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24 साल बाद यहां होगी क्रिकेट की वापसी!

राष्ट्रमंडल खेल-2022 की मेजबानी अगर बर्मिंघम को मिलती है तो इन खेलों में पुरुष क्रिकेट की वापसी हो सकती है. डरबन ने वित्तीय और राजनीतिक विवाद के चलते मेजबानी से अपना नाम वापस ले लिया था. इसके बाद खेलों की मेजबानी के लिए ब्रिटेन सरकार ने बर्मिंघम को नीलामी के लिए आमंत्रित किया है.

डरबन में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में महिला क्रिकेट को शामिल किया गया था. वारविकशायर के मुख्य र्कायकारी अधिकारी और बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों की नीलामी कंपनी के सदस्य नील स्नोबाल ने इस बात की पुष्टि की है कि उनका मकसद आईसीसी और ईसीबी के साथ मिलकर क्रिकेट को शामिल करने का है. क्रिकेट का प्रारूप टी-20 होगा.

मैच एजबेस्टन और वर्सेस्टशायर के न्यू रोड होम में होंगे. मेजबानी की रेस में सिर्फ बर्मिंघम ही शामिल नहीं है. इसमें कनाडा, मलेशिया और ऑस्ट्रेलिया के शहर भी हैं. लीवरपूल ने भी मेजबानी में अपनी रुचि जाहिर की है.

नीलामी के लिए ब्रिटेन सरकार के पास आवेदन भेजने की अंतिम तारीख 28 अप्रैल है. इस पर अंतिम फैसला जुलाई में लिया जाएगा. ईसीबी ने पहले भी इन खेलों में क्रिकेट को शामिल करने के लिए अपना समर्थन दिया है लेकिन, अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) से समर्थन मिलना तय नहीं है.

इंग्लैंड 2022 में भारत की मेजबानी करेगा जिससे उसके इन खेलों में भाग लेने की संभावना ज्यादा है. लेकिन व्यक्तिगत तौर पर राष्ट्रमंडल सदस्य इसके लिए हां कहें यह दूर की कौड़ी लगता है.

मलेशिया में 1998 में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में इंग्लैंड ने अपनी टीम नहीं भेजी थी. यह पहला मौका था जब राष्ट्रमंडल खेलों में क्रिकेट को शामिल किया गया था. इसके बाद ऐसा दोबारा नहीं हो सका. इन खेलों में दक्षिण अफ्रीका ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर फाइनल जीता था.

राष्ट्रमंडल खेलों में क्रिकेट आवश्यक रूप से शामिल किया जाना वाले खेलों की सूची में नहीं है लेकिन यह उन वैकल्पिक खेलों की सूची में जरूर शामिल है जिन्हें मेजबान देश चुन सकते हैं.

VIDEO : लड़का घूर रहा था लड़की को और फिर…

सड़क पर जा रहे हो और अचानक सामने से कोई लड़की आती दिख जाए टाइट कपड़ों में, तो उसके पूरे बदन का एक्स-रे करने में हमें देर नहीं लगती. स्कूल कॉलेज में सीढ़ियों के नीचे खड़े होकर उतरती हुई लड़कियों के स्कर्ट के भीतर ताकना, बस ट्रेन में किसी लड़की का अगर कोई अंग दिख जाए तो बगल वाले को कोहनी मार कर दिखाना. डिस्को, पब में छोटे कपडे पहनी हुयी लड़की के वक्ष स्थल को घूरना और ऐसा दिखाना की कहीं और ध्यान है. कहीं कुछ उठाते हुए किसी लड़की की कमर या पैंटी लाइन दिख जाने पर आहे भरना.

क्लीवेज से लेकर कमर, चेहरा, पीठ या पेट और गर्दन कुछ भी नज़र आ जाये या अगर नज़र ना भी आ रहा हो तो भी चीर देने वाली नज़रों से देखने की कोशिश करना.

ये सब तरीके है बिना कुछ बोले, बिना कुछ किये किसी भी लड़की को परेशान करने के और इन सब में सबसे बड़ी बात की आसानी से जवाब देकर निकल जाओ कि मेरा ध्यान कहीं और था या फिर दिख रहा था तो देख लिया, कौनसा रेप कर दिया.

ये सब कारनामे सिर्फ सड़कछाप मजनुओं के नहीं, बल्कि हर एक मर्द के हैं. चाहे वो कितने भी प्रतिष्ठित घर का हो या कितने बड़े स्कूल कॉलेज का विद्यार्थी या फिर किसी बड़ी कंपनी में काम करने वाला या रास्ते पर सब्जी बेचने वाला. सब माहिर होते है आंखे  सेकने की विद्या में.

कभी सोचा है की कितनी बेशर्मी से घूरते है आप लोग लड़कियों को? कभी सोचा है कि कितना घटिया होता है ये सब ? क्या कभी सोचा है कि ये भी एक तरह की कुंठा है? कभी सोचा है कि इस तरह की हरकतें बताती है कि अंदर से आप भी एक बलात्कारी है.

ज़रा खुद को रखकर देखिये उस लड़की की जगह जिसे आप घूरते हैं, जिसके बदन की एक झलक पाने को आप बेशर्मी की हदें पार करते है.

लड़कियों के ब्रेस्ट तो हर लड़का देखता है. देश में लड़कियां कहीं भी सुरक्षित नहीं है. हमेशा से यही देखा जा रहा है कि लड़कियों को कुछ लोगों के कारण कहीं भी जाने में ना केवल परेशानी होती है बल्कि वे इस बात से भी घबराती है कि कही उन्हें वैसे टाइप के लोग ना मिल जाये जो जगह-जगह गन्दी हरकते करते है.

देश में लड़कियों को परेशान करने वाले और उन्हें बेमतलब घूरने वाले काफी लोग मिल जाते है, और यह भी कहा जा सकता है कि ये ही वे लोग है जिनकी वजह से लड़कियां खुद को कहीं भी सुरक्षित महसूस नहीं कर पाती है. ऐसा ही एक नजारा यहां भी देखने को मिला है. 

ऐसे लगाइये स्मार्टफोन में वायरस का पता

ये बात तो आप सभी जानते हैं कि ऐंड्रॉयड दुनियाभर में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला ऑपरेटिंग सिस्टम है. पूरी दुनिया में अरबों से ज्यादा ऐंड्रॉयड उपयोगकर्ता हैं. इन उपयोगकर्ताओं को अपने जाल में फंसाने के लिए हैकर्स बहुत सी नयी-नयी ट्रिक्स आजमाते हैं, जिससे कि आप अपने मोबाइल में संदिग्ध ऐप्स डाउनलोड करें और वे आसानी से आपकी सारी जानकारी चुरा सकें.

अन्य ऑपरेटिंग सिस्टम्स के मुकाबले ऐंड्रॉयड में वायरस जल्दी आ जाते हैं. आज हम आपको कुछ ट्रिक्स बताने जा रहे हैं जिससे कि आप अपने स्मार्टफोन में वायरस का पता आसानी से लगा सकते हैं.

डेटा का उपयोग बढ़ना

अगर अचानक से आपके मोबाइल का डेटा ज्यादा खर्च होने लगे, तो इसकी एक वजह आपके मोबाइल में घुसपैठ करने वाले वायरस भी हो सकते हैं. अगर पिछले महीने की तुलना में आपका डेटा अचानक से ज्यादा खर्च हुआ है, वो भी तब, जबकि आपने इसका इस्तेमाल भी कम ही किया हो, तो आपको समझ जाना चाहिए कि आपका मोबाइल वायरस की चपेट में है.

एक्स्ट्रा चार्ज

अगर आपके मोबाइल बिल में अनावश्यक एसएमएस (SMS) चार्ज लिया जा रहा है तो यह भी वायरस का एक संकेत है. ऐसे में आपके मोबाइल से प्रीमियम रेट नंबर्स पर टेक्स्ट मेसेज भेजे जाते हैं और आपसे पैसे चार्ज किए जाते हैं. प्रीमियम रेट नंबर एक विशेष तरह का नंबर होता है जिसपर मेसेज भेजने का चार्ज सामान्य के मुकाबले ज्यादा होता है

ज्यादा बैटरी खर्च होना

वायरस से न सिर्फ आपके मोबाइल का डेटा खर्च होता है बल्कि आपके मोबाइल की बैट्री पर भी असर पड़ने लगता है. एक बार वायरस वाले ऐप डाउनलोड करने के बाद आप यह नोटिस करेंगे आपकी बैट्री तेजी से खर्च हो रही है.

