काली गाजर के गुणों के कारण इस की खेती बढ़ती जा रही है. इस से किसानों को मुनाफा होने लगा है. तमाम गुणों वाली काली गाजर की खेती को किसान लगातार तरजीह दे रहे?हैं. पीली व लाल रंग की गाजर के मुकाबले तेजी से इस का बाजार बढ़ रहा है. देश ही नहीं विदेशों में भी इस की मांग बढ़ने लगी है और किसान इसे एक्सपोर्ट करने की दिशा में बढ़ चुके हैं. पंजाब जैसे प्रदेशों में सैकड़ों किसानों ने काली गाजर की खेती को सब्जियों की फसल का खास हिस्सा बना लिया?है. कैंसर व पेट की बीमारियों की दवाओं में काली गाजर के इस्तेमाल ने इस की खेती को बढ़ा दिया है. गर्भावस्था में गाजर का रस पीते रहने से सैप्टिक रोग नहीं होता और शरीर में कैल्शियम की कमी भी नहीं रहती है. बच्चों को दूध पिलाने वाली माताओं को नियमित रूप से गाजर के रस का इस्तेमाल करना चाहिए. इस से उन के दूध की गुणवत्ता बढ़ती है. दिल कमजोर होने पर रोजाना 2 बार गाजर का रस पीने से लाभ होता है. गाजर का रस और पालक का रस मिला कर पीने से खून में लाल कणों का इजाफा होता है.

COMMENT