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इश्क जब जुनून में बदल जाए

टेलीविजन पर इन दिनों एक धारावाहिक आ रहा है ‘बेहद’ .‘यह धारावाहिक लव ट्राएंगल पर आधारित है. इस धारावाहिक में जेनिफर का किरदार फिल्म ‘गुप्त’ की सनकी लवर ईशा दीवान (काजोल) की याद दिलाता है. जिस में वह अपना प्यार पाने के चक्कर में मर्डर तक कर देती है. ‘बेहद’ धारावाहिक की प्रोमो की लाइन है “हद से ज्यादा कुछ भी अच्छा नहीं होता, प्यार भी नहीं.”

प्यार जब जूनून में बदल जाता है, तो यह एक अच्छेखासे रिश्ते को खतरनाक मोड़ पर ला देता है. दरअसल, जब इश्क जुनून में बदल जाता है तो इश्क का एक अलग ही रूप दिखता है. कभी किसी के लिए इश्क दवा बन जाता है तो किसी के लिए दर्द. एक तरफा प्यार का नशा बहुत ही खतरनाक होता है इसकी गिरफ्त में आया शख्स या तो खुद को नुकसान पहुंचाता है, या फिर अपने प्यार को.

पिछले दिनों इश्क की दीवानगी या जुनूनियत की ऐसी ही एक घटना नार्थ दिल्ली में सामने आई थी जहां पर एक सनकी आशिक ने एक 21 वर्षीय युवती की बड़ी बेरहमी से बीच सड़क पर 32 बार कैंची मारकर हत्या कर दी थी. बाद में पुलिस पूछताछ में पता चला कि आरोपी शादी शुदा था और वह युवती को काफी समय से परेशान कर रहा था.

सही कहते हैं जब इश्क हद से गुजर जाए तो वो जुनून बन जाता है, और अगर इश्क एक तरफा हो तो वो जानलेवा भी हो सकता है. प्यार में पागल व्यक्ति की हालत उस नशेडी जैसी हो जाती है जिसे अगर एक दिन नशा करने को न मिले तो वह पागलों की तरह व्यवहार करता है. वह मानसिक रूप से डिस्टर्ब हो जाता है और या तो खुद को नुकसान पहुंचाता है या सामने वाले को. इसलिए शायद प्यार को नशा भी कहा जाता है. एकतरफा प्यार होने की सबसे ज्यादा गुंजाइश कालेज और स्कूल टाइम में होती है जहां इकतरफा प्यार टीचर, क्लास मेट किसी से भी हो सकता है.

मैं तेरे प्यार में पागल …

प्यार में पागल व्यक्ति अपने प्यार को किसी भी कीमत पर पाने की कोशिश करता है. प्यार उस जुनून की तरह है जिसमें यदि जिसे आप चाहते हैं वह आपको ना मिले तो आप परेशान हो जाते हैं और उसे पाने की चाहत में किसी भी हद तक गुजरने को उतारू हो जाते हैं. एकतरफा इश्क का ऐसा ही एक मामला मध्यप्रदेश के इंदौर में भी सामने आया. जहां एक तरफा प्यार में पागल एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने बारहवीं कक्षा की एक छात्रा और उसकी मां पर चाकू से हमला कर दिया. जिसमें लड़की की मौके पर ही मौत हो गई और मां गंभीर रूप से घायल हो गयी.

इसी तरह लखनऊ की दीप्ति सरना अपहरण कांड की खबर तो याद होगी आपको. यह कहांनी भी एक ऐसे तरफा प्यार की थी जहाँ था एक तरफा प्यार, और फिर उस प्यार को पाने की सनक और फिर अपहरण. ऐसे सिरफिरे आशिक ही हाथ की नस काटकर अपने खून से ‘मैं तुम्हारे प्यार में पागल हूं, तुम्हारे बिना जी नहीं सकता” जैसे मेसेजेस लिखते हैं और अपने जूनून से सामने वाले का जीना हराम कर देते हैं .

फिल्मी एक तरफा प्यार

फिल्म “डर”, भी इश्क के जूनून का ही प्रतिरूप थी ,जहां शाहरुख खान “आई लव यू….क..क..किरण” कहता था, कहता था “तू हां कर या न कर तू है मेरी किरण.” फिल्म में शाहरुख खान किरण बनी जूही चावला से एक तरफा प्यार करता है और डरावने काल्स और मेसेजेस से जूही चावला को डराता है और इस जुनून में वह एक विलेन बन जाता है.

इसी तरह फिल्म ‘अंजाम’ ,‘आशिक बनाया आपने’ और ‘प्यार तूने किया किया’ और ‘दीवानगी’ भी सिरफिरे आशिकों की अपने जूनून से सामने वाले का जीना हराम कर देने वाली कहानियां थी. अगर आपने ‘ऐ दिल है मुश्किल’ फिल्म देख ली है तो आपको फिल्म का डायलॉग ‘प्यार में जुनून है, दोस्ती में सुकून है…’ तो याद होगा. यह फिल्म भी इकतरफा प्यार की कहानी है.

