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गौरी लंकेश हत्याकांड : भाजपा और कांग्रेस में छिड़ा सियासी घमासान

वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की मंगलवार शाम को हुई हत्या के तीन दिन बाद भी जांच एजेंसी हत्यारे का सुराग नहीं लगा पाई है. इसके मद्देनजर सरकार ने मामले में लोगों की मदद लेने का फैसला लिया है और सुराग देने वाले को 10 लाख रुपये इनाम देने की घोषणा की है.

कर्नाटक के गृहमंत्री रामलिंगा रेड्डी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और मामले की जांच के लिए गठित पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) के सदस्यों के साथ बैठक के बाद इनामी राशि की घोषणा की. साथ ही 21 सदस्यीय एसआईटी से संपर्क के लिए फोन नंबर और ईमेल आईडी जारी किया है, जिसपर लोग सूचना दे सकते हैं. बेंगलुरु पुलिस ने लोगों से अपील की वह मामले से जुड़ी जानकारी फोन नंबर 09480800202 या ईमेल आईडी sit.glankesh@ksp.gov.in पर साझा करें.

रिपोर्ट भेजी

केंद्रीय गृह मंत्रलय को कर्नाटक सरकार से गौरी लंकेश की हत्या के मामले में रिपोर्ट प्राप्त हुई है. इसमें राज्य मुख्य सचिव ने सनसनीखेज हत्या का ब्योरा का विवरण दिया है.

हत्यारे की पहचान में मुश्किल आ रही

गौरीलंकेश के घर पर लगे सीसीटीवी फुटेज में एक काले जैकेट और हेलमेट लगाया व्यक्ति उनपर गोलियां चलाता हुआ दिख रहा है. पुलिस का कहना है कि हेलमेट की वजह से उसकी पहचान करने में मुश्किल आ रही है. गौरीलंकेश का घर पश्चिमी बेंगलुरु के भीड़भाड़ वाले राजराजेश्वरी वाले इलाके में है. इसके बावजूद अब तक कोई भी चश्मदीद गवाह सामने नहीं आया है. इस बीच, एसआईटी के सदस्य नए सिरे से गौरी के रिश्तेदारों और दोस्तों से पूछताछ कर रही है.

भाजपा-कांग्रेस में सियासी घमासान

गौरी लंकेश के हत्यारों का अब तक सुराग नहीं मिला है. लेकिन इस मुद्दे को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का सियासी दौर चरम पर है. भाजपा ने राज्य सरकार पर सवाल उठाया है कि गौरी की जान का खतरा होने के बावजूद उन्हें सुरक्षा क्यों नहीं दी गई. वहीं कांग्रेस ने गौरी की हत्या पर कथित तौर पर जश्न मनाने वालों के प्रति भाजपा के रुख को खतरनाक बताया है.

भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, गौरी की हत्या अफसोसजनक और दुर्भाग्यापूर्ण है. उन्होंने सवाल किया कि राज्य सरकार ने गौरी को सुरक्षा क्यों नहीं मुहैया कराई. प्रसाद ने कहा, गौरी के भाई इंद्रजीत लंकेश ने कहा था उनकी बहन नक्सलियों के आत्मसमर्पण के लिए काम करती थीं, तो क्या यह वह राज्य सरकार की सहमति से ऐसा कर रही थीं. यदि ऐसा था तो उन्हें पर्याप्त सुरक्षा क्यों नहीं दी गई थी.

उन्होंने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने राज्य सरकार पर सवाल क्यों नहीं उठाया. राहुल पहले ही आरएसएस से जुड़े समूहों को हत्या के लिए जिम्मेदार ठहरा दिया है. ऐसे में निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती.

प्रसाद के आरोपों पर कर्नाटक के गृहमंत्री ने रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि गौरी ने कभी सुरक्षा की मांग नहीं की थी. अगर वह सुरक्षा मांगती तो कोई भी सरकार इससे इनकार नहीं करती.

