Download App

सट्टा बाजार में बसपा धडाम

चुनाव हो या खेल सट्टा बाजार का अपना अलग महत्व होता है. उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा राज्यों के विधानसभा चुनावों में भी सट्टा बाजार का अपना अलग अंदाज चल रहा है. उत्तर प्रदेश के विषय गुजरात, मुम्बई, मध्य प्रदेश और दिल्ली के सट्टा बाजार में मुख्य टक्कर सपा और भाजपा के बीच दिखाई जा रही है. इस सट्टा के बाजार में सबसे अधिक झटका बहुजन समाज पार्टी को लगा है. जहां प्रदेश में लोग बसपा को सत्ता का मुख्य दावेदार मान रहे थे वही सट्टा बाजार में बसपा धडाम से गिर कर तीसरे नम्बर पर हांफ रही है. सट्टा बाजार में पंजाब में आप को सबसे आगे और भाजपा-अकाली को कांग्रेस के बाद तीसरे नम्बर का भाव मिला है. सट्टा बाजार में भाजपा गोवा में सरकार बनाते दिख रही है वहां कांग्रेस दूसरे और आप पार्टी तीसरे नम्बर पर है. उत्तराखंड में सट्टा ने भाजपा को सत्ता के करीब माना है. कांग्रेस और बसपा को दूसरे तीसरे नम्बर पर रखा है.

सट्टा बाजार के जानकार कहते हैं कि यहां पर भाव पलपल में बदलता रहता है. यहां का भाव सही तरह से चुनावी नतीजो का आकलन नहीं करता, वह चुनावी प्रचार, खबरें और लोगों की बातचीत से अंदाजा लगाता है. सबसे बड़ा सट्टा उत्तर प्रदेश में बनने वाली सरकार को लेकर लगा है. उत्तर प्रदेश के बाद पंजाब और गोवा का नम्बर आता है. पहाडी राज्यों में केवल उत्तराखंड को थोडा बहुत महत्व इस बाजार में मिला है. मणिपुर का इस सट्टा बाजार में कोई जिक्र भी नहीं है. असल में सट्टा बाजार में जिसका भाव सबसे कम होता है अगर वह बडा उलटफेर करता है तो उस पर पैसा लगाने वालों को लाभ का सबसे अधिक होता है. उत्तर प्रदेश में बसपा को सबसे बड़ा खिलाडी माना जा रहा है जो उलटफेर करने में माहिर है. ऐसे में बसपा के भाव को सबसे कम रखा गया है. जिससे बसपा के पक्ष में सट्टा लगाने वालों को सबसे बड़ा मुनाफा हो सकता है.

राजनीतिक हलकों में बसपा को लेकर जानकार लोगों का उत्साह इसलिये खत्म हो गया है. सभी को लग रहा है कि वोटों के धुव्रीकरण के कारण बसपा को सबसे अधिक नुकसान होगा है. धर्म के मसले पर बसपा का दलित वर्ग भी भाजपा के साथ खडा हो जाता है. यही हालत सपा की भी है. सपा के यादव वर्ग को छोड़कर बाकी पिछडी जातियां धार्मिक धुव्रीकरण का शिकार होकर भाजपा के पक्ष में खड़ी हो जाती हैं. यही कारण है कि बहुत सारी परेशानियों के बाद भी भाजपा केवल अपने प्रचार के बल पर सबसे आगे खड़ी नजर आ रही है.

उत्तर प्रदेश में नेताओं रूप में सीधा मुकाबला मायावती, अखिलेश यादव, राहुल गांधी, अमित शाह और नरेन्द्र मोदी के बीच चल रहा है. नरेंद्र मोदी की केन्द्र सरकार की योजनाओं को घेरने का कोई काम सपा, बसपा और कांग्रेस के नेता नहीं कर पाये. नोटबंदी से लेकर बाकी किसी भी मसले पर यह लोग भाजपा को घेरने में सफल नहीं हुये. भाजपा ने राहुल और अखिलेश को निशाने पर लेकर प्रचार अभियान चलाया. भाजपा के मुकाबले सपा बसपा और कांग्रेस बहुत मुखर होकर काम नहीं कर पायें. इसका प्रभाव चुनाव प्रचार पर पड़ रहा है. अगर विरोधी दल भाजपा को मुद्दों पर घेर पाते तो भाजपा के लोग जुमलेबाजी करके नहीं निकल पाते. केवल आक्रामक प्रचार के बल पर ही भाजपा सबसे आगे दिख रही है. इस चुनाव में साफ दिख रहा है कि चुनाव प्रबंधन जीत के लिये सबसे जरूरी हो गया है.

एहसान फरामोश

3 नवंबर, 2016 को जालंधर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री राज शेखर की अदालत में कुछ ज्यादा ही गहमागहमी  थी. इस की यह वजह यह थी कि उन की अदालत में करीब 3 साल पहले 23 अगस्त, 2013 को हुए गुरजीत कौर हत्याकांड का फैसला सुनाया जाना था. अपने समय का यह काफी चर्चित मामला था, क्योंकि इस हत्याकांड का अभियुक्त करीब पौने 2 साल की जांच के बाद पकड़ा गया था.

इस बीच थाने में कई थानाप्रभारी आए और गए थे. इस हत्याकांड का कोई चश्मदीद गवाह भी नहीं था. अभियोजन पक्ष ने तकनीकी सहारा ले कर अपने पक्ष को मजबूत किया था. चर्चित मामला होने की वजह से अदालत  कक्ष वकीलों और आम लोगों के अलावा मीडिया वालों से भरा था.

फैसला सुनने के लिए मृतका गुरजीत कौर का पति रंजीत सिंह सेठी और दोनों बेटे भी अदालत कक्ष में मौजूद थे. अभियुक्त नरेश डिंपी को भी पुलिस ने ले आ कर अदालत कक्ष में खड़ा कर दिया था. अब सभी को जज साहब के आने का इंतजार था. चूंकि पिछली तारीख पर बहस हो कर सजा तय हो चुकी थी, इसलिए अब केवल सजा ही सुनाना था. जज साहब ने अभियुक्त नरेश डिंपी को क्या सजा सुनाई, यह जानने से पहले आइए इस पूरे मामले को जान लेते हैं.

मोबाइल रिपेयरिंग का काम करने वाला 18 साल का जगजीत सिंह सेठी उर्फ रमन 23 अगस्त, 2013 की दोपहर डेढ़ बजे जालंधर के वंचितनगर स्थित अपने घर खाना खाने पहुंचा तो घर का मुख्य दरवाजा खुला देख कर हैरान रह गया. मां को आवाज देते हुए वह घर में दाखिल हुआ तो बैडरूम के दरवाजे के बीचोबीच खून से लथपथ पड़ी मां गुरजीत कौर को देख कर वह जोरजोर से रोनेचिल्लाने लगा.

रमन की रोनेचिल्लाने की आवाज सुन कर पड़ोसी आए तो उन्हें घटना के बारे में पता चला. गुरजीत कौर की हलत देख कर सभी सन्न रह गए. रमन ने घटना की सूचना अपने पिता रंजीत सिंह सेठी को दी तो वह भी भाग कर घर आ गए. वह जालंधर स्थित दानामंडी में ऐरो पैंट लिमिटेड में डिस्पैच मैनेजर थे. घर पहुंचते ही उन्होंने घटना की सूचना पुलिस को दे दी थी. तभी उन्हें गुरजीत कौर के कराहने की हल्की सी आवाज सुनाई दी. सभी उसे नजदीक के कपूर अस्पताल ले गए, जहां के डाक्टरों ने उन की हालत देख कर उन्हें सिविल अस्पताल ले जाने को कहा.

सिविल अस्पताल पहुंच कर गुरजीत का इलाज शुरू हुआ, लेकिन उस के शरीर का खून काफी मात्रा में बह चुका था, इसलिए इलाज के दौरान ही उस की मौत हो गई. इतनी देर में थाना डिवीजन नंबर-8 की पुलिस अस्पताल पहुंच चुकी थी. पुलिस ने लाश को कब्जे में ले कर उस का निरीक्षण किया. मृतका की गरदन पर गहरा घाव था, जो शायद किसी तेजधार हथियार का था.

उस के सिर और पेट पर गहरे चोटों के निशानों के अलावा चेहरे और बाजुओं पर खरोंचों के निशान थे. पुलिस ने लाश का पंचनामा तैयार कर उसे पोस्टमार्टम के लिए वहीं अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया. इस के बाद अपराध संख्या 194/2013 पर हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी.

पुलिस ने घटनास्थल पर जा कर जांच की. बैडरूम का सामान इस तरह अस्तव्यस्त था, जैसे मृतका और हत्यारे के बीच काफी संघर्ष हुआ था. पुलिस ने घर से क्याक्या गायब है, यह पूछा तो रंजीत सिंह ने बताया कि उन की पत्नी अपने पास काफी पैसे रखती थी, क्योंकि वह ब्याज पर रुपए देती थी. उस के पास कितने रुपए थे, यह वह नहीं बता सकते. लेकिन अलमारी की तलाशी ली गई तो उस में ढाई लाख रुपए मिले. बैडरूम के अलावा सभी कमरे जस के तस थे.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, गुरजीत कौर की गरदन पर चाकू जैसे किसी हथियार से वार किया गया था. उसी तरह पेट पर भी वार किया गया था. इस के अलावा सिर के पिछले हिस्से पर बिना जख्म की चोट थी. यह चोट किसी भारी चीज की थी. सिर के अगले हिस्से में भी वैसी ही चोट थी. मृतका की मौत अधिक खून बहने की वजह से हुई थी.

मरने से पहले मृतका ने काफी संषर्घ किया था. उस की मुट्ठी में कुछ बाल पाए गए थे. संभवत: वे उसी आदमी के थे, जिस ने उस की हत्या की थी. पुलिस को घटनास्थल से ऐसा कोई सुबूत नहीं मिला था, जिस से हत्यारे तक पहुंचा जा सकता. हत्या के इस मामले में पुलिस कुछ नहीं कर पा रही थी.

पुलिस खुद कुछ नहीं कर पाई तो उस ने मुखबिरों को लगा दिया. किसी मुखबिर ने बताया कि इस मामले में घर के ही किसी आदमी का हाथ हो सकता है. इस के बाद पुलिस को मृतका के बेटे रमन पर संदेह हुआ, क्योंकि वह आवारा किस्म के लोगों के बीच उठताबैठता था. शराब पीने के साथसाथ वह जुआसट्टा भी खेलता था. संदेह के आधार पर पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया.

पुलिस ने रमन को ही नहीं, उस के दोस्तों को भी थाने ला कर सख्ती से पूछताछ की. लेकिन वे सभी बेकसूर पाए गए. पुलिस ने मृतका की मुट्ठी में पाए गए् बालों और रमन तथा उस के दोस्तों के बालों की जांच कराई. मेल न खाने से सभी को छोड़ दिया गया था. इस के बाद पुलिस के पास जांच को आगे बढ़ाने का कोई सबूत नहीं था.

पुलिस अंधेरे में हाथपैर मारती रही. धीरेधीरे पौने 2 साल का समय बीत गया. इस बीच कई थानाप्रभारी आएगए, लेकिन कोई गुरजीत कौर के हत्यारे तक पहुंच नहीं पाए.

रंजीत सिंह सेठी वंचितनगर के अपने मकान में पत्नी गुरजीत कौर और 2 बेटों के साथ रहते थे. उन का छोटा सा परिवार था. वह इतना कमाते थे कि उन्हें किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं थी. बेटे बडे़ हुए तो बड़ा बेटा ट्रांसपोर्ट नगर में इलैक्ट्रिशियन का काम करने लगा और छोटा मोबाइल रिपेयरिंग का.

रंजीत सिंह की पत्नी गुरजीत कौर देखने में दबंग जरूर लगती थीं, लेकिन दिल से वह बड़ी दयालु थीं. जरूरतमंदों की मदद करने में भी वह पीछे नहीं रहती थीं. दबंग वह इसलिए थीं, क्योंकि वह ब्याज पर रुपए उठाती थीं. ब्याज की रकम वसूलने के लिए दबंगई दिखानी ही पड़ती थी.

जनवरी, 2015 में थाना डिवीजन नंबर 8 में थानाप्रभारी के रूप में आए नरेश जोशी की नजर अनसुलझे मामलों में गुरजीत कौर सेठी हत्याकांड की फाइल पर पड़ी तो उन्होंने इसे प्राथमिकता के तौर पर सब से ऊपर रखा. उन्होंने फाइल का अध्ययन किया और घर के हर सदस्य से बारीबारी से पूछताछ की. रिश्तेदारों के अलावा उन्होंने करीबी और मिलने वालों के बारे में विस्तार से पूछताछ कर के उन की एक लिस्ट बनाई और फिर बारीबारी से उन से भी पूछताछ की.

इस पूछताछ में उन की नजर मृतका के धर्मभाई नरेश कुमार डिंपी पर जम गई. हत्या के बाद वह रंजीत के घर कभी नहीं आया था. जबकि उस के पहले धर्मभाई होने के नाते उस का गुरजीत कौर के घर काफी आनाजाना तो था ही, घर में भी काफी दखल था.

बच्चे उसे मामा कहने के साथ उस की काफी इज्जत भी करते थे. वह आटोमोबाइल इलैक्ट्रिशियन का काम करता था. सन 2011 में उस ने सीमा से प्रेमविवाह किया था. उस का एक पैर खराब था, जिस से वह लंगड़ा कर चलती थी. डिंपी और सीमा की शादी में धर्मबहन होने के नाते गुरजीत कौर ने दिल खोल कर खर्च किया था.

नरेश जोशी ने नरेश कुमार डिंपी की तलाश में अपनी पूरी पुलिस टीम और मुखबिरों को लगा दिया था. 2 मार्च, 2015 को मुखबिर की सूचना पर उसे गिरफ्तार कर के उन्होंने गुरजीत कौर हत्याकांड के रहस्य से परदा उठा दिया. पूछताछ में अपना अपराध स्वीकार करते हुए नरेश कुमार डिंपी ने बताया कि गुरजीत कौर ने उस की पत्नी सीमा को अपशब्द कहे थे, जिस से नाराज हो कर उस ने उस की हत्या कर दी थी.

10-11 साल पहले गुरजीत कौर की गाड़ी की लाइट खराब हो गई थी. उसे ठीक कराने के दौरान नरेश ने उस की मुलाकात हुई थी. मोबाइल इलैक्ट्रिशियन होने के नाते नरेश ने ही उस की लाइटें ठीक की थीं. यह मुलाकात जल्दी ही घर तक पहुंच गई थी.

नरेश अकेला था. उस के भाई वगैरह तो थे, लेकिन सब अपनेअपने कामों और परिवारों में मस्त थे. समय के साथ गुरजीत कौर और नरेश के संबंध गहराते गए. रक्षाबंधन पर गुरजीत कौर ने उसे राखी बांध कर अपना धर्मभाई बना लिया था और मरते दम तक उस ने इस रिश्ते को निभाया भी था.

भाई मानने के नाते उस ने समयसमय पर नरेश की आर्थिक मदद भी की थी. सन 2011 में नरेश की मुलाकात सीमा से हुई, जो जल्दी ही प्यार में बदल गई. सीमा खूबसूरत और सभ्य लड़की थी. उस में सिर्फ एक ही कमी थी कि वह लंगड़ा कर चलती थी. नरेश ने सीमा को गुरजीत कौर से मिलवा कर उस से शादी करने की इच्छा व्यक्त की.

 

गुरजीत कौर को भी सीमा पसंद आ गई थी. इसलिए धर्मभाई की खुशी के लिए उस ने सीमा के मातापिता से बात की. उस के मांबाप शादी के लिए तैयार नहीं हुए थे तो नरेश ने गुरजीत कौर की मदद से सीमा से प्रेम विवाह कर लिया था.

शादी के बाद नरेश के घर को गृहस्थी लायक बनाने के लिए गुरजीत कौर ने एक बहन का फर्ज अदा करते हुए नरेश को 25 हजार रुपए दिए थे. नरेश के पास जो भी पैसे थे, घर बसाने में सारे खर्च हो गए थे. उस के पास खर्च के लिए भी पैसे नहीं बचे तो उस ने गुरजीत कौर से 10 हजार रुपए ब्याज पर उधार मांगे.

इस पर गुरजीत कौर ने उसे समझाते हुए कहा, ‘‘देख नरेश, बड़ी बहन होने के नाते मेरा जो फर्ज बनता था, वह मैं ने पूरा कर दिया. अब तुम फिजूलखर्ची बंद कर के कमाओ और पत्नी के साथ आराम से रहो. तुम ब्याज के रुपयों के चक्कर में मत पड़ो, क्योंकि मुझे तुम्हारी कमाई के बारे में पता है. तुम हर महीने मुझे 10 हजार रुपए का ब्याज नहीं दे पाओगे.’’

‘‘दीदी, मुझे रुपए की सख्त जरूरत है. बिना रुपए के मेरी गाड़ी नहीं चल सकती. मैं हर महीने बिना मांगे तुम्हें ब्याज देता रहूंगा. बस तुम मुझे 10 हजार रुपए दे दो, ताकि मैं अपनी गाड़ी चला सकूं.’’

गुरजीत कौर ने नरेश को बहुत समझाया, लेकिन वह नहीं माना. तब गुरजीत कौर ने कहा, ‘‘ठीक है, तुम नहीं मान रहे हो तो मैं तुम्हें रुपए दे दूंगी. लेकिन यह मत सोचना कि ये रुपए बहन के हैं. तुम 10 हजार रुपए का एक हजार रुपए हर महीने ब्याज दे पाओगे.’’

‘‘दीदी, मैं ब्याज के 1 हजार रुपए हर महीने बिना मांगे पहुंचा दूंगा.’’ नरेश कुमार डिंपी ने कहा.

इस के बाद गुरजीत कौर ने उसे 10 हजार रुपए दे दिए. अपने वादे के मुताबिक नरेश हर महीने गुरजीत कौर को ब्याज के एक हजार रुपए देता रहा. उस ने 20 महीने में ब्याज के रूप में गुरजीत कौर को 20 हजार रुपए दे दिए. जबकि मूलधन 10 हजार रुपए जस का तस रहा.

ब्याज भरतेभरते वह परेशान हो गया. लेकिन गुरजीत कौर से उस ने जो वादा किया था, उस के अनुसार वह उस की वजह से कभी कुछ कह नहीं पाया.

दरअसल, नरेश कुमार डिंपी का सोचना था कि धर्मबहन होने के नाते उसे परेशान देख कर गुरजीत कौर खुद ही कह देगी कि अब बस कर भाई, तेरे 10 हजार रुपए पूरे हो गए. लेकिन गुरजीत कौर ने तो उस से पहले ही कह दिया था कि ब्याज के मामले में वह कोई रिश्ता नहीं देखती. करीब 2 साल तक ब्याज देने के बाद नरेश ने ब्याज देना बंद कर दिया.

