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एकतरफा प्यार के गुनाह की मिली इतनी बड़ी सजा कि सुनकर आप कांप जाएंगे

सुबह के यही कोई साढ़े 3 बजे मुंबई के डोमेस्टिक एयरपोर्ट परिसर में स्थित थाना विलेपार्ले पुलिस को इर्ला कूपर अस्पताल से सूचना मिली कि एक युवती की हत्या कर के उस की लाश को जला दिया गया है. उस समय ड्यूटी पर तैनात इंसपेक्टर महादेव निवालकर ने इस सूचना की तुरंत डायरी बनवाई और थानाप्रभारी लक्ष्मण चव्हाण, पुलिस कंट्रोल रूम के अलावा अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को सूचना दे कर खुद एआई देवकाते, सांलुके, सबइंसपेक्टर पाटिल, महिला सबइंसपेक्टर कडव, सिपाही सुरेश छोत्रो, संतोष शिंदे, योगेंद्र सिंह शिंदे, गांवडे, सावडेकर, महांडिक और पालवे को साथ ले कर के इर्ला कूपर अस्पताल के लिए रवाना हो गए.

इंसपेक्टर महादेव निवालकर जिस समय सहयोगियों के साथ अस्पताल पहुंचे थे, डाक्टरों की एक टीम युवती के शव का निरीक्षण कर रही थी. युवती के साथ आए लोग अस्पताल परिसर में ही मौजूद थे. उन के बीच मातम का माहौल था. महादेव निवालकर ने देखा, युवती का चेहरा बुरी तरह से जला हुआ था.

पूछताछ में पता चला कि मृतका का नाम श्रद्धा पांचाल था. वह फिजियोथेरैपिस्ट थी. डाक्टरों के अनुसार, श्रद्धा की हत्या एक से डेढ़ घंटा पहले गला घोंट कर की गई थी. उस के दोनों पैरों पर खरोंच के निशान थे, जिस से आशंका जताई गई थी कि हत्या के पूर्व उस के साथ मनमानी भी की गई थी.

डाक्टरों से बातचीत के बाद महादेव निवालकर ने मृतका श्रद्धा के साथ आए लोगों से बातचीत शुरू की. घर वालों से तो उस समय कोई खास जानकारी नहीं मिल सकी, क्योंकि उस समय वे कुछ बताने की स्थिति में नहीं थे. साथ आए पड़ोसियों ने जो बताया था उस के अनुसार, मामला काफी संदिग्ध था. पड़ोसियों ने रात ढाई बजे के आसपास श्रद्धा के कमरे से धुआं निकलता देखा था. तब उन्हें लगा था कि यह धुआं शायद एयरकंडीशनर से निकल रहा है.

लेकिन आधे घंटे बाद जब श्रद्धा के घर वालों के रोनेचीखने की आवाजें आईं तो पता चला कि वह धुआं एसी से नहीं, बल्कि श्रद्धा के कमरे से निकल रहा था. किसी ने श्रद्धा की हत्या कर के उस की लाश को जलाने की कोशिश की थी. पड़ोसी भाग कर वहां पहुंचे तो कमरे की लाइट नहीं जल रही थी. टौर्च की रोशनी में उन्होंने जो दृश्य देखा, वह दिल को दहलाने वाला था. कमरे के बीचोबीच श्रद्धा की अधजली निर्वस्त्र लाश पड़ी थी. उसी की जींस से उस का गला कसा हुआ था.

पड़ोसी दीपक और सचिन ने जल्दी से जींस हटाई और उपचार के लिए उसे इर्ला कूपर अस्पताल ले आए. डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर इस बात की सूचना थाना विलेपार्ले पुलिस को दे दी थी. महादेव निवालकर ने मामले की प्राथमिक काररवाई निपटा कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल में रखवा दिया था. यह 6 दिसंबर, 2016 की बात थी.

अस्पताल की काररवाई निपटा कर महादेव निवालकर सहयोगियों के साथ घटनास्थल पर यानी श्रद्धा के घर पहुंचे. डा. श्रद्धा पांचाल मकान की ऊपरी मंजिल पर बने कमरे में रहती थी. उसी कमरे में उस ने सोने से ले कर पढ़ाई तक का इंतजाम कर रखा था. लेकिन डाक्टर होने के बावजूद वह समय की पाबंद नहीं थी. उस के आनेजाने का कोई निश्चित समय नहीं था.

घर वालों को किसी तरह की तकलीफ न हो, इस के लिए श्रद्धा ने अपने कमरे की सीढ़ी घर के बाहर से बनवा रखी थी. इसलिए वह जब भी देर से घर आती थी, सीधे अपने कमरे में चली जाती थी. अगर कभी वह सहेलियों के घर रुक जाती थी तो घर वालों को बता देती थी.

महादेव निवालकर श्रद्धा के कमरे का निरीक्षण करने लगे. उस के कमरे की सारी चीजें बिखरी हुई थीं. अलमारी के भी दोनों पट खुले हुए थे. उस के अंदर का सारा सामान बिखरा था. कमरे में बिखरे किताबों के पेज जले हुए थे. इस से पुलिस को लगा कि किताबों के पन्ने फाड़ कर श्रद्धा की लाश को जलाने की कोशिश की गई थी.

महादेव निवालकर घटनास्थल का निरीक्षण कर आसपड़ोस वालों से पूछताछ कर रहे थे कि जोन-8 के डीसीपी वीरेंद्र मिश्र, एसीपी प्रकाश गव्हाणे, थानाप्रभारी लक्ष्मण चव्हाण भी आ पहुंचे. इन्हीं अधिकारियों के साथ फोरैंसिक टीम और क्राइम ब्रांच यूनिट-8 के अधिकारी भी आए थे. फोरैंसिक टीम का काम निपट गया तो अधिकारियों ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया.

अधिकारियों के जाने के बाद महादेव निवालकर भी थाने लौट आए थे. उन्होंने श्रद्धा के घर वालों की ओर से हत्या का मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी थी. चूंकि मामला दुष्कर्म और हत्या का था, इसलिए पुलिस हत्यारे को जल्दी से जल्दी गिरफ्तार करना चाहती थी. हत्यारे तक पहुंचने के लिए पुलिस ने श्रद्धा के घर वालों से गहराई से पूछताछ की, लेकिन उन लोगों से कोई खास जानकारी नहीं मिल सकी.

इस पूछताछ में पुलिस को सिर्फ इतना ही पता चला था कि उस रात श्रद्धा साढ़े 9 बजे घर आई थी. 10 बजे घर वालों के साथ खाना खा कर वह निपटी थी कि उस की 2 सहेलियां पूजा उर्फ पल्लवी और चैताली मुखर्जी उस से मिलने आ गई थीं. कुछ देर तीनों बातें करती रहीं, उस के बाद वे बाहर चली गई थीं. इस के बाद वे कब कमरे पर आईं, घर वालों को पता नहीं चला.

महादेव निवालकर ने श्रद्धा की दोनों सहेलियों को थाने बुला कर पूछताछ की तो पता चला कि वे श्रद्धा की जिगरी सहेलियां थीं. वे आपस में अकसर मिलती रहती थीं. कभीकभी एकदूसरे के घर रुक भी जाया करती थीं. उस दिन रात को वे श्रद्धा के यहां आईं तो थोड़ी देर घर में रुक कर सभी एटीएम पर पैसे निकालने चली गईं.

वहां से आ कर 12 बजे तक दोनों श्रद्धा के कमरे पर बातें करती रहीं. श्रद्धा को नींद आने लगी तो दोनों उठीं और श्रद्धा से दरवाजा बंद करने को कह कर दरवाजा उढ़का कर चली गईं. श्रद्धा की दोनों सहेलियों से भी हत्यारे तक पहुंचने का कोई सुराग नहीं मिला था. इस के बाद महादेव निवालकर ने अपना ध्यान श्रद्धा की क्लिनिक पर केंद्रित किया.

