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जीत के ‘चौके’ के साथ टीम इंडिया ने बनाए ये रिकार्ड्स

भारत ने श्रीलंका के खिलाफ चौथे वनडे मैच में 168 रनों से जीत दर्ज की. इसके साथ ही टीम इंडिया ने सीरीज में 4-0 से बढ़त दर्ज कर ली है. मैच में टीम इंडिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 5 विकेट पर 375 रन बनाए. जवाब में श्रीलंका की पूरी टीम 42.4 ओवरों में 207 रनों पर औलआउट हो गई. इस तरह से टीम इंडिया ने एक आसान जीत दर्ज कर ली.

भारतीय टीम की ओर से जीत के हीरो विराट कोहली रहे. उन्होंने 96 गेंदों में 131 रन बनाए जिसमें 17 चौके और 2 छक्के शामिल थे. उनके अलावा रोहित शर्मा ने 88 गेंदों में 104 रनों की पारी खेली. इस दौरान उन्होंने 11 चौके और 3 छक्के मारे.

इन दोनों ने दूसरे विकेट के लिए 219 रनों की साझेदारी निभाई. गौर करने वाली बात है कि यह टीम इंडिया की ओर से वनडे में निभाई गई 399वीं शतकीय साझेदारी थी.

भले ही श्रीलंकाई टीम यह मैच हार गई लेकिन उसके नाम भी कई रिकार्ड दर्ज हुए. तो आईए जानते हैं चौथे वनडे में दोनों टीमों द्वारा बनाए गए रिकार्ड्स.

धोनी का 300वां वनडे इंटरनैशनल

महेंद्र सिंह धोनी ने अपने करियर का 300वां वनडे मैच खेला. ऐसा करने वाले वह भारत के छठे खिलाड़ी हैं.

सबसे ज्यादा बार नौटआउट

धोनी ने इस मैच में नौटआउट रहकर विश्व में सबसे ज्यादा वनडे में नाबाद रहने का रिकार्ड अपने नाम किया. धोनी 73 बार नाबाद रहे हैं, उन्होंने 72 बार नाबाद रहे श्रीलंका के चामिंडा वास और दक्षिण अफ्रीका के शौन पोलाक को पीछे छोड़ा.

2017 में सबसे ज्यादा रन (वनडे) बनाने वाले खिलाड़ी

विराट कोहली 2017 में सबसे ज्यादा वनडे रन बनाने वाले खिलाड़ी बने. विराट ने रनों के मामले में दक्षिण अफ्रीका कप्तान डु प्लेसिस को पीछे छोड़ दिया.

सहवाग को पीछे छोड़ विराट ने बनाया रिकार्ड

मैन औफ द मैच बनते ही उन्होंने टीम इंडिया के पूर्व ओपनर वीरेंद्र सहवाग को पीछे छोड़ दिया. दरअसल विराट कोहली वनडे में 24वीं बार मैन औफ द मैच चुने गए जबकि सहवाग को ये अवार्ड 23 बार मिला था. वनडे में सबसे ज्यादा मैन औफ द मैच अवार्ड जीतने का रिकार्ड सचिन तेंदुलकर के नाम है जिन्होंने 62 बार इस खिताब को जीता है.

मलिंगा का 300वां विकेट

श्रीलंका के कप्तान लसिथ मलिंगा ने अपने वनडे करियर का 300वां विकेट लिया. मलिंगा ने भारत के कप्तान विराट कोहली को 131 रन पर आउट किया.

घर में सबसे बड़ी हार

168 रन के अंतर से हारने के बाद यह श्रीलंका की अपने घर में हुई सबसे बड़ी हार है.

श्रीलंका में सबसे बड़ी जीत

चौथे वनडे में मिली हार श्रीलंका की सबसे बड़ी हार है, जबकि टीम इंडिया की श्रीलंका के खिलाफ उसके सरजमीं पर सबसे बड़ी जीत है.

शतकीय साझेदारी निभाने के मामले में भी बनाया रिकार्ड

धोनी और पांडे के बीच पांचवें विकेट के लिए निभाई गई शतकीय साझेदारी भारत की ओर से वनडे क्रिकेट के इतिहास में निभाई गई 400वीं साझेदारी है. इसके साथ ही वनडे क्रिकेट में 400 साझेदारी का आंकड़ा छूने वाली टीम इंडिया दुनिया की पहली टीम बन गई है.

भारत की ओर से वनडे में सबसे बड़ी साझेदारी का रिकार्ड 331 है जो सचिन तेंदुलकर-राहिल द्रविड़ की जोड़ी ने साल 1999 में न्यूजीलैंड के खिलाफ बनाया था. वहीं दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा शतकीय साझेदारी निभाने का रिकार्ड आस्ट्रेलिया के नाम है वे 366 शतकीय साझेदारी निभा चुके हैं.

100वीं, 200वीं, 300वीं और 400वीं साझेदारी निभाने वाली जोड़ियां

भारत की ओर से 100वीं शतकीय साझेदारी सचिन तेंदुलकर-मोहम्मद अजहरुद्दीन की जोड़ी ने निभाई थी, 200वीं शतकीय साझेदारी सचिन तेंदुलकर-सौरव गांगुली की जोड़ी ने, 300वीं शतकीय साझेदारी गौतम गंभीर-विराट कोहली की जोड़ी ने और 400वीं शतकीय साझेदारी मनीष पांडे-एमएस धोनी की जोड़ी ने निभाई है.

सबसे ज्यादा शतकीय पारी बनाने वाली जोड़ी

गौर करने वली बात है कि वनडे क्रिकेट के इतिहास में सबसे ज्यादा शतकीय साझेदारी बनाने का रिकार्ड भारत की सचिन तेंदुलकर-सौरव गांगुली की जोड़ी के नाम है. दोनों ने आपस में 26 शतकीय साझेदारियां निभाई हैं.

