बौलीवुड अभिनेता अर्जुन कपूर अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा ‘नमस्ते इंग्लैंड’ में एक बार फिर साथ दिखाई देने वाले हैं. इस फिल्म में अर्जुन और परिणीति तीसरी बार एक साथ काम करने जा रहे हैं. इससे पहले यह जोड़ी फिल्म ‘इश्कजादे’ में नजर आ चुकी है और दोनों ने हाल ही में दिबाकर बनर्जी की फिल्म ‘संदीप और पिंकी फरार’ की शूटिंग भी पूरी कर ली है.
फिल्म ‘नमस्ते इंग्लैंड’ की रिलीज डेट की घोषणा तो काफी पहले ही हो गई थी और अब उसका पहला पोस्टर भी रिलीज कर दिया गया है. अर्जुन कपूर ने फिल्म का पहला पोस्टर रिलीज करते हुए ट्वीट किया- ‘नमस्ते इंग्लैंड! मैं और परिणीति एक बार फिर एकसाथ. समय आ गया है हमारे साथ पंजाब से इंग्लैंड तक उड़ने का.
पोस्टर में लिखा है- लंदन जाना है लीगल इल्लीगल सब चलता है. पोस्टर में परिणीति हरे रंग के सलवार कमीज में दिख रही हैं.
इससे पहले परिणीति ने फिल्म के क्लैपबोर्ड की तस्वीर ट्वीट करते हुए लिखा था- ‘नमस्ते इंग्लैंड. अपनी उत्सुकता पर काबू नहीं रख सकती. अर्जुन कपूर, संजना बत्रा, आरती नायर.’
आपको बता दें कि ‘नमस्ते इंग्लैंड’ पंजाब और कनाडा में फिल्माई जाएगी. फिल्म को विपुल अमृतलाल शाह ने डायरेक्ट किया है. फिल्म इस साल 7 दिसबंर को रिलीज होगी. फिल्म की शूटिंग आज से अमृतसर में शुरू हो गई. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अमृतसर के बाद टीम लुधियाना और पटियाला भी शूटिंग के लिए जाएंगी. इसके बाद ढाका, बांग्लादेश का रुख किया जाएगा, उसके बाद एक हिस्से की शूटिंग बेल्जियम के ब्रसेल्स में भी की जाएगी. इसके अलावा फिल्म के कुछ सीन को लंदन और मुंबई के कुछ हिस्सों में शूट किया जाएगा.
सिम कार्ड मुहैया कराने वाली कंपनी चैट सिम ने गुरुवार को इटली के मिलान में अपने सबसे नए चैट सिम 2 सिम कार्ड को लौन्च कर दिया. कंपनी के इस सिम कार्ड को लेकर कहा जा रहा है कि इसमें यूजर्स अनलिमिटेड इंटरनेट सर्फिंग और मैसेजिंग कर सकेंगे. खास बात है कि इसके लिए उन्हें किसी प्रकार का शुल्क नहीं देना पड़ेगा और न ही इसके लिए किसी प्रकार की सीमा होगी.
चैट सिम के वार्षिक प्लान के तहत यूजर्स के पास तकरीबन 165 देशों तक में मैसेज भेजने की सुविधा होगी. चैट सिम 2 बार्सिलोना में 26 फरवरी से एक मार्च तक चलने वाले ‘मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस 2018’ में पेश किया जाएगा. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि इसी कार्यक्रम में चैट सिम के बाकी फीचर्स से पर्दा उठेगा. चैट सिम 2 में अनलिमिटेड पैक्स जीरो रेटिंग कौन्सेप्ट पर चलते हैं. बता दें कि इससे पहले कंपनी ने चैट सिम लौन्च किया था, जिसमें कुछ बंदिशें थीं.
यूजर्स को इसमें फोटो, वीडियो भेजने और वौइस कौलिंग करने के लिए कुछ मल्टीमीडिया क्रेडिट्स खरीदने पड़ते थे. हालांकि, चैट सिम 2 को लेकर कंपनी का दावा है कि यूजर मूल प्लान के अंतर्गत ही इंटरनेट सर्फिंग और बाकी मोबाइल ऐप्लीकेशंस का इस्तेमाल कर सकेंगे.
कंपनी के अनुसार, चैट सिम 2 दुनिया भर के तकरीबन 250 टेलीकौम औपरेटर्स के साथ काम करेगा, जिसकी पहुंच 165 से अधिक देशों तक है. सिम कार्ड के साथ आने वाले प्लान में लोग कुछ चुनिंद ऐप्लीकेंशस के जरिए अनलिमिटेड चैट कर सकेंगे, जिनमें व्हाट्सऐप, फेसबुक मैसेंजर, वी चैट, टेलीग्राम, लाइन और हाइक जैसे ऐप्स शामिल हैं. यह सिम आईफोन औपरेटिंग सिस्टम, एंड्रायड और विंडो फोन व टैबलेट्स पर काम करेगा. फिलहाल भारत में इसकी कीमत क्या होगी, इसके बारे में अभी तक किसी प्रकार की जानकारी नहीं सामने आई है.
देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने अपनी कारों पर बंपर डिस्काउंट का ऐलान किया गया है. यदि आप ईयर एंडिंग डिस्काउंट में कार नहीं ले पाए तो आप भी इस मौके का फायदा उठा सकते हैं और सस्ते में कार को अपने घर लाकर होली की खुशियों को दोगुना कर सकते हैं.
ये औफर कंपनी की तरफ से फेबुलस फरवरी औफर्स (FABULOUS FEBRUARY OFFERS) के तहत दिया जा रहा है. ये डिस्काउंट चार कारों पर 45 हजार से लेकर 59 हजार रुपये तक का है. आपको बता दें कि ये औफर चालू वित्त वर्ष में अपनी इन्वेंट्री खाली करने के लिए कंपनी की तरफ से दिए जाते हैं. आगे पढ़िए किस कार पर कितना डिस्काउंट मिल रहा है.
मारुति आल्टो 800
मारुति की सबसे ज्यादा बिकने वाली मारुति औटो 800 कंपनी की तरफ से पूरे 45 हजार रुपये का डिस्काउंट दिया जा रहा है. इसके अलावा यदि आप सरकारी कर्मचारी (रिटायर्ड या मौजूदा) हैं तो कंपनी की तरफ से आपको 5100 रुपये की अतिरिक्त छूट मिलेगी. कार की राजधानी दिल्ली में एक्स शोरुम कीमत 2.51 लाख रुपये से शुरू होती है. आल्टो 800 पेट्रोल और CNG दोनों वर्जन में उपलब्ध है. कंपनी का दावा है कि 800 सीसी इंजन वाली इस कार का पेट्रोल मौडल 24.70 किमी प्रति लीटर का माइलेज देता है. वहीं इसका CNG मौडल 33.44 किमी प्रति किग्रा का माइलेज देता है.
सेलेरियो
मारुति की सेलेरियो की बाजार में काफी पसंद की जाने वाली कार है. दमदार लुक के कारण इस कार ने बाजार में तेजी से अपनी पकड़ बनाई है. इस कार पर कंपनी की तरफ से 50 हजार रुपये तक का डिस्काउंट दिया जा रहा है. आल्टो 800 और मारुति के10 की ही तरह इस पर भी सरकारी कर्मचारियों को 5100 रुपये का एक्सट्रा डिस्काउंट मिलेगा. दिल्ली में 4.2 लाख रुपये के बेसिक प्राइज पर मिलने वाली इस कार में 998 सीसी का इंजन है. कंपनी का दावा है कि कार का पेट्रोल इंजन 23.10 किमी प्रति लीटर का माइलेज देता है.
आल्टो के10
मारुति आल्टो के10 (Alto K10) पर कंपनी की तरफ से 52 हजार रुपये का डिस्काउंट औफर किया जा रहा है. इस पर सरकारी कर्मचारियों (रिटायर्ड या मौजूदा) को 5100 रुपये की अतिरिक्त छूट मिलेगी. कार की दिल्ली में एक्स शोरुम कीमत 3.30 लाख रुपये से शुरू होती है. 998cc के इंजन वाली इस कार का पेट्रोल वर्जन 24. 07 किमी प्रति लीटर का माइलेज देता है जबकि सीएनजी इंजन 32.26 किमी प्रति किग्रा का माइलेज देता है. CNG मोड पर यह कार 31.76 किमी प्रति किलोग्राम का माइलेज देती है.
मारुति वैगन-आर
अच्छे स्पेस वाली मारुति वैगन-आर खरीदने पर आप 59 हजार रुपये का डिस्काउंट पा सकते हैं. इसके आलावा सभी कारों की तरह 5100 रुपये तक का स्पेशल डिस्काउंट सरकारी कर्मचारियों (रिटायर्ड व कार्यरत) को दिया जा रहा है. 998 सीसी के इंजन से लैस यह कार पेट्रोल और सीएनजी वेरिएंट दोनों में उपलब्ध है. दिल्ली में 4.15 लाख रुपये एक्स शोरुम प्राइज वाली इस कार का पेट्रोल मौडल 20.51 किमी प्रति लीटर का माइलेज देता है. वहीं सीएनजी मौडल 26.6 किमी प्रति किलोग्राम का माइलेज देता है.
