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बस 3 आसान स्टेप में अपने खोए हुए कौन्टैक्ट पाएं वापस

आज के समय में स्मार्टफोन, जीमेल, गूगल कौन्टैक्ट्स हमारे जिंदगी का अहम हिस्सा बन गए हैं. हमारे दोस्तों और प्रोफेशनल कौन्टैक्ट्स के बारे में जानकारी जमा करने में गूगल बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. कई बार हम छोटी-मोटी गलतियों से या वायरस की वजह से सालों से जमा की अपनी सारी मेहनत खो देते हैं और इन कौन्टैक्ट्स को डिलीट कर बैठते हैं. लेकिन ऐसा हो जाए तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. बहुत आसान तरीकों से आप अपने खोए हुए गूगल कौन्टैक्ट्स वापस पा सकते हैं.

आईए जानते हैं कैसे आप अपने खोए हुए कौन्टैक्ट्स वापस पा सकते हैं.

स्टेप 1

अपने ब्राउजर में नई गूगल कौन्टैक्ट्स वेबसाइट खोलें. ध्यान रखें कि यह आपको उसी अकाउंट से खोलना है जिसके कौन्टैक्ट्स आप वापस पाना चाहते हैं.

स्टेप 2

वेबसाइट खोलने के बाद बाईं तरफ मेन्यु पर जाएं और मोर बटन पर क्लिक करें. उसके बाद आपको रीस्टोर कौन्टैक्ट्स क्लिक करना होगा.

स्टेप 3

अब आप वह टाइम फ्रेम चुन सकते हैं जिसमें डिलीट किए गए कौन्टैक्ट आप रीस्टोर करना चाहते हैं. इसके बाद रीस्टोर बटन पर क्लिक कर दें. ये स्टेप पूरे करने के बाद आपके सभी खोए हुए कौन्टैक्ट्स रीस्टोर हो जाएंगे.

आपकी जानकारी के लिए यह बता दें, कि आप कौन्टैक्ट्स खोने के सिर्फ 30 दिनों के भीतर ही रीस्टोरेशन की प्रक्रिया को अंजाम दे सकते हैं.

कहीं आप को भी सैल्फी लेने की लत तो नहीं है

कहीं आप को भी सैल्फी लेने की लत तो नहीं है? कुछ विशेष पलों को यादगार बनाने वाली सैल्फी आप की जान को खतरा तो नहीं पैदा कर रही? एक अध्ययन के अनुसार, सैल्फी लेने की लत घातक हो सकती है.

कारनेग मैलन यूनिवर्सिटी और अन्य संस्थानों के अध्ययनकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन ‘मी, माईसैल्फ ऐंड माई किल्फी : कैरेक्टराइजिंग ऐंड प्रीवैंटिंग सैल्फी डैथ्स’ के अनुसार, 2014 में दुनियाभर में सैल्फी के कारण हुईं 127 में से अकेले भारत में 76 मौतें हुई. ये मृतक खतरनाक जगहों पर सैल्फी ले रहे थे.

10 जनवरी, 2016 को बैंडस्टैंड, मुंबई में सैल्फी लेते हुए 3 युवतियां समुद्र में बह गईं, एक व्यक्ति ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उस की भी मृत्यु हो गई. अगस्त 2016 में महाराष्ट्र की ही 27 वर्षीया एक वकील की पुणे के पास मंदोषी घाट पर अपने पति के साथ सैल्फी लेते हुए गिर कर मृत्यु हो गई. नवंबर में लायंस पौइंट, लोनावाला पर 25 वर्षीय एक युवक की सैल्फी लेते हुए मृत्यु हो गई.

2015 में भी सैल्फी के कारण कई मौतें हुईं. आगरा के पास सामने से आती हुई ट्रेन के सामने पोज बनाते हुए कुछ विद्यार्थियों की मृत्यु हो गई. इसी वर्ष नागपुर में नौका पर सैल्फी लेते हुए 7 युवक डूब गए. एक जापानी युवक की भी ताजमहल पर सैल्फी लेते हुए गिरने के बाद सिर में लगी और चोट से मृत्यु हो गई थी.

एक अध्ययन के अनुसार, विश्वभर में सैल्फी से हुई मौतों का एक सामान्य कारण है, किसी बिल्डिंग या पहाड़ से नीचे गिरना. इस कारण से अब तक 29 जानें गई हैं. इस के बाद सैल्फी के चक्कर में 11 मौतें हुईं.

कुछ जगहों पर तो सैल्फी स्टिक को बैन ही कर दिया गया है, जैसे, कांस फिल्म फैस्टिवल, विंगल्डन, द कोलोसियम, रोम, कई थीम पार्क्स, द नैशनल गैलरी, लंदन, द गगेनहेम, न्यूयौर्क में द मैट्रोपोलिटन म्यूजियम औफ आर्ट, पैलेस म्यूजियम, बीजिंग, कोशैला म्यूजिक फैस्टिवल और बुल्स फैस्टिवल, स्पेन.

दांव पर जान

मुंबई के एवार्ड औफिसर किरण दिघवकर का कहना है कि मार्च 2017 में सीएसटी और बीएमसी बिल्डिंग के बाहर स्पैशल जगह बनाई जाएगी, सैल्फी जोन, क्योंकि भारत में यहां काफी सैल्फी ली जाती हैं. यह उचित रैलिंग वाली जमीन से 5 फुट ऊपर बनेगी.

क्या आप ने ब्रैगी बैन सुना है? ब्रैगी किसी खूबसूरत लोकेशन पर या जिम में हैवीवेट उठाते हुए सैल्फी है जो दोस्तों और परिवार को चिढ़ाने के लिए ली जाती है. दक्षिण फ्रांस में तो एक टूरिस्ट बीच को नो ब्रैगी जोन बना दिया गया है.

