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नए साल में घट सकती हैं लोन की दरें

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और कुछ अन्य बैंक 1 जनवरी से लोन सस्ते कर सकते हैं. इससे लोन लेने वालों की संख्या बढ़ सकती है. नोटबंदी के बाद से लोन लेने वालों की संख्या काफी कम हो गई है. कैश की सप्लाई कम होने के चलते लोग गैर-जरूरी चीजों पर पैसे खर्च नहीं कर रहे हैं. सूत्रों ने बताया कि कार और होम लोन रेट्स में कमी की जा सकती है. नोटबंदी के बाद बैंकों के पास काफी कैश आ रहा है. इससे उनके डिपॉजिट में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन लोन की मांग में कमी आई है.

खासतौर पर कॉरपोरेट सेक्टर से लोन की मांग काफी कम हो गई है. ऐसे में बैंक कार और होम लोन रेट्स कम कर क्रेडिट ग्रोथ बढ़ाने की कोशिश करने जा रहे हैं. इस पर एसबीआई ने कोई नोटीफिकेशन जारी नहीं किया है. सूत्रों के मुताबिक, इंडियन बैंक्स असोसिएशन की पिछले हफ्ते एक मीटिंग में कुछ बड़े बैंकों के सीईओ ने फाइनेंस मिनिस्ट्री से चर्चा के बाद इंट्रेस्ट रेट में कमी पर विचार किया. कुछ बैंकरों का मानना है कि इससे नोटबंदी के बाद कन्ज़्यूमर सेंटीमेंट को सुधारने में मदद मिलेगी.

हालांकि, इस पूरे मामले में सेविंग बैंक रेट में कमी के आसार भी दिख रहे हैं. सेविंग रेट के लिए कोई रेगुलेटरी नियम नहीं है, लेकिन ज्यादातर बैंकों ने इसे 4% रखा है.

मैंने जीजा की बहन के साथ कई बार सेक्स किया है. अब वह मुझ से नफरत करने लगी है. क्या करूं.

सवाल

मैं 23 साल का हूं और जीजा की बहन से प्यार करता हूं. हम दोनों ने कई बार सेक्स भी किया है, पर अब वह जीजा के डर से मुझ से नफरत करने लगी है. घर वाले हमारे प्यार के बारे में जान कर मेरी शादी कहीं और करने पर जोर दे रहे हैं. मैं उस के बगैर नहीं रह सकता. मैं क्या करूं?

जवाब

किसी भी वजह से सही, पर वह लड़की आप से नफरत करने लगी है. लिहाजा, आप को उस का पीछा छोड़ देना चाहिए. जीजा की रजामंदी से बात बन सकती थी, पर जब घर वाले ही साथ नहीं दे रहे, तो कहीं और शादी कर लेने में ही भलाई है.

 

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

 

20 रुपये खर्च कर गूगल पर देखें नई फिल्में

गूगल ने अपनी ऑनलाइन मूवी स्ट्रीमिंग सर्विस प्ले मूवीज के लिए प्रोमोशनल ऑफर लॉन्च किया है. इस ऑफर के तहत आप 20 रुपये में मूवी रेंट कर सकते हैं.

आप इस ऑफर के तहत कई सारी नई मूवीज भी देखी जा सकते हैं, जिनमें द जंगल बुक, सुल्तान, कैप्टन अमेरिका: सिविल वॉर, फाइंडिंग डोरी, सूइसाइड स्क्वॉड और जेसन बोर्न वगैरह शामिल हैं.

यह ऑफर 23 जनवरी, 2017 तक चलेगा. इसका मतलब यह हुआ कि आप इन मूवी को अभी रेंट पर लेकर अगले साल तक देख सकते हैं. बस एक बात का ध्यान रखना होगा कि प्रोमो को सिर्फ एक बार ही इस्तेमाल किया जा सकता है.

इस ऑफर को अवेल करने के लिए आपको गूगल प्ले मूवीज एप पर जाना होगा और कूपन को रीडीम करना होगा. इसके अलावा आप डेस्कटॉप पर भी गूगल प्ले मूवीज के वेबपेज पर जाकर अपने गूगल अकाउंट से साइन इन करके भी इस ऑफर को अवेल कर सकते हैं.

