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स्टाइलिश डिजाइन और वाटरप्रूफ से लैस हैं ये साउंड बौक्स

संगीत प्रेमियों के लिये टेक्नोलौजी बाजार में इस समय अच्छे साउंड क्वालिटी के साथ कई ब्लूटूथ स्पीकर्स उपलब्ध है. ये स्पीकर्स बेहतरीन साउंड क्वालिटी के साथ आते हैं. बाजार में कम कीमत से लेकर ज्यादा कीमत तक के ब्लूटूथ स्पीकर्स उपलब्ध है, जिन्हें आप खरीद सकते हैं.

म्यूजिक के शौकीन यूजर्स अच्छे साउंड क्वालिटी के गैजेट खरीदने के लिए ज्यादा भी पैसे खर्च करने के लिए तैयार रहते हैं. यहां हम आपके लिए कुछ बेहतर साउंड क्वालिटी वाले स्पीकर्स की लिस्ट पेश कर रहे हैं, जो कम कीमत में अच्छी साउंड क्वालिटी देते हैं. साथ ही यह सभी वाटरप्रूफ भी हैं.

जेबिएल चार्ज 3

इस स्पीकर की बाजार में कुल कीमत 16,448 रुपये है. अगर हम इसके फीचर्स के बारे में बात करें तो इसका कुल वजन 1.76 पाउंड है. इसकी बैटरी बैकअप 20 घंटे, वायरलेस रेंज 30 फीट से ज्यादा है. अगर इसके फ्रिक्वेंसी के बारे में बात करें तो यह 65khz है, वहीं इसका ब्लूटूथ वर्जन 3.0 है.

जेबीएल चार्ज 3 ब्लूटूथ स्पीकर साउंड क्वालिटी, फीचर्स और कीमत में बहुत अच्छा है. इसकी कीमत भी काफी कम है. आकार में बड़े होने के कारण यह ट्रैवलिंग के दौरान यूजर्स को कुछ दिक्कत जरूर दे सकता है

यूई बूम 2

यूइ बूम 2 की बाजार में कुल कीमत 15,750 रुपयें है. संगीत प्रेमियो के लिये यह किमत कुछ ज्यादा नहीं है. इस स्पीकर की बैटरी स्टैंडबाई 15 घंटे है, वही अगर इसके वायरलेस रेंज की बात की जाऐ तो यह 30 फीट से ज्यादा है. यह आपके कमरे या कहीं भी आपके फोन से 30 फीट की दूरी तक आसानी से कनेक्ट रह सकता है. बार बार आपके मनोरंजन में रुकावट का कारण तो कतई नहीं बनेगा.

यूइ बूम को काफी बेहतरीन तरीके से डिजाइन किया गया है. इस ब्लूटूथ स्पीकर 15 घंटे की बैटरी लाइफ से लैस है. इसका वजन 1.2 पाउंड्स है. हालांक  इसकी साउंड क्वालिटी में खास कोई बदलाव नहीं किया गया है.

फूगू स्टाईल

इस ब्लूटूथ स्पीकर की सबसे बड़ी खासियत इसकी बैटरी लाइफ है जो कि 40 घंटे तक चलती है. जैसा की इसके नाम से आपको पता चल गया होगा की यह कितना स्टाईलिश होगा. इसका छोटा साइज आपको इसे कहीं भी ले जाने में आसानी देगा. साथ ही इसकी साउंड भी काफी अच्छी है.

बोस साउंड लिंक कलर 2

इस ब्लूटूथ स्पीकर के साइज के मुताबिक इसकी साउंड क्वालिटी बहुत अच्छी है. यह काफी यूजर फ्रैंडली है. इसके बिल्ट इन माइक का इस्तेमाल स्पीकरफोन और सिरी व गूगल नाउ जैसे डिजिटल असिस्टेंट के लिए किया जा सकता है. इसकी बैटरी लाइफ 8 घंटे की है. वहीं बाजार में इसकी कुल किमत 11,500 रुपये तक है.

