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ऐसे संवारें अपने आशियाने को

आजकल घरों को सजाने के लिए जितनी नईनई चीजों का इस्तेमाल हो रहा है उतना पहले कभी नहीं हुआ. जो ट्रैंड चल रहा है वह बहुत मैचिंगमैचिंग वाला नहीं है. जब आप भी अपने घर को सजाएं तो अलगअलग चीजों को मिक्सअप करने से न हिचकिचाएं. हमेशा ध्यान रखें कि घर को बहुत अधिक परफैक्ट भी नहीं लगना चाहिए. घर सजाते समय जरूरी है कि कौन सा ट्रैंड चल रहा है, आप का बजट कितना है, आप को कितने समय में घर तैयार करना है के साथसाथ इस बात का भी ध्यान रखें कि आप कैसे घर में रहने में सहज महसूस करेंगे. ट्रैंड के साथसाथ अपनी पसंद का ध्यान भी रखें तभी आप इस में रहने का आनंद उठा पाएंगे.

सिमिट्री का ध्यान रखें

घर को एक सिमिट्री में सजाएं. इस से न केवल आप का घर सुंदर लगेगा, बल्कि आप के डैकोरेटिव पीसेस का आकर्षण भी बढ़ेगा. आप ने कितनी भी सुंदर और कलात्मक चीजें खरीदी हों अगर आप इन्हें व्यवस्थित रूप से नहीं रखेंगे तो ये घर का लुक बढ़ाने के बजाय कम कर देंगी.

सादगी से सजाएं

घर को संवारते समय आप को सादगी में ही सौंदर्य है वाली कहावत को हमेशा याद रखना है. थोड़ा व्यावहारिक बनें, बिना सोचेसमझे खरीदारी न करें. आप बहुत सारी ऐक्सैसरीज चुन सकते हैं, मूर्तियां, कैंडल होल्डर आर्ट पीसेस आदि. जब भी कोई ऐंटिक चीज खरीदें,, सोच लें कि वह आप के इंटीरियर से मैच खाएगी या नहीं. कमरे में अधिक चीजें न रखें. वैसे भी आजकल सिंपल लुक का प्रचलन अधिक है.

पेंट: कलर थेरैपिस्ट का मानना है कि जो रंग आप घर में इस्तेमाल करते हैं उन का आप की भावनात्मक स्थिति पर गहरा प्रभाव पड़ता है. डल कलर घर को उदास लुक देते हैं. दीवारों पर ब्राइट रंग कराएं. आजकल पिंक और पर्पल के शेड बहुत चल रहे हैं. आप लाइट रंग की थीम भी रख सकते हैं. लेकिन उस में थोड़ी ब्राइटनैस होनी चाहिए. ब्राइट कलर और अच्छी लाइटिंग कमरों में पौजिटीविटी बढ़ाती है. कमरे की एक दीवार को अपने मनपसंद रंग में पेंट करें. इसे फोकल पौइंट बनाएं. उस दीवार पर कोई आर्ट पीस लगाएं.

फर्नीचर: वुडन फर्नीचर के लिए वुड पौलिश के बजाय फैब्रिक का इस्तेमाल भी कर सकते हैं. इस का इस्तेमाल पुराने और नए दोनों फर्नीचर में किया जा सकता है. फ्लोरल, प्लेन, ज्योमैट्रिकल पैटर्र्न जो भी आप को अच्छा लगे आप चुन सकते हैं. कई लोग कैनवास का इस्तेमाल भी करते हैं.

लाइट्स: अगर आप के घर के लैंप पुराने हो गए हैं तो उन्हें बदल दें, क्योंकि इस से देखने वाले को समझ में आ जाएगा कि आप का घर आउटडेटेड है. नई डिजाइन के लैंप लगाएं. लिविंग रूम में हमेशा सौफ्ट लाइट का इस्तेमाल करें जैसे कैंडल्स या वोटिव्स. बैडरूम के लैंप पर लैंप शेड जरूर लगाएं जिस से बैडरूम आकर्षक लगे. अपनी डाइनिंग टेबल के ऊपर शैंडलियर लटकाएं. इस से खाना खाते समय सीधा ग्लेयर नहीं पड़ेगा और यह रमणीय लगेगा. सीलिंग लाइट के बजाय हैंगिग लाइट का इस्तेमाल कर सकते हैं. छोटी लाइट्स को मिला कर आप शैंडलर्स बना सकते हैं. आप घर को सजाने के लिए रंगबिरंगी लाइटों का इस्तेमाल भी कर सकते हैं.

किचन: किचन को थोड़ा खुलाखुला रखें. अपनी कटलरी और क्रौकरी को ऐसी अलमारी में रखें जिस के दरवाजों पर कांच लगी हो. किचन में प्राकृतिक प्रकाश आने की व्यवस्था करें, इस से किचन न केवल आकर्षक लगेगा, बल्कि उस में ताजगी भी बनी रहेगी. कटलरी और क्रौकरी को डिस्प्ले करने के लिए आप किचन में अलग से अलमारियां भी बनवा सकते हैं.

शीशे और पेंटिंग्स: हर कमरे में कम से कम एक शीशा लगाएं. शीशों को हमेशा इस तरह लगाएं कि उन में कमरे की किसी सुंदर चीज का प्रतिबिंब दिखाई दे. इस की फ्रेम ऐसी हो जो कमरे के फर्नीचर से मैच खाए. आप छोटीबड़ी आकर्षक पेंटिंग्स से अपने घर की दीवारों को सजा सकते हैं, लेकिन ध्यान रखें कि  बहुत अधिक संख्या में पेंटिंग्स न लगाएं.

डैकोरेटिव पिलो व कुशन: बैड और सोफा दोनों के लिए कलरफुल कुशन व पिलो का इस्तेमाल कर सकते हैं. ये बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं और आप के कमरे का टैक्सचर और पैटर्न बढ़ाने में योगदान देते हैं.

