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ऐसे मनी होली

प्रिय से मिल कर

शर्म से लाल हो ली

ऐसे मनी होली

गलियोंचौबारों में

नैनों की पिचकारी चली

लाज शर्म धो ली

ऐसे मनी होली

प्यार की बौछार से

तनमन भीगा

भीगी चोली

ऐसे मनी होली

गुलाल की करामात से

बिगड़ी सूरत भोली

ऐसे मनी होली

नाचनाच कर पायल टूटी

आशिकों में चल गई गोली

ऐसे मनी होली

उतरा जब नशा

पिया की बांहों में सो ली

ऐसे मनी होली.

– डा. अनिता राठौर ‘मंजरी’

रंग दे…मोहे रंग दे…

ससुराल में नेहा की पहली होली थी, इस कारण घर में खूब रौनक थी. छत पर डीजे लगा था और उस के मायके से उस की बहनों को बुलाया गया था. मस्ती का माहौल होने के चलते सब खूब मस्ती कर रहे थे. नेहा की बहनें अपने जीजू, उन के भैया वगैरा के साथ रंग व पानी से खूब होली खेल रही थीं.

सब को होली खेलते देख नेहा भी खुद को न रोक पाई और मौका मिलते ही अपनी सास व जेठ को रंग लगाते हुए बोली, ‘होली है भई, होली है, बुरा न मानो होली है.’ नेहा की इस शरारत के बाद सब होली के रंग में ऐसे रंगे कि कब दिन के 2 बज गए, पता ही न चला, फिर सब ने मिलबैठ कर लंच किया और पुराने किस्सों को याद कर खूब ठहाके लगाए.

बदलते समय के साथ महिलाएं भी होली की मस्ती का पूरा लुत्फ उठाती हैं और यह कहती हुई कि रंग दे मोहे रंग दे…रंग लगाती हैं और लगवाती भी हैं.

कुछ वर्षों पहले तक रंगों से पुते हुए पुरुष ही दिखते थे लेकिन अब महिलाएं भी दिखने लगी हैं. ‘महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार होता है,’ ऐसी बातों को धता बता कर वे अब होली के रंगों में पूरी तरह खुद को डुबो डालती हैं, ताकि वे पीछे न रहें किसी भी चीज में.

हर किसी संग मस्ती : पहले घरों में अगर महिलाएं होली खेलती भी थीं तो सिर्फ घर की चारदीवारी के भीतर और उस में भी देवरभाभी? के बीच ही. अपनों से बड़ों को रंग लगाना या फिर उन्हें छूना घर की परंपरा के खिलाफ होता था. लेकिन अब नहीं. अब वे जिस तरह से पढ़लिख कर हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं उसी तरह से उन्होंने अपने परिवार, अपने समाज की सोच बदली है.

यही कारण है कि अब वे होली हर किसी संग यानी देवर के अलावा अपने रिश्तेदारों, दोस्तों, पड़ोसियों के साथ भी खेलती हैं. जिस से पुरुषों के साथसाथ अब महिलाएं भी इस दिन को ले कर काफी उत्साहित रहती हैं.

स्टाइलिश दिखने की होड़ : महिलाओं का मेकअप से चोलीदामन का रिश्ता होता है. तभी तो वे कोई मौका नहीं छोड़तीं खुद को स्टाइलिश दिखने का. यहां तक कि तब जब कि उन्हें पता होता है कि होली के रंगों में उन की ड्रैस, मेकअप सब खराब हो जाएगा तब भी वे इस मौके पर खुद को किसी से कम नहीं दिखाना चाहतीं. उन्हें लगता है कि इस दिन भी उन की ऐंट्री इतनी धमाकेदार हो कि लोग देखते ही रह जाएं.

इस के लिए वे चाहे थीम ड्रैस सफेद ही क्यों न हो लेकिन फिर भी उस का चयन कुछ हट कर करना चाहती हैं ताकि वे सफेद रंग में भी यूनीक दिख सकें. साथ ही, मैचिंग ऐक्सैसरीज व हेयरस्टाइल भी ड्रैस को सूट करता हुआ होता है. वे अपनी स्टाइल से महफिल की शान बनना चाहती हैं.

एंजौय के लिए डांस : हम किसी से कम नहीं फिर चाहे बात हो डीजे की धुन पर थिरकने की या फिर ढोल पर नाचने की. वे नहीं चाहतीं कि जब होली पार्टी में डांस की बात आए तो उन्हें मुंह छिपा कर भागना पड़े या फिर एक कोने में खड़े होने के लिए मजबूर होना पड़े. ऐसे में वे खुद को इस दिन के लिए तैयार करने के लिए डांस प्रैक्टिस भी करती हैं. वे चाहती हैं कि जब पार्टी हो तो वे पार्टी के किसी भी पल को एंजौय करने से वंचित न रहें.

