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उड़ने पर रोक

शिव सेना के एक सांसद रवींद्र गायकवाड़ ने इंडियन एयरलाइंस की एक उड़ान में वही किया, जो सफेद खादीपोश नेता लोग अकसर बसों और बाजारों में करते हैं. उन्होंने बिजनेस क्लास में बैठना चाहा था, जबकि हवाईजहाज में बिजनेस क्लास ही नहीं था. इस पर वे बिफर गए और तूतूमैंमैं मारपीट पर उतर आई. उन्होंने इंडियन एयरलाइंस के एक अफसर को पकड़ कर कपड़े फाड़ डाले और चप्पल उतार कर उस की पिटाई कर डाली. बाद में भी उन्हें कोई अफसोस नहीं हुआ. वे यह कहते रहे कि वे कोई भारतीय जनता पार्टी के सांसद थोडे़ ही हैं कि किसी से डर कर दुबक कर रहें. वे टीवी स्क्रीनों पर चमक कर आते रहे. उन के खिलाफ रिपोर्टें तो दर्ज हो गई हैं, पर सवाल उठता है कि हमारे नेता, जो जनता से हाथ जोड़ कर वोट मांगने के आदी हैं, कैसे व क्यों इस तरह बेकाबू हो जाते हैं?

आमतौर पर हिंसा हमारी नसनस में भरी होती है. बचपन से ही आम घरों में मांएं अपने बच्चों को पीटती रहती हैं. हर बच्चा अपने पिता से अपनी मां को पिटते देखता है और मां को भाईबहनों को पीटते. वह अपने भाइयों को पीटने लगता है. जिन घरों में शिक्षा कम होती है, वहां तो हर बात पर मारपीट का सहारा लिया जाता है. बड़े होने पर दोस्तों को दुश्मन बनते देखना और मारपीट पर उतरना हर गलीगांव में देखा जा सकता है. जीवन मारपीट के इर्दगिर्द ही घूमता नजर आता है. इसी मारपीट की ताकत पर नेतागीरी मिलती है और इसी के बल पर लोग पंच, सरपंच, विधायक, सांसद बनते हैं. दूसरे पक्ष वालों को मारपीट कर चुप कराना जीवन का हिस्सा होता है. इस के बिना नेता रह ही नहीं सकता. हमारे राजाओं और जमींदारों ने ही नहीं, थानेदारों, बाबुओं दुकानदारों, महाजनों, सूदखोरों ने मारपीट को ही धंधे का हिस्सा बना रखा है.

रवींद्र गायकवाड़ ने यदि किसी बस में या अपनी ही गाड़ी के ड्राइवर के साथ ऐसा किया होता, तो खबर तक नहीं बनती, क्योंकि यह तो हर रोज होता रहता है. चमचमाते एयरपोर्टों पर, जहां सफेदपोश लोग आते हैं, वहां ये नजारे नहीं दिखते, क्योंकि वहां के लोग सही बात कर के अपनी मांग रखना जानते हैं. देश के बड़े हिस्से में बातबात पर ‘देख लूंगा’ वाली भाषा ही चलती है.यहां तो ‘समरथ को नहीं दोष गुंसाईं’ वाली बात इस तरह मन में बैठी हुई है कि जरा सा सामने वाला ताकतवर हुआ नहीं कि सब लोग उस की चरणवंदना करने लगते हैं. जब देशभर में इस को मानसम्मान मिल रहा हो, गौरक्षा के नाम पर सड़क पर ट्रक  वालों को पीटा जा रहा हो, हाथ में हाथ डाले चल रहे लड़केलड़की को पीटने का लाइसैंस दे दिया गया हो, इंटरनैट पर मांबहन की गंदी गाली देशभक्ति के नाम पर दी जा सकती हो, वहां रवींद्र गायकवाड़ ने क्या गलत किया है?

आयुष्मान और भूमि की वापसी का नया अंदाज

आयुष्मान खुराना और भूमि पडनेकर की जोड़ी को दर्शकों ने 'दम लगा के हईशा' फिल्म में काफी पसंद किया था. अब ये जोड़ी एक बार फिर अपने फैंस को गुदगुदाने के लिए तैयार है. आनंद एल राय की फिल्म 'शुभ मंगल सावधान' की रिलीज डेट आ गई है.

आयुष्मान और भूमि की 'शुभ मंगल सावधान' एक रोमांटिक कॉमेडी फिल्म है. ये आरएस प्रसन्ना द्वारा निर्देशित तमिल कॉमेडी फिल्म 'कल्याना समयल साधम' का हिन्दी रीमेक है. जिसे आनंद एल राय और एरोस ने साथ में मिलकर प्रोड्यूस किया है.

