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वीडियो : सचिन ने दिखाया नींबू तोड़ने का हुनर

भारत के महान बल्लेबाज और भारत रत्न सचिन तेंदुलकर शख्सियत ही ऐसी हैं कि क्रिकेट ग्राउंड से बाहर रहकर भी वह जो करते हैं, वह सुर्खियों में आ जाता है.

सोशल मीडिया पर खासे सक्रिय रहने वाले सचिन तेंदुलकर आये दिन वीडियो शेयर करते रहते हैं. हाल ही में उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक ​वीडियो शेयर किया है. इसमें सचिन एक पेड़ से लिंबू (नींबू) तोड़ने का हुनर दिखा रहे हैं.

इस वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि सचिन किस तरह से लिंबू तोड़ने में अपनी दिलचस्पी दिखा रहे हैं. खास बात यह है कि जैसे-जैसे सचिन अपने काम को अंजाम देते हैं, वीडियो शूट करने वाला उनका दोस्त इस दौरान कमेंटरी करता है. कमेंट्री में सचिन का दोस्त लिंबू को आम कहता है, तो सचिन पलटकर कहते हैं- “अरे ये आम नहीं है, ये लिंबू है लिंबू.”

सचिन की मेहनत देखकर लगता है मानो नींबू टूटने से मना कर रहा हो, लेकिन सचिन जैसे खेल के मैदान पर हार नहीं मानते हैं, वह यहां भी बाजी जीत ही लेते हैं. यह वीडियो किस जगह का है, इसके बारे में जानकारी नहीं है. लेकिन यह वीडियो काफी वायरल हो रहा है और कुछ ही घंटों में इसे 9 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है.

गौरतलब है कि सचिन तेंदुलकर क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद राजनीति करने के अलावा अपने दोस्तों और परिवार के साथ छुट्टियां बिताते नजर आते हैं. कभी वो अपने दोस्तों के लिए बैंगन का भर्ता बनाते हैं तो कभी औमलेट और खाना.

मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर अक्सर समाजिक कार्यों को लेकर भी तत्पर रहते हैं. वह भारत सरकार की तरफ से चलाए जा रहे स्वच्छ भारत अभियान में भी सहभागिता निभाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं. पहले भी सोशल मीडिया पर सचिन के ऐसे वीडियो वायरल हो चुके हैं, जिनमें वह लोगों को यातायात नियमों का पालन करने की नसीहत देते और बाइक पर जा रहे लोगों से हेलमेट पहनने की अपील करते देखे गए थे. ऐसा सचिन एक नहीं, कई बार कर चुके हैं. उनका यह हुनर दर्शाता है कि एक महान बल्लेबाज अपने विचारों से भी महान है जिसे समाज की फिक्र बनी रहती है.

कोहली पर कुछ ज्यादा ही निर्भर करती है भारतीय टीम : डु प्लेसिस

भारत के खिलाफ सीरीज के दूसरे टेस्ट मैच में 135 रनों की जीत से दक्षिण अफ्रीका के कप्तान फाफ डु प्लेसिस बेहद खुश हैं. मैच जीतने के बाद उन्होंने कहा, “यह मैच उनके लिए काफी मुश्किल भरा था. दिन के हर सेशन के साथ मैच का रुख बदलता जा रहा था”. इस जीत के साथ दक्षिण अफ्रीका ने तीन टेस्ट मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त ले ली है.

दक्षिण अफ्रीका ने भारत के सामने जीत के लिए 287 रनों का लक्ष्य रखा था, जिसे भारतीय टीम हसिल नहीं कर सकी और 50.2 ओवरों में सिर्फ 151 रनों पर ही औल आउट हो गई.

डु प्लेसिस ने कहा कि भारतीय टीम ज्यादातर विराट कोहली पर ही निर्भर रहती है. विराट कोहली के आउट होते ही भारतीय पारी भी लड़खड़ा जाती है. इस बात को दक्षिण अफ्रीकी खिलाड़ी बखूबी जानते हैं, इसलिए जब कोहली मैदान पर बल्लेबाजी करने आते हैं तो उनकी कोशिश उन्हें जल्द से जल्द आउट करने की रहती है.

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डु प्लेसिस ने कहा, “इस मैच में उनकी टीम बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों ही क्षेत्र में अच्छा काम किया. टीम के सभी बल्लेबाजों ने रन बनाने में योगदान दिया, उन्हें लग रहा था कि पहली पारी में स्कोर 400 के पार जाने की जरूरत थी”. उन्होंने कहा, पहले दिन के बाद वह निराश थे. दिन के आखिरी 45 मिनटों में उन्होंने भारत को मैच में आने का मौका दे दिया और उसके बाद चर्चा की थी कि अब इस गलती को अगले चार दिनों तक दोहराने की जरूरत नहीं है.

इसके अलावा कप्तान ने डेब्यू मैच खेलने वाले गेंदबाज लुंगी नगिडी की जमकर तारीफ की. बता दें कि लुंगी ने दूसरी पारी मे भारत के छह विकेट चटकाए. उन्होंने कहा कि यह नगिडी का विशेष प्रदर्शन है. वह शानदार खिलाड़ी हैं और उनका टीम में स्वागत हैं, उनका भविष्य अच्छा है. गौरतलब है कि सीरीज का आखिरी मैच 24 जनवरी से जोहानिसबर्ग में खेला जाएगा.

