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खुशबू की तरह हम

किस फूल से बिछुड़े हैं कि फिरते हैं परेशां

जंगल में भटकती खुशबू की तरह हम

कौन सी जमीं थी जो खो दी है हम ने

उड़ते फिरते हैं आवारा अब्र जैसे हम

खुद को ही खोया था खुद को ही पाना था

दुनिया को दुनिया में ही खोजा किए हम

गर्दिश में थे सितारे पर हौसले थे बुलंद

कदमों से तेज रास्ते भागा किए हरदम

मुहब्बत की खुशबू थी, तेरा फसाना था

तनहाइयों को जिस से सजाया किए हम

अश्कों के तबस्सुम में आहों के तरन्नुम में

मुहब्बत के ही नगमे गाया किए हम.

       

– डा. रेणु मिश्रा

 

जनता की बेचारगी

नोटबंदी के कारण देशभर के करोड़ों लोग दिनों नहीं, सप्ताहों तक अपने ही कमाए पैसे लेने के लिए बैंकों और एटीएमों के सामने कतारों में खड़े रहे पर कहीं लंबीचौड़ी विद्रोह की वारदातें नहीं हुईं. नरेंद्र मोदी चाहे उसे नोटबंदी पर सहमति कह लें पर यह असल में एक डरपोक, कमजोर, बिखरे, मंदबुद्घि, अंधविश्वासी, स्वार्थी और भाग्यवादी समाज का लक्षण है. यह समाज आज ही नहीं, सदियों से ऐसा ही रहा है और हमेशा मुट्ठीभर आकाओं के आगे देश की बहुसंख्या नतमस्तक होती रही है.

यह गुण भारतीय समाज में ही हो, ऐसा नहीं. कमोबेश हर देश, हर समाज ऐसा ही होता है. बड़ों का या ताकतवरों का हुक्म मानना हर समाज बचपन से सिखाता है. हर संकट का पहला मुकाबला संघर्ष नहीं, पलायन ही होता है. आदमी अपने ऊपर हुए अकारण आक्रमण का मुकाबला तब करता है जब उस के पास भागने की जगह न हो. गांधी ने 1915 से ले कर 1947 तक भारत की स्वतंत्रता के लिए आंदोलन चलाए पर ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ देश की, तब की 30 करोड़, जनता कब एकसाथ जनविद्रोह में खड़ी हुई? इतिहासकार बताते हैं कि इस देश में कभी भी एकसाथ 20,000 से ज्यादा ब्रिटिश गोरे नहीं रहे पर वे 30 करोड़ लोगों को हांकने में सफल रहे थे. इस का अर्थ यह नहीं, कि लोग ब्रिटिश शासन का समर्थन करते थे. असल में न उन के पास हिम्मत थी ब्रिटिश आक्रमणकारियों के सामने खड़ा होने की, न जररत.

उस से पहले यही बात मुसलिम आक्रमणकारियों के साथ हुई. ऐसा ही शकों, हूणों, ग्रीकों के साथ भी हुआ. अपने हिंदू राजाओं के खिलाफ बगावत के सुबूत भी बहुत कम हैं. रूस में जारों ने अपनी जनता पर खूब अत्याचार किए. उस के बाद 1917 में क्रांति हुई, लोग उठ खड़े हुए पर कितने दिनों के लिए और फिर क्या हुआ? रौमनौव डायनैस्टी का खूंखार राज 1613 से 1917 तक चला और उस के बाद जनक्रांति ने लेनिन, स्टालिन और ख्रुश्चेव जैसे तानाशाहों को जगह दे दी. माओत्से तुंग ने चीन से क्वांग डायनैस्टी का अंत किया पर उस के बाद माओ की पार्टी ज्यादा खूंखार साबित हुई. सर्वाधिक हत्याएं कराने वालों में स्टालिन, हिटलर, माओ शामिल हैं और किसी देश में भी जनाक्रोश के कारण तानाशाह नहीं गए.

