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इन खतरनाक खेलों को खेलने से पहले एक बार जरूर सोच लें

पूरी दुनिया में अलग अलग तरह के खेल खेले जाते हैं. इनमें से कुछ घर के अन्दर ही खेले जाते है जैसे शतरंज तो कुछ बड़े हाल में जैसे बौक्सिंग तो कुछ खेलों के लिए काफी बड़े मैदान या ट्रैक्स की जरुरत पड़ती है.

लेकिन इन सैंकड़ो खेलों में से कुछ खेल ऐसे भी होते हैं जो बहुत ही खतरनाक और जोखिम भरे होते हैं तो आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही खेल के बारे में जो दुनिया के सबसे खतरनाक खेलों में शुमार हैं.

बेस जंपिंग

यह खेल पूरी दुनिया के युवाओं में बहुत लोकप्रिय है, बेस जंपिंग में पैराशूटिंग भी शामिल रहती है और इस खेल में खिलाडी को ऊंचे पर्वत की चोटी या ऊंची बिल्डिंग से जम्प करना होता है. यह खेल सबसे खतरनाक खेलो में शुमार है और कई देशो ने तो इसके ऊपर प्रतिबन्ध भी लगाया हुआ है जिनके अमेरिका भी शामिल है.

पर्वतारोहण

पर्वतारोहण वास्तव में दुनिया के सबसे खतरनाक खेल में से एक है जिसमें अगले ही पल क्या हो जाए कुछ कहा नहीं जा सकता. अगर दूर से देखा जाए तो ऐसा लगता है की पर्वतारोहण में पर्वतारोही सिर्फ पहाड़ पर चढ़ता है लेकिन ऊंचे पहाड़ो पर चढ़ना एक अलग ही जोखिम भरा काम है और अचानक पैर फिसलना, रस्सी का टूटना, रस्सी को फसाने के स्थान का टूट जाना, बीच रास्ते में फंस जाना आदि अनेक जोखिम है.

वाइट-वाटर राफ्टिंग

वाटर राफ्टिंग पानी में खेले जाने वाला खेल है. कहने को तो यह खेल है लेकिन असल में यह बहुत ही जोखिम भरा और खतरनाक खेल है जिसमें थोड़ी सी गलती से बड़ी घटना दो सकती है. क्योंकि यह खेल तेज बहाव वाले पथरीले पानी में खेला जाता है और इसमें एक से एक खतरे लगातार आते ही रहते हैं.

बाइसिकल मोटोक्रास

बाइसिकल मोटोक्रास या BMX दुनिया के खतरनाक खेलों में से एक है. BMX रेसिंग गेम है जिसमें अचानक ही गहरी ढलाने, ब्रेकर्स, जम्प्स आदि होती है और प्रत्येक बाईकर्स अपने अनेक प्रतिद्वंदियों को हराकर इसमें विजेता बनना चाहता है. बाईकर्स आगे निकलने की होड़ में कई तरह के स्टंट करने से नहीं चुकते जो देखने में तो मनोरंजक लगते है लेकिन वास्तव में बहुत ही खतरनाक होते है .

सर्फिंग

सर्फिंग पानी में खेला जाने वाला शायद सबसे रोमांचक खेल है जिसमें पहले सर्फर को खुद ही सर्फिंग बोर्ड के साथ तैरते हुए बड़ी लहरों तक जाना पड़ता है जो कम से कम 20 फीट की हों. वैसे सर्फिंग का सबसे बड़ा रिकार्ड 100 फीट ऊंची लहरों पर सर्फिंग करने का है, जिसकी प्राइज मनी एक लाख डालर की थी.

स्ट्रीट ल्युज

स्ट्रीट ल्यूज में राइडर स्लेड के ऊपर लगभग लेटी हुई अवस्था में रहता है जिसे ल्यूज बोर्ड कहते हैं और ऊंची ढलानों से प्रतियोगी तेजी से फिसलते हुए निचे की और आते हैं जिसके कारण यह इस खेल का डेंजर लेवल बहुत ही हाई है. इस खेल में प्रतियोगी को अपने पैर ही ब्रेक की तरह प्रयोग करने पड़ता है जिससे बडी दुर्घटना होने की सम्भावना हमेशा रहती है.

