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जब इस रोल को करते वक्त रो पड़े आमिर खान..!

बौलीवुड में मिस्टर परफेक्शनिस्ट के तौर पर पहचाने जाने वाले अभिनेता फिल्म निर्माता आमिर खान ने एक पोस्ट के जरिए अपने उस किरदार के बारे में खुलासा किया जिसे करने में उन्हें कठनाइयों का सामना करना पड़ा. वैसे तो आमिर को मिस्टर परफेक्शनिस्ट के नाम से जाना जाता है यानी जो हर किरदार में परफेक्ट. लेकिन एक ऐसा किरदार भी है जिसे करने में आमिर को बेहद मुश्किलें हुईं.

आमिर ने गुरुवार को एक वीडियो ट्वीट किया, जिसमें दिख रहा है कि वह किस तरह फिल्म ‘दंगल’ के गंभीर और सिद्धांतवादी महावीर फोगट से ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ के शक्ति कुमार बन गए हैं. इसी वीडियो के जरिए उन्होंने बताया कि अपकमिंग फिल्म ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ में शक्ति कुमार नाम के शख्स का रंगीन किरदार उनके द्वारा पर्दे पर निभाए गए मुश्किल किरदारों में से एक है.

उन्होंने ट्वीट में लिखा, मेरी मुश्किल भूमिकाओं में से एक. वीडियो सिंगर मोनाली ठाकुर के साथ शुरू होता है, जिसमें वह कहती हैं उन्हें फिल्म में आमिर का लुक पसंद आया. मोनाली फिल्म में भूमिका निभा रही हैं. फिल्म में इंसिया की भूमिका निभा रहीं जायरा वसीम ने आमिर के किरदार पर टिप्पणी की, ‘अजीब जूते और जींस’. उनके सह कलाकार महर विज ने कहा कि अजीब दाढ़ी है.

इसी वीडियो में उनकी हेयर डिजाइनर एवन कांट्रैक्टर ने दावा किया कि आमिर का यह अंदाज लोगों को हंसा देगा और रुला भी देगा. इस तरह की भूमिका उन्होंने पहले कभी नहीं निभाई. यह बेहद जिंदादिल किरदार है. आमिर के किरदार के बारे में निर्माता और उनकी पत्नी किरण राव ने कहा, वह संगीत निर्देशक हैं, जिनका वक्त खराब चल रहा है. इस तरह का किरदार रोजाना नहीं लिखे जाते. आमिर ने कहा, “मुझे बड़ा मजा आया क्योंकि पागल किस्म का किरदार है. ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ 19 अक्टूबर को रिलीज होगी.

कबड्डी बनेगी या नहीं और अगर बनी तो कौन होगा लीड रोल में

‘‘यूटीवी’’से अलग होने के बाद रौनी स्क्रूवाला ने अपनी नई प्रोडक्शन कंपनी के तहत कई फिल्में शुरू की हैं,जिसमें से पांचवी फिल्म‘‘कबड्डी’’है. सूत्रों का दावा है कि रौनी स्क्रूवाला के लिए फिल्म ‘‘कबड्डी’’ अति महत्वाकांक्षी फिल्म है. राकेश ओमप्रकाश मेहरा के निर्देशन में बनने वाली फिल्म ‘‘कबड्डी’’में पिछले छह माह से रितिक रोशन अभिनय करने वाले थे. अब तक कहा जा रहा था कि फिल्म‘‘कबड्डी’’की शूटिंग इस वर्ष के अंत तक शुरू होगी और 2018 में यह फिल्म प्रदर्शित होगी. रितिक रोशन भी इस फिल्म को लेकर उत्साहित थे. पर अचानक खबर आयी है कि रितिक रोशन ने फिल्म ‘‘कबड्डी’’करने से साफ इंकार करते हुए ‘‘यशराज फिल्मस’’का दामन थाम लिया है.

