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समर ब्राइडल लुक के नए अंदाज

गरमी के मौसम में बनने वाली दुलहनें ऐसे परिधान तलाशती हैं, जो उन की खूबसूरती बढ़ाने के साथसाथ आरामदायक भी हों. इस मौसम में वजनदार लहंगा व भारीभरकम गहने पहनने के अलावा मेकअप की मोटी परत चढ़ाना भी मुमकिन नहीं होता है और इस बात को फैशन इंडस्ट्री भी बखूबी समझती है. तभी तो फैशन के गलियारों में समर वैडिंग की दुलहनों के लिए वह सब मौजूद है, जो वे चाहती हैं.

आजकल की लड़कियां ट्रैंडी और स्टाइलिश आउटफिट्स पसंद करती हैं. अब पारंपरिक दिखने वाले शादी के लहंगे चैक लिस्ट से आउट हो चुके हैं. इस बाबत फैशन डिजाइनर श्रुति संचिति कहती हैं, ‘‘बौलीवुड फिल्मों में

अभिनेत्रियों द्वारा पहने गए स्टाइलिश लहंगों का क्रेज आम लड़कियों में तेजी से बढ़ रहा है. पहले ज्यादातर दुलहनें गहरे लाल रंग की जरी और सीक्वैंस वर्क वाले भारीभरकम लहंगे ही पहनती थीं, मगर अब नौनट्रैडिशनल कौन्सैप्ट वाले लहंगे, वैडिंग गाउन्स, घाघरा और स्कर्ट्स पसंद करती हैं.’’

आजकल लड़कियां पहले की शरमाईसकुचाई दुलहनों की तरह एक जगह बुत बन कर नहीं बैठतीं, बल्कि अपनी शादी के हर क्षण का लुत्फ उठाती हैं. वे बरातियों संग डांस भी करती हैं और मेहमानों का स्वागत भी.

गरमी के मौसम में शादी के जोड़े को दोहरी भूमिका निभानी पड़ती है. उस का दुलहन को स्टाइलिश दिखाने के साथसाथ आरामदायक होना भी जरूरी है. श्रुति के अनुसार, यदि शादी में लहंगा ही पहनना है, तो फैब्रिक, कलर और लहंगे पर हुए काम पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है, क्योंकि इस मौसम में स्टाइल और कंफर्ट में संतुलन बैठाना जरूरी है. श्रुति समर में निम्न ट्रैंडी वैडिंग लहंगों के स्टाइल्स के बारे में बताती हैं:

– समर वैडिंग के लिए ओंब्रे सिल्क फैब्रिक का बना लहंगा सब से आरामदायक विकल्प है. यह फैब्रिक वजन में तो हलका होता ही है, इसे कलर कौकटेल के लिए भी जाना जाता है. दरअसल, कई रंगों की शेडिंग इसे रचनात्मक बना देती है, इसलिए इस फैब्रिक को वैडिंग लहंगे के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इस पर गोल्डन पैच वर्क बेहद खूबसूरत लगता है. इस तरह के लहंगे को क्रौप वैडिंग चोली के साथ पहना जा सकता है. हलकी शिफौन की चुन्नी इस लहंगे के लुक को पूरा कर देती है.

– गैरपारंपरिक दुलहनों के लिए सिल्वर क्रौप टौप के साथ स्करलेट रैड कलर का वैल्वेट से बना लहंगा भी एक आदर्श लहंगा हो सकता है. यदि लहंगे पर चौड़ा गोल्डन बौर्डर हो तो वह और भी स्टाइलिश लगेगा.

– आजकल गोल्ड थ्रैड की ऐंब्रौयडरी वाले लहंगे भी काफी इन हैं. ये दिखते भारी हैं, मगर वास्तव में इन का वजन काफी कम होता है.

– दुलहन के लहंगे में गोल्डन कलर का एक अलग महत्त्व होता है. यह एक ऐसा रंग है, जिस में ट्रैडिशनल और मौडर्न दोनों ही लुक देने की क्षमता होती है. इसलिए गोल्ड थ्रैड वर्क के साथ ही गोल्ड फ्लौवर मोटिफ्स से सजे लहंगे भी समर वैडिंग की दुलहनों के लिए अच्छे विकल्प हैं. साटन फैब्रिक पर हाफ नैट कवरिंग के साथ ये लहंगे नौनट्रैडिशनल कौन्सैप्ट पर तैयार होते हैं, इसलिए डैस्टिनेशन वैडिंग के लिए सब से अच्छे रहते हैं.

– अब दुलहनें लाल पारंपरिक रंगों से हट कर रंगों का चुनाव करती हैं. समर वैडिंग के लिए तैयार लहंगों के रंगों में प्रयोग काफी पसंद किए जा रहे हैं. अब रैड फैमिली के लाइट कलर्स के साथ ही पिंक, ग्रीन, ब्लू और निओन कलर्स के लाइट शेड्स के ब्राइडल लहंगे भी तैयार हो रहे हैं.

– लहंगों में हैरिटेज फैब्रिक्स जैसे बनारसी, कांजीवरम और चंदेरी का फैशन भी लौट आया है. रौयल एवं क्लासिक इंडियन लुक पसंद करने वाली दुलहनें इस तरह के लहंगे भी ट्राई कर सकती हैं.

पिक्चर परफैक्ट मेकअप का है ट्रैंड

आजकल प्रोफैशनल फोटोग्राफी का जमाना है, इसलिए मेकअप का पिक्चर परफैक्ट होना बेहद जरूरी है. इस बाबत मेकअप आर्टिस्ट अतुल चौहान कहते हैं, ‘‘पहले की तरह फाउंडेशन, फेस पाउडर, काजल, बिंदी और लिपस्टिक लगा देने भर से आज की दुलहनें तैयार नहीं हो जातीं, बल्कि उन की पोशाक के आधार पर हमें उन का मेकअप स्टाइल तय करना पड़ता है. तभी उन्हें फोटोजैनिक लुक दिया जा सकता है.’’

मेकअप स्टाइल को तो और भी सावधानी से चुनना पड़ता है, क्योंकि इस मौसम में पसीना सारा खेल बिगाड़ सकता है. अतुल के अनुसार, इस मौसम में डे वैडिंग हो या नाइट वैडिंग मेकअप का सैटल होना जरूरी है. इस तरह के मेकअप में न्यूट्रल रंगों पर जोर दिया जाता है. इन में सभी हलके रंग जैसे पीच, ब्राउन फैमिली के लाइट कलर्स और स्किनटोन बेस्ड कलर्स का इस्तेमाल होता है. ये रंग दुलहनों को सोबर और सौफ्ट लुक देते हैं.

अतुल कुछ ऐसे समर ब्राइडल लुक्स के बारे में बता रहे हैं, जो खूबसूरती के साथसाथ स्टाइल भी नवाजते हैं:

– ड्रामैटिक लुक: आजकल की लड़कियों को सैलिब्रिटी लुक चाहिए, जो असल में ड्रामैटिक मेकअप होता है. इस मेकअप में आंखों को बोल्ड लुक दिया जाता है और इस के लिए ग्लिटर्स का इस्तेमाल होता है. लिपस्टिक के शेड्स भी डार्क चुने जाते हैं. कंटूरिंग और हाईलाइटर्स का प्रयोग भी इस मेकअप का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है. समर वैडिंग के लिए यह मेकअप एक अच्छा विकल्प है बशर्ते शादी रात की हो.

– स्ट्रोबिंग एवं बेकिंग: स्ट्रोबिंग और बेकिंग मेकअप इंडस्ट्री का एकदम ताजा ट्रैंड है. जहां स्ट्रोबिंग में लाइट मेकअप के साथ अपर चीकबोन, नोज, अपर लिप्स और चिन हाईलाइटिंग पर जोर दिया जाता है, वहीं बेकिंग में अंडरआई और फोरहैड की कमियों को दुरुस्त किया जाता है.

– रौयल लुक: इस लुक में फ्लैट हेयरस्टाइल के साथ स्मोकी आई इफैक्ट दिया जाता है. इस लुक में बड़ी बिंदी और आभूषणों का अधिक महत्त्व है, इसलिए मेकअप बहुत ही हलका होता है.

– अरैबिक स्टाइल: यह मेकअप भारतीय दुलहनों द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है, क्योंकि इस मेकअप स्टाइल में बहुत ही कम कौस्मैटिक्स का प्रयोग होता है और पूरा फोकस आंखों को दिया जाता है.

समर ब्राइडल ज्वैलरी भी है खास

अब दुलहनें अपनी शादी के जोड़े के साथ इमिटेशन ज्वैलरी की जगह रियल ज्वैलरी पहनना ज्यादा पसंद करती हैं. इस बाबत ज्वैलरी डिजाइनर प्रितेश गोयल कहते हैं, ‘‘आजकल की दुलहनें ज्यादा जेवर पहनना पसंद नहीं करती हैं, इसलिए जो आभूषण वे शादी के वक्त खरीदती हैं उन की डिजाइन को अपनी ड्रैस के साथ मैच कर के ही खरीदती हैं.’’

समर वैडिंग और विंटर वैडिंग के हिसाब से दुलहनों की अलगअलग डिमांड होती है. जहां विंटर वैडिंग के लिए दुलहनें थोड़ा भारी ज्वैलरी भी पसंद कर लेती हैं वहीं समर वैडिंग के लिए उन की पसंद हलकी, सोबर और वनपीस ज्वैलरी होती है.

प्रितेश समर वैडिंग ज्वैलरी के कुछ खास ट्रैंड्स के बारे में बता रहे हैं:

– जहां सर्दियों में दुलहन के लिए मल्टीलेयर्ड नैकलैस ट्रैंड में है वहीं गरमियों में टोडा डिजाइन (लंबे हार) का फैशन है. इस मौसम में दुलहन गले से सटे चोकर डिजाइन के नैकलैस भी ले सकती हैं, क्योंकि ये भी लेटैस्ट ट्रैंड का हिस्सा हैं.

– यदि गोल्ड ज्वैलरी ही लेनी है, तो मेटा पौलिश और फ्रौस्टिंग वर्क वाले मेटा स्टाइल के गहने भी काफी इन ट्रैंड हैं. लुक में ये हैवी लगते हैं, मगर वजन में हलके होते हैं.

– अब चूडि़यों से भरे हाथों का फैशन भी चला गया है. अच्छे ज्वैलरी ब्रैंड्स में चौड़े ब्राइडल हैंडकफ्स आने लगे हैं. दुलहनें चाहें तो दोनों हाथों में 1-1 हैंडकफ पहन सकती हैं वरना एक हाथ में हैंडकफ और दूसरे में 2 कड़े भी पहन सकती हैं.            

