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‘विवेगम’ के टीजर में दिखा अजित का दमदीर एक्शन

तमिल फिल्म ‘विवेगम’ का आधिकारिक टीजर रिलीज कर दिया गया है. यूट्यूब पर इसे सत्य ज्योति फिल्म्स के यूट्यूब चैनल से रिलीज किया गया है. फिल्म में अजीत कुमार, विवेक ओबेरॉय, काजल अग्रवाल और अक्षरा हसन अहम भूमिकाओं में हैं. फिल्म का निर्देशन तमिल निर्देशक  शिवा ने किया है. फिल्म की ज्यादातर शूटिंग विदेशों में हुई है और टीजर के ज्यादातर दृश्य एक्शन सीन्स हैं.

फिल्म में इस्तेमाल किए गए स्पेशल इफैक्ट्स कमाल के हैं और ऐसा लगता है कि दर्शकों को इंप्रैस कर पाने में कामयाब रहेंगे. फिल्म में अजीत का लुक कमाल का है और यह तय है कि उनके फैन्स उन्हें इस नए अवतार में देख कर काफी इंप्रैस होने वाले हैं. फिल्म की रिलीज की बात करें तो यह फिल्म आने वाली 10 अगस्त को रिलीज होगी. फिल्म के पोस्टर और टीजर देखने के बाद दर्शको में फिल्म को देखने की बेसब्री बढ़ गई है. पहले आए पोस्टर्स में विवेक ओबेरॉय का और अजीत का लुक दिखाया गया था.

अजीत कुमार और शाहरूख खान संतोष सिवान की फिल्म अशोका में एक साथ काम कर चुके हैं. इस फिल्म में वह नेगेटिव किरदार में थे. अपनी आने वाली फिल्म में अजीत एक इंटरपोल ऑफिसर की भूमिका में हैं जिसे चेन्नई में हो रही क्राइम की वारदातों को रोकने का चार्ज मिलता है. शाहरूख ने अजित कुमार को ट्विटर पर बधाई दी है और अजित को ढेर सारा प्यार कहां है.

कहीं आपका भी स्मार्टफोन तो नहीं हो गया है स्लो!

फोन लेने के कुछ वक्त बाद ही अक्सर लोगों को फोन हैंग और स्लो होने जैसी समस्याओं से दो चार होना पड़ता है. और फिर ऐसे में फोन में कुछ भी सेव करना हो तो और मुश्किल. एक से ज्यादा काम करने पर बार-बार फोन या तो स्लो पड़ जाता है या हैंग हो जाता है. इस पोस्ट में हम आपको कुछ ऐसी एप्स के बारे में बताने जा रहे हैं जो आपको इस परेशानी से बचाएंगी.

स्मार्टफोन को करें बूस्ट

स्मार्टफोन हैंग करना या स्लो होना आम बात है. कई बार महंगे फोन के हैंग होने की वजह से दूसरों के सामने बेइज्जत तक होना पड़ता है. इन दिनों हर काम के लिए एप डेवलप हो रहे हैं ऐसे में फोन में भी आपको ज्यादा से ज्यादा एप रखने होते हैं. कई एप्स बग से भरे होते हैं तो कई एप आपके मोबाइल को हैंग करने में अहम रोल प्ले करते हैं. मोबाइल को स्लो करने वाले दूसरे सबसे बड़े कारण वो एप्स हैं जो बंद करने के बाद भी चलते रहते हैं.

गूगल प्ले स्टोर में ऐसे एप्स की भरमार है जो स्मार्टफोन को बूस्ट करने का दावा तो करते हैं, लेकिन असलियत यह है कि वो खुद आपके मोबाइल को हैंग कराने में सहायक होते हैं. पर यहाँ हम आपको कुछ ऐसे एप्स के बारे में बताते हैं जो आपके मोबाइल को बूस्ट करेंगे.

डी यू बूस्टर (DU Speed Booster)

यह एप एंड्रॉयड प्ले स्टोर से सबसे ज्यादा डाउनलोड किए जाने वाले बूस्टर एप्स में एक है. यह फोन के बैकग्राउंड में काम करता है और सिस्टम्स के गैर जरूरी फाइल्स को डिलीट करता है. इसके अलावा यह ऑटो स्टार्ट होने वाले एप्स को भी रोक कर बैट्री सेविंग करता है.

