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बाथटब में डूबने से हुई श्रीदेवी की मौत

शनिवार, 24 फरवरी को देर रात दुबई के होटल में बाथरूम के अंदर गिरने के बाद अभिनेत्री श्रीदेवी की मौत हो गयी थी. उस वक्त खबर आयी थी कि उनकी मौत हृदय गति रूक जाने से हुई. लेकिन श्रीदेवी के पारिवारिक सदस्यों को उनके पार्थिव शरीर के मिलने में होती रही देरी के चलते मीडिया में अटकलों का बाजार गर्म रहा. कई तरह की शंकाएं व्यक्त की जाती रही थी.

उधर दुबई में दुबई पुलिस व डौक्टर अपने हिसाब से जांच करते रहे. श्रीदेवी के पार्थिव शरीर का पोस्टमार्टम किया गया. फोरेंसिक रिपोर्ट करायी गयी और अंततः सोमवार, 26 फरवरी को शाम साढ़े चार बजे दुबई पुलिस ने यूएई स्थित भारतीय दूतावास को श्रीदेवी का मृत्यु प्रमाणपत्र सौंपा.

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दुबई स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से जारी इस मृत्यु प्रमाण पत्र में दुघर्टनावश डूबने से हुई मौत वजह बतायी गयी है. यानी कि इस प्रमाण पत्र के अनुसार श्रीदेवी की मौत हृदयगति रूकने से नहीं, बल्कि बाथटब के पानी में डूबने से हुई. जिसे वहां की पुलिस ने दुर्घटना माना और किसी भी तरह की आपराधिक संभावनाओं से इंकार कर दिया.

सूत्र बता रहे हैं कि श्रीदेवी के खून की जांच भी की गयी, जिसमें अल्कोहल पाया गया. इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि श्रीदेवी नशे की हालत में बाथरूम के अंदर गईं और अचानक वह बाथटब के अंदर गिर गईं. पानी उनके शरीर के अंदर चला गया, उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई और उनकी मौत हो गई.

यूएई में भारतीय उच्चायुक्त ने एक समाचार चैनल को आज शाम साढ़े चार बजे बताया कि अभी दो तीन विभागों से कुछ मंजूरी मिलनी बाकी है. यह सब होने में करीबन चार से पांच घंटे का समय लगेगा. यानी कि श्रीदेवी का पार्थिव शरीर चार्टेड प्लेन से देर रात ही दुबई से रवाना होगा. इससे यह बात साफ हो गयी कि अब श्रीदेवी का अंतिम संस्कार मुंबई में मंगलवार को ही हो पाएगा.

हवाई यात्रा के दौरान तेज इंटरनेट की सुविधा देगा एयरटेल

देश की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल ने हवाई यात्रा के दौरान मोबाइल उपभोक्ताओं को तेज स्पीड वाली निर्बाध इंटरनेट सेवा देने के लिए कंपनियों के एक वैश्विक संगठन से हाथ मिलाया है. कंपनी ने जारी अपने बयान में कहा कि वैश्विक समूह ‘सिमलेस एलायंस’में वनवेब, एयरबस, डेल्टा और स्प्रिंट जैसी कंपनियां शामिल हैं. ये सभी मिलकर उड़ान के दौरान भी उपभोक्ताओं को तेज स्पीड वाली इंटरनेट सेवा मुहैया कराने के लिए सैटेलाइट प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करेंगे.

इस वैश्विक पहल का ऐलान रविवार को बार्सिलोना में हुआ. इन 5 फाउंडिंग मेंबर्स के अलावा इंडस्ट्री के दूसरे औपरेटर्स भी जुड़ेंगे. सीमलेस एलायंस के सभी मेंबर्स मिलकर डेटा एक्सेस का इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधारने और किमत को कम करने के लिए काम करेंगे.

भारती एयरटेल के सीईओ गोपाल विट्टल ने कहा, ‘इस इनोवेटिव तकनीक के फाउंडिंग मेंबर होने पर हमें खुशी है, जिससे हम ग्राहक को बिना रुकावट के कनेक्टिविटी दे पाएंगे. एयरटेल सिमलेस एलायंस में शामिल हुआ है जो दूरसंचार कंपनियों को विमानों के केबिन तक सेवा देने एवं विमानन कंपनियों के लिए नवाचार के नये युग की शुरुआत करेगा.

विट्टल ने कहा कि हम अपने सभी पार्टनर मेंबर्स की मदद से इस प्लैटफौर्म को जल्द से जल्द ग्राहक तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे.

एयरटेल के ग्लोबल नेटवर्क के 37 लाख ग्राहकों को भी उड़ान के दौरान बिना रुकावट के हाइ-स्पीड इंटरनेट सेवा मिल पाएंगी. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एयरटेल दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मोबाइल औपरेटर है, जिसके एशिया और अफ्रीका के 16 देशों में औपरेशंस हैं.