महिंद्रा और टाटा पर भी डिस्काउंट
महिंद्रा भी थार को छोड़कर अन्य गाड़ियों पर छूट औफर कर रही है. महिंद्रा ने KUV100 पर 10,000 रुपये का एक्सचेंज बोनस और इसी कार के K8 वेरिएंट पर 28,000 रुपये तक के डिस्काउंट की घोषणा की है. इसके अलावा कुछ मौडल पर वेरिएंट के हिसाब से 12 हजार से 28 हजार रुपये तक की एक्सेसरीज दी जा रही है. टाटा मोटर्स हैचबैक कार बोल्ट पर 30,000 रुपये तक का कैश डिस्काउंट और 15,000 रुपये का एक्सचेंज बोनस दे रही है.
सवाल मेरी उम्र 28 वर्ष है, मैं पिछले 4 वर्षों से पेरैंट्स से दूर रह रही हूं क्योंकि मेरी उन से हमेशा लड़ाई होती रहती थी. मुझे रोकटोक बिलकुल भी पसंद नहीं है. पिछले दिनों मुझे खबर मिली कि मां की तबीयत काफी खराब है, जिस से पिता काफी परेशान हैं. ऐसे में घर के हालात को देखते हुए मेरा उन से मिलने का बहुत मन करता है. लेकिन बस यही सोच कर पीछे हट रही हूं कि मै किस मुंह से उन से मिलने जाऊंगी. कहीं उन्होंने मुझे घर में घुसने से ही मना कर दिया तो? आप ही बताएं, मैं क्या करूं?
जवाब
भले ही आप उन से हमेशा लड़ती रहती हों जिस के कारण आप ने घर से दूर जाने तक का फैसला कर लिया हो, लेकिन आप की बातों से लग रहा है कि आप आज भी उन से बहुत प्यार करती हैं. तभी, आप से उन का दर्द नहीं देखा जा रहा. ऐसे में आप बिना सोचेसमझे उन से मिलने पहुंच जाएं और अपनी गलती के लिए उन से माफी मांगें. यकीन मानिए आप को देखने मात्र से ही वे आप को माफ करने के लिए तैयार हो जाएंगे. वहां रह कर आप काम में हाथ बंटाएं और फिर कभी भूल कर भी घर से दूर जाने की बात मन में मत लाइए.
अकसर इस उम्र में हम सपनों की दुनिया में ज्यादा जीने लगते हैं. हमें लगने लगता है कि हम अकेले ही सबकुछ संभाल लेंगे लेकिन जब हकीकत से वास्ता पड़ता है तब समझ आता है कि भले ही हम कितनी भी ऊंचाइयों को छू लें लेकिन अपनों का साथ हमेशा जरूरी होता है. इसलिए कभी भी अपनों से दूर जाने की बात मत सोचिए.
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किशोर माता पिता का दूसरों से झगड़ा अपने पर न लें
पौराणिक उपन्यास महाभारत जिस में भाईभाई जमीनजायदाद के लिए युद्ध के मैदान में आ कर एकदूसरे के खून के प्यासे हो जाते हैं, में एक किशोर पात्र है अभिमन्यु, जो कौरवों के बनाए चक्रव्यूह में घिर जाता है और अपनी नासमझी के चलते मारा जाता है. जाहिर है वह वीर नहीं बल्कि बेवकूफ था, जिस ने अपने पिता अर्जुन और उस के भाइयों की लड़ाई लड़ी. कम उम्र के चलते अभिमन्यु में जोश तो था पर उसे यह मालूम नहीं था कि अपने से बड़ों से लड़ा कैसे जाना है. कथानक को दिलचस्प बनाने के लिए लेखक ने इस उपन्यास में एक ऐसे चक्रव्यूह की कल्पना की है, जिस में से निकलना असंभव था पर अभिमन्यु इस में गया और इस चक्रव्यूह भेदन में मारा गया.
आज का हर किशोर खुद को इसी तरह के किसी चक्रव्यूह में घिरा पाता है. जब उस के मम्मीपापा की लड़ाई किसी और से हो जाती है और अधिकांश किशोर स्वाभाविक बात है मांबाप का झगड़ा लड़ना अपनी जिम्मेदारी समझने लगते हैं.
भोपाल के 14 वर्षीय उत्कर्ष का किस्सा एक उदाहरण है कि बच्चों को मांबाप के बाहरी झगड़ों में क्यों नहीं पड़ना चाहिए. अब से एक साल पहले उत्कर्ष अपने मम्मीपापा के साथ पुरी घूमने जा रहा था. पुरी पहुंचने के लिए उन्हें बीना जंक्शन से ट्रेन बदलनी थी. बीना स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार करतेकरते उत्कर्ष मन ही मन पुलकित हो रहा था कि पुरी और चिलका झील जो डौलफिन मछलियों के लिए जानी जाती है, घूमने में कितना मजा आएगा. वह भी तब जब पापा ने सारा टूर प्लान कर रखा है और भुवनेश्वर सहित ओडिसा के दूसरे पर्यटन स्थलों पर भी ठहरने के लिए होटल बुक करा रखे हैं.
अभी उत्कर्ष खयालों की दुनिया में खोया अपने टूर के रोमांच के बारे में सोच ही रहा था कि प्लेटफौर्म पर बेखयाली में चलते उस के पापा एक अन्य मुसाफिर से टकरा गए. उस मुसाफिर ने सख्त लहजे में कहा, ‘‘अंधे हो गए हो क्या?’’
उत्कर्ष के पापा भी ताव में आ गए और बोले, ‘‘अंधा मैं हूं या आप, देख कहीं रहे हैं और चल कहीं रहे हैं. आप को भी देख कर चलना चाहिए.’’
बस, देखते ही देखते खासा तमाशा खड़ा हो गया और उस मुसाफिर ने उत्कर्ष के पापा का गरीबान पकड़ लिया. इस पर उत्कर्ष को भी गुस्सा आ गया और उस ने जोरदार घूंसा पापा का गरीबान पकड़े मुसाफिर के पेट पर दे मारा, जिस से वह गिर गया. इस झगड़े के कारण वहां काफी भीड़ जमा हो गई और उन्हें हल्ला मचाने का खासा मौका और बहाना मिल गया. कोई चिल्लाया, ‘अरे देखो, कहीं मर तो नहीं गया.’ एक ने कहा कि आजकल के लड़कों की हिम्मत तो देखो सरेआम गुंडागर्दी करने लगे हैं.
भीड़ बढ़ी और नीचे पड़ा मुसाफिर उठा नहीं तो उस के पापा भी घबरा गए. उन्होंने मारे गुस्से के एक जोरदार थप्पड़ उत्कर्ष के गाल पर दे मारा कि तुझे क्या जरूरत थी बीच में पड़ने की. तभी हल्ला सुन कर पुलिस के 2 सिपाही भी लठ बजाते वहां आ गए. जैसेतैसे वह मुसाफिर होश में आया तो पुलिस वाले ने सभी को थाने चलने का हुक्म सुना दिया. पुलिस को देख भीड़ काई की तरह छंट गई, लेकिन थोड़ी देर बाद उत्कर्ष मम्मीपापा सहित रेलवे पुलिस के थाने में बैठा हुआ था. वह मुसाफिर माहौल अपने पक्ष में देख पहले से ही आक्रामक हो गया था और बारबार कह रहा था कि इन दोनों ने मुझे मारा जबकि गलती मेरी नहीं थी. आप मेरी रिपोर्ट लिखिए. वहां मौजूद इंस्पैक्टर ने दोनों पक्षों की बातें सुनीं और फिर फटकार लगाई कि आप लोग खुद देखसमझ लीजिए. देखने में तो आप पढ़ेलिखे और शरीफ नजर आते हैं, पर स्टेशन पर गुंडेमवालियों की तरह झगड़ते हैं और शांति भंग करते हैं. मामला दर्ज हुआ तो दिक्कत आप लोगों को ही होगी, हमें नहीं.
फिर वह पुलिसकर्मी उत्कर्ष से मुखातिब हो कर बोला, ‘‘और… साहबजादे, इस उम्र में आप के ये तेवर हैं तो बड़े हो कर डौन बनेंगे क्या, अपने पंख ज्यादा मत फड़फड़ाओ नहीं तो किसी दिन बुरे फंसोगे.’’
उत्कर्ष ने पहली बार थाना देखा था, जिस से वह सहम उठा था. उधर पापा परेशान थे कि इस बिन बुलाई मुसीबत से छुटकारा कैसे पाया जाए. उन से भी बुरी हालत मम्मी की थी जो पहले भीड़ और अब थाने का माहौल देख कर कांपने लगी थीं.
इस तरह की बातों में घंटा भर गुजर गया और आखिरकार कुछ लेदे कर और उत्कर्ष के पापा द्वारा उस मुसाफिर से माफी मांगने पर बगैर रिपोर्ट लिखे मामला सुलट गया, लेकिन इस बीच उन की पुरी जाने वाली उत्कल ऐक्सप्रैस भी निकल चुकी थी.
