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स्मार्टफोन-टैबलेट इस्तेमाल करते हैं, तो रखें इन बातों का विशेष ध्यान

आज के समय में स्मार्टफोन, टैबलेट, आदि का क्रेज दिन-ब-दिन बढता ही जा रहा है. हम अपने रोजमर्रा की जिंदगी में इसका ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में इनके रख-रखाव पर ध्‍यान देना बहुत ही आवश्‍यक है,  इनके रखरखाव के लिये अगर हम कुछ टिप्‍स अपनायें तो इन्हें हम ज्यादा लम्‍बे समय तक सुरक्षित रूप से प्रयोग कर सकते हैं.

आइये जानते हैं इन्हें सुरक्षित रखने के आसान टिप्स

स्‍क्रीन गार्ड का करें इस्‍तेमाल

स्मार्टफोन, टैबलेट का सबसे जरूरी फीचर है टच स्‍क्रीन, इस कारण हर समय हमारी उंगलियां स्‍क्रीन पर ही रहती हैं, जिससे स्‍क्रीन पर स्‍क्रैच आने की संभावना रहती है. कई बार अचानक से फोन या टैब के गिर जाने पर स्क्रीन को खतरा होता है. इसलिये जरूरी है कि स्‍क्रीन गार्ड का इस्‍तेमाल किया जाये.

अनावश्‍यक ऐप्‍लीकेशन डाउलनोड न करें

अनावश्‍यक ऐप्‍लीकेशन डाउनलोड करने के तीन नुकसान हैं, एक तो जिन ऐप्‍लीकेशन को आप प्रयोग नहीं करते हैं, वह अनावश्‍यक फोन का स्पेस घेरती है, और दूसरा वह बैकग्राउन्‍ड में चलती रहती है, जिससे उसका असर रैम पर भी पड़ता है, इससे आपके फोन और टैब की स्‍पीड पर बहुत प्रभाव पडता है और तीसरा कारण अगर आपके टैब में इन्‍टरनेट है तो वह ऐप्‍लीकेशन अपडेट आदि होने के लिये अलग-अलग प्रकार से आपके डाटा का यूज करती है.

एन्‍टीवायरस अवश्‍य प्रयोग करें

इन्‍टरनेट का प्रयोग तो आम है, इसलिये अपके फोन और टैब पर वायरस की सम्‍भावना भी बनी रहती है, ऐसे में उनपर एक अच्‍छे एन्‍टीवायरस का होना बहुत जरूरी है. इससे आपका फोन और टैब सुरक्षित रहता है.

बैटरी का रखे विशेष ध्‍यान

इनका लगातार इस्तेमाल होने के कारण बैटरी ज्‍यादा खर्च होती है, बैटरी लम्‍बे समय तक बैकअप दे इसके लिये बैकग्राउन्‍ड में चल रही अनावश्‍यक एप्‍लीकेशनों को बन्‍द रखें, लाइव वालपेपर भी आपकी बैटरी को जल्‍द ही डाउन कर देता है, इसलिये हो सके तो साधारण वालपेपर का ही प्रयोग करें.

अच्‍छी स्‍पीड के लिये क्‍लीन रखें

टैब को चलाने का मजा तभी आता है जब उसमें अच्‍छी स्‍पीड हो, लेकिन टैम्‍परेरी और गैरजरूरी फाइलों के कारण इसकी स्‍पीड कम हो जाती है, उनको हटाना आवश्‍यक है, इसलिये समय समय पर सिस्‍टम को क्‍लीन रखना जरूरी है, इसके लिये आप Clean Master (Cleaner) को गूगल प्‍ले से डाउनलोड कर सकते हैं.

वजनी सामान न रखें

याद रखे कि स्मार्टफोन, टैबलेट, पर कभी भी वजनी सामान न रखें, कभी कभी ऐसा होता है कि हम किताबों आदि के नीचे टैब और अपने फोन को रख देते हैं, इससे यह जल्‍द ही खराब हो सकती है.

साल के अंत में यहां मिल रहा बंपर औफर, जल्दी करें

ई-कौमर्स वेबसाइट अमेजौन साल की आखिरी सबसे बड़ी सेल लेकर आई है. अमेजौन EMI फीस्ट नाम  दिया है. इस सेल में नो कोस्ट EMI पर स्मार्टफोन, टीवी और होम अप्लायंस के कई आइटम्स पर बंपर छूट मिल रही है. खास बात यह है कि अमेजौन इन आइटम्स की खरीद पर किसी तरह की डाउन पेमेंट या प्रोसेसिंग फीस नहीं लेगी. हालांकि, इसके लिए यूजर को सिर्फ 6 महीने का अधिकतम समय दिया जाएगा. औफर की वैधता 2 जनवरी 2018 तक मान्य है.

ऐसे मिलेगी औफर की जानकारी

अमेजौन की वेबसाइट पर जाकर जो प्रोडक्ट खरीदना है उसकी डिटेल्स देखी जा सकती है. जिस प्रोडक्ट पर नो कोस्ट EMI का औफर मिल रहा है उसके लिए आपको प्रोडक्ट के नीचे उसकी डिटेल मिलेंगी. प्रोडक्ट के नीचे No Cost Emi लिखा होना जरूरी है. तभी उस पर यह औफर लागू होगा.