श्रीलंका को करना होगा वर्ल्ड कप के लिए केवालीफाई

भारत के हाथों चौथे वनडे मैच में मिली हार के बाद श्रीलंका के लिए एक और बुरी खबर है. इस हार से श्रीलंका को 2019 में होने वाले आईसीसी विश्व कप में सीधे उसके सीधे क्वालीफिकेशन की उम्मीदों को तगड़ा झटका लगा है. श्रीलंका को विश्व कप में सीधे क्वालीफाई करने के लिए भारत के खिलाफ खेली जा रही पांच वनडे मैचों की सीरीज में कम से कम दो मैच जीतने थे, लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाई और 0-4 से पीछे है.

विश्व कप में इस साल 30 सितंबर तक मेजबान इंग्लैंड के अलावा आईसीसी रैंकिंग में शीर्ष सात टीमों को सीधे क्वालीफाई करने का मौका मिलेगा जबकि बाकी टीमों को क्वालीफिकेशन टूर्नामेंट खेलना होगा. हालांकि श्रीलंका की सीधे क्वालीफाई करने की उम्मीद पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है.

वेस्टइंडीज की हार पर निर्भर श्रीलंकाई टीम

आईसीसी के बयान के मुताबिक, भारत से 0-4 से पिछड़ने के बाद श्रीलंका को अब वेस्टइंडीज की आगामी सीरीज में उसकी कम से कम एक हार पर निर्भर होना पड़ेगा, अगर ऐसा होता है तो श्रीलंका को विश्व कप में सीधे एंट्री मिल सकती है.

अगर श्रीलंका भारत के खिलाफ होने वाले आखिरी मैच में जीत हासिल कर लेता है तो उसके 88 अंक हो जाएंगे, हालांकि यह क्वालीफिकेशन के लिए पर्याप्त नहीं होंगे. विंडीज के पास श्रीलंका से आगे निकलने का मौका है. अगर वह आने वाले अपने छह मैचों में जीत हासिल कर लेती है तो वह भी 88 अंकों पर पहुंच जाएगी. ऐसे में वह दशमलव अंकों के आधार पर श्रीलंका पर बढ़त लेने में सफल हो जाएगी.

किस टीम से होगा वेस्टइंडीज का मुकाबला

वेस्टइंडीज को 13 सितंबर को आयरलैंड के खिलाफ मैच खेलना है और फिर इंग्लैंड के खिलाफ 19 से 29 सितंबर के बीच पांच वनडे मैचों की सीरीज खेलनी है. अगर श्रीलंका भारत के खिलाफ 5-0 से हारता है तो विंडीज को विश्व कप में सीधे प्रवेश के लिए आयरलैंड को मात देनी होगी और इंग्लैंड के खिलाफ 4-1 से सीरीज पर कब्जा जमाना होगा.

अन्ना ने मोदी से पूछा, क्या हुआ तेरा वादा वो कसम वो इरादा

देश जिन हालातों और माहौल से गुजर रहा है उसे देखते हुए वाकई किसी बड़े आंदोलन की सख्त जरूरत है, जिससे मूर्छित होती जनता को सांस लेने नए और खुलेपन की आक्सीजन मिले. पिछले एक साल से आंदोलन करूंगा, आंदोलन करूंगा  की रट लगाए बैठे गांधीवादी समाजसेवी अन्ना हज़ारे ने इस अदृश्य मांग को समझते दोबारा एक बड़ा आंदोलन करने की हुंकार भर दी है. यह प्रस्तावित आंदोलन भी भ्रष्टाचार के ही खिलाफ होगा. इस बाबत अन्ना ने बाकायदा प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखते चेतावनी भी दी है कि 3 साल गुजर जाने के बाद भी न तो लोकपाल और लोकयुक्तों की नियुक्तियां हुई हैं और न ही सरकार किसानों की समस्याओं को दूर करने स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट पर अमल करने कोई पहल कर रही है.

बकौल अन्ना हजारे वे बेहद व्यथित हैं और इसलिए फिर से जन आंदोलन करने को विवश हो रहे हैं. अपनी चिट्ठी में उन्होंने खासतौर से इस बात का जिक्र किया है कि अगस्त 2011 के उनके आंदोलन में दिल्ली के रामलीला मैदान पर देश के कोने कोने से आए लोगों ने शिरकत कर अपना समर्थन दिया था, जिसके चलते तत्कालीन सरकार को लोकायुक्त का कानून 17 और 18 दिसंबर 2013 को क्रमश राज्यसभा और लोकसभा में पारित करने बाध्य होना पड़ा था और बाद में राष्ट्रपति ने भी इस पर दस्तखत किए थे. नरेंद्र मोदी को संबोधित करते अन्ना ने लिखा है कि आपने सत्ता में आने से पहले जनता को भ्रष्टाचार मुक्त भारत के निर्माण का भरोसा दिलाया था लेकिन जिन राज्यों में आपकी पार्टी की सरकारें हैं वहां भी नए कानून के तहत लोकायुक्त नियुक्त नहीं किए गए हैं. क्या हुआ तेरा वादा वो कसम वो इरादा की तर्ज पर मोदी पर तंज कसते हुये अन्ना ने उनकी कथनी और करनी में आते फर्क का भी जिक्र किया है.

इस एलान के और खत के मजमून के अपने दीर्घकालिक माने हैं कि मोदी जी भी पूनम गुप्ता की तरह बेवफा निकले, इसलिए उन्हें भी आंदोलन के जरिये वफा का सबक सिखाया जाएगा और मुमकिन है इस बाबत जगह भी वही हो, लोग भी वही हों, माहौल भी वही हो, लेकिन बाजी अन्ना के हाथों में ही होगी, इसमें शक है क्योंकि तीन साल में देश सचमुच में काफी बदल चुका है और उसकी प्रमुख समस्या भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि तेजी से देश को अपनी गिरफ्त में लेता नव हिंदुत्व या राष्ट्रवाद है, जिस पर अन्ना की नजर नहीं गई है या फिर जानबूझकर उन्होंने सत्ता पर हावी होते पंडावाद को अनदेखा कर दिया है, इसे समझ पाना हाल फिलहाल मुश्किल काम है.

