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पढ़िए दंगल की पूरी कहानी

यूं तो फिल्म ‘दंगल’ की कहानी राष्ट्रीय स्तर के पहलवान महावीर सिंह फोगट और उनकी बेटियां गीता व बबीता की जिंदगी की कहानी से प्रेरित फिल्म है. मगर यह फिल्म राष्ट्रवाद और उस समाज की कथा बयां करती है, जहां एक औरत अपनी भूमिका की सार्थकता को सिद्ध करने के लिए संघर्ष कर रही है.

यह फिल्म उस सोच पर कुठाराघाट करती है, जो यह कहती है कि एक पिता के सपनों को सिर्फ उसका बेटा ही पूरा कर सकता है क्योंकि इस कहानी में अपने पिता का सपना बेटियां पूरा करती हैं. निर्माता और अभिनेता के तौर पर आमिर खान ने यह भी कहने का प्रयास किया है कि वह देशभक्त हैं.

कहानी शुरू होती है हरियाणा के एक गांव से जहां महावीर सिंह फोगट (आमिर खान) को राज्य स्तर तक कुश्ती लड़ चुका इंसान कुश्ती लड़ने की चुनौती दे देता है. तब महावीर उसे पटकनी देते हुए बताते हैं कि सिस्टम में खराबी नहीं है, वह तो राष्ट्रीय स्तर के कुश्तीबाज रहे हैं. इस घटना के बाद जब महावीर घर पहुंचते हैं, तो वहां पर उनका भतीजा पृष्ठभूमि में कहानी सुनाने लगता है.

महावीर की पत्नी गर्भवती है. महावीर को बेटे की चाह है. पर एक के बाद एक चार बेटियों को उनकी पत्नी जन्म देती है. एक दिन महावीर जब अपने ऑफिस से घर पहुंचते हैं तो पता चलता है कि कुछ लोग उनकी बेटियों की शिकायत लेकर पहुंचे हैं. जब आमिर अपनी बेटियों से पूछते हैं कि उन्होंने उस लड़के को कैसे पीटा तो वह लड़कियां अपने चचेरे भाई की पिटायी कर बताती हैं कि उन्होंने उस लड़के को किस तरह से पीटा था. उसके बाद महावीर अपनी दो बेटियों गीता व बबिता को रोज सुबह पांच बजे उठाकर कुश्ती लड़ने की ट्रेनिंग देना शुरू करते हैं. गांव के लोगों के विरोध की परवाह किए बगैर लड़कियों के बाल कटवा देते हैं.

अपनी बेटी गीता को दंगल लड़वाने के लिए रोहतक लेकर जाते हैं. जहां पहले तो दंगल कराने वाला मना कर देता है, जिससे महावीर की उससे लड़ाई होती है, पर बाद में गीता को दंगल लड़ने का मौका मिल जाता है. गीता कुश्ती हार जाती है, मगर उसने जिस बहादुरी से कुश्ती लड़ी, उसके चलते उसे पचास और हारने वाले को बीस रूपए मिलते हैं.

अब गीता व बबिता कुश्ती लड़ने के लिए जाने लगती है. महावीर उन्हें मिट्टी के गद्दे पर ट्रेनिंग देना शुरू करते हैं. दोनों प्रगति करती रहती हैं. एक दिन गीता राष्ट्रीय कुश्तीबाज बन जाती है. इसलिए अब गीता नए कोच से ट्रेनिंग लेने के लिए पटियाला पहुंचती है, जहां महावीर व कोच के बीच बहस होती है. महावीर का मानना है कि गीता भारत को गोल्ड मैडल लाकर दे सकती है. जबकि कोच का मानना है कि उसे सब कुछ नए सिरे से सीखना होगा. पर यहां गीता भटक जाती है. टीवी देखती रहती है. उधर महावीर गांव में बबिता को तैयार करना शुरू करते है. गीता की परफॉर्मेंस गड़बड़ हो जाती है. वह वापस गांव लौटती है. तो बबिता को दूसरी लड़कियों को कुश्ती के दांव सिखाते देख कहती है कि यह पुराने गुर हैं. तब महावीर उसे डांटते हैं. गीता तथा महावीर के बीच कुश्ती का मैच होता है. पर बढती उम्र के चलते महावीर, गीता से हार जाता है. घर में तनाव हो जाता है. गीता नाराज होकर वापस चली जाती है.