बाद में भी कर सकती हैं लहंगे का इस्तेमाल

दुलहन की सब से बड़ी समस्या होती है कि शादी का महंगा भारीभरकम लहंगा शादी के 2-3 साल बाद उन के लिए बेकार हो जाता है. इस की पहली वजह होती है कि लहंगा आउट औफ फैशन हो चुका होता है या फिर दूसरी वजह यह होती है कि शादी को साल भर से ऊपर हो जाने के कारण उन्हें दुलहनों वाला लहंगा पहनने में झिझक होती है. मगर नौनट्रैडिशनल लुक वाले लहंगों को कभी भी किसी भी अवसर पर पहना जा सकता है. यदि बोरियत हो भी जाए तो उन्हें रीस्टिच कराया जा सकता है. रीस्टिच की प्रक्रिया द्वारा उन से निम्न लिबास तैयार करवाए जा सकते हैं:

अनारकली कुरता: यदि लहंगे और उस की चोली को अलगअलग बौटम और टौप के साथ स्टिच करवाया जाए, तो 2 पार्टीवियर अनारकली कुरते तैयार हो सकते हैं.

– लौंग गाउन: लहंगे की चोली और स्कर्ट को बीच से स्टिच करवा कर स्टाइलिश गाउन भी तैयार हो सकता है.

– लहंगा साड़ी: लहंगे के साथ मैच करता कुछ अलग सा दुपट्टा उस के साथ स्टिच करवा दिया जाए, तो एक डिजाइनर लहंगा साड़ी तैयार हो जाती है.

ब्राइडल चोली ट्रैंड्स

– औफशोल्डर: औफशोल्डर या कोल्ड शोल्डर इस सीजन का हौट ट्रैंड है. वैस्टर्न आउटफिट्स से ले कर इन्हें ट्रैडिशनल लिबासों के साथ भी पेयर किया जा रहा है. ब्राइडल लहंगों के साथ भी इस तरह की चोलियां विभिन्न डिजाइनों में उपलब्ध हैं.

– ब्रालेट: यदि दुलहन थोड़ा बोल्ड लुक चाहती है, तो ब्रालेट चोली अच्छा विकल्प है. यह चोली डीपनैक और शौर्ट स्लीव्स के लिए जानी जाती है. वैसे तो इस तरह की चोली का ट्रैंड साडि़यों के साथ है, मगर आजकल ब्राइडल लहंगों के साथ भी इन्हें क्लब किया जा रहा है.

– पोचू स्टाइल: पोचू स्टाइल चोली के कई अंदाज हैं. दुलहन के फ्रंट को कवर करने के लिए जिस दुपट्टे का इस्तेमाल किया जाता है पोचू चोली उस की आवश्यकता को खत्म कर देती है. इस तरह गरमी के मौसम में दुलहनें 2 दुपट्टों के वजन से भी बचती हैं और उन्हें स्टाइलिश लुक भी मिल जाता है.

– सुपर क्रौप चोली: नौनट्रैडिशनल लहंगे पर यह चोली बहुत ही खूबसूरत दिखती है. इस की लैंथ ब्रैस्ट लाइन तक ही होती है. पतली कमर वाली दुलहनों पर इस तरह की चोली खूब जंचती है.

– प्रीड्रैप्ड दुपट्टा चोली: लुक में सब से अलग यह चोली काफी ट्रैंडी है. इस में चोली के साथ ही दुपट्टा भी जुड़ा होता है. लहंगे के साथ इस तरह की चोली दुलहनों को इंडोवैस्टर्न लुक देती है.            

ऐसे तो रिश्ता टूटेगा ही

पतियों को लगातार हड़काने वाली औरतों को दिल्ली के उस पेंटर पति से सबक लेना होगा, जिस ने गुस्से में आ कर अपने 8 वर्षीय बेटे के सामने पत्नी को सिर पर फावड़ा मारमार कर मार डाला और फिर लाश को बोरे में भर कर सड़क पर डाल आया. यह पति मजदूरी करता था पर अच्छे पढ़ेलिखे घरों में लाखों पति ऐसे होंगे जिन का खून उस पेंटर पति की तरह उबलता हो. दरअसल, औरतें भूल जाती हैं कि पति कैसा भी हो, कम से कम उन की जबान चलाने से तो वह बदल नहीं सकता. कभीकभार का गुस्सा तो ठीक है पर लगातार शिकायती लहजा अपनाए रखना, रातदिन पतियों की गलतियों, कमियों, सुविधाओं के अभावों, रिश्तेदारों के व्यवहारों पर कमैंटरी करना चाहे औरतें अपना अधिकार व कर्तव्य समझती हों पर पतिपत्नी के बीच विवादों की जड़ आमतौर पर यह लगातार नैगिंग ही होती है जो अच्छेभले पति को पटरी से उतार देती है. पतिपत्नी में डोमैस्टिक वायलैंस की जड़ में भी यही बड़बड़ाहट होती है और पतियों का शराब या दूसरी औरतों का सहारा लेने के पीछे यही वजह भी होती है. यह संभव है कि बहुत पतियों में बहुत कमियां हों पर यह पक्का है कि वे कमियां पत्नी के आदेशों, उपदेशों, तानों, कड़वे वचनों, रोनेधोने, धमकियों से दूर नहीं हो सकतीं.

पतिपत्नी का जोड़ा एक विशिष्ट सामाजिक देन है और जब तक जोड़ा बना है दोनों एकदूसरे का पूरक बनें. बायां हाथ हर वह काम नहीं कर सकता जो दायां हाथ कर सकता है और पत्नी को बाएं हाथ का पूरक बनना होता है. उसी तरह पति को पत्नी के कामों में नुक्स निकालने की जगह खुद काम करने की आदत डालनी चाहिए. हर पति और हर पत्नी अलगअलग होते हैं. पड़ोस के या रिश्ते के पतिपत्नी क्या कर रहे हैं या क्या कर सकते हैं, यह आदर्श बात नहीं बन सकती.

ऊपर वाली घटना में पत्नी पति से कोई जौब लेने को कह रही थी पर यदि पति में क्षमता या योग्यता न हो तो पत्नी के कहने से तो जौब नहीं मिलेगी न? पतिपत्नी का जोड़ा जब टूटता है तब बहुत कुछ टूटता है, चीनी के बरतन की तरह. इस जोड़े को संभाल कर रखना होता है, इस पर लोहे की पतीली की तरह कल्छी नहीं मारी जा सकती. 

कोल्ड वैक्स स्ट्रिप है तो नो टैंशन

अकसर आप के साथ भी ऐसा होता होगा कि अंडरआर्म्स की वजह से आप को आखिरी समय में ड्रैस चेंज करनी पड़ती होगी और आप के पास इतना समय नहीं हो कि ब्यूटीपार्लर जा कर वैक्स करा सकें. ऐसे में आप को लेटैक्ट फैशन के बजाय अपनी वही पुरानी ड्रैस पहन कर जाना पड़ता होगा, जिसे सब ने कईर् बार देखा होगा  मगर इस समर आप चाहती हैं कि हौट व फैशनेबल दिखें और आप को अपनी ड्रैस के साथ समझौता न करना पड़े, तो कोल्ड वैक्स स्ट्रिप आप के लिए बैस्ट औप्शन है. इस से आप कभी भी कहीं भी खुद वैक्स कर सकती हैं. आप को पार्लर में वैक्ंिसग के लिए घंटों इंतजार करने की जरूरत नहीं है.

कैसे खास है कोल्ड वैक्स स्ट्रिप

ईजी टू यूज: कोल्ड वैक्स स्ट्रिप यूज करने में आसान है. इस में वैक्स को पहले गरम करने, धीरेधीरे लगाने और निकालने का झंझट नहीं होता. बस स्ट्रिप को हाथ से 5-10 सैकंड रब कर ग्रोथ की उलटी डाइरैक्शन में लगा मिनटों में हेयर फ्री स्किन पाएं. कोल्ड वैक्स स्ट्रिप की सब से खास बात यह है कि इसे सभी उम्र की महिलाओं के लिए इस्तेमाल करना आसान है.

समय की बचत: वैक्स कराने के लिए ब्यूटीपार्लर में घंटों इंतजार करना पड़ता है और फिर वैक्स होने में जो समय लगता है वह अलग. पर कोल्ड वैक्स स्ट्रिप में टाइम लिमिटेशन नहीं है. अब आप को जब समय मिले तब वैक्स कर सकती हैं और वह भी बिना किसी झंझट के.

कैरी करना आसान: कहीं घूमने जा रही हैं, तो आराम से हैंडबैग में कैरी कर सकती हैं. यह लीक नहीं होती और न ही वजनदार है.

नो पेन: वैक्सिंग का यह सब से आसान तरीका है. इस से बाल मिनटों में निकल जाते हैं. इस से न तो त्वचा पर किसी तरह की लालिमा आती है और न ही दर्द व जलन होती है. यह डैड स्किन की ऊपरी परत को भी निकालती है और त्वचा को स्मूद व सौफ्ट बनाती है.

हाइजिनिक: पार्लर में कई तरह की महिलाएं आती हैं. सभी पर एक ही प्रोडक्ट का इस्तेमाल किया जाता है, जिस से इन्फैक्शन होने का खतरा रहता है, पर कोल्ड वैक्स स्ट्रिप हाइजिनिक है. बस इस्तेमाल किया और फेंक दिया. इस की सब से खास बात यह है कि इस में किसी तरह की बदबू नहीं आती.

कई वैराइटीज में उपलब्ध: ब्यूटीपार्लर में अलगअलग वैक्स के अलगअलग चार्जेज होते हैं पर कोल्ड वैक्स स्ट्रिप में एक ही दाम में अलगअलग स्किन के अनुसार अलगअलग स्ट्रिप्स की कई वैराइटीज उपलब्ध हैं जैसे बटर, बैरी, ऐलोवेरा, लोव्स, विटामिन ई आदि. मार्केट में कई कंपनियों की कोल्ड वैक्स स्ट्रिप उपलब्ध हैं, जिन में से वीट भी एक है.

बलात्कारी मानसिकता कैसे खत्म हो

16 दिसंबर, 2012 की रात दिल्ली में 23 वर्षीय पैरामैडिकल की छात्रा के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था, जिस के फलस्वरूप अधिकांश जनमानस आंदोलित हो उठा था. लेकिन उस के बाद भी मासूम बच्चियों से ले कर प्रौढ़ों तक कई सामूहिक बलात्कार की घटनाएं घटीं. इस बात पर कोई विचार नहीं किया जा रहा है कि आखिर बलात्कारियों की संख्या क्यों बढ़ रही है? ऐसे कौन से कारण हैं जिन से कोई किशोर या प्रौढ़ अपनी मानमर्यादा व आचारविचार छोड़ कर दुष्कर्म जैसा कुकृत्य कर बैठता है? इस का मुख्य कारण केवल कामवासना है या महिलाओं के खिलाफ आक्रोश की अभिव्यक्ति?