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EMI के सिर्फ दो औप्शन

प्रोडक्ट की डिटेलिंग के नीचे नो कौस्ट EMI के सिर्फ दो औप्शन दिए गए हैं. इसमें 3 महीने और 6 महीने की EMI की डिटेल्स होंगी. प्रोडक्ट की कीमत के बराबर वाली EMI होंगी. अपने अनुसार इनमें से औप्शन को क्लिक किया जा सकता है. औप्शन चुनने के बाद इसकी पेमेंट क्रेडिट कार्ड से करनी होगी.

किस पर कितना औफर

अमेजौन की इस सेल में औफर का सबसे ज्यादा फायदा मोबाइल, टीवी और होम अप्लायंस पर मिलेगा. इसमें 313 रुपए में फोन, 499 रुपए में टीवी, 470 रुपए में स्मौल अप्लायंस और 470 रुपए में ही बड़े अप्लायंस खरीद सकते हैं.

कैशबैक औफर भी मिलेगा

अमेजौन से इस औफर का फायदा उठाने के लिए आपको कम से कम 7000 रुपए की शौपिंग करनी होगी. इसमें सबसे आकर्षित करने वाली बात ये है कि अमेजौन ने शौपिंग पर 1500 रुपए का कैशबैक औफर किया है. यानी सस्ते सामान के साथ ही कैशबैक का भी फायदा ग्राहकों को मिलेगा. कैशबैक का लाभ 2 मार्च तक उठाया जा सकेगा.

हरभजन सिंह की चेतावनी, भारतीय टीम को इस गेंदबाज से रहना होगा सतर्क

टीम इंडिया से बाहर चल रहे टीम इंडिया के स्पिनर हरभजन सिंह ने दक्षिण अफ्रीका दौरे पर टीम को तेज गेंदबाज से सतर्क रहने की जरूरत बताई है. हरभजन ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका में बल्लेबाजों को उछाल से पार पाना होगा. उन्होंने कहा, ‘20 ओवरों के बाद कूकाबूरा गेंद सीम लेना बंद कर देगी. उसके बाद उछाल से ही पार पाना होगा.’ उन्होंने कहा कि इस दौरे में टीम को दक्षिण अफ्रीका के तेज गेंदबाज डेल स्टेन से संभलकर रहना होगा.

सीनियर स्पिनर हरभजन सिंह का मानना है कि करियर के लिये खतरा बनी चोट से वापसी करना आसान नहीं होता और यही वजह है कि दक्षिण अफ्रीका के तेज गेंदबाज डेल स्टेन भारत के खिलाफ आगामी टेस्ट सीरीज में बड़ी चुनौती साबित नहीं होंगे. स्टेन पिछले साल आस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट मैच के दौरान कंधे की हड्डी खिसकने के बाद से प्रतिस्पर्धी क्रिकेट से दूर हैं.

हरभजन ने कहा ,‘डेल स्टेन पिछले दस साल में सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाज हैं. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी करना आसान नहीं होता. जिम्बाब्वे के खिलाफ टेस्ट मैच इसका प्रमाण नहीं है कि वह भारत के खिलाफ कैसे खेल सकता है.’ उन्होंने कहा, ‘भारत के बल्लेबाजी क्रम को देखें हमारे पास मुरली विजय, चेतेश्वर पुजारा, विराट कोहली, अजिंक्य रहाणे, रोहित शर्मा जैसे बेहतरीन बल्लेबाज हैं. यह विश्व क्रिकेट का सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजी क्रम है.’ स्टेन और मोर्कल के लिये इस बल्लेबाजी क्रम पर अंकुश लगाना बहुत कठिन होगा. खासकर तब जबकि वे खुद अपनी लय हासिल करने की जुगत में होंगे.

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इस बारे में बहस चल रही है कि हरफनमौला हार्दिक पंड्या छठे नंबर के लिये सही विकल्प हैं या नहीं, लेकिन हरभजन सिंह का मानना है कि रोहित शर्मा को इस क्रम पर उतारना चाहिये.

छह नंबर के लिए रोहित शर्मा सबसे सही बल्लेबाज

हरभजन ने कहा, ‘रोहित शानदार खिलाड़ी है. वह पूल और कट शाट बखूबी खेलता है. मेरी नजर में वह नंबर छह के लिये सबसे उपयुक्त है. हम उछाल भरी गेंदों पर भी अपने स्ट्रोक्स खेल सकता है.’ उन्होंने कहा, ‘हार्दिक प्रतिभाशाली लड़का है और रोहित मुकम्मल बल्लेबाज हैं.’ दक्षिण अफ्रीका में पहले टेस्ट से पूर्व भारत को एक भी अभ्यास मैच नहीं मिला है, लेकिन हरभजन इसे ज्यादा तूल नहीं देना चाहते.