सूत्रों की माने तो रितिक रोशन ने ‘यशराज फिल्मस’की फिल्म की शूटिंग के लिए फरवरी 2018 से अप्रैल 2018 तक की तारीखें दी है. इस फिल्म में रितिक रोशन के साथ जैकी श्राफ के बेटे टाइगर श्राफ भी होंगे. सूत्र बता रहे हैं कि उससे पहले रितिक रोशन अपने पिता राकेश रोशन के निर्देषन में फिल्म‘‘कृष 4’’की शूटिंग पूरी करना चाहते हैं.

जबकि एक अन्य सूत्र का दावा है कि रितिक रोशन को फिल्म‘‘कबड्डी’’की पटकथा पसंद नहीं आयी. मगर रौनी स्क्रूवाला के नजदीकी सूत्र का दावा है कि रितिक रोशन ने किसी अन्य वजह से रौनी स्क्रूवाला की फिल्म‘‘कबड्डी’’छोड़ी है, जिस पर वह बात नही करना चाहते. इस सूत्र के अनुसार रितिक रोशन ने इस फिल्म के लिए इस वर्ष की शुरूआत में हामी भरी थी. उसके बाद पटकथा पर काम हुआ. एक दिन रितिक रोशन ने रौनी स्क्रूवाला के पास संदेश भेजा कि उन्हें फिल्म की पटकथा पसंद नही है. जब निर्माता ने पटकथा को लेकर रितिक रोशन से विचार विमर्ष करना चाहा, तो रितिक रोशन ने बिना बात किए कह दिया कि वह ‘कबड्डी’’नही करेंगे.

बहरहाल,अब यह तय हो चुका है कि रितिक रोशन फिल्म ‘‘कबड्डी’’में नही होंगे. यूं तो फिल्म के निर्माता रौनी स्क्रूवाला और निर्देशक राकेश ओम प्रकाश मेहरा ने इस मसले पर चुप्पी साध रखी है. पर बौलीवुड में सवाल पूछा जाने लगा है कि अब ‘‘कबड्डी’’ बनेगी या नहीं, तो वहीं यह सवाल भी उठ रहा है कि जिस किरदार के लिए रितिक रोशन उपयुक्त हों, उस किरदार में क्या किसी अन्य कलाकार को लिया जाना ठीक होगा.

सोशल मीडिया पर फीकी पड़ती ‘मोदी भक्ती’

सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तारीफों का दौर खत्म होता दिख रहा है. कोर हिन्दुत्व के विषयों को छोड दे तो बाकी मुद्दों पर मोदी की तारीफ कम होती जा रही है. ‘मोदी भक्ती’ का यह युग नोटबंदी के बाद से प्रभावित होने लगा. नोटबंदी के 50 दिन के बाद मोदी का वादा टूटने से जनता में विरोध का स्वर दिखने लगा. नोटबंदी के बाद जीएसटी ने जिस तरह के कारोबार को प्रभावित किया उससे मोदी के समर्थन में आने वाले संदेश कम हो गये. मोदी का प्रचार करने वाला तंत्र अब महंगाई, अस्पताल में बच्चों की मौत, रेल दुर्घटनाओं पर जवाब देने में पिछड़ने लगा. सोशल मीडिया पर केवल हिन्दू मुसलिम ही ऐसा विषय बचा है जिसके जरीये मोदी सरकार की भक्ति होती दिख रही है. यही वजह है कि मोदी की भक्ति करने वाले बारबार इन मुद्दों को ही लेकर आते है.

आज के दौर में सोशल मीडिया की ताकत को सबसे अधिक प्रभावी माना जाता है. इसकी ताकत का अंदाजा इस बात से लग जाता है कि नेताओं ने खुद बड़ी संख्या में सोशल मीडिया जैसे फेसबुक, इंस्ट्राग्राम, ट्विटर और वाटसएप पर अपने खाते बना लिये. यह बात और है कि खाते केवल दिखावा मात्र है. मोदी की जीत के बाद भाजपा ही दूसरे दलों के नेताओं ने सोशल मीडिया के प्रचार को अपना सबसे बड़ा हथियार बना लिया. इसके बाद भी वह जनता के सवालों का जबाव नहीं देते. वह केवल अपनी प्रचार वाली बात कहते हैं. इस वजह से इसका प्रभाव कम होने लगा.