गुरजीत कौर को यह बात बड़ी नागवार गुजरी. ब्याज की रकम को ले कर दोनों में मनमुटाव हो गया. ब्याज देना तो दूर, नरेश ने गुरजीत के घर आना भी बंद कर दिया. तब गुस्से में एक दिन गुरजीत कौर ब्याज के पैसों के तकाजे के लिए नरेश के घर जा पहुंची. उसे देख कर नरेश और सीमा परेशान हो उठे.

गुरजीत कौर का इस तरह आना उन्हें अच्छा नहीं लगा. शायद इसी वजह से चायपानी को कौन कहे, दोनों ने उसे बैठने तक को नहीं कहा. गुरजीत कौर को पतिपत्नी का यह व्यवहार काफी नगवार गुजरा. उस ने नरेश से अपने ब्याज के रुपयों के बारे में पूछा तो उस ने बड़ी रुखाई से कहा, ‘‘अभी तुम जाओ, कल मैं तुम्हारे रुपए पहुंचा दूंगा.’’

गुरजीत कौर लौट आई. उसे नरेश का व्यवहार काफी बुरा लगा था. अगले दिन दोपहर को नरेश उस के घर आया तो वह घर में अकेली थी. नरेश आ कर सोफे पर बैठ गया. वह कुछ कहता, उस के पहले ही उस के और उस की पत्नी के व्यवहार से नाराज गुरजीत कौर ने कहा, ‘‘उस लंगड़ी की इतनी हिम्मत हो गई कि अपने घर में चायपानी की कौन कहे, उस ने बैठने तक को नहीं कहा.’’

‘‘दीदी, हमारी आपस की बातों में सीमा को मत घसीटो.’’ नरेश ने गुरजीत की बात को बीच में काटते हुए कहा. लेकिन दबंग गुरजीत कौर का पारा तो जैसे सातवें आसमान पर था. उस ने नरेश की बात को अनसुनी करते हुए कहा, ‘‘क्यों न कहूं कुछ उसे. औकात ही क्या है उस लंगड़ी की ’’

गुरजीत कौर के मुंह से बारबार अपनी पत्नी के बारे में अपशब्द सुन कर नरेश को गुस्सा आ गया. उस ने कहा, ‘‘दीदी, तुम कौपी ला कर हिसाब करो, मुझे फालतू की कोई बात नहीं सुननी.’’

गुरजीत कौर ने उठते हुए कहा, ‘‘मुझे भी उस लंगड़ी के बारे में कौन सी बातें करनी हैं ’’

इतना कह कर गुरजीत कौर हिसाब की कौपी लाने बैडरूम की ओर बढ़ी, तभी पत्नी के बारे में गुरजीत कौर द्वारा कहे गए अंतिम शब्दों को सुन कर नरेश को गुस्सा आ गया. उस ने वहीं टेबल पर रखी हथौड़ी उठाई और पीछे से जा कर उस के सिर पर पूरी ताकत से मार दी. गुस्सा और दर्द से गुरजीत कौर तड़प उठी. वह घायल शेरनी की तरह नरेश पर झपट पड़ी.

नरेश भी उसे थप्पड़ और मुक्के मारने लगा. दोनों गुत्थमगुत्था हो गए. गुरजीत कौर के हाथ में बेस बौल का बैट आ गया. वह बैट नरेश के सिर पर मारना चाहती थी, लेकिन नरेश ने बैग छीन कर फेंक दिया और डाइनिंग टेबल पर रखी छुरी उठा कर उस की गरदन पर वार कर दिया.

इस के बाद 2-3 वार उस ने पेट पर किए. इस के बाद उस ने उसे धक्का दे कर गिरा दिया और खुद भाग गया. गुरजीत कौर गंभीर रूप से घायल हो कर फर्श पर पड़ी थी. थोड़ी देर में वह बेहोश हो गई. इसीलिए उस के बेटे रमन और पड़ोसियों ने उसे मरा हुआ समझा था.

नरेश जोशी ने अभियुक्त नरेश का बयान और इकरारनामा दर्ज कर उसे अदालत में पेश कर के 2 दिनों के रिमांड पर लिया. हत्या में प्रयुक्त छुरी और हथौड़ी पहले ही बरामद कर ली गई थी. अन्य काररवाई पूरी कर उसे फिर से अदालत में पेश किया गया, जहां से जेल भेज दिया गया.

नरेश जोशी ने इस मामले की जांच समय से पहले ही पूरी कर के अदालत में आरोप पत्र जमा कर दिया था. गुरजीत कौर की हत्या का यह मुकदमा करीब पौने 2 साल चला. इस मामले का कोई चश्मदीद गवाह था नहीं, सिर्फ तकनीकी सहारा ले कर अभियोजन पक्ष ने अपने पक्ष को मजबूत किया था. उसी के आधार पर सरकारी वकील ने बहस कर के नरेश कुमार डिंपी को हत्यारा साबित किया था.

जज साहब के अदालत में आते ही सन्नाटा पसर गया था. अपनी कुर्सी पर बैठते हुए जज साहब ने एक नजर अदालत कक्ष में मौजूद सभी लोगों पर डाली. उस के बाद गुरजीत कौर सेठी हत्याकांड की फाइल खोल कर बचाव पक्ष के वकील श्री खन्ना की ओर देख कर कहा, ‘‘इस मामले की बहस वगैरह तो पूरी हो ही चुकी है. अब फैसला सुनाना है.’’

चूंकि घटनास्थल से मिली हथौड़ी और चाकू पर मिले फिंगरप्रिंट नरेश के फिंगरप्रिंट से मेल खा गए थे. इस के अलावा मृतका की मुट्ठी में मिले बाल भी नरेश के ही थे. इसलिए अदालत में उसे गुरजीत कौर की हत्या का दोषी मानते हुए सश्रम उम्रकैद की सजा सुनाई.

नरेश ने जो किया था, उसे उस की सजा उम्रकैद के रूप में मिल गई थी, लेकिन अगर वह जरा सा संतोष कर लेता तो आज अपनी पत्नी के साथ आराम से रह रहा होता. उस ने हत्या भी उस की की, जिस के उस के ऊपर तमाम एहसान थे. ऐसे आदमी को हमारे यहां एहसान फरामोश कहते हैं.

नोटबंदी का दंश

विपक्षी दलों के दबाव और राज्यों के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को उम्मीद के मुताबिक न मिलने वाले समर्थन से नरेंद्र मोदी और अरुण जेटली अब नोटबंदी पर कुछ सफाई देने को मजबूर हुए हैं. हालांकि यह सफाई कितनी सच्ची है, इस का पता नहीं है. सूचना के अधिकार के अंतर्गत मांगी जानकारी से आम जनता को अब तक कोई विशेष दस्तावेज नहीं मिले हैं कि यह नोटबंदी लाभदायक होगी या नहीं, या अनिवार्य है या नहीं, इस पर चर्चा हुई थी या रिपोर्टें बनी थीं या नहीं. पर प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री ने संसद में व बाहर कुछकुछ कहा है. अब यह पक्का है कि नोटबंदी का फैसला मनमाना था और इस के लिए कोई लंबीचौड़ी तैयारी नहीं थी.

इस देश में तरहतरह के निरर्थक विश्वास हर व्यक्ति के मन में बचपन से भर दिए जाते हैं कि पीपल के पेड़ के नीचे भूत होता है, फलां मंदिर में तहखाना है जिस में अरबों का खजाना है, नरबलि देने पर लक्ष्मी प्रकट हो जाती है आदि. इस तरह की अतार्किक बातों पर विश्वास करने के चलते ही हर दुकान में मंदिर बने हुए हैं और हर गाड़ी में नीबूमिर्चें लगी हैं कि विद्वान कह रहे हैं तो ऐसा ही होगा. नोटबंदी के बारे में भी यही समझा गया कि लोगों ने कमरों में नोट भर कर रखे हुए हैं और नोट बदल दिए जाएं तो कई लाख करोड़ रुपए अपनेआप ऐसे निकल आएंगे जैसे आग लगने पर चूहे बिलों से भागते हैं. नोटबंदीरूपी आग लगने से चूहे तो दिखे नहीं, पर अर्थव्यवस्था का एक हिस्सा स्वाहा हो गया और जनता को अब अपना घर संभालने में कई महीने लगेंगे.

अफसोस इस बात का है कि सड़कछाप स्वामियों, ओझाओं, पंडों की तरह सरकार अभी भी अपनी गलती मान कर आमजन को राहत देने का कोई काम नहीं कर रही. बस, अच्छे दिन आने वाले हैं, नोटबंदी का लाभ होने वाला है, कह कर भरमाया जा रहा है. नोटबंदी एक आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक थी पर निरीह, बेबस, निर्दोष और निहत्थी जनता पर. अगर इस से मनचाहा लाभ नहीं मिला है और अर्थव्यवस्था मजबूत होने के बजाय लड़खड़ाने लगी है तो गलती को सुधारना चाहिए, न कि इस गलती को छिपाने के लिए एक और बड़ी गलती करनी चाहिए.

अब सरकार उन लाखों खातों को खंगालने में लगी है जिन में अचानक पैसा जमा कराया गया है. जब तक सरकारी हाथ वहां पहुंचेंगे, पैसा निकल चुकेगा और सरकार के हाथ सिर्फ कोरे अकाउंट लगेंगे. इन खातों पर लेनदेन का प्रतिबंध भी नहीं लग सकता क्योंकि बहुतों को सही सिद्ध किया जा सकता है. नोटबंदी के पहले हर व्यक्ति घर में लाखों रुपए नकद रख सकता था अगर उस ने कर दे दिया हो या उस की आय कररहित हो. अब इन खातों के पीछे पड़ कर सरकार लकीर को सांप मान कर पीटती रहे और भक्तों से ताली बजवाती रहे, तो बात दूसरी.

इश्क में उजाड़ा परिवार

8 जनवरी, 2017 को दोपहर बाद की बात है. 34 साल का राहुल माटा पूर्वी दिल्ली के मधु विहार स्थित अजंता अपार्टमेंट के गेट पर पहुंचा. इसी अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर-32 में उस के मातापिता रहते थे. लेकिन राहुल की गलत आदतों की वजह से उस के पिता रविंद्र माटा ने उसे घर से बेदखल कर दिया था. इस के बाद उस के सोसाइटी में घुसने तक पर रोक लगा दी गई थी. जाहिर है, राहुल की कोई न कोई बात उस सोसाइटी के पदाधिकारियों को बुरी लगी होगी, तभी तो गेट पर तैनात गार्डों से भी कह दिया गया था कि उसे किसी भी सूरत में सोसाइटी के अंदर न आने दिया जाए.

उस दिन राहुल अपने फ्लैट पर जाने के लिए सोसाइटी के गेट पर पहुंचा तो वहां मौजूद सुरक्षागार्ड नंदन सहाय ने उसे रोक दिया. गार्ड ने कहा कि सोसाइटी के पदाधिकारियों के आदेश पर ही वह यह कर रहा है. एक सुरक्षागार्ड की राहुल के सामने भला क्या औकात थी. गार्ड द्वारा रोकने की बात राहुल को बुरी लगी. वह गार्ड को डांटते हुए आगे बढ़ा तो गार्ड ने इस का विरोध किया. क्योंकि उसे तो अपनी ड्यूटी करनी थी. राहुल को गार्ड की यह जुर्रत नागवार लगी और वह गार्ड से झगड़ने लगा तथा उस की पिटाई कर दी.

शोरशराबा सुन कर सोसाइटी के कई लोग अपनेअपने फ्लैट से निकल आए. उन लोगों ने भी सुरक्षागार्ड का पक्ष लिया, पर राहुल सभी की बात अनसुनी कर के जबरदस्ती आगे बढ़ गया. तब तक राहुल के 63 वर्षीय पिता रविंद्र माटा भी फ्लैट से बाहर निकल आए थे. बेटे का गार्ड से झगड़ना उन्हें अच्छा नहीं लगा. उस से बात करने के लिए वह उस की तरफ बढ़े. चूंकि वह उसे संपत्ति से पहले ही बेदखल कर चुके थे, इसलिए राहुल ने उन से झगड़ना शुरू कर दिया.

उसी दौरान राहुल ने अपने साथ लाए नारियल काटने वाले चापड़ से पिता पर हमला कर दिया. वहां जितने भी लोग मौजूद थे, उन में से किसी की भी इतनी हिम्मत नहीं हो सकी कि वह रविंद्र माटा को बचा सकते. बल्कि वह अपनी जान बचाने के लिए अपने फ्लैटों में चले गए और दरवाजे बंद कर लिए. राहुल पिता पर करीब ढाई मिनट तक चापड़ से वार करता रहा और वह जमीन पर गिर कर तड़पते रहे. इस दौरान किसी ने पुलिस के 100 नंबर पर फोन कर के वारदात की जानकारी देने का साहस जरूर कर दिया था.

राहुल को जब लगा कि उस के पिता मर चुके हैं तो वह खून से सना चापड़ हाथ में थामे अपने फ्लैट पर पहुंचा. पर उस की मां विभा माटा ने पहले ही दरवाजा बंद कर लिया था. राहुल ने मां को आवाज देते हुए कई बार दरवाजा खटखटाया, पर विभा ने दरवाजा नहीं खोला. राहुल को अब इस बात का डर लगा कि कहीं सोसाइटी के लोग उसे पकड़ न लें. इसलिए खुद को बचाने के लिए वह किसी दूसरे फ्लैट में जा रहा था, तभी रास्ते में रेनू बंसल नाम की महिला मिलीं, जो पास के फ्लैट में ही रहती थीं. राहुल ने चापड़ से उन्हें भी घायल कर दिया. रेनू को घायल करने के बाद वह तीसरी मंजिल स्थित फ्लैट नंबर 35 में घुस गया.

यह फ्लैट फिल्म अभिनेता वी.के. शर्मा का था. उस समय वह अपने बेटे कशिश के साथ मौजूद थे. राहुल के हाथ में खून से सना चापड़ देख कर वह भी डर गए. राहुल ने दोनों बापबेटों को धक्का दे कर कहा, ‘‘मेरे पास मत आना, वरना मार डालूंगा.’’

वी.के. शर्मा ने अपनी फिल्मी लाइफ में फिल्मी गुंडों को देखा था पर अब तो राहुल उन के सामने सचमुच का गुंडा था. उस से कोई पंगा लेने के बजाए उन्होंने खुद को बचाना जरूरी समझा और बेटे के साथ खुद को एक कमरे में बंद कर लिया. राहुल उन के किचन में चला गया और अंदर से किचन का दरवाजा बंद कर लिया. तब तक मधु विहार थाने की पुलिस अजंता अपार्टमेंट पहुंच चुकी थी. गेट से कुछ कदम दूर रविंद्र माटा की लहूलुहान लाश पड़ी थी. सोसाइटी के लोगों ने बताया कि इन की हत्या इन के बेटे राहुल ने की है जो फ्लैट नंबर 35 में छिपा है.

पुलिस टीम फ्लैट नंबर 35 में पहुंची. उस फ्लैट का किचन और एक कमरा अंदर से बंद था. पुलिस ने दोनों जगह दस्तक दी तो पुलिस का नाम सुनते ही अभिनेता वी.के. शर्मा ने दरवाजा खोल दिया. सामने पुलिस देख कर उन्होंने राहत की सांस ली. उन्होंने बताया कि राहुल उन के किचन में है.

पुलिस ने किचन का दरवाजा खटाखटा कर राहुल से दरवाजा खोलने को कहा. पर राहुल ने दरवाजा नहीं खोला. उसे डर था कि पुलिस उसे गिरफ्तार कर लेगी. इसलिए वह अपने बचाव का रास्ता खोजने लगा. पर उसे ऐसा कोई रास्ता नहीं मिला. जब काफी देर तक राहुल ने दरवाजा नहीं खोला तो पुलिस ने दरवाजा तोड़ना शुरू कर दिया.

तब राहुल ने रसोई गैस (पीएनजी) खोल कर पुलिस को धमकी दी. इतना ही नहीं उस ने आग भी लगा दी. रसोई गैस की आग ने पूरे किचन को चपेट में ले लिया. पुलिस ने दरवाजा तोड़ कर किचन की आग की लपटों में घुस कर राहुल माटा को बाहर निकाल लिया. उस समय तक राहुल काफी जल गया था. राहुल को सुरक्षित निकालने में 10 पुलिसकर्मी भी झुलस गए. झुलसे हुए पुलिसकर्मियों में इंसपेक्टर मनीष जोशी, एसआई संजय, निशाकर, अंशुल, मनीष, एएसआई सुनील कुमार, चंद्रघोष, हैडकांस्टेबल रामकुमार, कांस्टेबल सुधीर, गजराज शामिल थे. खुद के घायल होने के बावजूद भी पुलिस राहुल को मैक्स अस्पताल ले गई.

तब तक आग पूरे फ्लैट में फैल चुकी थी. फायर ब्रिगेड की 10 गाडि़यां मौके पर पहुंच गईं. घंटे भर की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका. पर आग में अभिनेता वी.के. शर्मा के फ्लैट का सारा सामान स्वाहा हो चुका था. उन्हें उत्कृष्ट अदाकारी के लिए संगीत नाटक अकादमी से मिला पुरस्कार भी स्वाहा हो गया था.

बचाव के दौरान पुलिसकर्मियों के झुलसने की बात सुन कर डीसीपी ओमवीर सिंह बिश्नोई भी अस्पताल पहुंच गए. आरोपी राहुल माटा और 4 पुलिसकर्मियों की हालत गंभीर होने पर उन्हें सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया गया. राहुल 40 प्रतिशत जल चुका था. घायल पुलिसकर्मियों को देखने के लिए पुलिस आयुक्त आलोक वर्मा भी अस्पताल पहुंचे.

राहुल ने रेनू बंसल नाम की जिस महिला को घायल किया था, उसे भी 26 टांके लगे थे. राहुल की हालत सामान्य होने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने उस से विस्तार से पूछताछ की तो चौंकाने वाली कहानी सामने आई—

राहुल माटा एक धनाढ्य परिवार से था. उस के पिता रविंद्र माटा का कनाडा में अपना बिजनैस था. करीब 20 साल पहले वह कनाडा चले गए थे. परिवार में पत्नी विभा माटा के अलावा 2 बेटे ही थे. एक राहुल माटा और दूसरा मुकुल माटा. दोनों बच्चों की प्रारंभिक पढ़ाई दिल्ली में हुई थी. विभा दिल्ली में सरकारी नौकरी करती थीं. स्कूली शिक्षा पूरी  करने के बाद राहुल ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक किया. आगे की पढ़ाई के लिए पिता ने उसे अमेरिका भेज दिया. सन 1995 से 1999 तक उस ने अमेरिका में पढ़ाई की.

