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प्रीत या नादानी : इश्क के चक्कर में कर दी दोस्त की हत्या

दिल्ली-अमृतसर राष्ट्रीय राजमार्ग पर जालंधर से करीब 50 किलोमीटर पहले ही जिला जालंधर की तहसील है थाना फिल्लौर. इसी थाने का एक गांव है शाहपुर. इसी गांव के 4 छात्र थे- हनी, रमेश उर्फ गगू, तजिंदर उर्फ राजन और निशा. 15 से 17 साल के ये सभी बच्चे फिल्लौर के ही एक सरकारी स्कूल में पढ़ते थे.

एक ही गांव के होने की वजह से इन सभी का आपस में गहरा लगाव था. साथसाथ खेलना, साथसाथ खाना, साथसाथ पढ़ने जाना. लेकिन ज्योंज्यों इन की उम्र बढ़ती गई, त्योंत्यों इन के मन में तरहतरह के विचार पैदा होने लगे.

हनी के घर वालों की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी, जबकि रमेश और राजन अच्छे परिवारों से थे. हनी के पिता हरबंसलाल की फिल्लौर बसअड्डे के पास फ्लाई ओवर के नीचे पंचर लगाने की छोटी सी दुकान थी. उसी दुकान की आमदनी से घर का खर्चा चलता था.

जबकि राजन और रमेश के पिता के पास खेती की अच्छीखासी जमीनों के अलावा उन का अपना बिजनैस भी था. इसलिए राजन तथा रमेश जेब खर्च के लिए घर से खूब पैसे लाते थे और स्कूल में अन्य दोस्तों के साथ खर्च करते थे.

शुरुआत में निशा हनी के साथ ज्यादा घूमाफिरा करती थी, पर बाद में उस का झुकाव रमेश की ओर से हो गया. धीरेधीरे हालात ऐसे बन गए कि इन चारों छात्रों के बीच 2 ग्रुप बन गए. एक ग्रुप में अकेला हनी रह गया था तो दूसरे में राजन, रमेश और निशा.

रमेश और निशा अब हर समय साथसाथ रहने लगे थे. दोनों के साथ राजन भी लगा रहता था. तीनों ही साथसाथ फिल्म देखने जाते. हनी को एक तरह से अलग कर दिया गया था. इस बात को हनी समझ रहा था. निशा ने हनी से मिलनाजुलना तो दूर, बात तक करना बंद कर दिया था.

एक दिन हनी ने फोन कर के निशा से कहा, ‘‘हैलो जानेमन, कैसी हो और इस समय क्या कर रही हो?’’

‘‘कौन…हनी?’’ निशा ने पूछा.

‘‘और कौन होगा, जो इस तरह तुम से बात करेगा. मैं हनी ही बोल रहा हूं.’’ हनी ने कहकहा लगाते हुए कहा, ‘‘अच्छा बताओ, तुम इस समय कहां हो? आज हमें पिक्चर देखने चलना है.’’

‘‘हनी, मैं तुम से कितनी बार कह चुकी हूं कि मुझे फोन कर के डिस्टर्ब मत किया करो. मैं तुम से कोई वास्ता नहीं रखती, फिर भी तुम मुझे परेशान करते हो. आखिर क्या बिगाड़ा है मैं ने तुम्हारा…?’’ निशा ने झुंझलाते हुए कहा.

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‘‘अरे डार्लिंग, परेशान मैं नहीं, तुम कर रही होे. आखिर तुम्हें मेरे साथ फोन पर दो बातें करने में इतनी तकलीफ क्यों होती है, जबकि दूसरे लड़कों के साथ आवारागर्दी करती रहती हो. तब तुम्हें कोई परेशानी नहीं होती.’’ हनी ने कहा तो उस की इन बातों से निशा खामोश हो गई. फिर उस ने हिम्मत जुटा कर कहा, ‘‘सुनो हनी, तुम जिन लड़कों की बात कर रहे हो, वे मेरे दोस्त हैं. अब तुम यह बताओ, मैं किसी के भी साथ घूमूंफिरूं, इस में तुम्हें क्या परेशानी है? यह मेरी मरजी है. मेरे दोस्त सभ्य परिवारों से हैं, समझे.’’

निशा की बात सुन कर हनी को गुस्सा तो बहुत आया, पर कुछ सोच कर उस ने अपने गुस्से पर काबू करते हुए कहा, ‘‘हां, सही कह रही हो. भला मैं कौन होता हूं. पर तुम शायद यह भूल गई कि तुम और तुम्हारे जो दोस्त हैं, वे मेरे ही गांव के हैं.’’