पेट्रोल की बढ़ती कीमतों पर जब जनता ने भाजपा नेताओं के पुराने वीडियो और धरना प्रदर्शन के फोटो सोशल मीडिया पर वायरल किये, तो भाजपा नेता उसका जवाब देने की हालत में नहीं दिखे. अब हालत यह हो गई है कि मोदी गुणगान में उनके समर्थक हर बात पर वापस हिंदू मुसलिम में पहुंच जाते हैं. जानकार लोग कहते है कि नोटबंदी और जीएसटी को लेकर केन्द्र सरकार ने जिस तरह से काम किया उसका कोई अच्छा प्रभाव देश पर नहीं पड़ रहा. हर तरह का रोजगार प्रभावित हो रहा है. देश में बेरोजगारी और मंहगाई बढ़ रही है. केंद्र सरकार केवल आम परेशानियों से लोगों का ध्यान हटाना चाहती है.

यह बात अब लोगों की समझ में आने लगी है. ऐसे में लोग चाहते हैं कि देश में मंहगाई कम हो, विकास बढ़े, रोजगार उपलब्ध हों सकें. सरकार अब इस दिशा में बात करने से बचने लगी है. चुनाव के पहले जिस गुजरात मौडल की चर्चा होती थी वह अब खत्म हो गई है. केवल विरोधी ही नहीं भाजपा के समर्थक नेता भी अब भाजपा की आलोचना करने लगे हैं. यशवंत सिन्हा के ताजा बयान से भाजपा को जवाब देते नहीं बन रहा. यह बात तब है जब यशंवत सिन्हा के बेटे जंयत सिन्हा ने ही उनका विरोध कर केन्द्र सरकार का बचाव किया. इसके बाद भी लोग यशंवत सिन्हा के बयान को ज्यादा प्रभावी मान रहे हैं.

आखिर क्यों महाभारत पर फिल्म बनाने से डर रहे हैं आमिर खान?

बाहुबली की सफलता के बाद खबर आ रही थी कि राजामौली अब जल्द ही महाभारत पर फिल्म बनाने की सोच रहे हैं, जिसके लिए उन्होंने अभिनेताओं की लिस्ट भी बना ली है. वहीं बौलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान ने ये बात लोगों के सामने कबूली थी कि अगर राजामौली महाभारत बनाते हैं, तो वे उसका हिस्सा बनना चाहेंगे.

लेकिन अब उन्होंने इस बात को लेकर एक और बयान दे दिया है. उन्होंने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा कि वे महाभारत बनाने से डरते हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे राजामौली के महाभारत प्रोजेक्ट का हिस्सा बनाना चाहेंगे? तो उन्होंने जवाब में कहा कि ‘मैं ऐसा करने से डरता हूं, क्योंकि ये प्रोजेक्ट मेरे 10-15 साल ले लेगा.’ तो बात ऐसी है, आमिर खान इतना लम्बा समय किसी एक प्रोजेक्ट को नहीं देना चाहते.

ये तो सभी जानते हैं कि राजामौली अपने काम के पक्के हैं, लेकिन इसी के साथ वे अपनी फिल्मों के लिए काफी समय देते हैं. अगर वे महाभारत बनाएंगे, तो उसमें भी कई साल लग जाएंगे. लेकिन इस प्रोजेक्ट के साथ जुड़ने पर स्टार्स को जो फायदा होगा, वह उनके करियर के लिए एक अच्छा फैसला साबित हो सकता है. अब देखना ये है कि आमिर इस प्रोजेक्ट से जुड़ते हैं या नहीं.

