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सरकारों की मनमानी

नरेंद्र मोदी की नोटबंदी ने यह साफ कर दिया है कि हमारा लोकतांत्रिक अधिकार वास्तव में कितना कमजोर है. 70 साल के लोकतांत्रिक शासन और उस से पहले अंगरेज शासन में भी आधेअधूरे वोट से चुने गए प्रतिनिधियों के सीमित शासन के आदी होने के बावजूद इस नोटबंदी पर देश कुछ न कर पाया. संसद में विरोधी पक्ष अपनी बात न कह पाया, लोग सड़कों पर लाइनों में लगे रहे, पर गुस्सा न जाहिर कर पाए.

भारत की तरह विश्व के अन्य देशों में भी लोकतंत्र से बनी सरकारें अकसर मनमानी करती रहती हैं. अमेरिका ने देश को पहले वियतनाम लड़ाई में भी बिना जनता की राय के झोंक दिया था, फिर इराक व अफगानिस्तान के युद्धों में. दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति पार्क ग्वेन हे को हटाने की मांग की जा रही है, पर कोई सुन नहीं रहा. अमेरिका में ही अश्वेतों, लेटिनों और दूसरे इम्मीग्रैंटों का रहना खतरे में पहुंच गया है. इंगलैंड ने बहुमत से यूरोपीय यूनियन से निकलने का फैसला किया है, पर जनमत संग्रह लोकतांत्रिक है या नहीं, इस की बहस चालू है.

लोकतंत्र का अर्थ केवल 2-3 साल बाद एक मतदान केंद्र में वोट डालना भर नहीं है. लोकतंत्र का अर्थ है कि जनता को उस के सभी मौलिक व मानवीय अधिकार मिलें और वह अपने नीति निर्धारकों को चुनने में स्वतंत्र हो, पर ज्यादातर लोकतंत्रों में एक तरह की राजशाही, मोनार्की खड़ी हो गई है, जिस में नौकरशाही, बड़ी कार्पोरेशनें और राजनीतिक दल शामिल हैं, जिन का संचालन वे लोग करते हैं, जो उत्पादन में नहीं लगे, दूसरों के उत्पादन को लूटते हैं.

सफलता आज यह नहीं है कि आप ने कितना जनता को सुख दिया, सफलता यह है कि आप ने जनता से कितना लूटा, चाहे उस से ज्यादा कमवा कर लूटा या भूखा मार कर लूटा. भारत में नोटबंदी भूखा मार कर लूटने का उदाहरण है, जिस में सत्तारूढ़ राजनीतिक दल, बड़ी कंपनियों के मालिक, बैंकर, नौकरशाही, हिंदू धर्म व्यवस्था के पैरोकार और अंधभक्त शामिल हैं. अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप को लाने वालों में कट्टरपंथी चर्च, बड़ी कार्पोरेशनें, समर्थ गोरे, बंदूकें रखने के हिमायती शामिल हैं.

ये सब आम जनता के लोकतांत्रिक मानवीय मौलिक अधिकारों के बदले जनता से कहते हैं कि जैसा है वैसा स्वीकार करो. भारत और अमेरिका में लाखों लोग जेलों में बिना गुनाह साबित हुए गिरफ्तार हैं, पर चुनावों की प्रक्रिया को लोकतंत्र कह कर ढोल पीटा जाता है. यह अधूरा लोकतंत्र है. यह षड्यंत्र है. यह जनता को दिया जाने वाला झुनझुना बन कर रह गया है. जनता अगर बेहाल, निरीह है, तो इसीलिए कि उसे कैदियों की तरह रखा जा रहा है और सूखी रोटी के साथ यहांवहां एक चम्मच हलवा वोट देने के हक के नाम पर दे दिया जाता है. वोट दे कर वह सरकार चलाने वाले चेहरे बदल सकती है, पर सरकार नहीं, शासन प्रक्रिया नहीं, कानून व्यवस्था नहीं, कुशासन नहीं. लोकतंत्र उस के लिए उस स्वर्ग की तरह है, जिस के सपने हर धर्म दिखाता है, पर कभी किसी को मिलता नहीं है. 

बदनामी का दाग

7 अगस्त, 2016 की सुबह 7 बजे सायरा ने अपनी छत से पड़ोस में रहने वाली सुनीता की छत पर देखा तो वहां का नजारा देख कर वह सन्न रह गई. छत पर सुनीता के देवर राजेश की लाश खून से लथपथ पड़ी थी. उस ने शोर मचाया तो आसपड़ोस के लोग इकट्ठा हो गए. सायरा ने 100 नंबर पर फोन कर के इस बात की सूचना पुलिस को भी दे दी थी. पीसीआर वैन कुछ ही देर में आ गई. यह स्थान दक्षिणपश्चिम दिल्ली के थाना रनहौला के अंतर्गत आता था, इसलिए कंट्रोल रूम की सूचना पर के एसआई ब्रह्मप्रकाश हैडकांस्टेबल संजय एवं कांस्टेबल नरेश कुमार के साथ सुनीता के घर पहुंच गए थे.

जैसे ही ये सभी दूसरी मंजिल पर पहुंचे, बरामदे में सुनीता की लाश पड़ी मिली. उस की हत्या चाकू से गला रेत कर की गई थी. वह चाकू लाश के पास ही पड़ा था. उन्हें सुनीता के मकान की दूसरी मंजिल की छत पर उस के देवर की लाश पड़ी होने की सूचना मिली थी, इसलिए वह छत पर गए तो छत पर बिछी चटाई पर सुनीता के देवर राजेश की लाश पड़ी थी.

राजेश का सिर फटा हुआ था. लाश के पास ही हथौड़ा पड़ा था, जिस पर खून लगा था. इस का मतलब हत्या उसी हथौड़े से की गई थी. चटाई पर शराब की एक बोतल, 2 गिलास, एक लोटे में पानी तथा एक कटोरी में तली हुई कलेजी रखी थी. इस से साफ लग रहा था कि यहां बैठ कर 2 लोगों ने शराब पी थी.

पड़ोसियों ने बताया कि मृतक राजेश कुमार हरियाणा के जिला सोनीपत के गांव हुमायूंपुर में रहता था. वह अकसर सुनीता के घर आता रहता था. पड़ोसियों ने एक बात यह भी बताई कि राजेश जब भी यहां रात को ठहरता था, सुनीता की छोटी बेटी ज्योति अपनी सहेली के घर सोने चली जाती थी. ब्रह्मप्रकाश के दिमाग में यह बात बैठ गई कि चाचा राजेश के आने पर ज्योति अपना घर छोड़ कर किसी और के यहां सोने क्यों चली जाती थी?