अचानक से आने वाले पॉप-अप्स

अगर आप पॉप अप्स, नोटिफिकेशन्स, अनचाहे रिमाइंडर और सिस्टम वार्निंग जैसे नोटिफिकेशन्स पर क्लिक करते हैं तो इससे भी आपके डिवाइस में वायरस बढ़ता जाता है.

अनचाहे ऐप्स

कुछ ऐसे ऐप होते हैं जो बिना आपकी जानकारी के ही आपके मोबाइल में इंस्टॉल हो जाते है. इस प्रकार के वायरसेज को ट्रोजन मालवेयर कहते हैं, इसके जरिए आपके मोबाइल को नुकसान पहुंचाने वाले ऐप, आपके मोबाइल में ऑटोमैटिक डाउनलोड हो जाते हैं.

प्यार में हारी हसीन मौडल: भाग 2

पुलिस ने उस से गहराई से पूछताछ की, जिस के बाद पता चला कि संदीप के साथ दोस्ती से शुरू हुआ उस का सफर पहले प्यार में बदला और बाद में प्यार के इस रिश्ते में ऐसा बेरुखी भरा बदलाव आया कि वह उस की जिंदगी को भी लील गया.

दरअसल 24 वर्षीय खूबसूरत रिचा मौडलिंग के क्षेत्र में जाना चाहती थी. उस की खूबसूरती की सभी तारीफ किया करते थे. जवानी की दहलीज पर कदम रखते ही पढ़ाई के साथसाथ उस ने इस के लिए प्रयास भी शुरू कर दिए थे. अपनी मेहनत के बल पर उस ने कम उम्र में ही एक्टिंग व मौडलिंग के क्षेत्र में खुद को स्थापित भी कर लिया. उस ने स्थानीय वह बाहरी कई म्यूजिक कंपनियों के साथ हिमाचली, गढ़वाली व पंजाबी वीडियो एलबम के साथ ही फिल्मों में भी काम किया.

रिचा व्यवहारकुशल भी थी और सुंदर भी. अभ्यास भी वह जम कर करती थी, जिस के बल पर उसे खूब काम मिला. वह ऐसी अदाकारा थी, जिस ने बिना किसी गौडफादर के अपनी प्रतिभा को साबित किया. वह काफी ऊंचाइयों पर पहुंच गई थी.

रिचा को हिंदी सीरियलों के औफर भी मिले, लेकिन वह हिमाचल प्रदेश में रह कर ही काम करना चहती थी. करीब एक साल पहले रिचा की मुलाकात एक प्रोग्राम के दौरान संदीप से हुई. पहली मुलाकात में ही दोनों ने एकदूसरे के दिलों पर अपनी छाप छोड़ी और मोबाइल नंबरों का आदानप्रदान भी कर लिया. दोनों के बीच अकसर बातें होने लगीं.

दोनों के बीच बातों के अलावा कुछ मुलाकातें भी हुईं. दिन, तारीख व साल के साथ उन की दोस्ती गहराती गई. उन की यह दोस्ती प्यार में कब बदल गई, इस का पता उन दोनों को पता ही नहीं चला. बातोंमुलाकातों के इसी दौर में दोनों के दिलों में चाहत ने जन्म ले लिया और यही चाहत एक प्यार का पौधा बन कर अंकुरित हो गई. रिचा के दिल में पहली बार किसी युवक ने अपनी जगह बनाई थी.

प्यार उस शै का नाम है जो बिना आहट किए दिल के दरवाजे खोल कर उस में चुपके से बस जाती है. इस का पता इंसान को तब चलता है, जब उस के दिल की धड़कनें खुदब खुद कुछ कहने लगती हैं. जब कोई प्यार का पाठ पढ़ता है तो दिल की धड़कनें उसी का नाम लेती हैं, जिस की सूरत उस में बसी होती है. दोनों अपने प्यार को कैद किए हुए थे. रिचा व संदीप प्यार का इजहार करने के लिए उचित अवसर की तलाश में रहने लगे. एक दिन संदीप ने अपने दिल की बात रिचा से कह दी.

रिचा को उस की बात पर कोई हैरानी नहीं हुई, क्योंकि वह जानती थी कि संदीप उसे चाहने लगा है. उस के सामने प्यार का इजहार करने के लिए उस के दिल की कलीकली खिल गई. वह मुस्करा दी. हालांकि उस की मुसकराहट में ही वह सच्चाई छिपी थी जो संदीप उस के मुंह से सुनना चाहता था. फिर भी उस ने पूछ लिया, ‘‘बताओ न, करती हो मुझ से प्यार?’’

‘‘बहुत ज्यादा, लेकिन ये बताओ कि कभी तुम मेरा साथ छोड़ तो नहीं दोगे?’’ रिचा ने आशंकित होते हुए कहा तो संदीप बोला, ‘‘ऐसा कभी हो सकता है क्या?’’ बात वहीं खत्म हो गई.

बीतते वक्त के साथ दोनों ने एक साथ जीनेमरने की कसमें खा लीं. समय अपनी गति से चलता रहा. रिचा दिल की सच्ची लड़की थी. वह संदीप को टूट कर चाहती थी. प्यार में दोनों ने हमेशा एक होने का फैसला कर लिया था. संदीप ने उसे यकीन दिलाया था कि वह अपनी बात से कभी पीछे नहीं हटेगा. देखतेदेखते कई महीने बीत गए.

रिचा ने संदीप से अपने प्रेमिल रिश्तों की बात अपने घर वालों को भी बता दी थी. उस ने घर वालों को विश्वास दिलाया था कि संदीप अच्छा लडका है और वह उस से जरूर शादी करेगा. रिचा अपने पैरों पर खड़ी थी. अच्छाबुरा भी समझती थी, इसलिए उस की खुशी के लिए किसी ने उस के रिश्ते पर कोई आपत्ति नहीं की. लेकिन प्यार में हर किसी को मुकाम मिल जाए, यह जरूरी नहीं. रिचा के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. प्यार में कुछ बातों की हकीकत वक्त के साथ ही पता चलती है. इस मामले में भी ऐसा ही हुआ.

रिचा संदीप को उस का शादी का वादा याद दिलने लगी तो वह कटाकटा सा रहने लगा. उसे संदीप से ऐसी उम्मीद कतई नहीं थी. वह किसी न किसी बहाने से बात को टाल जाता था. इस से रिचा परेशान रहने लगी. इसी बीच उसे पता चला कि संदीप की दोस्ती किसी अन्य युवती के साथ भी है. रिचा को लगा कि वह उसे धोखा दे रहा है. एक दिन उस ने इस मुद्दे पर संदीप से बात की तो वह हत्थे से उखड़ गया और उस ने रिचा को ही कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की. यह दिसंबर, 2016 की बात थी.

इस घटना के बाद दोनों के बीच अकसर झगड़ा होने लगा. हालांकि कुछ दिनों में धीरेधीरे दोनों सामान्य हो गए. 1 जनवरी, 2017 को नए साल का जश्न मनाने के लिए रिचा संदीप व अन्य दोस्तों के साथ हिमाचल के ही मैक्लोडगंज गई. कुछ दिन सब ठीक रहा, लेकिन उन के बीच फिर झगड़ा शुरू हो गया. हालात तब बिगड़े जब संदीप उस के साथ मारपीट व दुर्व्यवहार भी करने लगा. उस के बदले व्यवहार ने रिचा को तोड़ कर रख दिया.

रिचा चाहती तो किनारा कर सकती थी उसे कई चाहने वाले भी मिल सकते थे लेकिन वह संदीप को दिलोजान से प्यार करती थी. उस से दूर होने की कल्पना कर के ही वह निराश हो जाती थी. गलती संदीप की होने पर भी वह खुद हारने में यकीन रखती थी. खुद हार कर वह प्यार को जिताती थी. उस के बेपनाह प्यार का आलम यह था कि वह किसी भी सूरत में संदीप को खोना नहीं चाहती थी.