खुलापन और आधुनिकता इस अंध यौन लिप्सा के सामने असहाय क्यों हैं? पहले किशोरकिशारियों के आपस में न मिल पाने को दोष दिया जाता था, तो अब कहा जा रहा है कि युवतियां बिंदास व उन्मुक्त हो रही हैं तथा युवाओं से अधिक घुलमिल रही हैं, जिस कारण वे कभी रेप तो कभी गैंगरेप या फिर कभी अपने ही किसी रिश्तेदार की शिकार हो जाती हैं. नैशनल इलैक्शन वाच और एसोसिएशन फौर डैमोक्रेटिक रिफौर्म की एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले 5 साल में देश के विभिन्न राजनीतिक दलों ने 260 ऐसे उम्मीदवारों को अपनी पार्टियों से चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिए जिन पर दुष्कर्म व महिला उत्पीड़न जैसे संगीन आरोप थे. इन प्रमुख राजनीतिक दलों में कांग्रेस सब से आगे है, उस ने 26 बलात्कारियों को टिकट दिया है. इस के बाद भाजपा ने 24 को, बसपा ने 18 को और सपा ने 16 आरोपियों को टिकट दिया.

बढ़ती हताशा और हमारी सोच

केंद्र और राज्य सरकारों के पास वर्तमान युवापीढ़ी को शिक्षित करने के लिए न तो कोई योजना है और न ही सामाजिक संस्कार व रोजगार देने की कोई व्यवस्था. कुछ लोग आधुनिकता को कोस रहे हैं जोकि हकीकत से कोसों दूर है, क्योंकि बलात्कार अनादिकाल से अस्तित्व में है.

बदलती प्रवृत्ति

लिव इन रिलेशनशिप व समलैंगिकता को अपराधमुक्त किया जाना भी इस का एक कारण है. जो लोग यह सवाल उठाते हैं कि दबीढकी महिलाओं के साथ बलात्कार क्यों होते हैं, तो उन्हें सैक्स सर्वे पर गौर करना चाहिए, जिन में बताया जाता है कि कुछ पुरुषों को महिलाओं का उन्नत सीना आकर्षित करता है तो कुछ को उन के हिप्स आकर्षित करते हैं. यहां तक कि कुछ पुरुष तो किसी महिला की चाल पर ही फिदा हो जाते हैं.

परपीड़न की प्रवृत्ति भी एक कारण है. इस प्रवृत्ति के लोग, दूसरों को कष्ट पहुंचा कर खुद आनंदित होते हैं. अभी तक घटी सामूहिक दुष्कर्म की घटनाओं में इस प्रवृत्ति की स्पष्ट झलक मिलती है. नशे की बढ़ती प्रवृत्ति भी एक कारण है. नशे का आदी मानव अपना आपा खो बैठता है तथा उस की यौन उत्तेजना में बढ़ोतरी हो जाती है. वर्तमान में किशोर तो किशोर किशोरियां भी जाम से जाम टकरा रही हैं.

महिलाओं में बढ़ती जागरूकता

महिलाओं के लिए काम करने वाले गैर सरकारी संगठन ‘जागोरी’ का कहना है कि चूंकि अब भारतीय महिलाओं में जागृति आ रही है और वे यौन उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठा रही हैं इसलिए कुछ परंपरागत मर्द इसे पचा नहीं पा रहे हैं, इसलिए वे इन साहसी महिलाओं को सबक सिखाने के लिए बर्बर तरीके अपना रहे हैं. भारत की निर्वाचित सरकारें केवल आर्थिक बदलाव लाना चाहती हैं. स्वतंत्रता के बाद हमारे देश में विदेशी पूंजी के साथ ही वहां की विकृत संस्कृति भी आ धमकी है, जिस के चलते हमारी दमित इच्छाएं सामने आने लगी हैं तथा हमारे मनोविकार भी बढ़ते चले जा रहे हैं. हम अपने परंपरागत नैतिक मूल्यों व समृद्ध संस्कृति को ले कर बहुत ही आत्ममुग्ध हैं, जबकि हमारी सांस्कृतिक परंपराएं अब केवल सांस्कृतिक समारोहों और साहित्य तक ही सीमित रह गई हैं, जोकि आज के इंटरनैट के युग में बहुत पिछड़ी मानी जाती हैं. जिस कारण आज का युवक गलत आचरण करने से भी नहीं हिचकता.

लचर कानून व्यवस्था व संसाधनों का अभाव

शासनप्रशासन की लचर कानून व्यवस्था, रात को प्रकाश का उचित प्रबंध न होना तथा बिजली की कमी, सार्वजनिक परिवहन का उचित प्रबंध न होना, सड़कों का उचित रखरखाव न होना, चिकित्सा सुविधाओं और शिक्षण संस्थाओं का अभाव भी इस के मुख्य कारण हैं.

शहरी गरीबों में बढ़ती हताशा और लंपटपन के कारण उन में असंवेदनशीलता भी बढ़ रही है, जिस कारण वे अपने जैसी ही किसी गरीब या कामकाजी युवती के साथ बलात्कार या दूसरी तरह की हिंसा करते वक्त शर्मशार नहीं होते. वरिष्ठ मनोचिकित्सक डा. अरुणा ब्रूटा मानती हैं कि शहरों में जिस तरह से आर्थिक असमानता बढ़ रही है, उस से भी आम लोगों में कुंठा बढ़ रही है. शहरी पुरुष वर्ग ज्यादा आक्रामक और हिंसक हो गया है. सदियों से पुरुष महिलाओं का शोषण करता आया है. उन्हें भोग की वस्तु माना जाता है. पुरुषों के इस नजरिए के चलते भी महिलाओं से बलात्कार के मामले होते हैं.

अब युवतियां बड़ी संख्या में घरपरिवार से बाहर निकल कर कामकाजी दुनिया में अपनी पैठ मजबूत कर रही हैं. ऐसे में पहले से ही कुंठित युवाओं में युवतियों के प्रति जलन का भाव भी बढ़ रहा है. इसलिए वे मौका मिलते ही युवतियों को कमतर साबित करने की कोशिश करते हैं. कईर् बार इस की परिणति बलात्कार जैसे घिनौने अपराध के रूप में होती है.

मीडिया

हमारे देश का चाहे प्रिंट मीडिया हो या इलैक्ट्रौनिक, सभी जगह उत्तेजक दृश्य व अन्य सामग्री की कोईर् कमी नहीं है. विज्ञापन चाहे किसी भी वस्तु का हो, लेकिन उस में नारी की कामुक अदाएं व उस के अधिक से अधिक शरीर को दिखाने पर जोर रहता है. फुटपाथ पर अश्लील साहित्य व ब्लू फिल्मों की सीडी, डीवीडी आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं. बाकी कसर मोबाइल व इंटरनैट ने पूरी कर दी है. जहां प्रतिदिन हजारों नाबालिग अश्लील सामग्री का अवलोकन करते हैं.भारतीय सिनेमा में बलात्कार के दृश्यों को बहुत ही ग्लैमराइज तरीके से तथा बढ़ाचढ़ा कर दिखाया जाता है. कुछ युवा इन फिल्मी दृश्यों से प्रेरणा ले कर बलात्कार जैसी घटनाओं को अंजाम देते हैं. 

यौन शिक्षा का अभाव

यह एक शाश्वत सत्य है कि मानव जीवन की एक बुनियादी आवश्यकता है सैक्स. समाज ने इस के लिए विवाह के रूप में एक उचित व्यवस्था की है. विवाह के बाद स्त्री व पुरुष दोनों ही अपनी इस आवश्यकता की पूर्ति कर सकते हैं, लेकिन वर्तमान में हमारे समाज में युवाओं के मुकाबले युवतियों की संख्या दिन पर दिन कम होती जा रही है. कुछ युवतियां व युवक शादी के बंधन में बंधना ही नहीं चाहते. वे शिक्षा व रोजगार में स्थायित्व पाने के फेर में भी अपनी सैक्स जैसी बुनियादी आवश्यकता को पूरा नहीं कर पाते. घटिया शिक्षा पद्धति की वजह से अल्प मानसिक विकास के कारण भी कई युवा ड्रग्स, शराब और ग्लैमर के नशे में बलात्कार को रोमांच का हिस्सा मान लेते हैं. असामान्य यौन प्रवृत्ति के युवक, युवतियों के विरुद्ध हिंसा करने लगते हैं.

बलात्कारी का व्यवहार

दिल्ली की स्वयंसेवी संस्था ‘स्वचेतन’ द्वारा पिछले 5 साल में जेल में बंद 242 बलात्कारियों का अध्ययन किया गया. ज्यादातर बलात्कारी पकड़े जाने से पूर्व बलात्कार कर चुके थे और इन सभी के मन में महिलाओं के प्रति गहरी नफरत थी. वे महिलाओंके प्रति अपमानजनक और अश्लील गालियों का प्रयोग करते थे तथा इन में अपने शिकार पर यौन फंतासियां आजमाने की कभी न मिटने वाली भूख थी.                     

समाधान

नारी को वह सम्मान देना होगा जिस की वह हकदार है और यह तभी होगा जब हम युवाओं के मन में यह कूटकूट कर भर दें कि एक आदर्श समाज निर्माण के लिए महिलाओं का सम्मान करना अति आवश्यक है. इस के लिए स्कूलों में नैतिक शिक्षा को लागू करना होगा. इस के लिए यह भी आवश्यक है कि उन्हें अच्छा साहित्य पढ़ने को मिले.

–       टीवी चैनलों पर अच्छे कार्यक्रम दिखाए जाएं जिस से युवाओं की नकारात्मक सोच में बदलाव हो.

–       खेलकूद से भी बुरी प्रवृत्तियों का शमन किया जा सकता है. इस के बाद भी अगर कोई बलात्कार करता है तो बलात्कारी का अंगोच्छेद कर देना या रासायनिक विधि से उसे हमेशा के लिए नपुंसक बना देना चाहिए. शोहरत व दौलत के बल पर जो लोग कानून का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं उन्हें हर हाल में रोकना होगा. राजनीति में बढ़ती चरित्रहीनता व अपराधीकरण को रोकना होगा.