अब वे होली पार्टी में पुरुषों के साथ मिल कर थिरकती हैं, कई बार तो वे अपने डांस से पुरुषों को पीछे छोड़ देती हैं, जिस से होली का जश्न और दमदार हो जाता है.

किटी गैंग के साथ प्लानिंग : महिलाओं का किटी गैंग खूब धमाल मचाने वाला होता है. जहां यह गैंग इकट्ठा होता है वहां शरारतें, धमाके जरूर होते हैं. अगर उन्हें सोसायटी की तरफ से होली सैलिब्रेशन का आमंत्रण आ गया होता है या फिर उन का किटी गैंग ही खुशीखुशी 2 ग्रुपों में बंट कर होली सैलिब्रेट करने के मूड में होता है तो वे या तो अपने पूरे गैंग के साथ या फिर अपने ग्रुप के साथ प्लानिंग करती हैं कि कैसे होली पर सामने वाले को किस बहाने से बुला कर सब से पहले रंगना है, किस गाने पर नाच कर धमाल मचाना है, क्या पहनना है, कैसे ऐंट्री मारनी है वगैरावगैरा.

इस के लिए वे एक महीना पहले से तैयारियों में लग जाती हैं और इस की किसी को भनक नहीं लगने देतीं. बस, इंतजार करती हैं उस दिन का जब उन का किटी गैंग होली की पार्टी में धमाल मचाएगा.

फोटो में कलर मैजिक : मोबाइल फोन के ऐडवांस होने से अब महिलाएं फोटो क्लिक करवाने के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहतीं. तभी तो वे अब हर घंटे फोटो बदलने में विश्वास करने लगी हैं. ऐसे में सैल्फीके्रजी महिलाएं होली जैसे इतने कलरफुल फैस्टिवल को बिना फोेटो सैशन के कैसे जाने देंगी. वे चाहे होली पर फ्रैंड्स के साथ कोल्डड्रिंक चियर्स करती फोटोज हों या फिर रंगों से पुते चेहरे, हर तरह के फोटो लेती हैं. फिर इस मौके पर ली गई हर तसवीर को कभी व्हाट्सऐप डीपी बनाती हैं तो कभी फेसबुक प्रोफाइल पिक. इस से वे यह भी दिखाने की कोशिश करती हैं कि उन्होंने होली के अवसर पर कितनी मस्ती की है.

रंगों से दोस्ती : त्वचा के प्रति काफी जागरूक महिलाएं जहां पहले होली पर घर से बाहर निकलना भी पसंद नहीं  करती थीं कि कहीं उन का चेहरा खराब न हो जाए, कहीं बालों की शाइनिंग कम न हो जाए लेकिन अब समय के साथ उन की यह सोच भी बदली है.

उन्हें लगता है कि अगर हम पहले से थोड़ी सावधानी बरत लें, जैसे बालों और चेहरे पर तेल लगा लें, नेल्स पर नेलपेंट लगा लें तो इस से ज्यादा असर नहीं पड़ता. अगर रंगों की वजह से हलकी ड्राईनैस आई भी तो उसे घरेलू नुसखों से वैसे ही दूर कर लेंगे जैसे मौसम बदलने पर आईर् ड्राईनैस को दूर करते हैं.

वैसे, महिलाएं नैचुरल तरीके से होली खेलने की ज्यादा हिमायती होती हैं और इस के लिए वे औरों को भी प्रोत्साहित करती हैं, जिस से रंगों का भी पूरा आनंद मिल जाता है और किसी को नुकसान भी नहीं पहुंचता.

इसी संबंध में दिल्ली के विकासपुरी में  रहने वाली पूजा, जो काफी समय से इसी कारण से रंगों से दूरी बनाए रखती थीं लेकिन जब उन्होंने टीवी पर देखा कि कैसे फूलों से घर पर ही रंग तैयार किए जा सकते हैं, जिस का कोई नुकसान नहीं होता, अब होली के जश्न में शामिल होने लगीं हैं.

घरेलू जायके को नहीं भूलतीं : भले ही घर में बच्चे फास्टफूड खाने के शौकीन हों, लेकिन फिर भी वे

होली के मौके पर परंपरागत व्यंजन, जैसे दहीभल्ले, पापड़ी, गुझिया, पूरीभाजी वगैरा बनाना नहीं भूलतीं. क्योंकि वे त्योहारों के बहाने इस की खुशबू अपनों तक पहुंचाना चाहती हैं ताकि बच्चों को समझ आए कि आज त्योहार है तभी इस तरह के व्यंजन घर में बनाए गए हैं.

बच्चे भी मां की मेहनत को बेकार नहीं जाने देते और बड़े प्यार से खाते हैं, यहां तक कि इस दिन बनाई हर चीज को वे आनेजाने वालों के सामने भी परासेती हैं ताकि अपने घर की परंपरा से औरों को भी रूबरू करवा सकें.