श्रद्धा फिजियोथेरैपिस्ट थी, ऐसे में उस के यहां हर तरह और हर उम्र के लोग आते थे. उन में कुछ ऐसे भी रहे होंगे, जो श्रद्धा को पसंद करते रहे होंगे. क्योंकि श्रद्धा आधुनिक फैशनपरस्त और खुले विचारों वाली युवती थी. वह हर किसी से खुल कर बात करती थी.

ऐसे में कोई ऐसा भी रहा होगा, जो उस के प्रति आकर्षित हो गया होगा. श्रद्धा ने उसे नजरअंदाज किया होगा, जिस की वजह से बात दुष्कर्म से हत्या तक पहुंच गई होगी. यही सोच कर पुलिस ने श्रद्धा के क्लिनिक और उस के यहां आनेजाने वालों के नामपते तथा टेलीफोन नंबर ले कर गहराई से जांच की, लेकिन कोई भी ऐसा आदमी नहीं मिला, जिस पर शक किया जाता. इस तरह मामला धीरेधीरे जटिल और पेंचीदा होता जा रहा था.

ऐसे में परिस्थितियां कुछ ऐसी बनीं कि पुलिस को श्रद्धा के घर वालों पर ही शक हो गया. पुलिस को लगा कि श्रद्धा की हत्या एक सोचीसमझी साजिश के तहत की गई थी, जिस में घर वाले ही शामिल हैं. वे श्रद्धा की किसी कमजोरी को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं. यही सोच कर पुलिस पूछताछ के लिए श्रद्धा के एक मुंहबोले भाई तथा घर वालों को थाने ले आई.

इस बात की भनक जैसे ही मीडिया को लगी, उन्होंने श्रद्धा के घर वालों का जीना दूभर कर दिया. अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए इलैक्ट्रौनिक और प्रिंट मीडिया ने इस मामले को तिल का ताड़ बना दिया. जिस के जो मन में आया, वह खबरों को रंगीन और चटपटी बना कर नोएडा के आरुषि हत्याकांड से जोड़ कर अनापशनाप खबरें पेश करने लगा.

मीडिया ने श्रद्धा के मांबाप को गुनाहों के कटघरे में खड़ा कर दिया. यही नहीं, डा. श्रद्धा के चरित्र को भी जम कर शर्मसार किया गया. और यह सब तब तक चलता रहा, जब तक श्रद्धा का असली कातिल पकड़ा नहीं गया. एक ओर जहां मीडिया नाक में दम किए था, वहीं दूसरी ओर मामले की जांच कर रही पुलिस टीम पर वरिष्ठ अधिकारियों का भी दबाव था. क्राइम ब्रांच और थाना पुलिस का मिलाजुला औपरेशन भी काम नहीं आ रहा था. पुलिस का सारा तंत्र बेकार हो चुका था.

परेशान पुलिस ने सभी रेलवे स्टेशनों, मुंबई के उपनगर नवी मुंबई, थाणे, वसई पालघर जनपद के नालासोपारा, विरार, कल्याण के सभी पुलिस थानों के संदिग्धों के रिकौर्ड चैक कर पूछताछ कर डाली, साथ ही श्रद्धा के फोन नंबरों के काल डिटेल्स निकलवा कर खंगाला. इस के अलावा करीब 5 सौ से अधिक लोगों से पूछताछ की गई, लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात रहा.

50 दिनों से अधिक बीत गए, पर पुलिस अंधेरे में ही हाथपैर मारती रही. पुलिस की समझ में नहीं आ रहा था कि श्रद्धा की हत्या का रहस्य क्या था और हत्यारा कौन था? इस मामले को ले कर पुलिस चिंतित जरूर थी, लेकिन निराश नहीं थी.

एक बार फिर पुलिस ने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर घटनास्थल पर जा कर मामले से संबंधित सारे तथ्यों को समझने की कोशिश की. इसी के साथ उस इलाके में लगे सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज निकलवा कर उन्हें बारीकी से देखा गया. इस में उन्हें आशा के विपरीत फल मिला. आखिर इस से श्रद्धा की हत्या की कडि़यां जुड़ ही गईं.

पुलिस को एक फुटेज में एक ऐसा चेहरा दिखाई दिया, जिस पर शक हुआ. उस का चेहरा काफी धुंधला था, पर उस की गतिविधियां काफी संदिग्ध लग रही थीं. चेहरा स्पष्ट न होने की वजह से उसे पहचाना नहीं जा सकता था. फुटेज को सांताकु्रज की लैब भेजा गया तो चेहरा कुछ साफ हुआ. इस के बाद सच्चाई सामने आ गई. वह युवक उसी बस्ती में लगभग 7 सालों से रह रहा था, जहां श्रद्धा का परिवार रहता था.

उस युवक का नाम देवाशीष धारा था. पुलिस उस की तलाश में लग गई. वह जिस मकान में किराए पर रहता था, मकान मालिक ने बताया कि वह 8 जनवरी, 2017 को कमरा खाली कर के अपने गांव चला गया था. पुलिस ने इस मामले में देर करना उचित नहीं समझा. वैसे भी संभावित अभियुक्त उन की पहुंच से काफी दूर निकल चुका था.

थानापुलिस ने इस बात की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी. इस के बाद अधिकारियों के निर्देश पर पुलिस की एक टीम पश्चिम बंगाल स्थित देवाशीष के गांव के लिए रवाना हो गई. पुलिस को उस का पता मकान मालिक से मिल गया था.

देवाशीष के गांव गई पुलिस टीम ने स्थानीय पुलिस की मदद से उसे गिरफ्तार कर लिया. उसे वहां की अदालत में पेश कर के प्रोडक्शन वारंट पर मुंबई ला कर अधिकारियों की उपस्थिति में उस से पूछताछ की गई तो पहले वह खुद को इस मामले से अनभिज्ञ बताता रहा. लेकिन जब पुलिस ने थोड़ी सख्ती की तो वह टूट गया और उस ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया.

27 वर्षीय देवाशीष धारा मूलरूप से पश्चिम बंगाल के जिला मिदनापुर के थाना दासपुर के गांव मेधूपुर का रहने वाला था. उस के पिता नंदलाल गांव के एक गरीब किसान थे. परिवार का सब से बड़ा बेटा देवाशीष ही था. बड़ा हुआ तो घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने की वजह से सन 2010 में वह काम की तलाश में मुंबई आ गया.

कहा जाता है कि मुंबई में कोई भूखा नहीं सोता, पर यहां काम नसीब से मिलता है. यही देवाशीष के साथ भी हुआ. उसे उस के मनमुताबिक काम नहीं मिला. उस के गांव के कुछ लोग वहां मेहनतमजदूरी करते थे, उन्हीं के साथ वह भी मेहनतमजदूरी करने लगा.

देवाशीष महत्त्वाकांक्षी युवक था. मेहनतमजदूरी से जो पैसे मिलते थे, उन्हें जोड़ कर रखता था. खर्चे के बाद जो भी पैसे बचते थे, वह उन्हें गांव भेज देता था. रहने के लिए उस ने विलेपार्ले पूर्व के श्रद्धानंद रोड पर साईंबाबा मंदिर के पास किराए का कमरा ले रखा था.

