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मेरी उम्र 24 साल है. पीरियड्स के दिनों में पैरों में दर्द होता है. क्या यह चिंता की बात है.

सवाल

मेरी उम्र 24 साल है. पीरियड्स के दिनों में पैरों में दर्द होता है. क्या यह चिंता की बात है?

जवाब

नहीं, यह कोई बड़ी समस्या नहीं है. पीरियड्स के दौरान पैरों और शरीर के निचले हिस्से में दर्द आम बात है. पेट के निचले हिस्से में होने वाला दर्द शरीर के  अन्य हिस्सों तक फैलता है. कई औरतों को यह समस्या होती है. पैरों में दर्द की एक वजह गर्भाशय में सिकुड़न भी है.

 

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

भारत-पाक दोनों के लिए खेलता था यह खिलाड़ी

आपने ऐसे कई क्रिकेटरों के बारे में सुना होगा जिन्होंने दो देशों के लिए क्रिकेट खेली. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पाकिस्तान टीम के कई खिलाड़ी भारतीय टीम की ओर से खेले थे. जी हां, यह बिल्कुल सच है. आपको बता दें कि यह बात स्वतंत्रता मिलने से पहले की है जब भारत और पाकिस्तान एक देश था.

स्वतंत्रता के बाद भारत और पाकिस्तान दो देशों में बंट गए. इस तरह पाकिस्तान और भारत की क्रिकेट टीम भी अलग टीम बनी. इस नई पाकिस्तान टीम के कप्तान अब्दुल हफीज करदार बनें जो पहले भारत की ओर से क्रिकेट खेलते थें.

हफीज करदार ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का आगाज साल 1946 में किया था जब वह भारतीय टीम की ओर से इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स के मैदान पर खेले थें. हफीज ने इस मैच की पहली पारी में 43 और दूसरी पारी में शून्य रन बनाए थे.

पाकिस्तान को साल 1952 में टेस्ट दर्जा प्राप्त हुआ और हफीज ने 1952 से 1958 तक पाकिस्तानी टीम की बागडोर संभाली. जिस समय हफीज ने टीम की बागडोर संभाली उस समय पाकिस्तान क्रिकेट की माली हालत बेहद खराब थी. यहां तक की टीम के खिलाड़ियों के पास ढंग की क्रिकेट किट भी नहीं थी. वे अपनी किट की जरूरतें अपने दोस्तों व फैन्स से मांगकर पूरी करते थें. यहां तक की जूते भी उनके दोस्त उन्हें उधार देते थें.

इस सबके बावजूद हफीज ने अपनी कप्तानी की जिम्मेदारी बखूबी निभाई. पाकिस्तान ने हफीज की कप्तानी में 23 मैच खेले जिनमें 8 में जीत दर्ज की. यह उस टीम के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि थी जिसके खिलाड़ी गरीबी में गड़े हुए थे.

पाकिस्तान ने कैरेबियाई देश वेस्टइंडीज का पहला दौरा किया. 1958 में हफीज ने क्रिकेट से संन्यास ले लिया. 1972 में उन्हें पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया.

ये अंदाज है कुछ खास

पिछले साल के अंत में यानि कि दिसंबर 2016 में आई फिल्म 'कहानी 2' में अपने अभिनय का कमाल दिखा चुकी विद्या बालन एक बार फिर से बड़े पर्दे पर अपना जलवा दिखाने के लिए तैयार हैं. इस महीने की 17 तारीख को सिनेमाघरों में आने वाली फिल्म 'बेगम जान' में वे नजर आने वाली हैं. इस फिल्म में भी विद्या का अंदाज ऐसा ही होगा जो दर्शकों ने अब तक नहीं देखा होगा.

फिल्म 'बेगम जान' श्रीजीत मुखर्जी की बंगाली फिल्म 'राजकाहिनी' का हिंदी रीमेक है, जिसे नेशनल अवॉर्ड भी मिल चुका है. विशेष फिल्म्स द्वारा निर्मित इस हिन्दी रीमेक का निर्देशन भी श्रीजीत मुखर्जी ने ही किया है. महेश भट्ट और मुकेश भट्ट इस फिल्म के प्रोड्यूसर हैं.

इस फिल्म की पृष्ठभूमि 1947 में हुए भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद, बंगाल पर हुए इसके कुछ प्रभावों की कहानी पर आधारित है. फिल्म की पूरी कहानी कोठे पर रहने वाली 11 महिलाओं की है. जब देश का विभाजन होता है और इस विभाजन के बाद एक नई सीमा रेखा बना दी जाती है, जिसके बाद इस कोठे का आधा हिस्सा भारत में आता है और आधा हिस्सा पाकिस्तान में पड़ता है.

फिल्म में विद्या बालन ने इस कोठे की मालकिन का किरदार निभाया है. जबकि इसकी मूल फिल्म में ये किरदार बंगाली अदाकारा रितुपर्णा सेनगुप्ता ने निभाया था. इस किरदार के लिए रितुपर्णा को दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का खिताब भी प्राप्त हुआ था.

कुछ दिनों पहले ही फिल्म से विद्या बालन का फर्स्ट लुक सोशल मीडिया पर आउट हुआ था, इसमें वे एक चारपाई पर लेटी हुई हुक्का पीती नजर आ रहीं थी. विद्या बालन का ऐसा अंदाज उनकी अब तक की फिल्मों में नहीं देखा गया है और कयास लगाए जा रहे हैं कि ये फिल्म भी विद्या के करियर को नई ऊंचाइयां देगी.

इस फिल्म में गौहर खान भी वेश्या के किरदार में नजर आने वाली हैं. तस्वीर देख के तो यही लगता है कि गौहर ने अपने किरदार में ढलने के लिए ना तो मेक-अप का सहारा लिया है और ना ही किसी खास तरीके से अपने चेहरे की देखभाल के लिए किसी वस्तु का इस्तेमाल किया है.

मुफ्त इंटरनैट से किस को हुआ फायदा?

मोबाइल फोन सेवाप्रदाता रिलायंस ने अपने जियो सिमकार्ड के जरिए निशुल्क डाटा सेवा उपलब्ध करा कर देश में इंटरनैट सेवा के इस्तेमाल में क्रांति ला दी है. इस से लगभग हर हाथ का स्मार्ट मोबाइल फोन इंटरनैट सेवा से जुड़ गया है और लोग इंटरनैट सेवा का जम कर इस्तेमाल कर रहे हैं. जियो सिमकार्ड धारकों के साथ ही अन्य सेवाप्रदाता कंपनियों के उपभोक्ता भी जम कर इंटरनैट का इस्तेमाल कर रहे हैं.