परदे: परदे कमरे को हाईलाइट करते हैं, इसलिए इन का चयन बहुत सोचसमझ कर करना चाहिए. परदेपसंद करते समय इस बात का ध्यान रखें कि आप की दीवारों पर किस रंग का पेंट है, किस कमरे के लिए आप परदे ले रहे हैं, कमरे का फर्नीचर कैसा है आदि. परदे कई पैटर्न और प्रिंट्स में आते हैं जैसे फ्लोरल, प्लेन, ज्योमैट्रिकल आदि. आजकल नैट के परदों का प्रचलन भी काफी है.

बैडशीट्स: कौटन या लिनेन की बैडशीट इस्तेमाल करें. बैडशीट के साथ मैचिंग पिलो कवर भी लें. बैडरूम की दीवारों से मैच करती हुई या कंट्रास्ट कलर वाली बैडशीट्स खरीदें.

वाल पेपर या फोटो वाल: घर को स्पोर्टी लुक देने के लिए वाल पेपर या फोटो वाल क्रिएट कर सकते हैं. इस से कमरे को नया लुक भी मिलेगा और उस का आकर्षण भी बढ़ेगा. वाल पेपर और कैनवास का इस्तेमाल कर सकते हैं.

फ्लोर: आजकल फ्लोर पर डैकवुड चलन में है. टाइल्स लगवाने के बाद जगह छोड़ कर डैकवुड लगवा सकते हैं. इस का प्रयोग अधिकतर लिविंग रूम में किया जाता है.

इनडोर प्लांट्स: नैचुरल फील देने के लिए इनडोर प्लांट्स लगाएं. आजकल के घर बहुत बंदबंद होते हैं. प्रदूषण की भी बहुत समस्या है. ऐसे में ये पौधे हवा को साफ रखते हैं और घर में ताजगी का एहसास दिलाते हैं. ये केवल आप के घर का आकर्षण ही नहीं बढ़ाएंगे, बल्कि आप की सेहत भी सही रखेंगे. लेकिन पौधों का चयन करने से पहले इस बात का भी खयाल रखना चाहिए कि कहां कौन सा पौधा लगाएं. स्पाइडर प्लांट, स्नैक प्लांट, फिलोडैंड्रौन, लिली, गरबेरा डेजी, मनीप्लांट और पोथोस से अपने घर को सजाएं. अगर आप को पौधों के रखरखाव में रुचि नहीं है और आप केवल सुंदरता बढ़ाना चाहते हैं, तो आप कृत्रिम पौधों का चयन कर सकते हैं.

बालकनी: अधिकतर अपार्टमैंट्स में बालकनी होती है लकिन कई लोग अपनी बालकनी को सजाने में रुचि नहीं लेते हैं. आप को अपनी बालकनी को इस प्रकार सजाना चाहिए कि वह न केवल दिखने में सुंदर लगे, बल्कि आप इस का बेहतर तरीके से इस्तेमाल भी कर सकें. बालकनी में ऐंटीक फर्नीचर सब से बेहतर लगता है, इसलिए मौडर्न के बजाय एंटीक फर्नीचर का चयन करें. बालकनी की दीवार पर कोई आर्ट पीस लगाएं. बालकनी को न पूरी तरह कवर करें, न ही पूरी खुली रखें.

कौरिडोर: अगर आप का घर काफी बड़ा है और इस में कौरिडोर भी है तो इसे खाली न छोडे़ं. यहां की दीवारों पर कोईर् पेंटिंग या फोटो वाल क्रिएट करें. अगर कौरिडोर में जगह ज्यादा है तो इस में 2-3 जगह अलगअलग शोपीस रखे जा सकते हैं

टैरेस: अगर आप के घर में टैरेस है, तो उसे एक आउटिंग स्पौट का लुक दें. आप यहां एक छोटा सा गार्डन बना सकते हैं, सुंदर लैंप लगा सकते हैं. थोड़ी जगह को कवर कर के वहां फर्नीचर रख सकते हैं. टैरेस पर केन का फर्नीचर काफी आकर्षक लगता है, टैरेस गार्डन के साथ इस का कौंबिनेशन आप की टैरेस को एक अलग ही लुक देगा. अगर आप की टैरेस पर जगह अधिक है तो आप झूला भी लगा सकते हैं.   

– सरवेश चड्ढा, आर्किटैक्ट, ग्रे इन स्टुडियो, दिल्ली

1 घंटा केवल अपने लिए

हिंदी के एक मशहूर लेखक का कहना है कि आप चाहे कितनी भी व्यस्त क्यों न हों, यदि अपने लिए 24 घंटों में से एकाध घंटा नहीं निकाला तो क्या रहेगा साथ में? रूखे हाथ, बिना तराशे नाखून, रूखासूखा चेहरा, न बिंदी, न काजल, न बिछुए. हम औरतें दिन भर में अपने लिए कम से कम एकाध घंटा तो निकाल ही सकती हैं, जिस में हलकीफुलकी संगीत की स्वरलहरी हो, गजल का आनंद हो, शेरोशायरी हो, सुस्ताना हो, हाथपैरों की मालिश हो, फोन पर बतियाना हो या फिर कुछ पढ़ना. बस वह वक्त सिर्फ और सिर्फ तुम्हारा हो. सीमा को तब बड़ी हैरत हुई कि फेसबुक अकाउंट खोल अभीअभी रात के 12 बजे विदेश में रहते जो संदेश उस ने अपनी देवरानी को दिया उस का झट से जवाब भी आ गया. हैरानी इस बात की हुई कि वह तो खुद ही घर का काम करती है और फिर नौकरी भी करती है. उसे मेरे मैसेज का जवाब देने के लिए समय कैसे मिल गया? पूछने पर पता चला कि औफिस जाने से पूर्व उस ने 15-20 मिनट का समय ईमेल और फेसबुक के लिए रिजर्व कर रखा है ताकि थोड़ी देर अपना मनपसंद काम यानी मित्रों से हायहैलो कर औफिस तरोताजा हो कर पहुंचे और काम को बेहतर ढंग से कर सके.