एकमात्र क्रिकेट खिलाड़ी जिसे दी गई फांसी की सजा

क्रिकेट दुनिया के सबसे चर्चित खेलों में से एक है. अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच की शुरुआत सन 1844 में हुई थी और ये मैच कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच खेला गया था. 140 साल से भी ज्यादा समय से खेले जा रहे इस खेल में कई रिकार्ड बने हैं और टूटे हैं. सिर्फ रिकार्ड ही नहीं, इस खेल से जुड़े कुछ तथ्य ऐसे हैं जिन पर यकीन कर पाना मुश्किल है. तो आइए आज हम आपको क्रिकेट से जुड़े कुछ रोचक तथ्य बताते हैं जिसे जानकर आप दंग रह जाएंगे.

इंजमाम के नाम अनोखा रिकार्ड

क्रिकेट के मैदान पर अपनी बल्लेबाजी की धाक जमा चुकें पाकिस्तान के पूर्व कप्तान इंजमाम उल हक के नाम अनोखा रिकार्ड दर्ज है. इंजमाम के नाम वनडे में अपनी पहली ही गेंद पर विकेट लेने का रिकार्ड है. उन्होनें 24 नंवबर 1991 में पाकिस्तान के फैसलाबाद में खेले गए वनडे में वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज ब्रायन लारा को शिकार बनाया था.

सभी क्रम पर की बल्लेबाजी

साउथ अफ्रीका के लांस क्लूजनर, पाकिस्तान के अब्दुल रज्जाक और शोएब मलिक और श्रीलंका के हसन तिलकरत्ने चार ऐसे बल्लेबाज हैं जो वनडे में सभी 10 क्रम में बल्लेबाजी कर चुकें हैं.

एक अनोखा दर्शक

रिचर्ड स्टोक्स नामक व्यक्ति ने अपने जिंदगी में दो ही मैच स्टेडियम में देखें हैं. पहला मैच वो था जब जिम लेकर ने आस्ट्रेलिया के खिलाफ ओल्ड ट्रैफोर्ड में 1956 में खेले गए सभी 10 विकेट लिए थे. 43 साल बाद उन्होनें दूसरा मैच फिरोजशाह कोटला में देखा जिसमें अनिल कुंबले ने पाकिस्तान के खिलाफ सभी 10 विकेट लिए.

तीनों फार्मेट में जीता वर्ल्ड कप

भारत एकमात्र ऐसा देश है जिसने 60 , 50 और 20 ओवर के फार्मेट में वर्ल्ड कप जीता है.

इस खिलाड़ी को दी गई फांसी की सजा

वेस्टइंडीज के पूर्व खिलाड़ी लेसली हाइल्‍टन एकमात्र ऐसे टेस्ट खिलाड़ी है जिनको फांसी की सजा दी गई. उनपर अपनी पत्नी का मर्डर करने का आरोप था जिसके चलते 17 मई 1955 को उनको फांसी दी गई

एक ही दिन में टेस्ट की चारो पारी समाप्त

क्रिकेट इतिहास में ऐसा सिर्फ दो ही बार हुआ है जब एक टेस्ट मैच की चारो पारी एक ही दिन में समाप्त हो गई. पहला साल 2000 में लार्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के बीच खेला गया मैच था. दूसरा मैच साल 2011 में केपटाउन में साउथ अफ्रीका और आस्ट्रेलिया के बीच खेला गया था.

जन्म की तिथि और रन एक बराबर

इंग्लैंड के पूर्व बल्लेबाज एलेक स्टीवर्ट की जन्म तिथि (8-4-63) और टेस्ट करियर में कुल रन 8,463 हैं.

हिट विकेट आउट

भारत के लाला अमरनाथ एकमात्र ऐसे गेंदबाज है जिन्होनें टेस्ट मैच के दौरान डौन ब्रैडमैन को हिट विकेट आउट किया है. 1958 में ब्रिसबेन में खेले गए टेस्ट मैच में ब्रैडमैन अमरनाथ की गेंद पर हिट विकेट हो गए थे.

