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जियो फोन में बड़े बदलाव, खरीदने से पहले पढ़ें ये खबर

आपने जियो फोन तो ले लिया होगा, शायद सस्ता समझकर लिया होगा. लेकिन आपको बता दें कि ये फोन सस्ता तो बिलकुल नहीं है. जिस तरह से लान्च करते समय रिलांयस जियो ने बड़े-बड़े सपने दिखाये थे वो आपको भारी पड़ने वाले है. जियो फोन को लान्च करते समय जो सबसे बड़ी शर्त ग्राहकों के सामने रखी गयी थी वो ये कि जियो फोन को खरीदने के लिए आपको 1500 रुपये सिक्योरिटी के तौर पर कंपनी को देना होगा, जो कि 3 साल बाद ग्राहकों को वापस कर दिया जाएगा.

लेकिन यही शर्त अब ग्राहकों के लिए सर दर्द बन गया है. ऐसा इसलिए क्योंकि ये रुपये आपको आसानी से मिलने वाले नहीं हैं. रिलायंस जियो ने आखिरकार 0 रु लागत वाले जियो फोन के लिए अपने नियम व शर्तों पर से परदा उठा लिया है. जब से इस फोन और इसकी कीमत का ऐलान हुआ था अटकलें लगाई जा रही थीं कि कंपनी इसपर किस तरह की शर्तें लगा सकती है. पहली बार कंपनी ने खुलकर वेबसाइट पर इसके बारे में बताया है.

जानिए वे 8 खास शर्तें जो इस सस्ते फीचर फोन के साथ जुड़ी हुई हैं.

हर साल करवाना होगा 1500 रु का रीचार्ज

रिलायंस जियो की वेबसाइट पर लिखे नियम व शर्तों के मुताबिक यूजर्स को हर साल कम से कम 1500 रु का रीचार्ज करवाना जरूरी होगा.

जियो फोन का सिम लौक्ड रहेगा

जियो फोन में जियो का सिम कार्ड पहले से लगा हुआ आएगा और यह लौक्ड होगा. यानी इस फोन में यूजर किसी और नेटवर्क का सिम कार्ड इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे.

जियो फोन यूजर डिवाइस ना बेच सकेंगे ना किसी को दे सकेंगे

कंपनी की वेबसाइट पर साफ लिखा है कि फोन के ग्राहक ना तो इसे बेच सकते हैं, ना उधार दे सकते हैं और ना ही किसी को स्वेच्छा से फेक सकते हैं.

12 महीने से पहले जियो फोन लौटाने पर

जियो फोन यूजर अगर 12 महीने से पहले यह फोन लौटाना चाहते हैं तो उन्हें 1500 रुपये, जीएसटी और जो भी दूसरे टैक्स लागू हो रहे हैं, उनका भुगतान करना होगा.

12 महीने से 24 महीनों के भीतर फोन लौटाने पर

जो जियो फोन यूजर सालभर के इस्तेमाल के बाद और दूसरा साल पूरा होने से पहले फोन लौटाना चाहते हैं उन्हें जीएसटी और दूसरे टैक्स के साथ 1000 रुपये चुकाने होंगे.

24 महीने से 36 महीनों के भीतर फोन लौटाने पर

जो यूजर 24 महीनों (2 साल) के इस्तेमाल के बाद और 36 महीने (3 साल) पूरे होने से पहले फोन लौटाना चाहते हैं उन्हें जीएस और दूसरे टैक्सों के साथ 500 रु का भुगतान करना पड़ेगा.

जियो फोन वापस लेने का अधिकार

कंपनी को यह अधिकार होगा कि नियम व शर्तों का उल्लंघन करने पर वह किसी ग्राहक से हैंडसेट वापस ले ले.

इसके बाद फोन लौटाया तो कुछ नहीं मिलने वाला

फोन लौटाने की शर्तों में कंपनी ने लिखा है कि फोन को 3 साल पूरे होने के बाद ग्राहक को 3 महीने की मोहलत दी जाएगी. अगर इतने वक्त में वह फोन कंपनी को नहीं लौटाता और 39 महीने पूरे होने की मियाद के बाद फोन वापस करता है, तो उसे कुछ नहीं मिलेगा. फोन खरीदने की तारीख के 36वें से 39वें महीने के भीतर फोन लौटाने वाले ग्राहकों को ही 1500 रु की राशि वापस मिल पाएगी.

क्या अब अमिताभ बच्चन के रोल में दिखेंगी शिल्पा शेट्टी..?

जी हां, आपने बिलकुल सहीं सुना है, अब शिल्पा शेट्टी महिला किरदारों को छोड़कर अमिताभ बच्चन के रोल में नजर आएंगी. वे न सिर्फ अमिताभ बच्चन की तरह दिखाई देंगी, बल्कि उनकी तरह बात भी करेंगी.

इस खबर को पढ़कर आप जरूर सोच में पड़ गए होंगे कि आखिर ये कैसे मुमकिन है. चलिए हम आपको पूरी बात बताते हैं, जिसे पढ़कर आपको भी इस बात पर यकीन हो जाएगा.

दरअसल शिल्पा शेट्टी जल्द ही फराह खान के एक शो में नज़र आएंगी, जिसमें वे अमिताभ बच्चन का किरदार निभाएंगी. उन्होंने खुद अमिताभ के गेटअप में अपनी एक तस्वीर सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर की है. शिल्पा की माने तो ‘उन्हें खुद नहीं पता कि उन्होंने अमिताभ बच्चन जैसे दिग्गज कलाकार की नकल करने की हिम्मत कैसे जुटाई. उन्हें ये काम करने के लिए फराह खान ने कहा था.’

शिल्पा ने कहा कि वे पूरी तरह से उनके किरदार में ढल गई थीं. अमित जी के लिए ये उनका प्यार है, जो उनके जीवन का सबसे मुश्किल काम था. फराह खान का ये शो जल्द ही टीवी पर धूम मचाने आ रहा है. इस शो में न सिर्फ बौलीवुड हस्तियां, बल्कि खेल जगत के खिलाड़ी भी हिस्सा लेंगे.

अपने होंठों को कुछ इस तरह से दें मैट प्रूफ लुक

खूबसूरत, गुलाबी होंठों की चाह हर महिला की होती है और इस के लिए वह तमाम चीजों का सहारा लेती है, ले भी क्यों न, क्योंकि सुंदर होंठ सभी का ध्यान आकर्षित जो करते हैं.

होंठों के मेकअप को ले कर सौंदर्य विशेषज्ञ इशिका तनेजा कहती हैं कि लिप मेकअप का मतलब सिर्फ ट्रैंड के अनुसार होंठों पर कोई भी लिपस्टिक लगा लेना नहीं है, बल्कि उन का सौंदर्य बढ़ाने के लिए कुछ बातों का ज्ञान होना आवश्यक है.

बारिश के बाद उमस भरे दिनों में हौट लिपस्टिक ट्रैंड को अगर देखें तो मैट प्रूफ लुक के लिए मैट लिपस्टिक ही इन दिनों सब से ज्यादा पसंद की जाती है, जिस तरह से कपड़ों का फैशन बदलता है, उसी तरह से ब्यूटी प्रोडक्ट्स में भी नए कलर, नए स्टाइल आते हैं, इसलिए अगर खुद को फैशन के साथ अपडेट रखना चाहती हैं, तो न्यू लिपस्टिक ट्रैंड को ही फौलो करें.

अब फैशन ग्लौसी लिपस्टिक का नहीं, बल्कि मैट लिपस्टिक का है. मैटी फिनिश वाली लिपस्टिक बारिश के बाद उमस भरे दिनों के लिए सब से अच्छी होती है, क्योंकि इस की खासीयत यह होती है कि यह ह्यूमिडिटी और चिपचिपाहट वाले दिनों में होंठों पर फैलती नहीं है, उलट डिसैंट लुक देती है. मैट लिपस्टिक में डीप रैड, चैरी रैड, वाइन, प्लम, बरगंडी, कोरल रैड, डार्क ब्राउन, मैरून, ब्लैकिश मैरून, ब्लैक कलर ट्रैंड में हैं.

मैट का है बोलबाला

इस सीजन में मैट का ही बोलबाला है. आजकल कई कंपनियां लिक्विड फौर्म में भी मैट लिपस्टिक बाजार में उतार चुकी हैं, जिन से आप को मैट लुक ही नहीं मिलेगा, बल्कि ऐसी लिपस्टिक्स होंठों को हाइड्रेट भी करती हैं. आप को न्यूड से ले कर डार्क टोन्स तक के मैट लिप कलर मार्केट में मिल जाएंगे.

मैकाडामिया औयल, विटामिन ई और ऐवोकाडो बटर से बनी हाई क्वालिटी की कई मैट लिपस्टिक्स आप के होंठों की खूबसूरती को चार चांद लगाती हैं. इन की एक और खासीयत है कि ये लंबे समय तक खराब नहीं होती हैं.

मैट लिपस्टिक नैचुरल दिखने में मदद करती है. यह होंठों पर इस तरह लगती है मानो होंठों का रंग ही वैसा है. लिपस्टिक चार्ट या ऊपर से लिपस्टिक का रंग देख कर लिपस्टिक खरीदना समझदारी नहीं है. जो भी लिपस्टिक खरीदें वह लगाने पर आप की स्किन से मैच करे.

ध्यान रखें कि निचले होंठ के रंग से 2 शेड गहरी लिपस्टिक ही लें. रंग परखने के लिए लिपस्टिक को निचले होंठ पर लगाएं और ऊपर के होंठ को देख कर रंग की गहराई को चैक करें.

रैड मैट लिपस्टिक तुरंत ग्लैमरस लुक देती है. लेकिन लिपस्टिक के रंग का सही प्रभाव देखने के लिए बिना मेकअप किए इसे एक बार लगा कर जरूर चैक कर लें.

मान लें अगर आप कई शेड्स खरीद रही हों तो उन्हें चैक करते समय ध्यान रहे कि एक शेड को पोंछने के बाद ही दूसरा शेड होंठों पर लगाएं.