ब्रह्मप्रकाश ने इस दोहरे हत्याकांड की सूचना थानाप्रभारी सुभाष मलिक को भी दे दी थी. थोड़ी देर में वह भी अपने कुछ मातहतों के साथ आ गए थे. उन्होंने फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट और डौग स्क्वायड टीम को भी बुला लिया था. थानाप्रभारी की सूचना पर एसीपी (नांगलोई) आनंद राणा भी आ गए थे.

निरीक्षण के बाद जब ज्योति से पूछा गया कि अपना घर होते हुए भी वह अपनी सहेली के घर सोने क्यों गई थी तो जवाब देने के बजाय वह शरमाने लगी. इस से आनंद राणा समझ गए कि मामला कुछ ऐसा होगा, जिसे वह बताना नहीं चाहती. सारी कारवाई निपटा कर लाशों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया.

डीसीपी ने इस मामले को सुलझाने के लिए एसीपी आनंद राणा के नेतृत्व में एक पुलिस टीम का गठन किया, जिस में थानाप्रभारी सुभाष मलिक, इंसपेक्टर एस.एस. राठी, हैडकांस्टेबल नरेंद्र, कांस्टेबल विक्रांत, अनिल, वीरेंद्र, नरेश, प्रवीण, संजीव, महिला कांस्टेबल परमिंदर आदि को शामिल किया गया.

टीम में शामिल महिला कांस्टेबल परमिंदर ने ज्योति से पूछा कि चाचा के आने पर वह उस रात दूसरे के यहां सोने क्यों गई थी तो ज्योति ने सकुचाते हुए कहा, ‘‘चाचा और मम्मी शराब पी कर अश्लील बातें ही नहीं, अश्लील हरकतें करने लगते थे. कल रात भी जब दोनों नशे में एकदूसरे से अश्लील हरकतें करने लगे तो मैं रात 10 बजे के करीब गुस्से में सहेली के घर चली गई थी.’’

‘‘सुबह तुम्हें घटना की खबर कैसे मिली?’’

‘‘करीब 8 बजे सहेली के पापा ने मुझे बताया.’’ कह कर ज्योति रोने लगी.

इंसपेक्टर एस.एस. राठी ने उसे सांत्वना दे कर पूछा, ‘‘तुम्हारे खयाल से तुम्हारी मम्मी और चाचा की हत्या कौन कर सकता है?’’

‘‘साहब, पता नहीं इन्हें किस ने मारा है, मुझे सिर्फ इतना पता है कि पापा की मौत के बाद मम्मी बेलगाम हो गई थीं.’’

एस.एस. राठी को इस हत्याकांड की वजह समझ में आ गई. उन्होंने सुनीता के फोन नंबर की काल डिटेल्स निकलवा कर देखी तो उस में एक नंबर ऐसा मिला, जिस पर उन्हें संदेह हुआ. वह नंबर ज्योति के पति कप्तान सिंह का था. कप्तान के नंबर पर घटना वाली रात पौने 2 बजे सुनीता के फोन से फोन किया गया था.

एस.एस. राठी की समझ में यह नहीं आया कि जब कप्तान के संबंध सास और पत्नी से ठीक नहीं थे तो उतनी रात को सुनीता ने कप्तान को फोन क्यों किया? इस बारे में उन्होंने ज्योति से बात की तो उस ने बताया कि उस के और मम्मी के कप्तान से कोई संबंध नहीं थे, इसलिए फोन पर बात करने वाली बात संभव नहीं है. उन्होंने ज्योति से कप्तान का पता ले लिया. वह हरियाणा के भालगढ़ का रहने वाला था. पुलिस ने उस के यहां छापा मारा और उसे हिरासत में ले कर दिल्ली आ गई.

कप्तान सिंह से जब इस दोहरे हत्याकांड के बारे में सख्ती से पूछताछ की गई तो उस ने स्वीकार कर लिया कि राजेश और सुनीता की हत्या उस के छोटे भाई अमित ने अपने दोस्त सुमित शर्मा के साथ मिल कर की थी. इस के बाद कप्तान सिंह की निशानदेही पर पुलिस ने रोहतक के गांव बिचपड़ी से सुमित शर्मा और सोनीपत से अमित को गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में उन दोनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. पूछताछ के बाद इस दोहरे हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार थी—

रामकुमार मूलरूप से हरियाणा के सोनीपत जिले के हुमायूंपुर के रहने वाले जिले सिंह का बेटा था. उस के पास खेती की 7 एकड़ जमीन थी. उस के परिवार में 2 बेटियों के अलावा एक बेटा अंकित था. बाद में उस ने दिल्ली के रनहौला में मकान बनवा लिया और परिवार के साथ वहीं रहने लगा.

सुनीता हरियाणा के रोहतक की रहने वाली थी. शादी से पहले ही उस के कदम बहक गए थे. जब परिवार की बदनामी होने लगी थी तो पिता ने उस का विवाह रामकुमार से कर दिया था. रामकुमार की कुछ जमीन अच्छे पैसों में बिकी थी, इसलिए वह जम कर शराब पीने लगा था. बाद में सुनीता को भी उस ने अपने रंग में रंग लिया था. लगातार ज्यादा शराब पीने से रामकुमार की बड़ी आंत में कैंसर हो गया, जिस से उस की मौत हो गई. सुनीता को पति के मरने का कोई गम नहीं हुआ, इस के बाद वह और भी स्वच्छंद हो गई. इलाके के कई युवकों से उस के नाजायज संबंध बन गए.

शराब पी कर वह रात में अपने किसी प्रेमी को बुला लेती. बड़ी बेटी का विवाह रामकुमार के सामने ही हो चुका था. छोटी बेटी ज्योति ने मां की अय्याशी पर लगाम लगाने की कोशिश की तो उस ने उस का विवाह कप्तान सिंह से कर के उसे दूर कर दिया. कप्तान सिंह सोनीपत में संगमरमर का व्यापार करता था. वह भी पक्का शराबी था. शराब पी कर वह ज्योति से मारपीट करता था. पति से तंग आ कर वह मायके आ कर रहने लगी. सुनीता के अवैध संबंध अपने सगे देवर राजेश से भी थे. शादीशुदा राजेश की नजर सुनीता की संपत्ति पर थी. इसलिए वह उसे दूसरी पत्नी के रूप में रखना चाहता था.