इस के बाद सन 2000 में उस ने अमेरिका की ही एक बैंक में नौकरी कर ली. 8 सालों तक वहां काम करने के बाद वह पिता के पास कनाडा चला गया. पिता को कनाडा की नागरिकता मिली हुई थी. कनाडा में उस ने मर्चेंट नेवी में नौकरी की पर अनुशासनहीनता के आरोप में उसे सन 2011 में नौकरी से निकाल दिया गया.  कनाडा की एक लड़की से छेड़छाड़ के आरोप में राहुल को जेल जाना पड़ा, जिस में उसे 2 साल की सजा भी हुई. इस आरोप की वजह से राहुल को कनाडा से डिपोर्ट कर भारत भेज दिया गया.

बाद में सन 2014 में उस का मर्चेंट नेवी का लाइसैंस भी निरस्त हो गया. तब मर्चेंट नेवी में नौकरी करने का उस का रास्ता भी बंद हो गया.

रविंद्र माटा ने अपने छोटे बेटे मुकुल माटा को भी कनाडा बुला लिया था. उस की वहां एक मोबाइल फोन कंपनी में नौकरी लग गई थी. दोनों बापबेटे कनाडा में रहते थे, जबकि राहुल अपनी मां विभा के साथ दिल्ली के अजंता अपार्टमेंट के फ्लैट में रहता था. अब से करीब 2 साल पहले विभा भी रिटायर हो गई थीं. अजंता अपार्टमेंट का यह फ्लैट रविंद्र ने सन 1994 में खरीदा था.

दिल्ली में कोई कामधाम करने के बजाय राहुल दिन भर दोस्तों के साथ घूमता रहता था. खर्च के लिए पैसे मां से ले जाता था. विभा जब उसे कोई काम करने को कहतीं तो वह काम न मिलने का बहाना बना देता. इस के बावजूद भी मां उसे समझाती रहतीं. पर वह उन की सलाह को अनसुना कर देता था.

जिस अपराध की वजह से राहुल को कनाडा छोड़ना पड़ा था, उसी तरह का आरोप उस पर सोसाइटी की एक महिला ने भी लगाया था. राहुल पर बारबार इस तरह के आरोप लगने के बाद भी मांबाप ने उस की शादी नहीं की. इस का नतीजा यह हुआ कि राहुल 2 बच्चों की मां निशा के चक्कर में पड़ गया. निशा के 15 और 16 साल के 2 बच्चे थे. वह एक स्कूल में टीचर थी. राहुल निशा के साथ लिवइन रिलेशन में रहने लगा. एक दिन राहुल ने यह बात मां को बताई तो उन्हें यह बात बड़ी नागवार गुजरी. उन्होंने उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं माना.

इतना ही नहीं, वह निशा को मां के पास फ्लैट पर भी लाने लगा. विभा ऐतराज जताती रहीं और उसे फ्लैट पर लाने के लिए मना करती रहीं. मां की आपत्ति पर राहुल ने कहा कि उस ने उस के साथ मंदिर में शादी कर ली है. यह सुन कर विभा के पैरों तले से जमीन खिसक गई. उन्होंने यह जानकारी कनाडा में रह रहे पति को दे दी, साथ ही यह भी कह दिया कि मना करने के बावजूद राहुल जबरदस्ती निशा को फ्लैट पर लाता है.

तब वीडियो कौन्फ्रैंसिंग कर रविंद्र ने भी बेटे राहुल को समझाने की कोशिश की, लेकिन उस पर तो प्यार का फितूर चढ़ा था. वह भी अपनी जिद पर अड़ा था. राहुल की जिद से रविंद्र माटा और उन की पत्नी को इस बात की आशंका होने लगी कि कहीं बिना शादी की हुई यह महिला और उस के बच्चे उन के फ्लैट पर कब्जा न कर लें.

राहुल की हठधर्मिता से विभा का उस के प्रति व्यवहार भी बदल गया. हर महीने वह उसे खर्च के जो पैसे देती थीं, उन्होंने देने बंद कर दिए. तब राहुल उन से झगड़ता और उन की पिटाई तक कर देता. कभीकभी तो मांबेटे के बीच झगड़ा इतना बढ़ जाता कि पड़ोसियों को बीचबचाव के लिए आना पड़ता.

उस के हिंसक मिजाज से सोसाइटी के लोग भी परेशान थे. एकदो बार पड़ोसियों ने हस्तक्षेप किया तो राहुल ने उन के साथ भी बदतमीजी की. विभा के परिवार में कलह लगातार बढ़ती जा रही थी. फोन कर के वह कनाडा में बैठे पति को सब बताती रहती थीं. बेटे के आचरण से रविंद्र माटा भी परेशान हो गए.

12 अक्तूबर, 2016 को वह कनाडा से दिल्ली आ गए. उन्होंने एक बार फिर बेटे राहुल को समझाया. उन्हें लगा कि राहुल सुधरने वाला नहीं है तो उन्होंने उसे अपनी चलअचल संपत्ति से पूरी तरह से बेदखल करने की चेतावनी दे दी और कह दिया कि वह आइंदा उन के फ्लैट पर न आए.

सोसाइटी वाले तो राहुल के व्यवहार और उस के शोरशराबा करने से पहले परेशान थे. ऊपर से रविंद्र माटा ने सोसाइटी के सचिव जे.एल. गुप्ता से कह दिया कि राहुल को उन के फ्लैट में आने की अनुमति न दी जाए. इस के बाद अजंता रेजीडैंशियल सोसाइटी के सचिव जे.एल. गुप्ता ने गेट पर तैनात सुरक्षागार्डों को राहुल की एंट्री पर बैन लगाने की हिदायत दे दी. बेटे से खतरे को देखते हुए रविंद्र माटा ने अपने फ्लैट की एंट्री और बालकनी में लोहे के ग्रिल और दरवाजे भी लगवा दिए. बेटे के तेवर देखते हुए उन्होंने इस की शिकायत थाने में भी कर दी थी. सीनियर सिटिजन सेफ्टी के लिहाज से पुलिस ने उन्हें कुछ सेफ्टी टिप्स दिए, साथ ही पुलिस ने पड़ोसियों से भी उन का ध्यान रखने को कह दिया. बहरहाल रविंद्र माटा और विभा अब सतर्क रहने लगे. हालात सामान्य होने पर रविंद्र माटा का कनाडा लौटने का कार्यक्रम निश्चित था.

घर से बेदखल होने के बाद राहुल निशा के साथ पूर्वी दिल्ली के पांडव नगर में रहने लगा था. अब उसे अपने मांबाप दुश्मन लगने लगे. इतना ही नहीं, उस ने दोनों की हत्या करने की ठान ली. इस के लिए उस ने बाजार से एक चापड़ खरीद लिया. चापड़ अपने साथ ले कर वह 8 जनवरी को दोपहर के समय अजंता अपार्टमेंट पहुंच गया. वह जैसे ही गेट पर पहुंचा, वहां तैनात सुरक्षागार्ड नंदन सहाय ने उसे रोक लिया और बता दिया कि उस के अपार्टमेंट में घुसने पर बैन लगा है.

सुरक्षागार्ड के इतना कहते ही राहुल उस से उलझ गया और अपना रौब दिखाने लगा. गार्ड तो अपनी ड्यूटी कर रहा था, पर राहुल नहीं माना. सुरक्षागार्ड की पिटाई करने के बाद राहुल अपने फ्लैट की तरफ जाने लगा. इस के बाद शोर सुन कर बाहर आए पिता को उस ने चापड़ से वार कर मौत के घाट उतार दिया.

पिता की हत्या करने के बाद वह मां की हत्या करने के लिए फ्लैट पर गया. फ्लैट का दरवाजा बंद होने पर उस ने दूसरी बड़ी वारदात को अंजाम दे दिया.

रेनू बंसल को घायल करने के बाद वह फिल्म अभिनेता वी.के. शर्मा के फ्लैट में घुस गया और खुद को बचाने के चक्कर में उन के घर को आग के हवाले कर दिया. वी.के. शर्मा पिछले 15 सालों से इस फ्लैट में रह रहे थे.

राहुल माटा से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उसे 9 जनवरी, 2017 को कड़कड़डूमा अदालत में महानगर दंडाधिकारी के समक्ष पेश किया. राहुल ने जज को बताया कि उस ने अपने पिता की हत्या नहीं की और वी.के. शर्मा के फ्लैट में आग उस ने नहीं, बल्कि पुलिस ने लगाई थी. बहरहाल पुलिस ने कोर्ट के आदेश के बाद उसे जेल भेज दिया. मामले की जांच इंसपेक्टर अजीत सिंह कर रहे हैं.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित, निशा परिवर्तित नाम है.

प्रेमिका से छुटकारा

माधुरी जिस उम्र में थी, वह नएनए सपनों, उमंगों, उम्मीदों और उत्साह से लबरेज होती है. उस ने भी भविष्य के लिए ढेरों ख्वाब बुन रखे थे. बीकौम की छात्रा माधुरी सुंदर और हंसमुख स्वभाव की थी. पढ़लिख कर वह एक मुकाम हासिल करना चाहती थी. लेकिन यह ऐसी उम्र है, जब कोई करिश्माई व्यक्ति आकर्षित कर जाता है. फिर तो उसी के लिए दिल धड़कने लगता है. माधुरी के साथ भी ऐसा हुआ था. वह आदमी कौन था, यह सिर्फ माधुरी ही जानती थी, जिसे वह जाहिर भी नहीं होने देना चाहती थी. वह परिवार में सभी की प्रिय थी. मातापिता को अपने बच्चों से ढेरों उम्मीदें होती हैं. माधुरी को भी मांबाप की ओर से पढ़नेलिखने और घूमनेफिरने की इसीलिए आजादी मिली थी कि वह अपना भविष्य संवार सके.

माधुरी दिल्ली से लगे गौतमबुद्ध नगर जिले के रबूपुरा थाना के गांव मोहम्मदपुर जादौन के रहने वाले मुनेश राजपूत की बेटी थी. वह एक समृद्ध किसान थे. वैसे तो यह परिवार हर तरह से खुश था, लेकिन नवंबर, 2016 में एक दिन माधुरी अचानक लापता हो गई तो पूरा परिवार परेशान हो उठा. वह घर नहीं पहुंची तो उसे ढूंढा जाने लगा. काफी प्रयास के बाद भी जब माधुरी का कुछ पता नहीं चल सका तो परिवार के सभी लोग परेशान हो उठे. चूंकि मामला जवान बेटी का था, इसलिए मुनेश ने थाने जा कर बेटी की गुमशुदगी दर्ज करा दी. पुलिस जांच में पता चला कि माधुरी अपने पिता के मोबाइल से किसी को फोन किया करती थी. पुलिस और घर वालों ने उस नंबर के बारे में पता किया तो वह नंबर नजदीक के ही गांव के रहने वाले राहुल जाट का निकला. 27 नवंबर, 2016 को राहुल को खोज निकाला गया.

राहुल के साथ माधुरी भी थी. दोनों ने जो कुछ बताया, उसे सुन कर घर वाले दंग रह गए. दोनों एकदूसरे से प्रेम करते थे. यही नहीं, उन्होंने आर्यसमाज मंदिर में विवाह भी कर लिया था. राहुल ने अपने 3 दोस्तों की मदद से माधुरी को भगाया था. मामला 2 अलगअलग जातियों का था. माधुरी के घर वाले इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थे. वे बेटी द्वारा उठाए गए इस कदम से काफी आहत थे. बात मानमर्यादा और इज्जत की थी, इसलिए दोनों पक्षों के बीच आस्तीनें चढ़ गईं. इस मुद्दे पर पंचायत बैठी, जिस ने फैसला लिया कि दोनों ही अब एकदूसरे से कोई वास्ता नहीं रखेंगे. घर वालों ने माधुरी को डांटाफटकारा और जमाने की ऊंचनीच समझा कर इज्जत का वास्ता दिया. इस पर उस ने वादा किया कि अब वह कोई ऐसा कदम नहीं नहीं उठाएगी, जिस से उन की इज्जत पर आंच आए.

किस के दिमाग में कब क्या चल रहा है, यह कोई दूसरा नहीं जान सकता. माधुरी बिलकुल सामान्य जिंदगी जी रही थी. इस घटना को घटे अभी एक महीना भी नहीं बीता था कि 23 दिसंबर, 2016 की दोपहर माधुरी अचानक फिर लापता हो गई. उस के इस तरह अचानक घर से लापता होने से घर वाले परेशान हो उठे. उन्होंने अपने स्तर से उस की खोजबीन की. लेकिन जब वह शाम तक नहीं मिली तो उन का सीधा शक उस के प्रेमी राहुल पर गया.

माधुरी के घर वालों ने थाने जा कर राहुल और उस के दोस्तों के खिलाफ नामजद तहरीर दे दी. राहुल का चूंकि माधुरी से प्रेमप्रसंग चल रहा था और एक बार वह उसे ले कर भाग चुका था, इसलिए कोई भी होता, उसी पर शक करता. गुस्सा इस बात का था कि समझाने के बावजूद उस ने वादाखिलाफी की थी. इस बात से माधुरी के घर वाले ही नहीं, गांव वाले भी नाराज थे. शायद इसीलिए सभी माधुरी को जल्द से जल्द ढूंढ कर लाने को पुलिस से कहने लगे थे. पुलिस ने माधुरी के घर वालों से नंबर ले कर उस की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि अभी भी माधुरी की राहुल से बातचीत होती रहती थी. गायब होने वाले दिन भी उस की राहुल से बात हुई थी.

पुलिस ने राहुल और उस के दोस्तों को थाने ला कर पूछताछ की. लेकिन इन लोगों ने माधुरी के गायब होने में अपना हाथ होने से साफ मना कर दिया. इस पूछताछ में पुलिस को भी लगा कि इन लोगों का माधुरी के गायब होने में हाथ नहीं है तो उस ने उन्हें छोड़ दिया. कई दिन बीत गए, माधुरी का कुछ पता नहीं चला. घर वाले राहुल और उस के साथियों के छोड़े जाने से खिन्न थे. मुनेश के पड़ोस में ही रहता था हेमंत कौशिक उर्फ टिंकू, जो शादीशुदा ही नहीं, 2 बच्चों का बाप था. वह कंप्यूटर और मोबाइल रिपेयरिंग का काम करता था. पड़ोसी होने के नाते वह माधुरी के घर वालों की हर तरह से मदद कर रहा था.

हेमंत ने मुनेश को सलाह दी कि इस मामले में थाना पुलिस राहुल के खिलाफ काररवाई नहीं कर रही है तो चल कर पुलिस के बड़े अधिकारियों से मिला जाए. उस की बात घर वालों को ठीक लगी तो गांव के कुछ लोगों को साथ ले कर मुनेश एसएसपी औफिस जा पहुंचे. अपनी बात मनवाने के लिए इन लोगों ने धरनाप्रदर्शन भी किया. इस का नतीजा यह निकला कि एसएसपी धर्मेंद्र सिंह ने इस मामले में एसपी (देहात) सुजाता सिंह को काररवाई करने के निर्देश दिए. मामला तूल पकड़ता जा रहा था, इसलिए सुजाता सिंह ने थानाप्रभारी शाबेज खान को माधुरी की गुमशुदगी वाले मामले की गुत्थी सुलझाने को तो कहा ही, खुद भी इस मामले पर नजर रख रही थीं.

पुलिस एक बार फिर राहुल को पकड़ कर थाने ले आई. एसपी सुजाता सिंह ने खुद उस से पूछताछ की. राहुल का कहना था कि पंचायत के बाद वह माधुरी से कभी नहीं मिला तो पुलिस ने उस के ही नहीं, उस के दोस्तों के भी मोबाइल फोनों की लोकेशन निकलवाई. इस से पता चला कि राहुल ही नहीं, उस के दोस्त भी माधुरी के लापता होने वाले दिन घर पर ही थे. कई लोग इस बात की तसदीक भी कर रहे थे. जांच में यह बात सच पाई गई, इसलिए पुलिस उलझ कर रह गई. जबकि माधुरी के घर वाले यह बात मानने को तैयार नहीं थे. लेकिन अब तक राहुल के पक्ष में भी कुछ लोग उतर आए थे, इसलिए पुलिस को विरोध और आरोपों का सामना करना पड़ रहा था. कभीकभी परेशान हो कर पुलिस फरजी खुलासा करते हुए निर्दोषों को जेल भेज देती है. लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ. एसपी सुजाता सिंह ने तय कर रखा था कि वह जो भी काररवाई करेंगी, सबूतों के आधार पर ही करेंगी. माधुरी के घर वाले चाहते थे कि राहुल और उस के साथियों को जेल भेजा जाए, लेकिन पुलिस के पास उन के खिलाफ एक भी सबूत नहीं था.

बात माधुरी की बरामदगी की भी थी. इस के लिए राहुल के पास कोई सुराग नहीं था. माधुरी कहां चली गई थी, इस बात को कोई नहीं जानता था. उस का प्रेम प्रसंग राहुल से था और राहुल को ही उस की खबर नहीं थी. पुलिस के लिए यह मामला काफी पेचीदा हो गया था. इस बीच पुलिस को पता चला कि माधुरी चोरीछिपे मोबाइल फोन इस्तेमाल करती थी. पुलिस को लगा कि इस से कोई सुराग मिल सकता है. लेकिन घर वालों को माधुरी का मोबाइल नंबर पता नहीं था. पुलिस ने गांव के टावर से जितने भी मोबाइल नंबर इस्तेमाल हो रहे थे, सभी का डाटा निकलवाया. यह संख्या 3 हजार से अधिक थी, लेकिन पुलिस को उम्मीद थी कि इस से कोई न कोई सुराग जरूर मिल जाएगा.

पुलिस ने मोबाइल नंबरों को खंगाला तो उन में 2 मोबाइल नंबर एक ही सीरीज के मिले. उन नंबरों को संदिग्ध मान कर जांच शुरू की गई. इस में खास बात यह थी कि माधुरी के लापता होने के 2 दिनों बाद दोनों नंबर बंद कर दिए गए थे. पुलिस ने उन नंबरों की आईडी निकलवाई तो वे जनपद पीलीभीत के एक ही पते पर लिए गए थे. सिमकार्ड लेते वक्त जो पहचानपत्र दिया गया था, वह भी फरजी था. पुलिस ने आईएमईआई नंबर के जरिए मोबाइल का पता किया तो पता चला कि जिस मोबाइल में दोनों सिम में से एक सिम का उपयोग हो रहा था, उसी टावर के अंतर्गत उस में दूसरा नंबर चल रहा था. पुलिस ने उस नंबर के बारे में पता किया तो वह माधुरी के पड़ोसी हेमंत का निकला. इस से हेमंत शक के दायरे में आ गया. 7 जनवरी, 2017 को थानाप्रभारी शाबेज खान एसआई श्रीपाल सिंह, नरेश कुमार, कांस्टेबल जकी अहमद और जितेंद्र को साथ ले कर गांव पहुंचे और पूछताछ के लिए हेमंत को हिरासत में ले लिया.

