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दिलीप कुमार की तबीयत में सुधार

बॉलीवुड के मशहूर एक्टर और पद्म विभूषण अवॉर्ड जीत चुके दिलीप कुमार की तबीयत एक बार फिर बिगड़ गई है. पैर में सूजन, दर्द और बुखार के चलते उन्हें मुंबई के लीलावती हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया. उनके दाहिने पैर में दर्द और सूजन है.

आपको बता दें कि ट्रैजडी किंग दिलीप कुमार दिसंबर महीने में 94 साल के हो जाएंगे. 11 दिसंबर को उनका जन्मदिन है. इसी साल अप्रैल में भी उन्हें बुखार और सांस में दिक्कत के बाद हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था.

दिलीप कुमार की पत्नी सायरा बानो ने बताया, “उनके दाहिने पैर में सूजन थी और हम अच्छे से इसकी जांच करवाना चाहते थे इसलिए हम उन्हें अस्पताल ले आए. कुछ माह के अंतराल में उनकी नियमित जांच भी होती है. उनका स्वास्थ्य बिल्कुल ठीक है.”

सायरा बानो ने बताया, उनकी सेहत अच्छी है, चिंता की कोई बात नहीं है. सायरा को आशा है कि दिलीप कुमार 11 दिस्मबर को अपना 94वां जन्मदिन घर पर मनाएंगे.

अपने जमाने में फिल्मी पर्दे पर राज करने वाले दिलीप कुमार ने 1950 और 1960 के दशक में 'आन', 'दाग', 'देवदास', 'मधुमति', 'पैगाम', 'मुगल-ए-आजम', 'राम और श्याम' जैसी कई सुपरहिट फिल्में कर चुके हैं. दिलीप ने लगभग छह दशकों तक काम करने के बाद 1998 में सिनेमा को अलविदा कह दिया था, उनकी आखिरी फिल्म 'किला' थी.

दिलीप कुमार का असली नाम मोहम्मद यूसूफ खान है. वह आखिरी बार पर्दे पर साल 1998 में आई फिल्म ‘किला’ में दिखे थे. उनको वर्ष 1994 में दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड और वर्ष 2015 में पद्म विभूषण सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है.

दिलीप कुमार और सायरा बानो का प्यार सबके लिए एक मिसाल है. आज भी उनके प्यार में कोई कमी नहीं आई है. उनके प्यार को देखकर लगता है कि आज भी शादी, रिश्ते और प्यार का महत्व बाकी है. 11 अक्टूबर 1966 में शादी के बंधन में बंधे इस जोड़ी ने इस साल शादी की 50वीं सालगिरह मनाई. 

यह हमदर्दी कोरी धार्मिक है

तिहरे तलाक के मसले पर तो प्रधानमंत्री से ले कर भगवा दुपट्टा ओढ़े सड़कछाप मजदूर तक बड़े जोरशोर से बोल रहे हैं कि यह मुसलिम महिलाओं के साथ अन्याय है और इस कानून को तुरंत कर्बला में दफना दिया जाना चाहिए. पर हिंदू धर्म के तलाक कानून पर कुछ नहीं कहा जा रहा. जरूरत यह है कि औरतों को तलाक की सुविधा वैसी ही मिले जैसी शादी करने की मिलती है. फेरे लिए, कबूल है बोला, आई डू कहा और शादी हो गई पर यदि शादी तोड़नी हो तो औरतों को आज भी अपनी जिंदगी झोंकनी पड़ती है. फिर चाहे गलती उन की हो या न हो.

एक औरत को यह पैदाइशी हक मिलना चाहिए कि अगर वह किसी पुरुष के साथ बंध कर नहीं रहना चाहती है तो जब चाहे अपने बच्चों व सामान के साथ जहां मरजी चली जाए. हर औरत ऐसा नहीं करेगी यह पक्का है पर उस से धर्म या कानून उस का हक छीनता है और यह हक सिर्फ अदालतों को या सिर्फ पतियों को देता है तो गलत है. अगर भगवाई समाज को मुसलिम औरतों से प्यार अनायास उमड़ा है, तो उन्हें हिंदू पतियों के जुल्म सहती करोड़ों औरतों को भी हक दिलाना चाहिए कि वे ‘तलाक देती हूं, तलाक देती हूं, तलाक देती हूं’ कह कर एक अनचाहे से छुटकारा पा सकें और अपने पैरों पर खड़ी हो कर अपनी जिंदगी अकेले या अपने मनचाहे के साथ गुजार सकें.

सरकार की मुसलिम औरतों के प्रति यह हमदर्दी कोरी धार्मिक है. हर हिंदू को यह पाठ पढ़ा दिया जाता है कि मुसलिम पति मजे में रहते हैं. वे 4-4 शादियां कर सकते हैं और जब चाहें तलाक दे सकते हैं. यह उन का कानून अवश्य है, यह गलत भी है, पर इस का इस्तेमाल व्यापक हो रहा होता, तो मुसलिम मर्दों के पास 4 तो क्या 1 भी औरत नहीं होती और सारी मुसलिम औरतें तलाकशुदा होतीं. किस घर में कभी न कभी बरतन इतने जोर से नहीं खड़कते कि पति बोल दे कि वह तलाक देना चाहता है? पर कुछ देर बाद होश आ जाता है कि पत्नी एक नायाब तोहफा है, जो अपना तनमनधन एक पराए को सौंप कर उस के सुखदुख में शामिल हो कर एक घरौंदा बनाती है, एक सुरक्षा देती है, वक्त पड़ने पर दोस्त बनती है, सलाह देती है, सुरक्षा देती है, सुकून देती है. उसे 3 बार तलाक कह कर नहीं छोड़ा जा सकता.