जदयू में छिड़ी वर्चस्व की जंग, चुनाव आयोग लेगा अंतिम फैसला

दो फाड़ होने की कगार पर पहुंचे जनता दल (यूनाइटेड) में नीतीश कुमार और शरद यादव के खेमों के बीच असली पार्टी होने व चुनाव चिह्न के दावों कों लेकर जंग तेज हो गई है. खुद को असली जदयू बताते हुए शरद यादव धड़े ने 17 सितंबर को दिल्ली में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई है. दूसरी तरफ नीतीश खेमे ने चुनाव आयोग में जाकर खुद को असली जदयू बताते हुए मौजूदा पार्टी चुनाव चिह्न उसी को आवंटित करने की मांग की है.

इससे पहले 25 अगस्त शरद यादव खेमे ने चुनाव आयोग में जाकर खुद को असली जदयू बताते व चुनाव चिह्न पर दावा ठोका था. शुक्रवार को नीतीश खेमे ने चुनाव आयोग में अपना प्रतिवेदन पेश करते हुए चुनाव चिह्न पर अपना दावा जताया है. जदयू संसदीय दल के नेता आरसीपी सिंह व पार्टी महासचिव के सी त्यागी ने चुनाव आयोग से कहा है कि जदयू के पदाधिकारी, विधायक व अधिकांश सांसद जदयू के अध्यक्ष नीतीश कुमार के साथ हैं. इसलिए पार्टी का चुनाव चिह्न उनको आवंटित किया जाए.

शरद यादव खेमा चुनेगा कार्यकारी अध्यक्ष

शरद खेमे ने 17 सिंतबर को दिल्ली के मावलंकर हाल में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई है. इस खेमे की राष्ट्रीय परिषद की बैठक 18 सितंबर की बजाय अब 8 अक्टूबर को होगी. जदयू के संविधान के तहत राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार की अनुपस्थिति में वरिष्ठ उपाध्यक्ष कार्यकारिणी की अध्यक्षता कर सकता है. बैठक के दौरान ही कार्यकारी अध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा.

सांसद-विधायकों से नहीं कार्यकर्ता से बनती है पार्टी

शरद खेमे के नेता अरुण श्रीवास्तव ने कहा है कि सांसद व विधायक भले ही नीतीश के साथ हों, लेकिन अधिकांश पदाधिकारी राज्य इकाईयां व कार्यकर्ता शरद यादव के साथ हैं. कोई भी पार्टी सांसदों व विधायकों से नहीं बल्कि कार्यकर्ताओं से बनती है. उन्होंने शरद यादव की सदस्यता खारिज करने की मांग पर कहा कि शरद यादव कुर्सी से चिपकने वाले नेताओं में नहीं रहे हैं.

अबू सलेम की आवाज पर धड़कता था इस अभिनेत्री का दिल

1993 में मुंबई बम धमाकों के मामले की सुनवाई कर रही टाडा अदालत अबू सलेम समेत 5 अन्य दोषियों को सजा सुना दी है. इस वजह से अबू सलेम तो चर्चा में हैं ही, एक्ट्रेस मोनिका बेदी का नाम भी सुर्खियों में आ गया है. मोनिका लंबे समय तक अबू सलेम की गर्लफ्रेंड रही थीं. इन दिनों वह बेशक फिल्मी दुनिया से दूर हैं, लेकिन एक समय वो भी था जब अबू की वजह से ही उन्हें फिल्में मिलनी शुरू हुई थी.

ये जानना दिलचस्प है कि एक अंडरवर्ल्ड डौन और एक स्ट्रगलिंग एक्ट्रेस के बीच प्यार की ये कहानी कहां और कैसे पनपी. मोनिका बेदी मूल रूप से पंजाब की हैं. उन्होंने ब्रिटेन की आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी इंग्लिश लिटरेचर की पढ़ाई की. डांस और माडलिंग में भी मोनिका को काफी दिलचस्पी थी. यही दिलचस्पी उन्हें मुंबई लाई और यहां आकर 1995 में उन्हें उनकी पहली फिल्म ‘सुरक्षा’ मिली.

कहा जाता है कि अबू सलेम से मोनिका की मुलाकात एक बौलीवुड पार्टी के दौरान हुई थी. लेकिन एक मुलाकात ने ही दोनों के बीच कुछ ऐसा आकर्षण पैदा किया कि फिर मुलाकातों का सिलसिला बढ़ गया.