जनता की शांति को जनता की सहमति न समझें, कमजोरी और लाचारी समझें. नोटबंदी ने रातोंरात हर घर को मुहताज बना दिया. भुखमरी तो नहीं हुई पर व्यर्थ की कतारों का जनसमर्थन हुआ, यह कहना गलत होगा. जनता का कोई भी हिस्सा कभी भी दूसरों की गलती के लिए खुद को दंड देने को तैयार न होगा. सरकार का फर्ज था कि वह कालेधन वालों को पकड़े पर उस ने गुनहगारों और शरीफों दोनों को एक कतार में खड़ा कर दिया और 50 दिन भी बीत गए, कुछ नहीं हुआ. जनता 50 दिन तो क्या, 50 साल और 500 सालों तक इंतजार करती रही है, इतिहास गवाह है.भीरू हिंदू जनता तो वैसे भी कुंभों और मंदिरों में ही नहीं, फिल्मों के लिए भी लाइनों में लगती है, दारू की दुकान पर भी. फिर सरकारी फरमान का विरोध करेगी, ऐसा सोचा भी नहीं जा सकता. हां, देश का बुद्घिजीवी असमंजस में रहा और कालेधन वा लों की टांगें कटेंगी, सोच कर खुश होता रहा और उसे उन टांगों की चिंता नहीं रही जो बैंकों के सामने खड़ी थीं. ज्यादा अफसोस और रंज की बात यह है कि सरकारी अनाचार ईर्ष्या की भेंट चढ़ गया.

सीताएं

जो त्याग देते हैं

वे राम होते हैं

और जो त्याग दी जाती हैं

वे सीताएं कहलाती हैं

रोतीकलपती, अपने ईष्ट को

पूज्य मानती, रखती हैं व्रत

उस की लंबी उम्र के लिए

सूखे हुए मुंह,

अधूरी इच्छाओं को ले कर

जीती हुई ये सीताएं

देवी कहलाती हैं

और इन के राम

वे तो राजा होते हैं

तख्तोताज पर विराजमान

राजा करते हैं न्याय

न्याय में छिपे अन्याय को

कौन देखे कौन कहे

न जाने कितनी सीताओं का

जीवन नष्ट करने की सजाएं

इन रामों को कौन दे.

        

– गीता यादवेंद

अलटाबा के नाम से जाना जाएगा याहू

मशहूर सर्च इंजन कंपनी याहू जिसकी अमेरिकी वायरलेस कम्यूनिकेशन सर्विस प्रोवाइडर वेराइजन ने पिछले साल जुलाई में महज 4.8 अरब डॉलर में अधिग्रहण किया था, अब जल्द ही 'अलटाबा' के नाम से जानी जाएगी. इसके साथ ही याहू के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मैरिसा मेयर के भी कंपनी के बोर्ड से इस्तीफा देने की खबर है.

गौरतलब हो कि पिछले साल जुलाई में वेराइजन ने याहू के ईमेल, डिजिटल एडवरटाइजिंग और मीडिया कारोबार को 4.83 अरब डॉलर में खरीदने का सौदा किया था. तब से सौदे को अंतिम रूप देने पर काम चल रहा है. लेकिन हाल ही में याहू के करीब एक अरब उपयोगकर्ताओं का डाटा हैक होने की खबर के

बाद कहा जा रहा था कि वेराइजन सौदे और उसकी कीमत पर पुनर्विचार कर रही है. वहीं याहू के इस ताजा बयान के बाद पता चलता है सौदा पहले की तरह ही बने रहने की उम्मीद है.

फोटो शेयरिंग वेबसाइट फ्लिकर और धीरे-धीरे लोकप्रियता हासिल कर रही माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट टंबलर याहू की दो संपत्तियां है जिसमें विकास की काफी गुंजाइश है.

याहू ने 1994 में अपनी वेबसाइट, ई-मेल और मैसेंजर सर्विस शुरू कर इंटरनेट दुनिया में कदम रखा था. बता दें उस समय इंटरनेट का पूरे विश्व में व्यवसायिक इस्तेमाल शुरू हुआ था. बहुत कम समय में याहू ने इंटरनेट की दुनिया पर कब्जा जमा लिया था.