पूछताछ में हेमंत शातिर खिलाड़ी निकला. उस के न केवल माधुरी से प्रेमसंबंध थे, बल्कि उसी ने सुनियोजित तरीके से माधुरी की हत्या कर के उस की लाश को ठिकाने लगा दिया था. आपराधिक घटनाओं पर आधारित टीवी सीरियलों और फिल्मों से शातिर सोच पैदा कर के उस ने पूरी योजना बनाई थी. उस के प्रेम में अंधी हो चुकी माधुरी उस के इशारों पर नाचने वाली कठपुतली बन चुकी थी तो राहुल मोहरा. माधुरी के लिए हेमंत ही वह आकर्षक करिश्माई आदमी था, जिस का राज माधुरी ने अपने सीने में दफन कर रखा था. हेमंत की निशानदेही पर पुलिस ने गांव के ही एक खेत से माधुरी के शव को बरामद कर लिया था. पुलिस ने शव का पंचनामा भर कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया, साथ ही हेमंत के खिलाफ अपराध संख्या 2/2017 पर धारा 364, 302 और 201 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया था.

पुलिस ने हेमंत से विस्तार से पूछताछ की तो एक ऐसे शातिर दिमाग इंसान की कहानी निकल कर सामने आई, जिस ने एक लड़की को प्यार के जाल में फांस कर पहले उस की भावनाओं और विश्वास को छला, उस के बाद उसे मौत की चौखट पर पहुंचा दिया. पड़ोसी होने के नाते माधुरी और हेमंत के घर वालों का एकदूसरे के यहां आनाजाना था. करीब 10 महीने पहले हेमंत ने माधुरी पर डोरे डालने शुरू किए. माधुरी उम्र के नाजुक मोड़ पर थी. उस ने हेमंत का झुकाव अपनी ओर देखा तो वह भी उस की ओर आकर्षित हो गई. बहुत जल्दी दोनों के प्रेमसंबंध बन गए. हेमंत माधुरी को केवल मौजमस्ती का साधन बनाना चाहता था, लेकिन माधुरी उस से दिल से प्यार कर बैठी.

दिल के हाथों मजबूर हो कर माधुरी राह भटक गई. उन के रिश्ते की कोई मंजिल नहीं थी. बात एक ही गांव, पड़ोस और अलगअलग जाति की थी, इस से भी बड़ी बात यह थी कि हेमंत शादीशुदा ही नहीं, 2 बच्चों का बाप था. माधुरी इन बातों को भूल गई और उस के साथ जीनेमरने की कसमें खा लीं. हेमंत शातिर था. वह आपराधिक टीवी सीरियलों से भी खासा प्रभावित था. हेमंत किसी खतरे में नहीं पड़ना चाहता था, इसलिए उस ने फरजी आईडी पर 2 मोबाइल नंबर लिए. एक नंबर उस ने अपने पास रखा और दूसरा माधुरी को देते हुए कहा, ‘‘माधुरी, इस नंबर से मेरे सिवा किसी और से बात मत करना.’’

‘‘मैं भला किसी और से बातें क्यों करूंगी. वैसे भी मेरे लिए अब तुम ही सब कुछ हो.’’ माधुरी ने कहा ही नहीं, किया भी ऐसा ही. माधुरी फोन को छिपा कर रखती थी. उस से वह केवल हेमंत से ही बातें करती थी या एसएमएस करती थी. दोनों का संबंध इतना गुप्त था कि किसी को कानोंकान खबर नहीं थी. दोनों चूंकि पड़ोसी थे, इसलिए उन के संबंधों पर किसी ने कभी शक भी नहीं किया. इस मामले में हेमंत काफी सतर्क रहता था. हेमंत गांव से बाहर कंप्यूटर और मोबाइल रिपेयरिंग का काम करता था. वह सुबह घर से निकलता था तो शाम को ही वापस आता था. इस दौरान वह मोबाइल से माधुरी से जम कर बातें करता था और उस के प्यार के सपनों को पंख लगाता था. आखिर एक दिन माधुरी ने उस से कह ही दिया कि वह हमेशा के लिए उस की होना चाहती है. हेमंत ने भी ऐसा करने का वादा कर लिया. उस ने सोचा कि वक्त आने पर वह माधुरी से पीछा छुड़ा लेगा, लेकिन माधुरी की सोच ऐसी नहीं थी. वह उसे अपना सब कुछ मान चुकी थी, इसलिए प्यार की बातों के दौरान एक दिन उस ने हेमंत से पूछ लिया, ‘‘तुम कभी मुझे धोखा तो नहीं दोगे ’’

‘‘मैं ने तुम्हें धोखा देने के लिए प्यार नहीं किया माधुरी. मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकता हूं.’’

‘‘हम शादी कब करेंगे ’’

‘‘तुम जानती हो माधुरी कि यह सब इतना आसान नहीं है. इस के लिए हमें इंतजार करना होगा.’’ हेमंत ने उसे यह कह कर टाल तो दिया, लेकिन वह यह सोच कर चिंतित जरूर हो उठा कि माधुरी उस की पत्नी बनने का पक्का इरादा बना चुकी है.

इस के बाद आए दिन माधुरी हेमंत से शादी की बातें करने लगी. एक दिन बातोंबातों में माधुरी ने उस से कहा कि राहुल उसे पसंद करता है तो यह सुन कर वह खुश हो गया, क्योंकि इस से उसे माधुरी से छुटकारा पाने की राह सूझ गई. उस ने कहा, ‘‘माधुरी, तुम राहुल से भी बातें कर लिया करो, अब वही हमारी शादी कराएगा.’’

‘‘मतलब ’’ माधुरी ने पूछा.

‘‘यह मैं तुम्हें समय आने पर बताऊंगा. मैं जैसा कह रहा हूं, तुम वैसा ही करती रहो. उस के बाद हमें शादी से कोई नहीं रोक सकेगा. तुम अपने पिता के नंबर से उस से बातें किया करो.’’ माधुरी ने ऐसा ही किया. वह पिता के नंबर से राहुल को फोन करने लगी. दरअसल राहुल सीधासादा लड़का था. उसे पता नहीं था कि वह मोहरा बन रहा है. हेमंत के कहने पर माधुरी ने राहुल के सामने शादी का प्रस्ताव रखा. दोनों ही जानते थे कि घर वाले उन की शादी के लिए कभी तैयार नहीं होंगे. इस का एक ही उपाय था कि भाग कर शादी की जाए. माधुरी ने अधिक दबाव डाला तो राहुल इस के लिए तैयार हो गया. हेमंत ने माधुरी को समझाया, ‘‘तुम्हें राहुल से शादी भी करनी है और पकड़ी भी जाना है. इस से सब को विश्वास हो जाएगा कि राहुल तुम्हारा प्रेमी है. फिर एक दिन हम दोनों घर से भाग कर शादी कर लेंगे, जिस का सारा शक राहुल पर जाएगा. उस के जेल जाने पर मामला अपने आप शांत हो जाएगा.’’

हेमंत दिमाग से माधुरी के साथ खेल रहा था, जबकि वह दिल की खुशी के चक्कर में अच्छाबुरा सोचे बिना डगमगा गई. वह उसे अपने इशारों पर नचा रहा था. माधुरी उस की हर बात मानती थी और हद दरजे का विश्वास करती थी. हेमंत के कहे अनुसार, माधुरी राहुल के साथ भागी भी और शादी भी कर ली. दोनों पकड़े भी गए. उन्हें पकड़वाने में हेमंत ने ही अहम भूमिका निभाई थी. उस ने माधुरी से पीछा छुड़ाने की योजना मन ही मन पहले ही तैयार कर ली थी. इतना सब तमाशा होने के बाद वह घर आई तो उस ने हेमंत को शादी की बात याद दिलाई. बदनामी, परिवार की डांटफटकार माधुरी ने सिर्फ हेमंत से शादी करने के लिए सही थी. हेमंत उसे प्यार से समझाबुझा कर पीछा छुड़ाने के बजाए उस के सपनों को और भी ऊंचाई दे कर बरगलाने का काम करता रहा. उस के कहने पर माधुरी राहुल से पिता के मोबाइल से बातें करती रही.

22 दिसंबर को हेमंत ने माधुरी से कहा था कि अगले दिन वह घर से निकल कर गांव के बाहर तय जगह पर पहुंच जाए. उसे लगता था कि माधुरी ऐसा नहीं करेगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. माधुरी उस के झूठे प्यार में अंधी हो चुकी थी. वह उस खेत पर पहुंच गई, जहां उस ने पहुंचने को कहा था. माधुरी ने यह बात हेमंत को फोन कर के बता भी दी. वह खेत गांव के किसान डंकारी सिंह का था. हेमंत ने पहले ही तय कर लिया था कि उसे क्या करना है. माधुरी उस के गले की फांस बन चुकी थी. शाम करीब 4 बजे वह खेत पर पहुंचा और माधुरी को कंबल तथा बाजार से ला कर खाना दे आया.

हेमंत ने उसे समझाने के बजाए बरगलाते हुए कहा, ‘‘माधुरी, मैं माहौल देख लूं. पहले तो राहुल को जेल भिजवाना जरूरी है. उस के बाद हम निकल चलेंगे. लेकिन तब तक तुम्हें यहीं रहना होगा.’’

माधुरी ने इस कड़ाके की ठंड में वह रात अकेली खेतों में बिताई. हेमंत उस के लिए खाना पहुंचाता रहा. किसी को उस पर शक न हो, इस के लिए वह माधुरी के घर वालों के साथ खड़ा रहा और उन्हें राहुल के खिलाफ भड़काता रहा. 2 दिन बीत गए. अब माधुरी को खेत में रहना मुश्किल लगने लगा. आखिर उस के सब्र का बांध टूट गया.

तीसरे दिन यानी 26 दिसंबर की शाम माधुरी हेमंत से चलने की जिद करने लगी तो प्यार जताने के बहाने उस ने दुपट्टे से उस का गला कस दिया. हेमंत का यह रूप देख कर माधुरी के होश उड़ गए. बचाव के लिए विरोध करते हुए उस ने हाथपैर भी चलाए, लेकिन हेमंत ने गले में लिपटा दुपट्टा पूरी ताकत से कस दिया था, जिस से छटपटा कर उस ने दम तोड़ दिया. हत्या कर के हेमंत ने अपने और माधुरी के मोबाइल का सिमकार्ड तोड़ दिया और घर आ गया. रात को वह बहाने से निकला और गड्ढा खोद कर लाश को दफना दिया. इस के बाद वह सामान्य जिंदगी जीने लगा.

लोगों के शक से बचने के लिए वह अपने काम पर भी जाता और माधुरी के पिता के साथ बैठ कर माधुरी को ले कर फिक्र भी जताता. हेमंत को पूरा विश्वास था कि वह कभी पकड़ा नहीं जाएगा. उसे लगता था कि दबाव में आ कर पुलिस राहुल और उस के दोस्तों को जेल भेज देगी. उस के बाद माधुरी की खोजबीन ठंडे बस्ते में चली जाएगी. इसीलिए उस ने माधुरी के घर वालों को पुलिस अधिकारियों के यहां प्रदर्शन करने के लिए उकसाया था.

यह अलग बात थी कि एसपी सुजाता सिंह की समझ से पुलिस ने किसी दबाव में काम नहीं किया और वह पकड़ में आ गया. यह भी सच है कि अगर पुलिस बारीकी से जांच न करती तो हेमंत कभी पकड़ा न जाता. उस की फरेबी फितरत और हैवानियत ने पूरे गांव को हैरान कर दिया. पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था. कथा लिखे जाने तक उस की जमानत नहीं हो सकी थी. माधुरी हेमंत जैसे शातिर के झांसे में न आई होती और बिना डगमगाए अपने भविष्य को संवारने में लगी होती तो यह नौबत कभी न आती.

हेमंत जैसे लोग अपनी घिनौनी सोच को पूरी करने के लिए भोलीभाली लड़कियों को फंसाने का काम करते हैं. जरूरत है, लड़कियों को ऐसे लोगों से सावधान रहने की.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

चमचम चमके घर

 पिछले साल पापा ने जब घर में पेंटपौलिश करवाया था तो दीपक ध्यान से सब देख रहा था. बनेबनाए पेंट के डब्बे, ब्रश और रेगमार, बस इन्हीं का तो कमाल है. फिर पापा के साथ हुई मजदूरों की बहस पर भी उस का ध्यान गया. मजदूर दीवारें पेंट कर शाम को धब्बे जमीन पर लगे ही छोड़ जाते, जिन्हें मम्मीपापा के साथ मिल कर दीपक को ही साफ करना पड़ता, तिस पर 3 कमरे पेंट करने में पूरा हफ्ता लगा दिया. सारा सामान बिखरा सो अलग.

सो दीपक ने इस बार सोच लिया था कि वह अपने छोटे भाई के साथ मिल कर स्वयं घर चमकाएगा और ऐसा हुआ भी. दीपक ने पापा से बात कर सामान मंगवा लिया और न केवल घर चमका दिया बल्कि फर्नीचर पर पौलिश कर उसे भी नया लुक दे दिया. पापा बच्चों की इस जिम्मेदारीपूर्ण कार्यप्रणाली को देख फूले न समाए. चाहे तो हर किशोर दीपक की तरह अपने घर को पेंटपौलिश कर के चमका सकता है. बस, जरूरत है थोड़ी समझदारी और पेंटपौलिश सीखने की, जो आजकल नैट के जमाने में किशोर बखूबी सीख सकते हैं.

दीवारों पर पेंट

घर को चमकाने के लिए सब से जरूरी है दीवारों को रंगना. आप अपने घर के हर कमरे को मनचाहे तरीके से रंग सकते हैं, इस के लिए आप को जरूरत है पेंट की बालटी, ब्रश, रेगमार और मनवांछित रंगों की.

ऐसे रंगें दीवारें

घर की दीवारों को रंगने के लिए पहले उन्हें झाड़ूसे अच्छी तरह धूलमिट्टी हटा कर साफ कर लें. फिर रेगमार से दीवारों को रगड़ें. दीवारों से पुराने पेंट की पपड़ी हटा कर उन्हें प्लेन करें. वालपुट्टी ले कर उस में प्लास्टर औफ पैरिस मिलाएं, इसे लुगदी जैसा बनाने के लिए इन में थोड़ा पानी मिलाएं, फिर सपाट प्लेटनुमा लोहे की पत्ती से इसे दीवारों पर हुए छेदों, ऊबड़खाबड़ जगहों, दरारों आदि में भरें व समतल करें. थोड़ी देर इसे सूखने दें व पुन: रेगमार से घिस कर एकसार कर समतल कर दें. अब दीवार पेंट के लिए तैयार है. एक डब्बे में पेंट ले कर उस में मनचाहा कलर मिलाएं व मिक्स कर ब्रश की सहायता से पेंट दीवारों पर फैलाएं. इस प्रकार आप दीवारों पर मनचाहा रंग कर सकते हैं. याद रखें, दीवारों के साथसाथ छत को भी रंगना है लेकिन छत का कलर सफेद ही रखें तो बेहतर है. इस से अधिक प्रकाश नीचे को फैलता है और रोशनी अधिक होती है.

कुछ सावधानियां

–       पेंट करते समय ध्यान रखें कि फर्श पर ज्यादा धब्बे न गिरें. इस से बचने के लिए फर्श पर पुराने अखबार बिछा सकते हैं, जिस से धब्बे उन्हीं पर पड़ेंगे और फर्श खराब नहीं होगा.

–       अगर बिजली की फिटिंग दीवारों के ऊपर से है तो संभल कर पेंट करें.

–       ब्रश के बजाय रोलिंग ब्रश का इस्तेमाल करें, इस से फिनिशिंग अच्छी आएगी.

–       पेंट करने के बाद ब्रश डब्बे में ही न छोड़ें बल्कि धो कर साफ कर लें वरना सूखने पर इसे साफ करना व दोबारा इस्तेमाल में लाना मुश्किल होगा.

–       दीवारों पर पेंट करने से पहले कमरा खाली कर लें व अलमारी, लकड़ी के पलंग या भारी सामान जिसे निकाल न पाएं, पर कपड़ा डाल दें ताकि पेंट के छींटे पड़ने से वे खराब न हों.

–       पेंट करने से पहले हाथों में प्लास्टिक ग्लब्स व सिर पर कपड़ा बांध लें ताकि हाथ व बाल खराब न हों.

–       घर के लिए प्लास्टिक पेंट अच्छा रहता है. इसे आसानी से धोया भी जा सकता है.

–       पेंट सूखने के बाद सफाई करें व सामान वापस रख लें.

दरवाजों व खिड़कियों पर पेंट

घर के दरवाजे यदि लकड़ी के हैं तो उन पर पेंट करें लेकिन अगर उन पर पहले पौलिश हुई है तो पेंट न करें.

बनाबनाया पेंट बाजार में मिलता है, जो रंग पहले हुआ है वही लें और ब्रश की सहायता से दरवाजों, खिड़कियों, ग्रिलों, लोहे के दरवाजों पर पेंट करें. पेंट करने से पहले फर्श पर अखबार बिछा लेना अच्छा रहता है. पेंट को सूखने में समय लगता है अत: दूसरा कोट करने से पहले इसे अच्छी तरह सुखा लें. पेंट करते समय ध्यान रखें कि खिड़कियों के शीशों पर पेंट न लगे. अगर थोड़ाबहुत लग भी जाए तो उसे उसी समय कपड़े से पोंछ लें.

फर्नीचर पौलिश

दीवारों, दरवाजों व खिड़कियों को चमकाने के बाद नंबर आता है फर्नीचर की साफसफाई का. आप अपने घर के फर्नीचर जैसे सोफा, पलंग, लकड़ी की अलमारी, सैंटर टेबल, कंप्यूटर टेबल आदि को घर पर ही पौलिश कर सकते हैं. इस के लिए सब से पहले यह ध्यान रखने की जरूरत है कि आप का फर्नीचर पुराना है या नया. अगर आप का फर्नीचर नया है तो धूलमिट्टी साफ कर सिर्फ कपड़ा मार कर चमकाया जा सकता है. पतले रेशमी कपड़े से या डस्टिंग ब्रश से इसे साफ करें. साथ ही यह भी ध्यान रखें कि अगर अलमारी पर पहले पेंट किया हुआ है तो दोबारा पेंट ही करें, पौलिश नहीं. यदि फर्नीचर ज्यादा पुराना नहीं है तो आप बिना पौलिश के भी उसे चमका सकते हैं. इस के लिए निम्न तरीके अपनाएं :

– सब से पहले डस्टिंग ब्रश या पतले रेशमी कपड़े से फर्नीचर पर लगी धूलमिट्टी झाड़ लें.

