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‘आप’ का दलित एजेंडा

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनजर दलितों को दाना डालना शुरू कर दिया है. उन्होंने एक भारीभरकम दलित मैनिफैस्टो जारी किया है जिस में दलितों की बदहाली दूर करने के तमाम टोटके हैं. पंजाब में 32 फीसदी वोट दलितों के हैं जो जाहिर है अगर आदमी पार्टी को मिल जाएं तो उस की बल्लेबल्ले हो जाएगी.

पंजाब के दलितों और शेष देश के दलितों की सामाजिक हैसियत में काफी फर्क है. सिख गुरुओं का प्रभाव पंजाब के जनमानस पर साफसाफ दिखता है जो हमेशा बराबरी की बात करते थे. पंजाब में भेदभाव, प्रताड़ना और छुआछूत जैसी बीमारियां इतने पैर नहीं पसार पाईं कि दलितों को उन के दलितपने का एहसास करा कर वोट झटके जा सकें. बसपा यहां हाजिरी दर्ज कराती रही है जिस से अरविंद केजरीवाल उत्साहित हैं. लेकिन यह समझ पाना मुश्किल है कि पंजाब में अरविंद केजरीवाल दलितसवर्ण खाई पाटेंगे या और खोदेंगे.

पेटीएम करें, पर जरा ध्यान से

नोटबंदी के बाद से देश कैशलेस इकॉनमी की तरफ कदम बढ़ा रहा है. जेब में पैसे न होने से कई लोगों ने इस बीच पेटीएम या फ्रीचार्ज जैसी ऑनलाइन ट्रांजैक्शन करने वाली साइट्स का सहारा लेना शुरू कर दिया है. अगर आप भी ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के लिए पेटीएम या फ्रीचार्ज जैसे ऐप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं तो हैं तो कुछ सावधानियां बरतना जरूरी है.

पैसे के लेन-देन में आसानी और सुविधा डिजिटल ट्रांजैक्शन करने का सबसे बड़ा फायदा है. यह आपको कैश या प्लास्टिक कार्ड्स को रखने और एटीएम में कतार में खड़े होने की दिक्कतों से बचा सकता है. इसके अलावा ट्रैवलिंग के दौरान यह एक सुरक्षित और सुविधाजनक विकल्प है.

2000 रुपए से ऊपर के कार्ड ट्रांजैक्शन्स पर सर्विस टैक्स पर छूट के सरकार के कदम से डिजिटल ट्रांजैक्शन को प्रोत्साहन मिल रहा है. इसके बाद भी कई और तरह की छूट और कटौती की घोषणाएं की गई हैं. यह सही समय है कि आप इसका फायदा उठाकर सेविंग्स करें. उदाहरण के तौर पर, पेट्रोल की डिजिटल खरीद पर 0.75% की छूट का मतलब होगा कि दिल्ली में 63.47 प्रति लीटर की कीमत के पेट्रोल को आप 62.99 प्रति लीटर में खरीद सकते हैं.

इसी तरह रेल टिकट, हाइवे टोल और इंश्योरेंस की खरीददारी पर भी आप बचत कर सकते हैं. मोबाइल वॉलेट पेटीएम या अन्य पर चल रही कैशबैक ऑफर्स और डिस्काउंट्स का लाभ उठा सकते हैं. क्रेडिट कार्ड्स और स्टोर कार्ड्स पर रिवार्ड पॉइंट्स और लॉयलिटी का भी लाभ उठाएं. इससे थोड़ी बहुत मात्रा में आपका कैश फ्लो बना रहेगा.

अगर हर ट्रांजैक्शन का रेकॉर्ड आपके पास मौजूद रहेगा तो आपको अपने खर्च पर नजर रखना बहुत आसान हो जाएगा. इनकम टैक्स रिटर्न भरने और सुरक्षा की दृष्टि से भी ये रास्ते फायदेमंद हैं. अपना बजट बेहतर ढंग से बना पाएंगे. आप इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय अपने खर्च का ब्यौरा सही तरीके से और आसानी से दे पाएंगे.