मैट लिपस्टिक का प्रयोग

मैट लिपस्टिक का अच्छा लुक आए इस के लिए कंसीलर का प्रयोग जरूरी है. पहले होंठों पर कंसीलर लगा लें ताकि लिपस्टिक का रंग उभर कर आए. इस का 1 नहीं 2 कोट लगाएं और कोट लगाने के पहले या बाद में होंठों को आपस में रब करने से बचें. हां, लिपस्टिक के पहले लिपलाइनर लगा कर होंठों को शेप देना न भूलें. इस का कारण यह है कि लिपलाइनर की इस शेप पर ही टिक कर मैट लिपस्टिक काम करेगी. ग्लौसी लिपस्टिक की तरह मैट लिपस्टिक होंठों पर अपनेआप नहीं फैलती है, इसलिए होंठों पर लिपलाइनर की आउटलाइन ले कर इसे लगाना जरूरी होता है.

जिन के होंठ बहुत मोटे होते हैं, वे मैट लिपस्टिक का इस्तेमाल कर के अपनी लिपशेप को पतला दिखा सकती हैं. सांवली त्वचा वाली महिलाओं पर लिपस्टिक के मैट शेड्स ज्यादा अच्छे लगते हैं.

अगर दिन में कहीं जाना है या औफिस, कालेज जाते समय लिपस्टिक लगानी है, तो हलके व मैट शेड्स का प्रयोग करें, क्योंकि दिन में बहुत गाढ़े व चमक वाले रंग सूट नहीं करते.

मैट लिपस्टिक के प्रयोग में सावधानी जरूरी है. अगर होंठ फटे हों तो यह लिपस्टिक न लगाएं. ऐसी हालत में मैट लिपस्टिक लगाने से पहले होंठों को स्क्रब कर के ऐक्सफौलिएट कर लें. वैसे भी इन लिपस्टिक्स के इस्तेमाल से पहले नौर्मल होंठों पर बेबी औयल से हलकी मालिश कर लेनी चाहिए, क्योंकि कौमन मैट लिपस्टिक्स होंठों को रूखा कर देती हैं. बेबी औयल लगाने से एक तो दरारे नजर नहीं आतीं दूसरे होंठ भी नम हो जाते हैं.

– इशिका तनेजा, ऐग्जीक्यूटिव डायरैक्टर. एल्प्स ब्यूटी क्लीनिक

फैशन का है व्यक्ति से सीधा संबंध, इसलिए इसे दें सही स्टाइल

फैशन और स्टाइल का व्यक्ति से सीधा संबंध है. अगर उस की स्टाइल सैंस सही नहीं है तो फैशन कितना भी करे जंचता नहीं. महंगे कपड़े और भारीभरकम गहने आदि पहन लेने से कोई सुंदर नहीं लग सकता. इस के लिए शरीर की संरचना के साथसाथ अवसर, मौसम का भी खयाल रखना पड़ता है. अगर आप को इस की समझ नहीं है तो फैशन स्टाइलिस्ट के पास जा कर सही ड्रैस सैंस का विकास कर सकती हैं.

व्यक्ति अलग स्टाइल अलग

इस संबंध में मुंबई की इमेज कंसल्टैंट और फैशन स्टाइलिस्ट नेहा गुप्ता बताती हैं, ‘‘मैं 15 सालों से इस क्षेत्र में काम कर रही हूं. फैशन हर साल बदलता है, लेकिन स्टाइल हर व्यक्ति का अलगअलग होता है और यह बदलता नहीं. स्टाइलिंग के लिए व्यक्ति के रंग, उस की शारीरिक संरचना पर अधिक ध्यान देना पड़ता है. चाहे प्लस साइज हो या थिन, सही स्टाइलिंग से व्यक्ति ग्लैमरस और आकर्षक दिखता है. यह जरूरी नहीं कि सुंदर दिखने के लिए महंगे कपड़े पहनें. अगर साधारण सी ड्रैस भी अपने स्टाइल के हिसाब से चुनी है, तो आप अच्छी लग सकती हैं. कोई भी ड्रैस कलर, फैब्रिक और उद्देश्य के आधार पर पहनी जानी चाहिए.’’

यह समझना भी आवश्यक है कि स्टाइल को कैसे बनाए रखें. इस बारे में नेहा का मानना है कि कुछ में मैनर्स नैचुरली होते हैं, लेकिन कुछ की बौडी लैंग्वेज सही नहीं होती. ऐसे में उन्हें अपने कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ने का मौका नहीं मिलता. उन्हें बातचीत का सलीका सीखने की जरूरत होती है, ताकि अपने क्षेत्र में सफल हों.

प्रेजैंटेबल बनें

हाउसवाइफ भी इस की शिकार होती हैं. अगर उन्होंने सही तरह से बातचीत करना सीख लिया, तो उन का आत्मविश्वास बढ़ता है. वे खुद को कमतर नहीं समझतीं. वे परिवार में अच्छा वातावरण कायम कर सकती हैं. यह एक तरह का विज्ञान है, जिसे समझना जरूरी है. करीब 90% महिलाएं और पुरुष अपने बारे में नहीं जानते.

नेहा कहती हैं, ‘‘अधिकतर महिलाएं मुझ से पूछती हैं कि उन में क्या कमी है? ऐसे में उन्हें समझाना पड़ता है कि कमी कुछ भी नहीं है, केवल उन्होंने खुद को सही तरह से प्रेजैंट नहीं किया है. वे इसे सीख लेती हैं, तो उन की समझ में आ जाता है और वे आगे बढ़ती जाती हैं. इस के अलावा कई बार महिलाएं या पुरुष सोचते हैं कि उन का लुक खराब है, जबकि ऐसा नहीं होता. इंडस्ट्री के कई ऐसी ऐक्ट्रैसेज और ऐक्टर्स हैं, जो खास लुक्स न होने पर भी सफल रहे हैं. फेस की शेप और बौडी के अनुसार कौंबिनेशन में कपड़े पहनना सही रहता है. सही स्टाइल से मूड बदलता है, अपने काम पर अधिक फोकस कर सकते हैं, स्मार्ट दिख सकते हैं, अच्छा सोच सकते हैं, आत्मविश्वास बढ़ता है और फिर काम करने का तरीका भी बदल जाता है.’’

पहले इमेज को ले कर भारत में इतनी जागरूकता नहीं थी, पर अब सब इस पर ध्यान देते हैं. जब काम के बाद तारीफ मिलती है, तो व्यक्ति को प्रेरणा मिलती है. इसलिए आजकल कई कंपनियां भी इमेज कंसलटैंट हायर करती हैं.

लोगों के सामने प्रेजैंटेबल दिखने की कला ही आप की पहचान बनाती है इसलिए सचेत रहें और स्मार्ट दिखें.

फैशन मिस्टेक्स

नेहा के हिसाब से कुछ गलतियां जो अकसर लोग करते हैं, वे निम्न हैं:

सही फैब्रिक न पहनना.

कपड़े का रंग सही न होना.

पार्टी के अनुसार तैयार न होना.

दूसरों को अपने से अच्छा समझना.

इस में सुधार के निम्न उपाय हैं:

कहीं जाने से 2 दिन पहले कपड़े का चयन करें और उसे ट्राई कर देख लें कि वह ठीक है या नहीं.

गरमी के मौसम में हलके रंग अधिक पहनें तो सर्दी के मौसम में डार्क कलर. मेकअप भी उन के अनुसार ही करें. अगर पोशाक हैवी हो तो गहने कम पहनें. इसी तरह लाइट पोशाक पर हैवी गहने सही लगते हैं.

दिन में हलका रंग और फैब्रिक तो रात में गहरा रंग और हैवी फैब्रिक पहना जा सकता है.

2 लड़कियों की ऐसी आशिकी आपने शायद ही पहले कभी देख होगी

18 मार्च, 2017 को पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना मिली कि गांव अनोड़ा में कुछ लोगों ने 2 लड़कियों को घेर रखा है, उन की जान को खतरा है. कंट्रोल रूम ने यह सूचना थाना राया पुलिस को दे दी, क्योंकि गांव अनोड़ा उसी के अंतर्गत आता था. सूचना मिलते ही थाना राया के थानाप्रभारी इंसपेक्टर अनिल कुमार पुलिस बल के साथ गांव अनोड़ा पहुंच गए. गांव पहुंच कर उन्हें पता चला कि वह फोन रामखिलाड़ी के घर से किया गया था.

पूछताछ में अनिल कुमार के सामने जो घटना आई, वह हैरान करने वाली थी. फोन जिन 2 लड़कियों ने किया था, वे आपस में शादी करना चाहती थीं, जो लोगों को स्वीकार नहीं था. लोग दोनों को अलग करना चाहते थे, जबकि लड़कियां एकदूसरे से अलग नहीं होना चाहती थीं. जब लोग जबरदस्ती करने लगे तो उन्होंने कंट्रोल रूम के 100 नंबर पर फोन कर दिया था.

मामला कोई बहुत गंभीर नहीं था, फिर भी कुछ लोगों को उत्तेजित देख कर अनिल कुमार दोनों लड़कियों को साथ ले कर थाने आ गए. उन के पीछेपीछे दोनों लड़कियों के घर वाले ही नहीं, कुछ रिश्तेदार और गांव के भी तमाम लोग आ गए थे.

पुलिस जिन दोनों लड़कियों को थाने ले आई थी, उन में से एक का नाम सोनिया था. उस की उम्र 23 साल थी. वह मथुरा जिले के थाना राया के गांव अनोड़ा के रहने वाले रामखिलाड़ी की बेटी थी. उस के साथ आई लड़की का नाम रीना था, जो 21 साल की थी. वह गांव रूमगेला के रहने वाले लक्ष्मण की बेटी थी.relationship in hindi

थाने में की गई पूछताछ में सोनिया और रीना के प्रेम से ले कर बात विवाह तक पहुंचने की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार थी—

उत्तर प्रदेश के जिला मथुरा के थाना राया का एक गांव है अनोड़ा. रामखिलाड़ी इसी गांव के रहने वाले थे. उन के परिवार में पत्नी भारती के अलावा 4 बेटियां और एक बेटा था.

रामखिलाड़ी कपड़ों पर प्रैस कर के गुजरबसर करते थे. सोनिया उन की सब से छोटी बेटी थी. उन्होंने 3 बेटियों की शादी कर दी थी. अब वह सोनिया की शादी के बारे में सोचने लगे थे.

लेकिन सोनिया कुछ अलग तरह की लड़की थी, जिसे ले कर रामखिलाड़ी ही नहीं, उन की पत्नी भारती भी चिंतित रहती थी. इस की वजह यह थी कि सोनिया बचपन से ही लड़कियों की तरह नहीं, लड़कों की तरह रहती आई थी. वह कपड़े तो लड़कों जैसे पहनती ही थी, उस की सोच, बातचीत का लहजा भी लड़कों जैसा था. वह रहती भी लड़कों के साथ ही थी.