बुल राइडिंग

अमूमन अमेरिका में खेले जाने वाल बुल राइडिंग खेल दुनिया के सबसे खतरनाक खेलो में शुमार है और सिर्फ इसे एक बार देख कर ही कोई भी जान सकता है की यह खेल दुनिया के सबसे खतरनाक खेलो में क्यों शामिल है. इस खेल में राइडर को एक बड़े बुल के ऊपर जितनी देर तक हो सके बैठना होता है और बुल, राइडर के अपने ऊपर बैठते ही उसे नीच गिराने की भरसक कोशिश करता है.

केव डाइविंग

केव डाइविंग दुनिया के सबसे खतरनाक और संवेदनशील खेलो के अंतर्गत आता है जिसमें भूमिगत जलीय सुरंगों में डाइविंग की जाती है. केव डाइविंग में बहुत ही योग्यता और बेहतरीन स्कूबा उपकरणों की जरूरत पड़ती है तथा इस खेल में और भी कई प्रकार के विशेष उपकरणों की भी जरूरत पड़ती है जो गहरी अंधेरी और पानी से भरी हुई गुफाओं के हालातो से निपटने के काम आते हैं.

हेली स्कीइंग

जैसा की नाम से ही जाहिर है की इस स्कीइंग में हेलीकाप्टर का भी प्रयोग होता है. हेली स्कीइंग में खिलाड़ी हेलीकाप्टर की सहायता से स्कीइंग करता है, जिसमे हेलीकाप्टर खिलाड़ी से एक निश्चित दूरी पर रहता है और उसकी हवा की सहायता से खिलाड़ी तेजी से स्कीइंग करता है.

स्कूबा डाइविंग

“स्कूबा” शब्द डाइवर द्वारा पानी के निचे सांस लेने वाले उपकरण के लिए प्रयोग किया जाता है. आमतौर पर स्कूबा डाइविंग सुनने में बहुत ही अच्छा लगता है लेकिन कई मायनो में यह बहुत खतरनाक भी है, जैसे अगर डाइवर तेजी से सतह की और आता है तो उसे एक जानलेवा बिमारी हो सकती है जिसे “डीकम्प्रेशन सिकनेस” कहते है जिसमे फेफड़ो का काम करना बंद कर देना, दिमाग का सोचना समझना बंद हो जाना, रीड की हड्डी में परेशानी आदि हो सकती है और इसके अलावा खतरनाक जलीय जन्तुओ का जानलेवा हमला भी एक अलग परेशानी है.

आधार कार्ड के डिटेल्स को अगर आपने किया है अपडेट, तो ऐसे करें आनलाइन चैक

आधार को इनकम टैक्स फाइल करने जैसे कई कामों में जरूरी कर दिया गया है. इसलिए इस बात का ध्यान रखें कि आधार कार्ड में जो भी डिटेल्स दी जाएं वह बिल्कुल ठीक होनी चाहिए. आधार कार्ड में अगर आपने अपनी डिटेल्स में कुछ परिवर्तन किया है तो इस प्रक्रिया को पूर्ण होने में लगभग 90 दिन का समय लग सकता है. यहां हम आपको बताते हैं कि कैसे आप अपडेट का स्टैटस घर बैठे चैक कर सकते हैं.

आपको बता दें कि आधार कार्ड में आनलाइन डिटेल्स अपडेट करने के लिए मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड होना जरूरी है. बिना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर के आप आधार कार्ड में कुछ भी आनलाइन अपडेट नहीं कर पाएंगे.

इसके लिए आधार की वेबसाइट uidai.gov.in के होम पेज पर आधार आनलाइन की सर्विस के अलग अलग विकल्प दिए गए हैं. यहां पर आपको पिंक कलर की पट्टी पर आधार अपडेट लिखा दिखाई देगा और इसके नीचे कई विकल्प दिए गए होंगे. इसमें सबसे नीचे (Check Status – Updation done Online) विकल्प दिखाई देगा.