–       बलात्कारी मनोवृत्ति के फैलाव को रोकने के लिए नैतिक शिक्षा का विस्तार व सामाजिक मूल्यों का विकास अति आवश्यक है. सामाजिक मूल्यों के विकास में लोक संस्कृति, इतिहास तथा साहित्य की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है, इसलिए इन को बढ़ावा देना भी जरूरी है.

तीन साल बाद खुला रहस्य

पिछले साल सन 2016 के सितंबर महीने में अलीगढ़ का एसएसपी राजेश पांडेय को बनाया गया तो चार्ज लेते ही उन्होंने पुलिस अधिकारियों की एक मीटिंग बुला कर सभी थानाप्रभारियों को आदेश दिया कि जितनी भी जांचें अधूरी पड़ी हैं, उन की फाइलें उन के सामने पेश करें. जब सारी फाइलें उन के सामने आईं तो उन में एक फाइल थाना गांधीपार्क में दर्ज प्रीति अपहरण कांड की थी, जिस की जांच अब तक 10 थानाप्रभारी कर चुके थे और यह मामला 12 दिसंबर, 2013 में दर्ज हुआ था.

राजेश पांडेय को यह मामला कुछ रहस्यमय लगा. उन्होंने इस मामले की जांच सीओ अमित कुमार को सौंपते हुए जल्द से जल्द खुलासा करने को कहा. अमित कुमार ने फाइल देखी तो उन्हें काफी आश्चर्य हुआ. क्योंकि इतने थानाप्रभारियों ने मामले की जांच की थी, इस के बावजूद मामले का खुलासा नहीं हो सका था. उन्होंने थानाप्रभारी दिनेश कुमार दुबे को कुछ निर्देश दे कर फाइल सौंप दी.

मामला काफी पुराना और रहस्यमयी था, इसलिए इसे एक चुनौती के रूप में लेते हुए दिनेश कुमार दुबे ने मामले की तह तक पहुंचने के लिए अपनी एक टीम बनाई, जिस में एसएसआई अजीत सिंह, एसआई धर्मवीर सिंह, कांस्टेबल सत्यपाल सिंह, मोहरपाल सिंह और नितिन कुमार को शामिल किया.

फाइल का गंभीरता से अध्ययन करने के बाद उन्होंने मामले की जांच फरीदाबाद से शुरू की, क्योंकि प्रीति को भगाने का जिस युवक जयकुमार पर आरोप था, वह फरीदाबाद का ही रहने वाला था. दिनेश कुमार दुबे फरीदाबाद जा कर उस की मां संध्या से मिले तो उस ने बताया कि जयकुमार उस का एकलौता बेटा था. उस पर जो आरोप लगे हैं, वे झूठे हैं. उस का बेटा ऐसा कतई नहीं कर सकता. उस ने उस की गुमशुदगी भी दर्ज करा रखी थी.

संध्या से पूछताछ के बाद दिनेश कुमार दुबे को मामला कुछ और ही नजर आया. अलीगढ़ लौट कर उन्होंने 13 जनवरी, 2016 को प्रीति के पिता देवेंद्र शर्मा को थाने बुलाया, जिस ने जयकुमार पर बेटी को भगाने का मुकदमा दर्ज कराया था. पुलिस के सामने आने पर वह इस तरह घबराया हुआ था, जैसे उस ने कोई अपराध किया हो. जब सीओ अमित कुमार, एसपी (सिटी) अतुल कुमार श्रीवास्तव ने उस से जयकुमार के बारे में पूछताछ की तो पुलिस अधिकारियों को गुमराह करते हुए वह इधरउधर की बातें करता रहा.

लेकिन यह भी सच है कि आदमी को एक सच छिपाने के लिए सौ झूठ बोलने पड़ते हैं. ऐसे में ही कोई बात ऐसी मुंह से निकल जाती है कि सच सामने आ जाता है. उसी तरह देवेंद्र के मुंह से भी घबराहट में निकल गया कि कहीं जयकुमार ने घबराहट में ट्रेन के आगे कूद कर आत्महत्या तो नहीं कर ली.

देवेंद्र की इस बात ने पुलिस अधिकारियों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि इसे कैसे पता चला कि जयकुमार ने ट्रेन के आगे कूद कर आत्महत्या कर ली है. पुलिस ने दिसंबर, 2013 के ट्रेन एक्सीडेंट के रिकौर्ड खंगाले तो पता चला कि थाना सासनी गेट पुलिस को 7 दिसंबर, 2013 को ट्रेन की पटरी पर एक लावारिस लाश मिली थी.

इस के बाद पुलिस अधिकारियों ने देवेंद्र के साथ थोड़ी सख्ती की तो उस ने जयकुमार की हत्या का अपना अपराध स्वीकार कर लिया. इस के बाद उस ने जयकुमार की हत्या की जो कहानी सुनाई, उस की शातिराना कहानी सुन कर पुलिस हैरान रह गई. देवेंद्र ने बताया कि अपनी इज्जत बचाने के लिए उसी ने अपने साले प्रमोद कुमार के साथ मिल कर जयकुमार की हत्या कर दी थी. इस बात की जानकारी उस की बेटी प्रीति को भी थी.

इस के बाद पुलिस ने देवेंद्र शर्मा की बेटी प्रीति और उस के साले प्रमोद को भी गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में प्रीति और प्रमोद ने भी अपना अपराध स्वीकार कर लिया था. तीनों की पूछताछ में जयकुमार की हत्या की जो कहानी उभर कर सामने आई, वह इस प्रकार थी—

उत्तर प्रदेश के जिला अलीगढ़ के थाना गांधीपार्क के नगला माली का रहने वाला देवेंद्र शर्मा रोजीरोटी की तलाश में हरियाणा के फरीदाबाद आ गया था. उसे वहां किसी फैक्ट्री में नौकरी मिल गई तो रहने की व्यवस्था उस ने थाना सारंग की जवाहर कालोनी के रहने वाले गंजू के मकान में कर ली. उन के मकान की पहली मंजिल पर किराए पर कमरा ले कर देवेंद्र शर्मा उसी में परिवार के साथ रहने लगा था. यह सन 2013 के शुरू की बात है.

उन दिनों देवेंद्र शर्मा की बेटी प्रीति यही कोई 17-18 साल की थी और वह अलीगढ़ के डीएवी कालेज में 12वीं में पढ़ रही थी. फरीदाबाद में सब कुछ ठीक चल रहा था.

देवेंद्र शर्मा की बेटी प्रीति जवान हो चुकी थी. मकान मालिक गंजू की पत्नी गुडि़या का ममेरा भाई जयकुमार अकसर उस से मिलने उस के यहां आता रहता था. वह पढ़ाई के साथसाथ एक वकील के यहां मुंशी भी था. इस की वजह यह थी कि उस के पिता शंकरलाल की मौत हो चुकी थी, जिस से घरपरिवार की जिम्मेदारी उसी पर आ गई थी. वह अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा भी रहा था.

जयकुमार अपनी मां संध्या के साथ जवाहर कालोनी में ही रहता था. फुफेरी बहन गुडि़या के घर आनेजाने में जयकुमार की नजर देवेंद्र शर्मा की बेटी प्रीति पर पड़ी तो वह उस के मन को ऐसी भायी कि उस से प्यार करने के लिए उस का दिल मचल उठा. अब वह जब भी बहन के घर आता, प्रीति को ही उस की नजरें ढूंढती रहतीं.

एक बार जयकुमार बहन के घर आया तो संयोग से उस दिन प्रीति गुडि़या के पास ही बैठी थी. जयकुमार उस दिन कुछ इस तरह बातें करने लगा कि प्रीति को उस में मजा आने लगा. उस की बातों से वह कुछ इस तरह प्रभावित हुई कि उस ने उस का मोबाइल नंबर ले लिया.

जयकुमार देखने में ठीकठाक तो था ही, अपनी मीठीमीठी बातों से किसी को भी आकर्षित कर सकता था. उस की बातों से ही आकर्षित हो कर प्रीति ने उस का मोबाइल नंबर लिया था. इस के बाद दोनों की बातचीत मोबाइल फोन से शुरू हुई तो जल्दी उन में प्यार हो गया. फिर खतरों की परवाह किए बिना दोनों प्यार की राह पर बेखौफ चल पड़े. दोनों घर वालों की चोरीछिपे जब भी मिलते, घंटों भविष्य के सपने बुनते रहते.

जल्दी ही प्रीति और जयकुमार प्यार की राह पर इतना आगे निकल गए कि उन्हें जुदाई का डर सताने लगा था. उन के एक होने में दिक्कत उन की जाति थी. दोनों की ही जाति अलगअलग थी. उन की आगे की राह कांटों भरी है, यह जानते हुए भी दोनों उसी राह पर आगे बढ़ते रहे.

देवेंद्र गृहस्थी की गाड़ी खींचने में व्यस्त था तो बेटी आशिकी में. लेकिन कहीं से प्रीति की मां रीना को बेटी की आशिकी की भनक लग गई. उन्होंने बेटी को डांटाफटकारा, साथ ही प्यार से समझाया भी कि जमाना बड़ा खराब है, इसलिए बाहरी लड़के से बातचीत करना अच्छी बात नहीं है. अगर किसी ने देख लिया तो बिना मतलब की बदनामी होगी.

मां ने भले ही समझाया, लेकिन जयकुमार के प्यार में डूबी प्रीति को मां की बात समझ में नहीं आई. परेशान हो कर रीना ने सारी बात पति को बता दी. बेटी की आशिकी के बारे में सुन कर देवेंद्र तिलमिला उठा. वह मकान मालिक गंजू से मिला और उन से कहा कि वह जयकुमार को घर आने से मना करें, क्योंकि वह उस की बेटी प्रीति को बरगला रहा है.

‘‘आप का कहना ठीक है, लेकिन अपने किसी रिश्तेदार को मैं घर आने से कैसे रोक सकता हूं. आप अपनी बेटी को थोड़ा संभाल कर रखिए.’’ मकान मालिक गंजू ने कहा.

गंजू की इस बात से देवेंद्र ने खुद को काफी अपमानित महसूस किया. अब वह मकान मालिक से तो कुछ नहीं कह सकता था, लेकिन जयकुमार उसे जब भी मिलता, उसे धमकाता कि वह जो कर रहा है, ठीक नहीं है. वह उस की बेटी का पीछा छोड़ दे वरना उसे पछताना पड़ सकता है. लेकिन जयकुमार भी प्रीति के प्रेम में इस तरह डूबा था कि देवेंद्र की चेतावनी का उस पर कोई असर नहीं पड़ रहा था. जबकि देवेंद्र मन ही मन बौखलाया हुआ था.

