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सावधान : इस मॉडल का ये फोटोशूट आप अकेले में ही देखें

अकसर मॉडल फोटोशूट करते हैं. लेकिन कुछ मॉडल्स के फोटाशूट देखने के बाद हमारी आंखे फटी की फटी रह जाती हैं. ऑस्ट्रेलियन मॉडल शैनिना का ये फोटोशूट देखने के बाद आपके साथ भी कुछ ऐसा ही होने वाला है.

ऑस्ट्रेलियन मॉडल शैनिना शायक का आज आपको ऐसा लुक दिखाने जा रहे हैं, जो शायद आपने पहले कभी नहीं देखा होगा. इस लुक में उनका अंदाज जुदा है. बता दें कि शैनिना ने स्विमवियर कलेक्शन के लिए फोटोशूट करवाया है.

ज्यादातर फोटो में शैनिना ने कलरफुल स्विमसूट पहना है. ये फोटोज नार्थ कैलिफोर्निया के बीच पर शूट किए गए हैं. इस शूट की फोटो सोशल साइट्स पर भी खूब वायरल हो रही हैं. स्विमवियर कलेक्शन के लिए किए गए शूट की फोटोज शैनिना ने शेयर भी किए हैं. उनकी ये फोटोज फोटोग्राफर जोई ग्रॉसमैन ने क्लिक किए हैं.

शैनिना का स्टाइल और लुक सेट किया है एश्ले ग्लोरिसो ने. शैनिना ने कुछ फोटो में ब्लैक, कुछ में कलरफुल और व्हाइट कलर की बिकिनी पहनी है. उनकी फोटोज बीच के अलावा पुल साइड पर भी क्लिक किए गए हैं.

आप भी देखिए शैनिना का ये फोटोशूट

उत्तर प्रदेश चुनाव में नये तरह का धर्मवाद

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में धर्म के प्रचार के लिये भाजपा राममंदिर का जिक्र नहीं कर रही. अब वह धर्म को राजनीति के केन्द्र में रखने के लिये दीवाली-होली और ईद, श्मशान और कब्रिस्तान और तीन तलाक जैसे मुद्दों को चुनाव के केन्द्र में रख रही है. उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में यह नये तरह के धर्मवाद का प्रतीक बन गया है. सोशल मीडिया और दूसरे मौखिक प्रचार से यह बात की जा रही है कि भाजपा ने विधानसभा चुनावों में किसी मुसलिम प्रत्याशी को टिकट नहीं दिया. अब बारी हमारी है. सुप्रीम कोर्ट की मंशा को दरकिनार कर सभी दल पूरी तरह से जाति और धर्म को लेकर चुनाव प्रचार कर रहे हैं.

भाजपा को लोकसभा चुनावों में वोट के धर्मिक धुव्रीकरण का सबसे अधिक लाभ मिला था. विधानसभा चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की वोटिंग के बाद भाजपा ने नये तरह के धर्मवाद को सामने कर प्रचार किया है. उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में शुरुआत से ही सपा और बसपा मुसलिम वोटों को हासिल करने की मारामारी में लग गये. सपा को मात देने के लिये बसपा ने सबसे अधिक मुसलिम प्रत्याशियों को टिकट दिया. बसपा को लग रहा था कि भाजपा के मुकाबले केवल बसपा ही चुनाव मैदान में होगी, क्योंकि परिवार में विवाद का शिकार सपा पिछड़ जायेगी.

कांग्रेस के  तालमेल करने के बाद सपा ने मुसलिम मतों को बसपा के साथ खड़े होने में सेंधमारी कर दी. जिससे अब बसपा के साथ साथ सपा-कांग्रेस गठबंधन भी मुसलिम मतों का दावेदार हो गया. ऐसे में बसपा का दांव खाली चला गया. जिस तरह से बसपा, सपा और कांग्रेस भाजपा पर धर्मिक धुव्रीकरण का आरोप लगा रहे हैं उसी तरह से भाजपा इन दलों को धार्मिक ध्रुवीकरण का जिम्मेदार मान रही है.

सपा और बसपा की परेशानी का सबसे बड़ा सबब यह है कि दलित और पिछडा वर्ग हिन्दुत्व के मुद्दे पर भाजपा का साथ देने को तैयार हो जाता है. इस कारण ही भाजपा अब धर्म के नये मुद्दे उठा रही है. वह गांव में रहने वाले दलित और पिछडे वर्ग के लोगों को समझा रही है कि जो सरकार कब्रिस्तान बनवा सकती है वह श्मशान क्यों नहीं बनवाती, जो ईद के लिये कुछ करती है, वह होली दीवाली के लिये क्यों नहीं करती? अगर हज हाउस बन सकता है तो दूसरे धर्मिक संसाधन क्यों नहीं हो सकते. भाजपा को पता है कि अब राम मंदिर जैसे मुद्दे चुनाव में नहीं कारगर हो सकते, ऐसे में नये मुद्दे ही वोट दिला सकते हैं. यह नये मुद्दे प्रचार में भी सहायक हो रहे हैं. यही वजह है कि भाजपा नये धर्मवाद को लेकर लगातार तीखा हमला करने में लगी है.        

मैं कॉमेडी करना चाहती हूं : नीलू वाघेला

राजस्थानी फिल्मों से धारावाहिक ‘दिया और बाती हम’ में भाबो की भूमिका निभाकर नाम कमा चुकी अभिनेत्री नीलू वाघेला राजस्थान की हैं. बचपन से अभिनय का शौक रखने वाली नीलू एक थिएटर आर्टिस्ट हैं. उन्होंने 11 वर्ष की उम्र से अभिनय के क्षेत्र में कदम रखा. उनकी फिल्म ‘बाई चाली सासरिया’ काफी सफल फिल्म रही, जिसे हिंदी में रीमेक फिल्म ‘साजन का घर’ बनी. उन्होंने आज तक करीब 50 राजस्थानी फिल्में और 5 गुजराती फिल्में की हैं. अत्यंत शांत और मृदु भाषी नीलू के इस कदम को उनके परिवार वालों ने खूब सपोर्ट किया. अपनी सफलता का श्रेय वह अपने माता-पिता को और अपने पति अरविन्द कुमार को देती हैं. उनके दो बच्चे, बेटा कैज़र (15 वर्ष) और बेटी वंशिका (10 वर्ष) हैं. धारावाहिक ‘दिया और बाती हम’ की सफलता को देखते हुए इसकी सिक्वल ‘तू सूरज मैं सांझ पियाजी’ एक बार फिर से स्टार प्लस पर आ रहा है. इसमें नीलू, भाबो की ही भूमिका में दूसरी पीढ़ी का स्वागत करने वाली है, उनसे मिलकर बात करना रोचक था. पेश है अंश.