तलाक का कानून बराबरी का और सभी समाजों के लिए हो, यह जरूरी है. यह आसान भी हो. औरतें वर्षों अदालतों के गलियारों में सैंडल खड़खड़ाती न रहें. जब मन में पंगा तो 2 बालटी पानी में गंगा. मुक्ति का रास्ता घाट पर ही न हो, यह औरतों की मुट्ठी में भी हो.

अब ओला कैब से निकालें कैश

नोट बैन के बाद नकदी की समस्या से निजात दिलाने के लिए ऐप आधारित टैक्सी सेवा देने वाली कंपनी ओला कैब्स ने निजी क्षेत्र के यस बैंक के साथ साझेदारी की है. ओला की कैब में बैंक की ओर से माइक्रो एटीएम की सुविधा प्रदान की जाएगी जो लोगों के घर के नजदीक नकदी सुविधा प्रदान करेगी.

यस बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘यह ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों तक अपनी पहुंच बनाने की हमारी प्रतिबद्धता का हिस्सा है. हम ओला के साथ चलते-फिरते समाधान पर काम कर रहे हैं, इसका मतलब नकदी की आपूर्ति के लिए कैब आपके पास आएगी. हम इस सुविधा को शुरू करने के अंतिम चरण में हैं और हमें उम्मीद है कि इस सेवा की शुरुआत हम हफ्ते भर या ज्यादा से ज्यादा 10 दिन में कर लेंगे.’

गाड़ी की पिछली सीट, न बाबा न

चर्चित फिल्म ‘पीके’ का वह सीन आप को याद होगा, जिस में गाड़ी हिलते हुए दिखाई गई थी, जिस का सिंबोलिक मतलब है कि गाड़ी की पिछली सीट सैक्स के लिए इस्तेमाल की जा रही है, ऐसे में पीके जैसा दूसरे ग्रह से आया एलियन उन के कपड़े तक उठा कर चला जाता है, लेकिन गाड़ी में वह सब अनवरत चलता रहता है. गाड़ी हिलती है यानी सैक्स होने का आभास देती है.

आज यह स्थिति आम है. अधिकतर जोड़े सैक्स के लिए गाड़ी की पिछली सीट का इस्तेमाल करते हैं और उन्हें यह आभास भी नहीं होता कि किसी की निगाह उन पर पड़ चुकी है. भले ही वह उन का कलीग हो, दोस्त हो, रिश्तेदार हो या फिर अन्य कोई, लेकिन इस का खमियाजा उन्हें तब भुगतना पड़ता है जब समाज में उन्हें हिकारत भरी नजरों से देखा जाता है. ऐसा ही कुछ रोहित और प्रिया के साथ भी हुआ, जिस में उन की प्यार में पिछली सीट पर लांघी गई सीमाएं ही उन्हें ले डूबीं. दरअसल, रोहित कई दिन से प्रिया को नोटिस कर रहा था, क्योंकि दोनों एक ही औफिस में जौब करते थे और प्रिया उसे बहुत स्वीट लगती थी. इस बात से प्रिया अनजान थी क्योंकि वह अपनी दुनिया में खोई रहती थी.

एक दिन रोहित ने हिम्मत जुटा कर प्रिया को रोक कर उसे प्रपोज कर दिया. रोहित के इस प्रस्ताव को सुन प्रिया डर गई, क्योंकि वह इन लफड़ों में नहीं पड़ना चाहती थी. इसलिए प्रिया उस दिन तो बिना कुछ कहे वहां से चली गई, लेकिन उस दिन के बाद अब अकसर रोहित उसे मिल जाया करता था. प्रिया उसे इग्नोर करती पर वह उस के पीछे लगा रहता. कई बार मिलने से प्रिया के दिल में रोहित के लिए प्यार उमड़ पड़ा और एक दिन जब रोहित मैट्रो स्टेशन पर मिला तो प्रिया ने अपना कंट्रोल खो दिया और भीड़ की परवा किए बिना रोहित को गले लगा लिया.

अब तो दोनों दुनिया की परवा किए बिना रोज साथ आतेजाते, घूमतेफिरते. एक दिन रोहित के फ्रैंड दीपक को जब इस बात का पता चला कि प्रिया ने जिसे वह काफी चाहता था, लेकिन वह उसे भाव नहीं देती थी, उसे इग्नोर कर रोहित से फ्रैंडशिप कर ली है, तो उस का गुस्सा सातवें आसमान पर जा पहुंचा और उस ने उस से बदला लेने की ठान ली. उस ने एक प्लान बनाया, जिस से रोहित अनजान था. उस ने रोहित से आउटिंग पर अपनीअपनी गर्लफ्रैंड को ले कर चलने को कहा. यह सुन रोहित खुशी के मारे पागल हो गया और उस ने प्रिया को भी इस के लिए राजी कर लिया. अगले दिन वे दोनों तय समय पर दीपक की बताई जगह पर पहुंच गए. लेकिन वहां प्रिया को छोड़ कर किसी की भी गर्लफ्रैंड नहीं आई थी. यह देख प्रिया डर गई, लेकिन रोहित पर विश्वास कर वह गाड़ी की पिछली सीट पर बैठने के लिए तैयार हो गई.