इस का मकसद यह भी होता है कि बच्चे उन्हें देखदेख कर सीखें और जब वे उन से कभी दूर भी रहें तब भी घर पर खुद इन्हें बना कर अपने दोस्तों को भी खिलाएं ताकि उन के घर के इस जायके का स्वाद दूरदूर तक पहुंचे.

मस्ती में भी स्वास्थ्य : जब उन्हें पता होता है कि होली की मौजमस्ती में 1-2 दिन जम कर खाया जाएगा और ऐसे में खुद को रोक पाना या फिर किसी के सामने बहाना बनाना भी मुश्किल होता है, इसलिए वे कईर् दिनों पहले से लो कैलोरी डाइट लेनी शुरू कर देती हैं, ऐक्सरसाइज भी बढ़ा लेती हैं ताकि 1-2 दिन ज्यादा खानेपीने का कोई खास असर न हो. दरअसल, आज महिलाएं हमेशा फिट रहना चाहती हैं, मोटी नहीं. इस के लिए चाहे त्योहार हो या फिर शादीपार्टी, वे हैल्थ को इग्नोर नहीं करतीं. इस तरह अब यह कहना गलत नहीं होगा कि होली और महिलाओं का चोलीदामन का साथ है.  

ऐसा गांव जहां सिर्फ महिलाएं मनाती हैं होली

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के कुंडारा गांव में पिछले 30 वर्षों से सिर्फ महिलाएं होली खेलती हैं, पुरुष घर में बंद रहते हें. ऐसा करने के पीछे कारण यह है कि 30 वर्षों पहले जब इस गांव के लोग होली मना रहे थे तो इनामी डकैत मेग्बर सिंह ने एक व्यक्ति की हत्या कर ग्रामीणों को काफी प्रताडि़त किया था. तब से वहां के पुरूषों ने होली न मनाने की कसम खाई.

पुरुषों की यह बात महिलाओं को रास नहीं आई और उन्होंने सब को समझाया भी. जब उन की बात का असर नहीं दिखा तो उन्होंने निर्णय लिया कि अब से वे पुरुषों के बिना होली मनाएंगी और तब से यह परंपरा चली आ रही है.

वहीं, राजस्थान के कल्याणीपुरा गांव में महिलाएं एकदूसरे को रंग लगा कर खूब मस्ती करती हैं जबकि पुरुष उन की सुरक्षा में गांव के बाहर पहरा देते हैं.

 

यह भी खूब रही

हमारी बालकनी में पुराने सामान पड़े होने की वजह से कबूतरों ने डेरा डाल लिया था. आएदिन कबूतरी अंडे देती रहती. हम ने सारा सामान हटवा कर अच्छी तरह से साफसफाई कर दी. अब कबूतर आते भी तो तुरंत भाग जाते थे या हम में से भी कोई उन्हें भगा दिया करता था. एक दिन मेरी छोटी ननद आई हुई थी. इधरउधर की बातें होने के बाद उस ने पूछा, ‘‘भाभी, अभी भी कबूतर बालकनी में अंडे देते हैं क्या?’’ मैं कुछ कहती, इस से पहले ही मेरा बड़ा बेटा अंशुल तपाक से बोल उठा, ‘‘नहीं बूआजी, अब कबूतर अंडे नहीं देते. अब तो आते हैं, बस, मीटिंग कर के तुरंत चले जाते हैं.’’ उस का ऐसा उत्तर सुन कर मेरी ननद के साथ हम सब भी हंसने लगे.

अंजु सिंगड़ोदिया

*

मेरी आंटी अपनेआप को बहुत होशियार समझती हैं. बातचीत में वे अंगरेजी के शब्दों का प्रयोग धड़ल्ले से करती हैं भले ही उन शब्दों की जरूरत भी न हो. अंकलजी के मित्र का हार्टफेल होने से मृत्यु का समाचार पाते ही अंकलआंटी उन के वहां दुख प्रकट करने गए. पहले तो आंटी ने मृतक की पत्नी को सांत्वना दी, फिर पूछा, ‘‘भाईसाहब का हार्ट पहली बार फेल हुआ है या इस से पहले भी कभी हुआ था?’’ अंकलजी ने आंखे तरेर कर उन्हें चुप रहने का संकेत किया. उस दुख के माहौल में उन की बात सुन कर लोग? इधरउधर मुंह छिपा कर अपनी हंसी रोकने का प्रयास कर रहे थे.