इस फिल्म में सिर्फ आयुष्मान और भूमि की जोड़ी दोबारा देखने को मिलेगी, बल्कि 'दम लगा के हईशा' फिल्म के कंपोजर अनु मलिक और गीतकार वरुण ग्रोवर भी इस फिल्म में अपने गानों का जादू चलाएंगे. मोनाली ठाकुर और कुमार सानू ने फिल्म के लिए कई गाने गाए हैं. इन सबकी जोड़ी 2015 में आई फिल्म “दम लगा के हईशा” में कमाल दिखा चुकी है. इस फिल्म ने 63वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में तीन अवॉर्ड अपने नाम किए थे.

इतने काबिल लोगों के साथ आने से दर्शकों की फिल्म से उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं. फिल्म 1 सितंबर को रिलीज होगी. इस दिन अजय देवगन, इमरान हाशमी, ईशा गुप्ता और इलिना डीक्रूज की 'बादशाहो' भी रिलीज होगी. बादशाहो को 'वंस अपॉन अ टाइम इन मुंबई दोबारा' डायरेक्ट कर चुके मिलन लुथरिया डायरेक्ट कर रहे हैं.

आपकी छुट्टियों को और भी मजेदार बना देंगे ये ऐप्स

गर्मी ने तो दस्तक दे दिया है. अप्रैल का महीना अब खत्म होने को है और गर्मियों की छुट्टियां शुरू होने वाली हैं. ऐसे में आप कहीं जाने का प्लान भी बना रहे होंगे. कहीं घूमने जाने से पहले हजार चीजों के बारे में सोचना पड़ता है. उन्हीं चीजों में फोन की चार्जिंग, रुकने की जगह, खाने-पीने का इंतजाम शामिल हैं. तो चलिए आज हम आपको ऐप्स और गैजेट्स के बारे में बताते हैं जो गर्मी की छुट्टियों में आपके साथी बन आपकी मदद करेंगे.

सूटकेस चार्जर

जरा सोचिए कि आप एयरपोर्ट या रेलवे स्टेशन पर हैं और आपको फोन चार्ज करने की जरूरत पड़ जाए. ऐसे में आपको पूरे लगेज को लेकर घूमना होगा, लेकिन एक सूटकेस ऐसा भी है जिससे आप अपने फोन को चार्ज कर सकते हैं. आप स्मार्टलगेज सूटकेस खरीद सकते हैं जिसमें यूएसबी चार्जर और जीपीएस है. इसकी मदद से आप कहीं भी अपना फोन चार्ज कर सकते हैं.

ओवरनाइट ऐप

यह ऐप आपको 24 घंटे होटल खोजने में मदद करेगा. इसकी मदद से आप कुछ घंटों और रात के लिए होटल बुक कर सकते हैं. इसकी मदद से आपको 10 मिनट या उससे कम समय में होटल में मिल सकता है.

वीएससीओ (VSCO)

यदि आप भी अपनी छुट्टियों की फोटो को यादगार बनाना चाहते हैं या फिर कमजोर कैमरे वाले मोबाइल से शानदार फोटो इंस्टाग्राम पर पोस्ट करना चाहते हैं तो आप vsco ऐप को यूज कर सकते हैं. यह एक बेहतरीन फोटो एडिटिंग ऐप है. इसमें दिए गए एडवांस्ड फीचर की मदद से आप फोटो की लाइव एडिटिंग कर सकते हैं.

गो टेना (goTenna)

इस डिवाइस की मदद से आप बिना किसी मोबाइल नेटवर्क के टेक्स्ट मैसेज भेज सकते हैं और अपनी लोकेशन भी बता सकते हैं. यह डिवाइस एंड्रॉयड और आईओएस दोनों फोन से कनेक्ट हो सकती है.

जी स्पॉटिंग (G.Spotting)

यह ऐप पूरी तरह से एक ट्रेवल डायरेक्टरी की तरह है. दुनिया भर की 27 जगहों की पूरी जानकारी इस ऐप में है. यह ऐप आपको होटल,  दुकानों के साथ-साथ वहां के पहनावे के बारे में भी बताएगा.

फ्री वाई-फाई का इस्तेमाल करते समय इन बातों का रखें ध्यान

अगर आप भी सार्वजनिक जगहों पर मिलने वाले फ्री वाई-फाई नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं, तो आपको सावधान रहना चाहिए. सार्वजनिक वाई-फाई अनसेफ हो सकते हैं और हैकर्स बहुत आसानी से आपके स्मार्टफोन से कई संवेदनशील जानकारियां चुरा सकते हैं. इसलिए फ्री वाई-फाई नेटवर्क का इस्तेमाल करने से पहले इन बातों को समझ लेना बहुत आवश्यक है.

