साहित्य के क्षेत्र में गुलजार का नाम किसी पहचान का मुहताज नहीं है जो आमतौर पर चलताऊ जनवादी और परिपक्व रूमानी गीत लिखने के लिए जाने जाते हैं. गुलजार घोषित तौर पर कोई साहित्यिक मठ नहीं चलाते और न ही उन पर किसी पंथ या विचारधारा का अनुयायी या प्रतिनिधि होने का आरोप कभी लगा है. बीते दिनों वे बेंगलुरु के एक कवि सम्मेलन में थे. इस के इतर उन्होंने एक ध्यान खींचने वाली बात

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