कुल्लू घाटी की टीना को व्यास नदी के किनारे एक सुबह अपनी मित्र के यहां गुजारने का मौका मिला. हवा में हलकी ठंडक थी. चाय की ट्रे बड़े करीने के साथ सजी हुई कमलाबाई ले कर आई. साथ में एक ट्रे में, शीशा, कौटन बड्स, नेल कटर आदि भी थे. रीना ने हंसते हुए बाई से कहा, ‘‘सुबहसुबह चाय के साथ क्या ब्यूटी ट्रीटमैंट्स का भी प्रोग्राम है?’’

बाई बड़े संजीदे स्वर में बोली, ‘‘जी हां, इस में बुराई क्या है यदि चाय की चुसकियों से पहले 10 मिनट अपने शरीर पर लगा लिए जाएं? क्या आप कुछ नहीं करतीं? हमारी ऊषा बीबीजी तो रोज सुबह 15-20 मिनट इसी काम में लगाती हैं. इस दौरान वे आराम से अंडे व शहद का उबटन लगा लेंगी. फेशियल भी हो जाएगा और चाय की चुसकियां भी. फिर बाद में इसी कलकल बहते दरिया के किनारे पत्थर पर बैठ कर बहते पानी में पैरों को आराम भी लेंगी और ठंडेठंडे पानी से चेहरा भी धो लेंगी.’’

अब समझ आया रीना को अपनी सहेली ऊषा की चमकतीदमकती त्वचा का राज.

हो सकता है यह सब पढ़ कर आप को कुछ नया न लगे. सभी को मालूम है कि हमें अपने लिए कुछ वक्त अवश्य निकालना चाहिए. लेकिन कई मरतबा हम यह सोच कर कि कोईर् क्या कहेगा. इसे देखो घरगृहस्थी, कामकाज छोड़ कर अपने लिए कुछ समय निकाल कर कमरा बंद कर बैठ गई है.

तो क्या हुआ? कोई कुछ भी कहता रहे अवसाद में घिरने, तनाव में रहने से बेहतर है कुछ वक्त अपने लिए निकाला जाए. ‘कल करे सो आज कर आज करे सो अब…’ इस बात को ध्यान में रख कर ये कीजिए:

बिस्तर पर जाएं: कामकाजी महिला हो या गृहिणी अकसर उस की शिकायत रहती है नींद पूरी नहीं होती. कारण बच्चे हों, लेट नाइट डिनर हो, औफिस की ड्यूटी हो या किसी बुजुर्ग की घर में देखभाल. जब भी थोड़ी सी भी फुरसत मिले तुरंत बिस्तर पर जाएं या सोफे पर ही थोड़ा सुस्ता लें. एक झपकी से दिलोदिमाग तरोताजा हो जाएगा. फिर काम में जुट जाएं.

शौपिंग लिस्ट बनाएं: अकसर किचन में या घर में काम करते समय अचानक ध्यान आता है कि फलां चीज तो खत्म हो गई है. तब पति या बच्चों को तुरंत सामान लाने के लिए रिक्वैस्ट करने को मजबूर हो जाती हैं. अत: खाली समय में ध्यान से शौपिंग लिस्ट बनाएं. ऐसा करने से न केवल समय बचेगा, बल्कि पैसे की बचत होगी.

शौक पूरा करें: हम कोई न कोई शौक रखते हैं. मगर कुछ ऐसा हुआ कि शौक छूट गया. मनमसोस लिया, खुद को कोसा, हालात को कोसा और समझौता कर लिया. मगर ऐसा न करें. उस अपने लिए निकाले गए एकाध घंटे में उसे पूरा करने की कोशिश करें. जैसे मान लो, आप को कुछ अच्छेअच्छे विचार किताबों से, मैगजीनों से, अखबारों से इकट्ठा करने का शौक है, तो उसे पूरा कीजिए. डायरी सिर्फ  और सिर्फ इस काम के लिए लगाएं ताकि जब कोई ग्रीटिंग कार्ड जन्मदिन, वर्षगांठ पर किसी को भेजना हो तो, खूबसूरत सा कार्ड स्वयं हाथ से बना कर उपयुक्त पंक्तियां लिख कर भेज सकें. मतलब अपनी रुचि के अनुरूप ही अपने वक्त को ऐसे गुजारें कि कुछ भी बोझिल न लगे. केवल आनंद आए.

सपने देखें: जी हां, जागती आंखों से सपने देखें. जरूर देखें. यह हक सभी को है. किसी पत्रिका में पढ़ा था सोचिए यदि आज की जीरो फिगर की अभिनेत्री करीना कपूर 90 किलोग्राम के वजन को कम कर सकती है, तो हम और आप क्यों नहीं? बस जरूरत है तो सिर्फ दृढ़निश्चय की. आप भी खुद को समय दें.

बनाए रखें संवाद: अगर आप को अपने दोस्त, मित्र, सहेली, ननद, जेठानी, किसी करीबी रिश्तेदार या फिर बहन से कहीं कोई मनमुटाव का अंदेशा है, तो बेहतर होगा संबंधों को सुधारने के लिए अपने लिए रिजर्व रखें. इस 1 घंटे को उन पर लगाएं. फोन करें, मैसेज भेजें, ईमेल, व्हाट्सऐप या सोशल मीडिया का इस्तेमाल करें. बस कोशिश हो ये पल आप के संबंधों में मिठास ला कर उन्हें खूबसूरत बनाएं. अगले दिन की प्लानिंग करें: यदि कामकाजी हैं, अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाना चाहती हैं, तो अगले दिन के सारे शैड्यूल चैक करें. उन्हें अपडेट करें. उन पर फोकस करें. प्राथमिकताएं तय कर लें. ऐसा सब सुनियोजित ढंग से कर पाने के लिए अपने लिए विशेष समय निकालना जरूरी है. 24 घंटों में कुछ पल अपने लिए भी. कोशिश कर के देखें. काम की गुणवत्ता पहले से बेहतर होगी.