सोनिया की चालढाल, रहनसहन और उस की बातें सुन कर रामखिलाड़ी और भारती चिंतित रहते थे. जब तक वह बच्ची थी, बात बचपने में टाल दी जाती रही, लेकिन जब वह सयानी हुई तो मांबाप उसे समझाने ही नहीं लगे, बल्कि हिदायतें भी देने लगे. लेकिन सोनिया पर उन के समझाने या हिदायतों का कोई असर नहीं पड़ा.

सोनिया ने 12वीं तक पढ़ाई की और अपने पैरों पर खड़ी होने के लिए सिलाई सीख कर लोगों के कपड़े तो सीने ही लगी, साथ ही सिलाई सिखाने का इंस्टीट्यूट भी खोल लिया. उस के यहां सिलाई सीखने गांव की ही नहीं, अगलबगल के गांवों की भी लड़कियां आती थीं.relationship in hindi

सोनिया जहां अपने में मस्त रहती थी, वहीं मांबाप को उस के ब्याह की चिंता थी. क्योंकि उन्हें शायद पता नहीं था कि वह जिस बेटी के ब्याह के लिए परेशान हैं, उस में लड़कियों वाले गुण हैं ही नहीं. उन्होंने सोनिया के मन में क्या है, इस बात की परवाह किए बगैर अलीगढ़ की तहसील अतरौली के गांव जमनपुर के रहने वाले रमेश से उस की शादी तय कर दी.

जब इस बात की जानकारी सोनिया को हुई तो वह विरोध पर उतर आई. लेकिन उस के विरोध के बावजूद रामखिलाड़ी ने उस की शादी धूमधाम से रमेश के साथ कर दी. यह सन 2009 की बात है. मांबाप के इस फैसले से नाराज सोनिया ससुराल चली तो गई, पर बागी बन गई. ससुराल वालों ने उसे हाथोंहाथ लिया, पर उस के मन में जो था, उस में जरा भी बदलाव नहीं आया.

सोनिया ने पति को छूने देने की कौन कहे, चारपाई के भी नजदीक नहीं आने दिया. सवेरा होते ही उस ने साड़ी उतार कर फेंक दी और जींसटौप पहन लिया. बहू की इस हरकत से ससुराल वाले हैरान रह गए. उन्हें यह जरा भी पसंद नहीं आया. उन्होंने उसे नादान समझ कर समझाना चाहा, पर वह कुछ भी समझने को तैयार नहीं थी. उन्होंने फोन कर के सारी बात रामखिलाड़ी को बताई तो वह परेशान हो उठे.

बड़ी मुश्किल से तो उस ने बेटी की शादी की थी. ससुराल जा कर वह इस तरह का नाटक कर रही थी. 5 दिनों बाद वह मायके आई तो उस ने साफ कह दिया कि अब वह ससुराल नहीं जाएगी. इस के बाद लाख प्रयास के बावजूद भी वह ससुराल नहीं गई. मजबूर हो कर मांबाप ने बेटी के तलाक का मुकदमा अदालत में दायर कर दिया, जो अभी भी विचाराधीन है.

सोनिया तनमन से अपने सिलाई सैंटर में लग गई. उसे लड़कियों को सिलाई सिखाना पसंद था. न जाने क्यों उसे लड़कियों को छूना अच्छा लगता था. इसलिए वह उन्हीं के बीच लगी रहती थी. एक दिन पड़ोस के रूमगेला गांव की रहने वाली रीना उस के सिलाई सैंटर पर सिलाई सीखने आई तो उस ने उस में न जाने क्या देखा कि उसे लगा, इसी लड़की की उसे तलाश थी. रीना अभी पढ़ रही थी. वह सिलाई सीख कर अपनी पढ़ाई का खर्च खुद निकालना चाहती थी. उस के पिता लक्ष्मण खेती करते थे. उन के परिवार में पत्नी शांति के अलावा 4 बेटियां थीं. 3 बेटियों की वह शादी कर चुके थे. सब से छोटी रीना अभी पढ़ रही थी.

रूमगेला गांव अनोड़ा से 6 किलोमीटर दूर था. इस के बावजूद रीना रोज साइकिल से सोनिया के यहां सिलाई सीखने आती थी. रीना में ऐसा न जाने कौन सा आकर्षण था कि सोनिया उस की ओर खिंचती जा रही थी. जब तक वह सिलाई सैंटर में रहती, सोनिया को अजीब सा सुख महसूस होता. वह उसी के इर्दगिर्द मंडराती रहती थी. उसे छू कर उस के मन को असीम शांति ही नहीं मिलती थी, बल्ति अद्भुत सुख का भी अहसास होता था.

सोनिया की नजरें हमेशा रीना पर ही जमी रहती थीं, क्योंकि वह उसे अन्य लड़कियों से अलग नजर आती थी. रीना को भी जब उस के मन की बात का अहसास हुआ तो वह भी उस के करीब आने लगी. जल्दी ही वह उस की खास छात्रा बन गई.relationship in hindi

एक दिन सोनिया ने बहाने से उसे अपने घर क्या रोका, उस दिन के बाद से वह उसी की हो कर रह गई. इस के बाद सोनिया ने रीना के पिता लक्ष्मण को फोन कर के कहा कि रीना रोजरोज 6 किलोमीटर आनेजाने में थक जाती है. अच्छा होगा कि उसे उस के पास ही रहनें दें. इस से रीना सिलाई भी जल्दी सीख जाएगी और रोजरोज की थकान से भी बच जाएगी.

लक्ष्मण को क्या पता था कि सोनिया के मन में क्या है. उन्होंने सहज भाव से इजाजत दे दी. अब रीना सोनिया के साथ ही रहने लगी. सप्ताह में एकाध दिन वह घर भी चली जाती थी. एक साथ रहने से सोनिया और रीना एकदूसरे के इतने करीब आ गईं कि वे अलग होने के नाम से घबराने लगीं. इसी डर से एक दिन सोनिया ने कहा, ‘‘रीना, तुम्हारे घर वाले तुम्हारी शादी कर के ससुराल भेज देंगे तो मेरा क्या होगा?’’

‘‘मैं तुम्हें छोड़ कर किसी दूसरे से शादी कर ही नहीं सकती. मैं ने तो तुम्हें ही अपना पति मान लिया है. अब यह जीवन तुम्हारे साथ बिताऊंगी.’’ रीना ने कहा.

रीना की इस बात से सोनिया ने राहत की सांस जरूर ली, लेकिन जल्दी ही अनोड़ा वालों को सोनिया और रीना के संबंधों की जानकारी हो गई. फिर तो कानाफूसी होने लगी. धीरेधीरे यह कानाफूसी गांव रूमगेला तक पहुंच गई.

गांव वालों ने जब लक्ष्मण को यह बात बताई तो वह तुरंत अनोड़ा जा पहुंचा. उस के साथ घर वाले भी थे. जब सब ने रीना से घर चलने को कहा तो उस ने कहा, ‘‘अभी मैं ने सिलाई ठीक से नहीं सीखी है. जब सीख जाऊंगी तो घर आ जाऊंगी.’’

‘‘पहले तुम अपनी पढ़ाई पूरी कर लो, उस के बाद कोई दूसरा काम कर लेना. हमें सिलाई नहीं सिखानी.’’ लक्ष्मण ने कहा.

रीना अपने घर जाने को तैयार नहीं थी, लेकिन लक्ष्मण जबरदस्ती उसे घर ले आया. रीना के जाने से सोनिया परेशान हो उठी. उस के बिना वह बेचैन रहने लगी. उस के बिना सोनिया का मन ही नहीं लग रहा था. अब सिर्फ मोबाइल फोन ही उस का सहारा था. फोन पर बातें कर के दोनों अपनेअपने मन को संतोष दे रही थीं.

सोनिया ने फोन पर जब रीना से कहा कि वह उस के बिना नहीं रह सकती और उस से शादी करना चाहती है तो रीना ने कहा, ‘‘हम शादी नहीं कर सकते, क्योंकि हमारे यहां समलिंगी शादियों को गैरकानूनी माना जाता है.’’

‘‘हम भले ही शादी नहीं कर सकते, लेकिन साथ रह तो सकते हैं. साथ रहने से तो कानून मना नहीं कर सकता. इसलिए मैं तुम्हें जल्दी ही लेने आ रही हूं.’’ सोनिया ने कहा.

एक ओर जहां सोनिया और रीना साथ रहने की तरकीब भिड़ा रही थीं, वहीं लक्ष्मण रीना की शादी को ले कर परेशान था. गांव वाले उसे कोस रहे थे. उन का कहना था कि रीना जो कर रही है, उस का गांव की अन्य लड़कियों पर असर पड़ सकता है.

लक्ष्मण रीना के लिए घरवर की तलाश में तेजी से लगा था. लेकिन रीना ने मां से कहा था कि वह किसी भी हालत में शादी नहीं करेगी. तब मां ने कहा, ‘‘हर लड़की शादी कर के दुलहन बनती है, गृहस्थी बसाती है, मां बनती है.’’

‘‘मम्मी, मैं ने सोनिया को पति मान लिया है, इसलिए अब उसी से शादी करूंगी.’’ रीना ने कहा.

‘‘क्या कहा, तू सोनिया से शादी करेगी? तू उस से कैसे शादी कर सकती है? इस शादी का क्या मतलब होगा?’’ शांति ने कहा. उसे लगा कि बेटी पागल हो गई है.

शाम को जब यह बात उस ने लक्ष्मण को बताई तो उस ने गुस्से में रीना की पिटाई कर दी. यही नहीं, उस का कालेज जाना भी बंद करा दिया. रीना ने फोन कर के सारी बात सोनिया को बताई तो उस ने कहा, ‘‘तू चिंता मत कर, मैं जल्दी ही तुझे लेने आ रही हूं. तुम तैयार रहना.’’

रीना पर घर वाले नजर रखने लगे थे. लक्ष्मण और शांति काफी परेशान थे. उन की समझ में नहीं आ रहा था कि भला 2 लड़कियां शादी कर के एक साथ कैसे रह सकती है? दूसरी ओर मांबाप की परेशानी की चिंता किए बगैर रीना को सोनिया का इंतजार था.relationship in hindi

आखिर वह दिन आ ही गया, जब सोनिया अपनी मोटरसाइकिल से रूमगेला जा पहुंची. गांव के बाहर से उस ने रीना को फोन किया कि वह गांव के बाहर खड़ी उस का इंतजार कर रही है. फिर क्या था, रीना चुपचाप पिछले दरवाजे से सोनिया के पास पहुंच गई तो वह उसे मोटरसाइकिल से ले कर अपने गांव आ गई.