प्यार में बने मिसाल

प्यार की दीवानगी के किस्सों का क्या कहना. यहां कोई अपने आशिक की एक झलक पाने को रेगिस्तान में मीलों नंगे पांव चलता है तो कोई कंपकपाती ठंड में उफनती नदी घड़े के सहारे पार करता है तो कोई अपने महबूब को तोहफा देने के लिए अपने खूबसूरत बाल काट कर बेच डालता है. ऐसा नहीं कि प्यार के जुनून में लोग सिर्फ सामने वाले को नुकसान ही पहुंचाते हैं कुछ लोग प्यार में कुछ ऐसा कर जाते हैं की वे दुनिया के लिए एक मिसाल बन जाते हैं. ऐसी ही एक मिसाल दशरथ मांझी हैं जिन्होंने अपनी पत्नी की खातिर पहाड़ का सीना चीर डाला.

प्यार के नाम पर सनकपन

जो लोग प्यार के नाम पर किसी को तकलीफ पहुंचाते हैं, इनकार के बावजूद उन का पीछा करते हैं, प्यार करने के लिए मजबूर करते हैं इसे प्रेम हरगिज नहीं कहा जा सकता. इसे सिर्फ प्यार का जुनून या सनकपन कहा जा सकता है क्योंकि यह कैसा और कहां का प्यार है जिसमें सामने वाले को चोट पहुंचा कर खुशी मिलती है?

गोरखपुर की काया शर्मा के बौलीवुड में जलवे

बौलीवुड में गैर फिल्म परिवार से आने वाली प्रतिभाओं को काफी संघर्ष करना पड़ता है. मगर मूलतः गोरखपुर निवासी और सीरियल ‘‘बेहद’’ में मॉडल के किरदार में नजर आ रही अदाकारा काया शर्मा का मानना है कि यदि इंसान के अंदर प्रतिभा हो, कुछ कर गुजरने की चाहत हो, संघर्ष करने का माद्दा हो और मेहनत से दिल न चुराना हो, तो सफलता उसके कदम चूम सकती है.

बचपन से ही अभिनय व नृत्य की शौकीन काया शर्मा महज एक वर्ष पहले बौलीवुड में कुछ बनने का सपना लिए गोरखपुर से मुंबई पहुंची थी. उस वक्त उन्हें लोगा ने काफी डराया था कि यहां सफलता नहीं मिलेगी, सिर्फ शोषण होगा, वगैरह वगैरह. मगर काया शर्मा ने अपने इरादे पर अडिग रहते हुए मुंबई में पृथ्वी थियेटर में तीन सामाजिक मुद्दों पर आधारित नाटकों में अभिनय किया. फिर वह ‘एबीएसएस थियेटर’ ग्रुप से जुड़ गयीं. उनका मानना है कि रंगमंच एक ऐसा प्लेटफार्म है,जिससे जुड़े रह कर अभिनय में निखार आता है.थियेटर से जुड़कर अभिनय की बारीकियां सीखने में उन्हे आनंद की अनुभूति होती है.

थिएटर की वजह से ही काया शर्मा को छोटे परदे पर ‘‘जी टीवी’’ के सीरियल ‘‘फियर फाईल्स’’ में अभिनय करने का मौका मिला. इन दिनों वह जौहर दिखा चुकी हैं. वर्तमान समय में सोनी टीवी पर प्रसारित हो रहे सीरियल ‘बेहद’ में मॉडल की भूमिका में उन्हें पसंद किया जा रहा है. इसके अलावा स्टार परिवार अवार्ड शो में भी अपनी अदा का जलवा बिखेर चुकी हैं. साथ ही समय-समय पर व्यावसायिक विज्ञापन में भी नजर आती रहती हैं.

इतना ही नहीं इन दिनों वह हिंदी सिनेमा के साथ साथ भोजपुरी सिनेमा में भी सक्रिय हैं. वह हिंदी फिल्म ‘गैंस ऑफ लिटिल’ के अलावा भोजपुरी फिल्म ‘लूटेरे’ भी कर रही है. ‘मिथिला टॉकीज’ के बैनर तले बन रही निर्माता मनोज कुमार चौधरी एवं निर्देशक राजू की मल्टी स्टारर भोजपुरी फिल्म ‘लूटेरे’ में काया शर्मा के साथ आदित्य मोहन, यश कुमार,गौरव झा,अक्षरा सिंह,पूनम दूबे,ऋतू  सिंह तथा अवधेश मिश्रा भी हैं.

मोह माया मनीः क्लायमेक्स ने बर्बाद की फिल्म

एक अच्छे स्क्रिप्ट पर भी हर निर्देशक बेहतरीन फिल्म नही बना सकता. निर्देशक मुनीष भारद्वाज की अपनी कमजोरियों और गलतियों की वजह से फिल्म ‘मोह माया मनी’ एक अति साधारण फिल्म बनकर रह गई. फिल्म के क्लायमेक्स ने फिल्म को बर्बाद कर दिया.