मोनिका की मानें तो थोड़े वक्त के लिए ही सही, मोनिका का दिल अबू के लिए धड़का जरूर था. मोनिका के मुताबिक उन्हें नहीं पता था कि जिस शख्स के लिए उनका दिल धड़क रहा था वो अंडरवर्ल्ड का मोस्ट वान्टेड है. उन्हें नहीं पता था कि जिसके साथ वो प्यार कर बैठी हैं उसका असली नाम अबु सलेम है.

साल 1998 में मोनिका पहली दफा फोन पर सलेम के संपर्क में आईं. मोनिका दुबई में थीं, फोन पर उन्हें दुबई में एक स्टेज शो करने का आफर मिला. बस उसी के बाद वो अबू को चाहने लगीं. मोनिका सलेम की आवाज पर फिदा हो गई थीं. अबू सलेम भी मोनिका से बेहद प्यार करता था.

बताया तो यहां तक जाता है कि मोनिका को उनकी पहली हिट फिल्म ‘जोड़ी नंबर वन’ में भी सलेम ने ही काम दिलवाया था. बौलीवुड में मोनिका के लिए वह एक ऐसा दौर था, जब सब उनकी इज्जत करने लगे थे. हर कोई उन्हें खुश करने की कोशिश करता था. जबकि ये सब मोनिका की परफार्मेंस की वजह से नहीं, बौलीवुड में सलेम के खौफ की वजह से हो रहा था.

1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट के आरोपी अबू सलेम को साल 2005 में पुर्तगाल से प्रत्यर्पित किया गया था. बताया जाता है कि जब यह गिरफ्तारी हुई, तब होटल में उनके साथ मोनिका बेदी भी थीं.

सुनने में आया था कि इसके बाद मोनिका ने सलेम का साथ छोड़ दिया था और सरकारी गवाह बन गई थीं. बता दें कि मोनिका फर्जी पासपोर्ट के मामले में चार साल जेल में बीता चुकी हैं.

अपने हिस्से की सजा काटकर वह कई टीवी रिएलिटी शोज में भी नजर आ चुकी हैं. वह बिग बौस सीजन 2 के अलावा झलक दिखला जा में भी नजर आई थीं. उन्होंने यूनिवर्सल म्यूजिक के एक एलबम के लिए इक ओंकार भी गाया है. साल 2013 में उन्होंने स्टार प्लस के शो सरस्वतीचंद्र में नेगेटिव रोल भी किया था.

क्या आप जानते हैं गूगल मैप के ये फीचर्स

आज के जमाने में हर किसी के पास स्मार्टफोन मौजूद है. ये स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन गया है. इसके जरिए बड़े से बड़े काम आसानी से किए जा सकते हैं. इनमें से ही एक काम है रास्ता ढूंढना. लगभग हर स्मार्टफोन में गूगल मैप्स प्री-इंस्टौल्ड आता है. इसके जरिए यूजर्स किसी भी रास्ते का पता लगा सकते हैं. सबसे अहम बात अगर यह एप आपके फोन में पहले से मौजूद है तो एप से फोन में वायरस आने या हैंग होने जैसी समस्या भी नहीं आती है.

वैसे तो गूगल मैप्स के बारे में आप अच्छे से जानते होंगे लेकिन इस पोस्ट में हम आपको इससे संबंधित कुछ फीचर्स के बारे में बताएंगे जिन्हें शायद आप जरुर आजमाना चाहेंगे.

जूम करना         

अगर आप गूगल मैप इस्तेमाल करते हुए कहीं जा रहे हैं तो जाहिर है कि आप इसे औपरेट करने के लिए दोनों हाथों का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं. अगर आप मैप को जूम करना चाहते हैं तो आपको बस मैप पर डबल टैप करना होगा. इससे मैप जूम हो जाएगा और इसे आप एडजस्ट भी कर पाएंगे. लेकिन इसे जूम करने की भी एक सीमा है, हालांकि इसके फुल जूम होने से पहले आपको सब साफ साफ समझ में आने लगेगा.

पर्सनल मैप बनाएं

गूगल मैप (डेस्कटौप) पर आप खुद का मैप भी बना सकते हैं. इसके लिए आपको मेन्यू में जाकर प्लेस पर क्लिक करना होगा. इसके बाद मैप और फिर क्रियेट मैप पर क्लिक करें. यहां से आप मैप को कस्टमाइज कर सकते हैं. इसे आप अपने दोस्तों के साथ शेयर भी कर सकते हैं.