ग्राहक जब फ्री इंटरनैट के लिए जियो की तरफ उमड़े तो दूसरी कंपनियों में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई और उन्होंने इंटरनैट सेवा को बहुत सस्ता बना दिया. इन सब का सब से ज्यादा फायदा सोशल नैटवर्किंग साइट फेसबुक को मिला है.

दिसंबर की तिमाही में इंटरनैट इस्तेमाल करने वालों की संख्या में जम कर इजाफा हुआ है. भारत में फेसबुक यूजरों की संख्या 20 करोड़ से भी ज्यादा है. इस क्रम में अमेरिका भारत से निचले स्तर यानी नीचे पायदान पर है. तीसरे क्रम पर ब्राजील है जबकि उस के बाद इंडोनेशिया और मैक्सिको हैं.

भारत से प्रति यूजर आय का स्तर अन्य देशों की तुलना में भले ही बहुत कम है लेकिन यूजरों की संख्या का आधार सर्वाधिक है. फेसबुक के रिकौर्ड उपयोगकर्ता भारत में हैं और इस संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में करीब सवा अरब लोग फेसबुक का इस्तेमाल कर रहे हैं जिस का 18 प्रतिशत हिस्सा भारत में है. और हर माह अब इस संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. इंटरनैट से फेसबुक के अलावा व्हाट्सऐप जैसे सोशल मीडिया के यूजर्स में भी जबरदस्त इजाफा हो रहा है.

साइबर हमले रोकने के लिए रिजर्व बैंक की समिति

साइबर सुरक्षा आज सब से बड़ा संकट बन गया है. बैंकों से रुपए निकालने की घटनाएं बढ़ रही हैं. आएदिन खबरें आती हैं कि लोग एटीएम कार्ड के कारण धोखाधड़ी केजरिए लूटे जा रहे हैं. पुलिस इस तरह की शिकायतों को दर्ज करने में लोगों की मदद नहीं करती है. धोखेबाज नएनए तरीके अपना कर लोगों के एटीएम के नंबर हासिल कर के उन्हें लूटने में लगे हैं. हालांकि बैंक लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए बारबार चेतावनी दे रहे हैं कि उन की तरफ से कोई सूचना नहीं मांगी जाती है, इसलिए कोई ग्राहक अपनी सूचनाएं फोन पर किसी को न दे. इस के बावजूद लोग बड़ी संख्या में लुट रहे हैं.

इस बीच, रिजर्व बैंक ने वित्तीय संस्थानों तथा बैंकों के साथ साइबर सुरक्षा को और कड़ा करने के लिए अंतर अनुपालन स्थायी समिति के गठन की योजना बनाई है. यह समिति साइबर सुरक्षा से नजात दिलाने के लिए बैंक को अपनी सिफारिशें देगी. बैंकों तथा वित्तीय संस्थानों में साइबर हमले की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. इन घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए बैंक इस समिति की सिफारिशों के आधार पर कदम उठाएगा.

केंद्रीय बैंक ने पिछले वर्ष जून में बैंकों को अपना साइबर सुरक्षा तंत्र और मजबूत करने का निर्देश दिया था. इस में बैंकों से सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की विस्तृत सूचना देने का भी निर्देश दिया था. इन दिशानिर्देशों के बावजूद बैंकों को बड़े साइबर हमले का शिकार होना पड़ा था. साइबर हमले के कारण 60 लाख बैंककार्ड का डाटा चोरी हो गया था.

बहरहाल, अब बैंक इस दिशा में सख्त कदम उठा रहे हैं. नए दिशानिर्देशों के तहत किए जा रहे सुरक्षा उपायों को देखते हुए देश का सब से बड़ा स्टेट बैंक औफ इंडिया 6 लाख 25 कार्ड दोबारा जारी करने की योजना बना रहा है. उम्मीद की जानी चाहिए कि नए दिशानिर्देशों से डिजिटल इंडिया का सपना एक कदम आगे बढ़ेगा.

नए करिश्मे करने को तैयार ड्रोन

दिसंबर, 2016 के मध्य चीन ने फिलीपींस के नजदीक साउथ चाइना सागर के अंतर्राष्ट्रीय जल क्षेत्र से एक अमेरिकी ड्रोन को जब्त कर के दुनिया में सनसनी फैला दी. इस से अमेरिका के साथ चीन के रिश्तों में भी तल्खी आई. अमेरिका ने दावा किया कि पानी में चलने वाला ‘ओशियन ग्लाइडर’ नामक उस का ड्रोन (अनमैन्ड अंडरवाटर व्हीकल) वैज्ञानिक आंकड़े इकट्ठे कर रहा था. अमेरिका ने मिलिट्री ओशियनोग्राफी के तहत समुद्री पानी के खारेपन, तापमान और पानी में ध्वनि की गति से जुड़े डाटा को जमा करने वाले ड्रोन को पूरी तरह वैज्ञानिक कार्यों के लिए समर्पित बताया, लेकिन चीन ने इसे दक्षिणी चीन सागर में अमेरिका द्वारा कराई जा रही जासूसी का मामला बता कर ‘ओशियन ग्लाइडर’ जब्त कर लिया. हालांकि बाद में चीन ने बातचीत कर ड्रोन को लौटाने की बात कही, लेकिन अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ने इसे चीन की दादागीरी बताते हुए कहा कि चीन ने ड्रोन की चोरी की है, इसलिए इसे अब वही रख ले.

अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ाने वाली इस घटना के केंद्र में वे ड्रोन हैं, जो इन दिनों दुनिया में इस वजह से चर्चा में हैं कि उन से कई तरह के काम लिए जा सकते हैं. वैसे तो अभी तक इन की चर्चा इसलिए ज्यादा थी कि कुछ कंपनियां इन की मदद से सामान की डिलीवरी कराने का सपना देख रही थीं, पर चीनअमेरिका के बीच छिड़े विवाद से यह तथ्य उजागर हुआ है कि अब ड्रोन कई वैज्ञानिक कार्यों और सैन्य उद्देश्यों के लिए भी इस्तेमाल होने लगे हैं. हालत यह है कि कई देशों में ड्रोन को एक विलेन के रूप में देखा जाने लगा है, जैसे कि अफगानिस्तान, इराक और पाकिस्तान में इन्हें मौत बरसाने वाली मशीन के रूप में देखा जाता है. असल में ये एक तरह के लड़ाकू ड्रोन हैं, जो हथियारों से लैस होते हैं.