रोमांचक फिल्म ‘मोह माया मनी’ की कहानी है मध्यमवर्गीय परिवार के दिव्या मेहरा(नेहा धूपिया) और अमन मेहरा(रणवीर शौरी) की. दोनों पति पत्नी हैं. दिव्या मेहरा एक मीडिया कंपनी में कार्यरत हैं. जब कि अमन एक रियल एस्टेट से जुड़ी कंपनी में कार्यरत हैं. दिव्या के कंपनी में ही कार्यरत कबीर के साथ संबंध हैं. अमन रातों रात अमीर बनना चाहता है. उसे लगता है कि उसकी कंपनी उसका शोषण कर रही है. इसलिए वह एक बड़ी कंपनी को 25 फ्लैट बेचने का सौदा करता है. तो वहीं बीच का रास्ता निकालकर अपने लिए साढ़े तीन करोड़ रूपए जुटाता है. वह एक ब्रोकर रघु से 25 फ्लैट बिकवाने के लिए 50 लाख रूपए लेकर अपने लिए एक जमीन का प्लॉट बुक कराकर 45 लाख एडवांस में दे देता है.

मगर मामला बिगड़ जाता है. अमन का यह गोरखधंधा अमन की कंपनी के मालिक को पता चल जाता है. अब सौदा रद्द हो जाता है. अमन की नौकरी चली जाती है. नियम के अनुसार अमन को उसके 35 लाख वापस नहीं मिलते, पर उसे रघु को पचास लाख रूपए वापस देने हैं. रघु उसे प्रताड़ित करता है. तब अमन एक योजना बनाता है. योजना के तहत वह खुद को मरा हुआ घोषित कर देगा, जीवन बीमा से दिव्या को पैसे मिलेंगे, दिव्या उन पैसों से रघु का कर्ज चुकायेगी और इस के बाद बचे पैसों से वह लोग दूसरे शहर में जाकर जिंदगी जिएंगे.

अमन को अपस्ताल के शवगृह से कोई लाश नहीं मिलती है, तो वह एक लेखक रोहन को फिल्म निर्माता से मिलवाने के बहाने अपने साथ ले जाता है. उसके कोल्ड ड्रिंक में दवा मिलाकर उसे बेहोश कर कार की ड्राइविंग सीट पर बैठाकर कार को आग लगा देताहै. जली कार से मिले सबूत से साबित होता है कि अमन मर गया. उसकी लाश को कोई पहचान नहीं पाता है.

दिव्या व कबीर एक साथ रहने लगते हैं. दिव्या जीवन बीमा से पैसे लेने के लिए कागजी कार्यवाही में लग जाती है. एक दिन पुलिस स्टेशन में रोती बिलखती रोहन की पत्नी से दिव्या की मुलाकात हो जाती है. जिससे दिव्या को सारा सच पता चल जाता है. अब दिव्या खुद कबीर के साथ कबीर के घर में जिंदगी बिताने के साथ ही जीवन बीमा से मिली रकम को रोहन की पत्नी को देने का मन बना लेती है.

पर एक दिन अचानक अमन चुपचाप घर आ जाता है. घर पर दिव्या नहीं मिलती है. अमन को पता चलता है कि दिव्या, कबीर के घर पर है. अमन गुस्से में बंदूक खरीदकर कबीर के घर पहुंचता है. वह कबीर व दिव्या को कबीर की कार में बैठाकर जंगल में ले जाता है. जहां अमन, कबीर को गोली मारकर खत्म कर देता है. फिर दिव्या गुस्से में अमन को गोली मार देती है. दिव्या, कबीर की लाश को जमीन में दफन कर देती है. इधर पुलिस को अमन की लाश और रोहन से जुड़े सारे सबूत मिलते हैं. जिसे देखकर रोहन की पत्नी दिव्या पर चिल्लाती है, पुलिस वाले रोहण की पत्नी को शांत करने का प्रयास करते हैं. दिव्या वहां से चली जाती है.

फिल्म में एक अच्छा विषय उठाया गया है, मगर लेखक व निर्देशक की गलतियों के चलते फिल्म अति साधारण फिल्म बन जाती है. लालच बुर बला के साथ ही काला धन और किस तरह से भ्रष्टाचार पनपता है,उसका भी चित्रण किया गया है. निर्देशक ने इंटरवल से पहले कई दृष्यों के दोहराव के कारण फिल्म बेवजह लंबी हो गई है. पटकथा में काफी कमियां हैं. इंटरवल के बाद फिल्म थम सी जाती है. यदि लेखक ने पटकथा पर मेहनत की होती, तो शायद एक बेहतरीन फिल्म बन जाती.

घटिया स्तर की पटकथा व निर्देशकीय कमजोरियों के चलते नेहा धूपिया व रणवीर शौरी का अभिनय फिल्म को संभाल नहीं पाता. नेहा धूपिया व रणवीर शौरी ने बेहतरीन परफार्मेंस दी है. 2 घंटे की अवधि वाली फिल्म ‘मोह माया मनी’ के निर्देशक मुनीष भारद्वाज, लेखक मुनीष भारद्वाज व मानसी निर्मल जैन तथा कलाकार हैं ‘रणवीर शौरी, नेहा धूपिया, विदुषी मेहरा.