कहते हैं इंसान अकसर जोश में होश खो देता है. यही रोहित और प्रिया के साथ भी हुआ. दोनों रोमांटिक गानों की धुन में ऐसे खो गए कि गाड़ी की पिछली सीट पर उन्होंने सारी सीमाएं यह सोच कर पार कर दीं कि आगे वाली सीट पर बैठे फ्रैंड्स उन की हिफाजत कर रहे हैं, लेकिन उन्हें क्या पता था कि वे इसी मौके की तलाश में थे. उन्होंने उन्हें नशीली कोल्डड्रिंक पिला दी थी, जिस से दोनों खुद को संभाल नहीं पाए. उन्होंने इस सैक्सी मूवमैंट का वीडियो बना कर फेसबुक पर वायरल कर दिया. जैसे ही इस का पता रोहित और प्रिया को लगा तो उन के होश उड़ गए, क्योंकि इस के बाद वे दोनों कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं रहे थे. यहां तक कि दोनों अपने पेरैंट्स की नजरों में भी गिर गए थे. अब उन के पास सिवा पछतावे के कुछ नहीं था. ऐसा सिर्फ रोहित और प्रिया के साथ ही नहीं बल्कि अधिकांश युवकयुवतियों के साथ होता है, क्योंकि युवाओं के लिए गाड़ी की पिछली सीट महत्त्वपूर्ण होने के साथसाथ काफी रोमांटिक भी होती है, तभी तो वे इस पर प्रेमलीलाओं को अंजाम देने की कोशिश करते हैं.

जब भी कोई इस तरह की सैक्सी वारदात होती है या आपसी रजामंदी से ऐसे रिलेशन बनते हैं तो कार की पिछली सीट का ही इस्तेमाल होता है, क्योंकि मौजमस्ती करना पिछली सीट पर जितना सहज और मुमकिन है उतना ड्राइव करते वक्त नहीं. बलात्कार की ज्यादातर घटनाओं को भी पिछली सीट पर ही अंजाम दिया जाता है. यही नहीं युवकयुवती भी मौजमस्ती के लिए पिछली सीट का ही इस्तेमाल करते हैं. अमूमन ग्रुप में जाते समय भी यह तय कर लिया जाता है कि पहले एक जोड़ा ड्राइव करेगा और दूसरा पिछली सीट पर बैठेगा, लेकिन यह पिछली सीट का सैक्सी लुत्फ भी युवतियों पर ही भारी पड़ता है इसलिए कोशिश करें पिछली सीट को न कहने की.

और भी कई खतरे हैं सैक्सी वीडियो से ब्लेकमैल

एक बार यदि आप का सैक्सी वीडियो किसी के हाथ लग गया तो फिर आप की जिंदगी का रिमोट हमेशा के लिए उस के हाथों में आ जाएगा और आप उस के हाथों की कठपुतली बन कर रह जाएंगी. फिर चाहे वह आप के सामने पैसों की डिमांड करे या फिर ग्रुप सैक्स की फरमाइश, आप को न चाहते हुए भी इस के लिए राजी होना पड़ेगा इसलिए सावधान हो जाएं.

कौस्ट फ्री, बट टैंशन हजार

भले ही आप ने यह सोच कर कि इस में कोई खर्च नहीं आएगा और मजा भी पूरापूरा मिलेगा, पिछली सीट के लिए हामी भरी हो परंतु आप की यह सोच बिलकुल गलत है, क्योंकि गाड़ी में आप को ऐसा करते आसपास के लोग देख रहे हैं यदि किसी ने आप को सबक सिखाने के लिए भीड़ इकट्ठा कर ली तो आप की ठुकाई भी पक्की है. इसलिए कौस्ट फ्री के चक्कर में मुसीबत मोल न लें.

आप की तो लग जाएगी वाट

भले ही आप ने अपनी गाड़ी यह सोच कर बहुत दूर खड़ी की है कि कोई देख न ले, लेकिन इस के बावजूद यदि किसी फैमिली मैंबर या पड़ोसी ने आप को देख लिया तो आप की तो बदनामी हो जाएगी. इस के बाद आप लाख सफाई दें, लोगों का मुंह बंद नहीं कर पाएंगी. सो बी केयरफुल.

ब्लैक शीशे के बावजूद खतरा

भले ही आप के पार्टनर की गाड़ी में ब्लैक शीशे हों और आप यह सोच कर निश्चिंत हों कि किसी को कुछ नहीं दिखेगा, पार्टनर के साथ सैक्स ऐंजौय करने लग जाएं, तो ऐसे में आप समाज की नजरों के साथसाथ पुलिस के हत्थे चढ़ सकती हैं.

खुद की इज्जत पर भी बट्टा

जिस पार्टनर पर आप आंखें मूंद कर  अपना सबकुछ खुलेआम उसे सौंप रही हैं, क्या पता वही आप को धोखा दे जाए. ऐसे में आप खुद अपनी नजरों से गिर जाएंगी. इस से आप की पर्सनैलिटी, आप का कैरियर भी चौपट हो सकता है.