तो नहीं बढ़ेगी कैश निकालने की लिमिट

30 दिसंबर के बाद भी बैंक और एटीएम से कैश निकालने को लेकर पाबंदी जारी रह सकती है. सूत्रों के मुताबिक नए नोट पर्याप्त मात्रा यानी मांग के मुताबिक नहीं छप पाने की वजह से आरबीआई की सप्लाई की प्रक्रिया धीमी पड़ गई है. इसलिए वर्तमान पाबंदी कुछ समय के लिए जारी रह सकती है. फिलहाल एक एटीएम कार्ड से 1 दिन में 2500 रुपए निकाले जा सकते हैं.

अब तक कहा जा रहा था कि 30 दिसंबर के बाद हालात सामान्य हो जाएंगे, लेकिन नकदी संकट अभी भी बरकरार है और कहा जा रहा है कि 30 दिसंबर के बाद भी नकदी निकासी की सीमा बरकरार रहेगी. लगातार छपाई होने के बावजूद आरबीआई इस मांग को पूरी नहीं कर पा रहा है. नकदी की उपलब्धतता का संकट देखते हुए बैंकों ने सरकार और आरबीआई से यह अपील की है कि नकदी पर निकासी सीमा को 30 दिसंबर के बाद भी जारी रखा जाए.

मुताबिक बैंकर्स ने सरकार और आरबीआई से अपील की है कि 30 दिंसबर के बाद भी नोट निकासी की सीमा को जारी रखी जाए. दरअसल ऐसा इसलिए क्योंकि वो चाहते हैं कि निकासी पर यह सीमा तब तक जारी रहे जब तक कि नई करेंसी की उपलब्धता सामन्य स्थिति में नहीं आ जाती है. अगर नकदी निकालने की सीमा खत्म कर दी जाएगी तो मुश्किलें और बढ़ सकती हैं.

संन्यास के लिए फेयरवेल मैच की जरुरत नहीं: अफरीदी

विदाई मैच की मांग करने की अटकलों के बीच पाकिस्तान के दिग्गज ऑलराउंडर शाहिद अफरीदी ने कहा है कि क्रिकेट से संन्यास लेने के लिए किसी फेयरवेल मैच की जरूरत नहीं है और वो फिलहाल क्रिकेट नहीं छोड़ रहे हैं. अपने इस बयान के साथ ही उन्होंने क्रिकेट से अपने संन्यास लेने की खबरों पर विराम लगा दिया.

अफरीदी ने कहा कि “मैंने पाकिस्तान के लिए 20 वर्ष तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला ना कि पीसीबी के लिए और एक मैच के लिए मैं किसी पर निर्भर नहीं हूं. मैंने अपने क्रिकेट फैंस से जो प्यार और सपोर्ट हासिल किया है वही मेरे लिए सबसे बड़ा इनाम है. मैं अपने फेयरवेल के लिए पीसीबी को किसी भी मैच के लिए नहीं कहूंगा.”

उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान की तरफ से भारत के साथ क्रिकेट मैच खेले जाने के मसले पर भारत ने कभी भी सकारात्मक रुख नहीं दिखाया.

अफरीदी ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि मेरा क्रिकेट करियर खत्म हो गया है. मैं खेल का भरपूर मजा उठा रहा हूं और क्रिकेट खेलना जारी रखूंगा. जहां तक पाकिस्तान टीम में सेलेक्शन का सवाल है ये टीम के सेलेक्टर्श पर निर्भर करता है.

वहीं पीसीबी के एक वरिष्ठ अधिकारी नजम सेठी ने कहा कि उनका अफरीदी के साथ कोई मनमुटाव नहीं है और पाकिस्तान क्रिकेट के लिए उन्होंने जो किया वो उसकी प्रशंसा करते हैं. आगे उन्होंने कहा कि सही समय आने पर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की तरफ से उन्हें शानदार फेयरवेल दिया जाएगा.