लेकिन यह तय है कि इस बार भी उनके निशाने पर बिना किसी भेदभाव के सरकार और उसके मुखिया हैं. जन शक्ति आंदोलन पार्ट 2 को हालांकि उम्मीद के मुताबिक शुरुआती रेस्पान्स नहीं मिला है, लेकिन अन्ना की जिद और इच्छाशक्ति को हल्के में लेने की भूल मोदी और भाजपा करेंगे ऐसा लग नहीं रहा. 2011 के उनके हाहाकारी आंदोलन से भ्रष्टाचार भले ही खत्म न हुआ हो, लेकिन कांग्रेस जरूर खत्म सी हो गई, जिसे नरेंद्र मोदी भ्रष्टाचार का पर्याय बताते थकते नहीं थे, पर तब सिर्फ भ्रष्टाचार था और अब उसके साथ साथ वंदे मातरम, भारत माता, गौ माता, राष्ट्र गान वगैरह भी हैं, जिन्हें मौजूदा सरकार ने ही एक आंदोलन सा ही बनाकर रख दिया है.

राष्ट्रीय समस्याओं के नए बनते अपार्टमेंट में भ्रष्टाचार टॉप फ्लोर पर है, लेकिन ग्राउंड फ्लोर पर धर्म और उसके सहायक तत्वों की पार्किंग है, जिससे होकर गुजरना अन्ना हज़ारे के लिए एक दुश्वारी वाला काम होगा. कमजोर और बिखरे विपक्ष को अन्ना का नया ऐलान राहत देने वाला हो सकता है, जिसमें मुमकिन है दिल्ली की बवाना विधानसभा सीट जीत कर फिर से वापसी कर रहे अपने चेले अरविंद केजरीवाल को वे फिर हीरो बना दें या दो चार और नए नायक पैदा कर दें, परंतु 2011 जैसा जन समर्थन अन्ना हजारे को शायद ही मिले, वजह उनके आंदोलन का पेटर्न और डिजायन वक्त के हिसाब से नहीं बदले हैं.

उन्हे अगर टॉप फ्लोर गिराना है तो पहला बुलडोजर ग्राउंड फ्लोर पर चलाना पड़ेगा, जिसके किसी फ्लेट में उनका गांधीवाद भी बंधक पड़ा है. भाजपा की धर्मांधता को अरविंद केजरीवाल भी चुनौती देने की हिम्मत नहीं जुटा पाये थे, संभव नहीं दिख रहा कि अन्ना हजारे भी सच, एक कडवे सच से जूझने का दुसाहस कर पाएंगे. ऐसे में उनका आंदोलन टाइम पास इवैंट बन कर रह जाये तो बात कतई हैरानी की नहीं होगी.

शुभ मंगल सावधान : कमियों के बावजूद जागरुकता फैला सकती है फिल्म

पुरुषों की स्तंभन की कमजोरी की बीमारी के इर्दगिर्द बुनी गयी प्रेम कहानी  युक्त हास्य फिल्म ‘‘शुभ मंगल सावधान’’ में हास्य व नामदर्गी को एक साथ कहानी के ताने बाने में बुनने में लेखक असफल रहे. क्लायमेक्स तक पहुंचते पहुंचते फिल्म पूरी तरह से बिखरी हुई लगती है. जैसे ही दर्शक हास्य का लुत्फ उठाता है, पता चलता है कि फिल्म अपने मूल कथानक से भटक चुकी है. पर फिल्मकार ने मुदित के मुंह से मर्दानगी और मर्द की नई परिभाषा देते हुए कहलवाया है-‘‘मर्द वह होता है, जो न दर्द लेता है और न किसी को दर्द देने देता है.’’

फिल्म की कहानी दिल्ली में रह रहे मुदित शर्मा (आयुष्मान खुराना) और सुगंधा जोशी (भूमि पेडणेकर) के इर्द गिर्द घूमती है. दोनों के माता पिता उन पर शादी का दबाव डाल रहे हैं. पर दोनों शादी के लिए हां नहीं कह रहे हैं. मुदित और सुगंधा दोनों ही नौकरी करते हैं. अचानक दोनों की मुलाकातें हो जाती हैं. उनके बीच प्यार पनपता है. दोनों अपने प्यार का इजहार करते, उससे पहले ही अपनी मां के कहने पर मुदित, सुगंधा के परिवार वालों के पास आन लाइन शादी का प्रस्ताव भेज देता है. इस प्रस्ताव से सुगंधा भी खुश हो जाती है और सगाई की तारीख तय हो जाती है. अब सुगंधा इस अरेंज मैरिज को लव मैरिज में बदलने की बात सोच लेती है. वह मुदित से उसके आफिस में जाकर मिलती है.

मुलाकातें बढ़ती हैं. नाटकीय अंदाज में सुगंधा व मुदित की सगाई हो जाती है. फिर शादी दिल्ली की बजाय सुगंधा के चाचा के घर हरिद्वार में होनी है. सुगंधा के माता पिता हरिद्वार चले जाते हैं. इधर एक रात मुदित, सुगंधा के घर पहुंचता है. प्यार में आगे बढ़ते हुए शारीरिक संबंध बनाना चाहते हैं. पर मुदित को पुरुषों की बीमारी यानी कि स्तंभन की कमजोरी का अहसास होता है. अब सुगंधा, मुदित का हौसला बढ़ाना चाहती है. एक बार मुदित कह देता है कि वह शादी नहीं करेगा. पर सुगंधा कहती है कि यदि यही बात शादी के बाद पता चलती तो? हम शादी करेंगे.

मुदित अपने दोस्तों से इस मर्दाना बीमारी के बारे में बात कर हल खोजने का असफल प्रयास करता है. पर सुगंधा के दबाव में व अपने परिवार की इज्जत की खातिर मुदित बारात लेकर हरिद्वार पहुंचता है. जहां पता चलता है कि सुगंधा के पिता को पता चल चुका है कि मुदित नामर्द है. वह उसे लेकर एक डाक्टर के पास जाते हैं. डाक्टर मुदित को समझाते हैं कि यह उसकी अपनी दिमागी सोच है. एक बार तनाव के चलते ऐसा हो गया, उसके बाद वह डर उसके मन से नहीं निकला. फिर मुदित की बीमारी दूर हो जाती है. कुछ नाटकीय घटनाक्रम के बाद सुगंधा व मुदित शादी के बंधन में बंध जाते हैं.