इतिहास दोहरा रहे पार्थिव ही क्यों साहा का विकल्प!

पार्थिव पटेल ने 8 साल बाद राष्ट्रीय टीम में वापसी की है और 70 साल पुराना इतिहास दोहराया है. पार्थिव पटेल जब आखिरी बार भारत के लिए खेले थे तब अनिल कुंबले टीम इंडिया के कप्तान थे. अब पार्थिव पटेल वापसी कर रहे हैं और कुंबले टीम इंडिया के कोच हैं.

पार्थिव पटेल से पहले सन् 1946 में सीके नायडू समेत 4 खिलाड़ियों ने 10 साल बाद क्रिकेट में वापसी की थी. पार्थिव पटेल ने सन् 2008 में अपना आखिरी टेस्ट मैच खेला था, उन्होंने जिस टीम के साथ अपना आखिरी मैच खेला था उस टीम के आठ खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से सन्यास ले चुके हैं.

पार्थिव पटेल ने जब अपना अंतरराष्ट्रीय करियर शुरू किया था तब उनकी उम्र 17 साल थी और आठ साल बाद जब वो वापसी कर रहे हैं तब उनकी उम्र 31 साल है और इस तरह मौजूदा भारतीय टीम में वो तीसरे सबसे उम्रदराज खिलाड़ी हैं. मौजूद टीम में पार्थिव पटेल से ज्यादा उम्र सिर्फ अमित मिश्रा और मुरली विजय की है. अमित मिश्रा 34 और मुरली विजय 32 साल के हैं.

पार्थिव की वापसी के बाद एक और मजेदार वाकया सामना आया है, दरअसल, पार्थिव पटेल ने 2002 में जब इंटरनेशनल क्रिकेट खेलना शुरू किया था तक मौजूदा टीम का कोई भी खिलाड़ी इंटरनेशनल क्रिकेट में नहीं था. भारतीय टेस्ट टीम के कप्तान विराट कोहली खुद अंडर 14 क्रिकेट खेलते थे.

पार्थिव पटेल के 2002 में अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने से लेकर 2016 में एक बार फिर राष्ट्रीय टीम में वापसी करने तक 25 भारतीय खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह चुके हैं.

यह पहला मौका है जब किसी भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी ने इतने लंबे समय बाद अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी की है. पार्थिव जब 2008 में टीम में थे तब सचिन, लक्ष्मण, द्रविड़, सहवाग, वसीम जाफ़र, गांगुली, कुंबले, जहीर खान, अजित आगरकर भारतीय टीम में खेलते थे आज ये सब खिलाड़ी संन्यास ले चुके हैं.

मौजूदा रणजी सीजन में पार्थिव ने 5 मैचों में 59.28 की औसत से 415 रन बनाए हैं, जिसमें 1 सेंचुरी और 3 हाफ सेंचुरी शामिल हैं. पार्थिव की खासियत यही हैं कि वो किसी भी नंबर पर बल्लेबाजी कर सकते हैं.

पार्थिव पटेल ही क्यों, ये खिलाड़ी भी बन सकते थे साहा का विकल्प

हालांकि सवाल उठ रहे हैं कि क्या पार्थिव को साहा के विकल्प के रूप में खिलाना सही होगा. चयनकर्ताओं का फैसला अपनी जगह है, मगर कुछ ऐसे भी खिलाड़ी हैं, जिनका पलड़ा प्रदर्शन और अनुभव के आधार पर पार्थिव से भारी नजर आता है.

नमन ओझा

2015 में श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट डेब्यू करने वाले नमन ओझा मौजूदा रणजी सीजन में मध्यप्रदेश के लिए पहले 4 मैच नहीं खेल पाए. हालांकि ओझा एक काबिल कीपर हैं, जो क्रीज पर लंबा समय बिता सकते हैं. हालांकि रणजी सत्र से दूर रहना उनके खिलाफ जाता है. इसके अलावा नमन की उम्र भी पार्थिव से ज्यादा है.

दिनेश कार्तिक

टीम इंडिया के लिए दिनेश कार्तिक भी एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकते थे. कार्तिक ने 23 टेस्ट मैचों में 1000 रन बनाए हैं, जिसमें 1 शतक और 7 अर्धशतक शामिल हैं. कार्तिक ने घरेलु क्रिकेट में शानदार खेल दिखा कर अपने लोहा मनवाया है. हालांकि कार्तिक और विजय के बीच निजी कारणों के चलते कार्तिक को दरकिनार करना जायज दिखाई पड़ता है क्योंकि विजय टेस्ट टीम के प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल हैं.

रॉबिन उथप्पा

लंबे समय से टीम से बाहर चल रहे उथप्पा ने सीमित ओवरों के मैचों में अपनी प्रतिभा साबित की है. विकल्प के तौर पर उन्हें टेस्ट में डेब्यू करने का मौका दिया जा सकता था. घरेलु स्तर पर भी उथप्पा ने हर साल जमकर रन बनाए हैं. जिंबाब्वे सीरीज के दौरान ठीक-ठाक प्रदर्शन करने वाले उथ्पपा को टीम में शामिल करके एक मौका दिया सकता था.