अब चेक बाउंस करवाने वालों की खैर नहीं

डिजिटल लेन देन को बढ़ावा देने वाली केंद्र सरकार ने अब कुछ कठोर नियम बनाने का फैसला किया है. सरकार उन लोगों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने जा रही है जो जान बूझकर चेक बाउंस करवाते हैं. ऐसे में चेक बाउंस होना अब आपको महंगा पड़ सकता है. केन्द्र सरकार चेक बाउंस से संबंधित कानून में बदलाव करने जा रही है. जान बूझकर चेक बाउंस कराने वाले लोगों को अब एक-दो महीने के अंदर ही जेल की हवा खानी पड़ सकती है. आगामी बजट सत्र में केंद्र सरकार इससे संबंधित एक विधेयक लाने की तैयारी में है.

प्रस्तावित विधेयक के मुताबिक अगर कोई भी व्यक्ति चेक बाउंस होने के एक महीने के अंदर कुछ दंड के साथ भुगतान नहीं करता है तो उसे जेल जाना होगा. मौजूदा कानून में भी जेल की सजा का प्रावधान तो है लेकिन कानूनी लड़ाई में महीनों और सालों लग जाते हैं. हालांकि, चेक बाउंस होने की घटनाओं में तब थोड़ी कमी आई थी जब पहली बार निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट के तहत जेल का प्रावधान किया गया था.

सूत्रों ने बताया कि पिछले दिनों में प्रधानमंत्री समेत भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं से मिलकर कारोबारियों के समूह ने अपनी वेदना जताई थी. उनका कहना था कि चेक बाउंस होने के मामले में उन्हें वसूली करने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ता है. इसमें कई बार वर्षो लग जाते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने भी इसमें बदलाव के बाबत सुझाव दिया था.

फिलहाल देश भर के विभिन्न कोर्टो में चेक बाउंस के लगभग 20 लाख केस दर्ज हैं. इनमें से कई मामले तो 5 साल से भी ज्यादा पुराने हैं. सूत्र बताते हैं कि ऐसे मामलों से निपटने के लिए कवायद शुरू हो गई है. फिलहाल कानून के तहत चेक मूल्य के दोगुना फाइन या 2 साल तक की सजा या फिर दोनो का प्रावधान है. लेकिन यह कोर्ट से निर्णय होने के बाद होता है.

खुली सांस का मौका तो दें

सरकार की नई एविएशन नीति के अनुसार अब छोटे छोटे शहरों को भी हवाई सेवाएं मिल सकेंगी और बड़े शहरों तक पहुंचने के लिए युवाओं को घंटों की उबाऊ और थकाऊ रेल व बस यात्रा करने को मजबूर नहीं होना पड़ेगा. 500 किलोमीटर की यात्रा अब हवाईजहाज से 2,500 रुपए में की जा सकेगी यानी जिस ट्रैवल के लिए पहले 12-14 घंटे लगते थे अब सिर्फ 5-6 घंटे में वह सफर पूरा हो जाएगा.

सरकार ने नीति तो बना दी है पर एयरलाइंस इस का फायदा उठाएंगी इस में शक है. छोटे शहरों में एयरपोर्ट्स की कमी है और हैं भी तो शहरों के बाहर, जहां तक आनेजाने में ही मोटा खर्च हो जाएगा. छोटे शहरों से बस और ट्रेन हर 2-3 घंटे में मिल जाती है पर हवाई सेवा ज्यादा से ज्यादा दिन में 2 बार होगी, क्योंकि इतने पैसेंजर जुटाने मुश्किल होंगे. यह भी पक्का रेल के डब्बों और खटारा बसों की तरह हवाई कंपनियां भी कंडम हवाईजहाज लगाएंगी, जो कब खराब हो जाएं पता नहीं और जिन की सीटें फटी होंगी और उन में रिटायर्ड एयर होस्टेस होंगी.

दिक्कत यह है कि सरकार आज भी इतनी ज्यादा नीतियों के ढेर पर बैठी है कि उस की ढेरों अनुमतियों के बिना निजी सेवाएं देने वाले चाहें तो भी मर्जी की सेवाएं नहीं दे सकते. यही नहीं, देश में हर तरफ अफरातफरी का माहौल है, जिसे न नगर निकाय ठीक करते हैं, न राज्य सरकार व न केंद्र सरकार. नतीजा यह है कि एयरलाइंस को सैकड़ों बाधाएं पार कर सेवा करने का मौका मिलेगा और बहुत बार वे थकहार कर बैठ जाएंगे.