ग्रीनिफाइ (Greenify)

अपने नाम की ही तरह यह एप आपके स्मार्टफोन को हरा भरा रखेगा. यानी यह मोबाइल के बैकग्राउंड प्रोसेस को हाइबरनेट पर रखता है ताकि वो मोबाइल स्लो ना करें. बैट्री बचाने और परफॉर्मेंस बूस्ट करने में यह माहिर एप माना जाता है.

एंड्रॉयड एसिसटैंट (Andorid Assistant)

यह एप देखने में आपको पुराने तरीके का लग सकता है. लेकिन यह आपके एंड्रॉयड में एक्सपर्ट की तरह काम करता है. इसके जरिए आप मोबाइल के फाइल्स, सीपीयू, रैम, रोम, माइक्रो एसडी कार्ड और बैट्री को मॉनिटर और कंट्रोल कर सकते हैं. यह मोबाइल के प्रोसेसर को मैनेज करता है और कैशे क्लियर करके डिवाइस को बूस्ट करता है. इसमें एक वन क्लिक बूस्ट फीचर है जिसके जरिए महज एक क्लिक करके मोबाइल की स्पीड में इंप्रूवमेंट की जा सकती है.

इन खेलों के लिए जरूरी है हॉट यूनिफॉर्म

खेलों में यूनिफॉर्म का होना बेहद जरूरी है साथ ही इसका अपना महत्व है. यह कहना गलत नहीं होगा की खेल में अनुशासन और समानता बने रहने के लिहाज से भी स्पोर्ट्स यूनिफॉर्म पहना जाता है. सभी खेलों का अपना एक निश्चित यूनिफॉर्म होता है.

सभी खेल के यूनिफॉर्म कुछ इस तरह बनाए जाते हैं जिससे की खिलाड़ी को खेलने में कोई दिक्कत ना आए. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में कुछ ऐसे भी खेल हैं, जो सिर्फ और सिर्फ हॉट यूनिफॉर्म में ही खेले जाते हैं. आपने ऐसे बहुत से खेलों का नाम शायद इससे पहले सुना भी न हो, लेकिन जो इन खेलों के बारे में जानते हैं वे इन खेलों के मुरीद हैं.

लेंजरी फुटबॉल लीग

यह खेल तेजी से पॉप्युलर हो रहा खेल है, जिसे लेजंड फुटबॉल लीग के नाम से भी जाना जाता है. इसकी शुरुआत 2009 में हुई थी. इस खेल में महिलाएं अंडर गारमेंट्स पहनकर फुटबॉल खेलती हैं. बहुत थोड़े ही समय में आज कई लाख लोग इस खेल के दीवाने बन चुके हैं.

फिगर स्केटिंग

फिगर स्केटिंग भी ओलंपिक में खेले जाने वाला खेल है. इसे खिलाड़ी एकल या जोड़ी में बर्फ पर परफॉर्म करते हैं. बर्फ पर करतब करते हुए फिसलने का यह खेल बेहद शानदार है. इसमें खिलाड़ी का संतुलन मायने रखता है.

मड रेसलिंग

विदेशों में महिलाओं का यह पसंदीदा खेल है. वैसे तो यह भारतीय कुश्ती की तरह ही है, लेकिन इसे कीचड़ में खेला जाता है.

कुश्ती करीब 3000 साल पुराना भारतीय खेल है, जिसे पहले सिर्फ पुरुष ही खेलते थे. 1930 में अमेरिका में इसकी शुरुआत मिशेल विटरॉक और टेलर कैरोल ने की. आज महिलाओं की मड रेसलिंग अमेरिका के प्रसिद्ध खेलों में से एक है.

बीच वॉलीबॉल

समुद्र किनारे धूप में रेत पर नेट लगाकर खेले जाने वाला यह खेल भी गजब है. बिकीनी पहनकर महिला खिलाड़ी इसे खेलती हैं. अपने लोकप्रिय अंदाज के चलते इस खेल को ओलंपिक में भी जगह मिली है.

जिमनास्टिक्स

इस खेल में किसी महिला खिलाड़ी को परफॉर्म करने के लिए स्विमसूट पहनकर अपने ​ऐक्रोबैटिक मूव्स परफॉर्म करने होते हैं. जिमनास्टिक्स में वॉल्ट, बार, बैलंस बीम जैसे ऐथलीट्स के हैरतअंगेज मूव्स देखकर दर्शक अपनी सांसे थाम लेते हैं.