प्र. इस सीक्वल में खास क्या रहेगा?

इसमें मैं अपने आने वाले राठी परिवार का स्वागत करूंगी. 20 साल आगे बढ़ चुकी इस कहानी में मैं भी ओल्ड हो चुकी हूं, लेकिन मेरा स्वभाव पहले जैसा ही है. परिवार का वही भाव, वही इमोशन, नई सोच आदि सब कुछ इसमें भी है और ये कहानी भी एक मेसेज के साथ ही होगी. केरल में हमने शूटिंग की है. यहां की ताजगी और नयेपन को उसमें दिखाया जायेगा. इसमें मेरा पहनावा साड़ी है.

प्र. भाबो के चरित्र को करने के बाद आप अपने आप में क्या बदलाव महसूस करती हैं?

मेरी सोच काफी बदल चुकी है. आज मैं देखती हूं कि लोग बहुत व्यस्त रहने के बावजूद भी परिवार के साथ मिलने की कोशिश करते हैं. वे उन्हें मिस करते हैं. मैं अपने किरदार को घर तक भी लेकर जा चुकी हूं. इसके अलावा मैंने यह भी सीखा है कि अपनी कोई भी समस्या को आप खुद ही सुधार सकते है, इसकी जिम्मेदारी किसी पर थोपना ठीक नहीं और इंसान को हमेशा सच की लड़ाई लड़नी चाहिए.

प्र. बीच में ऐसा कहा गया था कि आप ये शो छोड़ने वाली हैं, इसकी वजह क्या थी?

उन दिनों मेरी तबियत काफी ख़राब हो गयी थी. रोज 12 से 14 घंटे काम करना पड़ रहा था. ऐसे में मुझे आराम नहीं मिल रहा था. इसलिए मैंने सोचा थी कि मैं थोड़ा रेस्ट कर लूं और कोई बात नहीं थी.

प्र. आप अपने काम से कितनी संतुष्ट हैं? क्या कभी लगा कि आप भाबो की भूमिका से कुछ और अच्छा काम कर सकती थी?

मेरा ये पहला टीवी शो था. मैंने इस चरित्र को जिया है. ये चरित्र मेरे दिल के बहुत करीब है. इसे करते हुए मुझे बहुत सुकून मिला और ऐसा कभी नहीं लगा कि मैं कुछ और अच्छा कर सकती थी.

प्र. आप थिएटर आर्टिस्ट हैं, उसे कितना मिस करती हैं? कितना फायदा आपको इसकी वजह से हुआ है?

मैं थिएटर आज भी करती हूं. मुझे बहुत गर्व होता है कि मैं आज भी अपने दर्शकों के बीच में जाती हूं. मैंने किसी को छोड़ा नहीं है. मैं अभी भी सब्जी खरीदने खुद ही जाती हूं. असल में थिएटर करने के बाद आप नेचुरल बन जाते हैं. पहले लोग थिएटर को असल नहीं, बल्कि बनावटी एक्टिंग करने की जगह बताते थे. लेकिन आजकल ऐसा नहीं है, आज ये बहुत नेचुरल है. इससे आप का आत्मविश्वास बढ़ता है और कैमरे का डर खत्म हो जाता है. फिर अगर आप में लगन है तो उसे और अधिक निखार सकते हैं.

प्र. क्या जिंदगी में कुछ मलाल रह गया है?

मैं कॉमेडी करना चाहती हूं, क्योंकि लोगों को हंसाना भी एक कला है.

प्र. क्या इस तरह के महिलाओं को प्रेरित करने वाले धारावाहिक का कुछ प्रभाव महिलाओं पर पड़ता है?

मुझे याद आता है कि राजस्थान में एक महिला पुलिस अधिकारी ने मुझे पास बुलाकर धन्यवाद दिया था. उसका कहना था कि वह जब आईपीएस अधिकारी बनना चाहती थीं, तो उन्हें बहुत सारी परेशानियां झेलनी पड़ी थी.

प्र. किस बात से आपको गुस्सा आता है?

जब कोई झूठ बोलता है तो मुझे गुस्सा आता है.

प्र. क्या टीवी इंडस्ट्री में योग्यता के अनुसार पैसे नहीं मिलते, जिस वजह से कई कलाकार टीवी छोड़ जाते हैं?

ऐसा मेरे साथ नहीं हुआ, ये सभी बातें आपके स्वभाव और तरीके पर निर्भर करती हैं, लेकिन अगर कोई समस्या है तो उसे मिल बैठकर सुलझाया जा सकता है.

प्र. इतना सब कुछ दिखाए जाने के बाद भी आज महिलाएं शोषित और प्रताड़ित होती हैं, किसे जिम्मेदार मानती हैं?

इसके लिए पूरे परिवार की जिम्मेदारी बनती है कि हमें अपपनी लड़कियों को इतना मजबूत बनाना होगा कि वे अपने परिवार, समाज और उन दरिंदों के साथ डटकर मुकाबला कर सकें. हमें उन्हें बांधकर नहीं रखना है, उन्हें पहनावे से लेकर शिक्षा तक की पूरी आजादी मिलनी चाहिए. जिससे उन्हें हिम्मत मिले. मेरी 10 साल की बेटी को आज से ही मैं सिखाती हूं कि कोई अगर गलत तरीके से छुए तो तुम जोर से चीखोगी या भागोगी. बच्चे को मजबूत बनाने के साथ-साथ उसकी सोच को भी नया बनाना पड़ेगा.

प्र. महिलाओं को क्या संदेश देना चाहती हैं?