ऐंटी-वाइरस टूल्स इस्तेमाल करें

पब्लिक वाई-फाई इस्तेमाल करने से पहले फोन में सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर इंस्टॉल कर लें. ऐंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम में मैलवेयर आ सकते हैं. ऐसे में कोई ऐसा ऐंटीवाइरस डालें जिसमें फायरवॉल, मैलवेयर स्कैनिंग और रिमूवल जैसे फीचर्स हों. पब्लिक वाई-फाई पर कनेक्ट करने पर अन्य डिवाइसेज के मैलवेयर आपके स्मार्टफोन पर आ सकते हैं. हैकर्स इन्हें जानबूझकर भी आपके फोन में भेज सकते हैं.

बैंकिंग और शॉपिंग न करें

पब्लिक वाई-फाई के जरिये ऑनलाइन बैंकिंग या शॉपिंग नहीं करना चाहिए. हैकर्स आपके अकाउंट्स की डीटेल्स हैक कर सकते हैं. अगर कोई जरूरी ट्रांजैक्शन करनी हो, तो मोबाइल डेटा इस्तेमाल करें या फिर वीपीएन इस्तेमाल करें. ब्राउजर पर नेट बैंकिंग करने के बजाय बैंक के ऑफिशियल ऐप का इस्तेमाल करें क्योंकि वह एनक्रिप्टेड होता है.

ऑपरेटिंग सिस्टम अपडेटेड रखें

अपने फोन के ऑपरेटिंग सिस्टम को हमेशा अपडेट रखें. कंपनियां समय-समय पर सिक्योरिटी अपडेट्स जारी करती हैं, जो खामियों को दूर करते हैं और वायरस से फोन को बचाते हैं.

टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन अपनाएं

अपने सभी ऑनलाइन अकाउंट्स जैसे जीमेल और बैंक अकाउंट्स पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन ऑन कर दीजिए. इससे सामान्य पासवर्ड के अलावा आपको मोबाइल फोन पर आने वाला ओटीपी भी डालना होता है. यह इसलिए जरूरी है क्योंकि अगर किसी ने पब्लिक वाई-फाई के जरिए आपके पासवर्ड का पता लगा लिया है, तो भी वह कुछ नहीं कर पाएगा.

स्लो वाई-फाई में रिस्क है

वाई-फाई नेटवर्क में कनेक्शन स्लो हो, तो तुरंत डिस्कनेक्ट कर दें. अगर साइन-इन पेज पर जाने में परेशानी हो रही हो, तो भी फोन को डिस्कनेक्ट करें. वाइरस की चपेट में राउटर के आने पर भी वाई-फाई की स्पीड कम हो सकती है. हो सकता है कि आप मेन राउटर के बजाय किसी अन्य राउटर से कनेक्ट हो गए हों.

हो सकता है कि आप डेटा को किसी अन्य डिवाइस के जरिए ऐक्सेस कर रहे हों. हैकर्स ट्रैक करते हैं कि आस-पास कोई वाई-फाई सिग्नल तो नहीं है. वे अपने पीसी को फेक राउटर में बदल देते हैं, जैसे ही कोई मेन राउटर के बजाय उनके डिवाइस से कनेक्ट करता है, वे उसके जरिए भेजे जाने वाले सारे डेटा को कॉपी कर लेते हैं.

राजनाथ सिंह पर सवालिया निशान

देश की सीमा पर कश्मीर में बढ़ती आतंकी घटनायें और देश के अंदर बढ़ती नक्सलवादी घटनाओं को लेकर अब विरोधी ही नहीं, भाजपा के समर्थक भी केन्द्र सरकार के गृह मंत्रालय और केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से नाराज नजर आ रहे हैं. छत्तीसगढ में नक्सली हमले में 25 जवानों के शहीद होने और कश्मीर में स्कूली बच्चों के पत्थरबाजी में शामिल होने के कारण केन्द्र सरकार के असफल होने की बात सामने आ रही है. अब भाजपा के समर्थक भी सोशल मीडिया पर ऐसे संदेश देने लगे हैं कि गृह मंत्रालय आतंकवाद और नक्सलवाद को संभालने में असफल हो गया है. दबी जुबान में सोशल मीडिया में यह बात भी सामने आ रही है कि अगर गृह मंत्रालय इस तरह की घटनायें रोक नहीं सकता तो उसमें व्यापक फेरबदल की जरूरत है.