जन्मदिन के दिन ली हैट्रिक

पीटर सिडल एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होनें अपने जन्मदिन वाले दिन हैट्रिक ली है. उन्होनें इंग्लैंड के खिलाफ 25 नंवबर 2010 ब्रिसबेन में खेले गए टेस्ट मैच में ये कारनामा कर दिखाया था.

टेस्ट मैच की पहली गेंद पर जड़ा छक्का

यूनिवर्स बौस के नाम से मशहूर खिलाड़ी क्रिस गेल दुनिया के एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होनें टेस्ट मैच की पहली ही गेंद पर छक्का जड़ा है. उन्होनें बांग्लादेश के खिलाफ 2012 में मीरपुर टेस्ट मैच में विपक्षी टीम के डेब्यू स्पिनर सोहाग गाजी के गेंद पर यह कारनामा किया था.

त्योहारी सीजन में सोने के गहने पर नहीं यहां करें निवेश

भारत में आम उपभोक्ता सोने में निवेश के जिस पारंपरिक तरीके से सबसे ज्यादा वाकिफ है वह है सोने के गहने खरीदना. लेकिन इसके इतर भी सोने में निवेश के तमाम ऐसे तरीके हैं जिनमें निवेश कर कोई भी उपभोक्ता अच्छे रिटर्न पा सकता है.

सोने में कैसे निवेश करें और किन गोल्ड स्कीम्स में निवेश करें ताकि बेहतर रिटर्न मिले इसके बारे में हम आपको यहां विस्तार से बता रहे हैं.

सोने की छड़ या सिक्के खरीदना

फिजिकल गोल्ड में निवेश करने का एक और तरीका छड़ और सिक्कों में निवेश करने का है. बैंक और ज्वेलरी शौप से आप इसे खरीद सकते हैं. आम तौर पर यह 5 ग्राम, 10 ग्राम और 50 ग्राम वजन में उपलब्ध होते हैं. इस विकल्प के जरिए अगर आप सोने में निवेश करते हैं तो आपको गहनों की तुलना में अधिक शुद्धता मिलती है. इसपर मिलने वाला रिटर्न गहनों की तुलना में इसलिए ज्यादा होता है क्योंकि इसमें कोई भी मेकिंग या डिजायन का चार्ज नहीं होता है. हालांकि, जरूरत पड़ने पर भविष्य में कभी भी आप इसके गहने बनवा सकते हैं.

गोल्ड ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडिड फंड्स)

गोल्ड ईटीएफ के जरिए आप गोल्ड में औनलाइन निवेश कर सकते हैं. औनलाइन गोल्ड खरीदने के लिए आपके पास एक डीमैट अकाउंट होना अनिवार्य है. इस माध्यम से कोई भी उपभोक्ता कम से कम 1 ग्राम सोना खरीद सकता है. इसे खरीदने में केवल ब्रोकर और डीमैट अकाउंट के चार्जेस लगते है. जब उपभोक्ता बेचना चाहें डीमैट की मदद से ही घर बैठे बेच सकते हैं.

गोल्ड ईटीएफ में काफी लिक्विडिटी होती है और इसलिए ये उन निवेशकों के लिए अच्छे होते हैं जो शौर्ट से मीडियम टर्म के लिए के लिए निवेश करना चाहते हैं. हालांकि इसमें रिटर्न कम मिलता है क्योंकि 1% व्यय अनुपात देना पड़ता है. इसके अलावा खरीदते या बेचते समय आपको 0.5% की दर से ब्रोकरेज भी देना पड़ता है.