उत्कर्ष का सारा मजा किरकिरा हो गया. मम्मीपापा का भी मूड खराब हो गया था इसलिए वे यात्रा रद्द कर वापस भोपाल आ गए. एक संभावित मजा तो किरकिरा हुआ ही साथ ही पैसों की भी बरबादी हुई सो अलग और मानसिक यंत्रणा भी भुगतनी पड़ी.
इस घटना से कई बातें और वजहें समझ आती हैं, जिन के चलते यह कहा जा सकता है कि मांबाप के बाहरी झगड़ों में बच्चों को क्यों नहीं पड़ना चाहिए, फिर वे झगड़े चाहे कैसे भी हों यह बात खास माने नहीं रखती.
मांबाप कमजोर पड़ते हैं
मांबाप बच्चे की सुरक्षा के प्रति कितने गंभीर होते हैं, यह बात काफी बड़े हो जाने और कभीकभी तो खुद पिता बनने के बाद समझ आती है. कोई मांबाप नहीं चाहता कि उन के बच्चे को जरा सी भी चोट लगे, फिर हाथापाई में तो बड़ी चोट की आशंका रहती है.
जब मांबाप ऐसे किसी हादसे से जूझ रहे हों और बच्चा बीच में कूद पड़े तो उन की हालत पतली हो जाती है और वे लड़ाई में कमजोर पड़ने लगते हैं. उन का सारा ध्यान बच्चे की हिफाजत में लग जाता है या फिर उसे रोकने में, ऐसे में फायदा सामने वाले को ही मिलता है.
नासमझी भारी पड़ती है
गुस्से में किसी पर हमला करना नादानी वाली बात है, अगर वाकई चोट ज्यादा लग जाए तो कोई ऐसा हादसा भी हो सकता है, जिस की उम्मीद बच्चे नहीं कर पाते. ऐसा इसलिए कि वे बचाव कम हमला ज्यादा करते हैं, जो इस उम्र का तकाजा भी है, लेकिन बात आखिरकार है तो बेवकूफी वाली.
बढ़ता है झगड़ा
बच्चे सोचते हैं कि वे मांबाप की तरफदारी कर उन की हिफाजत कर रहे हैं, जबकि झगड़े के दौरान उन के बीच में कूदने से झगड़ा और बढ़ जाता है. झगड़ रहे लोग अपनी भड़ास निकल जाने के बाद समझौते के मूड में आ जाते हैं, पर यदि बच्चा बीच में कूद पड़े तो झगड़ा बजाय कम होने के और बढ़ता है.
किसी का फायदा नहीं
लड़ाईझगड़े तात्कालिक हों या दीर्घकालिक इन से किसी का फायदा या भला नहीं होता. यह एक अप्रिय स्थिति भर है जिसे समझबूझ से टाला जा सकता है, लेकिन बच्चों के बीच में पड़ने से मांबाप को ज्यादा मुश्किलें उठानी पड़ती हैं.
7वीं के छात्र शाश्वत के मांबाप का झगड़ा आएदिन पड़ोसियों से कचरा फेंकने को ले कर होता रहता था. एक दिन विवाद बढ़ा तो शाश्वत ने भी पड़ोसी अंकल को खरीखोटी सुना दी जो उन से बरदाश्त नहीं हुई तो उन्होंने एक तमाचा उस के गाल पर लगा दिया, जिस से शाश्वत के कान का परदा फट गया. बाद में क्या हुआ यह ज्यादा अहम बात नहीं पर शाश्वत को लंबे इलाज से हो कर गुजरना पड़ा और आज भी वह थप्पड़ याद कर सहम उठता है यानी झगड़े सभी के लिए खासतौर से बच्चों के लिए तो नुकसानदेह साबित होते हैं.
शर्मिंदगी बहादुरी की
कई बार बच्चे उग्र हो कर मांबाप का पक्ष लेते हैं, लेकिन इस से मांबाप को कोई खुशी नहीं मिलती उलटे शर्मिंदगी ही उठानी पड़ती है. जब विवाद या झगड़ा मामूली हो और उन्हें यह सुनना पडे़ कि आप ने तो बच्चे को संस्कार ही नहीं दिए अभी से गुंडा बनाने की ट्रेनिंग दे रहे हैं, क्या? और दम है तो खुद सामने आओ, बच्चों को क्यों आगे करते हो. ऐसी बातें किसी भी मांबाप को शर्मिंदा करने वाली होती हैं.
बात गलत कहीं से नहीं है, हर बच्चा मांबाप को बहुत चाहता है और उन के झगड़ों को अपना समझता है, लेकिन इन्हें वह अपने ऊपर ले कर गलती करता है. वह यह नहीं सोच पाता कि उस के झगड़े में पड़ने से झगड़ा सुलझने के बजाय और बढ़ना तय है. सभी मांबाप बच्चों से शिष्ट और शालीन होने की उम्मीद रखते हैं पर हालात के चलते वे अशिष्ट हो जाएं यह पसंद नहीं करते.
बच्चों का यह सोचना भी गलत है कि उन के झगड़े में पड़ने से मांबाप खुश होंगे या फिर उन्हें शाबाशी देंगे, और न ही उन के ऐसा करने से उन्हें किसी तरह का सहारा मिलेगा, उलटे वे बच्चे के भविष्य को ले कर दुखी और आशंकित हो उठते हैं.
ऐसे में बच्चों को चाहिए कि वे मांबाप के बाहरी मामलों में दखल न दें, उन की लड़ाई चाहे वह कैसी भी हो उन्हें लड़ने दें, अपनी तरफ से कोई सिरदर्दी उन के लिए खड़ी न करें, जिस के चलते उन्हें हार कबूल करनी पड़े, नीचा देखना पड़े या फिर अस्पतालों, थानों और अदालतों के चक्कर काटने पड़े.
सवाल मेरी उम्र 32 साल है और मैं आईटी कंपनी में सीनियर पद पर हूं. मेरे घर वाले मुझ पर शादी के लिए दबाव बना रहे हैं जिस कारण मेरा उन से झगड़ा रहता है क्योंकि मैं जिंदगीभर अकेले रहना चाहती हूं न कि बंदिशों में. अगर मेरे मम्मीपापा ने मेरी बात नहीं मानी तो मैं घर से दूर चली जाऊंगी. क्या मेरा ऐसा सोचना सही है?
जवाब
भले ही आप कितनी अच्छी जौब करती हों लेकिन हमसफर की जरूरत तो लाइफ में एक न एक दिन हर किसी को होती है. और आप के पेरैंट्स आप के शुभचिंतक हैं तभी वे आप के लिए अपने जीतेजी अच्छा लड़का देख कर उस से आप की शादी करना चाहते हैं. जबकि, आप हैं कि उन से लड़ाई करती हैं और यहां तक कि पेरैंट्स से दूर जाने तक के बारे में भी सोच रही हैं, जो सही नहीं है. इसलिए आप कैसा लड़का पसंदकरती हैं, इस बारे में अपने पेरैंट्स को बता कर जल्द से जल्द किसी की जिंदगी को अपने प्यार से रोशन करिए. और यह बात मन से निकाल दें कि शादी मतलब बंदिश बल्कि यह तो आप की जिं?दगी को खुशियों से भरने वाला रिश्ता है.
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नवविवाहिता और नौकरी
‘‘लड़कियों की शादी देर से होने का एक कारण यह भी है कि आज लड़कियां अपना कैरियर बना कर आत्मनिर्भर बन कर ही शादी करना चाहती हैं. लेकिन जब नौकरी के दौरान किसी लड़की की शादी होती है तो बढ़ती हुई जिम्मेदारियों के साथ उस का कैरियर भी प्रभावित होने लगता है. इसलिए अगर आप की शादी हाल ही में हुई है या होने वाली है तो शादी और आफिस के बीच सामंजस्य बैठा कर चलें ताकि आप की शादीशुदा जिंदगी और आफिस दोनों ही प्रभावित न हों,’’ यह कहना है कैरियर काउंसलर प्रांजलि मल्होत्रा का.
रचना का कहना है, ‘‘जब मेरी नईनई शादी हुई तो आफिस और घर में सामंजस्य बैठाना मुश्किल हो गया. अपने मायके में मैं ने वे सब काम जो कभी नहीं किए थे वे मुझे ससुराल में करने पड़े. यहां तक कि मेरा लंच भी मेरी मम्मी बाहर तक पकड़ाने आती थीं और अब ससुराल में अपने पूरे परिवार का लंच बनाना पड़ता है. इसी के चलते देर हो जाती थी. इस वजह से मेरे बौस मुझ से नाराज रहने लगे और एक दिन मेरी जौब पर बन आई तो मुझे होश आया और मैं ने उस दिन से अपने आफिस पर पूरा ध्यान देना शुरू कर दिया.’’
प्राथमिकता को समझें
शादी से पहले की और बाद की स्थितियों में बहुत बड़ा फर्क है. शादी के बाद आप को दोहरी जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं. इसलिए अपने बढ़े हुए कार्यभार को देख कर घबरा न जाएं बल्कि उसे इस तरह मैनेज करें कि सब कुछ व्यवस्थित रहे. शादी होने से पहले ही अपने भावी पति से अपने आफिस के बारे में बीचबीच में बात करती रहें. उन्हें बताएं कि आप किस तरह का कार्य करती हैं और आप का कितना जिम्मेदारी वाला काम है ताकि वे आप के काम की प्रकृति के बारे में सब जान जाएं और भविष्य में जरूरत पड़ने पर आप का साथ दे सकें.
