कमाल करोगे, तो चर्चा में रहोगे. चीनियों के दबदबे वाले बैडमिंटन खेल में भारतीय शटलर प्रकाश पादुकोण ने 80 के दशक में कभी अपना सिक्का जमाया था. वे औल इंगलैंड चैंपियनशिप का मैंस सिंगल्स खिताब जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने थे. लेकिन दुख की बात है कि इस के इतने साल बाद किसी भारतीय पुरुष खिलाड़ी ने इंटरनैशनल लैवल पर कोई खास कारनामा नहीं दिखाया.

पर अब लगता है कि 24 साल के युवा बैडमिंटन खिलाड़ी किदांबी श्रीकांत प्रकाश पादुकोण की बनाई राह पर चल पड़े हैं. साल 2017 को अगर उन के खेल जीवन का सुनहरा साल कहें, तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी.

किदांबी श्रीकांत ने 18 जून, 2017 को इंडोनेशिया ओपन टूर्नामैंट जीतने के महज 7 दिनों बाद 25 जून, 2017 को आस्ट्रेलिया ओपन सुपर सीरीज पर भी अपना कब्जा जमाया. इस से पहले वे अप्रैल 2017 में सिंगापुर ओपन टूर्नामैंट के फाइनल मुकाबले में भी पहुंचे थे, लेकिन वहां अपने ही भारतीय साथी खिलाड़ी सांईं प्रणीत से हार गए थे.

वैसे अब यह कारनामा करने के बाद भारत के अग्रणी पुरुष बैडमिंटन खिलाड़ी किदांबी श्रीकांत लगातार 2 सुपर सीरीज खिताब जीतने वाले पहले पुरुष खिलाड़ी बन गए हैं. यही नहीं, वे यह उपलब्धि हासिल करने वाले दुनिया के महज छठे बैडमिंटन खिलाड़ी हैं.

यकीनन, इस तरह की कामयाबी से किदांबी श्रीकांत का कद भारतीय बैडमिंटन जगत में रातोंरात ऊंचा हो गया है. 7 फरवरी, 1993 को आंध्र प्रदेश के गुंटूर में जन्मे इस खिलाड़ी के पिता का नाम के वी एस कृष्णा और माता का नाम राधा है. श्रीकांत के बड़े भाई नंदा गोपाल भी एक बैडमिंटन खिलाड़ी हैं.

किंदाबी श्रीकांत की माता तो उन्हें इंजीनियर बनाना चाहती थीं, पर जब उन्हें लगा कि बेटा खेल में ही नाम कमाएगा, तो उन्होंने उस का हौसला बढ़ाना शुरू कर दिया.

किदांबी श्रीकांत अपनी इन शानदार जीतों पर कहते हैं, ‘‘अभी मैं अच्छी फौर्म में हूं और अपना बेहतरीन प्रदर्शन कर रहा हूं. मैं आत्मविश्वास से भरपूर हूं और इन दोनों टूर्नामैंटों में मैं ने अपने कैरियर का सब से अच्छा बैडमिंटन खेला है. पर अभी मेरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन आना बाकी है.’’

किदांबी श्रीकांत ने वाकई बढि़या खेल दिखाया है, तभी तो वे वर्ल्ड रैंकिंग में 22वें नंबर से टौप 10 में पहुंच गए हैं. उन के लिए कोच पुलेला गोपीचंद की कोचिंग और खेल की बारीकियों को अच्छी तरह समझाने की सोच रंग ला रही है.

लेकिन किदांबी श्रीकांत के लिए इस मुकाम तक पहुंचना आसान नहीं था. अपने कैरियर के शुरुआती दौर में उन्हें बहुत ज्यादा कड़ी मेहनत करनी पड़ी थी, क्योंकि इस में खिलाडि़यों को एरोबिक क्षमता, दक्षता, शक्ति, गति आदि की जरूरत होती है. लिहाजा, फिटनैस पर उन्होंने बहुत ध्यान दिया. इसे उन की खूबी ही कहा जाएगा कि वे कोच से मिले हर निर्देश पर चलते हैं.