प्रीति की अर्द्धवार्षिक परीक्षा की तारीख आ गई तो वह परीक्षा देने अपने मामा प्रमोद कुमार के यहां अलीगढ़ चली गई. उस के मामा अलीगढ़ के थाना गांधीपार्क की बाबा कालोनी में रहते थे. घर वाले तो यही जानते थे कि प्रीति बस से अलीगढ़ गई है, लेकिन घर से निकलने से पहले उस ने जयकुमार को फोन कर दिया था, इसलिए वह मोटरसाइकिल ले कर उसे रास्ते में मिल गया था. उस के बाद प्रीति उस की मोटरसाइकिल से अलीगढ़ गई थी.

मामा के घर रह कर प्रीति ने परीक्षा दे दी. उसी बीच प्रीति के मामामामी अपने एक रिश्तेदार के यहां शादी में चले गए तो घर खाली देख कर उस ने जयकुमार को फोन कर के अलीगढ़ बुला लिया. प्रेमिका के बुलाने पर घर में बिना किसी को कुछ बताए जयकुमार उस से मिलने अलीगढ़ पहुंच गया. प्रेमी को देख कर प्रीति का दिल बल्लियों उछल पड़ा. वह प्रेमी के आगोश में समा गई. जयकुमार और प्रीति को उस दिन पहली बार एकांत और आजादी मिली थी, इसलिए उन्होंने सारी सीमाएं तोड़ दीं. ऐसे में जयकुमार ने प्रीति से वादा किया कि कुछ भी हो, हर हालत में वह उसे अपना कर रहेगा.

प्रीति को भी प्रेमी पर पूरा विश्वास था. लेकिन उस दिन दोनों ने एक गलती कर दी. जयकुमार को प्रेमिका से मिल कर वापस आ जाना चाहिए था, लेकिन वह तो उस दिन और पिला दे साकी वाली स्थिति में था. प्रीति भी भूल गई थी कि अगले दिन मामामामी लौट आएंगे.

दोनों एकदूसरे में इस तरह खो गए कि सब कुछ भूल गए. याद तब आया, जब दरवाजे पर दस्तक हुई. प्रीति ने दरवाजा खोला तो मामामामी को देख कर सन्न रह गई. जयकुमार घर में ही था. प्रमोद ने अपने घर में जयकुमार को देखा तो पूछा, ‘‘यह कौन है?’’

‘‘यह जयकुमार है. मेरे मकान मालिक का साला.’’ प्रीति ने बताया.

प्रमोद को जब पता चला कि जयकुमार एक दिन पहले उस के घर आया था और प्रीति के साथ रात में रुका था तो उसे इस बात की चिंता हुई कि यह लड़का यहां क्यों आया था? उसे दाल में कुछ काला लगा तो उस ने जयकुमार को एक कमरे में बंद कर दिया और अपने बहनोई देवेंद्र को फोन कर के सारी बात बता दी.

देवेंद्र उस समय उत्तराखंड के रुद्रपुर में था. उस ने कहा, ‘‘जब तक मैं आ न जाऊं, तब तक उसे उसी तरह कमरे में बंद रखना.’’

प्रीति डर गई. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि प्रेमी को छुड़ाने के लिए वह क्या करे. उस ने मामामामी से बहुत विनती की कि वे जयकुमार को छोड़ दें, लेकिन प्रमोद कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहता था, इसलिए उस ने जयकुमार को नहीं छोड़ा.

शाम को देवेंद्र अलीगढ़ पहुंचा तो उस ने पहले ही मन ही मन तय कर लिया था कि बेटी के इस प्रेमी के साथ उसे क्या करना है? उस ने रास्ते में ही शराब की बोतल खरीद ली थी और साले के यहां पहुंचने से पहले ही उस ने शराब पी कर मूड बना लिया था.

नशे में धुत्त वह साले के यहां पहुंचा तो जयकुमार को कमरे से निकाल कर बातचीत शुरू हुई. इस बातचीत में जयकुमार ने साफसाफ कह दिया कि वह प्रीति से प्यार करता है और उस से शादी करना चाहता है. यह सुन कर देवेंद्र का खून खौल उठा और वह जयकुमार की पिटाई करने लगा.

पिटाई करते हुए ही उस ने जयकुमार से कहा, ‘‘इस बार तुम ने जो किया, माफ किए देता हूं. अब दोबारा ऐसी गलती मत करना. चलो, हम तुम्हें दिल्ली जाने वाली बस में बिठा देते हैं. फरीदाबाद आऊंगा तो तुम्हारी मां से बात करूंगा.’’

प्यार में बड़ी उम्मीदें होती हैं, जयकुमार को भी लगा कि शायद प्रेमिका का बाप मां से बात कर के शादी करा देगा. लेकिन देवेंद्र के मन में तो कुछ और था. अब तक अंधेरा गहरा चुका था.

देवेंद्र और प्रमोद जयकुमार को ले कर पैदल ही चलते हुए नगला मानसिंह होते हुए रेलवे लाइन की ओर नई बस्ती के अवतारनगर में रहने वाले अपने एक परिचित विनोद के घर पहुंचे.

विनोद ने चाय बनवाने के लिए कहा तो देवेंद्र ने सिर्फ पानी लाने को कहा. विनोद ने जयकुमार के बारे में पूछा तो देवेंद्र ने बताया कि यह उस के दोस्त का बेटा है. विनोद पानी ले आया तो प्रमोद और देवेंद्र ने शराब पी. नशा चढ़ा तो दोनों जयकुमार को ले कर रेलवे लाइन की ओर चल पड़े. अब तक काफी अंधेरा हो चुका था. जयकुमार कुछ समझ पाता, उस के पहले ही सुनसान पा कर दोनों ने उसे एक गड्ढे में गिरा दिया.

वह संभल भी नहीं पाया, उस के पहले ही दोनों ने उस की गला दबा कर हत्या कर दी. इस के बाद दोनों वहीं बैठ कर ट्रेन के आने का इंतजार करने लगे. थोड़ी देर बाद उन्हें ट्रेन आती दिखाई दी तो जयकुमार की लाश को उठा कर दोनों ने पटरी पर रख दिया. ट्रेन लाश के ऊपर से गुजर गई तो वह कई टुकड़ों में बंट गई.

देवेंद्र और प्रमोद ने राहत की सांस ली, क्योंकि अब कांटा निकल गया था. लेकिन अब क्या करना है, अभी देवेंद्र को इस बारे में सोचना था. उस ने जो किया था, उसे भले ही किसी ने नहीं देखा था, लेकिन उसे होशियार तो रहना ही था. सुबह प्रीति ने उस से पूछा, ‘‘पापा, जयकुमार चला गया क्या?’’

देवेंद्र ने उसे खा जाने वाली नजरों से घूरते हुए कहा, ‘‘तू अपनी पढ़ाई से मतलब रख. कौन कहां गया, इस से तुझे क्या मतलब?’’

प्रीति को शक हुआ. अगले दिन उस ने जयकुमार को फोन किया. लेकिन उस का तो फोन बंद था, इसलिए बात नहीं हो सकी. अब प्रीति की समझ में आ गया कि जयकुमार के साथ क्या हुआ है. वह बुरी तरह डर गई.

जयकुमार 2 दिन घर नहीं आया तो उस की मां गंजू के घर गई. उस ने बताया कि जयकुमार 2 दिनों से घर नहीं आया है और उस का फोन भी नहीं लग रहा है तो गंजू को भी चिंता हुई. उस ने रीना से प्रीति के बारे में पूछा तो पता चला कि वह तो परीक्षा देने अलीगढ़ गई है. जब उसे पता चला कि देवेंद्र भी घर पर नहीं है तो उस ने देवेंद्र को फोन कर के कहा कि वह जयकुमार को वापस भेज दे.

गंजू के इस फोन से देवेंद्र शर्मा घबरा गया. वह क्या जवाब दे, एकदम से उस की समझ में नहीं आया. लेकिन अचानक उस के मुंह से निकल गया, ‘‘प्रीति भी घर से गायब है. लगता है, वह उसे कहीं भगा ले गया है.’’

यह सुन कर संध्या परेशान हो उठी. उसे विश्वास नहीं हुआ कि उस का बेटा ऐसा भी कर सकता है. दूसरी ओर देवेंद्र परेशान था. वह गुनाह का ऐसा जाल बुनना चाहता था, जिस में जयकुमार का परिवार इस तरह फंस जाए कि कोई काररवाई करने के बजाए वह बचने के बारे में सोचे. उस ने पड़ोस में रहने वाले चौकीदार राकेश को बताया कि जयकुमार नाम का एक लड़का उस की बेटी को भगा ले गया है.

इस के बाद वह वकील मुन्नालाल के पास पहुंचा और उसे सारी बात बता दी. वकील मुन्नालाल देवेंद्र का परिचित था. उस ने उसे सलाह दी कि वह जयकुमार के खिलाफ बेटी को भगाने का मुकदमा दर्ज करा दे.

इस के बाद देवेंद्र मुन्नालाल वकील और कुछ पड़ोसियों को साथ ले कर थाना गांधीपार्क पहुंचा और जयकुमार के खिलाफ अपनी नाबालिग बेटी प्रीति को भगा ले जाने का मुकदमा दर्ज करा दिया. यह मुकदमा 12 दिसंबर, 2013 में दर्ज हुआ था. मुकदमा दर्ज होने के बाद इस मामले की जांच एसआई अभय कुमार को सौंपी गई.

अभय कुमार ने जयकुमार को नाबालिग प्रीति को भगाने का दोषी मानते हुए जांच शुरू की तो देवेंद्र को लगा कि उस ने जो किया है, पुलिस उस बारे में जान नहीं पाएगी. लेकिन चिंता की बात यह भी थी कि प्रीति का वह क्या करे. अब उसे घर में रखना ठीक नहीं था. दूसरी ओर उसे पता भी चल गया था कि जयकुमार की हत्या हो चुकी है.

पूछताछ में प्रीति सच्चाई उगल सकती थी, इसलिए उस ने उसे धमकाया कि अगर उस ने किसी को भी यह बात बताई तो वह उस की भी हत्या कर के उस की लाश को जयकुमार की लाश की तरह रेल की पटरी पर डाल आएगा. प्रीति डर गई. उस ने पिता से वादा किया कि वह मर सकती है, लेकिन यह बात किसी को बता नहीं सकती.