– फिर औलिव औयल यानी जैतून का तेल व विनिगर (सिरका) मिला कर एक स्प्रे बोतल में भरें और फर्नीचर पर स्पे्र कर दें. थोड़ी देर बाद हलके हाथों से मुलायम कपड़े से पोंछें.

– अगर फर्नीचर पुराना है तो सब से पहले उस की टूटफूट को देखें. कहीं कील निकली है तो ठोंक दें. कब्जे आदि उखड़े हों तो ठीक कर लें. सनमाइका उखड़ रहा है तो उसे पीवीसी एडहैसिव की मदद से चिपका लें.

– अगर लकड़ी में कहीं गड्ढे बन गए हैं तो फैवीकोल में लकड़ी का महीन बुरादा मिला कर लुगदी बना लें व उस से इन गड्ढों को भरें. बाजार में लकड़ी भरने की पुट्टी भी मिलती है आप इस से भी इन्हें भर सकते हैं.

– रेगमार की सहायता से हलके हाथों से रगड़ कर सतह को एकसार करें. अब सतह पौलिश करने को तैयार है.

– बाजार से मैनिलेथेड स्प्रिट, थोड़ा सा लाखदाना व सुंदरस ले कर एक बोतल में डालें व बोतल धूप में रख दें. जब तीनों मिक्स हो जाएं तो रेशमी कपड़े से इस की पोटली बना कर लकड़ी पर फिरा दें. अगर कहीं रंगीन पौलिश करनी है तो इसी घोल में बाजार से कच्चा रंग ले कर मिला लें.

– इस पौलिश किए फर्नीचर को थोड़ी देर सूखने दें. सूखने पर साफ मुलायम कपड़े से पोंछ लें.

घर चमकाने के अन्य टिप्स

– अगर आप के घर के फर्श पर टाइल्स लगी हैं तो उन्हें टाइल क्लीनर से साफ करें. यह काम नियमित एक हफ्ते में वैसे भी कर सकते हैं.

– नौर्मल रंग से रंगी दीवारों की धूलमिट्टी कपड़े से साफ करें व सिर्फ पानी में कपड़ा भिगो कर दागधब्बे साफ करें, ज्यादा रगड़ें नहीं वरना रंग उतरने का डर रहता है.

–  दीवारों पर अगर वालपेपर लगा है तो कुनकुने पानी में कपड़ा भिगो कर हलके हाथों से साफ करें.

– वाशबेसिन व टौयलेट को टौयलेट क्लीनर से चमकाएं.

– किचन में लगी टाइलों को टाइल क्लीनर से साफ करें व सिंक अगर स्टील की है तो विम आदि से साफ करें.

– यदि घर का फर्श मार्बल का है तो इसे पौलिश किया जा सकता है.

इस प्रकार जब आप अपने हाथ से घर को पेंट व फर्नीचर को पौलिश करेंगे तो न केवल आप का घर चमकेगा बल्कि आप का फर्नीचर भी सुंदर व नया लगेगा साथ ही मातापिता व घर में आने वाला हर मेहमान आप के इस कदम की तारीफ किए बिना नहीं रहेगा.    

लालू आए फिर रंग में

चीन की हिस्सेदारी वाली कंपनी पेटीएम के बहाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरते हुए लालू प्रसाद यादव कहते हैं कि ऐसा कोई प्रधानमंत्री होता है क्या, जो दूसरे देश की कंपनी का प्रचार करते हुए कहता है कि पेटीएम कर लो पेटीएम. ठेठ लहजे में पेटीएम का मतलब समझाते हुए वे आगे कहते हैं कि पेटीएम यानी पे टू मी. मतलब, मुझे पैसा दो. ऐसा प्रधानमंत्री तो कभी देखा ही नहीं. नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री की गरिमा का तो खयाल रखना चाहिए. राहुल गांधी के सामने नरेंद्र मोदी बौने दिखने लगे हैं. इसे साबित करने के लिए लालू प्रसाद यादव कहते हैं कि वाराणसी की सभा में नरेंद्र मोदी ने राहुल गांधी की खिल्ली उड़ाई थी. उस के तुरंत बाद राहुल गांधी ने जौनपुर में सभा की थी, तो उस में ‘मोदी मुरदाबाद’ के नारे लगने लगे. राहुल गांधी ने बड़प्पन दिखाते हुए नारे लगाने वालों को रोक दिया.

उन्होंने मुरदाबाद का नारा लगाने वालों से कहा कि नरेंद्र मोदी हमारे प्रधानमंत्री हैं और उन के खिलाफ ऐसा नारा नहीं लगाना चाहिए. विरोध विचारों का है और भारतीय जनता पार्टी को चुनाव से ही हराना है. नोटबंदी का हाल भी नसबंदी जैसा ही होगा. नसबंदी की वजह से कांग्रेस को सत्ता गंवानी पड़ गई थी और अब नोटबंदी की वजह से जनता भाजपा को सत्ता से उखाड़ फेंकेगी. प्रधानमंत्री ने 90 फीसदी लोगों को गरीब बना दिया है. एक के बाद एक ताबड़तोड़ सभाएं, बैठकें, धरने वगैरह कर के लालू प्रसाद यादव एक बार फिर अपने पुराने रंग में लौटते नजर आने लगे हैं. देश और राज्य के मसलों पर वे खुल कर अपनी राय रखने लगे हैं और अपने वोटरों को नए सिरे से गोलबंद करने में लगे हैं. खुद को और अपनी पार्टी को नीतीश कुमार की छाया से निकालने की कवायद में लग गए हैं और पूरे ठसक के साथ जनता से रूबरू होने लगे हैं.

पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल के सब से बड़ी पार्टी के तौर पर उभरने के बाद लालू प्रसाद यादव ने अपने दोनों बेटों को नीतीश कुमार सरकार में मंत्री बनवा दिया और बेटी मीसा भारती को राज्यसभा में भेज कर आराम फरमा रहे थे. पिछले कुछ दिनों से नीतीश कुमार के भाजपा से हाथ मिलाने और कई मसलों पर उन के द्वारा नरेंद्र मोदी का समर्थन करने के बाद उठी सियासी अटकलों के बीच लालू प्रसाद यादव फिर पुराने तेवर के साथ सियासी अखाड़े में उतर आए हैं. नोटबंदी के 50 दिन पूरे होने पर राष्ट्रीय जनता दल ने 28 दिसंबर, 2016 को महाधरना का आयोजन किया था, लेकिन उस में महागठबंधन के साथी दल नहीं पहुंचे. गौरलब है कि नीतीश कुमार ने पहले ही नोटबंदी को सही करार दे कर इस से पल्ला झाड़ लिया, तो कांग्रेस ने उसी दिन पार्टी ‘स्थापना दिवस’ होने का बहाना बना कर इस महाधरने से कन्नी काट ली. इस के बाद भी लालू प्रसाद यादव ने अकेले अपने बूते भाजपा के खिलाफ हुंकार भरी और उस में काफी हद तक कामयाब भी रहे. अब उन्हें यह महसूस हो गया है कि महागठबंधन के साथी जद (यू) और कांग्रेस से इतर उन्हें अपनी ताकत फिर से दिखाने का समय आ गया है. अब उन्होंने भाजपा के साथसाथ महागठबंधन में शामिल दलों से भी निबटने के लिए कमर कस ली है. राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने पटना समेत बिहार के सभी 38 जिलों के हैडक्वार्टरों पर महाधरने का आयोजन किया था और उस की कामयाबी से खुश हो कर नए साल में नोटबंदी के खिलाफ बड़ी रैली के आयोजन का ऐलान भी कर डाला.

महागठबंधन के दूसरे साथियों के महाधरने में शामिल नहीं होने से नाराज लालू प्रसाद यादव कहते हैं कि ईगो प्रोब्लम की वजह से सभी विरोधी दल एकजुट नहीं हो पा रहे हैं, जबकि गैरभाजपाई दलों की एक ही मंजिल है. सभी दल दिल्ली से भाजपा को उखाड़ने की कोशिश में लगे हुए हैं. राजद को मजबूत बनाने के लिए उन्होंने दूसरे दलों में गए राजद नेताओं की घर वापसी का दरवाजा खोल दिया है. अपनी पार्टी राजद के 20वें स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित जलसे में उन्होंने पार्टी छोड़ कर भागने वालों को दोबारा पार्टी में शामिल होने का खुला न्योता दिया. खास बात यह रही कि न्योते के साथसाथ उन्होंने धमकी भी दे डाली. उन्होंने साफ कहा कि जिसे राजद में  आना है, आ सकता है, पर आने के पहले अपनी आदतों को सुधार ले. पुरानी आदतों को सुधारने के बाद ही राजद में जगह मिलेगी.

सियासी हलकों में चर्चा है कि लालू प्रसाद यादव के बुलावे पर उन के कुछ पुराने दोस्तों का मन डोलने लगा है. एक बार फिर पुराने तेवर में नजर आने वाले लालू प्रसाद यादव को अब अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं का भी खासा खयाल आने लगा है, तभी तो उन्होंने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं की बैठक में उन की दुखती रग पर हाथ रखते हुए कहा कि जो अफसर राजद कार्यकर्ताओं की बात नहीं सुनेंगे, उन पर कार्यवाही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बात कर के की जाएगी. सरकार में शामिल सभी दलों में सब से बड़ा दल होने के बाद भी राजद को दरकिनार रखा गया है. इस से कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट रहा है. लालू प्रसाद यादव ने कार्यकर्ताओं को आगाह करते हुए कहा कि भाजपा सरकार आरक्षण को खत्म करने की साजिश रच रही है. वह धर्म के नाम पर देश को तोड़ने में लगी हुई है. इस के साथ ही वह भाजपा को चुनौती देने वाले लहजे में कहते हैं, ‘‘ऐ भाजपा वालो, जब तक लालू के शरीर के खून का एक कतरा भी रहेगा, वह आरक्षण को खत्म नहीं होने देगा.’’

लालू प्रसाद यादव केंद्र की भाजपा सरकार को कठघरे में खड़ा करने का कोई मौका नहीं गंवाते हैं. वे हर मौके पर केंद्र की मोदी सरकार पर भी जम कर तीर चलाते हैं. वे बारबार जोर दे कर अपने वोटरों से कह रहे हैं कि केंद्र सरकार ने अडानी का 2 हजार करोड़ रुपए का कर्ज माफ कर दिया. रिलायंस को फायदा पहुंचाया जा रहा है. मोदी सरकार को अमीरों की सरकार करार देते हुए लालू प्रसाद यादव कहते हैं कि अगले लोकसभा चुनाव में भाजपा को जड़ से उखाड़ फेंकने की जरूरत है, नहीं तो गरीबों का जीना मुहाल हो जाएगा. लालू प्रसाद यादव के पुराने रंग में लौटने की सब से बड़ी वजह यह भी है कि उन्हें नीतीश कुमार का अकेले दूसरे राज्यों में जा कर सभाएं करना और भाजपा और नरेंद्र मोदी पर निशाना साधना हजम नहीं हो रहा था. उन्होंने नीतीश कुमार की बेरुखी पर काफी दिनों तक चुप्पी साधे रखी, पर अब उन्हें लगने लगा है कि पानी सिर से ऊपर जा रहा है. अब खुल कर सामने आने का समय आ गया है.

राजद के थिंक टैंक माने जाने वाले रघुवंश प्रसाद सिंह कहते हैं कि अपने सियासी फायदे के लिए नीतीश कुमार महागठबंधन के दूसरे साथियों की अनदेखी कर रहे हैं. उन्होंने नीतीश कुमार से कुछ तल्ख सवाल पूछे हैं, ‘आखिर उन्हें प्रधानमंत्री का उम्मीदवार किस ने बना दिया  किस हैसियत से वे मिशन-2019 की बात कर रहे हैं  क्या अकेले घूम कर नीतीश कुमार सैकुलर ताकतों को कमजोर और सांप्रदायिक ताकतों को मजबूत नहीं कर रहे हैं   दूसरे राज्यों में सभाएं करने से पहले नीतीश कुमार को क्या सहयोगी दलों से बात नहीं करनी चाहिए थी  क्या उन्हें भरोसे में नहीं लेना चाहिए था ’ वगैरह.

अभी तक राजद को इन सवालों के जवाब नहीं मिल सके हैं. लालू प्रसाद यादव इस बात से भी नाराज बताए जाते हैं कि नीतीश कुमार उन से कोई सलाहमशवरा किए बगैर उत्तर प्रदेश के बनारस, कानपुर, नोएडा और लखनऊ में अकेले ही लगातार रैलियां करते रहे. इस मामले में महागठबंधन को भरोसे में नहीं लिया गया. गौरतलब है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में कुर्मी जाति की खासी आबादी है और नीतीश कुमार की नजर उन पर गड़ी हुई है. उस के बहाने वे वहां अपना जनाधार बढ़ाने की चाहत रखते हैं. नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव के बीच तनातनी की हवा के तूफान में बदलने से पहले लालू प्रसाद यादव बड़े भाई की भूमिका में खुल कर सामने आ गए. राजद और जद (यू) के नेताओं के बेवजह की बयानबाजी पर लगाम लगाने के लिए उन्होंने नीतीश कुमार से बातचीत की. दोनों नेताओं के बीच एक घंटे तक गुफ्तगू चली.

राजद सूत्रों ने बताया कि लालू प्रसाद यादव ने दोनों पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल बनाने और सरकार को सही तरीके से काम करने के मसले पर बात की. लालू प्रसाद यादव को महागठबंधन में अपनी ताकत का अहसास है और इस के साथ उन्हें यह भी डर सता रहा है कि महागठबंधन में बवाल मचने से भाजपा उस का फायदा उठा सकती है, इसलिए वे ताल ठोंक कर एक बार फिर बिहार की राजनीति के अखाड़े में कूद पड़े हैं.

समाचार

कांग्रेस ने किसानों को दिखाए सब्जबाग
कर्ज माफ करने और बिजली के बिल आधा करने का वादा

लखनऊ : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 के लिए लखनऊ में कांग्रेस द्वारा जारी किए गए घोषणापत्र में किसानों के कर्ज माफ करने और उन के बिजली के बिल आधे करने का जोरशोर से वादा किया गया है. कर्ज माफ करने और बिजली के बिल आधे करने के वादे के साथसाथ कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में 6 जगह सपा की तमाम योजनाओं को पूरा करने का भी ऐलान किया है. इन के साथसाथ महिलाओं और युवाओं को लुभाने वाली बातें भी घोषणापत्र में की गई?हैं. कांग्रेस ने पंचायतों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण देने का वादा भी किया है.

कांग्रेस के सूबा प्रभारी गुलाम नबी आजाद और सूबा अध्यक्ष राज बब्बर ने 3 जबानों यानी हिंदी, अंगरेजी और उर्दू में घोषणापत्र को जारी किया है. पार्टी के प्रदेश मुख्यालय पर तमाम नामीगिरामी नेताओं की मौजूदगी में फिल्म स्टार से नेता बनने वाले राज बब्बर ने कहा कि यह घोषणापत्र कांग्रेस का जनता से किया गया पक्का वादा है. वैसे गौर करने वाली बात यह है कि अपने पुराने इतिहास में भी कांग्रेस ने हमेशा किसानों को काफी तवज्जुह दी है. हालांकि सभी राजनीतिक पार्टियां खेती और किसानों की अहमियत से वाकिफ होती हैं, लिहाजा किसानों की भलाई की बातें करना राजनीति के खेल में लाजिम होता है. जहां तक सवाल कांग्रेस के मौजूदा घोषणापत्र का है, तो पार्टी ने सिर्फ इसी में किसानों की भलाई की बातें नहीं की हैं, ऐसा तो पहले भी होता था. इंदिरा गांधी के जमाने में भी कांग्रेस का?घोषणापत्र किसानों के हितों से भरपूर रहता था. खुद इंदिरा गांधी भी किसानों की सच्ची खैरख्वाह मानी जाती थीं. यों तो समाजवादी पार्टी यानी सपा को भी किसानों की भलाई करने वाली पार्टी के तौर पर माना जाता?है, लिहाजा कांग्रेस व सपा के मिलने से किसानों की उम्मीदें बढ़ जाना लाजिम है. बहरहाल, अब देखने वाली बात यही है कि क्या उत्तर प्रदेश में कांग्रेस व सपा के गठबंधन वाली सरकार बन पाती?है? और अगर ऐसा होता?है, तो किसानों का कितना भला होता है. डर यह भी है कि चुनावी वादे महज सब्जबाग साबित हो कर न रह जाएं.

*

टिड्डियों की वजह से बोलीविया में आपातकाल

सुक्रे: खेतों व फसलों को टिड्डियों से होने वाले नुकसान के बारे में ज्यादातर लोग जानते हैं. अकसर टिड्डियां फसलों को बुरी तरह तबाह कर देती?हैं. पिछले दिनों टिड्डियों के आतंक की वजह से बोलीविया की सरकार को मुल्क के एक बड़े कृषि इलाके में आपातकाल लगाना पड़ गया. बोलीविया के राष्ट्रपति इवो मोरैल्स ने टिड्डियों के आक्रमण से निबटने के लिए खासतौर से एक आपात योजना तैयार की है. योजना में इन कीटों के संक्रमण पर धुएं से काबू पाने के लिए 7 लाख डालर की अतिरिक्त रकम तय की गई?है. इस हमले के शिकार होने वाले और आसपास के तमाम लोगों के मुताबिक कुछ हफ्ते पहले सांता क्रूज के पूर्वी हिस्से में निचले इलाके के खेतों में खतरनाक टिड्डियों का काफी बड़ा झुंड देखा गया. यह देश का खास इलाका है, क्योंकि वहां खाद्यान्न और मांस का सब से ज्यादा उत्पादन होता है.

वहां के लोगों के मुताबिक देखे जाने के कुछ देर बाद ही टिड्डियां पूरे इलाके में फैल गईं. टिड्डियों की वजह से ज्वार व मक्के के खेतों और घास के मैदानों को काफी नुकसान पहुंचा है.