संदीप से उस की शादी जल्द हो इस के लिए उस ने बाहर शूटिंग पर जाने के कई प्रोग्राम छोड़ दिए थे. हालांकि यह सब उस के  कैरियर के लिए अच्छा नहीं था, लेकिन संदीप के लिए वह यह कुर्बानी देने को भी तैयार थी. दूसरी ओर संदीप पूरी तरह बेरुखी पर उतर आया था, जबकि वह चाहती थी कि वह उस से जल्द से जल्द शादी कर ले. रिचा तनाव के दौर से गुजर रही थी. अपनी परेशानियों का जिक्र वह अपनी सहेलियों से किया करती थी.

रिश्तों के मनमुटाव को दूर करने के लिए वह एक दिन संदीप के पास ऊना भी गई, लेकिन दोनों के बीच झगड़ा हो गया तो वह वापस आ गई.

11 जनवरी की रात मोबाइल फोन पर भी उस की संदीप से नोकझोंक हुई तो संदीप ने शादी करने से साफ इनकार कर दिया. उस ने रिचा के साथ दुर्व्यवहार भी किया. अचानक दिल पर लगी इस बड़ी चोट ने उसे तोड़ कर रख दिया. अवसाद के दौर में उस ने देर रात अपनी एक सहेली को कई बार फोन किया. लेकिन उस की बात नहीं हो सकी. कोई हालात को संभाल पाता, उस से पहले ही रिचा ने सुसाइड नोट पर कलम के जरिए अपना दर्द उकेरा. शुरुआती 2 पन्नों पर उस ने अपनी व संदीप की मौजूदा स्थिति के बारे में लिखा, जबकि अंतिम आधे पन्ने में आत्महत्या का कारण बताया.

रिचा ने अपनी मौत का जिम्मेदार संदीप को बताते हुए घातक कदम उठा लिया. उस की मौत उस के चाहने वालों को भी निराश कर गई.

पूछताछ के बाद पुलिस ने संदीप को माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया, जहां से उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. काश! रिचा की तरह संदीप  ने भी प्यार के रिश्ते को उतनी ही खूबसूरती से निभाया होता और वक्त पर रिचा को संभाल लिया होता तो निश्चित तौर पर आज वह प्रतिभाशाली खूबसूरत अदाकारा जिंदा होती. कथा लिखे जाने तक संदीप की जमानत नहीं हो सकी थी.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित
सहयोगी : आर. गुलेरिया

जब लड़ने वाले थे सचिन तेंदुलकर और नरेंद्र मोदी..!

सोमवार यानि कल मास्‍टर ब्‍लास्‍ट और क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन 44 वर्ष के हो गए. इस शुभ अवसर पर सचिन के चाहने वालों ने सचिन को कई तरह से बधाई दी. लेकिन क्या कभी किसी ने सोचा की क्रिकेट के भगवान और देश के सबसे लोकप्रिय नेता नरेंद्र मोदी कभी आमने-सामने आ सकते हैं. जी हां ये हादसा होते होते बचा.

ये बात है 2014 लोकसभा चुनावों से पहले की. कांग्रेस को लगाने लगा था कि मोदी को नहीं हराया जा सकता है. तब कांग्रेस के रणनीतिकारों ने इस समस्या के लिए एक हल निकाला. अगर नरेंद्र मोदी के सामने क्रिकेट के भगवान को चुनाव लड़ाया जाए तो शायद कुछ हो. देश में इन चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया कि सचिन नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ सकते हैं.

राजनितिक पंडित भी इसका अनुमान नहीं लगा पा रहे थे कि अगर इनका मुकाबला हुआ तो क्या होगा. लेकिन विवादों से दूर रहने वाले सचिन ने इन तमाम संभावनाओं को ये कहकर नकार दिया कि मै सक्रिय राजनीति में नहीं आऊंगा.

वरदी वाले कातिलों को सजा

वाकिआ 8 नवंबर, 1996 का है. गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश में एक ऐनकाउंटर की गूंज सुनाई दी. पुलिस की बहादुरी पर सभी को नाज हो रहा था. इस मुठभेड़ को भोजपुर थाने में तैनात पुलिस वालों, थाना प्रभारी लाल सिंह, सबइंस्पैक्टर जोगेंद्र, कांस्टेबल सुभाष, सूर्यभान और रणवीर ने अपनी जान पर खेल कर अंजाम दिया था. दरअसल, जोकुछ सामने आया, उस के मुताबिक, उस शाम पुलिस कुछ आरोपियों को ले कर जा रही थी, तभी उन्हें एक ईंख के खेत के नजदीक 4 बदमाश नजर आए. उन की हरकत ठीक नहीं लग रही थी. लिहाजा, उन्होंने पोजीशन ले ली और अपनी जान की परवाह किए बगैर बहादुरी का परिचय दे कर जवाबी फायरिंग की.

कुछ देरे तक तो दोनों तरफ से फायरिंग होती रही, उस के बाद गोलियों की तड़तड़ाहट बंद हुई. तब तक पुलिस चारों बदमाशों को ढेर कर चुकी थी. उन में से 2 ईख के खेत में और 2 रास्ते में पड़े थे.

ऐनकाउंटर में मारे गए बदमाशों के पास से पुलिस को तमंचे भी मिले. मारे गए बदमाश कौन थे, इस की शिनाख्त नहीं हो सकी थी. बहादुरी और सटीक निशानेबाजी का आलम यह था कि जान पर खेलने वाले एक भी पुलिस वाले के जिस्म पर खरोंच तक नहीं आई थी.पूरे पुलिस महकमे में बहादुर पुलिस वालों के चर्चे थे. यह तय हो गया था कि इस के एवज में उन्हें मैडल के साथसाथ तरक्की यानी प्रमोशन भी मिलेगी. क्योंकि ऐसी बहादुरी दिखाने वालों को अकसर समय से पहले ही तरक्की मिल जाती है.

जब पोल खुली तो…

उस ऐनकाउंटर में शामिल पुलिस वालों ने भले ही सभी की आंखों में धूल झोंक दी थी और वे अपनी पीठ थपथपा रहे थे, लेकिन एक दिन बाद ही उन की कहानी में कई छेद नजर आए. मारे गए नौजवान, जिन्हें पुलिस ने शातिर बदमाश बताया था, उन की शिनाख्त हुई, तो हर कोई पुलिस की हैवानियत पर दंग रह गया. इन नौजवानों में प्रवेश, जसवीर, अशोक और जलादुद्दीन शामिल थे. सभी का ताल्लुक गरीब परिवारों से था और वे कोई पेशेवर बदमाश नहीं, बल्कि फैक्टरी में दिहाड़ी मजदूर थे.

ऐसे चश्मदीद भी मिल गए, जिन्होंने पुलिस को इन नौजवानों को खेतों में खींच कर ले जाते हुए देखा था. वे खाकी वरदी में छिपे ऐसे शैतान थे, जो तरक्की पाने की चाह में कुछ भी करने को तैयार हो गए थे. पोल खुलते ही जनता का गुस्सा भड़क गया और लोग सड़कों पर आ गए. आरोपी पुलिस वालों के खिलाफ हत्या व साजिश का मुकदमा दर्ज हुआ, तो वे फरार हो गए. बाद में उन की गिरफ्तारी हुई, लेकिन जमानत पर आ कर मजे से नौकरी करने लगे.

लंबी चली कानूनी लड़ाई

मारे गए नौजवानों के परिवार वालों को पुलिस जांच पर भरोसा नहीं था. उन्होंने इस की जांच सीबीआई से कराने की पुरजोर मांग की. उन की मांग पर ऐनकाउंटर की जांच 7 अप्रैल, 1997 को सीबीआई के सुपुर्द कर दी गई. सीबीआई ने आरोपी पुलिस वालों के खिलाफ 10 सितंबर, 2001 को चार्जशीट अदालत में दाखिल कर दी. सीबीआई ने जांच में पाया कि तरक्की के लालच में नौजवानों की हत्याएं की गई हैं. पुलिस वालों के खिलाफ पैरवी करने वाले सीनियर वकील राजन दहिया ने इसे हीनियस क्राइम बताया. पुलिस वालों ने अपने पक्ष में कुछ लोगों के फर्जी शपथपत्र तक अदालत में दाखिल कर दिए, पर हालात उन के खिलाफ थे. उन के खिलाफ 112 लोगों की गवाही हुई.

इस बीच आरोपी थाना प्रभारी रूटीन प्रक्रिया में तरक्की पा कर सीओ तक बन गया. सभी रिटायर हो गए. इस बीच एक आरोपी सिपाही रणवीर की मौत हो गई.