ऋषभ पंत

अंडर-19 क्रिकेट के बाद रणजी क्रिकेट में चमत्कारी प्रदर्शन करने वाले कीपर ऋषभ पंत भारत के लिए नई खोज हो सकते थे. एक ही मैच के लिए सही, मगर पंत को मौका दिया जा सकता था. पंत ने इस रणजी सीजन के 6 मैचों में 97.11 की औसत से 874 रन बनाए हैं, जिसमें 1 तिहरा शतक, 1 शतक और 4 हाफ सेंचुरी शामिल हैं. 17 साल के पार्थिव पर अगर विश्व कप के लिए भरोसा किया जा सकता है, तो पंत को एक टेस्ट के लिए मौका देना तो बनता है.

शान किशन

पंत ही की तरह इशान किशन भी अंडर-19 के उभरते हुए सितारे हैं. किशन ने इस सीजन में दिल्ली के खिलाफ 162 रनों की धाकड़ा पारी खेल कर अपने हुनर पर ठप्पा लगा दिया. पार्थिव की ही तरह इशान किशन भी बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं. इशान किशन और ऋषभ पंत ने राहुल द्रविड़ से काफी कुछ सीखा है, जिसे बड़े मंच पर साबित करने का मौका इंग्लैंड के खिलाफ खिलाकर उन्हें दिया जा सकता था.

“बॉल-टेंपरिंग विवाद सीरीज से ध्यान भटकाने की कोशिश”

भारतीय टेस्ट कप्तान विराट कोहली द्वारा पहले टेस्ट में बॉल-टेंपरिंग का मामला ब्रिटिश मीडिया में काफी उछाला जा रहा है. लेकिन आईसीसी ने इस मामले में चुप्पी साध रखी है.

लेकिन भारत और इंग्लैंड के बीच खेली जा रही 5 टेस्ट मैचों की सीरीज के मोहाली में तीसरे मुकाबले से ठीक पहले कप्तान विराट कोहली ने गेंद से छेड़छाड़ विवाद पर खुलकर अपनी बात रखते हुए कहा कि ‘आईसीसी के अलावा इस तरह की खबरें उनके लिए कोई मायने नहीं रखती.’

कप्तान कोहली ने विवाद पर मीडिया से बात करते हुए कहा कि ‘ये सारा विवाद सीरीज से हमारा ध्यान भटकाने के लिए है. मेरे लिए अखबारों में छपने वाले लेख कोई खास मायने नहीं रखते जब तक कि आईसीसी मुझे कुछ ना कहे. अगर मैंने कुछ गलत किया होता तो आईसीसी मुझसे जरूर पूछताछ करता.’

पहला टेस्ट ड्रॉ खेलने के बाद दूसरे टेस्ट मुकाबले में भारतीय टीम ने 246 रनों से शानदार जीत हासिल कर सीरीज में 1-0 से बढ़ बना ली है. दूसरे टेस्ट के दौरान ही विराट पर ब्रिटिश मीडिया ने गेंद से छेड़छाड़ का आरोप लगाया था. ब्रिटिश अखबार का मानना है कि विराट कोहली के मुंह में एक मिठी चीज थी जिसका इस्तेमाल वो गेंद को चमकाने और उसकी शाइन बरकरार रखने के लिए कर रहे थे.

कप्तान कोहली पर लग रहे इस आरोप पर एक दिन पहले गुरूवार को ही कोच अनिल कुंबले ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा था कि ‘इस बारे में बहुत कुछ कहा और लिखा जा रहा है. ये सिर्फ आरोप है. जिसमें कोई सच्चाई नहीं है. मैं लोगों के आरोपों पर कोई जवाब नहीं दूंगा.’

इसके साथ ही भारतीय टीम के दूसरे मुकाबले में जीत के मोमेंटम को बरकरार रखने के सवाल पर कप्तान कोहली ने आज कहा कि ‘ये हमारे लिए एक चैलेंज है जिसे हम बरकरार रखने चाहेंगे.’ कप्तान कोहली ने कहा, ‘हमें इसे एक जिम्मेदारी की तरह ले रहे हैं ना कि किसी दबाव की तरह. हमें इस बात का ध्यान रखना होगा कि हम किस तरह से हर मैच खेल रहे हैं. लेकिन फिर भी आने वाला मुकबला एक मुश्किल चैलेंज होगा.’

सस्ते हो गए घरों के दाम

सरकार के नोटबंदी के फैसले का प्रभाव बाजार के हर क्षेत्र पर पड़ा है. अर्थशास्त्रियों और रेटिंग एजेंसियों की माने तो सरकार के इस फैसले का भविष्य में सकारात्मक असर देखने को मिलेगा.