उन्होंने कहा, ‘टीम प्रबंधन ने यह फैसला लेने से पहले सोचा होगा. अभ्यास मैच नहीं मिलने पर भी नेट गेंदबाज उन्हें मैच के समान अभ्यास का पूरा मौका देंगे.’ उन्होंने यह भी कहा कि 300 टेस्ट विकेट ले चुके स्पिनर आर अश्विन की भारतीय टेस्ट एकादश में जगह पक्की होनी चाहिये. उन्होंने कहा, ‘यदि अश्विन की 300 टेस्ट विकेट के बाद भी जगह पक्की नहीं है तो फिर कब.’

31 दिसंबर के बाद इन स्मार्टफोन्स में बंद हो जाएगा व्हाट्सऐप

फेसबुक द्वारा खरीदे गए मैसेजिंग ऐप व्हाट्सऐप ने घोषणा की है कि 31 दिसंबर, 2017 के बाद कुछ स्मार्टफोन पर व्हाट्सऐप अपडेट सपोर्ट की सुविधा को खत्म कर दिया जाएगा. व्हाट्सऐप के ब्लौग पोस्ट के अनुसार इस सुविधा को खत्म किए जाने के बाद यूजर्स कुछ स्मार्टफोन्स के जरिए न तो नया खाता बना पाएंगे और न ही अपने मौजूदा खाते को सत्यापित करा पाएंगे.

इसका यह मतलब नहीं है कि सपोर्ट खत्म करने के बाद यूजर्स अपना अकाउंट नहीं चला पाएंगे. व्हाट्सऐप ने कहा है कि यूजर्स अपना अकाउंट चला पाएंगे, लेकिन उन्हें किसी भी प्रकार के सिक्योरिटी अपडेट और नए फीचर प्राप्त नहीं होंगे. पिछले साल व्हाट्सऐप ने विंडो फोन 7, एंड्रोयड 2.1, एंड्रोयड 2.2 और आईओएस 6 जैसे ओएस वर्जन्स में सपोर्ट सुविधा को बंद कर दिया था.

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इसके बाद इस साल से व्हाट्सऐप ने नोकिया सिमबियन एस60 पर सपोर्ट सुविधा को खत्म कर दिया. अब जिन प्लेटफोर्म्स से व्हाट्सऐप सपोर्ट सुविधा को बंद करने जा रहे हैं उनमें ब्लैकबेरी ओएस शामिल हैं. बता दें कि कंपनी ने नए स्मार्टफोन बनाना या लौन्च करना बंद कर दिया है. इसके साथ ही व्हाट्सऐप ने यह भी कहा है कि 31 दिसंबर के बाद हो सकता है कि कुछ फीचर न रहें.

व्हाट्सऐप का कहना है कि कंपनी बहुत से फीचर का विस्तार करने की कोशिश कर रही है. इन स्मार्टफोन या प्लेटफोर्म्स का उन्हें औफर नहीं दिया जाएगा, इसलिए कंपनी के भविष्य को ध्यान में रखते हुए व्हाट्सऐप सपोर्ट सुविधा वापस ले रहा है.

इसके साथ ही व्हाट्सऐप ने लोगों को सुझाव दिया है कि अगर वे प्लेटफौर्म का पुराना वर्जन इस्तेमाल कर रहे हैं तो वे अपना ओएस अपग्रेड कर सकते हैं ताकि उन्हें अपडेट प्राप्त हो सके. व्हाट्सऐप विंडो फोन 8 में सपोर्ट नहीं करेगा लेकिन यूजर्स इसे अपग्रेड कर लेते हैं और उनके पास विंडो फोन 8.1 होगा तो वे सुविधा प्राप्त कर सकेंगे.

2017 के अलावा व्हाट्सऐप 2018 और 2020 में भी इसी प्रकार स्मार्टफोन्स पर सपोर्ट सुविधा को बंद करेगा. इस साल दिंसबर में ब्लैकबैरी ओएस और ब्लैकबेरी 10 पर सुविधा बंद कर दी जाएगी. इसके अलावा 31 दिसंबर, 2018 में नोकिया एस40 और विंडो फोन 8.0, 1 फरवरी, 2020 के बाद एंड्रोयड वर्जन्स 2.3.7 और इससे पुराने वर्जन पर व्हाट्सऐप सपोर्ट बंद कर दिया जाएगा.

शेक्सपियर के नाटक के साथ अनोखा प्रयोग

अमेरिका के ‘‘स्टेल्ला एडलर एक्टिंग’’ स्कूल में तीन वर्ष तथा शेक्सपियर एंड कंपनी से दो वर्ष का प्रशिक्षण लेकर लौटे नवसारी, गुजरात निवासी देशिक वांसदिआ अब विलियम शेक्सपियर के नाटक पर ही अंग्रेजी भाषा में एक नाटक ‘‘द टेमिंग आफ द श्रेव’’ का मंचन मुंबई में ही करने जा रहे हैं.