अब प्रीति को छिपा कर रखना था. इस के लिए देवेंद्र ने प्रीति को थाना सादाबाद, जिला हाथरस के गांव करसोरा स्थित अपने साले प्रमोद कुमार की ससुराल भिजवा दिया. चूंकि प्रमोद उस के साथ जयकुमार की हत्या में शामिल था, इसलिए देवेंद्र जो चाहता था, उसे वैसा ही करना पड़ता था. प्रीति मामा की ससुराल पहुंच गई, जबकि पुलिस जयकुमार और प्रीति की तलाश में दरदर भटकती रही.

प्रीति से छुटकारा पाने के लिए देवेंद्र उस के लिए लड़का तलाशने लगा. थोड़ी कोशिश कर के थाना वृंदावन के मोहल्ला चंदननगर के रहने वाले पूरन शर्मा का बेटा राहुल उसे पसंद आ गया तो करसोरा से ही उस ने प्रीति की शादी राहुल से कर दी. प्रीति की यह शादी 27 फरवरी, 2014 को हुई.

इस तरह प्रीति को ससुराल भेज कर देवेंद्र निश्चिंत हो गया. मजे की बात यह थी कि वह शांत नहीं बैठा था. वह महीने, 15 दिनों में थाने पहुंच जाता और पुलिस से बेटी की तलाश के लिए गुहार लगाता.

यही नहीं, वह फरीदाबाद में रहने वाले जयकुमार के घर वालों को भी धमकाता कि वे जयकुमार के बारे में पता कर के उस की बेटी को बरामद कराएं, वरना वह उन्हें शांति से जीने नहीं देगा. भले ही जयकुमार का कत्ल हो गया था और प्रीति की शादी हो गई थी. फिर भी पुलिस का डर तो देवेंद्र को सताता ही रहता था.

कहीं जयकुमार की हत्या का रहस्य खुल न जाए, इस बात से परेशान देवेंद्र एक बार फिर वकील मुन्नालाल से मिला. उस ने कहा कि अगर पुलिस को प्रीति के बारे में पता चल गया तो उस की परेशानी बढ़ सकती है. पुलिस उस पर शिकंजा कस सकती थी. अब तक प्रीति गर्भवती हो चुकी थी.

मुन्नालाल ने पूरी कहानी पर एक बार फिर नए सिरे से विचार किया. इस के बाद उस ने सलाह दी कि वह प्रीति को पुलिस के सामने पेश कर के उस से कहलवाए कि वह जयकुमार के बच्चे की मां बनने वाली है. वह उसे धोखा दे कर मथुरा रेलवे स्टेशन पर छोड़ कर कहीं भाग गया है. उस के बाद वह पिता के पास आ गई है.

प्रीति के अपहरण के मामले की जांच अब तक कई थानाप्रभारी कर चुके थे. लेकिन कोई मामले की तह तक नहीं पहुंच सका था. शायद उन्होंने कोशिश ही नहीं की थी. जबकि पुलिस ने कई बार फरीदाबाद जा कर जयकुमार की मां एवं रिश्तेदारों से पूछताछ की थी.

पूछताछ में जयकुमार की विधवा मां ने हर बार यही कहा था कि जयकुमार और प्रीति एकदूसरे को प्यार करते थे. दोनों को प्रीति के पिता देवेंद्र ने ही गायब किया है. मुकदमा दर्ज कराने के बाद देवेंद्र फरीदाबाद छोड़ कर बल्लभगढ़ में रहने लगा था. उस ने प्रीति को फोन कर के कहा कि वह सासससुर से लड़ाई कर के उस के यहां आ जाए. प्रीति पिता के हाथ की कठपुतली थी, इसलिए पिता ने जैसा कहा, उस ने वैसा ही किया.

इस की वजह यह थी कि वह नहीं चाहती थी कि उस के प्रेमसंबंधों की जानकारी उस की ससुराल वालों को हो. क्योंकि जानकारी होने के बाद वे उसे घर से निकाल सकते थे. पिता के कहने पर प्रीति ने सास से लड़ाई कर ली तो उसी दिन देवेंद्र उसे विदा कराने उस की ससुराल पहुंच गया.

वकील की सलाह के अनुसार देवेंद्र ने 1 सितंबर, 2015 को प्रीति को एसएसपी के सामने पेश कर दिया. प्रीति ने पुलिस के सामने वही सब कहा, जैसा उसे वकील ने सिखाया था. एसएसपी के आदेश पर प्रीति का मैडिकल कराया गया. जिस समय प्रीति को एसएसपी के सामने पेश किया गया था, उस समय थाना गांधीपार्क के थानाप्रभारी अमित कुमार थे. मजे की बात यह थी कि उन्होंने प्रीति से यह भी जानने की कोशिश नहीं की थी कि जयकुमार के साथ भागने के बाद वह उस के साथ कहांकहां रही.

पुलिस की देखरेख में ही प्रीति ने बच्चे को जन्म दिया. पुलिस ने अदालत में भी प्रीति के बयान करा दिए. वहां भी प्रीति ने वही कहानी सुना दी. अदालत ने प्रीति को उस के पिता को सौंप दिया. अब तक वैसा ही हो रहा था, जैसा देवेंद्र चाह रहा था. लेकिन इसी के बाद जब अलीगढ़ के एसएसपी बन कर राजेश पांडेय आए तो सब उलटा हो गया और वह पकड़ा गया.

मृतक जयकुमार के घर वालों को भी उस की हत्या की सूचना दे दी गई थी. पुलिस ने उस की मां को बुला कर जब जयकुमार के रखे सामान को दिखाया तो उस ने बेटे के जूते और कपड़ों की पहचान कर के फोटो में भी उस की शिनाख्त कर दी.

इस के बाद पुलिस ने प्रीति, देवेंद्र और प्रमोद को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. एसएसपी ने इस मामले का खुलासा करने वाली पुलिस टीम को 10 हजार रुपए का इनाम देने की घोषणा की है, साथ ही थानाप्रभारी दिनेश कुमार दुबे को शाबाशी दी.

प्रीति की ससुराल वालों को जब सच्चाई का पता चला तो वे हैरान रह गए. प्रीति ने प्रेम क्या किया, अपनी तो जिंदगी बरबाद की ही, प्रेमी को भी मरवा दिया जो विधवा मां का एकलौता सहारा था.

प्यार में हारी हसीन मौडल: भाग 1

मौडलिंग और क्षेत्रीय फिल्मों की दुनिया में अनगिनत लड़कियां कदम रखती हैं. अपवाद को छोड़ दिया जाए तो किस्मत के सितारे उन्हीं के चमकते हैं, जो प्रतिभा के साथ मेहनत करती हैं. खूबसूरती के अपने मायने होते हैं. आकर्षक नैननक्श वाले चेहरों को लोग पसंद करते हैं. रिचा खूबसूरत थी तो उस के भी कद्रदानों की कोई कमी नहीं थी. सैकड़ों लोग उस के दीवाने थे. वह एक बेहद हसीन मौडल और अदाकारा थी. कई साल पहले उस के कदम सफलता की सीढि़यों पर पड़ने शुरू हुए तो उस की खुशियों को जैसे पंख लग गए थे.

उस ने सालों से अपनी आंखों में बसे सपनों को साकार किया था. ऐसी कई मौडल थीं जो वक्त के साथ गुमनामी के अंधेरे में खो गई थीं, लेकिन रिचा का जादू लोगों के सिर पर चढ़ कर बोलता था. वह लगातार ऊंचाइयों को छू रही थी.

रिचा हिमाचल प्रदेश के सुंदर उपजाऊ पहाडि़यों वाले कांगड़ा जिले के प्रसिद्ध शहर धर्मशाला से लगे उपनगर नगरोटाबंगवां की रहने वाली थी. पहाड़ी वादियों में उस की फिल्में और म्यूजिक वीडियो एलबम धूम मचाती थीं. वह कई दरजन हिमाचली फिल्मों और एलबमों में काम कर चुकी थी. उस ने कुछ तमिल व पंजाबी फिल्मों में भी काम किया था.

इतना ही नहीं वह साउथ के चर्चित अभिनेता नागार्जुन के साथ भी फिल्म कर चुकी थी. रिचा मिस नगरोटा भी रह चुकी थी. इसके बाद वह मिस हिमाचल बनी. उस की गिनती हिमाचल की सब से खूबसूरत मौडलों में होती थी. लोग उस के इस कदर दीवाने थे कि वह जहां भी शूटिंग के लिए जाती थी, वहां लोगों की भीड़ लग जाती थी.

रिचा के पास नाम था, शोहरत थी और अच्छी जिंदगी जीने लायक दौलत भी थी. वह खुश रहने वाली लड़की थी और निजी जिंदगी में भी हंसतीमुसकराती रहती थी. कोई भी उसे देख कर नहीं कह सकता था कि रिचा परेशान होगी.

बाहरी दिखावे को छोड़ दिया जाए तो किसी के अंदर के खालीपन, अवसाद या उस के दिमाग में क्या चल रहा है, को जानना संभव नहीं होता. कई बार जो होता है वैसा दिखता नहीं है और जो दिखता है वह होता है. रिचा के साथ भी शायद ऐसा ही कुछ था. यह बात अलग थी कि लोग उस सब से बेखबर थे.

दिसंबर, 2016 में मौसम बेहद सर्द हो चला था. कभी बर्फबारी होती तो कभी बारिश. पर्यटकों के लिहाज से ऐसा मौसम जरूर लुभावना होता है, लेकिन इस से स्थानीय लोगों की दिनचर्या बिगड़ जाती है. रिचा को गायकी और अदाकारी के अभ्यास के लिए प्रतिदिन नगरोटा से धर्मशाला आना पड़ता था. ठंड में मुश्किल आई तो उस ने धर्मशाला के मोहल्ला गमरू में अपने लिए किराए पर कमरा ले लिया और वहां अकेले रहने लगी. इस से उस का आनेजाने का समय भी बचा और सर्दी से भी बचाव हो गया.

रिचा सुबह जल्दी उठ जाया करती थी और 9 बजे से 10 बजे के बीच स्टूडियो या प्रैक्टिस के लिए चली जाती थी, लेकिन 20 जनवरी, 2017 को ऐसा नहीं हुआ. उस दिन रिचा के कमरे का दरवाजा नहीं खुला तो घर में रहने वाले मकान मालिक के परिवार को उस की फिक्र हुई. पहले उन्होंने सोचा कि रिचा शायद देर से सोई होगी, जब थोड़ा और समय बीता तो वह सोचने पर मजबूर हो गए. उन से नहीं रहा गया तो उन्होंने रिचा के कमरे के दरवाजे पर दस्तक दी, लेकिन अंदर कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई.