*

सोते वक्त किसान की हत्या

मुरादनगर/गाजियाबाद : मुरादनगर थाना इलाके के गांव कनौजा में पिछले दिनों खेत में?ट्यूबवेल पर सो रहे किसान के सिर पर कोई भारी चीज मार कर उस की दर्दनाक हत्या कर दी गई. हत्यारे ट्यूबवेल का दरवाजा बंद कर के खामोशी से चंपत हो गए. कनौजा गांव में महेश त्यागी अपने बेटे के साथ रहते थे. 3 महीने पहले उन्होंने मकान बनवाया था. घटना वाली रात को वे अपने ट्यूबवेल पर सोए थे. सुबह जब वे अपने घर नहीं पहुंचे, तो घर के लोग खेत में पहुंचे. वहां महेश खाट पर मरे हुए पड़े थे और चारों तरफ खून फैला था. किसान महेश वक्त और हालात के शिकार थे. डेढ़ साल पहले उन की पत्नी की जलने से मौत हो गई थी. इसी मामले में पुलिस ने महेश को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया था. फिलहाल वे जमानत पर छूटे हुए थे. एएसपी आशीष के मुताबिक महेश काफी अरसे से ट्यूबवेल पर ही रहते थे. उन की हत्या क्यों व कैसे हुई, यह तो बाद में पता चलेगा, मगर ऐसे हादसे दुखद होते हैं.

*

झटका

दाल की पैदावार को लगा जोर का धक्का

पटना : बिहार के कृषि रोड मैप के तहत साल 2012 से 2017 तक के लिए दलहन उत्पादन का लक्ष्य 29 लाख 20 हजार टन रखा गया था. 5 साल बीतने को हैं और 4 लाख 62 हजार टन दलहन का ही उत्पादन हो सका है. कृषि विभाग ने जितना लक्ष्य रखा था, उस का केवल 19 फीसदी ही उत्पादन हो सका. राज्य में दलहन उत्पादन का सब से बड़ा हब मोकामा का टाल क्षेत्र है. इस बार टाल क्षेत्र में ज्यादा समय तक पानी भरा होने की वजह से दलहनी फसलों की बोआई काफी देर से हुई थी. धान, तिलहन, सब्जी, फल आदि की पैदावार जहां लगातार बढ़ी हैं, वहीं दालों के उत्पादन में भारी गिरावट आई है. बिहार में पिछले 8 सालों में चावल उत्पादन में?डेढ़ गुना इजाफा हुआ है. साल 2001 से 2008 तक चावल का औसत उत्पादन 46 लाख टन हुआ था. साल 2008 से 2016 तक वह बढ़ कर 66 लाख टन हो गया. वहीं दूसरी ओर दलहन की पैदावार साल 2008 तक औसतन 5 लाख 4 हजार टन थी, जो साल 2016 में घट कर 4 लाख 62 हजार टन हो गई है.

कृषि विभाग के प्रधान सचिव सुधीर कुमार का दावा?है कि दलहन उत्पादन के मामले में बिहार थोड़ा पिछड़ गया है, लेकिन आने वाले दिनों में इस की पैदावार बढ़ाने के ठोस उपाय किए गए हैं, जिन का बेहतर नतीजा सामने आएगा.

सूबे के किसानों को दलहनी फसलों को लगाने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है. गौरतलब है कि बिहार समेत पूरे देश में दलहनी फसलों का उत्पादन बढ़ाने की कोशिशें शुरू की गई हैं. कानपुर के भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान के साथ राज्यों के 11 कृषि विश्वविद्यालयों में 20 करोड़ 39 लाख रुपए की लागत से अतिरिक्त प्रजनक बीज उत्पादन कार्यक्रम की शुरुआत की गई है. बिहार समेत कई राज्यों में 150 दलहन सीड हब विकसित करने के लिए 225 करोड़ 31 लाख रुपए की रकम की मंजूरी दी गई है. इस से साल 2018-19 के आखिर तक 1000 क्विंटल उन्नत दलहनी बीजों के उत्पादन और सप्लाई का अनुमान है.

*

तैयारी

हरियाणा एग्री कांक्लेव एंड एक्सपो 2017 का आयोजन

हिसार : हरियाणा एग्रो कांक्लेव एंड एक्सपो 2017 के बारे में बताते हुए कुलपति प्रो. केपी सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय में आयोजित किया जाने वाला यह अपनी तरह का पहला कार्यक्रम है. उन्होंने बताया कि कृषि पैदावार और किसानों की आमदनी को बढ़ाने के मकसद से आयोजित किए जा रहे इस कार्यक्रम में ज्यादा से ज्यादा किसान शामिल होंगे. उन्होंने बताया कि इस आयोजन में किसानों के अलावा बीज, उर्वरक, कीटनाशक दवाओं व कृषि मशीनों से जुड़ी कंपनियों को भी आमंत्रित किया जाएगा. उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम 2 दिनों का होगा जो 22 मार्च से शुरू होगा. कुलपति के मुताबिक इस पहले हरियाणा एग्री कांक्लेव एंड एक्सपो का मुख्य विषय कृषि पैदावार और किसानों का लाभ बढ़ाने के लिए फार्म मशीनीकरण होगा, जिस में किसानों को विभिन्न कृषि कार्यों के लिए सही मशीनों और उन की कार्य प्रणाली के बारे में जानने का अवसर मिलेगा. इस के अलावा किसानों को इन मशीनों की कीमत और इन के निर्माताओं की भी पूरी जानकारी मिल सकेगी.

यहां उल्लेखनीय है कि हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हर साल मार्च में कृषि मेला आयोजित करता है, जिस में हरियाणा और पड़ोसी राज्यों से करीब 50 हजार किसान हिस्सा लेते हैं. इस मेले में एग्रो इंडस्ट्रियल प्रदर्शनी भी लगाई जाती है, जिस में हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, लुवास और हरियाणा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अलावा विभिन्न कृषि निविष्टों और फार्म मशीनरी बनाने वाली कंपनियां भी भाग ले कर अपनी टेक्नोलोजी प्रदर्शित करती हैं. लेकिन अब इस कृषि मेले की जगह पर हरियाणा एग्री कान्क्लेव एंड एक्सपो का आयोजन किया जाएगा जो कि कृषि मेले से व्यवस्था, आकार व पैमाने में बड़ा और आधुनिक होगा.

*
फायदा

सहकारी संस्थाओं से किसानों को लाभ

पटना : बिहार के सहकारिता मंत्री आलोक मेहता ने कहा है कि सहकारी संस्थाओं की मजबूती का सीधा फायदा तमाम किसानों को मिलता है. प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) के साथ बाकी सहकारी संस्थाओं को ताकतवर बनाने से किसानों को उन की फसलों की वाजिब कीमत दिलाने में बहुत आसानी हो जाएगी. पिछली 23 जनवरी को बिहार कोआपरेटिव फेडरेशन कैंपस में पाटलीपुत्र केंद्रीय सहकारी बैंक की सालाना आमसभा में मंत्री ने कहा कि किसानों को धान बेचने में सहूलियत देने के लिए जरूरी उपाय किए गए हैं. उन्होंने बताया कि धान खरीद के लिए 700 करोड़ रुपए सरकार की ओर से मुहैया करा दिए गए हैं. इस मौके पर मंत्री ने पैक्स अध्यक्षों के साथ धान खरीद में होने वाली परेशानियों की भी जानकारी ली और जल्द से जल्द समस्याओं को खत्म करने का भरोसा दिलाया.

बिहार कोआपरेटिव फेडरेशन के अध्यक्ष विनय कुमार शाही ने अनुरोध किया कि पैक्स व शीर्ष सहकारी संस्थाएं कोआपरेटिव फेडरेशन की लेवी का जल्दी से जल्दी भुगतान करें. ऐसा करने से फेडरेशन की आर्थिक हालत मजबूत होगी. उन्होंने कहा कि पाटलीपुत्र केंद्रीय सहकारी बैंक पिछले 21 सालों से फायदे में है. यह सहकारी संस्थाओं और बैंकों के लिए प्रेरणा का विषय है.

*

हालात

गन्ना पेराई इकाइयों का मुआयना

नई दिल्ली : एनजीटी ने उत्तर प्रदेश में गन्ने की पेराई के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले तमाम कोल्हुओं के मुआयने का आदेश जारी किया है. इस बारे में दाखिल की गई याचिका पर गौर करते हुए एनजीटी ने यह हुक्म जारी किया है. दायर की गई याचिका में इलजाम लगाया गया है कि हवा और पानी संबंधी प्रदूषण फैलाने में इन अनियंत्रित इकाइयों यानी कोल्हुओं का बहुत ज्यादा हाथ है. गुड़ बनाने के लिए गन्ने की पेराई ज्यादातर डीजल से चलने वाले कोल्हुओं से की जाती है, जो कि खासा प्रदूषण फैलाते हैं. न्यायमूर्ति जवाद रहीम की अध्यक्षता वाली पीठ ने पाया कि इन तमाम पेराई इकाइयों के काम करने और वातावरण पर इन के खराब असर के बारे में कोई वैज्ञानिक अध्ययन या रिपोर्ट सामने नहीं आई?है. इसी वजह से इन के मुआयने का फरमान जारी किया गया?है. पुराने जमाने में बैल कोल्हू चलाते थे और बगैर किसी प्रदूषण के पेराई की जाती थी. यह बात अलग है कि उत्तर प्रदेश में एनजीटी के इस फरमान का किस हद तक पालन हो पाता है, क्योंकि इतने बड़े सूबे में चप्पेचप्पे पर गन्ने की पेराई होती है.

*

आयोजन

तकनीक और मशीनरी प्रदर्शन मेले का जलवा

हिसार : चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के कृषि अभियांत्रिकी एवं तकनीकी महाविद्यालय के फार्म पावर एवं मशीनरी और प्रसंस्करण एवं खाद्य अभियांत्रिकी विभागों द्वारा गांव काजलहेड़ी के सरकारी स्कूल में संयुक्त रूप से तकनीक और मशीनरी प्रदर्शन मेले का आयोजन किया गया. विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केपी सिंह इस अवसर पर मुख्य अतिथि थे. यह मेला आईसीएआर, नई दिल्ली की विभिन्न योजनाओं द्वारा प्रायोजित था. मेले में विभिन्न प्रकार की तकनीकों व मशीनों का प्रदर्शन किया गया. मेले में हरियाणा के अलगअलग गांवों के तकरीबन 1200 किसान शामिल हुए. इस अवसर पर पराली प्रबंधन मशीनरी जैसे कि हे रैक, स्ट्रा बेलर, पेडी चोपर, स्ट्रा रीपर, सब सौइलर, रोटावेटर, छोटे व नएनए ट्रैक्टरों वगैरह का प्रदर्शन किया गया.

कुलपति प्रो. केपी सिंह ने इस अवसर पर बोलते हुए खेती व खाद्य प्रसंस्करण में मशीनों का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने पर जोर दिया. उन्होंने विश्वविद्यालय के सहयोग से किसानों को अपनी आय को दोगुना करने के लिए विभिन्न साधनों और उपकरणों का इस्तेमाल करने के लिए कहा. उन्होंने कहा कि किसानों को जरूरत के मुताबिक ही खाद व अन्य रसायन इस्तेमाल करने चाहिए. प्रो. सिंह ने किसानों से पराली प्रबंधन पर अपना ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा ताकि उस को जलाने से होने वाले प्रदूषण से बचा जा सके. उन्होंने किसानों से धीरेधीरे जैविक खेती की ओर बढ़ने को कहा. उन्होंने गांवों में ज्यादा से?ज्यादा संख्या में बायोगैस संयंत्र, केंचुआ खाद और सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने पर भी जोर दिया. इस अवसर पर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को अलगअलग विषयों जैसे पराली प्रबंधन, मिट्टी व जल प्रबंधन, गैर पारंपरिक ऊर्जा स्रोतो का उपयोग, फलों व सब्जियों की छंटाई व वर्गीकरण, खाद्य प्रसंस्कण एवं मूल्य संवर्धन, बायोगैस संयंत्र, सोलर टनल ड्रायर, बायोमास चूल्हों वगैरह के बारे में जानकारी दी.

इस अवसर पर विद्यालय के दिग्गज डा. आर के जोरर व विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष और वैज्ञानिक मौजूद थे. इस मेले के मुख्य संयोजक इंजीनियर मुकेश जैन थे, जिन का सहयोग गुरु जम्म शक्ति ट्रस्ट के चेयरमैन विकास गोदारा ने किया.

*

हादसा

कमी बताने वाले फौजी की अरजी खारिज

नई दिल्ली : सोशल मीडिया पर घटिया खाने की शिकायत करने के बाद चर्चा में आए सीमा सुरक्षाबल (बीएसएफ) के जवान तेज बहादुर की दिक्कतें लगातार बढ़ती जा रही हैं. पिछले दिनों बीएसएफ ने तेजबहादुर यादव की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की अपील को नकार दिया?है. गौरतलब है कि तेजबहादुर ने सेना में खाने की क्वालिटी को ले कर सोशल मीडिया पर एक वीडियो डाला था. इस की काफी चर्चा हुई थी और हंगामा भी हुआ था. इसी के बाद वीआरएस (मर्जी से रिटायर होना) के लिए आई तेज की अरजी को बीएसएफ ने खारिज कर दिया. इस सिलसिले में बीएसएफ का कहना है कि तेज बहादुर पर अनुशासनात्मक आधार पर इलजाम लगे हैं और उन पर कोर्ट आफ इंक्वायरी बाकी है. इसी वजह से उन की वीआरएस की दरखास्त मंजूर नहीं की जा सकती.

बीएसएफ के इस कदम को तेज के घर वालों ने गलत बताया है. तेज की पत्नी ने बताया कि उन के पति ने उन्हें फोन कर के बताया कि उन्हें डरायाधमकाया जा रहा है.   

*
 

दर्दनाक

किसान बना बाघ का शिकार

पीलीभीत : एक हादसा हाल ही में पीलीभीत में सामने आया. वहां के जंगल से बाहर आए खतरनाक बाघ ने एक मासूम किसान पर हमला कर के उस की जीवनलीला खत्म कर दी. घटना के वक्त शिकार होने वाले किसान के अलावा वहां कोई और नहीं था, पर लोगों का अंदाजा है कि घटना करीब 5 बजे सुबह हुई होगी. वन विभाग के अधिकारी घटना के करीब 5 घंटे बाद मौके पर पहुंचे, जबकि उन्हें सूचना काफी पहले मिल चुकी थी. माधोटांडा थाना क्षेत्र के गांव कुंवरपुर के रहने वाले किसान धनीराम ने गेहूं और मटर की फसल की देखभाल व रखवाली के लिए अपने खेत में ही झोंपड़ी बना रखी है. वह अपनी उसी झोंपड़ी में रात को सोया?था. सुबह धनीराम का बेटा नन्हें लाल पिता के लिए चाय ले कर आया तो उसे घटना की जानकारी हुई.

*
तालीम

एनडीआरआई सिखाएगी डेरी फार्मिंग

करनाल (हरियाणा) : भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की ओर से शुरू किए गए फार्मर फस्ट प्रोजेक्ट के तहत करनाल के राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) ने गढ़ी गुजरान, कमालपुर रोड़ान, चुरनी, खेड़ी मान सिंह और समौरा गांवों को गोद लिया है. इन गांवों के कम संसाधन वाले तकरीबन 1,000 परिवारों को डेरी फार्मिंग के गुर सिखा कर उन्हें डेरी क्षेत्र में फास्ट बनाया जाएगा. इस प्रोजेक्ट पर तकरीबन 80 लाख रुपए का खर्च आने की संभावना है, जिस की आईसीएआर?द्वारा स्वीकृति मिल गई है. क्लोनिंग के क्षेत्र में विश्वभर में ख्याति प्राप्त कर चुके इस संस्थान ने किसानों को कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में एक्सपर्ट बनाने के लिए गांवों में काम शुरू भी कर दिया है.

एनडीआरआई के वैज्ञानिक और फार्मर फस्ट प्रोजेक्ट के कोआर्डिनेटर डा. गोपाल सांखला ने बताया कि किसानों को प्रोडक्शन, प्रोसेसिंग, पशु प्रबंधन, बागबानी और उन की देखरेख सहित पशुपालन से जुड़ी जानकारियां दी जाएंगी. यह सब बिल्कुल मुफ्त होगा. इस के लिए 8 से 10 वैज्ञानिकों के अलावा 3 अन्य लोगों का चुनाव भी किया गया है, जो पूरे 2 साल तक गांव में रह कर ग्राउंड रिपोर्ट तैयार करेंगे. एनडीआरआई जिले के 5 किसानों को पशुपालन, बागबानी व कृषि से संबंधित हर क्षेत्र की ट्रेनिंग देगा. इस के लिए किसानों को 2 साल की ट्रेनिंग दी जाएगी, जिस से किसान खुद का डेरी जगत से जुड़ा व्यवसाय आसानी से?स्थापित कर सकेंगे. माहिर और दिग्गज वैज्ञानिकों की टीम गांवों में जा कर किसानों को कृषि जगत से जुड़ी तमाम जानकारियां देगी.

*

तालीम

फिल्में सिखाएंगी खेती के गुर

पटना : बिहार के किसानों को फिल्मों के जरीए खेती करने की नई तकनीक बताई जाएगी. इस के लिए किसानों के बीच फिल्मों के चिप बांटे जा रहे?हैं. चिप के जरीए किसान विभिन्न फसलों की खेती पर आधारित फिल्में अपने स्मार्ट फोन पर देख सकते हैं. बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने राज्य के 25 जिलों में इस योजना की शुरुआत की?है. पटना, गया, नवादा, जहानाबाद, नालंदा, अरवल, भोजपुर, औरंगाबाद, रोहतास, कैमूर, बक्सर, जमुई, मुंगेर, शेखपुरा, सुपौल, पूर्णियां, सहरसा, मधेपुरा, लखीसराय, कटिहार, किशनगंज, खगडि़या, भागलपुर, बांका, अररिया जिलों में पहले चरण में 100-100 किसानों को चिप दिए गए हैं. कृषि विज्ञान केंद्रों के जरीए चिप बांटने का काम चल रहा है. दूसरे चरण में और भी किसानों को चिप दिए जाएंगे. चिप में 20 तरह की फसलों की खेती के तौरतरीकों पर बनी फिल्में हैं. फिल्में 10 से 35 मिनट तक की हैं. फिल्म की भाषा इतनी आसान है कि किसानों को समझने में जरा भी दिक्कत नहीं होती है.

खेती के अलावा मुरगीपालन और बकरीपालन पर भी फिल्में बनी हैं. अजोला, चना, लीची, प्याज, मशरूम परवल, मक्का, स्ट्राबेरी, टमाटर, गेहूं, धान की उन्नत खेती के अलावा समेकित खेती, पौधशाला, प्रबंधन, मधुमक्खीपालन, मिट्टी जांच, बटेरपालन पर भी फिल्में बनाई गई?हैं. इस के साथ ही किसान पौली हाउस बनाने की तकनीक और तरीके पर भी फिल्में देख सकेंगे.