कोहली और धोनी नहीं अब रोहित संभालेंगे टीम की कमान

टी20 सीरीज जीतने के साथ ही टीम इंडिया का दो महीने लंबा अफ्रीका दौरा अब समाप्त हो गया है. 6 मार्च से 18 मार्च तक उसे श्रीलंका में होने वाली टी-20 ट्राइ सीरीज में हिस्सा लेना है. इसके लिए टीम इंडिया का ऐलान कर दिया गया है और इस टीम में कप्तान विराट कोहली और टीम के सबसे सीनियर खिलाड़ी महेंद्र सिंह धोनी को आराम दिया गया है और उनकी जगह टीम की कमान रोहित शर्मा के हाथों नें सौप दी गई है. इसका मतलब यह कि अब रोहित शर्मा भारत की दूसरे दर्जे की टीम की अगुआई करेंगे. इस घरेलू टूर्नामेंटों (सैयद मुश्ताक अली टी20 और आईपीएल) में प्रभावी प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को भी जगह दी गई है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि टीम में छ: बदलाव किए गए हैं. शिखर धवन को उप कप्तान बनाया गया है. राष्ट्रीय चयनकर्ता एमएसके प्रसाद के हवाले से कहा गया कि महेंद्र सिंह धोनी चयन के लिए उपलब्ध नहीं रहेंगे क्योंकि उन्होंने आराम का आग्रह किया था. उम्मीद के मुताबिक भुवनेश्वर कुमार और जसप्रीत बुमराह की शीर्ष तेज गेंदबाजी जोड़ी के अलावा औलराउंडर हार्दिक पंड्या को भी आराम दिया गया है क्योंकि दक्षिण अफ्रीका दौरे के दौरान इन पर काम का बोझ अधिक था. इनके अलावा चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप चहल भी श्रीलंका जाने वाली टीम का हिस्सा नहीं होंगे.

प्रसाद ने कहा कि टीम को अंतिम रूप देते हुए हमने खिलाड़ियों के बोझ और आगामी कार्यक्रम को ध्यान में रखा है. हाई परफोर्मेंस टीम ने सलाह दी है कि तेज गेंदबाजों के प्रदर्शन में सुधार और चोट से बचने के लिए उन्हें पर्याप्त आराम दिया जाना चाहिए.

श्रीलंका के खिलाफ घरेलू श्रृंखला के बाद आफ स्पिनर वॉशिंगटन सुंदर, तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज और आलराउंडर दीपक हुड्डा एक बार फिर टीम का हिस्सा होंगे. औलराउंडर विजय शंकर को पंड्या के विकल्प के तौर पर टीम में शामिल किया गया है. दिनेश कार्तिक पहले विकेटकीपर होंगे जबकि पंत बल्लेबाज के रूप में खेल सकते हैं. इनसब के अलावा राष्ट्रीय टी20 और वनडे प्रतियोगिताओं में शतक सहित सीमित ओवरों के क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करने वाले विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत की टीम में वापसी हुई. मयंक अग्रवाल को हालांकि टीम में जगह नहीं मिली है जबकि सत्र में वे 2000 से अधिक रन बना चुके हैं.

श्रीदेवी को ‘बौडी’ कहे जाने पर मीडिया पर भड़के ऋषि कपूर

बौलीवुड की दिग्गज अदाकारा श्रीदेवी की मौत ने देशभर के लोगों को एक गहरा सदमा दिया है. सिर्फ उनके चाहने वाले ही नहीं बल्कि फिल्मी हस्तियां भी इस बात पर यकीन नहीं कर पा रही हैं कि अब वह हमारे बीच नहीं हैं. हर कोई अपने गम और दुख को जाहिर करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं. अब इसी बीच अभिनेता ऋषि कपूर इस घटना से बेहद दुखी हैं. श्रीदेवी के निधन पर शोक जताते हुए ऋषि कपूर ने सोशल मीडिया पर कई ट्वीट किये. उन्होंने भावुक होते हुए लिखा कि अब ‘चांदनी’ नहीं रही, इसके अलावा उन्होंने अपने एक ट्वीट में मीडिया के ऊपर गुस्सा भी उतारा.

दरअसल, ऋषि कपूर ने दुबई से श्रीदेवी के पार्थिव शरीर को भारत आने की खबरों पर मीडिया में उनके शव को ‘बौडी’ कहे जाने पर भी गुस्सा जताया है.

ऋषि कपूर ने कहा है कि मौत के चंद घंटे बाद ही आपकी पहचान खो जाती है और आप महज ‘बौडी’ बनकर रह जाते हैं. टीवी में श्रीदेवी की ‘बौडी’ शब्द पर उन्होंने देर शाम एक ट्वीट कर सबको नसीहत दी कि श्रीदेवी के पार्थिव शरीर को ‘बौडी’ नहीं कहा जाना चाहिए.