जो माहिलायें सफल होती हैं, उसमें उनके परिवार का काफी योगदान होता है. जब भी समय मिले, परिवार की छोटी-छोटी बातों को इग्नोर कर दिल से उन्हें समय दें. तभी परिवार जुड़ पायेगा.

अपना ही तमाशा बनाने वाली लड़की: भाग 3

तय योजना के अनुसार, उर्वशी ने रात करीब 10 बजे अपने परिचित युवक संदीप लांबा को अपने पास बुला लिया.

संदीप को उर्वशी ने 9 जनवरी को दिन में ही फोन कर के कहा था कि रात को उस के घर वाले घर पर नहीं रहेंगे, इसलिए वह रात को उस के घर आ जाए. जयपुर जंक्शन से औटो में जगतपुरा जाते समय भी उर्वशी ने संदीप को बता दिया था कि वह रात को 280 प्रेमनगर, जगतपुरा आ जाए.

उर्वशी के इस तरह बुलाने से संदीप लांबा खुश था. संदीप ने अपनी गर्लफ्रैंड उर्वशी के पास जाने के लिए अपने एक मित्र पोलू जाट से 5 सौ रुपए उधार लिए और सजधज कर अपने कमरे से निकला. संदीप नर्सिंग के द्वितीय वर्ष का छात्र था. वह जयपुर में गुर्जर की थड़ी पर किराए के मकान में रहता था. उस की उर्वशी से दोस्ती इस घटना से करीब एक महीने पहले हुई थी.

दोनों एक महीने से फोन पर संपर्क में थे. संदीप ने घर से निकल कर उर्वशी के लिए चौकलेट खरीदी. इस के बाद वह लो फ्लोर बस से रात करीब 10 बजे जगतपुरा पहुंचा. रात का समय होने और उस फ्लैट की सही लोकेशन न मिलने पर संदीप ने उर्वशी को 3-4 बार फोन किया. इस पर उर्वशी उसे लेने के लिए पैदल ही जगतपुरा रेलवे लाइन तक अकेली आई.

रेलवे लाइन से वह संदीप को अपने साथ ऋषिराज के प्रेमनगर स्थित फ्लैट पर ले गई. संदीप के पहुंचने पर ऋषिराज फ्लैट में छिप गया. उर्वशी संदीप को एक कमरे में ले गई, जहां बिस्तर लगा था. कमरे की बिजली जल रही थी. कमरे की बिजली जली होने पर संदीप को कुछ शक हुआ, लेकिन उर्वशी ने उसे बातों में लगा लिया. इस के बाद उर्वशी और संदीप उस कमरे में एक साथ रहे. इस दौरान उन्होंने कई बार शारीरिक संबंध बनाए.

सुबह करीब 3 बजे जब दोनों थक गए तो शांत हुए. उर्वशी ने संदीप का मोबाइल ले कर यह कहते हुए उस का सारा रिकौर्ड डिलीट कर दिया कि किसी को पता लग जाएगा. बाद में उर्वशी ने संदीप के पर्स की तलाशी ली और उस के डेबिट व क्रेडिट कार्ड देखे. इस के बाद उर्वशी ने पुलिस में मुकदमा दर्ज कराने की धमकी दे कर उस से मोटी रकम मांगी.

संदीप के इनकार करने पर उर्वशी ने उस का एटीएम कार्ड ले लिया और उस का पासवर्ड भी पूछ लिया. इस के बाद उसे घर से निकल जाने को कहा. वह वहां से निकला तो करीब आधे घंटे बाद उर्वशी ने उसे फोन कर के जल्दी से रकम का इंतजाम करने को कहा.

संदीप के जाने के बाद उसी फ्लैट में छिपा ऋषिराज मीणा कमरे में आ गया. सुबह करीब 5 बजे वह उर्वशी को मोटरसाइकिल पर बिठा कर एमएनआईटी के समने ले गया. वहां उस ने उर्वशी के मुंह पर कीटनाशक एल्ड्रीन का घोल लगाया और उस के कपड़ों पर भी कीटनाशक छिड़क दिया. ऋषिराज ने उर्वशी से कहा कि वह पुलिस कंट्रोल रू म को फोन कर के अपने साथ गैंगरेप होने की सूचना दे.

यह कह कर ऋषिराज वहां से चला गया. उस के जाने के बाद उर्वशी ने पुलिस कंट्रोल रूम को फोन किया था. उर्वशी को एमएनआईटी छोड़ने के बाद ऋषिराज अपने फ्लैट पर पहुंचा और सामान समेट कर कमरे को खाली कर के फरार हो गया.

शुरुआती पूछताछ में उर्वशी ऋषिराज के बारे में कोई जानकारी होने से इनकार करती रही, लेकिन जब मोबाइल लोकेशन के आधार पर उसे पकड़ कर दोनों का आमनासामना कराया गया तो उर्वशी ने सारा सच उगल दिया.

पूछताछ में पता चला कि दोनों ब्लैकमेलिंग करने के लिए पहले युवकों को ढूंढते थे और फिर पुलिस में मुकदमा दर्ज कराने की धमकी दे कर उन से रकम ऐंठते थे. इस मामले में उर्वशी ने रिपोर्ट दर्ज कराते समय संदीप और ब्रजेश का नाम लिया था.

संदीप ने उर्वशी से उस की सहमति से शारीरिक संबंध बनाए थे. लेकिन संदीप से उर्वशी को कुछ नहीं मिला तो उस ने पुलिस के सामने संदीप का नाम ले लिया. संदीप खुद को बैंक मैनेजर का लड़का बताता था, इसलिए उर्वशी को उस से मोटी रकम मिलने की उम्मीद थी.

संदीप लांबा को जब इस षडयंत्र का पता चला तो उस ने जवाहर सर्किल थाने में खुद के साथ ब्लैकमेलिंग व आपराधिक षडयंत्र की लिखित रिपोर्ट दी. जांच में यह भी सामने आया कि उर्वशी ब्रजेश से भी पहले से ही अच्छी तरह परिचित थी. उन की फोन पर बातें होती रहती थीं. ऋषिराज ने ही ब्रजेश को उर्वशी से मिलवाया था. उर्वशी ब्रजेश को फोन कर के बुलाती थी, लेकिन वह उन के झांसे में नहीं आया.