आईआरसीटीसी ने लॉन्च किया नया ऐप

रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने नया यात्री मोबाइल ऐप 'आईआरसीटीसी रेल कनेक्ट' लॉन्च किया है. डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और टिकट बुकिंग को आसान बनाने के लिए यह ऐप लॉन्च किया गया है.

लेटेस्ट टेक्नॉलजी से लैस आईआरसीटीसी का यह ऐप IRCTC Rail Connect नाम से जाना जाएगा. यह पुराने IRCTC Connect की जगह लेगा.

ऐप में क्या है नया?

– आईआरसीटीसी रेल कनेक्ट की सबसे बड़ी खासियत है कि यह irctc.co.in से कनेक्टेड है. पहले के ऐप में वेबसाइट और ऐप सिंक न होने से समस्या आती थी.

– नया ऐप पहले से ज्यादा सुरक्षित है और इसमें पिन आधारित लॉग इन प्रणाली है, जिसमें बार-बार यूजरनेम और पासवर्ड डालने की जरूरत नहीं होती.

– नया ऐप आईआरसीटीसी की ई-वॉलेट के साथ काम करेगा, ताकि तेजी से और आसानी से भुगतान हो सके.

– नए ऐप में 40 से ज्यादा बैंकों से नेट बैंकिंग, डेबिट-क्रेडिट कार्ड, पेटीएम, पेयू, मोबिक्विक आदि से भुगतान की सुविधा है.

– यह ऐप नए नेक्स्ट जेनरेशन ई-टिकटिंग सिस्टम पर बेस्ड होगा, जिसके जरिए तेजी और आसानी से ट्रेन टिकट की बुकिंग की जा सकेगी.

– इस ऐप की मदद से आपको अपने सफर से संबंधित सारी जानकारी मिलेगी. टिकट की बुकिंग और इसे कैंसल करना पहले से ज्यादा आसान होगा.

– इसके साथ ही आप पुराने रिजर्वेशन की भी जानकारी ले सकते हैं. खास बात यह है कि इसमें पुरानी जानकारी सेव हो जाएगी, जिससे आपको बार-बार अपनी डीटेल्स नहीं भरनी पड़ेगी.

सिर्फ एंड्रॉयड फोन के लिए उपलब्ध

– आईआरसीटीसी रेल कनेक्ट फिलहाल एंड्रॉयड डिवाइस के लिए उपलब्ध है. इसे आप गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं.

– डाउनलोड और इंस्टॉल करने के बाद आपको लॉगइन करना होगा.

– अगर आपके पास पहले आईआरसीटीसी का अकाउंट है तो आप सीधे लॉगइन कर सकते हैं. अगर आप नए यूजर हैं तो नया अकाउंट बनाएं.

– इसके बाद आपको एक चार अंकों का पिन सेट करने के लिए कहा जाएगा. पहले लॉगइन के बाद से जब आप कभी भी लॉगइन करेंगे तो बिना यूजरनेम या पासवर्ड डाले आप केवल पिन डालकर ऐप खोल सकेंगे.

 

बर्थडे स्पेशल: जब क्लास में भी ग्लव्स पहनकर गए थे द्रविड़

भारतीय क्रिकेट के ‘मिस्टर भरोसेमंद’, ‘दि वॉल’ आदि नामों से पहचाने जाने वाले राहुल द्रविड़ आज अपना 43वां जन्मदिन मना रहे हैं. द्रविड़ भारतीय क्रिकेट के महान बल्लेबाजों में से एक हैं. उनकी गिनती ना सिर्फ भारत के बल्कि विश्व के महान बल्लेबाजों में की जाती है. वे सचिन तेंदुलकर के बाद एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने 10 हजार से ज्यादा रन बनाये हैं.

टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने वाले खिलाड़ियों में द्रविड़ को चौथा स्थान प्राप्त है, उनसे ऊपर भारत के सचिन तेंदुलकर, आस्ट्रेलिया के रिकी पोंटिंग और दक्षिण अफ्रीका के जैक कैलिस के बाद उनका नाम है. राहुल बल्लेबाजी में अपनी तकनीक के कारण विश्वप्रसिद्ध हैं.