सर्फिंग

अब लहरों पर सर्फिंग करनी है, तो फिर वह हॉट यूनिफॉर्म में ही होगा.

‘‘फैंटम’’ के बंद होते ही राम माधवानी की लगी लाटरी

लगभग एक माह पहले हमने ‘‘सरिता’’ पत्रिका में यहीं पर बताया था कि किस तरह अनुराग कश्यप, मधु मेंटेना, विकास बहल और विक्रमादित्य मोटावणे की भागीदारी वाली कंपनी ‘‘फैंटम’’ में ताला लगने जा रहा है. हमने यह भी कहा था कि कि अब मधु मेंटेना अपनी अलग राह पकड़ने वाले है. बहरहाल, हमारी वह खबर पूरे एक माह बाद न सिर्फ सच साबित हुई है, बल्कि धमाकेदार बदलाव आ गया है. पहले ‘‘फैंटम’’ कंपनी पांच सौ करोड़ की लागत वाली फिल्म ‘‘रामायण’’ का तीन भाषाओं में निर्माण करने वाली थी. जबकि इस फिल्म का निर्देशन अनुराग कश्यप, विक्रमादित्य मोटावणे व विकास बहल में से कोई एक करने वाला था. मगर अब ऐसा नहीं होने वाला है.

सूत्रों के अनुसार मधु मेंटेना ने अकेले ही अपनी नई राह पकड़ते हुए फिल्म निर्माण में कूद पड़े हैं. सूत्रों के अनुसार मधु मेंटेना ने अपने काफी पुराने दोस्तों अलू अरविंद और नमित मल्होत्रा के साथ मिलकर पांच सौ करोड़ की लागत तथा तीन भाषाओं में बनने वाली फिल्म के निर्माण की घोषणा कर दी है. इससे यह बात साफ हो जाती है कि ‘‘फैंटम’’ में ताला पड़ गया. क्योंकि अलू अरविंद और नमित मल्होत्रा का ‘फैंटम’ से कभी कोई संबंध नहीं रहा. इतना ही नही मधु मेंटेना की इस फिल्म का निर्देशन फिल्म ‘नीरजा’ फेम निर्देशक राम माधवानी करेंगे.

राम माधवानी के अति नजदीकी सूत्रों पर यकीन किया जाए, तो ‘नीरजा’ के प्रदर्शन के बाद से ही राम माधवानी स्वयं रामायण पर फिल्म बनाने की योजना पर काम कर रहे थे. इसलिए ‘रामायण’ के निर्देशन की जिम्मेदारी मिलते ही उनके मन की मुराद पूरी हो गयी. उन्होंने तो अपनी तरफ से रामायण पर काफी शोधकार्य भी करके रखा हुआ है.

पुलिस, योगी आदित्यनाथ और एक बुजुर्ग

जब से उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी है, तब से योगी अपने एक्शन अवतार में हैं. आज हम आपको ऐसा ही वाकया बताने जा रहें हैं, जब एक थानेदार की हालत पतली हो गई, क्यूंकि उससे परेशान एक बुजुर्ग ने सीएम योगी को फोन लगा दिया.

दरअसल इलाहाबाद के मांडा थाने में एक वृद्ध अपनी शिकायत लेकर थानेदार के पास पहुंचा. लेकिन आदत से मजबूर पुलिस ने बुजुर्ग की फरियाद पर भी टाल मटोल करना शुरू कर दिया. जब सुनवाई नहीं हुई, तो बुजुर्ग ने अपना मोबाइल निकाला और एक नंबर डायल कर थानेदार की ओर बढ़ाकर बोला, “लीजिए सीएम साहब से बात करिये.” थानेदार समझ ही नहीं पाया की आखिर अब वो करे तो क्या करे?

उस समय थाने में कई और लोग भी मौजूद थे, बुजुर्ग के आत्मविश्वास को देखकर वे सभी भी चौक गए. सकपकाते हुए थानेदार ने मोबाइल थाम लिया. मोबाइल की स्क्रीन पर नंबर देखा और कान पर लगा लिया. फिर तो अगले कुछ मिनट तक थानेदार साहब बस “जी सर” का शब्द ही दोहराते रहे.

बात करने के बाद दरोगा ने खुद बताया कि फोन पर सीएम योगी आदित्यनाथ के पीआरओ थे. उन्होंने वृद्ध के मामले में तुरंत कार्रवाई और वृद्ध की समस्या का निदान करने को कहा.