रेलवे प्रोटैक्शन फोर्स द्वारा प्रस्तावित नए रेलवे ऐक्ट के अनुसार, ट्रेन के पास खतरनाक सैल्फी लेने वाले को 5 वर्षों की सजा हो सकती है. यह कदम युवाओं में बढ़ते सैल्फी क्रेज को रोकने के लिए उठाया गया है.

यह जीवन एक अमूल्य उपहार है, इसे सस्ता न समझें, इस का महत्त्व समझें. टैक्नोलौजी मानव विकास के लिए है. सैल्फी के चक्कर में पड़ कर, अपने व्यर्थ के शौक में अपने जीवन को दांव पर न लगाएं.

बाइक से हैरतअंगेज करतब करते इन युवाओं को कभी देखा है आपने

युवाओं की खास पसंद है बाइक. कुछ उत्साही और दुस्साहसी युवक मोटरसाइकिल से ऐसे हैरतअंगेज कारनामे करते हैं कि देखने वाला आश्चर्यचकित रह जाए.

सेना की डेयर डेविल्स मोटरसाइकिल प्रदर्शन टीम ने ऐसे हैरतअंगेज कारनामों के लिए अनेक बार गिनीज बुक औफ वर्ल्ड रिकौर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया है. इस टीम ने अपना पहला रिकौर्ड 1991 में ग्वालियर में तब बनाया था जब 7 मोटरसाइकिलों पर 40 जवानों ने सवार हो कर 400 मीटर का फासला तय किया था. सेना की ही सिग्नल कोर टीम ने 11 मोटरसाइकिलों पर 251 जवानों को बैठा कर 11 जून, 2009 को जबलपुर में 240 मीटर चलने का रिकौर्ड बनाया था.

अक्तूबर 2014 में मध्य प्रदेश की जबलपुर डेयर डेविल्स टीम ने करतब दिखाते हुए 3 नए विश्व रिकौर्ड बनाए. पहला रिकौर्ड 70 सैकंड में 3 मोटरसाइकिलों पर 15 जवानों ने 1 किलोमीटर के वर्गाकार क्षेत्र में मानव मोटरसाइकिल पिरामिड बना कर बनाया. नायक दिलीप कुमार बोहरा के पेट के ऊपर से 1,200 बार बौक्स को निकाला गया. यह स्टंट जवानों ने 13 मिनट में पूरा किया. तीसरा रिकौर्ड हवलदार दिपायन चौधरी व ईश्वर रावटी ने वर्गाकार ट्रैक पर 218 किलोमीटर की रिवर्स राइडिंग की. उन्होंने पिछला रिकौर्ड तोड़ते हुए 4 घंटे 21 मिनट और 8 सैकंड में यह कीर्तिमान रचा.

1976 में ब्राजीलियन आर्मी पुलिस के 40 जवान एक ही मोटरसाइकिल पर सवार हो कर 1.6 किलोमीटर की दूरी तक गए थे.

मोटरसाइकिल द्वारा सब से लंबी छलांक का रिकौर्ड 69,60 मीटर का है. 6 फरवरी, 1977 को फ्रांस के एलो ज्यां प्रीयू ने पैरिस के निकट मौटलेहरी में छलांग लगा कर 16 बसों को पार कर के यह रिकौर्ड बनाया था.

22 जून को लौडन, न्यू हैंपशायर में डोग डैंजर ने 1991 होंडा सी आर 500 पर मोटरसाइकिल द्वारा लंबी छलांग में 251 फुट की सब से लंबी दूरी तय की.

रोमांचक प्रदर्शन

नई दिल्ली में हर वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह में मोटरसाइकिल के रोमांचक प्रदर्शन भारतीय सेना के जवानों द्वारा किए जाते हैं, जिन्हें देख दर्शक दांतों तले उंगलियां दबा लेते हैं. 26 जनवरी, 1992 को भारतीय थलसेना की मोटरसाइकिल प्रदर्शन टीम ने 42 पुरुषों और 8 मोटरसाइकिलों ने पिरामिड बनाने का रिकौर्ड बनाया था. जिस ने बिना किसी बाहरी सहायता के 600 मीटर की दूरी तय की थी. इस टीम ने 6 जून, 1992 को अपना रिकौर्ड सुधारते हुए 8 मोटरसाइकिलों पर 45 पुरुषों का पिरामिड बना कर 800 मीटर की दूरी तय की थी.

सेना की डेयर डेविल्स के नाम 2 रिकौर्ड और भी हैं, 21 दिसंबर, 2013 को उस ने चलती मोटरसाइकिल पर प्रदर्शन किया. इसी दिन उस ने जमीन पर लेटे हुए 50 जवानों के ऊपर से मोटरसाइकिल जंप करा कर लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया था.

मोटरसाइकिल से हैरतअंगेज प्रदर्शन करने वालों की कमी नहीं है. 30 नवंबर, 1988 को 10 फुट की सीढ़ी के ऊपर से पीछे की तरफ मुंह कर के लगातार 90 मिनट के लिए सिग्नलमैन डेबी जोंस, रौयल सिग्नल व्हाइट हैलमेट्स ने 23 किलोमीटर की दूरी केटरिक एयरफील्ड, न्यूयौर्क में तय की थी.

अटलांटा जौर्जिया के ग्रगेरीड ने स्ट्रीटलीगल मोटरसाइकिल प्रदर्शित की जो 15 फुट 6 इंच लंबी और 253 किलोग्राम भारी है.

क्या आप ने 25 फुट लंबी मोटरसाइकिल को चलते देखा है? जरमनी के एसेन मोटर शो में प्रदर्शित इस मोटरसाइकिल को बनाया है स्टीव हौपकिंस ने. इस पर 10 व्यक्ति आराम से बैठ सकते हैं.

लाजवाब कारनामे

ब्रिटेन के कोलिन फुर्ज ने तो कमाल ही कर दिखाया. उन्होंने 72 फुट लंबी मोटरसाइकिल प्रदर्शित की. लंबाई अधिक होने के कारण इसे सीधे चलना पड़ता है. इस पर 25 व्यक्ति आराम से बैठ सकते हैं. गिनीज बुक औफ वर्ल्ड रिकौर्ड्स के लिए इसे एक मील तक चला कर दिखाया गया. इस की रफ्तार 35 किलोमीटर प्रतिघंटा है.