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‘नागिन’ और ‘चांदनी’ में श्रीदेवी के साथ काम करने वाले ऋषि कपूर ने श्रीदेवी के निधन की खबर के बाद अपनी ट्विटर की फोटो भी ब्लैक लगा दी और उन्होंने अपने स्टेटस पर आरआईपी श्रीदेवी भी लिखा हुआ है. बता दें कि ऋषि कपूर ने अपना दुख जाहिर करते हुए सोशल मीडिया पर बोनी और उनकी दोनों बेटियों को इस दुख की घड़ी में खुद को संभालने की प्रार्थना की है. 

रविवार सुबह दुबई पहुंचे संजय कपूर ने कहा, ‘इस घटना के बाद से हम स्तब्ध हैं. इससे पहले उन्हें कभी दिल में समस्या नहीं हुई. इस खबर ने सभी को हैरान कर दिया है.’ बता दें कि श्रीदेवी परिवार के साथ भाई मोहित मारवाह की शादी में शामिल होने के लिए दुबई पहुंची थीं. जबकि बौलीवुड में डेब्यू करने जा रही उनकी बड़ी बेटी जाह्नवी कपूर शूटिंग में व्यस्त थी और उस समय मुंबई में ही थीं.

मैच के दौरान अपने खास दोस्त का सर दबाते दिखें विराट कोहली

गेंदबाजों के संघर्ष भरे प्रदर्शन के दम पर भारतीय क्रिकेट टीम ने शनिवार (24 फरवरी) को न्यूलैंड्स क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए रोमांचक टी-20 मैच में दक्षिण अफ्रीका को सात रन से हरा दिया. इस जीत के साथ ही भारत ने तीन टी-20 मैचों की सीरीज पर 2-1 से अपने नाम कर ली. टौस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने निर्धारित 20 ओवरों में दक्षिण अफ्रीका को 173 रनों का लक्ष्य दिया था, जिसे हासिल करने में मेजबान टीम केवल सात रनों से चूक गई.

भारत ने 7 विकेट पर 172 रन बनाए, जवाब में दक्षिण अफ्रीकी टीम 20 ओवर में छह विकेट पर 165 रन ही बना सकी. टेस्ट सीरीज गंवाने के बाद वनडे सीरीज जीतने वाली भारतीय टीम ने इस जीत के साथ ही 8 सप्ताह के दौरे का शानदार अंत किया.

केपटाउन में खेले गए तीसरे टी-20 मैच में पीठ की मांसपेशियों में खिंचाव के चलते कप्तान विराट कोहली टीम से बाहर थे. कोहली की जगह टीम की कमान रोहित शर्मा के हाथों में थी. भले ही मैदान पर उतर कर विराट खेल नहीं पाए, लेकिन पवेलियन में भी वह पूरी तरह उर्जा से भरपूर दिखाई दिए.

जब मैच अपने आखिरी दौर पर था, उस दौरान विराट कोहली और शिखर धवन का एक प्यारा सा मूमेंट कैमरे में कैद हो गया. भारतीय पारी के 19.4 ओवर में विराट कोहली, अपने सबसे ‘खास’ दोस्त शिखर धवन के सिर को दबाते हुए कैमरे में कैद हुए. 9.4 ओवर में 168 के स्कोर पर दिनेश कार्तिक के रूप में भारत का 7वां विकेट गिरा. इसी दौरान जब कैमरा भारतीय ड्रेसिंग रूम की तरफ घूमा तो विराट, शिखर की मसाज करते हुए दिखाई दिए.

सोशल मीडिया पर कुछ फैन्स ने विराट और शिखर के इस स्पेशल मूमेंट और दोस्ती पर अपना रिएक्शन भी दिया और विराट-शिखर की तस्वीरें-वीडियो भी शेयर किए.

यह कोई पहला मौका नहीं है, जब मैदान से दूर होकर भी कप्तान विराट कोहली ने अपने टीम के साथियों के लिए कुछ किया है. 2017 में औस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज के दौरान धर्मशाला टेस्ट में चोट की वजह से विराट नहीं खेल पाए थे. इस दौरान भी विराट खुद को अपनी टीम से दूर नहीं रख पाए और मौका मिलते ही पानी लेकर मैदान पर जा पहुंचे.

इस मैच के दौरान 12वें खिलाड़ी बने विराट कोहली अपने साथी खिलाड़ियों को पानी और ड्रिंक्स पिलाते नजर आए थें.

बता दें कि भारत ने अपने दक्षिण अफ्रीका दौरे की शुरुआत इसी मैदान पर टेस्ट मैच में हार के साथ की थी लेकिन दौरे का अंत जीत के साथ किया. भारत ने टेस्ट सीरीज 1-2 से गंवाने के बाद जोरदार वापसी करते हुए वनडे सीरीज 5-1 से जीती और फिर टी-20 सीरीज भी अपने नाम की.

13 अंको का नहीं होगा आपका मोबाईल नंबर, जानें विस्तार से

हाल ही में यह खबर ट्रेंड में थी कि आपका मोबाइल नंबर जल्द ही बदलने वाला है. इस खबर में दावा किया जा रहा था कि अब मोबाइल नंबर 10 अंकों का नहीं बल्कि 13 अंकों के साथ आएंगे. इस खबर में यह भी बताया जा रहा था कि 1 जुलाई 2018 के बाद नया नंबर लेने पर 13 अंक वाला मोबाइल नंबर मिलेगा. लेकिन यह खबर पूरी तरह सही नहीं है.