हालांकि, सबसे तेजी से रियल एस्टेट बिजनेस पर इसका देखने को मिल सकता है. प्रोपइक्विटी फर्म का मानना है कि नोटबंदी के चलते आने वाले 6-12 महीने में 42 प्रमुख शहरों में में मकानों की कीमत 30 प्रतिशत तक घट सकती है. इसके साथ ही अपने एक बयान में फर्म ने यह भी कहा कि सरकार के नोटबंदी के फैसले के बाद से पिछले 15 दिनों से रियल एस्टेट सेक्टर में अचानक निवेश बढ़ गए हैं और लोग अपने अघोषित धन को इस क्षेत्र में खपाना चाह रहे हैं.

अनुमान लगाया जा रहा है कि बिजनेस सेक्टर में अकेले मुंबई शहर में ही लगभग 2 लाख करोड़ की गिरावट आएगी. इसके अलावा बेंगलुरू और दिल्ली से सटे गुड़गांव में भी गिरावट देखने को मिल सकता है. फिलहाल भारत में रियल एस्टेट सेक्टर का कुल मुल्य 39,55,044 करोड़ बताया जा रहा है जिसमें कमी के बाद यह 31,52,170 करोड़ रुपये का रह जाएगा.

करीब 3 मिलियन एंड्रायड फोन खतरे में, हो सकते हैं हैक

एंड्रायड यूजर्स के लिए एक और बुरी खबर है. करीब 3 मिलियन एंड्रायड डिवाइस पर हैकर्स पूरी तरह से कंट्रोल करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसके लिए हैकर्स man-in-the-middle यानि MITM का इस्तेमाल कर रहे हैं. एक रिपोर्ट की मानें तो सस्ते एंड्रायड डिवाइस को बनाने में जो OTA मैकेनिजम इस्तेमाल किया जाता है वो सुरक्षित नहीं है. इसी के चलते ये परेशानी आ रही है. हैकर्स का निशाना ऐसी ही एंड्रायड डिवाइसेस पर है.

पहले से इंस्टॉल हैं बैकडोर/रूटकीट:

OTA मैकेनिजम में एक छिपी हुई बाइनरी /system/bin/debugs है, जो चाइनीज मोबाइल फर्म Ragentek ग्रुप के साथ जुड़ा हुआ है. शोधकर्ताओं के मुताबिक, ये विशेष बाइनरी न केवल यूजर की निजी जानकारी MITM हैकर्स के पास पहुंचती है बल्कि रूटकिट की तरह भी काम करती है. इसका मतलब कि रूटकिट के जरिए हैकर्स यूजर के फोन में रिमोटली प्रवेश कर सकते हैं.

इससे पहले एंड्रायड डिवाइस में जो कमी आई थी वो चीन की ही एक कंपनी Shanghai ADUPS टेक्नोलॉजी के जरिए आई थी. वहीं, ये नया बैकडोर या रुटकीट भी चीन की ही एक कंपनी द्वारा आया है. AdUps यूजर की जानकारी और फोन में मौजूद डिटेल्स को चुरा लेता है और Ragentek फर्मवेयर भी सेंड और रिसीव मैसेज को एनक्रिप्ट नहीं कर पाया है.

नोटबंदी का मजदूरी पर असर

बाराबंकी जिले के एक गांव हैदरगढ़ से करीब 100 मजदूर रोज लखनऊ कामधंधे के लिये आते थे. केवल बाराबंकी जिले के ही नहीं सीतापुर, उन्नाव, रायबरेली और सुल्तानपुर जैसे जिलों से काफी तादाद में मजदूर लखनऊ आते थे. यह लोग ज्यादातर लोकल ट्रेन से आते थे. दिनभर यहां काम कर 6 से 7 बजे के बीच फिर वापस अपने घरों को चले जाते थे.

लखनऊ के महानगर, पौलीटेक्निक, अलीगंज, तेलीबाग जैसी जगहों के चैराहों पर यह लोग एक भीड की शक्ल में खड़े नजर आ जाते थे. कई बार मजदूरों की इस भीड़ से चैराहों पर जाम लग जाता था. जब से नोटबंदी की घोषणा हुई है, बाहर से आने वाले मजदूरो की शहरों में बहुत कमी हो गई है. कारण यह है कि अब लोग नोटबंदी से परेशान हैं और ऐसे कामों को आगे सरकाते जा रहे हैं.

लखनऊ के दुबग्गा में रहने वाले अभिषेक कहते है मैं घरों की मरम्मत और पोताई को काम करता हूं. नोटबंदी के बाद से लोग मजदूरी देने के बजाये कह रहे है कि बाद में ले लेना. जब मजदूरी का 1 हजार 15 सौ रूपया उनके पास जमा हो जाता है तो 2-4 सौ रूपये दे देते हैं. सब इस बात से परेशान दिखते है कि उनके पास पैसा होने के बाद भी निकाल नहीं पा रहे. हम भी हालात को देखते हुये पैसा नहीं मांगते. पर अब क्या करें? कितने दिन बिना पैसे के काम करें. ऐसे में उधार काम करने से बेहतर है कि घर बैठ जायें.