काम को मैनेज करें
आप की अनुपस्थिति में आप के जिस सहयोगी को आप का कार्यभार सौंपा जा रहा हो उस से मीटिंग करें और अपने कामकाज से संबंधित सभी जरूरी बातें उसे बता दें ताकि उसे आसानी हो और कोई काम समझ न आ रहा हो तो उसे समझा दें.
शादी के लिए ली गई छुट्टियों से लौटने पर एक दिन पहले फोन कर के अपने सहयोगी से अपने कामकाज के बारे में पूरी जानकारी ले लें ताकि आफिस आने पर आप किसी काम से अनभिज्ञ न रहें और आप को काम में कोई परेशानी न हो.
कई लड़कियों की आदत होती है कि शादी की छुट्टियों से आने के बाद भी वे काम के मूड में कम और मस्ती के मूड में ज्यादा रहती हैं. खुद तो काम करती नहीं, अपनी सहेलियों को भी शादी से जुड़ी बातें बताने के लिए घेरे बैठी रहती हैं. ऐसी बातें या हरकतें बौस से छिपी नहीं रहतीं इसलिए बेकार की बातों में समय व्यर्थ कर अपनी बनीबनाई इमेज को खराब न करें.
पहनावे पर ध्यान दें
नईनई शादी के बाद आफिस जाते समय अपने पहनावे व मेकअप पर भी ध्यान दें कि वह बहुत ज्यादा भड़कीला न हो.
शादी के बाद अचानक ही किसी भी लड़की के जीवन में जिम्मेदारियां आना स्वाभाविक है और अगर वह संयुक्त परिवार में है तो जिम्मेदारियां कुछ ज्यादा ही आ जाती हैं. फिर भी इन सब बातों के चलते आफिस को नजरअंदाज न करें.
कई लड़कियां परिवार की जिम्मेदारी बढ़ने के कारण बारबार छुट्टियां लेती हैं. आफिस से घर जाने की जल्दी मचाती हैं और देर से आफिस पहुंचती हैं, जिस से उन के काम पर तो असर पड़ता ही है, साथ ही बौस कोई जिम्मेदारी वाला काम भी उन्हें देने से पहले कई बार सोचते हैं. अपना सुबह का काम इस तरह से विभाजित करें कि आप घर का कामकाज भी निबटा लें और आफिस पहुंचने में देर भी न हो.
मेहमानों को छुट्टी के दिन ही घर बुलाएं. वर्किंग डे में बुलाने पर आप को दिक्कत हो सकती है.
अगर आप की कोई घरेलू परेशानी है तो उस का रोना आफिस में न रोएं. घर की परेशानियां घर ही छोड़ आएं, उन्हें अपने आफिस के काम पर हावी न होने दें.
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होली का त्योहार नजदीक है. ऐसे में यदि आप कही घूमने का प्लान बना रहे हैं तो कई एयरलाइंस कंपनियां सस्ते एयर टिकट का बंपर औफर दे रही हैं. जी हां, इस बार आपके पास ट्रेन नहीं बल्कि प्लेन में सफर करने का मौका है, वो भी सस्ते किराये पर. हवाई यात्रा का सस्ता औफर देने वाली तमाम एयरलाइंस कंपनियों में गो एयर, एयर एशिया और जेट एयरवेज शामिल हैं. इनमें से गोएयर तो 991 रुपये की शुरुआती कीमत में हवाई सफर के टिकट की पेशकश कर रही है. वहीं एयर एशिया की तरफ से प्रमोशनल स्कीम के तहत 20 फीसद तक की छूट दी जा रही है. इसी तरह जेट एयरवेज भी चुनिंदा रूट्स की टिकट पर 20 फीसदी का डिस्काउंट दे रहा है. इन फ्लाइट टिकटों को एयरलाइन की वेबसाइट से बुक किया जा सकता है.
क्या है गोएयर का औफर
गोएयर घरेलू फ्लाइट टिकट 991 रुपये (सभी कर शामिल) की शुरुआती कीमत पर दे रही है. एयरलाइन के अनुसार यह डिस्काउंट औफर होली लौन्ग वीकेंड स्कीम का हिस्सा है. गोएयर का यह औफर कुछ चुनिंदा रूट्स के लिए ही वैध है. यदि आप भी गोएयर के औफर का फायदा उठाना चाहते हैं तो आपको कुछ नियम व शर्तों को पूरा करना जरूरी है. इसके लिए आप www.goair.in पर जाकर जानकारी ले सकते हैं. इसके अलावा यदि ग्राहक एचडीएफसी बैंक के डेबिट या क्रेडिट कार्ड के जरिए भुगतान करते हैं तो वह 10 फीसद का अतिरिक्त छूट लाभ उठा सकते हैं.
किस रूट पर कितना है किराया
बागडोगरा से गुवाहाटी तक के लिए टिकट 991 रुपये
चेन्नई से कोच्चि तक के लिए 1120 रुपये
गुवाहाटी से बागडोगरा तक के लिए 1291 रुपये
बेंगलुरू से कोच्चि तक के लिए 1390 रुपये
पटना से रांची तक के लिए 1560 रुपये रखी गई है
इसमें इनके अलावा अन्य रूट्स भी शामिल है. सभी रूट्स के बारे में एयरलाइन की वेबसाइट पर देखा जा सकता है.
एयर एशिया का औफर
आमतौर पर हर फेस्टिवल पर डिस्काउंट देने वाली एयरलाइन एयर एशिया ने होली पर यात्रियों को 20 प्रतिशत तक की छूट देने की घोषणा की है. इसी तरह इंटरनेशनल फ्लाइट पर भी एयर एशिया की पैरेंट कंपनी की तरफ से 20 प्रतिशत की छूट दी जा रही है. कंपनी का यह औफर 25 फरवरी तक ही है. यदि आप भी एयर एशिया के औफर का फायदा उठाना चाहते हैं तो इस औफर के तहत शामिल किए गए रूट को आपको चुनना होगा. एयर एशिया बेंगलुरू, नई दिल्ली, चेन्नई, विशाखापटनम आदि के रूट्स पर छूट दे रहा है. इसके तहत 26 फरवरी, 2018 से 31 जुलाई 2018 तक के बीच यात्रा की जा सकती है.
क्या है जेट एयरवेज का डिस्काउंट
जेट एयरवेज होली औफर के तहत चुनिंदा रूट्स पर फ्लाइट टिकटों पर 20 फीसद तक का डिस्काउंट दे रहा है. इस औफर का लाभ प्रीमियम और इकोनौमी क्लास पर उठाया जा सकता है. यह जानकारी कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर दी है. इसके लिए आखिरी बुकिंग 23 फरवरी, 2018 तक की जा सकती है. वहीं, यात्रा 24 फरवरी, 2018 से लेकर 24 मार्च, 2018 के बीच की जा सकती है. 20 फीसद डिस्काउंट प्रीमियर के बेस फेयर पर और 10 फीसद इकोनौमी के बेस फेयर पर लागू है. अधिक जानकारी आप जेट एयरवेज की वेबसाइट (www.jetairways.com) से प्राप्त कर सकते हैं.
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हार्वर्ड शोधकर्ताओं का अनुमान है कि भारत आने वाले दशक के लिए सब से तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था होगी. विश्व बैंक और आईएमएफ द्वारा एकत्र आंकड़ों के आधार पर अमेरिका के कृषि आर्थिक अनुसंधान सेवा विभाग ने अनुमान लगाया है कि भारत 2030 तक तीसरी सब से बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लिए तैयार है, जो 4 विकसित देशों, जापान, ब्रिटेन और फ्रांस को पार कर जाएगी.
32 देशों के लिए प्राइस वाटरहाउस कूपर ने दीर्घकालिक वृद्धि की भविष्यवाणी की है कि 2050 तक भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की सब से मजबूत अर्थव्यवस्था होगी.
सरकारें अर्थव्यवस्था के भ्रमित करते आंकड़ों से अपनी पीठ थपथपाने के बजाय देश की बड़ी आबादी की तंगहाल जीवनदशा को सुधारने के क्रम में कुछ कदम उठाए तो ही देश में गरीबी दूर हो सकती है. कृषि क्षेत्र की दयनीय स्थिति भी भारत में गरीबी का अहम कारण है.
उपरोक्त सुर्खियां भारत की अर्थव्यवस्था के बहुत अधिक सुदृढ़ होने व तेजी से आगे बढ़ने का भ्रम पैदा करती हैं, जबकि अनेक अर्थशास्त्री भारतीय अर्थव्यवस्था के तेजी से नीचे जाने व विकास की गति मंद होने की आलोचना कर रहे हैं. नोटबंदी व जीएसटी उस की बड़ी वजह मानी जा रही हैं.