इसके बाद इस लिंक पर क्लिक करें. क्लिक करते ही नया पेज खुल जाएगा. यहां आधार कार्ड का नंबर और अपडेट रिक्वेस्ट नंबर डाले. अपडेट रिक्वेस्ट नंबर तब मिलता है जब आधार में कुछ अपडेट करते हैं.

इसके बाद एक कैप्चा भी डालना होगा. यह सब डालने के बाद गेट स्टैटस पर क्लिक करना होगा.

इसके बाद मैसेज आएगा कि आपके द्वारा आधार में किए गए बदलाव हुए हैं या नहीं. अगर वह अपडेट नहीं हुआ होगा तो मैसेज आएगा कि अभी प्रक्रिया चल रही है.

आप कुछ दिन बाद इसे पुन: चैक कर डिटेल जान सकते हैं. अगर अभी भी अपडेशन नहीं हुआ है तो आपको 90 दिन तक का इंतजार करना होगा. अगर इसके लिए कोई शिकायत करना चाहते हैं तो आधार की वेबसाइट, टोल फ्री नंबर 1947 पर कर सकते हैं.

जीवन की मुसकान

हमारे घर के पास खाली पड़े प्लौट में एक डौगी ने बारिश के मौसम में 10 बच्चों को जन्म दिया. सुबह औफिस जाते समय पति ने मुझ से कहा, ‘‘जो टीन का पतरा हमारे पास रखा है, किसी से कह कर इन बच्चों के लिए छोटा सा आशियाना बनवा देना. अगर बारिश हुई तो ये बच नहीं पाएंगे.’’

मेरी दोनों बेटियां पशुप्रेमी हैं. लेकिन वे अपने स्कूल और कालेज गई थीं. शाम को एक अनजान लड़की, जो पहले भी कई स्ट्रीट डौग्स को खाना, दवाई वगैरा खिलाने हमारे महल्ले में आती रहती है, अपने भाई के साथ आई, और बच्चों की मां को टोस्ट खिलाने लगी. हम भी घर के बाहर खड़े थे.

बातोंबातों में मैं ने उस से कहा, ‘‘हम तो इन बच्चों के लिए घर बनाना चाहते थे, मगर कैसे क्या करें, हमारे पास तो टीन का एक पतरा भर है.’’ तो उस ने तुरंत कहा, ‘‘आंटीजी, मेरे पास लोहे का एक स्टैंड है. उस पर टीन को रख कर हम इन बच्चों के लिए घर बना सकते हैं. मैं, बस, कुछ देर में वापस आती हूं.’’

रात में 8 बजे वह अपने भाई व 3 दोस्तों को ले कर आई. मैं, मेरे पति व बेटी भी बाहर उन की मदद के लिए निकल आए. प्लौट में सुरक्षित ऊंची जगह के ऊपर स्टैंड रख कर उसे टिन के पतरे से ढक दिया गया.

सामने के घर से एक पड़ोसी ने अपनी कार का पुराना प्लास्टिक कवर दे दिया जिस से पूरा घर ढक गया और हम सब ने राहत की सांस ली.

एक पाठिका

*

वर्ष 2008 में मेरे पति के हृदय की बाईपास सर्जरी अपोलो अस्पताल, दिल्ली में हुई थी. 10 दिनों तक अस्पताल में रहने के बाद एक सप्ताह बाहर रहना था, उस के बाद फिर दिखाना था. उस के बाद छुट्टी मिलनी थी. अस्पताल के पास सरिता विहार में प्रतिदिन के हिसाब से एक सप्ताह के लिए कमरा और रसोई किराए पर मिल गए.

हम लोग तो बाहर का खा लेते पर इन के लिए खाने की व्यवस्था करनी थी. अस्पताल में ही एक सज्जन मिल गए जो दक्षिण दिल्ली में रहते थे. उन्होंने हमें अपनी गाड़ी से सरिता विहार पहुंचाया तथा हमारे लिए गैसबरतन आदि की व्यवस्था की और इन की सेवा के लिए एक नर्स भी दिलवा दी.