पटकथा व एडीटिंग के स्तर पर फिल्म में काफी कमियां हैं. फिल्म के शुरू होने के दस मिनट बाद ही फिल्म भटक सी जाती है. इंटरवल के बाद तो फिल्म को जबरन खींचा गया है. फिल्म में जो परिवार दिखाए गए हैं, वह भी पूरी तरह से नकली यानी कि पूरी तरह से फिल्मी परिवार नजर आते हैं. लेखक के तौर पर हितेश कैवल्य निराश करते हैं. फिल्म का क्लायमेक्स तो बची खुची फिल्म को भी तहस नहस कर देता है. लेखक व निर्देशक मुदित व सुगंधा की शादी के सीन व फिल्म के समापन को लेकर दुविधा में नजर आते हैं. इसी के चलते लेखक ने पूर्व प्रेमिका, केले के पेड़ से शादी सहित कई दृश्य व चीजें बेवजह भर दी हैं. फिल्म में कंडोम का विज्ञापन करने वाला जिम्मी शेरगिल का सीन भी जबरन ठूंसा हुआ लगता है.

बतौर निर्देशक आर एस प्रसन्ना की हिंदी में यह पहली और उनके करियर की यह दसरी फिल्म है, पर उनके अंदर संभावनाएं नजर आती हैं. हरिद्वार में रहने वाले सुगंधा के चाचा को एक तरफ मध्यमवर्गीय परिवारों की संस्कृति का वाहक दिखाया गया है, जो कि छोटों द्वारा बड़ों के पैर न छूने पर नाराज होता है, वहीं बारात आने पर हर किसी, यहां तक कि होने वाले दामाद के गाल चूमते नजर आते हैं. यह अजीबोगरीब विरोधाभास है.

यू तो यह फिल्म 2013 में प्रदर्शित तमिल रोमांटिक फिल्म ‘‘कल्याण समयाल साधम’’ का हिंदी रीमेक है. मगर फिल्म के निर्माता आनंद एल राय के अनुसार तमिल फिल्म की आइडिया पर नए सिरे से लिखी गयी पटकथा पर बनी यह ताजी फिल्म है. ‘‘शुभ मंगल सावधान’’ देखकर इस बात का अहसास ही नहीं होता कि इस फिल्म का निर्माण उन्ही आनंद एल राय ने किया है, जो कि अतीत में ‘तनु वेड्स मनु, ‘रांझणा’ व ‘तनु वेड्स मनु रिटर्न’ के अलावा सिर्फ निर्माता के रूप में ‘निल बटे सन्नाटा’ जैसी फिल्म दे चुके हैं. पर वह इस बात के लिए बधाई के पात्र हैं कि उन्होने एक व्यावसायिक फिल्म में सेक्स, पुरुष स्तंभन कमजोरी जैसे मुद्दे को उठाया, जिस पर हमारे देश में लोग खुलकर बात करना पसंद नहीं करते. पर वह पुरुषों की इस बीमारी का नाम फिल्म में लेने से बचते हुए नजर आए हैं. शायद वह इसे पारिवारिक फिल्म से इतर नहीं बनने देना चाहते थे. इस फिल्म से युवा पीढ़ी के लड़के व लड़कियों के बीच पुरुषों की इस बीमारी को लेकर जागरुकता आ सकती है. पर यदि फिल्म के निर्माता ने लेखक के साथ बैठकर कुछ काम किया होता, तो शायद यह फिल्म ज्यादा बेहतर बन जाती.

फिल्म की खासियत इसकी लोकेशन है. फिल्म में एक भी लोकेशन ऐसी नहीं हैं, जो पहले दूसरी फिल्मों में नजर आयी हों. जहां तक अभिनय का सवाल है, तो  आयुष्मान खुराना कमाल नहीं दिखा पाए. भूमि पेडणेकर ने भी अपने आपको दोहराया ही है. ब्रजेंद्र काला व सीमा पाहवा ने ठीक ठाक अभिनय किया है.

फिल्म का गीत संगीत साधारण है. फिल्म का ‘कान्हा’ गीत जरुर प्रभावित करता है. एक घंटे 50 मिनट की अवधि की आनंद एल राय और कृषिका लुल्ला निर्मित फिल्म ‘शुभ मंगल सावधान’ के निर्देशक आर एस प्रसन्ना, लेखक हितेश कैवल्य, संगीतकार तनिष्क वायु, कैमरामैन अनुज राकेश धवन तथा कलाकार हैं-आयुष्मान खुराना, भूमि पेडणेकर, ब्रजेंद्र काला, सीमा पाहवा व अन्य.

करण जौहर के जुड़वा बच्चों की तस्वीर सोशल मीडिया पर हो रही है वायरल

इन दिनों सोशल मीडिया पर बौलीवुड सितारों के साथ उनकी फिल्मों की भी काफी धूम मची रहती है, ये बौलीवुड स्टार्स जितने फेमस हैं उतने ही उनके बच्चे भी फेमस हो रहें हैं. उनके बच्चे यानी स्टार किड्स अभी से ही चर्चा में आकर सुर्खियां बटोर रहें हैं. कई स्टार किड्स को तो अभी इस बात की जानकारी ही नहीं होगी कि वह अभी से ही कितने फेमस हैं और उनके माता पिता की तरह उनके भी बहुत से लोग फैन्स हैं. फिर चाहे वह सैफ करीना के बेटे तैमूर अली खान हो या फिर शाहिद मीरा की बेटी मिशा हो.