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था अपने सकल घरेलू उत्पाद 2.44 ट्रिलियन डौलर के साथ विश्व में 7वें नंबर पर थी जोकि विश्व की सकल घरेलू उत्पाद में 3.08 फीसदी का अंशदान कर रही है. विश्व की 10 सब से बड़ी अर्थव्यवस्थाएं, उन की जनसंख्या, वहां की प्रतिव्यक्ति आय व उन के क्षेत्रफल तालिका-1 में दर्ज हैं :
तालिका से स्पष्ट है कि यद्यपि भारत अर्थव्यवस्था के आकार में विश्व में 7वें स्थान पर है किंतु यह कोई गर्व करने वाली स्थिति नहीं है. अर्थव्यवस्था का यह स्थान मुख्यरूप से भारत की विशाल जनसंख्या के कारण है. भारत का कुल क्षेत्रफल यूएसए का लगभग 1/3 है जबकि उस की जनसंख्या वहां से 3 गुना अधिक है. भारत 144वें स्थान पर है.
बाकी ढोल पीटना है
वास्तविक प्रतिव्यक्ति आय के मामले में भारत का विश्व में 144वां स्थान है जबकि क्रय शक्ति समता के आधार पर भारत का विश्व में 126वां स्थान है. एक अमेरिकी के मुकाबले एक भारतीय की प्रतिव्यक्ति आय मात्र 3.11 फीसदी है. यहां तक कि चीन के मुकाबले भी यह मात्र 21.58 फीसदी है. यह फर्क स्पष्ट रूप से दिखाता है कि भारत की वास्तविक स्थिति क्या है. बहुत से पिछड़े कहे जाने वाले देश हम से बेहतर स्थिति में हैं.
अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार, प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन 1.90 डौलर से कम आय के व्यक्ति अत्यधिक गरीब माने जाते हैं. वर्ष 2011 में भारत में 21.2 फीसदी व्यक्ति इस श्रेणी में आते थे. भारतीय रिजर्व बैंक के डाटा के अनुसार भी वर्ष 2011-12 में भारत की कुल जनसंख्या का 21.92 फीसदी भाग, लगभग 26.98 करोड़ व्यक्ति गरीबीरेखा के नीचे थे.
उक्त विवेचना से स्पष्ट है कि हालांकि भारत की अर्थव्यवस्था विश्व में 9वें स्थान पर है किंतु वह अभी भी विश्व के गरीबतम देशों में से एक है.
क्या हैं कारण
यदि हम भारत की गरीबी के कारणों की विवेचना करें तो ये कारण स्पष्ट रूप से सामने आते हैं :
वर्ष 2013 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में सैक्टरवार रोजगार की स्थिति थी: कृषि : 49.7 फीसदी, उद्दोग : 21.5 फीसदी और सेवा क्षेत्र : 28.7 फीसदी.
इन आंकड़ों की तुलना यूएसए और चीन से करें तो स्थिति भयावह व शर्मनाक नजर आती है. यूएसए में वर्ष 2014 में कुल कार्यरत जनसंख्या का मात्र 1.4 फीसदी सीधे कृषि क्षेत्र से जुड़ा था जबकि 12.7 फीसदी रोजगार उद्योग क्षेत्र में. 80.1 फीसदी रोजगार सेवा क्षेत्र में व 5.7 फीसदी स्वरोजगार क्षेत्र में था. यहां पर एक उल्लेखनीय बात है कि यूएसए में वर्ष 1870 में कम से कम 50 फीसदी जनसंख्या कृषि से रोजगार पा रही थी.
चीन में भी वर्ष 2016 में कुल कार्यरत जनसंख्या का 27.7 फीसदी सीधे कृषि क्षेत्र से जुड़ा था जबकि 28.8 फीसदी उद्योग क्षेत्र से तथा 43.5 फीसदी सेवा क्षेत्र में कार्यरत था. सो, यह स्पष्ट है कि जिस अर्थव्यवस्था में रोजगार के लिए कृषि पर निर्भरता जितनी अधिक है, उस की प्रतिव्यक्ति आय उतनी ही कम है.
कृषि की दयनीय स्थिति
भारत में गरीबी का एक बहुत बड़ा कारण उस के कृषि क्षेत्र की दयनीय स्थिति है. जहां एक ओर भारत की कुल कार्यरत जनसंख्या का 49.7 फीसदी भाग कृषि क्षेत्र से जुड़ा है वहीं कृषि क्षेत्र का कुल आय में योगदान मात्र 17.4 फीसदी है. भारतीय कृषकों का 62.8 फीसदी भाग सीमांत कृषकों का है जिन का औसत कृषि भूमि स्वामित्व मात्र 0.24 हैक्टेअर का है. इस का भी मात्र 51 फीसदी भाग ही सिंचित है. लघु कृषकों का भाग 17.8 फीसदी है जिन का औसत कृषि भूमि स्वामित्व 1.42 हैक्टेअर है और इस का मात्र 39 फीसदी भाग ही सिंचित है.
भारतीय कृषक परिवारों के प्रतिमाह आय व व्यय के आंकड़े क्या हैं, इस को तालिका-2 में दर्ज किया जा रहा है.
तालिका-2 से स्पष्ट है कि कुल कृषक परिवारों का 80 फीसदी से अधिक भाग अपने प्रतिमाह व्यय से बहुत कम कमा पाता है. परिणामस्वरूप उसे इस कमी को पूरा करने के लिए ऋण लेना पड़ता है. आय की कमी के कारण कृषक एक ऐसे कुचक्र में फंस जाता है जिस से बाहर आना उस के लिए तब तक संभव नहीं है जब तक कि उस को किसी अन्य माध्यम से नियमितरूप से अतिरिक्त आय प्राप्त नहीं हो जाती है.
संपत्ति का असमान वितरण
समग्र प्रतिव्यक्ति आय कम होने के साथसाथ भारत में आर्थिक विषमता बहुत अधिक है. आर्थिक विषमता के मामले में भारत विश्व में रूस के बाद दूसरे स्थान पर है. भारत के 1 प्रतिशत सर्वाधिक धनी व्यक्ति कुल संपत्ति का 58.4 फीसदी भाग रखते हैं. सरकारें हमेशा इन्हीं 58.4 फीसदी धनवानों की सुनती हैं.
देश की कुल संपत्ति में निम्नतम
30 फीसदी लोगों के पास कुल संपत्ति का मात्र 1.4 फीसदी भाग ही है. देश के निम्नतम 70 फीसदी लोगों के पास कुल संपत्ति का मात्र 10.9 फीसदी भाग ही है. यह अंतर लगातार बढ़ता ही जा रहा है. परिणामस्वरूप, देश की आर्थिक प्रगति का लाभ नीचे के लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है.
निर्यात में कम हिस्सेदारी
विश्व की सब से बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की तुलना करें तो हम पाते हैं कि यहां भी भारत की स्थिति संतोषजनक नहीं है. द वर्ड फैक्टबुक के अनुसार, वर्ष 2016 के अनुमानित आयात व निर्यात की स्थिति क्या थी, यह तालिका-3 में दर्ज है :
उक्त तालिका से स्पष्ट है कि खुद को विश्व की 7वीं सब से बड़ी अर्थव्यवस्था बता कर अपनी पीठ थपथपाने से भारत की स्थिति नहीं बदलेगी. यदि भारत को अपनी स्थिति बेहतर करनी है तो उसे अपनी मूलभूत कमजोरियों को दूर करने के लिए गंभीर प्रयास करने होंगे.
कृषि पर निर्भर जनसंख्या को रोजगार के दूसरे स्रोत उपलब्ध कराने होंगे, उन की कृषि पर से निर्भरता कम करनी होगी, विश्व के निर्यात में अपनी हिस्सेदारी बढ़ानी होगी और सब से महत्त्वपूर्ण संपत्ति के वितरण की असमानता को कम करना होगा. तभी हम अपनी अर्थव्यवस्था को हकीकत में गर्व करने लायक बना सकेंगे.
इस सब के लिए देश की सामाजिक स्थिति जिम्मेदार है जिस में धर्म का सब से ज्यादा रोल है जिस ने देश की जनता को अकर्मण्य बना रखा है.
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एक बोध कथा है जिस में अलौकिकता पर न जाएं. कथा के अनुसार, एक दिन शैतान मनुष्य के पास आया और बोला, ‘तुम सब मरने ही वाले हो. मैं तुम्हें मौत से बचा सकता हूं बशर्ते, तुम अपने नौकर को मार डालो, अपनी पत्नी की पिटाई करो या यह शराब पी लो.’
मनुष्य ने कहा, ‘मुझे जरा सोचने दीजिए अपने विश्वसनीय नौकर की हत्या करना मेरे लिए संभव नहीं, पत्नी के साथ दुर्व्यवहार करना बेतुकी बात होगी. हां, मैं यह शराब पी लूंगा.’ उस के बाद उस ने शराब पी ली और नशे में धुत हो कर पत्नी को पीटा तथा जब नौकर ने उस की पत्नी का बचाव करने की कोशिश की तो नौकर को मार डाला.