*

मुहिम

रोजाना 3 करोड़ अंडों का उत्पादन

पटना : बिहार में अंडा उत्पादन को बढ़ाने की बिहार अंडा प्रचुरता मुहिम शुरू की गई है. इस मुहिम के तहत रोजाना 3 करोड़ अंडों के उत्पादन का दावा किया गया है. राज्य के पशुपालन और मत्स्य संसाधन मंत्री अवधेश कुमार सिंह इस मुहिम को लांच करेंगे. बिहार विद्यापीठ में अंडों पर हुए सेमिनार में विद्यापीठ के अध्यक्ष विजय प्रकाश ने कहा कि राज्य में हर रोज 2 करोड़ 80 लाख अंडों की खपत होती है, जबकि 10 लाख अंडों का ही उत्पादन हो पाता है. इतनी बड़ी कमी को पूरा करने के लिए आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु से अंडे मंगवाने पड़त हैं. इतने बड़े पैमाने पर अंडों का आयात करने से रोजाना 10 करोड़ रुपए बिहार से बाहर चले जाते हैं. राज्य सरकार अंडा उत्पादन को बढ़ाने के लिए युवाओं को प्रोत्साहन देने के लिए कमर कस चुकी है.

इस के तहत 5000 अंडों के रोजाना उत्पादन की 1 यूनिट लगाने में 25 लाख रुपए की लागत आएगी. इस में इच्छुक युवक को 12 लाख रुपए लगाने पड़ेंगे और बाकी रकम नबार्ड और बैंकों द्वारा लोन के रूप में दी जाएगी. इस मुहिम के शुरू होने से लाखों लोगों को रोजगार भी मिल सकेगा. अंडा उत्पादन की यूनिटों के लगने से चारा मिल, अंडा पैकिंग ट्रे और ट्रांसपोर्ट आदि का भी कारोबार भी काफी ज्यादा बढ़ जाएगा.

*

तालीम

एनडीआरआई सिखाएगी डेरी फार्मिंग

करनाल (हरियाणा) : भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की ओर से शुरू किए गए फार्मर फस्ट प्रोजेक्ट के तहत करनाल के राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) ने गढ़ी गुजरान, कमालपुर रोड़ान, चुरनी, खेड़ी मान सिंह और समौरा गांवों को गोद लिया है. इन गांवों के कम संसाधन वाले तकरीबन 1,000 परिवारों को डेरी फार्मिंग के गुर सिखा कर उन्हें डेरी क्षेत्र में फास्ट बनाया जाएगा. इस प्रोजेक्ट पर तकरीबन 80 लाख रुपए का खर्च आने की संभावना है, जिस की आईसीएआर द्वारा स्वीकृति मिल गई है. क्लोनिंग के क्षेत्र में विश्वभर में ख्याति प्राप्त कर चुके इस संस्थान ने किसानों को कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में एक्सपर्ट बनाने के लिए गांवों में काम शुरू भी कर दिया है. एनडीआरआई के वैज्ञानिक और फार्मर फस्ट प्रोजेक्ट के कोआर्डिनेटर डा. गोपाल सांखला ने बताया कि किसानों को प्रोडक्शन, प्रोसेसिंग, पशु प्रबंधन, बागबानी और उन की देखरेख सहित पशुपालन से जुड़ी जानकारियां दी जाएंगी. यह सब बिल्कुल मुफ्त होगा. इस के लिए 8 से 10 वैज्ञानिकों के अलावा 3 अन्य लोगों का चुनाव भी किया गया?है, जो पूरे 2 साल तक गांव में रह कर ग्राउंड रिपोर्ट तैयार करेंगे.

एनडीआरआई जिले के 5 किसानों को पशुपालन, बागबानी व कृषि से संबंधित हर क्षेत्र की ट्रेनिंग देगा. इस के लिए किसानों को 2 साल की ट्रेनिंग दी जाएगी, जिस से किसान खुद का डेरी जगत से जुड़ा व्यवसाय आसानी से?स्थापित कर सकेंगे. माहिर और दिग्गज वैज्ञानिकों की टीम गांवों में जा कर किसानों को कृषि जगत से जुड़ी तमाम जानकारियां देगी.

*

हालात

सब्जियों के लिए चौकीदार

लंदन : महंगाई के दौर में अकसर सब्जियां 100 रुपए प्रति किलोग्राम या उस से भी महंगी मिलती हैं, मगर मोटे तौर पर सब्जियों को सस्ती चीज माना जाता है और उन के लिए किसी गार्ड को तैनात करने की बात ख्वाब में भी सोची भी नहीं जाती. लेकिन ब्रिटेन के सुपर मार्केट में आजकल जगहजगह सब्जियों की हिफाजत के लिए गार्ड तैनात किए गए हैं. साथ ही वहां कई जगहों पर बोर्ड लगे हैं कि ‘कृपया एक व्यक्ति एक ही सब्जी खरीदे’. हाल ही में स्पेन में आए भयंकर तूफान और भयंकर बर्फबारी से ब्रिटेन में सब्जियों की आपूर्ति नहीं हो पा रही है. सब्जियों की कमी की वजह से ग्राहकों को कोई दिक्कत न हो और मार्केट में बदइंतजामी न होने पाए, इसलिए सब्जियों की हिफाजत के इंतजाम किए गए हैं. 

*

सुधार

सब्जी व दाल ने कम की महंगाई

नई दिल्ली : सब्जियों व दालों जैसी खाने की चीजों के दामों में आई कमी से इस साल जनवरी में खुदरा मूल्य आधारित मुद्रा सफीति (सीपीआई) की दर कम हो कर 3.17 फीसदी पर पहुंच गई. यह खुदरा महंगाई का 5 सालों का निचला स्तर है. हाल ही में सरकार की ओर से जारी आंकड़ों में यह बात सामने आई है. केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक इस जनवरी में खाद्य महंगाई दर कम हो कर 0.53 फीसदी रह गई, जबकि पिछले साल दिसंबर में यह दर 1.37 फीसदी थी. जनवरी 2016 में खुदरा महंगाई 5.69 फीसदी और दिसंबर में 3.41 फीसदी रही थी. आंकड़ों के मुताबिक इस साल जनवरी में सब्जियों की कीमतों में 15 फीसदी से ज्यादा और दालों के दामों में 6 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई?है.

मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि फिलहाल तमाम आंकड़े साफ नहीं हैं. नवंबर में औद्योगिक उत्पादन में तेजी से इजाफा हुआ, जबकि दिसंबर में इस में गिरावट दर्ज की गई?है. इस महीने तीसरी तिमाही के आंकड़े आने के बाद रिजर्व बैंक उस पर गौर करते हुए कोई फैसला करेगा.

*

आगाज

फ्यूचर कंज्यूमर की आलूभुजिया

मुंबई : टेस्टी ट्रीट नाम से कई तरह के स्नैक्स की मार्केटिंग करने वाली फ्यूचर कंज्यूमर लिमिटेड ने हाल ही में जोरशोर से अपना नया उत्पाद आलूभुजिया बाजार में उतारा है. यों तो बेसन व आलू की तमाम तरह की भुजिया बाजार में मौजूद है, मगर टेस्टी ट्रीट की भुजिया को कई अंतर्राष्ट्रीय फ्लेवरों में पेश किया गया है. आलूभुजिया की इस नई रेंज को पेरेपेरी, वैस्बी, बारबीक्यू और शेजवान के रूप मे पेश किया गया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों को लुभाया जा सके. भारतीय लोगों द्वारा भुजिया को काफी ज्यादा पसंद किया जाता है. वे जब भी अपने देश में कहीं जाते?हैं या देश से बाहर भी जाते हैं, तो अकसर अपने साथ आलूभुजिया ले जाना पसंद करते हैं. टेस्टी ट्रीट ने भारतीयों की मानसिकता को मद्देनजर रखते हुए इसे भारतीय व अंतर्राष्ट्रीय जायके के मिलेजुले रूप में पेश किया है. यकीनन आलू भुजिया के जरीए टेस्टी ट्रीट ने नमकीनों की दुनिया में जोरदार कदम रखा है.

*

वादा

उत्तराखंड के किसानों के कर्ज माफ करेगी भाजपा

हरिद्वार : केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने उत्तराखंड के किसानों से चुनावी वादा करते हुए कहा है कि अगर उत्तराखंड में भाजपा की सरकार आई तो किसानों के कर्ज माफ कर दिए जाएंगे. उन्होंने लड़कियों को ग्रेजुएशन तक मुफ्त शिक्षा दिलाने का वादा भी किया है. हरिद्वार ग्रामीण के दुर्गागढ़ में हुई जनसभा को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में उत्तराखंड का गठन हुआ था, लेकिन 10 सालों के शासन में कांग्रेस ने सूबे की हालत खराब कर दी. राजनाथ सिंह ने कहा कि उत्तराखंड के किसानों के कर्ज पूरी तरह से माफ कर दिए जाएंगे और 1 साल का कृषि ऋण बिना ब्याज के देने का बंदोबस्त किया जाएगा, बशर्ते सूबे में भाजपा दल की ही सरकार बने. केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने अपने तरीके से किसानों को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी, मगर आज के दौर के किसान ज्यादा नासमझ नहीं हैं. भाजपा का केंद्र सरकार के तौर पर किया जाने वाला प्रदर्शन कुछ खास नहीं है, लिहाजा राजनाथ की बातें कितनी कारगर होंगी यह जल्द ही पता चलेगा. ज्यादातर लोग तो अभी तक नोटबंदी का दर्द भूल नहीं पाए हैं.

*

बेरुखी

किसान सम्मान को भूली सरकार

पटना : बिहार में किसानों को सम्मानित करने की योजना को सरकार भुला बैठी है. राज्य में उम्दा और अलहदा खेती कर के कामयाबी की नई कहानी लिखने वाले किसानों का हौसला बढ़ाने के लिए उन्हें सम्मानित करने की योजना पिछले कई सालों से फाइलों से बाहर नहीं निकल पा रही है. साल 2005 में बिहार में राजग की सरकार बनने के बाद किसानों को सम्मानित करने की योजना शुरू की गई?थी, पर अफसरों की लापरवाही, मनमानी और लूटखसोट की वजह से यह खटाई में पड़ गई है. एक बार किसानों को सम्म्मानित करने के बाद सरकार ने इसे बड़ा सिरदर्द मान कर ठंडे बस्ते में डाल दिया. सम्मान के लिए किसानों को चुनने की प्रक्रिया पर ही ढेरों सवाल खड़े किए गए और किसानों ने इस की खूब शिकायत भी की. इतना ही नहीं सम्मानित किए गए किसानों को मिलने वाली रकम में धांधली करने का भी आरोप लगा तो परेशान हो कर मुख्यमंत्री को कहना पड़ा कि इसे दोबारा शुरू करने से ले सारी व्यवस्था को दुरुसत कर लें, वरना इसे बंद कर दें, क्योंकि इस से सरकार और सम्मान योजना की बदनामी हो रही है.

कृषि मंत्री राम विचार राय कहते हैं कि किसानों को सम्मानित करने का काम जल्द ही शुरू किया जाएगा. इस के लिए केंद्र सरकार की किसान सम्मान योजना की जानकारी ली जा रही है और इसे फूलप्रूफ बनाने के बाद ही चालू किया जाएगा.

*

योजना

किसानों को भाई फसलबीमा योजना

नई दिल्ली : फसलबीमा योजना को चालू हुए काफी वक्त बीत चुका?है और इस का जोरशोर से प्रचार होता रहा है. सत्ताधारी दल द्वारा जबतब बढ़ाचढ़ा कर इस का बखान किया जाता रहा है. अब तक देश के तमाम किसान इस योजना से वाकिफ हो चुके हैं. केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने हाल ही में कहा कि प्रधानमंत्री फसलबीमा योजना तेजी से लोकप्रिय हो रही है. उन्होंने कहा कि खरीफ सीजन में कुदरती आपदा से अपनी उपज को आर्थिक सुरक्षा मुहैया कराने के लिए 1 करोड़ 10 लाख किसानों ने बीमा कवर लिया है. राधामोहन सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश में 75000 किसानों को 34 करोड़ बीमित रकम का भुगतान किया गया?है. यही वजह?है कि सरकार ने बजट में फसलबीमा के मद में करीब दोगुनी यानी 9000 करोड़ रुपए की रकम को मंजूरी दी है.

*

आगाज

4 सिंचाई योजनाओं की शुरुआत

जहानाबाद : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दरधा नदी पर बनी 4 सिंचाई योजनाओं का उद्घाटन किया. इस से पटना, जहानाबाद और औरंगाबाद के 30000 हेक्टेयर खेतों को पानी मिलना चालू हो गया. जहानाबाद जिले के लिए सोलहांडा वीयर योजना से 900 हेक्टेयर खेतों तक पानी पहुंच सकेगा. पंतीत वीयर सिंचाई योजना का लाभ 8000 हेक्टेयर खेतों को मिलेगा. वहीं औरंगाबाद जिले की जगरनाथ सिंचाई योजना के चालू होने से 2140 हेक्टेयर में फैले खेतों की प्यास बुझ सकेगी. सभी योजनाओं ने काम करना शुरू कर दिया है. इस के साथ ही किसानों की मांग को देखते हुए नीतीश ने लवाइच बराज के ऊपरी हिस्से में एक और बराज के आकलन का निर्देश अफसरों को दिया है. इस की मांग साल 1990 से ही हो रही?है. इस बराज के बनने से 8000 हेक्टेयर में सिंचाई का पानी पहुंच सकेगा.

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में 59 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई कूवत विकसित की जा सकती है. फिलहाल 30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही सिंचाई कूवत विकसित है.

*
मिड डे मील में मिला मरा चूहा

नई दिल्ली : राजधानी नई दिल्ली के एक सरकारी स्कूल में मिड डे मील में मरा चूहा पाए जाने से दूरदूर तक हंगामा हो गया. शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने ट्वीट कर के इस मामले का खुलासा किया. उन्होंने इस बात की जानकारी भी दी कि चूहे से खराब हुए खाने को खाने से 9 मासूम बच्चे बीमार पड़ गए. सभी बीमार बच्चों को अस्पताल में दाखिल कराया गया. मनीष सिसोदिया ने खाने से जुड़े वेंडर के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराने की घोषणा की. उन्होंने घटना पर गहरा दुख जाहिर किया. सूत्रों के मुताबिक यह घटना देवली के सर्वोदय विद्यालय की है, जहां बच्चों को दिए जाने वाले दोपहर के खाने में मरा हुआ चूहा पाया गया, नतीजतन 9 बच्चे खाना खा कर बीमार पड़ गए. बच्चों को मालवीय नगर के मदन मोहन मालवीय अस्पताल में दाखिल कराया गया. मनीष ने बताया कि उन्होंने बीमार बच्चों व इलाज करने वाले डाक्टर से बात की है. सभी बच्चे खतरे से बाहर हैं. सरकार द्वारा मिड डे मील की सप्लाई करने वाले के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है. शिक्षा विभाग ने इस खाना सप्लायर को काली सूची में डाल दिया है. घटना से नसीहत लेते हुए सरकार ने आइंदा से स्कूली बच्चों के लिए खाना बनाने वाली रसोई में सरकारी अफसरों की देखरेख जरूरी कर दी है.

*
हालात

खेतों में नहीं घट रही है यूरिया की खपत

पटना : बिहार में यूरिया की खपत घटाने के लिए चल रही सरकारी मुहिम दम तोड़ रही है. यूरिया की खपत घटने के बजाय बढ़ती ही जा रही है. हालत यह है कि अब फास्फेटिक खादों की खपत भी बढ़ने लगी है. चिंता की बात यह है कि प्रति हेक्टेयर इस की खपत 30 किलोग्राम तक बढ़ गई है. इस से मिट्टी के बंजर होने का खतरा कई गुना बढ़ गया है. यूरिया की खपत के बढ़ने के बाद सरकार ने अब प्लेन यूरिया की जगह नीम कोटेड यूरिया मंगवाना शुरू किया?है, जिस से मिट्टी की सेहत परज्यादा बुरा असर नहीं हो पाता है. गांवों में कैंप लगा कर किसानों को बारबार यह सलाह दी जा रही है कि मिट्टी की जांच कराने के बाद जितनी जरूरत हो, उतनी ही खाद का इस्तेमाल करें. नियमित रूप से मिट्टी की जांच कराने और यूरिया का इस्तेमाल बंद करने के लिए सरकार पिछले 5-6 सालों से मुहिम चला रही है, इस के बाद भी किसान इस के प्रति जागरूक नहीं हो रहे हैं.

राज्य में साल 2014 में प्रति हेक्टेयर 130 किलोग्राम यूरिया की खपत होती थी, जो आज बढ़ कर 159 किलोग्राम हो चुकी है. यूरिया की खपत को कम करने के लिए मूंग और ढैंचा की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिस का किसानों पर खास असर नहीं हो रहा है. इन फसलों की खेती से मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा खुदबखुद बढ़ जाती है. किसानों के मन में आज भी यही बात बैठी हुई है कि यूरिया के इस्तेमाल से ही पैदावार बढ़ती है. गौरतलब है कि साल 2003 में राज्य में 14 लाख टन खाद की खपत होती थी. साल 2014 में यह बढ़ कर 26 लाख टन हो गई और साल 2016 में यह आंकड़ा 30 लाख टन तक पहुंच गया है.

*

निराशा

उत्पाद शुल्क के इजाफे से तंबाकू किसान हताश

नई दिल्ली : खेती से जुड़े मदों में सरकारी शुल्कों के कमज्यादा होने का सीधा असर किसानों पर पड़ता?है. किसान संगठनों ने हालिया बजट में सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर उत्पाद शुल्क के इजाफे पर खासी निराशा जाहिर की है. फेडरेशन आफ आल इंडिया फार्मर एसोसिएशन के महासचिव मुरली बाबू ने कहा कि इस कदम से तंबाकू किसानों की दिक्कतें बहुत ज्यादा बढ़ जाएंगी. इस से उन्हें रोजाना की जिंदगी गुजारने तक में दिक्कतें होंगी.