हमलावर ड्रोन

दावा किया जाता है कि 18वीं सदी में औस्ट्रिया ने जब वेनिस पर बम से भरे गुब्बारों के जरिए हमला बोला था, तो उस में एक तरह से ड्रोन टैक्नोलौजी का ही इस्तेमाल किया गया था. प्रथम विश्वयुद्ध के समय भी इस तकनीक से दुश्मन सेनाओं पर कई हमले किए गए. आधुनिक ड्रोन के लड़ाकू चेहरे का खुलासा पहली बार बालकान युद्ध में हुआ और इस के फौरन बाद अफगानिस्तान, इराक और पाकिस्तान में इन्हें आसमानी हमलावरों की तरह ब्रिटेन और अमेरिकी सेनाएं अपने प्रयोग में लाईं. अमेरिका की सैन्य इकाई यूएस एयरफोर्स और खुफिया सीआईए के पास अपनेअपने सशस्त्र ड्रोन्स की सैन्य टुकडि़यां रही हैं.

अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान व इराक युद्ध में आरंभ में 36 ड्रोन्स तैनात किए थे, जिन की संख्या वर्ष 2011 में बढ़ा कर 50 कर दी गई थी. इसी तरह सीआईए ने पाकिस्तान और दूसरे देशों में आतंकवादियों को मारने के लिए ड्रोन आजमाए. इस तरह के ड्रोन हमलों की शुरुआत जौर्ज बुश के शासनकाल में की गई थी, जो बराक ओबामा के दौर में भी जारी रही.

इस मामले में ब्रिटेन भी अमेरिका से पीछे नहीं रहा. उस की सेना ने इराक और अफगानिस्तान में निगरानी रखने और हमला करने के लिए कई तरह के ड्रोन्स का इस्तेमाल किया. ब्रिटेन ने 2007 में जनरल एटौमिक्स से रीपर नामक 3 बेहद महंगे ड्रोन्स खरीदे थे. इन से पहली बार जून, 2008 में अफगानिस्तान में बड़ा हमला किया गया था. ब्रिटिश अखबार डेली टैलीग्राफ मार्च, 2009 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार ब्रिटिश ड्रोन्स की वजह से उस दौरान अफगानिस्तान में सशस्त्र हमलों की संख्या दसगुना तक बढ़ गई.

भारत में भी ‘लक्ष्य’ नामक सैन्य ड्रोन बनाया गया है जिस का प्रयोग भारतीय सेना हवाई हमलों के लिए करती है. इस के अलावा हमारे देश में रुस्तम, कपोथका, निशांत व औरा नाम से कई अन्य ड्रोन्स को विकसित किया जा रहा है.

ताकत सैन्य ड्रोन की

एक आम ड्रोन फिल्मों में दिखाए जाने वाले चारभुजीय खिलौने और छोटे विमान जैसा ही होता है, लेकिन किसी भी ड्रोन की बनावट इस बात पर ज्यादा निर्भर करती है कि उस का इस्तेमाल किस काम में हो रहा है. दुश्मन देश की सीमा या किसी दंगाग्रस्त इलाके की निगरानी वाले ड्रोन तो 4 या 8 भुजाओं के होते हैं और उन में बैटरी के अलावा वीडियो कैमरे व सैंसर भी लगे होते हैं.

सैन्य ड्रोन में कई और भी इंतजाम करने होते हैं जैसे ब्रिटेन द्वारा बनाए गए ड्रोन (यूएवी) प्रीडेटर में 3 किलोवाट की एक बैटरी होती है जो इसे स्टार्ट करने के लिए आरंभिक ऊर्जा देती है. अगले और पिछले हिस्से में रबड़ से बने फ्यूल टैंक होते हैं. ये टैंक अपने साथ करीब 600 पाउंड ईंधन ले जा सकते हैं. इंजन को ठंडा रखने वाले ऐंटीफ्रीज पदार्थ के साथ 7.6लिटर मोटर औयल भी इस में होता है जो इस की मशीनों में चिकनाई बनाए रखता है. इन के अतिरिक्त 14 एंपियर की 2 आपातकालीन बैटरियां भी इस में होती हैं जो पावर ठप होने की दशा में ड्रोन को उड़ाए रखने में मदद देती हैं.

कुल मिला कर प्रिडेटर जैसे ड्रोन में 32 उपकरण होते हैं, जो संचालन करने के साथसाथ सूचनाएं बटोरने, चित्र लेने से ले कर हमला करने में सहयोग करते हैं, जैसे सिंथैटिक अपरचर राडार (सार) एंटीना, जीपीएस आधारित नेवीगेशन सिस्टम, सैटेलाइट कम्युनिकेशन ऐंटीना, वीडियो रिकौर्डर, नोज कैमरा, आइस डिटैक्टर, फ्लाइट सैंसर आदि.

प्रिडेटर इतना ताकतवर है कि यह अपने भीतर 378 लिटर तेल रखने के साथसाथ 204 किलोग्राम सामान ढो सकता है. यही नहीं, इतने इंतजाम के बल पर यह दुश्मन के इलाके में लगातार 24 घंटे तक निगरानी रख सकता है. हालांकि इस मामले में ब्रिटेन का ही एक अन्य ड्रोन जेफर विश्व कीर्तिमान बना चुका है. उस ने प्रिडेटर को काफी पीछे छोड़ते हुए 82 घंटे की लगातार उड़ान का रिकौर्ड बनाया है.

हर जगह चलेगा ड्रोन

अमेरिकी सेना ऐसा ड्रोन बना रही है, जो जरूरत पड़ने पर हवा में उड़ने के अलावा पानी में तैर सके और जमीन पर भी चल सके. इस तरह के ड्रोन को ‘ट्रांसफौर्मर्स’ ड्रोन कहा जाता है. सब से पहले इस की परिकल्पना टकेरा टौमी ने 1975 में पेश की थी.

अमेरिकी सेना ने कैलिफोर्निया की सैंडिया राष्ट्रीय प्रयोगशाला में ऐसे ड्रोन का आरंभिक संस्करण यानी प्रोटोटाइप तैयार कर लिया है. इस प्रोजैक्ट के तहत उड़ने वाले ड्रोन में पंख के साथसाथ पैडल भी लगाए गए हैं. यह 30 फुट की ऊंचाई तक उड़ सकता है.