क्या आप 7.5 फुट ऊंची मोटरसाइकिल की कल्पना क सकते हैं? यह ‘विगटो’ है जोकि स्वीडन के टौम बीवर्ग ने बनाई है. जगुआर के 12 पावर के इंजन वाली यह मोटरसाइकिल 100 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चल सकती है.

फ्रांस के कलाकार जूलियन डूपौंट ने मैक्सिको में बाइक पर सांसें रोक देने वाले कारनामे को अंजाम दिया है. इस साहसी कलाकार ने अपने जीवन का सब से हैरतअंगेज प्रदर्शन करते हुए मैक्सिको सिटी के मोंटाना रूसा रोलर कौस्टर ट्रैक पर बाइक चलाई. 33 मीटर ऊंचा यानी 108 फुट वुडन कौस्टर बिना बिजली के चलने वाली ट्रेन के लिए तैयार किया गया था जो गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत पर काम करता है.

सड़क पर बाइक सवार प्रदर्शन करते हुए तो अकसर देखे जाते हैं लेकिन आसमान में पैराग्लाइडिंग से बाइक पर प्रदर्शन करना लोहे के चने चबाने से कम नहीं है. ऐसा ही कारनामा किया स्टंटमैन स्टीव मेयर ने. उन्होंने साल्ट लेक सिटी से 50 मील दूर उटाह में हार्ले डैविडसन से पैराग्लाइडर की तरह माउंट टिंपानोगास के चारों ओर चक्कर लगाया.

उम्र 56 साल की लेकिन जज्बा युवाओं जैसा. मिलिटरी एमसीटीई के ड्राइवर सुरेश चौधरी ने फरवरी 2014 में बगैर हैंडल पकड़े 221 किलोमीटर तक बाइक चलाने का कारनामा किया. उन्होंने मध्य प्रदेश के महू से जुलवानिया तक बाइक चला कर इस कारनामे को अंजाम दिया.

वे 10 साल के कड़े अभ्यास के बाद यह मुकाम हासिल कर पाए. उन का सपना हाथ छोड़ कर बाइक चलाने वाले 213 किलोमीटर के रिकौर्ड को तोड़ना था. वे अपने इस कारनामे को गिनीज बुक औफ वर्ल्ड रिकौर्ड्स में दर्ज कराने का दावा करेंगे.

फेसबुक पर ढूंढ़ रहे हैं गर्लफ्रैंड तो कभी न करें ये गलतियां

‘‘यार, बहुत ट्राई कर लिया, लेकिन एक भी फ्रैंड नहीं मिली. यार, इधर तो सब फेक हैं, जो मिलती हैं वे खेलीखाई हैं, क्या ये असली  युवतियां हैं. उस ने पहले फ्रैंड रिक्वैस्ट ऐक्सैप्ट की, फिर ब्लौक कर दिया. यार, इंटरनैट पर जितनी जल्दी रिश्ते बनते हैं उतनी ही जल्दी वे टूट भी जाते हैं,’’ ये बातें अकसर युवक या पुरुष एकदूसरे से साझा करते सुनाई पड़ते हैं.

दरअसल, सोशल मीडिया सर्च तकनीक बेहद सटीक है. जिस की हमें तलाश हो वह हमें मिल जाता है, लेकिन अकसर लोग धोखा खा जाते हैं. कई बार कुछ गड़बड़ होने से लोगों को सोशल मीडिया पर निराशा हाथ लगती है. भारत में ज्यादातर लोग साथी ढूंढ़ने के लिए फेसबुक का इस्तेमाल करते हैं.

फेसबुक के मुताबिक भारत में प्रतिदिन 6.90 करोड़ लोग फेसबुक का इस्तेमाल करते हैं जो देश में इस्तेमाल की जाने वाली साइट्स का 90 फीसदी है, यानी आप इन लोगों में से अपनी गर्लफ्रैंड जरूर ढूंढ़ सकते हैं, कोई कमी नहीं है बशर्ते आप यहां दिए सुझावों पर अमल करें. :

अनजान लोगों को फ्रैंड रिक्वैस्ट न भेजें

फेसबुक उन लोगों को ही रिक्वैस्ट भेजने की इजाजत देता है जिन को आप जानते हों, लेकिन अगर आप किसी अनजान महिला से फ्रैंडशिप का आग्रह कर रहे हैं और उस ने किसी की भी रिक्वैस्ट स्वीकार करने की गुंजाइश खुली रखी है तो आप उसे अपनी रिक्वैस्ट भेज सकते हैं. बशर्ते उसे आप पसंद आएं और आप दोनों के बीच बातचीत शुरू हो.

अपनी सर्च का दायरा सीमित रखें

फेसबुक पर सर्च का औप्शन होता है, जहां आप किसी का भी नाम और उस के शहर को खोज सकते हैं. उदाहरण के लिए अगर आप दिल्ली में किसी मधुरिमा को ढूंढ़ना चाहते हैं तो मधुरिमा और दिल्ली लिख कर सर्च करें. अगर आप लाखों मधुरिमाओं की भीड़ से बचना चाहते हैं तो आप मधुरिमा के साथ उन का उपनाम (सरनेम) भी टाइप कर दें तो परिणाम और सटीक होंगे.

फेसबुक रिक्वैस्ट न भेजने दे तो क्या करें

फेसबुक किसी अनजान को रिक्वैस्ट न भेजने दे तो ऐसी दशा में आप उसे एक मैसेज भेज सकते हैं. अंगरेजी में ‘हाय लैट अस बी फ्रैंड्स’ या हिंदी में ‘क्या हम दोस्त बन सकते हैं’ संदेश के साथ एक फूल या गुलदस्ता भी भेज सकते हैं.

वह स्वीकार कर ले तो न करें ये बातें

अगर आप की रिक्वैस्ट स्वीकार कर ली गई है तो इस का मतलब यह नहीं कि आप जबरन किसी के पीछे पड़ जाएं और उस पर मैसेज की बरसात कर दें. इस का मतलब यह भी नहीं कि वह आप के लिए उपलब्ध है और आप जब मरजी उसे डेट पर ले जा सकते हैं. फ्रैंड का अर्थ सैक्स नहीं, न ही उस की स्वीकारोक्ति है. अगर आप ने किसी को बारबार मैसेज किए तो वह आप को ब्लौक या अनफ्रैंड भी कर सकती है.

तमीज से पेश आएं जल्दबाजी न करें

अगर आप फेसबुक फ्रैंड के साथ तमीज से पेश आते हैं और उस को समझ कर वक्त देते हैं तो आप एक अच्छे दोस्त बन सकते हैं. आप तहजीब से बात करें. उस की पसंद व नापसंद का पता करें. उस की तारीफ करें. हो सकता है कि वह आप को सिर्फ अपने अच्छे दोस्तों की ही श्रेणी में रखे. अकसर देखा गया है कि भारत के कई युवकों ने विदेशी फेसबुक फ्रैंड्स से पहले दोस्ती की, 1-2 साल दोस्ती कायम रखी और फिर बाद में शादी कर ली.

मोबाइल रीचार्ज और पैसे मांगने वाली युवतियों से सावधान

इंटरनैट पर ठगों की कमी नहीं, वे लोगों को तरहतरह से ठगते हैं. कुछ चालाक युवतियां युवकों को मीठीमीठी बातों में फंसा कर उन से अपना मोबाइल रीचार्ज करवाती हैं और कई बार उन से पैसे भी उधार मांग लेती हैं. कुछ तो सीधेसीधे धंधे में भी उतर आती हैं और पैसों के लिए सबकुछ करने के लिए तैयार हो जाती हैं. ऐसी युवतियों से सावधान रहें.

अगर फेसबुक फ्रैंड मिलने आ जाए

यदि कोईर् फेसबुक फ्रैंड आप के आग्रह पर आप पर भरोसा कर के मिलने पहुंच जाए तो इसे न तो सैक्स का निमंत्रण समझें और न ही उस की स्वीकारोक्ति. फेसबुक फ्रैंड से मिलने से पहले युवतियों को बारबार सोचना चाहिए, क्योंकि हरियाणा के गुड़गांव, हिसार और पंजाब के मोहाली सहित कई स्थानों पर कईर् भोलीभाली फेसबुक फ्रैंड्स का बलात्कार तक किया जा चुका है. इसलिए यदि वह आप से मिलने आ गई तो आप बाइज्जत उसे उस के घर पहुंचा दें. छोटी सी गलती एक ओर जहां दोस्ती तोड़ सकती है, वहीं बड़ी गलती आप को कानून के शिकंजे में फंसा सकती है.

रिलेशनशिप स्टेटस को ले कर गलतफहमी न पालें

अकसर युवक किन्हीं युवतियों का रिलेशनशिप स्टेटस पा कर उन के प्रति गलतफहमी पाल लेते हैं. मसलन, अगर किसी युवती ने खुद को विधवा, तलाकशुदा, सेपरेटेड या फिर कौंप्लिकेटेड लिखा है तो लोग मानते हैं कि वह आसानी से उपलब्ध है. अकसर ऐसे स्टेटस वाली युवतियों के पास फ्रैंड रिक्वैस्ट बहुत आती हैं जिस वजह से उन्हें अपना फेसबुक एकाउंट या तो डीऐक्टिवेट करना पड़ता है या फिर वे फ्रैंड रिक्वैस्ट की संभावना ही खत्म कर देती हैं.

साइबर स्टौकिंग से सावधान

यदि आप की फ्रैंड रिक्वैस्ट या मैसेज का कोई जवाब नहीं मिलता है तो समझिए वह आप से दोस्ती करने की इच्छुक नहीं है. उस को बारबार मेसैज न करें, क्योंकि ऐसा करना अपराध है. कानून की भाषा में इसे साइबर स्टौकिंग यानी इंटरनैट पर किसी का पीछा करना कहा जाता है और कोई चाहे तो आप के खिलाफ कानूनी कार्यवाही कर सकता है.

फेसबुक सोशल नैटवर्किंग का साधन है, इसलिए इसे दूसरों को परेशान करने का जरिया न बनाएं. साफसुथरी दोस्ती किसी भी रिश्ते का रूप ले सकती है. आप एक अच्छे दोस्त के रूप में किसी का जीवन संवार सकते हैं. इंटरनैट सिर्फ सैक्स या महिलाओं के करीब आने का जरिया नहीं है. आप चाहें तो इंटरनैट का सही इस्तेमाल कर न केवल अपने जीवन में परिवर्तन ला सकते हैं बल्कि अपना ज्ञान भी बढ़ा सकते हैं.

लो आ गए अच्छे दिन, फ्लैटों के दाम औंधे मुंह गिर रहे हैं

जो लोग फ्लैटों में पैसा लगा कर यह सोच रहे थे कि अच्छे दिन आते ही उन के फ्लैटों के दाम बढ़ जाएंगे और उन की मेहनत की कमाई दोगुनाचौगुना फल देगी  वे अब घरों को भूल ही जाएं. इस देश में मकानों की बहुतायत इतनी है कि अब उन के दाम औंधे मुंह गिर रहे हैं. यह विकास की नैगेटिव ग्रोथ यानी नीचे गिरने का संकेत है कि बिना खुद की छत वाले अब मकानों के लायक पैसा नहीं बचा पा रहे.

मकानों के सैक्टर को सुधारने के नाम पर रियल स्टेट कानून और रजिस्ट्रेशन भी शुरू किया गया है और नोटबंदी व जीएसटी की भी मार पड़ी है कि इस गेम में अब पैसा ही नहीं लग रहा और जिन का लगा है वह फंस गया है. दिल्ली के निकट कार्यरत जेपी समूह दिवालिया होने के कगार पर है. डीएलएफ व आम्रपाली ग्रुप भी डूबने लगे हैं.

