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अब कोई नहीं कहेगा ‘बाबूजी धीरे चलना, प्यार में जरा संभालना’

‘बाबूजी धीरे चलना, प्यार में जरा संभालना’ इस गाने से तो आप बखूबी वाकिफ होंगे. इस गाने को अपनी अदा से तराशनेवाली अदाकारा शकीला ने 82 साल की उम्र में अपनी आखिरी सांस ली. उनका निधन हृदयघात होने की वजह से हुआ. उनके भांजे नसीर खान ने ये दुखद समाचार अपने फेसबुक पोस्ट के जरिये दिया.

शकीला ने आर पार (1954) और सी.आई.डी. में बेहतरीन प्रदर्शन से लोगों का दिल जीता था. इसके अलावा वे शक्ति सामंत की फिल्म चाईना टाउन (1963) में शम्मी कपूर के साथ भी स्क्रीन शेयर करती हुई दिखाई दी थीं. लेकिन 1961 के बाद उन्होंने फिल्म जगत से दूरी बना ली और शादी करके भारत के बाहर जा बसीं.

उनकी मौत की खबर ने कई कलाकारों के दिल को ठेस पहुंचाई होगी, क्योंकि उन्होंने अपनी खूबसूरती और अदाकारी से लोगों के मन एक अलग जगह बना ली थी.

जीक्यू अवार्ड्स में दिखा बौलीवुड सितारों का खास अंदाज

शुक्रवार को मुंबई के एक फाइव स्‍टार होटल में जीक्‍यू की तरफ से जीक्‍यू मेन आफ द ईयर अवार्ड्स का आयोजन किया गया था. जिसमें बौलीवुड के कई सितारे पहुंचे.

इस अवार्ड फंक्‍शन में एक तरफ ‘जेंटलमैन’ बने सिद्धार्थ मल्‍होत्रा जैकलीन फर्नांडीज और करण जौहर के साथ नजर आए तो वहीं दूसरी तरफ एक बार फिर फिल्‍म ‘बैंड बाजा बारात’ की जोड़ी देखने को मिली.

खास बात यह थी कि अनुष्‍का को देखते ही रणवीर काफी खुश हो गए और उन्‍होंने अनुष्‍का को गले लगा कर उनका स्‍वागत किया. रणवीर और अनुष्‍का का यह मिलन इतना खास था कि वहां खड़ा हर कोई बस उन्‍हें ही देख रहा था. यहां तक की यश राज बैनर्स ने अपने इन सितारों का यह खूबसूरत पल सोशल मीडिया पर भी शेयर किया है.

अक्‍सर अवार्ड फंक्‍शन से दूर रहने वाले बौलीवुड के ‘मिस्‍टर परफेक्‍शनिस्‍ट’ यानी आमिर खान भी इस अवार्ड फंक्‍शन में नजर आए. पिछले कुछ दिनों से अपनी फिल्‍म ‘ठग्‍स आफ हिंदोस्‍तान’ की शूटिंग में बिजी आमिर हर जगह अपनी फिल्‍म के लुक में ही नजर आ रहे थे, लेकिन यहां आमिर का स्‍टाइल काफी अलग था. रणवीर ने आमिर के साथ भी बिताए इस पल को कैमरे में कैद कर सोशल मीडिया पर शेयर किया है. इसे शेयर करते हुए रणवीर ने लिखा, ‘ ठग लाइफ..’ यहां मौजूद सभी सितारे रेड कारपेट पर अपने अलग अंदाज के साथ ही काफी स्‍टाइलिश लुक में नजर आए.

इस अवार्ड फंक्‍शन में पहुंचे बौलीवुड सितारों की बात करें तो यहां पर रणवीर, अनुष्‍का, सिद्धार्थ मल्‍होत्रा और आमिर खान के अलावा, करण जौहर, जैकलीन फर्नांडीज, श्रीदेवी, राजकुमार राव, मलाइका अरोड़ा, काल्‍की कोचलिन, ईशा गुप्‍ता, सयानी गुप्‍ता जैसे कई सितारे नजर आए.

यहां पर मिले अवार्ड्स की बात करें तो सिद्धार्थ मल्‍होत्रा मोस्‍ट स्‍टाइलिश और रणवीर सिंह को एंटरटेनर आफ द ईयर का खिताब, अनुष्‍का शर्मा वुमेन आफ द ईयर, राजकुमार राव को एक्‍टर आफ द ईयर, प्रोड्यूसर आफ द ईयर के लिए करण जौहर और डिजाइनर आफ द ईयर के रूप में मनीष मल्‍होत्रा को चुना गया जबकि एक्‍सिलेंस इन एक्टिंग के खिताब से श्रीदेवी को नवाजा गया.

सामाजिक जदलाव के एजेंट के रूप में राहुल बोस को चुना गया जबकि आमिर खान को मोस्‍ट क्रिएटिव का खिताब दिया गया. एक्सिलेंस इन डायरेक्‍शन एंड एक्टिंग का अवार्ड कोंकणा सेन शर्मा को और लिजेंड का खिताब बाइचुंग भूटिया को दिया गया जबकि इरफान खान को आउटस्‍टैंडिंग अचीवमेंट का अवार्ड मिला.

तो क्या बौलीवुड की पद्मावती को नहीं भूल पा रहे विन डीजल?

प्रियंका चोपड़ा की ही तरह बौलीवुड की मस्तानी दीपिका पादुकोण ने भी हौलीवुड में अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया है. अब दीपिका बौलीवुड में भी अपनी फिल्म पद्मावती के साथ धूम मचाने आ रही हैं. जैसा कि सभी जानते हैं कि दीपिका ने हौलीवुड फिल्म ‘XXX’ में एक्टर विन डीलज के साथ रोमांस किया था. लेकिन अब लगता है उन्हीं पुराने दिनों का साथ अब विन डीजल को परेशान कर रहा है. असल में उन्हें दीपिका पादुकोण की याद आ रही है और इसी के चलते उन्होंने दीपिका के लिए सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें पोस्ट की है.

#xXxThursdays

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ये तो सभी जानते हैं कि दीपिका इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म पद्मावती की शूटिंग में व्यस्त हैं, लेकिन दूर देश में कोई है जो उनके साथ को मिस कर रहा है. विन डीजल ने अपने इन्स्टा अकाउंट पर एक तस्वीर शेयर की है, जिसमें वे और दीपिका एक रंग-बिरंगे आटो में बैठे हुए दिखाई दे रहे हैं. इस तस्वीर में दीपिका की हंसी तो ऐसी है, जैसे इस हंसी के बल पर वे किसी का भी दिल चुरा लेंगी.

#xXxThursdays

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इससे पहले भी विन डीजल ने दीपिका के साथ एक तस्वीर शेयर की थी जिसमें दोनों कलकार हाथों में हाथ देकर आमने-सामने बैठे हुए हैं.

बता दें कि फिल्म ‘XXX’ के दौरान विन डीजल और दीपिका के बीच नजदीकियों की खबरें बाजार में थी, लेकिन हौलीवुड से वापसी के बाद दीपिका अपने काम में ऐसी व्यस्त हुईं कि उन्होंने फिर मुड़कर विन की तरफ नहीं देखा. वहीं लगता है कि विन डीजल अपना दिल दीपिका पर हार चुके हैं.

All love… #xXxThursdays

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आतंकवाद के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र में चारों खाने चित्त हुआ पाकिस्तान

आतंकवाद पर खुद को पीड़ित बताने वाला पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में बेनकाब हो गया. भारत ही नहीं, बांग्लादेश, ईरान और अफगानिस्तान के नेताओं के आतंकवाद पर चौतरफा हमलों से पाक चारों खाने चित नजर आया.

पाकिस्तान पर सबसे करारा हमला संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत की प्रथम सचिव एनम गंभीर ने बोला. पाक पीएम शाहिद खाकान अब्बासी के आरोपों का जवाब देते हुए गंभीर ने पड़ोसी मुल्क को ‘टेररिस्तान’ की संज्ञा दी. उन्होंने कहा कि मसूद अजहर, जकीउर रहमान लखवी जैसे खूंखार आतंकी पाक की गलियों में बेरोकटोक घूमते हैं. मुंबई हमले का गुनहगार हाफिज सईद अब राजनीतिक दल का नेता बनने की तैयारी में है. सबसे अजीब बात है कि ओसामा बिन लादेन और मुल्ला उमर जैसे आतंकी सरगनाओं को पनाह देने वाला देश खुद को पीड़ित बता रहा है. वह लोकतंत्र और मानवाधिकार के मुद्दे पर दुनिया को सीख देने की कोशिश कर रहा है.

उधर,विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी यूएन में ब्रिक्स, दक्षेस समेत बहुपक्षीय बैठकों में आतंकवाद को लेकर पाक को घेरा. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लिए स्पष्ट संकेत है कि वह राष्ट्र की नीति के रूप में आतंकवाद का इस्तेमाल करना बंद करे. उसे घोषित आतंकवादी संगठनों को पनाह देना बंद करना चाहिए.

आतंक की भूमि बना : भारत

यूएन में भारतीय राजनयिक एनम गंभीर ने कहा, पाक का अर्थ है पवित्र, लेकिन वह भूमि अब आतंक की भूमि बन चुकी है. पाकिस्तान में अब एक फलता-फूलता उद्योग है जो आतंकवाद पैदा कर रहा है.

ध्यान भटका रहा : अफगानिस्तान

अफगान राजनयिक ने कहा कि पाक आतंकी गतिविधियों का गढ़ है. उन्होंने आरोप लगाया कि पाक उसके देश में पैठ बनाए आतंकी संगठनों के खिलाफ कारवाई में नाकामी से दुनिया का ध्यान भटकाना चाहता है.

स्थिरता के लिए खतरा : बांग्लादेश

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने पाक पर परोक्ष हमला करते हुए कहा कि प्रायोजित आतंकवाद स्थिरता और विकास के लिए बड़ा खतरा बन गया है. इस रोक लगाने की जरूरत आ गई है.

बातें नहीं, कार्रवाई करे : ईरान

ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने पाक पीएम अब्बासी से मुलाकात के दौरान उन्हें आतंकी गुटों पर लगाम लगाने की नसीहत दी. रूहानी ने कहा कि पाक सीमा पर आतंकी गुटों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रहा है.

सुषमा ने अमेरिका में वीजा मुद्दा उठाया

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने शुक्रवार को अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन से मुलाकात की. उन्होंने भारतीय आईटी पेशेवरों से जुड़े एच1बी वीजा पर सख्ती और ड्रीमर योजना का मुद्दा उठाया.

ड्रीमर योजना पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में लाई गई थी. इसमें गैरकानूनी तरीके से अमेरिका आए प्रवासियों के बच्चों को अमेरिका में रहने की छूट प्रदान की गई थी. लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसमें कटौती करना चाहते हैं, जिसका असर भारतीयों पर भी पड़ेगा.