यूई वंडरबूम

यह ब्लूटूथ स्पीकर काफी हल्के वजन के साथ आता है. साथ ही इसका साउंड काफी संतुलित और स्मूथ है. इसके साथ ही आप अपने ब्लूटूथ स्पीकर से एक साथ दो डिवाइसेज को कनेक्ट कर सकते हैं. इसे एक बार चार्ज करने पर लंबे समय तक के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. आपके एक बार चार्ज करने के बाद आप इसे 10 घंटे के लिये लगातार इस्तेमाल कर सकते हैं. बाजार में इसकी कुल किमत 6,999 रुपयें है.

जब ‘डेटिंग’ का औफर मिलने पर शरमा गई इस टेनिस स्टार की प्रेमिका

अमेरिका की स्टार गायिका और सुपर मॉडल निकोल शेरजिंगर के दुनियाभर में लाखों प्रशंसक हैं. कोई उनकी खूबसूरती पर मरता है तो किसी को गायकी पसंद हैं. उनका स्टाइलिश और ग्लैमर लुक उम्र को पीछे छोड़ देता है.

39 साल की होने के बावजूद वह युवा दिलों की धड़कन बनी हुई हैं. बुल्गारिया के स्टार टेनिस खिलाड़ी ग्रिगोर दिमित्रोव की प्रेमिका फिलहाल एक्स फैक्टर रियलिटी शो में जज की भूमिका निभा रही हैं.

इस दौरान एक ऐसा वाकया हुआ जिसकी निकोल ने कल्पना भी नहीं की थी. शनिवार रात शो का ऑडिशन चल रहा था. बतौर जज निकोल प्रतियोगियों का चयन कर रही थीं. इसी दौरान 25 साल का युवक रसेल जोंस भी अपनी परफौरमेंसस देने स्टेज पर आया.

वेल्स के रहने वाले जोंस ने गाना गाकर अपना परफॉरमेंस दिया और फिर कुछ ऐसा किया, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. जोंस ने कहा, निकोल, आप एक्स फैक्टर की मलिका हैं. मैं आपको डेट पर ले जाना चाहता हूं. आई लव यू.

जोंस की बात सुनकर निकोल समेत वहां मौजूद अन्य जज भी हैरान रह गए. हालांकि निकोल ने स्थिति को बेहद समझदारी से संभाला. उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, ओह माई गॉड, तुम्हारा व्यवहार काफी शानदार है. तुम मेरे लिए कैंडी की तरह हो. मेरा दिन शानदार बनाने के लिए शुक्रिया. इसके बाद निकोल ने जोंस को गले लगाया और कहा कि गायिकी में तुम्हारा भविष्य उज्ज्वल है.

‘पेट्रोलियम को जीएसटी के दायरे में लाया जाए’

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ग्राहकों के हितों को ध्यान में रखते हुए पेट्रोलियम पदार्थो को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाने के लिए वित्त मंत्रालय से अपील की है. अपने कदम को सही ठहराते हुए प्रधान ने कहा कि पूरे देश में एक समान कर व्यवस्था होनी चाहिए.

प्रधान ने कहा कि पेट्रोलियम पदार्थो को जीएसटी के दायरे में लाना पेट्रोलियम मंत्रालय का प्रस्ताव है. हमने राज्य सरकारों और वित्त मंत्रालय से पेट्रोलियम वस्तुओं को जीएसटी के दायरे में लाने की अपील की है. उपभोक्ताओं के हितों को देखते हुए करों को युक्तिसंगत रखने की जरूरत है.

उन्होंने आगे कहा कि पेट्रोलियम पदार्थो पर दो तरह के कर लगते हैं, जिसमें एक केंद्रीय उत्पाद शुल्क और दूसरा वैट है. यही कारण है कि उद्योग के दृष्टिकोण से समान कर तंत्र की उम्मीद कर रहे हैं.