इधर बबिता भी राष्ट्रीय स्तर प पहुंचने के लिए प्रशिक्षण लेना शुरू करती है. एक दिन वह भी गीता के पास पहुंच जाती है. बबिता जहां आगे बढ़ रही है. वहीं गीता लगातार हार रही है. अंत में महावीर उसे कुछ दांव सिखाते हैं. अंततः 2012 के कॉमनवेल्थ गेम में गीता गोल्ड मेडल जीत जाती है. इस तरह महावीर अपनी बेटियों को अंतरराष्ट्रीय कुश्तीबाज बनाने में सफल होते हैं. राष्ट्र गीत व पिता पुत्री के मिलन के साथ फिल्म खत्म होती है.

एक बार फिर आमिर खान अपने अभिनय का लोहा मनवाने में कामयाब रहे हैं. वह युवा व अधेड़ उम्र में भी सटीक बैठे हैं. पिता की चिंता, सफलता, असफलता यह सभी भाव उनके चेहरे पर साफ झलकते हैं. बेटियों के किरदार में फातिमा सना शेख, सान्या मल्होत्रा, जायरा वसीम, सुहानी भटनागर ने भी बेहतरीन अभिनय किया है.

दंगल एक चुस्त दुरूस्त पटकथा व निर्देशन वाली फिल्म है. इंटरवल के बाद फिल्म की गति ज्यादा तेज गति से बढ़ने के साथ ही दर्शकों को भी बांधकर रखती हैं. अमिताभ भट्टाचार्य के गीत सटीक हैं. संगीत भी अच्छा है. संवाद अच्छे है. फिल्म में मनोरंजन के साथ संदेश भी है. काफी लंबे समय बाद एक बेहतरीन फिल्म दर्शकों को देखने को मिल रही है.

तो 1 अप्रैल से लागू नहीं होगी जीएसटी

केंद्र एवं राज्यों के बीच नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था जीएसटी में करदाताओं पर नियंत्रण का मुद्दा अभी सुलझ नहीं पाया है. हालांकि जीएसटी परिषद ने जीएसटी कानून को अमल में लाने वाले सहायक विधेयकों के अधिकतर उपबंधों को मंजूरी दे दी. इसको देखते हुए 1 अप्रैल से वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू करना एक तरह से असंभव सा दिख रहा है.

जीएसटी परिषद ने मुआवजा व्यवस्था में भी बदलाव किया जिसमें राज्यों को द्विमासिक आधार पर भुगतान की व्यवस्था होगी जबकि पहले तिमाही आधार पर भुगतान का फैसला किया गया था. दोहरे नियंत्रण तथा महत्वपूर्ण आईजीएसटी विधेयक के मुद्दे पर 3-4 जनवरी को होने वाली अगली बैठक में विचार किया जाएगा. ये मुद्दे पिछली तीन बैठकों से अटके हैं.

जेटली ने बैठक के बाद कहा, ‘अगर आप मुझसे पूछते हैं कि कौन सा महत्वपूर्ण मुद्दा बच गया है, तो वास्तव में मुख्य रूप से आईजीएसटी तथा दोहरे नियंत्रण का मुद्दा है. दूसरा मुद्दा इन विधेयकों की विधि मान्य भाषा है जिसे 3-4 जनवरी को होने वाली अगली बैठक में रखा जाएगा.’ उन्होंने यह भी कहा कि परिषद उसके बाद जीएसटी के तहत कर दर की हर श्रेणी में शामिल की जाने वाली वस्तुओं के मुद्दे को लेगी.

सूत्रों के अनुसार ‘मुआवजा कोष के स्रोत’ से जुड़े कानून के हिस्से को फिर से तैयार किया जा रहा है. इसमें मुआवजा राशि को उपकर या अन्य कर के जरिये जुटाये जाने पर चर्चा होगी और फिर जैसा भी जीएसटी परिषद निर्णय करेगी. वित्त मंत्री ने कहा कि अब तक जो भी फैसले किये गये हैं, वे सर्वसहमति के आधार पर किये गये हैं. कोई भी निर्णय ‘मतदान या दो तथा लो’ के आधार पर नहीं किये गये.