बैंकों ने इस क्षेत्र में उधार देना बंद कर दिया है और जिन्हें दे दिया गया है उन से वसूली चालू हो गई है. इस क्षेत्र में निर्माणाधीन फ्लैटों पर लाखों लोगों ने अपनी जमापूंजी और उधार ले कर पैसा लगाया था. वे सब अब विकास की आंधी में धुल रहे हैं और उन का पैसा गोल हो गया है.

स्टेट बैंक औफ इंडिया के नैशनल बैंकिंग ग्रुप के मैनेजिंग डाइरैक्टर रजनीश कुमार ने साफ कह दिया है कि यह सोचना कि सिर्फ उधार देने वाले बैंक नुकसान उठाएंगे और फ्लैटों में पैसा लगाने वाले आम नागरिकों का पैसा सुरक्षित रहेगा भ्रम है. नुकसान तो दोनों को होगा.

असल में नुकसान केवल घर खरीदारों का होगा, जिन्होंने नारों और विज्ञापनों के झांसे में आ कर निवेश कर दिया था. उन्हें नहीं मालूम था कि सरकार की नीतियां ऐसी कमजोर निकलेंगी कि अर्थव्यवस्था की पहचान रियल स्टेट ही डूबने लगेगा.

यह संभव है कि भवन निर्माताओं ने बेहद मुनाफाखोरी की है पर जिस तरह के जोखिम उन्होंने लिए हैं उस में मुनाफे की अपेक्षा तो होगी ही. आखिर इसीलिए तो बैंकों ने भरभर कर भवन निर्माताओं को भी कर्ज दिया और भवन खरीदारों को भी मासिक आय के अनुसार किश्तों पर चुकाने वाला कर्ज दिया. अगर इस धंधे में मूलभूत कमजोरी होती, तो लाखों लोग आज शानदार फ्लैटों में सुख से न रह रहे होते.

भवन निर्माताओं को सरकारों ने नियमों और अनुमतियों के जंजाल में फांस रखा है और पगपग पर नुक्कड़ के सिपाही से ले कर मुख्यमंत्री तक वसूली करता है. जमीन जनता की, मेहनत जनता की, पैसा जनता का पर सरकार ‘मान न मान मैं तेरा मालिक’ की तर्ज पर हर जगह मालिक बन बैठी है.

अब काले धन को जड़ से हटाने के पागलपन में धन की जड़ें ही खोद दी जा रही हैं. जब किसान बीज ही खाने लगे तो अकाल तो आएगा और भवन निर्माण क्षेत्र में यह आ पहुंचा है. अब भुखमरी होगी मकानों की. मकान होंगे पर खरीदार नहीं. छतें होंगी पर लोग सड़कों पर रहेंगे.

यही वजह है कि हाल ही में प्रकाशित एक सर्वे ने स्पष्ट किया है कि देश की अधिकांश जनता के पास कैदियों से भी कम जगह लायक छत है. जो छतें बन रही थीं वे अच्छे विकास और सुशासन की बाढ़ में ढह रही हैं.

अपने प्यार को खो देने के बाद अंदर से टूट चुके थे देवानंद

बौलीवुड एक्टर देवानंद को यूं तो किसी परिचय की जरूरत नहीं है. वह हमेशा से ही लड़कियों के फेवरेट रहे हैं. कहा जाता है, उन पर लड़कियां जान छिड़कती थीं और उन्हें सफेद शर्ट काले कोट में देख कर लड़कियां चक्कर खा कर गिर जाती थीं. इस वजह से कोर्ट ने उनके काले कोट पहनने पर बैन लगा दिया था, ताकि उनकी खूबसूरती को देख लड़कियां आत्महत्या न करें. हालांकि, देवानंद का दिल तो एक्ट्रेस सुरैया पर आया था. यहां तक कि उनकी आत्मकथा रोमांसिंग विद लाइफ में सुरैया का जिक्र है.

अपनी किताब में देवानंद लिखते हैं, ‘काम के दौरान, हम दोस्त हो गए और फिर गहरे दोस्त, गहरे दोस्त से प्रेमी. सबको पता चल गया और वैसे भी प्रेम कहानी कहां छुपती है. एक दिन भी ऐसा नहीं था, जब बिना बात किए रहा जाए. कभी आमने-सामने, तो कभी फोन पर घंटो बातें होती रहती थी’. बता दें, देवानंद पहली बार सुरैया से फिल्म ‘विद्या’ के सेट पर मिले थे.

देवानंद ने अपना परिचय देते हुए कहा, लोग मुझे देव कहते हैं, आप मुझे किस नाम से बुलाना पसंद करेंगी.

इस पर सुरैया ने मुस्कुरा कर कहा देव.

देवानंद ने बताया, ‘मुझे सुरैया से प्यार हो गया था, लेकिन एक परेशानी थी. उनकी नानी के कहे बिना उनके घर का पत्ता भी नहीं हिलता था और जैसा हर प्रेम कहानी में होता आया है, कोई न कोई विलेन आ ही जाता है. मैं जब भी सुरैया के घर जाता तो उनको अच्छा नहीं लगता. मेरा पहले की तरह स्वागत नहीं होता, लेकिन जैसे जैसे लोगों कों हमारा मिलना नागवारा होता गया वैसे-वैसे हमारे बीच प्यार की तड़प भी बढ़ती गई’.