करियर रिकॉर्ड

प्रथम क्रम पर बल्‍लेबाजी करते हुए द्रविड़ ने टेस्‍ट और वनडे, दोनों में ऐसी पारियां खेलीं, जो उनके करियर के लिहाज से मील का पत्‍थर रहीं. द्रविड़ की डिफेंस इतनी मजबूत थी कि उनके विकेट को हासिल करना दुनिया के तमाम मशहूर गेंदबाजों की चाहत हुआ करती थी.

राहुल द्रविड़ ने 164 टेस्ट और 344 वनडे मैच खेले हैं. जिनमें टेस्ट में 13,288 और वनडे में 10,889 रन बनाये हैं. वर्ष 2011-12 में उन्होंने दोनों ही फॉरमेट में अपना अंतिम मैच खेला. वर्ष 2012 में इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्‍यास लेने के बाद भी द्रविड़ कोच के तौर पर क्रिकेट से जुड़े हुए हैं.

टेस्ट

11 जनवरी 1973 को मध्‍यप्रदेश के इंदौर शहर में जन्‍मे राहुल शरद द्रविड़ ने जून 1996 में टेस्‍ट करियर का आगाज किया था. टेस्ट में द्रविड़ के नाम 36 शतक और 63 अर्द्धशतक हैं.

इसमें पाकिस्‍तान के खिलाफ रावलपिंडी में खेली गई 270 रन की पारी (वर्ष 2004)और ऑस्‍ट्रेलिया के खिलाफ एडीलेड में खेली गई 233 रन की बेहतरीन पारी (वर्ष 2003) शामिल रही. इन दोनों टेस्‍ट मैचों में टीम इंडिया को जीत दिलाने में द्रविड़ के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता. टेस्‍ट करियर में राहुल ने पांच दोहरे शतक जमाए और पाकिस्‍तान के खिलाफ 270 उनका टॉप स्‍कोर रहा.

वनडे

द्रविड़ ने 1996 में टेस्ट और एकदिवसीय मैच में डेब्यू किया था. हालांकि वनडे के लिहाज से द्रविड़ की बैटिंग को आदर्श नहीं माना जाता था क्‍योंकि वे हवा में शॉट बेहद कम मौकों पर खेलते थे. लेकिन कई मौकों पर वे बेहद तेज गति से बैटिंग करके अपने आलोचकों को हैरान भी करते रहे. वनडे में द्रविड़ के नाम 12 शतक और 83 अर्द्धशतक हैं.

जब स्कूल की क्लास में भी ग्लव्स पहनकर लिखते थे राहुल

राहुल द्रविड़ के बारे में एक रोचक कहानी है. कहा जाता है कि क्रिकेट के कारण राहुल हमेशा क्लास छोड़ देते थे. एक बार वे क्लास में पहुंचे तो ग्लव्स पहनकर नोट्‌स लिख रहे थे. उनके साथियों ने उनका यह कहकर मजाक उड़ाया था कि वो क्लास की सबसे सुंदर लड़की को इंप्रेस करने के लिए ऐसा कर रहे हैं, तो द्रविड़ ने कारण बताया कि वो लड़की तो इंप्रेस है ही दरअसल वे अपने नये ग्लव्स को अपनी हाथों में सेट करने के लिए ऐसा कर रहे हैं.

सबसे सेक्सी खिलाड़ी की उपाधि

वर्ष 2004 में राहुल द्रविड़ को एक मैंगजीन द्वारा कराये गये सर्वे में सबसे सेक्सी खिलाड़ी के रूप में चुना गया था. उस सर्वे में द्रविड़ को सानिया मिर्जा और युवराज सिंह से ज्यादा वोट मिले थे. द्रविड़ की पत्नी विजेता एक सर्जन हैं. इनके दो बच्चे हैं समित और अन्वेय. द्रविड़ हिंदी, अंग्रेजी, मराठी और कन्नड़ भाषा अच्छे से जानते हैं.