दैनिक आधार पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों की समीक्षा को सही ठहराते हुए प्रधान ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जो भी शुल्क एकत्रित किया जाता है उसमें से राज्यों को 42 प्रतिशत हिस्सेदारी प्राप्त होती है. पेट्रोल और डीजल का घरेलू मूल्य अंतरराष्ट्रीय कीमतों से निर्धारित होता है. जो भी अंतरराष्ट्रीय कीमत होती है वहीं उपभोक्ताओं के पास जाती है. जब कीमतों में वृद्धि होती है तो हमें बढ़ोतरी करनी पड़ती है, उसी तरह जब गिरावट आती है हम दामों में कमी करते हैं.

पेट्रोलियम मंत्री की राय

– ग्राहकों के हितों के लिए पूरे देश में एक समान कर व्यवस्था होनी चाहिए

– राज्य सरकारों से भी पेट्रोलियम वस्तुओं को जीएसटी के दायरे में लाने की अपील

– दैनिक आधार पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों की समीक्षा सही फैसला

केंद्रीय कर का 42 प्रतिशत हिस्सा राज्यों से

पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि केंद्रीय कर का 42 प्रतिशत हिस्सा राज्यों से आता है और राज्यों की अपनी स्वयं की कर प्रणाली है. राज्यों से आ रहे कर संग्रह का एक बड़ा हिस्सा उपयोग किया जाता है. उन्होंने कहा कि देश में विभिन्न कल्याणकारी परियोजनाओं को लागू करने के लिए धन की आवश्यकता होती है. क्या आपको नहीं लगता कि हमें अच्छी सड़कों का निर्माण करना चाहिए, क्या आपको नहीं लगता कि हमें नागरिकों को साफ पेयजल देना चाहिए. भारत सरकार के खर्च को देखिये. पहले गरीबों की आवासीय योजना पर सरकार 70,000 प्रति इकाई खर्च करता थी और अब 1.5 लाख रुपये खर्च कर रही है.

पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों पर दिए गए एक बकवास बयान का सच

साल 2014 में जो गरीबी और बदहाली भ्रष्टाचार खत्म कर और विदेशों में जमा काला धन वापस लाकर हरेक के खाते में 15 लाख रुपये जमा करने का सपना दिखाकर खत्म करने की बात की जा रही थी उसका तरीका अब बदल दिया गया है.

पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाकर गरीबी दूर करने की वकालत करते केंद्रीय पर्यटन मंत्री केजे अलफ़ान्स ने बड़ी मासूमियत से कहा कि जो लोग कार और बाइक चलाते हैं वे भूखे नहीं मर रहे हैं और पेट्रोल डीजल खरीदने की हैसियत रखते हैं, वे बढ़े दामों का भुगतान कर सकते है और उन्हें यह करना ही पड़ेगा.

आम लोगों का क्या है, वे वही करेंगे जो अलफ़ान्स जैसे मंत्री लगभग धमका कर कह रहे हैं, वे सहारा और माल्या जैसे खास तो हैं नहीं जो सरकार यानि जनता के अरबों रुपये डकार जाएं, वे अंबानी या रामदेव जैसे कारोबारी भी नहीं हैं जो आकाश, वायु, जल, अग्नि और धरती तक खरीदने की हैसियत रखते हैं. इसलिए उन्हें 80 रुपये लीटर का पेट्रोल खरीदकर अपने देशप्रेम और भक्ति को दिखाना ही होगा, नहीं तो उनके पास उन देशों में जाकर बसने का विकल्प सरकार ने अभी छीना नहीं है, जहां पेट्रोल डीजल सस्ते हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के गुब्बारे की हवा तो कभी की निकल चुकी है, अब तो उस गुब्बारे को पंखों की हवा देकर जमीन पर गिरने से रोका जा रहा है. सोशल मीडिया पर मोदी के भक्त दुम दबाकर भागने लगे हैं और खुद भी ऐसी मजाकिया, लेकिन गंभीर पोस्टों को इधर से उधर कर रहे हैं कि मोदी राज में पेट्रोल डीजल भले ही महंगा हो गया हो पर उसकी क्वालिटी अच्छी है और इंजन भी खराब नहीं होता.

