समझते हैं.

बीसीसीआई के एक सीनियर अधिकारी ने पीटीआई से कहा, ‘आईसीसी इससे अच्छी तरह वाकिफ है कि वर्तमान परिस्थितियों में जबकि भारतीय सैनिक शहीद हो रहे हैं तब पाकिस्तान के खिलाफ खेलना संभव नहीं है. चेयरमैन को अच्छी तरह से पता है कि हमारे लिये सरकार से मंजूरी लेना जरूरी है.’

उन्होंने कहा, ‘गुप्त मकसद से उठाया गया यह कदम पाकिस्तान के हाथों में खेलने की कोशिश है. वे कहेंगे कि यदि महिला खेल सकती है तो पुरुष टीम भी खेल सकती है. यदि आईसीसी ने अपना फैसला नहीं बदला तो हमारी पुरुष टीम भी महिला टीम के साथ है और वे चैंपियन्स ट्रॉफी में नहीं खेलेगी.’

इसमें कहा गया है, ‘इन मैचों का आयोजन एक अगस्त से 31 अक्तूबर 2016 के बीच होना था लेकिन इनका औपचारिक कार्यक्रम तैयार नहीं किया गया था और आखिर में इनका आयोजन नहीं हुआ और तकनीकी समिति ने फैसला दिया कि आईसीसी महिला चैंपियनशिप के नियमों के अनुसार पाकिस्तान को तीन में से प्रत्येक मैच के लिए दो अंक मिलेंगे जबकि 50 ओवरों के इन प्रत्येक मैच के लिए भारत के शून्य अंक होंगे और इसी हिसाब से इसका नेट रन रेट भी समायोजित किया जाएगा.’

तकनीकी समिति ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच वर्तमान रिश्तों में यह संवेदनशील मसला है लेकिन वह इस नतीजे पर पहुंचा है कि बीसीसीआई इस सीरीज में नहीं खेलने के लिए ‘स्वीकार्य वजह’ नहीं दे पाया.

शशांक मनोहर के चेयरमैन बनने के बाद आईसीसी और बीसीसीआई के बीच कई मसलों पर मतभेद उभरते रहे हैं. राजस्व को साझा करने के लिए प्रस्तावित बदलावों से लेकर भारत का कार्यकारी समूह में नहीं होने तक मनोहर का रवैया भारत विरोधी माना जाता है जबकि बीसीसीआई सदस्यों का उनके नेतृत्व पर पूरा विश्वास है.

बीसीसीआई के शीर्ष पदाधिकारी ने कहा, ‘ऐसा लग रहा है कि मनोहर का बीसीसीआई के खिलाफ रवैया भारत विरोधी बनता जा रहा है. बीसीसीआई का पूर्व अध्यक्ष होने के कारण वह अच्छी तरह से वाकिफ है कि भारतीय पुरुष टीम पिछले साल पाकिस्तान के खिलाफ द्विपक्षीय सीरीज नहीं खेल पाई थी. इसके बावजूद यदि पाकिस्तान के खिलाफ नहीं खेलने के कारण भारतीय महिला टीम के अंक काटे जा रहे हैं तो इसका मतलब है कि वह जनभावनाओं की परवाह नहीं करते.’

अब डाउनलोडिंग के दौरान देखें वॉट्सऐप वीडियो

वॉट्सऐप अपने यूजर्स को आये दिन अपने अपडेट के माध्यम से सहूलियतें देता रहता है. वीडियो कॉलिंग फीचर लॉन्च करने के बाद वॉट्सऐप अब एक नए फीचर की टेस्टिंग कर रहा है. जिस वक्त आप किसी के भेजे वीडियो को डाउनलोड कर रहे होते हैं, उस वक्त आप उसे स्ट्रीम करते हुए देख सकते हैं.

अभी किसी के भेजे वीडियो को तब तक नहीं देखा जा सकता, जब तक वह पूरी तरह से डाउनलोड न हो जाए. मगर नए फीचर से डाउनलोडिंग प्रोसेस के दौरान ही देखा जा सकता है कि वीडियो में क्या है. जितना वीडियो आपके फोन में डाउनलोड हो गया होता है, वह प्ले हो सकता है. इस तरह से आप देख सकते हैं कि सामने वाले ने क्या भेजा है. अगर आपको वह कॉन्टेंट पसंद न हो तो आप डाउनलोड कैंसल कर सकते हैं. इससे एक तरह से आपको डेटा बचाने में भी मदद मिलेगी.

अभी ऐंड्रॉयड के बीटा ऐप में जब कोई वीडियो भेजता है, आपको प्ले आइकॉन दिखता है. इसके नीचे वीडियो का साइज लिखा होता है. जैसे ही आप प्ले बटन पर टैप करते हैं, वीडियो स्ट्रीम होना शुरू हो जाता है. स्ट्रीमिंग आपके इंटरनेट की स्पीड पर निर्भर करती है. स्ट्रीमिंग के दौरान तो वीडियो वॉट्सऐप में ही प्ले होता है, मगर डाउनलोड हो जाने के बाद आपको चुनना होगा कि किस प्लेयर पर आप इसे प्ले करना चाहते हैं.

अगर आप अभी इस फीचर को इस्तेमाल करना चाहते हैं तो आपको ऐंड्रॉयड पर बीटा टेस्टर बनना होगा. इसके लिए आपको गूगल प्ले स्टोर पर जाकर WhatsApp सर्च करना होगा. ऐप लिस्टिंग पेज के बॉटम पर Beta Tester बनने का ऑप्शन नजर आएगा. आप यहां पर क्लिक करके भी वहां पहुंच सकते हैं. iOS यूजर्स को इस फीचर के लिए अभी थोड़ा इंतजार करना होगा.

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