*

मुहिम

झारखंड की कृषि नीति बनाने की मांग

रांची : झारखंड की अपनी कृषि नीति बनाने की मांग जोर पकड़ने लगी है. पिछले कई सालों से झारखंड के किसान, पशुपालक और मछलीपालक सरकार से मांग कर रहे हैं कि राज्य की अपनी कृषि नीति बनाई जाए, उस के बाद ही खेती और किसानों की तरक्की हो सकती है. इस के साथ ही किसानों को किसानबीमा समेत माली मदद की व्यवस्था करने की भी गुहार लगाई गई है. किसान प्रतिनिधियों ने सरकार को ज्ञापन दे कर बताया कि पलामू जिले में पहले हर साल 1400 मिलीमीटर बारिश होती थी, जो घट कर 800 मिलीमीटर रह गई है. बारिश के पानी को जमा करने की जरूरत काफी बढ़ गई है. सरकार को चाहिए कि बड़े व्यास वाले कुएं बनाने में किसानों की मदद करे. पशुपालकों ने बैंक स्मार्ट कार्ड बनाने और नई उर्वरक नीति बनाने की भी मांग उठाई है. मछलीपालकों का कहना है कि मछलीपालन को बढ़ावा देने से काफी लोगों को रोजगार मिलेगा और मछली के मामले में राज्य आत्मनिर्भर भी होगा. राज्य में तालाबों की कमी को देखते हुए वैज्ञानिक तरीके से वैसे तालाब बनाने की दरकार है, जिन में पूरे साल पानी रह सके. खेती और माली मामलों के जानकारों का भी मानना?है कि किसानों और मजदूरों की साझेदारी से ही खेती और राज्य की तरक्की मुमकिन है. गांवों की तरक्की में ही सूबे और देश की तरक्की हो सकती है.

मधुप सहाय, भानु प्रकाश व बीरेंद्र बरियार

*

सवाल किसानों के

सवाल : तरबूज की कौन सी किस्म लगाएं और उस में कौन सी खाद डालें? मल्चिंग कितने माइक्रोन की ठीक रहेगी?

-एसएमएस द्वारा

जवाब : तरबूज की सुगर बेबी, असाबी फयाटो, अर्का ज्योति, पूसा वेदाना, अर्का मानिक, दुर्गापुर मीठा वगैरह प्रजातियां लगा सकते?हैं. इस में 70 किलोग्राम नाइट्रोजन, 70 किलोग्राम फास्फोरस व 30 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर डालें. 200 माइक्रोन मोटी पालीथिन की मल्चिंग ठीक रहेगी.

*

सवाल : स्टीविया के बारे में जानकारी दें?

-एसएमएस द्वारा

जवाब : स्टीविया की पौध फरवरीमार्च में तैयार की जाती?है. इस के लिए प्रति हेक्टेयर 1 किलोग्राम बीज की जरूरत होती है.

*

सवाल : मैं ने पालीहाउस में शिमला मिर्च लगाई, जिस में वाइरस आ गया है. क्या करूं?

-जसबीर सिंह, एसएमएस द्वारा

जवाब : जिन पौधों में वाइरस आ गया है, उन को उखाड़ कर दबा दें या जला दें. आप सफेद मक्खी से फसल को बचाएं. इस के लिए 0.5 से 1 मिलीलीटर इमिडाक्लोरोपिड प्रति लीटर पानी की दर से छिड़कें.

*

सवाल : मक्के के साथ कौन सी सहफसल ले सकते हैं?

-गौरव, एसएमएस द्वारा

जवाब : मक्के के साथ मूंग, उड़द, लोबिया के अलावा कद्दूवर्गीय फसलें भी ले सकते?हैं.

*

सवाल : लहसुन के पत्ते मुड़ रहे हैं. इस का इलाज बताएं?

-कंचन, एसएमएस द्वारा

जवाब : आप के सवाल से परेशानी का पता नहीं लग रहा. आप अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र में पौधा दिखा कर सही इलाज करें.

*

सवाल : मेरे खेत में दीमक का हमला ज्यादा हो रहा है. इस का जैविक इलाज बताएं?

-तरुण किशोर, एसएसएस द्वारा

जवाब : दीमक के सफाए के लिए विवेरिया बेसियाना फंगस को गोबर में मिला कर डालें.

*

सवाल : पपीते व करौंदे की रोपाई कब की जाती है. कौन सी वैरायटी ठीक रहेगी. बीज कहां से मिलेंगे. रोपाई की जानकारी भी दें?

-एसएमएस द्वारा

जवाब : पपीते की रोपाई मार्च के पहले हफ्ते में उत्तरी भारत के मैदानी इलाकों मे कर सकते हैं. इसी के साथ करौंदा भी लगा सकते हैं. पपीते की पूसा नन्हा, पूसा डेलिसीयस व पूसा जाइंट प्रजातियां अच्छी हैं. इन के बीज आईएआरआई पूसा नई दिल्ली से ले सकते हैं.

*

सवाल : मेरे कलमी बेरों में कीडे़ लग जाते हैं. इस का हल क्या है?

-नरेंद्र पटेल, इटारसी, मध्य प्रदेश

जवाब : 2.5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से मेलाथियान का स्प्रे फल मक्खी रोकने के लिए करें.

डा. अनंत कुमार व डा. अरविंद कुमार
कृषि विज्ञान केंद्र, मुरादनगर, गाजियाबाद

*

दिक्कत आप की दवा फार्म एन फूड  की

खेतीकिसानी से जुड़ी अपनी समस्याएं हमें लिख कर भेजें. आप की समस्याओं का समाधान एक्सपर्ट करेंगे. समस्या के साथ अपना नाम व पता जरूर लिखें. आप हमें स्रूस् भी कर सकते हैं.

सवाल जवाब विभाग, फार्म एन फूड

ई-3, झंडेवालान एस्टेट, रानी झ्झांसी मार्ग, नई दिल्ली-55,
SMS के लिए नंबर: 08447177778

फ्लॉप फिल्म से हुई शुरुआत, अब हैं बॉलीवुड के सुपरस्टार

बॉलीवुड में ‘लक फैक्टर’ काफी मायने रखता है. अगर बॉक्स ऑफिस पर पहली फिल्म चल पड़ी तो बॉलीवुड में किस्मत की गाड़ी निकल पड़ी, लेकिन ऐसी किस्मत बहुत कम स्टार्स के पास होती है जिसकी डेब्यू फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल कर सके. बॉलीवुड के कई ऐसे अभिनेता हैं जिनकी पहली फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह पिटी. लेकिन इनसे स्टार्स का कॉन्फिडेंस नहीं डगमाया.

जानें बॉलीवुड के कुछ ऐसे अभिनेता जो भले ही आज शोहरत के ऊंचे मुकाम पर हो लेकिन इनको भी अपनी डेब्यू फिल्म से निराशा ही मिली थी.

1.करीना कपूर खान

बॉलीवुड की टैलेंटेड एक्ट्रेस करीना कपूर खान की पहली फिल्म ‘रिफ्यूजी‘ भी बॉक्स ऑफिस पर सुपर फ्लॉप हुई थी. लेकिन इसके बाद करीना ने अपनी एक्टिंग के दम पर खुद को साबित किया. आज करीना की गिनती बॉलीवुड की टॉप हीरोइनों में की जाती है.

2.कटरीना कैफ
आज भले ही कटरीना बॉलीवुड में A-लिस्टर के नाम में शुमार हैं, लेकिन कैटरीना ने भी अपना डेब्यू एक बी ग्रेड फिल्म ‘बूम’ से किया था. यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह से पिट गयी थी. इसके बाद ‘मैंने प्यार क्यों किया’, ‘न्यू यॉर्क’, ‘राजनीति’, ‘अजब प्रेम की गजब कहानी’, ‘जिन्दगी ना मिलेगी दोबारा’ और ‘एक था टाइगर’ जैसी फिल्मों ने उन्हें ऊचाईयों तक पहुंचाया.

3.अक्षय कुमार

अक्षय कुमार बॉलीवुड के हाईएस्ट पेड एक्टर्स में से एक हैं, लेकिन खिलाड़ी कुमार ने भी अपने फिल्मी करियर की शुरुआत में लगातार फ्लॉप फिल्में दी थी. इसके बाद अक्षय ने अपनी मेहनत और शानदार एक्शन के जरिये बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाई.

4.माधुरी दीक्षित

माधुरी दीक्षित ने 1984 में फिल्म ‘अबोध‘ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी, लेकिन उन्हें इस फिल्म से लोगों ने नोटिस नहीं किया. इसके बाद ‘तेजाब’ फिल्म ने माधुरी को सुपरस्टार बना दिया. उसके बाद तो जैसे माधुरी की कामयाब फिल्मों की लाइन ही लग गयी थी. ‘राम लखन’, ‘दिल’, ‘साजन’, ‘बेटा’, ’खलनायक’, ‘अंजाम’, ‘हम आपके हैं कौन’, ‘दिल तो पागल हैं’ और ‘देवदास’ जैसी फिल्मों में माधुरी ने अपनी एक्टिंग से जान डाल दी.
5.श्रद्धा कपूर
श्रद्धा कपूर ने अपने फिल्म की शुरुआत बिग बी के साथ फिल्म ‘तीन पत्ती’ में की. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह से पीटी. इसके बाद उन्हें ‘लव का द एंड’ फिल्म में काम करने का मौका मिला, लेकिन इस फिल्म को भी कामयाबी हासिल नहीं हुई. आखिरकार ‘आशिकी- 2’ को साइन कर श्रद्धा की किस्मत चमक उठी.
6.इमरान हाशमी
बॉलीवुड के ‘सीरियल किसर‘ इमरान हाशमी ‘मर्डर’ फिल्म के बाद ही लाइमलाइट में आए. 2004 में इमरान की ‘मर्डर’ ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ कमाई की, लेकिन इमरान की डेब्यू फिल्म ‘फुटपाथ’ बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह से पिटी थी.
7.रणबीर कपूर
संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘सांवरिया’ से रणबीर कपूर ने अपना डेब्यू किया था, लेकिन इस फिल्म को काफी बुरी ओपनिंग मिली. हालांकि रणबीर कपूर के अभिनय की तारीफ जरुर हुई थी, जिसके चलते उन्हें बॉलीवुड में कई सफल फिल्में मिली.
8.सोनम कपूर
रणबीर कपूर की तरह ही अनिल कपूर की लाडली सोनम कपूर ने ‘सांवरिया’ फिल्म से अपना डेब्यू किया लेकिन सोनम को कई सालों तक फ्लॉप फिल्मों का कलंक अपने माथे पर लेना पड़ा. आखिरकार फिल्म ‘रांझना’ और ‘नीरजा’ ने उन्हें सफलता के ऊंचे शिखर पर पहुंचाया.
9.आदित्य रॉय कपूर
आदित्य रॉय कपूर ने अपने करियार की शुरूआत बॉलीवुड के दो बड़े अभिनेता सलमान खान और अजय देवगन ने साथ ‘लंदन ड्रीम्स’ से की लेकिन इस फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर असफलता हासिल हुई. सलमान और अजय देवगन को तो इस असफलता से कोई फर्क नहीं पड़ा लेकिन आदित्य रॉय कपूर की इसके बाद की फिल्में भी नहीं चली. ‘एक्शन रीप्ले’ और ‘गुजारिश’ जैसी फिल्मों में उन्होंने कैमिया किया. आखिरकार उन्हें फिल्म ‘आशिकी -2’ ने बॉलीवुड में एक नयी राह दिलाई.
10. सलमान खान
बॉलीवुड के भाईजान सलमान खान की पहली डेब्यू फिल्म ‘बीवी हो तो ऐसी’ थी जो बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरी थी. इसके बाद उन्हें राजश्री की फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ मिली. फिल्म के रिलीज होने के बाद सलमान खान रातों रात स्टार हो गए. आज भी इनकी स्टारडम ऐसी हैं की फिल्में सिर्फ और सिर्फ सलमान खान के नाम की वजह से चलती हैं.

असली चालाक कौन

नर्मदा के तट पर ब्रह्मज्ञान विकसित हुआ है, नर्मदा का स्मरण किए बिना देश भर में पूजा नहीं होती, उस नर्मदा की जन्म भूमि मध्य प्रदेश को मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बेहद सुंदर बनाया है, इनके द्वारा चलाई गई नर्मदा यात्रा प्रशंसनीय है. यह काम इन्होंने बेहद चालाकी से किया, राजनीति में रहते हुये धर्म का काम अपने हाथ मे ले लिया और इसे जन आंदोलन बना दिया. जिस तरह आदि शंकराचार्य ने भारत के चारों अविकसित कोनों को विकसित करने का काम किया वही राजनीति में रहते शिवराज सिंह कर रहे हैं.

कानों को सुख और मस्तिष्क को शीतलता देने बाले ये उद्गार आर्ट ऑफ लिविंग के मुखिया श्री श्री रविशंकर ने भोपाल के टी टी नगर दशहरा मैदान में आयोजित फागोत्सव और महासत्संग में व्यक्त किए तो उपस्थित जन समुदाय जिसमें आम कम खास लोग ज्यादा थे भाव विभोर हो उठा. मारे आनंदातिरेक के जन समूह के नेत्रों से अश्रुधारा नहीं बही तो यह उसकी व्यावहारिकता नहीं बल्कि बेशर्मी, नास्तिकता और अनास्था ही मानी जानी चाहिए. इस खर्चीले और गैर जरूरी आयोजन के अपने अलग धार्मिक और राजनैतिक माने थे. अपनी धार्मिक आस्था को सार्वजनिक रूप से नर्मदा यात्रा के जरिये बड़े पैमाने पर व्यक्त करने उतारू हो आए शिवराज सिंह चौहान की तुलना अपनी बातों में चाटुकारिता का शहद लपेटते रविशंकर ने कहीं तो इस बात की पुष्टि आम लोगों ने कर ली कि दरअसल में नर्मदा यात्रा एक धार्मिक यात्रा ही है बाकी नशा मुक्ति,  प्रदूषण बगैरह के पुछल्ले तो यूं ही इसमें जड़ दिये गए हैं जिससे कोई उन पर धर्म प्रचार का खुला आरोप न लगाए.

जिस तरह आदि शंकराचार्य ने देश घूम घूम कर वेदों और वर्ण व्यवस्था का प्रचार किया था वही अब लोकतंत्र में शिवराज सिंह चौहान जैसे पिछड़े वर्ग से आए मुख्य मंत्री कर रहे हैं और यह सब करवाने बाली लाबी ब्राह्मणो की है, यह बात कतई हैरत की नहीं, बल्कि एक सनातनी षड्यंत्र है जब तक यह हकीकत पूरी तरह खुलकर सामने आएगी तब तक नर्मदा जी का अरबों क्यूसेक पानी बह चुका होगा.

भाजपा सत्ता में बने रहने का सबसे बेहतर तरीका धर्म को ही मानती रही है और राम मंदिर निर्माण के छोटे छोटे या क्षेत्रीय विकल्प ढूंढती रहती है पर अब तरीका उसने बदल दिया है. उसके नए धर्म युद्ध के अधिकांश सेनापति पिछड़े वर्ग के हैं जिनके मन से छोटी जाति का होने की हीनता अभी पूरी तरह से निकली नहीं है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसका अपवाद नहीं बल्कि श्रेष्ठ उदाहरण हैं जो केरल शंकर प्रतिमा का अनावरण करने भी जाते हैं और चुनावी भाषणों में शंकर के तीसरे नेत्र का भी जिक्र करते हैं.  गंगा को लेकर तो खासा बवाल मच ही रहा है. ऐसे में कोई यह कहे कि हम एक धर्म निरपेक्ष और लोकतान्त्रिक देश में रहते हैं तो यह उसकी मक्कारी और झूठ ही होगा.

रविशंकर ने भोपाल में जो कहा वह शिवराज सिंह की पीठ थपथपाने जैसी बात थी कि लगे रहो यूं ही धरम करम करते रहो हम धरम के ठेकेदार तुम्हारे साथ हैं. तुम्हारी यात्रा की तारीफ करने चार दिन पहले बाबा रामदेव आए थे और हमारे चार दिन बाद दलाई लामा भी आएंगे, कांग्रेसियों और आम आदमी पार्टी के लोगों की परवाह मत करना जो यह कहते फिर रहे हैं कि बाबा लोग तो मध्य प्रदेश अपने अपने आश्रमों के लिए साइट यानि उपयुक्त जगह देखने आते हैं. शिवराज सिंह चौहान की छवि कुछ दिन पहले तक एक कल्याणकारी योजनाओं के लिए जाने बाले सी एम की हुआ करती थी जो अब बदलकर धार्मिक ( स्वभाविक है हिन्दुत्व ) नेता की होती जा रही है और यह काम धर्मगुरु पूरी दिलचस्पी से कर रहे हैं इनके पीछे कौन है अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं. हालांकि खुद की तुलना आदि शंकराचार्य से करने और नर्मदा यात्रा को एकदम व सीधे धार्मिक कह देने से वे असहज होकर यह सफाई भी देने लगते हैं कि नहीं इस यात्रा का एक मकसद यह और एक वह भी है तो उनकी मासूमियत और बेचारगी पर तरस भी आता है. असल मकसद बहुत साफ है कि कैसे भी हो पंडावाद बनाए रखना है.

वोट की ताकत का इस्तेमाल हिन्दुत्व के प्रचार प्रसार के लिए भी करना है अगर मध्य प्रदेश में हर साल 7-8 लाख बच्चे स्कूल की पढ़ाई बीच में छोडकर चले जाते हैं तो उनकी चिंता में दुबले नहीं होना है वे गरीब दलित आदिवासी जिनमे 5-10 फीसदी सवर्ण भी हैं अपने कर्मों के सजा भुगत रहे हैं उनकी नियति यही है ब्रह्मा ने उनके भाग्य में अनपढ़ गंवार बने रहना ही लिखा है तुम तो धर्म कार्य करो खुद को पी एम की तरह जनता का सेवक कहते रहो और आदि शंकराचार्य की मूर्ति बनवाने घर घर से धातुएं इकट्ठा करो, आदि शंकराचार्य को स्कूली पाठ्यक्रम मे घुसेड़ दो उनका जीवन चरित बच्चों को बताया जाना जरूरी है जिससे उन्हें धर्म की अहमियत समझ आए नहीं तो तुम्हारी कुर्सी के पाये हिलने लगेंगे.

कल को कोई कैलाश विजयवर्गीय, बाबूलाल गौर या उमा भारती हल्ला मचाने लगें तो हमारे पास मत आना. सार इसी में है कि श्री श्री जैसे धर्म गुरुओं के चरणों में मंत्री मण्डल सहित सरेआम माथा नवाओ, उन्हे सिंहासननुमा आसन दो और खुद उनसे कुछ सेंटीमीटर नीचे व कम कीमत वाली कुर्सी पर बैठो, नहीं तो इस कुर्सी दौड़ से कब कैसे और क्यों बाहर हो जाओगे इस सवाल का जबाब ढूंढते रह जाओगे. 

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें