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वाई फाई है स्लो, तो अच्छी स्पीड के लिये ये तरीके अपनायें

मौजूदा समय में ज्यादातर लोगों के घरों में वाई फाई का कनेक्शन तो है ही. वाई फाई से आप किसी भी डिवाइस को कनेक्ट कर सकते हैं. फिर चाहे वह कम्प्यूटर, लैपटौप, टैबलेट हो या फिर आपका मोबाइल फोन.

इंटरनेट कनेक्शन होने के बावजूद भी अगर इंटरनेट की स्पीड आपके मन मुताबिक ना हो तो आप क्या करेंगे. ज्यादातर लोगों को ऐसी ही समस्या का सामना करना पड़ता है. जिसकी वजह से उनके इंटरनेट पर होने वाला जरूरी काम प्रभावित होते हैं. अगर आप भी ऐसी ही किसी समस्या का सामना कर रहे हैं तो परेशान होने की जरूरत नहीं है.

आज हम आपको बता रहे हैं ऐसे 5 तरीकें जिससे आप अपने वाई फाई की स्पीड को बेहतर कर सकते हैं.

राउटर को रिसेट करें

यह आपके राउटर को ठीक करने का सबसे आसान तरीका है. अगर आपके वाई फाई की स्पीड कम हैं तो सबसे पहले उसकी सेटिंग को रिसेट करें. इसके साथ ही अगर आप राउटर की सेटिंग को अलग अलग करके रिसेट नहीं करना चाहते हैं तो आप डिवाइस को पूरा रिसेट कर दें. इसके लिए राउटर के बैक में दिए गए बटन को लंबे समय तक दबाकर रखना होगा और यह आपके राउटर की पूरी सेटिंग्स को रीसेट करेगा. लेकिन ध्यान रखें कि, आपको राउटर को फिर से री कौन्फिगर करना होगा. जिसमें आपको ‘नेटवर्क नेम’ और ‘पासफ्रेज’ को दोबारा सेट करने की जरूरत होगी.

केबल वायर की जांच करें

अक्सर ऐसा होता है जब गलती से राउटर का केबल खींच जाता है या ढीला हो जाता है. जिससे वाई फाई काम नहीं करता है. ऐसे में हमें जांच लेना चाहिए कि राउटर के सभी केबल ठीक से जुड़े हुए हैं या नहीं.

राउटर की पोजिशन को बदलें

राउटर की पोजिशन में थोड़ा सा फेरबदल करके आप इंटरनेट स्पीड को बेहतर कर सकते हैं. इसके लिए राउटर को थोड़ी ऊंची जगह पर रखें और कोशिश करें कि उसके सामने की तरफ कोई सामान मौजूद न हो. अक्सर राउटर के सामने कुछ और चीज रखी होने से राउटर का परफौर्मेंस घट जाता है.

चैनल को बदलें

यदि आपके घर के पास कई वायरलेस राउटर हैं तो भी कई बार आपका वाई फाई सही से काम नहीं करता है. ऐसा इसलिए भी होता है क्योंकि आपका राउटर और दूसरे वायरलेस राउटर समान वायरलेस आवृत्ति पर संकेत भेज रहे हैं. इसके लिए आप राउटर सेटिंग्स बदल दें.

पीसी को क्लीन करें

जब हम नेट सर्फिंग करते हैं तो कई बार हमारे पीसी में वायरस आ जाता है. जो आपके पीसी पर कुछ भी डाउनलोड होने नहीं देता हैं. ऐसे में हमें अपने पीसी को समय समय पर क्लिन करते रहना चाहिए.

जब जेल में माइक टाइसन ने किया था महिला अधिकारी के साथ सेक्स

माइक टायसन बौक्सिंग की दुनिया में एक बहुत बड़ा नाम हैं. आज दुनिया भर में लोग उन्हें आइडल मानते हैं. मगर एक वक्त था जब उनके दोस्त उनका मजाक उड़ाते थे. वह तब घर या स्कूल में इसकी शिकायत नहीं करते थे. बल्कि खुद ही उन लड़कों को मुक्का जड़कर सबक सिखाते थे.

1966 में जन्मा यह बौक्सर 13 साल की उम्र तक 38 बार हुए गिरफ्तार किया गया था. चलिये जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ रोचक बातें.

  • 1981-82 के जूनियर ओलंपिक्स में गोल्ड मेडल जीता. सबसे तेज नौक आउट का रिकौर्ड इन्हीं के नाम है. 8 सेकेंड्स में विरोध को नौक आउट किया. तब से इन्हें किड डायनामाइट और आयरन माइट कहा जाने लगा.
  • 18 साल की उम्र में प्रोफेशनल बौक्सिंग में एंट्री ली. 30 सेकेंड से ज्यादा उनके सामने कोई टिक नहीं पाता था. कई बार फाइट में वह इतने खतरनाक हो जाते थे कि सामने वाले के कान काट लेते थे.
  • बचपन में माइक बोलने में असमर्थ थे वे तुतलाते हुए बात करते थे. इसपर उनका मजाक उड़ाया जाता तो वे मां से शिकायत नहीं करते, अपना मामला खुद ही निपटाते. बदमाश बच्चों के मुक्का जड़ देते और उन्हें सबक सिखाते.
  • क्रूर जिंदगी बिताने वाले टाइसन को पक्षियों जानवरों से खासा लगाव है. जब माइक छोटे थे तब कबूतरों के साथ खेलना उन्हें पसंद था. एक बार किसी बड़े बच्चे ने कबूतर को नुकसान पहुंचाया, तो उन्होंने उसकी पिटाई कर दी थी. 13 साल की उम्र तक वह 38 बार गिरफ्तार किए गए थे.
  • 1992 में 18 साल की उम्र में मिस ब्लैक अमेरिका पीजेंट प्रतियोगी डेसैरी वौशिंगटन के बलात्कार के मामले में 10 साल की सजा सुनाई गई थी. इसपर उन्हें 30 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था. तीन साल छह माह की सजा काटने के बाद उन्हें रिहा किया गया.
  • जब माइक जेल में थे तब माइक ने महिला अधिकारी संग सेक्स किया था उसके बाद वह महिला गर्भवती भी हुई थी. 1992 में बलात्कार के मामले में छह साल जेल की सजा सुनाई गई, लेकिन वह तीन साल की सजा काट कर बाहर आए. 1998 में एक बार फिर माइक को जेल जाना पड़ा था. तब वह नौ महीने जेल में रहे थे. इसी दौरान महिला अधिकारी संग उन्होंने सेक्स किया था.

जब सेट पर सबके सामने जूही चावला ने उड़ाया शाहरुख खान का मजाक

जब शाहरुख खान ने 1992 में अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी, तो किसे पता था कि आगे जाकर ये छोटे से कद का दिखने वाला लड़का बौलीवुड का बादशाह बन जाएगा. बौलीवुड एक्ट्रेस जूही चावला भी उन्हीं में से एक थी.

दरअसल जब 1992 में फिल्म ‘राजू बन गया जेंटलमैन’ के लिए जूही को शाहरुख के लिये साइन किया गया तो उन्होंने फिल्म करने से इनकार कर दिया. इस फिल्म के डायरेक्टर अजीज मिर्जा ने जूही चावला को काफी मनाने की कोशिश की लेकिन जूही किसी नए एक्टर के साथ काम नहीं करना चाहती थी.

फिल्म ‘राजू बन गया जेंटलमैन’ से पहले तक जूही चावला ने इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना ली थी और वह नहीं चाहती थी कि उनका नाम किसी नए कलाकार के साथ जोड़ा जाए. वहीं फिल्म के डायरेक्टर अजीज मिर्जा इस फिल्म को बिना जूही चावला के नहीं बनाना चाहते थे. उन्होंने जूही को बताया कि शाहरुख खान ‘फौजी’ सीरियल की वजह से काफी पौपुलर हैं. उनकी अच्छी खासी फैन फौलोइंग हैं. जिसका फायदा हमें फिल्म में जरूर मिलेगा. उन्होंने जूही चावला से एक बार शाहरुख से मिलने को कहा.

जूही इस बात के लिए तैयार हो गई. जूही चावला ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया था कि जब वह पहली बार शाहरुख खान से मिली तो वह समझ नहीं पा रही थी कि ये हीरो का रोल कैसे कर पाएगा. जूही के मुताबिक जब वह सेट पर पहुंची तो उन्होंने देखा कि एक नाटा सा लड़का जिसका आधा चेहरा उसके बालों ने ढक रखा है वह उनकी ओर आ रहा है. इसके बाद जब डायरेक्टर ने जूही से यह कहते हुए मिलवाया कि यह तुम्हारा हीरो होगा तो जूही जोर जोर से हंसने लगी.

खैर, जैसे तैसे जूही फिल्म करने के लिए तैयार हुई और फिल्म शूटिंग के दौरान ही जूही शाहरुख की बेहद खास दोस्त बन गई. फिल्म भी हिट हुई और शाहरुख और जूही की जोड़ी को भी दर्शकों ने खूब पसंद किया. इसके बाद से लेकर आज तक इन दोनों की दोस्ती बरकरार है. दोनों का एक दूसरे के घर भी आना जाना लगा रहता है. इसके अलावा ये दोनों कई बिजनेस में भी पार्टनर हैं.

बनना चाहते हैं करोड़पति तो अपनाएं ये उपाय

अगर आप करोड़पति बनने की ख्वाहिश रखते हैं, तो आपको सरकार एक मौका दे रही है. इस नयी योजना के तहत आपको खास मेहनत की जरूरत नहीं है. बस आप अपने पड़ोसियों पर निगरानी रखना शुरू कर दें. सुनने में ये बात थोड़ा मजाकिया लग रह हो लेकिन यह जल्द ही हकीकत बनने वाली है.

दरअसल, नोटबंदी के बाद काले धन पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ करने के लिए मोदी सरकार ने बेनामी संपत्ति को अपना निशाना बनाया था. इसी कड़ी में केंद्र सरकार उन मुखबिरों को 1 करोड़ रुपये तक का इनाम देने की तैयारी में है, जो उसे बेनामी संपत्ति रखने वालों के खिलाफ खुफिया जानकारी देंगे.

बताया जा रहा है कि यह योजना वित्त मंत्रालय के पास है. वित्त मंत्रालय और वित्त मंत्री की स‍हमति के बाद इसे सीबीडीटी द्वारा लागू किया जाएगा अगले महीने सरकार इस पहल का औपचारिक ऐलान कर सकती है.

सेंट्रल बोर्ड औफ डायरेक्ट टैक्स के अधि‍कारी ने बताया कि बेनामी संपत्ति की जांच कर रही जांच एजेंसियों को जानकारी मुहैया कराने वाले शख्स को 1 करोड़ रुपये का इनाम दिया जाएगा. नाम न बताने की शर्त पर केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया है कि सूचना देने वाले शख्स को कम से कम 15 लाख और अधिकतम 1 करोड़ रुपए का इनाम दिया जाएगा. इसके साथ ही उस शख्स की पहचान भी गुप्त रखी जाएगी ताकि उसकी सुरक्षा को लेकर कोई खतरा न हो.