दोनों नेताओं ने वार्षिक संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र से इतर न्यूयॉर्क में मुलाकात की. जून में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बैठक के बाद यह दोनों देशों के नेताओं की पहली उच्चस्तरीय बैठक थी. दोनों नेताओं ने एशिया प्रशांत इलाके के हालात पर चर्चा की. यह मुलाकात अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिटस की अगले सप्ताह भारत यात्र से पहले हुई.

इससे पहले सुषमा ने ब्रिक्स, इबसा, दक्षेस और इंडिया-सीईएलएसी सहित अन्य समूहों के नेताओं के साथ बहुपक्षीय बैठकें कीं. ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) पांच सदस्यीय समूह है, इबसा (भारत, ब्राजील और दक्षिण एशिया) तीन सदस्यीय ब्लॉक है और ईसीईएलएसी कम्युनिटी ऑफ लैटिन अमेरिकन एंड कैरेबियन स्टेट है. सुषमा ने कजाकिस्तान और अर्जेटीना के विदेश मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी की.

पाक मंत्री से दुआ सलाम

पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से दुआ सलाम किया और उनकी सेहत के बारे में हालचाल पूछा. सुषमा ने कहा कि अब उनकी सेहत ठीक है. पिछले वर्ष नई दिल्ली के एम्स में सुषमा का गुर्दा प्रत्यारोपण हुआ था.

भारत और पाक आपस में कश्मीर मुद्दा सुलझाएं : चीन

वैश्विक मंचों पर कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता की गुहार लगा रहे पाकिस्तान को उसके सर्वकालिक दोस्त चीन ने ही बड़ा झटका दिया है. चीन ने दो टूक कहा कि इस मुद्दे को भारत और पाकिस्तान आपस में ही सुलझाए.

इसके साथ ही बीजिंग ने कश्मीर मुद्दे पर यूएन के प्रस्ताव को लागू करने के इस्लामी सहयोग संगठन (ओआईसी) के आह्वान को सिरे से खारिज कर दिया है. कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव को लागू करने के ओआईसी के संपर्क समूह के आह्वान के बारे में पूछे जाने पर चीनी विदेश मंत्रलय के प्रवक्ता लू कांग ने कहा कि भारत और पाकिस्तान को इस मसले को सुलझाना चाहिए.

लू ने कहा, चीन को उम्मीद है कि भारत-पाकिस्तान संवाद एवं संचार बढ़ा सकते हैं और संबंधित मुद्दों से उचित तरीके से निपट सकते हैं.

तांत्रिक की हैवानियत की ये कहानी हमें सोचने पर मजबूर करती है

देश की राजधानी दिल्ली के जामियानगर में स्थित है जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी. उर्दू में जामिया का मतलब है यूनिवर्सिटी और मिलिया का मतलब है मिल्लत यानी समूह. ब्रिटिश शासन में स्थापित इस यूनिवर्सिटी को एक साल पहले भारत की बेस्ट यूनिवर्सिटी सर्वे में 8वां स्थान हासिल हुआ था.

इस यूनिवर्सिटी में देश के अलगअलग हिस्सों से छात्र तालीम हासिल करने आते हैं. युवा सद्दाम और बाबर उर्फ हैदर ने भी एक साल पहले यहां पढ़ने के लिए दाखिला लिया था. दोनों ही पढ़ने में होशियार थे.

सद्दाम और बाबर उत्तर प्रदेश के जिला मेरठ के थाना मुंडाली के गांव जिसौरा के रहने वाले थे. उन के गांव के कुछ और लड़के यूनिवर्सिटी में पढ़ते थे, इस लिहाज से उन्हें वहां दाखिला ले कर रहने में कोई दिक्कत नहीं हुई थी. 19 साल के बाबर और 18 साल के सद्दाम के पिता मोहम्मद मुन्नर और कलवा गांव के आर्थिक रूप से समृद्ध किसानों में थे.

वे चाहते थे कि बच्चे तालीम से ऊंचा दर्जा हासिल करें. बाबर डौक्टर बनना चाहता था और सद्दाम इंजीनियर. साप्ताहिक अवकाश पर सद्दाम और बाबर अपने घर आ जाया करते थे. 8 अप्रैल, 2017 को दोनों गांव आए थे. अगले दिन रविवार था. छुट्टी का पूरा दिन घर में बिता कर 10 तारीख की दोपहर करीब 3 बजे दोनों घर से दिल्ली के लिए रवाना हो गए थे.Crime story

दोनों के ही परिवारों में अच्छे संबंध थे. ऐसा पहली बार नहीं हुआ था कि वे दोनों दिल्ली एक साथ गए थे, बल्कि हर बार वे इसी तरह आतेजाते थे. हर बार दोनों दिल्ली पहुंच कर घर वालों को फोन कर के कमरे पर पहुंचने की बात बता देते थे.

लेकिन उस दिन ऐसा नहीं हुआ तो दोनों के ही घर वालों को चिंता हुई. यह चिंता इस बात से और भी बढ़ गई थी कि दोनों के मोबाइल स्विच्ड औफ बता रहे थे. हौस्टल में उन के साथ रहने वाले लड़कों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि दोनों वहां पहुंचे ही नहीं हैं.

बाबर और सद्दाम को ज्यादा से ज्यादा 3 घंटे में अपने कमरे पर पहुंच जाना चाहिए था. देर रात तक दोनों कमरे पर नहीं पहुंचे तो आखिर कहां लापता हो गए. जब सद्दाम और बाबर के बारे में कुछ नहीं पता चला तो रात में ही उन के घर वाले दिल्ली पहुंच गए.

रास्ते में भी वे पूछताछ करते रहे कि कहीं कोई दुर्घटना तो नहीं हुई थी. लेकिन ऐसा कुछ पता नहीं चला. थकहार कर वे लौट गए. नातेरिश्तेदारों से भी पता किया गया, लेकिन कुछ पता नहीं चला. अगले दिन भी किसी की चिंता कम नहीं हुई, क्योंकि दोनों के मोबाइल अभी तक बंद थे.

सभी को रहरह कर अनहोनी की आशंका सता रही थी. कोई नहीं जानता था कि आखिर दोनों के साथ हुआ क्या है? दिन के 11 बज रहे थे, बाबर के पिता मुन्नर के पास फोन आया. मोबाइल स्क्रीन पर नंबर बाबर का ही दिखाई दिया था, इसलिए उन्होंने तुरंत फोन रिसीव किया, ‘‘हैलो बेटा, कहां हो तुम?’’

उन्हें झटका तब लगा, जब दूसरी ओर से बाबर के बजाय किसी अन्य की गुर्राहट भरी आवाज उभरी, ‘‘ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है मियां, बाबर हमारे कब्जे में है.’’

गुर्राहट भरी आवाज सुन कर मुन्नर के पैरों तले से जमीन खिसक गई. डरते हुए उन्होंने पूछा, ‘‘तुम कौन बोल रहे हो भाई?’’

‘‘यह जान कर तुम क्या करोगे? बस इतना समझ लो कि हम अच्छे लोग नहीं हैं. तुम्हारा बेटा हमारे कब्जे में हैं. उसे सकुशल वापस पाना चाहते हो तो फटाफट 80 लाख रुपयों का इंतजाम कर लो. अगर ऐसा नहीं किया तो अंजाम भुगतने को तैयार रहो.’’Crime story

‘‘लेकिन…’’ मुन्नर ने कुछ कहना चाहा तो फोन करने वाले ने सख्त लहजे में कहा, ‘‘हमें ज्यादा सवाल सुनने की आदत नहीं है. रकम भी हम ने सोचसमझ कर मांगी है. अब यह तुम्हें तय करना है कि बेटा चाहिए या दौलत?’’

इस के बाद एक लंबी सांस ले कर फोन करने वाले ने आगे कहा, ‘‘और हां, किसी तरह की चालाकी करने की कोशिश मत करना, वरना बेटा नहीं, उस के शरीर के टुकड़े मिलेंगे. तुम रकम का इंतजाम करो, हम तुम्हें दोबारा फोन करेंगे.’’

इतना कह कर उस ने फोन काट दिया. फोन करने वाला कौन था? यह तो वह नहीं जानते थे, लेकिन उस की बातों में ऐसी धमक थी, जिस ने मुन्नर को अंदर तक दहला कर रख दिया था. वह समझ गए कि सद्दाम और बाबर का फिरौती के लिए किसी ने अपहरण कर लिया है.

मुन्नर सद्दाम के पिता से मिलने उन के घर पहुंचे तो वह सिर थामे बैठे थे. क्योंकि तब तक उन के पास भी 80 लाख रुपए की फिरौती के लिए उन के बेटे के ही मोबाइल से फोन आ चुका था. घर वालों ने मोबाइल नंबरों पर पलट कर फोन करने की कोशिश की, लेकिन वे स्विच्ड औफ हो चुके थे. घर वालों ने देर किए बगैर इस की सूचना पुलिस को देना उचित समझा.

बाबर और सद्दाम के पिता कुछ लोगों को साथ ले कर एसपी (देहात) श्रवण कुमार सिंह से जा कर मिले और उन्हें घटना के बारे में बताया. श्रवण कुमार सिंह के आदेश पर थाना मुंडाली में अज्ञात लोगों के खिलाफ दोनों छात्रों सद्दाम और बाबर के अपहरण का मुकदमा दर्ज कर लिया गया. मामला गंभीर था, इसलिए पुलिस तुरंत काररवाई में लग गई. थानाप्रभारी अजब सिंह ने तुरंत इस मामले की जांच शुरू कर दी.Crime story

एसएसपी जे. रविंद्र गौड़ ने श्रवण कुमार सिंह के निर्देशन और सीओ विनोद सिरोही के नेतृत्व में पुलिस टीमें गठित कर अपहरण के खुलासे के लिए लगा दीं. विनोद सिरोही पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पहले भी तैनात रहे हैं, इसलिए अपराध और अपराधियों पर उन की गहरी पकड़ थी. अगले दिन एक पुलिस टीम दिल्ली रवाना हुई, जहां दोनों छात्रों के साथियों अब्दुल कादिर और मेहरात से पूछताछ की गई.

लेकिन उन से कोई सुराग नहीं मिला. इस बीच पुलिस ने दोनों छात्रों के मोबाइल नंबरों की काल डिटेल्स और अंतिम लोकेशन हासिल कर ली थी. मोबाइल नंबरों के रिकौर्ड के अनुसार, सद्दाम और बाबर की लापता होने वाले दिन की अंतिम लोकेशन नोएडा शहर की पाई गई थी. फिरौती के लिए जो फोन किए गए थे, वे नोएडा से ही किए गए थे.

अपहर्त्ताओं तक पहुंचने के लिए पुलिस के पास मोबाइल ही एकमात्र जरिया था. अपहर्त्ता काफी चालाक थे. वे बात करने के लिए सद्दाम और बाबर के ही मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे थे. पुलिस टीमें संदिग्ध स्थानों के लिए रवाना हो गई थीं.

12 अप्रैल की सुबह अपहर्त्ता ने मुन्नर को एक बार फिर फोन किया. इस बार फोन किसी अन्य नंबर से किया गया था. उस ने सीधे मतलब की बात कही, ‘‘रकम तैयार रखना, डील होते ही तुम्हारे बच्चों को छोड़ दिया जाएगा.’’

‘‘हम तैयार हैं, बताओ रकम कहां पहुंचानी है?’’

‘‘इस बारे में हम तुम्हें दोपहर को फोन कर के बताएंगे.’’ कह कर अपहर्त्ता ने फोन काट दिया.

यह नंबर भी पुलिस को दे दिया गया था. 4 दिन बीत चुके थे, लेकिन पुलिस को कोई सफलता नहीं मिली. अपहर्त्ता फोन कर के तुरंत मोबाइल फोन बंद कर देते थे, इसलिए पुलिस को उन की सटीक लोकेशन नहीं मिल पा रही थी. लेकिन यह जरूर पता चल गया था कि मोबाइल फोन से जो फोन किए जा रहे हैं, वे नोएडा के सैक्टर-63 से किए जा रहे हैं.

पुलिस ने बाबर के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स खंगाली तो उस में एक नंबर ऐसा मिला, जिस पर उस की लापता होने से पहले बातें हुई थीं. उस नंबर के बारे में पता किया गया तो वह नंबर नोएडा के छिजारसी गांव के रहने वाले मौलाना अयूब का निकला. उस के बारे में पता किया गया तो पता चला कि वह एक मदरसे में बच्चों को दीनी तालीम दिया करता था, साथ ही वह तंत्रमंत्र भी करता था.

अयूब उसी जिसौरा गांव का रहने वाला था, जहां के बाबर और सद्दाम रहने वाले थे. कुछ सालों पहले अयूब नोएडा जा कर बस गया था. उस के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवा कर चैक की गई तो पता चला कि उस का संपर्क हैदर नामक एक युवक से था.

इस के बाद पुलिस ने हैदर के बारे में पता किया तो पता चला कि वह भी जिसौरा गांव का ही रहने वाला था. वह गाजियाबाद में टैंपो चलाता था. खास बात यह थी कि अयूब और हैदर की लोकेशन सद्दाम और बाबर के लापता होने वाली शाम को एक साथ थी.Crime story

इन सभी तथ्यों के हाथ में आने से पुलिस समझ गई कि दोनों छात्रों के लापता होने के तार अयूब और हैदर से जुड़े हुए हैं. युवकों के बारे में पता न चलने से गांव के लोगों में नाराजगी बढ़ रही थी. इस बात की जानकारी होने पर सीओ विनोद सिरोही ने गांव जा कर लोगों की नाराजगी को शांत कर के उन्हें पुलिस की काररवाई से अवगत कराया.

15 अप्रैल को एक पुलिस टीम अयूब की तलाश में निकल पड़ी. छिजारसी गांव नोएडा के सैक्टर-63 में ही आता था. पुलिस टीम ने नोएडा पुलिस की मदद से उसे हिरासत में ले लिया. पहले तो उस ने धर्म का डर दिखा कर पुलिस को धमकाने की कोशिश की, लेकिन सबूतों के आगे उस ने हथियार डाल दिए.

पुलिस दोनों लड़कों को सकुशल बरामद करना चाहती थी. जब अयूब से उन के बारे में पूछताछ की गई तो उस ने हाथ जोड़ कर कहा, ‘‘साहब, वे दोनों अब नहीं हैं.’’

‘‘क्या मतलब?’’

‘‘मुझे माफ कर दीजिए साहब, मैं ने और हैदर ने उन की हत्या कर के शव फेंक दिए हैं.’’

अयूब की हैवानियत भरी बातें सुन कर पुलिस सकते में आ गई. पुलिस ने लाशों के बारे में पूछा तो उस ने बताया, ‘‘हम ने दोनों लाशें ले जा कर गाजियाबाद जिले की डासना-मसूरी नहर में फेंक दी थीं.’’

पुलिस अयूब को ले कर तुरंत वहां पहुंची, जहां उन्होंने लाशें फेंकी थीं. उस की निशानदेही पर पुलिस ने झाडि़यों में अटकी सद्दाम और बाबर की लाशें बरामद कर लीं. उन के घर वालों को इस बात की सूचना दी गई तो उन के यहां कोहराम मच गया. मौके पर पहुंच कर उन्होंने लाशों की शिनाख्त कर दी.

पुलिस ने घटनास्थल की काररवाई निपटा कर लाशों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. हत्या की बात से जिसौरा गांव में तनाव फैल गया, जिस की वजह से गांव में पुलिस बल तैनात करना पड़ा. पुलिस ने दूसरे आरोपी हैदर की तलाश शुरू की, लेकिन वह हाथ नहीं आया.

पुलिस ने अयूब से विस्तार से पूछताछ की तो दोनों लड़कों की हत्या की जो कहानी निकल कर सामने आई, वह चौंकाने वाली थी. धर्म की आड़ में कमाई के लिए ढोंग रचने वाले अयूब के चेहरे से तो नकाब उतरा ही, साथ ही हैदर की भी हकीकत खुल गई.

हैदर ने अपनी प्रेमिका से बाबर को दूर करने के लिए मौत की ऐसी खौफनाक साजिश रची, जिस में अयूब भी शामिल हो गया था. तंत्रमंत्र पर बाबर का नासमझी भरा अंधविश्वास उसे मौत की चौखट तक ले गया. उसी के साथ निर्दोष सद्दाम भी मारा गया. इस तरह नासमझी में 2 घरों के चिराग बुझ गए.

दरअसल, टैंपो चालक हैदर का गांव की ही एक लड़की से प्रेमप्रसंग चल रहा था. दोनों का प्यार परवान चढ़ रहा था कि उसी बीच हैदर को पता चला कि उस की प्रेमिका का बाबर से भी चक्कर चल रहा है. इस से उस का दिमाग घूम गया. उस ने अपने स्तर से इस बारे में पता किया तो बात सच निकली.

हैदर को यह बात काफी नागवार गुजरी. उस ने अपनी प्रेमिका को भी समझाया और बाबर को भी. उस का सोचना था कि दोनों अब कभी बात नहीं करेंगे, लेकिन उस की यह खुशफहमी जल्द ही खत्म हो गई, जब उसे पता चला कि उस की बातों का दोनों पर कोई असर नहीं हुआ है. हैदर लड़की पर अपना हक समझने लगा था. उसे यह कतई मंजूर नहीं था कि वह किसी और से बातें करे, इसलिए एक दिन उस ने बाबर को समझाते हुए कहा, ‘‘बाबर, मैं नहीं चाहता कि तुम मेरी होने वाली बीवी से बात करो.’’

‘‘तुम क्या उस से निकाह करने वाले हो?’’

‘‘हां.’’

‘‘तो फिर मुझे रोकने से अच्छा है कि उसे समझाओ. अब मुझ से कोई बात करेगा तो मैं भला कैसे मना कर सकता हूं.’’

‘‘जो भी हो, मैं तुम्हें समझा रहा हूं. अगर तुम नहीं माने तो अंजाम अच्छा नहीं होगा.’’ हैदर ने धमकी भरे लहजे में कहा तो दोनों में बहस हो गई.

दूसरी ओर हैदर ने प्रेमिका से बात की तो वह मुकर गई. हैदर उस पर भरोसा करता था. उस का अहित करने की वह सोच भी नहीं सकता था. वक्त के साथ हैदर के दिमाग में यह बात घर कर गई कि हो न हो, उस की प्रेमिका को बाबर ही अपने जाल में फंसा रहा हो. उसे इस बात का भी डर सता रहा था कि अगर उस ने कुछ नहीं किया तो उसे एक दिन प्रेमिका से हाथ धोना पड़ेगा.

ठंडे दिमाग से सोचा जाए तो किसी भी मसले का हल निकल आता है, लेकिन हैदर ऐसी फितरत का इंसान नहीं था. कई दिनों की दिमागी उधेड़बुन के बाद उस ने बाबर को ही रास्ते से हटाने का फैसला कर लिया.

बाबर की बातें तांत्रिक अयूब से भी हुआ करती थीं. इस बात की जानकारी हैदर को थी. अयूब से उस के भी अच्छे रिश्ते थे. उस की प्रेमिका की बातें कई बार अयूब ने ही उसे बताई थीं, इसलिए हैदर ने अयूब के जरिए ही बाबर को रास्ते से हटाने की सोची.

मौलाना अयूब लोगों को इंसानियत का पाठ पढ़ाने का ढोंग करता था, धर्म की आड़ में तंत्रमंत्र के बल पर सभी समस्याओं से छुटकारा दिलाने का दावा करता था. अंधविश्वासियों की चूंकि समाज में कोई कमी नहीं है, इसलिए उस का यह धंधा ठीकठाक चल रहा था. एक दिन हैदर अयूब के पास पहुंचा. अयूब ने आने की वजह पूछी तो उस ने कहा, ‘‘अयूब भाई, मैं एक काम में आप की मदद चाहता हूं.’’

‘‘कैसी मदद?’’

‘‘एक लड़के को रास्ते से हटाना है. इस काम में तुम मेरी बेहतर मदद कर सकते हो.’’

‘‘कैसी बात कर रहे हो हैदर मियां?’’ हैदर की बात सुन कर अयूब एकदम से चौंका तो हैदर ने हंसते हुए कहा, ‘‘इस में इतना चौंकने की क्या बात है? कब तक तुम लोगों के लिए ताबीज बना कर हजार, 5 सौ रुपए कमाते रहोगे. मैं तुम्हें 10 लाख रुपए के साथ एक प्लौट भी दिला दूंगा. मैं जानता हूं कि तुम किराए पर रहते हो. ऐसे में तो तुम अपना घर बनाने से रहे. सोच लो, मौका बारबार नहीं आता.’’

हैदर की इस बात पर अयूब सोच में डूब गया. उस का दिया लालच वाकई मोटा था. थोड़ी ही देर में अयूब धर्म और इंसानियत को भूल गया. उस ने साथ देने का वादा किया तो हैदर ने उसे बाबर का नाम बता दिया.

‘‘तुम उसे क्यों मारना चाहते हो?’’

‘‘वह मेरी प्रेमिका को हथियाने की कोशिश कर रहा है, इसलिए उस का मरना जरूरी है.’’

इस के बाद हैदर और अयूब ने बाबर की हत्या कर उस के घर वालों से फिरौती वसूलने की योजना बनाई. इसी योजना के तहत अयूब ने 9 अप्रैल की शाम बाबर को फोन किया, ‘‘बाबर, मेरे पास एक ऐसी आयतों की ताबीज है, जिस लड़की का भी नाम ले कर पहनोगे, वह हमेशा के लिए तुम्हारी दीवानी हो जाएगी.’’

‘‘सच?’’

‘‘हां, अगर तुम्हें वह ताबीज चाहिए तो मैं तुम्हें वह ताबीज दे सकता हूं. लेकिन एक शर्त होगी.’’

‘‘क्या?’’ बाबर ने उत्सुकता से पूछा तो उस ने राजदाराना अंदाज में कहा, ‘‘इस के बारे में तुम किसी से जिक्र नहीं करोगे. एक बात और, उसे मेरे पास आ कर ही लेना होगा.’’