इस नाटक में आज के समाज में चल रहे पुरुष व महिलाओं के समान अधिकार की बात की गयी है. इस नाटक में नया प्रयोग किया जा रहा है कि इसमें महिला पात्र पुरुष और पुरुष पात्र को महिलाएं निभा रही हैं. इस नाटक का मंचन मुंबई, अहमदाबाद, दिल्ली, बंगलुरू व राजस्थान के कई शहरों में होगा.

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नाटक ‘‘द टेमिंग आफ द श्रेव’’ के निर्देशक देशिक वांसदिआ खुद ही इस नाटक में ‘श्रू’’ की मुख्य भूमिका निभाने वाले हैं. इस नाटक के संबंध में जब देशिक वासंदिआ से बात हुई, तो उन्होंने कहा, हम महिला व पुरुषों की समानता की बात करते हैं. लेकिन जब आज कोई लड़की आधुनिक ड्रेस पहनकर बाहर निकलती है, तो पुरुष उसको लेकर गलत बातें करने लगते हैं.

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लोग उस लड़की को बिगड़ी हुई लड़की कहने लगते हैं. पर इस तरह की बातों के पीछे ‘पावर’ ही अहमियत रखती है. पुरुष या महिला, जिसके पास कोई न कोई ‘पावर’ होता है, वह अपने उस पावर के बल पर दूसरों को नीचा दिखाने का काम करते हैं. जबकि हकीकत में कोई बड़ा या छोटा नही होता. इसी बात को हम इस नाटक में पेश कर रहे हैं. नाटक की भाषा विलियम शेक्सपियर वाली अंग्रेजी ही है. उसमें जो भाव, रस व कविता है, वह आज की अंग्रेजी में नही है.’’

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देशिक वांसदिआ लंबे समय तक अमेरिका के लौस एंजिल्स शहर में रह कर शेक्सपियर के नाटकों का हिस्सा रहे हैं. लौस एंजिल्स में रहते हुए रोमियो एंड ज्यूलिएट के प्रोडक्शन में रोमियो का किरदार निभाया. फिर शेक्सपियर के मुरीद बनकर कई नाटकों में अभिनय करते हुए विश्व भर में कई शो किए. मुंबई वापस आने के बाद वह नाटकों, विज्ञापन, फिल्मों, टीवी सीरियल आदि से जुड़े रहे.

शेक्सपियर की 400वीं पुण्यतिथि पर आल इंडिया रेडियो के लिए उन्होंने अंग्रेजी नाटक ‘मेसर फार मेसर’ का निर्देशन किया. इस नाटक में एक साधु एक लड़की पर मोहित हो जाता है. देशिक वांसदिआ का सर्वाधिक चर्चित नाटक है- ‘‘द ब्वाय हू स्टाप्ड स्माइलिंग”, जिसके कई शो मुंबई के पृथ्वी थिएटर व एनसीपीए में भी हो चुके हैं.

आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ बनी पहली बाल फिल्म “बिल्लू उस्ताद”

आतंकवादी गतिविधियों में बच्चों के उपयोग पर पहली भारतीय फिल्म है- सुवाहदान अंग्रे निर्देशित फिल्म ‘‘बिल्लू उस्ताद’’. इस फिल्म के माध्यम से फिल्मकार का मकसद हर बालक के अंदर आत्मरक्षा यानी कि सेल्फ डिफेंस सीखने के लिए प्रेरित करना है.

मुंबई पर हुए 26/11 के आतंकवादी हमले के खिलाफ लड़ने वाले पुणे के एटीएस प्रमुख भानुप्रताप बर्गे के काम पर आधारित फिल्म ‘‘बिल्लू उस्ताद’’ की कहानी उस अनाथ आश्रम की है, जहां बिल्लू(मिहिर सोनी) अपने दोस्तों के साथ रहता है. यह बिल्लू अपनी वीरता के साथ इन बच्चो को आतंकवादी गतिविधियों से दूर रहने के लिए समझाता है. फिल्म में दिखाया गया है कि किस तरह एटीएस, बिल्लू को राजी करता है कि बिल्लू अपने दोस्तों को समझाए कि वह मानवता को नुकसान पहुंचाने वाले काम से दूर रहें.

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फिल्म ‘बिल्लू उस्ताद’ के निर्देशक से जब हमारी बात हुई, तो उन्होने कहा-‘‘इन दिनों आतंकवादी संगठन आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने लिए बच्चों का ब्रेन वाश करके उनकी मदद ले रहे हैं. यह जो चलन बढ़ रहा है, उसी को रेखांकित करने के मकसद से इस फिल्म का निर्माण किया गया है. इस फिल्म की कहानी में आम लोगो के बीच आतंक फैलाने के लिए आतंकवादी संगठन अनाथ बच्चों के माध्यम से जिंदा लोगों के बीच पहुंचाते हैं.

इसी अनाथ आश्रम में रह रहा बिल्लू, आतंकवादियों के साथ जुड़े बच्चों को मुख्य धारा में लाने के लिए महाराष्ट्र पुलिस की आतंकवाद विरोधी शाखा की मदद करता है. बिल्लू दूसरे बच्चों को समझाता है कि यह आतंकवादी संगठन उनका उपयोग मानवता विरोधी काम के लिए कर रहा है.’’