जब दर्ज करवाना हो कंज्यूमर कोर्ट में मामला

आपके साथ भी कई बार दुकानदार या विक्रेता ने धोखाधड़ी की होगी. और कंज्यूमर कोर्ट के बारे में तो आपने सुना ही होगा. पर सही जानकारी न होने के कारण बहुत से लोग उपभोक्ता मंच पर शिकायत दर्ज नहीं करवाते. अपना नुकसान कर के भी आप शांत बैठे रहते हैं, क्योंकि आप इन झंझटों में नहीं पड़ना चाहते. पर कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत करना बेहद आसान है और यहां फैसला भी आम कोर्ट के मुकाबले जल्दी होता है.

आज हम आपको कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत दर्ज करने और उसकी सुनवाई की प्रक्रिया के बारे में बता रहे हैं. आपको जागरूक उपभोक्ता बनना जरूरी है. पर अगर फिर भी आपके साथ कभी धोखाधड़ी हो जाए तो आप कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत दर्ज करवा सकते हैं.

कौन है कंज्यूमर?

किसी चीज को खरीदने या सेवाएं लेने के लिए दाम चुकाना जरूरी है. यदि आपने कोई चीज खरीदी ही नहीं है तो आप इसके कंज्यूमर नहीं हो सकते. अगर कोई चीज गिफ्ट में मिली है तो यह जरूरी है कि गिफ्ट देने वाले ने उस वस्तु का दाम चुकाया हो, तभी आप उस वस्तु में डिफेक्ट आने पर कंज्यूमर फोरम में शिकायत कर सकते हैं. गिफ्ट देने वाले से आपको खरीदी हुई चीज की रसीद लेनी होगी. रसीद एक सबूत की तरह है, कि आपने उस चीज के पूरे पैसे चुकाए हैं.

जब न हो रसीद

जब किसी कारण आपके पास रसीद न हो तब आप अन्य चीजों से भी काम चला सकते हैं. जैसे- कुछ खरीदने से पहले दिए हुए एडवांस की रसीद या विजिटिंग कार्ड पर लिखा बैलेंस भुगतान आदि. पर हर मामले में ऐसा नहीं हो सकता, इसलिए दाम चुकाने का प्रमाण ही आपको सही मायने में कंज्यूमर बना सकता है. यह भी जान लें कि जो व्यापारी ग्राहकों को बेचने के लिए सामान खरीदते हैं, वे कंज्यूमर की श्रेणी में नहीं आते.

कौन करा सकता है मामला दर्ज?

कंज्यूमर कोर्ट में कंज्यूमर या उपभोक्ता खुद या कोई पंजीकृत स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठन शिकायत दर्ज कर सकते हैं.

नाबालिग बच्चों के लिए माता-पिता शिकायत कर सकते हैं. पति-पत्नी एक दूसरे के लिए शिकायत कर सकते हैं और गिफ्ट के मामले में वस्तु का वास्तविक इस्तेमाल करने वाला शिकायत कर सकता है.

ये है सुनवाई की प्रक्रिया

– कंज्यूमर कोर्ट में केस दायर करने के लिए सबसे पहले प्राथमिक सुनवाई होती है, जो शिकायत दर्ज करने के 21 दिनों के भीतर ही कर ली जाती है.

– कोर्ट में आप विवाद शुरू होने के 2 साल के अंदर शिकायत कर सकते हैं.

– उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अनुसार कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत करने के लए तकनीकी रूप से कंज्यूमर होना जरूरी है.

किसकी सुनवाई कहां?

– 20 लाख रुपये तक की रकम के लिए डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत कर सकते हैं.

– 20 लाख से 1 करोड़ तक के मामले स्टेट कंज्यूमर कोर्ट जा सकते हैं.

– 1 करोड़ से ज्यादा के मामले के लिए नैशनल कंज्यूमर कमिशन मे मामला दर्ज होगा. कंज्यूमर अपनी शिकायत अपने जिले के कोर्ट में कर सकता है, जिसमें प्रतिवादी का ऑफिस/दुकान /शोरूम आदि हो. कंज्यूमर अपने हिसाब से आसपास की अदालत नहीं चुन सकता.