पुलिस का कहना था कि ऋषिराज मीणा ने उर्वशी के साथ मिल कर लोगों को दुष्कर्म के केस में फंसाने की धमकी दे कर उन्हें ब्लैकमेल कर के मोटी रकम ऐंठने की योजना बनाई थी. ऋषिराज संदीप और ब्रजेश से करीब 5 लाख रुपए में सौदा करना चाहता था. इन पैसों से वह अपना कोई व्यापार करना चाहता था.

पुलिस ने षडयंत्र रच कर गैंगरेप की मनगढं़त कहानी बना कर झूठा मुकदमा दर्ज कराने, अवैध व फरजी आईडी से अलगअलग सिम व मोबाइल रखने और ब्लैकमेलिंग कर के धन ऐंठने के आरोप में उर्वशी और ऋषिराज मीणा को 13 जनवरी को गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस ने इन के कब्जे से 6 मोबाइल फोन और 15 सिम बरामद किए. ऋषिराज मीणा सवाई माधोपुर जिले के वजीरपुर थाना इलाके के बढोद गांव के रहने वाले रामफल मीणा का बेटा था. उस के खिलाफ चोरी व गबन के 2 मामले पहले से दर्ज हैं.

पुलिस जांच में सामने आया है कि उर्वशी के जयपुर आने के बाद से ऋषिराज उस के साथ रिलेशनशिप में रह रहा था. उस ने लोगों को फंसाने के लिए घटना से 20 दिनों पहले ही प्रेमनगर में 8 हजार रुपए महीने पर किराए का फ्लैट लिया था. वह जल्दी ही उर्वशी से शादी करना चाहता था और उर्वशी के माध्यम से लोगों को दुष्कर्म के केसों में फंसा कर ब्लैकमेल करने के बाद मोटी रकम ऐंठ कर पैसे वाला बनना चाहता था.

इस के लिए उस ने उर्वशी का ब्रेनवाश भी कर दिया था. उर्वशी भी सहयोग करने के लिए तैयार हो गई थी. जांचपड़ताल में यह भी सामने आया है कि ऋषिराज और उर्वशी मिल कर आगरा और मैनपुरी में ब्लैकमेलिंग की 5 वारदात कर चुके थे. उर्वशी जब काशीपुर छोड़ कर आगरा आ गई थी तो ऋषिराज उस से मिलने आगरा जाया करता था.

पुलिस ने 14 जनवरी को ऋषिराज व उर्वशी को मजिस्ट्रैट के सामने पेश कर के एक दिन के रिमांड पर लिया. पूछताछ में पता चला कि उर्वशी और उस के पिता के 4 बैंक खातों में करीब 5 लाख रुपए की रकम जमा है. पुलिस को शक है कि यह राशि ब्लैकमेलिंग की है.

उर्वशी ने इस रकम के बारे में पुलिस को बताया कि उस के पिता ने गांव में जमीन बेची थी, जबकि मैनपुरी से पुलिस को पता चला कि उर्वशी के पिता ने अभी तक कोई जमीन नहीं बेची है. उर्वशी के परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं है कि बैंक खातों में 5 लाख रुपए जमा कर सके. इसलिए पुलिस इस रकम के बारे में भी जांच कर रही है.

पुलिस ने रिमांड अवधि पूरी होने पर 15 जनवरी को दोनों आरोपियों को फिर मजिस्ट्रैट के सामने पेश किया. मजिस्ट्रैट ने ऋषिराज व उर्वशी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है. पुलिस उर्वशी की ओर से सदर थाने में दर्ज कराए गए मामले और जवाहर सर्किल थाने में संदीप लांबा की ओर से दर्ज कराए गए मामले की जांचपड़ताल कर रही है.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित, उर्वशी परिवर्तित नाम है.

जब सचिन बनें लारा के बैटिंग पार्टनर

सचिन तेंदुलकर और ब्रायन लारा विश्व क्रिकेट के ऐसे दो बल्लेबाज रहे हैं जिन्होंने क्रिकेट की परिभाषा बदल दी. ये दोनों ऐसे दिग्गज क्रिकेटर हैं जिनकी तुलना ऑस्ट्रेलिया के महान बल्लेबाज डॉन ब्रेडमेन से की गई. इसके अलावा इन दोनों बल्लेबाजों को लेकर खूब चर्चाएं होती हैं.

इनके कई रिकॉर्ड्स की तुलना भी की गई. लेकिन क्या जानते हैं कि भारत के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर और वेस्टइंडीज के ब्रायन लारा ने एक बार एक साथ बल्लेबाजी भी की थी. नहीं. तो आइए जानते हैं ऐसा कब और कहां हुआ.

दरअसल यह वाकया साल 2006 का है जब एक चैरिटी मैच में ये दोनों दिग्गज एक साथ बल्लेबाजी करते नजर आए थे. यह मैच विश्व एकादश बनाम पाकिस्तान के बीच ओवल में खेला गया था. यह एक टी20 मैच था लेकिन एक बारिश हो जाने की वजह से अंपायरों ने मैच को 10-10 ओवरों का कर दिया.

राहुल द्रविड की अगुआई वाली टीम विश्व एकादश ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया. विश्व एकादश की ओर से बल्लेबाजी की शुरुआत करने सचिन और लारा आए. दोनों ने आते ही आतिशी बल्लेबाजी की और पाकिस्तान के गेंदबाज उनके तूफान के आगे बौने साबित होने लगे. दोनों ने पहले विकेट के लिए बहुत कम समय में 72 रन जोड़े.

यहां देखें सचिन और लारा की बल्लेबाजी.

एक ऐसा ऐप जो कर सकता है वाईफाई हैक

आज का समय ऐसा समय है जब कोई भी व्यक्ति इंटरनेट के बिना अपना कोई भी काम नहीं कर सकता है. घर हो या ऑफिस आज के समय में हर किसी के पास वाईफाई की सुविधा होती है. लेकिन जब हम कहीं बाहर होते हैं तो वाईफाई की सुविधा हमें नहीं मिल पाती है, और वाईफाई मिल भी जाए तो उसका पासवर्ड नहीं मिलता है. अगर घर पर वाईफाई लगा हो तो आपको उसका पासवर्ड तो पता होता ही है लेकिन अगर आपको किसी दूसरे का वाईफाई पासवर्ड पता चल जाए तो आप फ्री में खूब नेट चला सकते हैं. एक ऐसा ऐप जिसके जरिए पब्लिक प्लेस में कहीं भी किसी भी वक्त कोई भी वाईफाई हैक कर सकते हैं.