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फिल्म के निर्माता शांतनु सिंह कहते हैं-‘‘हमने फिल्म में दिखाया है कि किस तरह अनाथ बच्चे आतंकवादी गतिविधियों का हिस्सा बनते हैं और एटीएस इन बच्चों को गलत राह पर जाने से रोकने की लड़ाई लड़ता है.’’

बिल्लू का किरदार निभाने वाला बाल कलाकार मिहिर सोनी इससे पहले महेश मांजरेकर निर्देशित फिल्म ‘‘कुटुंब’’ में अभिनय कर चुका है. इस फिल्म के अन्य कलाकार हैं-प्रियांशु चटर्जी, अखिलेंद्र मिश्रा, मिथिला नाइक, नील बक्षी, अथर्व नेलेकर, राखी, दीपराजा राणा व अन्य.

शांतनु सिंह निर्मित फिल्म ‘‘बिल्लू उस्ताद’’ संगीतकार श्रीरंग अरस के निर्देशन में कैलाश खेर व वैशाली सामंत ने गीत गाए हैं.

क्रिकेट मैदान पर सांता बने धोनी, सबने की खूब मस्ती

अपने बेहतरीन हरफनमौला खेल के दम पर भारत ने रविवार को वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए तीसरे और आखिरी टी-20 मैच में श्रीलंका को पांच विकेट से हरा दिया. इसी के साथ भारत ने तीन टी-20 मैचों की सीरीज पर 3-0 से कब्जा जमा लिया है. इसी जीत के साथ टीम इंडिया ने देश को क्रिसमस और नए साल का शानदार तोहफा दिया. मैच और सीरीज अपने नाम करने के बाद टीम इंडिया के खिलाड़ी मैदान पर क्रिसमस मस्ती करते नजर आए. सभी खिलाड़ी मैच के बाद मैदान पर सांता की टोपी पहने नजर आए, लेकिन इन सब के बीच धोनी सबसे अलग ही दिख रहे थे.

दरअसल, विकेटकीपर-बल्लेबाज महेंद्र सिंह धोनी की सांता वाली टोपी बाकी खिलाड़ियों से अलग थी. एक बार फिर से जब मैच फंसने की स्थिति में पहुंच गया, तब धोनी ‘सांता’ बनकर आए और जीत को भारत की झोली में डाल दिया.

एक वक्त पर मैच फंसता नजर आ रहा था, लेकिन दिनेश कार्तिक (नाबाद 18) और महेंद्र सिंह धोनी (16) ने अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए मैच को भारत के खाते में डाला दिया.

बता दें कि मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम से धोनी की खास यादें जुड़ी हुई हैं. इसी मैदान पर श्रीलंका के खिलाफ ही 2011 में धोनी ने मैच विनिंग छक्का जड़कर भारत को वर्ल्ड चैंपियन बनाया था. इस बार भी धोनी ने उसी छोर से बल्लेबाजी करते हुए इस मैच में भी विनिंग बाउंड्री जड़ी और श्रीलंका के खिलाफ सीरीज पर क्लीन स्वीप की.

खिलाड़ियों ने सांता टोपी पहनकर ही ट्रौफी के साथ फोटो खिंचवाई. इसके बाद ज्यादातर क्रिकेटरों ने अपनी टोपी निकाल दी थी, लेकिन धोनी ने इसे पहने रखा. जिसे देखकर कुछ खिलाड़ियों ने दोबारा टोपी लगा ली.

चौका जड़ भारत को जीत दिलाने वाले धोनी ने मैच के बाद मैदान पर साथी खिलाड़ियों के साथ जमकर मस्ती की. कुलदीप यादव और हार्दिक पांड्या भी धोनी की टोपी के साथ मस्ती करते नजर आए.

टि्वटर पर भी धोनी के ‘सांता’ लुक की जमकर तारीफ हुई. सोशल मीडिया पर भी धोनी की सांता वाली टोपी छा गई. लोगों ने इसको लेकर कई ट्वीट्स किए हैं.

कुछ ऐसा रहा मैच का रोमांच

भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने टौस जीतकर श्रीलंकाई टीम को बल्लेबाजी के लिए आमंत्रित किया और अपने गेंदबाजों के दम पर उसे निर्धारित 20 ओवरों में सात विकेट के नुकसान पर 135 रनों पर ही सीमित कर दिया. इस आसान से लक्ष्य को हासिल करने के लिए हालांकि मेजबान टीम को आखिरी ओवर की दूसरी गेंद तक का इंतजार करना पड़ा. भारत ने पांच विकेट खोकर लक्ष्य हासिल करते हुए श्रीलंका के जीत के साथ दौरे का अंत करने के सपने को तोड़ दिया.