ये था मामला

इलाहाबाद जिले के मांडा हेठार गांव के रहने वाले बुजुर्ग की जमीन पर बनी बाउंड्री कुछ लोगों ने तोड़ दी. घटना की शिकायत करने बुजुर्ग मांडा थाने पहुंचा. यहां थाने में इंस्पेक्टर मांडा पीके मिश्रा फरयादियों से मिल रहे थे. बुजुर्ग ने उनसे अपनी समस्या बताई तो इंस्पेक्टर साहब ने राजस्व विभाग का प्रकरण बताकर बुजुर्ग को वहां से जाने को कह दिया. थानेदार के व्यवहार से दुखी  बुजुर्ग थोड़ा सा दूर गए, मोबाइल से नंबर मिलाया और फोन पर ही अपनी सारी समस्या बताने लगे. लगभग दो मिनट बाद बुजुर्ग फोन लेकर इंस्पेक्टर के पास वापस वापिस पहुंचे और बोले, “लीजिए सीएम साहब से बात करिये.

मैदान में घुसा रैना का फैन और फिर..

क्रिकेटर्स और उनके फैंस की दीवानगी से जुड़े आपने ढेरों किस्से सुने होंगे. कई बार फैंस अपने पसंदीदा खिलाड़ी से हाथ मिलाने या फिर उनका ऑटोग्राफ लेने के लिए सभी सीमाएं लांघकर मैदान पर पहुंच जाते हैं. ऐसी ही एक घटना कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम में दिल्ली डेयरडेविल्स और गुजरात लायंस के बीच खेले गए मैच में देखने को मिली. आईपीएल 10 का कानपुर के ग्रीन पार्क मैदान में खेला गया यह पहला मुकाबला था.

दरअसल दिल्ली की बैटिंग के दौरान एक फैन मैच के दौरान ही मैदान में सुरेश रैना का ऑटोग्राफ लेने पहुंच गया वो घुटनों पर बैठकर रैना से ऑटोग्राफ मांगने लगा. मजेदार बात ये थी कि रैना के फैन ने उनके नाम और नंबर की ही जर्सी पहनी थी. रैना के फैन के चलते मैच को बीच में रोकना पड़ा. इसके बाद अंपायर और मैच अधिकारियों ने मिलकर इस फैन को मैदान से बाहर जाने के लिए कहा. खुद रैना ने फैन को उठाया और मैदान से बाहर जाने की अपील की.

आपको बता दें सुरेश रैना यूपी रणजी टीम के कप्तान हैं और उन्होंने अपनी क्रिकेट का ककहरा कानपुर में ही सीखा है इसीलिए जब भी वो ग्रीन मार्क स्टेडियम में खेलते हैं तो फैंस की दीवानगी चरम पर पहुंच जाती है.

हालांकि रैना कानपुर में खेले गए मैच में कोई कमाल नहीं दिखा पाए और सिर्फ 6 रन बनाकर ही आउट हो गए, लेकिन उन्होंने आईपीएल में अबतक शानदार प्रदर्शन किया है. रैना ने 13 मैच में 44.00 के औसत से 440 रन बनाए हैं.

मैन ऑफ द मैच श्रेयस अय्यर (96) की एकतरफा बल्लेबाजी के दम पर दिल्ली डेयरडेविल्स ने आईपीएल-10 के 50वें मैच में गुजरात लॉयंस को दो विकेट से हरा दिया. गुजरात ने पहले बैटिंग करते हुए 5 विकेट पर 195 रन बनाए थे. जवाब में दिल्ली ने 8 विकेट पर 197 रन बनाकर दो गेंद शेष रहते शानदार जीत दर्ज की.

रैना के लिए कप्तान के तौर पर आईपीएल-10 खास नहीं रहा उनकी टीम प्लेऑफ की दौड़ से पहले ही बाहर हो चुकी है. रैना की कप्तानी वाली गुजरात लायंस टीम का ये आखिरी आईपीएल सीजन भी था. अगले साल राजस्थान रॉयल्स और चेन्नई सुपरकिंग्स की वापसी के साथ राइजिंग पुणे सुपरजायंट और गुजरात लायंस के लिए फिलहाल आईपीएल के दरवाजे बंद हो जाएंगे. इसके साथ-साथ रैना को चैम्पियंस ट्रॉफी के लिए 15 सदस्यीय टीम इंडिया में शामिल नहीं किया गया है, हालांकि वो पांच स्टैंडबाय क्रिकेटरों में शामिल हैं.