जीएसटी से जुड़े विधेयकों के पारित होने के बाद उद्योग को तीन महीने के समय की जरूरत के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘इस बारे में सभी चीजें पूरी होने के बाद फैसला किया जाएगा. मैं स्वयं को बांधने नहीं जा रहा हूं, हमारा प्रयास यथाशीघ्र रास्ता साफ करने को लेकर है. मुझे लगता है कि हम उपयुक्त रूप से आगे बढ़े हैं.’

अब चार क्वॉर्टर में खेले जाएंगे हॉकी के सभी मैच

इंटरनैशनल हॉकी फेडरेशन (FIH) के एग्जिक्युटिव बोर्ड ने होने वाले वर्ल्ड कप के लिए कुछ नए नियमों को मंजूरी दी है. नए नियमों के मुताबिक, वर्ल्ड कप समेत सभी लेवल पर हॉकी मैच चार क्वॉर्टर में खेले जाएंगे. हरेक क्वॉर्टर 15 मिनट का होगा. इसके अलावा वर्ल्ड कप 2018 में 16 टीमें खेलेंगी. हॉकी रेवोल्यूशन पार्ट-2 नाम से नवंबर में दुबई में हुई ऐग्जिक्युटिव बोर्ड की मीटिंग में ये फैसले लिए गए.

हॉकी इंडिया लीग से हुई शुरुआत

15 मिनट के एक क्वॉर्टर और कुल चार क्वॉर्टर में एक मैच को बांट कर खेलने की शुरुआत हॉकी इंडिया लीग (HIL) के पहले सीजन में हुई थी. बाद में इस फॉर्मेट का ट्रायल कुछेक टूर्नामेंट्स में भी हुआ. इसी फॉर्मेट के तहत इस साल रियो ओलंपिक के मैच भी खेले गए. अब इसे वर्ल्ड कप के साथ-साथ सभी मैचों के लिए मंजूरी मिलने से एचआइओल (HIL) के फॉर्मेट पर मुहर लग गई है. पहले 35-35 मिनट के दो हिस्सों में बांट कर गेम खेला जाता था. नया नियम 1 जनवरी 2017 से लागू होगा.

16 टीमें

वर्ल्ड कप में इससे पहले केवल एक मौके पर 16 टीमों ने शिरकत की थी. एफआइएच (FIH) ने अब अपनी एग्जिक्युटिव कमिटी की मीटिंग में लिए गए फैसलों को अमली जामा पहनाते हुए एक बार फिर से 2018 के वर्ल्ड कप में 16 (चार पूल में चार-चार) टीमों की अनिवार्यता का नियम फिर से लागू कर दिया है.

गेम को होगा फायदा

चार हिस्सों के फॉर्मेट को अपनाने से गेम के पेस, स्ट्रैटिजी, प्लेयर्स और ऑर्गनाइजर सबको फायादा होगा. पूर्व हॉकी प्लेयर जफर इकबाल के शब्दों में, 'हॉकी के चार हिस्सों वाले फॉर्मेट से गेम और रोचक बनेगा. प्लेयर्स को तरोताजा होने का वक्त मिलेगा. कोच को नई स्ट्रैटिजी पर अमल करने का मौका मिलेगा. गेम के हर क्वॉर्टर में आपको अलग पेस दिखेगा, लेकिन सबसे बड़ा फायदा हॉकी का होगा. क्वॉर्टर्स में मिलने वाले ब्रेक के दौरान एडवर्टाइजर्स खेल से जुड़ना चाहेंगे. इससे हॉकी में पैसे का रोना बहुत हद तक कम हो जाएगा.'

आसानी से बनवायें पासपोर्ट

सरकार नोटबंदी के जख्म के बाद, कई तरह के मरहम लेकर आ रही है. टैक्स में छूट के बाद अब पासपोर्ट बनवाने के नियमों में भी कुछ बदलाव किए गए हैं. अब पासपोर्ट  बनवाना बेहद आसान हो गया है. नए नियमों के मुताबिक अब जन्‍म तारीख लिखे आधार या ई-आधार को पासपोर्ट आवेदन के दौरान प्रूफ के रूप में स्‍वीकार किया जाएगा.

भारत में साधु और संन्यासी अब अपने पासपोर्ट में अपने जैविक मां-बाप की जगह आध्यात्मिक गुरुओं का नाम भी लिख सकते हैं. अब पासपोर्ट के लिए जन्मतिथि के प्रमाण के तौर पर बर्थ सर्टिफिकेट की अनिवार्यता को भी खत्म कर दी गई है.