ऐसे करें शिकायत

डॉक्युमेंट: खरीद की रसीद, चिट्ठी, रिमाइंडर या कोई भी ऐसा डॉक्युमेंट, जो साबित करता हो कि आपकी शिकायत बनती है.

ऐप्लिकेशन: ऐप्लिकेशन सादे कागज पर दी जा सकती है.

सेवा में- कंज्यूमर रेड्रेसल फोरम, जगह का नाम

अपना नाम पता vs जिसके खिलाफ केस बनता हो

विषय- यहां संक्षिप्त में अपनी शिकायत के बारे में बताएं

ब्यौरा- अपनी शिकायत के बारे में सिलसिलेवार तरीके से लिखें. किसी खास घटना से जुड़े (रिफ्यूजल या फॉर्मल रिक्वेस्ट आदि) डॉक्युमेंट्स होने पर उसे भी अटैच करें.

प्रार्थना – ऐप्लिकेशन के अंत में रिक्वेस्ट के तौर पर लिखें कि आप कोर्ट से क्या चाहते हैं. मिसाल के तौर पर सामान बदलना चाहते हैं, नुकसान की भरपाई चाहते हैं, मानसिक परेशानी के लिए मुआवजा चाहते हैं, मुकदमे का खर्च चाहते हैं या फिर इनमें से सब चाहते हैं. इसे लिखना इसलिए भी जरूरी है कि कोर्ट उस आधार पर ही शिकायत करने वाले को राहत पहुंचाती है. ऐसा न लिखने से कोर्ट की दी हुई किसी भी पेनल्टी पर प्रतिवादी विरोध कर सकता है.

फीस- 20 लाख रुपये तक के में 500 रुपये

जब न हो कोर्ट के आदेश का पालन

कंज्यूमर के हक में आए फैसले पर अगर प्रतिवादी अमल नहीं करता है, तो उसे दस हजार रुपये की पेनल्टी और तीन साल तक की सजा दी जा सकती है. सजा भुगतने के बाद भी आदेश का पालन करना बाकी रहता है तो जरूरत के मुताबिक आदेश का पालन करवाने के लिए प्रॉपर्टी भी जब्त की जा सकती है.

मुझे हस्तमैथुन करने की आदत है. सेक्स के दौरान मैं फौरन पस्त हो जाता हूं. बीवी मुझे नामर्द कहती है. क्या करूं.

सवाल

मेरी शादी को 6 साल हो चुके हैं. मुझे हस्तमैथुन करने की आदत है. दिन में 2 बार हस्तमैथुन करता हूं, इस वजह से मेरा अंग पतला, छोटा और टेढ़ा हो गया है. सेक्स के दौरान मैं फौरन पस्त हो जाता हूं. लिहाजा, बीवी मुझे नामर्द कहती है. मैं क्या करूं?

जवाब

जब आप की शादी हो चुकी है, तो हस्तमैथुन करने की क्या जरूरत है? वैसे, हस्तमैथुन करने से अंग के आकारप्रकार में कोई फर्क नहीं पड़ता. आप हस्तमैथुन करना बंद कर दें और अच्छी तरह फोरप्ले कर के हमबिस्तरी करें. ऐसा करने से आप जरूर कामयाब होंगे.

 

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

मैं एक लड़के से प्यार करती हूं. जब वह सेक्स के लिए कहता है, तो मैं मना कर देती हूं. मैं क्या करूं.

सवाल

मैं बीए के तीसरे साल की छात्रा हूं और 8 महीने से एक लड़के से प्यार करती हूं. जब वह सेक्स के लिए कहता है, तो मैं मना कर देती हूं. इस से वह नाराज हो जाता है और सोचता है कि मैं उसे प्यार नहीं करती. अब वह मुझ से हमेशा के लिए दूर अपने गांव जाना चाहता है, पर मैं उस के बगैर नहीं रह सकती. मैं क्या करूं?

जवाब

शायद वह सेक्स के लिए ही गांव जाने का नाटक कर रहा होगा. अगर वह वाकई आप से प्यार करता है, तो उसे आप से शादी कर लेनी चाहिए. इस के बाद आप दोनों जी भर कर सेक्स कर सकते हैं.