समाज में बदलाव लाने वाली फिल्में ज्यादा बननी चाहिएं : सोनम कपूर

2007 में ‘‘सांवरिया’’ से अभिनय करियर की शुरुआत करने वाली सोनम कपूर ने धीरे धीरे लीक से हटकर और महिला प्रधान फिल्में करना शुरू किया. अब वह उन फिल्मों को प्रधानता दे रही हैं, जो कि लोगों को प्रेरणा दें या नारी उत्थान की दिशा में कारगर साबित हों. फिलहाल वह अपनी 25 जनवरी को प्रदर्शित होने वाली फिल्म ‘‘पैडमैन’’को लेकर उत्साहित हैं. फिल्म ‘‘पैडमैन’’ में औरतों को माहवारी के दौरान सैनेटरी नैपकीन पैड के उपयोग की बात की गयी है.

क्या आप नई फिल्म ‘‘पैडमैन’’ को लेकर काफी नर्वस हैं?

बिलकुल नहीं. मैने ‘आएशा व रांझना’ से लेकर अब तक हर फिल्म सही सोच व अच्छे इरादे से ही की है. इसीलिए मेरी फिल्में सफल होती रही हैं. मेरी पिछली फिल्म ‘‘नीरजा’’ के लिए कई अवार्ड भी मिले. मेरी राय में फिल्म में मनोरंजन व सीख दोनों होनी चाहिए और फिल्म दर्शक तक पहुंचनी चाहिए. मै हमेशा वह फिल्में करना चाहती हूं, जिनको कर मैं गौरवान्वित महसूस कर सकूं. ‘पैडमैन’ भी उसी तरह की फिल्म है.

तो ‘पैडमैन’से भी लोगो के सीख मिलेगी?

हमारे देश में सिर्फ 12 प्रतिशत महिलाओं को ही पीरियड/ माहवारी के दौरान सैनेटरी पैड के उपयोग की सुविधा है. बाकी औरतें राख, पत्ते या गंदे कपड़ों का उपयोग करती हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ता है. इसी वजह यह भी है कि औरतों के बीच सैनेटरी नपकीन पैड को लेकर जागरुकता नहीं है. तो वहीं कुछ के पास सैनेटरी पैड खरीदने के लिए पैसे नहीं है. पर दक्षिण भारत में अरूणाचलम ने नई मशीन का ईजाद कर अति सस्ते दामों में सैनेटरी पैड उपलब्ध कराकर एक नई मिसाल कायम की है. हम ‘पैडमैन’ से सैनेटरी नैपकीन के प्रति हर औरत के बीच जागरुकता लाना चाहते हैं.

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लेकिन ‘‘पैडमैन’’ में तो आपका किरदार काफी छोटा है?

मैं किरदार की लंबाई देखकर फिल्म का चयन नहीं करती. मैं फिल्म के निर्देशक आर बालकी की बहुत बड़ी फैन हूं, और उनके साथ काम करना चाहती थी. आर बालकी ऐसे निर्देशक हैं, जो कि अलग तरह की प्रभावशाली कहानी सुनाने में यकीन करती हैं. तो जब उन्होंने मुझे इस फिल्म के लिए याद किया, तो मैं उत्साहित हो गयी. कहानी सुनकर व फिल्म की विषय वस्तु को जानकर मैने तय कर लिया कि मुझे इस फिल्म का हर हाल में हिस्सा बनना है.

फिल्म में छोटा किरदार निभाने को मैं रिस्क नहीं मानती. मेरी राय में किरदार का फिल्म की कहानी में महत्व होना जरुरी है. फिल्म में लीडिंग रोल करते हुए तीन गानें या दो दृश्य करने से बेहतर है कि ‘पैडमैन’ में परी का किरदार निभाना. जब आपका किरदार कहानी का महत्वपूर्ण बनाता है, तो उसे निभाना ही ठीक है. इससे पहले ‘दिल्ली 6’ में मेरा किरदार सिर्फ 15 मिनट की अवधि के लिए था. जबकि ‘भाग मिल्खा भाग’ मे मेरे महज चार दृश्य थे, पर यह सब फिल्म की कहानी का अहम हिस्सा थे. फिल्म ‘पैडमैन’ की कहानी दो रूपए में सैनेटरी नैपकीन उपलब्ध कराने वाले अरूणाचलम मुरूगनाथन की है.

अरूणाचलम मुरूगनाथन के बारे में आपको सबसे पहले जानकारी कब मिली थी?

यह लगभग चार पांच वर्ष पहले उस वक्त की बात है, जब मैं सिंगापुर में पढ़ाई कर रही थी. उस वक्त मेरे एक विदेशी मित्र ने विदेशों में प्रसारित कार्यक्रम ‘‘टेड टौक’’, जिसमें अरूणाचलम को लेकर बात की गयी थी, का वीडियो भेजा था. उसने मुझे लिखा था कि, ‘यह आपके भारत देश का आदमी है, आप देख लें.’ मैं यह वीडियो देखकर शौक्ड रह गयी थी. जबकि वीडियो बहुत मनोरंजक था. एक स्मार्ट और अच्छे इंसान के बारे में बात कर रहा था. अरूणाचलम ने काफी शोध किया है, जबकि बहुत ज्यादा पढे़ लिखे नहीं है. बहुत अच्छी अंग्रेजी नहीं जानते हैं. पर उन्होंने एक मशीन बनायी. इस मशीन के उपयोग से सैनेटरी नैपकीन 2 रूपए में बनती हैं. इस तरह उन्होने कम कीमत में पर्यावरण अनुकूल सैनेटरी नैपकीन बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. उन्हे 2016 में पद्मश्री भी मिला है, पर जब मैंने उनका टेड टौक शो देखा था, उस वक्त तक उन्हे भारत में कम लोग ही जानते थे और पद्मश्री भी नहीं मिला था.