लुक्स पर ध्यान दें: यों ही कुछ पहन लेने से या फिर कपड़ों के संग मैचिंग ज्वैलरी भले ही कौस्टयूम ज्वैलरी हो, चप्पलजूते, स्कार्फ सलीके से पहनने से थोड़ा नहीं बहुत फर्क पड़ता है. इसलिए यदि आप कामकाजी हैं, तो यह और भी लाजिम है. अपने खाली वक्त में ज्वैलरी बौक्स को चैक करती रहें. कुछ टूटफूट गया हो तो उस पर भी ध्यान दें. यदाकदा मैचिंग क्लिप्स, सूइयां, जूड़ा पिन, हेयर ऐक्सैसरीज को भी रीअरेंज कर के रखें. बेहतर होगा कल जो पहनना है उस की तैयारी भी पहले खाली वक्त में अवश्य कर लें. इस से आप की पर्सनैलिटी में निखार आने के साथसाथ आप का आत्मविश्वास भी बढ़ेगा जो आप के काम में चार चांद लगा देगा. जब दफ्तर, घरबाहर आप की तारीफ होगी, आप की पर्सनैलिटी को सराहा जाएगा, तो फुरसत के क्षणों में आराम से कुरसी पर पीठ लगाए पैरों को गुलाबजल मिले पानी में डुबो कर सुस्ताने का आनंद यह एहसास अवश्य दिलाएगा कि यह 1 घंटा अपने लिए अच्छा लगता है.      

फरवरी महीने के जरूरी काम

फरवरी में सर्दी उतार पर होती है, लिहाजा किसानों को काफी राहत महसूस होती है और वे खुद को खेती के लिए एकदम फिट पाते हैं. फरवरी के मौसम में किसानों को सेहत खराब होने का डर नहीं रहता और वे आराम से काम करने की हालत में होते हैं. जनवरी में तो किसानों का ज्यादा वक्त खुद को सर्दी से बचाते हुए ही बीतता है, मगर फरवरी की फिजा और आबोहवा तनबदन में चुस्तीफुरती भरने वाली होती है. काम चाहे गन्ने की बोआई का हो या गेहूं की फसल की देखभाल का, किसान पूरी लगन से जुट जाते हैं. फरवरी में सुस्ती एकबारगी खत्म हो चुकी होती है और खेतों में चहलपहल बढ़ जाती है. आइए डालते हैं एक नजर फरवरी के दौरान खेतीजगत में होने वाले खास कामों पर :

* शुरुआत गन्ने से करें, तो 15 फरवरी के बाद गन्ने की बोआई का सिलसिला शुरू किया जा सकता है. बोआई के लिए गन्ने की ज्यादा पैदावार देने वाली किस्मों का चुनाव करना चाहिए. किस्मों के चयन में अपने जिले के कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों से मदद ले सकते हैं.

* गन्ने का जो बीज इस्तेमाल करें वह बीमारी रहित होना चाहिए. इस के बावजूद बोआई से पहले बीजों को अच्छे किस्म के फफूंदीनाशक से उपचारित कर लेना चाहिए. बोआई के लिए 3 पोरी व 3 आंख वाले गन्ने के स्वस्थ टुकड़े सही होते हैं.

* समय से बोई गई गेहूं की फसल में फरवरी में फूल लगने लगते हैं. इस दौरान खेत की सिंचाई हर हालत में कर देना जरूरी है. सिंचाई करते वक्त इस बात का खयाल रखें कि ज्यादा तेज हवाएं न चल रही हों. हवा चल रही हो तो उस के थमने का इंतजार करें और मौसम ठीक होने पर ही खेत की सिंचाई करें. हवा के बीच सिंचाई करने से पौधों के उखड़ने का पूरा खतरा रहता है.

* इस बीच चना, मटर व मसूर के खेतों का मुआयना कर लेना चाहिए. अगर फसल पर फलीछेदक कीट का हमला नजर आए, तो मोनोक्रोटोफास दवा का इस्तेमाल करें.

* चूर्णी फफूंदी नामक बीमारी मटर की फसल को काफी नुकसान पहुंचाती है. इस का हमला होने पर बचाव के लिए कैराथेन दवा के 0.06 फीसदी घोल का छिड़काव करें.

* फरवरी का महीना लोबिया, राजमा व भिंडी जैसी फसलों की बोआई के लिए मुफीद होता है. अगर इन चीजों की  खेती का इरादा हो, तो इन की बोआई निबटा लेनी चाहिए.

* 15 फरवरी के बाद तेल की फसल सूरजमुखी की बोआई करना मुनासिब रहता है. अगर यह फसल लगानी हो तो 15 से 28 फरवरी के बीच इस की बोआई कर देनी चाहिए. बोआई के लिए अपने इलाके के मुताबिक किस्मों का चयन करें. इस के लिए कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक से भी बात कर सकते हैं. हां, सूरजमुखी के बीजों को बोने से पहले कार्बंडाजिम या थीरम से उपचारित जरूर करें.

* यदि अभी तक टमाटर की गरमी वाली फसल की रोपाई का काम बाकी पड़ा हो, तो उसे फौरन निबटाएं.

* टमाटर के पौधों की रोपाई 45×60 सेंटीमीटर के फासले पर करें. रोपाई धूप ढलने के बाद शाम के वक्त करें. रोपाई के बाद हलकी सिंचाई करें.

* जनवरी में लगाए गए टमाटर के पौधों को नाइट्रोजन मुहैया कराने के लिए पर्याप्त मात्रा में यूरिया डालें. ऐसा करने से फसल बेहतर होगी.

