Download App

रिंग में अक्सर सड़ा हुआ कचरा लेकर आता था ये रेसलर

8 सितंबर 1964 को रेवन का जन्म अमेरिका में हुआ था. डब्लू सी डब्लू (WCW), टी एन ए (TNA) और डब्लू डब्लू ई (WWE ) में स्टार रेसलर रहे रेवन को अक्सर लोग सनकी कहते थे. आज रेवन के 53वां बर्थडे है और आज के इस मौके पर हम आपको बता रहे हैं उनकी लाइफ से जुड़ी कुछ खास बाते.

सड़ा हुआ कचरा रिंग में ले आते थे

वह अक्सर अपने अजीबो गरीब बर्ताव और कपड़ो की वजह से चर्चा में रहते थे. कई बार वे सड़ा हुआ कचरा लेकर रिंग में आ जाते थे और अपोनेंट को गंदगी लगा देते थे. एक दौर ऐसा था जब रेवन एक फाइट के बाद गायब हो गए थे और ऐसी अफवाह थी कि उनकी मौत हो गई है. लेकिन रेवन ने अंडरटेकर की तरह ही डब्लू डब्लू ई में दोबारा वापसी की.

डब्लू डब्लू ई के खिलाफ किया था केस

रेवन डब्लू डब्लू ई द्वारा रेसलर्स को दी जा रही सुविधाओं से नाखुश थे. इसलिए सनक में एक बार रेवन ने डब्लू डब्लू ई के ही खिलाफ केस दर्ज करा दिया था.

रेवन से डरते थे अंडरटेकर

डब्लू डब्लू ई के सबसे खतरनाक रेसलर माने जाने वाले डैडमैन ‘द अंडरटेकर’ को भी एक रेसलर से डर लगता था. ये रेसलर था रेवन. रेवन के खतरनाक लुक्स गुस्से से लाल आंखों से ज्यादा उनकी अजीबो गरीब हरकतों से कई रेसलर खौफ खाते थे जिसमें अंडरटेकर भी शामिल थे.

रेवन के फेवरेट हैं अंडरटेकर

रिटायरमेंट के बाद रेवन ने एक खुलासा करते हुए कहा था कि अंडरटेकर मुझसे डरते थे. हालांकि, बाद में अंडरटेकर का ये डर खत्म हो गया और उन्होंने रेवन से बुरी तरह बदला भी लिया था. रेवन कहते हैं कि इन सब के बावजूद अंडरटेकर मेरे फेवरेट हैं.

आपके फेसबुक कमेंट्स भी दिखेंगे रंग-बिरंगे

पिछले महीने फेसबुक ने स्टेटस में कलर बैकग्राउंड के औप्शन को जोड़ा था, जिसे पूरी दुनिया के यूजर्स द्वारा मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली थी. अब फेसबुक अपने इस फीचर को अपने कमेंट्स में भी जोड़ने की तैयारी कर रहा है.

हाल ही में इसे कुछ लोगों द्वारा टेस्टिंग के दौरान उपयोग किया गया. इसमें कलरफुल बैकग्राउंड वाले स्टेटस की तरह ही कलरफुल बैकग्राउंड वाले कमेंट्स भी पोस्ट किए जा सकेंगे. इस फीचर में आपके कमेंट्स एक रंग-बिरंगे बबल में नजर आएंगे. फिलहाल कमेंट्स सफेद बैकग्राउंड पर ही नजर आते हैं.

द नेक्स्ट वेब में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक कुछ ही यूजरों को कलरफुल कमेंट करने का विकल्प मिला है. बैकग्राउंड का कलर बदलकर आप अपने स्टेटस से मैच कर सकते हैं.

कंपनी इस फीचर को कुछ डिवाइस पर उतार सकती है लेकिन इस बारे में अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. फेसबुक ने हाल ही में इंस्टेंट मेसेजिंग ऐप वाट्सऐप पर भी कलरफुल बैकग्राउंड पर टेक्स्ट स्टेटस अपडेट डालने का फीचर जारी किया था.

इस रिपोर्ट के मुताबिक, फेसबुक के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘हम हमेशा लोगों को जोड़ने और उनके बीच संवाद स्थापित करने के नए तरीके खोजते रहते हैं, इसलिए हम कमेंट्स में कुछ नए फीचरों की टेस्टिंग कर रहे हैं.’

फेसबुक पर आ रही है इंस्टाग्राम स्टोरीज

फेसबुक का स्टोरीज फीचर जल्द इंस्टाग्राम के साथ ही मर्ज किया जा सकता है. मतलब, जो स्टोरी आप इंस्टाग्राम पर डालेंगे, वह फेसबुक पर डालने का औप्शन भी आपको मिलेगा. हालांकि, इंस्टाग्राम के प्रवक्ता ने फिलहाल इस मर्जर पर खुलकर कोई बात नहीं की है. लेकिन, ऐसा इसलिए संभव माना जा रहा है क्योंकि फेसबुक पर स्टोरीज का इस्तेमाल बहुत ज्यादा नहीं हो रहा.

आखिर क्या करते हैं बौलीवुड के मशहूर खलनायकों के बेटे

अगर हिन्दी सिनेमा की बात करें तो हीरो को लोगों की नजर में हीरो बनाने में विलेन का सबसे बड़ा हाथ होता है. विलेन ना हो तो हीरो किससे लड़ेगा, किसकी बेटी से प्यार करेगा या किसकी दौलत गरीबों में बांटेगा. 80 और 90 के दशक में कुछ ऐसे ही विलेन थे जिनके बच्चे अब बड़े हो गये हैं.

बौलीवुड के सबसे बड़े विलेन थे अमजद खान जो गब्बर बन लोगों को डराता था और आज भी गब्बर का नाम लोगों के जुबान पर बातों बातों में आ जाता है.  फिर आया मुगैम्बो, मुगैम्बो खुश हुआ उनका ये डायलोग काफी चर्चित है. शाकाल और भी बहुत से. चलिए आज आपको उन विलेन के बेटों को दिखाते हैं शायद इस बारे में आप नहीं जानते होंगे.

अमरीश पुरी और राजीव पुरी

अमरीश पुरी सभी विलेन में सबसे यादगार और खूंखार विलेन थे. इन्होंने मिस्टर इंडिया, दामिनी, शहंशाह, जान, तहलका, गदर, कोयला, करन अर्जुन, बादशाह, राम लखन, घायल, ऐलान, विरासत, ताल जैसी सुपरहिट फिल्मों में विलेन के किरदार को निभाया और उसे अमर कर दिया. लेकिन इनके बेटे राजीव पुरी ने बिजनेस की राह चुनी. क्योकि उन्हें फिल्मों में कोई खास दिलचस्पी नहीं थी.  इसलिये इन्होंने एक बिजनेस मैन बनने का रास्ता चुना. आज राजीव एक सफल बिजनेस मैन हैं.

रजा मुराद और अली मुराद

रजा मुराद मोहरा, राम तेरी गंगा मैली, गुलामी, हीना, राम लखन, जोधा अखबर, बाजीराव मस्तानी, आंखे, फूल और कांटे, नमक हराम जैसी सुपरहिट फिल्मों में काम कर चुके हैं. इनके बेटे का नाम अली मुराद है. रजा मुराद के काम की तारीफ फिल्म प्रेम रोग में खूब हुई थी. एक प्रेस वार्ता में इन्होंने बताया था की उनका बेटा अभी लंडन में एक थियेटर स्कूल में पढ़ाई कर रहा है, वहां से आने के बाद वह फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ेगा.