बारी इंटरनैट ड्रोन की

सोशल नैटवर्किंग कंपनी फेसबुक को ड्रोन में इंटरनैट के विस्तार का एक नया विकल्प दिख रहा है. फेसबुक दुनिया के 5 अरब लोगों को सौर ऊर्जा से चलने वाले अंगरेजी के वी (ङ्क) आकार के ड्रोन के जरिए इंटरनैट से जोड़ना चाहती है. एक छोटी कार जितना वजनी और बोइंग 767विमान के एक पंख जितने आकार वाले इस ड्रोन से फेसबुक इंटरनैट के विस्तार के दूसरे नए तरीकों के मुकाबले ज्यादा तेजी से काम करने के बारे में योजना बना रही है.

समुद्र के नीचे बिछाए गए केबल्स की तुलना में बेहद ऊंचाई पर उड़ने वाले हीलियम के गुब्बारों और हाइस्पीड फाइबर नैटवर्क के मुकाबले ड्रोन्स ज्यादा बेहतर ढंग से इंटरनैट लोगों को दे सकते हैं. ऐसे ड्रोन्स बनाने के लिए फेसबुक ने एसेंटा नामक कंपनी से करार भी किया है.

करिश्मा बायोलौजिकल ड्रोन का

विज्ञान जगत ऐसे ड्रोन बनाने की दिशा में भी काम कर रहा है, जो दुर्घटनाग्रस्त होने पर पर्यावरण के लिए कोई खतरा पैदा न करें. कई बार बेहद दुर्गम इलाकों में दुर्घटनाग्रस्त होने वाले ड्रोन वातावरण में रासायनिक कचरे की समस्या उत्पन्न करते हैं. इसे देखते हुए अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के एमेस रिसर्च सैंटर (कैलिफोर्निया) ने माइसेलियम नामक पदार्थ से ड्रोन बनाए हैं, जो न बेहद हलके हैं बल्कि दुर्घटनाग्रस्त होने पर आसानी से पर्यावरण में घुलमिल भी जाते हैं. उल्लेखनीय है कि माइसेनियम नामक पदार्थ से दुनिया में समुद्र के पानी पर सर्फिंग करने वाली बोट्स और शराब की पेटियां बनाई जाती हैं. इन ड्रोन्स पर एक परत सेलुलोस और प्रोटीन की चढ़ाई जाती है, ताकि ये वाटरप्रूफ बन सकें.

सैन्य और वैज्ञानिक उद्देश्यों के अलावा भी ड्रोन्स अब कई काम आ रहे हैं. जैसे ट्रैफिक के संचालन, भीड़ के नियंत्रण और दंगाग्रस्त इलाकों की निगरानी करने में. पिछले दिनों राजधानी दिल्ली में छठ पूजा और दिल्ली के ही त्रिलोकपुरी इलाके में सांप्रदायिक तनाव का माहौल बनने पर शरारती तत्त्वों पर नजर रखने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल करने की खबरें आई थीं. दिल्ली में यों तो ड्रोन का पहली बार प्रयोग छठ पूजा के दौरान भीड़ की निगरानी के लिए किया गया, लेकिन जब (अक्तूबर-नवंबर, 2014 में) यहां के त्रिलोकपुरी में माहौल कुछ बिगड़ा तो पुलिस ने पूरे इलाके की निगरानी के लिए 4-5 ड्रोन आकाश में तैनात कर दिए. वे 2 मीटर लंबे, 1 मीटर चौड़े और करीब 2 किलोग्राम वजन के थे. इन मानवरहित ड्रोन्स ने अपने कैमरों से पूरे इलाके की नजदीक से छानबीन की और वे तसवीरें व  वीडियो पुलिस कंट्रोल रूम में हाथोंहाथ पहुंचाई. इस से पुलिस को शरारती तत्त्वों पर काबू पाने में काफी मदद मिली. दंगों के दौरान ड्रोन के  प्रयोग का अपने देश में यह पहला वाकेआ बना.

इस के बाद दिल्ली पुलिस ने ऐसे ड्रोन खरीदने की योजना भी बनाईर् है जो रात में देख सकने वाले नाइट विजन कैमरों और कुछ हथियारों (जैसे कि भीड़ नियंत्रित करने वाली रबड़ की गोलियां बरसाने वाली गन) से लैस हों. अफ्रीका में इसी तरह का पेपर बुलेट ड्रोन बनाया गया है जो भीड़ को नियंत्रित करने के काम आता है.

2 साल पहले (2015) में सरकार दिल्लीमुंबई सहित देश के 7 शहरों में आसमान से निगरानी रखने के लिए ड्रोन तैनात करने का प्रस्ताव दे चुकी है. प्रस्ताव के मुताबिक इन अनमैन्ड एरियल व्हीकल्स (यूएवी) यानी ड्रोन्स का इस्तेमाल शहरों के ज्यादा ट्रैफिक और भीड़भाड़ वाले इलाकों पर नजर रखने के लिए किया जा सकेगा.

ऐंटी ड्रोन तकनीक

एक तरफ दुनिया में ड्रोन के विविध उपयोग बढ़ रहे हैं तो दूसरी तरफ उन जगहों पर इन्हें नष्ट करने वाली तकनीक भी विकसित की जाने लगी है. जैसे अपने भूभाग पर ड्रोन हमलों के कारण अमेरिका से नाराज पाकिस्तान ने 2013 में स्वदेशी ऐंटी ड्रोन टैक्नोलौजी विकसित करने का दावा किया था. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और आर्मी चीफ परवेज कयानी की मौजूदगी में वहां की सेना (आर्मी एयर डिफैंस) ने बहावलपुर में इस तकनीक के इस्तेमाल से एक ड्रोन को सफलतापूर्वक मार गिराने का दावा किया था. तकनीक में ओरलिकन गन का इस्तेमाल कर के ड्रोन को मार गिराया था.

इसी तरह का एक सफल प्रयोग नवंबर, 2014 में चीन में भी किया गया,हालांकि यहां निशाने पर वे ड्रोन्स थे जिन के बारे में दावा है कि उन का इस्तेमाल आतंकवादी कर सकते हैं. चीन में लेजर रक्षा उपकरणों से लैस इस तकनीक का विकास चाइना एकैडमी औफ इंजीनियरिंग फिजिक्स ने किया है और उस का दावा है कि इस तकनीक की मदद से आसमान में ड्रोन दिखाई देने के 5 सैकंड के अंदर लेजर से उसे नष्ट किया जा सकता है. उल्लेखनीय है कि सस्ता होने और इस्तेमाल में आसान होने के कारण आतंकवादी भी कहीं हमला करने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कर सकते हैं.                                 