अधिकारी ने बताया कि सूचना पुख्ता होनी चाहिए. उसकी जानकारी गुप्त रखी जाएगी. बेनामी संपत्ति कानून को पिछले साल ही संसद में पारित किया गया था. हालांकि इसमें किसी को इनाम देने का प्रावधान नहीं रखा गया है. बेनामी संपत्ति रखने वालों का पता लगाना आयकर और प्रवर्तन निदेशालय के लिए हमेशा से ही टेढ़ी खीर रहा है. सीबीडीटी से जुड़े अधिकारी का मानना है कि गुप्त सूचनाओं के आधार पर बेनामी संपत्तिधारियों को पकड़ना काफी आसान हो जाएगा और इससे पूरे देश में अभियान चलाया जा सकेगा.

अधिकारी के अनुसार इनकम टैक्स डिपार्टमेंट, एनफोर्समेंट डारेक्टोरेट, और डायरेक्टोरेट औफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस हमेशा से ही सूचना देने वालों को इनाम देता रहा है. हालांकि अब तक यह इनाम कुछ खास नहीं रहता था. ऐसे में अब इससे जल्दी और आसानी से बेनामी संपत्ति के बारे में जानकारी मिल पाएगी. यह योजना फिलहाल, वित्त मंत्रालय के पास है. वित्त मंत्रालय और वित्त मंत्री की स‍हमति के बाद इसे सीबीडीटी द्वारा लागू किया जाएगा. अक्टूबर या नंवबर में इसकी घोषणा हो सकती है.

पहले भी दिया जाता था इनाम

अधिकारी के अनुसार आईटी विभाग, ईडी, और डायरेक्टोरेट औफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस हमेशा से ही सूचना देने वाले लोगों को इनाम देता रहा है. हालांकि इस इनाम की रकम बहुत बड़ी नहीं होती थी. अगर रकम इतनी बड़ी होगी तो बेनामी संपत्ति के बारे में जानकारी मिलने में आसानी भी होगी और ऐसे मामलों में तेजी भी आएगी.

हसीना पारकर : कमजोर और बिखरी हुई कहानी

अंडरवर्ल्ड की कहानी पर ‘‘शूट आउट एट लोखंडवाला’’ जैसी बेहतरीन फिल्म के निर्देशक अपूर्वा लाखिया ने जब अंडरवर्ल्ड की एक अन्य कहानी यानी कि मशहूर डान दाउद की बहन हसीना पारकर की सच्ची कहानी पर इसी नाम से बोयोपिक फिल्म बनाने की घोषणा की थी, तो उम्मीद जगी थी कि एक बेहतरीन कथानक वाली बेहतरीन फिल्म देखने का अवसर मिलेगा. लेकिन ‘हसीना पारकर’ देखकर कहीं से भी यह अहसास नहीं होता कि इसके निर्देशक अपूर्वा लाखिया ही हैं.

फिल्म देखते हुए एक ही बात समझ में आती है कि अपूर्वा लाखिया ने अंडवर्ल्ड से जुड़ी हसीना पारकर व उनके भाई दाउद आदि का महिमा मंडन करने के लिए यह फिल्म बनायी है. ऐसा करते समय वह सिनेमा की मूलभूत जरुरतों को भी अनदेखा कर गए. पिछले कुछ समय से जिस तरह नामचीन व बेहतरीन निर्देशक अपनी पहचान के विपरीत घटिया स्तर की फिल्में लेकर आए हैं, उससे एक सवाल उठता है कि क्या यह सब सिनेमा में बदलाव का असर है या कारपोरेट कंपनियों के आगमन के बाद हर फिल्मकार जल्द से जल्द फिल्म बनाकर कुछ धन जेब के हवाले करने की अजीब सी दौड़ का हिस्सा बना हुआ है और उसे अपनी पहचान को भी दांव पर लगाने से परहेज नहीं रहा.

फिल्म ‘‘हसीना पारकर’’ की कहानी मशहूर माफिया डान दाउद की बहन और अंडरवर्ल्ड से जुड़ी रही मुंबई की महिला डान कही जाने वाली हसीना पारकर की कहानी है. यह कहानी है कोंकणी मुस्लिम परिवार की एक लड़की के मुंबई की अंडरवर्ल्ड डान बन जाने की. फिल्म की कहानी शुरू होती है 2007 के उस अदालती मुकदमे से, जिसमें हसीना पारकर (श्रद्धा कपूर) पर चल रहे कई मुकदमों की सुनवाई होती है. उस पर अवैध वसूली, प्रोटक्शन मनी, धमकी सहित कई आरोप हैं. अदालती कारवाही के ही दौरान कहानी बार बार अतीत में जाती रहती है, जहां हसीना पारकर अपनी जिंदगी की दास्तानं बयां करती हैं.

Shraddha Kapoor

बतौर हसीना 12 बच्चों की परवरिश करने वाले उसके पिता (दधि पांडे) रिश्वतखोर नहीं, बल्कि ईमानदार पुलिसकर्मी थे. जो अपने दोनों बेटों दाउद (सिद्धांत कपूर) और साबिर पर काफी सख्त थे. मगर गरीबी, दूसरों की गुंडागर्दी और अपराध के लिए पुलिस से मिली शह के चलते वह तस्कर बन गए. वह अपने पति (अंकुर भाटिया) के संबंध में भी कई रोचक बाते बताती है. बाबरी मस्जिद, हिंदू मुस्लिम दंगे, मुंबई ब्लास्ट, पारिवारिक मुद्दों का बखान करती हैं. जबकि सरकारी वकील एक ही बात दोहराती रहती है कि हसीना ने अपने भाई दाउद का नाम उपयोग कर इतना डर फैला रखा है कि उनके खिलाफ गवाही देने को कोई तैयार नहीं.

इंटरवल से पहले फिल्म डाक्यूमेंट्री बनकर रह गयी है. इंटरवल के बाद का हिस्सा तो कुछ ज्यादा ही कमजोर हो गया है. इंटरवल के बाद के अदालती दृश्य हंसने पर मजबूर करते हैं. एडीटर ने अपने काम को ठीक से अंजाम नहीं दिया. फिल्म को कसने की जरुरत है. लेखक व निर्देशक फिल्म में हसीना पारकर उर्फ आपा को लेकर ठोस कुछ भी बयां नहीं कर पाए. टुकड़ों टुकड़ों में बयां की गयी कहानी पूरी तरह से बिखरी हुई है. भाई बहन की कहानी भी सही ढंग से नहीं बनी. लेखक इन पात्रों को विस्तार ही नही दे पाया. फिल्म की कहानी के साथ ही पात्रों के अनुरूप कलाकारों का चयन करना निर्देशक की जिम्मेदारी होती है, इन दोनों ही जिम्मेदारियों को निभाने में अपूर्वा लाखिया बुरी तरह से विफल रहे हैं. फिल्म का गीत संगीत भी प्रभावहीन है.

जहां तक अभिनय का सवाल है, तो हसीना पारकर के किरदार में श्रद्धा कपूर बिलकुल नहीं जमीं. इसी तरह दाउद के किरदार में सिद्धांत कपूर भी नही जमे. दाउद इतना कमजोर हो सकता है, यह सपने में भी नहीं सोचा जा सकता.

दो घंटे चार मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘हसीना पारकर’’ का निर्माण नाहिद खान ने किया है. फिल्म के निर्देशक अपूर्वा लाखिया, लेखक सुरेश नायर, कैमरामैन फसाहत खान तथा कलाकार हैं – श्रद्धा कपूर, सिद्धांत कपूर, अंकुर भाटिया, दधि पांडे, सुनील उपाध्याय, राजेश तैलंग, प्रियंका सेतिया व अन्य.

भूमि : बासी कहानी पर संजय दत्त की बेहतरीन परफार्मेंस

बेटी के साथ बलात्कार के बाद बदले की कहानी पर ‘मौम’ और ‘मातृ’ के बाद अब संजय दत्त अभिनीत फिल्म ‘‘भूमि’’ में भी वही कहानी दोहरायी गयी है. कहानी के स्तर पर कुछ भी नयापन नहीं है. फिल्म में कुछ संदेश परोसने की कोशिश की गयी है, मगर यह संदेश भी प्रभावशाली नहीं बन पाए हैं. बल्कि अति खून खराबा और हिंसा के सीन सत्तर के दशक की बदले की कहानी वाली बौलीवुड मसाला फिल्मों की याद जरुर दिलाते हैं.

फिल्म की कहानी आगरा निवासी व एक जूते की दुकान के मालिक अरूण सचदेव (संजय दत्त) के परिवार के साथ शुरू होती है, जो कि अपनी इकलौती बेटी भूमि (अदिति राव हादरी) के साथ रहे हैं. भूमि पढ़ी लिखी है. स्वतंत्र है. पिता पुत्री में अगाथ प्यार है. अरूण के पड़ोसी ताज (शेखर सुमन) उनके सुख दुख के साथी हैं. भूमि, नीरज (सिद्धांत गुप्ता) से प्यार करती है. दोनों की शादी तय हो जाती है.

यह बात उसी कालोनी के लड़के (विशाल) को पसंद नहीं आती. क्योंकि वह भूमि से इकतरफा प्यार करता है. इसलिए वह अपने चचेरे भाई व स्थानीय गुंडे धौली (शरद केलकर) की मदद से शादी से ठीक एक दिन पहले भूमि को अगवा कर उसके साथ रेप करता है. इससे अरूण व उनकी बेटी के सारे सपने टूट जाते हैं. पहले अरूण अपनी बेटी को सलाह देता है कि वह इस हादसे को भूल जाए और चुपचाप नीरज से शादी कर ले तथा अपने पति नीरज से कभी इस हादसे का जिक्र न करे. पर भूमि चुप नहीं रहना चाहती. उसके बाद मामला पुलिस स्टेशन, अदालत होते हुए बदले की कहानी में बदल जाता है.

Sanjay Dutt

फिल्म की शुरुआत कुछ उम्मीदें जगाती है, लेकिन जैसे जैसे कहानी आगे बढ़ती है, वैसे वैसे दर्शक खुद ब खुद अंदाजा लगाने लगता है कि अब क्या होगा? इंटरवल के बाद तो फिल्म पूरी तरह से कई फिल्मों का मिश्रण और अति बासी कहानी के रूप में नजर आती है. फिल्म के अंदर अदालती सीन भी अच्छे नहीं बन पाए हैं. कमजोर कहानी के चलते फिल्म में उठाए गए मुद्दे ध्यान नहीं खींच पाते. पटकथा पर सही ढंग से मेहनत नहीं की गयी. पटकथा के स्तर पर अपराधियों के चेहरे पर कहीं भी शर्मिंदगी का भाव नहीं दिखाया गया. फिल्म का गीत संगीत असरदार नहीं है.

फिल्म के निर्देशक उमंग कुमार ने ‘मैरी काम’ निर्देशित कर राष्ट्रीय पुरस्कार के साथ ही अपनी पहचान उत्कृष्ट निर्देशक के रूप में बना ली थी. उसके बाद वह ‘सरबजीत’ लेकर आए थे, पर इस फिल्म ने दर्शकों को निराश किया था. अब ‘भूमि’ भी उनके निर्देशन में बनी फिल्म है, जो कि दर्शकों को बांध नहीं पाती. माना कि फिल्म के लिए लोकेशन अच्छी चुनी गयी है. मगर निर्देशक के रूप में उमंग कुमार ‘वन फिल्म वंडर’ ही बनकर रह गए हैं.

जहां तक अभिनय का सवाल है, तो संजय दत्त ने बेहतरीन परफार्मेंस दी है. जेल से वापस आने के बाद संजय दत्त ने अभिनय में वापसी के लिए अच्छा प्रयास किया है, मगर अफसोस उन्होंने काफी कमजोर कहानी वाली फिल्म चुनी. भूमि के किरदार में अदिति राव हादरी ने भी अच्छा अभिनय किया है, मगर कुछ दृश्यों में वह निराश करती हैं. विलेन के किरदार में शरद केलकर खास नहीं जमे. वह विलेन कम कैरीकेचर ज्यादा नजर आए.

कुल मिलाकर ‘‘भूमि’’ को केवल संजय दत्त के कारण देखा जा सकता है, पर अहम सवाल है कि बिना कहानी वाली फिल्म को संजय दत्त कितनी सफलता दिलाएंगे?

2 घंटे 14 मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘भूमि’’ का निर्माण टीसीरीज के साथ उमंग कुमार व संदीप सिंह ने मिलकर किया है. निर्देशक उमंग कुमार, पटकथा लेखक राज शांडिल्य, संगीतकार सचिन जिगर व इस्माइल दरबार, कैमरामैन अर्तुर जुरावस्की तथा कलाकार हैं- संजय दत्त, अदिति राव हादरी, शेखर सुमन, शरद केलकर, सिद्धांत गुप्ता व अन्य.

जे डी : हिंदी पत्रकारिता पर बोल्ड फिल्म

फोटो पत्रकारिता से फिल्म  निर्माता निर्देशक बने शैलेंद्र पांडेय ने अपनी फिल्म ‘‘जे डी’’ में पत्रकारिता की असल जगह और असल रंगों को पर्दे पर उतारा है. फिल्म अखबार की दुनिया की कहानी है. युवा कैसे आदर्शों और सपनों के साथ इस पेशे से जुड़ते हैं, मगर उन्हें अंततः हासिल क्या होता है? फिल्म की कहानी के केंद्र में हिंदी भाषी पत्रकार हैं, पर इसमें अंग्रेजी पत्रकारिता के अंदाज का तड़का भी है.

फिल्म में जेडी के दो अर्थ हैं पहला हैं नायक जय द्विवेदी उर्फ जेडी (ललित बिस्ट). दूसरा इस नायक द्वारा दिल्ली में निकाली गई पत्रिका जेडी यानी जर्नलिज्म डिफाइंड. फिल्म की कहानी लखनऊ से शुरू होती है, जहां जय द्विवेदी ‘प्रभात क्रांति’ नामक छोटे मगर लोगों में पैठ रखने वाले अखबार से अपना पत्रकारिता का करियर शुरू करता है. वह अमरीका से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद अपने देश में काम करने का ख्वाब लिए लौटा है.

अच्छी शुरुआत के साथ वह तेजी से आगे बढ़ता है. मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे विपक्षी नेता दिवाकर (गोविंद नामदेव) को अहसास होता है कि जय ने अपनी पत्रकारिता के बल पर सरकार की जितनी छीछालेदर छह माह में की है, उतना तो वह पिछले तीन साल में नहीं कर पाए. इसलिए  दिवाकर, जेडी को अपने साथ जोड़ लेते हैं. उसे हिंदी अखबर से हटाकर अंग्रेजी अखबार में नौकरी दिलवा देते हैं. अंग्रेजी में भी जेडी अपना जलवा कायम रखता है. इसी बीच उसे अहसास होता है कि अखबार का मालिक उसकी ईमानदारी और मेहनत को मूर्खता से अधिक कुछ नही मानता. वह तो केवल अपने फायदे के लिए जे डी का इस्तेमाल कर रहा है.

हताश जेडी, दिवाकर से बात करता है. इस बार दिवाकर चाल चलते हुए अपने इशारों पर काम करने वाली पत्रकार नूर (वेदिता प्रताप सिंह) के साथ जेडी को दिल्ली भेज उसे अपनी पत्रिका निकालने के लिए कहते हैं. फिर जेडी पूरी तरह से दिवाकर और नूर के हाथों की कठपुतली बनकर रह जाता है. यह दोनों सिर्फ अपने फायदे के लिए उसका इस्तेमाल करते हैं. यहां तक कि दिवाकर अपने प्रतिद्वंदी नेता सुदर्शन (अमर सिंह) को रास्ते से हटाने के लिए भी जेडी का उपयोग करते हैं. तभी एक ऐसी घटना घटती है, जिससे जेडी की आंखे खुलती हैं, पर तब तक काफी देर हो चुकी है. हालात ऐसे हो गए हैं कि अब जेडी को खत्म करने के लिए सुदर्शन और नूर एक हो चुके हैं. फिर कहानी में कई घटनाक्रम तेजी से बदलते हैं.

फिल्म में पत्रकारिता मे आ रहे बदलाव पर करारी चोट की गयी है. समाचार पत्रों के दफ्तरों, दैनिक घटनाक्रम, पत्रकारिता का मिशन से दुकान बन जाना, पत्रकारों की आर्थिक स्थिति, स्वतंत्र पत्रकारों की हालत, भ्रष्ट संपादकों और मुनाफाखोर मालिकों की सोच सहित कई मुद्दों को फिल्म में पिरोया गया है. हिंदी में पत्रकारिता की दुनिया पर यह एक बोल्ड फिल्म मानी जा सकती है.

तमाम कमियों के बावजूद पत्रकार से फिल्मकार बने शैलेंद्र पांडेय के इस पहले प्रयास की सराहना की जानी चाहिए. कहानी और फिल्म का संपादन कसा हुआ है. गीत संगीत कर्णप्रिय है. फिल्म में कुछ नामचीन व प्रतिभाशाली अभिनेता होते तो शायद फिल्म ज्यादा बेहतर ढंग से निखर कर आती. विपक्षी नेता के किरदार में गोविंद नामदेव का अभिनय प्रभावित करता है. वेदिता प्रताप सिंह का अभिनय ठीक ठाक है. अदालती दृश्यों में अमन वर्मा अपनी छाप छोड़ जाते हैं. पोलीटीशियन अमर सिंह भी छोटी भूमिका में जमे हैं. ललित बिस्ट को अभी काफी मेहनत करने की जरुरत है.

इस फिल्म में 1993 मुंबई विस्फोटों के मामले में करीब एक दर्जन दोषियों को फांसी और अभिनेता संजय दत्त को अवैध हथियार रखने के मामले में छह साल कैद की सजा सुनाने वाले अवकाशप्राप्त न्यायाधीष पीडी कोडे ने जज का किरदार निभाया है.

शैलेन्द्र पांडेय और अंजू पांडेय निर्मित फिल्म ‘जे डी’ के निर्देशक शैलेंद्र पांडेय, पटकथा लेखक कुमार विजय व शैलेंद्र पांडेय, संगीतकार जान निसार लोन, गणेश पांडेय व मोंटी शर्मा तथा कलाकार हैं ललित बिष्ट, वेदिता प्रताप सिंह, गोविंद नामदेव, अमर सिंह, अमन वर्मा व अन्य.

30 सितंबर तक इन बैंकों की चेकबुक हो जाएगी पूरी तरह अमान्य

क्या आप स्टेट बैंक आफ इंडिया के सब्सिडियरी बैंकों के ग्राहक हैं? यदि हां, तो आपको अब जल्द से जल्द नई चेकबुक के लिए अप्लाई कर देना चाहिए. क्योंकि एसबीआई द्वारा जारी किये गये निर्देश के तहत 30 सितंबर के बाद से आपकी पुरानी चेकबुक अमान्य हो जाएगी. इन पर लिखे हुए पुराने आईएफएस (Indian Financial System) कोड भी अवैध हो जाएंगे.

एसबीआई ने अपने सब्सिडियरी बैंकों के कस्टमर्स से कहा है कि वे जल्द से जल्द नई चेकबुक और आईएफएस कोड के लिए आवेदन कर दें. आपको बता दें कि एसबीआई से जुड़े सभी बैंक और भारतीय महिला बैंको के ग्राहकों पर यह आदेश लागू होगा. इसका अर्थ यह हुआ कि यदि आपका खाता छहों बैंकों (स्टेट बैंक आफ त्रावणकोर, स्टेट बैंक आफ पटियाला, स्टेट बैंक आफ हैदराबाद, स्टेट बैंक आफ बीकानेर और जयपुर, स्टेट बैंक आफ रायपुर, भारतीय महिला) में से किसी एक में भी है तो आपको नई चेकबुक इश्यू करवाने के लिए आवेदन दे देना अनिवार्य है.

एसबीआई ने इस ट्वीट कर जानकारी दी कि ग्राहक नई चेक बुक के लिए इंटरनेट और मोबाइल बैंक के जरिए आनेदन कर सकते हैं. इसके अलावा एटीएम और होम ब्रांच में जाकर भी आनेदन कर सकते हैं.

इसी के साथ बता दें कि एसबीआई ने हाल ही में कहा है कि वह उपभोक्ताओं की प्रक्रिया मिलने के बाद मासिक औसत बैलेंस बरकरार नहीं रखने पर लगने वाले शुल्क की समीक्षा कर रही है.

बैंक के प्रबंध निदेशक रजनीश कुमार ने कहा था कि उन्हें इस संबंध में उपभोक्ताओं की प्रतिक्रियाएं मिली हैं और अब वह उनकी समीक्षा कर रहे हैं. बैंक उन्हें ध्यान में रखकर और आंतरिक विमर्श करके ही उचित निर्णय लेगा कि वरिष्ठ नागरिकों या विद्यार्थियों के लिए शुल्क में सुधार की जानी चाहिए या नहीं.

बताते चलें कि पांच साल के अंतराल के बाद इस साल एसबीआई ने मासिक औसत बैलेंस बरकरार नहीं रखने पर शुल्क लागू किया था. इसके तहत खाते में मासिक औसत नहीं रख पाने पर 100 रुपये तक के शुल्क और जीएसटी का प्रावधान किया गया था. शहरों में मासिक औसत कीमत पांच हजार रुपये तय किया गया था. ग्रामीण इलाकों के लिए मासिक औसत कीमत 1000 रुपये तय किया गया था तथा इससे बरकरार नहीं रखने पर 20 से 50 रुपये जीएसटी का प्रावधान किया गया था.

विराट कोहली को खेलते देख हमेशा खुशनुमा अहसास होता है : सौरव गांगुली

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने आस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे मैच में कोहली के शानदार प्रदर्शन की जमकर तारीफ की. गांगुली ने कहा कि कोहली को खेलते देखना उनके लिए हमेशा खुशनुमा होता है.

बंगाल क्रिकेट संघ (सीएबी) के अध्यक्ष गांगुली ने कहा, “वाह! कोहली की एक और शानदार पारी. मुझे उन्हें खेलता देख हमेशा खुशनुमा अहसास होता है.”

कोहली के अलावा, भारतीय टीम के लिए अजिंक्य रहाणे ने भी 55 रन बनाए. इन पारियों की बदौलत भारत ने आस्ट्रेलिया को 253 रनों का लक्ष्य दिया. इस जीत के साथ भारत की टीम पांच वनडे मैचों की सीरीज में 2-0 से आगे हो गई है.

आपको बता दें कि एस मैच के दौरान आस्ट्रेलिया के लिए केन रिचर्डसन और नाथन कल्टर नाइल ने तीन-तीन विकेट लिए. कोहली और रहाणे जब खेल रहे थे, तब लगा था कि मेजबान टीम बड़े स्कोर तक आराम से पहुंचेगी, लेकिन इन दोनों के आउट होने के बाद उसे कोई बड़ी साझेदारी नहीं मिली और आस्ट्रेलियाई गेंदबाजों ने उसे बड़े स्कोर तक नहीं जाने दिया.

रहाणे और कोहली ने दूसरे विकेट के लिए 102 रनों की साझेदारी की. यह साझेदारी सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा (7) के 19 रनों के कुल स्कोर पर आउट हो जाने के बाद आई. नाइल ने अपनी ही गेंद पर अच्छा कैच पकड़कर रोहित को पवेलियन भेज मेजबान टीम को पहला झटका दिया.

हालांकि दूसरे सलामी बल्लेबाजी अजिंक्य रहाणे विकेट पर खड़े थे. उन्होंने कप्तान का बखूबी साथ दिया और लगातार स्ट्राइक रोटेट करते रहे. कोहली ने इस मैच में अपना 45वां अर्धशतक भी पूरा किया. बता दें कि 22वें ओवर की पांचवीं गेंद पर एश्टनर अगर द्वारा फेंकी गई गेंद पर एक रन लेकर उन्होंने पचास रन पूरे किए. रहाणे ने भी अगले ओवर की पांचवीं गेंद पर एक रन लिया और अपने वनडे करियर का 20वां अर्धशतक पूरा किया, पर इसके बाद वह विकेट पर ज्यादा देर न टिक सकें.

रहाणे के बाद चौथे नंबर पर आए मनीष पांडे चार रन ही बनाकर बोल्ड हो गए. उनके बाद बल्लेबाजी करने आए केदार जाधव (24) ने कोहली के साथ मिलकर पारी को आगे बढ़ाया. यह जोड़ी लय पकड़ ही रही थी कि जाधव ने नाइल की गेंद को सीधे प्वांइट पर खड़े मैक्सवेल के हाथों में खेल दिया. इस बीच कोहली अपने 31वें वनडे शतक की ओर बढ़ रहे थे. 90 के स्कोर पर पहुंचने के बाद  उनके खेल में हड़बड़ी देखी गई. जिस वजह से वह आठ रन से रिकी पोंटिंग को पीछे करने से चूक गए.

बते दें कि आस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान पोंटिंग के वनडे में 30 शतक हैं. कोहली वनडे में शतकों के मामले में पोंटिंग के बराबर हैं. कोहली ने 107 गेंदों का सामना करते हुए आठ चौके मारे.

अलग मौके अलग फैशन : खास अवसरों पर पहनिए ये परिधान

कालेज गोइंग यूथ्स को न सिर्फ कालेज जाने के लिए फैशनेबल कपड़ों की जरूरत होती है बल्कि कालेज में आएदिन होने वाले फैस्टिवल, फंक्शंस, टूर और फ्रैंड्स की बर्थडे पार्टी या शादी जैसे मौके के लिए भी उन्हें अलगअलग परिधानों की जरूरत पड़ती है. ऐसे में वे चाहते हैं कि हर मौके पर यूनीक दिखें ताकि हर कोई उन की ड्रैस और पसंद की वाहवाही करे.

प्रस्तुत हैं ऐसे ही कुछ विशेष अवसरों पर पहने जाने वाले खास फैशनेबल परिधान:

कालेज फैस्ट

कालेज फैस्ट को ले कर स्टूडैंट्स में खासी ऐक्साइटमैंट रहती है, तभी वे फैस्ट की डेट डिसाइड होते ही इस दिन की तैयारियों में जुट जाते हैं. उन्हें लगता है कि वे इस दिन अच्छे कपड़े पहन कर खूबसूरत दिख कर सब की नजरों में चढ़ सकते हैं. ऐसा हो भी क्यों न, यह दिन तो होता ही खास है. यदि आप भी फैस्ट की शान बनना चाहते हैं तो दिखें कुछ इस तरह खास :

डंगरीज जो दिखने में कूल होने के साथ कंफर्टेबल भी होती है. आप इसे फुल स्लीव टौप, टीशर्ट वगैरा के साथ पहनें और साथ में शूज का स्टाइल आप को कूल लुक देगा.

जंपसूट का फैशन तो चलन में है ही, लेकिन इस बार आप फ्लोरल जंपसूट पहन कर ट्रैंडी लुक पा सकती हैं. स्टाइलिश दिखने के लिए गौगल्स लगाना न भूलें. फिर देखिए क्या जलवा बिखेरती हैं आप फैस्ट में.