सौवरिन गोल्ड बांड्स

सौवरिन गोल्ड बांड्स में निवेश करना सबसे अच्छा है क्योंकि इसमें आपको 2.75% की दर से ब्याज मिलता है. हालांकि इसकी लिक्विडिटी उतनी अच्छी नहीं है. इसके अलावा यदि आप सेकेंडरी मार्केट से बांड खरीदते हैं तो आपको 0.5% की दर से ब्रोकरेज देना पड़ता है. इस स्कीम के अंतर्गत बौन्ड्स को बैंक/एनबीएफसी/पोस्ट औफिस/ नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (एनएससी) एजेंट्स के जरिए खरीदा या बेचा जा सकता है. भारत में गोल्ड में निवेश करने का यह एक और माध्यम है.

गोल्ड फंड्स

औनलाइन गोल्ड में निवेश करने का एक और तरीका म्युचुअल फंड्स भी है. इसमें आप न्यूनतम 1000 रुपये का भी निवेश कर सकते हैं. तमाम कंपनियां गोल्ड फंड चलाती हैं, जिनमें निवेश करके कोई भी व्यक्ति गोल्ड में औनलाइन निवेश कर सकता है.

ओपन एंड फंड होने के कारण इसमें लिक्विडिटी की समस्या नहीं आती. हालांकि गोल्ड फंड्स गोल्ड ईटीएफ में निवेश करते हैं और इसलिए गोल्ड ईटीएफ की तुलना में इसमें व्यय अनुपात 1.5% अधिक होता है.

गोल्ड बुलियन

यदि आप भौतिक रूप में गोल्ड चाहते हैं तो आपको इसका चुनाव करना चाहिए. हालांकि इन्हें खरीदते या बेचते समय ज्वेलर्स 2% कमीशन लेते हैं.

आधार नंबर के बहाने निजता पर सरकारी पहरा

पहले राजा अपने गुप्तचरों पर निर्भर रहते थे कि उन्हें अपने शासन क्षेत्र में रह रहे नागरिकों के बारे में छिपी जानकारी मिल सके. आज कंप्यूटरों ने जहां जीवन काफी सरल बना दिया है, वहीं उन्होंने गुप्तचरों की जगह भी ले ली है. कंप्यूटर के जरीए आज का राजा यानी सरकार हर नागरिक पर नजर रख सकती है. आज का तंत्र ऐसा हो गया है कि जो भी कुछ है वह कंप्यूटर के बिना नहीं रह सकता और अब सरकार ने इस विधा का लाभ उठा कर हर जानकारी इंटरनैट व कंप्यूटर से लेनी शुरू कर दी है.

कंप्यूटरों को धोखा देना आसान नहीं है, क्योंकि ये अरबों रिकौर्डों में से मतलब की जानकारी सैकंडों में जमा कर सकते हैं. आईटी क्षेत्र में नईनई तकनीकें विकसित हो रही हैं. न केवल वह जानकारी जो किसी नागरिक ने दूसरों को या सरकार को दी, बल्कि उसे भी जो उस के अपने कंप्यूटर में है, सरकार हासिल कर सकती है.

आधार नंबर पर बहस के दौरान सर्वोच्च न्यायालय आमतौर पर मान कर चला है कि सरकार के पास यह जानकारी जनहित और अच्छे शासन के लिए है चाहे उस का मनमाना उपयोग किया जाए. कहने को सरकार लगातार कहे जा रही है कि आधार के माध्यम से केवल बेईमानों, कालाबाजारियों, कर चोरों, आतंकवादियों को गिरफ्त में ले लेगी पर यह पक्का है कि अगर जानकारी जमा होगी तो हर सरकार विरोधी को कर चोर कह देना बेहद आसान है.

सरकार का आम जनता पर अंकुश अब कंप्यूटर के सहारे कई गुना बढ़ जाएगा और उसे गुप्तचरों की नहीं, टैक सेवियों की जरूरत होगी जो सरकार को हर तरह की सेवा दे सकते हों. अब हर नागरिक सरकार की निगाह में है. ऐसे में सरकार को तानाशाह बनने से कोई नहीं रोक सकता और इस के लिए सरकार को बंदूकों की भी जरूरत नहीं रहेगी, केवल कंप्यूटरों की होगी.