स्पैशल जज राजेश चौधरी ने सुबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर आखिरकार सभी आरोपी पुलिस वालों को उम्रकैद की सजा सुनाई. साथ ही, उन पर 5 लाख, 20 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया. जुर्माने की रकम में से आधी रकम मारे गए नौजवानों के परिवार वालों को दी जाएगी.

मिलती सजा ए मौत

जिन के बेटे मारे गए, उन का 20 साल का सफर बहुत मुश्किल भरा रहा, परंतु उन्होंने इंसाफ की चाह में हार नहीं मानी. प्रवेश की मां शीला अब बुजुर्ग हो चली हैं, लेकिन खाकी के दर्द को नहीं भूलतीं. उन्होंने ठान लिया था कि कातिलों को सजा दिला कर ही दम लेंगी. इस दौरान उन के पति की भी मौत हो गई. 8 बीघा जमीन और एक प्लाट भी बिक गया. पुलिस वालों ने समझौते के लिए उन्हें रुपए देने का भी लालच दिया, लेकिन इस बूढ़ी मां ने इंसाफ की जंग जारी रखी. जसवीर को खो चुका उस का परिवार उस दिन को नहीं भूला, जब उन्होंने बेटे का फोटो बदमाश के रूप में देखा था. इंसाफ की आस में जसवीर की मां ब्रह्मकौर की मौत हो गई. उस के भाई वीर सिंह को जुदाई आज भी दर्द देती है.

इसी तरह ऐनकाउंटर में मारा गया अशोक अपने घर का एकलौता चिराग था. उस के पिता किशन सिंह की साल 2008 में मौत हो गई, लेकिन मां शीला ने जंग जारी रखी. इस के लिए उन्हें अपनी जमीन तक बेचनी पड़ी. 5 भाइयों में दूसरे नंबर के जलालुद्दीन के परिवार को भी इंसाफ के लिए सब्र करना पड़ा. उस के पिता मंसूर की इस बीच मौत हो गई. उस की मां शरीफन ने सबकुछ बेच कर मुकदमा लड़ा. तरक्की की चाह में आरोपी पुलिस वाले वह कर बैठे, जो उन्हें नहीं करना चाहिए था. इस की उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ी. महकमे की बदनामी करा कर उन की अपनी इज्जत तो खराब हुई ही, साथ ही वे सलाखों के पीछे भी पहुंच गए.

इस केस को लड़ने वाले सीनियर वकील राजन दहिया का कहना है कि पीडि़तों को इंसाफ मिला है. इस से समाज में एक संदेश भी जाएगा कि कानून सब के लिए बराबर है.       

ऐसा सोचा भी न था

आईटी क्षेत्र में बंगलुरु की इंफोसिस सौफ्टवेयर कंपनी का एक बड़ा नाम है. केरल की रहने वाली रासिला ओ.पी. इसी कंपनी के पुणे फेज-2 स्थित कंपनी में नौकरी करती थी. वह सौफ्टवेयर इंजीनियर थी. इस कंपनी के प्रोजेक्ट इतने महत्त्वपूर्ण होते हैं कि उन्हें पूरा करने के लिए कर्मचारियों और अधिकारियों को कभीकभी 24-24 घंटे तक काम करना पड़ता है.

29 जनवरी को रविवार था. शहर के अधिकांश औफिस और प्रतिष्ठान बंद थे. लेकिन इंफोसिस कंपनी का एक प्रोजेक्ट इतना अर्जेंट था कि उसे पूरा करने के लिए कर्मचारियों को रविवार को भी औफिस आना पड़ा था. इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की जिम्मेदारी पुणे और बंगलुरु टीम को सौंपी गई थी. रासिला भी उस दिन इसी प्रोजेक्ट की वजह से औफिस आई थी. बंगलुरु में कुछ कर्मचारी अपनेअपने घरों में बैठ कर उस की मदद कर रहे थे.

कंपनी का प्रोजेक्ट लगभग पूरा हो गया था. केवल कुछ ही औपचारिकताएं बाकी रह गई थीं कि शाम 7 बजे अचानक रासिला और बंगलुरु टीम के बीच फोन और ईमेल से होने वाली बातचीत बंद हो गई. बंगलुरु के कर्मचारी समझ नहीं पाए कि अचानक यह क्या हो गया.

तमाम कोशिशों के बाद भी रासिला और बंगलुरु के कर्मचारियों के बीच जब संपर्क नहीं हो पाया तो उन के मन में तरहतरह की आशंकाएं जन्म लेने लगीं. उन्होंने पुणे के बड़गांव में रहने वाले इंफोसिस सौफ्टवेयर के सीनियर एसोसिएट कंसलटेंट और रासिला के प्रोजेक्ट रिपोर्टिंग मैनेजर अभिजीत कोठारी को फोन किया.

उन्हें सारी बातें बता कर रासिला के विषय में पता लगाने के लिए कहा. अभिजीत ने उसी वक्त रासिला को फोन लगाया. उस के फोन की घंटी तो बज रही थी, पर वह फोन नहीं उठा रही थी. इस के बाद उन्होंने पुणे फेज-2 स्थित कंपनी के औफिस के लैंडलाइन पर फोन किया.

फोन एक सिक्योरिटी गार्ड ने उठाया. उस ने अभिजीत को बताया कि वह ड्यूटी पर अभीअभी आया है. उस के पहले ड्यूटी पर सिक्योरिटी गार्ड भावेन सैकिया था. वह अपनी ड्यूटी पूरी कर के अपना चार्ज उसे दे कर चला गया है. अभिजीत कोठारी ने जब ड्यूटी पर मौजूद गार्ड से रासिला के बारे में पूछा तो गार्ड रासिला की केबिन में गया. इस के बाद उस गार्ड ने जो जानकारी दी, उसे सुन कर उन के पैरों तले से जमीन खिसक गई.

फिर क्या था, कुछ ही देर में अभिजीत कोठारी इंफोसिस के औफिस पहुंच गए. उन्होंने देखा कि औफिस के अंदर रासिला की खून से लथपथ लाश पड़ी थी. शव के आसपास काफी खून फैला था. चेहरा पूरी तरह किसी भारी और ठोस वस्तु से कुचला गया था. अभिजीत कोठारी ने मामले की जानकारी कंपनी के प्रमुख अधिकारियों और रासिला के परिवार वालों को देने के बाद थाना हिंजवाली पुलिस को दे दी थी.

थाना हिंजवाली के थानाप्रभारी अरुण वायकर अपने सहायकों के साथ तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गए. हत्या की जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दे कर वह मामले की जांच में जुट गए. वह घटनास्थल का निरीक्षण कर रहे थे कि पुणे शहर के डीसीपी गणेश शिंदे, एसीपी वैशाली जाधव भी घटनास्थल पर आ गईं.

उन के साथ डौग स्क्वायड और फिंगरप्रिंट ब्यूरो के अधिकारी भी आए थे. सभी ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया तो पाया कि रासिला की हत्या की बड़ी बेरहमी से की गई थी. उस के गले में एक पीले रंग का तार लपेटा हुआ था. वह कंप्यूटर का तार था. पुलिस यह जानने की कोशिश करने लगी कि ऐसा कौन व्यक्ति हो सकता है, जिस ने इस की हत्या के बाद चेहरा तक कुचल दिया.

घटनास्थल की काररवाई पूरी कर के पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए पुणे के मसन अस्पताल भिजवा दिया. इस के बाद कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर अभिजीत कोठारी की ओर से रासिला की हत्या का मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी. शुरुआती जांच में पुलिस को पता चला कि रासिला जिस केबिन में बैठती थी, वह बेहद सुरक्षित थी.

उस का दरवाजा एक विशेष कार्ड के टच होने पर ही खुलता था. इस से पुलिस को यही लगा कि उस की हत्या में किसी ऐसे आदमी का हाथ है, जिस का उस केबिन में आनाजाना था. इस संबंध में पुलिस ने कंपनी के कर्मचारियों से पूछताछ की तो कंपनी का सिक्योरिटी गार्ड भावेन सैकिया पुलिस के शक के दायरे में आ गया. इस के बाद कंपनी के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी गई तो स्पष्ट हो गया कि सिक्योरिटी गार्ड भावेन ने ही रासिला की हत्या की थी.