उपरोक्त बोधकथा से मद्यपान के हमारे जीवन पर पड़ने वाले कुप्रभाव को भलीभांति समझा जा सकता है. निसंहेद मद्यपान का हमारे जीवन पर घातक प्रभाव पड़ता है. किंतु इस के बावजूद आज जिधर देखो उधर युवाबूढ़े, स्त्रीपुरुष, अमीरगरीब सभी इस घातक जहर की चपेट में नजर आते हैं. शराब पीना आजकल फैशन सा बन गया है. फैशनपरस्त लोगों ने साजसिंगार तथा वेशभूषा तक ही सीमित न रह कर शराब को भी उस के दायरे में समेट लिया है. शराब पीने से इनकार करने वाले को अब पुराने विचारों का तथा रूढि़वादी करार दिया जाता है और अपने को आधुनिक व प्रभावशाली साबित करने का इच्छुक हर व्यक्ति उस के खतरों को नजरअंदाज करते हुए या जानेअनजाने में इस के जानलेवा जाल में फंसता जा रहा है.
क्यों पीते हैं शराब
इस के कई कारण हैं. अकसर देखने में आता है कि मानसिक तनाव के कारण लोग शराब पीते हैं. जब व्यक्ति किसी समस्या का हल पाने में असफल होता है तो शराब पी कर उसे भूलने की चेष्टा करता है. अधिकांश मामलों में यही देखा गया है कि हताशा मद्यपान का कारण बनती है. पारिवारिक कलह, आर्थिक अभाव या कभीकभी शारीरिक यंत्रणा से मुक्ति पाने के लिए लोग इसे मुंह से लगा बैठते हैं. किंतु क्या इसे उचित कहा जा सकता है? शराब किसी समस्या का समाधान तो नहीं हो सकती या शराब पी कर भूलने से आप की समस्या का अंत तो नहीं हो जाता. किसी भी परेशानी से घबरा कर शराब पीना एक और परेशानी को गले लगाना है, उस से छुटकारा पाना नहीं.
शराब पीने के लिए लोगों के पास बहानों की कमी नहीं है. कुछ व्यक्ति केवल इसलिए शराब पीते हैं कि लोग उन्हें विशिष्ट समझें, वे शराब को स्टेटस व संपन्नता का प्रतीक मानते हैं. वे यह भूल जाते हैं कि शराब का सेवन करना दिमागी खोखलेपन की निशानी भी है. दिनभर मेहनत करने के बाद शाम को शराब पीने वालों का तर्क होता है कि इस से थकान दूर हो जाती है. ये लोग शराब पीने के बाद डगमगा कर चलने व बेहोश हो जाने को ही शायद थकान का दूर होना समझते हैं.
आजकल किसी भी सामाजिक उत्सव या त्योहार पर गिलासों की खनखनाहट होनी आम बात होती है. ऐसे अवसरों पर अकसर ही यह सुना जाता है कि सोसायटी में रहना है तो उस के हिसाब से ही चलना होगा, और फिर सोसायटी में यह सब चलता ही है. इन चीजों को अपनाए बगैर कोई भी उन्नति नहीं कर सकता. यहां ये लोग शायद यह भूल जाते हैं कि कोई भी व्यक्ति अपने परिश्रम व लगन से उन्नति करता है, शराब पीने से नहीं.
शराब के संपर्क में आने के बाद व्यक्ति के पास चरित्र नाम की कोई चीज नहीं रह जाती है. कहने को इस के बचाव में वह कुछ भी कहता रहे, शराब पी कर वह केवल अपनेआप को धोखा देता है और जो व्यक्ति अपनेआप को धोखा देता है उस का क्या चरित्र हो सकता है.
विचारशक्ति खत्म होती है
कभीकभी कुछ व्यक्ति केवल झगड़ा करने के लिए शराब पीते हैं ताकि स्फूर्ति आ जाए. जबकि, ऐसा होता नहीं है. शराब पीने के बाद आदमी सामान्य नहीं रह पाता है क्योंकि हमारे मस्तिष्क में कुछ ऐसे तंत्र होते हैं जो हमारे बोलनेचालने या काम करने के तौरतरीके आदि को नियंत्रित करते हैं. शराब पीने के बाद वह नियंत्रण समाप्त हो जाता है और आदमी के सोचनेसमझने की शक्ति खत्म हो जाती है. वह उचितअनुचित का भेद नहीं कर पाता है और सभ्यता व शिष्टाचार की सीमा लांघ कर अपशब्द बोलने लगता है. इस के अतिरिक्त, कुछ व्यक्ति यह सोच कर भी शराब पीते हैं कि वे जिस से झगड़ा करने जा रहे हैं वह उन्हें नशे में देख कर डर जाएगा. पर मजा तो तब आता है जब इस का उलटा होता है और इन की पिटाई हो जाती है क्योंकि नशे में इन की प्रतिरोध क्षमता खत्म हो जाती है.
जो व्यक्ति शराब के आदी नहीं होते हैं वे कभीकभी मित्रों आदि पर रोब गांठने के लिए पी लेते हैं तो कुछ लोग यह सोचते हैं कि जहां अन्य सभी पीने वाले हों, वहां एक व्यक्ति शराब को हाथ नहीं लगाता है तो लोग उसे बेवकूफ समझेंगे और उसे इग्नोर करने लगेंगे. इसलिए वह न चाहते हुए भी अपनी श्रेष्ठता साबित करने के लिए पीतापिलाता रहता है. ऐसा कर के वह सोचता है कि वह भी आधुनिक और उच्च श्रेणी में आ गया है. किंतु पीने के बाद यही व्यक्ति नशें में धुत हो कर जब घर जाता है और अपनी पत्नी व बच्चों को पीटता है तो ऐसा कर के वह अपनी नीचता का ही प्रदर्शन करता है, आधुनिकता या श्रेष्ठता का नहीं.
छोटेछोटे बालक शुरू में अपने बड़ेबुजुर्गों की देखादेखी शराब पीना शुरू करते हैं, क्योंकि जब वे उन्हें पीता देखते हैं तो उन के बालसुलभ मन में भी वैसा ही करने की स्वाभाविक इच्छा जागृत होती है. इस तरह वे छिप कर शराब पीना शुरू कर देते हैं और आगे चल कर इस के आदी हो जाते हैं.
पीने की आदत
एक बार शराब का सेवन करने के बाद व्यक्ति इस की गिरफ्त में आ जाता है और फिर एक आदत बन जाती है. पहली बार शराब का सेवन करते समय आदमी यह सोचता है कि वह शराब का आदी थोड़े ही बन रहा है. पर वह यह नहीं जानता है कि एक बार पीना शुरू कर देने पर इतना विवेक किस में होता है कि अच्छाबुरा सोच सके.
शराब पीने की आदत पड़ जाने पर लोग पैसा न हो तो उधार ले कर पीना शुरू कर देते हैं. उधार न मिलने पर शराब प्राप्त करने के लिए लोग चोरी, जेबकतरी और रिश्वतखोरी आदि करते हैं. घर में कलह शुरू होता है और घर बरबाद हो जाता है. शराब के नशे में गाडि़यां चला कर दुर्घटनाएं, हत्याएं, बलात्कार व अन्य जघन्य अपराध करने के समाचार हम प्रतिदिन पढ़ते, सुनते व देखते हैं. ऐसा कौन सा कुकृत्य है जो शराब के नशे में और शराब को प्राप्त करने के लिए नहीं किया जाता.
इन सब बातों के विपरीत कोई शराबी यह नहीं चाहता कि उस की संतान शराब को हाथ लगाए. वह यह भी नहीं चाहता कि उस के निवास स्थान के पास शराब की दुकान या होटल आदि हो. क्या यह तथ्य यह बात सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं है कि एक शराबी भी शराब को घृणा की दृष्टि से देखता है.
इन सब बातों को जानते व समझते हुए भी बहुत से लोग शराब पीना छोड़ना नहीं चाहते हैं. कुछ लोग छोड़ना चाहते हुए भी कहते हैं कि क्या करें, छूटती ही नहीं. माना शराब मनुष्य की बहुत बड़ी कमजोरी है पर कमजोरियों पर विजय भी तो मनुष्य ने ही पाई है. ऐसा कोई भी कार्य नहीं है जिसे मनुष्य पूरी इच्छा से करना चाहे और न कर सके. आवश्यकता केवल दृढ़प्रतिज्ञ होने की है.
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देश में तेजी से बढ़ते डिजिटाइजेशन के नाम पर हर कार्य औनलाइन किए जाने की अनिवार्यता के चलते जहां आमजन परेशानी का अनुभव करता है तो वहीं औनलाइन कार्य से जुड़े कियोस्क सैंटर्स लोगों की जेब पर डाका डालने का काम कर रहे हैं. मोदी सरकार द्वारा आधार कार्ड को बैंक खाते, मोबाइल नंबर, एलपीजी गैस आदि से लिंक कराने को अनिवार्य किए जाने से देश की जनसंख्या का एक बड़ा वर्ग अपने रोजमर्रा के काम छोड़ कर आधार लिंक कराने के लिए इन औनलाइन सैंटर्स के चक्कर लगाने पर मजबूर है. सरकारी नौकरियों में अब प्रतियोगी परीक्षाओं के जरिए चयन होने लगा है. अखबारों के माध्यम से पद विज्ञापित कर औनलाइन पोर्टल के माध्यम से परीक्षाओं के फौर्म भरवाए जाते हैं. ऐसे में बेरोजगार युवकयुवतियां सरकारी नौकरी की आस में इन औनलाइन कियोस्क सैंटर्स के इर्दगिर्द चक्कर पर चक्कर लगा कर अपना अमूल्य समय व धन खराब करने पर मजबूर हैं.