बाराबंकी से आने वाले दिनेश का कहना है, मजदूरी रोज कमाता रोज खाता है. उसके लिये धन केवल धन होता है. काला और सफेद क्या होता है यह पता नहीं होता. उसके लिये तो पैसा घर परिवार चलाने का माध्यम भर होता है. जिसके लिये वह मेहनत करता है. अब जब पैसा ही नहीं मिल रहा तो वहा जाने का क्या लाभ पर काम ने मिलने से हम जैसे मजदूर भुखमरी की कगार पर पहुंच गये हैं. नोटबंद होने का प्रभाव मजदूर वर्ग पर ज्यादा पड़ रहा है. नोटबंदी से कब क्या प्रभाव पड़ेगा पता नहीं पर अभी तो मजदूर परेशान हैं. वह भुखमरी के कगार पर है.केवल मजदूर ही नहीं छोटे मोटे कामधंधे वाले भी परेशान हैं.

दिनेश और अभिषेक दोनों कहते हैं कि नोटबंदी के बाद से ही फुटकर सामान मंहगें हो गये हैं. एक तरफ तो मजदूर को कामधंधा नहीं मिल रहा और दूसरी ओर उसे अपने घर को चलाने के लिये ज्यादा पैसा खच करना पड़ रहा है. यह सच है कि नोटबंदी के शुरूआती दिनों में कुछ मजदूरों को पैसा बदलवाने की लाइन में लगने की एवज में कुछ मजूदरी मिल जाती थी. अब वह भी बंद हो गई है. ऐसे में मजदूर शहर आकर काम करने की बजाये अपने घरों में रहना पसंद करता है. जिससे उसकी दिहाड़ी नहीं मिल रही है. नोटबंदी से कालाधान वाले कितना परेशान पता नहीं पर मेहनत, मजूदरी का घर चलाने वाले परेशान घूम रहे हैं.

ऑनलाइन सिक्योरिटी को न करें इग्नोर

स्मार्टफोन, कंप्यूटर और इंटरनेट हम सबकी दिनचर्या का अहम हिस्सा हैं. वास्तविक दुनिया से ज्यादा हमें हमारे इस वर्चुअल वर्ल्ड से सारोकार होता है. और हो भी क्यों न? आखिर पूरी दुनिया से जो हम कनेक्टेड रह पाते हैं. तो ऐसे में इसके सिक्योरिटी की चिंता करना लाजमी है.

लेकिन आपको याद है आखिरी बार अपने ईमेल या फेसबुक का पासवर्ड कब बदला था? या फिर कब खतरनाक हैकर्स से बचने के लिए जरूरी सेटिंग्स किये थे? नहीं न! तो आज हम आपको कुछ ऐसे तरीके बताते हैं जिनपर अमल करके आप खुद की ऑनलाइन प्रेजेंस सिक्योर कर सकते हैं.

अपडेट- कंप्यूटर और स्मार्टफोन के अपडेट्स को कभी इग्नोर न करें. क्योंकि कंपनियां इसके जरिए सिक्योरिटी पैच देती हैं जो आपके सिस्टम को सुरक्षित रखते हैं. क्योंकि हर दिन नए वायरस आते हैं और पुराने ऑपरेटिंग सिस्टम उसे समझ नहीं पाते.

एंटी वायरस- प्रीमियम एंटी वायरस यूज करें और उसे हमेशा अपडेट रखें. समय समय पर अपने कंप्यूटर और स्मार्टफोन को उससे स्कैन करते रहें.

डिवाइस लॉक- अपने स्मार्टफोन या लैपटॉप को हर वक्त फिंगरप्रिंट स्कैनर या पिन के जरिए लॉक रखें. क्या पता आपके आसपास वाला ही हैकर हो और आपके साथ धोका कर ले.

सेफ पासवर्ड-  किसी भी अकाउंट के पासवर्ड में स्पेशल कैरेक्टर और डिजिट्स जरूर रखें. कैप्स और स्मॉल का कॉम्बिनेशन भी रखें. इसके अलावा रेग्यूलर अंतराल पर पासवर्ड बदलते रहें.

टू स्टेप ऑथेन्टिकेशन- जीमेल और दूसरी ऑनलाइन सर्विस टू स्टेप ऑथेन्टिकेशन फीचर देती हैं . अगर आपका मोबाइल चोरी या क्लोन हो गया फिर भी कोई दूसरा आपकी आईडी को ऐक्सेस नहीं कर सकता है. क्योंकि इसमें हर बार ओटीपी आती है.

ऐप इंस्टॉलेशन- कंप्यूटर और मोबाइल में किसी भी ऐप को इंस्टॉल करने से पहले ये देख लें कि वो वेरिफाइड पब्लिशर का है या नहीं. इसके अलावा यह भी देखें कि वो आपके स्मार्टफोन से कौन कौन सी जानकारियां हासिल करेगा.