जहां देवाशीष रहता था, उसी के नजदीक की लीलाबाई सोसायटी के एक चालनुमा 2 मंजिले मकान में काशीनाथ पांचाल परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में पत्नी और 2 बेटियां थीं. 50साल के काशीनाथ मुंबई लोअर परेल की सन मिल कंपाउंड की एक प्रतिष्ठित फर्म में नौकरी करते थे. उन्हें बेटा नहीं था, इसलिए उन्होंने बेटियों को ही बेटों की तरह पालापोसा. वह बेटियों को पढ़ालिखा कर किसी योग्य बनाना चाहते थे. बड़ी बेटी श्रद्धा पढ़लिख कर फिजियोथेरैपिस्ट बन गई थी और विलेपार्ले वेस्ट जुहू में अपनी क्लिनिक खोल ली थी, जो धीरेधीरे चलने भी लगी थी. छोटी बेटी भी इलैक्ट्रौनिक इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही थी.

24 साल की श्रद्धा खूबसूरत तो थी ही, वाचाल भी थी. वह किसी से भी बात करने में नहीं झिझकती थी. इस की एक वजह यह थी कि उस का काम ही ऐसा था.

जो दूसरों की फिटनेस का खयाल रखता हो, वह अपनी फिटनेस का ध्यान रखेगा ही. श्रद्धा के अधिकतर ग्राहक फिल्मी दुनिया और टीवी सीरियलों में काम पाने वाले युवकयुवतियां थे. वे क्लिनिक पर भी आते थे और घर पर भी. ऐसे लोगों के बीच रहने की वजह से श्रद्धा खुद भी मौडल की तरह रहती थी. वह कपड़े भी छोटेछोटे पहनती थी.

देवाशीष की नजर श्रद्धा पर पड़ी तो वह उसे चाहने लगा. वैसे तो वह श्रद्धा को कई सालों से देखता आ रहा था, लेकिन उस के मन में श्रद्धा के प्रति प्यार तब जागा, जब उस ने फिजियोथेरैपिस्ट डाक्टर बन कर अपनी क्लिनिक खोली थी. फिल्म और सीरियल में काम पाने के इच्छुक युवकयुवतियों के संपर्क में रहने की वजह से श्रद्धा का रहनसहन और बातव्यवहार उसी तरह हो गया था. वह बनसंवर कर घर से सुबह निकलती थी तो देर रात को ही लौटती थी.

श्रद्धा की खूबसूरती देवाशीष को अपनी ओर आकर्षित करने लगी थी. दिल के हाथों मजबूर देवाशीष श्रद्धा का सामीप्य पाने को बेचैन रहने लगा था. इस के लिए वह श्रद्धा का पीछा भी करने लगा था. लेकिन वह उस से अपने दिल की बात कह नहीं पा रहा था. इस की एक वजह यह थी कि उस की और श्रद्धा की हैसियत में बड़ा अंतर था. श्रद्धा के सामने वह कुछ नहीं था.

लेकिन दिल तो दिल है, वह किस पर आ जाए कौन जानता है. जब देवाशीष से रहा नहीं गया तो एक दिन उस ने श्रद्धा से दिल की बात कह ही दी. भला श्रद्धा उस के प्यार को कहां स्वीकार करने वाली थी. उस ने जो जवाब दिया, वह देवाशीष के कलेजे में तीर की तरह उतर गया.

देवाशीष को अपमानित कर श्रद्धा अपने काम पर चली गई और उसे भूल गई. उस ने यह बात किसी को बताई भी नहीं. श्रद्धा भले ही इस बात को भूल गई थी, लेकिन देवाशीष अपने अपमान को नहीं भुला सका था. वह बदले की आग में जलने लगा. वह श्रद्धा को सबक सिखाने का मौका ढूंढने लगा.

घटना वाली रात देवाशीष दोस्तों से मिल कर लौट रहा था, तभी उस ने श्रद्धा की सहेलियों को उस के कमरे से निकलते देखा. उसे यह मौका उचित लगा. वह कुछ देर श्रद्धा के मकान के आसपास घूमता रहा. उस के बाद मौका देख कर वह श्रद्धा के कमरे के दरवाजे पर जा पहुंचा.

उस ने दरवाजे पर हाथ रखा तो दरवाजा खुल गया, क्योंकि दरवाजा खुला ही था. दरअसल, श्रद्धा की सहेलियों ने जाते समय उस से दरवाजा बंद करने को कहा था, लेकिन नींद में होने की वजह से वह दरवाजा बंद नहीं कर सकी थी. गहरी नींद में सो रही श्रद्धा को देवाशीष ने इस तरह दबोचा कि वह अर्द्धबेहोशी की स्थिति में चली गई. उसी हालत में उस ने श्रद्धा के कपड़े उतार कर उस के साथ दुष्कर्म किया और अपना अपराध छिपाने के लिए उसी की जींस से उस का गला घोंट दिया.

श्रद्धा मर गई तो अलमारी में रखी किताबें निकाल कर उस ने फाड़ा और उन के पन्ने श्रद्धा की लाश पर रख कर आग लगा दी. आग जब तक जोर पकड़ती, उस ने कमरे की लाइट तोड़ कर बाहर आ गया. बाहर आ कर दरवाजे की कुंडी बंद की और भाग गया.

इस हत्याकांड के बाद एक महीने तक वह अपने दोस्तों के यहां रह कर पुलिस काररवाई के बारे में पता करता रहा. जब उस ने देखा कि पुलिस हत्यारे के बारे में पता नहीं लगा पा रही है तो निश्चिंत हो कर वह गांव चला गया. लेकिन वह बच नहीं सका और 2 फरवरी, 2017 को पुलिस द्वारा पकड़ा गया.

इंसपेक्टर महादेव निवालकर ने पूछताछ के बाद देवाशीष के खिलाफ दुष्कर्म और हत्या का मुकदमा दर्ज कर उसे अदालत में पेश किया, जहां से उसे आर्थर रोड जेल भेज दिया गया.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

शिल्पा शेट्टी की फोटो खींचने पर बाउंसर्स ने फोटोग्राफरों पर कर दिया हमला

शिल्पा शेट्टी और उनके पति राज कुंद्रा मुंबई के खार इलाके में स्थित बस्तियन होटल गये थे, जहां होटल के बाहर दो फोटोग्राफर्स शिल्पा और उनके पति की फोटो लेने की कोशिश कर रहे थे. इसी दौरान होटल से दो बाउंसर आएं, फोटोग्राफर्स को फोटो लेने के लिए मना किया और वहां से जाने के लिए भी कहा. फोटोग्राफर्स ने उनकी बात को अनसुना कर दिया और शिल्पा की फोटो लेते रहे.

जानकारी के मुताबिक, यह घटना गुरुवार रात 1 से 2 बजे के बीच की है, जब शिल्पा और उनके पति राज कुंद्रा होटल से बाहर निकल रहे थे. तभी उन्हें बाहर आते देख कुछ फोटोग्राफर्स ने उनकी फोटो लेनी शुरू कर दी. शिल्पा शेट्टी भी आराम से होटल के बाहर खड़े होकर उन दोनों फोटोग्राफर्स को पोज दे रहीं थीं. इसके बाद शिल्पा जैसे ही अपनी कार में बैठीं होटल के बाउंसर्स ने फोटोग्राफर्स पर हमला कर दिया.

इस घटना में फोटोग्राफर्स को काफी चोट आई हैं. एक फोटोग्राफर को तो इतनी मार पड़ी है कि उसके कपड़े तक फट गए और चेहरे से खून निकलने लगा. वारदात के एक घंटे बाद होटल मालिक के फोन करने पर पुलिस वहां पहुंची. इसके बाद दोनों फोटोग्राफर्स की शिकायत के बाद शुक्रवार को मुंबई के खार पुलिस ने केस दर्ज कर दो बाउंसर्स को अरेस्ट कर लिया.