कप्तान का परिवार खानदानी और रईस था. कप्तान और घर वालों को सुनीता के चालचलन की जानकारी हो चुकी थी, इसलिए कप्तान के मातापिता नहीं चाहते थे कि ज्योति मायके में रहे. उन्हें इस बात का अंदेशा था कि सुनीता कहीं ज्योति को भी अपनी तरह न बना दे. इसलिए उन्होंने ज्योति को लाने के लिए कप्तान और छोटे बेटे अमित को कई बार रनहौला भेजा.

मांबेटी ने दोनों भाइयों को हर बार अपमानित कर के भगा दिया था. कप्तान और उस के घर वालों को सुनीता की हर खबर मिलती रहती थी. लोग उस की अय्याशी के किस्से सुना कर उन की हंसी उड़ाते थे. इस से अमित का खून खौल उठता था. वह अकसर भाई से कहा करता था कि उस की सास की वजह से उन लोगों की बड़ी बदनामी हो रही है. देखना एक दिन वह उसे मार देगा.

एक दिन अमित सुनीता के घर गया और सुनीता को काफी समझाया. यही नहीं, उस ने चेतावनी भी दी कि वह सुधर जाए वरना अंजाम बुरा होगा. सुनीता ने उस की धमकी पर गौर करने के बजाय उसे धक्के मार कर घर से भगा दिया. अपमानित हो कर अमित घर तो लौटा आया, लेकिन उस ने तय कर लिया कि वह उसे जीवित नहीं छोड़ेगा. अपने दोस्त सुमित शर्मा के साथ मिल कर उस ने सुनीता की हत्या की योजना बना डाली.

रोज की तरह 6 अगस्त, 2016 की रात करीब 12 बजे अमित सुमित शर्मा को ले कर सुनीता के घर पहुंचा. सुनीता ने गुस्से में कहा, ‘‘इतनी रात को तुम लोग यहां क्या लेने आए हो?’’

अमित उसे धक्का दे कर अंदर ले गया तो नशे में धुत सुनीता उसे गालियां देने लगी. दूसरी मंजिल की छत पर शराब पी रहे राजेश को पता चला कि अमित आया है तो वह भी अमित को ऊपर से गालियां देने लगा. अमित का पारा चढ़ गया. वह छत पर पहुंचा और राजेश के चेहरे पर घूंसे मारने लगा.

सुमित भी ऊपर पहुंचा. वहां रखा हथौड़ा उठा कर पूरी ताकत से उस ने राजेश के सिर पर मारा, जिस से उस का सिर फट गया और थोड़ी देर में उस की मौत हो गई. सुनीता डर कर नीचे अपने कमरे की ओर भागी तो अमित और सुमित भी उस के पीछे दौड़े. सुमित ने बरामदे में सुनीता को दबोच लिया. अमित ने रसोई से सब्जी काटने वाली छुरी ला कर सुनीता का गला रेत दिया. सुनीता भी कुछ देर में मर गई.

इस के बाद अमित ने कहा, ‘‘सुमित, अपना फोन देना. पुलिस को हमारी लोकेशन का पता न चले, इसलिए मैं अपना फोन नहीं लाया.’’

अमित की नजर बैड पर रखे सुनीता के मोबाइल पर गई तो उस ने फोन उठा कर बड़े भाई कप्तान का नंबर मिला कर कहा, ‘‘मैं ने उस कुलटा को सबक सिखा दिया है.’’

इस के बाद सुमित के साथ मकान से बाहर आया और पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पहुंचा, जहां से सुबह 5 बजे ट्रेन से सोनीपत चला गया. अमित निश्चिंत था कि किसी को पता नहीं चलेगा कि राजेश और सुनीता की हत्या किस ने की है मगर सुनीता की हत्या उस ने की है, लेकिन सुनीता के फोन से कप्तान को फोन कर के उस ने जो भूल की, उसी ने उसे कानून के फंदे में फंसा दिया.

8 अगस्त को पुलिस ने इस दोहरे हत्याकांड का मुकदमा अमित और सुमित के खिलाफ दर्ज कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. चूंकि कप्तान हत्याकांड में शामिल नहीं था, इसलिए पुलिस ने उसे छोड़ दिया. मामले की जांच एस.एस. राठी कर रहे हैं.

– उमेश त्रिवेदी

थाम लें उम्र की डोर

कोई अगर आपसे कहे कि अब आपकी उम्र हो चली है, आपकी त्वचा से आपकी उम्र का पता चलने लगा है, अब आप में वो बात नहीं रही तो कितना बुरा लगता है न? और फिर आप मन ही मन सोचने लगते हैं कैसे हाथ से फिसलती उम्र को थामा जाए. क्योंकि खुद को सदा जवान दिखाने की चाहत हर किसी में होती है, लेकिन हैरानी की बात है कि आज के आधुनिक जमाने में जब हेल्थी और फिट रहने के सभी साधन मौजूद हैं, फिर भी लोग उम्र से पहले बुजुर्ग या अपनी उम्र से अधिक के दिखने लगे हैं. आइये जानते हैं ऐसे कौन से  कारण हैं जिनसे युवाओं में बुढ़ापा जल्दी आ रहा है और इस से कैसे बचा जा सकता है.

पौष्टिक और संतुलित भोजन खाएं

डाईटिशियन गीतू अमरनानी का मानना है कम उम्र में अधिक उम्र का दिखने का एक मुख्य कारण जंक फूड को नियमित दिनचर्या में शामिल करना है. आप ने एक ही जगह बैठ कर ढेर सारा जंक फ़ूड पिज़्ज़ा पास्ता नूडल्स खा लिए, लेकिन अपनी जगह से इंच भर भी नहीं हिले तो तो यह आपको उम्र से पहले बूढा बनाएगा. अपने इस लाइफ स्टाइल को बदलें और दिनभर कुछ न कुछ खाते रहने की आदत छोड़ दें. भूख लगने पर ही भोजन करें और जंक फ़ूड की बजाय पौष्टिक और संतुलित भोजन करें. साथ ही जितनी भूख हो, उससे थोड़ा कम खाएं. सीजन के फल व सब्जियों का सेवन अवश्य करें. इसके अलावा त्वचा को यंग बनाए रखने के लिए भरपूर मात्रा में पानी ज़रूर पियें. जब आपके शरीर में पानी की कमी हो जाती है तो डेटॉक्सिफिकेशन नही हो पाता है, जिससे त्वचा सांस लेना बंद कर देती है और  35 की उम्र का व्यक्ति  भी 40-45 का दिखने लगता हैं.