मासूम बेटियों की गुहार : बाबुल अभी न कीजो बियाह

गीता की शादी जबरन एक अधेड़ के साथ की जा रही थी. लड़की के मां-बाप भी उस पर विवाह का दबाब बना रहे थे. मां-बाप ने 50 हजार रूपए में उसका सौदा उत्तर प्रदेश के अधेड़ कारोबारी से तय कर दिया था. नवादा जिला के रजौली थाना के धमनी गांव की घटना है. इस बात की भनक लगने पर मुखिया और सरपंच लड़की के घर पहुंच गए और लड़की के बाप को फटकार लगाने लगे. विवाद बढ़ता देख कर कारोबारी आपने आदमियों के साथ भाग निकला. शिकायत मिलने के बाद भी पुलिस ने कारोबारी को पकड़ने में चुस्ती नहीं दिखाई. रजौली के एसएचओ अवधेश कुमार ने यह कह कर पल्ला झाड़ लिया कि इस बारे में लिखित शिकायत मिलने पर ही कारवाई होगी. लड़की की मौसी उत्तर प्रदेश में रहती है और उसी ने अधेड़ कारोबारी को विवाह के लिए तैयार किया था. पिछले 18 अप्रैल को विवाह कराने के लिए सभी लोग मंदिर की ओर निकलने की तैयारी में थे. इसी बीच मुखिया और सरपंच के हल्ला मचाने से गांव के लोग जुट गए.

बिहार के नवादा जिला के कौवाकोल गांव की रहने वाली सुगंध की शादी 13 साल की उम्र में कर दी गई थी. तब वह जानती भी नहीं थी कि विवाह किस चिड़िया का नाम है? आज 22 साल की सुगंध का यह हाल है कि उसके 3 बच्चे हो गए हैं और वह जिस्मानी रूप से इतनी कमजोर है कि ठीक से चल-फिर नहीं पाती है. लड़कियों के खेलने और पढ़ने की उम्र में उसकी शादी कर उनके मां-बाप एक तो उनका बचपन छीन लेते हैं और जिस्मानी एवं मानसिक रूप से कच्ची होने के बाद भी बच्चे को जन्म देने की वजह से वह अपनी बेटी और उसके बच्चे की जान को खतरे में डाल देते हैं.

बाल विवाह को रोकने और इसे बढ़ावा देने वालों पर कड़ी कारवाई के लिए ढेरों कानून बने हुए हैं, इसके बाद भी इस कुप्रथा पर रोक नहीं लग पर रही है. देश भर में बाल विवाह का चलन तेजी से बढ़ता जा रहा है. बाल बाल विवाह होने वाले देशों में भारत 11वें नंबर पर है. इस मामले में भारत अतिपिछड़े अफ्रीकी देशों इथियोपिया एवं लीबिया के साथ खड़ा है. भारत के तमाम राज्यों में बाल विवाह के मामले में बिहार सबसे आगे है. यह हैरानी और अफसोस की बात है कि सूबे की 69 फीसदी लड़कियों की शादी 18 साल से कम उम्र में ही कर दी जाती है. बिहार के पश्चिम चंपारण, कैमूर, रोहतास, मधेपुरा, गया, नवादा और वैशाली जिले में सबसे ज्यादा बाल विवाह हो रहा है.

राष्ट्रीय परिवार सैंपल सर्वे के मुताबिक देश भर में 22 से 24 आयु वर्ग की 47.4 फीसदी औरतें ऐसी हैं जिनका विवाह 18 साल से कम उम्र में ही कर दिया गया. इसमें 56 फीसदी औरतें गांवों की और 29 फीसदी शहरी इलाकों की हैं. बिहार में 69 फीसदी लड़कियों को 18 साल से कम उम्र में विवाह कर मां-बाप अपने ‘बोझ’ को हटा डालते हैं. राजस्थान में 65.2 प्रतिशत, आंध्र प्रदेश में 54.8 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल में 54 प्रतिशत, असम में 38.6 प्रतिशत तामिलनाडु में 23.3 प्रतिशत, गोवा में 12.1 प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 साल से कम आयु में ही कर दी जाती हैं.