डिजिटल पेमेंट की आदत डालने से आप अपना बजट बेहतर ढंग से बना पाएंगे. अगर आप संयमित होकर खर्च करेंगे तो इससे आपकी निवेश क्षमता भी बढ़ेगी. अगर आप कैंडी और चिप्स पर 10 रुपए खर्च करते हैं या फिर ऑफिस में रोजाना एक कप कॉफी पीते हैं, छुट्टे की कमी की वजह से आप उसमें कटौती करना शुरू कर देंगे. इस तरह आप इधर-उधर खर्च करने की अपनी आदत छोड़ देंगे और बजट के बाहर पार नहीं होंगे.

आपको भले ही यह बहुत बड़ा फायदा नजर न आए पर इस तरह से आप उधार मांगने वालों से भी बच सकेंगे. इसके अलावा आपने जितनी कीमत की खरीददारी की है उतनी ही कीमत अदा करनी होगी, आपको दुकानदार से कुछ रुपए वापस मांगने में आने वाली हिचकिचाहट महसूस नहीं होगी.

डिजिटल ट्रांजैक्शन के फायदे हैं तो कई खतरे भी हैं. सबसे बड़ा डर आइडेंटिटी चोरी हो जाने का है. चूंकि हम डिजिटल ट्रांजैक्शन के आदी नहीं हैं, यहां तक कि पढ़े-लिखे लोग भी हैकर्स के जाल में फंसने से डरते हैं.

ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के नुकसान भी हैं

ऑनलाइन फ्रॉड में तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है. जैसे-जैसे डिजिटल प्लैटफॉर्म लोगों के बीच लोकप्रिय होता जाएगा वैसे-वैसे ऑनलाइन फ्रॉड की घटनाएं और बढ़ेंगीं. सरकार ने 2000 रुपए से ऊपर के ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के लिए टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन को हटा दिया है. ट्रांजैक्शन की किसी सीमा को नजरअंदाज करके आइडेंटिटी चोरी होने का खतरा कई गुना बढ़ गया है.

अगर ऑनलाइन ट्रांजैक्शन में किसी को कोई शिकायत होती है तो उसकी सुनवाई का कोई निश्चित प्लैटफॉर्म नहीं है. अगर कोई ऑनलाइन अपना पैसा खो देता है तो उसके पास कोई आसान विकल्प नहीं होगा. ऑनलाइन धोखेबाजी को लेकर कोई कड़ा कानून भी नहीं है. अगर किसी बैंक या कंपनी के डेटाबेस को हैक करके सामूहिक तौर पर आइडेंटिटी की चोरी कर ली जाएं तो बहुत बड़े वित्तीय संकट का समाना करना पड़ सकता है.

आप अपने ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के लिए आप अपने मोबाइल पर निर्भर होंगे और अगर आपका फोन खो गया तो आप दोहरी मुश्किल में फंस जाएंगे. फोन खोने से न केवल आपकी आइडेंटिटी चोरी होने का खतरा रहेगा बल्कि अगर आप पूरी तरह से कैशलेस हैं तो आप किसी तरह का पेमेंट करने में असहाय महसूस करेंगे. कहीं आप अगर विदेश में यात्रा कर रहे हैं या फिर किसी छोटे गांव या कस्बे में जहां बैकिंग व्यवस्था लचर हैं तो आपकी मुश्किल बढ़ जाएगी.

एक नुकसान यह भी है कि आपको अपना फोन हमेशा चार्ज रखना होगा. अगर आपके फोन की बैटरी गई तो आप भी कोई काम नहीं कर पाएंगे. कहीं आप किसी खरीददारी के बीच में होंगे या बाजार में कुछ खरीदने का मन कर गया तब आपको मन मसोस कर रह जाना पड़ेगा.

डिजिटल रास्ते को अपनाने में व्यावहारिक अड़चनों के अलावा कई तरह की अड़चनें भी हैं. सबसे बड़ी दिक्कत हमारी मानसिकता को बदलने की है. यह अचानक से तीन जेनरेशन आगे बढ़ने जैसा है. डिजिटल माध्यम टेक अनफ्रेंडली लोगों के लिए सिरदर्द साबित होगा. उन्हें इस तकनीक को सीखने में अभी काफी समय लगेगा.