इस हमले के शिकार फोटोग्राफर्स राजू और हिमांशु शिंदे कहना है कि हमने 100 नंबर पर फोन कर पुलिस को इस घटना की जानकारी देनी चाही, लेकिन न तो किसी ने किसी ने हमारा फोन उठाया और न ही हमारी मदद के लिए वहां कोई आया.

आपको बता दे कि हाल ही में बौलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी टीवी के लिए अपना पहला लाइव गेम शो लाने जा रही है. शिल्पा ने ट्विटर पर शो का पोस्टर शेयर भी किया है. उन्होंने कैप्शन में लिखा, कार की तमन्ना बेकार नहीं जाएगी. अब कम से कम पैसे में आंटी आपको हर हफ्ते एक कार दिलाएगी. शो के पोस्टर का शीर्षक था ‘आंटी बोली लगाओ बोली: सबसे कम सबसे अनोखी’. शिल्पा ने फोटो कैप्शन में लिखा, ‘यह मेरा पहला टीवी प्रौडक्शन है.’ यह शो 24 सितंबर से कलर्स चैनल पर प्रसारित किया जाएगा.

मि. कबाड़ी : इस फिल्म को देखना है समय और धन की बर्बादी

फ्रांस के मशहूर लेखक मोलियर द्वारा लिखित नाटक ‘द बोर्जिवा जेंटलमैन’ में एक गरीब इंसान जब अमीर बन जाता है, तब उसकी जिंदगी की जो त्रासदियां होती हैं, उसका चित्रण है. उसी से प्रेरणा लेकर स्व. ओम पुरी की पूर्व पत्नी द्वारा लिखित व निर्देशित फिल्म ‘मि. कबाड़ी’ अपना प्रभाव छोड़ने में पूरी तरह से नाकामयाब रहती है. भारतीय समाज पर हास्यव्यंग युक्त यह फिल्म अपने मकसद से भटकी हुई नजर आती है.

यह कहानी है कबाड़ी का काम करने वाले कल्लू (अन्नू कपूर) की, जो छोटा सा स्क्रैप डीलर है. उसका जीवन एक दिन रंक से राजा में बदल जाता है. उसके बाद कल्लू मुस्कुराते हुए अपनी प्रेमिका चंदो (सारिका) से शादी करता है. कल्लू अपने दादा की जमीन के टुकड़े का मालिक है. जमीन की कीमतें आसमान छू रही हैं, क्योंकि इस पर राजमार्ग का निर्माण किया गया है. इस जमीन के टुकड़े से मिले धन से कल्लू अमीर हो जाता है, तब वह अपने अतीत को अलविदा कह कर एक नए अध्याय की शुरूआत करता है.

वह अपनी पिछली दोस्त गरीब दुःखी मलिन बस्ती वाले जीवन को हमेशा के लिए मिटाकर एक भव्य जिंदगी जीना चाहता है. इसलिए वह दिल्ली के पौश इलाके में बंगला खरीद कर रहने लगता है. अब तक उसका बेटा चमन स्कूल नहीं जाता था, पर अब वह उसे एक अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में प्रवेश दिला देता है. मगर बेटा चमन (राजवीर सिंह) पांचवीं से ज्यादा पढ़ नहीं पाता. उसके बाद उनके जीवन की त्रासदियों का सिलसिला शुरू होता है. उसका केवल एक ही सपना है उसकी गिनती एक सफल उद्योगपति के रूप में हो. मगर सम्मानित व्यवसाय चलाने के लिए उसके पास आवश्यक अनुभव या शिक्षा नहीं है. इसलिए वह राज्य के 150 से ज्यादा निजी शौचालयों का मालिक है, कल्लू का बेटा चमन इन शौचालयों को चलाता है और साप्ताहिक पैसा इकट्ठा करता है.

मगर चमन अपने इस पेशे से शर्मिंदा है. कल्लू और चमन सहित पूरा परिवार कहता है कि वह 150 होटलों की श्रृंखला के मालिक हैं पर जब जब चमन की शादी इस आधार पर तय होती है, तब तब सच सामने आ जाता है और चमन की शादी टूट जाती है. कल्लू का सपना समाज के उच्च लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना है, वह अपने बेटे चमन और बेटी मीठी (उल्का गुप्ता) की शादी अमीर परिवार में करने की इच्छा रखता है.

चंदो की मूर्खता के कारण कल्लू और चमन के सपने नीचे आते हैं. कहानी एक महत्वपूर्ण मोड़ पर तब पहुंचती है, जब चमन, शैली के साथ प्यार में पड़ जाता है. शैली के पिता मि. अरोड़ा (ब्रजेंद्र काला) को कबाड़ियों से नफरत है क्योंकि उनकी बहन कल्लू के साले यानी कि चमन के मामा भूरिया मदारी (विनय पाठक) के साथ भाग गई थी. पर अंत में चमन की शादी होती है. कल्लू को अहसास होता है कि उसे अपने अतीत से नफरत नहीं करनी चाहिए. मि. अरोड़ा की समझ में आता है कि काम छोटा या बड़ा नहीं होता है.

कमजोर व भटकी हुई पटकथा के चलते गरीब इंसान के अमीर बनने की त्रासदी पर बहुत अच्छे हास्य दृश्य रचे जा सकते थे, पर ऐसा नहीं हो पाया. फिल्म की पटकथा का कोई ओर छोर ही नहीं है. दिग्गज अभिनेताओं की मौजूदगी के बावजूद यह फिल्म प्रभावित नहीं करती. विनय पाठक के किरदार को बहुत दबा हुआ दिखाया गया है. सारिका का किरदार महज कैरीकेचर बनकर रह गया है. लेखक व निर्देशक के तौर पर सीमा कपूर ने फिल्म में लव जेहाद, शौचालय सहित बहुत कुछ पिरो दिया है. पर कुछ भी दर्शक के दिमाग तक नहीं पहुंचता. फिल्म मनोरंजक होने की बजाय बोर ही करती है. लेखक व निर्देशक के तौर पर सीमा कपूर निराश करती है.

जहां तक अभिनय का सवाल है, तो हास्य में माहिर कलाकार अन्नू कपूर ने काफी लाउड अभिनय किया है, जो कि मजा किरकिरा करता है. ऐसा लगता है कि बहन सीमा कपूर के संग रिश्ता निभाने के लिए अन्नू कपूर ने इस फिल्म में काम किया है. सरिका व विनय पाठक बंधक बनाए हुए लगते हैं. ओम पुरी कुछ हद तक प्रभावित करते हैं. इसके अलावा किसी भी कलाकार का अभिनय प्रभावित नहीं करता.

फिल्म में शौचालय के उद्घाटन समारोह में अनूप जलोटा का भजन भी असरदार नहीं है. पर एक शायरी ‘आंखों पर कभी न बांधो पट्टियां, ओ जाने वालों खुले में कभी ना जाओ टट्टियां..’’ से खुले में शौच न जाने की सलाह जरूर दी गयी है. फिल्म का संगीत पक्ष भी अति साधारण है.

कुल मिलाकर ‘मि. कबाड़ी’ ऐसी फिल्म है, जिसके लिए समय व धन बर्बाद करना मूर्खता ही कहलाएगी. ‘अनूप जलोटा फिल्मस’ और ‘ओम छानगानी फिल्मस’ एंड साधना टीवी के बैनर तले बनी फिल्म ‘मि. कबाड़ी’ के निर्माता अनूप जलोटा, सह निर्माता राकेश गुप्ता व ओम छानगानी, लेखक निर्देशक सीमा कपूर तथा कलाकार हैं- स्व. ओम पुरी, अन्नू कपूर, सारिका, विनय पाठक, ब्रजेंद्र काला, उल्का गुप्ता, राजवीर सिंह, कशिश वोरा व अन्य.