अकसर ऐसा होता है कि ऑफिस में वाईफाई तो होता है लेकिन एम्पलॉयज को वाईफाई का पासवर्ड पता नहीं होता है. ऐसा इसलिए क्योंकि ऑफिस में एम्प्लॉइज को वाईफाई चलाने की अनुमति नहीं होती है.

लेकिन आप इस ऐप के जरिए ऑफिस में ही नहीं बल्कि राह चलते कहीं भी किसी भी वाईफाई पासवर्ड हैक कर सकते हैं. किसी दूसरी कंट्री में भी होने पर आप वाईफाई ऐप को फोन में इंस्टॉल करके कहीं भी वाईफाई का पासवर्ड पता कर सकते है. सुत्रों के अनुसार इसे करीब 1 मिलियन लोग अबतक डाउनलोड कर चुके हैं.

ऐप इंस्टॉल कैसे करें

सबसे पहले गूगल प्ले स्टोर पर जाकर वाईफाई ऐप को इंस्टॉल करना है. डाउनलोड होने के बाद इस ऐप को खोलना है.

वाईफाई पासवर्ड का लगाए पता

इस ऐप के खुलने के बाद इसमें आपको लोकेशन के लिए पूछेगा ऐप में दिए डाउनलोड ऑप्शन पर क्लिक करना है. और इसमें आपको कंट्री सिलेक्ट करना हैं. आपकी लोकेशन के मुताबिक वाईफाई के यूजर और वाईफाई के कनेक्शन की पूरी जनकारी ऐप में दिखा दी जाएगी.

कंट्री सिलेक्ट करने के बाद राइट साइड में फ्री लिखा होगा उस पर क्लिक करके रजिस्टर करना होगा. पासवर्ड वहां से अपने आप डाउनलोड हो जाएंगे. उसके बाद जब आप कोई भी सिटी सिलेक्ट करेंगे वहां आपकी लोकेशन के हिसाब से वाईफाई का पासवर्ड आपको पता चल जायेगा.

अश्विन से गेंदबाजी सीखना चाहता है यह क्रिकेटर

चार टेस्ट मैचों के लिए भारत आई ऑस्ट्रेलियाई टीम का एक खिलाड़ी टीम इंडिया के स्टार गेंदबाज रविचंद्रन अश्विन से गेंदबाजी के गुर सीखना चाहता है. भारत दौरे पर आई ऑस्ट्रेलिया टीम के स्पिन ऑक्रमण के सबसे बड़े हथियार नाथन लियोन ने कहा, ‘मैंने अश्विन को गेंदबाजी करते देखा है. वह एक विश्वस्तरीय गेंदबाज है और मैं उनसे काफी कुछ सीख सकता हूं.’

उन्होंने कहा, ‘‘मैं आपको यह नहीं बताने जा रहा हूं कि मैं किस पर काम कर रहा हूं. मैंने चार साल पहले की तुलना में उपमहाद्वीप की परिस्थितियों के लिए अपने रवैये में वास्तव में बदलाव किया है. हमें इंतजार करना होगा कि हमें किस तरह की परिस्थितियां मिलती हैं.’

इस स्पिनर ने कहा, ‘मैंने अश्विन की काफी फुटेज देखी हैं. वह विश्वस्तरीय गेंदबाज है और अभी दुनिया का सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज और इसका कोई कारण है. उनकी गेंदबाजी का काफी अध्ययन करने के बाद उम्मीद है कि मैं खेल में भी उसे लागू करूंगा.’

लियोन ने स्वीकार किया कि उनकी पूरी टीम के लिए यह अच्छी चुनौती है. उन्होंने कहा, ‘मैं जानता हूं कि आपको कुछ चीजों में बदलाव करना होगा. लेकिन यह क्रिकेट का खेल है. दोनों टीमें उसी तरह के विकेट पर खेलेंगी जैसा वह होगा. इसलिए कोई बहाना नहीं है. हमारे लिए इस दौरे में अलग तरह की चुनौती होगी. हमारी टीम वास्तव में अच्छी है. यह पूरी टीम के लिये अच्छी चुनौती है.’

भारत में लॉन्च हुए पैनासोनिक के टफपैड डिवाइस

पैनासोनिक ने मंगलवार को भारत में तीन नये डिवाइस मार्केट में लॉन्च किए हैं. इनमें दो स्मार्टफोन्स शामिल हैं, टफपैड एफज़ेड-एफ1 और टफपैड एफजे़ड-एन1 और इसके अलावा टफपैड एफज़ेड-ए2 टैबलेट भी लॉन्च किया गया है. बिज़नेस क्लासेज के लिए बनाए गए इन तीनों प्रीमियम डिवाइसेज की सबसे खास बात है, इसकी मज़बूती और टिकाऊ होना है. इनकी लॉन्चिंग पर ये ही बताया गया कि ये डिवाइस मुश्किल परिस्थितियों में भी आपके साथ बने रहेंगे.

लॉन्च किये गए इन स्मार्टफोन्स में से एक फोन एंड्रॉयड डिवाइस है, इसकी कीमत लगभग 99,000 रुपये तय की गई है और दूसरा स्मार्टफोन विंडोज10 पर आधारित मोबाईल है, इसकी कीमत 1,09,000 रुपये निर्धारित की गई है. वहीं इनके अलावा टैबलेट भी एंड्रॉयड बेस्ड ही है, जो कि 1,20,000 रुपये की कीमत के साथ इनमें सबसे महंगा डिवाइज है. इस कीमत के अलावा इस पर टैक्स अतिरिक्त होगा.