सही जानकारी यह है कि सिम आधारित मशीनों के बीच (एम2एम) संवाद के लिए जल्द ही 13 अंकों की नई नंबर सीरीज को इस्तेमाल किया जाएगा. इसका इस्तेमाल इंटरनेट के जरिए निगरानी कैमरे और कार ट्रेकिंग जैसे विभिन्न उपकरणों के नियंत्रण के लिए किया जा सकेगा. हालांकि, मोबाइल नंबरों के लिए 10 अंकों की मौजूदा व्यवस्था ही कायम रहेगी.

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एम2एम संवाद में इस्तेमाल होगा

ऐसा माना जाता है कि दूरसंचार विभाग ने भारत संचार निगम (बीएसएनएल) सहित अन्य कंपनियों को सूचित किया है कि 13 अंकों की नंब​र सीरीज का इस्तेमाल मशीन टु मशीन (एम2एम) संवाद में किया जाएगा. एम2एम संवाद में जहां 13 अंकों वाली नंबर योजना का उपयोग एक जुलाई 2018 से होगा वहीं मोबाइल फोन नंबरों के लिए 10 अंकों की मौजूदा व्यवस्था कायम रहेगी.

एक जुलाई 2018 से लागू होगा

बीएसएनएल ने अपने उपकरण वेंडरों को हाल ही में भेजे गए एक पत्र में कहा है कि दूरसंचार विभाग द्वारा बुलाई गई बैठक में यह फैसला किया गया कि 13 अंकों की एम2एम नंबर योजना का कार्यान्वयन एक जुलाई 2018 से किया जाएगा. इससे पहले दावा किया जा रहा था कि बैठक में कहा गया कि 10 अंकों के लेवल में अब नए मोबाइल नंबरों की गुंजाइश नहीं बची है. इसी कारण 10 से अधिक अंकों की सीरीज शुरू की जाए और बाद में सभी मोबाइल नंबरों को 13 अंकों का कर दिया जाए.

इस खबर के बार यह माना जा रहा था कि मोबाइल नंबर की नई सीरीज आने से सभी सेवाप्रदाता कंपनियों को अपना सिस्टम अपडेट करना होगा. यह भी दावा किया गया था कि इस संबध में मोबाइल हैंडसेट बनाने वाली कंपनियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने सौफ्टवेयर को 13 अंकों के मोबाइल नंबर के अनुसार अपडेट कर लें, ताकि उपभोक्ताओं को परेशानी न हो.

1 अप्रैल से पहले इन सेवाओं से करलें अपने आधार को लिंक

तमाम सेवाओं और योजनाओं से आधार लिंक कराने का मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है. लेकिन, कोर्ट ने आधार कार्ड को मोबाइल नंबर और बैंक अकाउंट से लिंक कराने की अंतिम तारीख बढ़ाने से मना कर दिया है. इसलिए बैंक अकाउंट, मोबाइल नंबर और अन्य जरूरी योजनाओं को आधार से जोड़ना जरूरी हो गया है.

ऐसा नहीं करने पर 31 मार्च 2018 के बाद सभी सेवाएं बंद हो जाएंगी. वर्तमान में करीब 139 ऐसी सेवाएं हैं जिनके साथ आधार लिंक करना जरूरी है. दरअसल, दिसंबर 2017 में तमाम मंत्रालयों ने 139 सेवाओं से आधार लिंक करने को लेकर एक सर्कुलर जारी किया था. जब तक इस मामले में आखिरी फैसला नहीं आ जाता है, तब तक मंत्रालयों की तरफ से जारी किया गया सर्कुलर को मानना जरूरी है. जो लोग आधार की अनिवार्यता का विरोध कर रहे हैं वे इसे प्राइवेसी के खिलाफ मानते हैं. बीते कुछ सालों में आधार कार्ड का दबदबा इतना बढ़ा है कि इसने लोगों की जिंदगी को प्रभावित करना शुरू कर दिया है.

आधार कार्ड से नहीं जोड़ने पर ये सेवाएं बंद हो जाएंगी

मोबाइल नंबर: अगर आपने मोबाइल नंबर को आधार से नहीं जोड़ा है तो 31 मार्च के बाद मोबाइल नंबर काम करना बंद कर देगा. टेलीकौम कंपनियों ने प्रीपेड मोबाइल नंबर को आधार से जोड़ने के लिए 14546 टोल फ्री नंबर जारी किया है. इस नंबर पर नाम, नंबर और जन्मतिथि जैसी जानकारियां देनी होंगी. पोस्ट पेड यूजर्स को अपने सर्विस प्रोवाइडर के पास जाना होगा. वहां आपके फिंगर प्रिंट के जरिए मोबाइल नंबर को आधार से जोड़ा जाएगा.