अरूणाचलम ने इस मशीन को अब तक साढे़ छह हजार गांव में जाकर बेचा है. उन्होंने औरतों को समझाया कि यह मशीन किस तरह से काम करती है. हर गांव की कुछ औरतों ने मिलकर बैंक से साठ हजार रूपए कर्जा लेकर यह मशीन खरीदी. दो रूपए की लागत वाली सैनेटरी नैपकीन को 3 रूपए में बेच कर बैंक का कर्जा भी चुकाया. इससे कुछ औरतों को रोजगार मिल गया और गांव की हर औरत को सैनेटरी नैपकीन सस्ते दाम में मिल गयी. अब आप खुद सोच लें कि इस इंसान ने कितना बड़ा काम किया. कुछ लोगों को रोजगार मिल गया. औरतों के स्वास्थ्य की रक्षा के साथ प्रगति हुई तथा एक जागरुकता भी आयी. मुझे यकीन है कि हमारी फिल्म ‘पैडमैन’से बाकी की औरतों में भी जागरुकता आएगी.

फिल्म के किरदार को लेकर क्या कहेंगी?

मैंने इस फिल्म में अक्षय कुमार के किरदार लक्ष्मीकांत चौहाण की बिजनेस पार्टनर परी का किरदार निभाया है. परी पहली इंसान है, जो कि उसके साथ खड़ी होती है, उसे आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है. मेरे हिसाब से परी का किरदार बहुत ही अलग तरह का और अति महत्वपूर्ण किरदार है. परी आज की लड़की है, उसकी परवरिश प्रोग्रेसिव माहौल में हुई है. वह औरतों के बारे में बहुत सोचती है.

फिल्म ‘‘पैडमैन’’ से क्या बदलाव आएगा?

इस फिल्म के बाद लोग आपस में खुलकर सैनेटरी नैपकीन को लेकर बात करना शुरू करेंगे. यह बहुत जरुरी है. मेरी राय में कलाकारों व फिल्मकारो को उन विषयों पर बात करनी चाहिए, फिल्म बनानी चाहिए, जिन पर समाज में लोग बात करने से हिचकते हैं. इस तरह के विषयों पर जब फिल्में बनेंगी तो समाज में बदलाव आएगा. औरतों में सैनेटरी नैपकीन को लेकर जागरूकता आएगी. आज की तारीख में 88 प्रतिशत महिलांए सैनेटरी नैपकीन की बजाय माहवारी के दिनो में रद्दी कपड़े, भूसा, बालू व राख का उपयोग करती हैं.

आप हमेशा मुद्दों पर आधारित या फेमिनिस्ट फिल्मों में ही नजर आती हैं. क्या आपको मसाला फिल्मों से एलर्जी है?

मैं मसाला फिल्मों के खिलाफ नहीं हूं. मैं सिनेमा में अभिनेत्रियों के लिए लिखे जाने वाले हास्यास्पद किरदारों के खिलाफ हूं. मुझे ‘‘प्रेम रतन धन पायो’’ जैसी मसाला फिल्म करने से एतराज नहीं है. यदि मसाला फिल्म में भी सम्मान जनक व अच्छे किरदार के आफर मिले, तो मैं जरुर करना चाहूंगी. पर मसाला फिल्में कर रही दूसरी अभिनेत्रियों को मैं जज नहीं करती. पर अब तक मेरी कोशिश रही है कि मैं उन फिल्मों का हिस्सा बनूं, जो लोगों को बेहतरीन इंसान बनने व कुछ करने के लिए प्रेरित करें.

अभिनय के अलावा आप क्या करना चाहेंगी?

मैं फिल्म निर्देशित करना चाहती हूं. मुझे लगता है कि लोग भी चाहते हैं कि मैं फिल्म निर्देशित करूं. मैं बतौर अभिनेत्री किसी से प्रतिस्पर्धा नहीं करती. मुझे अच्छे लेखकों और अच्छी पटकथा की तलाश है. वैसे मैंने हाल ही में कृष्णा उदयशंकर लिखित किताब ‘‘गोविंदा’’ खरीदी है. यह भगवान कृष्ण से प्रेरित एक कहानी है. शायद इस पर पटकथा लिखवाकर फिल्म निर्देशित करने के बारे में कोई निर्णय लूं.

आप पढ़ने की शौकीन हैं. इन दिनों आपने नया क्या पढ़ा हैं?

मैंने हाल ही में एक किताब ‘‘रावण’’ पढ़कर खत्म की है. ‘रामायण’ कि जो मैथोलौजी है, उसी को इस किताब ने रावण के नजरिए से पेश किया गया है. बहुत खूबसूरत किताब है. इस किताब को पढ़कर मुझे रामायण से जुड़ा दूसरा पक्ष समझ में आया. देखिए, हर सिक्के के दो पहलू होते हैं. वैसे भी हमारे देश में उत्तर भारत में राम की और दक्षिण भारत में रावण की पूजा होती है. रावण अपने आप में बेहतरीन शासक, बेहतरीन राजा व धार्मिक इंसान था, शिव भक्त था. विद्वान था. पर उसका अहंकार उसे ले डूबा. इस किताब में उसकी कहानी को बहुत खूबसूरत तरीके से पेश किया गया है. रावण के संघर्ष को भी पेश किया गया है. इस किताब को पढ़ने के बाद मुझे समझ में आया कि इस संसार में कोई भी इंसान सिर्फ बुरा या अच्छा नही होता है. एक ही मुद्दे को लेकर हर इंसान का अपना अलग नजरिया हो सकता है. हम जिसे सही मानते है, उसे दूसरा गलत मान सकता है.

सोशल मीडिया पर आप क्या लिख रही हैं?