कुछ देर बाद जब रीना के घर वालों को उस के घर से गायब होने का पता चला तो घर में तूफान सा आ गया. लक्ष्मण गांव के कुछ लोगों और रिश्तेदारों के साथ अनोड़ा स्थित सोनिया के घर जा पहुंचा.

सोनिया को पता था कि रीना के घर वाले उसे लेने आ सकते हैं. वे आ भी गए थे. रीना के घर वाले उसे जबरदस्ती साथ ले जाने की कोशिश करने लगे तो सोनिया को अपनी खुशियों की दुनिया लुटती नजर आई. उसे पता था कि अगर इस बार रीना चली गई तो वह उसे फिर कभी नहीं वापस ला सकेगी. उसे अपना प्यार हाथ से निकलता दिखाई दिया तो उस ने 100 नंबर पर फोन कर के कहा कि कुछ लोग उसे जान से मारने के लिए घेरे हुए हैं.

पुलिस कंट्रोल रूम ने तुरंत इस बात की सूचना थाना राया पुलिस को दे दी तो इंसपेक्टर अनिल कुमार पुलिस बल के साथ अनोड़ा पहुंच गए. वहां सचमुच लोग सोनिया और रीना को घेरे हुए थे. दोनों को निकाल कर वह थाने ले आए, जहां से उन्होंने ही नहीं, दोनों लड़कियों के घर वालों ने भी उन्हें खूब समझाया.

लेकिन सोनिया और रीना, दोनों ही एकदूसरे के प्यार में इस कदर पागल थीं कि उन्होंने किसी की बात नहीं मानी. रामखिलाड़ी को तो कोई ऐतराज नहीं था, लेकिन रीना के घर वाले ऐतराज होने के बावजूद कुछ नहीं कर पाए. क्योंकि रीना बालिग थी, वह अपनी मरजी से कहीं भी किसी के भी साथ रह सकती थी.

पुलिस ने जैसे ही कहा कि दोनों लड़कियां बालिग हैं, इसलिए वे अपनी मरजी से कहीं भी रह सकती हैं, सोनिया ने रीना का हाथ थामा और थाने से बाहर आ गई. उस का कहना है कि वह रीना से शादी कर के सारी जिंदगी उस के साथ रहेगी. वे किसी बच्चे को गोद ले लेंगी, जिस से उन का बच्चा भी हो जाएगा. रीना अपनी बीएससी की पढ़ाई पूरी करेगी. उस के बाद उसे जो करना होगा, वह करेगी. वे दोनों खुश हैं, बाकी न उन्हें समाज से कोई मतलब है, न घरपरिवार से.

सनकियों की साजिश : हत्या की एक ऐसी कहानी जिसने सबके होश उड़ा दिए

ब्रिटेन के पूर्वी क्षेत्र लिंकनशायर स्थित उपनगरीय इलाके स्पालडिंग में एक पौश कालोनी है डा. वसन एवेन्यू. इसी कालोनी में स्थित एक 2 मंजिले मकान से 15 अप्रैल, 2016 की दोपहर को मांबेटी की खून से लथपथ लाशें मिलने से कालोनी में सनसनी फैल गई थी. लोगों को इस बात पर हैरानी हो रही थी कि किस ने मांबेटी की हत्या कर दी?

उन्हें तब और हैरानी हुई, जब पुलिस ने मकान से एक किशोर प्रेमी जोड़े को हिरासत में लिया. पुलिस को पड़ोसियों से पूछताछ में पता चला कि मरने वाली महिला 49 वर्षीया एलिजाबेथ एडवर्ट उर्फ लिज और उन की 13 साल की बेटी केटी थी, जो एक स्कूल में खाना परोसती थी. मांबेटी इस मकान में लंबे समय से रह रही थीं.

लिज के पति पीटर एडवर्ट उस से अलग रहते थे. उन की विवाहिता बड़ी बेटी मैरी काट्टिंघम भी दूसरे इलाके में अपने परिवार के साथ रहती थी. 15 अप्रैल, 2016 को जब पुलिस उस 2 मंजिला मकान का दरवाजा तोड़ कर अंदर दाखिल हुई तो निचले तल पर एक किशोर जोड़ा गद्दे पर आराम फरमाते मिला. पुलिस ने उस से पूछा, ‘‘एलिजाबेथ कहां है?’’

लड़के के साथ मौजूद लड़की ने बगैर किसी हड़बड़ाहट और डर के हाथ से सीढि़यों की तरफ इशारा करते हुए धीमे से कहा, ‘‘ऊपर.’’

पुलिस ने लड़के से पूछा, ‘‘उन के साथ क्या हुआ है?’’

लड़के ने भी लड़की की तरह शांत भाव से कहा, ‘‘ऊपर जा कर देख क्यों नहीं लेते?’’

पुलिस को उन का व्यवहार कुछ अटपटा सा लगा. कुछ पुलिसकर्मी सीढि़यों के जरिए ऊपरी मंजिल पर पहुंचे तो वहां एलिजाबेथ उर्फ लिज और उन की बेटी केटी की लाश उन के कमरों में पड़ी मिलीं. लिज के शरीर पर तेजधार हथियार के गहरे निशान थे, जो गले के अतिरिक्त शरीर के दूसरे ऊपरी हिस्से पर भी थे.

इसी तरह के जख्म केटी के भी शरीर पर थे. ऐसा लग रहा था, जैसे उन पर हत्यारे ने चाकू से ताबड़तोड़ वार किए हों.

पुलिस ने मकान में मौजूद लड़की और लड़के को हिरासत में ले लिया था. दोनों से पूछताछ की गई तो उन्होंने मां बेटी की हत्या का अपराध आसानी से स्वीकार कर लिया था. वह पुलिस से इतने इत्मीनान से बात कर रहे थे, जैसे इन्होंने कोई अपराध किया ही न हो. उन्होंने अपने बारे में बताया कि उन का इरादा नींद की ज्यादा गोलियां खा कर आत्महत्या करने का था.

पुलिस ने उन के पास से एक डायरी बरामद की थी, जिस में उन्होंने एक स्यूसाइड नोट भी लिखा था. उन्होंने अपनी अंतिम इच्छा व्यक्त की थी कि खुदकुशी के बाद उन की लाशों को जला कर उस की राख उन के पसंदीदा जगहों पर बिखेर दी जाए.

लिखे गए कुछ अन्य वाक्यों से लग रहा था कि उन्हें न तो जीवन से प्यार था और न ही भविष्य की कोई योजना थी. न जीने की तमन्ना थी और न ही कोई महत्त्वाकांक्षा. दोनों लाशों को पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पाया गया था कि उन की हत्या धारदार चाकू से गला रेत कर की गई थी.

पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले कर अदालत में उन के बयान कराए तो लड़के ने तो अपना अपराध स्वीकार कर लिया, लेकिन लड़की हत्या में शामिल होने से इनकार कर रही थी. वारदात के समय उन की उम्र महज 14 साल थी. पुलिस के सामने लड़की की भूमिका काफी अस्पष्ट होने से तहकीकात करना एक चुनौती बन गई थी.

पुलिस को उन पर जघन्य हत्या का दोष लगाने के साथसाथ उन के नाबालिग होने का भी खयाल रखना था. उन के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उन की पहचान भी पुलिस छिपा रही थी. जांच करने वाली टीम ने पाया था कि दोनों एक किस्म के मनोरोगी और जीवन से हताश प्रेमीयुगल थे. उन की हरकतें जितनी बचकानी थीं, उतने ही वे इस उम्र में ही सब कुछ हासिल करने की तमन्ना रखते थे.crime news in hindi

इस मनोविज्ञान की गुत्थी के साथ दोहरे हत्याकांड को सुलझाने में जासूसी और फोरैंसिक जांचकर्ताओं की खास टीम के अतिरिक्त मनोचिकित्सक तक की मदद ली गई. पुलिस ने छानबीन में पाया कि लिज और आरोपी लड़की के बीव किसी बात को ले कर कोई पुराना विवाद चल रहा था.

उसी विवाद ने उस लड़की को इस कदर सनकी बना दिया था कि उस ने मांबेटी की हत्या की साजिश रच डाली. उस ने अपने साथ पढ़ने वाले प्रेमी को हत्या के लिए राजी कर लिया. इस संबंध में कुल 12 विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों में 7 पुरुष और 5 महिलाओं द्वारा जुटाए गए तथ्यों और तर्कों की मदद से मामले की तह तक पहुंचना संभव हो सका था.

पुलिस की प्राथमिक रिपोर्ट और अदालत में दिए गए उन के बयानों के आधार पर लड़के को 8 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में ले कर ट्रायल पर भेज दिया गया था. बाद में पूरी तहकीकात की जिम्मेदारी मुख्य जांचकर्ता इंसपेक्टर मार्टिन हैल्वे को सौंप दी गई थी. जांच जब आगे बढ़ी तो नाबालिग लडकी को भी आरोपी बना दिया गया. इस के बाद लड़की के बयान के आधार पर हत्याओं की गुत्थी परतदरपरत उधड़ने लगी.

यह जान कर सभी को हैरानी हुई कि हत्याएं बहुत ही साधारण अपमान का बदला लेने के लिए की गई थीं. इस से पहले हम उन परिस्थितियों पर गौर करना चाहेंगे, जिन की वजह से हत्यारा लडका और उस की प्रेमिका कू्रर बनी.

बात सितंबर, 2013 की है. हायर सैकेंडरी स्कूल की एक 12 वर्षीया छात्रा एक दिन अपनी कक्षा में काफी आक्रामक थी. उस ने स्कूल के अनुशासन को नजरअंदाज करते हुए आक्रोश में एक कुरसी इस कदर धकेली कि उस से एक सहपाठी छात्र को जोर की टक्कर लग गई. इस से लड़का तमतमाया हुआ उस पर उबल पड़ा.crime news in hindi

लड़की साथियों के बीच तमाशा बन गई. स्थिति को भांप कर उस ने झट से सौरी बोल दिया. लड़का भी दूसरे सहपाठियों के समझानेबुझाने पर शांत हो गया. बात आईगई हो गई, लेकिन इस घटना ने दोनों के बीच आकर्षण के बीज अंकुरित कर दिए. बाद में उन के बीच दोस्ती हो गई, जो जल्द ही एकदूसरे पर अथाह विश्वास करने वाली गहराई तक पहुंच गई.