* यह महीना बैगन की रोपाई के लिहाज से भी मुफीद होता है, लिहाजा उम्दा नस्ल का चयन कर के बैगन की रोपाई करें.

* बैगन की उम्दा फसल के लिए रोपाई से पहले खेत की कई बार जुताई कर के उस में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या कंपोस्ट खाद भरपूर मात्रा में मिलाएं. इस के अलावा खेत में 100 किलोग्राम नाइट्रोजन, 80 किलोग्राम फास्फोरस व 80 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से डाल कर अच्छी तरह मिट्टी में मिला दें.

* बैगन के पौधों की रोपाई भी सूरज ढलने के बाद यानी शाम के वक्त ही करें, क्योंकि सुबह या दोपहर में रोपाई करने से धूप की वजह से पौधों के मुरझाने का डर रहता है. रोपाई करने के बाद पौधों की हलकी सिंचाई याद से करें.

* इसी महीने मैंथा की बोआई भी निबटा लेनी चाहिए. इस के लिए 400-500 किलोग्राम जड़ों का प्रति हेक्टेयर की दर से इस्तेमाल करें. बोआई से पहले 30 किलोग्राम नाइट्रोजन,

75 किलोग्राम फास्फोरस और 40 किलोग्राम पोटाश का प्रति हेक्टेयर की दर से इस्तेमाल करें.

* मैंथा की बोआई करने से पहले खेत के तमाम खरपतवार निकालना न भूलें, क्योंकि ये फसल की बढ़वार में काफी रुकावट पैदा करते हैं. बोआई के बाद खेत की हलकी सिंचाई करना जरूरी है.

* आम के बगीचे का मुआयना करें. इन दिनों आम में चूर्णिल आसिता बीमारी का काफी खतरा रहता है, लिहाजा कैराथेन दवा का छिड़काव करें. श्यामवर्ण और छोटी पत्ती वाले रोग की रोकथाम के लिए ब्लाइटाक्स 50 और जिंक सल्फेट का छिड़काव करें. ऐसा करने से आम के पेड़ ठीक रहेंगे.

* बीमारियों के साथसाथ इन दिनों आम के पेड़ों को कुछ कीटों का भी खतरा रहता है. अगर कीटों का हमला नजर आए तो कृषि विज्ञान केंद्र के फल वैज्ञानिक की राय ले कर उन का सफाया करें.

* आम के साथसाथ केले के बागों का खयाल रखना भी जरूरी है. बाग में फैली तमाम सूखी पत्तियां बटोर कर खाद के गड्ढे में डाल दें. बाग की सफाई के बाद 15 दिनों के फासले पर 2 बार सिंचाई करें.

* केले की उम्दा फसल हासिल करने के लिए बाग की निराईगुड़ाई करने के बाद सही मात्रा में नाइट्रोजन व पोटाश वाली खादें डालें.

* केले के पेड़ों पर अगर किसी बीमारी या कीटों का हमला नजर आए तो तुरंत उस का इलाज फल वैज्ञानिक की राय के मुताबिक करें.

* इस महीने नीबू नस्ल के पौधों की बोआई करना मुनासिब रहता है, लिहाजा नीबू, संतरा व मौसमी वगैरह के बीजों की बोआई पौधशाल में करें. पौधशाला में कली बांधने का काम भी निबटाएं.

* पहले से लगे नीबू, संतरा व मौसमी वगैरह के पेड़ों में नाइट्रोजन व पोटाश वाली खादें डालें.

* आड़ू के पेड़ों में पर्णकुंचन माहू कीट लगने पर पत्तियां सिकुड़ जाती हैं. अगर कीट का असर हो तो रोकथाम के लिए मेटासिस्टाक्स दवा का छिड़काव करें. 1 बार का छिड़काव पूरी तरह कारगर न हो, तो 2 हफ्ते बाद दोबारा छिड़काव करें.

* आड़ू के पेड़ पूरी तरह ठीक नजर आएं, तो भी उन में निराईगुड़ाई कर के जरूरी खादें डालना जरूरी है.

* इस महीने में अंगूर की कलमें लगाना सही रहता है. कलमों की रोपाई के लिए उम्दा नस्ल की कलमों का इंतजाम करें.

* अंगूर की कलमों की रोपाई के साथसाथ पहले से लगी बेलों की देखभाल भी जरूरी है. अकसर इस दौरान अंगूर की बेलों पर श्यामवर्ण रोग लग जाता है. ऐसी हालत में इलाज के लिए ब्लाइटाक्स 50 ईसी दवा का इस्तेमाल करें. इस दवा के छिड़काव से यह बीमारी ठीक हो जाती है.

* आमतौर पर फरवरी तक सर्दी का मौसम काफी हद तक खत्म हो जाता है, लिहाजा कई पशुपालक लापरवाह हो जाते हैं और अपने पशुओं को सर्दी से बचाने के उपाय बंद कर देते हैं. मगर ऐसा करना अकसर काफी नुकसानदेह साबित होता है, लिहाजा लापरवाही न करें.

* सचाई तो यह है कि जाती हुई सर्दी इनसानों के साथसाथ जानवरों को भी बीमार करने वाली होती है, इसलिए सर्दी से बचाव के उपाय एकदम से बंद न कर के धीरेधीरे बंद करें. ठीक तो यह होगा कि मार्च की शुरुआत तक अपने जानवरों को गरम कपड़े ओढ़ा कर रखें.

* अपने मुरगामुरगियों के मामले में भी चौकन्ने रहें ताकि वे बीमार न होने पाएं, वरना काफी नुकसान हो सकता है.

* इस बीच गाय या भैंस हीट में आएं तो उन्हें पशु चिकित्सक के जरीए गाभिन कराने में देरी न करें.

कुछ कहती हैं तसवीरें

कमाल के सांप : सांपों को दूर से देख कर ही लोगों के दिल दहल जाते हैं, मगर इन का वजूद बहुत ज्यादा है. खतरनाक कोबरा का जहर यानी वेनम निहायत कीमती होता है. माहिरों द्वारा सांपों का जहर बेहद सावधानी व सलीके से निकाला जाता है.