पिछले दिनों राजधानी दिल्ली में कार की पिछली सीट पर सैक्स करने के कई मामले सामने आए. ज्यादातर में युवतियों के साथ सैक्स किया गया और उन्हें गाड़ी से धक्का दे कर सड़क पर फेंक दिया गया. आप भी कहीं ऐसे किसी हादसे का शिकार न हो जाएं इसलिए सोचसमझ कर ही बौयफ्रैंड की कार में बैठें.

बाग बगीचों में सैक्स, खतरा ही खतरा

दृश्य 1 : दिल्ली के दिल कनाट प्लेस स्थित सैंट्रल पार्क में एक पेड़ के नीचे गर्लफ्रैंडबौयफ्रैंड एकदूसरे की बांहों में समाए हुए हैं. बौयफ्रैंड कभी गर्लफ्रैंड को किस कर रहा है तो कभी उस की टीशर्ट में अपना हाथ डाल रहा है.

दृश्य 2 : साउथ दिल्ली का गार्डन औफ फाइव सैंसेस, झाडि़यों के अंदर, पहाड़ों के पीछे, पेड़ के नीचे, प्रेमी जोड़े एकदूसरे के साथ फुल ऐंजौय करते हुए. कहीं बौयफ्रैंड अपनी गर्लफ्रैंड की उत्तेजना को शांत कर रहा है तो कहीं गर्लफ्रैंड शर्म के मारे बौयफ्रैंड को खुश नहीं कर पा रही है.

दिल्ली के इन पार्कों की तरह हर शहर में कोई न कोई पार्क ऐसा जरूर होता है जहां हमेशा प्रेमी युगलों का जमघट लगा रहता है, क्योंकि वहां न तो कोई उन्हें डिस्टर्ब करने वाला होता है और न ही उन्हें एकदूसरे के साथ समय बिताने के लिए पैसे खर्च करने पड़ते हैं. घंटों फ्री में एकदूसरे के साथ मस्ती कर सकते हैं. वे घूमतेफिरते हुए एक सुरक्षित स्थान खोजते हैं. बस फिर क्या, न अगल, देखते हैं न बगल, बस, शुरू हो जाते हैं. इन पार्कों में एकदूसरे की बांहों में समाना, किस करना तो आम बात है, वे झाडि़यों की आड़ में सैक्स करने से भी नहीं कतराते. वे यह भी नहीं सोचते कि उन की ये सैक्सी हरकतें उन्हें मुसीबत में भी डाल सकती हैं. वे तो बस, जवानी के नशे में मदहोश रहते हैं.

दरअसल, युवा सोचते हैं कि गर्लफ्रैंड के साथ सैक्स करने का यह अच्छा स्थान है. यहां न तो पेरैंट्स आएंगे और न वे पकड़े जाएंगे, क्योंकि आसपास सारे कपल्स भी उन्हीं की तरह हैं. इस तरह बागबगीचों में खुलेआम सैक्स करना आप के और आप की पार्टनर के लिए महंगा पड़ सकता है, आप केवल प्रौब्लम्स में ही नहीं फंसते बल्कि आप का कैरियर भी खराब हो सकता है.

खर्च कम, मुसीबतें ज्यादा

अधिकांश युवा सोचते हैं कि कौन करे पैसे खर्च जब फ्री में काम हो रहा है और इसी वजह से वे बागबगीचों में जाना पसंद करते हैं. वहां उन्हें खर्च भी नहीं करना पड़ता और झाडि़यों के पीछे या पेड़ के सहारे फुल ऐंजौय कर सकते हैं.

क्या आप जानते हैं कि इस ऐंजौयमैंट के बदले आप को कई तरह की मुसीबतों का भी सामना करना पड़ सकता है, जैसे कोई चुपके से आप का वीडियो बना कर फेसबुक और व्हाट्सऐप पर शेयर कर सकता है. एक बार आप का वीडियो शेयर हो जाने के बाद वह चारों तरफ वायरल हो जाएगा. फिर आप के कंट्रोल में कुछ भी नहीं रहेगा. इन जगहों पर एकदूसरे के साथ मस्ती करने के दौरान अकसर आप सेफ्टी बरतना भी भूल जाते हैं, गलती से आप की जींस का बटन टूट सकता है, कपड़े फट सकते हैं, आप दोनों को वहां आप का कोई फ्रैंड पहचान सकता है, भले ही वह भी वहां वही करने आया हो, जो आप करने गए हैं. लेकिन आप दोनों के अलावा अगर किसी तीसरे को इस बारे में पता चल जाए तो मन में हमेशा के लिए डर बना रहता है.

ऐक्स का मिलना मतलब काम तमाम

ऐसा भी हो सकता है कि आप जिस पार्क में गई हैं वहां आप का ऐक्स बौयफ्रैंड मिल जाए और जब वह किसी दूसरे के साथ आप को देखे तो उस का गुस्सा बाहर आ जाए और वह आप के पार्टनर से झूठ बोलने लगे कि आप ने उस के साथ भी ऐसा ही किया था और जब मन भर गया तो आप को छोड़ दिया. भाई, मैं तो इसलिए बता रहा हूं ताकि तुम संभल जाओ. ऐक्स के बोलने के बाद फिर क्या आप का बौयफ्रैंड आप से झगड़ने लगेगा, आप पर शक करने लगेगा.