सरकार ने आधार नंबर को पैन से जुड़वाया है और पैन नंबर को जीएसटी से ताकि हर आर्थिक लेनदेन पर उस की नजर रहे. यह कहना गलत है कि इस से कर चोरों पर लगाम लगेगी और देश विकास की उड़ानें भरेगा. कर चोरी का, विकास से बहुत कम मतलब है. अगर देश में उत्पादकता बढ़ रही है और लोगों को नया सोचने व करने की स्वतंत्रता है तो ही विकास हो सकता है.

गांवों में कर चोरी न के बराबर होती है, क्योंकि आज भी कृषि उत्पादन पर कर नहीं है. पर क्या गांव विकास कर रहे हैं? कर चोर तो एक तरह से वहां हैं ही नहीं, फिर भी गांव वहीं के वहीं 18वीं सदी के माहौल में जी रहे हैं.

शहरों में अगर कुछ ने बड़े मकान, उद्योग बना भी लिए हैं, तो उन में 10-15% पैसा कर चोरी से लग सकता है. ज्यादातर लोग नंबर एक का लेनदेन करते हैं. और हां, रिश्वतखोर भी अपनी सफेद कमाई पर ही इतराते हैं. कर चोरी के नाम पर जनता को कंप्यूटर से बांधना असल में नागरिकों को सरकार का गुलाम बनाना है. धर्म के पहले से ही गुलाम रहे लोग अब सरकारी गुलाम भी बनने जा रहे हैं. पहले मंत्रों के वश में थे, अब कंप्यूटरों के.

अंग्रेजी ना जानने की वजह से कपिल देव को करना पड़ा इन दिक्कतों का समना

कप्तान के रूप में 1983 में भारत को पहला क्रिकेट विश्व कप का खिताब दिलाने वाले दिग्गज खिलाड़ी कपिल देव ने एक इंटरव्यू में कहा है कि अंग्रेजी न जानने पर लोगों ने उनके कप्तान होने पर सवाल उठाए थे. कपिल ने एक समारोह में अपनी पुरानी यादों को ताजा करते हुए इस बात का खुलासा किया.

इस दिग्गज खिलाड़ी ने कहा, “मैं कृषि पृष्ठभूमि से था और मेरे साथी खिलाड़ी सुसंस्कृत (कल्चर्ड) परिवारों से थे. मेरे लिए यह मेरे जीवन का हिस्सा बन गया था, जो मेरे व्यवहार में नजर आता था.”

कपिल ने कहा, “हमने जब खेलना शुरू किया, तो अधिकतर लोग अंग्रेजी में बात करते थे, हिंदी में नहीं. मुझे जब कप्तान बनाया गया तो लोगों ने कहा कि मुझे अंग्रेजी नहीं आती और मुझे कप्तान नहीं होना चाहिए.

इसकी प्रतिक्रिया में मैंने कहा कि आप किसी को अंग्रेजी में बात करने के लिए औक्सफोर्ड से ले आइए और मैं क्रिकेट खेलना जारी रखूंगा.” 1983 विश्व कप की यादों को ताजा करते हुए कपिल ने कहा कि शुरू में हममें आत्मविश्वास की कमी थी, लेकिन कुछ मैचों में मिली जीत ने हमारे आत्मविश्वास को मजबूत कर दिया.

कपिल ने कहा, “हमने 1983 में शानदार प्रदर्शन किया. यह सच है कि हम मानसिक तौर पर मजबूत नहीं थे, लेकिन कुछ मैच जीतने के बाद हमारा आत्मविश्वास बढ़ गया. 1983 में आखिरकार हमने खिताबी जीत हासिल की.”