हर मामले में बिहार भले ही पिछड़ा हो, लेकिन बाल विवाह के मामले में देश के सारे राज्यों को पछाड़ दिया है. पश्चिम चंपारण में 80 फीसदी लड़कियों की शादी पढ़ने और खेलने की उम्र में ही कर दी जाती है. नवादा में 73 फीसदी, रोहतास और कैमूर में 70 फीसदी, मधेपुरा में 66 फीसदी एवं वैशाली में 61.6 फीसदी लड़कियों को 18 साल से कम आयु में ही ब्याह कर मां-बाप अपनी जिम्मेवारी से नजात पा लेना मानते हैं. पटना जिला में 40 फीसदी लड़कियां बाल विवाह की शिकार बनती हैं.

बिहार की समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा कहती हैं कि औरतों के पढने-लिखने और जागरूक होने से ही बाल विवाह पर रोक लग सकती है. इस कुप्रथा को खत्म करने के लिए कानून से ज्यादा समाज के सहयोग की जरूरत है. यह सही है कि समाज में बड़ी संख्या में बाल विवाह हो रहे हैं, लेकिन समय से उसकी सूचना नहीं मिलने की वजह से कानून दोषियों पर कोई कारवाई नहीं कर पाता है. गांवों में होने वाले वाल विवाह को रोकने और उस पर नजर रखने के लिए सरपंचों को जिम्मवारी दी गई है.

डाक्टर किरण शरण बताती हैं कि कम उम्र में शादी होने से लड़कियां मानसिक और जिस्मानी रूप से कच्ची होती हैं. उन्हें न तो सेक्स आदि के बारे में कुछ पता होता है न ही परिवार के दायित्वों की ही जानकारियां होती है. कम उम्र में उन पर ढेर सारा बोझ डाल कर उनके मां-बाप अपनी बेटियों को मौत के मुंह में ढकेल देते हैं. कम आयु में मां बन जाने से जच्चा और बच्चा दोनों की जान के लिए खतरा होता है. यह लड़के एवं लड़कियों के मां-बाप और समाज को समझना चाहिए.

लड़कियों में जागरूकता के बगैर बाल विवाह पर रोक मुमकिन नहीं हैं. खुद को बाल विवाह की शिकार होने से बचाने वाली कुछेक लड़किया इसकी जीती जागती मिसाल हैं. नेहरू युवा केंद्र से जुड़ी कटिहार की आरती, नारी शक्ति फांउडेशन की मेंबर गया की राधिका, नवादा की रूबी और प्रमिला ने बताया कि उन्होंने किस तरह से खुद को बाल विवाह से बचाया. राधिका बताती हैं कि जब उसके पिता ने 15 साल की आयु में ही उसकी शादी तय कर दी तो उसने महिला संगठनों को बता दिया. इससे उसकी शादी रूक गई. प्रमिला बताती है कि वह पढ़ना चाहती थी पर उसके मां-बाप उसकी शादी करने पर उतारू थे. उसने यह बात अपने स्कूल की मास्टर को बताई. मास्टर ने उसके मां-बाप को समझाया और कानूनी काररवाई करने की चेतावनी दी. उसके बाद ही उसके पिता ने उसकी शादी की जिद छोड़ी.

समाजसेवी आलोक कुमार कहते हैं कि बाल विवाह के मामलों में अकसर यही देखा गया है कि अनपढ़ और गरीब लोगों को कुछ रूपयों का लालच देकर उनकी लड़की से विवाह कर दूसरे राज्यों में ले जाते हैं. उसके बाद उसका शोषण शुरू हो जाता है. ज्यादतर ऐसे मामलों में लड़कियों को दलालों के हाथों में बेच दिया जाता है. इस तरह के धंधे का बड़ा नेटवर्क चलाया जा रहा और कई गांवों में एजेंट तक बहाल किए गए हैं. एजेंट गरीबों को रूपयों का लालच देकर उनकी बेटियों की शादी कराने की बात करते हैं और उसे ले उड़ते हैं.

क्या हैं बाल विवाह रोकने के कानून?