गुणकारी काली गाजर का हलवा

काली गाजर के गुणों के कारण इस की खेती बढ़ती जा रही है. इस से किसानों को मुनाफा होने लगा है. तमाम गुणों वाली काली गाजर की खेती को किसान लगातार तरजीह दे रहे?हैं. पीली व लाल रंग की गाजर के मुकाबले तेजी से इस का बाजार बढ़ रहा है. देश ही नहीं विदेशों में भी इस की मांग बढ़ने लगी है और किसान इसे एक्सपोर्ट करने की दिशा में बढ़ चुके हैं. पंजाब जैसे प्रदेशों में सैकड़ों किसानों ने काली गाजर की खेती को सब्जियों की फसल का खास हिस्सा बना लिया?है. कैंसर व पेट की बीमारियों की दवाओं में काली गाजर के इस्तेमाल ने इस की खेती को बढ़ा दिया है. गर्भावस्था में गाजर का रस पीते रहने से सैप्टिक रोग नहीं होता और शरीर में कैल्शियम की कमी भी नहीं रहती है. बच्चों को दूध पिलाने वाली माताओं को नियमित रूप से गाजर के रस का इस्तेमाल करना चाहिए. इस से उन के दूध की गुणवत्ता बढ़ती है. दिल कमजोर होने पर रोजाना 2 बार गाजर का रस पीने से लाभ होता है. गाजर का रस और पालक का रस मिला कर पीने से खून में लाल कणों का इजाफा होता है.

बनाने की सामग्री

काली गाजर 1 किलोग्राम (8-10 गाजरें मध्यम आकार की), चीनी 250 ग्राम, मावा 250 ग्राम, दूध 1 कप, देशी घी 1 टेबल स्पून, किशमिश 1 टेबल स्पून, काजू 12-15 ग्राम, छोटी इलायची 5-6.

बनाने की विधि

हलवा बनाने के लिए काली गाजरों को?छील कर अच्छी तरह धो लीजिए और फिर उन्हें कद्दूकस कर लीजिए. मावे को कढ़ाई में डाल कर धीमी आंच पर भून लीजिए. भुना हुआ मावा प्याले में डाल कर अलग रख लीजिए. कद्दूकस की हुई गाजर कढ़ाई में डाल कर गैस पर रखिए और उस में दूध डाल दीजिए. गाजर को नरम होने तक पकने दीजिए. इस के बाद गाजर में चीनी मिला दीजिए. थोड़ीथोड़ी देर में गाजर को पलटे से चलाते रहें. रस जलने तक गाजरों को पकाएं. पकी गाजरों में घी डाल कर भूनें. फिर उस में किशमिश, काजू और मावा मिलाएं. हलवे को चलाते हुए 2-3 मिनट तक और पकाएं. फिर गैस बंद कर दें और?छोटी इलायचियों को पीस कर मिलाएं. आप का गाजर का हलवा तैयार है. गाजर के हलवे में सूखे मेवे अपनी पसंद के मुताबिक कम या ज्यादा कर सकते हैं. जो मेवे आप को पसंद हों उन्हें डाल सकते?हैं और जो नहीं पसंद हों उन्हें हटा सकते हैं.

100 ग्राम गाजर में ही इतने गुण

ऊर्जा                         173 कैलोरी

कार्बोहाइड्रेड                    9.6 ग्राम

शुगर                            4.7 ग्राम

फैट                             .24 ग्राम

प्रोटीन                          .93 ग्राम

कैल्शियम                   03 फीसदी

आयरन                 2 से 4 फीसदी

विटामिन ए               104 फीसदी

विटामिन बी              1  6 फीसदी

विटामिन बी            6  11 फीसदी

विटामिन सी                 7 फीसदी

विटामिन ई                  4 फीसदी

विटामिन के               13 फीसदी

मिलिए ‘मुबारकां’ के करतार सिंह से

भतीजे अर्जुन कपूर के बाद अब बदले चाचा अनिल कपूर के भी रंग. अनिल कपूर की आने वाली फिल्म ‘मुबारकां’ में उनका रोल सरदार का है और उन्होंने अपने इस नए लुक को हाल ही में शेयर करते हुए लिखा है कि जब भी में किसी नए किरदार को प्ले करता हूं तो मुझे उसका लुक रिवील करना बहुत अच्छा लगता है. 

फिल्म ‘मुबारकां’ में अनिल कपूर और अर्जुन कपूर रील लाइफ में भी चाचा और भतीजे के किरदार में नजर आएंगे. अनीस बज्मी की इस फिल्म में अर्जुन कपूर डबल रोल में दिखाई देंगे, जबकि इलियाना डिक्रूज और आथिया शेट्टी अर्जुन की लव इंटरेस्ट के रूप में दिखाई देंगी. कुछ दिनों पहले अर्जुन कपूर ने फिल्म में अपने लुक की पहली झलक जारी कर अपने डबल रोल का खुलासा ट्विटर पर कर दिया है.

सोनी पिक्चर्स और सिने 1 प्रोडक्शन के बैनर तले बन रही यह फिल्म 28 जुलाई 2017 को रीलीज हो सकती है.

बजट में मिलेगा नौकरी का तोहफा

बेरोजगारी एक विश्वव्याप्त समस्या है और हमारे देश में इस समस्या से बहुत से लोग पीड़ित हैं. साल दर साल शिक्षित युवाओं की संख्या बढ़ती जा रही है, पर उस हिसाब से नौकरियों की संख्या में कुछ खास बढ़ौतरी दिखाई नहीं दे रही है. इंजीनियरिंग जैसे कोर्स में लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी कई युवा बेरोजगार घूमते रहते हैं.