 

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

ये हैं दुनिया के 10 सबसे लोकप्रिय खेल

दुनिया में कई खेल खेले जाते हैं लेकिन कुछ ही खेल ऐसे हैं जिनका खुमार दर्शकों पर सिर चढ़ कर बोलता है. इन खेलों के प्रति दर्शकों की दीवानगी किसी जुनून से कम नहीं होती.

जानिए दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेलों के बारे में..

फुटबॉल

फुटबॉल दुनिया का सबसे लोकप्रिय खेल है. फुटबॉल की लोकप्रियता का अंदाजा फीफा के 208 सदस्य देशों की संख्या को देखकर ही लगाया जा सकता है. फुटबॉल को किंग ऑफ द होल वर्ल्ड भी कहा जाता है.

क्रिकेट

दुनिया में सबसे ज्यादा खेले जाने वाले खेलों की इस सूची में क्रिकेट दुसरे नंबर पर आता है. लेकिन भारत में क्रिकेट एक धर्म है. क्रिकेट का सबसे ज्यादा जनून भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, वेस्टइंडीज में है. पूरी दुनिया में क्रिकेट के लगभग 4 अरब प्रशंसक हैं.

हॉकी

हॉकी को दुनिया में तीसरा सबसे लोकप्रिय खेल माना जाता है. हॉकी के बारे में कहा जाता है कि इसे ईसा से दो हजार वर्ष पूर्व ईरान में खेला गया था और बाद में इसे ओलंपिक प्रतियोगिता में शामिल किया गया. ओलंपिक में हॉकी पहली बार 21 अक्टूबर, 1908 को लंदन में खेली गई थी.

टेनिस

इतिहासकारों की मानें तो टेनिस की शुरूआत 12वीं शताब्दी में फ्रांस में हुई थी, जहां गेंद को हथेली से मार कर खेला जाता था. 16वीं सदी में रैकेट प्रयोग में आया था. एक साल में टेनिस के चार ग्रैंड स्लैम (ऑस्ट्रेलियाई ओपन, फ्रेंच ओपन, विंबलडन, यूएस ओपन) खेले जाते हैं.

वॉलीबॉल

वॉलीबॉल दुनिया के सबसे आसान खेलो में से एक है जिसे दुनिया के हर एक कोने में खेला जाता है. ओलंपिक में वॉलीबॉल सबसे पहले 1964 में खेला गया था. वॉलीबॉल को यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, एशिया और अमेरिका में सबसे ज्यादा खेला जाता है.

टेबल टेनिस

दुनिया के लोकप्रिय खेलों में शुमार टेबल टेनिस को पिंग पॉन्ग भी कहा जाता है. 1922 में इसकी शुरूआत इंग्लैंड में हुई थी. 71 देशों में यह खेल खेला जाता है.

बेसबॉल

एक बल्ले और गेंद से खेला जाने वाला खेल बेसबॉल सबसे पहले इंग्लैंड में 1846 में खेला गया था. बेसबॉल अमेरिकी खेल है. इस खेल को अंतरराष्ट्रीय खेल भी संयुक्त राज्य अमेरीका ने ही बनाया था. लेकिन अब यह खेल क्यूबा में ज्यादा लेकप्रिय हो रहा है.

बास्केटबॉल

अमेरिकी खेल बास्केटबॉल 19वीं शताब्दी में लोकप्रिय हुआ. बास्केटबॉल अमेरिका, चीन, कनाडा. फिलिपींस में बहुत पसंद किया जाता है.

गोल्फ

दुनिया की महंगे खेलों में से एक गोल्फ की शुरूआत 13वीं शताब्दी में स्कॉटलैंड में हुई थी. यूरोप, एशिया, अमेरिका और कनाडा में यह खेल सबसे ज्यादा खेला जाता है.

अमेरिकी फुटबॉल

अमेरिकी फुटबॉल अमेरिका और कनाडा में काफी लोकप्रिय है. इसे खासकर यूरोप, अफ्रीका, एशिया, ऑस्ट्रेलिया में खेला जाता है.

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