प्रोमिला भाटिया

*

मेरे मौसाजी शाम को औफिस से घर लौटे. मौसीजी किचन में थीं तो वे सीधे वहीं गए. हैलमैट एक तरफ रख कर उन्होंने मौसीजी से पकौड़े बनाने को कहा. मौसीजी ने बताया कि बेसन खत्म हो गया है. पहले जा कर बेसन ले आएं. इस बात पर मौसाजी गुस्सा हो गए, ‘‘अभीअभी थकाहारा लौट कर आया हूं. बेसन लेने नहीं जाऊंगा.’’ तब मौसीजी ने भी कह दिया, ‘‘आप की मरजी.’’ मौसाजी बड़बड़ाते हुए बाहर गए और 2 मिनट बाद वापस लौट आए. उन के एक हाथ में फ्राइंगपैन था. दरअसल, वे हैलमैट के बजाय फ्राइंगपैन उठा कर चल दिए थे. यह देख कर मौसीजी हंसी से लोटपोट होती हुई बोलीं, ‘‘चलो, हैलमैट न पहनने पर जब पुलिस डंडे चलाती, तो यह आप का सिर बचाने के काम आता.’’ मौसाजी भी हंस पड़े कि यह भी खूब रही.

आरती चौरसिया

इन्हें भी आजमाइए

– बालों को रंग से बचाने के लिए नारियल या सरसों के तेल से बालों की अच्छी तरह से मालिश करें. इस से बालों पर रंग नहीं चढ़ेगा. रंग यदि लग भी गया तो आसानी से निकल जाएगा.

– होली का रंग हाथ से तो हट जाता है लेकिन नाखूनों पर काफी दिनों तक लगा रहता है. इसलिए नाखूनों पर पारदर्शी रंग का नेलपेंट लगा लें, साथ ही, जैतून के तेल की मालिश करें.

– ईकोफ्रैंडली होली मनाने के लिए रंग घर पर बनाएं. मेहंदी के पत्तों को सुखा कर पाउडर बना, हरा रंग बनाएं. लाल चंदन का पाउडर लाल रंग के लिए इस्तेमाल करें.

– होली पर पहने सफेद कपड़ों से रंगों के दाग छुड़ाने के लिए कपड़ों को ब्लीच या नीबू के रस से साफ करें.

– अगर घर के फर्श पर रंग के निशान पड़ जाएं तो बेकिंग सोडा और पानी की मदद से उसे साफ करें. सोडे और पानी के गाढ़े पेस्ट को धब्बे पर कुछ देर तक लगा कर छोड़ दें. जब पेस्ट सूख जाए तो उस सूखे कपड़े से पोंछ कर साफ कर लें.

– कुछ लोगों के चेहरे से रंग तो उतर जाता है पर चेहरा काला पड़ जाता है. ऐसे में कुछ दिन हलदी और बेसन का फेसपैक बना कर लगाएं. यदि तैलीय त्वचा है तो दही में नीबू और बेसन मिला कर फेसपैक लगाएं.

– घर के बजाय किसी मैदान या गार्डन में होली खेलें. घर पर होली खेलने पर फर्श आदि पर रंग को हटाने में काफी समय व पानी बरबाद होता है.        

– आंख में रंग चला जाए तो हाथ से रगड़ें नहीं, बल्कि तुरंत पानी से उन्हें साफ करें और गुलाब जल की 2-4 बूंदें आंखों में डालें.

सट्टे पे सट्टा

देश के होनहार सटोरियों के आगे अच्छेअच्छे राजनीतिक विश्लेषक पानी भरते नजर आते हैं. उन के खोले भाव की रिपोर्टिंग करते कई पत्रकार बताते हैं कि हवा का रुख दरअसल किस दिशा की तरफ है. 5 राज्यों खासतौर से उत्तर प्रदेश के नतीजों को ले कर इस बार सट्टा बाजार में सन्नाटा सा छाया हुआ है.

देश के प्रमुख सट्टा सैंटर इंदौर के सैसटोरियों की मानें तो इस की अहम वजह नोटबंदी को ले कर जनता का मूड न समझ आना है. इसलिए अगरमगर लगा कर भाव खोलने पड़ रहे हैं. नतीजतन,  आम लोग सट्टे पर तवज्जुह नहीं दे रहे और हर चुनाव में औंधेमुंह गिरने वाले चैनलों के सर्वेक्षणों को आधार नहीं मान रहे. अब हो यह रहा है कि पहले दिन सपाकांग्रेस गठबंधन पर ज्यादा दांव लगता है तो दूसरे दिन भाजपा का भाव बढ़ जाता है और तीसरे ही दिन बसपा छिपी रुस्तम नजर आने लगती है. अब तो सट्टा इसी बात पर लगने लगा है कि मतदान के बाद सट्टा बाजार किसे भाव देगा.