इसमें कोई शक नहीं है कि मोबाइल वॉलेट ट्रांजैक्शन्स ज्यादा सुविधाजनक है लेकिन इससे कुछ लोगों में ज्यादा खर्च करने की प्रवृत्ति बढ़ जाएगी. कैश से खरीददारी करना कार्ड या मोबाइल वॉलेट की तुलना में लोगों को ज्यादा खलता है.

अगर जितनी मात्रा में नोट वापस लिए गए हैं उतनी मात्रा में नए नोट नहीं आते हैं तो लोग डिजिटल ट्रांजैक्शन का रुख अपनाएं रहेंगे लेकिन अगर ऐसा हो जाता है तो लोग फिर से कैश इस्तेमाल करने की अपनी पुरानी आदत का रुख कर सकते हैं.

अब सोशल मीडिया से भी करें मनी ट्रांसफर

फेसबुक, ट्विटर और वॉट्सऐप सिर्फ बातें करने के लिए ही नहीं बल्कि मनी ट्रांसफर के काम भी आ सकते हैं. कई बैंक अपने ऐप के जरिए इन सोशल साइट्स से जुड़ कर मनी ट्रांसफर के ऑप्शन दे रहे हैं.

फेसबुक पर कोटक महिंद्रा के KayPay (फेसबुक, ईमेल) और ऐक्सिस बैंक का PingPay, आईसीआईसीआईसीआई के Pockets (फेसबुक, ट्विटर, वॉट्सऐप, ईमेल) ऐप के जरिए मनी ट्रांसफर किया जा सकता है.

क्या है जरूरी

7 डिजिट की मोबाइल मनी आइडेंटिफायर (MMID) जरूरी है. बैंक कस्टमर इस नंबर के जरिए ही तत्काल पेमेंट सर्विस या IMPS से जुड़े रहते हैं. हर बैंक का अलग-अलग एमएमआईडी होती है, जो किसी एक मोबाइल नंबर से अटैच हो सकती है. किसी भी ट्रांजैक्शन के लिए रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ही अलर्ट आएगा.

कैसे करें पेमेंट

सबसे पहले ऐप डाउनलोड करें. उसके बाद जरूरी जानकारी देकर रजिस्ट्रेशन करें. जिस मोबाइल नंबर से एमएमआईडी कनेक्ट है वही नंबर जानकारी मे दें. इसके बाद ऐप फेसबुक, ट्विटर या वॉट्सऐप के कॉन्टैक्ट्स सिंक करने की परमिशन मांगेगा.

इसे देते ही आप सोशल मीडिया के कॉन्टैक्ट्स को मनी ट्रांसफर करने के लिए तैयार हो जाएंगे. जिसको मनी ट्रांसफर कर रहे हैं, उसे ऐप पर अपने बैंक अकाउंट को रजिस्टर करना होगा. जब मनी ट्रांसफर करेंगे तो हर बार एक पासवर्ड जेनरेट होगा, जिसे भरने पर ही ट्रांजैक्शन मुमकिन हो सकेगा.

50 हजार तक भेज सकते हैं

ये ऐप्स सिर्फ भेजने वाले के पास होना चाहिए. पैसा पाने वाला किसी भी ऐप का इस्तेमाल कर सकता है. बस उसे सोशल मीडिया पर होना चाहिए. ये ऐप्स ऐंड्रॉयड पर पूरी तरह से मुफ्त हैं. इनके जरिए कम से कम 10 रुपये और ज्यादा-से-ज्यादा 50 हजार रुपये तक भेजे जा सकते हैं.