लूटपाट का खतरा

आप सोचते हैं पार्क में जाएंगे वहां घूमेंगेफिरेंगे और एक सुरक्षित स्थान खोज कर सैक्स का मजा लेंगे. फिर वापस घर आ जाएंगे और किसी को कुछ पता भी नहीं चलेगा. लेकिन जब आप एकदूसरे में व्यस्त होते हैं तब साइड से कोई आप का फोन चोरी कर सकता है. अगर आप की गर्लफ्रैंड ने गोल्ड पहन रखा है तो कोई चाकू या रिवाल्वर दिखा कर उसे लूट सकता है. सुनसान जगहों पर लूटपाट की घटनाएं आम हैं. इसलिए जब भी एकांत स्थान पर जाएं तो गोल्ड या महंगी चीजें साथ न ले जाएं.

बीमारियों का डर

यहां सैक्स करना आप के लिए इसलिए भी खतरनाक हो सकता है, क्योंकि पता चले आप एकदूसरे में समाने के लिए झाडि़यों के पास गए और वहां आप को किसी कीड़े ने काट लिया तो लेने के देने पड़ सकते हैं. आप ऐंजौय तो जरूर कर लेंगे, लेकिन इस के बाद बीमार पड़ जाएंगे उस का क्या. आजकल तो वैसे भी डेंगू, चिकनगुनिया तेजी से फैला हुआ है, अकसर जल्दबाजी में गर्लफ्रैंड व बौयफै्रंड सेफ्टी मेजर्स साथ नहीं रखते. बस, सैक्स करने में जुट जाते हैं. अगर गर्लफ्रैंड को कोई बीमारी है तो बौयफ्रैंड को हो सकती है इसी तरह बौयफ्रैंड किसी गंदी बीमारी से ग्रस्त है तो वह गर्लफ्रैंड को भी हो सकती है.

पुलिस की रेड

सोचिए, आप पार्क में गर्लफ्रैंड की बांहों में हैं और वहां पुलिस की रेड पड़ जाए, उस समय आप मुसीबत में तो फंस ही जाएंगे और यह बात जब आप के घर वालों को पता चलेगी तो आप उन से नजरें भी नहीं मिला पाएंगे.

अपमान होने का डर

कभी ऐसा भी हो सकता है कि आप अपनी गर्लफ्रैंड के साथ घूम रहे हों और गर्लफ्रैंड की खूबसूरती देख कर आप अपना कंट्रोल खोने लगें और बातोंबातों में उसे पास के ही पार्क में ले कर चले जाएं, जहां आप पहले कभी नहीं गए हों और वहां के बारे में आप को कोई आइडिया भी न हो, लेकिन फिर भी आप एक कोना ढूंढ़ कर ऐंजौय करने लगें. ऐसा हो सकता है कि उस पार्क में बड़ेबुजुर्ग घूमने आते हों. वे आप दोनों को इस तरह से देख कर आपत्ति जताएं या आप की गतिविधियों के बारे में गार्ड को खबर कर दें और गार्ड सब के सामने आप दोनों को बाहर निकाल दे.

अंधेरे में सैक्स करना पड़ेगा महंगा

प्रेमी जोडे़ बागबगीचों में अंधेरा होने का बेसब्री से इंतजार करते हैं, जल्दी से अंधेरा हो ताकि उजाले में जो मजा नहीं मिल पाया, वे उसे अंधेरे में ले सकें. दिन में गर्लफ्रैंड सैक्स में थोड़ी हिचकिचाहट दिखाती है, लेकिन अंधेरा होते ही वह भी ऐंजौयमैंट में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती. लेकिन अंधेरे में सैक्स करना खतरनाक ही नहीं बल्कि खुद को प्रौब्लम में डालने के बराबर है इसलिए अगर आप सोचते हैं कि अंधेरे में सैक्स कर के भरपूर मजा ले पाएंगे और किसी को पता भी नहीं चलेगा, तो जरा संभल जाएं. वैसे तो यह उम्र ही ऐसी है जिस में खुद पर कंट्रोल रखना मुश्किल होता है, हम फिसलते चले जाते हैं. अगर ऐसा है तो आप वैसी जगहों का चयन करें जो हर तरीके से सुरक्षित हों, जहां न तो पकड़े जाने का खतरा हो और न ही ब्लैकमेलिंग का डर. युवकयुवतियों के बीच सैक्स होना लाजिमी है, क्योंकि यह उम्र ही ऐसी होती है जब अपनी सैक्स भावनाओं पर अंकुश रख पाना मुश्किल होता है. पर सैक्स के लिए ऐसे स्थान का चयन करें जहां किसी भी प्रकार का खतरा न हो. हां, प्रीकौशंस का भी ध्यान रखें वरना आप मुसीबत में पड़ सकते हैं.