गुलशन ग्रोवर और संजय ग्रोवर

बैड मैन के नाम से मशहूर गुलशन ग्रोवर के बेटे बहुत ही शांत स्वभाव के हैं. उनके बेटे का नाम संजय ग्रोवर है. गुलशन ग्रोवर ने खिलाड़ियों का खिलाड़ी, राम लखन, विजयपथ, मोहरा, गैगस्टर, यमराज, दिलवाले, बुलेट राजा, हेरा फेरी, राजा बाबू, सदमा, लज्जा, यश बौस, अनाड़ी, 16 दिसम्बर, मशाल, अवतार जैसी फिल्में कर चुके हैं. खबरें हैं कि संजय कुछ समय बाद किसी फिल्म से डेब्यू करने वाले हैं.

शक्ति कपूर और सिद्धांत कपूर

आआऊऊ ललीता  इस डायलौग से फेमस हुए शक्ति कपूर ने बौलीवुड में विलेन के रूप में कदम रखा था. उनके बेटे का नाम सिद्धांत है. और बेटी का नाम श्रद्धा कपूर है. शक्ति कपूर ने अंदाज अपना-अपना, राजा बाबू, चुप-चपुके, चालबाज, कूली नम्बर वन, जांबाज, बाप नम्बरी बेटा दस नम्बरी, आंखे, भाई, मुकाबला, लाडला, नसीब जैसी फिल्मों में काम किया है. सिद्धांत भी काफी अच्छे एक्टर हैं. इन्होने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत भूल भूलैया, भागंमभाग जैसे फिल्मों से कि थी. कुछ  समय पहले आऐ फल्म शूटआउट ऐट वडाला में विलेन के रोल में नजर आऐ थे. जिसको दर्शको द्वारा काफी सराहा गया.

अमजद खान और शादाब खान

फिल्म शोले के गब्बर को तो कोई भूल ही नहीं सकता. फिल्म में गब्बर जैसे विलेन का किरदार निभाने वाले अमजद खान 90 के दशक में ही दुनिया को अलविदा कर चुके हैं. इनके बेटे ने फिल्मों में कोशिश की लेकिन नाकाम रहे. अमजद खान ने शोले, याराना, गंगा की सौगंध, कालिया, मुकद्दर का सिकंदर, सत्ते पे सत्ता, नसीब, चमेली की शादी, राम बलराम, मिस्टर नटवरलाल, सुहाग, नास्तिक, सम्राट, चरस, दौलत, लूटमार जैसी सुपरहिट फिल्मों में काम किया.

मैं गलत आदमी का साथ नहीं देती : उर्वशी शर्मा

फिल्म ‘नकाब’ से अभिनय के क्षेत्र में कदम रखने वाली मौडल और अभिनेत्री उर्वशी शर्मा दिल्ली की रहने वाली हैं. उन्होंने ‘नकाब’, ‘खट्टामीठा’, ‘आक्रोश’ आदि कई फिल्मों व टीवी शोज और विज्ञापनों में काम किया है. 2005 में वे मुंबई आईं और कुछ समय बाद उन्होंने अपने बौयफ्रैंड निर्माता और ऐक्टर सचिन जोशी से शादी कर ली.

काम से थोड़े दिनों के लिए उर्वशी ने बे्रक ले लिया और फिर ‘फियर फैक्टर’ शो में आईं. वे एक बच्चे की मां हैं और अब एक धारावाहिक ‘एक मां जो लाखों के लिए बनी अम्मा’ में जीनत की मुख्य भूमिका निभा रही हैं.

पेश हैं उन से हुई बातचीत के खास अंश :

इस शो में आने की प्रेरणा कैसे मिली?

पहली बार जब निर्देशक फरहान ने मुझे कहानी सुनाई और कहा कि शो की शूटिंग हैदराबाद में होगी. इस दौरान मुझे वहीं रहना पड़ेगा. एक बार तो मुझे लगा कि वे मेरा टाइम वेस्ट कर रहे हैं.

मैं मना करने वाली थी, क्योंकि परिवार छोड़ कर वहां जाना मेरे लिए आसान नहीं था, लेकिन मेरे पति ने जब स्क्रिप्ट पढ़ी तो उन्होंने कहा कि तुम्हें एक अच्छा चरित्र करने को मिल रहा है. यह एक ड्रीम प्रोजैक्ट है, इसलिए तुम इसे स्वीकार कर लो. बस, मैं ने फरहान का औफर स्वीकार कर लिया.

इस में कितना होमवर्क किया?

मेरे लिए इस में होमवर्क है भी और नहीं भी. यह एक आम औरत की कहानी है, जिस का पति अगर उसे निकाल दे, तो वह क्या करेगी जबकि उस के पास एक बच्चा भी है.

अपने और अपने बच्चे के लिए हर औरत किसी भी परिस्थिति से लड़ सकती है, बस यही अभिनय करना था, इसलिए कोई रिसर्च नहीं करनी पड़ी.

लेकिन हां, यहां की भाषा, रहनसहन, कपड़े कैसे पहनने हैं आदि चीजें सीखनी पड़ीं, क्योंकि यह चरित्र एक मुसलिम औरत का है और मैं तो पंजाबी हूं. किसी रोल मौडल को फौलो नहीं करना था.

इस में अभिनय करने में लेखक और निर्देशक ने मेरा भरपूर साथ दिया.

आप ने इतनी जल्दी शादी कर कैरियर पर बे्रक क्यों लगा दिया?

यह मेरी प्रायोरिटी थी. मैं कम उम्र में शादी करना चाहती थी. समय रहते अगर शादी न की जाए तो उस पर बे्रक लग जाता है. मुझे सचिन मिले, हम दोनों में प्यार हुआ और फिर हम ने शादी कर ली.

अब मैं जो चाहूं कर सकती हूं.

परिवार के साथ काम कैसे करती हैं? पति का कितना सहयोग मिलता है?

मैं ने अपनी मम्मी को अपने पास बुला रखा है. वे पूरा घर मैनेज कर लेती हैं. साथ ही, हैदराबाद में मेरा घर है, इसलिए कोई खास परेशानी नहीं है. पति का काफी सहयोग है.

उन्होंने ही काम करने के लिए मुझे प्रेरित किया. अब वे ‘बेबी सिटिंग’ कर रहे हैं. जब वे काम करते हैं तब मैं ‘बेबी सिटिंग’ करती हूं.

रीयल लाइफ में आप अन्याय के विरुद्ध कितना लड़ती हैं? क्या कभी आप के साथ कुछ ऐसी घटना घटी?

रीयल लाइफ में अन्याय के खिलाफ मैं कुछ भी कर सकती हूं. मेरे साथ कई बार ऐसी घटनाएं घटी हैं. सिरफिरे लड़के जो टाइमपास करने के लिए किसी को देख कर कमैंट पास करते हैं उन्हें मैं ने पकड़ कर मारा है.

स्कूल टाइम में जब मैं और मेरी बहन स्कूल जाती थीं तब एक लड़का हमें रोज फौलो करता था. हम दोनों बहनें तकरीबन एकजैसी दिखती हैं, इसलिए कभी वह मुझे फौलो करता था तो कभी मेरी बहन को. हम ने उसे समझाया कि ऐसा करना छोड़ दो, यह हमें पसंद नहीं.