‘‘ठीक है, मैं गांव आया हूं. मुझे कल जामिया जाना है. तुम्हारे पास से होता हुआ चला जाऊंगा.’’

बाबर आने के लिए तैयार हुआ तो अयूब ने यह बात हैदर को बता दी. अगले दिन शाम के वक्त बाबर अपने साथी सद्दाम के साथ छिजारसी पहुंचा. हैदर वहां पहले से ही मौजूद था. हैदर को देख कर हालांकि बाबर को झटका लगा, लेकिन उस ने उस के साथ दोस्ताना व्यवहार करते हुए कहा, ‘‘हैदर, तुम यहां..?’’

‘‘मैं अयूब भाई से यूं ही मिलने चला आया था.’’ हैदर ने कहा.

बाबर उम्र के लिहाज से इतना समझदार नहीं था कि उन की चाल को समझ पाता. सद्दाम सिर्फ दोस्ती की वजह से उस के साथ आया था. कुछ देर की बातचीत के बाद अयूब ने बाबर और सद्दाम को कोल्डड्रिंक पीने के लिए दी. कोल्डड्रिंक पी कर दोनों बेहोश हो गए. अयूब ने उस में पहले से ही नशीली दवा मिला रखी थी.

बाबर और सद्दाम के बेहोश होते ही हैदर और अयूब ने मिल कर उन की गला दबा कर हत्या कर दी. तब तक रात हो चुकी थी. उन के मोबाइल उन्होंने स्विच औफ कर दिए. इस के बाद दोनों की लाशों को चादरों में बांध कर टैंपो में रखा और गाजियाबाद के मसूरी की ओर चल पड़े.

रास्ते में कई जगह उन्हें पीसीआर वैन और पुलिस की गाडि़यां मिलीं, लेकिन संयोग से टैंपो को किसी ने चैक नहीं किया. मसूरी नहर की पटरी पर सुनसान जगह देख कर हैदर ने टैंपो रोका. इस के बाद दोनों ने मिल कर लाशों को नहर में फेंक दिया. लेकिन जल्दबाजी में लाशें झाडि़यों में अटक गई थीं, जबकि उन्होंने सोचा था कि लाशें नहर में बह गई होंगी. अंधेरा होने की वजह से वे देख नहीं सके थे.

लाशों को ठिकाने लगा कर दोनों छिजारसी चले गए. अगले दिन अयूब ने आवाज बदल कर बारीबारी से बाबर और सद्दाम के घर वालों को फिरौती के लिए फोन कर के मोबाइल बंद कर दिए. हैदर को लगा कि बारबार उन के नंबर इस्तेमाल करना ठीक नहीं है, इसलिए वह फर्जी पते पर नया सिमकार्ड खरीद लाया, जिस से बाद में दोनों लड़कों के घर वालों को फोन किए जाते रहे.

हैदर और अयूब को पूरी उम्मीद थी कि अपने बेटों के बदले घर वाले फिरौती जरूर देंगे, जिस से उन की किस्मत बदल जाएगी. लेकिन उन की सारी चालाकी धरी की धरी रह गई थी.

विस्तार से पूछताछ के बाद पुलिस ने अयूब को अदालत में मैट्रोपौलिटन मजिस्ट्रैट के समक्ष पेश कर के जेल भेज दिया. पोस्टमार्टम के बाद बाबर और सद्दाम के शवों को घर वालों के हवाले कर दिया गया था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, दोनों की मौत गला दबाने से हुई थी. गमगीन माहौल में दोनों लड़कों के शवों को पुलिस की मौजूदगी में दफना दिया गया.

20 अप्रैल को पुलिस ने फरार चल रहे हैदर को भी गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में उस ने भी अपना गुनाह कबूल कर लिया था. पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे भी अदालत में पेश कर के जेल भेज दिया. हैदर ने जो कदम उठाया, वह कोई नासमझी नहीं, बल्कि जानबूझ कर उठाया गया सरासर गलत कदम था. 2 युवाओं की जान ले कर वह खुद भी नहीं बच सका.

वहीं धर्म का पाठ पढ़ाने वाले अयूब ने भी लालच में आ कर गलत राह पकड़ ली. जबकि उस ने हैदर को समझा कर सही राह दिखाई होती तो शायद यह नौबत न आती. लालच में आ कर वह खुद भी 2 हत्याओं का गुनहगार बन गया. कथा लिखे जाने तक दोनों आरोपियों की जमानत नहीं हो सकी थी. पुलिस उन के खिलाफ आरोपपत्र तैयार कर रही थी.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

एनआरआई की हत्या की उलझी हकीकत ने कर दिया सबको हैरान

12 मई, 2017 की सुबह करीब 9 बजे सोहाना के थानाप्रभारी राजन परमिंदर सिंह मल्ही को किसी ने उन के मोबाइल पर फोन कर के जानकारी दी कि मोहाली इंटरनैशनल एयरपोर्ट रोड के पास स्थित गांव मौलीबैदवान की ओर से बहने वाले गंदे नाले की झाडि़यों में एक लाश पड़ी है.

यह खबर सुन कर परमिंदर सिंह एएसआई नायब सिंह, कांस्टेबल जसविंदर सिंह, मक्खन सिंह, नवतेज सिंह और सवनीत सिंह के अलावा होमगार्ड के जवान अंगरेज सिंह को साथ ले कर फोन पर बताई गई जगह की ओर रवाना हो गए.

मौके पर लोगों की खासी भीड़ जमा थी. परमिंदर सिंह ने झाडि़यों से जूट के बोरे से ढकी लाश बाहर निकलवाई. लाश नग्वावस्था में थी, जो किसी पुरुष की थी. वह कुछ फूली हुई थी. मुंह व गरदन पर कपड़ा बंधा था. दोनों हाथ भी पीठ पर ले जा कर रबड़ की ट्यूब से बंधे थे.

परमिंदर सिंह ने लाश मिलने की खबर उच्चाधिकारियों को दी तो मोहाली पुलिस के कई उच्चाधिकारियों के अलावा जिले के सीआईए इंसपेक्टर अतुल सोनी भी अपनी टीम के साथ वहां आ पहुंचे. इस बीच पुलिस फोटोग्राफर व डौग स्क्वायड के अलावा फोरैंसिक टीम के सदस्य भी आ कर अपनेअपने काम में लग गए थे.crime story

मौके पर मौजूद लोगों से पुलिस ने लाश की शिनाख्त करानी चाही, पर कोई भी उसे पहचान नहीं सका. पुलिस मौके की काररवाई निपटा रही थी, तभी करीब 40 साल का एक आदमी तेज कदमों से चलता हुआ आया और परमिंदर सिंह से उस ने अपना नाम सुखजीत सिंह और मोहाली के गांव लखनौर का रहने वाला बता कर कहा, ‘‘सर, मुझे अभीअभी किसी ने फोन पर बताया है कि मेरे जीजा सुरजीत सिंह की किसी ने हत्या कर उन की लाश यहां डाल दी है.’’

‘‘हां, एक लाश मिली तो है. देख लें.’’ परमिंदर सिंह ने बोरे से ढकी लाश की तरफ इशारा कर के कहा.

एक कांस्टेबल ने लाश के ऊपर से बोरा हटा दिया. लाश से बदबू आने की वजह से सुखजीत अपनी नाक पर रूमाल रख कर उस लाश को गौर से देखने लगे. लाश बहुत खराब हो चुकी थी. वह काफी हद तक गल चुकी थी. चेहरा भी पूरी तरह पहचान में नहीं आ रहा था. इस के बावजूद भी उन्हें लगातार यही आशंका हो रही थी कि यह लाश उन के जीजा सुरजीत सिंह की ही है.

अचानक उन्हें ध्यान आया कि जीजा ने अपनी एक जांघ पर मोरनी का टैटू गोदवाया था. उन्होंने देखने का प्रयास किया तो वह एक जांघ पर मिल गया. इस के बाद तो संदेह की कोई गुंजाइश ही नहीं रह गई.

उस टैटू के आधार पर ही उन्होंने उस लाश की पहचान अपने बहनोई सुरजीत सिंह के रूप में कर दी. लाश की शिनाख्त होने पर पुलिस ने मौके की काररवाई पूरी की और लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी. इस के बाद पुलिस ने सुखजीत सिंह की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ सुरजीत सिंह की हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली.

पुलिस ने जब इस मामले की जांच शुरू की तो पता चला कि 55 साल के अनिवासी भारतीय सुरजीत सिंह मूलरूप से जिला फतेहगढ़ साहिब के गांव फतेहपुर जट्टां के रहने वाले थे. अच्छीखासी खेतीबाड़ी थी उन की. घर में किसी चीज की कोई कमी नहीं थी.

मगर बरसों पहले वह एक बार कनाडा क्या गए, वहीं के हो कर रह गए. उन्होंने वहीं की नागरिकता ले ली. उन की पत्नी बलजीत कौर की सन 2009 में मौत हो गई तो वह अपने बेटे रुपिंदर सिंह के परिवार के साथ रहने लगे. बेटे का परिवार भी कनाडा में ही रहता था.

सुरजीत सिंह भले कनाडावासी हो गए थे, मगर अपने देश व अपने गांव से बराबर उन का लगाव बना रहा. मोहाली तो उन्हें विशेष रूप से पसंद था. कनाडा से भारत आने का वह अकसर बहाना ढूंढा करते थे. मोहाली के सैक्टर-71 में उन्होंने अपनी तिमंजिला कोठी बना रखी थी.crime story

इस कोठी का भूतल और ऊपर वाली मंजिल उन्होंने किराए पर दे रखी थी. बाकी बीच वाला फ्लोर उन्होंने अपने लिए खाली रख छोड़ा था. वह जब भी मोहाली आते थे, अपनी इसी कोठी में रुका करते थे. पिछले कुछ समय से सुरजीत सिंह भारत आए हुए थे. गांव में उन्होंने बड़ा अच्छा समय बिताया.

सब से खूब अपनत्व भाव से मिलतेमिलाते रहे. अपने सभी रिश्तेदारों व कई परिचितों के लिए वह तोहफे भी लाए थे. गांव में कई दिन रहने के बाद वह मोहाली चले गए. यह 5 मई, 2017 की बात है. मोहाली में अपनी कोठी पर उन्होंने 2-3 दिन बिताए. इस बीच उन की अपने कई रिश्तेदारों से फोन पर बातें होती रहीं. बातचीत में उन्होंने बताया था कि वह मोहाली में रुके हुए हैं.

8 मई की शाम करीब 5 बजे सुरजीत सिंह ने अपना बैग उठाया और कहीं चले गए. जाते समय उन के एक किराएदार ने उन्हें देखा जरूर था, मगर आगे बढ़ कर वह यह नहीं पूछ सका कि वह कहां जा रहे हैं.

उस दिन के बाद उन्हें किसी ने नहीं देखा. इस बीच उन के गांव के रहने वाले सेवा सिंह ने 10 मई को उन्हें अपने किसी काम से फोन किया. फोन सुरजीत सिंह ने न उठा कर किसी अन्य ने उठाया. उस आदमी ने अपना नाम परमिंदर सिंह बताते हुए कहा, ‘‘सुरजीत अंकल हम से मिलने आए थे. जाते वक्त अपना मोबाइल यहीं भूल गए. आप से उन की मुलाकात हो तो प्लीज उन्हें इस बारे में बता दीजिएगा.’’