इसी बीच वे एकदूसरे से प्रेम करने लगे, जिस का अहसास उन्हें जल्द हो गया. वे साथसाथ घूमनेफिरने लगे. हालांकि लड़का जितना गंभीर और शांत स्वभाव का था, लड़की उतनी ही चुलबुली और अपनी मनमर्जी की मालकिन थी. अपनी बातें मनवाना और इच्छा पूरी करना वह भलीभांति जानती थी. आगे बढ़े कदम को पीछे हटाना तो जैसे उस ने सीखा ही नहीं था. यही कारण था कि जल्द ही उस ने लड़के को अपने रंग में रंग लिया.

उन के बीच प्रेम पनपा तो वे पढ़ाई के प्रति असहज और लापरवाह हो गए. स्कूल परिसर में उन की अनुशासनहीनता की कई शिकायतें आईं. जिस ने भी उन्हें समझाने की कोशिश की, वे उस से उलझ पडे़. लड़का भी अपनी प्रेमिका के प्रभाव में आ कर आक्रामक तेवर वाला बन गया.

यही वजह थी कि एक दिन लड़का अनियंत्रित हिंसक प्रवृत्ति दिखाने और अनुशासनहीनता के आरोप में स्कूल से निकाल दिया गया. यह बात लड़की के दिल में चुभ गई, क्योंकि उसे लड़के से मिलनेजुलने में परेशानी होने लगी थी.

लड़की 6 साल की उम्र से ही अपने परिवार के लिए सिरदर्द बनी रहती थी. तब उस के असामान्य व्यवहार को देखते हुए उस का मनोचिकित्सक से इलाज भी कराया गया था. डाक्टर ने उस की अच्छी देखभाल की सलाह दी थी.

हत्याकांड की घटना से ठीक एक साल पहले भी उसे मानसिक उपचार के लिए स्थानीय मानसिक स्वास्थ्य सेवा केंद्र में भरती कराया गया था. कुछ महीने तक उस का उपचार चला. उस में सुधार होने के बावजूद मनोचिकित्सक ने उस की मनोस्थिति के स्तर को 10 में से 2 अंक दे कर चिंता का विषय बताया था. अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उस की अच्छी देखभाल और विशेषज्ञ की मदद लेने की सलाह दी गई. उस के पिता वेल्डर थे. वह ड्रग लेता था और इस कारण वह पत्नी और 2 साल की बेटी को छोड़ कर कहीं चला गया था. बड़ी होने पर वही लड़की अकेलेपन की भावना से भर गई थी, जिस से उस में आक्रामक तेवर आ गए थे.

लड़के की परवरिश भी असामान्य तरीके से हुई थी और उस का बचपन काफी अशांत किस्म का था. उस की मां की आकस्मिक मौत हो गई थी. तब वह मात्र 5 साल का था और उस ने अपने पिता को घर में रहते हुए शायद ही कभी भरी नजरों से देखा हो. उस के पिता हमेशा काम के सिलसिले में यात्राओं पर रहते थे, जिस से उस का बचपन भी एकाकीपन में गुजरा था. अदालत में केस चला तो वकीलों ने भी इस हत्याकांड की पृष्ठभूमि के 2 मुख्य कारणों की ओर संकेत किए.

पहले कारण में सामाजिक और पारिवारिक संस्कार के साथ मानवीयता को पोषित करने वाले मनोवैज्ञानिक विकास की समस्या को रेखांकित किया. जबकि दूसरा कारण नाबालिग लड़की के मन में गहराई तक बैठ चुकी डिनर लेडी लिज के साथ पुराने विवाद से संबंधित था.

पूछताछ में आरोपी लड़की ने बताया था कि एक बार उस की लिज के साथ जबरदस्त बहस हो गई थी. लड़की का व्यवहार और स्कूल में अनुशासनहीनता लिज को पसंद नहीं थी. उस ने उसे कड़ी फटकार लगाई थी. तभी लड़की ने खुद को बेहद अपमानित महसूस किया था और उस ने लिज से हर कीमत पर बदला लेने की ठान ली थी.

जांच और हत्यारे द्वारा अदालत में दिए गए बयान के मुताबिक प्रेमी युगल ने हत्या की योजना मैकडोनाल्ड के एक आउटलेट में बैठ कर 11 अप्रैल, 2016 को बनाई थी. उसी दिन उन्होंने हत्या के बाद खुदकुशी करने की शपथ भी ली थी. योजना को अंजाम देने के लिए दोनों 13 अप्रैल की रात को लिज के घर के एक अलग हिस्से में चोर की भांति जा घुसे थे.

लड़के ने पीठ पर टांगने वाले बैग में एक टीशर्ट में लपेट कर तेज धार के 4 चाकू रख लिए थे. उन में 8 इंच के 2 चाकुओं में काला हत्था लगा था, जबकि 2 मध्यम आकार के चाकू थे. लड़की ने बताया था कि उस का प्रेमी जब लिज की हत्या को अंजाम दे रहा था, तब अपने बचाव के लिए वह काफी संघर्ष कर रही थी. वह शोर मचा रही थी.

लड़के ने उस की आवाज को रोकने के लिए चाकू से गले की नली काट दी ताकि दूसरे कमरे में सो रही उस की बेटी तक उस की आवाज न पहुंचे. लिज की हत्या करने के बाद उन्होंने उस की बेटी केटी को भी मौत की नींद सुला दिया था. विशेषज्ञों ने इसे उस की अपरिपक्व मानसिकता और मन में दबे आक्रोश को दर्शाने वाला मनोविज्ञान बताया था.

उस के बारे में जांच करने वालों ने पाया था कि उसे बचपन से ही किसी भी तरह की रोकटोक पसंद नहीं थी. वह हमेशा अपनी मनमरजी की मालकिन बनी रहना चाहती थी. वह लिज से बदला लेना चाहती थी. इस के लिए उस ने अपने सहपाठी को उकसाया. जांच के बाद लड़की भी हत्या की आरोपी करार दे दी गई थी. जबकि पक्ष के वकीलों द्वारा उसे विक्षिप्त और सनकी साबित करने की भी कोशिश की गई थी.

इस के बावजूद फोरैंसिक मनोचिकित्सक के एक सलाहकार डा. फिलिप जोसेफ ने अदालत में तर्क दिया था कि उस के दावे के मुताबिक वे मानसिक विकार से पीडि़त नहीं थे. अगर वे अपने मन में जहरीले रिश्ते, भावना और विचार नहीं रखते तो बहुत संभव था कि ये हत्याएं नहीं होतीं. पर कुटिल मन वाले 2 व्यक्ति एक साथ होते हैं, तब ऐसी घटनाओं को बढ़ावा मिलता है.

अदालत ने विभिन्न बयानों के आधार पर पाया था कि लड़की और लड़का सितंबर, 2013 से गाहेबगाहे मिलतेजुलते रहे, लेकिन मई 2015 तक उन के संबंधों में मधुरता नहीं बन पाई थी. इस दौरान वे बातबात पर उलझते भी रहते थे, जो एक तरह से नाबालिगों में होता है. उन के व्यवहार में हमेशा आक्रोश बना रहता था. लड़की ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए कहा था कि उसी ने लड़के को हत्या के लिए प्रेरित किया था.

उस ने यह भी माना था कि लड़के के साथ उस ने केवल एक बार यौनसंबंध बनाया था, वह भी हत्या के बाद. उस का कहना था कि हत्या की रात वह उस से बहुत प्रभावित हुई थी, क्योंकि उस ने उस की इच्छा पूरी कर दी थी. न्यायाधीशों की बेंच ने पाया था कि दोनों के संबंधों में एकदूसरे के प्रति विश्वास की भावना नवंबर, 2015 से मार्च 2016 के बीच पनपी थी.

यह भी स्पष्ट हुआ था कि हत्या में उस की भूमिका पूरी तरह से बदले की भावना से ग्रसित थी. तमाम गवाहों के बयान, तहकीकात के सभी जांच बिंदुओं, तर्कों, तथ्यों और आरोपियों के बयानों के आधार पर 18 अक्तूबर, 2016 को नाटिंघम क्राउन कोर्ट में ढाई घंटे तक लंबी बहस चली. कोर्ट में न्यायाधीशों की बेंच द्वारा इसे बहुत ही असाधारण मामला बताया गया.

न्यायाधीश जस्टिस हड्डन ने प्रेमी युगल को हत्या का दोषी ठहराते हुए उन्हें आजीवन कैद की सजा सुनाई थी. वे 9 नवंबर, 2016 को 20 साल के लिए जेल भेज दिए गए. फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश ने यह भी कहा कि इस मामले में कई पहलू एकदूसरे से अलग थे और यह असाधारण ढंग से एक सुनियोजित साजिश के तहत की गई हत्या थी. दोनों हत्यारे सजा के वक्त भले ही नाबालिग थे, लेकिन जब वे जेल से छूटेंगे, तब उन की उम्र 35 साल हो जाएगी.?

वह नादान नहीं थी : आखिर क्यों उस शादीशुदा औरत को लग गई ऐसी लत

रात के 10 बजे राजेंद्र सिंह ने कमबाइन मशीन खेतों के बाहर बने कमरे के पास खड़ी की और ट्यूबवैल की मोटर चला कर नहाने लगा. नहा कर उस ने खाना खाया और सोने के लिए चारपाई पर लेट गया, क्योंकि उसे सुबह जल्दी उठना था.

दिन भर कमबाइन मशीन चलातेचलाते बलजिंदर इतना थक जाता था कि चारपाई पर लेटते ही उसे नींद आ जाती थी. अभी उस ने आंखें मूंदी ही थीं कि उस के मोबाइल फोन की घंटी बज उठी. अलसाई आंखें खोल कर उस ने मोबाइल स्क्रीन को देखा.

रात के ठीक 11 बजे थे. उस ने फोन रिसीव कर के कान से लगाया तो दूसरी ओर से उस के छोटे भाई की पत्नी सोमपाल कौर की घबराई हुई आवाज उभरी. उस ने कहा, ‘‘सत्तश्री अकाल वीरजी, क्या अभि के पापा आप के पास हैं?’’