अलफ़ान्स जैसे मंत्रियों के बेतुके और बकबास बयानों से लोगों की चिढ़ और मोदी के प्रति बढ़ती है. लोग ढूंढ ढूंढ कर वे औडियो वीडियो क्लिपिंग साझा कर रहे हैं, वे फोटो पोस्ट कर रहे हैं, जिनमे भाजपा के दिग्गज नेता तत्कालीन सरकार को पेट्रोल डीजल के बढ़े दामों पर घेरते नजर आ रहे हैं. यह सरकार के प्रति आक्रोश नहीं तो क्या है, कोई अलफ़ान्स की इस थ्योरी से इत्तफाक नहीं रख रहा कि सरकार यूं रोबिनहुड़ बनकर गरीबी दूर करने का ड्रामा करे.

शायद ही आईएएस अधिकारी रहे अलफ़ान्स यह बताएं कि पेट्रोल डीजल जैसा जरूरी रोजमरराई आइटम खरीदने वाले लोग रईस किस आधार पर मान लिए गए. इस नए पैमाने पर तो चाय पीने वाला भी अमीर है, स्वच्छ भारत अभियान का लिहाज करते 2 वक्त 10 रुपये देकर सार्वजनिक शौचालय में पेट हल्का करने वाला भी पैसे वाला है. सार ये कि अब गरीब वही है जो खुले में शौच करने पर पेनल्टी भरता है और भीख मांग कर चाय पीता है.

बक़ौल अलफ़ान्स इसी टेक्स और बढ़े दामों से सरकार गरीबों के लिए घर और शौचालय बनवा रही है. धन्य हैं ये मंत्री जी जिन्हें यह नहीं मालूम कि बाइक अब हर किसी के पास है, कार हर मध्यमवर्गीय की जरूरत बन चुकी है, जो वादों और बातों से नहीं बल्कि पेट्रोल से ही चलती है जिसका खामियाजा भी वह भुगत रही है.

आज जो आम लोग इस बयान पर सोशल मीडिया पर हंसी मज़ाक में ही सही अपना जी हल्का कर रहे हैं, वही कल किसी अन्ना हजारे के नए आंदोलन की भीड़ बनकर सरकार का जीना मुश्किल करेंगे, तब कोई अलफ़ान्स या प्रधान सामने नहीं आयेगा. जनाक्रोश का सामना तो मोदी को ही करना पड़ेगा जिनके वादों पर उसने भाजपा को वोट दिया था.

दरअसल में बढ़ती मंहगाई अब बड़ा मुद्दा बनती जा रही है, जिसके आगे लोग वंदे मातरम, गौ माता और भारत माता जैसे भड़काऊ मुद्दों को डस्टबिन में डालने से चूकने वाले नहीं, जिनसे धार्मिक अहम तो तुष्ट होता है, पर पेट भरने वाली रोज मंहगी होती थाली सस्ती नहीं होती.  अब जिन्हें पेट्रोल डीजल सस्ता चाहिए, वे भूखे मरने को तैयार रहें.

मासूम त्वचा की कोमल देखभाल के ये सुझाव बेहद काम आएंगे

शिशु का जन्म घरआंगन में खुशियों के साथसाथ जिम्मेदारी भी ले कर आता है. जिम्मेदारी नवजात की सही परवरिश और उस की कोमल देखभाल की. ऐसे में नई मांओं के सामने यह जिम्मेदारी किसी चुनौती से कम नहीं होती, क्योंकि शिशु की देखभाल से संबंधित कई अहम बातों की जानकारी उन्हें नहीं होती.

स्तनपान के जरीए नवजात के शरीर का आंतरिक विकास तो सही ढंग से होता रहता है, मगर उस की त्वचा को सेहतमंद व सुरक्षित रखने के लिए ज्यादा देखभाल की जरूरत पड़ती है.