राउटर को सिक्योर रखें- अगर आपका राउटर सिक्योर नहीं है तो मुमकिन है आप 100 फीसदी हैक हो जाएंगे. क्योंकि अगर राउटर हैक हुआ तो उससे जुड़े सभी डिवाइस के ट्रैफिक से पासवर्ड चुराया जा सकता है. इसलिए इसमें मजबूत पासवर्ड लगा कर रखें और अनजान को न बताएं.

ईमेल, पॉपअप और फर्जी लिंक- किसी भी ऐसे ईमेल में दिए गए अटैचमेंट को न खोलें जो पूरी तरह अंजान हों और फर्जी लग रहे हैं. क्योंकि हैकर्स के लिए सबसे आसान होता है किसी लिंक के जरिए आपके सिस्टम को अपने कंट्रोल में लेना. ऐसे ही आप किसी पॉप अप विज्ञापन और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे फर्जी लिंक को ओपन करने से भी बचें.

ऑनलाइन पैसों के लेनदेन में सावधानी- ऑनलाइन शॉपिंग हो, किसी को पैसे भेजने हो या रिचार्ज करना हो इन सब में आपको सावधान रहने की जरूरत है. चाहे इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड हो या फिर क्रेडिट डेबिट कार्ड इनकी डीटेल दर्ज करने से पहले वेबसाइट सिक्योर है या नहीं यह जरूर देखें. वेबसाइट में सिक्योरिटी का डिजिटल सर्टिफिकेट और URL में पैडलॉक का आइकन होना जरूरी है.

पब्लिक वाईफाई- किसी भी पब्लिक वाईफाई को इंटरनेट के चक्कर में न यूज कर लें. क्योंकि इसके जरिए आपके स्मार्टफोन का मेटाडेटा हैकर्स आसानी से उड़ा सकते हैं. इसलिए कनेक्ट होने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि वो सिक्योर है या नहीं.

नोटबंदी से सुस्त पड़ सकती है अर्थव्यवस्था

कंपनियों का क्रेडिट प्रोफाइल बिगड़ने से भारतीय बैंकों के लिए रिस्क और नोटबंदी से बैंकों की एसेट क्वॉलिटी के लिए शॉर्ट टर्म में जोखिम बढ़ गया है. एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने गुरुवार को यह बात कही. ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कहा है कि नोटबंदी से इकनॉमिक ऐक्टिविटी पर अच्छा-खासा असर पड़ेगा.

एसएंडपी ने कहा कि 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोट वापस लिए जाने से लॉन्ग टर्म में फायदा होगा, लेकिन शॉर्ट टर्म में इससे ग्रोथ कम हो सकती है और बैंकों की एसेट क्वॉलिटी पर बुरा असर पड़ेगा. एसएंडपी ने बताया कि भारतीय कंपनियों की क्रेडिट क्वॉलिटी पिछले कुछ साल में तेजी से खराब हुई है क्योंकि डोमेस्टिक इंडस्ट्रियल ऐक्टिविटी सुस्त है, कमोडिटी प्राइसेज निचले स्तर पर हैं, प्रॉजेक्ट्स में देरी हो रही है, प्रॉफिटेबिलिटी कम है और कुछ सेगमेंट में बहुत ज्यादा कर्ज है.

मार्च 2016 तक मेटल सेक्टर का स्ट्रेस्ड लोन 34.4% और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर का 16.7% था. इसके बावजूद एसएंडपी ने सभी फाइनैंशल इंस्टीट्यूशंस की पिछली रेटिंग बनाए रखी है. उसने बताया कि पॉलिसी लेवल पर लगातार पहल हो रही है, जिससे मीडियम टर्म में भारत का आर्थिक और फिस्कल परफॉर्मेंस अच्छा रह सकता है. ऐसे में भारत की जीडीपी ग्रोथ ऐसे दूसरे देशों से अधिक रह सकती है. उधर, मूडीज ने कहा कि नोटबंदी से ‘इकनॉमिक ऐक्टिविटी ’ काफी हद तक प्रभावित होगी और इससे शॉर्ट टर्म में जीडीपी ग्रोथ काफी कम हो जाएगी.

हालांकि, लॉन्ग टर्म में इससे टैक्स रेवेन्यू बढ़ेगा और सरकार फिस्कल कंसॉलिडेशन का लक्ष्य हासिल कर पाएगी. उसने कहा है कि नोटबंदी का असर इकनॉमी के सभी सेक्टर्स पर पड़ रहा है. मूडीज ने कहा कि नोटबंदी से कुछ लोगों और कंपनियों की ब्लैक मनी बर्बाद हो सकती है.

काला धन रखने वाले कई लोग फॉर्मल फाइनैंशल सिस्टम में इसे जमा नहीं करेंगे क्योंकि वे यह नहीं बताना चाहते कि उनके पास यह पैसा कहां से आया है. मूडीज ने यह भी कहा कि नोटबंदी से कंजम्पशन में भी गिरावट आएगी. हाउसहोल्ड और बिजनेस को कैश की शॉर्टेज का सामना करना पड़ेगा. इकनॉमिक ऐक्टिविटी सुस्त पड़ने की चोट कंपनियों पर भी पड़ेगी.

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