जब कई बार दस्तक व आवाज देने पर भी रिचा ने कोई उत्तर नहीं दिया तो उन्होंने खिड़की के रास्ते अंदर देखने का प्रयास किया.  अंदर का नजारा देख कर उन के होश उड़ गए. रिचा पंखे के सहारे लटकी हुई थी. अविलंब इस की सूचना पुलिस को दी गई. सूचना पा कर धर्मशाला थानाप्रभारी कुलदीप राजा मौके पर आ पहुंचे.

पुलिस कमरे का दरवाजा तोड़ कर अंदर दाखिल हुई. पुलिस ने देखा रिचा ने ग्रे कलर की टी-शर्ट और छींटदार लोअर पहना हुआ था. उस का शव एक गर्म चादर के सहारे पंखे से लटका हुआ था. लटकने के बाद उस के घुटने लगभग जमीन पर टिक गए थे. कमरे में एक बेड के अलावा एक कंप्यूटर व जरूरत का अन्य सामान मौजूद था.

रिचा के परिजनों को भी सूचना दे दी गई. खबर मिलते ही उन के होश उड़ गए. वे लोग तुरंत धर्मशाला के लिए चल दिए. रिचा आत्महत्या जैसा घातक कदम उठा सकती है, ऐसा उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था.

सोचने वाली बात यह थी कि चकाचौंध भरी जिंदगी के पीछे आखिर कौन सा अंधेरा था, जिस के लिए रिचा को आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ा. आखिर उस की ऐसा कौन सी मजबूरी थी जिस की वजह से वह जिंदगी की जंग हार कर अपनी सांसों की डोर को खुद ही तोड़ने पर मजबूर हो गई थी. पुलिस ने रिचा के शव को नीचे उतारा.

मामला सीधे तौर पर आत्महत्या का था. बिस्तर पर ही रिचा का मोबाइल रखा था. एसपी संजीव गांधी को इस की सूचना मिली तो उन्होंने इस मामले में गहनता से जांच करने के निर्देश दिए. फोरैंसिक लैब की निदेशक मीनाक्षी महाजन के निर्देशन में फोरैंसिक एक्सपर्ट की टीम भी वहां आ गई.

पुलिस ने रिचा का मोबाइल अपने कब्जे में ले कर उस की जांच की तो पता चला कि उस ने एक नंबर पर रात 2 से 3 बजे के बीच कई बार काल की थी लेकिन संभवत: उस की बात नहीं हुई थी, क्योंकि काल के साथ ड्यूरेशन टाइम जीरो था.

इस से यह बात साफ हो गई कि वह देर रात तक किसी बात को ले कर परेशान थी. सुबह के समय उस के नंबर पर अलगअलग नंबर से कई मिस काल जरूर आई थीं. लेकिन तब तक वह दुनिया को अलविदा कह चुकी थी. इन में एक नंबर वह भी था जिस पर रिचा ने देर रात कई बार बात करने की कोशिश की थी.

पुलिस ने कमरे के सामान की बारीकी से जांच की तो घटनास्थल पर एक 3 पेज का सुसाइड नोट मिला. उस नोट से पता चला कि रिचा का संदीप नामक किसी युवक से प्रेमप्रसंग चल रहा था और वह उस की बेरुखी से बेहद आहत थी. रिचा ने 3 पेजों में कई बातों का जिक्र किया था. संदीप का मोबाइल नंबर भी सुसाइड नोट में लिखा था.

संदीप के नंबर से रिचा के मोबाइल पर सुबह भी काल की गई थी. निस्संदेह वह उस से बात करना चाहता था. इस के अलावा उस के कई एसएमएस भी थे, जिन्हें पढ़ कर पता चलता था कि दोनों के बीच अनबन थी.

चर्चित अदाकारा की आत्महत्या की खबर पूरे शहर में फैल चुकी थी. वहां लोगों का जमावड़ा लग गया. तब तक रिचा के घर वाले भी वहां आ गए थे. पुलिस ने उन से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि रिचा और संदीप एकदूसरे से प्यार करते थे और शादी करने वाले थे. यह बात परिवार में किसी से छिपी नहीं थी. लेकिन संदीप अकसर उस के साथ मारपीट करता था. उस की मौत का जिम्मेदार वही है. उन से संदीप के बारे में पता चला कि वह प्रशिक्षु कांस्टेबल है और ऊना में उस का प्रशिक्षण चल रहा है.

पुलिस ने मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए डा. राजेंद्र प्रसाद मैडिकल कालेज एवं अस्पताल भिजवा दिया. साथ ही उस के घर वालों की तरफ से संदीप के खिलाफ भादंवि की धारा 303 व 34 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर लिया. अगले दिन अखबारों में रिचा आत्महत्या प्रकरण सुर्खियों में आ गया.

पोस्टमार्टम के बाद उस का शव उस के घर वालों को सौंप दिया. पुलिस ने रिचा के मोबाइल की काल डिटेल्स हासिल की तो पता चला कि संदीप व उस के बीच अकसर बातें हुआ करती थीं. बातों का यह दौर कभी कम तो कभी ज्यादा चलता था. पुलिस ने रिचा की काल रिकौर्डिंग्स को भी सुना, जिस से दोनों के रिश्ते की कड़वाहट पुख्ता हो गई.

जब सेट पर हुआ डिम्पल कपाड़िया के साथ ये हादसा

बॉलीवुड एक्ट्रेस अक्सर अपनी ड्रेस को लेकर सुर्खियों में रहती हैं, यहां तक कि कई एक्ट्रेस तो ऐसी ड्रेस भी पहन लेतीं हैं जिससे उन्हें शर्मसार होना पड़ता है. दरअसल बॉलीवुड की कई एक्ट्रेस हैं जो अपनी ड्रेस की वजह से वॉर्डरोब मार्लफंक्शन का शिकार भी हुईं है. तो आज हम आपको एक ऐसी एक्ट्रेस के बारे में बताने जा रहे हैं कि जिसके साथ फिल्म की शूटिंग के दौरान ऐसा कुछ हुआ था जिसके बाद लोगों की आंखे झुंक गईं थी.

दरअसल डिंपल कपाड़िया के साथ एक फिल्म की शूटिंग के दौरान ऐसा कुछ हुआ कि जिसके बाद वह लोगों के सामने नजर नहीं मिला पाईं. फिल्म की शूटिंग के सेट पर डिंपल वार्डरोब मार्लफंक्शन का शिकार हुईं थीं. 80 के दशक की मशहूर एक्ट्रेस को एक फिल्म के सेट पर वार्डरोब मार्लफंक्शन का शिकार होना पड़ा था. जिसे आज भी याद किया जाता है. डिंपल कपाड़िया फिल्म सागर में वार्डरोब मार्लफंक्शन का शिकार हुईं थीं.

फिल्म सागर में डिंपल ने ऋषि कपूर के साथ काम किया है इसमें उन्होंने कई हॉट सीन भी दिए हैं, लेकिन नहाते समय डिंपल से साथ एक अलग ही हादसा हुआ था.

दरअसल हुआ ये था कि फिल्म सागर की शूटिंग में नहाते समय का सीन शूट हो रहा था, तभी नहाते समय डिंपल की टॉवेल नीचे खिसक गई. इस दौरान फिल्म के सेट पर मौजूद लोगों की शर्म के मारे आंखें नीचें झुक गईं थीं. इसका वीडियो भी इंटरनेट पर जमकर वायरल हुआ था. इस फिल्म में डिंपल ने ऋषि कपूर के साथ कई सीन दिए थे.

आपको बता दें कि डिंपल ने साल 1973 में राजेश खन्ना के साथ शादी कर ली थी. उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री को भी अलविदा कह दिया था. लेकिन, उन्होंने साल 1985 में फिर से फिल्मों में वापसी की. फिल्म ‘सागर’ की उनकी कम बैक फिल्म थी.

सुशांत और कृति सनन मचा रहे हैं धमाल

सुशांत और कृति सनन स्टारर फिल्म राबता इन दिनों खूब सुर्खियों में बनी हुई है. इन दोनों की जोड़ी को बहुत अच्छा रिस्पोंस मिलता दिखा रहा है. इसके साथ ही इस फिल्म का जब से ट्रेलर आया है उसके बाद से यह फिल्म चर्चा का विषय बनी हुई है. फिल्मी गलियारे में इन दिनों इसकी काफी सराहना की जा रही है. यह जोड़ी पहली बार एक साथ फिल्म में धमाल मचाने जा रही है.

फिल्म की को प्रोडूसर प्रिया गुप्ता ने अपने ट्वीटर पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा है एक वारी गाने से पहले यह वीडियो देखें. राबता का एक वारी हाल ही में रिलीज किया गया है और यह बहुत ही रोमांटिक गाना है.

आप यह वीडियो देख कर समझ गए होंगे की आखिर क्या है मामला और इन दोनों की जोड़ी तो सुपरहिट साबित होने वाली है. आपको बता दे कि इस फिल्म में सुशांत और कृति के बीच बहुत से किसिंग सीन्स भी दिखाए गए हैं.

 

क्या आप भी यूज कर रहे हैं फ्री वाई-फाई !

आप होटल, बस अड्डे, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, मॉल या अन्य जगहों पर फ्री वाई-फाई इस्तेमाल करते हैं? अगर हां तो आपको सावधान रहना चाहिए. सार्वजनिक वाई-फाई यूज करने की जल्दी में आप भूल सकते हैं कि यह आपके लिए खतरनाक हो सकता है. इसलिए जरूरी है कुछ बातों का ध्यान रखा जाए.

फ्री वाई-फाई इस्तमाल करते समय इन बातों का रखें ध्यान.

फोन के ऑपरेटिंग सिस्टम को अपडेटेड करें

ऑपरेटिंग सिस्टम सिर्फ स्मार्टफोन्स को यूज करने के लिए जरूरी इंटरफेस ही मुहैया नहीं कराते बल्कि खतरों से भी बचाते हैं. वक्त-वक्त पर कंपनियां सिक्यॉरिटी अपडेट्स जारी करती हैं जो खामियों को दूर करते हैं और अन्य खतरों से भी स्मार्टफोन्स को बचाते हैं. इसलिए हमेशा अपने स्मार्टफोन का सॉफ्टवेयर अप-टु-डेट रखना चाहिए.

बैंकिंग और शॉपिंग करने से बचें

पब्लिक वाई-फाई कनेक्शन के जरिए ऑनलाइन बैंकिंग या शॉपिंग करना असुरक्षित है. स्कैमर आपके अकाउंट्स की डीटेल्स हैक कर सकते हैं. अगर कोई जरूरी ट्रांजैक्शन करनी हो तो मोबाइल डेटा इस्तेमाल करें या फिर वीपीएन इस्तेमाल करें. ब्राउजर पर नेट बैंकिंग करने के बजाय बैंक के ऑफिशल ऐप को इस्तेमाल करें क्योंकि उसमें एनक्रिप्शन होता है. इसी तरह से स्थापित कंपनियों के ऐप्स के जरिए ही शॉपिंग करें.