‘‘इस का मतलब तुम मुझे धमकी दे रहे हो?’’ निशा ने उत्तेजित हो कर कहा.

‘‘मैं तुम्हें कोई धमकी नहीं दे रहा. तुम ना जाने क्यों नाराज हो रही हो.’’ हनी ने कहा.

इस के बाद निशा थोड़ा नार्मल हुई तो हनी ने कहा, ‘‘अरे पगली, मुझे इस से कोई ऐतराज नहीं है. तुम किसी के साथ भी घूमोफिरो. मैं सिर्फ इतना चाहता हूं कि थोड़ा टाइम मुझे भी दे दिया करो. बात यह है कि आज मैं ने पिक्चर का प्रोग्राम बनाया है. तुम मेरे साथ पिक्चर देखने जालंधर चलो. मैं फिल्लौर बसअड्डे पर तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं.’’

‘‘ठीक है, मैं आ रही हूं, लेकिन आइंदा जो भी प्रोग्राम बनाना, मुझ से पूछ कर बनाना.’’ निशा ने कहा.

‘‘ओके जानेमन, मैं आइंदा से ध्यान रखूंगा. तुम टाइम पर बसअडडे आ जाना. बाकी बातें वहीं करेंगे.’’ हनी ने कहा.

निशा समझ गई कि हनी उसे ब्लैकमेल कर रहा है, इसलिए न चाहते हुए भी मजबूरी में उसे उस के साथ फिल्म देखने जाना पड़ा. इस के बाद यह नियम सा बन गया.

हनी जब भी निशा को बुलाता, न चाहते हुए भी उसे उस की बात माननी पड़ती. निशा जानती थी कि अगर उस ने उस की बात नहीं मानी तो इस का क्या परिणाम हो सकता है. क्योंकि हनी ने उस से स्पष्ट कह दिया था कि अगर उस ने उस की कोई बात नहीं मानी तो वह उस के और रमेश के संबंधों के बारे में उस के मातापिता से बता देगा.

उधर रमेश और उस के दोस्त को पता चल गया था कि निशा हनी के साथ घूमती है. यह बात उन्हें अच्छी नहीं लगी. इसलिए उन्होंने निशा को धमकी दी कि अगर उस ने हनी से बोलना बंद नहीं किया तो नतीजा ठीक नहीं होगा. निशा ने यह बात रमेश को नहीं बताई थी कि वह हनी के साथ अपनी मरजी से नहीं जाती, बल्कि यह उस की मजबूरी है.

निशा पेशोपेश में पड़ गई. वह जानती थी कि जिस दिन उस ने हनी से बोलना बंद किया, उसी दिन वह उस के मांबाप से उस की शिकायत कर देगा. लेकिन ऐसा कब तक चलता. एक न एक दिन इस बात का भांडा फूटना ही था.

यही सोच कर एक दिन निशा ने यह बात रमेश और राजन को बता दी कि हनी उसे किस तरह ब्लैकमेल कर रहा है. यह सुन कर रमेश और राजन का खून खौल उठा. उन्होंने उसी दिन हनी को रास्ते में घेर लिया. उन्होंने उसे धमकाते हुए कहा, ‘‘तुम निशा से दूर ही रहो, वरना यह तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा. तुम लापता हो जाओगे और तुम्हारे मांबाप तुम्हें ढूंढते रह जाएंगे.’’

दोनों की इस धमकी से उत्तेजित होने के बजाय हनी ने उन्हें समझाते हुए कहा, ‘‘देखो रमेश, हम सब दोस्त हैं और एक ही गांव के रहने वाले हैं. बचपन से साथसाथ खेलेकूदे हैं और पढ़ेलिखे हैं. अब यह बताओ कि तुम निशा के साथ बातें करते हो, घूमने जाते हो, मैं ने कभी बुरा माना तो फिर मेरे बात करने पर तुम्हें भी बुरा नहीं मानना चाहिए.’’

‘‘अच्छा तो पंक्चर लगाने वाले का बेटा मेरी बराबरी करेगा?’’ रमेश ने नफरत से यह बात कही. इस के बावजूद हनी ने मुसकराते हुए जवाब दिया, ‘‘रमेश बात हम लोगों के बीच की है, इसलिए इस में बड़ों को मत घसीटो.’’