मुझे इस बात का अफसोस है कि आप मुझे सोशल मीडिया पर यानी कि ट्वीटर पर फौलो नही करते है. आप ट्वीटर पर क्यों नही है. आपको भी ट्वीटर पर आ जाना चाहिए. मैं हर दिन कुछ न कुछ ट्वीट करती रहती हूं. मैंने आज ही एक रीट्वीट किया हैं. यह हिंडोल सेन गुप्ता की किताब ‘बिइंग हिंदू’ को लेकर है. यह एक खूबसूरत किताब है. इसके अलावा एक ट्वीट किया है कि फिल्म ‘वीरे दी वेडिंग’ 1 जून को आ रही है. इसके अलावा मेरे पसंदीदा लेखक देव दत्त पटनायक है. पाकिस्तान में मार्टियल रेप कानूनन अपराध हैं, पर हमारे देश में क्यों नही हैं, इसे भी ट्वीट किया है.

क्या आप औरतों के मुद्दों पर कुछ लिखना पसंद करती हैं?

जी हां! मैंने कई लेख अंग्रेजी भाषा में लिखे हैं, जो कि कई जगह छपे हैं.

बिग बी का जलवा देख निशब्द हुए इजरायली पीएम, शेयर की तस्वीर

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपने छह दिवसीय भारत दौरे के दौरान गुरुवार को मुंबई पहुंचे. यहां उन्होंने बौलीवुड हस्तियों से मुलाकात की. इजरायली पीएम नेतन्याहू से मुलाकात करने वालों में अमिताभ बच्चन, ऐश्वर्या बच्चन, अभिषेक बच्चन, करण जौहर, इम्तियाज अली, मधुर भंडारकर, विवेक ओबराय, प्रसून जोशी समेत कई फिल्मी हस्तियां मौजूद थीं.

इस दौरान उन्होंने कहा कि, ‘अंग्रेजी में एक शब्द होता है- स्पीचलेस (निशब्द), जिसका अनुभव उन्हें जिंदगी में पहली बार हो रहा है.’ नेतन्याहू ने अपना भाषण, ‘प्यारे दोस्तो, नमस्कार शैलौम’ से शुरू किया. उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता था कि मैं बड़ी हस्ती हूं, फिर मुझे अमिताभ बच्चन के जलवे का अहसास हुआ. उनके पास मुझसे 30 मिलियन (3 करोड़) ज्यादा ट्विटर फौलोअर्स हैं. अब मैं नि:शब्द हूं.’

इस दौरान इजरायली पीएम ने बौलीवुड की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा, ‘दुनिया बौलीवुड को पसंद करती है. इजरायल बौलीवुड को पसंद करता है और मैं भी आपको पसंद करता हूं. हमने सिनेमा पर हाल ही में एक बिल पास किया है. आप हमारे देश में आइए, हम सिनेमा में और ज्यादा निवेश करेंगे.’

उन्होंने आगे कहा, ‘हम इजरायल में बौलीवुड देखना चाहते हैं. हमारे पास आपको केवल उन्नत तकनीक ही नहीं, रचनात्मकता भी देखने को मिलेगी. आपने होमलैंड और POW देखे होंगे, यह हमारे शो के फौर्मेट हैं. बौलीवुड का विकास यानी दुनिया में भारत का विकास और इजरायली तकनीक का विकास होगा. हमारी तकनीक, विज्ञान और कला आपसे मिल जाएगी तो जादुई नजारा देखने को मिलेगा.’

उन्होंने आगे कहा, ‘मैं आप सबके साथ एक सेल्फी लेना चाहता हूं ताकि दुनिया हमारे संबंधों को जाने. आपको मालूम होगा कि दुनिया की सबसे ज्यादा पसंद की गई सेल्फी एलन (शो प्रजेंटर) की थी, जो उन्होंने औस्कर्स में ली थी. अब मैं इतिहास बनाना चाहता हूं.’ उन्होंने अपनी बात को खत्म करते हुए कहा जय हिंद, जय महाराष्ट्र, जय इजरायल.

थप्पड़ से डर नहीं लगता साहब, सी एम की ड्यूटी से डर लगता है

अगर वाकई मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उतने गंभीर अनुशासित और शांत स्वभाव के होते जितने कि अब तक वे प्रचारित किए जा चुके हैं तो निश्चित रूप से अपने सुरक्षाकर्मी कुलदीप सिंह गुर्जर से माफी मांगते या अपनी गलती पर खेद तो व्यक्त करते, लेकिन ऐसा न कर उन्होंने जता दिया है कि राजा आखिर राजा होता है फिर जमाना राजशाही का हो या कथित लोकतन्त्र का उससे कोई फर्क नहीं पड़ता. गौरतलब है कि तीन दिन पहले धार जिले के कस्बे सरदारपुर में शिवराज सिंह ने अपनी सुरक्षा में तैनात कुलदीप को जोरदार थप्पड़ जड़ दिया था.

इस थप्पड़ की गूंज और गूंज की भी गूंज अब सुनाई देने लगी है, शिवराज सिंह की खामोशी ने उनकी शांत इमेज के चिथड़े उड़ाकर रख दिये हैं और स्वाभिमानी गुर्जर समुदाय उनके खिलाफ लामबंद होकर भाजपा के बहिष्कार की चेतावनी तक दे चुका है. आम लोग इस थप्पड़ की तुलना सुभाष घई निर्देशित फिल्म कर्मा के उस दृश्य से करने लगे हैं जिसमे जेल में दिलीप कुमार ने अनुपम खेर को थप्पड़ मारा था पर सरदारपुर के मामले में विलेन शिवराज सिंह को माना जा रहा है.

भोपाल के पुलिस हेड क्वार्टर में अब दबंग फिल्म का यह डायलोग पुलिस कर्मी मुंह दबाकर कह रहे हैं कि थप्पड़ से डर नहीं लगता साहब, सी एम की ड्यूटी से डर लगता है. शिवराज सिंह चौहान भले ही ऐसे हंसी मजाकों को हवा में उड़ा दें, लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि जो नाम उन्होंने पिछले तीस सालों में कमाया था वह महज तीन दिन में मिट्टी मिल गया है. कांग्रेसी तो उन पर निशाना तानने की स्वभाविक और राजनैतिक जिम्मेदारी निभा ही रहे हैं, लेकिन खुद उनकी ही पार्टी के नेता भी उन्हें गलत ठहराने से चूक नहीं रहे, यह और बात है कि सार्वजनिक तौर पर सिर्फ पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने उन्हें गलत करार देने का जोखिम उठाया.