फिलहाल ड्रोन से कुछ और काम भी लिए जा रहे हैं जो इस प्रकार हैं :

शिकारियों पर नजर : भारत के काजीरंगा नैशनल पार्क के सुरक्षा अधिकारियों ने 2013 में ऐलान किया था कि वे 480 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैले संरक्षित वन पर नजर रखने के लिए कैमरे लगे ड्रोन का इस्तेमाल करेंगे. गैंडे़ के सींगों के बढ़ते अवैध बाजार की वजह से उन के शिकार की समस्या अब एशिया में ही नहीं बल्कि अफ्रीकी देशों में भी तेजी से बढ़ रही है.

खेल का सीधा प्रसारण : वर्ष 2012 में रूपर्ट मर्डोक की कंपनी फौक्स स्पोर्ट्स आस्ट्रेलिया ने एक क्रिकेट मैच के प्रसारण के लिए पहली बार एक कैमरायुक्त ड्रोन का इस्तेमाल किया था. वर्ष 2013 में एक रग्बी मैच में भी इस तरह का प्रयोग किया गया. दावा किया जा रहा है कि इन हवाईर्मशीनों के इस तरह के इस्तेमाल से भविष्य में लोगों को अपने मनपसंद खेल को उस ऐंगल से देखने का भी मौका मिलेगा, जिस से अभी तक वे महरूम थे.

खबरों पर नजर : अमेरिकी यूनिवर्सिटी औफ नेब्रास्का लिंकन ने ड्रोन जर्नलिज्म लैब तैयार की है. इस के अलावा यूनिवर्सिटी औफ मिसौरी ने ड्रोन जर्नलिज्म का कोर्स भी शुरू किया है. अमेरिकी एविएशन डिपार्टमैंट उन रिसर्चर्स को ड्रोन के इस्तेमाल की आसानी से मंजूरी देने लगा है, जो इस मशीन के अनूठे इस्तेमाल की दिशा में काम कर रहे हैं.

अंगूर भी बचाएंगे : फ्रांस के शहर बोर्डेक्स में वाइन बनाने वाली एक कंपनी ने अंगूरों को संक्रमण से बचाने के लिए कैमरे लगे ड्रोन का इस्तेमाल किया है. ये ड्रोन अपनी उड़ान के दौरान अंगूरों की बेलों की काफी करीब से तसवीरें खींचते हैं, जिस से पता लग जाता है कि कहीं फसलें सड़ने तो नहीं लगी हैं. इसी तरह जापान में कीटनाशकों के छिड़काव के लिए भी ड्रोन का इस्तेमाल हो रहा है.

तेल पाइपलाइनों पर नजर : पैट्रोलियम कंपनी बीपी ने कुछ समय पहले अलास्का में पैट्रोल से चलने वाले एक ड्रोन का परीक्षण किया था. सुदूर सुनसान इलाकों में फैली पाइपलाइनों में किसी किस्म की खराबी तो नहीं आई, यह पता लगाना आसान नहीं है. इस के अलावा, कड़कड़ाती ठंड और तेज हवाओं के मद्देनजर भी उन पर नजर नहीं रखी जा सकती है. इन स्थितियों में ड्रोन काफी काम आते हैं.

आपदा में भी इस्तेमाल : हैती में 2010 में आए भूकंप के बाद बचाव व राहत कार्य चलाने के लिए ड्रोन की मदद ली गई थी. इसी तरह 2013 में उत्तराखंड में विनाशकारी प्रलय के बाद ड्रोन की मदद से पहाड़ों, जंगलों और सुनसान जगहों पर फंसे लोगों की तलाश की गई थी. ये ड्रोन उन इलाकों में भी जाने में सक्षम थे, जहां हैलिकौप्टर्स को उड़ान भरने में दिक्कत का सामना करना पड़ा था.

ब्यूटी एप्स से पायें खूबसूरती

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मोडीफेस

इस एप में आप अपनी सेल्फी लेकर यह देख सकती हैं कि कौन सा सेलेब्रिटी हेयर स्टाइल आप पर फबेगा या किस हेयर स्टाइल में आप कैसी दिखेंगी  यह सभी कुछ आप कुछ ही पलों में इस ब्यूटी एप्स से जान सकती है. इसके साथ ही कौन सा हेयर कलर आप पर सूट करेगा किससे आप खूबसूरत दिखेंगी इसकी जानकारी भी आपको इस एप से मिल जाएगी. मेकअप कौन सा अधिक खिलेगा सभी कुछ यह एप्स आपको बता देगा.

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इस ऐप से आप यह जान सकती हैं कि मार्केट में इस समय मेकअप और हेयर स्टाइल का क्या लेटेस्ट ट्रेंड चल रहा है और कैसे उस ट्रेंड को फॉलो किया जा सकता है साथ ही इस एप पर आप ब्यूटी रिलेटेड टिप्स की जानकारी भी पा सकती हैं. इस एप पर  ब्यूटी प्रोडक्ट के रिव्यू के साथ उनकी शॉपिंग का ओप्शन भी होता है.

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इस एप की मदद से अनेक तरह के बेहतरीन हेयर स्टाइल बनाये जा सकते हैं. इसमें हेयर स्टाइल से जुड़े कई ट्युटोरियल दिए हुए हैं और हर एक हेयर स्टाइल को को बनाने का तरीका स्टेप बी स्टेप बताया गया है. इस एप में एक स्मार्ट मिरर भी है जिसमें आप अपनी बनी हुई हेयर स्टाइल की तस्वीर भी ले सकती हैं और अपने दोस्तों एवं रिश्तेदारों के साथ शेयर कर सकती हैं.

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एक की तारीफ का मतलब दूसरे से लगाव खत्म होना नहीं : वरुण धवन

फिल्मी माहौल में पले बढ़े वरुण धवन ने बॉलीवुड में बहुत कम समय में अपनी एक खास पहचान बना ली है. वह लगातार सफलता की ओर अग्रसर हैं. तो वहीं बॉलीवुड में नताशा दलाल के संग उनके रिश्तों की चर्चाएं हैं. वरुण धवन अक्सर नताशा के साथ नजर आ जाते हैं, पर अब तक वरुण ने खुलकर इस रिश्ते की बात कबूल नहीं की है. पर इन दिनों वह दस मार्च को होली के अवसर पर प्रदर्शित होने वाली फिल्म ‘बद्रीनाथ की दुल्हनिया’ की चर्चा करते रहते हैं.

आपके करियर का टर्निंग प्वाइंट क्या रहा?

मेरे करियर की पहली फिल्म ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ थी. इस फिल्म से जुड़ना मेरे करियर, मेरी जिंदगी में एक नया मोड़ रहा. इस फिल्म के बाद मेरी ईमेज एक चॉकलेटी ब्वॉय की बन गयी. लोगों को समझ में आया कि मैं सिर्फ क्लासी फिल्में करता हूं और खुश रहता हूं. लेकिन एक साल के बाद मेरे करियर में दूसरा मोड़ आया, जब मैंने अपने पिता डेविड धवन के निर्देशन में फिल्म ‘मैं तेरा हीरो’ की. इस फिल्म ने मेरी इमेज बदली.