बहरहाल, उस दिन तो मामला यहीं पर शांत हो गया. लेकिन हनी और रमेश के बीच कड़वाहट पैदा हो गई. आगे चल कर इस कड़वाहट का क्या नतीजा निकलेगा, कोई नहीं जानता था. हनी ने कुछ दिनों तक निशा से बात नहीं की.

7 जुलाई, 2017 को हनी ने निशा को फोन कर के मिलने के लिए कहा. इस बार निशा ने उस से मिलने से साफ मना कर दिया. हनी को गुस्सा आ गया. उस ने उसी दिन रमेश और निशा के प्रेमप्रसंग की बात निशा के पिता को बता दी.

बेटी की बदचलनी के बारे में जान कर मांबाप की नींद उड़ गई. निशा घर लौटी तो उन्होंने उसे डांटा. उस ने लाख सफाई दी, पर उन्होंने उस की बात पर विश्वास न करते हुए उसे घर में कैद कर दिया. यह बात जब रमेश और राजन को पता चली तो दोनों हनी के पास जा पहुंचे. दोनों पक्षों में काफी तूतूमैंमैं हुई और अंत में एकदूसरे को देख लेने की धमकी देते हुए अपनेअपने घर चले गए.

अगले दिन यानी 8 जुलाई, 2017 की शाम साढ़े 6 बजे हनी के पिता हरबंशलाल ने कहा, ‘‘जा बेटा, हवेली जा कर पशुओं के लिए चारा काट दे. पशु भूखे होंगे.’’

पिता के कहने पर हनी चारा काटने के लिए हवेली चला गया. चारा काटने का काम ज्यादा से ज्यादा एक घंटे का था. लेकिन जब हनी साढ़े 8 बजे तक घर नहीं लौटा तो हरबंशलाल को चिंता हुई. पहले तो उन्होंने अपने छोटे बेटे को हवेली जाने को कहा, फिर उसे रोक कर खुद ही उठ कर चल पड़े.

वहां हनी नहीं दिखा. उस ने चारा काट कर पशुओं को डाल दिया था. चारा काटने के बाद वह कहां चला गया, वह इस बात पर विचार करने लगे. उन्हें लगा ऐसा तो नहीं कि वह घर चला गया हो. वह घर लौट आए.

पर हनी घर नहीं आया था. उन्होंने उसे इधरउधर देखा, लेकिन वह कहीं दिखाई नहीं दिया. अब तब तक रात के 10 बज चुके थे. हनी के मातापिता के अलावा गांव के अन्य लोग भी रात के 1 बजे तक उसे गांव और आसपास ढूंढते रहे. पर हनी का कहीं पता नहीं चला. थकहार कर सब सो गए.

अगले दिन सुबह जब हनी के दोस्तों रमेश, राजन आदि को उस के गायब होने का पता चला तो सभी हनी के घर जमा हो गए. वे सब भी उसे खोजने लगे.

अगले दिन सुबह गांव का ही ओंकार सिंह अपने खेतों पर गया तो उस के खेत के दूसरे छोर पर नहर के पास एक जगह किसी आदमी का कटा हुआ कान पड़ा दिखाई दिया. वहीं पर काफी मात्रा में खून बिखरा था. खून देख कर ओंकार सिंह सोच रहा था कि यह सब वह किस ने किया होगा, तभी हरबंशलाल, रमेश, राजन तथा अन्य लोग हनी को तलाशते हुए वहां पहुंच गए.

कान और खून वाली जगह उन्होंने भी देखी, पर एक अकेले कान को देख कर कुछ कहा नहीं जा सकता था कि कान किस का होगा. खेत में कुछ दूरी पर खून से सनी एक चप्पल देख कर हरबंशलाल के मुंह से चीख निकल गई. वह कान को भले ही नहीं पहचान पाए थे, पर वह चप्पल उन के बेटे हनी की थी. कुछ दिनों पहले ही उन्होंने खुद वह चप्पल हनी को खरीद कर दी थी.

कान वाली जगह से खून टपकता हुआ खेत के बाहर तक गया था. सभी ने टपकते खून का पीछा किया तो वह नहर के किनारे तक टपका हुआ मिला. अनुमान लगाया गया कि मरने वाला जो भी था, उस की हत्या करने के बाद लाश को ले जा कर नहर में फेंक दिया गया था.