फल खाएं जवान दिखें

आप हम ऊपरी तौर पर त्वचा पर कितने भी कॉस्मेटिक्स प्रयोग कर ले, लेकिन त्वचा की भीतरी खूबसूरती को बनाये रखने के लिए जरुरी है कि आप की त्वचा भीतर से स्वस्थ हो. कोई भी  त्वचा  बीमार, थकी हुई और असमय बूढ़ी तभी दिखती है जब आपके शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है. ऐसे में पौष्टिक और संतुलित आहार की मदद से आप बढ़ती उम्र की निशानियों को काफी हद तक कम कर सकते हैं. गीतू अमरनानी का मानना है कि फलों में मौजूद ज़रूरी एंटीआक्सिडेंट्स त्वचा को हर दम जवां बनाये रखने में सक्षम होते हैं. जब हम दैनिक आहार में फलों को शामिल करते हैं तो त्वचा पर निखार आता है. क्योंकि फलों में मौजूद कैल्शियम, मैगनीशियम, विटामिन सी, आयरन, बीटा कैरोटीन और फ़ोलिक एसिड और बहुत कम मात्रा में मौजूद कैलोरीज़ त्वचा को हेल्दी और ग्लोइंग बनाये रखने में मदद करते हैं. खट्टे फल जैसे नींबू और संतरे में मौजूद विटामिन सी कोलाजन बनाने में मदद करता है और कोलाजन त्वचा के लिए प्रोटीन बनाता है. जिस से झुर्रियां कम दिखती हैं.

स्मोकिंग और अल्कोहल से बनायें दूरी

स्मोकिंग और अल्कोहल के सेवन से भी सेहत पर विपरीत असर पड़ता है. धूम्रपान से त्वचा खुश्क होती है और चेहरे पर झुर्रियां पड़ती हैं, शरीर में विटामिन सी का स्तर भी घटता है, इन ख़राब आदतों के साथ ही यदि हफ्ते में दो घंटे से कम शारीरिक व्यायाम किया जाए तो ये दुष्प्रभाव और बढ़ जाते हैं. इन बुरी आदतों के शिकार लोग या तो अपनी उम्र से 12 साल कम जीते हैं या फिर ऐसे लोग अपनी वास्तविक उम्र से 12 साल अधिक के लगते है.

व्यायाम को बनायें दिनचर्या का हिस्सा

आज के युवा एक ही जगह घंटो बैठकर काम करते हैं, जिसके  कारण उन्हें  कमर दर्द, स्पांडीलिसिस की परेशानी होने लगती है. रिसर्चर्स ने पाया है कि एक्सरसाइज करके वक्त से पहले बूढ़ा होनेवाली प्रक्रिया से बचा जा सकता है और साथ ही अनहेल्दी फूड के कारण होने वाले हानिकारक प्रभावों से भी बचा जा सकता है. दरअसल, आप दिन भर में जितनी कैलोरी लेते है उसे बर्न करना भी जरूरी होता है इसका सबसे सरल उपाय एक्सरसाइज हैं.

ब्यूटी स्लीप

ये बात तो शोधों में भी साबित हो चुकी  हैं कि गहरी नींद की कमी के कारण उम्र बढ़ने की प्रक्रिया तेज होती है और वे लोग जो पर्याप्त नींद नहीं लेते हैं उनकी चयापचय प्रणाली पर असर पड़ता है. 6  घंटे से कम नींद लेने से त्वचा पर झुर्रियां हो जाती हैं और चेहरे से आपकी उम्र बड़ी लगने लगती है. जबकि भरपूर नींद त्वचा में कोलेजन के उत्पादन को बढ़ा देती हैं, जो आपकी त्वचा के लिए जरुरी प्रोटीन होता हैं और ये त्वचा को कई फायदे पहुंचाता है. अब तो आप समझ गए होंगे ब्यूटी स्लीप अपने आप में एक बेहतरीन ब्यूटी ट्रीटमेंट है.

से नो टू स्ट्रेस

नीदरलैंड्स के वैज्ञानिकों ने एक शोध में पाया है कि वे लोग जो ज्यादा टेंशन लेते है उनके ब्रेन का ब्लड सर्कुलेशन ज्यादा कांसन्ट्रेट हो जाता है और वहां ब्लड की मात्रा ज्यादा हो जाती है और ज्यादा प्रेशर पडऩे से लोग उम्र के अधिक दिखने लगते हैं. इसके अतिरिक्त ज्यादा स्ट्रेस की वजह से शारीरिक क्षमताओं पर भी बुरा असर पड़ता है और सेल्स में एजिंग की प्रक्रिया भी तेज हो जाती है. इसलिए क्रोध, चिंता, तनाव, भय, घबराहट, चिड़चिड़ापन, ईर्ष्या जैसे भावनाओं को त्यागें और हमेशा खुश रहने का प्रयास करें और उम्र को अपने ऊपर हावी होने से रोकें.

नमामि देवी नर्मदे के सामने नतमस्तक नोबल

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की नमामि देवी नर्मदे सेवा यात्रा एक महत्वाकांक्षी राजनैतिक अभियान के साथ साथ उनकी धार्मिक आस्थाओं की सार्वजनिक अभिव्यक्ति भी है. यह यात्रा मध्य प्रदेश के 11 जिलों की 90 विधानसभा सीटों से होकर गुजर रही है जिनमे से अधिकांश आदिवासी बाहुल्य हैं. इसलिए राजनैतिक विश्लेषक इसे 2018 के विधानसभा चुनाव की आक्रामक तैयारी भी मान रहे हैं.

इस यात्रा की एक विशेषता इसमे पंडे पुजारियों की भरमार है जिसमे नामी ब्रांडेड से लेकर लोकल पंडे भी पूजे और पूछे जा रहे हैं. यात्रा जहां भी पड़ाव डालती है वहां धार्मिक मंत्रों का उद्घोष, पूजन पाठ, हवन आरती वगैरह जरूर हो रहे हैं जिनमे लोग खासतौर से गांव वाले उत्साह से हिस्सा लेते दान दक्षिणा भी चढ़ा रहे हैं. इस  सरकारी यात्रा मे शामिल होने जन प्रतिनिधियों को सख्त निर्देश हैं और प्रशासनिक अधिकारियों की तो यह मजबूरी हो गई है कि वे इसके स्वागत और प्रस्थान के लिए मौजूद रहें. सेवा यात्रा की ब्रांडिंग के लिए खासतौर से बुलाये गए नोबल पुरुस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी की मौजूदगी इस लिहाज से हैरान कर देने वाली थी कि सत्यार्थी मूल रूप से आर्य समाजी हैं और धार्मिक पाखण्डों वर्ण वाद और अंधविश्वासों के घोर विरोधी रहे हैं, लेकिन उन्हे इस यात्रा के होशंगाबाद जिले मे प्रवेश के दौरान उमरधा गांव में यात्रा का स्वागत करते देखना कई वजहों के चलते चिंतनीय बात थी.