पेश हैं, कुछ सुझाव जो शिशु की त्वचा की कोमल देखभाल में आप के बेहद काम आएंगे:

बेबी बाथ

शिशु को नहलाते समय व नहलाने के बाद यहां बताई गई बातों का ध्यान रखें:

शिशु के नहाने का पानी या तो साधारण तापमान पर या फिर कुनकुना होना चाहिए. उस के शरीर को हाथों की सहायता से धीरेधीरे पानी डालते हुए साफ करें.

शिशु को नहलाने के लिए सौम्य बेबी सोप या लोशन का ही इस्तेमाल करें. किसी अन्य साबुन या लोशन का इस्तेमाल उस की नाजुक त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है.

शिशु के बालों को साफसुथरा रखने के लिए बेबी शैंपू का ही इस्तेमाल करें. शैंपू को हथेलियों पर हलका सा रगड़ने के बाद शिशु के बालों में लगाएं. पानी से साफ करने के लिए शिशु को अपनी गोद में बैठा कर हथेलियों में पानी ले कर धीरेधीरे सिर के आगे से पीछे की तरफ शैंपू साफ करें. ऐसा करने से शैंपू शिशु की आंखों को नुकसान नहीं पहुंचाएगा.

नहलाने के बाद नरम तौलिए से थपथपा कर शिशु के शरीर को सुखाएं.

बेबी मसाज

बच्चे के संपूर्ण विकास में उस की मालिश का सब से ज्यादा महत्त्व है. मालिश बच्चे की त्वचा के साथसाथ उस की हड्डियों को भी मजबूती व पोषण देती है. शिशु की मालिश के दौरान इन बातों का ध्यान रखें:

शिशु की मालिश के लिए पोषणयुक्त, कैमिकलरहित बेबी मसाज औयल का ही इस्तेमाल करें.

मालिश शुरू करने से पहले शिशु को आरामदायक स्थिति में लिटा लें. फिर हथेलियों पर तेल ले कर सब से पहले शिशु के पैरों की मालिश करें. इस के बाद हाथों व अन्य हिस्सों जैसे छाती व पीठ की मालिश करें.

मालिश करते समय शिशु के शरीर पर दबाव न डालें.

शिशु की मालिश हमेशा स्तनपान कराने से पहले ही करें.

शिशु की हथेलियों और तलवों पर भी मसाज औयल जरूर लगाएं. इस के साथसाथ उस के हाथों और पैरों की अंगुलियों की भी हलके हाथों से मालिश करें.

बेबी स्किन केयर ऐंड हाइजीन

शिशु की त्वचा की कोमलता बनाए रखने में इन बातों की भी बड़ी भूमिका है:

शिशु के नाजुक अंगों की साफसफाई के लिए तौलिया इस्तेमाल करने के बजाय सौफ्ट बेबी वाइप्स का प्रयोग करें. तौलिया या अन्य किसी कपड़े का इस्तेमाल करने से शिशु की त्वचा पर रैशेज पड़ने का खतरा रहता है.

नहलाने के बाद शिशु को कपड़े पहनाने से पहले उस के शरीर पर सौम्य बेबी पाउडर लगाएं. बेबी पाउडर की सुगंध बच्चे को ताजगी का एहसास देती है.

बच्चे की नैपी को समयसमय पर चैक करती रहें ताकि गीलेपन की वजह से बच्चे के नाजुक अंगों को नुकसान न पहुंचे.

बच्चे को नहलाने के बाद बेबी इयरबड्स की सहायता से उस के कानों में जमा शैंपू का पानी साफ करना न भूलें.

इन बातों का ध्यान रखने के साथसाथ शिशु के सही शारीरिक विकास के लिए हमेशा सौम्य बेबी प्रोडक्ट्स का ही चुनाव करें. शिशु की कोमल देखभाल का यह दौर आप के जीवन का सब से यादगार दौर होता है. इसलिए उस की कोमलता का ध्यान रखें.

पद्म पुराण

सत्ता में रहते कांग्रेस ने पद्म पुरस्कारों की रेवडि़यां अपनों को बांटबांट कर उपकृत किया था. अब यही मौजूदा एनडीए सरकार यानी भाजपा कर रही है. पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस के लिए भी आम सहमति चाहते हैं जिस से लगे कि कांग्रेस बेईमान थी, भाजपा नहीं है.

सरकारी पुरस्कारों का अपना एक अलग आकर्षण होता है. वहीं, पद्म पुरस्कार तो किसी उपाधि से कम नहीं होते, इसलिए हर कोई उन्हें किसी भी कीमत पर चाहता है. नीति आयोग के एक कार्यक्रम में नरेंद्र मोदी ने अप्रसंगवश यानी जानबूझ कर कहा कि अब पद्म पुरस्कारों में ‘खेल’ नहीं चलेगा.

अब औनलाइन भी नामांकन दाखिल किया जा सकता है. मोदी की मंशा कुछ भी हो पर औनलाइन नामांकन ईमानदारी की गारंटी नहीं हैं क्योंकि कई राज्यों में खसरेखतौनी और नकशे औनलाइन हैं, फिर भी पटवारी कैसे बारबार घूस खा रहे हैं.

किस करवट शरद यादव

जदयू के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव ने राजनीति में चढ़ाव ज्यादा, उतार कम देखे हैं. उन्हें पहली दफा 1975 में मध्य प्रदेश की जबलपुर सीट से जयप्रकाश नारायण की पहल पर संयुक्त विपक्ष का उम्मीदवार बनाया गया था. प्रयोग सफल रहा तो फिर शरद यादव ने मुड़ कर नहीं देखा.

धीरेधीरे वे भी दूसरे लोहियावादियों की तरह मतलबपरस्त और सत्ताभोगी होते चले गए. अब शरद यादव फिर सुर्खियों में हैं, जो कथित तौर पर जदयू से निकाल दिए गए हैं. कथित तौर पर इसलिए कि यह उन का और नीतीश का एक और प्रयोग हो सकता है जिस का मकसद नीतीश के प्रति जरूरत से ज्यादा नाराजगी न बढ़ने देना है. वाकई उन्हें कुछ करना था तो उस वक्त करना चाहिए था जब नीतीश भाजपा की गोद में बैठ रहे थे. अब सियायत से खारिज होते शरद यादव की मंशा अपने बेटे शांतनु बुंदेला को राजनीति में स्थापित करने की है यानी किसी वाद के कोई माने अब उन के लिए भी नहीं रहे.

रोमांटिक अध्यात्म

दिग्गज कांग्रेसी दिग्विजय सिंह वाकई समझदार व्यक्ति हैं जो पार्टी से निकाले जाने के पहले खुद ही अभिजात्य तरीके से निकल रहे हैं. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की तर्ज पर अब

वे भी 30 सितंबर से तकरीबन 2,500 किलोमीटर लंबी नर्मदा यात्रा करेंगे. इस दौरान वे कुछ ऐसे नियमों का पालन करेंगे जो कुछकुछ संन्यासियों जैसे होते हैं, मसलन खुद के हाथ का बना भोजन करना या भिक्षा मांगना, जमीन पर सोना, किसी के घर न ठहरना वगैरा.

इस अध्यात्मिक यात्रा में उन की नईनवेली खूबसूरत पत्नी अमृता राय उन के साथ रहेंगी. नर्मदा किनारे हरेभरे मैदानों की उन की यह यात्रा कम रोमांटिक भी नहीं होगी. यात्रा के लिए वे अपनी राजनीतिक गुरु सोनिया गांधी

और धर्मगुरु शंकराचार्य स्वरूपानंद से आशीर्वाद ले चुके हैं जो शायद फल जाए. पर इस के लिए 6-7 महीने इंतजार तो सभी को करना पड़ेगा. नर्मदा परिक्रमा से अगर मध्य प्रदेश में कांग्रेस सत्ता में वापस आती है तो यात्रा घाटे का सौदा नहीं.