एसीपी वैशाली जाधव के निर्देशन में जब पुलिस टीम सिक्योरिटी गार्ड भावेन के घर पर पहुंची तो वह घर पर नहीं मिला. उस के घर के दरवाजे पर ताला लगा था. पड़ोसियों ने बताया कि भावेन की मां की तबीयत अचानक खराब हो गई थी, इसलिए वह अपने गांव चला गया है. जिस सिक्योरिटी एजेंसी में उस की नियुक्ति थी, उस से संपर्क कर पुलिस ने भावेन के बारे में सारी जानकारी ले ली.

जहांजहां से भावेन के गांव जाने के साधन मिलते थे, उन सभी रास्तों पर नाकेबंदी करवा दी गई. इस के अलावा जांच टीम को 7 भागों में विभाजित कर उन्हें महानगर मुंबई और पुणे के विभिन्न इलाकों के लिए रवाना कर दिया गया. रासिला की हत्या पुणे पुलिस के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुकी थी. क्योंकि पिछले साल आईटी प्रोफेशनल महिला ज्योति कुमारी, नयना पुजारी, दर्शना टोगारी और अंतरा दास की कंपनी के सिक्योरिटी गार्डों द्वारा जिस तरह हत्याएं की गई थीं, उसे देख कर आईटी कंपनियों में काम करने वाली महिलाओं के भीतर डर का माहौल बन गया था.

इसलिए इस मामले का खुलासा करने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर दबाव बढ़ गया था. यही वजह थी कि एसीपी वैशाली जाधव ने इस मामले की जांच अपने हाथों में ले ली थी. आखिरकार एसीपी वैशाली जाधव और उन की टीम की मेहनत रंग लाई और 8 घंटे की कोशिश के बाद सौफ्टवेयर इंजीनियर रासिला के हत्यारे भावेन सैकिया को महानगर मुंबई के छत्रपति शिवाजी रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया गया.

पुलिस टीम जिस समय छत्रपति शिवाजी रेलवे स्टेशन पहुंची थी, उस समय रात के लगभग 3 बज रहे थे. भावेन सैकिया अपना पूरा चेहरा कंबल के नीचे ढक कर टिकट खिड़की के पास बैठा खिड़की के खुलने का इंतजार कर रहा था. मुखबिर के इशारे पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था.

सिक्योरिटी गार्ड भावेन सैकिया को ले कर पुलिस पुणे आ गई. उस से थोड़ी पूछताछ कर के उसे पुणे के प्रथम श्रेणी दंडाधिकारी ए.एस. वारूलकर के सामने पेश कर 4 फरवरी, 2017 तक की रिमांड पर ले लिया. पूछताछ में उस ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया. उस ने इस हत्याकांड की जो कहानी बताई, इस प्रकार निकली.

27 वर्षीय भावेन सैकिया मूलरूप से असम के गांव ताती विहार का रहने वाला था. उस के पिता ने 3 शादियां की थीं. भावेन सैकिया उन की तीसरी पत्नी का बेटा था. भावेन महत्त्वाकांक्षी के साथ पढ़ाईलिखाई में भी होशियार था.

उस का स्वभाव उग्र था. इस वजह से उस की अपने सौतेले भाइयों से नहीं पटती थी. 12वीं कक्षा में अच्छे अंक पाने के बाद उस ने स्नातक की पढ़ाई करनी चाही पर उस के सौतेले भाई नहीं चाहते थे कि वह पढ़े. किसी न किसी बात को ले कर वह उस से झगड़ने लगते थे. फिर एक दिन झगड़ा इतना बढ़ गया कि सन 2013 में उस ने अपने सौतेले भाई की हत्या कर दी. हत्या के बाद वह घर से फरार हुआ तो वापस गांव नहीं लौटा.

सन 2014 में वह पुणे पहुंच गया और वहां की एक सिक्योरिटी एजेंसी में सिक्योरिटी गार्ड के पद पर उस की नौकरी लग गई. कंपनी की तरफ से भावेन की तैनाती इंफोसिस सौफ्टवेयर कंपनी के औफिस में हो गई. उस ने औफिस के पास ही हिजवाड़ी जयरामनगर के फेज-3 में एक कमरा किराए पर ले लिया.

नौकरी के दौरान उस में काफी परिवर्तन आ गया था. औफिस में काम करने वाली लड़कियों को वह चाहत की निगाहों से देखता. खूबसूरत लड़कियां उस की कमजोरी बन गई थीं. किसी न किसी बहाने वह उन से बातें करता और उन्हें छूने की कोशिश करता था. इसी प्रकार की कोशिश जब उस ने रासिला ओ.पी. के साथ की तो उस ने भावेन की बात अनदेखी नहीं की, बल्कि उस से अपनी नाराजगी भी जता दी.

घटना के 2 दिन पहले रासिला ने भावेन सैकिया को अपने केबिन में बुला कर काफी डांटाफटकारा और उस की हरकतों की शिकायत ईमेल द्वारा उस की सिक्योरिटी कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों से करने की भी धमकी दी. इस धमकी से भावेन काफी डर गया था. उसे लग रहा था कि रासिला उस की शिकायत जरूर कर देगी. उस की शिकायत पर उसे अपनी नौकरी जाने का डर था.

24 वर्षीय रासिला ओझम पोईल पुराईत उर्फ रासिला ओ.पी. मूलरूप से केरल राज्य के कालीकट जिले के गांव कुदमंगलम की रहने वाली थी. उस के पिता ओझम पोईल पुराईत उर्फ राजू ओ.पी. होमगार्ड में एक तृतीय श्रेणी कर्मचारी थे. परिवार में उस के और पिता के अलावा एक बड़ा भाई तेजस कुमार ओ.पी. था. मां पुष्पलता का देहांत उस समय हो गया, जब छोटी थी. दोनों भाईबहन का बचपन बहुत ही गरीबी में बीता था. पिता से ही दोनों को मां का प्यार मिला था. घर की परिस्थतियों को देखते हुए दोनों बच्चों ने मन लगा कर पढ़ाई की.

रासिला और तेजस कुमार दोनों ने 98 प्रतिशत अंकों से 12वीं की परीक्षा पास की. इंजीनियरिंग की परीक्षाएं भी दोनों ने प्रथम श्रेणी से पास की थीं. इंजीनियरिंग के बाद तेजस कुमार को आबूधाबी की एयरलाइंस कंपनी में और रासिला की बंगलुरु की इंफोसिस सौफ्टवेयर कंपनी में असिस्टैंट इंजीनियर के पद पर नौकरी लग गई. अपने बच्चों को अच्छी जगह और अच्छे पद पर देख कर राजू ओ.पी. की सारी चिंताएं दूर हो गईं. रासिला की अच्छी पोस्ट देख कर तो उस की शादी के रिश्ते भी आने शुरू हो गए थे.

रासिला खूबसूरत तो थी ही, साथ ही वह कंपनी की जिस पोस्ट पर काम करती थी, उस की जिम्मेदारी भी अच्छी तरह निभा रही थी. अपने काम और व्यवहार से उस ने कंपनी के कई वरिष्ठ अधिकारियों के दिल में एक खास जगह बना ली थी. इस श्रेणी में एक बड़ा अधिकारी ऐसा था जो रासिला को अपने दिल में एक खास जगह देना चाहता था, पर रासिला को वह पसंद नहीं था. जिस के कारण वह अधिकारी रासिला से चिढ़ गया और उसे किसी न किसी बहाने परेशान करने लगा.

उस अधिकारी से परेशान हो कर रासिला ने कुछ वरिष्ठ अधिकारियों से उस की शिकायत कर दी. साथ ही अपना इस्तीफा भी दे दिया. लेकिन कंपनी ने उस का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया. बल्कि कंपनी ने रासिला का ट्रांसफर इंफोसिस कंपनी की पुणे ब्रांच में कर दिया और पुणे के हिजवाड़ी के जयरामनगर फेज-1 में उस के रहने की व्यवस्था भी कर दी. पुणे ब्रांच में रासिला को आए अभी 5 महीने ही हुए थे कि उसे औफिस के सिक्योरिटी गार्ड भावेन सैकिया से दोचार होना पड़ा.