‘‘हां, जरूर बता दूंगा. वैसे आप उन्हें कैसे जानते हैं और आप कहां से बोल रहे हैं? अपना एड्रैस बता दीजिए. टाइम मिला तो मैं ही उन का फोन लेने आ जाऊंगा.’’ सेवा सिंह ने कहा.

‘‘अजीब किस्म की बातें कर रहे हैं, मुझे तो आप कुछ शक्की मिजाज के लग रहे हैं. सुरजीत सिंह मेरी वाइफ गुरप्रीत कौर के अंकल हैं. लीजिए, आप गुरप्रीत से ही बात कर लें.’’ वह आदमी थोड़ा तल्ख लहजे में बोला.

तभी फोन पर किसी महिला की आवाज आई, ‘‘देखिए, मैं सुरजीत अंकल की कोठी में किराए पर रहती थी. वह मुझे अपनी बेटी की तरह मानते हैं. जब भी इंडिया आते हैं, मुझ से मिलने जरूर आते हैं. कल वह हमारे यहां आए थे, रात में खाना खाने के बाद यहीं सो गए थे. गांव जाने को कह कर वह आज सुबह चले गए. उन के जाने के कई घंटे बाद हम ने देखा कि उन का फोन यहीं रह गया है.’’

‘‘वह तो जब उन्हें ध्यान आएगा, वह किसी और के फोन से अपने नंबर पर फोन कर लेंगे. मुझ से बात होगी तो मैं इस बारे में उन्हें बता दूंगा. मगर मुझे हैरानी इस बात की है कि आप लोग अपना एड्रैस बताने से क्यों हिचकिचा रहे हैं?’’

सेवा सिंह के इतना कहते ही उस औरत ने फोन काट दिया. सेवा सिंह ने दोबारा फोन मिलाया तो इस बार फोन स्विच्ड औफ कर दिया गया था.

सेवा सिंह को शक हुआ. उन के पास सुरजीत सिंह के साले सुखजीत सिंह का मोबाइल नंबर था. उन्होंने सुखजीत सिंह को फोन कर के सारी बात बता दी. इस के बाद सुखजीत सिंह को बहनोई की चिंता हुई. वह उसी समय मोहाली के लिए रवाना हो गए. सेवा सिंह से भी उन्होंने मोहाली के सेक्टर-71 स्थित कोठी नंबर 3217 पर पहुंचने को कहा.

दोनों ही मोहली स्थित सुरजीत सिंह की कोठी पर पहुंचे. जिस फ्लोर पर वह रहते थे, वहां ताला लगा था. ऊपर की मंजिल और भूतल पर रहने वाले किराएदार घर पर मौजूद थे. उन से बात की गई तो उन्होंने किसी परमिंदर और उस की पत्नी गुरप्रीत कौर को जानने से इनकार कर दिया. हां, एक किराएदार ने यह जरूर बताया कि सुरजीत सिंह 8 मई की शाम 5 बजे के करीब अपना बैग ले कर घर से कहीं गए थे.

अब तक जितनी भी बातें सुखजीत सिंह के नोटिस में आई थीं, उन से उन्हें शक हो रहा था कि कहीं उन के बहनोई किसी साजिश का शिकार तो नहीं हो गए. आखिर वह एनआरआई थे, अच्छीखासी संपत्ति के मालिक थे. ऐसे में फिरौती की खातिर उन का अपहरण होने की भी आशंका थी.

उन की कोठी मोहाली के थाना मटौर के अंतर्गत आती थी. कोई दूसरा चारा न देख सुखजीत सिंह रिपोर्ट लिखाने थाने पहुंच गए. उन्होंने पुलिस को अपने बहनोई के गायब होने की बात बताई तो पुलिस ने केवल गुमशुदगी दर्ज की.

पुलिस ने सुखजीत सिंह से सुरजीत सिंह का फोटो मांगा. उन के पास उन का फोटो नहीं था, वह उन की कोठी से ही मिल सकता था. 2 पुलिस वालों के साथ सुखजीत बहनोई की कोठी पर पहुंचे. लोगों की मौजूदगी में दरवाजे पर लगा ताला तोड़ा गया. उन के कमरे से उन का फोटो तो मिल गया, लेकिन तभी पुलिस की नजर वहां लगे सीसीटीवी कैमरे पर पड़ी.crime story

पुलिस ने कैमरे की फुटेज अपने कब्जे में ले ली. पुलिस ने जब वह फुटेज देखी तो उस में एक लड़का और लड़की उन के कमरों की तलाशी लेते दिखाई दिए. पुलिस ने कोठी में रहने वाले किराएदारों को वह फुटेज दिखाई तो वे उन्हें पहचान नहीं सके. मटौर पुलिस केस की जांच में जुट गई. उधर सुखजीत भी अपने बहनोई की तलाश में लगा था.

सुखजीत सिंह के अलावा अन्य रिश्तेदार और दोस्तों ने भी अपने स्तर से सुरजीत सिंह को संभावित जगहों पर तलाशा, लेकिन उन का कहीं कोई पता नहीं चला. आखिर 12 मई, 2017 की वह मनहूस सुबह आई, जब सुखजीत सिंह को उन के किसी परिचित ने फोन कर के बताया कि उन के जीजा सुरजीत सिंह को किसी ने मार कर उन की लाश मौलीबैदवान के गंदे नाले की झाडि़यों में फेंक दी है. इस पर सुखजीत सिंह वहां पहुंच गए थे.

मामला एक एनआरआई के कत्ल का था, इसलिए मोहाली के युवा एसएसपी कुलदीप सिंह चहल ने इसे गंभीरता से लेते हुए केस को जल्द से जल्द हल करने के आदेश थाना पुलिस को दिए.

थानाप्रभारी राजन परमिंदर सिंह मल्ही व एएसआई नायब सिंह ने संयुक्त रूप से केस की विवेचना शुरू की. उन्होंने सुरजीत सिंह के फोन नंबर की काल डिटेल्स को खंगालते हुए अपना पूरा ध्यान उस युवक व युवती पर केंद्रित कर दिया, जो सुरजीत सिंह के घर की तलाशी लेते हुए सीसीटीवी फुटेज में कैद थे.

सुरजीत सिंह की कोठी में रहने वाले किराएदारों का कहना था कि उन्होंने उस लड़केलड़की को वहां कभी नहीं देखा था. जबकि दूसरी ओर पड़ोसियों को उन के फोटो दिखाए गए तो कुछ लोगों ने बताया कि करीब 2 साल पहले तक यह लड़की यहां किराए पर रहती थी.

किराया देने की बात पर इस का सुरजीत सिंह से झगड़ा भी हुआ था. झगड़े के बाद उन्होंने इस से मकान खाली करवा लिया था. पुलिस का काम उस समय आसान हो गया, जब एक पड़ोसी ने यह जानकारी दी कि इन दिनों यह लड़की मोहाली के सेक्टर-79 की कोठी नंबर 1069 में किराए पर रह रही है.

यह जानकारी मिलते ही पुलिस टीम सेक्टर-79 के उस पते पर भेज दी गई. मगर पुलिस के वहां पहुंचने से पहले ही वह घर से गायब हो चुकी थी. फिर क्या था, पुलिस तमाम शिद्दत से उस की तलाश में जुट गई. मुखबिरों को भी सतर्क कर दिया गया.

अगले दिन एक गुप्त सूचना के आधार पर उसे अपने एक साथी के साथ खरड़ के नजदीक लांडरां चौक से हिरासत में ले लिया गया. पूछताछ करने पर युवती ने अपना नाम गुरप्रीत कौर निवासी सैक्टर-79, मोहाली बताया. जबकि उस के साथ वाले युवक ने अपना नाम परमिंदर सिंह उर्फ डौन, निवासी गांव इसरेल, जिला फतेहगढ़ साहिब बताया. दोनों की उम्र 30 व 32 साल के बीच थी. उन्होंने आपस में अपना रिश्ता देवरभाभी का बताया था.

जब उन से सुरजीत सिंह की हत्या के बारे में पूछा गया तो उन्होंने स्वीकार कर लिया कि एनआरआई सुरजीत सिंह का कत्ल उन्होंने ही किया था. हत्या की उन्होंने जो वजह बताई, उस से पता चला कि सुरजीत सिंह का गुरप्रीत कौर पर 25 हजार रुपया किराया बाकी था, जिसे वह दे नहीं पा रही थी. इस के एवज में सुरजीत सिंह ने उस से शारीरिक संबंध बनाने को कहा था, साथ ही यह शर्त भी रखी थी कि ऐसा करते समय वह उस की फिल्म भी बनवाएंगे.

गुरप्रीत कौर के पास पैसे नहीं थे, इसलिए वह उस की घिनौनी शर्त मानने को तैयार हो गई. उस ने इस बारे में परमिंदर से बात की तो वह उस की इज्जत बचाने के लिए उस का साथ देने को तैयार हो गया. इस तरह उन्होंने एक योजना बना डाली.

योजना के अनुसार, गुरप्रीत कौर ने सुरजीत सिंह को मनमानी करने का लालच दे कर फोन कर के अपने घर बुला लिया. फिर वहीं पर परमिंदर और गुरप्रीत कौर ने उस की हत्या कर दी. उन की इस कहानी पर पुलिस को पूरी तरह विश्वास नहीं हुआ. लिहाजा पुलिस ने उन्हें 14 मई की सुबह मोहाली की जेएमआईसी बिसमन मान के निवास पर पेश किया.

उस दिन रविवार की छुट्टी होने की वजह से ऐसा किया गया था. विद्वान दंडाधिकारी ने दोनों अभियुक्तों को 3 दिनों के पुलिस कस्टडी रिमांड पर दे दिया. रिमांड की इस अवधि में महिला पुलिस की मदद से परमिंदर सिंह ने दोनों से गहन पूछताछ की. इस पूछताछ में जो कुछ इन्होंने बताया, उस से लोमहर्षक अपराध की एक अलग ही कहानी सामने आई.

मूलरूप से लुधियाना की सैंट्रल जेल के नजदीक बसे प्रीतनगर की रहने वाली गुरप्रीत कौर शुरू से ही महत्त्वाकांक्षी थी. परिवार में पति हरजीत सिंह के अलावा एक बेटा था. हरजीत एक प्राइवेट फर्म में नौकरी करते हुए अपनी जिंदगी से पूरी तरह संतुष्ट था. गुरप्रीत कौर के साथ ऐसा नहीं था. अपनी ढर्रे की जिंदगी से हट कर वह कुछ ऐसा करना चाहती थी, जिस से पैसा उस के कदमों पर बरसे.

उस ने ब्यूटीपार्लर का काम सीख रखा था, जिसे वह धंधे के रूप में अपनाना चाहती थी. जबकि उस का पति इस के लिए तैयार नहीं था. इस से दोनों में तकरार रहने लगी, जो इस कदर बढ़ती गई कि आखिर दोनों ने एकदूसरे से तलाक ले लिया.