काम होते ही वाई-फाई से डिस्कनेक्ट करें

बहुत से लोग इस बात को नजरअंदाज कर देते हैं. अगर आप वाई-फाई पर काम पूरा कर लें तो स्मार्टफोन या टैब का वाई-फाई स्विच ऑफ कर दें. वाई-फाई डिसेबल नहीं होगा तो चुपके से कोई आपके स्मार्टफोन में वाइरस डाल सकता है.

मोबाइल ऐंटी-वाइरस टूल्स का करें इस्तेमाल

पब्लिक वाई-फाई इस्तेमाल करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि फोन में सिक्यॉरिटी सॉफ्टवेयर इंस्टॉल्ड है. आपके ऐंड्रॉयड पर मालवेयर आ सकते हैं. ऐसे में कोई ऐसा ऐंटीवाइरस डालें जिसमें फायरवॉल, मालवेयर स्कैनिंग और रिमूवल जैसे फीचर्स हों. दरअसल पब्लिक वाई-फाई पर कनेक्ट करने पर अन्य डिवाइस के मालवेयर आपके डिवाइस पर आ सकते हैं. यह गलती से हो सकता है और तभी हो स सकता है, जब इन्फेक्टेड डिवाइस अन्य डिवाइस को वाइरस भेज रहा हो. हो सकता है हैकर्स जानबूझकर ऐसा कर रहे हों.

स्लो सार्वजनिक वाई-फाई खतरनाक हो सकता है

अगर आपने किसी ओपन वाई-फाई नेटवर्क पर लॉगइन किया है और लग रहा है कि कनेक्शन स्लो है तो तुरंत डिस्कनेक्ट कर दें. अगर साइन-इन पेज पर जाने में दिक्कत हो, तब भी तुरंत डिस्कनेक्ट करें. स्पीड इसलिए कम हो सकती है क्योंकि राउटर वाइरस की चपेट में हो सकता है. यह भी हो सकता है कि आप मेन राउटर के बजाय किसी और राउटर से कनेक्ट हो गए हों. संभव है कि आप डेटा को किसी अन्य डिवाइस के जरिए ऐक्सेस कर रहे हों. दरअसल साइबर क्रिमिनल ट्रैक करते रहते हैं कि आसपास कोई वाई-फाई सिग्नल तो नहीं है. वे तुरंत अपने पीसी को फेक राउटर में तब्दील कर देते हैं. जैसे ही कोई मेन राउटर के बजाय उनके डिवाइस से कनेक्ट करता है, वे उसके जरिए भेजा जाने वाले सारा डेटा कॉपी कर लेते हैं.

टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन अपनाएं

अगर आप अक्सर फ्री वाई-फाई यूज करते हैं तो अपने सभी ऑनलाइन अकाउंट्स, खासकर पर्सनल जीमेल और बैंक अकाउंट्स पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन ऑन कर दीजिए. टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन में दरअसल सामान्य पासवर्ड के अलावा आपको मोबाइल फोन आने वाला ओटापी भी डालना होता है. इसके बिना लॉगइन नहीं कर पाएंगे. यह इसलिए जरूरी है क्योंकि अगर किसी ने पब्लिक वाई-फाई के जरिए आपके पासवर्ड का पता लगा लिया होगा, तब भी वह कुछ नहीं कर पाएगा.

इन टिप्स को अपनाकर आप अपने डाटा और मोबाईल को सुरक्षित रख सकते हैं.

बर्थडे स्पेशल: 24 तारीख से है सचिन का खास कनेक्शन

क्रिकेट की दुनिया में 24 वर्ष तक छाए रहने वाले सचिन तेंदुलकर आज 44 साल के हो गए. सचिन ने भले ही क्रिकेट को अलविदा कह दिया हो, लेकिन आज भी उनकी उम्‍दा बल्‍लेबाजी के गवाह क्रिकेट के मैदान और उनके फैन्‍स, उन्‍हें भूल नहीं पाए हैं. सचिन ने क्रिकेट के सभी फॉर्मेट पर अपनी छाप छोड़ी है. उनकी बल्‍लेबाजी का लोहा केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी माना जाता है.

महज 16 वर्ष की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखने वाले इस 'छोटे सचिन' ने 40 के हो जाने पर ही अपने बल्ले को आराम दिया. नहीं थकने वाले इस सफर के दौरान सचिन ने इतने कीर्तिमान रच डाले कि उन्हें 'क्रिकेट के भगवान' का दर्जा दे दिया गया.

इस महान क्रिकेटर नाम कुछ ऐसे रिकॉर्ड्स दर्ज हैं, जो अब तक नहीं टूट पाए हैं. जानिए, ये 5 बड़े रिकॉर्ड

टेस्ट मैच में सर्वाधिक रन

टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर के नाम ही है. उन्होंने 200 टेस्ट मैचों में 15921 रन बनाए हैं और टेस्ट क्रिकेट में भी इस रिकॉर्ड के आसपास कोई ऐसा क्रिकेटर नहीं हैं, जो इस रिकॉर्ड को तोड़ सके.

वनडे में 18426 रन बनाने का रिकॉर्ड

टेस्ट रिकॉर्ड के साथ साथ सचिन के नाम वनडे में भी सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड दर्ज हैं.  उन्होंने वनडे में 18426 बनाए हैं, जो किसी भी खिलाड़ी के लिए तोड़ना मुश्किल हैं.

200 टेस्ट मैच खेलने का रिकॉर्ड

तेंदुलकर ने 200 टेस्ट मैच खेले हैं. टेस्ट क्रिकेट खेलने का दोहरा शतक लगाने वाले तेंदुलकर दुनिया के इकलौते क्रिकेटर हैं. इस लिस्ट में उनके नीचे ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी रिकी पोंटिंग हैं जो रिटायर हो चुके हैं. पोंटिंग के नाम पर 168 टेस्ट मैच दर्ज हैं.

टेस्ट मैच में 51 सेंचुरी बनाने का रिकॉर्ड

टेस्ट क्रिकेट में सेंचुरी का पचासा जड़ने वाले तेंदुलकर एकमात्र खिलाड़ी हैं. उन्होंने 51 टेस्ट सेंचुरी जड़ी हैं. उनसे नीचे इस लिस्ट में जैक्स कैलिस हैं जिनके नाम पर 45 सेंचुरी हैं.

463 वनडे खेलने का रिकॉर्ड

सबसे ज्यादा 463 वनडे खेलने का सचिन का रिकॉर्ड टूटना भी आसान नहीं है. उनके रिकॉर्ड के सबसे करीब पहुंचने वाले महेला जयवर्धने 448 वनडे खेलने के बाद इस फॉर्मेट को अलविदा कह चुके हैं.

मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर और 24 तारीख का खास रिश्ता है. यह वह दिन है, जिससे न सिर्फ उनके जीवन की शुरुआत हुई, बल्कि इसी तारीख को उन्होंने अपने क्रिकेट करियर की कई मंजिलें तय कीं. आइए जानते हैं सचिन के लिए क्यों अहम है 24 तारीख.

24 तारीख के ही 664* रन की चमत्कारिक साझेदारी की

24 फरवरी 1988 को ही सचिन तेंदलुकर सुर्खियों में छा गए थे, जिससे उन्हें क्रिकेट विश्व में पहचान मिली और दुनिया वाह-वाह कह उठी. दरअसल, उन्होंने इस दिन अपने दोस्त विनोद कांबली के साथ हैरिस शील्ड के सेमीफाइनल में नाबाद 664 रन की चमत्कारिक साझेदारी की थी. उस भागीदारी के दौरान सचिन 326 और विनोद कांबली 349 रन पर नाबाद रहे थे.

मुंबई के आजाद मैदान पर शारदाश्रम विद्यामंदिर टीम के स्कूली खिलाड़ियों की यह जादुई बल्लेबाजी किसी करिश्मा से कम नहीं थी. जिसे 19 साल बाद हैदराबाद में मनोज कुमार और मो. शैबाज ने 721 रन की साझेदारी कर तोड़ दिया.

वनडे का ऐतिहासिक दोहरा शतक

24 फरवरी 2010 को सचिन ने ग्वालियर के कैप्टन रूप सिंह स्टेडियम में वह ऐतिहासिक पारी खेली, जिसके बारे में किसी ने सोचा तक न होगा. उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ नाबाद 200 रन की पारी खेल कर वनडे क्रिकेट के 39 साल के इतिहास की पहली डबल सेंचुरी लगा दी.

टेस्ट करियर की पहली हाफ सेंचुरी

सचिन ने 16 साल की उम्र में 24 नबंबर 1989 को अपने टेस्ट करियर की पहली हाफ सेंचुरी (59 रन) बनायी थी. पाकिस्तान के खिलाफ अपने पहले दौरे में फैसलाबाद में उन्होंने सबसे कम उम्र में यह कारनामा किया था.

24 साल का क्रिकेट करियर

उनका अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर 1989-2013 यानी 24 साल का रहा.

शादी भी 24 तारीख को ही की

सचिन की शादी भी 24 मई 1995 को उनके बचपन की दोस्त अंजली से हुई.

24 को बनें पिता

यह संयोग ही था की सचिन 24 तारीख को ही पिता भी बनें. सचिन 24 सितंबर 1999 को अर्जुन तेंदुलकर के पिता बनें.

सचिन से जुड़े कुछ अनसुने किस्से

1. बचपन में सचिन को उनके दोस्त मेकेनरो नाम से पुकारते थे. दरअसल वे अपने लंबे बालों में बैंड लगाकर अमेरिकी टेनिस खिलाड़ी जॉन मैकेनरो की तरह दिखना चाहते थें.

2. सचिन अपने क्रिकेट करियर में भले ही इतने सफल रहे हों, लेकिन वे क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स पर टेस्ट में शतक नहीं जमा पाए.

3. सचिन पहले ऐसे बल्लेबाज रहे जिन्हें थर्ड अंपायर ने रन आउट दिया. यह वाकया 1992 के डरबन टेस्ट का है.

4. सर डॉन ब्रैडमैन के 29 शतकों की बराबरी करने पर उन्हें फरारी 360 मोडेना गिफ्ट के तौर पर मिला था. जिसकी चाबी उन्हें एफ-1 चैंपियन माइकल शूमाकर ने सौपी थी.

5. सचिन 2003 में बॉलीवुड फिल्म स्टंप्ड में देखे गए.

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