हमारे प्रवास के दौरान वे बराबर हालचाल पूछते रहे. आज भी उन्हें याद कर के हमारा सिर श्रद्धा से झुक जाता है.

मनोरमा अग्रवाल

सफर अनजाना

एकाएक मुझे दिल्ली जाना पड़ा. मेरे पति जा नहीं पा रहे थे. उन्होंने शताब्दी ऐक्सप्रैस के एसी चेयरकार में मुझे और बेटी को बिठा दिया. गाड़ी चलने पर मैं ने मुड़ कर देखा कि डब्बे में लगभग 20 युवा लड़कियां बकबक कर रही हैं.

मुझे देख कर उन में से एक बोली, ‘‘हैलो गाइज, हम लोगों के साथ एक दीदी और एक बेबी भी बैठी हुई हैं. वे मुड़मुड़ कर आश्चर्य से हमें देख रही हैं.’’

‘‘तो बोलो न, मुड़मुड़ कर न देख, मुड़मुड़ कर,’’ दूसरी बोली.

पहली मुझ से बोली, ‘‘दीदी, हम लोग एमबीए फाइनैंस के फाइनल ईयर की छात्राएं हैं और दिल्ली एक कौन्फ्रैंस व कंसल्टैंसी के लिए जा रही हैं.’’

मैं ने कहा, ‘‘विश यू औल, द बैस्ट.’’ फिर एक गीत की पंक्ति को सुधार कर मैं बोली, ‘‘इतनी शक्ति इन्हें देना दाता, मन का विश्वास कम हो न जाए.’’

इतने में वे सब एकसाथ बोलीं, ‘‘थैंक्यू दीदी, थैंक्यू.’’

फिर उन्होंने निर्णय किया कि उन में से कुछ कैंपस सेलैक्शन के सदस्य हो जाएं और शेष का इंटरव्यू लेने की रिहर्सल की जाए. यह रिहर्सल करीब 2 घंटे चली.

मैं ने कहा, ‘‘तुम सब थक गई होंगी. मीठी पूड़ी चलेगी, मेरे पास हैं तुम लोगों के लिए.’’ वे सब खुशी से उछलने लगीं, बोलीं, ‘‘ग्रेट दीदी, गे्रट.’’

इस तरह अनजाना सफर, अपना सा हो कर समाप्त हुआ.

जया श्रीवास्तव

*

मैं अपने दोनों बेटों के साथ लखनऊ से देहरादून वापस जा रही थी. हरिद्वार स्टेशन पर गाड़ी तकरीबन आधा घंटा रुकती थी.

हरिद्वार स्टेशन पर बंदरों का बड़ा प्रकोप रहता था. हम खिड़की से बाहर देख ही रहे थे कि तभी एक बंदर डब्बे में घुस आया. मैं अपने दोनों बच्चों को अपने से चिपका कर बैठ गई.

बंदर को खाने को तो कुछ मिला नहीं, मेरी एक सैंडिल ही उठा वह बाहर की तरफ भागा और प्लेटफौर्म के शैड में ऊंचाई पर जा कर बैठ गया. यह देख मैं ने शोर मचाया कि शोर सुन वह मेरी सैंडिल नीचे फेंक दे.

तभी एक सज्जन ने कहा कि ऐसे तो वह कभी सैंडल नहीं छोड़ेगा. फिर उन्होंने अपने झोले से एक केला निकाल बंदर को दिखाया. पर यह क्या, बंदर तो मेरी सैंडिल वहीं छोड़, नीचे उतर आया. मेरी समस्या तो वही रही.

दीपशिखा त्यागी

हमारी बेड़ियां

मेरी करीबी रिश्तेदार माया महज 42 वर्ष की आयु में ही विधवा हो गई थी. उस का पति बेरोजगार था. माया प्राइवेट नौकरी करती थी. वहां 5 दिनों की अनुपस्थिति में नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता था. सो, उस ने तेरहवीं के दूसरे दिन ही नौकरी जौइन कर ली थी.

उस के 2 बच्चे थे. उसे पति के जाने के दुख से ज्यादा कमाने की चिंता थी. उसे समाज का बहुत विरोध सहना पड़ा, कटाक्ष का सामना करना पड़ा. परिवार का कहना था कि उसे विधवा के लिबास में रहना चाहिए. किसी ने यह नहीं सोचा कि उस की उम्र क्या है. वह सलीकेदार लिबास में रहती है, रंगीन कपड़े पहनती है घूमतीफिरती है तो इस पर सब का विरोध है लेकिन कोई यह क्यों नहीं देखता कि वह अपनी जिम्मेदारी भी तो निभा रही है.

माया बहुत खुशमिजाज है. हर बात में हर घटना में सहज रहना, सदा सामान्य बने रहना उस का स्वभाव है. पहले उस का यह स्वभाव सब के लिए मिसाल था और अब यही स्वभाव दुर्गुण इसलिए कि उसे पति की मृत्यु का गम नहीं, हर वक्त हंसती रहती है. जबकि ये उस के गुण हैं कि उस ने इस अवस्था को बहुत सहज रूप से ले कर, बिना किसी को परेशान किए खुद ही इस अवस्था से बाहर निकल कर सामान्य रूप से काम कर रही है.

सवाल है कि क्या हम सचमुच में आधुनिक हो चलें हैं या यह केवल बनावटीपन है? दरअसल, ये हमारी मानसिक बेडि़यां हैं.

कल्पना मिश्रा

*

मैं शासकीय स्कूल में शिक्षिका के पद पर कार्यरत हूं. हमारी कक्षा में पढ़ाई में कुशाग्र दिव्या नाम की छात्रा काफी दिनों से अनुपस्थित थी.

मैं ने एक दिन स्कूल की छुट्टी के समय उस के घर जा कर पता किया तो पता चला कि उसे पीलिया है. मेरी नजर उस के गले में पड़े धागे, हाथ में बंधी तावीज पर पड़ी. वह काफी कमजोर लग रही थी.

मैं ने उस के मातापिता से उस की बीमारी के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, ‘‘हमारे समाज में पीलिया डाक्टर के इलाज से नहीं, बल्कि ओझा बाबा की दवा से ठीक होता है. ये तेल और तावीज इसे कुछ समय में ठीक कर देंगे.’’

मेरे समझाने पर वे डाक्टर के पास उसे ले गए. वहां पता चला कि उस के ब्लड प्लेट्लेट्स मात्र 5 रह गए थे. वह जबरदस्त एनीमिया की शिकार हो चुकी थी. बड़ी मुश्किल से उस बच्ची की जान बचाई जा सकी. व्यर्थ के अंधविश्वास के चक्कर में एक प्रतिभावान छात्रा की जान जातेजाते बची.

रूपल राठौर

 

भारतीय जनता पार्टी और नरेंद्र मोदी से मुक्ति चाहतीं महबूबा

आमतौर पर भाजपा और नरेंद्र मोदी की शान में कसीदे गढ़ती रहने वाली जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की जबां पर दिल की बात आ ही गई कि उन की नजर में इंदिरा गांधी ही इंडिया थीं. इस के पहले वे अपनी तरफ से भाजपा को नाराज करने की पूरी कोशिश करते धारा 370 से छेड़छाड़ न करने की धौंस भी दे चुकी थीं कि अगर संविधान के अनुच्छेद 35ए से छेड़छाड़ की गई तो कश्मीर में कोई तिरंगा उठाने वाला भी नहीं मिलेगा.

महबूबा अब भाजपा के सहयोग से मुक्ति चाहती हैं पर भाजपा इन गंभीर बयानों पर भी गौर नहीं कर रही, तो महबूबा को अपना खिसकता वोटबैंक देखते काफी परेशानी हो रही है. अब कोई नया धमाका वे भाजपा को नाराज करने का कर डालें तो बात कतई हैरत की नहीं होगी.