इस के बाद गुरप्रीत कौर मोहाली चली आई. बेटा तो उस के साथ था ही, मां से यह कह कर अपनी छोटी बहन को भी साथ ले आई कि वह उस की जिंदगी बनाएगी. मोहाली आते ही उस की छोटी बहन की नौकरी लग गई. बेटा भी स्कूल जाने लगा. मोहाली में गुरप्रीत ने एनआरआई सुरजीत सिंह की कोठी का एक हिस्सा किराए पर ले रखा था, जहां रहते हुए वह अपना ब्यूटीपार्लर भी चलाया करती थी.

गुरप्रीत कौर द्वारा पुलिस को बताए अनुसार, सुरजीत सिंह अकसर इंडिया आते रहते थे. वह उन्हें अंकल कहती थी. एक दिन जब उस का बेटा स्कूल गया हुआ था और बहन नौकरी पर, उसी समय उस ने सुरजीत सिंह को उकसाते हुए उन से शारीरिक संबंध बना लिए और फिर इस एवज में मकान का किराया देना बंद कर दिया.

इसी दौरान गुरप्रीत कौर की मुलाकात फतेहगढ़ निवासी हरजीत सिंह से हुई. दोनों में प्रेम हुआ, फिर इन लोगों ने चंडीगढ़ के सेक्टर-22 के गुरुद्वारा में आनंद कारज (ब्याह) रचा लिया. मगर उसी शाम हरजीत सिंह के घर वाले आ कर उसे जबरन अपने साथ ले गए. उन्होंने बताया कि वह नशा करने का आदी था.

बाद में उसे खरड़ के नशामुक्ति केंद्र में भरती करवा दिया गया. इस सब के चलते गुरप्रीत कौर की जानपहचान हरजीत के चचेरे भाई परमिंदर सिंह उर्फ डौन से हुई. इन के भी आपस में संबंध बने और दोनों ने शादी का मन बना लिया.

उन्हीं दिनों सुरजीत सिंह इंडिया आ गए. अब तक गुरप्रीत कौर उन का घर छोड़ कर कई मकान बदलते हुए सेक्टर-79 की कोठी नंबर 1069 में किराए पर रहने लगी थी. परमिंदर कोई कामधंधा नहीं करता था. गुरप्रीत ने जिस मकसद से घर छोड़ा था, वह पूरा नहीं हो रहा था. वह कोठी, गाड़ी सभी तरह के ऐशोआराम चाहती थी. यह सब उसे परमिंदर से भी मिलता नजर नहीं आ रहा था.

तब गुरप्रीत कौर और परमिंदर को एनआरआई सुरजीत सिंह ही मोटी मुर्गी दिखाई दिए. उन्हीं को दोनों ने न्यूड फोटो के जरिए ब्लैकमेल करने की योजना बनाई. गुरप्रीत कौर के सुरजीत से पहले शारीरिक संबंध बन चुके थे, इसलिए वह आसानी से झांसे में आ सकते थे.

योजनानुसार गुरप्रीत कौर ने सुरजीत सिंह से फोन पर बात कर अपने यहां बुला लिया. बेटा और बहन लुधियाना गए हुए थे. परमिंदर कमरे में पहले से छिप कर बैठ गया. देर रात तक सुरजीत और गुरप्रीत कौर का खानेपीने का दौर चलता रहा, फिर संबंध बनाने को उकसाते हुए गुरप्रीत ने उन के कपड़े उतरवा लिए.

उसी समय परमिंदर आगे आ कर अपने मोबाइल से उन की फिल्म बनाने लगा. इस पर सुरजीत सिंह गुस्से में उस से उलझ गए. मगर परमिंदर ने गुरप्रीत कौर की सहायता से सुरजीत सिंह को काबू कर उन के चेहरे व गरदन पर कपड़ा कस दिया, जिस से उन की मौत हो गई.

उन की योजना तो फोटो के बल पर उन्हें ब्लैकमेल करने की थी, पर अब उन की मौत हो गई. इस से वह घबरा गए. उन्होंने शव को बिस्तर में लपेट कर घर में ही एक तरफ रख दिया. तलाशी में सुरजीत सिंह की जेब से कुछ हजार रुपयों के अलावा और कुछ हाथ नहीं लगा.

जेब में उन की कोठी की चाबी मिल गई. चाबी ले कर वे सेक्टर-71 स्थित उन की कोठी पर पहुंचे. वहां भी वह नकदी, ज्वैलरी तलाशते रहे, पर इन के हाथ कुछ खास नहीं लगा. अलबत्ता घर पर लगे सीसीटीवी कैमरों में उन की फोटो जरूर कैद हो गई.

परमिंदर और गुरप्रीत कौर पतिपत्नी की तरह रह रहे थे. परमिंदर को इस बात पर गुस्सा आ रहा था कि सुरजीत सिंह गुरप्रीत कौर के जिस्म से खेलता रहा, इसलिए वह सुरजीत सिंह के शव का अंगअंग काट देना चाहता था. इस के लिए वह तेजधार वाली दरांती खरीद लाया.

घर में पड़े शव में से 2 दिनों बाद दुर्गंध उठने लगी. आखिर 11 मई, 2017 की रात एक जूट के बोरे में सुरजीत सिंह का शव भर कर अपनी कार से मौलीबैदवान के गंदे नाले के पास ले गए और झाडि़यों में डाल दिया. फेंकने से पहले खुन्नस में परमिंदर ने सुरजीत सिंह के दोनों पैर और गुप्तांग भी काट कर नाले में फेंक दिए. बाद में कार सेक्टर-43 बसअड्डे की पार्किंग में पार्क कर दी.

पुलिस ने इन की निशानदेही पर कार और अन्य सबूत भी बरामद कर लिए. इन का कहना था कि कपड़े से गला घोंटने से पहले इन लोगों ने सुरजीत सिंह के सिर पर बेसबाल बैट से वार भी किया था, जिस से खून निकल कर फर्श पर फैल गया था. इसे गुरप्रीत कौर ने साफ किया था.

दोनों पैर, गुप्तांग व दरांती इन लोगों से बरामद नहीं किए जा सके. यह बरामद करने के लिए माननीय अदालत ने दोनों अभियुक्तों की कस्टडी 19 मई तक बढ़ा दी. मगर अब इन लोगों का कहना है कि इन्होंने पैर व गुप्तांग नहीं काटे. आरोपी अपने बयान कई बार बदल चुके हैं.

पुलिस का यह भी मानना है कि इस अपराध में उक्त 2 लोगों के अलावा कुछ अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं.   इस रिमांड अवधि में भी पुलिस अभियुक्तों से मृतक के काटे हुए अंगों के बारे में पता नहीं लगा सकी तो उन्हें फिर से 19 मई, 2017 को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें 2 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. पुलिस अभी मामले की जांच कर रही है.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

देर है अंधेर नहीं : इस कहानी पर कहीं कोई फिल्म न बना दे

ऐसा लग रहा है यह कोई अपराध नहीं, बल्कि फिल्मी कहानी है. अगर कोई निर्माता इस पर फिल्म बनाने का निर्णय ले ले तो हैरानी भी नहीं होनी चाहिए. घटना की शुरुआत या अंत कुछ भी कह लें, जबलपुर के थाना कैंट के बिलहरी मोहल्ले से हुई, जो मंडला रोड पर स्थित है. यहां अनुसूचित जाति के लोग ज्यादा रहते हैं. ज्यादा नहीं, अब से कुछ साल पहले तक बिलहरी एक गांव हुआ करता था. लेकिन धीरेधीरे यहां लोग बसने लगे तो यह जबलपुर के कैंट इलाके का प्रमुख मोहल्ला इस लिहाज से हो गया, क्योंकि यहां आसपास के गांव वालों के अलावा दूसरे शहरों और राज्यों के भी लोग आ कर बसने लगे थे.

कुछ लोगों को छोड़ दें तो बिलहरी में रह रहे ज्यादातर लोग मेहनतमजदूरी कर रोज कमानेखाने वाले हैं और कच्चे मकानों या झुग्गियों में रहते हैं. रोजाना कई लोग आ कर इस इलाके में बसते हैं और फिर धीरेधीरे यहीं के हो कर जबलपुरिया कहलाने लगते हैं.

रोजगार की तलाश में ऐसा ही एक जोड़ा अप्रैल, 2015 में जबलपुर आया तो बिलहरी में किराए का मकान ले कर रहने लगा. पति का नाम मयूर मलिक था और पत्नी का रिंकी शर्मा. रहने का ठिकाना मिल गया तो मयूर इधरउधर काम करने लगा. कुछ दिनों बाद उसे एक दुकान में नौकरी मिल गई. जल्दी ही उन के यहां एक बेटा भी हो गया.

रिंकी हालांकि हंसमुख और मिलनसार स्वभाग की थी, लेकिन अड़ोसपड़ोस में उस का कम ही उठनाबैठना था. रोज होने वाली बातचीत में उस ने पड़ोसियों से अपने बारे में बताया था कि वह और मयूर बिहार के जिला मुजफ्फरपुर के एक गांव के रहने वाले हैं.

शादी के बाद रोजगार की तलाश में दोनों जबलपुर आ गए हैं. आमतौर पर वहां रहने वालों में बाहर से आए परिवारों की औरतें भी घरगृहस्थी चलाने के लिए मजदूरी या घरों में झाड़ूपोंछा, बरतन आदि का काम करती थीं, पर रिंकी ने ऐसा कुछ नहीं किया तो इस की एक खास वजह थी.crime story hindi

उस खास वजह का पता 9 मई, 2017 को तब पता चला, जब थाना कैंट के थानाप्रभारी मनजीत सिंह दलबल के साथ उस के घर पहुंचे. पुलिस को देख कर स्वाभाविक रूप से हलचल मचनी ही थी. मोहल्ले वाले सवालिया नजरों से एकदूसरे को देखने लगे कि आखिर हुआ क्या है? रिंकी और मयूर मलिक तो किसी झगड़ेफसाद में भी नहीं पड़ते थे.

किसी को अंदाजा नहीं था कि सीधेसादे दिखने और लगने वाले रिंकी और मयूर एक हैरतंगेज फसाद खड़ा कर यहां रह रहे थे, जिस की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी. इसलिए जिस ने भी सुना, आंखें फाड़े हैरानी से यही कहा कि ‘हे भगवान! इतना बड़ा धोखा और जुर्म. कैसे लोग हैं ये?’

रिंकी और मयूर को थाना कैंट लाया गया. उन के गुनाह से परदा उठ चुका था. उन का गुनाह ऐसा था, जिस के बारे में मनजीत सिंह तो दूर, आला अफसरों ने भी नहीं सोचा था कि ऐसा भी होता है. सचमुच उन दोनों ने जो किया था, हैरान करने वाला था.