2017 में हो सकती है नौकरी की कमी

वैश्विक स्तर पर दिक्कतों तथा घरेलू मोर्चे पर नकदी की कमी की वजह से कर्मचारियों या नौकरी की तलाश कर रहे लोगों के लिए नया साल चुनौतीपूर्ण रहेगा. नियोक्ता पहले से ही 'वेट एंड वॉच' की नीति अपना रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि वेतनवृद्धि में भी कमजोर रुख दिख रहा है. कई महिनों के विश्लेषण से पता चलता है कि इस साल नियुक्तियों में वृद्धि का रुख 2015 की तुलना में कमजोर रहा है.

विशेषज्ञों के अनुसार वेतनवृद्धि अनुमानित 20 प्रतिशत के आंकडे़ से कम रही. हालांकि यह 10 प्रतिशत की औसत वृद्धि के अनुमान से अधिक रही. माना जा रहा है कि सरकार का नोटबंदी का फैसला तथा अमेरिका में डॉनल्ड ट्रंप का राष्ट्रपति चुना जाना, दो ऐसे कारक हैं जिनका नए साल में कुछ निश्चित सेक्टरों पर असर पड़ सकता है.

ग्लोबल एग्जिक्युटिव रिक्रूटमेंट फर्म 'एंटल इंटरनेशनल इंडिया' के प्रबंध निदेशक जोसफ देवासिया ने कहा, 'उपभोक्ता आधारित क्षेत्रों मसलन एफएमसीजी तथा खुदरा क्षेत्र ने शुरुआत में अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन हालिया नोटबंदी के कदम के बाद बिक्री में भारी गिरावट आई है. फिलहाल इन क्षेत्रों में नौकरियांकम हुई हैं और अगले दो साल तक ऐसी स्थिति रहने का अनुमान है.'

उन्होंने हालांकि कहा कि नोटबंदी से अभी नकारात्मक असर पड़ा है लेकिन बाद में इससे देश को लाभ होगा और युवाओं को औपचारिक क्षेत्र में अधिक रोजगार उपलब्ध होगा. 'माई हायरिंग क्लब डॉट कॉम' के सीईओ राजेश कुमार ने कहा, 'मौजूदा अप्रेजल सीजन में सैलरी और बोनस केवल एक अंक में ही बढ़ेगा. इन्क्रिमेंट में औसतन 9 फीसदी और बोनस 10 फीसदी की बढ़ोतरी होगी.'

विजेंदर ने चेका को किया चित

भारत के स्टार मुक्केबाज विजेंदर सिंह ने अपनी ख्याति के अनुरूप प्रदर्शन करते हुए तंजानिया के फ्रांसिस चेका को दस मिनट के अंदर ही नॉकआउट करके पेशेवर मुक्केबाज के रूप में अपना अजेय अभियान जारी रखा. इसके साथ ही उन्होंले डब्ल्यूबीओ एशिया पैसेफिक का अपना खिताब बरकरार रखा. विजेंदर ने त्यागराज स्टेडियम में पूर्व विश्व चैंपियन चेका के खिलाफ दस राउंड के मुकाबले के तीसरे राउंड में ही जीत दर्ज की.

उन्होंने बाद में कहा, 'मैंने इस मुकाबले के लिए मैनचेस्टर में दो महीने तक कड़ा अभ्‍यास किया था. मैं अपने सभी कोचों का आभार व्यक्त करता हूं. चेका ने बहुत बातें की थी, लेकिन मैं अपने मुक्कों की ताकत में विश्वास रखता हूं और मैंने वही किया'.

मैच के दौरान रिंग के इर्द-गिर्द कई हस्तियां मौजूद थीं. पांच बार की विश्व चैंपियन एमसी मेरीकोम से लेकर गृह राज्यमंत्री किरेन रिजिजू तथा पहलवान सुशील कुमार और योगेश्वर दत्त भी विजेंदर का हौसला बढ़ा रहे थे.

'सिंह इज किंग' की आवाजों के बीच विजेंदर के आने से पहले ही दर्शक उत्साहित दिखे. जब मुकाबला शुरू हुआ तो चेका ने थोड़ी तेजी दिखाई, लेकिन भारतीय मुक्‍केबाज ने जल्द ही लय हासिल कर ली और चेका को करारे अपरकट से हिलाकर रख दिया.