जियोफाई अब सभी स्मार्टफोन पर करेगा काम

रिलायंस जियो अपने लॉन्चिंग के समय से ही कभी अच्छी तो कभी बुरी बातों को ले कर खबरों में बना हुआ है. लेकिन इस बार यह अपने डिवाइस को ले चर्चा में है. रिलायंस जियो का कहना है कि उसका 4 जी डिवाइस अब बाजार में उपलब्ध है जिसके जरिए कोई भी 2जी व 3जी स्मार्टफोन धारक उसकी सभी सेवाओं का इस्तेमाल कर सकता है. कंपनी के यहां जारी बयान के अनुसार जियोफाई 4जी पोर्टेबल वायस व डेटा डिवाइस है जो कि हॉटस्पॉट के रूप में काम करता है और इसके जरिए फोन कॉल करने के साथ साथ वीडियो कॉल व जियो के सभी ऐप का इस्तेमाल किया जा सकता है. यानी अगर ग्राहक का फोन 4जी नहीं है तो भी वह रिलायंस जियो की सभी सेवाओं का इस्तेमाल कर सकेगा.

बयान के अनुसार इसके लिए जियोफाई में सिम लगाकार उसे एक्टिवेट करना होता है. इसके बाद 2जी या 3जी स्मार्टफोन पर जियो4जीवायस एप्लीकेशन डाउनलोड कर उसे जियो नेटवर्क से कनेक्ट करना होता है. कंपनी का कहना है कि इस डिवाइस के जरिए जियो के ग्राहक इंटरनेट, वायसकाल, वीडियोकाल व एसएमएस सहित कंपनी की विभिन्न सेवाओं का इस्तेमाल कर सकता है भले ही उसका फोन 4जी वोल्टी नहीं हो.

उल्लेखनीय है कि मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस जियो के पास देश भर में 4जी दूरसंचार सेवा उपलब्ध कराने का लाइसेंस है. कंपनी ने पांच सितंबर को अपनी सेवाओं की औपचारिक शुरुआत की थी और हाल ही में घोषणा की कि उसके ग्राहकों की संख्या पांच करोड़ से अधिक हो गई है.

कंपनी फिलहाल 31 मार्च 2017 तक अपनी सभी सेवाएं मुफ्त दे रही है.

20, 50 के बाद अब 100 रुपए के नए नोट

20 और 50 रुपए के नए नोट के बाद आरबीआई अब 100 रुपए के नए नोट जारी करेगा. पर 100 रुपए के पुराने नोट बंद नहीं होंगे. आरबीआई द्वारा जारी किए गए बयान में कहा गयाहै, ‘आरबीआई महात्मा गांधी-2005 सीरीज के तहत जल्द ही 100 रुपये के नए नोट जारी करेगी. इसमें वर्तमान गर्वनर उर्जित आर. पटेल के हस्ताक्षर होंगे और इस पर मुद्रण का साल 2016 दर्ज होगा.’

नोटबंदी के बाद छोटे नोटों की कमी को देखते हुए शीर्ष बैंक ने यह कदम उठाया है. 100 रुपए का ये नोट 2005 की महात्मा गांधी सीरीज में ही छापे जाएंगे. इन पर मौजूदा गवर्नर उर्जित पटेल के हस्ताक्षर होंगे. इन नए नोटों के बाकी डिजाइन और सिक्यॉरिटी फीचर्स 100 के नोट की तरह ही होंगे. इसके अलावा इन नोटों में बढ़ते क्रम में अंक दर्ज होंगे.

इससे पहले 50 और 20 रुपये के नए नोट जारी करने की भी घोषणा की जा चुकी है. 50 रुपये के नोट 2005 की महात्मा गांधी सीरीज में छापे जाएंगे. 50 रुपये के इस नए नोट के दोनों नंबर पैनल में कोई इनसेट लेटर नहीं होगा. आरबीआई के मुताबिक 20 और 50 रुपये के नए नोटों को जारी किए जाने के बावजूद पुराने नोट पहले की तरह ही मान्य रहेंगे.

पॉन्टिंग और मैथ्यू को पीछे छोड़ वॉर्नर ने रचा इतिहास

न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे वनडे मैच में शतक लगाने वाले ऑस्ट्रेलियाई सलामी बल्लेबाज डेविड वॉर्नर ने 119 रन की पारी खेलकर एक रिकॉर्ड बना दिया. इसी के साथ उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पॉन्टिंग और पूर्व सलामी बल्लेबाज मैथ्यू हेडन के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है.

डेविड वार्नर ने एकदिवसीय क्रिकेट में एक साल में आस्ट्रेलिया की तरफ से सबसे ज्यादा शतक लगाने का रिकार्ड अपने नाम कर लिया है. वार्नर ने न्यूजीलैंड के खिलाफ खेले गए मुकाबले में 115 गेंदों में 14 चौके और एक छक्के की मदद से 119 रनों की शतकीय पारी खेली. यह वार्नर का इस साल में खेले गए 22 मैचों में छठा शतक था. वह इसके साथ ही एक साल में एकदिवसीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले बल्लेबाजों की सूची में तीसरे स्थान पर आ गए हैं.

एक साल में एकदिवसीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा शतक लगाने का रिकार्ड सर्वकालिक महान बल्लेबाजों में शुमार भारत के सचिन तेंदुलकर के नाम हैं. सचिने ने 1998 में 34 मैच खेले थे और नौ शतक लगाए थे.

उनके बाद भारत के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली का नंबर आता है. गांगुली ने 2000 में 32 मैचों में सात शतक लगाए थे. वार्नर के अलावा एक साल में छह शतक लगाने वाले बल्लेबाजों में दक्षिण अफ्रीका के गैरी कर्स्टन और सचिन (1996) तथा भारत के ही राहुल द्रविड़ (1999) के नाम शामिल हैं.