गुलजार की कशमकश

साहित्य के क्षेत्र में गुलजार का नाम किसी पहचान का मुहताज नहीं है जो आमतौर पर चलताऊ जनवादी और परिपक्व रूमानी गीत लिखने के लिए जाने जाते हैं. गुलजार घोषित तौर पर कोई साहित्यिक मठ नहीं चलाते और न ही उन पर किसी पंथ या विचारधारा का अनुयायी या प्रतिनिधि होने का आरोप कभी लगा है. बीते दिनों वे बेंगलुरु के एक कवि सम्मेलन में थे. इस के इतर उन्होंने एक ध्यान खींचने वाली बात

यह कही कि देश ने सांस्कृतिक नहीं, राजनीतिक आजादी हासिल की है. गुलजार की मंशा समझ से परे उस वक्त और हो गई जब उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अगर कालेजों में ‘पैराडाइज लास्ट’ जैसी कृतियों को पढ़ाया जा सकता है तो कालिदास, युधिष्ठिर और द्रौपदी को क्यों नहीं पढ़ाया जा सकता. ये कृतियां हमारी संस्कृति के ज्यादा नजदीक हैं. इकलौती अच्छी बात यह रही कि गुलजार ने वेदपुराणों को पाठ्यक्रम में शामिल करने की वकालत नहीं की.

चंदा नहीं गुरुदक्षिणा : हर साल आरएसएस को मिलता है इतना पैसा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बढ़ते खर्चों का हिसाब मांगने वालों का मुंह बंद करने के लिए अब उसे मिलने वाले चंदे की गिनती का काम शुरू हो गया है. शुरुआती दौर में लोगों को इतना पता चला कि संघ को वर्ष 1928 में महज 84 रुपए मिले थे और नागपुर स्थित उस का मुख्यालय भी एक व्यापारी के दान के 6 हजार रुपए से वर्ष 1937 में बना था.

संघ के एक वरिष्ठ प्रचारक एम जी वैद्य की बातों से यह तो साफ जाहिर हुआ कि चंदे की वित्तीय वर्ष 2016-17 की राशि करोड़ों में है. लेकिन वे कहते हैं कि यह चंदा नहीं, बल्कि दक्षिणा है.

गौरतलब है कि आरएसएस हर साल गुरुपूर्णिमा से ले कर रक्षाबंधन तक यह चंदा, दान या गुरुदक्षिणा जो भी है, लेता है. अब तो हर कोई संघ को यह दक्षिणा देना चाहता है जिस से उस की बिगड़ी सुधरे और हिंदुत्व का मिशन परवान चढ़ता रहे. इस चंदे में देखने लायक इकलौती बात यह होगी कि इस की राशि ब्रैंडेड मंदिरों के चढ़ावे से कम निकलती है कि ज्यादा.

पुरस्कारों के बोझ तले दबी नजर आई ‘बेगम जान’

विद्या बालन की अगली फिल्म ‘तुम्हारी सुलु’ का पहला पोस्टर रिलीज हो गया है. इसमें विद्या का चेहरा छिपा हुआ है और वह पुरस्कारों के बोझ तले दबी नजर आ रही हैं. पोस्टर में दिखाए गए गिफ्ट्स विद्या के किरदार ने कान्टेस्ट में भाग लेकर जीते हैं, यानी सुलु काफी इंटेलीजेंट हैं और वह हर जगह मुकाबले के लिए तैयार रहती हैं. विद्या के हाथ में सब्जी का थैला और किचन का सामान जैसे मिक्सर-ग्राइनर, कुकवेयर, प्रेशर कुकर है.

फिल्म में विद्या के किरदार का नाम सुलोचना है जो की फिल्म के टाइटल ‘सुलु’ में भी नजर आता है. फिल्म तुम्हारी सुलू में विद्या बालन की भूमिका एक चुलबुली महिला की है जो रेडियो जाकी है और रात का शो करती हैं. ‘तुम्हारी सुलु’ को यूथ और फैमिली ओरियंटेड बताया जा रहा है. फिल्म में मानव कौल की भी मुख्य भूमिका है, जो विद्या के पति बने हैं.

इस कामेडी फिल्म में विद्या और मानव कौल के साथ नेहा धूपिया और आर जे मलिष्का नजर आएंगी. ये एक कामिक फिल्म है जिसका निर्देशन सुरेश त्रिवेणी ने किया है. ये फिल्म 1 दिसम्बर को रिलीज होगी.