चेका दूसरे राउंड में बैकफुट पर पहुंच गए, क्योंकि विजेंदर के करारे मुक्कों का उनके पास कोई जवाब नहीं दिख रहा था. विजेंदर ने अपनी पहुंच का भी फायदा उठाया. अपनी छोटी पहुंच के कारण जहां चेका को संतुलन बनाने में दिक्कत हो रही थी, वहीं विजेंदर ने अपने हाथों की लंबाई का अच्‍छा उपयोग किया.

बीएसएनएल का नए साल का तोहफा

भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) अपने मोबाइल ग्राहकों के लिए अगले माह से 149 रुपये या इससे कम पैसे प्रतिमाह 'टैरिफ प्लान' पर किसी भी नेटवर्क में 'फ्री वॉइस कॉल' एवं कुछ डाटा देने की योजना बना रही है.

सूत्रों ने बताया कि सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल का यह नया मंथली 'टैरिफ प्लान' एक जनवरी से पेश किए जाने की उम्मीद है. इससे बीएसएनएल को रिलायंस इंडस्ट्रीज की टेलीकॉम इकाई रिलायंस जियो इंफोकॉम से मुकाबला करने में मदद मिलेगी, जिसकी एंट्री से देश की टेलीकॉम कंपनियों के लिए चुनौती बढ़ गई है.

बीएसएनएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अनुपम श्रीवास्तव ने बताया, ‘हमने बीएसएनएल के मोबाइल फोन ग्राहकों को अगले महीने से 149 रुपये  या इससे कम पैसे प्रति माह टैरिफ प्लान पर किसी भी नेटवर्क में फ्री अनलिमिटेड लोकल और एसटीडी वॉइस कॉल एवं कुछ डाटा देने की शुरआत करने की योजना बनाई है.’

उन्होंने कहा, ‘बीएसएनल का रिवाइवल होना शुरू हो गया है. इसकी वित्तीय स्थिति में जबरदस्त सुधार हुआ है. अब हम 'ऑपरेशनल प्रॉफिट' में हैं."  श्रीवास्तव ने बताया, "हमें उम्मीद है कि वर्ष 2018-19 तक बीएसएनएल शुद्ध लाभ कमाने वाली कंपनी हो जाएगी और उसके बाद हम देश के तीन शीर्ष ऑपरेटरों में शामिल हो जाएंगे.’

श्रीवास्तव ने कहा कि बीएसएनएल द्वारा जो फ्री रोमिंग सुविधा दी गई है, उसके अच्छे परिणाम निकले. इससे मोबाइल ग्राहकों में इजाफा हुआ है. उन्होंने कहा कि बीएसएनएल टेलीकॉम क्षेत्र में पहले नंबर एक पर था. फिर छह पर आ गया और अब हम चौथे पायदान पर पहुंच गए हैं. श्रीवास्तव ने कहा कि देश के मोबाइल सेक्टर में बीएसएनएल का 10 प्रतिशत शेयर है, जिसको बढ़ाकर 15 प्रतिशत की कार्ययोजना पर कार्य किया जा रहा है.

उन्होंने बताया कि हम वॉइस मोबाइल सेवा में पिछड़े हैं, लेकिन हम डाटा सेवा उपलब्ध कराने में आगे रहेंगे. उन्होंने कहा कि लैंडलाइन फोन सेक्टर में भी हम फोकस कर रहे हैं, जिसका दूरी दुनिया में आज पुनरत्थान हो रहा है.

 

रेलवे को दें आइडिया और पायें इनाम

भारतीय रेलवे ने यात्री क्षमता बढ़ाने, स्टेशनों पर नई डिजिटल क्षमता के विकास तथा कम ऊचाई वाले प्लेटफार्म से ट्रेनों में आसानी से चढ़ने-उतरने को लेकर रेलवे के कोच के संबंध में सुझाव मांगे हैं. इसके लिए विभाग ने प्रभावी तरीके से माल लादने और माल की ढुलाई के लिए रेलवे कोच (वैगनों) की नई डिजाइन समेत विभिन्न पहलुओं पर बेहतरीन विचार के लिए नकद इनाम की भी घोषणा की है.

रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस बारे में रेलवे ने एक अभियान शुरु किया है जिसमें देश के सभी नागरिकों और तबकों से सुझाव मांगे गए हैं. देश के लगभग सभी नागरिकों के रेलवे के बारे में अपने व्यक्तिगत अनुभव हैं. इसीलिए उम्मीद है कि वे पूरे उत्साह के साथ इस अभियान में हिस्सा लेंगे.

रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस संदर्भ में रेलवे ने एक अभियान शुरू किया है, जिसमें देश के सभी नागरिकों और तबकों से सुझाव मांगे गए हैं.

देश के लगभग सभी नागरिकों के रेलवे के बारे में अपने व्यक्तिगत अनुभव हैं, इसीलिए उम्मीद है कि वे पूरे उत्साह के साथ इस अभियान में हिस्सा लेंगे. इस अभियान में लोगों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए रेलवे ने 12 लाख रुपये के छह पुरस्कारों की पेशकश की है. रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने बजट में घोषणा की थी कि इस संदर्भ में अभियान शुरू किया जाएगा.

रेलवे के अनुसार इसमें भाग लेने की प्रक्रिया, नियम एवं शर्तों, योग्यता, दिशानिर्देश के बारे में वेबसाइट 'इनोवेट डॉट माईगॉव डॉट इन पर उपलब्ध है. ऑनलाइन आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 20 दिसंबर है.

आईएसएलः कोलकाता बना चैंपियन

एटलेटिको डि कोलकाता ने केरला ब्लास्टर्स को पेनल्टी शूटआउट में 4-3 से शिकस्त देकर तीन साल में दूसरी बार इंडियन सुपर लीग खिताब अपने नाम किया.

दोनों टीमें निर्धारित समय तक 1-1 से बराबरी पर थी. अतिरिक्त समय के बाद भी दोनों टीमों में से कोई गोल नहीं कर सकी. इससे 120 मिनट के बाद यह मुकाबला शूटआउट में चला गया. केरला के लिए निर्धारित समय में मोहम्मद रफीक ने, जबकि कोलकाता के लिए हेनरिक सरनो ने गोल किया था.

एटीके के सह-मालिक सौरव गांगुली, संजीव गोयनका के साथ काफी खुश थे, जिनकी फ्रेंचाइजी ने साथी खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर की टीम को शिकस्त दी. भारतीय अंतरराष्ट्रीय टीम के खिलाड़ी जेवेल राजा ने जब पांचवीं पेनल्टी पर गोल किया तो 55,000 दर्शकों की क्षमता वाले नेहरू स्टेडियम में चुप्पी छा गई. 2014 के फाइनल में भी एटलेटिको डि कोलकाता ने केरला ब्लास्टर्स को मुंबई में 1-0 से शिकस्त दी थी. यह इंडियन सुपर लीग के तीन चरणों में पहला पेनल्टी शूटआउट था.

जेवेल राजा के अलावा शूटआउट में समीघ दौते, बाजरे फर्नांडिज और जेवियर लारा ने गोल किए, जबकि इयेन हुमे का शॉट केरला के गोलकीपर ग्राहम स्टैक ने रोक दिया.

केरला की टीम ने इस मैच से पहले लगातार छह जीत दर्ज की थी. उसके लिए अंटोनियो जर्मन, केरवेंस बेलफोर्ट और मोहम्मद रफीक ने गोल किए, जबकि इल्हादजी एनडोए और सेड्रिक हेंगबार्ट लक्ष्य से चूक गए. एटलेटिको डि कोलकाता के टूर्नामेंट के दूसरे सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ी हुमे मैच के ज्यादातर हिस्से में शांत ही दिखे, क्योंकि केरला के डिफेंडरों ने उन्हें कोई मौका नहीं लेने दिया.