मुझे सुरैया को देखे बिना चैन नहीं मिलता. दोनों के लिए एक एक पल काटना मुश्किल हो गया. सुरैया के परिवार ने हमारे प्यार पर पाबंदियां लगा दीं और मिलने जुलने पर भी रोक लगा दी. एक इंटरव्यू में देवानंद ने कहा था, सुरैया एक बड़ी एक्ट्रेस थी और हमेशा लोगों से घिरी रहती थीं. उनसे मिलने के लिए मुझे काफी जद्दोजहद करनी पड़ती थी. एक दिन हम छुपके से एक पानी की टंकी के पास मिले और सुरैया ने मुझे गले लगा कर कहा- आई लव यू. इसके बाद मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था. मैंने सोच लिया कि अब ऐसे नहीं चलेगा. मैंने फौरन सगाई के लिए अंगूठी खरीदी, लेकिन मुझे समझ नहीं आया कि उसने मेरी अंगूठी पानी में क्यों फेंक दी. हालांकि, मैंने सुरैया से कभी इस बारे में नहीं पूछा. दो प्रेमी अलग हो गए, मजहब की दीवार ने दो प्यार करने वालों को दूर कर दिया. इसके बाद दोनों ने एक साथ कोई फिल्म नहीं की. सुरैया ने पूरी जिंदगी किसी से शादी नहीं की. अपनी बुक में देवानंद ने अपनी प्रेम कहानी का बेहद खूबसूरती से जिक्र किया है. उन्होंने लिखा, पहले प्यार का अहसास ही अलग होता है.

देवानंद ने एक इंटरव्यू में कहा, आप खुद बताइए, एक लड़का, एक लड़की से बेइंतहा महोब्बत करता है और उससे शादी करना चाहता है, लेकिन जब वह बेबस होकर आपसे कहती है, मेरा परिवार, मेरे रिश्तेदार, मेरी नानी, मेरा धर्म तो आप क्या करेंगे. देव ये बात बोलते वक्त चुप हो गए, उनकी खामोशी ही उस वक्त सब बयां कर रही थी. उन्होंने कहा, उस दिन मैं बहुत रोया, मैं अंदर से टूट चुका था, लेकिन मैंने अपने आप को संभाला. इसके बाद मैं कभी सुरैया से नहीं मिला. हालांकि, मैंने एक दो बार पार्टीज में उसे देखा. मुझे पता चला कि उसने कभी शादी नहीं की.

फिर एक दिन मेरे पास किसी का फोन आया और उसने मुझे बताया कि सुरैया अब इस दुनिया में नहीं रही. यह सुन कर मुझे बहुत दुख हुआ. कई बार ऐसा होता है आप अपना दुख जता नहीं पाते. मैं उसे अंतिम समय में देखने भी नहीं गया. अगर जाता तो लोगों को बातें बनाने का एक और मौका मिल जाता. एक हेडलाइन मिल जाती, लोग मेरी तस्वीर लेते और वो सबके लिए मजे की बात बन जाती. वो मुझसे सवाल करते, मैं क्या कहता.  वह सुंदर थी, अच्छा गाती थी, मैं उनसे प्यार करता था, इतना काफी था. मैं चुपचाप बैठ गया उदास था, लेकिन वह इन सब दुखों से आजाद हो गई, वह तो अब चली गईं इस दुनिया से, लेकिन किसी के जाने से जिंदगी कहां रुकती है.

देवानंद ने 1954 में अपनी एक फिल्म की शूटिंग के दौरान अपनी सह कलाकार कल्पना कार्तिक से शादी कर ली थी. अपनी शादी के बारे में उन्होंने किसी को कुछ नहीं बताया. हालांकि, उनकी यह शादी ज्यादा वक्त तक नहीं चली. उनके दो बच्चे हैं सुनील आनंद और देविना आनंद. देविना वही नाम है जो देव और सुरैया ने अपनी बेटी के लिए सोचा था. देवानंद अपनी जिंदगी के उस पड़ाव पर पहुंच गए थे. देव अक्सर अपनी उम्र के बारे में बात किया करते थे. यूं तो दुनिया उन्हें रोमांटिक हीरो के तौर पर जानती है लेकिन असल में उनका रोमांस अपनी किताब से है विचारों से है. वह अपनी जिंदगी के अंतिम क्षणों तक काम करते रहे और 3 दिसंबर 2011 को चुपचाप दुनिया को अलविदा कह कर हमेशा के लिए चले गए.

अब ट्विटर की शब्द सीमा होगी दोगुनी, लिख सकेंगे 280 शब्द

ट्विटर ने शब्दों की सीमा को बढ़ाने का फैसला ले लिया है. इसके जरिए वह उन लोगों को भी ट्विटर से जोड़ने में का प्रयास करेगा जो कि अब तक इससे दूर हैं.

एक रिपोर्ट के मुताबिक शब्दों की यह सीमा बकायदा दोगुनी होने वाली है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आपको पूरे 280 शब्द लिखने ही होंगे बल्कि यह होगा कि आप अधिकतम 280 शब्दों को लिख सकते हैं.

ट्विटर चीफ ऐग्जेक्यूटिव जैक डोर्सी ने ट्वीट करके बताया कि जापानी, कोरियाई और चीनी भाषाओं में एक शब्द या कम शब्दों में दोगुनी जानकारी दी जा सकती है, लेकिन अंग्रेजी जैसी भाषा व अन्य भाषाओं में ऐसा संभव नहीं होता. ट्विटर ने इससे जुड़ी घोषणा कर कहा कि 140 शब्दों में अपनी बात समेटना इतना भी आसान नहीं है. इसलिए हमने शब्द सीम बढ़ाने का फैसला किया है. इसकी टेस्टिंग भी शुरू की जा चुकी है. टेस्टिंग के तहत कुछ ही लोगों को यह सुविधा दी जाएगी.

कई बार लोग कम शब्दों में अपनी बात कह पाने में असमर्थ रहते थे, जिसके चलते वह ट्वीट नहीं करते थे या फिर कम ही करते थे, हालांकि कई बार लोग एक के बाद एक ट्वीट करते हुए उसे क्रमांक देते हुए अपनी बात रख देते थे. लेकिन जल्द ही अधिक कैरेक्टर संख्या मिलने से ज्यादा स्पेस और शब्द लोगों को मिलने शुरू हो जाएंगे. ट्व‍िटर को भरोसा है कि शब्दों की सीमा बढ़ने से ज्यादा से ज्यादा लोग इससे जुड़ंगे और अब वह ज्यादा से ज्यादा ट्वीट भी कर सकेंगे.