पोंटिंग और हेडन ने एक साल में पांच शतक लगाए थे. पोंटिंग ने अपने करियर में दो बार 2003 और 2007 में यह कारनामा किया था. वहीं हेडन ने 2007 में एक साल में पांच शतक लगाए थे. वार्नर के इसी शतक की बदौलत आस्ट्रेलिया ने किवी टीम के खिलाफ निर्धारित 50 ओवरों में पांच विकेट के नुकसान पर 378 रन बनाए जोकि उसका एकदिवसीय में तीसरा सर्वोच्च स्कोर है.

मनहूस कौन विधानसभा या….

5 दिसम्बर को जब मध्यप्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू हुआ, तब सदन में आ रहे कई विधायकों के चेहरे पर दहशत थी, मानो मौत उनका पीछा कर रही हो. माहौल वाकई किसी डरावनी फिल्म या जासूसी उपन्यास के सस्पेंस सरीखा था, जिसमें एक के बाद एक मौतें हो रही हों और इनकी वजह किसी को समझ नहीं आ रही हो.

दरअसल में राज्य के अधिकांश विधायकों के मन में दोबारा से यह डर बैठ गया है कि हो न हो विधानसभा भवन मनहूस है या इसमें कोई वास्तुदोष है जिसके चलते एक के बाद एक विधायकों की मौतें हो रही हैं.

बीती 25 अक्टूबर को कांग्रेसी विधायक सत्यदेव कटारे की मौत के बाद यह डर और गहरा गया था, जो विधानसभा सत्र शुरु होते ही भवन के गलियारों में दिखा. कुछ प्रेस फोटोग्राफर्स यह चर्चा करते देखे भी गए कि जाने कब फिर से पूजा, पाठ, यज्ञ, हवन और वास्तुदोष निवारण का फरमान आ जाए.

13 साल, 29 मौतें

साल 1998 में अरेरा हिल्स स्थित नए विधानसभा भवन में जब कामकाज शुरू हुआ था, तब सभी ने नई ईमारत की भव्यता की खूब तारीफ की थी, पर 2003 आते आते यानि 5 साल में 10 विधायकों की मौतें हुईं, तो इस नए भवन पर मनहूसियत का ठप्पा लग गया जो अब तक बरकरार है.

2003 से लेकर 2008 तक 12वीं विधानसभा के दौरान भी 8 विधायकों की मौतें हुईं, तो विधानसभा भवन के मनहूस होने का शक यकीन में बदल गया. 13वीं विधानसभा 2013 तक चली और इस दौरान 6 विधायक काल के गाल में समा गए. फिर 2013 के बाद से लेकर अब तक फिर 6 विधायकों की मौतें हुईं, तो एक बार फिर यह चर्चा शुरू हो गई है कि विधानसभा भवन का ‘ट्रीटमेंट’ होना चाहिए. इलाज होना चाहिए यानि फिर से पूजा पाठ या दूसरे टोटके कर कोई ऊपरी बाधा या हवा जो भी हो उसे दूर करने जतन किए जाना चाहिए.

खूब हुए ड्रामे

कांग्रेसी शासनकाल में विधानसभा अध्यक्ष पंडित श्रीनिवास तिवारी ने विधायकों की मौतों का शुरू हुआ सिलसिला रोकने एक खास किस्म की पूजा कराई थी. तब विंध्य इलाके के पांच नामी पंडितों ने भोपाल आकर सदन के दरवाजे पर खुलेआम पूजा पाठ कर सरकार को भरोसा दिलाया था कि इससे बला टल गई.

लेकिन विधायकों की मौतें होती रहीं, तो अंधविश्वास भाजपा सरकार के राज में भी खूब फला फूला. विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी ने भी इस कथित मनहूसियत को टालने उपाय किए थे, जिनके तहत मुख्य दरवाजे के टाइल्स बदले गए थे ओर सदन के अंदर की सीटों का रंग बदला गया था. अलावा इसके विधानसभा अध्यक्ष के चेम्बर के नीचे एक पंडित के मशवरे पर मैदान बनाकर यहां बना नर्मदा कुण्ड बंद कराया गया था. इतने पर भी बात नहीं बनी तो विधानसभा अध्यक्ष और प्रमुख सचिव के चेम्बर्स के सामने के बैठने के इंतजाम भी बदल दिए गए थे.

इसके बाद एक बेतुका काम यह किया गया था कि विधानसभा स्टाफ केम्पस में बने दुर्गा मंदिर में बिना पर्वत वाले हनुमान की स्थापना की गई थी. इस बारे में किसी पंडित ने मशवरा यह दिया था कि पर्वत वाला हनुमान सिर्फ राम की हिफाजत करता है, जबकि बिना पर्वत वाला हनुमान आम लोगों की हिफाजत करता है.

अंधविश्वास या वहम के इलाज का यह टोटका भी बेकार साबित हुआ, तो सुंदरकांड के पाठ विधानसभा भवन में होने लगे. एक वक्त में तो यहां का माहौल देख लगता था कि यह विधानसभा नहीं, बल्कि कोई नामी मंदिर है. विधायकों की मौतें होती रहीं, खासतौर से हादसों में कुछ युवा विधायक मरे तो फिर से मांग उठने लगी कि कुछ किया जाए. मौजूदा विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा इस मसले पर हाल फिलहाल खामोश हैं.