अब तो इसी कड़ी में 2 नए नाम और जुड़ गए हैं आपको बता दे यह नाम और किसी के नहीं बल्कि फिल्म मेकर करण जौहर के जुड़वा बच्चे यश और रूही के हैं. इन सभी के इतने चर्चित होने का पूरा श्रेय इंटरनेट और सोशल मीडिया को ही जाता है. कुछ समय पहले सेरोगेसी से पिता बने करण जौहर ने सोशल मीडिया पर अपने पिता बनने की जानकारी शेयर की थी. उसके बाद से ही जब भी रूही और यश की तस्वीरें आती तुरंत ही सोशल मीडिया पर वायरल हो जाती है.

हाल ही में करण ने अपने दोनों बच्चों की एक तस्वीर को सोशल मीडिया पर शेयर किया है और इस वजह से वह एक बार फिर सुर्खियों में हैं. इस तस्वीर को उन्होंने बेहद ही खूबसूरत कैप्शन देते हुए लिखा, ‘मेरी दुनिया.’ करण कहते हैं, कि वह अपने बच्चों की मां है.

आप को बता दें कि रूही और यश का जन्म 7 फरवरी को हुआ था. समय से पहले जन्में दोनों बच्चों को 2 महीनों तक अस्पताल में ही रखना पड़ा था.

स्मार्टफोन की इन सीक्रेट सेटिंग्स से अनजान होंगे आप

स्मार्टफोन का इस्तेमाल आज हर कोई कर रहा है. स्मार्टफोन जरूरत बन गया है. ऐसे में जाहिर है कि आपको स्मार्टफोन के बारे में लगभग सभी कुछ पता होगा. फोन की छोटी से छोटी सेटिंग से लेकर फोन को रीबूट करने तक किसी भी बात से आप अनजान नहीं होंगे. लेकिन आपके स्मार्टफोन की कुछ सेटिंग्स को लेकर आप अंजान हंगी.

आज हम आपको फोन की 3 सीक्रेट सेटिंग्स के बारे में बताएंगे जिनके जरिए आप अपने फोन का डाटा सुरक्षित रख सकते हैं और साथ ही पासवर्ड को पब्लिक होने से भी बचा सकते हैं.

सेटिंग 1

ब्राउजर पर जाकर myactivity.com टाइप करना है. इसके बाद नेक्सट के औप्शन पर टैप करें जब तक मेन स्क्रीन न आ जाए. इसके बाद बायीं तरफ दिए गए आइकन से मेन्यू पर जाए. यहां आपको delete activity by पर टैप करना है. फिर delete पर क्लिक करना है. ऐसा करने से आपकी गूगल पर की गई एक्टिविटी डिलीट हो जाएगी.

सेटिंग 2

सबसे पहले आपको फोन सेटिंग्स पर जाना होगा. इसमें Language and input औप्शन पर टैप करें. अब Gboard पर टैप कर advanced पर क्लिक करें. इसके बाद Share usage statistics और share snippets को औन कर दें. इससे आपका Gboard बेहतर हो जाएगा.

सेटिंग 3

फोन सेटिंग्स में जाकर Google पर टैप करें. यहां आपको सबसे नीचे Smart lock for password दिखाई देगा. इस सेटिंग से आप एप और वेबसाइट पर औटो लौगइन करते हैं. यहां से आप इसे औफ कर सकते हैं. साथ ही आप उन एप्स को यहां एड कर सकते हैं जिनका पासवर्ड आप सेव नहीं रखना चाहते हैं. इससे आपकी जानकारी भी औनलाइन लीक नहीं होगी.

मेरे पड़ोस की भाभी के साथ जिस्मानी संबंध हैं. एक दिन उन के पति ने हम दोनों को रंगेहाथ पकड़ लिया. अब मैं क्या करूं.

सवाल
मैं 21 साल का हूं. पड़ोस वाली भाभी 32 साल की हैं और उन के 3 बच्चे भी हैं. एक बार उन के पति गांव गए थे, तो मेरे और उन के बीच जिस्मानी संबंध बन गए, जो लगातार चल रहे हैं. एक दिन उन के पति ने हम दोनों को रंगेहाथ पकड़ भी लिया. इस के बावजूद वे अपनी बीवी को साथ ले जाने को तैयार हैं, पर वह मुझे छोड़ना नहीं चाहती. क्या करूं?

जवाब
3 बच्चों की मां को तलाक दिला कर उस से शादी करना आसान काम नहीं है. लिहाजा, आप उसे समझा कर पति के साथ जाने को कहें. उस का पति बेहद भला है, वरना कोई भी ऐसी हरकत बरदाश्त नहीं कर सकता. आप ने मुफ्त की मलाई खूब चाट ली, अब उस से किनारा करने में ही भलाई है.

एक नहीं दो-दो शादी कर चुके हैं क्रिकेट के ये दिग्गज खिलाड़ी

क्रिकेट जगत में ऐसे कई क्रिकेटर हैं जो अपने खेल के साथ साथ अपनी निजी जिंदगी को लेकर सुर्खियों में रहते हैं. यह कहना गलत नहीं होगा कि सिने जगत के सितारों की ही तरह इन क्रिकेटर्स की भी लाइफ ग्लैमर से भरपूर होती है. क्रिकेट में ऐसे कई खिलाड़ी हुए हैं जिन्होंने अपनी पत्नियों के कारण खासा प्रसिद्धि बटोरी.

क्रिकेट इतिहास में ऐसे कई खिलाड़ी हुए हैं जिनकी एक से ज्यादा रिश्ते होने की खबरें आई. कभी ये रिश्ते शादी में बदल जाते हैं तो कई बार शादियां भी टूट जाती हैं. ऐसे ही कुछ क्रिकेटर्स हैं जिन्होंने अपने जीवनसाथी की मौत के बाद दोबारा शादी की तो कुछ ने अपने जीवनसाथी को तलाक देकर दूसरी शादी की. आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ क्रिकेटरों के बारे में जिन्होंने एक से अधिक शादियां की.