मेहमान टीम के मार्की खिलाड़ी हेल्डर पोस्टिगा फार्म में नहीं लग रहे थे, 68वें मिनट में उनकी जगह दूसरे खिलाड़ी को लाया गया. केरला के फारवर्ड सीके विनीत और डकेन्स नाजोन भी प्रभावित नहीं कर सके, जबकि वे फाइनल से घरेलू स्थल पर पहले शीर्ष फार्म में थे जहां घरेलू दर्शक उन्हें चीयर करने आते थे.

भारत ने जीता जूनियर हॉकी विश्व कप का खिताब

भारतीय हॉकी टीम ने 15 साल बाद फिर जूनियर हॉकी वर्ल्ड कप के खिताब पर कब्जा जमा लिया है.  लखनऊ के मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने बेल्जियम को 2-1 से शिकस्त देकर खिताब पर कब्जा किया. दोनों ही टीमों के बीच जबरदस्त मुकाबला देखने को मिला. लेकिन आखिरी में बाजी भारतीय टीम ने जीता.

यह दूसरा मौका है जब भारतीय जूनियर हॉकी टीम वर्ल्ड चैंपियन बनी है. इससे पहले 2001 में ऑस्ट्रेलिया के होबर्ट में भारतीय टीम ने अर्जेंटीना को 6-1 से हराकर एकमात्र जूनियर विश्व कप जीता था.

भारत ने जीता जूनियर हॉकी वर्ल्ड कप

फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने शुरुआत से ही जोरदार हमले किए और दो पेनल्टी कॉर्नर भी मिले. लेकिन इसका फायदा भारतीय टीम नहीं उठा सकी. बावजूद इसके भारत की तरफ से बेल्जियम पर जोरदार हमले जारी रहे. भारत की तरफ से पहला गोल गुरजंट सिंह ने किया. गुरजंट का इस टूर्नामेंट में दूसरा गोल था.

सेमीफाइनल मुकाबले में भी उन्होंने ऑस्‍ट्रेलिया के खिलाफ गोल किया था. भारत की तरफ से दूसरा गोल सिमरनजीत सिंह की स्टिक से निकला. पहले हाफ में 22 मिनट के खेल के बाद भारत 2-0 आगे रहा. बेल्जियम ने आखिरी मिनट में पेनल्टी कॉर्नर से गोल किया. इस शानदार जीत के बाद भारतीय टीम को बधाईयां मिल रही हैं

दूसरे हाफ में भी भारतीय टीम ने आक्रमक हॉकी खेली

दूसरे हाफ में भी भारतीय टीम ने जोरदार हमले किए और बेल्जियम की एक न चलने दी. भारत को दो पेनल्टी कॉर्नर मिले लेकिन में भी गोल नहीं किया. भारत 2-0 से आगे रहा. बेल्जियम ने वापसी की पूरी कोशिश की लेकिन दूसरे हाफ में भारतीय डिफेंस ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है और खिताब पर कब्जा जमा लिया. तीसरे स्थान के लिए खेले गए मैच में जर्मनी ने ऑस्ट्रेलिया को 3-0 से हराया.

भारत ने दूसरी वर्ल्ड कप जीता

साल 2001 में भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया में अर्जेंटीना को 6-1 से हारकर खिताब पर कब्जा जमाया था. भारत तीसरी बार जूनियर विश्व कप के फाइनल में पहुंचा था. वहीं 1997 में इंग्लैंड में हुए टूर्नामेंट के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को हराया था.

भारत 11 साल पहले रोटरडम में कांस्य पदक के मुकाबले में स्पेन से पेनल्टी शूटआउट में हार गया था और उस समय भी टीम के कोच हरेंद्र सिंह ही थे. इस जीत ने भारतीय हॉकी में नई जान फूंकी है.

राजनैतिक दल भी दें हिसाब

राजनैतिक दलों सहित सभी संवैधानिक इकाइयों द्वारा नकद लेन-देन की सीमा 10000 से अधिक न हो, 10000 से अधिक मूल्य के वाहन, आभूषण एवं अचल सम्पत्ति की नकद खरीद व बिक्री प्रतिबंधित हो और राजनैतिक दलों, सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों, कार्पोरेट घरानों आदि को अनिवार्य रूप से सूचना के अधिकार के दायरे में लाया जाय इन मांगों को लेकर अब जनता मुखर हो रही है. वह सरकार पर दबाव डाल रही है.