वह हमारे घर तक आ गया, क्योंकि उसे फ्रैंडशिप करनी थी. फिर हम ने पुलिस में उस की रिपोर्ट लिखवाई. पुलिस वाले सादी पोशाक में आए और उसे पकड़ लिया. उस के बाद वह कभी हमारे पीछे नहीं आया.

इस किरदार की चुनौती क्या है?

इस में शूटिंग करना बहुत चैलेंजिंग था. 50 डिगरी तापमान में ऐक्टिंग करना बहुत मुश्किल था. जब संवाद बोले जाते थे तो फैन बंद करना पड़ता था.

इस धारावाहिक में सारे गहने आप के हैं. ऐसा क्यों? रीयल लाइफ में आप कितनी फैशनेबल हैं?

मैं हमेशा डायमंड पहनती हूं. सोना नहीं पहनती. मुझे आर्टिफिशियल ज्वैलरी से एलर्जी है. फैशन मेरे लिए आरामदायक होना चाहिए, मैं हर रंग पहनती हूं, लेकिन सफेद रंग मुझे ज्यादा पसंद है.

आज महिलाएं बहुत आगे बढ़ने के बावजूद प्रताडि़त हो रही हैं. उन के लिए क्या संदेश है?

महिलाओं को समझना है कि जितना परिवार के लिए पुरुष जरूरी है उतनी ही महिला भी है. अगर हम उत्पीड़न सहेंगे तो बच्चे भी यही सीखेंगे.

सहना भी उतना ही गलत है जितना कि जुर्म करना. मेरे पति इस बात का पूरा समर्थन करते हैं. वे मेरे हर काम को आगे बढ़ाते हैं. गलत आदमी का मैं कभी साथ नहीं देती.

किदांबी श्रीकांत : बैडमिंटन जगत का नया सितारा

कमाल करोगे, तो चर्चा में रहोगे. चीनियों के दबदबे वाले बैडमिंटन खेल में भारतीय शटलर प्रकाश पादुकोण ने 80 के दशक में कभी अपना सिक्का जमाया था. वे औल इंगलैंड चैंपियनशिप का मैंस सिंगल्स खिताब जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने थे. लेकिन दुख की बात है कि इस के इतने साल बाद किसी भारतीय पुरुष खिलाड़ी ने इंटरनैशनल लैवल पर कोई खास कारनामा नहीं दिखाया.

पर अब लगता है कि 24 साल के युवा बैडमिंटन खिलाड़ी किदांबी श्रीकांत प्रकाश पादुकोण की बनाई राह पर चल पड़े हैं. साल 2017 को अगर उन के खेल जीवन का सुनहरा साल कहें, तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी.

किदांबी श्रीकांत ने 18 जून, 2017 को इंडोनेशिया ओपन टूर्नामैंट जीतने के महज 7 दिनों बाद 25 जून, 2017 को आस्ट्रेलिया ओपन सुपर सीरीज पर भी अपना कब्जा जमाया. इस से पहले वे अप्रैल 2017 में सिंगापुर ओपन टूर्नामैंट के फाइनल मुकाबले में भी पहुंचे थे, लेकिन वहां अपने ही भारतीय साथी खिलाड़ी सांईं प्रणीत से हार गए थे.

वैसे अब यह कारनामा करने के बाद भारत के अग्रणी पुरुष बैडमिंटन खिलाड़ी किदांबी श्रीकांत लगातार 2 सुपर सीरीज खिताब जीतने वाले पहले पुरुष खिलाड़ी बन गए हैं. यही नहीं, वे यह उपलब्धि हासिल करने वाले दुनिया के महज छठे बैडमिंटन खिलाड़ी हैं.

यकीनन, इस तरह की कामयाबी से किदांबी श्रीकांत का कद भारतीय बैडमिंटन जगत में रातोंरात ऊंचा हो गया है. 7 फरवरी, 1993 को आंध्र प्रदेश के गुंटूर में जन्मे इस खिलाड़ी के पिता का नाम के वी एस कृष्णा और माता का नाम राधा है. श्रीकांत के बड़े भाई नंदा गोपाल भी एक बैडमिंटन खिलाड़ी हैं.

किंदाबी श्रीकांत की माता तो उन्हें इंजीनियर बनाना चाहती थीं, पर जब उन्हें लगा कि बेटा खेल में ही नाम कमाएगा, तो उन्होंने उस का हौसला बढ़ाना शुरू कर दिया.

किदांबी श्रीकांत अपनी इन शानदार जीतों पर कहते हैं, ‘‘अभी मैं अच्छी फौर्म में हूं और अपना बेहतरीन प्रदर्शन कर रहा हूं. मैं आत्मविश्वास से भरपूर हूं और इन दोनों टूर्नामैंटों में मैं ने अपने कैरियर का सब से अच्छा बैडमिंटन खेला है. पर अभी मेरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन आना बाकी है.’’

किदांबी श्रीकांत ने वाकई बढि़या खेल दिखाया है, तभी तो वे वर्ल्ड रैंकिंग में 22वें नंबर से टौप 10 में पहुंच गए हैं. उन के लिए कोच पुलेला गोपीचंद की कोचिंग और खेल की बारीकियों को अच्छी तरह समझाने की सोच रंग ला रही है.

लेकिन किदांबी श्रीकांत के लिए इस मुकाम तक पहुंचना आसान नहीं था. अपने कैरियर के शुरुआती दौर में उन्हें बहुत ज्यादा कड़ी मेहनत करनी पड़ी थी, क्योंकि इस में खिलाडि़यों को एरोबिक क्षमता, दक्षता, शक्ति, गति आदि की जरूरत होती है. लिहाजा, फिटनैस पर उन्होंने बहुत ध्यान दिया. इसे उन की खूबी ही कहा जाएगा कि वे कोच से मिले हर निर्देश पर चलते हैं.

स्वभाव से कूल दिखने वाले किदांबी श्रीकांत क्रिकेट की दुनिया में कैप्टन कूल नाम से मशहूर भारतीय खिलाड़ी महेंद्र सिंह धौनी से बहुत प्रभावित हैं. वे उन की तरह अपने दिमाग को कूल रख कर खेलने की सोचते हैं, ताकि आक्रामकता उन पर हावी न होने पाए.

आस्ट्रेलियन ओपन सुपर सीरीज के फाइनल मुकाबले में किदांबी श्रीकांत के सामने रियो ओलिंपिक में गोल्ड मैडल जीतने वाले चीन के चेन लौंग थे, जो काफी लंबा खेल खेलने की क्षमता रखते हैं. उन में गजब का स्टेमिना है, जिस का इस्तेमाल वे अपने विरोधी खिलाड़ी पर करते हैं. उन के सामने डट कर जमे रहना ही श्रीकांत के लिए सब से बड़ी चुनौती थी, जिस पर वे पार पा गए.

किदांबी श्रीकांत की इस कामयाबी से खुश हो कर क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने सोशल मीडिया पर उन्हें जीत की बधाई दी. उन्होंने लिखा, ‘लगातार दूसरा सुपर सीरीज खिताब जीतने पर श्रीकांत को बधाई. चैंपियन, हमें आप पर गर्व है.’

इस के जवाब में श्रीकांत ने लिखा, ‘थैंक्स सर. आप का संदेश मेरे लिए करोड़ों शुभकामनाओं के समान है. देश के लिए मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करता रहूंगा.’