उनके साथ जन प्रतिनिधियों के अलावा थोक मे धर्मगुरु और पंडे पुजारी मौजूद थे जिनहे उनकी हैसियत के मुताबिक और अपने मिजाज के खिलाफ सत्यार्थी ने सर झुकाते प्रणाम भी किया. इनमे प्रमुख या उल्लेखनीय नाम स्वामी अखिलेश्व्ररारनन्द, साध्वी प्रज्ञा भारती, जबलपुर की एक कथावाचक प्रज्ञा भारती, साध्वी योग मायातीर्थ और महंत बालकदास  के हैं. लग ऐसा रहा था कि नोबल पुरुस्कार विजेता या तो अति महत्वाकांक्षी होने के चलते इस राजनैतिक चक्रव्यूह में फंस गए हैं क्योंकि भारत रत्न भी हासिल कर लेने का रास्ता यहीं से होकर जाता है या फिर वे शिवराज सिंह चौहान का वह कर्ज उतार रहे हैं जो नोबल लेने के बाद भोपाल मे स्वागत समारोह आयोजित कर उन पर लादा गया था.

मुद्दे की बात कैलाश सत्यार्थी की आर्यसमाजी छवि है जो इस धार्मिक आयोजन में बिकी हुई सी दिखी, जिसे विवादों से बचाने प्रदूषण पर्यावरण के नाम पर सामाजिक चुनरी पहना दी गई है. बाल अधिकारों की लंबी लड़ाई लड़ने वाले सत्यार्थी को जाने क्यों बाल श्रमिक हमेशा कारखानों, खदानों ढ़ावों और कालीन उद्योग में ही दिखे. बच्चे सबसे ज्यादा धर्म की आड़ में किस तरह शोषित किए जाते हैं यह वे शायद धार्मिक आस्थाओं की नकाब ओढ़े रहने के कारण नहीं देख पाये, न ही यह चिंतन मनन कर पाये कि बच्चों का जबरन मुंडन करना, उन्हे जनेऊ पहनाना, तरह तरह की दीक्षाएं दी जाना भी उनके अधिकारों का हनन हैं जिनसे वे ज़िंदगी भर उबर नहीं पाते.

पिपरिया और होशंगाबाद में कैलाश सत्यार्थी के वे तेवर नदारद दिखे, जिन्होंने उन्हे नोबल के मुकाम तक पहुंचाने में अहम रोल निभाया था कि धार्मिक पाखण्डों के सामने घुटने मत टेको, फिर चाहे हश्र जो भी हो और अब जब दूसरे कई आर्य समाजियों की तरह उन्होंने भी कट्टर हिंदुवादी अपने ही शहर विदिशा के शिवराज सिंह चौहान के आग्रह या आदेश पर घुटने टेक ही दिये हैं, तो मुमकिन है उन्हे भी अनुपम खेर और गजेंद्र चौहान जैसों की तर्ज पर कोई सरकारी बख्शीश दे दी जाये.  

क्यों खास है भारत-इंग्लैंड सीरीज

भारत और इंग्लैंड के बीच वनडे सीरीज शुरू होने में अब कुछ ही दिन बचे हैं और वनडे सीरीज के बाद टी20 सीरीज भी खेली जाएगी. ऐसे में भारतीय टीम सीरीज में शानदार खेल दिखाने की पूरी कोशिश करेगी. साथ ही टीम के कप्तान विराट कोहली सीरीज को जीतने का भरपूर प्रयास करेंगे.

भारत-इंग्लैंड के बीच आज से पहले भी कई वनडे सीरीज हुए हैं, लेकिन 15 जनवरी से शुरू होने वाला सीरीज कफी खास है. जानिए आखिर क्यों खास है भारत-इंग्लैंड सीरीज.

कप्तानी छोड़ने के बाद पहली बार बतौर खिलाड़ी खेलेंगे महेंद्र सिंह धोनी

बांग्लादेश के खिलाफ अपने वनडे करियर का आगाज करने वाले एमएस धोनी कप्तानी छोड़ने के बाद पहली बार बतौर खिलाड़ी टीम का हिस्सा होंगे. धोनी ने हाल में सीमित ओवरों की कप्तानी छोड़ी है. लेकिन उन्होंने खुद को चयन के लिए उपलब्ध रखा था जिसके बाद चयनकर्ताओं ने उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ वनडे और टी20 टीम में चुन लिया था.

अब जब इंग्लैंड के खिलाफ धोनी मैदान पर उतरेंगे तो वह भारत के कप्तान नहीं रहेंगे और वह सिर्फ एक विकेटकीपर बल्लेबाज के रूप में ही भारतीय टीम का हिस्सा होंगे.

पहली बार तीनों प्रारूपों में कप्तानी करेंगे विराट कोहली

महेंद्र सिंह धोनी के सामित ओवरों के पद से कप्तानी छोड़ने के बाद अब विराट कोहली भारत के तीनों प्रारूपों के कप्तान बन चुके हैं. इंग्लैंड के खिलाफ पहले वनडे में जब वह भारतीय टीम की कमान संभालेंगे तो वह पहली बार तीनों प्रारूपों में भारतीय टीम की बागडोर अपने हाथ में रखेंगे. विराट कोहली को टेस्ट कप्तानी पहले ही मिल चुकी थी. लेकिन वनडे और टी20 टीम की कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ही थे.

3 साल बाद युवराज सिंह की वनडे टीम में वापसी

जब चयनकर्ताओं ने टीम का ऐलान किया तो एक नाम ने सभी को चौंका दिया और वो था युवराज सिंह का नाम. 2019 विश्व कप खेलने का सपना संजोय युवराज सिंह के के लिए ये बेहद ही अच्छी खबर थी. लेकिन क्या आपको पता है युवराज जब इंग्लैंड के खिलाफ पहले वनडे में उतरेंगे तो वह लगभग 3 साल बाद भारतीय वनडे टीम में दोबारा खेलने का गौरव प्राप्त करेंगे. युवराज सिंह ने आखिरी वनडे अंतरराष्ट्रीय साल 2013 में 11 दिसंबर को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेला था जिसमें उन्हें बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला था.