सियासत और वकालत

70 सावन पार कर चुके माजिद मेनन ठीक वैसे ही वकील हैं जैसे फिल्मों में दिखाए जाते हैं. रोबदार, सूटबूट और टाई वाले वकील जिन की दलीलें सुन अदालत भी सन्नाटे में आ जाती है और चश्मदीद गवाह लड़खड़ाने लगते हैं. मुंबई के अंडरवर्ल्ड में माजिद मेनन की खासी पूछपरख की एक और वजह उन का शरद पवार की पार्टी एनसीपी से राज्यसभा सदस्य होना भी है. हालांकि, वे राजनीति से जुड़े मसलों में वक्त जाया करने में यकीन नहीं करते, जिसे उन की समझदारी माना जाता रहा है. बीते दिनों जैसे ही सुप्रीम कोर्ट के 23 जजों की नियुक्ति की सूची जारी हुई तो मेनन का सब्र और उन की समझ दोनों जवाब दे गए. उन्होंने एतराज यह जताया कि इस लिस्ट में एक भी मुसलिम नाम नहीं है जिस से सरकार की नीयत पर शक होता है. जजों की नियुक्ति धर्म के आधार पर नहीं होती, यह भी उन्होंने माना लेकिन खुद की नीयत बातबात में जता दी कि वे तो थे न.

अपने बोल्ड फोटोशूट से इंटरनेट पर छा गई ये पाकिस्तानी मॉडल

एक जमाने में पोर्नस्टार रहीं सनी लियोनी अब फिल्म मेकर्स के लिए सोने की बेबी डॉल बन गई हैं. सनी की कातिलाना अदाएं लाखों नहीं करोड़ो का मुनाफा कमा के देती. रागिनीज एमएमएस-2 और जिस्म-2 जैसी फिल्मों की सफलता इस बात को साबित करने के लिए काफी है. ये तो हुई सात संमदर पार से भारत आई सनी लियोनी की बात.

मगर हम आपको बता दे कि पाकिस्तान में भी सनी की परछाई रहती है. वैसे तो पाकिस्तान में बोल्ड सीन्स के मामले में फिल्मों को भारत जैसी आजादी नहीं मिली है. लेकिन सरहद पार सनी की तर्ज पर एक मोहतरमा हैं, जो बोल्डनेस की सभी हदें पार कर रही हैं. हम बात कर रहे है तहमीना अफजल की.

आपको बताते चलें कि पाकिस्तानी हालात में भी तहमीना ने एक नहीं कई बार न्यूड फोटोशूट कराया है. एक इंटरव्यू के दौरान जब तहमीना से पूछा गया कि पाकिस्तान में एक महिला के लिए बोल्ड होकर एडल्ट मैग्जीन में काम करना कितना मुश्किल है? तो उन्होंने बताया कि उन्हे पाकिस्तानियों का काफी विरोध झेलना पड़ा है और साथ ही उनके अपने परिवार का भी लेकिन वो सिर्फ अपने दिल की सुनती हैं और वो करती हैं जो वो चाहती हैं. अपने जिस्म की नुमाईश को लेकर उनका कहना है कि अंग प्रर्दशन करके अगर वो कुछ लोगों का मनोरंजन करती हैं तो इसमें गलत क्या है, इससे वो किसी को नुकसान तो नहीं पहुंचा रही.

तहमीना की अदाएं देखकर एक बार को आप सनी लियोनी को भी भूल सकते हैं. ये टीवी से लेकर कई म्यूजिक एल्बम में देखी जा चुकी हैं और ये ना सिर्फ बोल्ड मॉडलिंग कर रही हैं बल्कि एक म्यूजिक वेबसाईट भी चलाती हैं.

खैर आप देखें तहमीना की ये कातिलाना अदाएं…

जब सनी देओल ने हेमा मालिनी पर किया चाकू से हमला..!

बॉलीवुड में लव स्टोरी का दौर तो सदियों से चला आ रहा है. ऐसे में अभिनेता धर्मेंद्र और ड्रीम गर्ल कही जाने वाली हेमा मालिनी की लव स्टोरी से भी हर कोई वाकिफ ही है. वैसे आपको बता दें कि एक वक्त ऐसा था, जब बॉलीवुड की ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी पर एक साथ तीन अभिनेताओं यानि संजीव कुमार, जितेंद्र और धर्मेंद्र का दिल आ गया था. तब हेमा मालिनी संजीव कुमार को पसंद तो करती थी, लेकिन उनसे शादी नहीं करना चाहती थीं. जब कि जितेंद्र से हेमा मालिनी की शादी होते होते रह गई. तो ऐसे में हेमा मालिनी का दिल जीतने में धर्मेंद्र साहब ने बाजी मार ली.

इसके इलावा ऐसा कहा जाता है कि धर्मेंद्र के बड़े बेटे सनी देओल ने एक बार गुस्से में आकर अपनी सौतेली मां हेमा मालिनी पर चाकू से हमला भी कर दिया था. अब सनी देओल ने ऐसा क्यों किया, इसके पीछे की वजह भी हम आपको बताते है.