नहीं सुधरेंगे

मध्यप्रदेश की राजनीति में धर्म कर्म बेहद आम बात है, तमाम नेता कुछ और करें ना करें पर पूजा पाठ यज्ञ हवन और दूसरे धार्मिक जलसों में जरूर शिरकत करते हैं. इसके बाद भी भगवान जाने क्यों विधायकों से खफा हैं, जो बजाय जिंदगी बचाने के जिंदगियां छीन रहा है. इस सवाल का जवाब हालांकि धर्म ग्रंथों में है कि मौत तो शाश्वत है और कब किसकी कैसे कहां आ जाए यह किसी को नहीं मालूम.

और ‘जिन्हें’ मालूम रहता है वे पूजा पाठ, यज्ञ, हवन और वास्तु दोष दूर करने के नाम पर हर बार तगड़ी दक्षिणा खीसे में डालकर चलते बनते हैं. अब फिर कुछ कहने की मांग उठ रही है तो विधायकों की मानसिकता पर तरस ही खाया जा सकता है, जो डरे हुए हैं क्योंकि अंधविश्वास के शिकार हैं.

यह मानने समझने कोई तैयार नहीं कि अधिकांश विधायकों की मौतों चाहे वे हार्ट अटैक से हुई हों या हादसों की जिम्मेदार खुद उनकी लापरवाही रही है. अगर विधानसभा भवन मनहूस होता, तो उसकी गाज यहां काम कर रहे मुलाजिमों पर गिरनी चाहिए थी, क्योंकि वे विधायकों से कहीं ज्यादा वक्त यहां बिताते हैं. पाखंडी माहौल सुधरेगा ऐसा लग नहीं रहा, क्योंकि कई विधायकों ने अपने लेवल पर धार्मिक और तांत्रिक उपाय शुरु कर दिए हैं.

पांच रुपए में बिकेगी मामा थाली

अपने मुख्यमंत्रित्व काल के 11 साल पूरा होने पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल के जम्बूरी मैदान से ताबड़तोड़ घोषणाएं, कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा कर डालीं, इनमें से अधिकांश गरीबों के लिए हैं. इन घोषणाओं पर यकीन करें तो सूबे में अब कोई बेघर और बेजमीन नहीं होगा, गरीबों को मुफ्त इलाज मिलेगा और सरकारी योजना के तहत शादी करने वालों को तोहफे में स्मार्ट फोन दिया जाएगा.

घोषणावीर होते जा रहे शिवराज सिंह चौहान ने एक घोषणा यह भी कि जल्द ही सरकार गरीबों को पांच रुपये थाली के हिसाब से भरपेट खाना मुहैया कराएगी. इस योजना का नाम दीनदयाल रसोई रखा गया है, जिसकी शुरुआत भोपाल से होगी. चूंकि शिवराज सिंह चौहान को प्रदेश में मामा कहा जाता है, इसलिए आम लोगों ने ही इसे मामा थाली खाना नाम दे दिया है.

गरीबों को मुफ्त या सस्ता खाना खिलाने से पुण्य के साथ साथ शोहरत भी मिलती है, इसलिए शिवराज सिंह चौहान पुण्य कमाने का यह मौका भी नहीं छोडऩा चाह रहे. मुफ्त के भाव के खाने की शुरुआत तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता ने की थी, जिनके नाम पर अम्मा थाली 15 रुपये में तमिलनाडु में मिलती है, जयललिता जिन वजहों के चलते याद की जाएंगी, अम्मा थाली उनमें से एक है.

शिवराज सिंह चौहान के भाषण को समझें तो उनका इशारा बेहद साफ है कि अब भाजपा बजाए धर्म और राम के समाजवाद की राजनीति करेगी और गरीबों को अमीर और अमीरों को गरीब बनाने की कोशिश जारी रखेगी. 11 साल में हुआ इतना है कि भाजपा का कांग्रेसीकरण हो गया है, जिस तरह दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री रहते सोनिया जी सोनिया जी करते रहते थे, उसी तरह शिवराज सिंह अपने भाषणों में मोदी मोदी भजते रहते हैं. दिग्विजय दलितों के भले के लिए दलित एजेंडा लाए थे, तो शिवराज सिंह ने तो दलितों को कुम्भ में नहलाकर उन्हें हिन्दू मान लिया.

मुद्दे की बात उनके भाषण में कहीं नहीं थी कि सूबे की बिगड़ती कानून व्यवस्था पर लगाम कसी जाएगी, औरतों पर बढ़ रहे अत्याचार रोके जाएंगे और गांव के स्कूलों में शिक्षक मुहैया कराए जाएंगे. साफ दिख रहा है कि असल समस्याओं से मुंह चुरा रहे शिवराज सिंह चौहान अब ऐसी बातें और नारे लगा रहे हैं, जिन्हें पूरा किया गया तो सूबा गले तक कर्ज में डूबकर कंगाल हो जाएगा, पर राजनीति आखिरकार राजनीति है, इसमें सब जायज होता है. एक बार कुर्सी का चस्का लग जाए, तो नेता उससे चिपके रहने के लिए कुछ भी कर सकते हैं, फिर शिवराज सिंह चौहान ने तो गरीबों के भले के लिए कुछ एलान ही किए हैं.

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