भाजपा के दूसरे नेता शिवराज सिंह के बचाव में कुछ नहीं बोल पा रहे हैं तो जाहिर है इसमें बचाने लायक कुछ बचा ही नहीं है उल्टे शिवराज सिंह के इस गुस्से में आरएसएस की भूमिका तलाशी जाने लगी है कि विदिशा की मीटिंग में मोहन भागवत ने उनकी इतनी ज्यादा खिंचाई कर दी कि वे हड़बड़ा उठे और गुस्सा या भड़ास निकली कुलदीप पर जिस बेचारे का कसूर इतना भर था कि वह ईमानदारी से अपनी ड्यूटी बजा रहा था. कुछ लोगों का मानना है कि आपा खो चुके शिवराज सिंह में अगर अपनी गलती स्वीकारने की भी हिम्मत या नैतिकता नहीं बची तो वे एक अच्छे और सफल नेता का पहला गुण खो चुके हैं जिसे धैर्य कहा जाता है.

मुमकिन है यह अहंकार ही हो जो चिंता की बात भाजपा के लिहाज से है वजह धार थप्पड़ कांड के दूसरे ही दिन धार के मनावर से भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री रंजना बघेल का भी एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें वे एक पुलिस अधिकारी को यह कहते धमकाती नजर आ रहीं हैं कि तेरी पुलिस गिरि निकाल दूंगी. ठीक इसी दिन आगर मालवा में एकात्म यात्रा के दौरान भाजपा विधायक गोपाल परमार की पिटाई भाजपा के ही सांसद मनोहर ऊंटवाल के समर्थकों ने सरेआम कर डाली. इन मामलों से भाजपा के अनुशासन की पोल ही खुली है पर आलाकमान खामोश है वजह वह कुछ बोलेगा या करेगा तो रंजना बघेल और मनोहर ऊंटवाल यह कहने से चूकेंगे नहीं कि जाओ पहले सीएम के खिलाफ कारवाई करो जिन्होंने सुरक्षाकर्मी को थप्पड़ मारा था.

अब हैरानी नहीं होनी चाहिए अगर पुलिस कर्मी भाजपा के कार्यक्रमों में ड्यूटी देने से कतराने लगें जिनमे खुलेआम जन प्रतिनिधि थप्पड़ मारते हैं, एक दूसरे पर लात घूंसे चलाते हैं और पुलिस वालों को धौंस भी देते हैं. ऐसे में अगर कोई अप्रिय हादसा होता है तो सबसे पहले नौकरी पुलिस वालों की ही जाना है मंत्रियों, विधायकों, सांसदों और दूसरे नेताओं का तो कुछ बिगड़ने से रहा.

पंड्या की बेवकूफी पर भड़के कपिल देव, कहा मुझसे तुलना न करें

पंड्या को कई बार कपिल के बाद भारत का सर्वश्रेष्ठ आलराउंडर बताया गया है. कपिल ने सेंचुरियन में दूसरे टेस्ट में पंड्या के बल्लेबाजी प्रदर्शन की आलोचना की. टीम इंडिया के पूर्व कप्तान कपिल देव का मानना है कि पंड्या अगर सेंचुरियन टेस्ट में की गई बेवकूफी दोहराएंगे तो उनसे मेरी तुलना नहीं की जानी चाहिए.

कपिल देव ने कहा कि ‘अगर पंड्या इस तरह की बेवकूफाना गलतियां करना जारी रखते हैं, तो वह मेरे साथ तुलना का हकदार नहीं है.’कपिल दूसरी पारी में पंड्या के आउट होने के तरीके से खुश नहीं थे. हार्दिक की बल्लेबाजी देखने के बाद कपिल देव ने कहा, ‘उनकी तुलना मेरे साथ की जाती है, लेकिन अगर मैदान में वो इस तरह की गलती बार-बार करते रहेंगे, तो उनकी तुलना मेरे साथ करना बंद कर दें.’ उनका कहना है कि हार्दिक पांड्या एक अच्छे खिलाड़ी हैं, लेकिन उन्हें थोड़ी बुद्धि का इस्तेमाल अपने खेल में करना होगा ताकि वह बार बार इस तरह की छोटी गलतियों को न दोहराए.

दरअसल कपिल देव सेंचुरियन टेस्ट की दूसरी पारी में जिस तरह पांड्या आउट हुए थे, उसे लेकर नाराज हैं. पांड्या ने उस वक्त अपना विकेट गंवाया, जब आधी टीम पवेलियन लौट चुकी थी और हार का खतरा मंडरा रहा था.

दक्षिण अफ्रीका से जीत के लिए मिले 287 रनों का पीछा करने उतरी टीम इंडिया उस वक्त मुश्किल में थी. जब पांड्या चौथी पारी में बल्लेबाजी करने आए थे, तब टीम इंडिया के पांच विकेट सिर्फ 65 रन पर गिर चुके थे.

ऐसे में उनसे मैच की नजाकत को देखते हुए बल्लेबाजी करने की उम्मीद थी. मगर पांड्या केवल 6 रन बनाकर आउट हो गए, वो भी लुंगी नजीदी की ऐसी गेंद को जो औफ स्टंप से काफी बाहर जा रही थी और जिसे आसानी से छोड़ा जा सकता था. मगर पांड्या ने यहां गलती कि और बाहर जाती गेंद को छेड़ने के चक्कर में विकेटकीपर क्विंटक डी कौक को कैच थमा बैठे और टीम के लिए मैच गंवा दिया.