मोहम्मद अजहरुद्दीन

पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद अजहरुद्दीन ने अपनी दूसरी शादी संगीता बिजलानी से की. इनकी पहली पत्नी का नाम नौरीन था. इनकी पहली पत्नी से इनको दो बच्चे हैं. अजहर की दूसरी शादी की खूब चर्चा हुई थी.

वसीम अकरम

रिवर्स स्विंग के मास्टर पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज वसीम अकरम ने भी दो शादियां की. उनकी पहली शादी साल 1995 में हुमा मुफ्ती से हुई थी. हुमा की मृत्यु साल 2009 में शरीर के कई अंगों के खराब हो जाने के कारण हो गई थी. इसके बाद वसीम अकरम ने आस्ट्रलियाई युवती शानियारा थाम्पसन से अपनी दूसरी शादी की.

तिलकरत्ने दिलशान

श्रीलंका के क्रिकेटर तिलकरत्ने दिलशान ने भी पहली पत्नी को छोड़कर दूसरी शादी मंजुला से की. इसके पीछे पहली पत्नी की बेवफाई सामने आई जिनका अफेयर श्रीलंकाई बल्लेबाज उपुल थंरगा से चल रहा था. बाद ही दोनों ने शादी कर ली.

ग्लेन मैक्ग्रा

आस्ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंदबाज ग्लेन मैक्ग्रा ने अपनी पहली शादी एक एयरलाइंस में फ्लाइट अटेंडेंट जेनी लुईस से की. कैंसर के कारण जेनी की मृत्यु हो गई. इनके दो बच्चे भी हैं जिनका नाम जेम्स और होल्ली है. जेनी की मृत्यु के बाद आस्ट्रलियाई गेंदबाज ग्लेन मैक्ग्रा ने सारा लियोनार्डी से अपनी दूसरी शादी की.

दिनेश कार्तिक

क्रिकेटर दिनेश कार्तिक अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर काफी चर्चाओं में रहे. उनकी पहली पत्नी ने उनका साथ छोड़कर एक अन्य फेमस भारतीय क्रिकेटर का दामन थाम लिया था और कार्तिक ने स्क्वैश प्लेयर दीपिका पल्लीकल से शादी कर ली.

इमरान खान

पूर्व पाकिस्तानी कप्तान इमरान खान का महिलाओं में कुछ ज्यादा ही क्रेज था. 1995 में उन्होंने अपनी पहली शादी पेरिस में जेमिमा गोल्डस्मिथ से की लेकिन 9 साल बाद साल 2004 इनका तलाक हो गया. बाद में इमरान ने टीवी पत्रकार रेहम खान से शादी की लेकिन कुछ ही दिनों के बाद दोनो का तलाक हो गया.

विनोद कांबली

भारतीय टीम के पूर्व क्रिकेटर विनोद कांबली ने पहले नोएला लुइस से ब्याह रचाया, जो कि 1998 में पुणे के ब्लू डायमंड होटल में रिसेप्शनिस्ट का काम करती थी. उनसे अलग होने के बाद विनोद कांबली ने फैशन मौडल एंड्रिया हेविट से शादी कर ली.

दिल्ली में मोहल्ला क्लीनिक पर छिड़ी जंग, सरकार और एलजी आमने सामने

मोहल्ला क्लीनिक को लेकर दिल्ली में महासंग्राम छिड़ गया है. आम आदमी पार्टी सरकार ने बुधवार को इस मामले को लेकर उपराज्यपाल अनिल बैजल पर सवाल उठाए, तो वहीं एलजी ने इसके लिए सीधे-सीधे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को दोषी करार दिया है. विधायकों के अड़ने के बाद इस मसले पर एलजी ने गुरुवार को बैठक बुलाई है. माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत कैबिनेट के अन्य सदस्य और विधायक भी इसमें शामिल हो सकते हैं. बैठक में मोहल्ला क्लीनिक के मसले पर विस्तार से चर्चा की जाएगी. एलजी आवास पर यह बैठक पांच बजे होगी.

सम्मेलन कक्ष में बैठकर ट्वीट के जरिए हमले

दोपहर के 2.30 बजे मोहल्ला क्लीनिक की बैठक से शुरू हुआ हंगामा देर रात नौ बजे तक चलता रहा. विधायक राजनिवास के सम्मेलन कक्ष में बैठकर सोशल मीडिया के जरिए एलजी पर हमले करते रहे. मामले में उपराज्यपाल कार्यालय ने भी विस्तृत सफाई दी और देर रात पर वार पलटवार शुरू हो गया. देर रात उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सोशल मीडिया के माध्यम से राजनिवास द्वारा दी गई सफाई को खारिज कर दिया. उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि इस मामले में उपराज्यपाल कार्यालय की तरफ से सही तर्क नहीं दिए जा रहे हैं. इस मुद्दे पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए.

सतर्कता विभाग ने आपत्तियां जताई थीं

मोहल्ला क्लीनिक को लेकर सतर्कता विभाग ने कई सवाल खड़े किए हैं. ये क्लीनिक सितंबर 2016 से दिसंबर 2016 के बीच खोले गए थे. राजनिवास का तर्क है कि इन मामलों में मिली शिकायतों के आधार पर सरकार से जवाब मांगा गया था, लेकिन सरकार से कोई रिपोर्ट नहीं मिली. यह मामला सतर्कता विभाग की जांच की दायरे में है.

ये सवाल खड़े किए थे

– मोहल्ला क्लिनिक के लिए परिसर का चयन करने के लिए कोई पारदर्शी तरीका नहीं होना

– परिसर का किराया बाजार के किराए से अधिक होना

– पार्टी कार्यकर्ताओं के परिसर किराये पर लिए गए थे

– क्लिनिक का स्थान एवं मौजूदा डिस्पेंसरी का कोई तालमेलनहीं था

– क्लिनिक चलाने के लिए चार घंटे पर्याप्त नहीं होना

– मरीजों का कोई उचित लेखा जोखा नहीं होना जिससे कि चिकित्सकों का भुगतान का निर्णय किया जा सके

कहीं बोर्ड नहीं मिला, तो कहीं बंद हुए क्लीनिक

केजरीवाल सरकार कहती है कि मोहल्ला क्लीनिक बीमारियों के इस मौसम में बहुत मददगार है. इसे राजनीति से दूर रखिए. इसी मोहल्ला क्लीनिक को लेकर सरकार और उपराज्यपाल में टकराव भी दिख रहा है.