बाल विवाह प्रतिशोध अधिनियम, 2006 की धारा-2 के तहत 21 साल से कम उम्र के लड़कों और 18 साल से कम उम्र की लड़कियों को अवस्यक माना गया है. इस कानून के तहत वाल विवाह को अवैध करार दिया गया है. बाल विवाह की अनुमति देने, विवाह तय करने, विवाह करवाने या विवाह समारोह में हिस्सा लेने वालों को सजा दिये जाने का नियम है. कानून की धारा-10 के मुताबिक बाल विवाह करवाने वाले को 2 साल तक साधारण कारावास या एक लाख रूपए का जुर्माने की सजा दी जा सकती है. धारा-11 कहती है कि बाल विवाह को बढावा देने या उसकी अनुमति देने वालों को 2 साल तक का कठोर कारावास और एक लाख रूपए जुर्माने की सजा हो सकती है.

अब आपकी शॉपिंग ट्रैक करेंगे एक्‍सपेंस ट्रैकिंग ऐप

शादियों का मौसम है और ऐसे में गिफ्ट्स देना तो बनता है. गिफ्ट्स देने के लिए आपको एक शॉप से दूसरी शॉप पर खरीदारी करने जाना ही होगा. शॉपिंग के समय थोड़ा मुश्किल हो जाता है इस बात पर ध्यान देना कि आप अब तक कहां और कितना खर्च कर चुके हैं, जबकि यह सबसे महत्वपूर्ण बात है क्योंकि आपके घर का पूरा बजट ओवर शॉपिंग से गड़बड़ा सकता है.

ऐसे में क्या तरीका हो सकता है कि आप कहां और कितना खर्च कर रहे हैं इसका आपको पता चलता रहे? अब बार-बार आप काम के साथ-साथ हिसाब-किताब करने तो बैठ नहीं सकते. तो इसका भी तरीका है और वह भी बहुत आसान. बस आपको इन एक्‍सपेंस ट्रैकिंग ऐप को अपने स्मार्टफोन में यूज करना है फिर खर्चे का हिसाब रखने के झंझट बिना आप शॉपिंग का मजा लेते हैं

1. स्‍पेंडिंग ट्रेकर एमएच-

रिले द्वारा विकसित किया गया स्‍पेंडिंग ट्रेकर, खर्चे का हिसाब रखने के लिए एक बहुत आसान ट्रैकिंग ऐप है. इस ऐप का नेविगेशन बहुत सिंपल है और आप आसानी से इसमें अपनी डिटेल्स डाल सकते हैं. खास बात यह है कि यह ऐप मोबाइल, टैबलेट्स और विंडोज पीसी सभी पर एक समान काम करता है. यह ऐप एंड्रायड के लिए गूगल प्ले स्टोर पर फ्री में उपलब्ध है और आइओएस, विंडोज फोन्स व पीसी प्लेटफॉर्म के लिए भी उपलब्ध है.

2. वाली प्‍लस-

यह ऐप सामाजिक सरोकार के लिए किए जाने वाले खर्चों पर फोकस करता है. यह एक ग्रेट ऐप है. वैसे अपनी डिटेल्स डालने के लिए यह आपको बहुत अधिक मात्रा में फील्ड्स उपलब्ध कराता है, इतना ही नहीं आपकी खर्चीली आदत के बारे में भी यह आपको जानकारी देता है. जैसे- यह आपको यह नहीं बताता कि आपने घर या ऑफिस में कहां खर्च किया बल्कि यह बताता है कि आपने दोस्तों या वाइफ किसके साथ ज्यादा खर्च किया. यह ऐप वैल डिजाइन ऐप है, जो आपके खर्चे को फन और जानकारी के साथ ट्रैक करता है. यह ऐप एंड्रायड के लिए गूगल प्ले स्टोर पर फ्री में उपलब्ध है और एपल स्टोर पर आइओएस के लिए.

3. डोलाबर्ड-

यह एक साधारण एक्सपेंस ट्रैकर ऐप है और बहुत लोगों के लिए यह वही है जो वह चाहते हैं. जब आप अपने खर्चे को इसमें डाल रहे होते हैं तो आपसे कुछ प्रश्न पूछे जाते हैं, लेकिन तब आपको बहुत सारे जवाब उपलब्ध हो जाते हैं. यह एक मैन्युअल ट्रैकर की तरह काम करता है. इसमें खर्चे को ट्रैक करने के लिए एक अच्छा सा कैलेंडर भी मिलता है, जिससे सिर्फ एक नजर में आप अपने खर्चे के बारे में पता लगा सकते हैं. यह एंड्रायड डिवाइसेज के लिए गूगल प्ले स्टोर पर फ्री में उपलब्ध है और एप्पल स्टोर पर आइओएस के लिए है.