असल में भाजपा के समर्थक केन्द्र सरकार के असफल होने की बात को मानना नहीं चाहते, ऐसे में वह गृह मंत्रालय को निशाने पर ले रहे हैं. केवल छत्तीसगढ़ में ही फरवरी 2014 में 2 बार इस तरह की घटनायें घटी. दोनों घटनाओं में 22 से अधिक पुलिसकर्मियों की हत्या की गई थी. मार्च 2017 में 12 जवान मारे गये और 24 अप्रैल की घटना में 25 जवान शहीद हो गये. हर हमले के बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह हमले को चुनौती के रूप में देखते हैं. इसके बाद फिर हमला हो जाता है. कुछ इसी तरह से कश्मीर में भी हो रहा है. कश्मीर में बच्चों के स्कूल लबें समय तक बंद रहे. इसके बाद खुले तो एक सप्ताह में ही स्कूली बच्चे वापस पत्थरबाजी करने लगे. तब सरकार को स्कूल फिर बंद करने पड़ गये.

सरकार के तमाम दावों और प्रयासों के बाद भी कश्मीर में शांति बहाली नहीं हो पा रही है. कश्मीर में शांति बहाली के नाम पर ही भाजपा ने पीडीपी के साथ मिलकर सरकार बनाई. दावा यह किया गया कि इससे कश्मीर में शांति बहाली हो सकेगी. पीडीपी और भाजपा के बीच कभी अच्छे संबंध नहीं रहे. वैचारिक रूप से दोनों अलग विचारधारा को मानते हैं. इनके एक साथ होने से भी कश्मीर पर कोई सार्थक प्रभाव नहीं पड़ा है. नोटबंदी को लेकर सरकार ने कहा कि इससे कश्मीर में अमन कामय होगा. ऐसे में अब यह सवाल मुखर होने लगा है कि भाजपा सरकार आतंकवाद और नक्सलवाद दोनों को लेकर असफल हो चुकी है.

मोदी समर्थक इसे केन्द्र सरकार के असफल होने के जगह पर गृह मंत्रालय के असफल होने की बात मान रहे हैं. ऐसे में साफ है कि इसको लेकर निशाने पर गृहमंत्री राजनाथ सिंह हैं. ऐसे में यह संभव है कि आने वाले दिनों में केन्द्र सरकार इसको लेकर कोई बड़ा फैसला ले. उत्तर प्रदेश में चुनावी जीत के बाद भाजपा की जिम्मेदारियों में कई गुने की बढोत्तरी हो चुकी है. दूसरी तरफ खुफिया सूत्र यह मानते हैं कि उत्तर प्रदेश में भगवा वेश में आतंकवादी किसी घटना को अंजाम दे सकते हैं. ऐसे में गृहमंत्रालय के सामने नई चुनौतियों के ढेर लगे हैं. इनपर खरे उतराना सरल नहीं है. राजनीतिक जानकार यह मानते हैं कि गृह मंत्रालय को जिम्मेदार मानना भाजपा की अंदरूनी राजनीति का हिस्सा भी हो सकता है.   

‘प्रवचन मोड’ में योगी आदित्यनाथ

योगी से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने योगी आदित्यनाथ अभी भी अपने ‘प्रवचन मोड’ से बाहर नहीं आ पा रहे हैं. योगी आदित्यनाथ को लगता है कि धर्म के प्रचार से ही प्रदेश और देश के सारे दुख द्ररिद्र दूर हो जायेंगे. बिजली को गांव गांव तक पहुंचाने की बात हो या गांव में पंचायती राज को मजबूत करने की, मुख्यमंत्री योगी हर जगह पर अपने ‘प्रवचन मोड’ में ही बात की शुरुआत करते हैं. ‘प्रवचन मोड’ से खुद योगी की गंभीर बात पीछे चली जाती है, सुनने वाले लोगों प्रवचन ही याद रहता है. राष्ट्रीय पंचायत दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री योगी ने अपने भाषण में तमाम तरह की बातें की. लोगों को यह याद रहा कि मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘द्वापर युग से हो रहा है कैशलेस ट्रांजेक्शन’.

गांव में कैशलेस इकानोमी को बढ़ावा देने की बात करते हुये मुख्यमंत्री योगी ने कहा      ‘सुदामा द्वारिका में कृष्ण से अपनी बात खुलकर नहीं कह सके. कृष्ण भी मौन रहे. सुदामा उदास होकर लौट आये. तो देखा कि उनकी झोपड़ी की जगह महल है. भारत में तो कैशलेस ट्राजेक्शन की पंरपरा 5 हजार साल पुरानी है. आज के दौर का बड़े से बड़ा अर्थशास्त्री इस कैशलेस ट्रांजेक्शन की बात समझ नहीं पा रहा है. योगी के अफसर जरूर उसी तरह से हां में हां मिला रहे हैं जैसे पहले वाले मिलाया करते थे.