‘‘नहीं तो. क्यों क्या बात है?’’ राजेंद्र ने चिंतित स्वर में पूछा तो सोमपाल कौर ने कहा, ‘‘बलजिंदर काम से नहीं लौटे हैं, मुझे चिंता हो रही है.’’

राजेंद्र ने सोमपाल कौर की बात सुन कर उसे सांत्वना देते हुए कहा, ‘‘तुम्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है. वह किसी यारदोस्त के पास बैठ गया होगा, थोड़ी देर में आ जाएगा.’’

‘‘लेकिन उन का फोन…’’

‘‘मैं ने कहा न, तुम सो जाओ. मैं सुबह घर आ कर देख लूंगा. चिंता की कोई बात नहीं है.’’ कह कर राजेंद्र ने फोन काट दिया. यह रात 11 बजे की बात थी.

जिला श्रीमुक्तसर साहिब के थाना सदर मटौल का एक गांव है खुन्नण कलां. इसी गांव के रहने वाले गुरमेज सिंह के 2 बेटे थे, 32 साल का राजेंद्र सिंह और 29 साल का बलजिंदर सिंह उर्फ बिल्ला. इस गांव की अधिकांश आबादी मेहनतमजदूरी करने वाले सिखों की है.

गरीब परिवार के होने के कारण राजेंद्र और बलजिंदर जाटों के खेतों में काम कर के गुजरबसर करते थे. मेहनत की बदौलत दोनों भाई घर खर्च चलाने के साथसाथ थोड़ीबहुत बचत भी कर लेते थे.

राजेंद्र सिंह की शादी करीब 11 साल पहले हुई थी. वह अपने बीवीबच्चों के साथ गांव में ही अलग मकान में रहता था. बलजिंदर की शादी 8 साल पहले फाजिल्का के गांव महुआणा बोदला निवासी थाना सिंह की बेटी सोमपाल कौर के साथ हुई थी. दोनों का 7 साल का एक बेटा अभि सिंह था.

राजेंद्र सिंह खेतों में कमबाइन से फसल काटने का काम करता था, जबकि बलजिंदर ट्रैक्टर चलाता था. सोमपाल कौर भी मजदूरी करती थी. वह थी तो सांवले रंग की, पर उस के तीखे नैननक्श और आकर्षक शरीर किसी को भी उस की ओर देखने को मजबूर कर सकते थे.

14 अप्रैल, 2017 की सुबह बलजिंदर रोज की तरह अपने काम पर गया तो लौट कर नहीं आया. उस की पत्नी सोमपाल कौर और भाई राजेंद्र सिंह रात भर उस के नंबर पर फोन करते रहे. उस के फोन की घंटी तो बजती थी, पर कोई फोन नहीं उठा रहा था. अगले दिन सुबह राजेंद्र सिंह घर पहुंचा और सोमपाल कौर से पूरी बात सुनने के बाद भाई की तलाश में निकल पड़ा.

राजेंद्र सिंह ने आसपास के गांवों में रहने वाले अपने रिश्तेदारों तथा उस के यारदोस्तों के यहां पता किया पर वह किसी के यहां नहीं गया था. बलजिंदर काफी हंसमुख और मिलनसार युवक था. वह गांव वालों के सुखदुख में काम आता था. इसलिए गांव के कई लोग और उस के दोस्त काफी परेशान थे और उस की तलाश में जुटे हुए थे.

लेकिन 3 दिनों तक ढूंढने के बाद भी बलजिंदर का कोई सुराग नहीं मिला. आखिर में ग्रामप्रधान और अन्य लोगों के कहने पर 19 अप्रैल, 2017 को राजेंद्र सिंह ने थाना सदर मलौट जा कर अपने भाई बलजिंदर सिंह की गुमशुदगी दर्ज करवा दी.

थाना सदर मलौट के थानाप्रभारी इंसपेक्टर परमजीत सिंह ने उसे आश्वासन दिया कि वह उस के भाई को ढूंढने की हर संभव कोशिश करेंगे. पुलिस अपना काम अपने तरीके से कर रही थी, पर राजेंद्र सिंह भी पुलिस के भरोसे नहीं बैठा था. उस की समझ में यह नहीं आ रहा था कि शाम 6 बजे तक घर लौटने वाला उस का भाई आखिर अचानक कहां गायब हो गया.

20 अप्रैल को राजेंद्र सिंह गांव के अपने दोस्तों हरदीप, बलजिंदर और जालंधर सिंह के साथ अपने भाई की तलाश कर के राजस्थान फीडर नहर के किनारे से गांव की ओर लौट रहा था तो भुल्लर गांव के पास उन्हें भयानक दुर्गंध का सामना करना पड़ा. जिज्ञासावश सभी ने नहर में झांक कर देखा तो नहर के किनारे सिर पर बांधने वाला केसरी रंग का पटका नजर आया था.

हालांकि वहां इतनी दुर्गंध थी कि खड़ा होना मुश्किल था. राजेंद्र सिंह के दोस्त नहर की ओर जाने से मना कर रहे थे, पर राजेंद्र सिंह पटका देख कर आगे जाना चाहता था. क्योंकि उस का भाई ज्यादातर केसरी रंग का ही पटका बांधा करता था. उस जगह नहर में बांध सा बना था, इसलिए वहां पानी रुका हुआ था.

राजेंद्र सिंह ने जब नीचे पानी में झांक कर देखा तो उसे नहर में एक लाश दिखाई दी. उस ने चिल्ला कर अपने दोस्तों को आवाज दी. सभी ने पानी में उतर लाश बाहर निकाली. वह लाश बलजिंदर सिंह की थी.

अपने जवान भाई की लाश देख राजेंद्र दहाड़े मार कर रोने लगा. उस के एक दोस्त ने जा कर यह सूचना थाना सदर मलौट पुलिस को दी. सूचना मिलते ही इंसपेक्टर परमजीत सिंह, सबइंसपेक्टर श्रवण सिंह, अजमेर सिंह, हैडकांस्टेबल गुरमीत सिंह, गुरजीत सिंह और कांस्टेबल रणदीप सिंह के साथ उस जगह पहुंच गए, जहां लाश पड़ी थी.

पुलिस ने लाश और पटका कब्जे में ले कर पंचनामा तैयार कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया. इस के बाद थाने लौट कर बलजिंदर सिंह उर्फ बिल्ला की गुमशुदगी को लाश बरामदगी दिखा कर अज्ञात लोगों के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 201/34 के तहत हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी.

शुरुआती जांच में इंसपेक्टर परमजीत सिंह ने सोमपाल कौर और उन के पड़ोसियों के बयान लिए. मृतक बलजिंदर के खास दोस्तों से भी पूछताछ की, पर उन्हें कोई सुराग नहीं मिला. मृतक बेहद मिलनसार था, उस की ना किसी से दुश्मनी थी, न लड़ाईझगड़ा. किसी से कोई लेनदेन भी नहीं था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो उस के अनुसार मृतक की हत्या गला घोंट कर की गई थी.  उस के पेट में नशे के अंश भी पाए गए.

पोस्टमार्टम के बाद लाश मृतक के घर वालों को सौंप दी गई. घर वालों ने उसी दिन उस का अंतिम संस्कार कर दिया. जांच में जब कहीं कोई बात सामने नहीं आई तो इंसपेक्टर परमजीत सिंह ने गांव के मुखबिरों का सहारा लिया. मुखबिरों ने टोह लेने के बाद बताया कि गांव के ही हरबंस सिंह की पत्नी परमजीत कौर और मृतक की पत्नी सोमपाल कौर में कुछ ज्यादा ही पट रही है.

परमजीत कौर को ले कर मृतक का अपनी पत्नी से कई बार झगड़ा भी हुआ था. वजह यह थी कि गांव में कोई भी परमजीत कौर को अच्छी नहीं समझता था. उस की गिनती गलत औरतों में होती थी. मुखबिर ने यह भी बताया कि इन दिनों सोमपाल कौर रोजाना परमजीत कौर के साथ काम करने गांव के ही जाट जमींदार गुरप्रीत सिंह उर्फ पिंदा के खेतों में जाती है और काम खत्म होने के बाद सोमपाल कौर अकेली ही पिंदा के घर पर कईकई घंटे गुजारती है.

इंसपेक्टर परमजीत सिंह ने सीधे परमजीत कौर पर हाथ डालने से पहले पिंदा के बारे में पता करवाया. पता चला कि पिंदा अय्याश किस्म का जमींदार है. उस का अपनी पत्नी से तलाक का केस चल रहा है. गांव की कई जरूरतमंद खूबसूरत औरतों से उस के संबंध हैं. बहलाफुसला कर काम दिलवाने के बहने परमजीत कौर ही उन औरतों को पिंदा के यहां ले आती थी.

परमजीत कौर, गुरप्रीत कौर और पिंदा के बारे में ठोस जानकारी मिलते ही इंसपेक्टर परमजीत सिंह ने गुपचुप तरीके से पूछताछ के लिए परमजीत कौर और पिंदा को थाने बुलवा लिया. पहले उन्होंने परमजीत कौर से पूछताछ करने का फैसला लिया. पूछताछ से पहले उन्होंने लेडी कांस्टेबल जसवीर कौर को उस के कमरे में भेजा.

लेडी कांस्टेबल ने धमकाते हुए परमजीत कौर को चेतावनी दी कि साहब बडे गर्ममिजाज हैं. उन की बात का सीधासच्चा जवाब नहीं दिया तो समझो तुम्हारी फांसी पक्की है. इसलिए वह जो भी पूछें, सचसच जवाब देना.

परमजीत सिंह ने परमजीत कौर पर मनोवैज्ञानिक दबाव डाल कर पूछा, ‘‘देखो, मैं जानता हूं कि बलजिंदर को तुम सब ने मिल कर क्यों और कैसे मारा है, फिर भी मैं तुम्हें इस शर्त पर बचा सकता हूं कि तुम अपने मुंह से मुझे पूरी बात बता दो. नहीं तो दूसरों के चक्कर में तुम भी फांसी…’’

‘‘नहीं…नहीं सरदार जी, मुझे फांसी नहीं चढ़ना है. मैं तो पहले ही बेवजह इस चक्कर में फंस गई.’’ परमजीत कौर ने इंसपेक्टर परमजीत सिंह की बात पूरी होने से पहले ही एक सांस में सच उगल दिया. उस का बयान लेने के बाद परमजीत सिंह ने पुलिस टीम भेज कर गांव से मृतक बलजिंदर की पत्नी सोमपाल कौर तथा कुलविंदर सिंह उर्फ भूप को थाने बुलवा लिया.