नये लॉन्च किए गए पैनासोनिक स्मार्टफोन्स के सारे स्पेसिफिकेशन एक जैसे ही हैं, फ़र्क सिर्फ इनके ऑपरेटिंग सिस्टम्स का है. टफपैड एफज़ेड-एफ1 फोन, विंडोज़10 आईओटी मोबाइल इंटरप्राइज़ ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलता है और टफपैड एफज़ेड-एन1 स्मार्टफोन, एड्रॉयड 5.1.1 लॉलीपॉप ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल करता है. इनके स्पेसिफिकेशन में इन स्मार्टफोन्स में 2.3 गीगाहर्ट्ज़ ऑक्टा-कोर क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 801 चिपसेट के साथ 2 जीबी रैम उपलब्ध है. इनका डिस्प्ले एचडी और 4.7 इंच का है. इन फोन्स की बैटरी की क्षमता 1,400 घंटे तक के स्टैंडबाय टाइम देने की है. इसका इनबिल्ट स्टोरेज 16 जीबी है. दोनों ही स्मार्टफोन में 8 मेगापिक्सल के रेयर या बैक कैमरा हैं और फ्रंट कैमरा 5 मेगापिक्सल का है.

नया लॉन्च किया गया टफपैड टैबलेट एफज़ेड-ए2 एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम के 6.0 मार्शमैलो वर्जन पर ओएस इंटरप्राइज़ सिक्योरिटी के साथ चलता है. यह टैबलेट 1.44 गीगाहर्ट्ज़ क्वाड-कोर इंटल एटम प्रोसेसर और 4 जीबी रैम का इस्तेमाल करता है. इसका अंतर्निहित स्टोरेज 32 जीबी का है. इसका डिस्प्ले 10.1 इंच .नि कि लगभग 1920×1200 पिक्सल्स का है. इसके बैक में 8 मेगापिक्सल का कैमरा और 2 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा है.

कंगना रनौत का बड़बोलापन उन्हें ले डूबेगा!

कंगना रनौत चुप रहने को तैयार नही है. मगर उनके मुंहफट होने, उनके बड़बोलेपन और सच बोलने का खामियाजा भी उन्हें ही भुगतना पड़ रहा है. एक तरफ जहां कंगना रनौत व रितिक रोशन का विवाद अभी तक खत्म नहीं हुआ है, वहीं दूसरी तरफ कंगना ने फिल्म ‘‘रंगून’’ के सह अभिनेता शाहिद कपूर के खिलाफ भी जंग छेड़ रखी है. कंगना ने शाहिद कपूर को लेकर कई तरह के बयान दिए हैं, जिनका शाहिद कपूर ने बड़े शांत मन से यह कर जवाब दिया कि फिल्म के प्रमोशन के लिए इस तरह की बयान बाजी ठीक नहीं है.

मगर कंगना रनौत अपने आपको बड़ी अदाकारा साबित करने पर तुली हुई हैं. वह बार बार दावा करती हैं कि वह अब वह सिर्फ नारी प्रधान व उन फिल्मों में अभिनय करती हैं, जिनकी कहानियां उनके किरदार के इर्द गिर्द घूमती हो. कंगना का दावा है कि अब उनके लिए खास तौर पर किरदार लिखे जा रहे हैं.

मजेदार बात यह है कि कंगना को अब अपने बयानों की वजह से ही फिल्मों से हाथ धोना पड़ रहा है. 2016 में मशहूर फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली ने कंगना रनौत से बात की थी. और यह तय हुआ था कि संजय लीला भंसाली के निर्देशन में बनने वाली एक काल विषेश की फिल्म में शाहरुख खान और कंगना रनौत की जोड़ी होगी. इस बात की पुष्टि कंगना और शाहरुख खान ने भी अपरोक्ष रूप से कर दी थी. उस वक्त कंगना व रितिक के विवाद में भी शाहरुख का उन्हें साथ मिल रहा था.
लेकिन फिल्म ‘‘रंगून’’ के प्रमोशन के दौरान जब पत्रकारों ने कंगना रनौत से पूछा कि क्या वह बॉलीवुड के तीन खान कलाकारों के साथ फिल्म नहीं करना चाहती? तो कंगना ने कहा कि इन तीन खान की फिल्में हमेशा इनके ही इर्दगिर्द वाली होती हैं. उनमें मेरे लिए कोई जगह नहीं हो सकती. मेरी फिल्में विशाल दर्षक वर्ग तक पहुंचने लगी हैं. इसलिए बड़े स्टूडियो या बड़े निर्देशक या बड़े कलाकार के साथ काम करने की जरुरत महसूस नहीं होती.’’

सूत्रों का दावा है कि कंगना के इस बयान से शाहरुख खान नाराज हो गए हैं. सूत्रों का दावा है कि इसी के चलते अब शाहरुख खान ने संजय लीला भंसाली की फिल्म में कंगना के साथ काम करने से मना कर दिया है. संजय लीला भंसाली के सूत्रों की माने तो संजय लीला भंसाली कुछ दिन पहले दो फिल्मों की पटकथा लेकर शाहरुख खान से मिलने गए थे. इनमें से एक फिल्म की पटकथा वह थी, जिसमें शाहरुख खान के साथ कंगना रनौत हीरोइन होने वाली थी. खैर,शाहरुख खान ने कंगना के साथ वाली फिल्म को करने से मना करते हुए दूसरी पटकथा वाली फिल्म के लिए हामी भर दी. यानी कि सच बोलने या बड़बोलेपन की वजह से कंगना को शाहरुख खान के साथ वाली फिल्म से हाथ धोना पड़ा.

तो दूसरी तरफ जब से कंगना रनौत ने विशाल भारद्वाज के साथ उनकी फिल्म ‘‘रंगून’’ में अभिनय करना शुरू किया था, तभी से वह चिल्लाती आ रही हैं कि फिल्म ‘‘रंगून’’ की असली हीरो वही हैं. ज्ञातव्य है कि कंगना रनौत के साथ सैफ अली व शाहिद कपूर भी अभिनय कर रहे हैं. अब जबकि फिल्म का प्रमोशन शुरू हुआ, तो कंगना ने फिर से दोहराना शुरू किया कि इस फिल्म की हीरो वही हैं. तो दूसरी तरफ शाहिद कपूर दावा कर रहे हैं कि फिल्म ‘‘रंगून’’ में उनका किरदार हीरोटिक है. शाहिद कपूर की इस तरह की बातें सुनने के बाद कंगना ने शाहिद कपूर को मूड़ी और बहुत कुछ कहना शुरू कर दिया.