थाने में सिर झुकाए बैठी बेबस और थकीहारी रिंकी ने जो कहानी बताई, वह वाकई रहस्य और रोमांच से भरपूर थी, जिसे सुन कर हर किसी को उस आदमी पर तरस आया था, जिस का नाम मनोज शर्मा था. रिंकी की शादी बिहार के जिला मुजफ्फरपुर के गांव सरैया के रहने वाले मनोज शर्मा से फरवरी, 2015 में हुई थी. सरैया गांव थाना गुरका में आता है.

ससुराल में कुछ दिनों तक रहने के बाद एक दिन रहस्यमय तरीके से रिंकी गायब हो गई. उस की गुमशुदगी की खबर जब उस के पिता चंद्रशेखर शर्मा और मां बबीता को लगी तो उन्होंने थाने में रिपोर्ट लिखाई कि उन के दामाद मनोज और उस के घर वालों ने दहेज के लालच में उन की बेटी की हत्या कर दी है. यही नहीं, उन्होंने रिंकी की लाश भी पुलिस के सामने पेश कर दी थी, जो पूरी तरह से पहचान में नहीं आ रही थी.

पुलिस ने इस मामले में यकीन शायद इसलिए कर लिया था, क्योंकि खुद लड़की के मांबाप ने लाश की पहचान की थी. लिहाजा दहेज मांगने और हत्या के जुर्म में मनोज को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया, जिस की सुनवाई अदालत में चल रही थी.

मनोज की मां ललिता देवी को यकीन नहीं हो रहा था कि उन का सीधासादा बेटा अपनी पत्नी की हत्या कर सकता है. वह पुलिस वालों के सामने खूब रोईंगिड़गिड़ाईं, पर सब बेकार गया. तजुर्बेकार ललिता को बहू की हरकतें पहले दिन से ही संदिग्ध लग रही थीं. पर बेटा जेल में था और उस पर हत्या का आरोप था, इसलिए उन की समझ में नहीं आ रहा था कि वह बेटे की बेगुनाही कैसे साबित करें.

मां का दिल मां का होता है. उस की ममता और हिम्मत किसी सबूत की मोहताज नहीं होती. अपनी औलाद को खतरे में पड़ी देख कर उस की हिम्मत और बढ़ जाती है. ललिता ने ठान लिया था कि जैसे भी हो, बेटे की बेगुनाही साबित कर उसे जेल और हत्या के कलंक से मुक्त कराएंगी.

कानून की निगाहों में रिंकी मर चुकी थी. उस का अंतिम संस्कार भी हो चुका था. उस का हत्यारा पति अपने किए की सजा भुगत रहा था. जबकि ललिता का दिल बारबार यही कह रहा था कि कहीं कुछ गड़बड़ जरूर है. पुलिस वालों को धोखा हुआ है. यही बात जब जानपहचान और नातेरिश्तेदार दोहराते तो उन का दिल डूबने लगता.

उन की समझ में एक बात यह नहीं आ रही थी कि अगर रिंकी मरी नहीं है तो वह लाश किस की थी, जिसे रिंकी समझ कर अंतिम संस्कार किया गया था. कम पढ़ीलिखी ललिता का दिमाग अब जासूसों सरीखा सोचने लगा था कि मुमकिन है कि इस साजिश में समधीसमधन के साथ रिंकी भी शामिल रही हो. लेकिन वे ऐसा क्यों करेंगे, यह सवाल भी अकसर मुंह बाए उस के सामने खड़ा रहता था.

आखिर तर्कों पर ममता भारी पड़ी और ललिता ने रिंकी का इतिहास यानी शादी के पहले की जिंदगी के बारे में खंगालना शुरू किया. उन्हें पहली बार में ही चौंकाने वाली बात यह पता चली कि रिंकी मयूर मलिक नाम के युवक को चाहती थी और यह बात हर कोई जानता था. उम्मीद की पहली किरण जागी तो दूसरी भी जल्द ही मिल गई. पता चला कि मयूर मलिक तभी से गायब है, जब से रिंकी की हत्या की बात कही गई थी. वह कहां है, यह किसी को नहीं मालूम था.crime story hindi

अब ललिता ने अपना पूरा ध्यान बहू के प्रेमी पर लगा दिया कि वह कहीं तो होगा और कभी न कभी तो अपने घर वालों से या फिर चंद्रशेखर और बबीता से संपर्क करेगा.

शक सच निकला. आखिरकार मई के पहले हफ्ते में ललिता को कहीं से पता चल गया कि मयूर मलिक उन की बहू रिंकी के साथ जबलपुर के बिलहरी इलाके में रह रहा है. देर न करते हुए उन्होंने यह जानकारी थाना सरैया पुलिस को दे दी.

पहली बार पुलिस ने ललिता की बात को गंभीरता से लिया और थानाप्रभारी ने तुरंत एएसआई शत्रुघ्न शर्मा की अगुवाई में एक टीम बना कर जबलपुर रवाना कर दिया. जबलपुर पहुंच कर शत्रुघ्न शर्मा ने थाना कैंट पहुंच कर थानाप्रभारी मनजीत सिंह को सारी बात बताई तो वह भी हैरान रह गए.

वह सोच कर रोमांचित थे कि अगर ऐसा है तो यह एक विरला मामला है. फौरन तैयारी कर के जब वह बिलहरी स्थित रिंकी के घर पहुंचे तो वाकई उन का सामना उस जिंदा लाश या औरत रिंकी शर्मा से हुआ, जो दुनिया और कानून की निगाह में 2 साल पहले मर चुकी थी. मयूर मलिक को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया.

रिंकी ने तुरंत स्वीकार कर लिया कि वह मनोज से शादी होने से पहले मयूर से प्यार करती थी और उसी से शादी करना चाहती थी. लेकिन घर वालों ने उस की शादी जबरदस्ती मनोज से कर दी थी. मनोज को वह मन से अपना पति नहीं स्वीकार पाई, जिस से ससुराल में उस का मन नहीं लगा.

यहां तक बात कतई हैरानी की या नई नहीं थी कि शादी के बाद लड़कियां अपने प्यार को भूल नहीं पातीं. ऐसे में वे भाग जाती हैं या फिर राज खुलने पर पति की निगाह में पत्नी का सम्मान और प्यार हासिल नहीं कर पातीं.

यही रिंकी के साथ हुआ. एक दिन मौका पा कर वह मयूर के साथ भाग गई और जबलपुर जा कर रहने लगी. अपनी नईनवेली पत्नी की गुमशुदगी के बारे में मनोज कुछ कर पाता, उस के पहले ही सासससुर ने उस पर परिवार सहित दहेज मांगने का आरोप लगा कर हत्या की रिपोर्ट दर्ज करा दी. पुलिस ने भी उसे जेल भेज दिया. जेल में वह यही सोचता रहा कि आखिरकार उस का गुनाह क्या है?

इधर चंद्रशेखर शर्मा और बबीता ने बेटी की गलती को ढंकने के लिए एक लाश का इंतजाम किया और रोरो कर पुलिस वालों को यकीन दिला दिया कि लाश उन की बेटी रिंकी की है. साफ दिख रहा है कि पुलिस ने  इस मामले में घोर लापरवाही बरती, जिस का खामियाजा निर्दोष मनोज को भगुतना पड़ा.

अभी इस मामले में एक अहम राज खुलना बाकी है. चंद्रशेखर और बबीता ने जिस लाश को रिंकी की लाश बताया था, उस की व्यवस्था उन्होंने कहां से की थी? कथा लिखे जाने तक दोनों फरार थे, इसलिए इस का पता नहीं चल सका था. अब उन की गिरफ्तारी के बाद ही पूरी तसवीर साफ होगी.

बात वाकई हैरान करने वाली है कि मनोज अपनी उस पत्नी की हत्या के आरोप में 2 साल जेल में रहा, जिस की हत्या हुई ही नहीं थी. अगर यह रहस्य न खुलता तो उस की हत्या के जुर्म में उसे मुमकिन है उम्रकैद या फांसी की सजा हो जाती. अगर ललिता देवी भागदौड़ कर के उसे नहीं बचातीं तो जरूर मनोज अंधे कानून की बेरहमी का शिकार हो जाता.

इस घटना ने अमिताभ बच्चन अभिनीत फिल्म ‘अंधा कानून’ के उस दृश्य की याद दिला दी, जिस में अमिताभ बच्चन भरी अदालत में खलनायक अमरीश पुरी की हत्या कर देता है और अदालत उसे सजा नहीं दे पाती, क्योंकि वह उसी खलनायक की हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा पहले ही भुगत चुका था.

हालांकि अब यह कहने में भी हर्ज नहीं है कि इंसाफ की चौखट पर देर है, अंधेर नहीं.

जमघट बिच्छुओं का और सरकार की उदासीनता

इस देश का हाल यह है कि एक गरीब की बुढ़ापे से पहले मौत का राज खोलने के लिए पैकिंग का जरा सा कागज हटाओ कि जहरीले बिच्छुओं का जमघट दिखाई दे जाएगा. हर गरीब की मौत चाहे आग लगने पर हो, सड़क दुर्घटना में हो, दंगे में हो, अस्पताल में हो, खुदकुशी से हो, मारपीट से हो, ढूंढ़ोंगे तो पता चलेगा कि वह उन जहरीले बिच्छुओं से मरा है, जो अमीर ऊंची पहुंच वाले लोगों के रहमोकरम पर पल रहे हैं.

गोरखपुर में औक्सिजन की कमी की वजह से 60 बच्चे मरे तो अखबारों की जांच से एकएक बिच्छू निकल रहा है. कभी पता चलता है कि औक्सिजन का ठेका तो 3 सौ मील दूर इलाहाबाद या लखनऊ की फर्मों को दिया गया था. कभी पता चलता है कि सप्लायरों को भुगतान महीनों नहीं किया जाता. कभी पता चल रहा है कि सिलैंडर में औक्सिजन ही कम आती है.

बिहार और उत्तर प्रदेश में आजादी के 70 साल बाद भी बाढ़ आने पर हर साल सैकड़ों जानें जाती हैं, लाखों भूखे तरसते हैं. सरकारें बाढ़ नहीं रोक सकतीं, तो पक्के 2-3 मंजिले मकान तो बनवा सकती हैं, पर सरकारों को तो बिच्छू पालने हैं, जो लोगों को जहर के डंक मारें. अब सरकार के बिच्छू और खूंख्वार हो गए हैं, क्योंकि अब एक पार्टी का राज पूरे देश में है.

यही बिच्छू किसानों को खा रहे हैं. जब अकाल पड़ता है, तो उन की जेब खाली. जब बारिश ज्यादा हो, तो फसल डूब जाती है. जब भरपूर फसल हो जाए, तो अनाज टका सेर मिलना शुरू हो जाता है. इस दौरान महाजन और बैंक का सूद बिच्छुओं के लिए जहर बनाता रहता है. कोई बिच्छुओं को मारे नहीं, सरकार इस के लिए कानून बनाती रहती है.

सरकार की हर फाइल में सैकड़ों बिच्छू पाले जाते हैं. सरकार के हर कानून से बिच्छुओं को पैदा करने की जमीन तैयार होती है. हर आदेश से बिच्छुओं को आम आदमी को जहर से डसने का हक दिया जाता है. बच्चे, बड़े, औरतें, जवान मरते हैं, पर सरकारें आराम से चलती हैं.