विदेश मंत्रालय द्वारा यह नियम बनाया गया था कि 26 जनवरी 1989 के बाद जन्मे लोगों को बर्थ सर्टिफिकेट जमा करवाना जरूरी था, लेकिन अब इसकी जरूरत नहीं है.

स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट, ट्रांसफर सर्टिफिकेट या मैट्रिकुलेशन सर्टिफिकेट भी प्रमाण के तौर पर दिए जा सकते हैं. वहीं, पैन कार्ड, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, मतदाता पहचान पत्र, एलआईसी पॉलिसी की कॉपी भी डेट ऑफ बर्थ के प्रूफ के तौर पर जमा करवाई जा सकती है. पासपोर्ट आवेदकों के लिए न तो मैरिज सर्टिफिकेट और न ही एनेक्जर की जरूरत है. जिनका तलाक हो चुका है उन्हें स्पाउस का नाम भी नहीं लिखना होगा. डायवोर्स डिक्री की भी जरूरत नहीं है.

अनाथ बच्चों को बर्थ सर्टिफिकेट, मैट्रिक सर्टिफिकेट या कोर्ट के ऑर्डर की कॉपी की जरूरत नहीं है. केवल चाइल्ड केयर होम के लेटर पैड पर डेट ऑफ बर्थ लिखकर बतौर प्रूफ जमा कराया जा सकता है. साधु-सन्यासी पासपोर्ट आवेदन में माता-पिता की बजाय अपने धार्मिक गुरु का नाम दर्ज करा सकते हैं. पासपोर्ट जारी करवाने के लिए उन्हें वोटर कार्ड, पैन कार्ड, आधार कार्ड देना होगा, जिसमें उनके गुरु का नाम दर्ज होगा.

इसके साथ ही लिव इन रिश्ते या बगैर शादी के होने वाले बच्चों के लिए पासपोर्ट बनाने के नियम भी आसान कर दिये गये हैं. पासपोर्ट बनाने में जन्म प्रमाण पत्र को लेकर उठने वाली समस्याओं के मद्देनजर इससे संबंधी नियमों को काफी उदार बना दिया गया है.

पासपोर्ट आवेदन करने में अभी 15 खाने भरते हैं जिसे घटा कर 09 नौ कर दिया गया है. कई तरह की सूचनाओं को स्वघोषित कर दिया गया है. कई तरह के प्रपत्रों को जन्म दिन प्रमाणपत्र के तौर पर मान्यता मिली. आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, चुनाव पहचान पत्र, एलआइसी के बांड्स कोजन्म प्रमाण पत्र माना जाएगा.

विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह की ओर से घोषित इन नियमों में उन सरकारी नौकरशाहों के लिए भी प्रावधान किया गया है, जो अपने संबंधित मंत्रालयों-विभागों से नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट हासिल नहीं कर पा रहे हैं.

भारत ने जीता अंडर 19 एशिया कप का खिताब

अंडर 19 एशिया कप क्रिकेट टूर्नामेंट में भारत ने श्रीलंका पर शानदार जीत दर्ज की है. कप्तान अभिषेक शर्मा (4 विकेट) की शानदार गेंदबाजी की बदौलत भारत ने अंडर-19 एशिया कप के फाइनल में मेजबान श्रीलंका को 34 रनों से मात देते हुए खिताब पर कब्जा जमा लिया. आर प्रेमदासा स्टेडियम में खेले गए इस मैच में भारत ने श्रीलंका के सामने 274 रनों का लक्ष्य रखा था.

श्रीलंका की टीम लक्ष्य हासिल नहीं कर पाई और 48.4 ओवरों में 239 रनों पर ढेर हो गई. भारत ने लगातार तीसरी बार इस खिताब पर कब्जा जमाया है. इससे पहले 2012 और 2014 में भी भारतीय टीम ने यह टूर्नमेंट जीता था.

भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए हिमांशु राणा (71) और शुभम गिल (70) की बेहतरीन पारियों की मदद से निर्धारित 50 ओवरों में 8 विकेट के नुकसान पर 273 रन बनाए थे. इसके बाद कप्तान की अगुआई में भारतीय गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन कर जीत हासिल की. अभिषेक के अलावा राहुल चाहर ने 3 और यश ठाकुर ने एक विकेट लिया. अभिषेक को मैन ऑफ द मैच चुना गया और राणा को प्लेयर ऑफ द सीरीज का खिताब मिला.

लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंका को मनचाही शुरुआत नहीं मिली. ठाकुर ने विश्वा चतुरंगा (13) को 27 के कुल योग पर आउट कर भारत को पहली सफलता दिलाई. दूसरे छोर पर रेवेन केली (62) लगातार रन बना रहे थे. उन्हें हसिथा बोयागोदा (37) का साथ मिला और दोनों ने मिलकर टीम का स्कोर 105 पहुंचा दिया. दोनों ने दूसरे विकेट के लिए 78 रन की साझेदारी की. बोयागोदा को अभिषेक ने अपना पहला शिकार बनाया.

केली ने तीसरे विकेट के लिए कामिंडु मेंडिस के साथ मिलकर 53 रन जोड़ लिए थे, लेकिन अभिषेक ने केली को पविलियन भेज इस साझेदारी की अंत किया. केली का विकेट 158 के कुल स्कोर पर गिरा. मेंडिस को भी अभिषेक ने अपना तीसरा शिकार बनाया और मेजबानों को बैकफुट पर धकेल दिया. यहां से श्रीलंका की टीम संभल नहीं पाई लगातार अंतराल पर विकेट गंवाती रही. 225 के कुल स्कोर पर उसने अपने 3 विकेट गंवाए.

ठाकुर ने प्रवीण जयाविकरामा को रन आउट कर श्रीलंका की पारी को समेटा. इससे पहले भारत के शीर्ष क्रम ने इस मैच में अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन मध्यक्रम और निचला क्रम अच्छी शुरुआत का फायदा नहीं उठा सका. राणा के साथ पारी की शुरुआत करने आए पृथ्वी शॉ (39) ने भारत को अच्छी शुरुआत दी. दोनों ने पहले विकेट के लिए 67 रन जोड़े. शॉ को जयाविकरमा ने पविलियन भेजा.

भारत के रन बटोरने का सिलसिला यहां नहीं रुका. राणा ने इसके बाद शुभम के साथ पारी को आगे बढ़ाया और तीसरे विकेट के लिए 88 रन जोड़ते हुए बड़े स्कोर की नींव रखी. जयाविकरमा ने एक बार फिर अपनी टीम को सफलता दिलाई और राणा को पविलियन भेजा. राणा ने 79 गेंदों में 6 चौके और 1 छक्का लगाया. वह 155 के कुल स्कोर पर पविलियन लौटे.

कप्तान अभिषेक (29) ने शुभम का साथ दिया और टीम का स्कोर 200 के पार ले गाए, लेकिन 209 के कुल स्कोर पर कप्तान पविलियन लौट गए. जयाविकरमा ने 224 के कुल स्कोर पर शुभम को आउट कर भारत को बड़ा झटका दिया. उनके जाने के बाद भारतीय टीम लड़खड़ा गई और 245 रनों तक उसने अपने सात विकेट गंवा दिए.

कमलेश नागरकोटी ने अंतिम ओवरों में 14 गेंदों में 23 रन की पारी खेल टीम को 273 के स्कोर तक पहुंचाया. श्रीलंका की तरफ से जयाविकरमा और निपुन रनसिका ने 3-3 विकेट लिए. थिसारू रासमिका के हिस्से 1 विकेट आया.

इंसानों की जगह अब रोबोट डिलीवर करेंगे पिज्जा

ऑस्ट्रेलिया की पिज्जा कंपनी 'डोमिनोज' ने दुनिया का पहला पिज्जा डिलीवरी रोबोट पेश किया है. इस रोबोट का नाम 'डोमिनोज रोबोटिक यूनिट' (डीआरयू) है. यह वाहननुमा रोबोट तय जगह पर पिज्जा डिलिवरी करने के लिए लेजर्स का इस्तेमाल करेगा और डिलिवरी के बाद उपभोक्ताओं से पैसे भी ले सकेगा.

डोमिनोज ग्रुप के मुख्य कार्यकारी अधिकारी(सीईओ) और प्रबंध निदेशक डोन मीज ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि यह रोबोट नए अवसरों को जन्म देने की शुरुआत कर रहा है. साथ ही ऑस्ट्रेलिया व दुनियाभर में डोमिनोज के लिए एक नई मुहिम शुरू करने वाला है.