भारत में आज भी सरकार युवापीढ़ी को वह संतोष और सुख दिलाने में कुछ नहीं कर पा रही है, जिस की वह हकदार है. हवाई सेवाएं एक छोटी सेवा है. पुस्तकालय, रेडियो स्टेशन, टीवी स्टेशन, स्पोर्ट्स स्टेडियम, अच्छे रेस्तरां व साफ बागबगीचे नहीं हैं. उन्हें हवाई सेवाएं मिल जाएं तो अच्छा है, पर उन के लिए स्टूडैंट कंसेशन होना चाहिए. शहरों की खराबी के लिए सरकारें जिम्मेदार हैं और उस का जुर्माना सरकार स्टूडैंट कंसेशन दे कर उन्हें बड़े शहरों में खुली सांस लेने का मौका तो दे.

…तो मोदी ने ली रिश्वत और लागू हो गई नोटबंदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब 8 नवंबर को 500 और 1000 रुपए के नोट बंद करने की देश को सूचना दे रहे थे, उससे बहुत पहले सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण देश की प्रमुख आधा दर्जन से अधिक सरकारी जांच एजेंसियों को लिखकर बता चुके थे कि न सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी ने, बल्कि देश के अन्य तीन और मुख्यमंत्रियों ने करोड़ों का कैश उद्योगपतियों से वसूला है. प्रशांत भूषण ने जिन एजेंसियों को डाक्यूमेंट्स भेजे हैं, उनमें सुप्रीम कोर्ट द्वारा कालेधन को लेकर बनाई गई दो सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम, निदेशक सीबीआई, निदेशक ईडी, निदेशक सीबीडीटी और निदेशक सीवीसी शामिल हैं.

भारत सरकार के इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से किए गए रेड के जो डाक्यूमेंट्स दिल्ली के पत्रकारों और नौकरशाहों के दायरे में घूम रहे हैं उनके मुताबिक, गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी को सुब्रत राय के सहारा इंडिया ग्रुप से जुड़े किसी 'जायसवाल जी' ने करोडों रुपए कैश में दिए. इन डाक्यूमेंट्स से साफ है कि 30 अक्टूबर 2013 और 29 नवंबर 2013 को गुजरात सीएम, मोदी जी के नाम से 13 ट्रांजेक्शन हुए. इन ट्रांजेक्शन से पता चलता है कि 13 ट्रांजेक्शन में 55.2 करोड़ रुपए मोदी जी और गुजरात सीएम के नाम से दिए गए.

इसके अलावा सहारा ग्रुप से जुड़े जायसवाल ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को भी करोड़ों के रुपए कैश में दिए. करोड़ों का कैश लेने वालों में भारतीय जनता पार्टी की कोषाध्यक्ष शायना एनसी भी शामिल हैं. इस रिपार्ट का विस्तृत खुलासा करने वाले वरिष्ठ पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता का कहना है कि कारवां और इकॉनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली पत्रिका ने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से मिले सबूतों के आधार पर सभी नेताओं को सफाई के लिए ईमेल किया है. पर 17 नवंबर को किए गए ईमेल का जवाब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारतीय जनता पार्टी कोषाध्यक्ष शायना एनसी, छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री रमन सिंह, मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित में से किसी ने अब तक नहीं दिया है.

प्रधानमंत्री से लेकर तीन-तीन मुख्यमंत्रियों द्वारा कैश में करोडों का कालाधन लेने के इस मामले का खुलासा इनकम टैक्स की डिप्टी डायरेक्टर अंकिता पांडेय ने किया था. इन कागजातों पर उनके अलावा भारत सरकार के दूसरे अधिकारियों के भी दस्तखत हैं. यह डाक्यूमेंट देश के तमाम पत्रकारों और सरकार अधिकारियों के पास है.