इसके बाद मेरी फिल्म आयी ‘बदलापुर’. बदलापुर मेरे करियर की बहुत बड़ी टर्निंग प्वाइंट रही. इसमें मेरा किरदार बहुत अलग था. इसके बाद ‘ए बी सी डी’ रही, इस फिल्म ने सौ करोड़ का व्यापार भी किया. उसके बाद मैंने ‘दिलवाले’ व ‘ढिशुम’की. अब मेरी नई फिल्म आ रही है ‘बद्रीनाथ की दुल्हनिया’. उम्मीद करता हूं कि यह फिल्म भी मेरे करियर में एक नया मोड़ लेकर आएगी.

इन फिल्मों के चलते आपकी निजी जिंदगी में क्या बदलाव आए?

‘मैं तेरा हीरो’ के समय मुझे साबित करना था कि सोलो हीरो के रूप में मैं फिल्म को सफलता दिला सकता हूं. तो मुझ पर बहुत बड़़ा दबाव था. इस फिल्म के बॉक्स ऑफिस पर सफलता पाने से मेरा अपना आत्म विश्वास बढ़ गया. मुझे निजी जिंदगी में अहसास हुआ कि मैं भी फिल्म में हीरो बन सकता हूं. उस वक्त मैं निजी जिंदगी में बहुत खुश था. जब मैंने ‘बदलापुर’ की, तो माहौल थोड़ा सा धीमा व डार्क हो गया था. यह फिल्म भी बहुत डार्क थी. इसका असर मेरी जिंदगी में बहुत पड़ा. मेरी निजी जिंदगी में कुछ झगड़े भी हुए. अब जब मैं ‘बद्रीनाथ की दुल्हनिया’ की शूटिंग कर रहा था, तब बीच में मैं थोड़ा अग्रेसिव हो गया था. क्योंकि इस किरदार में कुछ चीजें ऐसी हैं, जो मेरी निजी जिंदगी पर भी पूरी तरह से छा गयी थीं.

क्या आपके पिता ने मैं तेरा हीरोआपकी ईमेज को बदलने के लिए बनायी थी?

देखिए, पहली फिल्म ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ में मेरे साथ दो दूसरे नए हीरो भी थे. जैसा कि मैंने पहले ही कहा कि इस फिल्म से मेरी इमेज एक क्लासी किस्म करने वाले चॉकलेटी हीरो की हो गयी थी. अब ईमेज बदलना था. तो फिल्मों में अलग पहचान बनाने के लिए रिस्क तो लेनी होती है. फिल्म ‘मैं तेरा हीरो’ के समय मैंने रिस्क लिया. मेरे पिता ने रिस्क लिया और खुद को साबित करने का मेरे उपर दबाव भी था. यदि मैं यह कहूं कि मेरे पिता पर मुझसे ज्यादा दबाव था, तो गलत नहीं होगा.

आप बद्रीनाथ की दुल्हनिया को हम्प्टी शर्मा की दुल्हनिया का सिक्वअल मानते हैं या नहीं?

मैं इसे सिक्वअल नहीं बल्कि फ्रेंचाइजी वाली फिल्म मानता हूं. सिक्वअल में कहानी आगे बढ़ती है. पर यहां कहानी बहुत अलग है. किरदार अलग है. किरदार व कहानी का माहौल अलग है. हां! दोनों फिल्मों के कलाकार समान हैं. हम इसे ‘लव फ्रेंचाइजी’ मानते हैं. दोनों ही फिल्मों में प्यार ही मुख्य मुद्दा है. इसके अलावा पिछली फिल्म की ही तरह यह फिल्म भी दुल्हन व शादी के बारे में है.

बद्रीनाथ की दुल्हनिया को लेकर क्या कहना चाहेंगे?

बद्री झांसी के एक साहूकार का लड़का है. जिसे कोटा में रह रही वैदेही पसंद आ जाती है. कोटा और झांसी अलग जगह है. दोनों शहरों की अपनी अलग अलग खासियत है. जबकि इनके बीच चार घंटे की दूरी है. पर दोनों शहर के लोगों की सोच रहन सहन बहुत अलग है. इस फिल्म में इस बात को बेहतर तरीके से पेश किया गया है, कि दो चार घंटे की दूरी में हमारे यहां कैसे भाषा और रहन सहन बदल जाती है.

छोटे शहर के लोगों की सोच, मानसिकता, बातचीत का लहजा बहुत अलग होता है. इसको अपने किरदार में ढालने के लिए आपने क्या किया?

फिल्म के निर्देशक शशांक खेतान इस मसले पर काफी शोध कर चुके हैं. वह कानपुर, झांसी, लखनउ, कोटा सहित कई छोटे छोटे शहरों में जा चुके हैं. वहां रहकर हुए काफी कुछ समझ चुके थे. वह इन शहरों से मेरे लिए करीबन तीस वीडियो लेकर आए थे. मैंने उन वीडियो को देखा. दो माह का वर्कशॉप किया. मैंने बात करने के लहजे पर काम किया. भाषा के एक्सेंट पर काम किया. उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान इन सभी जगहों पर बात करने का लहजा अलग है. तो मुझे झांसी का एक्सेंट भी लाना था. पर इस बात का भी ख्याल रखना था कि फिल्म पूरे देश वालों के लिए बन सके. इस पर काम करने पर मुझे समय लगा. देखिए, झांसी में भी किसान और साहूकार दोनों अलग अंदाज में बात करते हैं.

बद्री क्या है?

झांसी का रहने वाला नवयुवक है बद्रीनाथ बसंल. बद्री का किरदार बहुत प्यारा है. शराबी है. मगर गाली गलौज नहीं करता. वह वैदेही के प्यार को पाने के लिए कई तरह की हरकतें करता रहता है. बद्री उन लोगों में से है, जो कुछ भी करने से पहले सोचते नहीं हैं, बस कर जाते हैं.

झांसी के लोग गर्म दिमाग के होते हैं?

बिलकुल सही कहा! बद्री भी गर्म दिमाग का है. किसी ने गलत बात कर ली, तो सीधे मारामारी पर उतर जाता है. पर वह हंसमुख भी है. दिलवाले भी हैं. झांसी के लोग बहुत संजीदा किस्म के होते हैं. भावुक हैं.

चलिए मंबई और झांसी के बीच का अंतर बता दीजिए?