गोरखपुर के बाबा राघवदास अस्पताल का नाम कहने को चाहे किसी संतमहंत पर हो, पर संतोंमहंतों के यहां भी यही होता है. वहीं गरीबों, दलितों, मुसलमानों, औरतों के बारे में नियमकानून बनाए जाते हैं, ताकि वे बिच्छुओं के जहर से कमजोर और गरीब के गरीब रह जाएं. जो मर जाते हैं, उन पर दुख नहीं होता. उन की लाशों पर राजनीति की रोटियां सेंकी जाती हैं. मौत तो आतीजाती रहती है. शरीर नश्वर है. जो जल्दी मर गया, वह पिछले जन्मों के पापों के कारण मरा. बिच्छू तो भगवान की कृपा हैं.

फीफा अंडर-17 वर्ल्ड कप: खिलाड़ियों की संघर्ष से शिखर तक पहुंचने की कहानी

कुछ ही दिनों में फीफा अंडर-17 वर्ल्ड कप भारत में शुरू होना वाला है. इसी बीच अंडर-17 वर्ल्ड कप की ट्राफी कोच्चि पहुंच गई है. ट्राफी के भारत पहुंचने पर रंगारंग कार्यक्रम और राज्य की लोककला की झाकियों के साथ स्वागत किया गया.

केरल के खेल मंत्री एसी मोइदीन ने जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम परिसर में खेल प्रशंसकों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में ट्राफी का अनावरण किया. ट्राफी का अनावरण करने के बाद केरल के खेल मंत्री ने कहा कि फीफा अंडर-17 वर्ल्ड कप को सफल बनाने के लिए राज्य विभाग के साथ-साथ स्पोर्ट्स क्लब, स्कूलों और कालेजों के माध्यम से व्यापक प्रचार अभियान किया जा रहा है.

इस ट्राफी को आज अम्बेडकर स्टेडियम में आयोजित मिशन इलेवन मिलियन समारोह में रखा जाएगा. भारत में ट्राफी के सफर को समाप्त करते हुए, कोच्चि का किला ट्राफी की मेजबानी करेगा.

अगले महीने से शुरू हो रहे फीफा अंडर-17 फुटबाल विश्व कप के लिए भारत ने 21 सदस्ययी टीम की घोषणा कर दी गई है. इस टूर्नामेंट में भारत, अमेरिका, कोलंबिया और घाना के साथ ग्रुप-ए में है. भारत अपना पहला मुकाबला अमेरिका के साथ 6 अक्टूबर को खेलेगा. इसके बाद कोलंबिया और घाना के साथ क्रमश: 9 और 12 अक्टूबर को नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में मैच होगा. इस टूर्नामेंट का आयोजन भारत के 6 शहरों में होने वाला है.

कुछ ऐसी है फीफा अंडर-17 विश्व कप के लिए भारतीय टीम

गोलकीपर – धीरज सिंह, प्रभसुखन गिल, सनी धालीवाल

डिफेंडर – बोरिस सिंह, जितेंद्र सिंह, अनवर अली, संजीव स्टेलिन, हेंनरी एंटोनी, नमित देशपांडे

मिडफिल्डर – सुरेश सिंह, निनथोइगंबा मितई, अमरजीत सिंह, अभिजीत सरकार, कोमल, लालेनगमवाइ, जीकसन सिंह, नोनदंबा लोरेम, राहुल कनलोए प्रवीन, मोहम्मद शाहजहां

फारवड– राहीम अली, अनिकेत जाधव

फीफा अंडर-17 वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम में चुने गए खिलाड़ियों की कहानी संघर्ष की दास्तां है. टीम में शामिल खिलाड़ियों में कोई दर्जी का बेटा है, कोई बढ़ई का तो किसी की मां रेहड़-पटरी पर सामान बेचती है. टीम के 21 खिलाड़ियों में से ज्यादातर ने अपने अभिभावकों को संघर्ष करते देखा है. बावजूद इसके वे इस खेल में देश का प्रतिनिधित्व करने के अपने सपने को पूरा करने के करीब हैं.

सिक्किम के 17 वर्षीय कोमल थाटल के पास फुटबाल खरीदने के लिए पैसे नहीं थे और वह प्लास्टिक से बनी गेंद से खेलते थे. थाटल ने गोवा के ट्रेनिंग कैंप से बताया, ‘मेरे अभिभावक दर्जी हैं और मेरे पैतृक गांव में उनकी छोटी-सी दुकान है. बचपन में मैं कपड़े या प्लास्टिक से बनीं गेंद से फुटबाल खेलता था’.

थाटल के पिता अरुण कुमार और मां सुमित्रा अपनी थोड़ी-सी कमाई में से उनके लिए फुटबाल किट खरीदने के लिए पैसे जमा किए.

संघर्ष की ऐसी ही कहानी अमरजीत सिंह कियाम की भी है जो टीम के कप्तान बनाए गए हैं. अमरजीत के पिता मणिपुर के छोटे से शहर थाबल में खेती और बढ़ई का काम करते हैं. उनकी मां वहां से 25 किमी दूर इंफाल में मछली बेचती हैं.

अमरजीत ने कहा, ‘मेरे पिता किसान हैं और खाली समय में खेती करते हैं. मां मछली बेचती है लेकिन खेल से मेरा ध्यान ना भटके इसलिए वे मुझे कभी भी काम में हाथ बटाने के लिए नहीं कहते थे’.

अमरजीत ने कहा, ‘मेरे चंडीगढ़ फुटबाल अकैडमी में आने के बाद माता-पिता से बोझ थोड़ा कम हुआ क्योंकि वहां रहने, खाने और स्कूल का खर्च भी अकैडमी ही वहन करती है’.

बौडी फिट तो लाइफ हिट और फिर ये फायदे तो आपका इंतजार कर ही रहे हैं

अच्छा स्वास्थ्य हर कोई चाहता है, लेकिन आज के तनाव भरे वातावरण में अच्छे स्वास्थ्य की कल्पना करना एक चुनौती से कम नहीं है. अधिकतर लोगों का मानना है कि पौष्टिक भोजन करने से ही शरीर हमेशा स्वस्थ और तंदुरुस्त रहता है, लेकिन यह बात कुछ हद तक ही सही है. क्योंकि कोई भी आहार लेने से पहले व्यक्ति को यह देख लेना चाहिए कि वह जो भोजन खा रहा है, क्या उस को पचाने की शक्ति उस के पास है.

भोजन पचाने का काम अधिकतर व्यक्ति के परिश्रम पर निर्भर करता है. जितनी अधिक वह मेहनत करता है, उतना ही अधिक उसे पौष्टिक आहार लेने की आवश्यकता पड़ती है.

आज के युवा पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक भोजन के बजाय स्वाद को ज्यादा तरजीह देते हैं. नतीजतन, वे कम उम्र में ही आलसीपन और मोटापे के शिकार हो जाते हैं. ऐसे में चाह कर भी वे फिट बौडी नहीं रख सकते. शारीरिक रूप से फिट व्यक्ति को कई प्रकार के लाभ मिलते हैं:

  1. आप का एनर्जी लेवल बढ़ता है.
  2. शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है.
  3. आप मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकते हैं.
  4. आप में आत्मविश्वास की भावना बढ़ती है.

खुद को हमेशा चुस्तदुरुस्त बनाने के लिए डेली वर्कआउट करना बहुत जरूरी है. मुंबई के एलिविंसर फिटनैस केंद्र के ट्रेनर डिसूजा कहते हैं, ‘‘शरीर को फिट रखने के लिए नियमित व्यायाम जरूरी है. साथ ही, खूब पानी पिएं ताकि शरीर के टौक्सिक कण बाहर निकल जाएं. भूखे पेट काम करना सब से अधिक हानिकारक है. खाना 3 बार के बजाय 6 बार खाएं ताकि आप कभी आलसीपन महसूस न करें. अधिकतर युवा दूसरे कार्यों की वजह से वर्कआउट करना छोड़ देते हैं, जिस से उन के शरीर पर बुरा असर पड़ता है. कार्य चाहे कुछ भी हों पर वर्कआउट रोज करना चाहिए.

‘‘कई युवा मोटापे के शिकार होने पर जिम का रुख करते हैं जबकि 18 साल के बाद अगर वे किसी भी प्रकार के वर्कआउट को नियमित रूप से अपनी दिनचर्या में शामिल करेंगे तो हमेशा स्वस्थ रहेंगे. हर व्यक्ति को 40 से 45 मिनट रोज वर्कआउट करना चाहिए.’’

स्नैप फिटनैस जिम के फिटनैस ट्रेनर शैलेंद्र सावंत 15 साल से इस क्षेत्र में हैं का कहना है, ‘‘मुंबई में 75 फीसदी लोग स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हैं. उन में महिलाएं कम, पुरुष अधिक हैं. यहां हर युवा हिंदी सिने कलाकार से प्रेरित है और उन के बौडी स्टाइल को खुद भी अपनाना चाहता है. कई बार वे वर्कआउट कम शुरू तो करते हैं पर बीच में छोड़ जाते हैं.

‘‘नियमित वर्कआउट करने से कई बीमारियां नहीं होती है. शरीर का ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है, जिस से भूख लगती है. भोजन में रोटी, सब्जीदाल के साथसाथ प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होनी चाहिए. जंकफूड से हमेशा दूर रहें. हर व्यक्ति  को चुस्त रहने के लिए 40 से 50 मिनट रोज व्यायाम करना चाहिए.

‘‘शरीर के हर भाग के लिए अलगअलग व्यायाम हैं, जिसे ट्रेनर की सहायता से सीखना चाहिए. बौडी मास इंडैक्स के साथसाथ फैट प्रतिशत की जांच भी जरूरी है.’’

शैलेंद्र आगे कहते हैं, ‘‘वर्कआउट करने के बाद कुछ लोगों को शिकायत होती है कि उन का वजन कम नहीं हो रहा है. ऐसे में वे कहते हैं कि व्यक्ति को 1 किलो के वजन पर सिर्फ 1 ग्राम प्रोटीन लेना चाहिए. गाइडलाइन के द्वारा अगर आप सही डाइट लेंगे, तो वजन अवश्य कम होगा और आप चुस्तदुरुस्त रहेंगे. 15-16 साल के युवा भी हलकाफुलका वर्कआउट कर सकते हैं. उन्हें कम उम्र से ही स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होना चाहिए.’’

जब आप इतनी सारी खूबियां अपनी बौडी को फिट बना कर पा लेंगे तो जाहिर है कि लाइफ भी हिट हो ही जाएगी.

कुछ फायदे जो बौडी फिट होने पर मिलते हैं:

  1. आत्मविश्वास बढ़ेगा.
  2. मानसिक दबाव कम होगा.
  3. ब्लड सर्कुलेशन बढ़ेगा.
  4. शक्ति बढ़ेगी.
  5. हृदय मजबूत होगा.
  6. ऊंचाई बढ़ेगी.
  7. बोन डैन्सिटी अच्छी होगी.
  8. मांसपेशियों का विकास सही तरीके से होगा.
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