अगले दिन पुलिस ने परमजीत कौर, सोमपाल कौर, गुरप्रीत सिंह उर्फ पिंदा तथा कुलविंदर सिंह और भूप को बलजिंदर सिंह उर्फ बिल्ला की हत्या के आरोप में अदालत में पेश कर के 23 अप्रैल तक के लिए पुलिस रिमांड पर ले लिया.

रिमांड के दौरान चारों से पूछताछ में बलजिंदर की हत्या की जो कहानी सामने आई, वह दूसरों की बातों में आ कर अपना घर बरबाद करने वाली बेअक्ल औरत की जुर्म भरी कहानी थी, जिस ने दूसरों के महलों के ख्वाब देख कर अपना झोपड़ा फूंक दिया था.

शादी के बाद सोमपाल कौर बड़ी खुश थी. बलजिंदर जैसा सुंदर, हृष्टपुष्ट, नेक, कमाऊ और मेहनती पति पा कर जैसे उसे सब कुछ मिल गया था. गरीब परिवार की बेटी गरीब परिवार में ही ब्याह कर आई थी. इसलिए उस के ना कोई ऊंचे ख्वाब थे, न कोई बड़ी महत्वाकांक्षा. बस 2 वक्त की रोटी और शांति से परिवार कर गुजारा होता रहे, यही उस की कामना थी.

बलजिंदर के लाख मना करने पर भी उस ने कंधे से कंधा मिला कर उस के साथ मेहनत की और पैसा जमा कर के कच्चे घर की जगह पक्का घर बनवा लिया. संतान के रूप में बेटा पैदा हुआ तो वह निहाल हो गई. कुल मिला कर सब कुछ ठीकठाक चल रहा था. करीब 2 साल पहले उस ने लोगों के यहां काम करना बंद कर दिया था.

अब उस का सारा समय बेटे अभि के लालनपालन में गुजरता था. पतिपत्नी अपने इस जीवन से संतुष्ट थे. इसी बीच अचानक बलजिंदर बीमार हो गया. बीमारी की वजह से वह 2-3 महीने तक काम पर नहीं जा पाया, जिस से घर की आर्थिक स्थिति डगमगा गई.

पति से पूछ कर सोमपाल कौर ने दूसरे के खेतों में काम करना शुरू कर दिया. कुछ समय बाद बलजिंदर ठीक हो गया तो उस ने सोमपाल कौर को घर पर ही रहने के लिए कहा, पर सोमपाल ने पति को समझाते हुए कहा, ‘‘इस में हर्ज क्या है, घर पर मैं सारा दिन खाली ही बैठी रहती हूं. चार पैसे जमा हो जाएंगे तो भविष्य में बेटे के काम आएंगे.’’

सोमपाल कौर की बात सही थी. बलजिंदर चुप रह गया. अब पतिपत्नी दोनों सुबह अभि को स्कूल भेज कर काम पर निकल जाते. स्कूल से लौट कर अभि अपने ताया राजेंद्र के घर चला जाता था.

लगभग एक साल पहले की बात है. सोमपाल कौर शाम को काम से घर लौट रही थी तो रास्ते में पिंदा के खेत पड़ते थे. पिंदा की नजर उस पर पड़ी तो वह पहली ही नजर में उस का दीवाना हो गया. उस का पिछले 2 सालों से अपनी पत्नी से तलाक का मुकदमा चल रहा था. उस की रातें रंगीन करने का इंतजाम परमजीत कौर किया करती थी.

पिंदा ने जब सोमपाल कौर को देखा तब वह नहीं जानता था कि यह कौन है. उसे परमजीत कौर के माध्यम से पता चला कि वह अपने गांव की ही है तो उस ने परमजीत कौर के सामने नोट फेंकते हुए कहा कि उसे हर हाल में सोमपाल कौर चाहिए. परमजीत कौर ऐसे कामों में माहिर थी. उस ने सोमपाल कौर को फंसाने के लिए ऐसा जाल फेंका कि ना चाहते हुए भी वह परमजीत कौर की बातों में आ कर पिंदा के बिस्तर पर जा पहुंची.

धीरेधीरे दोनों को एकदूसरे के शरीर का ऐसा चस्का लगा कि दोनों साथ रहने के सपने देखने लगे. पिंदा ने सोमपाल कौर के लिए अपनी तिजोरी का मुंह खोल दिया था. गरीब परिवार की सोमपाल कौर को लगने लगा कि अब वह जमीनदारनी बनने वाली है. लेकिन बलजिंदर के रहते यह संभव नहीं था. फिर भी यह खेल जैसे-तैसे गुपचुप तरीके से चलता रहा. लेकिन ऐसा कब तक संभव था.

आखिर एक दिन यह खबर बलजिंदर के कानों तक पहुंच ही गई. उस ने सोमपाल कौर को प्यार से समझाते हुए कहा, ‘‘कल से तुम बाहर काम पर जाना बंद कर दो और घर में रह कर बेटे की परवरिश पर ध्यान दो. कमाने के लिए मैं काफी हूं.’’

लेकिन सोमपाल ने बलजिंदर का कहना मानने से इनकार कर दिया. इस बात को ले कर घर में तनाव रहने लगा क्योंकि सोमपाल कौर ने खेतों में काम करना बंद नहीं किया था. लेकिन अब उसे इस बात का डर सताने लगा था कि कभी भी कुछ भी हो सकता है. इसी बात को ध्यान में रख कर एक दिन उस ने पिंदा से कहा, ‘‘जो करना है जल्दी करो, क्योंकि अब मैं ज्यादा दिनों तक घर में बगावत नहीं कर सकती. हमारे रिश्तेदारों को भी खबर लग गई है.’’

‘‘बताओ, क्या करना है.’’ पिंदा ने सोमपाल को बांहों में भर कर कहा, ‘‘कहो तो बलजिंदर का काम तमाम कर देते हैं.’’

‘‘नहीं…नहीं…’’ घबरा कर सोमपाल कौर बोली, ‘‘यह ठीक नहीं है. अगर हम फंस गए तो मेरे बेटे अभि का क्या होगा?’’crime news in hindi

‘‘तुम चिंता मत करो, बलजिंदर को हम इस तरह से रास्ते से हटाएंगे कि किसी को हम पर शक नहीं होगा.’’

यह 2 अप्रैल की बात है. अगले दिन पिंदा के घर पर बलजिंदर की हत्या की योजना बनाई गई. इस योजना में पिंदा ने सोमपाल कौर के अलावा परमजीत कौर और गांव के ही कुलविंदर सिंह उर्फ भूप को पैसों का लालच दे कर शामिल कर लिया. योजना यह थी कि जिस दिन बलजिंदर का भाई राजेंद्र कमबाइन चलाने किसी दूसरे गांव जाए, उसी दिन यह काम कर दिया जाएगा.

गेहूं की कटाई शुरू हो चुकी थी. राजेंद्र बैसाखी वाले दिन पड़ोसी गांव लखमी रेहाणा चला गया. उसी दिन यानी 14 अप्रैल, 2017 की शाम जब बलजिंदर अपने काम से घर लौट रहा था तो रास्ते में उसे कुलविंदर सिंह और पिंदा मिल गए. बलजिंदर उन के साथ जाना नहीं चाहता था, पर बैसाखी मनाने के बहाने वे उसे जबरदस्ती घर ले गए.  परमजीत कौर और सोमपाल कौर दूसरे कमरे में मौजूद थीं.

वहां शराब का दौर चला और बलजिंदर को अधिक शराब पिला कर उसे नशे में कर दिया गया इस के बाद चारों उसे बातों में उलझा कर भुल्लर गांव के पास नहर पर ले गए. चूंकि बलजिंदर नशे का आदी नहीं था, इसलिए उस का दिमाग काम नहीं कर रहा था.

बलजिंदर वही कर रहा था, जो वे कह रहे थे. नशे की अधिकता की वजह से वह सीधा खड़ा भी नहीं हो पा रहा था. बहरहाल, नहर के पास पहुंच कर चारों ने उसी के सिर पर बंधे पटके को उस के गले में डाल कर कस दिया.

सोमपाल कौर ने उस के बाजू और परमजीत कौर ने उस की टांगें पकड़ीं. पिंदा और कुलविंदर ने दोनों ओर से पटका खींच कर गला कसा. इस के बाद लाश नहर में फेंक कर सभी अपनेअपने घर चले गए थे. योजनानुसार रात 11 बजे सोमपाल कौर ने राजेंद्र को फोन कर के बलजिंदर के घर न आने की जानकारी दी थी.

रिमांड अवधि समाप्त होने पर पुलिस ने चारों आरोपियों को एक बार फिर अदालत में पेश किया, जहां से सभी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

मोबाईल की बैटरी लाइफ बढ़ानी है, तो अपनाएं ये तरीका

स्मार्टफोन आज के जमाने में हर किसी के पास है ऐसे में ज्यादातर व्यक्ति अपने फोन को ना चाहते हुए भी खुद खराब करने में लगे रहते हैं. जब मन किया फोन को चार्ज मे लगा लिया. जब मन किया निकाल लिया, उसे चार्ज में सावधानी नाम की कोई चीज ही नहीं है.

स्मार्टफोन निर्माता कंपनियां अब ज्यादा क्षमता वाली बैटरी के साथ हैंडसेट लौन्च कर रही हैं. इसके बावजूद भी मोबाइल ज्यादा देर तक नहीं चल पाता है. इसी के चलते हम आपको कुछ ऐसे आसान तरीके बताने जा रहे हैं जो फोन की बैटरी लाइफ को बढ़ाने में मदद करेंगी.

इन टिप्स को फौलो कर बैटरी बैकअप बढाएं

– अगर आप कार ड्राइव करते हैं तो अपने फोन को हमेशा कार के डैशबोर्ड से दूर रखें. साथ ही फोन को सनलाइट या हीट से भी बचाकर रखें. ऐसा इसलिए क्योंकि लिथियम आयन बैटरी को हीट से नुकसान पहुंचता है.

– फोन यूज करते समय यह ध्यान रखना चाहिए की फोन की बैटरी कभी भी पूरी तरह से खत्म न हो. फोन में जब 10 या 20 फीसद बैटरी रह जाए तो उसे चार्जिंग पर लगा दें.

– कई यूजर्स को यह भम्र होता है कि फोन को 100 फीसद तक चार्ज करना चाहिए. जबकि ऐसा नहीं है. हमेशा फोन को 100 फीसद चार्ज करना जरुरी नहीं होता.