डीआयू 20 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चल सकता है. इसे फुटपाथ, पगडंडी और दुपहिया वाहनों के मार्गो पर सफर करने के लिए बनाया गया है.

फेसबुक यूजर्स के लिए नई सौगात

फेसबुक मैसेंजर में अब यूजर्स वीडियो ग्रुप चैट कर सकते हैं. कंपनी ने हाल ही में ये नया फीचर अपडेट किया है. ग्रुप चैट का इस्तेमाल एंड्रॉइड स्मार्टफोन यूजर्स के साथ iPhone और वेब यूजर्स भी कर पाएंगे. फेसबुक के मुताबिक यूजर्स लंबे समय से इस फीचर की डिमांड कर रहे थे.

फेसबुक मैसेंजर यूजर किसी ग्रुप वीडियो कॉल के दौरान स्क्रीन पर 6 लोगों को एक साथ देख पाएंगे. हालांकि इसमें यूजर 50 यूजर्स तक वॉयस या कैमरा के जरिए जुड़े रह सकते हैं. कंपनी ने एक पोस्ट में लिखा है कि कॉल पर छह से ज्यादा लोग जुड़ जाते हैं, तब सिर्फ ज्यादा बोलने वाले यूजर्स को ही स्क्रीन दिखाई देगा.

ग्रुप वीडियो चैट शुरू करने से पहले यूजर को किसी पुराने ग्रुप चैट या नए चैट में जाना होगा. इसके बाद दायीं तरफ टॉप में बने वीडियो आइकन पर क्लिक करना होगा. इसके बाद सभी ग्रुप सदस्यों को नोटिफाई किया जाएगा. वे सिंगल टैप के जरिए वीडियो चैट का हिस्सा बन जाएंगे. फेसबुक ने कहा, "अगर यूजर चाहें तो वे निजी तौर पर कुछ यूजर या पूरे ग्रुप को कॉल भी कर सकते हैं."

एशियाई ल्यूज चैंपियनशिप: शिवा ने जीता गोल्ड

पांच बार शीतकालीन ओलंपिक में हिस्सा ले चुके भारत के शिवा केशवन ने जापान के नगाओ में एशियाई ल्यूज चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीत कर बड़ी उपलब्धि दर्ज की. केशवन ने चैंपियनशिप में अपना दबदबा बनाए रखा और दो हिट की रेस में एक मिनट 39.962 सेकंड का बेहतरीन समय निकाला. केशवन ने 130.4 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से पहले स्थान पर रहते हुए सोने पर कब्जा जमाया.

मेजबान जापान के तनाका शोहेई एक मिनट 44.874 सेकंड और 124.6 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार के साथ दूसरे स्थान पर रहे और रजत पदक जीता जबकि चीनी ताइपे के लिएन तेन एन ने एक मिनट 45.120 सेकंड और 126.3 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार के साथ तीसरा स्थान हासिल किया.

केशवन के लिए स्पाइरल ओलंपिक ट्रैक पर हुई इस स्पर्धा से पहले का सफर काफी उतार चढ़ाव भरा रहा. इसी सप्ताह ट्रेनिंग के दौरान केशवन दुर्घटना का शिकार हो गए जिससे उनकी स्लेड टूट गई और उनके बाएं पैर में भी चोट आई. इस कारण से वह आधिकारिक अभ्यास में भी हिस्सा नहीं ले सके थे. इसके अलावा पैसों की तंगी के कारण वह इसी वर्ष हुई विश्व चैंपियनशिप में भी हिस्सा नहीं ले सके थे.

तमाम परेशानियों के बावजूद स्वर्ण पदक जीतने पर खुशी जताते हुए केशवन ने कहा कि इस बार मैंने स्वर्ण पदक जीतने की ठान ली थी और मैं किसी भी बात से घबराया नहीं. इतनी परेशानियों के बावजूद मैंने रेस में जोखिम उठाने का निर्णय किया. मैं अपने सभी समर्थकों को धन्यवाद देना चाहता हूं.