मध्य प्रदेश में पटवारी की भरती के लिए व्यावसायिक परीक्षा मंडल, भोपाल द्वारा आयोजित होने जाने वाली परीक्षा के 9,235 पदों के लिए 10 लाख से अधिक आवेदन इन कियोस्क सैंटर्स द्वारा भरे गए हैं. इस परीक्षा को पास कर बेरोजगार युवकयुवतियां पटवारी बन कर रोजगार प्राप्त कर पाएं या नहीं, परंतु प्रदेशभर में स्थापित हजारों कियोस्क सैंटर्स ने 15 दिनों में अंधाधुंध कमाई कर अपना रोजगार स्थापित कर लिया है.
सर्वर डाउन होने के नाम पर आवेदकों से फौर्म भरने के नाम पर 500-500 रुपए तक की राशि वसूल कर के लाचार और मजबूर आवेदकों का आर्थिक शोषण करने में इन के द्वारा कोई कसर नहीं छोड़ी गई है. मनमरजी से चलने वाले ये कियोस्क सैंटर्स ग्राहकों को खुलेआम लूट रहे हैं.
औनलाइन कियोस्क सैंटर
डिजिटल इंडिया के नाम पर नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा हर गांव व शहर में औनलाइन कामकाज के लिए लोगों को सहूलियत देने हेतु कौमन सर्विस सैंटर खुलवाए गए थे. 10×10 फुट की दुकानों में स्थापित इन सर्विस सैंटर्स में कंप्यूटर सिस्टम, यूपीएस, प्रिंटर, स्कैनर की सुविधा होनी अनिवार्य है, लेकिन कई कियोस्क सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाते किसी सरकारी विभाग के दफ्तर की तरह सुविधा शुल्क के नाम पर खुलेआम वसूली कर रहे हैं. शहरों में हर गलीचौराहे पर खुले इन कियोस्क सैंटर्स पर आधार कार्ड, पैन कार्ड के आवेदन, संशोधन जैसे महत्त्वपूर्ण कार्यों के साथ केंद्र और राज्य सरकार की सभी प्रकार की भरतियों के लिए औनलाइन फौर्म भरने का काम भी किया जाता है.
बिजली बिल, टैलीफोन बिल, जीवन बीमा प्रीमियम भरने के साथ डीटीएच और मोबाइल रिचार्ज जैसे कार्य भी इन कियोस्क सैंटर्स के माध्यम से कराए जा रहे हैं. स्कूल या विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्रछात्राओं की फीस हो या किसी भी प्रकार का सरकारी चालान, सरकारी विभागों की सभी प्रकार की निविदाएं भरने के कार्य भी कियोस्क सैंटर्स के माध्यम से औनलाइन ही किए जाते हैं.
औनलाइन कार्य के लिए इन सैंटर्स को पोर्टल शुल्क के नाम पर अलगअलग प्रकार के कार्यों के लिए 50 से ले कर 500 रुपए तक का कमीशन मिलता है. उपभोक्ताओं या ग्राहकों की मजबूरी यह है कि उन्हें इन कियोस्क सैंटर्स पर जा कर ही ये कार्य संपादित कराने पड़ते हैं. ऐसे में इन सैंटर्स द्वारा उन की मजबूरी का बेजा फायदा उठाया जाता है.
लूट पर नियंत्रण नहीं
आज सरकारी नौकरी के आवेदन के लिए बेरोजगारों से भारीभरकम फीस वसूल की जा रही है. सरकार के किसी भी विभाग द्वारा होने वाली परीक्षा के लिए 250 से ले कर 1,000 रुपए तक परीक्षा शुल्क लिया जा रहा है. मध्य प्रदेश सरकार द्वारा तो लाइसैंस फीस ले कर हर गांवशहर में एमपी औनलाइन कियोस्क सैंटर खोले गए हैं जिन्हें परीक्षा फौर्म भरने के लिए परीक्षा शुल्क के साथ
50 से 500 रुपए तक पोर्टल शुल्क मिलता है. बावजूद इस के, ये कियोस्क सैंटर्स परीक्षा संबंधी दस्तावेजों को स्कैन व अपलोड करने के नाम पर बेरोजगारों से पोर्टल शुल्क के अलावा अतिरिक्त राशि भी धड़ल्ले से वसूल कर के उन की जेबों पर डाका डाल रहे हैं.
नवोदय विद्यालय में कक्षा में प्रवेश के लिए ली जाने वाली प्रवेश परीक्षा के फौर्म भी इस बार मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा औनलाइन भरे गए और इन सैंटर्स द्वारा नन्हेंमुन्ने बच्चों के साथसाथ अभिभावकों को भी परेशान करने के लिए उन से मनमाफिक वसूली की गई. इसी प्रकार मध्य प्रदेश सरकार की राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा के औनलाइन आवेदन के लिए किसी भी प्रकार का शुल्क कियोस्क सैंटर्स को न लेने के निर्देश दिए जाने के बाद भी उन के द्वारा पोर्टल शुल्क के नाम पर अवैध वसूली की गई.
फीस के नाम पर गड़बड़झाला
मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत लगभग 10 लाख छात्रछात्राओं के हाईस्कूल और हायर सैकंडरी परीक्षा के फौर्म तथा 9वीं कक्षा के नामांकन फौर्म भरने के नाम पर प्रतिपरीक्षार्थी 25 रुपए का पोर्टल शुल्क प्रतिवर्ष वसूल किया जा रहा है. नियम के अनुसार, इस पोर्टल फीस में परीक्षा फौर्म भरने के साथ परीक्षार्थी की फोटो के स्कैन करने का कार्य करना होता है, परंतु मध्य प्रदेश में परीक्षा फौर्म भरने का कार्य अधिकांश सरकारी स्कूलों द्वारा अपने संसाधनों से किया जाता है.
सरकारी स्कूल में कार्यरत एक प्राचार्य बताते हैं कि परीक्षा फौर्म के डाटा में किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो, इस के लिए स्कूल के शिक्षकों द्वारा स्कूल के कंप्यूटर सिस्टम के माध्यम से एमपी औनलाइन की वैबसाइट पर माध्यमिक शिक्षा मंडल के लिंक पर जा कर परीक्षा फौर्म भरे जाते हैं, जबकि परीक्षार्थियों की फीस एमपी औनलाइन के माध्यम से भरी जाती है. इस में दिलचस्प बात यह है कि कियोस्क सैंटर्स भी फीस भरने के लिए ईपिन के रूप में जो पासवर्ड उपयोग करते हैं वह प्राचार्य के मोबाइल नंबर पर आता है.
साइबर क्षेत्र के जानकार बताते हैं कि जब परीक्षा फौर्म प्राचार्य अपने लौगइन से भरते हैं तो फीस की पेमैंट स्कूल बैंक खाते या डैबिड, क्रैडिट कार्य के माध्यम से की जा सकती है. एमपी औनलाइन और माध्यमिक शिक्षा मंडल के उच्च अधिकारियों की मिलीभगत से यह गोरखधंधा 3 वर्षों से चल रहा है और कियोस्क सैंटर्स 25 रुपए प्रतिछात्र के हिसाब से कमीशन के रूप में करोड़ों का वारेन्यारे कर रहे हैं.
सुविधा नहीं दुविधा केंद्र
लोगों का कहना है कि जब मोबाइल के माध्यम से औनलाइन शौपिंग का चलन बढ़ रहा है और रुपयों का भुगतान भी ईवौलेट से हो रहा है, तो फिर औनलाइन पोर्टल की निर्भरता क्यों खत्म नहीं की जा रही है? इस का सीधा सा जवाब यही है कि सरकार प्रतिवर्ष लाखों रुपए लाइसैंस फीस की वसूली कर इन औनलाइन सैंटर्स? को प्रश्रय देने के साथ आम नागरिकों की जेब ढीली करने के षड्यंत्र में भागीदार है.
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माया जब 5 वर्ष बाद अपनी बड़ी बहन सिया से मिली तो उसे वह बड़ी उदास सी दिखाई दी. उस ने पूछ ही लिया, ‘‘दीदी, क्या बात है, आप के चेहरे की तो रौनक जैसे खो ही गई, कोई परेशानी है क्या?’’
‘‘परेशानी तो नहीं है माया बस ढलती उम्र है, हड्डियां जवाब देने लगी हैं और ऊपर से बाल झड़ना और चेहरे की झुर्रियां. यों कहो उम्र अपना असर दिखा रही है. चेहरा तो उदास दिखेगा ही,’’ सिया बोली.
‘‘आप ऐसा क्यों सोचती हैं दीदी. उम्र से क्या फर्क पड़ता है. थोड़ा बनठन कर और चुस्तदुरुस्त रहा करो.’’
‘‘किस के लिए माया. अब इस उम्र में कौन देखने वाला है? बच्चे भी होस्टल में हैं. फिर मैं एक विधवा हूं. बनठन कर रहूंगी तो लोग क्या कहेंगे? लोग मुझे शक की नजरों से देखने लगेंगे,’’ सिया ने कहा.