– कई यूजर्स फोन पूरा चार्ज होने के बाद भी चार्जर प्लग नहीं निकालते हैं. ऐसा करना फोन के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है. यही नहीं, फोन को रात भर चार्जिंग पर लगाकर नहीं रखना चाहिए.

– वाइब्रेशन और हाई वौल्यूम मोड में रिंगटोन बैटरी की ज्यादा खपत करता है. ऐसे में वाइब्रेशन को औफ रखें और रिंग टोन वौल्यूम को भी लो रखें.

– अगर आपको यह लगता है कि सभी बैटरी सेवर एप फोन के लिए अच्छे होते हैं तो यह आपकी गलतफहमी है. हर बैटरी सेवर एप फोन के लिए अच्छी नहीं होती है. यह फोन की बैटरी को नुकसान पहुंचा सकती है.

– अगर फोन में बैटरी कम बची है तो फोन की बैकग्राउंड एप्स और वाई-फाई को बंद कर दें. कम बैटरी पर एप्स का इस्तेमाल करना बैटरी की खपत ज्यादा करता है.

वीडियो : दर्शक का सिर फोड़ने के लिए बल्ला ले दौड़ गए थे इंजमाम

क्रिकेट खेलते वक्त खिलाड़ियों का जोश सातवें आसमान पर रहता है और ऐसे वक्त पर भावनाओं का फूटना लाजमी है. कई बार मैदान में ही ये इमोशन खिलाड़ियों के गुस्से के तौर पर फूटकर बाहर आ जाता है. खेल का मैदान इतिहास में कई ऐसे विवादों का गवाह बन चुका है जब खिलाड़ी एक दूसरे को मारने के लिए उतारू हो गए हों. हालांकि मैदान के भीतर के विवाद दर्शकों और खिलाड़ियों के बीच भी कई बार देखे जा चुके हैं. कुछ ऐसा ही हुआ था भारत पाकिस्तान के बीच खेले गए एक मैच में.

दरअसल पाकिस्तान के इंजमाम उल हक मैच के दौरान एक दर्शक की हरकत से इतने परेशान हो गए कि वह उसे बैट उठाकर मारने के लिए दौड़े थे. यह बात 14 सितंबर 1997 की है जब भारत व पाकिस्तान के बीच सहारा कप का दूसरा वनडे मैच खेला जा रहा था. इस मैच में पाकिस्तान टीम ने पहले बल्लेबाजी की और पूरी टीम कुछ खास नहीं कर सकी और 116 रनों पर ढेर हो गई.

निराश और हताश इंजमाम मैच में कुछ खास नहीं कर सके और मात्र 10 रन (34 गेंद) के साथ पवेलियन लौट गए. उस मैच में कुछ दर्शकों को मैदान पर होमोफोन लाने की भी अनुमति दी गई थी जिसे लेकर वे अपनी टीम के खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ा रहे थे.

लेकिन इसी बीच मैदान पर जानें क्या हुआ कि दर्शकों ने फील्डिंग पर लगे खिलाड़ियों का मजाक बनाना शुरू कर दिया. यह सिलसिला पाकिस्तान की पारी से ही शुरू हो गया था. उन्होंने इसका सबसे पहला निशाना भारतीय कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन को बनाया और उनकी पत्नी संगीता बिजलानी को छोड़ने को लेकर मैदान में लोगों ने खूब फब्तियां कसीं.

उन्होंने बाद में देबाशीष मोहंती को निशाना बनाया और उन्हें कालिया कालिया कह कर चिढ़ाने लगे. लेकिन दोनों क्रिकेटर शांत होकर मैदान में खड़े रहे व किसी ने भी दर्शकों के इन नापाक हरकत का जवाब देना ठीक नहीं समझा.

लेकिन अब बात आई पाकिस्तानी खिलाड़ी इंजमाम उल हक की उन्हें लोग मोटा आलू, सड़ा आलू कह कर मैदान में चिढ़ाने लगे. इंजमाम इस बात को लेकर आग बबूला हो गए और दर्शकों पर टूट पड़े. यकीन नहीं आता तो देखें वीडियो.

बाद में मीडिया खबरों में पुष्टि हुई कि जिस दर्शक के ऊपर वे बल्ला लेकर टूट पड़े थे उसका नाम थिंड था जो एनआरआई था. कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि अगर भीड़ में मौजूद लोग व पुलिस इंजमाम को नहीं पकड़ती तो ये बात पक्की थी कि इंजमाम उसका सिर फोड़ देते.

लेकिन इसके बाद सबसे बड़ा सवाल जो कई दिनों तक चर्चा में रहा कि इंजमाम जो सीमा रेखा पर क्षेत्ररक्षण कर रहे थे उनके हाथ में बैट कहां से आया. बहरहाल इसके बारे में यह कहा गया कि यह बैट पाकिस्तान के 12वें खिलाड़ी ने इंजमाम को लाकर दिया था.

मैच में इस बवाल के मचने के चलते मैच को 40 मिनट के लिए रोकना पड़ा. इस दौरान भारत के कप्तान सचिन तेंदुलकर और पाकिस्तान के कप्तान रमीज राजा ने मैदान पर मौजूद दर्शकों को बिठाने के लिए विनती की. बाद में भारत ने इस मैच को बड़ी आसानी से जीत लिया.

बाद में जब एक साक्षात्कार में इंजमाम से पूछा गया कि आखिर हुआ क्या था तो इंजमाम ने बताया कि वह उसे मारने नहीं गए थे बल्कि बात करने गए थे कि आखिर वह मुझे अनाप शनाप क्यों बोल रहा है. उन्होंने बताया कि उसकी बातों से वे उत्तेजना में आ गए थे.

इंजमाम उल हक बाद में पाकिस्तान के कप्तान भी बनें और कई मैचों में पाकिस्तान के लिए मैच जिताऊ पारियां भी खेली. इंजमाम ने 2007 के विश्व कप के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया था.

सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता पर अमेरिका में पेश हुआ प्रस्ताव

अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (प्रतिनिधि सभा) में दो प्रभावी सांसदों द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के समर्थन में प्रस्ताव पेश किया गया. सांसदों ने कहा कि समय आ गया है कि बढ़ती वैश्विक समद्धि में भारत की भूमिका को स्वीकारा जाए.

प्रस्ताव को सदन की विदेश मामलों की समिति के वाइस रैंकिंग सदस्य और सांसद अमी बेरा और भारत तथा भारतीय अमेरिकियों पर बने संसदीय कॉकश के संस्थापक सांसद फ्रैंक पेलोन ने पेश किया. इसके जरिए सदन आधिकारिक रिकॉर्ड में भारत की दावेदारी का समर्थक करने वाला बन जाएगा.

बेरा ने कहा, ‘विश्व का प्राचीनतम और सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के नाते अमेरिका और भारत समान मूल्यों को साझा करते हैं और कई क्षेत्रों में उनकी साझेदारी बढ़ रही है.

उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका के लिए रणनीतिक साथी के तौर पर महत्त्वूपर्ण भूमिका निभाता है. वह मजबूत स्तंभ है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य विश्व को उस प्रकार प्रतिबिंबित करते हैं जैसा वह 60 साल पहले था. समय आ गया है कि वैश्विक समद्धि में भारत की भूमिका को स्वीकार किया जाए.

दुष्प्रचार के लिए फर्जी तस्वीर पेश करने पर यूएन सख्त

संयुक्त राष्ट्र के मंच पर पाकिस्तान द्वारा फर्जी तस्वीर दिखाए जाने की घटना पर इस वैश्विक संस्था ने भी चिंता जताई है. संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष मिरोस्लाव लजाक ने स्पष्ट किया कि निश्चित तौर पर इसे रोकने के सुझावों पर विचार किया जाएगा. कुछ ही दिन पहले संयुक्त राष्ट्र में पाक की स्थायी प्रतिनिधि मलीहा लोधी ने फलस्तीन के गाजा शहर की एक घायल लड़की की तस्वीर को कश्मीर की पीड़िता के रूप में पेश किया था.

जवाब देने के अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने इस तस्वीर के माध्यम से भारत पर बेबुनियाद आरोप लगाए थे. लजाक से पूछा गया कि क्या वैश्विक मंच पर फर्जी तस्वीर दिखाए जाने जैसी घटनाओं को रोकने के लिए वह कोई कदम उठाना चाहेंगे. इस पर उन्होंने कहा, ‘मैं निश्चित तौर पर आपके सुझाव के बारे में विचार करूंगा.’

पद का उपयोग करूंगा

संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष मिरोस्लाव लजाक ने पाक की ओर से पेश की गई फर्जी तस्वीर मामले पर कहा कि यह कूटनीति का मामला है. ‘इसका जवाब मुझे नहीं देना है. यह संबंधित प्रतिनिधियों से जुड़ा मुद्दा है. मैं महासभा के अध्यक्ष के रूप में अपने पद का उपयोग करना चाहता हूं, इसका दुरुपयोग नहीं.’

चीन अपने पड़ोसियों के हितों का सम्मान करे

भारत के साथ डोका ला विवाद के समाधान के कुछ हफ्ते बाद चीन के सरकारी मुखपत्र का नजरिया बदलता दिख रहा है. उसने अपने ही देश को सलाह दे डाली है कि उसे पड़ोसियों के हितों का सम्मान करना चाहिए. साथ ही द्विपक्षीय विवादों को सुलझाना चाहिए ताकि वैश्विक प्रभाव की बीजिंग की कोशिश के विरोध को कम से कम किया जाए.

ग्लोबल टाइम्स में छपे संपादकीय में लिखा गया, ‘हमें अपने सिद्धांतों पर अडिग रहना चाहिए, लेकिन अपने पड़ोसियों के हितों का सम्मान करना चाहिए. इसमें कहा गया कि पड़ोसियों के साथ विवाद सुलझाना चीन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि उसे अपनी महत्वाकांक्षाओं को हासिल करने के अपने प्रयासों का विरोध कम से कम करने की आवश्यकता है.’

भारत, जापान, वियतनाम और दक्षिण चीन सागर क्षेत्र के अन्य पड़ोसी देशों पर परोक्ष निशाना साधते हुए लेख में कहा गया कि कुछ पड़ोसी देश चीन के साथ समुद्री और भूमि विवादों को सुलझाने में कड़ा रूख अपना रहे हैं.

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