पर इस बजट में बेरोजगारों के लिए नई सौगातें तैयार की जा रही हैं. सूत्रों के मुताबिक सरकार रोजगार के मौके पैदा करने के एक बड़े पैकेज पर विचार कर रही है ताकि हर साल वर्कफोर्स में शामिल होने की कतार में लगने वाले लाखों युवाओं के लिए मौके बनाए जा सकें. पहली फरवरी को पेश होने वाले आम बजट की प्रमुख घोषणाओं में इसे शामिल किया जा सकता है. अधिकारियों ने बताया कि इसके तहत ज्यादा श्रम शक्ति वाले सेक्टरों में रोजगार के मौके बनाने के लिए इंसेंटिव्स दिए जा सकते हैं.

सरकार लेदर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और जेम्स ऐंड जूलरी जैसे सेक्टर में रोजगार के मौके बनाने के लिए उसी तर्ज पर इंसेंटिव्स देने पर विचार कर रही है, जिस तरह पिछले साल टेक्सटाइल्स सेक्टर के लिए शुरू किए गए थे. भारत में हर साल जॉब मार्केट में करीब 1.2 करोड़ लोग आते हैं और आबादी में 65% से ज्यादा लोगों की उम्र 35 साल से कम है. इस स्थिति के दम पर भारत दुनिया में मानव संसाधन का बड़ा केंद्र बन सकता है.

40 बरस के हुए अमर, अकबर और ऐंथनी, जाने कुछ रोचक बातें

यूं तो फिल्म अमर अकबर ऐंथनी ने इस साल यानि कि जनवरी 2017 में अपने 40 साल पूरे किये हैं पर एक्शन और कॉमेडी से भरी फिल्म आज भी लोगों के दिलों और पसंदीदा फिल्मों की लिस्ट में शुमार है. फिल्म की इस ऐतिहासिक छाप का कारण, फिल्म में सभी बिल्कुल फिट बैठने वाले कलाकार और फिल्म का संगीत ही माना जाता है. फिल्म ने न केवल भारत में बल्कि वेस्ट इण्डीज जैसे और कई देशो में भी खूब तारीफ बटोरी थी. यह फिल्म पूरी कास्ट और सभी कलाकारों के लिये एक ‘बिग-हिट’ साबित हुई थी. पर आज भी फिल्म के बारे में कई तथ्य ऐसे हैं जो बहुत कम लोग जानते हैं.

यहां हम बात कर रहे हैं फिल्म के एक गाने “मॉय नेम इज एंथनी गोंजाल्विस” की, जिसे आज भी लोग सुनना बहुत पसंद करते हैं. इस गाने की शुरुआती लाइन जिसे इंग्लिश में गाया गया है, ‘Sophisticated rhetorician intoxicated with the exuberance of your own verbosity’ एक प्रसिद्ध ब्रिटिश राजनेता, उपन्यासकार और निबंधकार बेंजामिन डिजरायली द्वारा सन 1878 में दिए गए एक भाषण से लिया गया है.

अमिताभ का शीशे वाला सीन जिसमें वे “पक्का ईडियट लगते हो ” डायलॉग बोल रहे हैं  जो काफी चर्चित भी हुआ था, बहुत कम लोग ये बात जानते हैं कि जब ये सीन शूट किया जा रहा था तब फिल्म के निर्माता मनमोहन देसाई उसी स्टूडियो के दूसरे फ्लोर पर अपनी अगली फिल्म परवरिश के क्लाइमेक्स की शूटिंग में व्यस्त थे और अमिताभ को ये सीन उनके बिना ही शूट करना पड़ा.

मनोरंजन उद्योग में काम करने वाले निर्माता, निर्देशक और भी जो लोग फिल्मों से जुड़े होते हैं वे अपनी आसपास की दुनिया से प्रेरणा लेकर ही फिल्मों में किरदारों का चयन करते हैं. इसी तरह फिल्म अमर अकबर ऐंथनी में अमिताभ बच्चन का नाम एंथनी गोंजाल्विस भी फिल्म की संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के निजी जीवन से लिया गया था. एंथनी गोंजाल्विस लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के संगीत शिक्षक थे. एंथनी गोंजाल्विस 1930 के दशक में मुंबई में सबसे प्रसिद्ध संगीत प्रबंधकों में से एक थे.

फिल्म के निर्माता मनमोहन देसाई को इस फिल्म का आइडिया तब आया जब वे एक अखबार में जैक्शन नाम के शराबी व्यक्ति के बारे में पढ़ रहे थे, जो उसके जीवन से तंग आकर पार्क में अपने तीन बच्चों को छोड़ने का फैसला ले लेता है. इसी तरह फिल्म की कहानी में शुरुआत में भी तीनों बच्चों को एक पार्क में छोड़ दिया जाता है. बाद में एक बच्चे को एक हिन्दू पुलिस अधिकारी द्वारा और अन्य दो को मुस्लिम दर्जी और एक कैथोलिक पादरी द्वारा अपना लिया जाता है.

अब बिना इंटरनेट के भी भेज सकेंगे व्हाट्सऐप मैसेज

दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले व्हाट्सऐप मैसेंजर के अपडेट में नया ऑफलाइन (offline) फीचर जोड़ा गया है, जो यूजर्स को स्मार्टफोन में बिना नेटवर्क या बिना इंटरनेट के भी मैसेज भेजने की सुविधा देता है.

व्हाट्सऐप के लेटेस्ट iOS अपडेट में मैसेज को queue up करने की सुविधा दी गई है. इसी प्रकार का फीचर फेसबुक मैसेंजर और ईमेल में पहले से दिया गया है. इसके अलावा नए अपडेट में ऐप को नए तरह से तैयार किया गया है ताकि स्टोरेज को और बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सके.