फिर आ रहे हैं बिन बुलाए मेहमान आपको हसाने

परेश रावल की आने वाली फिल्म 'गेस्ट इन लंदन' का मोशन पोस्टर सामने आया है. ये फिल्म 16 जून को रिलीज की जाएगी. बताया जा रहा है कि ये फिल्म पहले आई परेश रावल की फिल्म 'अतिथि तुम कब जाओगे' का दूसरा पार्ट है, हालांकि फिल्ममेकर्स ने ऐसा कुछ नहीं बताया है.

इस मोशन पोस्ट में कार्तिक आर्यन, कृति खरबंदा, परेश रावल और तन्वी आजमी को दिखाया गया है. फिल्म 'गेस्ट इन लंदन' में कार्तिक आर्यन और कृति खरबंदा पति-पत्नी की भूमिका में हैं. परेश और उनकी पत्नी तन्वी उनके घर बिन बुलाए मेहमान के तौर पर आ जाते हैं जिससे परेशान हो कर वो उन्हें अपने घर से निकालना चाहते हैं.

जैसा की फिल्म के नाम में लंदन है तो उसे सपोर्ट करने के लिए इस पोस्टर में पीछे बिग-बैन भी दिखाया गया है. इससे पहले आई 'अतिथि तुम कब जाओगे' में अजय देवगन और कोंकणा सेन के साथ परेश रावल ने दर्शकों को खूब हंसाया था.

बॉलीवुड में नकल का कोई जवाब नहीं

ये बात जान कर आपको हंसी तो आएगी ही साथ ही आप सोचने पर भी मजबूर हो जाएंगे कि बॉलीवुड में ऐसा क्यों होता है. हम बात कर रहे हैं हाल ही में आए अभिनेत्री हुमा कुरैशी की फिल्म ‘दोबारा’ के ट्रेलर की.

हम आपको बता दें कि ये फिल्म, साल 2013 में आई हॉलीवुड फिल्म ‘ऑक्युलस’ की हुबहू नकल है. फिल्म के निर्माता प्रवाल रमन ने, हाल ही में आए इस फिल्म के ऑफिशियल ट्रेलर में भी ये बात जाहिर की है कि ये फिल्म आज तक की सबसे डरावनी कही जाने वाली फिल्मों में से एक ‘ऑक्युलस’ से ले गई है. तो क्या सबको बताकर फिल्मों की कहानी चोरी करने से उसे चोरी या नकल नहीं कहा जाता?

अब तो जैसे ये बॉलीवुड का रिवाज हो गया है और ये कोई पहली बार नहीं हुआ है कि जब बॉलीवुड की किसी फिल्म की कहानी हॉलीवुड फिल्मों से ली गई हो. केवल फिल्में ही नहीं, बॉलीवुड तो विदेशी गानों तक की नकल बनाने में पीछे नहीं रहता. इसका एक ताजा उदाहरण इसी साल की शुरुआत में आई फिल्म ‘बद्रीनाथ की दुल्हनियां’ का गाना, “तम्मा तम्मा लोगे” है. 'तम्मा तम्मा' दरअसल एक विदेशी गीतकार और गायक ‘मोरे केंटे’ का गीत है जो साल 1988 में आया.

इसके अलावा भी बॉलीवुड में कई ऐसी फिल्मों के उदाहरण आपको देखने मिल जाएंगे, जिन्हें पूरा का पूरा हॉलीवुड से कॉपी किया गया है और सिर्फ बॉलीवुड ही नहीं हमारे टॉलीवुड की भी कई ऐसी फिल्में हैं, जो कई पुरानी हॉलीवुड फिल्मों से ली गईं हैं. इस लिस्ट में हिन्दी सिनेमा की कई सुपरहिट फिल्में शामिल हैं.

यहां हम जिस फिल्म की बात कर रहे हैं उस फिल्म की पूरी कहानी तो हॉलीवुड से ली ही गई है पर साथ ही फिल्म का एक एक सीन भी बहुत बारीकी से कॉपी किया गया है. यही नहीं फिल्म का ट्रेलर तक हुबहू इसकी असल फिल्म ‘ऑक्युलस’ जैसा ही है.

तो आप भी देखिए फिल्म ‘दोबारा’ का ताजा ट्रेलर..

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