जानें नए नियम लागू होने के बाद क्या होगा अंदाज-ए-क्रिकेट

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने क्रिकेट के पुराने नियमों को बदल कर नए नियम लागू कर दिए हैं. इन नियमों को बदलने पर इस साल मई में विचार किया गया था, जिससे अब आईसीसी के द्वारा 28 सितंबर से लागू कर दिया जायेगा. इस नियम में पहली बार हौकी और फुटबौल की तरह क्रिकेट के मैदान पर भी रेड कार्ड का नियम लागू किया जा रहा है.

नए नियम के लागू होते ही दक्षिण अफ्रीका और यूएई में इसी सप्ताह शुरू होने वाले टेस्ट मैचों में गलत व्यवहार करने वाले खिलाड़ियों को पहली बार रेड कार्ड दिखाकर मैदान से बाहर कर दिया जाएगा.

नए नियम मौजूदा भारत-आस्ट्रेलिया के अलावा इंग्लैंड-वेस्टइंडीज के बीच जारी वनडे सीरीज पर लागू नहीं होंगे, क्योंकि ये सीरीज नियमों की घोषणा से पहले शुरू हो गई थीं.

टीम इंडिया नए नियमों के तहत अपना पहला मैच 7 अक्टूबर को रांची में खेलेगी. यह आस्ट्रेलिया के साथ तीन टी-20 मैचों की सीरीज का पहला मैच होगा.

आईसीसी के महाप्रबंधक क्रिकेट ज्योफ अलार्डिस ने कहा, ‘आईसीसी के खेलने के नियमों में ज्यादातर बदलाव एमसीसी द्वारा घोषित क्रिकेट नियमों के बदलाव के परिणामस्वरूप किए गए हैं. हमने हाल में अंपायरों के साथ वर्कशाप पूरी की है, ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि वे सभी बदलावों को समझा लें’

आईसीसी द्वारा बनाये गए नए नियमों पर एक नजर

बैट की एज 40 मिमी से ज्यादा नहीं

बैट की लंबाई और चौड़ाई पर रोक बरकरार रहेगी. साथ ही बल्ले के एज (कोण) की मोटाई 40 मिमी से अधिक नहीं होनी चाहिए. गहराई 67 मिमी तक हो सकती है.

खिलाड़ी होगा मैदान से बाहर

अंपायर को धमकाना, किसी खिलाड़ी या अन्य सदस्य के साथ हिंसक व्यवहार आदि करने पर खिलाड़ी को लेवल-4 का दोषी माना जाएगा. उसे मैदान से बाहर कर दिया जाएगा.

टी-20 में भी डीआरएस

अब टी20 मैचों में भी डिसीजन रिव्यू सिस्टम का इस्तेमाल किया जा सकेगा. बल्लेबाजी या गेंदबाजी करने वाली टीम मैदानी अंपायर के फैसले को चुनौती दे सकेगी.

नए रेफरल नहीं

टेस्ट मैच में पहले 80 ओवर में किसी टीम के 2 रेफरल विफल रहते हैं तो उसे 80 ओवर खत्म होने के बाद 2 नए रेफरल नहीं मिलेंगे.

ऐसे में नहीं कटेगा रेफरल

यदि अंपायर के फैसले को किसी टीम के द्वारा टीवी अंपायर को रेफर किया जाता है और मैदान पर लिया गया फैसला सही रहता है क्योंकि डीआरएस में अंपायर कॉल के कारण यह नतीजा निकला है, तो वह टीम अपना रिव्यु नहीं गंवाएगी.

दो से कम ओवर नहीं

टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अगर कोई मैच 10 ओवर से कम का खेला जाता है, तो कोई भी गेंदबाज 2 ओवर से कम गेंदबाजी नहीं करेगा. मतलब अगर कोई मैच 5 ओवर का है, तो 2 गेंदबाजों को 2 ओवर करने की अनुमति दी जाएगी.

हेलमेट से टकराने पर भी आउट

फील्डर या विकेटकीपर ने हेलमेट पहना हुआ है तो उससे गेंद के टकराने के बाद बैट्समैन को कैच आउट, रनआउट और स्टंप आउट किया जा सकता है.

बाउंड्री से अंदर गेंद फेंकना गलत

बाउंड्री लाइन के पास यदि फील्डर हवा में उछलकर कैच लेने का प्रयास कर रहा है तो गेंद से उसका पहला संपर्क बाउंड्री लाइन के अंदर होना चाहिए वर्ना अंपायर बाउंड्री का इशारा कर देगा.

तो रन आउट नहीं

अगर बल्लेबाज रन दौड़ते हुए क्रीज के अंदर आ जाता है और फील्डर द्वारा स्टंप्स बिखेरे जाने के समय उसका बल्ला या शरीर का कुछ हिस्सा हवा में रहेगा तो भी वह रन आउट नहीं होगा.

औब्सट्रक्टिंग द फील्ड

अब ‘हैंडल्ड द बौल’ नियम को हटाकर उस तरीके से आउट होने वाले बल्लेबाज को ‘औब्सट्रक्टिंग द फील्ड’ नियम के तहत आउट दिया जाएगा.

6 सब्सिटिट्यूट

टेस्ट क्रिकेट में 6 सब्सिटिट्यूट फील्डरों को कोई भी टीम नामित कर सकती है. पहले यह संख्या 4 थी.

रोक दिया जाएगा गेंदबाजी से

अगर कोई बोलर जानबूझकर फ्रंटफुट नो बौल डालता है तो उसे पारी के बाकी हिस्से में गेंदबाजी करने से रोक दिया जाएगा.