देश से वास्तविक रूप से भ्रष्टाचार के सफाए के लिए कुछ प्रभावी कदम उठाने जाने की आवश्यकता पर बल देते हुए आज काशी हिन्दू विश्वविद्यालय मुख्य द्वार से सूचना का अधिकार अभियान उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में एक हस्ताक्षर अभियान प्रारंभ किया गया. इस अवसर पर अभियान का उद्देश्य बताते हुए वक्ताओं ने कहा कि आये दिन नई नोटों का जखीरा अवैध तरीके से मिलने से स्पष्ट है कि 1000 और 500 की नोट बदलने और तमाम अन्य बंदिशें लगाये जाने मात्र से भ्रष्टाचार का पूर्णरुपेण खात्मा होना संभव नही है.

8 नवंबर से लागू नोटबंदी के कदम के बाद से आज तक अधिसंख्य सामान्य जनता रोजमर्रा की जरूरतों के लिए तमाम तरीके की परेशानियां झेल रही हैं और उन्हें अपनी मेहनत से जमा किये हुए पैसों की निकासी के लिए सारे दिन बैंको की कतार में लगे रहना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ गोलमाल करने वाले अपना काला धन येन केन प्रकारेण सफेद बना लेने में काफी हद तक सफल हैं. पेट्रोल पंपों, सरकारी देयों के भुगतान काउन्टर और बैंको से कमीशन पर बड़ी नोट बदलने की खुले आम चर्चा सामने आयी है.

वक्ताओं ने कहा कि वास्तविकता यह है कि नकदी से अधिक अवैध धन सम्पत्ति के रूप में अर्जित किया गया है, उस पर अंकुश लगाये बिना विमुद्रीकरण से कोई सार्थक परिणाम नही निकल पायेगा. राजनैतिक दलों सहित आयकर में छूट पाने वाली विभिन्न संवैधानिक इकाइयों द्वारा नकद लेन-देन पर कोई प्रतिबन्ध नही है, अतः उनके द्वारा चतुराई से काले धन की हेरा फेरी की जाती है और उनकी कोई जवाबदेही नही है.

हस्ताक्षर अभियान के माध्यम से सरकार से मांग की जा रही है कि सभी राजनैतिक दलों, सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों, कार्पोरेट घरानों आदि को अनिवार्य रूप से सूचना के अधिकार के दायरे में लाया जाय क्योंकि उन्हें आयकर की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत कर से छूट प्रदान होती है साथ ही अन्य सरकारी सुविधाएं भी मिलती है, अतः जनता के समक्ष उनकी पारदर्शिता और जवाबदेही तय होनी चाहिए. ऐसी सभी सस्थाओं द्वारा नकद आय और व्यय की अधिकतम सीमा रूपये 10000 निर्धारित की जानी चाहिए जिससे दान देने वालों और लाभ लेने वालों पर निगरानी हो सके.

सम्पत्ति के रूप में काला धन जमा करने की  प्रवृत्ति पर प्रभावी नियंत्रण के लिए रूपये 10000 से अधिक मूल्य के किसी भी प्रकार के वाहन, आभूषण एवं भूमि-भवन आदि अचल सम्पत्ति के नकद क्रय विक्रय पर रोक लगाना चाहिए. हस्ताक्षर अभियान में प्रमुख रूप से प्रदीप सिंह, धनञ्जय त्रिपाठी, सूरज पाण्डेय, विनय सिंह, रवि शेखर, सुनील यादव, चिंतामणि सेठ, प्रेम सोनकर, अजय पटेल, दिवाकर सिंह, मनीष गुप्ता, डा. अनूप श्रमिक, विनोद, रोशन, दीपक सिंह , राकेश सरोज, सौरभ यादव, सुमन आदि शामिल रहे.            

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