बहुत अलग माहोल है. हमने झांसी के किले में जाकर शूटिंग की. वहां से आसमान बहुत साफ नजर आता है. मुझे झांसी और कोटा दोनों जगह का वातावरण और खाना अच्छा लगा. वहां के लोग सोचते बहुत अलग ढंग से हैं, बातचीत करते समय गुणाभाग नहीं लगाते. लाभ हानि नहीं सोचते हैं.

कोटा और झांसी में क्या फर्क हैं?

कोटा में कोचिंग क्लासेस बहुत हैं. आईआई टी का हब बना हुआ है. मतलब कोटा एक पढ़ाकू शहर है. इसीलिए वैदेही में समझदारी बहुत है. जबकि झांसी में मारामारी का मासला है. मुझे तो दोनों जगह शूटिंग करने में मजा आया.

जब आप अपने पिता या भाई के निर्देशन में काम करते हैं अथवा जब दूसरे निर्देशकों के साथ काम करते हैं. तो कहां सहज रहते हैं?

देखिए, धर्मा प्रोडक्शन तो मेरे लिए परिवार की तरह है. शशांक भी पारिवारिक सदस्य की तरह हो गए हैं. इन लोगों के साथ मैं भावनात्मक रूप से जुड़ जाता हूं. इनकी जब मैं फिल्में करता हूं, तो मैं आर्थिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि भावनात्मक दृष्टिकोण से चाहता हूं कि फिल्म सफल हो.

कहा जा रहा है कि आप सलमान खान का स्थान लेने वाले हैं?

इन चर्चाओं को मैं गंभीरता से नहीं लेता. मैं तो चाहूंगा कि इस तरह की चीजें ना लिखी जाएं. पर मैं अपना व्यक्तित्व नहीं बदल सकता. मेरे व्यक्तित्व के आधार पर किसी को कुछ लगता है, तो बात अलग है. यह सच है कि मुझे सलमान खान या गोविंदा जिस तरह की फिल्में करते रहे हैं, वह सारी फिल्में बहुत पसद हैं.

गोविंदा ने आपके पापा के खिलाफ जो बयान बाजी की है, उसे आप कैसे देखते हैं?

मुझे पता है कि गोविंदा और मेरे पापा ने एक साथ काम करते हुए इतिहास रचे हैं. दोनों इज्जतदार और प्रतिभाशाली लोग हैं. अब गोविंदा ने जो कुछ कहा, अब उस वक्त उनके अपने मन में जो था, वही उन्होंने कहा. पर मेरे पिता के मन में उनके प्रति कोई नाराजगी नहीं है. हमारे परिवार में नकारात्मक बातों पर सोचा नही जाता. उन्होंने जो कुछ कहा, वह कहकर अच्छा लग रहा है. तो कुछ नहीं कह सकता. मैं उनके खिलाफ कुछ भी कहकर बयानबाजी नहीं कर सकता. क्योंकि मेरी परवरिश ऐसी हुई है, उन्होंने तो करण जौहर के खिलाफ भी बाते की हैं. पर वह भूल गए कि हमारी फिल्म की रिलीज की तारीख आठ माह पहले ही घोषित कर दी गयी थी. मैं आज भी उनकी इज्जत करता हूं. इसलिए उनके खिलाफ कोई बात नहीं करूंगा.

दूसरी बात एक कलाकार के तौर पर किसी भी कलाकार को इस बात पर निर्देशक से नाराज नहीं होना चाहिए कि वह उसे लेकर फिल्म नहीं बना रहा है. हर कलाकार किसी भी निर्देशक के साथ काम कर सकता है. एक निर्देशक किसी भी कलाकार के साथ काम कर सकता है. तीसरी बात रचनात्मकता में आप किसी को बांध कर नही रख सकते. फिर भी उनके खिलाफ बात नहीं करना चाहता.

घर पर आप लोगों के बीच फिल्म को लेकर क्या बातें होती हैं?

हम लोग सिनेमा, फिल्म की पटकथा, कंटेंट, सिनेमा में आ रहे बदलाव आदि पर बहुत लंबी लंबी बहस करते हैं. यह सब जब चर्चाएं होती हैं, तो मेरे जहन में कहीं न कहीं बस ही जाती हैं. पर सेट पर मैं पूरी तरह से निर्देशक का कलाकार बनकर काम करता हूं.

आप आलिया भट्ट की बड़ी तारीफ करते हैं?

वह मेरी फिल्म की हीरोइन हैं. हमने एक साथ तीन फिल्में की हैं. हमारे शुभचिंतक भी हैं.

इससे नताशा दलाल को तकलीफ नहीं होती हैं?

बिलकुल नहीं होती है. होनी भी नही चाहिए. कलाकार के तौर पर मैं किसी की भी तारीफ कर सकता हूं. आलिया भट्ट की तारीफ करने के अर्थ यह नही हैं कि नताशा के प्रति मेरा लगाव कम हैं. मैं तो पुरूष कलाकारों कि भी तारीफ करता हूं .

आप ट्वीटर पर बहुत व्यस्त रहते हैं. ट्वीटर का बॉक्स ऑफिस पर कितना असर पड़ता है?

ट्वीटर और बॉक्स ऑफिस का कोई संबंध नही है. मुझे पता है कि तमाम कलाकार ऐसे हैं, जो ट्वीटर पर नही हैं. पर उनकी फिल्में सफलता के रिकॉर्ड बनाती है. आमिर खान ट्वीटर पर नही हैं, आमिर खान किसी टीवी चैनल पर नहीं गए. पर ‘दंगल’ ने कमायी के रिकॉर्ड बना दिए. मैं ट्वीटर पर फिल्म को प्रमोट करने नही जाता. बल्कि अपने मन की बातें लिखने जाता हूं. मैं हमेशा सकारात्मक बातें ही ट्वीटर पर डालता हूं.

सोशल मीडिया पर कलाकारों को गालियां बहुत मिलती हैं?

मुझे तो गालियां नही मिली. शायद मैं भी सिर्फ पॉजीटिव बातें करता हूं.

बायोपिक फिल्में नहीं करना चाहते?

बायोपिक फिल्में करनी है, पर अभी थोड़ा समय है, बाद में करूंगा.

इसके अलावा क्या कर रहे हैं?

पुरानी फिल्म ‘जुड़वा’ की सिक्वअल फिल्म ‘जुड़वा 2’ की शूटिंग शुरू कर चुका हूं. पहले दिन हमने गणपति के भजन के गाने के फिल्मांकन से शुरूआत की है. इसका निर्देशन मेरे पिता डेविड धवन कर रहे हैं. इसमें मेरे साथ जैकलीन फर्नांडिश और तापसी पन्नू हैं. जैकलीन के  साथ यह मेरी दूसरी और तापसी पन्नू के साथ पहली फिल्म है.