बिग बी ने सुनाई धीरूभाई अंबानी की दरियादिली की कहानी, लोग हुए भावुक

अमिताभ बच्‍चन ने एक कार्यक्रम में जब धीरूभाई अंबानी की दरियादिली की कहानी सुनाई तो सामने बैठे रिलायंस इंडस्‍ट्रीज के अध्‍यक्ष मुकेश अंबानी की आंखों में आंसू आ गए. बिग बी रिलायंस इंडस्‍ट्रीज के वार्षिक सम्‍मेलन में बोल रहे थे. उन्‍होंने बताया कि नब्‍बे के दशक में जब वह दिवालिया हो गए थे, उस वक्‍त धीरूभाई ने मदद का हाथ बढ़ाया था.

हालांकि, उन्‍होंने उनके प्रस्‍ताव को विनम्रता के साथ टाल दिया था. इस कार्यक्रम में रिलायंस इंडस्‍ट्रीज के तकरीबन 80,000 अधिकारी, कर्मचारी और अन्‍य लोग मौजूद थे. बिग बी ने बताया कि धीरूभाई का मानना था कि लोगों में खुशी के साथ-साथ अपनापन बांटने से भरोसा बढ़ता है. शायद इसीलिए उन्‍होंने अपनी कंपनी को ‘रिलायंस’ का नाम दिया.

अमिताभ बच्‍चन ने बताया कि उनकी कंपनी एबीसीएल घाटे में चल रही थी. उन्‍होंने कहा, ‘मैं दिवालिया हो चुका था. मुझ पर करोड़ों रुपये का कर्जा था और कुर्की का आदेश दिया जा चुका था. मेरा बैंक बैलेंस शून्‍य हो गया था. कर्ज देने वाले लगातार दस्‍तक दे रहे थे.

धीरूभाई को जब इसका पता चला तो उन्‍होंने अपने छोटे बेटे अनिल अंबानी को भेजा और कहा कि मुझे कुछ पैसे दे दें. अनिल ने मुझे इसके बारे में बताया. वह मुझे जितना देना चाह रहे थे, उससे मेरी सारी परेशानियां खत्‍म हो जातीं. मैं उनकी उदारता पर भावुक हो गया था, लेकिन उनकी इस उदारत को स्‍वीकार न कर सका.

ईश्‍वर की कृपा से धीरे-धीरे मेरी हालत सुधरी और मुझे काम मिलने लगा था. मैं कर्ज चुकाने में सफल रहा था.’ बिग बी ने बताया कि धीरूभाई अंबानी ने लाखों लोगों की स्थिति में सुधार किया. अमिताभ बच्‍चन के अलावा इस कार्यक्रम में शाहरुख खान, रणबीर कपूर और सोनू निगम जैसी हस्तियां भी मौजूद थीं.

बिग बी ने बताया कि धीरूभाई अंबानी के घर पर एक कार्यक्रम था, जिसमें उन्‍हें भी आमंत्रित किया गया था. अमिताभ ने कहा, ‘धीरूभाई ने दिग्‍गज उद्योगपतियों के बीच में कहा था कि ‘यह लड़का गिर गया था, लेकिन अपने दम पर फिर से उठा. इसलिए मैं इसका सम्‍मान करता हूं.’ धीरूभाई के ये शब्‍द मेरे लिए उनके द्वारा दी जाने वाली राशि से कहीं ज्‍यादा मूल्‍यवान थे.’ कंपनी की 40वीं सालगिरह के मौके पर रिलायंस कर्मचारियों के अलावा कई अन्‍य लोग भी मौजूद थे.

अब रेलवे देगा आपको 10 हजार का कैशबैक, बस करना होगा ये काम

आईआरसीटीसी ने अपना आधार कार्ड आईआरसीटीसी अकाउंट से लिंक करने पर 10,000 रुपए कैश देने और फ्री में टिकट देने का औफर निकाला है. वहीं आईआरसीटीसी अकाउंट से आधार लिंक करने पर एक महीने में 12 टिकट बुक कर सकते हैं और बिना लिंक किए एक महीने में 6 टिकट ही बुक किए जा सकते हैं. भारतीय रेलवे ने यह ‘लकी ड्रौ स्कीम’ शुरू कर दी है.

इस स्कीम में शामिल होने के लिए आपको कुछ भी एक्स्ट्रा नहीं करना है. इसके लिए आप अपने आईआरसीटीसी अकाउंट को आधार से लिंक कर लें, जैसे ही आप इस काम को कर लेंगे, तो अगले 6 महीने तक जब भी आप टिकट बुक करेंगे, तो आप इस स्कीम में शामिल हो जाएंगे. रेलवे हर महीने 5 लोगों को इस लकी ड्रौ का फायदा देगी.

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इस दौरान जीतने वालों को न सिर्फ 10,000 रुपए इनाम दिया जाएगा, बल्कि उन्होंने टिकट बुक करने पर जो खर्च किया है, वह पूरा पैसा भी लौटाया जाएगा. हालांकि इसके लिए जरूरी है कि IRCTC प्रोफाइल में आपका जो नाम है, टिकट पर भी वही नाम होना चाहिए.