घटना के दिन सारा औफिस बंद होने के बावजूद भी कंपनी द्वारा सौंपे गए प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए रासिला को अपने औफिस आना पड़ा था. दिन के 2 बजे जब वह अपने औफिस में पहुंची तो काफी खुश थी. उस समय सिक्योरिटी गार्ड भावेन अपनी ड्यूटी पर तैनात था. रासिला ने अपने एक्सेस कार्ड से केबिन का लौक खोला और केबिन के अंदर जा कर अपने बंगलुरु ब्रांच के कुछ साथियों के साथ औनलाइन जुड़ कर अपने प्रोजेक्ट की तैयारी में जुट गई थी.

इधर रासिला की धमकी और अपनी नौकरी को ले कर भावेन काफी परेशान था. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे क्या न करे. शिकायत को अपने वरिष्ठ अधिकारियों तक जाने से कैसे रोके इसी बारे में वह सोचने लगा. सोचविचार करने के बाद उस ने खतरनाक फैसला ले लिया.

उस समय रासिला औफिस में अकेली थी. बातचीत करने के लिए मौका अच्छा था. अपनी हरकतों की माफी मांगने के बहाने वह रासिला के केबिन में जाने में कामयाब हो गया. केबिन के अंदर पहुंचते ही उस ने रासिला से कहा, ‘‘मैडम, आप मेरी शिकायत मेरे अधिकारियों से नहीं करना वरना मेरी नौकरी चली जाएगी और मैं बेकार हो जाऊंगा.’’ वह गिड़गिड़ाया.

रासिला ने एक बार गार्ड के चेहरे को देखा. जिस पर मिलेजुले खौफ का असर स्पष्ट दिखाई पड़ रहा था. हालांकि रासिला ने उस की हरकतों को नजरअंदाज कर दिया था. लेकिन वह उसे थोड़ा और सबक सिखाना चाहती थी, जिस से वह सुधर जाए. इसलिए वह गंभीर होते हुए बोली, ‘‘नौकरी चली जाएगी, बेकार हो जाओगे तो मैं क्या करूं. तुम्हें  लड़कियों को परेशान करने का बड़ा शौक है न, अब भुगतो, मैं ने तो तुम्हारी शिकायत तुम्हारी कंपनी के सीनियर अधिकारियों को ईमेल से कर दी है. अब जाओ गांव में ही बैठना.’’

यह सुन कर भावेन का चेहरा क्रोध से तमतमा उठा. अपने आपे से बाहर होते हुए उस ने इंटरनेट का वायर खींच कर रासिला के गले में डालते हुए कहा, ‘‘मैडम, यह तुम ने अच्छा नहीं किया. अब तुम्हें इस की सजा तो भुगतनी ही पड़ेगी.’’

रासिला उस का इरादा जान कर अपने बचाव के लिए काफी चीखीचिल्लाई. पर उस वक्त उस की मदद के लिए वहां कोई नहीं था. उस ने उस इंटरनेट वायर से रासिला का गला घोंट दिया. उस की हत्या करने के बाद उस ने अपने बूटों से ठोकरें मारमार कर उस का चेहरा लहूलुहान कर दिया.

रासिला की हत्या करने के बाद जब भावेन का गुस्सा शांत हुआ तो वह बाहर आ कर आराम से अपनी जगह बैठ गया. उसे पुलिस और कानून का डर लगने लगा. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि वह अब कहां जाए. गांव जा नहीं सकता था, क्योंकि उस पर सौतेले भाई की  हत्या का आरोप था. पुणे और गांव की पुलिस से बचने के लिए उस के पास कोई रास्ता नहीं था. ऐसे में उसे बस आत्महत्या के अलावा और कोई चारा नहीं दिखा.

उस की ड्यूटी का टाइम भी पूरा हो चुका था. जैसे ही दूसरा सिक्योरिटी गार्ड शिफ्ट बदलने आया तो उसे जिम्मेदारी सौंप कर भावेन औफिस से निकल गया. आत्महत्या करने के लिए वह पुणे रेलवे स्टेशन पर पहुंचा ताकि किसी टे्रेन के सामने कूद कर जीवनलीला खत्म कर ले लेकिन ऐसा करने की उस की हिम्मत नहीं हुई.

फिर उस ने आत्महत्या करने के बजाय किसी दूसरे शहर में जाने का इरादा बनाया. अपने कमरे से उसे कुछ जरूरी सामान भी साथ लेना था. इसलिए कमरे पर पहुंच कर उस ने पड़ोसियों से झूठ कह दिया कि उस की मां की तबीयत खराब है. बैग में कपड़े आदि भर कर वह महानगर मुंबई के छत्रपति शिवाजी रेलवे स्टेशन पहुंचा. वहां से टिकिट ले कर उसे अपनी किसी मंजिल की ओर रवाना होना था. पर इस के पहले ही वह पुलिस के हत्थे चढ़ गया. भावेन मराली सैकिया से विस्तार से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने न्यायालय में पेश कर उसे जेल भेज दिया.

पुलिस ने रासिला ओ.पी. के शव को पोस्टमार्टम के बाद उस के पिता राजू ओ.पी. और परिजनों को सौंप दिया. पिता और परिवार वालों का कहना था कि रासिला की हत्या एक साजिश के तहत इंफोसिस कंपनी के ही एक बड़े अधिकारी ने कराई है, जिस की शिकायत उन्होंने हिजवाड़ी पुलिस थाने में दर्ज करवा दी.

पुलिस ने उन्हें भरोसा दिया कि रासिला की हत्या के मामले में जो भी दोषी होगा, उस के खिलाफ सख्त काररवाई की जाएगी. मामले की जांच थानाप्रभारी अरुण वायकर कर रहे थे. कथा लिखे जाने तक भावेन सैकिया की जमानत नहीं हो सकी थी.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

शराबी बाप और जवान बेटियां

निहाल सिंह की उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में अच्छीखासी दुकान चल रही थी, जिस से उस के परिवार का खर्चा आसानी से निकल रहा था. लेकिन 2 साल पहले दोस्तों के चलते उसे शराब की ऐसी लत लगी कि कारोबार चौपट हो गया. निहाल सिंह के शराब पीने की लत दिनोंदिन बढ़ती जा रही थी, जिस की वजह से उस के घर में खाने के भी लाले पड़ गए. उस की पत्नी जब भी शराब छोड़ने की बात कहती, तो वह उसे मारनेपीटने लगता था. ऐसे में उस की बेटियां सहमी सी अपनी मां को पिटते हुए देखती थीं.

आखिरकार निहाल सिंह की बेटियां पिता की शराब की लत के चलते काम की तलाश में रहने लगीं. लेकिन वे जहां भी जातीं, तो उन्हें हवस की नजरों से ही देखा जाता. लड़कियों ने घर पर ही कागज के लिफाफे बना कर बेचने का काम शुरू कर दिया, लेकिन निहाल सिंह बेटियों की इस कमाई को भी छीन कर शराब पीने में उड़ा देता था. एक दिन निहाल सिंह अपने कुछ शराबी दोस्तों के साथ महफिल जमाए बैठा था कि उस के शराबी दोस्तों की नजर उस की जवान होती बेटियों पर पड़ गई. अपनी शराब की लत के चलते निहाल सिंह अपने दोस्तों से काफी रुपए उधार ले चुका था. जब उन्होंने अपने रुपए मांगने शुरू किए, तो वह बोला कि उस के पास पैसे तो नहीं हैं. इस पर दोस्तों ने सख्ती से रुपए मांगे और यह भी कहा कि वे आगे से उस की शराब की जरूरत पूरी नहीं कर पाएंगे.

निहाल सिंह शराब के नशे का इतना आदी हो चुका था कि उस ने अपने दोस्तों से गिड़गिड़ाते हुए कहा कि वह उस की शराब की जरूरत पूरी करते रहें. उस के दोस्तों ने निहाल सिंह की मजबूरी का फायदा उठाते हुए बेटियों से पहले छेड़छाड़ की और फिर निहाल सिंह की नजर बचा कर उन को छेड़ना शुरू कर दिया. बेटियों ने बाप से शिकायत की, तो उस ने उन्हें चुप करा दिया कि वे उस के दोस्त ही तो हैं. इस के बाद तो निहाल सिंह की कम उम्र की बेटियां उस के शराबी दोस्तों की शिकार होती रहीं. यह बात तब खुली, जब निहाल सिंह की बड़ी बेटी ने बाप के शराबी दोस्तों से तंग आ कर फांसीं लगा कर अपनी जान दे दी.  इस मामले में पुलिसिया पूछताछ के दौरान यह पता चला कि निहाल सिंह की शराब की लत का फायदा उठा कर उस के शराबी दोस्त महीनों से उस की बेटियों को अपनी हवस का शिकार बनाते आ रहे थे. पुलिस ने निहाल सिंह और उस के दोस्तों को इस मामले में गुनाहगार मानते हुए सलाखों के पीछे डाल दिया, जबकि निहाल सिंह को अपनी इस करनी पर कोई पछतावा नहीं था. ज्यादातर मामलों में शराबी बाप के चलते उस की जवान होती बेटियों को किसी न किसी तरह से ज्यादती का शिकार होना पड़ता है.