दरअसल उस दौर में शादीशुदा धर्मेंद्र का दिल बॉलीवुड की ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी पर कुछ इस कदर फिदा था कि वो हर हाल में उन्हें अपना बनाना चाहते थे. वैसे आपको बता दें कि धर्मेंद्र जब 19 साल के थे तभी उनकी शादी प्रकाश कौर के साथ हो गई थी. ऐसे में ये जानते हुए कि धर्मेंद्र पहले से शादीशुदा है और चार बच्चों के पिता हैं, फिर भी हेमा मालिनी धर्मेंद्र से शादी करने को तैयार हो गईं.

पर वही दूसरी तरफ हेमा चाहती थीं कि धर्मेंद्र अपनी पहली पत्नी को तलाक देकर ही उनसे शादी करें. मगर जब पहली पत्नी प्रकाश कौर ने धर्मेंद्र को तलाक देने से मना कर दिया तो धर्मेंद्र और हेमा मालिनी ने इस्लाम धर्म अपना कर शादी कर ली. इसके बाद धर्मेंद्र की दूसरी शादी से ना सिर्फ प्रकाश कौर सदमे में थी बल्कि सनी और बॉबी देओल भी इससे बेहद खफा थे.

अगर सूत्रों की माने तो ऐसा कहा जाता है कि अपने पिता धर्मेंद्र की शादी से सनी देओल इतने ज्यादा खफा हो गए थे, कि उन्होंने एक बार हेमा मालिनी पर चाकू से हमला तक कर दिया था. मगर वहीं उस दौर के एक मैग्जीन में दिए गए इंटरव्यू के मुताबिक धर्मेंद्र की पहली पत्नी प्रकाश कौर ने इस तरह की किसी भी घटना से इंकार कर दिया था.

अगर प्रकाश कौर की मानें तो उन्होंने अपने बच्चों को अच्छे संस्कार दिए हैं. इसलिए उनके बच्चे इस तरह की हरकत कर ही नहीं सकते थे. इसके इलावा प्रकाश कौर ने ये भी स्वीकार किया था कि इस शादी से उनके दोनों बेटे काफी सदमें में थे और मां को दुखी देख कर वो काफी गुस्से में भी आ गए थे.

गौरतलब है कि धर्मेंद्र ने भले ही हेमा मालिनी से दूसरी शादी कर ली, लेकिन सनी देओल ने हेमा मालिनी को कभी अपनी मां के रुप में स्वीकार नहीं किया. ऐसे में हेमा मालिनी पर सनी का हमला गुस्से का ही एक रूप था. शायद इसलिए आज भी दोनों के रिश्ते में खटास दिख ही जाती है.

भाजपा की सरकार बनी तो मुख्यमंत्री होंगे…

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव जैसे जैसे आगे बढ़ रहे हैं, दलित और पिछड़ों में हिंदुत्व का उफान बढ़ रहा है. जिससे भाजपा को राहत और सपा बसपा को आफत नजर आ रही है. बढे हुये आत्मविश्वास के साथ अब भाजपा में सीएम के चेहरे को लेकर चर्चा शुरू हो चुकी है. उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भाजपा की ओर से नरेन्द्र मोदी और राजनाथ सिंह सबसे बड़े स्टार प्रचारक रहे हैं.

राजनाथ सिंह पांच चरण के चुनावों में 100 से अधिक रैलियां कर चुके है. चुनाव के अंत तक 140 रैलियां हो जायेंगी. नरेन्द्र मोदी के बाद प्रदेश में सबसे ज्यादा मांग राजनाथ सिंह की ही रही है. ऐसे में मुख्यमंत्री पद के लिये सबसे प्रभावी असरदार चेहरा राजनाथ सिंह ही माने जा रहे हैं. खुद राजनाथ सिंह ऐसे सवालों को सही नहीं मानते और खुद को सीएम का फेस भी नहीं मानते. राजनाथ सिंह का कहना है कि भाजपा में चुने गये विधायक यह फैसला करते हैं कि मुख्यमंत्री कौन होगा?

राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनाथ सिंह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद पार्टी का सबसे प्रमुख चेहरा हैं. संघ से लेकर बाकी संगठनों को भी राजनाथ के प्रभाव से कोई परेशानी नहीं है. भाजपा को अगर 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को सरकार बनाने के लायक सांसद देने हैं तो उत्तर प्रदेश में सरकार को बेहतर तरह से चलाना होगा. ऐसे में राजनाथ सिंह ही वह चेहरा हैं जो प्रदेश में 2 साल सरकार चला कर छवि को सुधार सकते हैं. लोकसभा चुनाव में अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिये नरेंद्र मोदी राजनाथ सिंह को उत्तर प्रदेश की कमान सौंप सकते हैं. इससे एक लाभ यह भी होगा कि राष्ट्रीय स्तर पर नरेंद्र मोदी के मुकाबले नंबर 2 ही हालत में दूसरा नेता नहीं उभर पायेगा.