इंग्लैंड के खिलाफ हार के सिलसिले को तोड़ने की होगी कोशिश

भारत भले ही टेस्ट सीरीज में इंग्लैंड को 4-0 से हराकर इतरा रहा हो लेकिन क्या आपको पता है कि भारत पिछले तीन मैचों से इंग्लैंड को हरा नहीं पाया है. इंग्लैंड की मेजबानी में खेली गई वनडे सीरीज में इंग्लैंड ने भारत को आखिरी मैच में हराया था और यह सिलसिला ऑस्ट्रेलिया में खेली गई त्रिकोणीय सीरीज तक जारी रहा. त्रिकोणीय सीरीज में भारत को इंग्लैंड ने दोनों मैचों में हराया. इस लिहाज से भारत पहले वनडे को जीतकर इंग्लैंड के खिलाफ हार के सिलसिले को तोड़ने की पूरी कोशिश करेगा.

3 साल बाद टीम में एक साथ खेलेंगे युवराज-धोनी

कभी भारत के बल्लेबाजी क्रम की रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले युवराज सिंह और एमएस धोनी लगभग तीन साल बाद फिर से भारतीय टीम में एक साथ खेलते नजर आएंगे. धोनी और युवराज ने मिलकर भारत को कई ऐतिहासिक और यादगार मैच जिताए हैं. लेकिन साल 2013 में युवराज के टीम से बाहर होने के बाद दोनों एक साथ भारत के लिए नहीं खेल पाए. लेकिन अब जबकि युवराज सिंह को इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए चुन लिया गया तो एक बार फिर से भारत के लिए युवराज और धोनी साथ खेलते नजर आएंगे.

जानिए ‘बौंड’ के बारे में

अगर आप शेयर बाजार में निवेश करने वाले हैं तो आपको बांड बाजार की समझ भी होनी चाहिए. शेयर खरीद कर आप कंपनी में हिस्सेदारी खरीदते हैं और बांड खरीद कर आप इसे जारी करने वाले को एक तरह का उधार देते हैं. इस उधार के लिए बांड जारी करने वाला आपको ब्याज देता है, जिसे कूपन कहते हैं. जब भी सरकार या फिर किसी कंपनी को उधार की जरूरत होती है तो वह बांड जारी करती है. इस पर निवेशकों को तय ब्याज दर की पेशकश की जाती है. अगर आपने किसी बांड में एक लाख रुपये का निवेश किया है और उसका कूपन है 8 फीसद तो बांड के परिपक्व होने तक हर साल आपको 8,000 रुपये मिलेंगे. परिपक्वता की अवधि समाप्त होने पर आपको आपके एक लाख वापस मिल जाएंगे.

बौंड एक तरह की सिक्योरिटी है जिसमें एक निवेशक, किसी निगम या सरकार से बौंड खरीदता है. इस अवधि के दौरान बौंड का जारीकर्ता, बौंड के द्वारा कमाए गए ब्याज को चुकाता है.

कूपन

कूपन बौंड पर मिलने वाला ब्याज है. 10,000 रुपये के बांड पर 5 फीसद का कूपन आपको मैच्योरिटी तक हर साल आपको 500 रुपये की राशि देगा.

यील्ड

परिपक्वता के वक्त मिलने वाली अंतिम राशि को यील्ड टु मैच्योरिटी कहा जाता है. आप बौंड की खरीद-बिक्री भी कर सकते हैं. अगर आपने सस्ते में बौंड खरीदा है तो आपको ज्यादा यील्ड मिलेगा.

मैच्योरिटी

बांड जिस समय में परिपक्व होता है उसे मैच्योरिटी कहते हैं. यह कुछ महिनों से 50 साल तक हो सकता है.

इश्यू साइज

अगर कोई संस्था 1,000 रुपये के फेस वैल्यू वाले 10 लाख बांड बाजार में उतारती है तो इश्यू साइज 100 करोड़ (10 लाख गुणा 1,000 रुपये) का हुआ.

विभिन्न प्रकार के बौंड

पब्लिक सेक्टर के उपक्रम बौंड

 ये सरकार द्वारा अधिकृत और पब्लिक सेक्टर द्वारा जारी किए गए लंबी अवधि के बौंड हैं.

कॉर्पोरेट बौंड

कॉर्पोरेट बौंड किसी कॉर्पोरेशन द्वारा जारी किए जाते हैं. बौंड धारक को कॉर्पोरेशन से समय-समय पर निश्चित अवधि के लिए ब्याज मिलता है.

वित्तीय संस्थाएं एवं बैंक बौंड

जो निवेशक अधिक निवेश करते हैं, उनके लिए बैंक अथवा वित्तीय संस्थायें बौंड जारी करते हैं.

टैक्स सेविंग बौंड

जो निवेशक लंबे समय तक बचत करना चाहते हैं और टैक्स लाभ भी उठाना चाहते हैं उनके लिए ये बौंड सबसे ज्यादा उपयुक्त हैं.

आपकी भी है ये आदत तो फेसबुक से करें तौबा

फेसबुक हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग बन चुका है. कोई पेशेवर नेटवर्किंग के लिये, कोई निजी संबंधों के लिये तो कोई टाइम पास करने के लिये इसका इस्तेमाल करता है. किसी की फोटो या स्टेटस को लाइक करने में तो कोई नुकसान नहीं है लेकिन कुछ ऐसे लक्षण भी होते हैं जिससे पता चलता है कि आप फेसबुक के बुरी तरह आदी हो चुके हैं बिना इसके आपको अपनी वक्त का अंदाजा ही नहीं हो सकता.

हम यहां आपको ऐसे लक्षण बता रहे हैं जिससे आपको सावधान रहना चाहिये.

अगर आप नये लोगों से मिलने के लिये फेसबुक का इस्तेमाल करते हैं

एक अध्ययन से पता चला है कि ऐसे लोगों की फेसबुक की लत लग चुकी होती है जो नये लोगों से इसके जरिये मिलने की कोशिश करते हैं. एक्सपर्ट के अनुसार ऐसे लोग आमतौर पर बहिर्मुखी होते हैं जो सोशल मीडिया पर अपनी निजी बातें आसानी से बता देते हैं लेकिन ये बातें हमेशा सही नहीं होतीं.

ऐसे लोग जो लोगों का ध्यान खींचने के लिये का इस्तेमाल करते हैं

वो लोग जो फेसबुक का इस्तेमाल लोगों का ध्यान खींचने के लिये करते हैं उनको भी इसकी लत लग चुकी होती है. ऐसे लोग बजाय इसके कि अपने अनुभव या आमने सामने बैठकर बातचीत से खुद अपने बारे में जाने, फेसबुक के दोस्तों के फीडबैक के आधार पर खुद का आंकलन करते हैं. ऐसे लोग दूसरों की राय से आसानी से सहमत हो जाते हैं और इनमें आत्म-सम्मान बहुत कम होता है.