अगर कैशलेस ट्रांजेक्शन इतना पुराना है तो धर्म के नाम पर पैसे का चढ़ावा क्यों? मंदिरों में दबा सोना चांदी क्यों? मंदिरों पर कब्जे को लेकर इतने संघर्ष क्यों? इंसान के पैदा होने से लेकर मरने तक के कर्मकांड कभी कैशलेस पूरे होते हैं क्या? यह सवाल बताते हैं कि कैशलेस का धर्म में क्या स्थान रहा है. इस देश में हर बड़े आदमी के लिये कैशलेस की व्यवस्था रहती है. उसकी साख पर सारे काम होते हैं. मुख्यमंत्री के नाम पर सारे काम बिना पैसे के हो सकते हैं. पर आम अदमी को बिना पैसे के एक कप चाय भी नसीब नहीं हो सकती. हाडतोड़ मेहनत करने के बाद मजदूर को 4 पैसे मिलते हैं तो उसके चेहरे पर खुशी चमकती है.

मुख्यमंत्री का प्रवचन मोड यहीं पर नहीं कायम रहा. वह जब बिजली की आपूर्ति विषय पर अपनी राय रख रहे थे तो इसी मोड में वापस चले गये. वह कहते हैं ‘गांव गांव 24 घंटे बिजली पहुंच सकती है. जरूरत इस बात की है कि बिजली की चोरी रूक जाये.’ यह बात सही है कि बिजली की चोरी, लाइन लौस, समय में बिल का भुगतान न करने की आदत बिजली पर भारी पड़ती है. यह अपने से रुक जायेगा, यह वैसे ही है जैसे पुलिस व्यवस्था कि बात करते समय यह कहा जाये कि लोग अपराध करना छोड़ दें तो समाज में अपराध कम हो जायेंगे.

सुनने में यह अच्छा लगता है कि इस तरह से समाज सुधर सकता है. ऐसा हो सकेगा? यह समझ में आने वाली बात नहीं है. इस देश का हर आदमी धर्म से डरता है. खुद को सबसे बड़ा धार्मिक मानता है. इसके बाद भी यहां न तो भ्रष्टाचार कम है और न गलत काम बंद है. अगर धर्म के प्रवचन से ही समाज में सुधार होता तो शायद कानून व्यवस्था को चलाने के लिये सरकार की जरूरत नहीं होती. आज प्रदेश की सबसे बड़ी कुर्सी पर योगी बैठे हैं तो चारों तरफ लोग इनकी हां में हां मिला रहे है. ऐसे में योगी को लग सकता है कि उनके प्रवचन से शासन, सत्ता और व्यवस्था में सुधार हो जायेगा. असल में ऐसा होगा यह तय नहीं है.            

क्रिकेट की नई सनसनी हैं 9 साल की अनादि

प्रतिभा किसी उम्र की मोहताज नहीं होती है. 9 साल की अनादि तागड़े ने इस बात को साकार कर दिखाया है. इंडियन क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन की प्रतिभा भी दुनिया ने 15 साल की उम्र में देखी थी लेकिन मध्य प्रदेश के इंदौर की अनादि 9 साल की उम्र में ही सफलता की नई इबारत लिख रही हैं.

दरअसल 9 वर्षीय आनादि का चयन मध्य प्रदेश की अंडर-19 महिला क्रिकेट टीम में हुआ है. सबसे हैरानी की बात यह है कि वह पहली बार किसी ट्रायल में शामिल हुई हैं. चौथी कक्षा में पढ़ने वाली अनादि तेज गेंदबाजी करती हैं. 9 साल की अनादि अपने से 10 साल बड़ी खिलाड़ियों के लिए खौफ का पर्याय बन गई हैं.

अनादि कुछ दिन पहले मध्य प्रदेश की अंडर-19 महिला क्रिकेट टीम के चयन के लिए आयोजित ट्रायल में शामिल हुईं. उनकी गेंदबाजी देखकर सभी चयनकर्ता हैरान रह गए. उनकी गेंदों की लाइन-लेन्थ देखकर बल्लेबाजों के साथ-साथ चयनकर्ता भी अचरज में पड़ गए. उनके शानदार प्रदर्शन के कारण चयनकर्ताओं ने छोटी उम्र को दरकिनार कर अनादि का टीम में चयन कर लिया.