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बैंक अकाउंट्स: बैंक अकाउंट्स  को भी आधार से जोड़ना जरूरी है. ये काम आप औनलाइन और बैंक जाकर कर सकते हैं. कई बैंक ATM के जरिए आधार जोड़ने की सुविधा दे रहे हैं. आधार नंबर से जोड़ने के लिए डेबिट कार्ड को ATM मशीन में पहले स्वाइप करें. पासवर्ड डालने के बाद आपको सर्विस रजिस्ट्रेशन वाले औप्शन में जाना होगा. सर्विस रजिस्ट्रेशन में आधार कार्ड रजिस्ट्रेशन का औप्शन है जिसे सिलेक्ट कर आप आधार से बैंक अकाउंट को जोड़ सकते हैं.

डेबिट/ क्रेडिट कार्ड: अगर आपका क्रेडिट और डेबिट कार्ड आधार से नहीं जुड़ा है तो कस्टमर केयर के जरिए इसे जोड़ सकते हैं. कस्टमर केयर आपके द्वारा दी गई जानकारी को वेरीफाई करेगा और आपके डेबिट/ क्रेडिट कार्ड को आधार से जोड़ देगा. यह काम संबंधित बैंक ब्रांच में जाकर भी किया जा सकता है. अगर आपने अपने डेबिट और क्रेडिट कार्ड को नहीं जोड़ा तो 31 मार्च के बाद कार्ड बंद हो जाएंगे.

पीएफ: पीएफ को भी आधार से जोड़ना जरूरी है. अगर आपका पीएफ अकाउंट आधार से नहीं जुड़ा है तो पीएफ की वेबसाइट पर जाकर लौगिन करें. जरूरी जानकारी देने के बाद आधार को जोड़ा जा सकता है.

म्यूचुअल फंड: म्यूचुअल फंड को भी आधार कार्ड से जोड़ना जरूरी है. आप जिस फंड हाउस से म्यूचुअल फंड ले रहे हैं उसे आधार से जोड़ना होगा. आपके पासे जितने भी फंड हाउस हैं सभी को आधार से जोड़ना जरूरी है.

बीमा पौलिसी: बीमा पौलिसी को भी आधार से जोड़ना जरूरी कर दिया गया है. अगर बीमा पौलिसी आधार से नहीं जुड़ा है तो बीमा कंपनी की वेबसाइट पर जाकर इसे जोड़ सकते हैं. तमाम बीमा कंपनियां औनलाइन आधार जोड़ने की सेवा दे रहे हैं.

रसोई गैस: अगर आपने रसोई गैस को आधार से नहीं जोड़ा है तो आपको सब्सिडी का लाभ नहीं मिलेगा. आधार से जोड़ने के लिए आप गैस डीलर से संपर्क कर सकते हैं. या फिर, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से गैस कंपनी को फोन करें, उसमें आधार नंबर जोड़ने का औप्शन आता है.

राशन कार्ड: राशन कार्ड के लिए भी आधार जरूरी है. अगर आपका राशन कार्ड आधार से नहीं जुड़ा है तो आप सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकान पर जाकर आधार कार्ड की कौपी दे सकते हैं.

सरकार की कई ऐसी योजनाएं हैं जो पोस्ट औफिस द्वारा संचालित हो रही हैं. इन योजनाओं का लाभ जारी रखने के लिए भी आधार से जोड़ना जरूरी है. अगर कोई ज्वाइंट पौलिसी है तो दोनों के आधार नंबर जरूरी हैं.

पैन कार्ड: पैन कार्ड को भी आधार से जोड़ना जरूरी है. अगर आपका पैन कार्ड आधार से नहीं जुड़ा है तो इनकम टैक्स की वेबसाइट पर जाकर आधार से जोड़ सकते हैं. वेबसाइट पर जाने के बाद आपसे आधार कार्ड और पैन कार्ड डिटेल्स पूछे जाएंगे. यह प्रक्रिया पूरी करने के बाद आपका आधार, पैन से जुड़ जाएगा.

ड्राइविंग लाइसेंस: ड्राइविंग लाइसेंस को भी आधार से जोड़ना जरूरी कर दिया गया है. जो लाइसेंस पुराने हैं वे मान्य होंगे लेकिन हाल में जारी किए गए लाइसेंस को आधार से जोड़ना जरूरी है. नया लाइसेंस जारी करने के लिए जरूरी दस्तावेजों में आधार को शामिल किया गया है. अगर आप कोई गाड़ी खरीदते हैं उसके लिए भी आधार जरूरी है.

हालांकि जनधन खाते को आधार से जोड़ना जरूरी नहीं है. हर किसी का बैंक अकाउंट हो इसके लिए पीएम मोदी ने जनधन योजना की शुरुआत की थी. जनधन अकाउंट में 50 हजार रुपए से ज्यादा नहीं जमा कर सकते हैं.