ऐसे लोग जो फेसबुक का इस्तेमाल मनोरंजन के लिये करते हैं

शोध से पता चला है कि वो लोग जो फेसबुक का इस्तेमाल सूचना के लिये करते हैं, जैसे ये जानना कि उन्हें छुट्टियों में कहां जाना चाहिये या कौन सी फिल्म देखनी चाहिये, वे भी दरअसल इसके आदी हो चुके होते हैं. आपको बता दें कि सोशल मीडिया अगर आपको वास्तविक दुनियां से काट रहा है तो ये आपके लिये खतरनाक हो सकता है क्योंकि ये वास्तविक जीवन-संबंधों का विकल्प नहीं हो सकता.

CES 2017 में लॉन्च हुए 8 दमदार स्मार्टफोन

5 जनवरी से शुरू हुए CES 2017 में कई कंपनियों ने अपने स्मार्टफोन्स पेश किए. शाओमी से लेकर आसुस तक सभी ने अपने स्पेशल स्मार्टफोन मार्केट में उतारे. इस दौरान दुनिया का पहला 8जीबी रैम से लैस स्मार्टफोन पेश किया गया. साथ ही इशारों पर चलने वाला फोन भी पेश किया गया.

जानिए CES 2017 में लॉन्च हुए कुछ स्मार्टफोन्स के बारे में.

Asus Zenfone 3 Zoom

इस फोन में 5.5 इंच का फुल एचडी एमोलेड डिस्पले दिया गया है, जिसपर कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास 5 का प्रोटेक्शन दिया गया है. यह फोन क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 625 प्रोसेसर और 4जीबी रैम से लैस है. इसमें 128जीबी की इंटरनल स्टोरेज दी गई है. यह फोन एंड्रायड 6.0 मार्शमैलो पर काम करता है. फोटोग्राफी के लिए इसमें डुअल रियर कैमरा दिया गया है.

इसमें से एक कैमरा 12 मेगापिक्सल का है, जिसमें सोनी आईएमएक्स362 सेंसर और f/1.7 अपर्चर स्पीड दी गई है. वहीं, दूसरा रियर कैमरा भी 12 मेगापिक्सल का है, जो 2.3एक्स ऑप्टिकल जूम फीचर से लैस है. इसके साथ ही इसमें 13 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा भी दिया गया है, जो आईएमएक्स214 सेंसर, f/2.0 अपर्चर और स्क्रीन फ्लैश फीचर से लैस है.

Asus ZenFone AR

फोन में 5.7 इंच का सुपर एमोलेड क्यूएचडी डिस्पले दिया गया है. फोन का 79 फीसदी हिस्सा इसकी स्क्रीन है. यह फोन क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 821 प्रोसेसर और 8जीबी रैम से लैस है. सूत्रों की मानें तो कंपनी इस फोन के फोटकोलाज, गैलरी और जेनसर्किल एप्स में Asus ZenUI VR 360 degree एप का स्पोर्ट देगी.

कंपनी ने दावा किया है कि इस फोन में कूलिंग सिस्टम जो फोन को ओवरहीट होने से बचाता है. फोटोग्राफी के लिए इसमें 23 मेगापिक्सल का रियर कैमरा दिया गया है, जो सोनी आईएमएक्स318 सेंसर से लैस है. यह कैमरा TriTech+ ऑटोफोक्स सिस्टम, डुअल-पीडीएएफ, सेंकेड जनरेशन लेजर फोक्स और कन्टीन्यूएस फोक्स से लैस है. इसके साथ ही इसका रियर कैमरा 4-axis OIS और 3-axis EIS को सपोर्ट करेगा, जो 4K वीडियो रिकॉर्डिंग को सपोर्ट करेगी. यह फोन एंड्रायड 7.0 नॉगट पर काम करता है.

Mi MIX

फोन में 6.4 इंच का डिस्पले दिया गया है. यह फोन 2.35 गीगाहर्ट्ज क्वाड-कोर स्नैपड्रैगन 821 प्रोसेसर और 4 जीबी/6जीबी रैम से लैस है. यह फोन डुअल-सिम (नैनो+नैनो) सपोर्ट करता है. इसमें 128 जीबी/256जीबी की इंटरनल स्टोरेज दी गई है. फोटोग्राफी के लिए इसमें 16 मेगापिक्सल का रियर कैमरा दिया गया है, जो पीडीएएफ, एफ/2.0 अपर्चर और डुअल-टोन एलईडी फ्लैश से लैस है.

इसके साथ ही 5 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया गया है. कनेक्टिविटी के लिए इसमें जीपीएस/ ए-जीपीएस, एनएफसी, ब्लूटूथ वी4.2, वाइ-फाइ 802.11एसी और यूएसबी टाइप-सी पोर्ट जैसे फीचर दिए गए हैं. साथ ही इसमें 4400 एमएएच की बैटरी दी गई है, जो क्विक चार्ज 3.0 को सपोर्ट करती है.

Xolo Era 2X

फोन में 5 इंच का ऑन-सेल आईपीएस डिस्पले दिया गया है, जिसपर गोरिल्ला ग्लास का प्रोटेक्शन है. यह फोन 1.2 गीगाहर्ट्ज 64-बिट मीडियाटेक एमटी6737 क्वाड-कोर प्रोसेसर से लैस है. ग्राफिक्स के लिए इसमें माली टी720 जीपीयू दिया गया है. इसमें 32जीबी की इंटरनल मेमोरी दी गई है, जिसे माइक्रोएसडी कार्ड के जरिए 32जीबी तक बढ़ाया जा सकता है.

यह फोन एंड्रायड 6.0 मार्शमैलो पर काम करता है. यह डुअल सिम 4जी VoLTE स्मार्टफोन है. फोटोग्राफी के लिए इसमें 8 एमपी का रियर और 5 एमपी का फ्रंट कैमरा दिया गया है. इसमें फिंगरप्रिंट सेंसर भी दिया गया है. साथ ही इसमें 2500 एमएएच की बैटरी भी दी गई है. कनेक्टिविटी के लिए इसमें वाइ-फाइ, जीपीएस, ए-जीपीएस, ब्लूटूथ 4.0, 3.5 एमएम ऑडियो पोर्ट और माइक्रोयूएसबी 2.0 पोर्ट जैसे फीचर्स दिए गए हैं.