सलाखों के पीछे पहुंचा पंजाब पुलिस का एक एसपी, जानिए क्यों

पठानकोट एयरबेस पर जनवरी, 2016 में हुए आतंकी हमले को लोग अभी भूले नहीं होंगे. अगर आप को याद हो तो इस हमले के समय पंजाब के पुलिस अधीक्षक सलविंदर सिंह का नाम आया था. उन दिनों वह गुरदासपुर के एसपी (हैड क्वार्टर) थे. उन का तबादला हालांकि दूसरी जगह कर दिया गया था, लेकिन उन्होंने जौइन नहीं किया था.

संदर्भवश बता दें कि दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने बठिंडा से एक ऐसे युवक को गिरफ्तार किया था, जिस पर पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई को भारतीय वायुसेना के गोपनीय दस्तावेज उपलब्ध करवाने का आरोप था. इस युवक का नाम था रंजीत.

पुलिस द्वारा की गई पूछताछ से ये तथ्य सामने आए थे कि रंजीत एयरफोर्स का बरखास्त नौन कमीशंड औफिसर था. उस की उम्र 24 वर्ष थी. वह केरल के मलप्पुरम जिले के एक गांव का रहने वाला था.

एक दिन रंजीत को अपने फेसबुक अकाउंट पर दामिनी मैकनेट के नाम से एक महिला की फ्रैंडशिप रिक्वेस्ट मिली थी, जिसे उस ने स्वीकार कर लिया था. दामिनी द्वारा अपने प्रोफाइल में बताए अनुसार वह देशदुनिया की खबरों पर आधारित यूके की एक पत्रिका में फीचर राइटर थी.

सिलसिला आगे बढ़ा तो रंजीत के मैसेज बौक्स में उस ने अपना मोबाइल नंबर छोड़ कर उस से बात करने की गुजारिश की थी.

रंजीत ने इस नंबर पर बात की तो दोनों की अच्छीभली दोस्ती हो गई. कुछ दिन प्यारभरी मीठीमीठी बातें करते रहने के बाद एक दिन उस ने रंजीत से यह कहते हुए भारतीय वायुसेना से संबंधित कुछ जानकारियां मांगीं कि वह इस विषय पर अपनी पत्रिका के लिए एक फीचर तैयार करना चाहती है. रंजीत पहले ही उस के हनीट्रैप में फंस चुका था, उस ने जो भी जानकारी चाही, रंजीत ने बेझिझक दे दी. बाद में उस ने रंजीत से पठानकोट एयरबेस के बारे में काफी जानकारियां हासिल की थीं.

दिल्ली पुलिस द्वारा रंजीत से पूछताछ का सिलसिला जारी था कि 1 जनवरी, 2016 की भोर में गुरदासपुर जिले की सबडिवीजन पठानकोट के थाना नरोड जैमल सिंह के अधीन पड़ने वाली रावी नदी पर बनी कंबलौर पुलिया के पास एक लावारिस लाश पड़ी मिली. इस से थोड़े ही फासले पर एक गाड़ी खड़ी थी. अनुमान लगाया गया कि मरने वाला उसी गाड़ी का ड्राइवर रहा होगा.

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पुलिस गिरफ्त में रंजीत

अभी यह गुत्थी सुलझ भी नहीं पाई थी कि एक अन्य सनसनीखेज समाचार चर्चा का विषय बन गया.

पता चला कि बीती रात गुरदासपुर के एसपी (हैडक्वार्टर) सलविंदर सिंह को उन के साथियों समेत अपहृत कर के उन के साथ बुरी तरह मारपीट की गई. यह काम पाक आतंकियों का था जो उन्हें एक सुनसान जगह पर छोड़ कर उन की नीली बत्ती लगी कार अपने साथ ले गए थे.

जिस ड्राइवर की लाश बरामद की गई थी, छानबीन में पुलिस को उस के बारे में पता चला कि वह थाना नरोट जैमल सिंह के अंतर्गत पड़ने वाले गांव भगवाल का निवासी 35 वर्षीय इकागर सिंह था, जो अपनी इनोवा कार को टैक्सी के रूप में चलाया करता था. पिछली रात करीब 9 बजे किसी ने फोन कर के उस की कार किराए पर लेने के लिए किसी अज्ञात जगह पर बुलाया था. तभी से वह गाड़ी समेत गायब था.

1 जनवरी, 2016 को जब लाश के अलावा उस की गाड़ी बरामद की गई तो गाड़ी के चारों पहियों की हवा निकली हुई थी. गाड़ी को और भी काफी नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई थी. यह सीधेसीधे कत्ल के लिए हमला करने का मामला था.

पहली जनवरी की भोर में ही एक अनजान नंबर से गुरदासपुर के पुलिस मुख्यालय में एसपी सलविंदर सिंह की काल आई, जिस पर उन्होंने औपरेटर को बताया, ‘‘मैं इस वक्त गांव गुलपुर सिंबली में घायल पड़ा हूं. यहीं के किसी व्यक्ति से फोन ले कर बात कर रहा हूं. मेरी सारी बात नोट कर के मामला फ्लैश करवा दो.’’

सलविंदर सिंह ने फोन पर बताया कि पिछले रोज वह अपने एक रसोइए व करीबी दोस्त राजेश वर्मा के साथ इलाके के एक धार्मिक स्थल पर मत्था टेकने गए थे. रात के वक्त जब वे लोग अपनी महिंद्रा एक्सयूवी गाड़ी नंबर पीबी02ए बी0313 से वापस लौट रहे थे तो रास्ते में फौजी वरदी पहने 2 व्यक्तियों ने सड़क पर गाड़ी के सामने आ कर उन्हें रुकने का इशारा किया.

सलविंदर सिंह ने औपरेटर को बताया, ‘‘गाड़ी रुकने पर 3 अन्य व्यक्ति भी वहां आ गए. इस के बाद उन लोगों ने खतरनाक हथियारों के बल पर हमारा अपहरण कर लिया. रास्ते में मेरे साथसाथ मेरे रसोइए की पिटाई करने के बाद हमें गुलपुर सिंबली गांव के पास गाड़ी से उतार दिया गया. राजेश वर्मा को वे लोग अपने साथ ले गए. हमारे सैलफोन उन्होंने पहले ही हथिया लिए थे.’’

निस्संदेह यह गंभीर मामला था. जानकारी मिलते ही पुलिस अधिकारियों ने पठानकोट व आसपास के इलाकों में रेड अलर्ट जारी कर के उस इलाके की सख्त नाकाबंदी करवा दी.

उसी रोज राजेश वर्मा भी पुलिस से संपर्क साधने में कामयाब हो गया था. बुरी तरह पिटाई करने के अलावा उस की गरदन काटने का भी प्रयास किया गया था. उस की गरदन पर तेज धार हथियार का गहरा घाव था, जिस पर उस ने अपनी कमीज बांध रखी थी, जो खून से पूरी तरह लाल हो गई थी. राजेश को सिविल अस्पताल में दाखिल करवा दिया गया था.

चैकिंग के दौरान पुलिस को पठानकोट के गांव अकालगढ़ के नजदीक एक वीरान जगह से एसपी सलविंदर सिंह की गाड़ी खड़ी मिल गई थी. इनोवा चालक इकागर सिंह के कत्ल व एसपी और उन के साथियों के अपहरण के संबंध में अलगअलग प्रकरण दर्ज कर के पुलिस ने काररवाई शुरू कर दी.

इस जांच में एसपी सलविंदर सिंह ही संदेह के दायरे में आते दिख रहे थे. वैसे भी इस एसपी का पिछला आचरण सही नहीं माना जा रहा था. उस के खिलाफ एक साथ 5 महिला सिपाहियों ने गलत आचरण की शिकायत की थी, जिस के आधार पर गुरदासपुर से उस का ट्रांसफर कर दिया गया था. लेकिन रिलीव हो कर नई जगह जौइन करने के बजाय वह गुरदासपुर में ही जमा हुआ था.

बाद में एक महिला ने एसपी सलविंदर पर उस से नाजायज शादी करने का आरोप भी लगाया. मगर इन मामलों में उस के खिलाफ कहीं कोई काररवाई नहीं हुई थी.

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पुलिस गिरफ्त में सलविंदर सिंह

एनआईए (नैशनल इनवैस्टिगेशन एजेंसी) ने पूर्व में इस आरोप के आधार पर सलविंदर व उस के साथियों से पूछताछ की कि उस का संबंध पाक आतंकियों से था या नहीं. लेकिन इस पूछताछ में आतंकियों से संबंध वाला आरोप साबित नहीं हो सका, अलबत्ता यह आरोप जरूर प्रमाणित हो गया था कि सलविंदर के संबंध ड्रग माफिया से थे, जिन की खेप सीमा पार करवाने के एवज में वह उन से हीरे लिया करता था. यह भी पता चला कि एसपी का ज्वैलर दोस्त राजेश वर्मा इन हीरों की जांच किया करता था.

उस रात भी एसपी सलविंदर निकला तो इसी काम से था, मगर सामना हो गया था आतंकियों से. छानबीन से यह बात पूरी तरह साफ हो गई थी कि ड्राइवर इकागर सिंह के कत्ल व एसपी सलविंदर के साथियों समेत किए गए अपहरण में उन आतंकियों का ही हाथ था, जिन्होंने बाद में अपने अन्य साथियों से मिल कर पठानकोट एयरबेस पर हमला किया था. संदेह था कि एयरबेस संबंधी जानकारियां रंजीत के माध्यम से जुटाई गई थीं.

खैर, पूछताछ के बाद एनआईए ने एसपी सलविंदर व उस के साथियों को अपने यहां से रिहा कर के पंजाब पुलिस के हवाले कर दिया था, जहां इन के खिलाफ कोई खास काररवाई नहीं हुई.

इसी बीच एक और मामला भी उछला. दरअसल, गुरदासपुर का एक व्यक्ति रेप के आरोप में गिरफ्तार हुआ था. उस की पत्नी ने केस को झूठा बताते हुए एसपी सलविंदर सिंह से उस के पति को बचा लेने की गुहार लगाई. एसपी ने इस काम के लिए न केवल उस से 50 हजार रुपयों की रिश्वत वसूली, बल्कि उस की अस्मत भी लूट ली.

जमानत हासिल कर के घर लौटने पर पति को इस बात की जानकारी मिली तो उस ने एसपी के खिलाफ वांछित काररवाई करने के लिए पुलिस के उच्चाधिकारियों से विनती की. लेकिन किसी ने भी उस की शिकायत पर तवज्जो नहीं दी. एक दिन वह व्यक्ति पत्नी को साथ ले कर पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के संगतदर्शन कार्यक्रम में पेश हुआ और मुख्यमंत्री को सारी बात बता कर न्याय की गुहार लगाई.

मुख्यमंत्री के आदेश पर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस मामले की व्यापक जांच कर के एसपी सलविंदर सिंह के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की अनुशंसा कर दी. इस तरह 3 अगस्त, 2016 को सलविंदर के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 और प्रिवेंशन औफ करप्शन एक्ट की धारा 13 (2) के तहत गुरदासपुर के सिटी थाने में प्राथमिकी दर्ज हो गई.

गिरफ्तारी से बचने के लिए सलविंदर ने अदालत से अग्रिम जमानत हासिल करने का प्रयास किया. आखिरकार उसे पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से जमानत मिल तो गई, लेकिन जल्दी ही यह जमानत आदेश रद्द हो गया. इस के बाद सलविंदर लापता हो गया तो कोर्ट ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया गया.

रेप पीडि़ता को न्याय दिलवाने के लिए मीडिया ने भी सलविंदर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था.

आखिर सलविंदर कब तक भागता और कहांकहां छिपता. करीब 8 महीनों की लुकाछिपी के बाद इसी 20 अप्रैल, 2017 को दोपहर में उस ने गुरदासपुर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मोहित बंसल की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया, जिन्होंने उसे 5 मई तक न्यायिक हिरासत में गुरदासपुर के केंद्रीय जेल भिजवाने के आदेश जारी कर दिए. जल्दी ही यहां के अधिकारियों ने इसी जिले में एसपी रहे सलविंदर सिंह को सैंट्रल जेल, अमृतसर ट्रांसफर कर दिया.

कथा तैयार करने तक एसपी सलविंदर की जमानत नहीं हुई थी और गुरदासपुर पुलिस उस के खिलाफ आरोपपत्र तैयार करने में जुटी थी.

खतरे में है लाखों लोगों की नौकरी, कही इसमें आप भी तो नहीं

जिस प्रकार पुरी दुनिया में रोजगार को लेकर मारामारी है उस की वजह से आज हमारे देश में सात लाख लोगों की नौकरियां खतरे में हैं. यह दावा किया है अमेरिका की एक रिसर्च फर्म ने. रिसर्च फर्म एचएसएफ रिसर्च की रिपोर्ट पर यकीन करें तो नौकरियों पर यह खतरा औटोमेटिक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण बढ़ता दिखाई दे रहा है.

इसके अनुसार भारत में आईटी और बीपीओ सेक्टर में काम करने वाले सात लाख लोगों की नौकरियां खतरे में हैं. अमेरिका की रिसर्च कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में 2022 तक 7 लाख लोगों की नौकरी जाने तक की बात कही है.

हालांकि यह सभी के लिए बुरी खबर हो ऐसे हालात भी नहीं है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इसी अवधि में मध्यम और उच्च कौशल रखने वालों के लिए नौकरी के अवसर बढ़ेंगे. स्वचालन और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का उपयोग बढ़ने से भारत के सूचना प्रौद्योगिकी और बीपीओ उद्योग में कम कुशलता वाले कर्मियों की संख्या 2016 में घटकर 24 लाख रह गई है जो 2022 में मात्र 17 लाख रह जाएगी.

मध्यम कौशल वाली नौकरियों की संख्या 2022 तक बढ़कर 10 लाख हो जाएगी जो 2016 में नौ लाख थीं. उच्च कौशल वाली नौकरियों की संख्या भी 2022 तक बढ़कर 5,10,000 हो जाएगी जो 2016 में 3,20,000 थी. भारत में नौकरियों का यह रुख वैश्विक परिदृश्य के ही अनुरूप है.

वैश्विक स्तर पर कम कुशलता वाली नौकरियों की संख्या में 31% गिरावट की संभावना है जबकि मध्यम कुशलता वाली नौकरियों में 13% वृद्धि और उच्च कुशलता वाली नौकरियों में 57 फीसदी वृद्धि की उम्मीद है. स्वाचालन को अपनाने से भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं बीपीओ क्षेत्र में सभी कौशल स्तर पर 2022 तक नौकरियों का कुल नुकसान 3,20,000 रहने का अनुमान है.

कार में फोन चार्ज करते समय ना करें ये गलतियां

आज दुनिया में सबके पास स्मार्टफोन है और स्मार्टफोन आज हमारी सबसे बड़ी जरुरत बन गया है. हालांकि स्मार्टफोन में बैटरी की समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है. ये समस्या तब ज्यादा बढ़ जाती है जब यूजर्स फोन को गलत तरीके से चार्ज करने लगते हैं. इससे फोन की बैटरी पर बुरा प्रभाव पड़ता है.