बेवजह नहीं चुंबन सीन : इशिता दत्ता

तेलुगु फिल्म से अपने कैरियर की शुरुआत करने वाली हीरोइन इशिता दत्ता की बचपन से इच्छा थी कि उन्हें ऐक्टिंग करने का मौका मिले और यह प्रेरणा उन्हें अपनी हीरोइन बहन तनुश्री दत्ता से मिली जो उन्हें हमेशा अपनी इच्छा से जुडे़ काम करने की सलाह दिया करती थीं. इतना ही नहीं, आज भी किसी काम को करने से पहले इशिता अपनी बहन की राय जरूर लेती हैं.

झारखंड के जमशेदपुर शहर की रहने वाली इशिता दत्ता अभी अपने मातापिता के साथ मुंबई में रहती हैं. हाल ही में उन की फिल्म ‘फिरंगी’ बड़े परदे पर आई है. पेश हैं, उन से हुई बातचीत के खास अंश :

फिल्म ‘फिरंगी’ को करने की क्या वजह थी?

इस से पहले मैं ने हिंदी फिल्म ‘दृश्यम’ की थी. इस फिल्म में मैं ने अजय देवगन की बेटी का किरदार निभाया था. उस फिल्म में कास्टिंग डायरैक्टर विकी सदाना ने मेरी कास्टिंग कराई थी. फिल्म ‘फिरंगी’ में भी उन्होंने मुझे मेरे किरदार के बारे में बताया और औडीशन के लिए तैयार होने को कहा. कई औडीशन के बाद मैं चुनी गई.

जब मैं इस फिल्म की टीम से मिली तो पहली मुलाकात में इस की कहानी मुझे रोचक लगी. साथ ही, इतने दिनों तक बे्रक के बाद मुझे एक अच्छी फिल्म करने का औफर मिल रहा था जो बड़ी बात थी.

इस से पहले आप ने टैलीविजन में भी काम किया है. टैलीविजन से फिल्मों में आना कैसे हुआ? आप दोनों में क्या फर्क महसूस करती हैं?

दरअसल, मैं ने पहले फिल्म और उस के बाद टैलीविजन में काम किया है. फिल्म ‘दृश्यम’ के बाद मुझे हर कोई वैसी ही छोटी लड़की के किरदार निभाने का औफर दे रहा था और मुझे वैसा काम नहीं करना था इसलिए मैं मना करती रही. उसी दौरान मुझे टैलीविजन सीरियल ‘एक घर बनाऊंगा’ का औफर मिला. वह मुझे पसंद आया औैर मैं ने कर लिया.

मुझे काम करते रहना पसंद है. मैं घर बैठ कर समय को बरबाद नहीं करना चाहती थी.

आजकल फिल्म से टीवी और टीवी से फिल्मों में आना आम बात है. बडे़बड़े कलाकार भी टीवी पर आ रहे हैं. इस के अलावा आजकल टीवी की शूटिंग फिल्मों के जैसे ही हो रही है. टीवी में समय की कमी की वजह से काम बहुत ज्यादा होता है जबकि फिल्म में काम आराम से होता है.

क्या ऐक्टिंग करना एक इत्तिफाक था या बचपन से इच्छा थी?

मेरे लिए ऐक्टिंग जौब नहीं बल्कि एक इच्छा थी. मेरी बहन ने इस बात पर बल दिया और मैं इस क्षेत्र में चली आई. मैं ने मास मीडिया में पढ़ाई पूरी करने के बाद कई जगहों पर अपना पोर्टफोलियो भेजा और मुझे पहले तेलुगु फिल्म में काम करने का मौका मिला. यहीं से मेरे अंदर प्रेरणा जगी और अब मैं इस क्षेत्र में अच्छा काम करना चाहती हूं.

मेरे कैरियर की सपोर्ट सिस्टम मेरी दीदी ही हैं. उन्होंने मुझे फिल्म इंडस्ट्री की बारीकियों को समझाया है. दीदी कहती हैं कि जब भी कोई काम करने की इच्छा हो तो उसे कर लेना चाहिए ताकि बाद में अफसोस न हो.

यहां तक पहुंचने में परिवार का सहयोग कितना रहा?

उन्होंने बहुत सहयोग दिया है, जमशेदपुर से वे मुंबई रहने चले आए ताकि हमें सुविधा हो. मैं ने हमेशा काम के साथ परिवार का बैलैंस रखा है. फुरसत मिलते ही उन के साथ समय बिताना पसंद करती हूं. काम मेरे ऊपर इतना हावी नहीं होता है कि मैं परिवार और दोस्तों को भूल जाऊं इसलिए मुझे कभी तनाव नहीं होता.

फिल्मों में चुंबन सीन करने में आप कितनी सहज होती हैं?

अभी तक तो मैं ने कोई फिल्म ऐसी नहीं की है. लेकिन स्क्रिप्ट की जरूरत पर करना पडे़गा. पर मैं सहज नहीं हूं. ग्लैमर के लिए मैं ऐसे सीन नहीं कर सकती.

आगे किस तरह की फिल्में करने की इच्छा रखती हैं?