‘‘अरे, इस में क्या बुरा है? क्यों शक करेंगे लोग? कोई देखने वाला नहीं और विधवा होना आप का दोष तो नहीं. अपने जीवन व शरीर के प्रति उदासीन हो जाना ठीक नहीं. जब बच्चे अपनेअपने परिवार में व्यस्त हो जाएंगे तो कौन संभालने वाला है आप को. यदि आज जीजू होते तो वे आप का ध्यान रखते. लेकिन अब उन के न होने से आप को ही अपनेआप का ध्यान रखना चाहिए वरना 40 के बाद बढ़ती उम्र के साथसाथ शरीर में बीमारियां भी घर करने लगती हैं.’’
‘‘कहती तो तुम ठीक ही हो माया, लेकिन अकेलापन खाए जाता है. पहले तो बच्चों में व्यस्त रहती थी, पर अब सारा दिन अकेली घर बैठे रहती हूं. वक्त काटे नहीं कटता,’’ सिया ने कहा.
ऐसे न जाने कितने उदाहरण हमारे आसपास होंगे, जो महिलाएं किसी कारण से सिंगल रह जाती हैं और 40 के बाद अपने जीवन के प्रति उदासीन हो जाती हैं.
मेरे ही पड़ोस में रहने वाली स्मिता एक फार्मा कंपनी में कार्यरत है. अपने पिता के आकस्मिक निधन के बाद 2 छोटी बहनों की जिम्मेदारी उस पर आ गई. मां ज्यादा पढ़ीलिखी नहीं थीं. स्मिता ने स्वयं नौकरी कर अपनी दोनों बहनों को अपने पैरों पर तो खड़ा किया ही, उन के लिए योग्य वर ढूंढ़ कर उन के विवाह भी किए. बहनों के तो घर बस गए, लेकिन वह स्वयं जीवन भर के लिए अकेली रह गई. पहले तो मां के साथ रहती थी, लेकिन 2 साल पहले उन का भी देहांत हो गया. स्मिता 45 वर्ष की है. नौकरी कर रही है. अब जीवन का एकाकीपन और शरीर में जोड़ों का दर्द उसे परेशान करने लगा है. कल तक अपने कंधों पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी लेने वाली स्मिता चेहरे व मन से बुझीबुझी सी दिखने लगी है.
एक दिन मैं ने उसे सोसायटी में होने वाले कार्निवाल का आमंत्रण पत्र थमाते हुए कहा, ‘‘जरूर आना, बहुत मजा आएगा.’’
‘‘तुम्हारे तो बच्चे हैं, मैं वहां आ कर क्या करूंगी?’’ स्मिता बोली.
‘‘आप आइए तो सही. आप के लिए भी एक चेंज हो जाएगा.’’
मेरे जोर देने से वह कार्निवाल में आई. अब वह सोसायटी के हर प्रोग्राम में सहर्ष आती है और महत्त्वपूर्ण भूमिका भी निभाती है.
इस से न सिर्फ स्मिता के चेहरे की रंगत निखर गई है, बल्कि ऐक्टिव रहने से उस में आत्मविश्वास भी आया है. सोसायटी के बच्चे उसे बहुत पसंद करते हैं, क्योंकि वह उन के लिए साल भर कोई न कोई आयोजन करती रहती है.
सिंगल्स को भी पूरा हक है कि वे अपने जीवन को संपूर्ण रूप से जिएं और अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि 40 के बाद सिंगल महिला हो या परिवार वाली, सभी की मेनोपौज की उम्र आ जाती है. 40 से 50 वर्ष की उम्र में महिलाओं का मासिकचक्र खत्म होने के कगार पर होता है, जिस के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. कई बार ये समस्याएं बहुत कष्टदायक होती हैं. इन के कारण शारीरिक व मानसिक दोनों परिवर्तन आने लगते हैं.
सुस्ती आना, नींद न आना, शरीर में शिथिलता आना, मोटापा बढ़ना, शरीर के विभिन्न हिस्सों में दर्द होना आदि समस्याएं अकसर 40 के बाद ही होने लगती हैं. ऐसे में कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है:
अपने आहार पर ध्यान दें
आप अपने खाने में ऐसी चीजों को शामिल करें, जिन में आप के लिए जरूरी न्यूट्रिशंस हों, क्योंकि 40 वर्ष की आयु तक पहुंचतेपहुंचते आप का पाचनतंत्र कमजोर होने लगता है. यही कारण है कि मसल मास 45% तक कम होने लगता है, जिस कारण शरीर में फैट बढ़ने लगता है.
बढ़ती उम्र के साथ आप का मैटाबौलिज्म स्लो होने लगता है. ऐसे में आप को पहले के मुकाबले कम कैलोरी की आवश्यकता होती है. इसलिए आप जो भी खाएं कैलोरी पर जरूर ध्यान रखें.
व्यायाम को बनाएं दिनचर्या का हिस्सा
व्यायाम करने से आप स्वस्थ रहेंगी और अपनेआप को जवां महसूस करेंगी. इस से आप की मांसपेशियों को ताकत मिलेगी, आप को अच्छी नींद आएगी, शरीर में लचीलापन आएगा और आप का आत्मविश्वास भी बढ़ेगा.
कई बार 40 के बाद जोड़ों में दर्द की समस्या हो जाती है, जिस के कारण जिम में व्यायाम करना मुश्किल हो जाता है, यहां तक कि पैदल चलने में भी तकलीफ होने लगती है. ऐसे में वाटर ऐक्सरसाइज भी लाभदायक है. आप व्यायाम किसी भी रूप में कर सकती हैं जैसे मौर्निंग वाक, ऐरोबिक्स, नृत्य, स्विमिंग आदि. जुम्बा डांस भी ऐक्सरसाइज के तौर पर समूह में किया जा सकता है. इस से न सिर्फ आप शारीरिक रूप से चुस्त रहती हैं, बल्कि म्यूजिक के साथ सहेलियों के संग नृत्य का आनंद भी ले सकती हैं.
हारमोंस में बदलाव
40 के बाद मेनोपौज शुरू होने के कारण हारमोंस में भी बदलाव आता है, जिस कारण वजन बढ़ता है, लेकिन हारमोंस पर ध्यान न दे कर अपनी फिटनैस पर ध्यान दें ताकि आप अपने शरीर में हो रहे हारमोंस में बदलाव को संतुलित कर सकें.
प्रोटीन युक्त भोजन लें
उम्र के साथ नाखून खराब होने लगते हैं, बाल झड़ने लगते हैं और त्वचा में झुर्रियां पड़ने लगती हैं. इस के लिए भोजन में प्रोटीन लेने से शरीर के साथसाथ मांसपेशियां, बाल, त्वचा और कनैक्टिव टिशू अच्छे रहते हैं. मांसपेशियां फिर से बनने लगती हैं, साथ ही लंबे समय तक भूख भी नहीं लगती है. कुछ प्रोटीन युक्त आहार जो आप खाने में ले सकती हैं उन में मुख्य हैं मांस, मछली, चिकन, अंडा, दूध, दही, दाल, पालक, छोले, राजमा, स्प्राउट्स, सोयाबीन, मूंगफली, अंजीर, बादाम, अखरोट आदि.
थोड़ा सोशल भी रहें
जो महिलाएं अपने परिवार के साथ हैं, उन्हें तो किसी न किसी बहाने दूसरे लोग आमंत्रित करते रहते हैं, लेकिन सिंगल महिला के लिए यह एक समस्या है कि वह किस से बोले, क्योंकि उस का विषय दूसरों से मैच नहीं होता.
ऐसे में आप अपनी सोसायटी में होने वाले कार्यक्रमों में हिस्सा लें. उन को सफल बनाने में अपना योगदान दें ताकि आप के समय का सदुपयोग हो सके और सोसायटी में आप की अपनी पहचान हो. आप के सहयोग को देख कर लोग स्वयं आप को आमंत्रित करने लगेंगे और इस बहाने आप का लोगों से मिलनाजुलना बढ़ जाएगा, जिस से आप का एकाकीपन दूर होगा.
इस के अलावा आप स्वयं महिलाओं के साथ एक मासिक किट्टी पार्टी की शुरुआत कर सकती हैं, जिस में अलगथलग थीम रख कर नए गेम्स रखें ताकि आप को भी अपनी पसंद के कपड़े पहनने का मौका मिले.
यदि आप कामकाजी महिला हैं तो दफ्तर की पिकनिक और्गेनाइज कर सकती हैं.
इस तरह से आप का टेलैंट भी सब के सामने आएगा और आप सब की चहेती बन कर रहेंगी.
यहां एक खास बात यह है कि जो महिलाएं अपने परिवार के साथ हैं उन का वक्त व जरूरत के हिसाब से कोई न कोई खयाल करने वाला होता है, लेकिन सिंगल्स के पास यह सुविधा नहीं होती है. ऐसे में अपने दफ्तर और आसपास के लोगों से दोस्ती आप के आड़े वक्त काम आएगी.
स्वयं हर तरह से अपना खयाल रखें.
जज करिए अपनेआप को कि कहीं आप अपने जीवन के प्रति उदासीन तो नहीं हो गईं? अपने सोशल सर्किल में जरूर बात कीजिए कि मैं अच्छी तो लग रही हूं न. जिन के दिलों में आप राज करती हैं वे नहीं चाहेंगे कि आप किसी से कमतर दिखें.