यदि कोई व्यक्ति किसी महिला की इच्छा के विरुद्ध उस के साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाता है, तो उसे रेप कहते हैं. नैशनल क्राइम रिकौर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़े बताते हैं कि 2015 में हमारे देश में रेप के 34,651 मामले दर्ज किए गए, जिन में 33,098 मामलों में इस घृणित अपराध को अंजाम देने वाले पीडि़ता के परिचित थे.

आज फोन, इंटरनैट, फैशनेबल ड्रैस, खानपान, आधुनिक सुखसुविधाएं, विलासिता के साधन अपनी जेब के अनुसार सब के घरों में हैं. मगर इन सब के बावजूद विचारों में हम वहीं के वहीं हैं. किसी लड़की को सड़क पर देखते ही फिल्मी स्टाइल में उस पर फबतियां कसते, अवसर मिलते ही रेप करते. फिर विचार के नाम पर पीडि़ता को ही अपराधिनी मान लेते. यहां तक कि मातापिता और परिवार के अन्य लोग भी पीडि़ता को ही दोषी मानते हैं.

आज महिलाएं घरबाहर कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं. अपनी बदनामी के डर से रेप पीडि़ता आत्महत्या करने तक को मजबूर हो जाती है.

हां, अब शिक्षा के कारण महिलाओं की सोच में परिवर्तन जरूर आ रहा है. अब लड़कियां अपनी आजादी को ऐंजौय कर रही हैं. अपनी इच्छानुसार ऐक्सपोज कर के स्वतंत्रता से जी रही हैं.

आज लड़कों के साथ बातचीत और दोस्ती सामान्य बात है. पर अब लड़कियां अपनी सुरक्षा का इंतजाम भी रखती हैं. ब्लैक पैपर स्प्रे आदि रखना आम हो चुका है. अब लड़कियां मानसिक रूप से शक्तिशाली भी बन चुकी हैं. कोई उन पर हाथ डालने से पहले 10 बार सोचेगा. वे अब लड़कों की नजरों को पहचानती हैं.

आज के मातापिता भी जागरूक हैं. वे बचपन से ही बेटी को अपनी सुरक्षा के लिए जूडोकराटे आदि की शिक्षा दिलाते हैं.

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