मैं ने अभी तो शुरुआत की है. मेरी एक ऐक्शन फिल्म करने की इच्छा है. मैं इम्तियाज अली के डायरैक्शन में बनी फिल्म करना चाहती हूं.

आप कितना फैशनेबल हैं? आप को किस तरह का खानपान पसंद है?

बंगाली हूं और हर तरह का खाना पसंद करती हूं. मिठाई खूब पसंद हैं. समय मिले तो खाना भी बना लेती हूं. मैं चिकन बिरयानी और आइसक्रीम बना लेती हूं. कंफर्ट लैवल को ध्यान में रख कर ड्रैस पहनती हूं. मैं इंडियन और वैस्टर्न हर तरह की पोशाक पहनती हूं. मुझे चटकीले रंग के कपड़े पसंद हैं जिस में पीला रंग मेरा पसंदीदा है.

मेकअप कितना पसंद करती हैं?

पहले मुझे मेकअप का शौक था, पर अब नहीं है क्योंकि हमेशा लगाना पड़ता है. रात को सोने से पहले अच्छी तरह से मेकअप उतारना नहीं भूलती.

आप खाली समय में क्या करना पसंद करती हैं?

मुझे पालतू जानवरों से बहुत लगाव है. मेरे पास एक डौगी है जिस का नाम मैं ने हैप्पी रखा है. उस के साथ मैं खेलती हूं. जब भी मैं काम से घर लौटती हूं तो वह मेरा स्वागत खुशी से करता है. उसे देखते ही मेरी थकान दूर हो जाती है.

इस के अलावा मैं अपना खाली समय दोस्तों और अपने परिवार के साथ बिताती हूं.

 

नौकरी के लाले और देश में बेरोजगारी का आलम

देश में बेरोजगारी का आलम यह है कि पक्की ठीकठाक लंबी नौकरी देने वाली सेना की भरती पर आमतौर पर हर जगह धक्कामुक्की तो होती ही है, अकसर लाठीचार्ज होता है, पुलिस बंदोबस्त करना पड़ता है और कई दफा इस दौरान एकदो मौतें हो जाती हैं. सासाराम, बिहार में मिलिटरी पोलिस कंपाउंड में घुसने के समय भीड़ में कुचलने से 1 की मौत हो गई और 4 बुरी तरह घायल हो गए.

यह 6000 की भीड़ सर्दियों के दिनों में सुबह 3 बजे देशभक्ति के जज्बे की वजह से रिक्रूटमैंट सैंटर पर नहीं खड़ी थी. यह तो एक ऐसी नौकरी पाना चाहती थी जिस में खाने, पीने, रहने, कपड़ों, घूमने के साथ एक अच्छी पगार भी मिलती हो.

देश के गांवोंकसबों में आज जो मारामारी सरकारी नौकरियों की है वह साफ जाहिर करती है कि देश का माहौल ऐसा है कि अपनी मेहनत के बलबूते पर अच्छी जिंदगी बिताना हरेक के बस का नहीं. सरकार नौकरियां देने के कितने वादे करती रहे, असल यही है कि आज न खेतों में नौकरियां हैं, न कारखानों में, न दुकानों में और न दफ्तरों में.

यह देश की असल आर्थिक स्थिति की पोल तो खोलती ही है, यह भी साबित करती है कि अपनी मनचाही नौकरी पाना अब मुश्किल होता जा रहा है. यहां के लोगों को अपने पर इतना कम भरोसा है कि वे पक्की सरकारी नौकरी ही लपकना चाहते हैं जिस में काम कम हो, वेतन ठीकठाक, पर यदि ऊपरी कमाई हो तो पौबारह. अगर राजस्थान में चपरासी की नौकरी के लिए इंजीनियर परचा भरते हैं और विधायक का बेटा ही सिफारिश के बलबूते पर नौकरी पाता है. इस पर चौंकने की जरूरत नहीं. यह तो होना ही है.

यहां मुफ्त की रोटियों को बड़ी इज्जत मिलती है. समाज पंडोंमुल्लाओं को सिरआंखों पर रखता है. जो न एक तिनका उगाते हैं और न एक पैसे का सामान बनाते हैं या बेचते हैं. काम करने वालों को तो यहां शूद्र और अछूत कहा जाता रहा है और आरक्षण के बलबूते उन्हें कुछ लाख सरकारी नौकरियां ही मिली हैं, जबकि उन की गिनती पूरी जनसंख्या में 80-85 फीसदी है. बाकी 10-15 फीसदी से आने वालों ने ही सरकारी नौकरियों पर कब्जा कर रखा है और इसीलिए सब से निचली रैंक के लिए हो रही भरती पर हर जगह हजारों जमा हो जाते हैं.

यह देश के लिए परेशानी की बात होनी चाहिए. दूसरे कई देशों में सदियों तक सेना में भरती के लिए जबरदस्ती की जाती थी पर यहां हमेशा ही इसे नियामत समझा गया है क्योंकि इस में पैसा, परमानैंसी और पौवर तीनों हैं. यह बेरोजगारी का हल नहीं है, यह बदन पर हर जगह बहते नासूरों को मैले कपड़ों से ढकना भर है.