भारतीय एथलीट शिवा वर्ष 2017 में ऑस्ट्रिया के इन्सब्रुक में होने वाली विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा लेंगे. वह साथ ही विश्वकप सर्किट स्पर्धाओं में भी हिस्सा लेंगे जिसके जरिए वह कोरिया में होने वाले 2018 शीतकालीन ओलंपिक क्वॉलिफिकेशन प्रक्रिया में जगह बना सकेंगे.

तो इतने लोगों ने नहीं भरा टैक्स रिटर्न

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने और 67 लाख 54 हजार लोगों को चिह्नित किया है जिन्होंने 2014-15 में मोटी रकम का लेनदेन किया, लेकिन 2015-16 में टैक्स रिटर्न्स फाइल नहीं किया. आईटी डिपार्टमेंट ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई जल्द शुरू करने वाला है.

यह जानकारी बैंकों और दूसरे वित्तीय संस्थानों से जुटाई गई है. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने आंकड़ों की छानबीन की जिसमें इनकम टैक्स रिटर्न्स नहीं भरने वालों की पहचान की गई है. यह छानबीन इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के नॉन-फाइलर्स मॉनिटरिंग सिस्टम (एनएमएस) के तहत की गई.

सीबीडीटी की एक प्रेस रिलीज में कहा गया है कि आई-टी डिपार्टमेंट ने आंकड़ों के मिलान के 5वें चक्र में 67.54 लाख लोगों की पहचान की है. डिपार्टमेंट अब इन लोगों को नोटिस भेजकर यह कहनेवाली है कि वो अपने लेनदेन का हिसाब-किताब दें और जरूरी टैक्स भरें.

सीबीडीटी ने कहा है कि आई-टी रिटर्न्स फाइल नहीं करनेवाले पैन नंबर से ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग इन कर अपने लेनदेन की विस्तृत जानकारी पा सकते हैं. जिनके पास पैन नंबर हैं, वो ऑनलाइन जानकारी दे सकते हैं और उसकी एक कॉपी अपने पास रख सकेत हैं.

सीबीडीटी ने स्क्रूटिनी से बचने के लिए सभी करदाताओं से अपनी सही आमदनी बताने और उसके अनुकूल टैक्स भरने की अपील की है. सीबीडीटी का कहना है कि वह रिटर्न नहीं भरनेवालों का तेजी से पीछा करती रहेगी.

अब पैसों की भी होगी होम डिलिवरी

कैश ऐट होम (Cash@Home) सर्विस के तहत स्नैपडील अब अपके घर 2000 रुपये की डिलिवरी करेगा. जी हां स्नैपडील ने कैश की दिक्कत से परेशान लोगों की मदद के लिए ‘होम डिलिवरी एटीएम’ बनने का फैसला किया है.

स्नैपडील इस सर्विस के तहत कैश ऑन डिलिवरी ऑर्डर पर मिलने वाले कैश का इस्तेमल करेगी. अब यूजर स्नैपडील से 2000 रुपये तक ऑर्डर कर सकेंगे.

इस डील की सबसे अच्छी बात ये है कि ऑर्डर के साथ कस्टमर्स कोई सामान स्नापडील से खरीदें ये जरुरी नहीं होगा. ऑर्डर करते वक्त स्नैपडील आपसे 1 रुपये कनवेनियंस चार्ज लेगा जो आप फ्रीचार्ज वॉलेट या डेबिट कार्ड के जरिए पे कर सकते हैं.

स्नैपडील से कैश लेने के बाद आपको अपने एटीएम कार्ड के जरिए स्नैपडील को पैसे पे करना होगा. इसके लिए आपको स्नैपडील एप इंस्टॉल करना होगा. ये एप आपकी लोकेशन का इस्तेमाल करके एरिया में कैश की उपलब्धता की जानकारी जुटाएगा. कैश की जानकारी जुटाने के बाद यूजर को एक नेटिफिकेशन और मैसेज आएगा. इसके जरिए यूजर ऑर्डर पेज पर जाकर 2000 कैश के लिए ऑर्डर कर सकता है.

कंपनी के को-फाउंडर रोहित बंसल ने बताया कि ‘हम डिजिटल इकॉनमी की ओर बढ़ रहे हैं ऐसे में हमारा ये कदम कस्टमर्स की जरुरतों को ध्यान में रख कर उठाया गया है.’

Cash@Home सेवा गुड़गांव और बंगलूरु में इस वक्त चल रही है जिसे आने वाले दिनों में और भी बढ़ाया जाएगा.

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