सही भी है, क्योंकि किदांबी श्रीकांत का अभी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन आना बाकी है. अगर उन्होंने आगे भी अपनी लय बनाए रखी, तो आने वाले ओलिंपिक खेलों में मैडल जीतने का उन का सपना पूरा हो सकता है. एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा भी है, ‘‘देश के लिए ओलिंपिक मैडल जीतना मेरा सब से बड़ा सपना है. अगर मैं ऐसा करने में कामयाब रहा, तो मेरी मेहनत सफल हो जाएगी.’’

उम्मीद है कि किदांबी श्रीकांत अपने इस सपने को पूरा करेंगे और भारत को बैडमिंटन के खेल में नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे.

हर बार किया खुद को साबित

दुबलेपतले युवा बैडमिंटन खिलाड़ी किदांबी श्रीकांत ने साल 2012 में 18 साल की उम्र में सीनियर लैवल पर खेलना शुरू किया था. साल 2013 में उन्होंने दिल्ली में हुई अखिल भारतीय सीनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप प्रतियोगिता में परुपल्ली कश्यप को हरा कर खिताब जीता था. किदांबी श्रीकांत ने साल 2013 में ही थाईलैंड ओपन ग्रां पी टूर्नामैंट में दुनिया के 8वें नंबर के खिलाड़ी थाईलैंड के बूनसक पोनसाना को हरा कर इंटरनैशनल लैवल पर नाम कमाया था. किदांबी श्रीकांत के पिता के वी एस कृष्णा दिसंबर 2009 में उन्हें पुलेला गोपीचंद की बैडमिंटन एकेडमी में ले कर गए थे. पुलेला गोपीचंद ने एक इंटरव्यू में बताया था कि किदांबी श्रीकांत ने जूनियर लैवल पर अच्छा प्रदर्शन किया था. उन में 2 बड़ी खूबियां हैं. पहली, वे बड़े मुकाबलों में बिना तनाव के आखिर तक हार मारने को तैयार नहीं होते. दूसरी, उन में गजब की फुरती है, जो विरोधियों पर भारी पड़ती है.

साल 2016 में किदांबी श्रीकांत का जापान ओपन टूर्नामैंट में एक मैच खेलते हुए टखना चोटिल हो गया था और वे एक साल तक बैडमिंटन कोर्ट से बाहर रहे थे. अब उन्होंने वापसी की और खुद को भी बेहतर साबित कर दिया.

जब एक लड़की ने किया अपनी बोल्डनैस का परफैक्ट इस्तेमाल

चंडीगढ़ में विकास बराला और उस के दोस्त आशीष ने सिद्ध कर दिया कि एक गाड़ी में भी एक युवती बहुत सेफ नहीं है. शोहदे यदि चाहें तो वे तेज गाड़ी में जाती लड़की को भी अगवा कर सकते हैं. इस बहुचर्चित मामले में केवल 2 लड़कों में ही इतनी हिम्मत थी कि गाड़ी में चलती लड़की को पकड़ने की कोशिश कर सकें.

ठीक है विकास बराला के सिर पर सत्ता का बड़ा भूत सवार था कि उस का बाप सरकार चलाता है. अगर वह भारतीय जनता पार्टी की हरियाणा प्रदेश इकाई के अध्यक्ष का बेटा न होता, तो भी ऐसा कर लेता, इस में थोड़ा संदेह है. हां, अगर सताई लड़की आईएएस अधिकारी की बेटी न होती तो मामला उछलता ही नहीं.

देश में लड़कियों को जो आजादी मिली है वह अभी भी सतही है और इस पर भी हजार पाबंदियां हैं. लड़कियों को आज भी कोरे मनोरंजन की चीज समझा जा रहा है क्योंकि देश के अधिकांश घरों में मांओं, दादियों, बूआओं, मौसियों और बहनों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार को हर कोई देखता है. जब घरघर में दहेज हत्या की चर्चा हो रही हो तो स्वाभाविक है कि यह हरेक के मन में बैठ जाएगा कि औरत जात के साथ जैसा मरजी व्यवहार किया जा सकता है.

लड़कियों के पैदा होते ही यह पाठ पढ़ा दिया जाता है कि वे कमजोर हैं लेकिन इस से ज्यादा लड़कों को यह पढ़ाया जाता है कि वे ज्यादा मजबूत हैं और मनमानी कर सकते हैं. ऐसा हर स्तर पर होता है. निर्भया कांड में सब से दुर्दांत नाबालिग लड़का किसी नेता का बेटा नहीं था, एक बेहद गरीब का, सड़कों का मारा लड़का था. उस ने बड़े ही वहशीपन से लड़की के साथ बरताव किया था.

इस मानसिकता को बदलना आसान नहीं  है.  हर लड़की की अपनी आजादी है कि वह घर में रहे या बाहर मजे में घूमे, विवाह पूर्व सैक्स करे या न करे, चिरकुंआरी रहे, ऊपर से नीचे टैंटनुमा कपड़ों में रहे या अपने सुंदर अंगों का सार्वजनिक प्रदर्शन करे.

समाज, सरकार या स्वामियों को उसे रोकने का कोई हक नहीं. लड़कियां कब क्या करें क्या न करें, यह उन के विवेक पर छोड़ें.

हर जीव की तरह हर लड़की भी अपनी सीमाएं जानती है. वह जल्दी समझ जाती है कि किस हद तक स्वतंत्रता का इस्तेमाल किया जा सकता है. उसे यह पाठ अपनी गलतियों से खुद सीखने दें, उस पर थोपें नहीं. चंडीगढ़ के मामले में आईएएस पिता ने 12 बजे रात को अकेले आने के बेटी के अधिकार की रक्षा की है, यह तारीफ की बात है.

यह भी तारीफ की बात है कि उस लड़की ने धैर्य नहीं खोया और अपनी गाड़ी को बचा भी लिया और पुलिस को रात में सड़कों पर रेस करते हुए सूचना भी दे दी. इतना प्रैजेंस औफ माइंड हरेक में नहीं होता. यह सही मानो में उस लड़की की बोल्डनैस है जिस का उस ने परफैक्ट इस्तेमाल किया.

ये हैं वो टिप्स जिन्हें अपना कर आप सही ज्वैलरी चुन सकती हैं

घर हो या बाहर या फिर कौरपोरेट जगत, महिलाओं को आभूषणों से दूर रखना लगभग नामुमकिन है. कार्यालयों में काम करने वाली महिलाओं के लिए सही आभूषणों का चुनाव करना मुश्किल होता है, क्योंकि उन्हें कार्यालय के आला दर्जे के माहौल से मेल खाते आभूषण चाहिए होते हैं.

पेश हैं, कुछ टिप्स जिन्हें अपना कर आप सही आभूषण चुन सकती हैं:

भड़कीले न हों: कपड़ों की तरह आभूषण भी बहुत भड़कीले नहीं होने चाहिए. कुछ कार्यस्थलों पर ज्यादा आभूषण पहनने की अनुमति नहीं होती. कार्यस्थल के लिए आभूषणों का चुनाव बहुत सोचसमझ कर करना चाहिए. आखिर आप के परिधान आप के व्यक्तित्व को परिभाषित करते हैं.