ब्लॉक छह त्रिलोकपुरी, एसी का किराया न देने से बंद

सरकार की शीर्ष100 मोहल्ला क्लीनिक लिस्ट में शामिल रहा त्रिलोकपुरी ब्लॉक छह का क्लीनिक बंद हो चुकी है. क्लीनिक का बोर्ड उखाड़ दिया गया है और ताला लटक रहा है. इलाके के लोगों ने मुख्यमंत्री तक शिकायत की, लेकिन कुछ नहीं हुआ. बताया जा रहा है कि एसी का किराया समय से नहीं मिलने से यह क्लीनिक बंद हो गया है.

ब्लॉक-25 त्रिलोकपुरी, मोहल्ला क्लीनिक का बोर्ड नदारद

चुनाव के समय यहां मोहल्ला क्लीनिक का बोर्ड हटा दिया गया था, तब से नहीं लगा. जो लोग जानते हैं, वह तो आ जाते हैं लेकिन बाकी लोगों के लिए मुश्किल होती है. इस क्लीनिक पर सुबह आठ बजे से मरीज लाइन में लग जाते हैं. यहां के डॉक्टर बताते हैं कि दिन में 100 से 150 मरीज आते हैं. यह डेंगू और चिकनगुनिया का मौसम है. दूर-दूर से मरीज आ रहे हैं.

प्रताप चौक दल्लूपुरा, क्लीनिक जाने के लिए सड़क नहीं

इस गांव में बनी मोहल्ला क्लीनिक किसी प्राइवेट क्लीनिक की तरह नजर आता है. एयर कंडीशन लगा है, जहां मरीज और तीमारदार बैठकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं. साफ-सफाई का भी खास ख्याल रखा गया है. क्लीनिक का स्टाफ मरीज की पूरी जानकारी लेकर डॉक्टर के पास भेजता है. डॉक्टर तसल्ली से मरीज की जांच करते हैं.

अजय माकन बोले घोटाला हो रहा है

दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने दिल्ली सरकार द्वारा शुरू किए गए मोहल्ला क्लीनिक को एक बड़ा घोटाला बताया है. अपने ट्विटर संदेश में उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी के नेताओं को फायदा पहुंचाने के लिए इनका इस्तेमाल किया जा रहा है.माकन ने अपने ट्वीट संदेश में कहा कि बड़े पैमाने पर किए गए सर्वेक्षण में मोहल्ला क्लीनिक के जरिए किए जा रहे घोटाले का खुलासा हुआ है.

राष्ट्रपति से करेंगे शिकायत : भाजपा

आप विधायक मोहल्ला क्लीनिक के नाम पर नौटंकी कर रही है. इस मामले में भारतीय जनता पार्टी जल्द ही राष्ट्रपति से शिकायत दर्ज कराएगी. मामले में भाजपा ने राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा है. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा कि उपराज्यपाल भारतीय राष्ट्रपति के प्रतिनिधि हैं और आज की आराजकता सीधा सीधा संविधान पर प्रहार है . गुरुवार को हम राष्ट्रपति से मिलेंगे.

इनका कहना है

एक संवैधानिक पदाधिकारी के कार्यालय में दबाव बनाकर मामले को निपटाना कानून के मुताबिक उचित तरीका नहीं है. मोहल्ला क्लीनिक को लेकर मुख्यमंत्री अर¨वद केजरीवाल ने भी कोई ध्यान नहीं दिया. मुख्यमंत्री अपनी साप्ताहिक बैठक जोकि बुधवार सायं 5.00 बजे होती है, उसमें भी शामिल नहीं हुए.

– अनिल बैजल, उपराज्यपाल, दिल्ली

मोहल्ला क्लीनिक पर राजनीति नहीं होनी चाहिए. यह दिल्ली के दो करोड़ लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा मसला है. उपराज्यपाल सभी अफसरों की बैठक बुलाकर इस मामले को निपटाएं. वे चाहें तो मैं अपने मंत्रियों के साथ राजनिवास आने के लिए तैयार हूं. एक बार में ही सभी आपत्तियां दूर कर ली जाएं.

– अरविंद केजरीवाल, मुख्यमंत्री, दिल्ली

प्रचार की भूखी कंगना को अपनी अभिनय क्षमता पर भरोसा नहीं

लगता है कंगना रानौट का अपनी अभिनय क्षमता पर भरोसा नहीं रहा. इसीलिए वह अपनी हर फिल्म के प्रदर्शन से पहले नए नए विवाद पैदाकर खुद को सुर्खियों में रखने का प्रयास करती रहती हैं, अब इसका कितना फायदा उन्हे मिलता है, यह तो वही जानें. रितिक रोशन के साथ उनका विवाद तीन साल पुराना हो चुका है. पर वह अपनी फिल्म के प्रदर्शन से पहले उसी विवाद को न सिरे से हवा देती रहती हैं. अपनी पिछली फिल्म ‘‘रंगून’’ के प्रदर्शन के समय भी कंगना रानौट ने यही किया था. पर फिल्म ‘रंगून’ को सफलता नही मिली. अब उनकी नई फिल्म ‘सिमरन’ प्रदर्शित होने वाली है, जिसमें उन्होंने विवाद पैदा कर, लेखक से झगड़ा कर लेखक के तौर पर अपना नाम दर्ज करवा लिया है.