ऐसे होगा सिलेक्शन

भारतीय रेलवे के मुताबिक जैसे ही आप आधार लिंक करने के बाद आईआरसीटीसी अकाउंट से टिकट बुक करेंगे, तो आपका पीएनआर नंबर इस स्कीम में शामिल हो जाएगा. इसके बाद कंप्यूटर की मदद से हर महीने 5 लकी विजेता चुने जाएंगे. जिस महीने आप टिकट बुक करेंगे, उसके अगले महीने के पहले हफ्ते में आपको पता चल जाएगा कि आप जीते हैं या नहीं.

इस स्कीम में जीतने वालों की जानकारी न सिर्फ आईआरसीटीसी साइट पर डालेगा, बल्क‍ि जीतने वालों की रजिस्टर्ड ईमेल आईडी पर भी भेजेगा। यह स्कीम दिसंबर से शुरू हो गई है और अगले 6 महीनों तक चलेगी.

लकी ड्रौ स्कीम के बारे में पूरी जानकारी हासिल करने के लिए आप आईआरसीटीसी के अलर्ट एंड अपडेट्स सेक्शन में जा सकते हैं और अन्य नियम व शर्तों के बारे में पता कर सकते हैं.

विदेशी उच्च शिक्षा बनाम लाचार भारतीय शिक्षा

भारत में एक ओर उच्चशिक्षा के स्तर को ले कर सवाल उठते रहे हैं तो दूसरी ओर पढ़ने के लिए छात्र बड़ी संख्या में विदेशों का रुख कर रहे हैं. भारतीय छात्रों के माध्यम से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को अरबों डौलर मिल रहे हैं. इस का बुरा प्रभाव हमारी अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है.

प्रतिभा किसी एक ही देश की परिरक्षित निधि नहीं है. प्रत्येक देश के अपनेअपने क्षेत्र के प्रवीण व्यक्ति होते हैं, जैसे वैज्ञानिक, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ, साहित्य या कलाओं के विद्वान, चित्रकार, कलाकार आदि. असाधारण प्रतिभा संपन्न ऐसे पुरुष और स्त्रियां अपने देश की  प्रगति व समृद्धि में योगदान तो देते ही हैं साथ ही, अपनी विशिष्टता वाले क्षेत्र में भी उत्कर्षता लाते हैं.

यह कोई असामान्य बात नहीं है कि इन योग्य व्यक्तियों में से कुछ लोगों को अपने ही देश में संतोषजनक काम नहीं मिल पाता या किसी न किसी कारण वे अपने वातावरण से तालमेल नहीं बिठा पाते. ऐसी परिस्थितियों में ये लोग बेहतर काम की खोज के लिए या अधिक भौतिक सुविधाओं के लिए दूसरे देशों में चले जाते हैं.

उच्चशिक्षा पर सवाल

अपने कुशल और प्रतिभासंपन्न व्यक्तियों की हानि से विकासशील देश सब से अधिक प्रभावित हुए हैं. इस का मुख्य कारण यह है कि विकासशील देशों में वेतन और अन्य सुविधाओं के रूप में प्राप्त होने वाले लाभ कम हैं. इन में भारत भी एक है.

भारत में उच्चशिक्षा के स्तर को ले कर हमेशा ही सवाल उठते रहते हैं. अंतर्राष्ट्रीय रेटिंग में भारतीय विश्वविद्यालय पहले 100 संस्थानों में अपनी जगह क्यों नहीं बना पाते हैं? शीर्ष भारतीय संस्थानों में कोई मौलिक शोधकार्य क्यों नहीं होता है? दाखिले में आरक्षण का मुद्दा, ऊंचे अंक हासिल करने के बावजूद दाखिले से वंचित रह जाना, शिक्षक और छात्रों का बिगड़ा हुआ अनुपात, प्रोफैसरों और कुलपतियों की राजनीतिक नियुक्तियां और किस तरह से उच्चशिक्षा के संस्थान अकादमिक भ्रष्टाचार और औसत दरजे के डिगरीधारकों के उत्पादन की फैक्टरियां बन गए हैं. इन सवालों में एक बड़ा सवाल अब यह भी जुड़ गया है कि इतनी बड़ी संख्या में भारतीय छात्र विदेशों का रुख क्यों कर रहे हैं? इतना ही नहीं, इन छात्रों के साथ फीस और पढ़ाई का पैसा भी बह कर विदेशों में जा रहा है.

ओपन डोर संस्था की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी कालेजों में दाखिला लेने वाले भारतीय छात्रों में 25 फीसदी की वृद्धि हुई है. अमेरिकी अर्थव्यवस्था में उन्होंने 5 अरब रुपए का योगदान दिया है.

सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में यूरोप और आस्ट्रेलिया जाने वाले छात्रों में भी नाटकीय ढंग से वृद्धि हुई है, जबकि इसी दौर में भारत में बड़ी संख्या में उच्च शिक्षण संस्थान और विश्वविद्यालय खुले हैं. आखिर ये छात्र देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में क्यों नहीं पढ़ना चाहते?