पहली पारी में रन आउट हुए थे पांड्या

गलती केवल भारतीय टीम की दूसरी पारी में नहीं हुई थी, बल्कि पहली पारी में भी क्रीज के अंदर पहुंचने के बाद भी पांड्या ने अपना बल्ला नहीं रखा था और वो रन आउट हो गए थे. इस तरह से आउट होने को लेकर उनकी काफी आलोचना भी हुई थी, मगर दूसरी पारी में फिर पांड्या लापरवाही भरा शौट खेलकर आउट हुए.

कपिल देव ने कहा कि, ‘पांड्या में काफी टैलेंट है, जो पहले टेस्ट में उन्होंने दिखाया भी, मगर पांड्या को अपनी मानसिकता पर काम करना होगा.

कपिल देव के अलावा पूर्व चीफ सिलेक्टर संदीप पाटिल ने भी कहा कि अभी पंड्या की तुलना कपिल देव के साथ करना ठीक नहीं, क्योंकि अभी पंड्या के करियर की शुरुआत है. मैं कपिल के साथ काफी क्रिकेट खेला, सचमुच इन दोनों में कोई तुलना नहीं है.

कपिल शानदार प्रदर्शन करते हुए 15 साल भारत के लिए खेले हैं, जबकि पंड्या ने सिर्फ अपना पांचवां टेस्ट खेला है. अभी पंड्या को लंबा रास्ता तय करना है.’

वहीं, भारतीय कप्‍तान विराट कोहली ने हार के लिए बल्‍लेबाजी को जिम्‍मेदार ठहराया. उन्‍होंने मैच खत्‍म होने के बाद प्रेस कौन्‍फ्रेंस में कहा, ”हम अच्छी साझेदारियां करने और बढ़त लेने में असफल रहे. हमने अपने आप को मायूस किया. गेंदबाजों ने अपना काम किया, लेकिन बल्लेबाजों ने टीम को निराश किया. हमने कोशिश की, लेकिन हमारा प्रयास काफी नहीं था, खासकर फील्डिंग में. इसलिए दक्षिण अफ्रीका को जीत मिली.”

14 डिजाइन में 10 रुपये के सिक्के जारी करता है आरबीआई

10 रुपये के सिक्कों को लेकर अफवाहों का बाजार गर्म रहता है और कई दुकानदार एवं अन्य व्यवसायी एक खास डिजाइन का 10 रुपये का सिक्का ही लेते हैं और बाकी डिजाइन के सिक्के लेने से इनकार कर देते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि वो नकली है.

10 रुपए के सिक्कों को लेकर थोड़े दिनों पहले अफवाहें सामने आई थीं कि इनके कुछ डिजाइन नकली हैं. कहा जा रहा था कि भारी संख्या में जाली सिक्के बाजार में चलाए जा रहे हैं. कई बार आपका भी उन लोगों से सामना हुआ होगा जो 10 रुपये के कुछ खास डिजाइन वाले सिक्के लेने से इनकार कर देते हैं. कई दुकानदार, औटो वाले, सब्जी विक्रेता आदि इन अफवाहों के शिकार हो जाते हैं कि 10 रुपये के वही सिक्के सही हैं जिनमें 10 धारियां बनी हुई हैं. बाकी सारे सिक्के अवैध हैं.

यही वजह है कि 10 के सिक्के को लेकर लोगों को काफी परेशानी होती है. कई बार पैसे होते हुए भी लोग सामान नहीं खरीद पाते हैं या अन्य तरह की मुश्किलों को उन्हें  झेलना पड़ता है.

इसकी खबर रिजर्व बैंक को भी है. आरबीआई समय समय पर इन अफवाहों की खबरों को लेकर सफाई देता रहता है. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने एक बार फिर लोगों के इस तरह के भ्रम को खत्म करने के लिए एक नया आदेश जारी किया है.

रिजर्व बैंक ने अपने इस बयान में स्पष्ट किया है कि “आरबीआई 10 रुपए के सिक्के 14 डिजाइन में जारी करता है. सरकारी टकसाल में इन्हें तैयार किया जाता है. समय-दर-समय ये आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृति मूल्यों से जुड़ी हुई थीम्स को दर्शातें हैं.” लोगों को यह सूचित किया जाता है कि ये सभी सिक्के मान्य हैं और लेन-देन में स्वीकारें जाएंगे. रिजर्व बैंक ने बैंकों को भी अपनी सभी शाखाओं में लेनदेन के लिए सिक्के स्वीकृत करने के लिए कहा है. गौरतलब है कि इंडियन कौइनेज ऐक्ट, 2011 की धारा 6 के तहत सिक्कों की वैधता परिभाषित की जाती है.

आरबीआई ने इससे पहले नवंबर महीने में भी सफाई दी थी कि सभी तरह के सिक्के ठीक हैं और लोग उन्हें लेने से मना न करें. 10 का सिक्का लेने से इनकार करने पर कानूनी कार्रवाई की भी बात कही गई थी, फिर भी लोगों में संदेह बरकरार है.

कोई व्यक्ति 10 रुपये का सिक्का न लें तो क्या करें?

अगर कोई व्यक्ति 10 रुपये का कोई भी सिक्का लेने से इनकार करता है तो उसे RBI के निर्देश की जानकारी दें. वह फिर भी न माने तो उसे सिक्के के साथ नजदीकी पुलिस थाना ले जाएं और पुलिस को उस व्यक्ति से हुई बातचीत के बारें में बताएं.

पुलिस को RBI के निर्देश के बारे में भी बताएं. आप चाहे तो उस व्यक्ति के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा भी दर्ज करा सकते हैं. आपके एफआईआर पर पुलिस मामले की जांच करेगी.