राजनाथ सिंह के मुख्यमंत्री बनने से दूसरे किसी नेता की दावेदारी स्वतः खत्म हो जायेगी. नरेन्द्र मोदी की कार्यशैली को देखते हुये कुछ राजनीतिक जानकार यह मानते हैं कि वह मुख्यमंत्री के रूप मे राजनाथ कि जगह किसी ऐसे नेता का नाम आगे लायेंगे जो उनकी बात को बिना किसी सवाल के मान ले. 2019 के चुनाव में भाजपा के लिये उत्तर प्रदेश सबसे खास है. यहां नरेन्द्र मोदी परोक्ष रूप से अपना राज ही चलाना पसंद करेंगे. ऐसे में वह बहुत बड़े कद के नेता की जगह छोटे युवा चेहरे को प्राथमिकता देंगे. अभी की हालत को देखते हुये मुख्यमंत्री पद के लिये भाजपा के नेताओं की पहली पसंद राजनाथ सिंह ही हैं. चुनाव परिणाम आने के बाद असल सच सामने आयेगा.

जानकार लोग यह मान रहे हैं कि मुसलिम वोटर को लेकर जिस तरह से सपा-बसपा ने बयानबाजी की है, उसका लाभ भाजपा को मिल रहा है. दलित और पिछड़ा भी हिन्दुत्व के नाम पर जाति से अलग धर्म पर वोट दे रहा है. बसपा नेता मायावती का यह बयान कि बाहुबली मुख्तार नहीं राजा भैया है पूर्वांचल में बसपा को नुकसान पहुंचा सकता है. बसपा ने मुख्तार अंसारी के साथ उसके भाई और बेटे को भी टिकट दिया है. मुख्तार जेल में है. ऐसे में मायावती का उसे क्लीन चिट देना चुनावी दांव का उलटा पड जाना माना जा रहा है.

नए लोगों के लिए इंडस्ट्री बहुत मुश्किल है : विद्युत जामवाल

एक्शन फिल्मों में जबरदस्त भूमिका निभाने वाले अभिनेता विद्युत जामवाल ने मार्शल आर्ट की कठिन विधा ‘कलरिपैतु’ में डिग्री ली है. महज 3 साल की उम्र से ही विद्युत मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग लेनी शुरू कर दी था. इसके बाद उन्होंने करीब 25 शहरों में एक्शन शो किया है.

स्वभाव से विनम्र विद्युत आर्मी ऑफिसर के बेटे होने की वजह से पिता के ट्रान्सफर के साथ-साथ उन्हें हर जगह जाना पड़ा, लेकिन उन्होंने मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग नहीं छोड़ी. उन्हें बचपन में जैकी चैन की फिल्में देखना बहुत पसंद था. जिसकी भी फिल्म हिट होती, उसे वे अपना आइडियल मान लेते थें. जिसमें शाहरुख खान, अजय देवगन और अक्षय कुमार है. विद्युत ने बॉलीवुड के एक्शन हीरो के रूप में अपनी इमेज बना ली है. उनकी फिल्म कमांडो 2 रिलीज होने वाली है. वे अपनी फिल्म को लेकर बहुत उत्सुक हैं. पेश है उनसे हुई बातचीत के अंश.

इस फिल्म का मिलना कैसे हुआ?

सभी को ‘कमांडो’ का एक्शन इतना पसंद आया कि ‘कमांडो 2’ करना ही था. सबने मेरी एक्टिंग को काफी सराहा था. यह मुझे काफी अच्छा लगा. जब निर्देशक ने यह फिल्म बनाने की सोची तब उन्होंने सबसे पहले मुझे ही फोन लगाया और मैंने हां कर दिया.

इस फिल्म की खास आकर्षण क्या रही? कितना कठिन है ये फिल्म?

ये फिल्म मेरा अपना फ्रेंचाइज है. इसमें एक चुनौती ये रही कि मैं जो भी करूं, बेहतर करूं. इसकी स्टोरी अलग है. मैंने काफी मेहनत किया है. ‘कमांडो’ की पहली फिल्म में निर्माता ने एक नए लड़के को लिया था, जिसमें मुझे प्रूव करना था, लेकिन कमांडो 2 की कहानी से लेकर अभिनय सब अच्छी लगी थी. इसमें स्टंट बहुत कठिन है, इतने बड़े शरीर को लेकर एक खिड़की से निकलने वाला दृश्य बहुत कठिन था.

एक फिल्म के बाद दूसरी कितनी सफल होगी ये पता नहीं, ऐसे में आप कितना प्रेशर महसूस कर रहे हैं?

कमांडो 2 को बनाने में मैंने काफी समय लिया है. इसकी वजह यह थी कि ये फिल्म पहली फिल्म से भी बेहतर हो. मैंने मेहनत भी काफी की है, उम्मीद है फिल्म सफल होगी.