इतना ही नहीं, व्हाट्सऐप अब एक बार में 30 तस्वीरें या वीडियो भेजने की सुविधा देगा. आप पहले एक बार में अधिकतम 10 मीडिया भेज सकते थे. ये सभी नए फीचर्स ऐप्पल आईफोन यूजर्स लेटेस्ट WhatsApp 2.17.1 अपडेट इंस्टॉल करने के बाद पा सकेंगे. हालांकि नया ‘ऑफलाइन’ फीचर एंड्रॉइड यूजर्स के लिए पहले से उपलब्ध है. ऐप्पल आईफोन के लिए जारी की गई नई ऐप का साइज 91.2 MB है, जिसे ऐप्प स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है.

WhatsApp सबसे ज्यादा पॉपुलर मैसेजिंग ऐप है, जिसका इस्तेमाल दुनियाभर के 1 अरब से ज्यादा लोग कर रहे हैं. लेकिन नेटवर्क नहीं होने पर लोगों को व्हाट्सऐप के जरिए मैसेज भेजने में असुविधा होती थी. यूजर्स नेटवर्क आने का इंतजार करते थे और ऑनलाइन होने के बाद मैसेज भेजते थे. लेकिन अब नेटवर्क आने के इंतजार किए बिना भी टेक्स्ट भेज सकते हैं, जैसे ही कनेक्टिविटी मिलती है ऐप खुद से मैसेज को भेज देगी. यह ऐसे लोगों के लिए खुशखबरी की तरह है जहां नेटवर्क की समस्या बनी रहती है.

क्यों जरूरी पशुबीमा

आज भी ज्यादातर पशुपालक अपने पशुओं का बीमा कराने में दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं. इस से पशुओं के बीमार पड़ने, बाढ़ में बहने  या उन के मरने पर पशुपालकों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है. महंगे और दुधारू पशुओं का बीमा करा कर पशुपालक बड़े नुकसान की भरपाई आसानी से कर सकते हैं. किसानों और पशुपालकों को राहत देने के लिए साल 1973 में पशुबीमा योजना की शुरुआत की गई थी, पर इस के 43 सालों बाद भी पशुपालक पशुबीमा के फायदों को नहीं समझ सके हैं. नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के मैनेजर रहे इंश्योरेंस एक्सपर्ट आरके सिन्हा बताते हैं कि बीमा कराने से पहले यह जानना जरूरी है कि किनकिन पशुओं का बीमा कराया जा सकता है और उस के लिए कितनी रकम प्रीमियम के रूप में देनी होगी. देशी और संकर नस्ल की दुधारू गाय या भैंस, बछड़ा या बछिया, प्रजनन क्षमता वाले सांड़ व बैलों का बीमा कराया जा सकता है. 2 से 10 साल की उम्र की दुधारू गायों, 3 से 12 साल की दुधारू भैंसों, 2 से 8 साल के प्रजनन क्षमता वाले सांड़ों, 2 से 12 साल के बैलों या भैंसों और 4 महीने से ले कर पहला बच्चा देने लायक बछिया या बछड़ों का बीमा किया जा सकता है. नस्ल, क्षेत्र और समय के आधार पर सौ फीसदी बाजार मूल्य को बीमित राशि माना जाता है. बीमा राशि की मंजूरी के लिए मवेशी डाक्टर की रजामंदी जरूरी होती है.

इस के बाद बीमा कराने से पहले पशुपालकों को यह समझ लेना चाहिए कि किस पशु का बीमा कराने पर कितनी रकम प्रीमियम के तौर पर जमा करनी होगी. दुधारू गायों या भैंसों की कुल बीमा की रकम का 5 फीसदी सालाना प्रीमियम के रूप में जमा करना होता है. प्रजनन कूवत वाले सांड़ों और बैलों के लिए कुल बीमा की रकम का 2.75 फीसदी प्रीमियम के रूप में देना होता है. अगर कोई किसान बीमा एजेंट से बीमा कराने के बजाय खुद बीमा दफ्तर में जा कर पशुओं का बीमा कराए, तो उसे मूल प्रीमियम में 15 फीसदी की छूट मिल सकती है.

इन सब के बाद यह समझना जरूरी है कि किस हालत में बीमा का फायदा मिलेगा और कब नहीं मिलेगा? बाढ़, आंधी, तूफान, सूखा, अकाल या किसी बीमारी से पशु की मौत होने पर पशुपालकों को बीमा का फायदा मिलता है. बीमा कराने के 15 दिनों के भीतर पशु की मौत होने पर बीमा कंपनी नुकसान की भरपाई नहीं करती है. अगर यह साबित हो जाए कि पशु को जानबूझ का मार दिया गया है या देखभाल में ढिलाई की गई है या उसे चोरीछिपे बेच दिया गया है, तो बीमा का फायदा नहीं मिलता है.

बीमा कराए गए पशु के कान में पीतल का नंबर दिया हुआ बटननुमा टैग लगा दिया जाता है. टैग के गिरने पर तुरंत बीमा कंपनी को जानकारी देना जरूरी है. पशु के मरने या बीमार पड़ने पर नुकसान की भरपाई का लाभ लेने के लिए बीमा कंपनी द्वारा तय वेटनरी डाक्टर से सार्टीफिकेट ले लेना चाहिए.

पशुबीमा के बाद इन बातों पर ध्यान दें

* बीमा का फायदा लेने के लिए फार्म को सही और पूरा भरें. * सड़क दुर्घटना में पशु की मौत हो, तो तुरंत थाने में रिपोर्ट लिखवाएं और बीमा कंपनी को सूचित करें. * पशु के कान में लगे टैग को हमेशा चेक करते रहें. टैग का नंबर किसी डयरी या कापी में नोट कर के रखें और इस के खोने पर बीमा कंपनी को बताएं. * अगर पशु सुस्त पड़ जाए या खाना छोड़ दे या किसी बीमारी का लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत बीमा कंपनी को खबर करें. * पशु को बेचने या उस के स्थान बदलने की जानकारी बीमा कंपनी को दें. *  पशुओं को सभी जरूरी टीके समय पर लगवाएं.

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