बिग बॉस की इस हॉट कंटेस्टेंट ने कराया बोल्ड फोटोशूट

इंडियन सुपरमॉडल और 'बिग बॉस' कंटेस्टेंट डिआंड्रा सॉरेस अपने बोल्ड स्टेटमेंट्स के लिए जानी जाती हैं. डिआंड्रा एक बार फिर अपने इसी एटीट्यूड को लेकर चर्चा में हैं. दरअसल हाल ही में डिआंड्रा ने बोल्ड फोटोशूट कराया है, जिसमें वो टीवी एक्टर और मॉडल कुशाल पंजाबी के साथ काफी हॉट लुक में नजर आ रही हैं. बता दें, डिआंड्रा ‘बाल्ड’ (बिना बाल वाले) मॉडल के तौर पर फेमस हैं और उन्होंने 'बिग बॉस' में भी सबसे ज्यादा सुर्खियां शो के दौरान सिर मुंडवाकर ही बटोरीं थीं.

डियांड्रा ने अपने इस न्यू फोटोशूट की फोटोज इंस्टाग्राम पर भी शेयर की हैं जिसमें डियांड्रा काफी बोल्ड और स्टनिंग नजर आ रही हैं. इसी के साथ डियांड्रा ने बॉडी शेमिंग को लेकर भी बड़ा सा पोस्ट शेयर करते हुए ये मैसेज देने की कोशिश की, कि लड़कियों को अपनी बॉडी पर गर्व करना चाहिए.

डिआंड्रा 'बिग बॉस' सीजन-8 की कंटेस्टेंट रही हैं. इस सीजन में डिआंड्रा अपने बाल्ड लुक को लेकर काफी सुर्खियों में रही थीं. वहीं उनकी गौतम गुलाटी की साथ नजदीकियों ने भी उन्हें काफी लाइमलाइट दी थी. डिआंड्रा को आखिरी बार पॉपुलर वेब सीरीज 'आयशा' में देखा गया था.

डिआंड्रा को कैटरीना कैफ की डेब्यू फिल्म 'बूम' का भी ऑफर मिला था. इसमें डिआंड्रा को कैटरीना का रोल ऑफर हुआ था. लेकिन डिआंड्रा ने इसे ठुकरा दिया था. जिसके बाद डिआंड्रा मधुर भंडारकर की फिल्म 'फैशन' में भी नजर आईं. डिआंड्रा ने अपने करियर में बाल्ड मॉडल के रूप में भी खूब लाइमलाइट बटोरी है. इस बोल्ड स्टेप को शुरू में तो लोगों ने नापसंद किया, लेकिन बाद में डिआंड्रा का यह लुक फैशन वर्ल्ड में काफी फेमस हो गया और कई डिजाइनर्स को पसंद आया.

बिग बॉस के शुरुआत में डिआंड्रा बहुत ज्यादा लाइमलाइट में नहीं रहती थीं, लेकिन लगता है कि उनका बाल्ड लुक उनके लिए दोबारा लकी साबित हुआ है, क्योंकि ऐसा करके वो कई निगाहें अपनी ओर खींचने में कामयाब हुई हैं. डिआंड्रा ने पहली बार बाल्ड मॉडल के रूप में अपीयरेंस 1999 में गोआ में चल रहे एक फैशन शो के दौरान दिया था, लेकिन तब इनके लुक को जनता ने अपनाया नहीं था.

डिआंड्रा कई बार बाल्ड हो चुकी हैं उन्होंने तीसरी बार अपना हेड शेव 2013 में किया था. हालांकि, डिआंड्रा ने इसकी वजह धार्मिक बताई थी. वहीं डिआंड्रा ने चौथी बार अपना सर 'बिग बॉस' हाउस में मुंडवाया. डिआंड्रा मिस बॉम्बे भी रह चुकी हैं और कई ब्रांड्स के लिए विज्ञापन शूट भी कर चुकी हैं. डिआंड्रा कई इंटरनेशनल फैशन शोज का भी हिस्सा रह चुकी हैं और आज भी मॉडलिंग वर्ल्ड में इनकी डिमांड है. डिआंड्रा कई म्यूज़िक वीडियोज में भी दिख चुकी हैं, जैसे 'जादू' और 'बालि भ्रमभट्ट का रीमिक्स', 'जलवा'.

खैर अब आप देखें डिआंड्रा का ये हॉट एंड बोल्ड फोटोशूट…

बिग बी के दामाद की इस फिल्म में हैं ऐसे इंटीमेट सीन, देखिए वीडियो

अभिनेता कुणाल कपूर की राजशाही पृष्‍ठभूमि पर आधारित मलयालम फिल्‍म 'वीरम' रिलीज हो चुकी है. राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार से सम्‍मानित निर्देशक जयराज द्वारा निर्देशित फिल्‍म ‘वीरम’ का ट्रेलर बॉलीवुड अभिनेता ऋतिक रोशन ने अपने फेसबुक पेज पर भी शेयर किया था. जयराज निर्देशित फिल्‍म वीरम विलीयम शेक्‍सपियर के नाटक मैकबैथ से प्रेरित है. इस फिल्म के इंटीमेट सीन भी जबरदस्त हैं.

ट्रेलर का संपादन, फिल्‍मोग्राफी काफी अच्‍छी है. फिल्‍म कलाकारों के हाव-भाव फिल्‍म में वास्‍तविकता का एहसास करवाते हैं. वैसे फिल्म में वेषभूषा, हावभाव और अन्‍य पक्षों से कुणाल कपूर बाहुबली के प्रभास को कांटे की टक्‍कर दे रहे हैं.

मलयालयम में बनी फिल्म आगामी 24 फरवरी को रिलीज हुई है, जबकि इसका हिन्दी वर्जन मार्च के अंत तक रिलीज किया जाएगा. हाल ही में कुणाल को शाहरुख खान और आलिया भट्ट की जोड़ी वाली गौरी शिंदे की फिल्म डियर जिंदगी में देखा गया था. उनकी शादी अमिताभ बच्चन के छोटे भाई अजिताभ की बेटी नैना के साथ हुई है. कुणाल रंग दे बसंती, बचना ऐ हसीनो, आजा नचले और डॉन 2 जैसी फिल्मों में काम कर चुके हैं.

खैर ये सब छोड़िए और आप देखें कुणाल के इंटीमेट सीन…

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