मां ने दी ट्रेनिंग

अनादि की मां दीप्ति तागड़े भी एक अच्छी क्रिकेटर रह चुकी हैं. उन्हें जब अपनी बेटी के लिए कोई उपयुक्त कोच नहीं मिला तो उन्होंने अनादि को प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी खुद ही उठा ली. दो साल तक बेटी को क्रिकेट का बेसिक प्रशिक्षण देने के बाद उन्होंने अनादि को हैप्पी वाण्डरर्स क्लब ज्वाइन कराया. जहां ट्रेनिंग लेते वक्त ही उनका स्टेट चैंपियनशिप के लिए चयन हो गया.

आईपीएल में सीखी फील्ड प्लेसिंग

हाल ही में अनादि ने अपने पिता से इंदौर में आयोजित आईपीएल मैच देखने की जिद की. बेटी की बात मानते हुए पिता उसे मैच दिखाने ले गए जहां अनादि मैच का लुत्फ उठाने के बजाए इस बात पर नजर रख रही थी कि ईशांत शर्मा अपनी गेंदबाजी के दौरान फील्ड प्लेसिंग पर नजर रख रही थी.

आधी रात में भी कर सकती हैं बॉलिंग

अनादि बॉलिंग को लेकर बेहद जुनूनी हैं. उन्हें आधी रात को भी यदि उठाकर बॉलिंग करने को कहा जाए तो भी वह इसके लिए तैयार रहती हैं. उनकी प्रतिभा को देखकर ऐसा लगता है कि वह एक दिन जरूर राष्ट्रीय टीम में शामिल होंगी और देश के साथ-साथ अपने प्रदेश का नाम रोशन करेंगी.

VIDEO : सुनसान सड़क, एक लड़की को तीन लड़कों ने घेरा और फिर…

हाल ही में दिल्ली पुलिस की वार्षिक रिपोर्ट में एक बड़ा खुलासा हुआ है, जिस के अनुसार हर घंटे एक महिला अपराध का शिकार हो रही है. चाहे वह दुष्कर्म की घटना हो या फिर छेड़छाड़ का मामला. साथ ही यह भी खुलासा किया गया है कि महिलाओं से दुष्कर्म की करीब 97% घटनाओं में उन के जानकारों का ही हाथ होता है. वहीं ऐसी वारदातों में 3% अपरिचित आरोपी निकले. हकीकत यह है कि दुष्कर्म या बलात्कार के ज्यादातर मामले लोकलाज के भय से या तो दबा दिए जाते हैं या उन की रिपोर्ट दर्ज नहीं होती, लेकिन दुष्कर्म के बाद जो मानसिक पीड़ा या त्रासदी महिला को झेलनी पड़ती है वह अकल्पनीय है.

सब से बड़ा सवाल यह है कि एक बलात्कारी किन मानसिक परिस्थितियों में इस तरह के कुकृत्य को अंजाम देता है? क्या वह उस के बाद होने वाले परिणामों को भूल जाता है या फिर उन के बारे में सोचता ही नहीं. दुष्कर्म या बलात्कार सब से घृणास्पद कुकृत्यों में शामिल है. ऐसे कुकृत्यों को अंजाम देने के बाद कोई बहादुर नहीं बन जाता या फिर समाज उसे कोई बड़ा तमगा नहीं दे देता. इस के उलट सचाईर् सामने आने पर वह घृणा या दुराव का ही शिकार होता है. उस की सोशल आईडैंटिटी खतरे में पड़ जाती है और उसे सजा के साथसाथ रिजैक्शन भी भोगना पड़ता है. हद तो तब होती है जब ये दुष्कर्मी सरेआम सीना ठोक कर ऐसे घूमते हैं मानो उन्होंने कोई बड़ा तीर मारा हो. देश के सुदूर ग्रामीण आदिवासी इलाकों में उच्चजाति के लोगों द्वारा दलित आदिवासी महिलाओं की अस्मत लूटने और उन्हें जिंदा जलाए जाने की खबरें सुर्खियां बनती रहती हैं पर पीड़ाजनक स्थिति तब होती है जब ऐसे लोग अपने कुकृत्यों का सरेआम ढिंढोरा पीटते हैं. पुलिस और कानून को धताबता कर ये अपनी जांबाजी में एक तमगा और जोड़ लेते हैं, पर यह विडंबना है कि हम आंख मूंदे इन बलात्कारियों का साथ देते हैं.

दुष्कर्मियों का कोई नैतिक बल नहीं होता. न ही कोई चारित्रिक संबल. असंतुलित भावनाओं के उन्माद में वे दुष्कर्म के दलदल में जा गिरते हैं पर एक सच यह भी है कि इस क्षणिक ज्वार के ठंडा पड़ते ही वे अपने पुराने स्वरूप में लौट आते हैं और ताउम्र पश्चात्ताप व ग्लानि की पीड़ा में अपनी बची जिंदगी गुजार देते हैं. इस की सब से बड़ी बानगी दिल्ली में घटा निर्भया कांड है. बलात्कारियों ने क्षणिक आवेश में वह कर डाला जो उन्हें नहीं करना चाहिए था. इस के बदले उन आरोपियों को मिला क्या? केवल सामाजिक बहिष्कार, अलगाव, घृणा और सजा. सामाजिक बहिष्कार इन आरोपियों पर इस कदर हावी हुआ कि उन में से एक ने तो खुदखुशी कर ली. बाकी या तो सजा भुगत रहे हैं या अदालती ट्रायल के चक्कर काटते हुए भारी मानसिक तनाव व कुंठा से गुजर रहे हैं. अपराध छोटा हो या बड़ा उसे कभी सामाजिक स्वीकृति नहीं मिलती. दुष्कर्मियों के लिए तो समाज में कोई स्थान है ही नहीं. अपराध हमेशा कुंठा, पीड़ा व सजा ही दिलवाता है, सम्मान नहीं.

हमें चाहिए कि इन दुराचारियों को किसी भी स्तर पर बिलकुल न सराहें और न सहें. इन्हें बढ़ावा तभी मिलता है जब हम मौन साध लेते हैं. हमारी दहाड़ इन के हौसले पस्त करेगी. सामाजिक और पारिवारिक बहिष्कार से ये अलगथलग पडे़ंगे और इन का वहशीपन कमजोर पड़ेगा.ऐसे प्रयास सिर्फ अपराधियों की तरफ से ही नहीं करने होंगे बल्कि हमें महिलाओं का पक्ष भी मजबूत करना होगा. दुष्कर्म की शिकार पीडि़ताओं के लिए स्वाभिमान कार्यक्रम चलाने होंगे. उन के भीतर के ग्लानि और कुंठा के भाव को स्नेह व प्रेम से निकाल ना होगा. उन्हें समाज व परिवार में दोबारा उचित स्थान दिलाने के लिए उन का मनोबल बढ़ाना होगा. तभी हम इन बलात्कारियों को मजबूत इरादों वाली महिलाओं से टक्कर दे सकेंगे. बलात्कारियों का बहिष्कार और पीडि़ताओं की सम्मानजनक वापसी उन के होश ठिकाने लगाने का सब से बड़ा मूलमंत्र है.

खैर आज हम आपको जो वीडियो दिखाने जा रहे हैं वो ऊपर लिखी कहानी से थोड़ा अलग है. एक सुनसान बस स्टॉप पर एक अकेली लड़की को तीन लड़कों ने घेर लिया और उनके अंदर का मर्द जाग उठा. फिर…जो हुआ उसे आप इस वीडियो में देख सकते हैं.

ट्रेवलिंग के दौरान पैसा बचाने में मदद करेंगे ये टिप्स

अब गर्मियां आ गई है, और छुट्टीयां भी चल रही हैं. तो आज कल सभी लोग अपने परिवार के साथ कहीं घूमने तो जाएंगे ही. कुछ ऐसी ही टिप्स जिनके द्वारा आप ट्रेवलिंग के दौरान पैसा बचा सकते हैं.

पॉड्स इन होटल

'पॉड होटल' का सबसे पहले चलन जापान में शुरू हुआ था, जो अब सभी जगहों पर पहुंच चुका है. इसमें होटल यात्रियों को रूम्स की जगह कम किराये में पॉड्स ऑफर किए जाते हैं. पॉड छोटा और कॉम्पैक्ट कैप्सूल की तरह होता है, जहां यात्री आराम कर सकता है. मुंबई में खुले सबसे पहले पॉड होटल का नाम 'अर्बन पॉड' है. यह 140 पॉड्स ऑफर करता है जिसमें आपको बेड, एसी, वाई फाई, टीवी, यूएसबी पोर्ट और पर्सनल सेफ समेत कई फैसिलटी मिलेगी.

इन पॉड्स में एक रात रुकने के लिए 2,030 रुपये चुकाने पड़ सकते हैं, जिसके साथ ब्रेकफास्ट और शेयर्ड वॉशरूम्स मिलेगा. यदि आप मुंबई में थोड़े समय के लिए रुकना चाहते हैं तो यह आपके लिए पैसा बचाने का एक ऑप्शन हो सकता है.