पूर्वजों के भी पूर्वज

प्राइमरी स्कूल का बच्चा अकसर बड़े कुतूहल से पूछता है कि क्या वाकई हमारे पूर्वज बंदर थे. समझदार अभिभावक अपना यह जवाब हलक के नीचे ही रखते हैं कि पूर्वजों का तो पता नहीं, पर लगता है कि हम जरूर बंदर हैं जो बातबात पर खीखी करते एकदूसरे के धर्मों, जातियों और संप्रदायों पर झपट्टा मारा करते हैं.

भाजपा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी का बड़बोलापन किसी पहचान का मुहताज नहीं है. उन से हर कोई डरता है कि जाने वे कब क्या ऐसा बोल जाएं जिस की सफाईधुलाई करनी मुश्किल हो. इलाहाबाद में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जन्मशताब्दी वर्ष पर आयोजित समारोह में उन्होंने मुफ्त की सलाह यह दे डाली कि मुसलमान अगर शांति चाहते हैं तो उन्हें हिंदुओं को अपना पूर्वज मान लेना चाहिए. कौन इस विद्वान चिंतक और दार्शनिक राजनेता को समझाए कि हिंदुओं के पूर्वज कौन हैं, पहले यह तो तय हो. अब अमनपसंद मुसलमानों को चाहिए कि वे इतिहास या भूगोल के चक्कर में न पड़ते स्वामी की धौंस मान लें.

जीएसटी न भरने वाली कंपनियों पर शिकंजा कसेगा आयकर विभाग

जीएसटी नहीं भरने वाले व्यापारियों और कंपनियों को पकड़ने के लिए टैक्स डिपार्टमेंट देशव्यापी अभियान चलाने जा रहा है. एक सीनियर टैक्स अधिकारी के अनुसार टैक्स डिपार्टमेंट पूरे देश में तलाशी और सर्वे करने की योजना बना रहा है. जिसके तहत जान-बूझकर टैक्स भरने से बच रहीं कंपनियों की तलाशी अभियान अगले सप्ताह तक शुरू किया जा सकता है.

एक रिपोर्ट के अनुसार हाल ही में टैक्स अधिकारियो का एक दल पीएम नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरूण जेटली से मिला था, माना जा रहा है कि इसी मुलाकात के बाद टैक्स डिपार्टमेंट ने इस अभियान को चलाने का निर्णय लिया है.

टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा चलाये जाने वाले इस देशव्यापी अभियान के तहत कंपनियों की जीएसटी से संबंधित सभी कागजातों की जांच की जाएगी. वह इस जांच में यह पता लगाने का कोशिश करेगी कि क्या वह कंपनी गुड्स एण्ड सर्विस टैक्स चुका रही है या नहीं.

अधिकारी ने इस अभियान से सम्बन्धित सूचना देते हुए कहा कि हमें जीएसटी के अंदर नए रजिस्ट्रेशन करने वालों की संख्या बढ़ाने का टारगेट दिया गया है क्योंकि सरकार टैक्स के दायरे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को लाना चाहती है. हम जल्द ही पूरे देश में जाकर यह सुनिश्चित करेंगे कि जीएसटी के दायरे में आने वाली सभी कंपनियां जीएसटी भरने के लिए रजिस्ट्रेशन करवा लें.

सूत्रों का कहना है कि कई कंपनियां और बिजनस अभी भी जीएसटी चुकाने से बच रहे हैं क्योंकि उन्हे डर है कि कहीं टैक्स डिपार्टमेंट उनके टैक्स चुकाने के उनके पुराने इतिहास न खंगालने लगे. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब सरकार की जिम्मेदारी है यह देखना कि जीएसटी के नाम पर किसी को प्रताड़ित ना किया जाए. पी.डब्लयू.सी. इंडिया में नैशनल लीडर प्रतीक जैन का कहना है कि सरकार का यह कदम बिलकुल सही है, क्योंकि सरकार टैक्स देने से भाग रहे लोगों पर शिकंजा कसना चाहती है. लेकिन इस पूरी प्रक्रिया पर जीएसटी काउंसिल को अपनी नजर बनाए रखने की जरूरत है, ताकि किसी को भी प्रतिड़त न किया जाए.

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