त्वचा के रंग को ध्यान में रख चुनें आभूषण: आभूषण आप की त्वचा के रंग और परिधान के अनुसार होने चाहिए. मैटल और जेमस्टोन त्वचा पर चमक लाते हैं. इन का कलर स्पैक्ट्रम गोल्ड, सिल्वर, रोज गोल्ड, टर्क्वाइज, एमेथिस्ट हो सकता है.

आभूषण शरीर के अनुरूप हों: आभूषणों का आकार भी बहुत माने रखता है. उन्हें चुनने से पहले अपने शरीर पर ध्यान दें. उदाहरण के लिए नैकलैस या इयररिंग्स का आकार ऐसा हो कि सहकर्मी या क्लाइंट की नजरें उन पर न टिकें.

जिओमैट्रिक डिजाइन चुनें: आभूषणों की डिजाइन सादा, सर्कल, आयताकार या जिओमैट्रिक हो, जो सभ्य दिखाईर् दे और सहकर्मियों का ध्यान अनावश्यक रूप से आकर्षित न करे. डिजाइन कपड़ों से भी मेल खाती हो. कौरपोरेट महिलाएं ओवल डायमंड इयररिंग्स, छोटा पैंडेंट और हलका डायमंड बैंड पहन सकती हैं.

एक बोल्ड पीस: अगर आप ने सभी आभूषणों को सीमित कर दिया है, तो एक बड़ा या बोल्ड पीस चुन सकती हैं. आप क्लासी इयररिंग्स या स्टेटमैंट रिंग पहन सकती हैं. औफिस शर्ट के साथ नैकपीस मैच कर सकती हैं या पर्ल स्ट्रिंग के साथ साइड ब्रोच का इस्तेमाल कर सकती हैं. अपनी शर्ट पर कटवर्क नैकलैस या गोल्ड इटैलियन चेन के साथ जेमस्टोन पैंडेंट पहन सकती हैं.

सभी परिधानों के लिए पर्ल यानी मोती: पर्ल यानी मोती कौरपोरेट जगत का सब से बेहतरीन आभूषण है. यह किसी भी कौरपोरेट परिधान के साथ मेल खाता है. कानों में मोती के स्टड्स, मोती का ब्रेसलेट पहनें. अगर ब्रेसलेट पहनने में सहज महसूस नहीं करतीं, तो मोतियों की सादी माला पहन सकती हैं.

 – अनुष्का जैन, ज्वैलरी डिजाइनर, वरारोहा   

ये 5 उपचार आपकी रूखी त्वचा को बना देंगे चुटकियों में चमकदार

टैनिंग, रूखापन, काले घेरे, दागधब्बे, मुंहासे जैसी त्वचा की समस्याएं महिलाओं के लिए चिंता का विषय बन जाती हैं. महिलाएं इन से छुटकारा पाने के लिए कई घरेलू नुसखों से ले कर क्लीनिकल उपचार तक अपनाती हैं. लेकिन या तो उन से कोई फायदा नहीं होता या फिर कुछ साइड इफैक्ट देखे जाते हैं. ऐसे में सेहतमंद व दमकती त्वचा के लिए ये प्रमुख क्लीनिकल ट्रीटमैंट्स अपनाएं:

कैमिकल पीलस: कैमिकल पील में बाहरी परत को हुए नुकसान को हटाते हुए त्वचा के टैक्स्चर को स्मूद करने के लिए एक कैमिकल सौल्युशन का इस्तेमाल किया जाता है. इस उपचार की एक खामी यह है कि यह प्रक्रिया काली त्वचा वाले मरीजों पर असर नहीं करती. इस के साथ ही इन्फैक्शन, त्वचा रोग, कट या ब्रोकन स्किन, सनबर्न या फिर अन्य गंभीर त्वचा रोगों से ग्रस्त महिलाओं को भी यह उपचार कराने की सलाह नहीं दी जाती है. यह उपचार प्रशिक्षित चिकित्सक द्वारा ही कराया जाए.

माइक्रोडर्माब्रेशन: माइक्रोडर्माबे्रशन में माइक्रोक्रिस्टल्स का इस्तेमाल त्वचा की सब से बाहरी परत को हटाने के लिए किया जाता है ताकि नई, स्वस्थ त्वचा बाहर आ सके. इस प्रक्रिया से महीन रेखाएं, झुर्रियां, धूप से खराब हुई त्वचा, दागों, मुंहासों आदि का बेहतरीन इलाज किया जा सकता है.

लेजर लाइट ट्रीटमैंट: इस तकनीक में लाइट की छोटी और कंसंट्रेटेड बीम्स का इस्तेमाल किया जाता है, जो त्वचा की गहराई में जा कर त्वचा संबंधी विभिन्न परेशानियों को टारगेट करती हैं. ये उन्हें जड़ से ठीक करती हैं. जहां बाकी स्किन ट्रीटमैंट्स का असर हफ्तों बाद नजर आता है, वहीं लेजर लाइट ट्रीटमैंट का असर तुरंत देखा जा सकता है.

बोटोक्स इन्जैक्शन: बोटोक्स एक इंजैक्टेबल दवा है, जिसे बोेटुलिनम बैक्टीरिया से बनाया जाता है. यह एक टौक्सिन है, जिस से चेहरे की झुर्रियों को लगभग पूरी तरह से हटाया जा सकता है. यह प्रक्रिया त्वचा की ऊपरी और गहराई वाली झुर्रियां दूर करने में मदद करती है. इसे प्रशिक्षित डाक्टर द्वारा ही कराया जाए.

डर्माब्रेशन: डर्माब्रेशन का इस्तेमाल अकसर कुछ खास प्रकार के दागों या ऐज्ड स्किन के लिए किया जाता है. इस प्रक्रिया में त्वचा की ऊपरी परत को हटाने के लिए वायर्ड ब्रश का इस्तेमाल किया जाता है. ब्रश तेजी से घूमता है, जिस से त्वचा की ऊपरी परत निकलती और बराबर होती है. उपचारित हिस्सा जैसेजैसे ठीक होता जाता है, वैसे नई त्वचा विकसित होती जाती है.

हालांकि इन सभी प्रक्रियाओं के अपने फायदे हैं, लेकिन सफलता की अधिकतम संभावना और तुरंत परिणाम के कारण लेजर लाइट ट्रीटमैंट का इस्तेमाल स्किन ऐक्सपर्ट्स और डर्मेटोलौजिस्ट द्वारा सतही और गहरी त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए बहुत अधिक किया जाता है. सभी तरह के स्किन ट्रीटमैंट्स त्वचा चिकित्सक से सलाह के बाद ही किए जाने चाहिए. स्किन ऐनालिसिस सैशन के दौरान दवा के इस्तेमाल, क्रीम्स और मैडिकल हिस्ट्री का उल्लेख किया जाना चाहिए. बेहतर परिणाम के लिए उपचार के बाद त्वचा की सावधानीपूर्वक देखभाल करना बहुत जरूरी है.

– डा. मोहन थौमस, सीनियर कौस्मैटिक सर्जन

शादी जो मौत बन कर आई, पढ़िए इस इंतकाम की पूरी कहानी

किसी परिवार में विवाह की तैयारियां चल रही हों तो खुशियां देखते ही बनती है. लियाकत का परिवार भी ऐसी ही खुशियों से सराबोर था. क्योंकि उस ने अपने बेटे आदिल का रिश्ता न सिर्फ पक्का कर दिया था, बल्कि चंद रोज बाद वह बारात ले कर भी जाने वाला था. लियाकत उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के कस्बा मिर्जापुर में परिवार के साथ रहता था. उस के पास गुजारे लायक खेती की जमीन थी. बेटे आदिल की शादी उत्तराखंड के देहरादून के थाना विकासनगर के गांव कुंजाग्रांट की हिना से तय हुई थी.