बाप की शराब की लत के चलते उन की पढ़ाईलिखाई और सामाजिक सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाती है. ऐसी हालत में ज्यादातर लड़कियां चुपचाप सबकुछ सहती रहती हैं और जो नहीं सह पाती हैं, वे या तो घर छोड़ कर गलत धंधे में उतर जाती हैं या खुदकुशी का रास्ता अख्तियार कर लेती हैं.

शराब है दुश्मन

शराब दिलोदिमाग के सोचने की ताकत को खत्म कर देती है. जैसेजैसे कोई शख्स शराब का आदी होता जाता है, वह अपनी नौकरीकारोबार से हाथ धोने लगता है. एक समय ऐसा भी आता है, जब शराब की लत के चलते उस का सबकुछ चौपट हो चुका होता है. पढ़ाईलिखाई का सपना संजोने वाली लड़कियों के ख्वाब पिता की इस बुरी लत के चलते धरे के धरे रह जाते हैं और उन्हें बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ता है. इस की वजह से वे न केवल कुंठा का शिकार हो जाती हैं, बल्कि तमाम मजबूरियों के चलते कई तरह के अपराधों में भी शामिल हो जाती हैं.

शराबी बाप के चलते जवान होती बेटियों के सामने जो सब से बड़ी समस्या उभर कर आती है, वह है उन की शादी. ऐसी हालत में या तो उन्हें भाग कर शादी करनी पड़ती है या फिर शराब की जरूरतों को पूरा करने के लिए पिता बेटी को पैसों के लालच के चलते उस से उम्र में काफी बड़े शख्स के साथ शादी कर देता है.

देह धंधे को मजबूर

बाप की शराब की लत के चलते अगर सब से ज्यादा खतरा किसी को होता है, वह है उस की जवान होती बेटियां, क्योंकि बाप की शराब की लत परिवार की माली हालत को खस्ताहाल बना देती है. इस वजह से परिवार में भूखों मरने की नौबत तक आ जाती है, जिस से उबरने व पेट की भूख मिटाने के लिए जवान बेटियां खुद की इज्जत बेचने को मजबूर हो जाती हैं. इस तरह के जितने भी मामले अभी तक सामने आए हैं, उन में यह पाया गया है कि जो लड़कियां देह धंधे में आईं, उन में से ज्यादातर की वजह पिता के शराब पीने की लत रही है. इस हालत में छोटे भाईबहनों की अच्छी पढ़ाईलिखाई और पेट की भूख मिटाने के लिए उन के पास यह गलत काम करने के सिवा कोई दूसरा चारा नहीं था. दिल्ली के रहने वाले सुशील खन्ना पिछले कई सालों से नशे व शराब के खिलाफ मुहिम चला कर जागरूकता फैला रहे हैं. उन का कहना है कि शराब हर तरीके से पतन की तरफ ले जाती है. इस का जो सब से ज्यादा बुरा असर देखा गया है, वह है शराबी बाप की जवान होती बेटियों पर, क्योंकि बाप की शराब की लत के चलते इन की पढ़ाईलिखाई, शादीब्याह में रुकावट तो आती ही है, साथ ही इन की इज्जत पर हर समय खतरा मंडराता रहता है.

ऐसे कई मामले सामने आते रहते हैं, जिस में किसी जवान लड़की ने अपने शराबी बाप की ज्यादतियों के चलते खुदकुशी कर ली फिर या ऐसे कदम उठा लिए, जिसे समाज अच्छी नजर से नहीं देखता है. अगर आप भी किसी बेटी के बाप हैं और नशे के आदी हैं, तो आज ही इस से दूरी बना लें. शराब पीने की लत आप की बेटी के भविष्य को चौपट कर सकती है. आप इस से छुटकारा पाने के लिए अपने नजदीकी नशामुक्ति केंद्र जा सकते हैं. आप का यह फैसला आप की बेटी के भविष्य के सुनहरे पल लाने के लिए काफी होगा.

ट्रैंडी फिंगर रिंग्स

डिफरैंट स्टाइल की फिंगर रिंग हाथों की खूबसूरती बढ़ाने के साथ ही पर्सनैलिटी को भी डिफाइन करती हैं. जहां डायमंड की सिंपल फिंगर रिंग पर्सनैलिटी को सोबर लुक देती है, वहीं कौकटेल फिंगर रिंग काफी फैशनेबल नजर आती है. इन के अलावा और कौनकौन सी रिंग की वैराइटी फैशन में है आइए, जानें:

फुल फिंगर रिंग: फुल फिंगर रिंग की डिजाइन उंगली से शुरू और उंगली के साथ ही खत्म होती है. इस से उंगली को फुलर लुक मिलता है. इसे आप वैस्टर्न, इंडियन और इंडोवैस्टर्न वियर के साथ पहन सकती हैं. लेकिन जब भी फुल फिंगर रिंग पहनें, उस के साथ बाकी कोई रिंग न पहनें और अगर आप की उंगलियां मोटी हैं तो भूल से भी फुल फिंगर रिंग पहनने की गलती न करें.

चेन फिंगर रिंग: अगर आप के हाथ पतले हैं तो चेन फिंगर रिंग आप के हाथों को फुलर लुक दे सकती है. चेन फिंगर रिंग 1 से ज्यादा उंगलियों में भी पहनी जाती है. रिंग्स चैन की सहायता से एकदूसरे से जुड़ी रहती हैं, इसलिए इसे चेन फिंगर रिंग कहा जाता है. लेकिन यह सिर्फ खास मौकों पर ही पहनी जाती है.

कौकटेल फिंगर रिंग: अगर आप मिनटों में फैशनेबल नजर आना चाहती हैं तो अपनी रैग्युलर सिंपल रिंग को कौकटेल फिंगर रिंग से रिप्लेस करें. बिग और बोल्ड साइज की कौकटेल रिंग हमेशा स्टाइलिश लुक देती है. इसे आप खासकर वैस्टर्न आउटफिट के साथ पहन सकती हैं. ऐसी रिंग लंबी और पतली उंगलियों वाली महिलाओं पर ज्यादा सूट करती है.

मिड फिंगर रिंग: रैग्युलर रिंग को उंगली के अंत में और नेल आर्ट रिंग को उंगली की शुरुआत में पहना जाता है, लेकिन मिड फिंगर रिंग को उंगली के ठीक बीच में पहनते हैं. इसलिए इसे मिड फिंगर रिंग कहते हैं. खास मौके के साथ ही मिड फिंगर रिंग को आप रैग्युलर जींस टीशर्ट, सलवारकमीज आदि के साथ भी पहन सकती हैं.

फोर फिंगर रिंग: अगर आप चारों उंगलियों में रिंग पहनना पसंद करती हैं, तो चारों में अलगअलग रिंग पहनने के बजाय फोर फिंगर रिंग को अपनी पहली पसंद बना सकती हैं. फोर फिंगर रिंग एकसाथ चारों उंगलियों में पहनी जाती है, लेकिन इसे देख कर नहीं लगता कि ये आपस में जुड़ी हुई हैं. इसे आप रैग्युलर नहीं पहन सकतीं, यह सिर्फ खास मौकों पर पहनी जाती है.

नेल आर्ट रिंग: अगर आप के पास नेल आर्ट के लिए वक्त नहीं है तो आप नेल आर्ट रिंग भी ट्राई कर सकती हैं. इसे उंगली में आगे की ओर जहां नाखून होता है, वहां पहना जाता है. वैस्टर्न वियर के साथ पहनने के लिए नियोन या फिर ब्लैक ऐंड व्हाइट शेड की नेल आर्ट रिंग खरीदें और इंडियन आउटफिट के साथ पहनने के लिए ज्वैल्ड नेल आर्ट रिंग चुनें.