जातिवाद में सुलगता देश और जाति के खुले घावों से कराहते लोग

देश के गांवदेहातों में ही नहीं कसबों और शहरों की गरीब बस्तियों में भी पढ़ाईलिखाई, साथ नौकरियां करने, साथ चलने के बावजूद जाति और धर्म के भेद आज भी 100 साल पुराने लगते हैं. गुजरात चुनावों में अगर जाति का भूत बोतल से फिर बाहर निकल कर आता दिखा तो सिर्फ इसलिए कि नरेंद्र मोदी और उन की भारतीय जनता पार्टी को लगा कि विकास के मुद्दों पर जिन ऊपरी जातियों को इकट्ठा किया था, वे छिटक रही हैं और राहुल गांधी पर हिंदू धर्म विरोधी यानी जाति को भड़काने का आरोप लगा दो.

राहुल गांधी ने खुद तो कुछ नहीं कहा पर भाजपा समर्थक मीडिया ने इतना कुछ कांग्रेसियों के मुंह से निकलवा लिया कि जाति का सवाल देशभर में सुलगने लगा है. थोड़े ऊंचे पाटीदारों और बहुत नीचे दलितों का साथ हो जाना बहुत ऊंचों को अपनी सत्ता पर हमला दिखा है और इसीलिए जब महाराष्ट्र में भीमा कोरेगांव में दलितों की एक जाति महार के लाखों लोग पेशवाओं की हार की 200वीं बरसी मनाने पहुंचे तो ऊंची जातियोें का गुस्सा भड़क उठा.

गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार पहले से जाति के खुले घावों से कराह रहे हैं. अन्य राज्यों में यह कैंसर है पर छिपा है और पीढ़ी दर पीढ़ी चला आ रहा है. यह जिंदगी का हिस्सा है जहां घाव की चीराफाड़ी होने लगी है. लोग समझने लगे हैं कि उन के घावों को कुरेद कर उन्हें काम करने, वह भी लगभग मुफ्त में, मजबूर करा जा रहा है तो आज जो अकेली जबान उन्हें मिली है, वोट की जबान, का इस्तेमाल करने लगे हैं.

भीमा कोरेगांव देश के हर हिस्से में हर रोज छोटे पैमाने पर दोहराया जाता है. इस के समाचार नहीं बनते क्योंकि यह आम बात मानी जाती है. कांग्रेस की खूबी थी कि उस ने बरसों इस की दवा ढूंढ़ रखी थी, ऐसी अफीम जिसे खा कर वे चुप हो जाते थे. भाजपा के पास इस की दवा मंदिर हैं जहां इन्हें अंदर आने की इजाजत दे कर मगर अलग कतार में खड़ा कर बेइज्जत कर के भिखारियों की तरह 2 दाने दे दिए जाते हैं. चूंकि मंदिर में जगह मिल रही थी, दलित सोच रहे थे कि उन का भी भगवान कल्याण करेंगे. पर जहां मंदिर ऊंची जातियों के दूसरों से बेहतर पैदायशी होने के सुबूत बन गए, दलितोंपिछड़ों के नीचे होने का अहसास बढ़ाते गए.

जिन पिछड़ों व दलितों ने केसरिया दुपट्टा पहना था वे अब दुविधा में हैं कि वे किस राह पर चलें? उन के कल के नेता जगजीवन राम, कांशीराम, उदित राज, मायावती, रामविलास पासवान थे पर सब सत्ता सुख भोगने में लग गए, पूरियों की टुकड़न से मुंह बंद कर दिया गया उन का. अब जिग्नेश मेवाणी, चंद्रशेखर आजाद जैसे नेता निकल रहे हैं.

बजाय जाति भेद को पैदा होने से रोकने के, ऊंची जातियों का रवैया बड़ा दोगलापन लिए है. वे अपने नाम के आगे जाति लगाते हैं, कुंडली बनवाते हैं, मंदिरों में हजारों का दान करते हैं, जाति में शादी करते हैं पर आरक्षण पर हल्ला मचाते हैं, जिग्नेश मेवाणी और चंद्रशेखर आजाद पर जातिवादी होने का दोष मढ़ते हैं.

जाति तब खत्म होगी जब नीची जातियों को थोड़ा पैसा मिलेगा. उन्हें काम, काम के बदले दाम और इज्जत से नाम तीनों चाहिए. ये तीनों ऊंची जातियां देने को तैयार नहीं हैं– न पहले थीं, न आगे रहेंगी. ये हल्ले होते रहेंगे. दलित नेताओं को कानून और डंडों के साथ बासी पूरी दे कर चुप कराया जाता रहेगा. भीमा कोरेगांव के बाद उफना तूफान ठंडी होती आग पर चढ़ा पानी है जो एक उबाल के बाद ठंडा हो जाएगा.

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