अगर आप पैंट पहनने की शौकीन हैं तो लैदर पैंट पहन कर फैस्ट में ऐंट्री करें. साथ ही लौंगशर्ट  के साथ हैंडबैग आप को क्लासिक लुक देगा.

प्लाजो कंफर्टेबल होने के साथसाथ मौड लुक भी देता है. आप इस बार फैस्ट में शौर्ट कैजुअल टौप के साथ इसे ट्राई करिए.

आप ग्रैफिक टीशर्ट के साथ जींस पहन कर अगर फैस्ट में जाएंगी तो अलग ही नजर आएंगी.

यदि ड्रैस यूनीक हो और हेयरस्टाइल वही पुराना तो आप के लुक में चारचांद नहीं लग पाते हैं. ऐसे में डिफरैंट हेयरस्टाइल ट्राई कर फैस्ट में हट कर दिखें.

यदि आप यह सोच कर कन्फ्यूज्ड हो रही हैं कि मेरे फेस पर कोई भी हेयरस्टाइल नहीं जंचता तो आप लूज कर्ल्स वाले हेयरस्टाइल ट्राई करना न भूलें, क्योंकि यह सभी आउटफिट और फेसकट पर सूट करता है.

मैसी बन हेयरस्टाइल जिस को ले कर युवतियां क्रेजी रहती हैं, आप इस हेयर स्टाइल में सैंटर औफ अट्रैक्शन बन सकती हैं.

अगर आप बालों के साथ ज्यादा छेड़छाड़ करना पसंद नहीं करतीं और सिंपल सा लुक चाहती हैं तो बालों में प्रैसिंग कर के क्यूट लुक पा सकती हैं.

अगर आप के हेयर्स काफी कर्ली हैं तो पिन्स से भी स्टाइलिश लुक पा सकती हैं.

आप को बता दें कि ऐक्सैसरीज के बिना आप का लुक इनकंप्लीट लगता है. आप अफगानी ज्वैलरी, झुमकियां, चूडि़यां, ड्रैस के हिसाब से सिलैक्ट कर के डैशिंग लुक पा सकती हैं.

फ्रैंड की शादी

फ्रैंड की शादी में जाने से ज्यादा इस अवसर पर नए कपड़े पहनने की ऐक्साइटमैंट होती है ताकि हर कोई वाउ कहे और दुलहन के बाद सब का ध्यान हम पर ही रहे तो इस के लिए आप ट्राई करें लेटैस्ट ड्रैसेज.

कैजुअल ब्लैक मैक्सी आप को ग्लैमरस लुक देगी. इसे आप ग्लेडिएटर सैंडिल्स के साथ पहन कर धमाल मचा सकती हैं.

सैक्सी दिखने की चाह हर युवती की होती है. ऐसे में आप पार्टी में स्ट्रिप ड्रैस पहन कर न सिर्फ खुद हौट फीलकरेंगी बल्कि औरों को भी हौट फील करवा सकती हैं.

आजकल गाउन का फैशन है. आप पार्टीफंक्शन में नैट वाला, फिशकट, ए लाइन गाउन पहन कर सब की नजरें खुद पर टिकाने को मजबूर कर सकती हैं. साथ ही स्कर्टटौप, पटियाला सलवार के साथ शौर्ट कुरती भी ट्राई कर सकती हैं.

बर्थडे पार्टी

अगर पार्टी थीम बैस्ड हो तब तो ज्यादा झंझट नहीं, क्योंकि ऐसी पार्टियों में थीम बैस्ड कौस्ट्यूम्स जो पहनने होते हैं. लेकिन अगर पार्टी थीम पर आधारित नहीं है तो आप कैजुअल वियर के साथ वैस्टर्न ड्रैसेज ट्राई कर सकती हैं, क्योंकि यह कूल दिखने के साथ पार्टी के हिसाब से बिलकुल परफैक्ट बैठती है.

दोस्तों संग आउटिंग

दोस्तों के साथ आउटिंग पर जाने की बात सुनते ही हमारा मन खुशी से झूम उठता है. ऐसे में एक तरफ घूमने जाने की खुशी तो दूसरी तरफ हम यही सोचते हैं कि क्या पहनें जिस से आउटिंग को ऐंजौय कर पाएं.

ऐसे में सब से पहले यह ध्यान देना जरूरी है कि हम किस जगह और किस मौसम में घूमने जा रहे हैं. जैसे अगर आप समुद्री इलाके में घूमने जा रहे हैं वहां सूट वगैरा ले जाने से अच्छा है कि डैनिम की शौर्ट्स हाफ पैंट्स, स्मार्ट टीशर्ट्स वगैरा के साथ पहनें. यदि आप पहाड़ी इलाके में घूमने जा रहे हैं तो स्मार्ट वूलन टौप विद जींस, टाउजर, वूलन कुरती विद स्टौल के साथ वियर करें. इस से आप स्मार्ट दिखने के साथसाथ खुद को उस जगह के हिसाब से तैयार भी कर पाएंगे.

इन बातों को न करें नजरअंदाज

एकदूसरे की देखादेखी कपड़े न खरीदें.

ऐसे आउटफिट खरीदें जो कंफर्टेबल हो वरना आप का सारा ध्यान उन को ठीक करने पर ही लगा रहेगा.

आप के रंगरूप और फिगर पर जो कलर जंचे वही खरीदें.

डार्क मेकअप करने से बचें. जितनी आप सिंपल रहेंगी उतनी ही खूबसूरत दिखेंगी.

ज्यादा टाइटफिट कपड़े न पहनें, क्योंकि इस से उठनेबैठने में दिक्कत होती है.

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