14 मार्च, 2017 को उन के निकाह की तारीख भी तय कर दी गई थी. 19 फरवरी को हिना के लिए शादी का जोड़ा भी जाना था. इन खुशियों से हर कोई खुश था, लेकिन खुशियां किसी की मोहताज नहीं होतीं. वक्त कब कौन सी करवट ले ले, इस बात को कोई नहीं जानता. दुलहन के जोड़ा खुलने की रश्म पूरी हो पाती उस से पहले ही लियाकत का परिवार एक नाउम्मीद मुसीबत में फंस गया.

18 फरवरी की शाम आदिल अचानक लापता हो गया. वह शाम को घर से कुछ देर में आने की बात कह कर गया था, लेकिन वापस नहीं आ सका. उस का मोबाइल फोन भी स्विच औफ आ रहा था. वह इस तरह अचानक कहां लापता हो गया, यह बात किसी की समझ में नहीं आ रहा थी.

घर वालों ने अपने स्तर से उसे बहुत खोजा, लेकिन उस का कुछ पता नहीं चला. थकहार कर उन्होंने इस की सूचना थाना मिर्जापुर को दे दी. थानाप्रभारी पंकज त्यागी ने उस के बारे में पूरी जानकारी ले कर पूछा, ‘‘किसी से कोई झगड़ा या रंजिश तो नहीं थी?’’

‘‘नहीं साहब, हम सीधेसादे लोग हैं. आदिल का स्वभाव भी ऐसा नहीं था.’’ जवाब में लियाकत ने कहा.

‘‘कहीं ऐसा तो नहीं कि जिस लड़की से तुम आदिल की शादी कर रहे हो, वह लड़की उसे पसंद न हो.’’ थानाप्रभारी ने अगला सवाल किया.

‘‘बिलकुल नहीं साहब. उस ने ऐसा कभी जाहिर नहीं किया. वह तो बहुत खुश था. वह खुद भी शादी का जोड़ा खुलने की रस्म की तैयारियों में लगा था.’’ लियाकत ने कहा.

‘‘फिर तुम लोगों को क्या लगता है?’’ थानाप्रभारी ने पूछा.

‘‘साहब, लगता है, हमारे बेटे का अपहरण किया गया है.’’ लियाकत ने आशंका जताई.

‘‘यह अंदाजा किस बात से लगाया?’’ थानाप्रभारी ने पूछा.

‘‘साहब, हमें कुछ लोगों ने बताया है कि आदिल को 2 लोगों के साथ मोटरसाइकिल पर जाते देखा गया है.’’

‘‘कौन थे वे लोग?’’

‘‘यह पता नहीं साहब.’’ लियाकत ने कहा.

आदिल के दोस्तों आदि के बारे में जानकारी ले कर थानाप्रभारी ने लियाकत को जरूरी काररवाई का आश्वासन दे कर घर भेज दिया.

लियाकत की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि फिरौती के लिए आदिल का अपहरण करता. जांच में पता चला कि आदिल जिस मोटरसाइकिल पर गया था, उस पर स्पोर्ट्स लिखा था. गांव वालों से पूछा गया तो लोगों ने बताया कि पूरे गांव में किसी के पास ऐसी मोटरसाइकिल नहीं है.

आदिल के लापता होने से लोगों में आक्रोश बढ़ने लगा था. एसएसपी लव कुमार को इस की जानकारी हुई तो उन्होंने केस के खुलासे के लिए अपराध शाखा की टीम को भी थाना पुलिस के साथ लगा दिया.

पुलिस ने आदिल के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स और लोकेशन हासिल कर ली थी. उस की अंतिम लोकेशन नजदीकी गांव सोफीपुर की पाई गई थी. इस के बाद उस का मोबाइल औन नहीं हुआ था.

आदिल की काल डिटेल्स में कोई संदिग्ध नंबर नहीं मिला था. पुलिस अभी माथापच्ची कर ही रही थी कि सी ने बताया कि स्पोर्ट्स लिखी मोटरसाइकिल गांव के एक व्यक्ति के रिश्तेदार अफरोज की थी, जो देहरादून के पास स्थित गांव कुंजाग्रांट में रहता था. वह गांव आताजाता भी रहता था. कुंजाग्रांट की ही हिना से आदिल की शादी होने वाली थी.

अब पुलिस को यह मामला प्रेमप्रसंग से जुड़ा लगने लगा. पुलिस ने किसी तरह अफरोज का मोबाइल नंबर हासिल कर के काल डिटेल्स निकलवा ली. जिस दिन आदिल लापता हुआ था, उस दिन अफरोज की 2 नंबरों पर बातें हुई थीं. खास बात यह थी कि वे दोनों नंबर अफरोज के ही गांव के शाकिर और मारुफ के थे. इतना ही नहीं, उन की लोकेशन भी उस शाम मिर्जापुर गांव की पाई गई.

सुराग और सबूत पुख्ता होते ही अगले दिन यानी 20 फरवरी, 2017 को एक पुलिस टीम कुंजा ग्रांट के लिए रवाना हो गई और अफरोज, शाकिर तथा मारुफ को शक के आधार पर हिरासत में ले कर थाने आ गई. उन से पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि 18 फरवरी को वे मिर्जापुर आए ही नहीं थे.

पुलिस के पास उन के फोन नंबरों की लोकेशन और डिटेल्स थी. इस से साफ था कि वे झूठ बोल रहे थे. पुलिस ने सख्त रुख अख्तियार किया तो अफरोज टूट गया. उस ने जो कुछ बताया, उसे सुन कर पुलिस हैरान रह गई. क्योंकि वे तीनों आदिल के खून से अपने हाथ रंग चुके थे.

तीनों ने आदिल की हत्या कर के उस के शव को सफीपुरा गांव के जंगल के एक गड्ढे में छिपा दिया था. पुलिस ने उन की निशानदेही पर आदिल का शव बरामद कर लिया. उस के सिर व चेहरे पर घावों के निशान थे. शव के नजदीक ही खून से सने पत्थर पड़े थे. पुलिस ने बतौर सबूत उन्हें कब्जे में ले लिया.

आदिल की मौत की खबर से उस के घर में कोहराम मच गया. पुलिस ने उस के शव का पंचनामा भर कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया, साथ ही तीनों आरोपियों के खिलाफ भादंवि की धाराओं 302, 201 व 120 बी के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया.

पुलिस ने हत्यारोपियों से विस्तार से पूछताछ की तो एक ऐसे प्रेमी की कहानी निकल कर सामने आई, जो नहीं चाहता था कि उस की प्रेमिका किसी और के नाम का शादी का जोड़ा पहने. उस की प्रेमिका भी मौत के इस षडयंत्र में शामिल थी.

करीब 2 साल पहले अफरोज और हिना की आंखें चार हुईं तो दोनों एकदूसरे के दिल में उतर गए. दोनों ने प्यार के खुशनुमा सफर की शुरुआत कर दी और किसी को खबर भी नहीं लगी. जब कोई इंसान किसी को प्यार करे तो उस के लिए ढेरों सुनहरे ख्वाब सजाता है. उन्होंने भी ख्वाबों का एक महल बना लिया था.