ब्रेनड्रेन की बड़ी वजह

आज भारत की उच्चशिक्षा व्यवस्था विश्व की बड़ी व्यवस्थाओं में एक मानी जाती है. 2030 तक भारत में कालेज जाने की उम्र वाले 14 करोड़ से अधिक लोग होंगे और ये विश्व का सब से जवान देश माना जाएगा.

ताजा हालात में भारत के लिए यह चुनौती होगी कि वह किस तरह से इन संभावित विद्यार्थियों को स्वदेश में ही रोके और उन की प्रतिभा व योग्यता का अपने यहां अधिकतम इस्तेमाल कर सके ताकि वे मेक इन इंडिया में अपना सहयोग कर सकें.

ब्रेनड्रेन की सब से बड़ी वजह है कि विदेशी डिगरी खासतौर पर अमेरिकी डिगरी से नौकरी पाना आसान है. आर्थिक उदारीकरण के बाद मध्यवर्गीय परिवारों की आय का स्तर बढ़ा है और उन की दृष्टि में भारतीय उच्चशिक्षा प्रणाली में सीमित अवसर हैं.

भारत में चुनिंदा विश्वविद्यालयों में ही पढ़ाई का स्तर ठीक है और सीमित सीटों के कारण वहां दाखिला दुष्कर होता जा रहा है. ज्यादातर छात्र विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित पढ़ने के लिए बाहर जाते हैं. बेशुमार सरकारी स्कौलरशिप और अनुदान से छात्रों का बाहर जा कर पढ़ने का सपना पूरा होना आसान हो गया है.

मानव संसाधन विकास मंत्रालय और एसोचैम जैसे संस्थानों को इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि इसे कैसे रोका जाए. ब्रेनड्रेन अब निश्चित रूप से घाटे का सौदा बनता जा रहा है. प्रतिभा पलायन रोकने के लिए आईआईटी और आईआईएम जैसे और संस्थान स्थापित किए जाने की जरूरत है. विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में अपने कैंपस खोलने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए. उन के लिए कर रियायतें और प्रोत्साहन दिए जाने चाहिए जिस से हमारे देश का शिक्षा स्तर ऊपर हो. इस से ब्रेनड्रेन पर भी लगाम लगेगी.

दूसरी तरफ उच्चशिक्षा के लिए सिर्फ सरकार पर ही निर्भर रहना उचित नहीं है बल्कि उद्योग और अकादमिक सहयोग से नई संस्थाएं स्थापित करनी चाहिए और उन का स्तर बढ़ाया जाना चाहिए.

कदम उठाए सरकार

सरकार द्वारा उच्चशिक्षा की फीस भी बढ़ाई जाए, क्योंकि जो छात्र विदेशों में इतना खर्च करने के लिए तैयार हैं वे अच्छी शिक्षा के लिए स्वदेश में भी खर्च कर सकते हैं. जहां तक गरीब छात्रों का सवाल है, उन के लिए अमेरिका की तरह गारंटी प्रणाली की स्थापना की जाए जहां उन्हें बिना अभिभावकों की सुरक्षा के भी सस्ता लोन मिल सके.

विदेशों में पढ़ने के लिए उदार भाव से दी जा रही सरकारी छात्रवृत्तियों और अनुदानों में कटौती भी की जा सकती है. अभी ब्राजील ने ऐसा किया है और उस के बाद वहां के छात्रों के विदेश जाने में कमी आई है.

आज विदेश का रुख करने वाले छात्रों के लिए एक आकर्षक विकल्प देश में ही पैदा करने की जरूरत है. आज अधिकांश सरकारी संस्थानों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए आमूलचूल बदलाव की जरूरत है. शिक्षा माफिया के काले धन पर भी सर्जिकल स्ट्राइक की जरूरत है. ये शिक्षा व्यवस्था को दीमक की तरह चाट रहे हैं.

विज्ञान, चिकित्सा या ज्ञान के किसी अन्य क्षेत्र का विशेषज्ञ कम वेतन और अन्य कठिनाइयों को भी सह सकता है, यदि उस की योग्यता को अच्छी मान्यता मिले. उस के काम का ठीक मूल्यांकन हो. अच्छे तरह साधनसंपन्न प्रयोगशाला या पुस्तकालय राष्ट्रीय प्रतिभाओं में से अधिकांश को अपनी मातृभूमि छोड़ने से रोक देंगे, चाहे विदेशों में  उन्हें कितना ही अधिक वेतन क्यों न मिले.

विकसित देशों के रहनसहन के ऊंचे स्तर ने विकासशील क्षेत्रों के लोगों को सदा ही अत्यधिक आकृष्ट किया है और प्रतिभाशाली लोग और विशेषज्ञ भी इस मोहजाल से अपनेआप को नहीं बचा पाए.

इस का परिणाम यह हुआ कि विकासशील देशों के अधिकांश प्रतिभासंपन्न व्यक्ति रहनसहन के इस स्तर को प्राप्त करने में प्रसन्नता का अनुभव करने लगे जोकि विकसित देशों के एक साधारण नागरिक को भी उपलब्ध होती है. इसलिए ऐसी सुविधा देश में ही उपलब्ध कराने की योजना बनाई जाए.

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