मुंबई में हुए एक कार्यक्रम के दौरान विद्या ने बताया कि उनकी फिल्म तुम्हारी सुलु में श्रीदेवी का गाना ‘हवा-हवाई’ एक ट्रिब्यूट की तरह है. इस गाने में विद्या बालन और नेहा धूपिया हैं. विद्या ने बताया कि फिल्म की शूटिंग पूरी हो गई है और पोस्ट प्रोडक्शन शुरू है.

पोस्टर में विद्या बालन का अंदाज फिल्म को देखने की बेताबी बढ़ा रहा है. ‘तुम्हारी सुलु’ विद्या बालन के लिए काफी जरूरी फिल्म है. उनकी फिल्म ‘बेगम जान’ को तारीफ तो मिली, लेकिन यह फिल्म बाक्स आफिस पर कोई खास कमाल नहीं दिखा सकी. लेकिन इस कामेडी फिल्म के साथ विद्या हिट की उम्मीद कर रही हैं.

अगर आपका फोन भी बार-बार हो रहा है हैंग, तो ऐसे पाएं छुटकारा

आज बाजार में यूजर्स की सुविधा के लिए हर तरह के फीचर्स वाले स्मार्टफोन मौजूद हैं. जहां एक तरफ मल्टीटास्किंग काम के लिए फोन में 6 जीबी तक रैम दी जी रही है. वहीं, 5000 एमएएच तक की बैटरी वाले स्मार्टफोन्स ने बार-बार फोन चार्ज करने के झंझट को काफी हद तक खत्म कर दिया है. इसके बावजूद भी यूजर्स को फोन हैंग जैसी समस्या झेलनी पड़ती है. आपके स्मार्टफोन का बार-बार हैंग होना एक बड़ी समस्या है.

मोबाइल हैंग होने का कारण

इसका सबसे बड़ा कारण फोन की इंटरनल मैमोरी और रैम का कम होना हो सकता है. इसके अलावा फोन का हार्डवेयर अच्‍छा नहीं होने पर भी कुछ समय बाद मोबाइल हैंग होने लगता है.

ऐसा फोन की स्पीड कम होने के चलते आपको मैसेज टाइप करने से लेकर ऐप खोलने तक के हर एक्शन के लिए इंतजार करना पड़ता है. इसके कई कारण हो सकते हैं. जैसे मैमोरी फुल हो जाना या फोन में वायरस का आ जाना.

इंटरनेट सर्फिंग करते वक्त बीच में कोई काल आने पर या कई बार ढेर सारी मोबाइल एप्लिकेशंस खोलने पर भी अक्सर मोबाइल हैंग हो जाते हैं.

क्या करें

सबसे पहले बैकग्राउंड में चलने वाली एप्लिकेशंस को बंद कर दें. ऐसा करने से फोन की रैम को थोड़ा स्पेस मिल जाता है.

अपने फोन को स्‍विच आफ करने की कोशिश करें. अगर वो स्‍विच आफ हो जाता है तो इससे आपके फोन में सेव डाटा सुरक्षित रहेगा.

स्‍विच आफ होने के बाद फोन के बैक पैनल को खोलें और कुछ देर के लिए उसमें से बैटरी बाहर निकाल लें.

अपने स्मार्टफोन को कैसे रखें वायरस से सुरक्षित

बैटरी निकालने के बाद फोन में दी गई पावर बटन को स्‍विच आफ करें इससे फोन में सेव बैटरी पावर खत्‍म हो जाएगी. अब फोन में बैटरी और बैक कवर लगाकर उसे आन करें. फोन आन करने के बाद वो दोबारा हैंग नहीं होता.

अगर ये समस्या फिर से आती है तो आपको अपने फोन की इंटरनल मैमोरी को थोड़ा खाली कर देना चाहिए, साथ ही कैश फाइल्स भी‌ डिलिट करते रहना चाहिए क्‍योंकि कभी-कभी फोन की इंटरनल मेमोरी फुल होने पर भी हैंडसेट हैंग होने लगता है.

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