यात्रा के दौरान लगाएं स्टौप

यात्रा करने के दौरान आप ब्रेक भी ले सकते हैं. इसका मतलब कि गूगल मैप पर आप मल्टीपल स्टौप फीचर का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसमें स्टार्टिंग प्वाइंट और डेस्टीनेशन डालें. स्टार्टिंग प्वाइंट के बराबर में तीन डौट्स दिए गए होंगे जिस पर क्लिक करने से आपको स्टौप का औप्शन मिलेगा. हालांकि यह फीचर केवल आईओएस में ही दिया गया है.

एक्सप्लोर

अगर आपको कोई जगह पसंद आई है तो आप उसे रेटिंग दे सकते हैं. साथ ही डिस्क्रिप्शन भी जोड़ सकते हैं. इसके लिए आपको मैन्यू में जाकर औप्शन मिल जाएगा.

लोकेशन शेयर करें

यहां आप अपने मौजूदा लोकेशन को किसी के साथ भी शेयर कर सकते हैं. यही नहीं आपके दोस्त की लोकेशन क्या है इसका पता भी आपको चल जाएगा. इसके लिये आपको शेयर योर लोकेशन पर क्लिक करना होगा.

पोस्टर ब्वायज : निराश करती है ये फिल्म

श्रेयस तलपड़े द्वारा निर्मित व उनके अभिनय से सजी 2014 की मराठी भाषा की फिल्म ‘‘पोस्टर ब्वायज’’ का श्रेयस तलपड़े बतौर निर्देशक व अभिनेता हिंदी रीमेक ‘‘पोस्टर ब्वायज’’ लेकर आए हैं, जो कि दिशा हीन पटकथा पर बनी अस्सी के दशक के पुराने चुटकुलों से भरपूर अति बोरियत वाली फिल्म है.

फिल्म की कहानी हरियाणा के एक गांव की है. सरकार की गलती के चलते इस गांव के तीन पुरुषों स्कूल शिक्षक विनय शर्मा (बाबी देओल), रिकवरी एजेंट कम गली का गुंडा अर्जुन सिंह (श्रेयष तलपड़े) और पूर्व सैन्य अधिकारी जागवार चौधरी (सनी देओल) की तस्वीरें नसबंदी से जुड़े एक पोस्टर पर छप जाती हैं, जिस पर लिखा हुआ है कि हमने नसबंदी करवा ली.

इससे इन तीनों की जिंदगी में परेशानियों का दौर शुरू हो जाता है. गांव के लोग इनकी मर्दांनगी पर सवाल उठाने लगते हैं. जागवार चौधरी अपनी पत्नी सुनीता (सोनाली कुलकर्णी) के सहयोग से अपनी बहन की शादी तय करने में लगे हुए हैं. पर इस पोस्टर के बाद उनकी बहन की शादी होना मुश्किल हो जाता है. जबकि विनय शर्मा का हर दिन पत्नी से झगड़ा होने लगता है. वह अपना घर छोड़कर मायके जाने की बात करती है. जबकि अर्जुन सिंह की खुद की शादी में समस्या आ जाती है. तब यह तीनों सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू कर देते हैं.

मराठी फिल्म की पटकथा का हिंदी में रूपांतरण करने व उसे हरियाणा में स्थापित करते करते पटकथा लेखक इस तरह की गलतियां कर बैठे हैं कि पूरी फिल्म ही दिशाहीन हो गई है. नसबंदी के पोस्टर पर अपनी तस्वीर देखकर पुरुष को जो शर्मिंदगी होनी चाहिए और उससे जो हास्य उभरना चाहिए, वह कहीं उभरकर नहीं आता. कमजोर प्लाट व पटकथा के चलते एक हास्य फिल्म बनते बनते रह गयी. फिल्म में सारे जोक्स व चुटकुले 80 के दशक के हैं, जिन्हे सुनकर हंसी नहीं आती. सनी देओल की पुरानी फिल्मों के कुछ संवाद उठाकर इस फिल्म में ठूंसे गए हैं. फिल्म का संगीत भी कमजोर है.

जहां तक अभिनय का सवाल है तो एक भी कलाकार अपनी परफार्मेंस से प्रभावित नहीं कर पाता. सनी साउंड प्रा.लिमिटेड, श्रेयस तलपड़े व दीप्ति तलपड़े निर्मित व श्रेयस तलपड़े निर्देशित फिल्म ‘‘पोस्टर ब्यायज’’ के पटकथा लेखक पारितोष पेंटर व बंटी राठौड़, संगीतकार तनिष्क बागची, कैमरामैन निगम बोमजान तथा कलाकार हैं- सनी देओल, बाबी देओल, श्रेयस तलपड़े, सोनाली कुलकर्णी व अन्य.

पेंशन योजनाओं में बड़े बदलाव करने को तैयार है सरकार

सामाजिक पेंशन योजनाओं में बड़े बदलावों के लिए सरकार ने खाका तैयार किया है, लेकिन अभी सरकार की नजर रेवेन्यू पर है वह अभी इस उलझन में है कि जीएसटी के बाद आए रेवेन्यू के भरोसे किये गये बदलावों को जमीन पर उतारा जा सकता है या नहीं.

अनुमानों के मुताबिक, नैशनल सोशल असिस्टेंस प्रोग्राम (NSAP) से बजट पर 10 से 12 हजार करोड़ का अतिरिक्त भार पड़ेगा अभी इसका बजट 9,500 करोड़ रुपये है. आपको बता दें कि अभी नैशनल सोशल असिस्टेंस प्रोग्राम तहत वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और दिव्यांग पेंशन दी जाती है. अगर पेंशन योजनाओं में सरकार इन तरह के बदलाव चाहती है तो उसे करीब 22 हजार करोड़ का फंड जुटाना होगा.

प्रस्ताव के मुताबिक सरकार वृद्धवस्था पेंशन को 200 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये कर सकती है इस तरह सरकार वृद्धावस्था पेंशन में ढाई गुना तक का इजाफा करेगी इसमें केंद्र सरकार का योगदान 300 रुपये होगा और राज्य सरकार का 200 रुपये.

सरकार ने पेंशन स्कीम की फंडिंग में भी बड़े बदलाव का खाका तैयार किया है केंद्र सरकार सारा खर्चा खुद उठाने की बजाए 40 प्रतिशत राज्य सरकार से जुटा सकती है, इस तरह अगर 40 प्रतिशत खर्चा हटा दें, तब भी करीब 10 हजार करोड़ का भार केंद्र सरकार पर ही है.

वर्तमान में पेंशन योजनाएं करीब 3.5 करोड़ घरों को कवर करती है, इसका दायरा बढ़कर 8.72 करोड़ हो सकता है 18 से 39 साल की विधवाओं को भी पेंशन मिलने का प्रस्ताव है साथ ही उन्हें दूसरी शादी के लिए भी आर्थिक मदद दी जाएगी.

आपको बता दें कि अभी तक विकलांग पेंशन के लिए 80 प्रतिशत विकलांगता जरूरी होती थी. अब सरकार इसे आधा यानी 40 प्रतिशत करने को तैयार है साथ ही पेंशन को 300 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये भी किया जा सकता है.

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को तैयार कर लिया है और अब इसे वित्त मंत्रालय की खर्च संबंधी समिति के समक्ष रखा जाएगा उसके बाद ही फंड्स से जुड़ी तस्वीर साफ हो पाएगी.

डैडी : अर्जुन रामपाल का दमदार अभिनय

मुंबई के डौन से राजनेता बने अरुण गवली के जीवन पर फिल्मकार आशिम अहलूवलिया की फिल्म ‘डैडी’ में अर्जुन रामपाल के दमदार अभिनय के अलावा कुछ नहीं है.

यह कहानी है मुंबई के वर्ली इलाके की दगड़ी चौल में रहने वाले एक गरीब मिल मजदूर के बेटे अरुण गवली की, जो कि गैंगस्टर की राह पकड़कर खुद को गैंगस्टर के रूप में इस कदर स्थपित करता है कि लोग उससे डरने लगते हैं और फिर वह राजनीति में कूद कर चुनाव लड़ता है. उसके निर्वाचन क्षेत्र के लोग उससे डरते हैं. वह उसे चुनाव जिताने में कमी नहीं रखते.

फिल्मकार ने ‘सत्यकथा’ बयां करने के दावे के साथ फिल्म में डैडी यानी कि अरुण गवली को कठोर, निर्दयी, ठंडे खूनी की बजाय अनिच्छा से गैंगस्टर बने इंसान के रूप में पेश किया है, जो कि एक पारिवारिक इंसान है. वह दोस्तों का दोस्त है और अपने परिवार, अपनी पत्नी व बेटियों से बहुत प्यार करता है. उसकी आपराधिक गतिविधियां अपने दोस्तों के प्रति निष्ठा से संतुलित है. अर्थात अब तक लोगों के दिमाग में अरुण गवली की जो छवि रही है, उससे यह कहानी मेल नहीं खाती.

फिल्मकार ने उन्हें एक गैंगस्टर की बनिस्पत एक पारिवारिक इंसान के रूप में पेश करने का ज्यादा प्रयास किया है. इसके बावजूद फिल्म में मार धाड़ व खून खराबा सहित सभी आम मसाला फिल्मों के फार्मूले हैं. परिणामतः कहानी का मजा किरकिरा हो जाता है. फिल्मकार एक अपराधिक प्रवृत्ति के इंसान की अतीत के कुछ घटनाक्रमों व अतीत की कहानी को रोचक तरीके से पेश कर भी अपनी फिल्म को मनोरंजक व रोचक बनाते रहे हैं, पर इस आधार पर भी आशिम अहलूवालिया बुरी तरह से विफल रहे. घटिया कहानी और नाटकीय संवादों से युक्त इस फिल्म में ऐसा कुछ भी रोचक नहीं है, जिसकी वजह से दर्शक फिल्म को देखना चाहे.

गैंगस्टर की कहानी होने के बावजूद फिल्मकार ने अरुण गवली के कृत्यों को सही ठहराने का असफल प्रयास किया गया है. फिल्म में एक संवाद है, जहां एक पात्र एक पुलिस अफसर से कहता है, ‘‘यदि आप एक चौल में पैदा होते और वह यानी कि अरुण गवली एक पुलिस अफसर के घर तो आप गुंडा और वह पुलिस अफसर होता.’’

यदि हम कहानी की सत्यता को नजरंदाज कर फिल्म पर गौर करें, तो यह फिल्म महज डैडी उर्फ अरुण गवली का किरदार निभाने वाले अभिनेता अर्जुन रामपाल के दमदार अभिनय के लिए ही देखी जा सकती है. कई दृश्यों में अर्जुन रामपाल की बौडी लैंगवेज कमाल की है. उन्होंने संवाद अदायगी, भाषा व बौडी लैंगवेज पर काफी मेहनत की है. मुंबई शहर पर शासन करने वाले मकसूद भाई के किरदार में फरहान अख्तर की परफार्मेंस असरदार नहीं है.

कैमरामैन जेसिका ली गने और पंकज कुमार ने कुछ दृश्यों को बड़ी खूबसूरती से अपने कैमरे से पकड़ा है. अर्जुन राम पाल और रूतविज पटेल निर्मित फिल्म ‘डैडी’ के निर्देशक आशिम अहलूवालिया, लेखक आशिम अहलूवालिया व अर्जुन रामपाल, संगीतकार साजिद वाजिद तथा कलाकार हैं- अर्जुन रामपाल, फरहान अख्तर, ऐश्वर्या राजेश, निशिकांत कामत, राजेश श्रृंगारपुरे, श्रृति बापना व अन्य.

मैदान पर अनोखी थी क्रिकेट के इन दो महान खिलाड़ियों की लड़ाई

एक दौर था जब सर डौन ब्रैडमैन, सर विवियन रिचर्ड्स और सुनील गावस्कर जैसे दिग्गज खिलाड़ी क्रिकेट जगत पर राज करते थे. पूरी दुनिया इनकी प्रतिभा का लोहा मानती थी. लेकिन समय बीतने के साथ-साथ दिग्गजों ने जब अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहा तो 90 के दशक में दो ऐसे क्रिकेट स्टार्स ने इंटरनेशनल लेवल पर अपनी दस्तक दी, जिनकी तुलना बाद में इन्हीं महान खिलाड़ियों से की जाने लगी.

भारत के स्टार बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर और वेस्टइंडीज के धुरंधर ब्रायन लारा ने अपने खेल के दम पर वो मुकाम हासिल किया. जिसकी वजह से इन्हें क्रिकेट जगत के महान खिलाड़ियों की श्रेणी में शुमार किया जाता है. सचिन और लारा ने अपने अंतर्राष्ट्रीय करियर की शुरुआत लगभग एक ही साथ की थी और आगे चलकर वो मुकाम हासिल किया कि वेस्टइंडीज में भी क्रिकेट फैंस सचिन की बल्लेबाजी देखना चाहते थे तो वहीं भारत में भी क्रिकेट फैंस लारा को बेहद पसंद करते थे.

ये बात किसी से छुपी नही है कि सचिन और लारा के बीच हमेशा कौम्पिटिशन चलता रहता था और इसी का ताजा उदाहरण लारा ने लौर्ड्स में एमसीसी में लेक्चर के दौरान दिया. वेस्टइंडीज के इस पूर्व दिग्गज बल्लेबाज ने माना कि 1994 का भारत दौरा उनके क्रिकेट करियर के सबसे मुश्कल दौरों में से एक था. क्योंकि भारत आने से पहले लारा लगातार क्रिकेट खेल रहे थे और रन स्कोर कर रहे थे. भारत आने से पहले उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ सिरीज में हिस्सा में लिया था. उसके बाद एजबेस्टन में डरहम काउंटी क्रिकेट क्लब के खिलाफ क्रिकेट खेला था. जाहिर तौर पर लगातार क्रिकेट ने उन्हें काफी थका दिया था. लेकिन बावजूद इसके वो सचिन के साथ कौम्पिटिशन को मिस नहीं करना चाहते थे.

1994 में भारत और वेस्टइंडीज के बीच 3 टेस्ट मैचों की सिरीज का पहला टेस्ट मुंबई में खेला गया था. जिसमें भारत ने 96 रन से जीत दर्ज की. इस टेस्ट में सचिन ने पहली पारी में 34 और दूसरी पारी में में 85 रन बनाए थे. जबकि ब्रायन लारा ने पहली पारी में 14 रन बनाए और दूसरी पारी में वो खाता भी नहीं खोल पाए थे. लारा ने बताया की वो पहले टेस्ट में खराब प्रदर्शन के साथ ही सचिन के साथ अपनी लड़ाई हार गए थे.

मुंबई टेस्ट जीतकर टीम इंडिया सीरीज में 1-0 से आगे थी. जिसके बाद नागपुर में खेला गया सिरीज़ का दूसरा टेस्ट मैच ड्रौ रहा. नागुपर टेस्ट की पहली ही पारी में सचिन ने 179 रन की शानदार पारी खेली. वहीं लारा ने पहली पारी में अर्धशतक जड़ा. दूसरी पारी में भी सचिन ने अपनी शानदार फौर्म जारी रखी और 54 रन बनाए. वहीं दूसरी पारी में लारा महज 3 रन बना पाए.

लारा ने बताया कि सिरीज के आखिरी और निर्णायक टेस्ट में भारत ने मोहाली में ग्रीन टौप देकर गलती की. मोहाली टेस्ट की पहली पारी में लारा ने 40 रन बनाए. जबकि सचिन ने भी पहली पारी में 40 रन बनाए. इसके बाद लारा ने दूसरी पारी में 91 रन बनाए. मैच पूरी तरह से भारत के हाथ से निकल चुका था. दूसरी पारी में सचिन के बल्ले से सिर्फ 10 रन निकले और भारत को इस मैच में 243 रनों के बड़े अंतर से हार का सामना करना पड़ा.

लारा ने मोहाली टेस्ट की दूसरी पारी में हुए किस्से को याद करते हुए बताया कि ‘जब मैं 91 रन के निजी स्कोर पर खेल रहा था तब गेंद बल्ले का किनारा लेकर विकेटकीपर नय मोंगिया के हाथो में गई. भारतीय गेंदबाज वेंकेटपति राजू ने जोरदार अपील की. लेकिन उसके बाद भी मैं क्रीज छोड़ने को तैयार नहीं था. मैं उम्मीद कर रहा था कि अंपायर वेंकेटराघवन मुझे नौट आउट देंगे. लेकिन जैसे ही उन्होंने आउट का इशारा किया, मैं मैदान छोड़कर पवेलियन की तरफ लौट गया और इस तरह से मैं भारत में कभी भी टेस्ट शतक नहीं लगा पाया.

ये सिरीज़ भले ही 1-1 से ड्रौ रही हो लेकिन अगर लारा और सचिन के प्रदर्शन की तुलना करें तो लारा ने 3 टेस्ट मैचों में 33 की औसत से 198 रन बनाए. जबकि सचिन तेंदुलकर ने 3 टेस्ट मैचों में 67 की औसत से 402 रन बनाए.

आप भी रहते हैं किराये के घर में तो ये खबर आपके लिए ही है

मोदी सरकार लगातार कालेधन और टैक्स चोरी करने वालों पर शिकंजा कस रही है. अगर आप किराया देते हैं तो इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट की आप पर नजर हो सकती है. आपने आईटी डिपर्टमेंट के निर्देशों को पालन नहीं किया तो आपके खिलाफ कारवाई भी संभव है.

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने किरायेदारों को किराया भरने और उससे जुड़ी टैक्स भरने की जिम्मेदारी को लेकर कुछ निर्देश दिए हैं. इन्हें अनदेखा करना कुछ लोगों के लिए मुसीबत खड़ी कर सकता है.

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर मकान मालिक को किराया देने और उस पर टीडीएस वसूलने को लेकर एक विज्ञापन जारी किया है, जिसमें साफ लिखा है कि अगर इस विज्ञापन को अनदेखा किया गया, तो इनकम टैक्स विभाग कार्रवाई कर सकता है.

इनकम टैक्ट विभाग की यह सूचना उन किरायेदारों के लिए है, जो हर महीने 50 हजार रुपए या उससे ज्यादा किराया भरते हैं. विभाग ने कहा है कि ऐसे लोग अपने मकान मालिक को जब किराया दें, तो वह टीडीएस काटने के बाद ही दें. विभाग ने कहा है कि ये लोग जब भी मकान मालिक को किराया सौंपें, तो उन्हें 5 फीसदी टीडीएस काटने के बाद ही किराया दें.

किराये में से काटे गए टीडीएस को किरायेदार को इनकम टैक्स विभाग के पास जमा करना होगा. यह टीडीएस TIN-NSDL.com पर जमा किया जा सकता है.

यहां आपको मकान मालिक के पैन नंबर की जानकारी देनी है और फार्म नंबर 26QC भरना होगा. इसमें सारी डिटेल्स एंटर कर आप टीडीएस जमा कर सकेंगे. यहां आपको अपनी पैन डिटेल देने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

यहां फार्म भरने के बाद आपको tdscpc.gov.in पर जाकर 16C फार्म को अपलोड करना होगा. यह फार्म आपके सर्टिफिकेट के तौर पर काम करेगा.

इनकम टैक्स विभाग ने साफ किया है कि अगर आप ऐसा नहीं करते और टैक्स विभाग की जांच में आपका नाम सामने आता है, तो आप पर इनकम टैक्स की धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है.

मैं 21 वर्षीय युवक हूं. मेरी आंखों के नीचे काले घेरे हो गए हैं. इन्हें हटाने का कोई तरीका बताएं.

सवाल
मैं 21 वर्षीय युवक हूं. मेरी समस्या यह है कि मेरी आंखों के नीचे काले घेरे हो गए हैं, जिन की वजह से उस जगह गड्ढे से हो गए हैं. इन्हें हटाने का कोई तरीका बताएं?

जवाब
आंखों के नीचे काले घेरे नींद पूरी न होने, स्ट्रैस व कंप्यूटर या मोबाइल के अधिक प्रयोग के कारण होते हैं. इन्हें हटाने के लिए 1 चम्मच टमाटर के रस में 1 चम्मच नीबू का रस मिला कर काले घेरों पर लगाएं. 10 मिनट बाद धो लें. टमाटर व नीबू में नैचुरल ब्लीचिंग एजेंट होते हैं, जो काले घेरे को हटाने में मदद करते हैं और स्किन को लाइट करते हैं. आंखों के नीचे के काले घेरों को हटाने के लिए आप बादाम के तेल का भी प्रयोग कर सकते हैं. बादाम के तेल में मौजूद विटामिन ई डार्क सर्कल्स को हलका करने में मदद करता है.

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