फिल्म ‘‘सिमरन’’ को लेकर वह जितना विवाद पैदाकर सुर्खियां बटोर सकती थीं, वह सब करके वह हार गयी. अब जबकि फिल्म के प्रदर्शन का समय नजदीक आ रहा है, तो कंगना रानौट ने एक बार फिर गड़े मुर्दे को उखाड़ते हुए एक टीवी चैनल पर इंटरव्यू देते हुए रितिक रोशन से माफी मांगने के लिए कहा है. सूत्रों से जो खबरें मिल रही हैं, उसके अनुसार चैनल पर कंगना रानौट ने रितिक रोशन को चुनौती देते हुए रितिक रोशन से उस विवाद पर माफी मांगने के लिए कहा है.

‘सिमरन’ के प्रमोशन के लिए चैनल पर अपना इंटरव्यू रिकार्ड करवा चुकी कंगना ने कहा है-‘‘उसको यहां बुलाइए और पूछिए, उससे एक एक प्रश्न पूछिए, क्यूंकि मैंने नोटिस नहीं भेजा था. मेरे नाम वाहियात मेल रिलीज किए हुए हैं. उनकी बदतमीजी के लिए मुझे माफी चाहिए उनसे.’’

कंगना ने आगे कहा-‘‘मैंने अपमान बर्दाश्त किया. मैं रोती रही. मैं सो न सकी. मैं तनाव में रही. लोग आज भी उन मेल्स को आनलाइन देखकर मेरा मजाक बनाते हैं. उसके इस कृत्य के लिए मैं उससे माफी की मांग करती हूं.’’

यानी कि कंगना रानौट ने एक बार फिर बुझी हुई आग को सुलगाते हुए उससे फायदा उठाने की कोशिश की है. मगर कंगना शायद यह भूल गईं कि जब से उन्होंने रितिक रोशन के साथ इस विवाद को जन्म दिया था, तब से कंगना का करियर निरंतर पतन की ओर ही जा रहा है.

बौलीवुड में लोग खुलकर कहने लगे हैं कि दर्शक सिनेमा में अच्छी कहानी और कलाकार की अभिनय क्षमता को देखना चाहता है. उसे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कलाकार कितने विवाद पैदाकर खबरों में बना रहता है. काश! कंगना इस तरह के विवादों को हवा देने की बजाय अपनी अभिनय क्षमता को निखारने पर ध्यान देती.

‘पिछले दरवाजे’ से विधानसभा जाएंगे ‘भाजपा के महारथी’

विधान परिषद और राज्य सभा को विधानसभा और लोकसभा का पिछला दरवाजा कहा जाता है. जो नेता चुनाव जीत कर सदन में पहुंचने की हालत में नहीं होते हैं, राजनीतिक पार्टियां उनके लिए इस पिछले दरवाजे का प्रयोग करती हैं. भाजपा के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित दो उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य और डाक्टर दिनेश शर्मा और दो मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, मोहसिन रजा विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं हैं. ऐसे में शपथ ग्रहण के 6 माह के अंदर इनको विधानसभा या विधानपरिषद का सदस्य होना जरूरी होता है. भाजपा के यह महारथी जनता के वोट से चुन कर विधानसभा सदस्य न बन कर विधायकों के वोट से चुन कर विधानपरिषद के सदस्य बनेंगे.

मजेदार बात यह है कि भाजपा ने विधान परिषद की इन सीटों को सपा बसपा के नेताओं से तोड़फोड़ कर खाली कराई है. समाजवादी पार्टी के 4 सदस्यों यशंवत सिंह, बुक्कल नवाब, सरोजनी अग्रवाल और अशोक वाजपेई सहित जयवीर सिंह ने अपनी सीट से इस्तीफा दिया. अब इन सीटों के जरीये ही भाजपा अपने 5 महारथियों को विधानसभा के पिछले दरवाजे से सदन में भेजेगी. विपक्ष कहीं से रास्ते में रोडा न बने, इसके लिये सभी सीटों पर अलग अलग चुनाव की व्यवस्था की गई है. तकनीकी रूप से भले ही भाजपा अपनी जीत तय करने में सफल हुई है पर सिद्वांतों के आधार पर उसको समझौते करने पड़े हैं. विरोधी पार्टी के सदस्यों ने अपनी सीटों से त्यागपत्र देकर भाजपा की सदस्यता भी ली है. इससे साफ है कि इस्तीफा योजना के अनुसार दिया गया था.

विपक्षी दलों का आरोप है कि भाजपा जनता के बीच सीधे चुनाव से बचना चाहती थी. इसलिये उसने विधानपरिषद के रास्ते अपने नेताओं को सदन में भेजना सरल समझा. भाजपा को अपने नेताओं की जीत पर भरोसा नहीं था. जिस वजह से वह जनता के बीच जाने से बच रहे हैं. यह एक तरह का दलबदल ही है. भाजपा के लिये यह शर्मनाक हो जाता अगर उसके 5 नेताओं में से एक भी चुनाव हार जाता. ऐसे में भाजपा ने विधान परिषद के रास्ते को ही बेहतर रास्ता समझा. उत्तर प्रदेश में अगर भाजपा को अपनी सरकार के कामकाज पर भरोसा होता तो वह सीधे चुनाव में जाकर विरोधी दलों के आरोपों को नकार देती.

भाजपा विधानसभा चुनाव से भले ही बच गई हो पर सांसद योगी आदित्यनाथ और केशव मौर्य के विधानपरिषद सदस्य चुने जाने के बाद लोकसभा की 2 सीटों गोरखपुर और फूलपुर में लोकसभा का उपचुनाव चुनाव कराना होगा. इसमें भाजपा की साख दांव पर लगी है. भाजपा इस बात का प्रयास करेगी कि विरोधी इन दोनों सीटों पर एकजुट होकर अपना प्रत्याशी न उतार सकें. फूलपुर लोकसभा सीट पर बसपा नेता मायावती के चुनाव लड़ने की बात सामने आई थी. जिस तरह से बिहार में विरोधी दलों की रैली से बसपा ने दूरी बनाई उससे साफ हो गया है कि बसपा नेता मायावती फूलपुर से चुनाव नहीं लड़ेंगी. भाजपा के लिये यह राहत वाली बात है. इसके बाद भी इन दो लोकसभा सीटों पर भाजपा की साख दांव पर लगेगी.

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