कार में सफर करने वाले यूजर्स के पास कार चार्जर तो होता ही है, लेकिन कार चार्जर से फोन चार्ज करते समय हम कई गलतियां कर बैठते हैं और फोन को चार्ज होने में ज्यादा समय लग जाता है. यही नहीं, ऐसी गलतियों के चलते फोन की बैटरी को भी नुकसान हो सकता है. आज हम आपको इन्हीं गलतियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आप जाने अनजाने करते हैं.

फोन चार्जिंग में क्यों लगता है समय

अगर आप कार में स्मार्टफोन को यूज करते समय चार्ज कर रहे हैं तो बैटरी चार्ज होने में ज्यादातर समय लगेगा. ज्यादा फोन में चार्जिंग के अलावा जीपीएस और ब्लूटूथ जैसे फीचर्स लगातार काम कर रहे होते हैं. इसी के चलते जितना फोन चार्ज होता है उतनी ही बैटरी साथ-साथ खर्च होती जाती है. इससे आपके फोन के तथा बैटरी के खराब होने की संभावना बढ़ जाती है.

जरुरत हो तभी करें फोन चार्ज

ध्यान रहे कि कार चार्जर से प्रतिदिन फोन को चार्ज न करें. जब आपको सच में इसकी जरूरत हो तभी अपने फोन को चार्ज करें. अगर आप ऐसा नही करते हैं तो इससे फोन की बैटरी प्रभावित होती है. और हा अगर आप कार चार्जर से फोन चार्ज करते हैं तो जैसे ही फोन चार्ज हो जाए उसे चार्जिंग से हटा दें.

अच्छे चार्जर का प्रयोग करें

कार चार्जर की क्वालिटी पर ध्यान देना बेहद जरुरी है. फोन को चार्ज करने के लिए सही चार्जर का इस्तेमाल करें. यह टिप आपको घर पर भी काम आ सकती है. यानि अगर आप घर पर फोन चार्ज कर रहे हैं तो फोन के ओरिजनल चार्जर से ही चार्ज करें.

जल्दी चार्जिंग के लिए ये काम करें

फोन को जल्दी चार्ज करने के लिए फोन को स्विच औफ करे चार्ज करें. या फिर इससे फोन में कम खपत होगी और फोन भी जल्द हो जाएगा.

मेरे पति की जिंदगी में कोई लड़की है जो रात के वक्त उन्हें मैसेजेज भेजती है. मुझे डर है कि वह मेरे पति को छीन न ले.

सवाल
मेरे पति की जिंदगी में कोई लड़की है जो रात के वक्त उन्हें रोमांटिक मैसेजेज भेजती है. पति ने यह बात स्वयं मुझे बताई थी. वे उस लड़की को तवज्जुह नहीं देते. मगर आजकल वे मुझ से छिप कर उस लड़की के मैसेज पढ़ने लगे हैं. मुझे डर लगने लगा है कि कहीं वह मेरे पति को मुझ से छीन न ले. उन्होंने अपने मोबाइल में पासवर्ड भी डाल दिया है ताकि मैं उसे चैक न कर सकूं.

जवाब
सर्वप्रथम अपने मन में विश्वास रखें. अगर आप का पति के साथ रिश्ता मजबूत है तो कोई तीसरा आसानी से बीच में नहीं आ सकता. आप पति के साथ पहले की तरह ही व्यवहार कीजिए. बारबार शक की नजरों से देखने पर वे आप से बातें छिपाने लगेंगे. बेहतर होगा कि उन की जिंदगी में दखल देने के बजाय उन्हें अपने खूबसूरत साथ का हर पल एहसास दिलाएं और उस लड़की को अपने बीच में आने ही न दें. यदि फिर भी आप को लगे कि अब पति हाथ से निकल चुके हैं तो स्पष्ट तौर पर उन से इस संदर्भ में बात करें.

सोनाली बेंद्रे को किडनैप करवाना चाहते थे शोएब अख्तर!

बौलीवुड और क्रिकेट का रिश्ता बहुत पुराना है. बौलीवुड स्टार्स और क्रिकेटर्स का रिश्ता हमेशा खबरों में बना रहता है. ये सिलसिला आज से नहीं बल्कि 19वीं सदी से चलता आ रहा है. इन अफेयर्स में किसी का सफर शादी तक पहुंचता है तो कुछ बीच मझधार में ही अलग हो जाते हैं. लेकिन अपने डेट और अफवाहों की वजह से हर कोई विवाद का हिस्सा बना रहता है. तो चलिए आज हम आपको एक ऐसे ही रिश्ते के बारे में बताते हैं.

बौलीवुड एक्ट्रेस सोनाली बेंद्रे की खबसूरती पर भला किसका दिल ना फिसले. 90 के दशक में सोनाली की अदा पर कई दिल फिदा हुए थे जिनमें से एक नाम था पूर्व तूफानी गेंदबाज शोएब अख्तर का.

जी हां. विश्व के सबसे तेज गेंदबाज पाकिस्तान के शोएब अख्तर के करियर की शुरुआत में भारतीय अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे के साथ प्रेम संबंध के चर्चे सुनने को मिले थे. शोएब हमेशा अपनी पसंदीदा एक्ट्रेस में सोनाली बेंद्रे का नाम लेते हैं. ये दोनों भारत-पाकिस्तान सीरीज के दौरान कथित तौर पर मिले थे. हालांकि ये शोएब का एकतरफा प्यार था.

इस संबंध में शोएब ने अपनी मंशा को खुले तौर पर स्वीकारते हुए मजाकिया अंदाज में कहा था कि अगर सोनाली उनके प्रपोजल को स्वीकार नहीं करेंगी तो वह उन्हें किडनैप कर लेंगे. बाद में जब एक साक्षात्कार में उनसे यह बात पूछी गई तो उन्होंने बताया कि वह सोनाली को पसंद करते हैं लेकिन उन्होंने सोनाली को किडनैप करने के बारे में कभी नहीं सोचा. साथ ही शोएब ने बताया था कि वह सोनाली से कभी नहीं मिले. बवजूद इसके शोएब के संबंध में यह अफवाहें लगातार उड़ती रहीं. कहा तो यहां तक जाता है कि एक समय वो अपने बटुए में सोनाली बेंद्रे की तस्वीर लेकर घूमते थे.

सोनाली बेंद्रे ने साल 2002 में फिल्म निर्माता गोल्डी बहल से शादी कर ली. वहीं शोएब ने 2014 में रुबाब से शादी की. रुबाब बेहद खूबसूरत हैं.

शोएब मैदान के भीतर और बाहर हमेशा अपनी हाजिरजवाबी के लिए जाने जाते रहे हैं. शोएब ने साल 1997 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था. उन्होंने अगले कुछ सालों में अपनी सनसनाती हुई तेज गेंदों से दुनियाभर के बल्लेबाजों को परेशान किया था.

शोएब साल 2007 तक पाकिस्तान की ओर से टेस्ट क्रिकेट में सक्रिय रहे और उन्होंने 46 मैचों में 178 विकेट लिए. वहीं उन्होंने साल 2011 तक वनडे क्रिकेट खेलते हुए 163 मैचों में 247 विकेट लिए. इस दौरान वह अंतरराष्ट्रीय टी20 क्रिकेट में भी कुछ समय के लिए सक्रिय रहे और 15 मैच खेलते हुए उन्होंने 19 विकेट निकाले.

गौरी लंकेश : असहमति का एक और स्वर खामोश

तर्कवादी, स्वतंत्र विचारक और पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के बाद देश भर में एक बार फिर कट्टरपंथ हिंदुत्व निशाने पर है. गौरी की हत्या के खिलाफ दिल्ली, बंगलुरु, लखनऊ, मुंबई, हैदराबाद, पटना जैसे शहरों में प्रदर्शन शुरू हो गए. इस हत्या को नरेंद्र दाभोलकर, गोविंद पानसरे, एमएम कलबुर्गी की  हत्या की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है. हत्या पर सत्ता मौन है.

हत्या का हिंदुत्ववादियों पर शक है. वह भाजपा और उस के सहयोगी संगठनों की प्रखर विरोधी थीं. उन्हें कई बार जान से मारने की धमकियां मिल चुकी थीं. खबर है कि इस हत्या पर कट्टरपंथियों द्वारा जश्न मनाया गया. सोशल मीडिया में भाजपा नेताओं को फोलो करने वाले लोग खुशी जाहिर कर रहे हैं. गौरी की हत्या को हिंदू धर्म की रक्षा बताया जा रहा है.

55 वर्षीय गौरी लंकेश को बंगलुरु के राजराजेश्वरी नगर स्थित घर में 3 हत्यारों ने गोलियां चला कर हमेशा हमेशा के लिए खामोश कर दिया. गौरी लंकेश कन्नड टैब्लायड लंकेश पत्रिका निकाल रही थीं. उन के पिता पी. लंकेश प्रसिद्घ कन्नड लेखक, पत्रकार थे. वह कट्टरपंथियों के निशाने पर थीं. नवंबर 2016 में उन्हें भाजपा सांसद प्रहलाद जोशी की मानहानि मामले में 6 माह की सजा सुनाई गई थी. वह जमानत पर थीं. लेखन के अलावा वह सामाजिक सौहार्द के लिए काम करने वाले एक समूह की कार्यकर्ता थीं. वह पत्रकार से ज्यादा सोशल एक्टिविस्ट थीं.

वह समाज के शोषित, दबेकुचले लोगों के प्रति आवाज उठाती थीं. उन के विचार संपादकीय में साफ दिखते थे. वह दक्षिणपंथी हिंदूवादी विचारधारा पर बेबाक लिखती थीं. उन का मानना था कि धार्मिक और बहुसंख्यवाद की राजनीति भारत को तोड़ देगी. वह माओवादी समर्थक मानी जाती थीं. माओवादियों को मुख्यधारा में लाने का प्रयास कर रही थीं. उन्होंने दलितों, अछूतों को अधिकार दिलाने के लिए भी अभियान चलाया. उनकी पत्रिका के प्रसार में गिरावट के बावजूद उस की धार बनी रही. उस ने टकराना बंद नहीं किया.

दो साल पहले हंपी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर और मशहूर विद्वान 77 वर्षीय एमके कुलबर्गी को धारवाड़ में उन के घर के दरवाजे पर गोली मार कर हत्या कर दी गई थी. रैशनलिस्ट नरेंद्र दाभोलकर और तर्कवादी गोविंद पानसरे की कट्टरपंथियों ने जान ले ली थीं. इन के हत्यारों को अब तक सजा नहीं मिल पाना संकीर्ण विचारों और उस से जुड़े अपराधों को सरंक्षण देना ही है. विरोधी स्वरों को बंद करने के प्रयास किए जा रहे हैं. लोगों में सच का सामना करने का साहस नहीं है. एक औरत से भयभीत हो कर, कलम की ताकत से डर कर कत्ल का सहारा लिया गया.

कम्युनिज्म हो या फासिज्म, हर तरह का वाद खतरनाक है. कट्टरता कोई भी हो, बुरी है. उदारता से ही शांति, विकास हो सकता है. कट्टरता तो विध्वंस का आमंत्रण है. समस्या यह है कि हम अपने विचार दूसरों पर थोपना चाहते हैं. न मानने पर सामने वाले को दबाया जाता है, मारापीटा जाता है और जान से भी मार दिया जाता है. यह हालत राजनीतिक दलों में ही नहीं, समाज, परिवार में भी है. सहमत न होने पर भाईभाई लड़ पड़ते हैं, पतिपत्नी झगड़ने लगते हैं, सासबहू में घमासान मच जाता है.

हर व्यक्ति को अपनी बात कहने का अधिकार होना चाहिए. यह उस का प्राकृतिक हक है. हरेक के विचार एक जैसे नहीं हो सकते. यह प्रकृति की देन है. संविधान ने भी नागरिक को अभिव्यक्ति की आजादी दी है. असहमति का भी सम्मान किया जाना चाहिए.

हम जिस विचार से सहमत नहीं होते, उस का सम्मान, स्वागत का हमारा स्वभाव नहीं है. ऐसा होता नहीं है. असहमति को स्वीकार करना हमें सिखाया नहीं गया. ऐसे में हम कैसे अपनेआप को सहिष्णु समाज होने का दावा कर सकते हैं.

ट्रूकौलर ऐप ने पेश किए दो नए फीचर

दुनियाभर में ट्रूकालर ऐप के 25 करोड़ से ज़्यादा यूजर हैं.और भारत कंपनी के लिए सबसे बड़ा मार्केट है. नए फीचर ट्रूकालर के एंड्रायड वी 8.45 वर्जन पर उपलब्ध होंगे. इन फीचर को यूजर के लिए रोल आउट किया जाएगा. फास्ट ट्रैक नंबर और स्कैन एंड पे फीचर अभी सिर्फ भारतीय यूजर के लिए उपलब्ध होगा.

पहला फीचर है नंबर स्कैनर

इसकी मदद से अब आप बिलबोर्ड, बिजनेस कार्ड, या फिर किसी अन्य जगह से नंबर को स्कैन करने की सुविधा दी जाएगी. ऐसा फोन के कैमरे के जरिए संभव होगा. आप इस फीचर को ट्रूकालर ऐप में सर्चबार में मौजूद नया कैमरा आइकन की मदद से इस्तेमाल कर सकेंगे.

गैजेट 360 को इस फीचर की टेस्टिंग का मौका मिला था जिसमें पाया गया कि ट्रूलकालर ऐप ने इस फीचर के साथ बेहतरीन काम किया. यह तेज था और नंबर को स्कैन करने में भी सटीक था. इसके लिए आपको इंटरनेट कनेक्शन की जरूरत नहीं है और अगर आपके मोबाइल में इंटरनेट कनेक्शन है तो यह ऐप नंबर को ट्रूकालर के डेटा बेस में स्टोर कर लेगा. इसके बाद आपको उस शख्स या बिजनेस हाउस की पहचान भी मिल सकेगी.

भारत में ऐप के यूजर नए स्कैन फीचर को ट्रूकालर के साथ भी इस्तेमाल कर पाएंगे. तेजी से किसी को भी पैसे भेजने के लिए अब आपके पास स्कैन और पे फीचर है.

अगर ऐप के सामने कई नंबर एक ही फ्रेम में मौजूद हैं तो इसके जरिए आपको किसी एक नंबर को चुनने की सुविधा मिलेगी. अभी आप नंबर स्कैनर का इस्तमाल अपने फोटो लाइब्रेरी में मौजूद किसी तस्वीर से नंबर निकालने के लिए नहीं कर सकते. यह फीचर सिर्फ रियल टाइम में काम करेगा.

दूसरा नया फीचर फास्ट ट्रैक नंबर

यह फीचर बैंक, आपातकालीन सेवाओं, होटल और अन्य जरूरी नंबर को ट्रूकालर ऐप में स्टोर कर देता है. इन्हें आप सर्च बार के जरिए एक्सेस कर सकेंगे. इन फास्ट ट्रैक नंबर को आप आफलाइन रहने पर भी एक्सेस कर सकेंगे.

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