ये है पूरी कहानी

अक्टूबर 2013 से नवम्बर 2014 में क्रमशः सहारा और आदित्य बिड़ला के ठिकानों पर इनकम टैक्स के छापे पड़े थे. यहां से आयकर अधिकारियों को दो महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले थे, जिनमें सरकारी पदों पर बैठे कई लोगों को पैसे देने का जिक्र था. इसमें प्रधानमंत्री मोदी का नाम भी शामिल था. बिड़ला के यहां से जब्त दस्तावेज में सीएम गुजरात के नाम के आगे 25 करोड़ रुपये लिखा गया था. इसमें 12 करोड़ दे दिया गया था, बाकी पैसे दिए जाने थे.

इसी तरह से सहारा के ठिकानों से हासिल दस्तावेजों में लेनदारों की फेहरिस्त लम्बी थी जिसमें सीएम एमपी, सीएम छत्तीसगढ़, सीएम दिल्ली और बीजेपी नेता सायना एनसी के अलावा मोदी जी का नाम भी शामिल था. मोदी जी को 30 अक्टूबर 2013 से 21 फ़रवरी 2014 के बीच 10 बार में 40.10 करोड़ रुपये की पेमेंट की गई थी. खास बात ये है कि तब तक मोदी जी बीजेपी के पीएम पद के उम्मीदवार घोषित किए जा चुके थे.

सहारा डायरी की पेज संख्या 89 पर लिखा गया था कि 'मोदी' जी को 'जायसवाल जी' के जरिये अहमदाबाद में 8 पेमेंट किए गए. डायरी की पेज संख्या 90 पर भी इसी तरह के पेमेंट के बारे में लिखा गया है. बस अंतर केवल इतना है कि वहां 'मोदी जी' की जगह 'गुजरात सीएम' लिख दिया गया है, जबकि देने वाला शख्स जायसवाल ही थे. मामला तब एकाएक नाटकीय मोड़ ले लिया जब इसकी जांच करने वाले के बी चौधरी को अचानक सीवीसी यानी सेंट्रल विजिलेंस कमीशन का चेयरमैन बना दिया गया. प्रशांत भूषण ने उनकी नियुक्ति को अदालत में चुनौती दी.

इस साल 25 अक्टूबर को प्रशांत भूषण ने सीवीसी समेत ब्लैक मनी की जांच करने वाली एसआईटी को सहारा मामले का अपडेट जानने के लिए पत्र लिखा. खास बात यह है कि उसी के दो दिन बाद यानी 27 अक्टूबर को दैनिक जागरण में 500-1000 की करेंसी को बंद कर 2000 के नोटों के छपने की खबर आयी. बताया जाता है कि के बी चौधरी ने वित्त मंत्री अरुण जेटली को इसके बारे में अलर्ट कर दिया था.

उसके बाद सहारा ने इनकम टैक्स विभाग के सेटलमेंट कमीशन में अर्जी देकर मामले के एकमुश्त निपटान की अपील की. जानकारों का कहना है कि कोई भी शख्स इसके जरिये जीवन में एक बार अपने इनकम टैक्स के मामले को हल कर सकता है और यहां लिए गए फैसले को अदालत में चुनौती भी नहीं दी जा सकती है. साथ ही इससे जुड़े अपने दस्तावेज भी उसे मिल जाते हैं जिसे वह नष्ट कर सकता है. अदालत या किसी दूसरी जगह जाने पर यह लाभ नहीं मिलता. चूंकि मामला पीएम से जुड़ा था इसलिए सहारा इसको प्राथमिकता के आधार पर ले रहा था.

बताया जाता है कि सेटलमेंट कमीशन में भी मामला आखिरी दौर में था. भूषण ने 8 नवम्बर को फिर कमीशन को एक पत्र लिखा जिसमें उन्होंने मामले का अपडेट पूछा था. शायद पीएम को आने वाले खतरे की आशंका हो गई थी जिसमें उनके ऊपर सीधे-सीधे 2 मामलों में पैसे लेने के दस्तावेजी सबूत थे. उनके बाहर आने का मतलब था पूरी साख पर बट्टा. मामले का खुलासा हो उससे पहले ही उन्होंने ऐसा कोई कदम उठाने के बारे में सोचा जिसकी आंधी में यह सब कुछ उड़ जाए. नोटबंदी का फैसला उसी का नतीजा था.