स्वभाव से कूल दिखने वाले किदांबी श्रीकांत क्रिकेट की दुनिया में कैप्टन कूल नाम से मशहूर भारतीय खिलाड़ी महेंद्र सिंह धौनी से बहुत प्रभावित हैं. वे उन की तरह अपने दिमाग को कूल रख कर खेलने की सोचते हैं, ताकि आक्रामकता उन पर हावी न होने पाए.

आस्ट्रेलियन ओपन सुपर सीरीज के फाइनल मुकाबले में किदांबी श्रीकांत के सामने रियो ओलिंपिक में गोल्ड मैडल जीतने वाले चीन के चेन लौंग थे, जो काफी लंबा खेल खेलने की क्षमता रखते हैं. उन में गजब का स्टेमिना है, जिस का इस्तेमाल वे अपने विरोधी खिलाड़ी पर करते हैं. उन के सामने डट कर जमे रहना ही श्रीकांत के लिए सब से बड़ी चुनौती थी, जिस पर वे पार पा गए.

किदांबी श्रीकांत की इस कामयाबी से खुश हो कर क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने सोशल मीडिया पर उन्हें जीत की बधाई दी. उन्होंने लिखा, ‘लगातार दूसरा सुपर सीरीज खिताब जीतने पर श्रीकांत को बधाई. चैंपियन, हमें आप पर गर्व है.’

इस के जवाब में श्रीकांत ने लिखा, ‘थैंक्स सर. आप का संदेश मेरे लिए करोड़ों शुभकामनाओं के समान है. देश के लिए मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करता रहूंगा.’

सही भी है, क्योंकि किदांबी श्रीकांत का अभी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन आना बाकी है. अगर उन्होंने आगे भी अपनी लय बनाए रखी, तो आने वाले ओलिंपिक खेलों में मैडल जीतने का उन का सपना पूरा हो सकता है. एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा भी है, ‘‘देश के लिए ओलिंपिक मैडल जीतना मेरा सब से बड़ा सपना है. अगर मैं ऐसा करने में कामयाब रहा, तो मेरी मेहनत सफल हो जाएगी.’’

उम्मीद है कि किदांबी श्रीकांत अपने इस सपने को पूरा करेंगे और भारत को बैडमिंटन के खेल में नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे.

हर बार किया खुद को साबित

दुबलेपतले युवा बैडमिंटन खिलाड़ी किदांबी श्रीकांत ने साल 2012 में 18 साल की उम्र में सीनियर लैवल पर खेलना शुरू किया था. साल 2013 में उन्होंने दिल्ली में हुई अखिल भारतीय सीनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप प्रतियोगिता में परुपल्ली कश्यप को हरा कर खिताब जीता था. किदांबी श्रीकांत ने साल 2013 में ही थाईलैंड ओपन ग्रां पी टूर्नामैंट में दुनिया के 8वें नंबर के खिलाड़ी थाईलैंड के बूनसक पोनसाना को हरा कर इंटरनैशनल लैवल पर नाम कमाया था. किदांबी श्रीकांत के पिता के वी एस कृष्णा दिसंबर 2009 में उन्हें पुलेला गोपीचंद की बैडमिंटन एकेडमी में ले कर गए थे. पुलेला गोपीचंद ने एक इंटरव्यू में बताया था कि किदांबी श्रीकांत ने जूनियर लैवल पर अच्छा प्रदर्शन किया था. उन में 2 बड़ी खूबियां हैं. पहली, वे बड़े मुकाबलों में बिना तनाव के आखिर तक हार मारने को तैयार नहीं होते. दूसरी, उन में गजब की फुरती है, जो विरोधियों पर भारी पड़ती है.

साल 2016 में किदांबी श्रीकांत का जापान ओपन टूर्नामैंट में एक मैच खेलते हुए टखना चोटिल हो गया था और वे एक साल तक बैडमिंटन कोर्ट से बाहर रहे थे. अब उन्होंने वापसी की और खुद को भी बेहतर साबित कर दिया.

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