जी हां! फिल्म ‘‘रंगून’’ के प्रमोशन के सिलसिले में मीडिया से बात करते हुए कंगना ने शाहिद कपूर को लेकर कहा, ‘‘शाहिद कपूर का मूड हर दिन बदलता रहता है. कभी दोस्ताना स्वभाव, तो कभी शंकास्पद स्वभाव. दूसरी बात मुझे फिल्म में इंटीमेट सीन पसंद नहीं है. इस तरह के दृष्य फिल्माना बहुत कठिन होता है. किसी के साथ आपके संबंध बहुत साधारण होते हैं, पर कुछ मिनट बाद आप उसके मुंह में अपना मुंह लगा रहे होते हैं, यह कैसे आसान हो सकता है. इतना ही नहीं शाहिद कपूर की मूंछे भी बहुत परेशान करती थीं.’’ परिणामतः शाहिद कपूर ने कंगना रनौत के साथ ‘रंगून’ का प्रमोशन करने से इंकार कर दिया.

विशाल भारद्वाज इन दोनों कलाकारों को संभालते, उससे पहले ही ‘‘वाड़िया मूवी टोन’’ के रॉय वाड़िया ने विशाल भारद्वाज व उनकी फिल्म ‘‘रंगून’’ के खिलाफ मुंबई उच्च न्यायलय में कॉपीराइट उल्लंघन का मुकदमा दायर करते हुए आरोप लगाया कि ‘रंगून’ में कंगना रनौत का जूलिया का किरदार उनकी फिल्मों में अभिनय करने नाडिया पर आधारित है. जो उन दिनों फिअरलेस नाडिया के नाम से मशहूर थीं. इतना ही नहीं सोमवार, 20 फरवरी को मुंबई उच्च न्यायालय में ‘वाड़िया मूवी टोन’ की तरफ से फिल्म ‘रंगून’ के ट्रेलर के आधार पर कंगना के जूलिया के किरदार और अपनी फिल्मों की हीरोईन नाडिया के बीच 19 समानताएं गिना दी. अब अगली सुनवायी 22 फरवरी यानी कि आज को होनी है. कहा जा रहा है कि 22 फरवरी को अदालत फिल्म ‘रंगून’ देख सकती है.

सूत्रों की मानें तो विशाल भारद्वाज ने इस अदालती पचड़े से बचने के साथ साथ शाहिद कपूर को भी खुश करने का मन बनाते हुए ‘रंगून’ के 40 मिनट के उन दृष्यों पर कैंची चला डाली, जिनमें कंगना का जूलिया का किरदार ही हावी है. और मंगलवार 21 फरवरी को खबर आ गयी कि विशाल भाद्वाज ने फिल्म ‘रंगून’ को नए सिरे से एडिट करके चालीस मिनट के दृश्यों को काट दिया है. विशाल भारद्वाज की तरफ से तर्क दिया जा रहा है कि फिल्म ‘रंगून’ की लंबाई 2 घंटे 47 मिनट थी, पर अब विशाल भारद्वाज ने महसूस किया कि इतनी लंबी फिल्म देखने में लोगों को रूचि नहीं होती है. इसलिए 40 मिनट की फिल्म को काट कर अब फिल्म कि अवधि को दो घंटे सात मिनट कर दिया गया.

मगर बॉलीवुड के विचौलयों की मानें तो विशाल भारद्वाज ने 40 मिनट की फिल्म महज अदालती कारवायी से बचने तथा शाहिद कपूर केा खुश करने के लिए ही काटी है. सूत्रों का दावा है कि विशाल भारद्वाज ने ज्यादातर कैंची कंगना रनौत के जूलिया किरदार से संबंधित दृश्यों पर चलायी है, जिससे वह अदालत में फिल्म ‘रंगून’ दिखाकर साबित कर सकें कि ‘वाड़िया मूवी टोन’ के आरोप निराधार हैं.

बॉलीवुड से जुड़ा एक तबका मानता है कि ‘रंगून’ को लेकर जो कुछ भी हो रहा है, उसकी वजह कंगना रनौत व शाहिद कपूर के बीच खिंची तलवारें हैं. सभी जानते है कि शाहिद कपूर, विशाल भारद्वाज के पसेदीदा कलाकार हैं. विशाल भारद्वाज इससे पहले शाहिद कपूर के साथ ‘कमीने’ तथा ‘हैदर’ जैसी फिल्म निर्देशित कर चुके हैं. अब उन्होंने ‘रंगून’ में तीसरी बार शाहिद कपूर को लिया है. शाहिद कपूर और विशाल भारद्वाज के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं, यह भी जगजाहिर है. जबकि कंगना ने पहली बार विशाल भारद्वाज के निर्देशन में फिल्म की है. पर वह पहले दिन से ही बड़े बड़े बयानबाजी करती आयी हैं. इसलिए भी जब फिल्म पर कैंची चलाने की बात आयी,तो कंगना के जूलिया के किरदार वाले दृष्यों पर कैंची चलायी गयी. यानी कि एक बार फिर कंगना रनौत को अपने बड़बोलेपन व बयानों की ही वजह से जबदस्त नुकसान उठाना पड़ा है.

यदि सूत्रों का दावा सही है और फिल्म ‘‘रंगून’’ से 40 मिनट के उन दृश्यों पर कैंची चलाई गयी है, जिनमें कंगना रनौत का किरदार जुलिया रही है, तो इसके मायने यह हुए कि अब इस फिल्म में कंगना के किरदार की कोई अहमियत नहीं रही. बहरहाल, सच तो फिल्म के प्रदर्शन के बाद ही पता चलेगा. पर जो कुछ हो रहा है, उससे किसे सबक लेना चाहिए, पता नहीं?