सोशल मीडिया

आप सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके भी पैसा बचा सकते हैं. इसके लिए एयरलाइन कंपनी के ट्विटर हैंडल पर साइन-इन करना होगा, जहां आपको लास्ट मिनट फ्लाइट डिस्काउंट और फ्लैश सेल के बेनिफिट्स मिल सकते हैं. यहां पर आपको एयरलाइन और होटल द्वारा चलाए गए ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर हैशटैग कैंपेन को जीतने का मौका भी मिलेगा. इसके अलावा स्टेट टूरिज्म के फेसबुक पेज पर भी कई तरह के डिस्काउंट ऑफर किए जाते हैं.

बेस्ट एयरफेयर

गूगल फ्लाइट्स, Goibibo और मेकमायट्रिप के जरिए आप मल्टीपल एयरलाइन और सिंगल एयरलाइन कंपनियों में से सबसे सस्ती फ्लाइट का चुनाव कर सकते हैं. इसके अलावा आप Deal4flight.com को भी चेक कर सकते हैं, जहां आपको लिस्टिंग डिस्काउंट्स, पेबैक्स और क्रेडिट कार्ड पर डिस्काउंट मिल सकता है. लास्ट मिनट बुकिंग पर भी आपको यहां बड़ा डिस्काउंट मिल सकता है. इसके अलावा आप ट्रैवल एग्रीगेटर साइट पर प्राइस अलर्ट के लिए साइन अप कर सकते हैं. इसके बाद यदि आपकी फ्लाइट के 24 घंटे पहले किसी अन्य फ्लाइट की किराये में कटौती होती है तो आप पुरानी फ्लाइट का टिकट कैंसल कर नई फ्लाइट बुक कर सकते हैं.

घंटों के हिसाब से करे पेमेंट

माइक्रो स्टे का प्रचलन भी भारत में धीरे-धीरे जोर पकड़ रहा है. भारत में कई होटल्स, वेबसाइट और ऐप्स भी रेगुलर कॉस्ट के स्थान पर घंटों के हिसाब से पेमेंट का ऑप्शन दे रहे हैं. बिजनेस ट्रैवलर और किसी स्थान पर कुछ घंटों के लिए समय बिताने के लिए यह पैसा बचाने का सबसे बढ़िया तरीका है. आप इसके लिए 6 Hourly, Chatur Musafir, Frotels और MiStay जैसी वेबसाइट के जरिए बुकिंग कर सकते हैं.

डिस्काउंट साइट्स

Nearbuy.com, Coupondunia.com और Dealsandyou.com जैसी कुछ साइट्स आपको ट्रैवल एग्रीगेटर की तरह डिस्काउंट और डील ऑफर करती हैं. इसमें आपको होटल, फ्लाइट, रेल बुकिंग, कैब बुकिंग जैसी कई और चीजें एक ही जगह मिल जाएंगी. इसलिए यदि आप किसी ट्रिप का प्लान कर रहे हैं तो आप एकबार इन साइट्स को चेक कर सकते हैं.

101 की उम्र में जीता 100 मीटर की दौड़ में गोल्ड

भारत की 101 वर्षीय धाविका मान कौर ने न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में वर्ल्ड मास्टर्स गेम्स की 100 मीटर फर्राटा स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीत लिया. चंडीगढ़ की रहने वाली मान कौर स्पर्धा के 100 या अधिक आयु वर्ग में अकेली प्रतिस्पर्धी थीं और उन्होंने एक मिनट 14 सेकंड में रेस पूरी कर स्वर्ण पदक हासिल किया.

टूर्नामेंट में आगे वह 200 मीटर रेस में भी हिस्सा लेंगी. इसके अलावा मान कौर ने गोला फेंक और भाला फेंक स्पर्धाओं के लिए भी पंजीकरण करवाया है. बेटे गुरदेव सिंह से प्रशिक्षण प्राप्त मान कौर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी हैं.

गुरदेव भी धावक हैं और कनाडा में रहते हैं. बेटे के प्रोत्साहन पर मान कौर ने 93-वर्ष की अवस्था से एथलेटिक्स शुरू की. वह पूरी दुनिया में होने वाले मास्टर्स गेम्स में 20 से अधिक पदक जीत चुकी हैं.

उम्र के इस दहलीज पर आकर उनके जोश और उत्साह में कोई कमी नहीं आई है. यही वजह है कि विभिन्न प्रतियोगिताओं में खेलते हुए वह अबतक 17 गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं.

एक वेबसाइट की मानें तो मान कौर ने कहा कि, 'मेरा बेटा जो भी करता हैं, मैं उसी का अनुसरण करती हूं. मैं अपने बेटे के साथ रोज अभ्यास करती हूं. खुद को फिट और स्वस्थ रखना मुझे पसंद है. मरते दम तक दौड़ती रहूंगी.'

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