इसे अगले साल जनवरी-फ़रवरी तक लागू किया जाना था, लेकिन उससे पहले ही कर दिया गया. यही वजह है कि सब कुछ आनन-फानन में किया गया. न कोई तैयारी हुई और न ही उसका मौका मिला. यह भले ही 6 महीने पहले कहा जा रहा हो लेकिन ऐसा लगता है उर्जित पटेल के गवर्नर बनने के बाद ही हुआ है, क्योंकि नोटों पर हस्ताक्षर उन्हीं के हैं. छपाई से लेकर उसकी गुणवत्ता में कमी पूरी जल्दबाजी की तरफ इशारा कर रही है.

बंगाल के पंकज ने खेली रिकॉर्ड 413 रनों की पारी

बंगाल के मध्य क्रम के बल्लेबाज पंकज शॉ ने बंगाल क्रिकेट संघ (कैब) के तीन दिवसीय प्रथम श्रेणी टूर्नामेंट में रिकार्ड नाबाद 413 रन की पारी खेली. बारिशा स्पोर्टिंग का प्रतिनिधत्व कर रहे 28 साल के पंकज ने अपनी पारी में 44 चौके और 23 छक्के मारे. वह तीन दिवसीय कैब लीग में 400 से अधिक का स्कोर बनाने वाले पहले बल्लेबाज हैं.

बारिशा स्पोर्टिंग की टीम रविवार को दो विकेट पर 192 रन से आगे खेलने उतरी. शॉ ने 44 रन से आगे खेलते हुए नाबाद 413 रन बनाए. उन्होंने अजमेर सिंह (47) के साथ छठे विकेट के लिए 203 जबकि श्रेयन चक्रवर्ती (22) के साथ आठवें विकेट के लिए 191 रन बनाए जिससे बारिशा स्पोर्टिंग ने 115 ओवर में आठ विकेट पर 708 रन बनाकर पारी घोषित की.

इससे पहले दक्षिण कालीकट संसद ने पहली पारी में 369 रन बनाए थे. टीम ने दूसरी पारी में दो विकेट पर 96 रन बनाए जब मैच ड्रॉ कर समाप्त किया गया. शॉ ने पिछले सीजन में रणजी में राजस्थान के खिलाफ आगाज किया था. पंकज ने अभी तक 12 प्रथम श्रेणी के मैच खेले हैं.

अब आधार पेमेंट ऐप से करें भुगतान

सरकार की ओर से डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए लगातार नई-नई योजनाएं लाई जा रही हैं. सरकार ने आधार पेमेंट ऐप नाम से एक नया मोबाइल ऐप लॉन्च किया है जिसके तहत आप सिर्फ आधार नंबर की मदद से ही किसी भी दुकान पर या रेस्टारेंट या फिर किसी अन्य जगह पर पेमेंट कर सकते हैं. इसके लिए सिर्फ आपको अपना अंगूठा लगाना होगा. इस नए ऐप को यूज करने के लिए आपके पास स्मार्टफोन की जरूरत भी नहीं.

आधार पेमेंट ऐप को यूआईडी, आईडीएफसी बैंक और नेशनल पेंमेंट कॉरपोरेशन (एनपीसीआई) ने डेवलप किया है. इस ऐप को गूगल प्ले स्टोर पर से फ्री में डाउनलोड किया जा सकता है. इससे पेमेंट करने के आपको अपना आधार नंबर और बैंक का नाम ऐप में डालना होगा. इसके बाद मोबाइल हैंडसेट से जुड़े बॉयोमेट्रिक स्कैनर या हैंडसेट के स्कैनर पर अपना अंगूठा रखना होगा. इसके बाद आपके अंगूठे के निशान से आपकी पहचान साबित हो जाएगी और पेमेंट हो जाएगा.

आधार पेमेंट ऐप की सबसे बड़ी खास बात ये है कि फिलहाल इसके तहत लेन-देन करने पर किसी भी तरह का सर्विस चार्ज नहीं देना होगा. इस डिजिटल लेन-देन के लिए ना तो डेबिट कार्ड की जरुरत है, ना ही डेबिट कार्ड या फिर मोबाइल वॉलेट की. इसमें एक बात यह भी है कि इसके यूज के लिए आपको पिन यानी पर्सनल आइडेंटिफिकेशन नंबर भी देने की जरुरत नहीं होगी.

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