वैसे अपने मुंहफट स्वभाव को डिप्लोमैटिक करने के सवाल पर कंगना रनौत कह चुकी हैं, ‘‘यदि ऐसा हुआ तो लोग, मुझे जिंदा चबा जाएंगे. दो मिनट में मेरी बोटी/हड्डी नोचकर फेंक देंगे. जो मुझ पर हमला करते हैं, उन पर पलटवार करना जरुरी है. लोग यहां मेरे करियर, मेरी पसंद नापसंद और मेरी डिग्निटी को चुनौती देते हैं. यदि आप मेरे खिलाफ बातें करें, मुझे अपमानित करें और मैं खुद को डिप्रेशन में जाने का इंतजार करुं या आत्महत्या कर लूं. मैं यह सब करने से रही. मेरी पहली प्राथमिकता खुद को सुरक्षित व स्वस्थ रखना है. माना कि औरत का जन्म दूसरों की देखभाल करने व दूसरों को पोषित करने के लिए होता है, पर इसके मायने यह नहीं है कि वह अपना ख्याल रखना छोड़ दे. मैं अपने वजूद के लिए लड़ती हूं.

कांग्रेस को समर्थन देंगे रामदेव

अपनी नर्मदा सेवा यात्रा की ब्रांडिंग के लिए नोबल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी को बुलाने के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने योग गुरु कम कारोबारी ज्यादा बाबा रामदेव को भी बुला भेजा. भोपाल में इन दोनों की मुलाकात ठीक वैसी ही थी जैसी द्वापर और त्रेता युग में राजाओं और राजर्षियों की हुआ करती थी. दोनों एक दूसरे के प्रति बड़ा सम्मान और आत्मीयता दिखाते थे. ऋषि के आने का मतलब होता था कि आश्रमों में अन्न वगैरह खत्म हो चला है या फिर दुश्मन की गतिविधियों से वह राजन को अवगत कराना चाहता है, राजा इसलिए भी प्रसन्न होता था कि जाते जाते गुरुवर एकाध अश्वमेघ या जनकल्याण के लिए किसी यज्ञ की तात्कालिक आवश्यकता पर जोर देकर प्रजा को एक झुनझुना थमा जाते थे जिससे प्रजा का ध्यान अपनी समस्याओं और राजा की ज्यादतियों से हटकर हवन कुंड से उठते धुए में लग जाता था और वह अच्छे दिनों के सपने देखने लगती थी.

इस मुलाकात यानि डील के माने मुंह लगे दरबारियों के अलावा किसी को समझ नहीं आते थे कि बाबा जी हफ्ता वसूली के साथ साथ जनता को भी चूना लगाकर चलते बने हैं. इधर लोकतंत्र के चलते राजा-बाबा की मुलाकातों के मायने काफी कुछ बदले हैं जिन्हें अधिकतर बुद्धिजीवी समझने लगे हैं. बहरहाल बाबा रामदेव और शिवराज सिंह कुंभ के मेले में बिछड़े भाइयों की तरह गले मिले और एक दूसरे को टटोल कर ही उन्हें समझ आ गया कि किसे क्या चाहिए.

बाबा ने कहा कि अब उन्हें राजनीति से कोई लेना देना नहीं तो मौजूद पत्रकार चकरा उठे कि यह कौन सा नया आसन है. पर जल्द ही सबको समझ आ गया कि बाबा का मोह अब भाजपा और नरेंद्र मोदी से भंग हो चला है. जिन्हें प्रधानमंत्री बनवाने पर उतारू हो आए रामदेव ने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था और हरिद्वार न जाने की कसम भी खा ली थी पर जनता ने उन्हें लुटने से बचा लिया था. इधर जब रामदेव अपने सजातियों लालू और मुलायम सिंह यादव के संपर्क में आए तब उन्हें पता चला कि इस मिथ्या संसार मे जाति ही सब कुछ है.

इसलिए मोदी मोह उन्होंने त्याग दिया और भोपाल में कहा कि अगले बचे-कुचे 2 सालों में मोदी जरूर कोई चमत्कार करेंगे यानि, अभी तक वादों और उम्मीद के मुताबिक कुछ नहीं हुआ है. बाबा ने बड़ी सावधानी से यह बात कह डाली. 2 हजार रुपए के बड़े नोट पर भी उन्होंने एतराज जताया कि इससे आर्थिक अपराध बढ़ेंगे तो समझने बाले समझ गए कि पतंजलि के उनके आउट लेट्स पर जाने बाले अधिकतर ग्राहक चार पांच सौ रुपए का सामान खरीदते हैं और फुटकर नहीं मिलता तो प्रधानमंत्री की तरह ही स्वदेशी का मोह त्याग भी देते हैं. इसलिए 2 हजार का नोट बंद होना चाहिए. पतंजलि के ही शीतल पेय बिकें इसके लिए जरूरी है कि पेप्सी और कोक जैसे कोल्ड ड्रिंक्स पर रोक लगे, यह मांग भी उन्होंने उठा डाली. इसके साथ ही भारतीय अर्थव्यवस्था पर बहु राष्ट्रीय कंपनियों के कब्जे की कलई खोली. बाबा ने जोश में यह तक कह दिया कि कंपनियां सभी राजनैतिक दलों को चंदा देती हैं, इसलिए कोई पार्टी स्वदेशी को बढ़ावा नहीं देना चाहती यानि भाजपा भी चंदा खाऊ पार्टियों में से एक है.

बकौल बाबा रामदेव वे हर उस पार्टी का समर्थन करेंगे जो देशभक्त है. फिर वह कांग्रेस ही क्यों न हो. ऐसी कई अप्रत्याशित बातें उन्होने भोपाल में कहीं तो इसका यह मतलब नहीं कि वे गड़बड़ा गए हैं बल्कि यह है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजों को लेकर वे भाजपा की जीत में शक ही जता रहे हैं. बख्शा तो उन्होंने शिवराज सिंह को भी नहीं, मुख्यमंत्री जी के लिए यह कहा कि मोदी की तरह वे भी निराश नहीं करेंगे. हद तो उस वक्त हो गई जब रामदेव ने नर्मदा यात्रा को धार्मिक कह डाला इस बात या आरोप से अब तक शिवराज सिंह ने खुद को बचाए रखा था. एक कारोबारी की यह मजबूरी हो जाती है कि वह सब से अच्छे संबंध बनाकर चले इसलिए अब रामदेव किसी की सीधे बुराई नहीं करते.

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