ZTE Blade V8 Pro

फोन में 5.5 इंच का फुल एचडी डिस्पले दिया गया है, जिसपर कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास 3 का प्रोटेक्शन दिया गया है. यह फोन 2 गीगाहर्ट्ज क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 625 ऑक्टा-कोर प्रोसेसर और 3जीबी रैम से लैस है. ग्राफिक्स के लिए इसमें एड्रेनो 560 जीपीयू दिया गया है. इसमें 32जीबी की इंटरनल स्टोरेज दी गई है, जिसे माइक्रोएसडी कार्ड के जरिए 128जीबी तक बढ़ाया जा सकता है. यह फोन एंड्रायड 6.0 मार्शमैलो पर काम करता है. यह डुअल सिम स्मार्टफोन है.

फोटोग्राफी के लिए इसमें दो 13 मेगापिक्सल के रियर और 8 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया गया है. इसका रियर कैमरा डुअल-एलईडी फ्लैश, पीडीएएफ, फेस डिटेक्शन जैसे फीचर्स से लैस है. इसके साथ ही 3140 एमएएच की बैटरी दी गई है. कंपनी ने दावा किया है कि यह बैटरी 24 घंटे का टॉकटाइम और 23 दिनों का स्टैंडबाय टाइम दिया गया है.

गैस सिलेंडर पर भी बचा सकते हैं टैक्स

बीमा करवाना बहुत जरूरी है. मध्यम वर्गीय परिवारों और निम्न वर्गीय परिवारों के लिए और भी जरूरी है. पर क्या आप जानते हैं कि आप सिर्फ घर, गाड़ी, दुकान और स्वयं के बीमा के अलावा रसोई में रखे अपने गैस सिलेंडर की भी बीमा करवा सकते हैं? इसके अलावा आपके गैस सिलेंडर की एक निश्चित आयु होती है, यानी कि आपके सिलेंडर की भी एक्सपायरी डेट है. पर जब आपको एक्सपायरी डेट होने का पता ही नहीं तब आप डेट देखकर सिलैंडर कैसे लेंगे?

गैस सिलेंडर से हादसा होने पर उपभोक्ता को कंपनी की ओर से 50 लाख रुपए तक का बीमा मिलता है.  जानकारी न होने के कारण उपभोक्ता इसका लाभ नहीं उठा पाते.

कैसे पता करें एक्सपायरी की तारीख?

गैस सिलेंडर की एक्सपायरी डेट पता करना बेहद आसान है. गैस सिलेंडर की पट्टी पर ही एक कोड लिखा होता है. अगर आपको कोड पढ़ना आ गया तो आप गैस सिलेंडर की एक्सपायरी पता कर सकते हैं.

जब मिले एक्सपायर्ड सिलेंडर

अगर आपको एक्सपायर्ड सिलेंडर डिलीवर किया गया है तो आप एजेंसी को सूचना देकर सिलेंडर को रिप्लेस करवा सकते हैं. अगर गैस एजेंसी रिप्लेसमेंट से इनकार कर दे तो आप प्रशासनिक अधिकारी से शिकायत कर सकते हैं. अगर इसके बाद भी आपकी समस्या न सुलझे तो आप कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत दर्ज करवा सकते हैं.

आपके रसोई में ही रखें हैं 50 लाख

आरटीआई से प्राप्त जानकारी के मुताबिक गैस कनेक्शन लेते ही किसी भी उपभोक्ता का 10 से 25 लाख रुपए तक का दुर्घटना बीमा हो जाता है. इसके तहत गैस सिलेंडर से हादसा होने पर पीड़ित बीमा क्लेम कर सकते हैं. इसके अतिरिक्त अगर दुर्घटना से पूरी परिवार पीड़ित है तो दुर्घटना होने के 24 घंटे के अंदर ही संबंधित एजेंसी और लोकल थाने को सूचना देने पर 50 लाख तक के बीमा का प्रावधान है. दुर्घटना होने पर जरूरी प्रमाणपत्र भी उपलब्ध कराने होते हैं.

बीमा लेने से पहले ध्यान रखें

बीमा क्लेम करने से पहले आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए.

– आपके गैस सिलेंडर का कनेक्शन वैध होना चाहिए.

– ध्यान रहे कि सिलेंडर के साथ आप आईएसआई मार्क वाले चूल्हे का ही इस्तेमाल कर रहे हों.

– गैस कनेक्शन लेते समय एजेंसी द्वारा दिए गए पाइप-रेग्युलेटर का ही इस्तेमाल कर रहे हों.

– गैस चूल्हे का स्थान, सिलेंडर रखने के स्थान से ऊंचा होना चाहिए.

– गैस सिलेंडर और गैस चूल्हे के आस पास बिजली का कोई खुला तार न हो. 

मंच पर भिड़ गए अखिलेश और मुलायम, देखिए वीडियो

समाजवादी पार्टी में जारी पिता-पुत्र के घमासान के बीच मुलायम सिंह यादव ने एक बार फिर अपना रुख बदला है. सोमवार रात मुलायम सिंह यादव ने सबको चौंकाते हुए कहा कि यूपी विधानसभा चुनाव के बाद अखिलेश ही सूबे के अगले मुख्यमंत्री होंगे. साथ ही उन्होंने दावा किया कि पार्टी टूटने का सवाल ही नहीं है.

मुलायम ने सोमवार को कहा कि यूपी में जल्द ही वह पार्टी के लिए चुनावी अभियान की शुरुआत करेंगे. मुलायम ने सोमवार को चुनाव आयोग से मुलाकात के बाद कहा था कि उनका अखिलेश से कोई विवाद नहीं है. वहीं एक सप्ताह के भीतर लगातार दूसरी बार मुलायम सिंह ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त नसीम जैदी से मुलाकात की और साइकिल पर अपना दावा जताने के साथ ही अपने चचेरे भाई राज्यसभा सदस्य रामगोपाल यादव पर पार्टी में झगड़ा लगाने का आरोप लगाया. रामगोपाल यादव का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा कि उसी ने अखिलेश को बहका दिया है.

वहीं इस बीच अमर सिंह ने भी अपनी सफाई जारी की है. अमर सिंह ने अखिलेश की पढ़ाई से लेकर शादी तक में अपनी भूमिका का हवाला देते हुए कहा कि अखिलेश के लिए उन्होंने क्या-क्या किया है. दूसरी तरफ खुद अमर सिंह ने कहा कि पार्टी में जो कुछ हो रहा है इसके पीछे उनकी कोई भूमिका नहीं है. अखिलेश मेरे बेटे जैसे हैं और मैने समाजवादी पार्टी में कोई झगड़ा नहीं लगवाया. अमर सिंह ने कहा कि मेरे ऊपर लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं.

इस बीच यूट्यूब पर एक वीडियो वायरल हो रहा है. इस वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मंच पर ही मुलायम सिंह यादव से भिड़ गए.

आप भी देखिए ये वायरल वीडियो

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