जवानी के जोश में दोनों ने मर्यादा की दीवार भी गिरा दी और हमेशा एक होने का फैसला भी कर लिया. दोनों ही अक्सर एकदूसरे का हमसफर होने की कसमें खाते थे. एक दिन दोनों मिले तो अफरोज ने हिना से पूछा, ‘‘हिना यह बताओ कि तुम कभी मेरा सथ तो नहीं छोड़ दोगी?’’

‘‘कैसी बात करते हो अफरोज, तुम तो मेरी सांसों में बसे हो. मैं कभी बुरे ख्वाबों में भी ऐसा नहीं सोच सकती. एक दिन मुझे पूरी तरह तुम्हारी होना है.’’ हिना ने कहा.

‘‘लेकिन पता नहीं क्यों, मुझे डर लगता है कि वक्त आने पर तुम बदल न जाओ.’’ अफरोज ने कहा.

‘‘ऐसा कभी नहीं होगा. मैं तुम से सच्चा प्यार करती हूं.’’ हिना ने उस की आंखों में हसरतों से देखते हुए जवाब दिया तो अफरोज बेहद खुश हुआ.

जनवरी, 2017 में हिना का रिश्ता सहारनपुर के कस्बा मिर्जापुर के आदिल के साथ तय हो गया. घर वालों से वह इस रिश्ते का विरोध करने का साहस नहीं कर सकी. उस की मरजी के खिलाफ रिश्ता तो पक्का हो गया, पर वह दिल से इस रिश्ते के लिए खुश नहीं थी.

रिश्ता तय होने पर हिना और अफरोज दोनों ही परेशान थे. अब अफरोज को अपने ख्वाब टूटते नजर आने लगे. वह परेशान रहने लगा. हिना के घर वालों के सामने हकीकत बयां करने की हिम्मत उस में भी नहीं थी. बावजूद इस के वह किसी भी सूरत में हिना को खोना नहीं चाहता था. इस मुद्दे पर एक दिन उस ने हिना से बात की, ‘‘यह सब क्या हो गया हिना? हम दोनों ने तो साथ जीनेमरने की कसमें खाई थीं.’’

‘‘मैं खुद भी परेशान हूं अफरोज. समझ में नहीं आ रहा कि क्या करूं?’’ हिना बोली.

‘‘कुछ तो करना ही पड़ेगा. कहीं ऐसा तो नहीं कि तुम्हारे दिल में अपने मंगेतर के लिए जगह बन गई हो?’’ अफरोज ने मायूसी के साथ कहा.

‘‘ऐसा क्यों कह रहे हो, क्या तुम मेरे प्यार का इम्तिहान ले रहे हो?’’ हिना ने नाराजगी जाहिर की.

उधर रिश्ता तय हो जाने पर आदिल हिना के ख्वाब देखने लगा था. वह बेहद खुश था और अक्सर हिना से फोन पर बातें किया करता था. हिना के दिल में अफरोज की तसवीर थी. वह नाखुशी से आदिल से बात करती थी. उस ने आदिल को जरा भी शक नहीं होने दिया था कि वह उस के बजाय किसी और से प्यार करती है.

जैसे जैसे समय बीत रहा था, अफरोज और हिना की बेचैनी बढ़ती जा रही थी. अफरोज के कई दिन इसी उधेड़बुन में बीत गए कि वह इस रिश्ते को कैसे तुड़वाए. उसे सीधा कोई रास्ता नजर नहीं आया तो मन ही मन उस ने खतरनाक निर्णय ले लिया.

एक दिन उस ने अपने दिल की बात हिना से भी जाहिर कर दी, ‘‘हिना मैं ने सोच लिया है कि अब क्या करना है?’’

‘‘क्या?’’ वह चौंकी.

‘‘मैं आदिल को रास्ते से हटा दूंगा.’’

‘‘इस में खतरा हो सकता है?’’ हिना ने आशंका जाहिर की.

‘‘ऐसा कुछ नहीं होगा. मैं काम पूरी प्लानिंग से करूंगा.’’ अफरोज ने आत्मविश्वास से कहा.

हिना इस कदर बहक चुकी थी कि उसे अंदाजा भी नहीं था कि किस खतरनाक षडयंत्र का हिस्सा बन रही है और बाद में उसे इस की क्या कीमत चुकानी पड़ सकती है. शायद इसी वजह से एक दिन उस ने अफरोज से कहा, ‘‘अफरोज, मुझे नहीं लगता कि अब हम कभी एक हो पाएंगे.’’

‘‘क्यों?’’ अफरोज ने पूछा.

‘‘देखो, चंद दिनों बाद 20 तारीख को मेरी  शादी का जोड़ा खुलने की रश्म होने जा रही है.’’ हिना मायूस हो कर बोली.

यह सुन कर अफरोज आगबबूला हो गया. उस ने तिलमिला कर कहा, ‘‘तुम चिंता मत करो, मैं जल्दी ही कुछ करता हूं. मेरा तुम से वादा है कि मैं तुम्हें किसी और के नाम का शादी का जोड़ा नहीं पहनने दूंगा.’’

अफरोज आदिल को रास्ते से हटाने का फैसला तो कर चुका था, लेकिन यह काम उस के अकेले के वश का नहीं था. गांव में ही उस के रिश्ते का मामा शाकिर और दोस्त मारुफ रहते थे. उस ने उन दोनों को अपना इरादा बता कर उन से आदिल को रास्ते से हटाने में मदद मांगी. वे उस का साथ देने को तैयार हो गए.

अफरोज की आदिल के गांव में रिश्तेदारी थी. वह वहां अपनी मोटरसाइकिल से आताजाता रहता था. इस नाते उस की आदिल से भी अच्छी जानपहचान थी. कई बार ऐसा भी हुआ था कि दोनों ने साथ बैठ कर शराब भी पी थी. फरवरी के दूसरे सप्ताह में वह मिर्जापुर गया तो रास्ते में उस की मुलाकात आदिल से हो गई. वह उस से काफी खुशमिजाज अंदाज में मिला, ‘‘मुबारक हो आदिल भाई, तुम्हारा निकाह हमारे ही गांव में होने जा रहा है.’’

‘‘शुक्रिया भाईजान.’’ आदिल मुसकरा दिया.

‘‘चलो अच्छा है इस बहाने मुलाकात होती रहेगी. किसी दिन फुरसत में आऊंगा तो साथ बैठ कर दावत करेंगे.’’ अफरोज ने कहा तो वह खुश हो गया.

यह अफरोज की योजना का एक हिस्सा था. वह नहीं चाहता था कि अचानक साथ बैठने में आदिल उस पर शक करे. योजना के मुताबिक 18 फरवरी की शाम ढले अफरोज शाकिर और मारुफ अलगअलग मोटरसाइकिलों से मिर्जापुर पहुंच गए. इत्तेफाक से उन्हें सड़क पर ही आदिल मिल गया. शराब की दावत के बहाने उन्होंने उसे अपने साथ ले लिया.

आदिल आसानी से उन के झांसे में आ गया. ठेके से उन्होंने शराब तथा दुकान से सोडे की बोतल आदि सामान लिया और सफीपुर गांव के जंगल में पहुंच गए. वहां सभी ने बैठ कर शराब पी. उन्होंने जानबूझ कर आदिल को ज्यादा शराब पिलाई थी. उसे पता नहीं था कि जिन्हें वह अपना दोस्त समझ रहा है, वास्तव में वे उस के दुश्मन हैं.

अधिक शराब पीने से वह नशे में हो गया. अफरोज बहाने से उठा और एक पत्थर उठा कर आदिल के सिर पर पीछे से दे मारा. अचानक हुए हमले से आदिल चीख कर  लुढ़क गया. इस के बाद बाकी ने भी उस के सिर व मुंह पर पत्थरों से प्रहार किए.

आदिल लहूलुहान हो गया. वह जिंदा न बच सके, इस के लिए उन्होंने उस का गला भी दबा दिया. कुछ ही देर में आदिल की सांसों की डोर टूट गई. जब उन्हें विश्वास हो गया कि उस की मौत हो चुकी है तो उन्होंने उस के शव को गड्डे में ठिकाने लगा दिया. उस का मोबाइल भी स्विच औफ कर के फेंक दिया.

इस के बाद तीनों देहरादून चले गए. अफरोज ने सोचा था कि उस की राह का कांटा आदिल हमेशा के लिए हट गया. मामला शांत होने के बाद वह मौका देख कर हिना के परिवार वालों से अपने रिश्ते की बात कर के अपने प्यार की दुनिया आबाद करेगा. उस की सोच थी कि वह कभी पकड़ा नहीं जाएगा.

लेकिन पुलिस के पहुंचते ही उस की यह गलतफहमी दूर हो गई. पुलिस ने पूछताछ के बाद उस की प्रेमिका हिना को भी गिरफ्तार कर लिया. अपने प्यार को पाने की गरज में अफरोज का कदम सरासर गलत था. प्यार को पाने का यह कोई तरीका नहीं था. जबकि आदिल तो हर हकीकत से पूरी तरह अंजान था. न उस का कोई गुनाह था न कोई अफरोज से सीधी रंजिश.

अफरोज के गलत निर्णय से न सिर्फ एक घर का चिराग हमेशा के लिए बुझ गया, बल्कि खुद उस का और हिना का भविष्य भी खराब हो गया. दोनों भविष्य में एक हो भी जाएं तो भी यह कसक दिलों से कहां जाएगी कि उन के हाथ किसी निर्दोष के खून से रंगे हैं.

विस्तृत पूछताछ के बाद पुलिस ने आरोपियों को न्यायालय में पेश किया, जहां से तीनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक किसी की भी जमानत नहीं हो सकी थी. आदिल के परिवार वाले उन्हें सख्त सजा दिलाए जाने की मांग कर रहे थे.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

पति से न कहें ये 6 बातें वरना आपसी रिश्तों में आ सकती है खटास

हमेशा पति को ही हर गलत बात का जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. पत्नियां भी काफी अनुचित बातें कह कर पति का दिल दुखाती हैं. कुछ बातें पति को कभी न कहें. उन्हें बुरा लग सकता है. जानें वे बातें क्या हो सकती हैं-

मैं कर लूंगी

पलंबर या इलैक्ट्रिशियन को बुलाने के समय यह न कहें कि मैं कर लूंगी, भले ही इस से आप का काम जल्दी हो जाए पर पति को शायद अच्छा न लगे. मनोवैज्ञानिक ऐनी क्रोली का कहना है, ‘‘हो सकता है वह आप की हैल्प कर के आप को खुश करना चाहता हो. इस बात से पति चिढ़ते हैं, क्योंकि ‘मैं कर लूंगी’ इस बात से पति के कार्य करने पर आप का संदेह प्रतीत होता है और या यह कि आप को उस की जरूरत नहीं है.’’

तुम्हें पता होना चाहिए था

क्लीनिकल मनोवैज्ञानिक रियान होव्स का कहना है, ‘‘अगर आप यह आशा करती हैं कि आप का पति हर बात या इशारा जो आप करती हैं, अपनेआप समझ जाएं तो आप खुद ही निराश होंगी. जब पति पत्नी के मन की बात नहीं समझते तो पत्नियां बहुत अपसैट हो जाती हैं. लेकिन पुरुष सच में दिमाग नहीं पढ़ पाते. अगर पत्नियां इस बात को स्वीकार कर लें तो वे बहुत दुखों से बच सकती हैं. वे साफसाफ कहें कि वे क्या चाहती हैं.’’

क्या तुम्हें लगता है कि वह सुंदर है

पुरुषों की काउंसलिंग के स्पैशलिस्ट एक थेरैपिस्ट कर्ट स्मिथ का कहना है, ‘‘क्या आप सचमुच किसी आकर्षक स्त्री के विषय में अपने पति के विचार जानना चाहती हैं? शायद नहीं. आप यह पूछ कर अपने पति को असहज स्थिति में डाल रही हैं. कमरे में अधिकांश पुरुष सुंदर स्त्री को पहले ही देख चुके होते हैं. यदि वह आप का सम्मान रखने के लिए वहां नहीं देख रहा है तो आप का पूछना उसे असहज कर देगा. वह तय नहीं कर पाएगा कि आप को अपसैट न करने के लिए या आप को दुख न पहुंचाने के लिए क्या करे.’’

पुरुष बनो

स्मिथ कहते हैं, ‘‘क्या आप सचमुच ये शब्द कहती हैं? पुरुष बन कर दिखाने का कोई सही या गलत तरीका नहीं है. आदमी बनो यह कहना उस की पहचान पर एक घातक हमला होता है, यह नफरत और शर्म से भरी बात होती है, यह आप के रिश्ते को ऐसी हानि पहुंचा सकती है, जिस की पूर्ति मुश्किल होगी.’’

हमें बात करने की जरूरत है

ये शब्द विवाहित पुरुष के अंदर डर सा पैदा कर देते हैं. थेरैपिस्ट मार्सिया नेओमी बर्गर का कहना है, ‘‘अगली बार कोई इशू हो तो आसान शब्दों का प्रयोग करें. ये शब्द सिगनल देते हैं कि पत्नी को पति से शिकायत या कोई आलोचना का विषय है, फिर जो आप अकसर सोच रही होती हैं, उस के उलटा हो जाता है.’’

फिर दोस्तों के साथ जा रहे हो

होव्स कहते हैं, ‘‘पति का दोस्तों के साथ क्रिकेट देखने या गोल्फ खेलने से आप के विवाह को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा, यह चीज आप के रिश्ते को अच्छा ही बनाएगी. हां, कभीकभी पति पीने के लिए कोई बहाना कर देते हैं पर अधिकतर कुछ सलाह, कुछ महत्त्वपूर्ण बातें, सहारे के लिए मिलतेजुलते हैं, जो पत्नी अपने पति को दोस्तों से मिलनेजुलने से मना करती है वह अपने पति को उस के सपोर्ट सिस्टम से दूर कर रही होती है जबकि वह अन्य पतियों और पिताओं के साथ समय बिता कर अच्छा इनसान ही बनेगा.’’

किसी पुरुष ने आप का पति बनने के बाद अपनी मरजी से जीने का अधिकार नहीं खो दिया है. उस पर विश्वास करें, उस का सम्मान करें. अपनी शिकायतें, सुखदुख उस के साथ प्यार से बांटें. वैसे भी आज के जीवन में बहुत भागदौड़ है, तनाव है. उस के साथ अपना जीवन प्यार से, सुख से, आराम से बिताएं.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें