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जानिए क्या है जीएएआर

जनरल एंटी अवॉयडेंस रूल्स (जीएएआर) 1 अप्रैल से लागू कर दिया जाएगा. कंपनियां अपने फायदे के लिए गलत तरीकों से टैक्स बचाने के लिए कई तरीके अपनाती हैं. कंपनियों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए वित्त मंत्रालय ने यह फैसला लिया है. इस पर रोक लगाने के लिए वित्त मंत्रालय ने 1 अप्रैल 2017 से जीएएआर को लागू करने जा रही है.

जीएएआर ऐसे फॉरेन पोर्टफोलियो इन्‍वेस्‍टर्स पर लागू नहीं होगा, जिनका किसी देश को चुनने का मुख्‍य उद्देश्‍य टैक्‍स बेनेफिट लेना नहीं है. 

 क्या है जीएएआर?

जीएएआर(जनरल एंटी अवॉयडेंस रूल्स) टैक्स की चोरी और काले धन पर रोकथाम के लिए बनाया गया नियमों का एक समूह है. सरकार कर चोरी को रोकने और भारत में राजस्व की वृद्धि के लिए इसे लागू करना चाहती है. बहुत से विदेशी निवेशक केवल कर नियमों का मनमाने ढंग से लाभ प्राप्त उठाते हैं, जो देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाता है. इसे रोकने के लिए सरकार तत्पर है. जीएएआर लागू करने का मुख्य उद्देश्य कर में मौजूद खामियों को दूर करना है.

जीएएआर नियम प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी) 2010 में प्रस्तावित है और तत्कालीन वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने आम बजट 2012-13 को प्रस्तुत करते समय गार के प्रावधानों का उल्लेख किया था. लेकिन बाद में इन नियमों को लेकर उठे विवादों से बचने के लिए इसे स्थगित कर दिया गया था.

कौन होंगे प्रभावित ?

दुनिया की कोई भी कंपनी अपना व्यापार ऐसे बनाती है कि वो ज्यादा से ज्यादा टैक्स बचा सकते हैं. नए नियमों से सबसे ज्यादा मुश्किल उन पैसे प्रबंधकों के लिए होगी जो भारत में मॉरिशस जैसे टैक्स हैवन के माध्यम से निवेश करते हैं.

आम आदमी पर असर

आम आदमी पर भी जीएएआर नियमों का असर पड़ेगा. आयकर न देने वाले कर्मचारियों के लिए अब टैक्स चोरी करना मुश्किल हो जाएगा. उदाहरण के लिए अब करों से बचने का उपाय करने के लिए किसी कर्मचारी का वेतन कम नहीं रखा जा सकेगा. इसके अलावा केवल ब्याज भुगतान पर कर कटौती के लिए लिया जाने पारिवारिक कर्जा भी अब गार के नियमों का उल्लंघन माना जाएगा.

प्रियंका-डिंपल देगी प्रचार को नई धार

भाजपा सांसद विनय कटियार का बयान भाजपा में प्रियंका से भी सुंदर स्मृति ईरानी हैबताता है कि विधानसभा चुनाव प्रचार में प्रियंका के सक्रिय होने से भाजपा को परेशानी होने वाली है. उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव शैलेन्द्र किशोर पांडेय मधुकरकहते हैं, प्रियंका जी को राजनीति में लाने की मांग कांग्रेसी कार्यकर्ता लंबे समय से करते आ रहे हैं. अभी तक वह सुल्तानपुर और रायबरेली में प्रचार तक सीमित रही हैं. अब वह प्रदेश के दूसरे क्षेत्रों में प्रचार करेगी तो कार्यकर्ता नये उत्साह के साथ पार्टी के साथ जुडेगा. कांग्रेस के कार्यकर्ता प्रियंका में इंदिरा गांधी की छवि को देखते हैं. प्रियंका के भाषण की शैली बहुत बेबाक है. इससे कांग्रेस को लाभ होगा.

उत्तर प्रदेश में 7 करोड़ के करीब महिला मतदाता हैं. महिलाओं के मतदान का प्रतिशत दिनों दिन बढ़ता जा रहा है. 2012 के विधानसभा चुनावों में 60 फीसदी महिलाओं ने मतदान किया था कांग्रेस और सपा के गठजोड़ से चुनाव लडने से प्रियंका के साथ डिपंल यादव के चुनाव प्रचार का भी महत्व बढ़ गया है. डिपंल यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी हैं. 2012 और 2014 में वह लगतार 2 बार सासंद चुनी जा चुकी हैं. सपा के युवा भी चाहते हैं की डिंपल यादव चुनाव प्रचार करें. सपा ने अपने स्टार प्रचारको के नामों में डिंपल का नाम शामिल किया है. ऐसे में इस विधानसभा चुनावों में डिपंल और प्रियंका की जोड़ी चुनाव प्रचार को नई धार देगी.

बाल आयोग की अध्यक्ष और सपा की प्रवक्ता जूही सिंह कहती हैं, युवाओं में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और डिपंल जी का बहुत क्रेज है. डिपंल जी ने महिलाओं और बच्चों को लेकर कई योजनाओं की शुरूआत में अहम रोल अदा किया. प्रदेश की महिलाओं का रूझान उनकी ओर है. ऐसे में विधानसभा चुनावों में उनके प्रचार का लाभ जरूर होगा.

कांग्रेस और सपा के अलावा दूसरी पार्टियों में महिला प्रचारको के नामों में बसपा से मायावती, सपा से जया बच्चन, कांग्रेस से शीला दीक्षित, भाजपा से स्मृति ईरानी, हेमा मालिनी, रीता बहुगुणा जोशी का ही नाम है. बसपा में मायावती ही सबसे प्रमुख है.

भाजपा की महिला नेताओं में जमीनी स्तर की नेताओं का अभाव है. स्मृति ईरानी और हेमा मालिनी का महत्व स्टार होने के नाते है. विधानसभा चुनावों में वह बहुत प्रभावी नहीं होंगी. रीता बहुगुणा जोशी पर दलबदल का आरोप है. ऐसे में उनकी छवि बेहतर नहीं है. जनता की नजर में प्रियंका-डिंपल की जोड़ी चुनाव में सबसे अच्छी साबित होगी.

म्यूचुअल फंड में निवेश से पहले

बढ़ती महंगाई को देखते हुए भविष्य के लिए बचत करना बहुत जरूरी है और निवेशकों के पास बाजार में निवेश करने के अनेक विकल्प हैं. उन में म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए निवेश करने का बेहतरीन विकल्प है. म्यूचुअल फंड योजना के तहत खरीदी गई यूनिटों से इकट्ठी धनराशि को फंड मैनेजर द्वारा विभिन्न प्रतिभूतियों जैसे शेयर, डिबैंचर या फिर मुद्रा बाजार में निवेश किया जाता है. इस तरह म्यूचुअल फंड आम लोगों के लिए निवेश का उचित विकल्प है. इस में निवेश अपेक्षाकृत कम लागत पर विविध प्रतिभूतियों में किया जाता है.

निवेशकों की जरूरतों, लक्ष्यों, आयु, वित्तीय स्थिति, जोखिम आदि के आधार पर म्यूचुअल फंड की अनेक योजनाएं हैं. जिस स्कीम में निवेशक जितनी रकम लगाता है उसे उस के निवेश के अनुसार यूनिटें प्रदान की जाती हैं. प्रत्येक यूनिट का मूल्य म्यूचुअल फंड के पोर्टफोलियो के बाजार में प्रदर्शन के हिसाब से बदलता रहता है. एक समय में यूनिट का मौजूदा भाव उस का नैट ऐसेट वैल्यू (एनएवी) कहलाता है.

म्यूचुअल फंड के प्रकार

म्यूचुअल फंड क्लोज ऐंडेड और ओपन ऐंडेड होता है. क्लोज ऐंडेड म्यूचुअल फंड को न्यू फंड औफर (एनएफओ) के दौरान खरीदा व परिपक्वता के बाद बेचा जाता है जबकि ओपन ऐंडेड स्कीम में निवेश या निवेश की निकासी कभी भी की जा सकती है. निवेशक जरूरत अनुसार इस का लाभ उठा सकते हैं. म्यूचुअल फंड का संचालन एक ऐसेट मैनेजमैंट कंपनी करती है. फंड का चुनाव करते समय जिस फंड में पैसा लगाएं उस फंड के बारे में यह जान लें कि वह उस पैसे का निवेश कहांकहां कर रहा है. लिक्विड फंड: अगर निवेश 3 से 6 महीनों के लिए करना है तो लिक्विड फंड का चुनाव करें. इस फंड की परिपक्वता 91 दिनों में हो जाती है.

टैक्स बचत योजनाएं: ये योजनाएं निवेशकों को समयसमय पर टैक्स नियमों के तहत टैक्स में छूट प्रदान करवाती हैं और म्यूचुअल फंडों के माध्यम से इक्विटी शेयरों में दीर्घकालीन निवेश को प्रोत्साहित करती हैं. अगर आप लंबी अवधि के लिए म्यूचुअल फंड में निवेश करना चाहते हैं तो सिप यानी सिस्टेमैटिक इनवैस्टमैंट प्लान के तहत निवेश कर सकते हैं. इस में 1 किस्त की निश्चित राशि एक स्कीम में नियमित रूप से निवेश की जाती है. यह स्कीम आप को एक बार में भारी पैसा निवेश करने की जगह म्यूचुअल फंड में कम अवधि का निवेश करने की आजादी देती है.

डेट फंड: इस तरह के फंड का उद्देश्य निवेशकों को सुरक्षित निवेश के जरीए लाभ प्रदान करना होता है. आमतौर पर ऐसी योजनाओं का पैसा सरकारी प्रतिभूतियों, बौंड्स व कौरपोरेट डिबैंचरों में लगाया जाता है.

बैलेंस फंड: यह फंड निवेश का बेहतर माध्यम समझा जाता है. इस तरह के फंडों में एक निश्चित अनुपात में निवेशकों का पैसा इक्विटी व डेट दोनों तरह के फंडों में निवेश किया जाता है. यह फंड उन निवेशकों के लिए बेहतर है, जो अपने पैसे को धीरेधीरे बढ़ते देखना चाहते हैं.

इक्विटी फंड: यह उन निवेशकों के लिए बेहतर साबित होता है, जो लंबी अवधि के लिए पैसा लगा कर लाभ कमाना चाहते हैं. इस स्कीम के तहत आप के पैसे का प्रमुख हिस्सा शेयरों में निवेश किया जाता है.

म्यूचुअल फंड में निवेश के लाभ

– म्यूचुअल फंड में निवेश से आप अनुभवी और विशेषज्ञों की सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं.

– एक म्यूचुअल फंड में निवेश द्वारा आप एकसाथ कई कंपनियों में निवेश करते हैं.

– म्यूचुअल फंड लंबी अवधि से ले कर छोटी अवधि तक में कमाई का मौका देते हैं.

– ओपन ऐंडेड योजना में तुरंत एनएवी संबंधी मूल्य पर अपनी धनराशि प्राप्त कर सकते हैं. क्लोज ऐंडेड व रिटायरमैंट योजना में आप अपनी यूनिटें स्टौक ऐक्सचेंज में चालू बाजार मूल्य पर बेच सकते हैं या मौजूदा नैट ऐसेट वैल्यू पर और यूनिट खरीद सकते हैं.

– म्यूचुअल फंड आप को अपने विभिन्न लक्ष्यों व जरूरतों के अनुसार तरहतरह की योजनाएं प्रदान करते हैं.

सेबी द्वारा पंजीकृत होने के कारण म्यूचुअल फंड सेबी द्वारा निवेशकों के हितों की रक्षा को ध्यान में रख कर बनाए गए निर्धारित नियमों के तरह ही अपना काम करते हैं.

एक ही ओवर में लग गए 2 हैट्रिक

छह गेंदों पर छह विकेट लेना क्रिकेट का एक ऐसा मुकाम है जिसे हर गेंदबाज हासिल करना चाहता है. क्रिकेट में नए-नए रिकॉर्ड बनते रहते हैं मगर ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था. लगातार छह गेंदों पर छह विकेट हासिल करना किसी भी गेंदबाज के लिए किसी सपने से कम नहीं है मगर इस खिलाड़ी ने ये कमाल कर दिखाया.

ऑस्ट्रेलिया के एक क्रिकेटर ने यह मुकाम हासिल कर लिया है. ऑस्ट्रेलिया में गोल्डन पॉइंट क्रिकेट क्लब की ओर से खेलते हुए एलेड कैरी ने यह कारनामा किया. उन्होंने एक ओवर में तीन-चार नहीं बल्कि छह बल्लेबाजों को आउट किया.

29 वर्षीय कैरी, ईस्ट बेलार्ट के खिलाफ खेले गए इस मुकाबले के पहले आठ ओवरों में कोई विकेट लेने में नाकाम रहे थे. लेकिन इसके बाद 9वें ओवर में उन्होंने कुछ ऐसा कारनामा कर दिखाया जो हर गेंदबाज का सपना होता है.

मजे की बात तो ये है कि पहले आठ ओवर में उन्हें कोई विकेट नहीं मिला लेकिन नौवें ओवर में जो उन्होंने किया वो अपने आप में इतिहास बन गया. केरी के नाम पर अब ऐसा रिकॉर्ड बन गया है जो कल्पना से परे लगता है. केरी की इस घातक गेंदबाजी से विरोधी टीम बेलेरेट 40 रन पर ऑल आउट हो गई.

9वें ओवर की पहली गेंद पर स्लिप में कैच हुआ. अगला विकेटकीपर के हाथों कैच आउट हुआ. तीसरी गेंद पर बल्लेबाज एलबीडब्ल्यू हो गया. उन्होंने अगली तीन गेंदों पर बल्लेबाजों को क्लीन बोल्ड कर दिया. विपक्षी टीम 40 पर ऑल आउट हो गई. कैरी की इस कामयाबी की कहानी पूरे ऑस्ट्रेलिया में मशहूर हो गई है.

दलबदल की चिंगारी में झुलसती भाजपा

भाजपा का विजय रथ उत्तर प्रदेश में आकर फंस गया है. कैडर वाले कार्यकर्ताओं, नेताओं की उपेक्षा से भीतरघात का खतरा बढ़ गया है. जिलों जिलों में इस बात को लेकर असंतोष फैल गया है. नेताओं के घेराव, धरना प्रदर्शन को लेकर असंतोष की आंच संघ तक पहुंच रही है. इसको लेकर अब भाजपा अपने वादे से मुकर भी रही है. ऐसे में भाजपा की हालत सांप छछुदंर वाली हो गई है. समाजवादी पार्टी के नेता बेनी प्रसाद वर्मा के बेटे राकेश वर्मा को टिकट देने के मामले में भाजपा पीछे हट गई. बसपा से अलग हुये नेता आरके चौधरी को भाजपा ने अपने टिकट पर चुनाव लड़ने के लिये कहा. आरके चौधरी इसके लिये तैयार नहीं हुये. आरके चौधरी ने भाजपा के प्रस्ताव को खारिज करत हुये अपना पर्चा दाखिल कर दिया है. अब वह मोहनलालगंज सीट भाजपा के समर्थन से निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे.

भाजपा ने उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में दलबदल कर चुनाव लड़ने वाले नेताओं को तरजीह देने का काम किया. बड़े पैमाने पर ऐसे लोगों को टिकट दिया जो चुनाव के चंद दिन पहले ही पार्टी में शामिल हुये. जिन सीटों पर भाजपा के पुराने नेता और कार्यकर्ता चुनाव की तैयारी कर रहे थे उनको घोर निराशा हुई है. बाहरी नेताओं के साथ उनके समर्थक भी पार्टी में शामिल हुये हैं. भाजपा के अपने लोगों और बाहरी नेताओं के बीच किसी तरह का कोई तालमेल नहीं हो पा रहा है. बाहरी नेताओं को जितवाने के लिये भाजपा कैडर के लोग मेहनत करने को तैयार नहीं हैं. चुनावी माहौल में यह लोग खामोश हैं. इनकी खामोशी में चुनाव में भीतरघात का खतरा साफ दिख रहा है.

हमारे लखनऊ आफिस आये भाजपा के कुछ नेता नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं ‘कल तक हम लोग सपा, बसपा और कांग्रेस के जिन नेताओं का विरोध कर रहे थे आज उनके समर्थन में नारे कैसे लगाये यह समझ नहीं आता? हमारे लोग कहते हैं कि जब प्रदेश में भाजपा की लहर चल रही है तो बाहरी नेताओं को क्यों शामिल किया जा रहा है? अगर भाजपा के पक्ष में हवा चल रही है तो अपने नेताओं को टिकट देकर चुनाव जितवाना चाहिये था. हम जानते हैं कि बाहरी नेता कभी भाजपा के कार्यकर्ता की तरह से काम नहीं कर सकते. लोकसभा चुनाव में कई बाहरी नेता भाजपा के साथ चुनाव लड़े और जीते. सांसद बनने के बाद यह नेता तभी भाजपा आफिस आते हैं जब राष्ट्रीय अध्यक्ष या कोई बड़ा पदाधिकारी आये. बाहरी नेता पार्टी के कार्यकर्ताआ की उपेक्षा करते हैं.’ 

राजनीतिक समीक्षक हनुमान सिंह ‘सुधाकर‘ कहते हैं ‘भाजपा ने प्रदेश स्तर पर कोई ऐसा नेता सामने नही किया जिसके नाम पर चुनाव लड़ा जा सके. भाजपा की लड़ाई बिना दूल्हे के बारात जैसी है. भाजपा यहां पर भी लोकसभा चुनाव की तरह केवल नरेन्द्र मोदी के चेहरे को लेकर चुनाव लड़ रही है. भाजपा को यह पता है कि लोकसभा और विधानसभा के चुनाव में मुद्दे अलग होते हैं. दूसरे ढाई साल केन्द्र सरकार को हो चुके हैं, उससे जनता को जो उम्मीद थी वह पूरी नहीं हुई. ऐसे में भाजपा ने विधानसभा चुनाव जीतने के लिये हर तरह के समझौते करने शुरू कर दिये. जिससे भाजपा के मूल कैडर के लोग नाराज हैं. भाजपा ने केवल अपने कैडर की उपेक्षा ही नहीं कि, उसने पार्टी के चाल चरित्र और चेहरा की परिभाषा को भी बदल दिया है. कल तक जिन नेताओं का भाजपा विरोध कर रही थी आज वह भाजपा में शामिल होते ही पवित्र कैसे हो गये, यह प्रदेश की जनता को समझ नहीं आ रहा है. अब भाजपा की मूल चुनौती विरोधी नेता नहीं अपने असंतुष्ट नेताओं का भीतरघात है. दिल्ली में भाजपा इस तरह का घाव खाने के बाद भी सबक नहीं सीखी, यह हैरानी वाली बात है.’

एक पहेली की तरह है नर्सरी में ऐडमिशन

नर्सरी स्कूलों में अपने बच्चों को प्रवेश दिलाना माता पिताओं के लिए सारे देश में एक दुखद प्रक्रिया हो गई है. बच्चे स्कूल जाएं, पढ़ें लिखें और योग्य युवा बनें. यह अब आदर्श सपना हो गया है कि बच्चे अच्छे स्कूल में जाएं, जहां शान से सिर उठा सकें और फिर पढ़ें या न पढ़ें चमचमाते दिखें. स्कूली शिक्षा पढ़ाई व जानकारी के लिए नहीं वर्ग और वर्ण यानी स्टेटस और कास्ट से जुड़ गई है, जो पहले नर्सरी प्रवेश से शुरू होती है. गोरे ऊंचे वर्ण में पैदा हुई संतान की तरह अच्छा स्कूल जीवन में सफलता की पक्की सीढ़ी माना जाने लगा है.

दिल्ली के स्कूलों में नर्सरी में प्रवेश में ही इतने विवाद होने लगे हैं कि उच्च व सर्वोच्च न्यायालय व सरकार रोज नियम व कानून बनाती और बदलती है. दिल्ली में बहुत स्कूलों को वह जमीन दी गई है जिसे सरकार ने जबरन किसानों से सस्ते दाम पर खरीदा था और उसे बाजार भाव से थोड़े से कम दाम पर स्कूल चलाने वाली संस्थाओं को अलौट किया था. इस अलौटमैंट में बहुत सी शर्तें डाल दी गई थीं, जिन्हें उस समय संस्था के संचालक पढ़ते भी नहीं थे, क्योंकि जमीन का बड़ा टुकड़ा पाना अपनेआप में एक टेढ़ी खीर होता है. अब सरकार उस हक के नाते स्कूलों पर रोब गांठती है, तो संचालक चूंचूं करते हैं.

हाल ही में दिल्ली सरकार ने आदेश दिया है कि नर्सरी में प्रवेश केवल आसपास के पड़ोसी इलाकों में रह रहे मातापिताओं के बच्चों को दिया जाएगा और जो लोग किराए पर रह रहे हैं वे इस सुविधा का लाभ न उठा सकेंगे. किराएदारों को वंचित रखा गया है, क्योंकि मातापिता फर्जी किराया ऐग्रीमैंट बनवा लेते हैं ताकि मनचाहे स्टेटस और कास्ट के स्कूल में दाखिला मिल सके. छोटेछोटे बच्चों को भेड़ों की तरह रिकशों और कैबों में भर कर ले जाना देश भर में देखा जा सकता है, क्योंकि नेबरहुड स्कूल भी इतने दूर होते हैं कि आज के कोमल बच्चे 20-25 मिनट की वाक भी नहीं कर सकते. व्यस्त मातापिता उन्हें रिकशा वालों और कैब ड्राइवरों के हवाले कर देते हैं.

एक तरह से मातापिताओं, स्कूल संचालकों और सरकारों ने मिल कर शिक्षा का न केवल भयंकर बाजारीकरण कर दिया है, इस पर शासकीय आदेशों, अदालती फैसलों, नेतागीरी की कालिख व पैसे की चाहत के काले ब्रश भी फेर दिए हैं. मातापिता 4 लोगों में अपने बच्चे के स्कूल के गुणगान गा सकें. इस के लिए वे हर नेता, संचालक, व्यापारी की खुशामद को तैयार रहते हैं. नर्सरी से ले कर 8वीं कक्षा तक की शिक्षा पास के स्कूल में हो यह अच्छी बात है पर अंत के 4 साल ही बच्चे का भविष्य बनाएं, ऐसी कोई नीति बननी चाहिए और इन 4 सालों में वे धर्म, जाति, स्टेटस के आधार पर नहीं, बल्कि योग्यता के आधार पर स्कूलों में प्रवेश पाएं. छोटे बच्चे नामी स्कूल से न जुड़ें यह भावना पैदा करने की कोशिश करना आवश्यक हो रहा है ताकि छुटपन में ही बच्चों में उच्च या हीनभावना पैदा न हो. यह पहेली हल करना आसान नहीं, क्योंकि किसी को उसे हल करने की फुरसत भी नहीं है.

साथी हाथ बढ़ाना

कामकाजी महिलाओं की संख्या हर दिन बढ़ रही है और बढ़ती ही जाएगी. यह शुभ संकेत है पर महिला के शिक्षित और सुदृढ़ होने पर खुशी कहां अकेली आती है? अपने साथ कुछ मुसीबतें भी तो ले आती है. कामकाजी महिला घरबाहर के सारे काम संभालती है, फिर भी यही सुनती है कि तुम करती क्या हो? काम करती हो तो इतना जताती क्यों हो? क्या सिर्फ तुम ही काम करती हो? आजकल तो सब औरतें काम करती हैं, फिर इतना हल्ला क्यों? कामकाजी महिलाएं घरबाहर, बच्चों की परवरिश से जुड़े कई मोरचे संभालती हैं, पर तब उतनी ही दुखी भी हो जाती हैं जब उन्हें सहयोग और प्रशंसा नहीं मिलती. उन्हें सहयोग, प्रशंसा की जगह ताने क्यों सुनने पड़ते हैं? पति सहयोगी क्यों नहीं हो पाते? यदि वह अकेली है, तो यह दर्द और भी बढ़ जाता है. इस की जगह कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं, जिन्हें सहयोग, समर्थन ज्यादा मिलता है. क्या कारण और तरीके हैं, जो इस समस्या को सुलझा कर सुकून दे सकते हैं?

विवाह की शुरुआत सतरंगी होती है. वह समय है अपनेआप को स्थापित करने का. आप आगे की सोच कर यदि अभी से पति को भी घरबाहर के कामों में शामिल करेंगी, तो उन्हें भी इस की आदत हो जाएगी. पर सावधान, इस समय की पतिभक्ति उन्हें कहीं नवाब न बना दे. जैसाकि सपना ने किया. पति नेवी में औफिसर हैं. वह खुद कालेज में लैक्चरर है. एक बार जब पति बाहर से आए तो सपना बीमार हो गई. सुबह की चाय पति ने बना कर दी. बहुत स्वाभाविक और सही था, पर सपना की प्रतिक्रिया थी कि आज तक मैं ने इन से घर का कोई काम नहीं करवाया. इन की जूठी थाली भी हमेशा मैं ने ही उठाई है. आज जब इन्होंने मुझे चाय दी तो मैं ने मन ही मन कुदरत से कहा कि ऐसा दिन मत दिखाना कि मेरे पति को काम करना पड़े. मुझे हमेशा स्वस्थ रखना. यह रुख गलत था. फिर वही हुआ जो हमेशा से होता आया है. पहला बच्चा होने के बाद जब पति अधिकतर बाहर रहते, तो सारे काम उसे खुद ही करने पड़ते. तब वह चिढ़ने लगी. अब कहती है कि इन्हें मेरी जरा भी चिंता नहीं है. अब पति को बदलना आसान नहीं है. जब वक्त था तब वह खो दिया, इसलिए शुरू से सारे मोरचे खुद न संभालें.

‘‘मुझे आप की सहायता की जरूरत है. ये सब मैं अकेली नहीं कर पाऊंगी,’’ ऐसे शब्दों के साथ ही अपने जीवनसाथी का हाथ थामे रखें. उन्हें यह एहसास दिला दें कि आप को उन की जरूरत है. अब देखो शिखा का समर्पण कल उस का ही दुश्मन बन गया. शादी के बाद पति ने पहला अल्ट्रासाउंड केंद्र खोला. संघर्ष के दिनों में शिखा ने उन का बेहद साथ दिया. अपना काम, बच्चे सब कुछ संभालती गई. जैसेजैसे काम बढ़ा पति ने शिखा को यह कह कर कार खरीदवा दी कि अब तुम आराम से बच्चों को साथ ले कर काम कर लिया करना.

शुरू में तो शिखा को भी लगा पति उस का ध्यान रख रहे हैं पर जब 3 अल्ट्रासाउंड केंद्र खुल गए. पति की व्यस्तता सुबह 8 से रात के 12 बजे तक की हो गई तो अकेले सारी जिम्मेदारी उठाना शिखा को बेहद खलने लगा. अब पति का कहना था कि सारे काम तो नौकर कर देते हैं, तुम करती ही क्या हो? मुझे काम कर लेने दो. परेशान मत करो. शिखा के लाख समझाने पर भी कि बच्चों और उसे उन के साथ की जरूरत है, वह अपने पति को नहीं बदल पाई. बात यहीं नहीं रुकी, शिखा ने भी अपना काम बढ़ा लिया. बच्चों को कम समय देने लगी. हालात ने उस दिन जमीन पर ला पटका जब बच्चों ने कहा, ‘‘मम्मी, आप घर में आती हो, तो बहुत परेशान कर देती हो. नैट बंद करो, टीवी की आवाज कम करो. आप कमरे से बाहर चली जाओ.’’ यह सब सुन कर शिखा रो पड़ी कि उस का कियाधरा सब धूल में मिल गया.

जब शिखा ने पति को यह सब बताया तो उन्हें अपनी भूल समझ में आई. अभी हालात संभालने को वक्त था. उस दिन से उन दोनों ने बच्चों को समय देना शुरू किया. बच्चे छोटे थे, इसलिए सब कुछ संभल गया. यदि बच्चे बड़े होते तो शायद स्थिति को संभालना आसान न होता.

सब को साथ ले कर चलें

पूरे विश्व में यह साबित हो चुका है कि महिलाएं बेहतर मैनेजर होती हैं. घर हो या बाहर उन्हें यह दक्षता विरासत में ही मिली होती है. छुट्टी के दिन काम का बंटवारा करें. सुनीता के पति छुट्टी के दिन सुबह का नाश्ता बनाते हैं. बच्चे भी उन की सहायता करते हैं. परिवार का साथ और मिल कर काम करना सुनीता की छुट्टी को सुंदर बना देता है. बच्चों को भी पिता का साथ अच्छा लगता है. सब को कमरे में जाजा कर हाथ में खाना देने की जगह सब को साथ ले कर चलें. रास्ते रंगीन और आसान लगने लगेंगे.

खुद को नजरअंदाज न करें

यदि आप कामकाजी हैं, तो दिन घड़ी की सुइयों के साथ चलने लगता है. सुबह की चाय से रात को दही जमाने तक का रूटीन बेहद थका देता है. ये सब करतेकरते आप अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज न करें. जो खुद की कद्र नहीं करते उन की कद्र  दूसरे भी नहीं करते हैं. इस व्यस्त दिनचर्या में से पति या परिवार को आप की भी चिंता है, ऐसा माहौल बनने दें. ऐसा न करने पर कई बार कोई गंभीर बीमारी हमारे अंदर पल रही होती है. जब तक हम जागते हैं तब तक देर हो चुकी होती है. ब्रैस्ट कैंसर के अधिकतर केसों में ऐसा ही होता है. विभा को सिर में बेहद दर्द होता था. कोई भी पेन किलर खा कर वह अपना काम चला लेती थी. पति शुरू में कहते थे कि चलो विभा जांच करवा लेते हैं, पर हर बार विभा टाल जाती कि फिर कभी देखेंगे. अभी नहीं जा सकते. उस के बाद पति ने भी कहना छोड़ दिया. फिर एक दिन जब विभा की हालत बहुत बिगड़ गई और उसे अस्पताल में भरती करवाना पड़ा तब पता चला कि उसे ब्रेन ट्यूमर है.

यदि अकेली हैं तो

अकेले होने पर आप की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है. एक तो सारे मोरचे आप को ही संभालने होते हैं, दूसरा बच्चे को पिता की कमी भी खलती है उसे भी पूरा करना होता है. इस के लिए जरूरी है आप का बेहद चौकन्ना होना, धैर्यवान होना. घरबाहर, बच्चों के स्कूल, पढ़ाई, बिजली का बिल हो या डाक्टर के पास जाना सब कुछ अब आप को ही देखना है. जरूरत है बच्चों को अपना दोस्त बनाने की, उन से बात करते रहने की और एक स्वस्थ व मजबूत रिश्ता बनाने की, जिसे जमाने की आंधी से आप बचा सकें. बेशक, आप को सुनने और समझने वाला कोई नहीं है, फिर भी धीरेधीरे बच्चे ही आप के हमदर्द बनेंगे. शारदा के साथ ऐसा नहीं हो सका. शादी के 1 साल बाद पति से अलगाव हो गया. शारदा एक बेहद अनुशासित जीवन जीने वाली महिला थी. बेटे रवि को भी उसी अनुशासन के घेरे में बड़ा होना पड़ा. वह न तो अपनी पसंद से अपना कैरियर चुन सका न गाने का शौक पूरा कर सका. ऐसे ही जब वह 24 साल का हुआ, तो एक बार पिता की तरफ से संदेशा आया कि तुम यहां आ कर मेरे साथ मेरा काम संभाल सकते हो. रवि पिता के पास चला गया. उस ने मां को भी बहुत समझाया पर वे नहीं मानीं. आज वे अकेली हैं. अपनेआप को बहुत हारा हुआ महसूस करती हैं.

शारदा की जगह छवि ने अपनी इकलौती बेटी को अकेले ही पाला. आज मांबेटी की दोस्ती एक मिसाल है. अपने बच्चों को घरबाहर के काम में सहयोगी बनाएं. आज जो कमी आप ने महसूस की उसे कल को आप के बच्चे महसूस न करें. जीवन हम सब को अलगअलग चुनौतियां देता है. जो मिला है उसे कैसे बेहतर बनाना है, यह सोच ही सफल जीवन का राज है. हमारे आसपास कई उदाहरण हैं. जरूरत है पैनी निगाह की, जीवन को थाम लेने की चाह की और यदि वह चाह है तो साथी हाथ जरूर बढ़ा देगा, जीवनसाथी के या फिर अपने बच्चे के रूप में.

यूरिनरी इन्फैक्शन न करें अनदेखा

महिलाओं के लिए यूरिन से जुड़ी दिक्कतें परेशानी का सबब बनती हैं. ऐसी ही एक परेशानी है यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फैक्शन (यूटीआई). शरीर में मौजूद मूत्रमार्ग जिंदगी भर ऐसे जीवाणुओं को पेशाब की थैली में जाने का रास्ता देता रहता है, जिन की वजह से यूटीआई दिक्कत होती है. इसी वजह से हर दूसरी महिला को जीवन में कभी न कभी यूटीआई से जरूर जूझना पड़ता है.

दरअसल, मेनोपौज के बाद ऐस्ट्रोजन हारमोन में कमी की वजह से इन्फैक्शन पैदा करने वाले जीवाणुओं के पनपने की संभावना काफी बढ़ जाती है. महिलाओं के प्रजनन काल के समय ऐस्ट्रोजन हानिकारक जीवाणुओं को वैजाइना में घर बनाने से रोकता है. उस के पीएच स्तर को कम रखता है और उस के लिए जरूरी जीवाणुओं की वृद्धि में मदद करता है. यही जीवाणु यूटीआई से लड़ते हैं. ऐस्ट्रोजन में कमी और बढ़ोतरी दोनों से ही यूटीआई होता है, क्योंकि दोनों ही स्थितियों में योनि की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं.

क्या है यूटीआई

यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फैक्शन यानी मूत्रमार्ग के संक्रमण को बोलचाल की भाषा में यूटीआई कहते हैं. यह दरअसल, बैक्टीरिया का संक्रमण है. यह मूत्रमार्ग के किसी हिस्से को प्रभावित कर सकता है. मुख्यतया ई-कोलाई नामक बैक्टीरिया से यूटीआई की समस्या पैदा होती है. अन्य कई किस्म के बैक्टीरिया, फंगस और परजीवियों से भी यूटीआई की समस्या होती है. यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फैक्शन जैसाकि नाम से ही स्पष्ट है हमारे यूरिनरी सिस्टम का संक्रमण है. इस सिस्टम के अंग हैं किडनी, यूरिनरी ब्लैडर और यूरेथ्रा. इन में कोई अंग संक्रमित हो जाए तो उसे यूटीआई कहते हैं. इस संक्रमण के अधिकांश मरीजों के यूरिनरी टै्रक्ट का निचला हिस्सा प्रभावित होता है और यह संक्रमण यूरेथ्रा और ब्लैडर तक फैल जाता है. यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फैक्शन वैसे तो अधिक गंभीर  समस्या नहीं है, पर समय पर इलाज न हो तो इस संक्रमण के चलते कई अन्य गंभीर समस्याएं जन्म ले सकती हैं.

यूटीआई के कुछ आम कारण हैं- पीरियड्स के दिनों में योनि और गुदामार्ग की साफसफाई में कमी, प्रौस्टेट का बड़ा होना और शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता में कमी.

मूत्र मार्ग के अंदर और आसपास मौजूद बैक्टीरिया मौनसून में बहुत तेजी से बढ़ते हैं, जिस से संक्रमण का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है. यह समस्या महिला और पुरुष दोनों में होती है. मगर महिलाओं में अधिक होती है. इस की वजह है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं का यूरिनरी ट्रैक्ट छोटा होना.

रोकथाम के उपाय

– शारीरिक साफसफाई पर ध्यान देना जैसे यौन संबंध से पहले और बाद में पेशाब कर लेना.

– अधिक मात्रा में तरल पदार्थ का सेवन करना और पेशाब देर तक न रोकना.

– क्रैनबैरीज खाना या उन का जूस पीना, अनन्नास का जूस पीना भी इस बीमारी और इस के खतरे को कम करने में सहायक होता है.

– पर्याप्त विटामिन सी लेने से भी पेशाब में बैक्टीरिया नहीं पनपता है. 

– डा. अनुभा सिंह, गाइनोकोलौजिस्ट व आईवीएफ ऐक्सपर्ट

पहचानें बांझपन के लक्षणों को

अगर आप गर्भधारण नहीं कर पा रही हैं, तो आप अकेली नहीं हैं. आज हर 7 में से 1 दंपती के साथ यह समस्या है. एक सामान्य धारणा है कि बांझपन महिलाओं की समस्या है, लेकिन बांझपन के हर 3 केस में से 1 का कारण पुरुष होता है. बांझपन के बारे में पता केवल तब नहीं चलता जब कोई दंपती काफी प्रयासों के बाद भी संतान सुख प्राप्त नहीं कर पाते, बल्कि कई लक्षण हैं जो बहुत पहले ही इस बारे में संकेत दे देते हैं.

पुरुषों में बांझपन के लक्षण

अधिकतर पुरुष जो बांझपन की समस्या से जूझ रहे हैं वे पिता बनने की अक्षमता के अलावा बांझपन के लक्षणों को पहचान नहीं पाते. पुरुष बांझपन से ये संकेत और लक्षण जुड़े हुए हैं: टेस्टिकल की असामान्यता मुख्य है. टेस्टिकल्स अर्थात वर्षण में ही स्पर्म का निर्माण और संग्रह होता है. अगर इन का आकार छोटा है या सही स्थान पर नहीं हैं अथवा किसी बीमारी या दुर्घटना के कारण क्षतिग्रस्त हो गए हैं, तो इस से सीमन की गुणवत्ता प्रभावित होगी, जो प्रजनन क्षमता को सीधे तौर पर प्रभावित करती है. अगर मेल सैक्स हारमोन टेस्टोस्टेरौन जो स्पर्म के निर्माण में सम्मिलित होता है का स्तर असामान्य रूप से कम होता है तो यह सीधे तौर पर प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकता है. इस असंतुलन से छोटे कड़े टेस्टिकल्स हो जाते हैं व हेयर ग्रोथ में परिवर्तन आ जाता है. आमतौर पर सैक्स करने की इच्छा में भी परिवर्तन आ जाता है. टेस्टिकल्स में सूजन आ जाती या दर्र्द होता है. इरैक्शन और इजेक्युलेशन में समस्या पैदा हो जाती है.

उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों में स्पर्म की संख्या कम होने लगती है. कम स्पर्म का अर्थ है गर्भधारण की संभावना का कम होना. 40 साल पार के पुरुषों की प्रजनन क्षमता युवा पुरुषों की तुलना में लगभग 40-50% कम होती है. जिन पुरुषों को इम्यून तंत्र से संबंधित समस्याएं होती हैं उन्हें बांझपन का खतरा अधिक होता है. कमजोर इम्यून तंत्र के कारण स्पर्म की गति प्रभावित होती है, जिस से स्पर्म एग तक नहीं पहुंच पाते और उसे पेनिट्रेट नहीं कर पाते. वजन समान्य से बहुत अधिक या बहुत कम होने से शुक्राणुओं की संख्या, उन का स्वास्थ्य औैर टेस्टोस्टेरौन का स्तर प्रभावित होता है, जो अंतत: बांझपन का कारण बन जाता है. कई सैक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज जैसे क्लेमाइडिया, यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फैक्शन स्पर्म के स्वास्थ्य, उन के उत्पादन और गति को प्रभावित करते हैं, जो बांझपन का कारण बन सकता है.

इरैक्टाइल डिसफंक्शन

इरैक्टाइल डिसफंक्शन (ईडी) वह स्थिति है जिस में पुरुष संभोग के दौरान इरैक्शन प्राप्त नहीं कर पाते या उसे बनाए नहीं रख पाते हैं. कभीकभी ईडी की समस्या होना कोई चिंता का कारण नहीं, लेकिन अगर यह समस्या लंबे समय से चल रही है तो जरूर यह चिंता का विषय है. ईडी के लक्षणों में निम्न लक्षण सम्मिलित हो सकते हैं:

– इरैक्शन प्राप्त करने में समस्या आना.

– इरैक्शन को बनाए रखने में समस्या आना.

– सैक्स की इच्छा कम होना.

महिलाओं में बांझपन के लक्षण

महिलाओं में बांझपन के  लक्षण मासिकधर्म प्रारंभ होने के साथ ही दिखने लगते हैं. इन में से कईर् लक्षण ऐसे होते हैं, जिन्हें तुरंत पहचान कर उन का उपचार करा लिया जाए तो बहुत संभव है कि भविष्य में होने वाली बांझपन की आशंका से बचा जाए.

अनियमित मासिकधर्म

महिलाओं में मासिकधर्म की अनियमितता बांझपन का सब से प्रमुख कारण है. कईर् महिलाओं में संतुलित व पोषक भोजन के सेवन और नियमित ऐक्सरसाइज के द्वारा यह समस्या दूर हो जाती है, लेकिन कई महिलाओं को उपचार की आवश्यकता पड़ती है. मासिकचक्र से संबंधित निम्न अनियमितताएं हो सकती हैं:

– 21 दिन से कम समय के अंतराल में पीरियड्स आना.

– पीरियड्स के दौरान 2 दिन से भी कम समय तक ब्लीडिंग होना.

– 2 पीरियड्स के बीच में ब्लीडिंग होना जिसे इंटरमैंस्ट्रुअल ब्लीडिंग कहते हैं. इसे स्पौटिंग भी कहते हैं.

– 3 मासिकचक्र में पीरियड्स न आना.

– पीरियड्स 35 दिन के अंतराल से अधिक समय में आना.

– मासिकचक्र के दौरान अत्यधिक ब्लीडिंग होना.

मासिकधर्म न आना

कई महिलाओं में कभीकभी मासिकधर्म आता ही नहीं. इस का कारण अंडाशय या गर्भाशय की अनुपस्थिति होती है. यह समस्या जन्मजात हाती है, लेकिन इस के बारे में पता यौवनावस्था प्रारंभ होने पर लगता है. ऐसी महिलाएं कभी मां नहीं बन पाती हैं.

हारमोन असंतुलन

कभीकभी महिलाओं में बांझपन हारमोन समस्याओं से भी संबंधित होता है. इस मामले में निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं:

– त्वचा में परिवर्तन आ जाना, जिस में अत्यधिक मुंहासे होना सम्मिलित है.

– सैक्स करने की इच्छा में परिवर्तन आ जाना.

– होंठों, छाती और ठुड्डी पर बालों का विकास.

– बालों का झड़ना या पतला होना.

– वजन बढ़ना.

– निप्पल से दूध जैसा सफेद डिस्चार्ज निकलना, जो स्तनपान से संबंधित नहीं होता है.

– सैक्स के दौरान दर्द होना.

– असामान्य मासिकचक्र.

फैलोपियन ट्यूब्स का क्षतिग्रस्त हो जाना

ऐसा फैलोपियन ट्यूब्स के सूज जाने के परिणामस्वरूप होता है. यह पैल्विक इनफ्लैमेटरी डिजीज के कारण हो सकता है, जो सामान्यतया सैक्सुअली ट्रांसमिटेड संक्रमण, ऐंडोमैट्रिओसिस के कारण होता है.

गंभीर ऐंडोमैट्रिओसिस

ऐंडोमैट्रिओसिस गर्भाशय से जुड़ी एक समस्या है. यह समस्या महिलाओं की प्रजनन क्षमता को सर्वाधिक प्रभावित करती है, क्योंकि गर्भधारण करने और बच्चे को जन्म देने में गर्भाशय की सब से महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है. ऐंडोमैट्रिओसिस गर्भाशय की अंदरूनी परत की कोशिकाओं का असामान्य विकास होता है. यह समस्या तब होती जब कोशिकाएं गर्भाशय के बाहर विकसित हो जाती हैं. इसे ऐंडोमैट्रिओसिस इंप्लांट कहते हैं.

जिन महिलाओं को ऐंडोमैट्रिओसिस है, उन में से 35-50% को गर्भधारण करने में समस्या होती है. इस के कारण फैलोपियन ट्यूब्स बंद हो जाती हैं जिस से अंडाणु और शुक्राणु का निषेचन नहीं हो पाता है. कभीकभी अंडे या शुक्राणु को भी नुकसान पहुंचता है. इस से भी गर्भधारण नहीं हो पाता. जिन महिलाओं में यह समस्या गंभीर नहीं होती उन्हें गर्भधारण करने में अधिक समस्या नहीं होती है.

प्रीमेनोपौज

इस में ओवरी काम करना बंद कर देती है और मासिकधर्म 40 साल की उम्र के पहले बंद हो जाता है. मेनोपौज की स्थिति इस बात का प्रत्यक्ष लक्षण है कि आप अब कभी मां नहीं बन पाएंगी.

पौलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम

इस में गर्भाशय में छोटेछोटे सिस्ट बन जाते हैं, जिस से गर्भधारण करने में समस्या होती है. यह बांझपन का कारण बन सकता है.

30 साल से अधिक उम्र 30 के बाद गर्भधारण करने की संभावना घटने लगती है, क्योंकि एग्स जितने पुराने होंगे उन का निषेचन उतना ही कठिन हो जाता है.

जिन महिलाओं की आयु 30 साल से अधिक है उन के एक मासिकचक्र में गर्भधारण करने की संभावना 20% होती है और 40 साल की उम्र तक पहुंचतेपहुंचते यह संभावना 5% रह जाती है.

अगर 35 साल की आयु के बाद लगातार 6 महीनों तक असुरक्षित यौन संबंध बनाने के बावजूद कोई महिला गर्भवती नहीं होती है, तो यह बांझपन का संकेत हो सकता है.

गर्भाशय के फाइब्रौयड्स

फाइब्रौयड्स एक कैंसर रहित ट्यूमर होता है, जो गर्भाशय की मांसपेशीय परत में विकसित होता है. इसे यूटरिन फाइब्रौयड्स, मायोमास या फाइब्रोमायोमास भी कहते हैं. जब गर्भाशय में केवल एक ही फाइब्रौयड हो तो उसे यूटरिन फाइब्रोमा कहते हैं.

वैसे फाइब्रौयड्स के कारण गर्भधारण करना कठिन नहीं होता है. जब फाइब्रौयड्स फैलोपियन ट्यूब्स को ब्लौक कर देते हैं तब गर्भधारण करना कठिन हो जाता है.

कई मामलों में फाइब्रौयड्स निषेचित अंडे को गर्भाशय की भीतरी दीवार से जुड़ने नहीं देते. जब फाइब्रौयड्स गर्भाशय की बाहरी दीवार पर होते हैं, तो इस से गर्भाशय का आकार बदल जाता है और गर्भधारण करना कठिन हो जाता है.

रोकथाम

विश्व भर में हुए कई अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि कई लोगों में बांझपन की समस्या को जीवनशैली में बदलाव ला कर दूर किया जा सकता है. अध्ययन में यह भी कहा गया है कि अगर आप बांझपन को दूर करने के लिए कोई उपचार करा रहे हैं तो वह भी तभी कारगर होगा जब आप अपनी जीवनशैली में इन्हें शामिल करें.

ऐक्सरसाइज करें

नियमित ऐक्सरसाइज करने से न केवल आप का स्वास्थ्य बेहतर होता है, बल्कि आप की प्रजनन क्षमता पर भी इस का सीधा प्रभाव पड़ता है. ऐक्सरसाइज करने से रक्तसंचार सुधरता है, तनाव कम होता है और शरीर के सभी तंत्र बेहतर तरीके से काम करते हैं. लेकिन एक बात का ध्यान रखें कि बहुत ज्यादा ऐक्सरसाइज भी न करें, क्योंकि इस से प्रजनन क्षमता नकारात्मक रूप से प्रभावित हो सकती है.

पूरी नींद लें

जो लोग पूरी नींद नहीं लेते उन का सैक्स जीवन बुरी तरह प्रभावित होता है. नींद की कमी से शरीर की लय गड़बड़ा जाती है. शरीर में तनाव बढ़ने से हारमोन का संतुलन गड़बड़ा जाता है. इन में सैक्स हारमोन भी सम्मिलित हैं. इसलिए रोज नियत समय पर सोएं और जागें.

धूम्रपान, शराब औैर कैफीन के सेवन से बचें

अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि जो लोग धूम्रपान और शराब के आदी होते हैं, उन में बांझपन विकसित होने की आशंका अधिक होती है. कैफीन का अधिक सेवन भी प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है.

संतुलित भोजन का सेवन करें

जो भोजन आप खाते हैं उस का आप की प्रजनन क्षमता पर सीधा प्रभाव पड़ता है. अत: अपने प्रजनन तंत्र को दुरुस्त रखने के लिए ऐसा भोजन लें जिस में फल, सब्जियां, साबूत अनाज और मछली अधिक तथा लाल मांस व रिफाइंड अनाज कम मात्रा में हो.

तनाव न पालें

तनाव का सीधा प्रभाव सैक्स लाइफ पर पड़ता है. इसलिए तनाव से बचने और मस्तिष्क को शांत रखने के लिए नियमित ध्यान करें. थोड़ा समय अपने परिवार और दोस्तों के साथ बिताएं.

– डा. आंचल अग्रवाल, हैड कंसल्टैंट इनफर्टिलिटी ऐंड आईवीएफ. बीएलके हौस्पिटल   

सर्द मौसम की स्पैशल डिशेज

कश्मीरी दम आलू

सामग्री

– 500 ग्राम छोटे आलू – 250 ग्राम दही – 15 ग्राम सरसों का तेल – 10 ग्राम कश्मीरी लालमिर्च पाउडर  – 10 ग्राम धनिया पाउडर – 1 छोटा चम्मच सौंफ पाउडर – 1 छोटा चम्मच जीरा पाउडर – 1/2 छोटा चम्मच जीरा – 1/2 छोटा चम्मच गरममसाला  – चुटकी भर इलाइची पाउडर – 2 हरीमिर्चें कटी – 50 ग्राम प्याज कटा – 2 करीपत्ते – 1 छोटा चम्मच लहसुन का पेस्ट – 1 छोटा चम्मच अदरक का पेस्ट – 10 ग्राम टोमैटो प्यूरी – थोड़ी सी धनियापत्ती कटी गार्निशिंग के लिए – नमक स्वादानुसार.

विधि

आलुओं को धो कर कुकर में नमक डाल कर उबालें. फिर छील कर अलग रख दें. एक बरतन में सरसों का तेल गरम कर लें. जीरा डाल कर फ्राई करें. फिर इस में करीपत्ते, हरीमिर्चें, अदरक और लहसुन मिलाएं. फिर प्याज डाल कर फ्राई करें. अब आलू डाल कर फ्राई करें. फिर दही डाल कर पकाएं. अब इस मिश्रण में धनिया पाउडर, सौंफ पाउडर, लालमिर्च पाउडर, जीरा पाउडर व इलाइची पाउडर डालें और फ्राई करें. अब टोमैटो प्यूरी डालें और फ्राई करें. तेल के अलग होने पर गरममसाला डालें और भूनें. धनियापत्ती से गार्निश कर सर्व करें.

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अदरक की सब्जी

सामग्री

– 100 ग्राम अदरक – 5-6 लहसुन – 1 छोटा प्याज – 1 छोटा टमाटर  – 10 एमएल दूध – 10 एमएल घी – 1/2 छोटा चम्मच लालमिर्च पाउडर – 1/2 छोटा चम्मच हलदी – 1/2 छोटा चम्मच सौंफ  – 1/2 छोटा चम्मच जीरा – 1/2 छोटा चम्मच अजवाइन – धनियापत्ती – अदरक के लच्छे गार्निशिंग के लिए – नमक स्वादानुसार.

विधि

टमाटर और प्याज को बारीक काट लें. कड़ाही में घी गरम कर उस में जीरा और सौंफ डालें और फ्राई करें. फिर इस में अदरक और लहसुन डाल कर 2 मिनट फ्राई करें. अब इस मिश्रण में टमाटर व प्याज डालें और अच्छी तरह फ्राई करें. फिर नमक, लालमिर्च और हलदी डालें. थोड़ा पानी डाल कर तब तक पकाएं जब तक प्याज अच्छी तरह पक न जाए. इस मिश्रण में दूध डालें और उबालें. पकने के बाद धनियापत्ती और अदरक के लच्छों से गार्निशिंग कर सर्व करें.

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मूली मलाई कोफ्ता

सामग्री

– 500 ग्राम मूली – 150 ग्राम उबले आलू – 1 छोटा प्याज – 1/2 छोटा चम्मच गरममसाला – 1/2 छोटा चम्मच लालमिर्च पाउडर – चुटकी भर अजवाइन – 2-3 बड़े चम्मच आटा.

ग्रेवी की सामग्री

– 2-3 कलियां लहसुन – 1 छोटा टुकड़ा अदरक – 2 प्याज – 50 ग्राम टोमैटो प्यूरी – 2 अखरोट – 4 काजू – 1 छोटा चम्मच इलाइची पाउडर – 1 बड़ा चम्मच धनिया पाउडर – 1/2 छोटा चम्मच जीरा पाउडर  – 2 बड़े चम्मच तेल – 50 ग्राम मलाई  – 2 तेजपत्ते – नमक स्वादानुसार.

विधि

मूली और प्याज को एक साथ कस लें. उस में आलू, आटा, नमक, आधा गरममसाला, आधा लालमिर्च पाउडर और अजवाइन डाल कर अच्छी तरह मिक्स करें. अब इस मिश्रण के कोफ्ते बना कर डीप फ्राई करें. अखरोट और काजू को 2-3 मिनट पानी में भिगो दें. इस के बाद लहसुन, अदरक, प्याज, काजू और अखरोट का पेस्ट बना लें. एक पैन में तेल गरम कर उस में प्याज वाला पेस्ट तब तक फ्राई करें जब तक कि वह हलका भूरा न हो जाए. इस में टोमैटो प्यूरी, धनिया पाउडर, इलाइची पाउडर, जीरा पाउडर, लालमिर्च पाउडर, गरममसाला और नमक डाल कर फ्राई करें. इस मिश्रण में थोड़ा पानी डालें और ग्रेवी को उबालें. ग्रेवी के तैयार होने पर उस में कोफ्ते डालें और सर्व करें.

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बेक्ड मसाला गोभी

सामग्री

– 1 फूल गोभी – 4 प्याज – 2 टमाटर – 1 छोटा टुकड़ा अदरक – 6 कलियां लहसुन  – 1 छोटा चम्मच हलदी पाउडर  – 2 तेजपत्ते – 1 छोटा चम्मच लालमिर्च पाउडर – 2 चम्मच धनिया पाउडर – 1 छोटा चम्मच गरममसाला – 1/2 छोटा चम्मच जीरा पाउडर – 2 हरीमिर्चें – 10 ग्राम तेल – 15 ग्राम पिज्जा चीज – थोड़ी सी धनियापत्ती कटी गार्निशिंग के लिए – नमक स्वादानुसार.

विधि

गोभी के निचले हिस्से को अलग कर बाकी गोभी को 5 मिनट के लिए नमक वाले गरम पानी में रखें और फिर पानी से निकाल कर सुखा लें. प्याज, टमाटर, हरी मिर्च, लहसुन और अदरक का पेस्ट बनाएं. इस पेस्ट में तेजपत्ते, नमक, धनिया पाउडर, हलदी, जीरा पाउडर, गरममसाला और लालमिर्च पाउडर डालें. अब इस मिश्रण को गोभी में लगा कर 30 मिनट के लिए अलग रख दें. अब बेकिंग ट्रे में तेल लगाएं और गोभी पर फौइल पेपर लगा कर 15 मिनट तक बेक करें. फिर पिज्जा चीज डालें और तब तक बेक करें जब तक चीज पिघल न जाए. फिर धनियापत्ती से गार्निश कर सर्व करें.

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खजूर नवाबी कोफ्ते

सामग्री

– 10 खजूर – 20 ग्राम खोया – 50 ग्राम पनीर मसला – चुटकी भर इलाइची पाउडर – चुटकी भर लालमिर्च पाउडर – चुटकी भर गरममसाला – 100 ब्रैडक्रंब्स – पर्याप्त तेल फ्राई करने के लिए – नमक स्वादानुसार.

ग्रेवी की सामग्री

– 2-3 कलियां लहसुन – 1 छोटा टुकड़ा अदरक – 2 प्याज – 30 ग्राम टोमैटो प्यूरी – 5 काजू – चुटकी भर इलाइची पाउडर – 1 बड़ा चम्मच धनिया पाउडर – चुटकी भर सौंफ पाउडर – 1/2 छोटा चम्मच जीरा पाउडर – 2 बड़े चम्मच तेल – 5 ग्राम क्रीम – 2 तेजपत्ते – नमक स्वादानुसार.

विधि

खजूर के बीज निकाल लें. फिर खोया, नमक, लालमिर्च पाउडर, इलाइची पाउडर और गरममसाले का मिश्रण तैयार करें और प्रत्येक खजूर में यह मिश्रण भरें. अब पनीर को मैश कर उस में नमक, लालमिर्च पाउडर और थोड़े से ब्रैडक्रंब्स मिला कर गूंथ लें. अब एक लोई के बीचोंबीच एक खजूर रख दें. खजूर को अच्छी तरह लोई से कवर करें और ब्रैडक्रंब्स में रोल करने के बाद उसे डीप फ्राई करें. इस तरह

10 कोफ्ते तल लें. फिर 2-3 मिनट के लिए काजू को पानी में रखें. अब लहसुन, अदरक, प्याज और काजू का पेस्ट बना लें. इस मिश्रण को हलका सुनहरा होने तक तेल में फ्राई करें. फिर इस में टोमैटो प्यूरी, धनिया पाउडर, इलाइची पाउडर, सौंफ पाउडर, जीरा पाउडर, लालमिर्च पाउडर, नमक और गरममसाला डालें और फ्राई करें. अब इस मिश्रण में थोड़ा पानी डालें और ग्रेवी को उबालें. इस में थोड़ी क्रीम डाल कर ग्रेवी में कोफ्ते डालें और परोसें.

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मटर मेथी मलाई

सामग्री

– 300 ग्राम मेथी की पत्ती – 200 ग्राम मटर उबले – 100 ग्राम मलाई – 1 छोटा चम्मच कालीमिर्च – 1 छोटा चम्मच अदरक का पेस्ट – 1 छोटा चम्मच लहसुन का पेस्ट – 2 हरीमिर्चें – 2 तेजपत्ते – 10 ग्राम काजू का पेस्ट

– थोड़ी सी क्रीम – 1 छोटा चम्मच गरममसाला – 1/2 छोटा चम्मच लालमिर्च पाउडर – 1 बड़ा चम्मच तेल – चुटकी भर हलदी – नमक स्वादानुसार.

विधि

मेथी की पत्तियों को साफ कर के उन्हें हरी मिर्च के साथ पीस लें. अब एक बरतन में तेल गरम कर उस में अदरक व लहसुन का पेस्ट डाल कर 2 मिनट तक फ्राई करें. इस मिश्रण में काजू का पेस्ट, हलदी, लालमिर्च पाउडर, तेजपत्ते, कालीमिर्च और नमक डालें. फिर इसे मेथी के मिश्रण में डालें और कुछ देर तक पकाएं. इस में थोड़ा पानी डालें और ढक कर कुछ देर और पकाएं. अब इस में गरममसाला, मटर और मलाई डालें और 2 मिनट तक पकाएं. क्रीम से गार्निश कर सर्व करें.

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मखाना शाही सब्जी

सामग्री

– 60 ग्राम मखाने – 4 काजू – 5 ग्राम किसमिस – 20 ग्राम खोया – 1 छोटा चम्मच लालमिर्च पाउडर – 15 ग्राम पनीर मसला – 1 छोटा चम्मच लहसुन का पेस्ट – 1 छोटा चम्मच अदरक पेस्ट – 15 ग्राम मशरूम – 1 छोटा चम्मच चीनी – 1 छोटा चम्मच गरममसाला – 1 छोटा चम्मच इलाइची पाउडर – 1 छोटा चम्मच जीरा – 10 ग्राम तेल या घी – 3 तेजपत्ते – 10 ग्राम मटर उबले – सिल्वर फौइल गार्निशिंग के लिए – नमक स्वादानुसार.

विधि

मशरूम को चौकोर काट लें. कड़ाही में तेल गरम कर उस में मखाने तल लें. इस के बाद कड़ाही में जीरा और तेजपत्ते, लहसुन व अदरक का पेस्ट और खोया डाल कर फ्राई करें. अब इस में मशरूम, नमक, लालमिर्च पाउडर, इलाइची पाउडर और थोड़ा पानी डालें और ढक कर पकाएं. मशरूम के पक जाने के बाद उस में पनीर, गरममसाला और चीनी डाल कर अच्छी तरह मिलाएं. अब इस में काजू, मखाने और किसमिस डालें. फिर मटर डाल कर उबालें. सिल्वर फौइल से गार्निश कर सर्व करें.

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शलगम भरता

सामग्री

– 500 ग्राम शलगम – 2 प्याज – 2 टमाटर – 1 छोटा टुकड़ा अदरक – 5 कलियां लहसुन – चुटकी भर हींग – 1/2 छोटा चम्मच हलदी – 1/2 छोटा चम्मच लालमिर्च पाउडर – 1/2 छोटे चम्मच धनिया पाउडर – 1/2 छोटे चम्मच गरममसाला – 1/2 छोटा चम्मच चीनी – 1 बड़ा चम्मच घी गार्निशिंग करने के लिए – 1 छोटा चम्मच तेल – थोड़ी सी धनियापत्ती कटी गार्निशिंग के लिए – नमक स्वादानुसार.

विधि

शलगमों को थोड़े पानी में उबाल कर मैश करें और अलग रख दें. प्याज, टमाटर, लहसुन और अदरक का पेस्ट बना लें. एक बरतन में तेल गरम कर प्याज का मसाला भूनें. फिर इस में नमक, धनिया पाउडर, हलदी और लालमिर्च पाउडर डालें. बाद में शलगम डालें और अच्छी तरह मिक्स करें. फिर इस मिश्रण में पानी और गरममसाला डालें. थोड़ी चीनी डाल कर सामग्री को ढक कर 2 मिनट पकाएं. भाप निकलने पर ढक्कन खोलें और घी व धनियापत्ती से गार्निश कर के गरमगरम सर्व करें.

व्यंजन सहयोग : रुचिता जुनेजा कपूर

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