बेल्स को एक धागे से बांधने का फैसला

आईसीसी ने विकेट पर रखी बेल्स को अब एक धागे के साथ बांधने का नियम लागू किया है. यह फैसला फील्डर और विकेटकीपर को किसी भी प्रकार की चोट बेल्स उड़ने से न लगे इसलिए लिया गया है.

सेशन खत्म का नया नियम

टेस्ट क्रिकेट में सेशन खत्म होने से 3 मिनट पहले ही अगर विकेट गिरता है तो तभी सेशन खत्म होने की घोषणा कर दी जाएगी. इससे पहले यह समय 2 मिनट था.

दो बार बाउंस मतलब नौ बौल

अगर गेंदबाज की गेंद बल्लेबाजी क्रीज से पहले दो बार बाउंस करती है, तो उसे नो बौल दिया जायेगा. इससे पहले यह नियम लागू था कि गेंद दो बाउंस ले सकती है. यदि कोई फील्डर गेंद को बल्लेबाज तक पहुंचने से पहले ही पकड़ लेता है, तो अंपायर के द्वारा या तो वह गेंद नो बौल होगी या फिर डेड बौल.

बाई और लेग बाई के मिलेंगे रन

नो बौल पर आये बाई और लेग बाई के रन अब नो बौल से हटकर गिने जायेंगे. गेंदबाज के खिलाफ उस नो बौल को गिना जायेगा और लेग बाई व बाई को अतिरिक्त रन में गिना जायेगा. इससे पहले बाई और लेग बाई को नो बौल में ही गिन लिया जाता था.

अफगानिस्तान में सैनिक नहीं भेजेगा भारत, विकास कार्यों पर होगा जोर

भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह युद्धग्रस्त अफगानिस्तान में अपने सैनिक नहीं भेजेगा, बल्कि पुनर्निर्माण और विकास कार्यों पर ही जोर देगा. रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने अमेरिकी रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस के साथ वार्ता के बाद साझा बयान के दौरान यह बात कही.

द्विपक्षीय वार्ता में भारत और अमेरिका ने रक्षा संबंधों को और मजबूत करने के तौर तरीकों के साथ ही आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे पाक और अफगानिस्तान से जुड़े अहम मुद्दों पर भी चर्चा की. सीतारमण ने कहा कि हमारे पड़ोस की स्थिति और सीमापार आतंकवाद के बढ़ते खतरे पर विस्तार से चर्चा हुई. रक्षा मंत्री ने कहा कि दोनों पक्षों ने माना कि आतंकवाद को सरकारी नीति के तौर पर इस्तेमाल करने वालों पर शिकंजा कसा जाए.

रक्षा मंत्री के मुताबिक, मैटिस ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि वह पाक के समक्ष उसकी धरती से उपज रहे आतंक का मुद्दा उठाएंगे. पाक को परोक्ष चेतावनी देते हुए मैटिस ने कहा, आतंकवाद की सुरक्षित पनाहगाह को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.

‘उन्नत रक्षा तकनीक साझा करने पर विचार’

अमेरिकी रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने कहा, हम रक्षा व्यापार और तकनीकी सहयोग बढ़ाने के रास्ते खोज रहे हैं. इसके तहत अमेरिका भारत के साथ उन्नत रक्षा तकनीक साझा करने पर विचार कर रहा है. भारत ने पिछले एक दशक में अमेरिका से एक हजार करोड़ रुपये के हथियार खरीदे हैं. सैन्य विश्लेषकों के मुताबिक, अमेरिका चीन से बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत से सैन्य सहयोग बढ़ाने का उत्सुक है. दोनों देश भारत को 22 गार्डियन ड्रोन की आपूर्ति करने की डील पर आगे बढ़ रहे हैं. जून में अमेरिका ने पहली बार किसी गैर नाटो सहयोगी को ऐसे ड्रोन देने की मंजूरी दी थी.

भज्जी ने की इस आस्ट्रेलियाई कप्तान से दोबारा टीम में वापसी की अपील

भारत दौरे पर आई आस्ट्रेलिया टीम की हालत खराब है. पांच मैच की सीरीज में टीम 3-0 से पिछड़ चुकी कंगारु अब एक अदद जीत की तलाश में है. तीनों ही मैच में भारतीय टीम ने आस्ट्रेलिया को खेल की हर विधा में फेल साबित किया है. ऐसे में अब आस्ट्रेलिया की लगातार हार को देखते हुए भारतीय दिग्गज स्पिन गेंदबाज हरभजन सिंह ने सन्यांस ले चुके पूर्व आस्ट्रेलियाई कप्तान माइलक क्लार्क से दोबारा टीम में वापसी के लिए कहा है.

हरभजन सिंह ने एक ट्वीट कर कहा कि ‘मुझे लगता है आस्ट्रेलिया के मौजूदा लाइन अप में अच्छे बल्लेबाजों की कमी है. टीम में दिग्गज बल्लेबाजों का दौर अब खत्म हो चुका है. इसलिए मैं चाहता हूं कि क्लार्क अपना संन्यास खत्म कर आस्ट्रेलिया के लिए एक बार फिर से बल्लेबाजी करें.

माइकल क्लार्क ने ट्विटर के माध्यम से ही हरभजन को जबाव दिया उन्होंने कहा कि, ‘मैं यह देख रहा हूं, मेरे पुराने पैर अब कमेंट्री बाक्स के एसी रूम का आनंद ले रहे हैं, आस्ट्रलियाई टीम को कुछ और करना चाहिए.’

आपको बता दें कि टीम इंडिया के खिलाफ क्लार्क का वनडे रिकार्ड अच्छा रहा है. उन्होंने भारत के खिलाफ 30 मैच खेलकर 39 के औसत से 858 रन बनाए हैं. इसमें 2 शतक और 4 अर्धशतक भी शामिल हैं. टेस्ट क्रिकेट में क्लार्क ने भारत के खिलाफ 22 मैच में 54 की औसत से शानदार 2049 रन बनाए जिसमें 7 शतक और 6 अर्धशतक शामिल हैं.

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