सितंबर 2016 में उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में इस तरह का मामला सामने आने के बाद कलेक्टर ने रिजर्व बैंक के नियमों का हवाला देते हुए कहा था कि भारतीय सिक्कों को लेने से इनकार करना आईपीसी की धारा 124A के तहत राजद्रोह है. इस सेक्शन के तहत तीन साल या आजीवन कारावास के साथ-साथ जुर्माने का भी पआवधान है.

अक्टूबर 2017 में मध्य प्रदेश के मुरेना जिले में पुलिस ने एक ऐसे ही मामले में एक दुकानदार के खिलाफ आईपीसी की धारा 188 (सरकारी सेवक के कानूनी आदेश की अवहेलना) के तहत मामला दर्ज किया था. इस धारा के तहत दोषी पाए गए व्यक्ति को छह महीने तक की जेल की सजा दिए जाने का प्रावधान है.

2 जनवरी 2018 को वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ल ने राज्यसभा को बताया था कि कुछ बैंक सिक्के स्वीकार नहीं कर रहे हैं. इस पर सरकार ने रिजर्व बैंक के सभी क्षेत्रीय दफ्तरों को आम लोगों से सिक्के लेने के लिए काउंटर खोलने का निर्देश दिया था.

इसलिए अगर आपसे भी कोई सिक्का लेने से इनकार कर दें तो आप उसे इस खबर के बारें में बताएं.

ऋतिक रोशन दोबारा बन सकते हैं दूल्हा, जानिए किससे होगी शादी

अभिनेता ऋतिक रोशन एक बार फिर से शादी करने की तैयारी में हैं. साल 2014 में सुजैन खान से तलाक के बाद ऋतिक का नाम अभिनेत्री कंगना रनौत के साथ चर्चा में रहा, लेकिन किसी विवाद के बाद दोनों का यह रिश्ता भी टूट चुका है. चर्चा है कि ऋतिक बच्चों की खातिर एक बार फिर से दूल्हा बनने वाले हैं.

शादी के लिए ऋतिक रोशन ने ऐसी लड़की का चुनाव किया है जो शायद उनके घर वालों को भी पसंद है. रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि घरवालों के सलाह के बाद लड़की का चुनाव किया गया है. ऋतिक की होने वाली दुल्हन का नाम शायद हम सभी जानते हैं. लेकिन जब आप इस लड़की का नाम जानेंगे तो चौंक जाएंगे. हम आपके सब्र का इम्तिहान नहीं लेंगे, आइए जानते हैं कि आखिर कौन वह खुशनसीब है जो ऋतिक रोशन की दुल्हनियां बनने को तैयार है.

एक खबर के मुताबिक ऋतिक रोशन के एक करीबी दोस्त के हवाले से यह पता चला है कि ऋतिक रोशन और उनकी एक्स वाइफ सुजैन खान के बीच की दूरियां खत्म हो चुकी है. दोनों परिवारों की कोशिश के बाद ऋतिक और सुजैन दोबारा शादी के बंधन में बंधने की तैयारी में हैं.

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रिपोर्ट के मुताबिक पिछले कुछ समय से ऋतिक और सुजैन साथ में काफी टाइम स्पेंड कर रहे हैं. दोनों ने गिले-शिकवे भुलाकर दोबारा शादी करने का फैसला लिया है. बताया जा रहा है कि बच्चों की वजह ऋतिक और सुजैन एक बार फिर से करीब आए हैं. तलाक के बाद से दोनों बच्चे कभी भी एक साथ मां-पिता के साथ नहीं रह पाते थे. वे अक्सर पिता ऋतिक और मां सुजैन के सामने ये बातें छेड़ते थे.

राकेश रोशन ने फिल्म ‘कहो ना प्यार है’ से बेटे ऋतिक रोशन को बौलीवुड में लांच किया था. साल 2000 में रिलीज हुई यह फिल्म सुपरहिट साबित हुई थी. इसके कुछ दिन बाद ही ऋतिक ने बचपन की दोस्त सुजैन के साथ शादी रचा ली थी.

कुछ वजहों से दोनों के रिश्तों में दूरियां पैदा होने लगी थी. इसके बाद करीब तीन साल पहले 2014 में दोनों ने स्वेच्छा से तलाक ले लिया था. अब एक बार फिर से दोनों शादी के बंधन में बंधने को तैयार हैं. हालांकि इस खबर पर दोनों के परिवार वालों ने कोई कमेंट नहीं किया है.

पत्नी से तलाक के बाद ऋतिक अपने बच्चों के साथ अक्सर क्वालिटी टाइम स्पेंड करते हुए नजर आते हैं और वह सोशल मीडिया पर अपने बच्चों के साथ तस्वीरें शेयर करते रहते हैं. इतना ही नहीं वह अक्सर अपनी एक्स पत्नी सुजैन और बच्चों के साथ फैमिली डिनर या लंच के लिए जाते हैं.

थप्पड़ से कतराता मीडिया

अखबारों की हालत घर के किसी कोने में पड़े उपेक्षित बुजुर्गों सरीखी हो चली है, जो होते हुये भी नहीं होते. आमतौर पर अब लोग अखबार पर यूं ही सरसरी नजर डाल मान लेते हैं कि आज के ढाई तीन रुपये वसूल हो गए, लेकिन मध्य प्रदेश के लोग बीते 2 दिन से पूरा अखबार खोल कर इस उम्मीद के साथ पढ़ रहे हैं कि शायद किसी कोने में यह खबर दिख जाये कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने धार के सरदारपुर कस्बे में एक सुरक्षाकर्मी कुलदीप सिंह गुर्जर को आपा खोते जोरदार थप्पड़ जड़ दिया.