उल्लेखनीय है कि फिल्म निर्देशक कबीर खान 1983 में कपिल की कप्तानी में भारतीय टीम को विश्व कप में मिली खिताबी जीत पर एक फिल्म बना रहे हैं, जिसमें अभिनेता रणवीर सिंह को कपिल देव के किरदार में देखा जाएगा.

अमीषा पटेल के इस बैग की कीमत आपके होश उड़ाने के लिए काफी है..!

साल 2000 में फिल्म ‘कहो ना प्यार है’ से अपना फिल्मी करियर शुरू करनेवाली अमीषा पटेल के पास इन दिनों कोई फिल्म नहीं है. गदर जैसी सुपरहिट फिल्म उनकी झोली में होने के बाद भी उनका करियर बेहाल ही रहा. पिछले कई सालों से उन्हें किसी फिल्म में नहीं देखा गया, लेकिन इसके बाद भी उनके स्टाइल का बोलबाला आज भी है.

Thank u @tajbengal for a lovely stay in Kolkata .. now enroute PATNA..

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हाल ही में उन्हें मुंबई एअरपोर्ट पर देखा गया, जहां सबका ध्यान बस उनके बैग पर ही था. उन्होंने सफेद ट्रैकसूट के साथ काला चश्मा लगा रखा था और हाथ में था ‘Versace Chaos’ काउचर का बैग, जिसकी कीमत सुनकर आपको झटका लग सकता है. उनका ये बैग करीब 775 डालर्स, यानी कि 50713 रुपए का था.

खबरों की मानें तो अमीषा को बैग्स का बेहद शौक है, यही वजह है कि उनके पास 200 से ज्यादा बैग्स हैं. भले ही अमीषा के पास काम न हों, पर वे खुद को किसी फेमस सेलिब्रिटी की तरह कैरी करती हैं. इन दिनों वे बड़ी-बड़ी पार्टियों में नजर आती हैं, यहां तक कि वे कई पार्टियों में बिन बुलाए ही पहुंच जाती हैं.

हाथों में हाथ डाले सड़क पर रोमांस करते नजर आए सनी देओल और डिम्पल कपाड़िया

बौलीवुड में कई ऐसी जोड़ियां हैं, जिनका प्यार परवान तो चढ़ा, लेकिन वे साथ-साथ एक दिल-एक जान होकर अपनी जिन्दगी नहीं बिता सके. इन जोड़ियों में एक नाम है डिंपल कपाड़िया और सनी देओल का, जिनके प्यार के किस्से एक समय में लोगों की जुबान पर थे. दोनों ने लम्बे समय तक एक-दूसरे को डेट भी किया, यहां तक कि खबर तो ये भी आई थी कि दोनों ने छुपकर शादी कर ली है. लेकिन इसके बाद भी दोनों एक नहीं हो पाए.

समय के साथ उनके प्यार के किस्से कहीं खो गए, लेकिन हाल ही में हुई एक घटना ने इस आग को फिर से हवा दे दी. इन दिनों इन्टरनेट पर बस एक ही तस्वीर शेयर की जा रही है, जिसमें सनी और डिंपल दोनों हाथों में हाथ डाले लंदन की सड़कों में रोमांस करते हुए दिखाई दे रहे हैं. इस तस्वीर में आप साफ देख सकते हैं कि दोनों किसी बस का इंतजार कर रहे हैं और दोनों बेहद करीब बैठे हैं.

कुछ समय पहले दोनों को एक ही दिन एयरपोर्ट पर देखा गया था, लेकिन दोनों अलग-अलग समय पर एअरपोर्ट से बाहर निकले थे. तब किसी ने भी ये सोचा नहीं था कि दोनों एक साथ हालिडे पर जा सकते हैं. बता दें कि दोनों ने एक साथ ‘मंजिल-मंजिल’, ‘अर्जुन’, ‘नरसिम्हा’, ‘गुनाह’ और कई फिल्मों में एक साथ काम किया है.

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