आर्मी बैकग्राउंड से होने की वजह से इस तरह की फिल्मों में काम करना कितना सहज होता है?

नॉन फिल्मी लोगों के लिए ये इंडस्ट्री बहुत मुश्किल है. आर्मी बैकग्राउंड से होने की वजह से मैं देश के हर कोने में गया हूं. इससे एक्सपोजर बहुत मिला है. फौजी का बेटा होने से आप हर तरह की परिस्थिति में अपने आप को सेट केर लेते है.

आप इंडस्ट्री की दिनचर्या में अपने आप को कैसे फिट करते हैं, क्योंकि आप फौजी बैकग्राउंड से हैं और मार्शल आर्ट को सीखा है?

मेरे लिए अनुसाशन का मतलब थोड़ा अलग है. मैं अपनी दिनचर्या को अपने हिसाब से तैयार कर लेता हूं. काम सब करता हूं, कुछ छूटता नहीं है. मेरे फादर नहीं हैं, एक मां है, जिनसे मैं काफी ‘क्लोज’ हूं. वह लन्दन में रहती हैं, लेकिन मैं दिन में एक से दो बार उनको फोन अवश्य कर लेता हूं.

आपको फिल्म इंडस्ट्री में आने की प्रेरणा कहां से मिली?

मुझे हमेशा से कठिन काम पसंद है. मैं एक मार्शल आर्टिस्ट हूं और कमांडो के दौरान निर्माता विपुल शाह ने मुझे चुना, क्योंकि उन्हें पता था कि इस चरित्र में में फिट बैठूंगा. जब आप नॉन फिल्मी बैकग्राउंड से होते है तो इतनी कैपिबिलिटी आपमें होनी चाहिए कि लोग आप को देखें. यूथ इस इंडस्ट्री में आने के लिए कुछ सिखते हैं. मैं तो पहले से ही सीखा हुआ था. फिल्मों में आने का भी उद्देश्य भी यही था. मेरी मां की संस्था केरल में है, जहां मार्शल आर्ट सिखाया जाता है. वही मैं पला-बड़ा हूं.

कितना संघर्ष था?

यहां काम मिलना मुश्किल है. हर बार प्रूव करना पड़ता है. अगर आप को मौका मिल भी जाए, तो आपको सपोर्ट नहीं मिलता. मैंने सोचा था कि मैं सूरज की तरह इतना चमकूं कि लोग मुझे ‘इग्नोर’ ना करें.

‘कमांडो’ के दौरान भी मैंने बिना वायर और केबल के एक्शन किया. कमांडो 2 में मैंने सब कुछ अपने आप किया और सोचा कि हर बार मैं दर्शकों को इतना कुछ दे दूं कि वे मेरी फिल्म को अवश्य देखें. ये आत्मविश्वास मुझे मेरे परिवार और गांव से मिला. मुझे 4 साल की मेहनत के बाद फोर्स फिल्म मिली थी.

अभी आप अपने आप में कितना बदलाव महसूस करते हैं?

मैं बहुत विनम्र हो गया हूं. सब लोग आपके बराबर नहीं, आपसे काफी ऊपर हैं. हेयर स्टाइलिस्ट, ड्रेस डिजाइनर जैसे कोई भी हो, उन्हें अपने क्षेत्र में महारथ हासिल है, इसलिए मैं सबकी इज्जत करता हूं.

ग्लैमर वर्ल्ड में अपने आपको ग्राउंडेड रखना कितना मुश्किल होता है?

जो लोग सफलता के बाद बदल जाते हैं, मुझे लगता है कि वे सफलता के लिए तैयार नहीं होते. मुझे पता है मुझे सफलता मिलेगी, इसलिए मुझमें कोई बदलाव नहीं आएगा. आज के जमाने में लोग बहुत होशियार हैं और वे सही और गलत इंसान के फर्क को अच्छी तरह समझते हैं. आपको ईमानदार होना जरुरी है. मुझे नॉर्मल लोग बहुत प्रभावित करते हैं.

फिटनेस के लिए आप क्या करते है?

मैं पर्सनली विश्वास करता हूं कि आप सब कुछ लिमिट में खाएं, क्योंकि शरीर के लिए सब जरुरी है. मैं सब खाता हूं. रोज 15 मिनट वर्कआउट करता हूं. कोई डाइट फॉलो नहीं करता.

फिल्मों में आने की चाहत रखने वाले यूथ के लिए क्या मेसेज है?

सिर्फ ‘गुड लुकिंग’ लड़के या लड़की से कुछ नहीं होता. यहां आने के लिए किसी एक टैलेंट की आवश्यकता होती है. उसमें आपको इतना अच्छा होना है कि हिन्दुस्तान में वैसा कोई न हो. अगर ऐसा नहीं है, तो आप मुंबई मत आइये.

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