खबर धांसू थी जो सोशल मीडिया के दायरे में सिमट कर रह गई. एकाध न्यूज़ चैनल ने एकाध  बार इसे दिखाया, फिर यह गधे के सर से सींग गायव होने वाली कहावत को चरितार्थ करने वाली हो गई. इधर लोगों ने अखबार टटोले पर किसी ने इसे नहीं छापा.

खुद शिवराज सिंह को हैरानी और खुशी हो रही होगी कि बात तो बात बेबात में भी तिल का ताड़ बना देने बाला मीडिया उनका कितना लिहाज और सम्मान करता है. इधर प्रदेश भर में गुर्जर समाज के लोगों ने आहत होते इस ऐतिहासिक हो चले थप्पड़ के विरोध में न केवल धरने प्रदर्शन किए, बल्कि शिवराज सिंह का पुतला भी फूंका, लेकिन मीडिया के मुंह में मानो गुड भरा है, जो इस खबर को खबर मानने ही तैयार नहीं हुआ.

अब कहने वाले कहते रहें कि मीडिया बिकाऊ है या मेनेज कर लिया गया है, पर इससे शिवराज सिंह के अदब और रसूख की टीआरपी नहीं गिर रही, उल्टे और बढ़ रही है. गोया कि एक अदने से मुलाजिम का कोई स्वाभिमान ही नहीं होता और सीएम से पिटना जिल्लत या जलालत की नहीं बल्कि फख्र की बात होती है. लोकतंत्र के इस अलिखित उसूल का ही प्रताप इसे कहा जाएगा कि सरकारी इश्तहारों के एहसान तले दबा मीडिया इस थप्पड़ पर इस तरह खामोश है जैसे अगर इस पर कुछ बोला, लिखा या दिखाया तो अगला थप्पड़ उस के ही नाजुक गाल पर पड़ना है.

अब भला कौन किस मुंह से कहने का हक रखता है कि देश में इमरजेंसी सरीखे हालात हैं और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का गला घोंटा जा रहा है. कल को हुक्मरान अगर खुलेआम भी गुंडागर्दी पर उतारू हो आयें, तो यकीन माने किसी के पेट में अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता जैसी मरोड़ नहीं उठेगी, अब डर तो इस बात का सताने लगा है कि कहीं इसे यानि मुलाजिमों की सरे आम पिटाई को सर्विस बुक में शामिल न कर लिया जाये.

वीडियो साभार : यूट्यूब

रखें इन बातों का ध्यान, नहीं होगा आपका फोन स्लो

जब स्मार्टफोन पुराना होता जाता है तो वह स्लो होता जाता है. आज हम आपको कुछ ऐसे ही टिप्स बताने जा रहे हैं जिससे कि आप अपने स्मार्टफोन को स्लो होने से बचा सकते हैं. आप सोचते होंगे की जब आपने अपना फोन खरीदा था तब तो उसकी स्पीड अच्छी थी लेकिन बाद में धीरे धीरे स्लो होने लगा है आखिर कैसे.

सौफ्टवेयर अपडेट

कई बार जब कंपनी औपरेटिंग सिस्टम के अपडेट्स जारी करती है तो हम अपना फोन अपडेट कर लेते हैं. जब भी हम फोन को लोअर वर्जन से हायर में अपडेट करते हैं तो देखा जाता है कि फोन की पर्फोरमेंस पर फर्क पड़ता है. इसलिए कंपनी द्वारा जारी किए गए अपडेट को तुरंत इंस्टौल न करें. साथ ही यह भी देख लें कि आपके फोन का हार्डवेयर उस अपडेट के लिए तैयार है या नहीं. अपडेट आने के बाद उसे इंस्टौल करने से पहले एक बार उसके बारे में रिव्यू जरूर पढ़ लें. अपडेट्स कंपनी द्वारा जारी करने के तुरंत बाद ही इंस्टौल न करें.

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ऐप अपडेट

जब आप फोन में प्ले स्टोर से कोई ऐप इंस्टौल करते हैं तो उसके भी अपडेट्स मिलते रहते हैं. ऐप के नए अपडेट को इंस्टौल करने से पहले यह देख लें कि उसमें क्या क्या नए फीचर्स ऐड हुए हैं. जरूरी नहीं है कि यह अपडेट्स आपके फोन के मुताबिक ही डिवेलपर ने किए हों. अपडेट अगर आपके काम के नहीं हैं तो अपडेट न करें. इससे फोन की मेमोरी भी बचेगी और फोन जैसा चल रहा है वैसा ही चलता रहेगा. अपडेट को औटोमेटिक इंस्टौल पर न रखें.

जंक फाइल

हम ट्राई करने के लिए अपने फोन में कई ऐप्स इंस्टौल कर लेते हैं और फिर अनइंस्टौल भी कर देते हैं. अनइंस्टौल करने के बाद ऐप पूरे तरीके से आपके फोन से नहीं जाती है. उसके कुछ फोल्डर्स या फाइल्स फोन में रह जाती हैं. धीरे धीरे यह फोन में इकट्ठी हो जाती है और काफी स्पेस घेर लेती है. इससे फोन की स्पीड स्लो हो जाती है.

फाइल सिस्टम

जब आप अपने फोन को यूज करते हैं तो उसमें डेटा सेव करते रहते हैं. फोटोज, वीडियोज और दूसरा डेटा सेव करते हैं. इससे फोन की स्पीड स्लो होने लगती है. जब मेमोरी धीरे धीरे भरने लगती है तो फोन की स्पीड स्लो होने लगती है. इसलिए फोन का महीने में एक बार बैकअप लेकर उसे खाली करते रहें. अगर मुमकिन हो सके तो 2-3 महीने में एक बार फेक्ट्री रीसेट कर लें. फेक्ट्री रीसेट करने के बाद सिर्फ वही ऐप्स फोन में रखे जिनका आपको यूज करना है.

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