ट्रिपल फिंगर रिंग: डबल फिंगर रिंग की तरह ट्रिपल फिंगर रिंग भी काफी पसंद की जा रही है. इसे एकसाथ 3 उंगलियों में पहना जाता है. आप चाहें तो इसे भी ट्राई कर सकती हैं. सिंपल डायमंड के साथ ही यह कलरफुल डायमंड में भी मिलती है, जिस का चुनाव आप अपने आउटफिट के अनुसार कर सकती हैं.

डबल फिंगर रिंग: ऐसी रिंग एकसाथ 2 उंगलियों में पहनी जाती है. इस का लुक काफी स्टाइलिश होता है. रैग्युलर से ले कर ह्यूज डिजाइन वाली डबल फिंगर रिंग्स भी मार्केट में उपलब्ध हैं. रोजाना पहनने के लिए सिंपल स्टाइल की डबल फिंगर रिंग और खास मौकों के लिए ज्वैल्ड फिंगर रिंग खरीदें. अगर आप की उंगलियां पतली हैं तो हैवी और मोटी हैं तो लाइट वेट डबल फिंगर रिंग का चुनाव करें.

कफ फिंगर रिंग: इन दिनों हैंड कफ की तरह कफ फिंगर रिंग की भी काफी डिमांड है. मार्केट में प्लेन कफ के साथ ही डिजाइनर कफ रिंग्स भी मिलती हैं. अगर आप की उंगली लंबी है, तो चौड़ी कफ वाली रिंग खरीदें और अगर छोटी है तो ज्यादा चौड़ाई वाली कफ रिंग पहनने से बचें. इस से आप की उंगली और भी छोटी नजर आएगी.

यूरोपियन लुक मेकअप से बनें वैडिंग पार्टी की शान

हर महिला चाहती है कि वह मेकअप के अलगअलग लुक्स अपना कर पार्टी की शान बने. मेकअप के अलगअलग लुक्स व्यक्तित्व को निखारने के साथसाथ आत्मविश्वास भी बढ़ाते हैं. महिलाओं की इसी चाह को ध्यान में रखते हुए सैलिब्रिटी मेकअप आर्टिस्ट अभिषेक खेत्रपाल ने फेब मीटिंग में यूरोपियन लुक मेकअप करना सिखाया. आइए, जानें कि किस तरह इस लुक को अपना कर आप भी बन सकती हैं वैडिंग पार्टी की शान:

बेस मेकअप

मेकअप की शुरुआत करने से पहले क्लींजिंग से चेहरे को अच्छी तरह साफ कर लें. फिर टोनिंग और मौइश्चराइजिंग करें. इस के बाद कंसीलर लगा कर फेस के दागधब्बों को छिपाएं. अब बारी आती है फाउंडेशन यानी बेस से चेहरे को स्मूद लुक देने की. बेस का चुनाव अपनी स्किनटोन के हिसाब से करें. स्किनटोन के हिसाब से बेस चुनने के लिए बेस को फोरहैड और चीक्स पर लगा कर देखें. अगर वह चेहरे की त्वचा से मैच कर रहा हो तो उसे पूरे चेहरे पर अच्छी तरह लगाएं. बेस लगाते समय लाफिंग लाइंस, आई कौर्नर्स, लिप कौर्नर्स पर खास ध्यान रखें और उन्हें अपलिफ्ट करें. बेस लगाते समय उसे त्वचा पर अच्छी तरह ब्लैंड करना न भूलें. ओपन पोर्स को अच्छी तरह फिल करें ताकि पूरे चेहरे की त्वचा को स्मूद लुक मिले. अगर त्वचा ज्यादा ड्राई हो तो प्राइमर या मौइश्चराइजर लगाएं और अगर ग्रीसी यानी औयली हो तो मैट फिनिश बेस का इस्तेमाल करें, साथ ही मेकअप से पहले टोनर लगाना न भूलें. इस से स्किन पर औयल आना बंद हो जाएगा. बेस की ब्लैंडिंग करते समय हाथों का प्रैशर हलका रखें. आई बौल्स एरिया पर बेस न लगाएं वरना आंखें छोटी लगेंगी.

ट्रांसल्यूशन पाउडर: चेहरे पर बेस को अच्छी तरह ब्लैंड करने के बाद उस पर ट्रांसल्यूशन पाउडर राउंड डाइरैक्शन में लगाएं. अगर ट्रांसल्यूशन पाउडर ज्यादा लग जाए तो ब्रश की सहायता से ऐक्स्ट्रा पाउडर हटा लें. लाफिंग लाइंस न दिखें, इस के लिए ब्लैंडिंग अच्छी तरह करें. अगर पैनकेक लगा रही हैं, तो उसे पानी से ही लगाएं और मेकअप उतारते समय औयल की सहायता से हटाएं. पैनकेक मेकअप को वाटरप्रूफ और लौंगलास्टिंग बनाता है. अगर रात की पार्टी में जाना है और वैस्टर्न ड्रैस पहन रही हैं, तो पूरे चेहरे पर मैटेलिक शाइनर लगाएं.

ब्लशर: मेकअप में ब्लशर बहुत जरूरी होता है. इस से डल स्किन में फ्रैश और रोजी ग्लो आता है. ब्लशर से फीचर्स को उभार मिलता है और चेहरे को डैफिनेशन. ब्लशर की सहायता से चेहरे को शेप देने के अलावा कंटूर भी किया जा सकता है. इसे लगाने के लिए डोम शेप्ड ब्लशर ब्रश को ब्लशर पर रख कर गोलाई में घुमाएं और चीक्स के उभार पर हलके स्ट्रोक्स देते हुए लगाएं तथा फोरहैड की तरफ ले जाते हुए ब्रश से अच्छी तरह ब्लैंड करें. यदि ब्लशर ज्यादा लग जाए, तो पाउडर पफ पर साफ टिशू लपेटें और ब्लशर में थोड़ा गोल्डन शिमर मिला कर लगाएं. ऐसा करने से फीचर्स को उभार मिलेगा. अगर स्किनटोन डार्क हो तो पेल पेस्टल शेड्स लगाने से बचें. इस से त्वचा की रंगत ग्रे दिखेगी.

हेयरस्टाइल: किसी भी स्टाइल के मेकअप व ड्रैस का परफैक्ट लुक तभी आता है जब हेयरस्टाइल मैचिंग व परफैक्ट हो. यूरोपियन मेकअप के साथ स्टाइलिश हेयरस्टाइल के लिए सब से पहले बालों को ब्लो ड्राई कर लें ताकि वे सुलझ कर स्मूद हो जाएं. उस के बाद बालों को 3 हिस्सों में बांट लें. पीछे के बालों के हिस्से को रोल करते हुए जूड़े का आकार दें. इस के बाद दोनों तरफ के बालों को 1-1 कर के गूंथें और रबड़ से बांध लें. फिर दोनों तरफ की ब्रेड को जूड़े के ऊपर पिनअप कर दें. तैयार हेयरस्टाइल को ऐक्सैसराइज करने के लिए छोटेछोटे आर्टिफिशियल या नैचुरल फूल लगाएं.

आई मेकअप: आई मेकअप के लिए पहले ऊपरी पलकों पर फाउंडेशन और लूज पाउडर लगाएं. इस के बाद आई पैंसिल से ऊपर की पलकों पर पतली रेखा खींच कर उसे अच्छी तरह ब्लैंड कर लें ताकि आईलिड बड़ी दिखें. इस के बाद आईशैडो लगाएं. दिन के समय लाइट शेड का आईशैडो लगाएं, तो रात को ब्राइट शेड के आईशैडो का प्रयोग करें. आईज को ग्लिटरी लुक देने के लिए ग्लिटर सिर्फ आउटलाइन पर ही लगाएं.

लिप मेकअप: होंठों के मेकअप के लिए लिपस्टिक के शेड से मैच करते लिपलाइनर से आउटलाइन बनाएं. आउट लाइनिंग के लिए डार्क शैड का प्रयोग न करें. अगर होंठ पतले हों और उन्हें मोटा दिखाना हो तो लिपलाइनर को होंठों के बाहरी किनारों पर लगाएं. इस के बाद ड्रैस से मैचिंग लिपस्टिक का शेड ले कर पूरे होंठों को फिल करें. लिपस्टिक लगाने के बाद लिपग्लौस की सहायता से होंठों को हाईलाइट करें.

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