कुछ लोग गोताखोरों को बुलाने चले गए तो कुछ लोग पुलिस को सूचना देने थाने चले गए. पर गोताखोर और पुलिस आती, उस के पहले ही अपनी दोस्ती का फर्ज निभाते हुए रमेश और राजन नहर में कूद गए और लाश ढूंढने लगे.

सूचना मिलने पर थाना फिल्लौर के थानाप्रभारी राजीव कुमार अपनी टीम के साथ नहर पर पहुंच गए. गोताखोर भी आ कर नहर में लाश ढूंढने लगे. कुछ देर बाद गोताखोर नहर से लाश निकाल कर बाहर आ गए. लाश देख कर हरबंशलाल पछाड़ खा कर गिर गए. क्योंकि वह लाश और किसी की नहीं, उन के बेटे हनी की थी.

थानाप्रभारी ने लाश मिलने की सूचना अधिकारियों को दे दी. सूचना पा कर डीएसपी (फिल्लौर) बलविंदर इकबाल सिंह, सीआईए इंचार्ज हरिंदर गिल भी मौके पर पहुंच गए. लाश का मुआयना करने पर उस का एक कान गायब मिला. गरदन भी पूरी तरह कटी हुई थी. वह सिर्फ खाल से जुड़ी थी.

लाश व कान को बरामद कर पुलिस काररवाई में जुट गई. खेत से खूनआलूदा मिट्टी भी अपने कब्जे में ले कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया. पुलिस ने हरबंशलाल की तहरीर पर अज्ञात लोगों के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 201, 34 के तहत मुकदमा दर्ज कर तफ्तीश शुरू कर दी.

15 साल के हनी की हत्या के विरोध में लोगों ने बाजार बंद कर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी. सूरक्षा की दृष्टि से एसपी (जालंधर) बलकार सिंह ने फिल्लौर और शाहपुर में भारी मात्रा में पुलिस तैनात कर दिया. इस के अलावा एसपी ने लोगों को आश्वासन दिया कि जल्द ही केस का खुलासा कर अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

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उन के आश्वासन के बाद लोग शांत हुए. एसपी बलकार सिंह ने डीएसपी गुरमीत सिंह और डीएसपी बलविंदर इकबाल सिंह की अगुवाई में पुलिस टीमों का गठन किया, जिस में सीआईए इंचार्ज हरिंदर गिल, एसआई ज्ञान सिंह, एएसआई लखविंदर सिंह, परमजीत सिंह, हंसराज सिंह, हवलदार राजिंदर कुमार, निशान सिंह, प्रेमचंद और सिपाही जसविंदर कुमार को शामिल किया गया.

पुलिस ने सब से पहले मृतक हनी के यारदोस्तों से पूछताछ की. इस में निशा को ले कर रमेश और राजन की नाराजगी वाली बातें निकल कर सामने आईं. यह बात भी सामने आई कि इस हत्या से एक दिन पहले रमेश और हनी के बीच जम कर कहासुनी हुई थी.

संदेह के आधार पर पुलिस ने रमेश को पूछताछ के लिए थाने बुला लिया. पर उस की हिमायत में लगभग पूरा गांव थाने पहुंच गया. दबाव बढने पर पुलिस को तफ्तीश बीच में छोड़ कर उसे घर भेजना पड़ा.

हरबंशलाल ने अपने बयान में बताया था कि रात को जिस समय वह उसे तलाश रहे थे, उन्होंने अपने फोन से हनी को कई बार फोन किया था, पर हर बार फोन बंद मिला था. थानाप्रभारी राजीव कुमार ने हनी के फोन नंबर की काल डिटेल्स निकलवा कर चेक की तो उस में अंतिम फोन रमेश के फोन से गई थी.

रमेश के अलावा 4 नंबर और भी थे. डीएसपी गुरमीत सिंह ने राजन, रमेश सहित उन चारों लड़कों को उठवा लिया. इस बार थाने के बजाय उन्हें किसी अन्य जगह ले जाया गया. वहां हनी की हत्या के संबंध में पूछताछ की गई तो रमेश अधिक देर तक नहीं टिक सका. उस ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए हनी की हत्या की जो सनसनीखेज कहानी सुनाई, उसे सुन कर सभी सन्न रह गए.

रमेश और हनी के बीच निशा को ले कर खींचातानी चल रही थी. निशा और रमेश, दोनों के दिलों में इस बात को ले कर एक डर बैठा हुआ था कि हनी कभी भी उन की पोल गांव वालों या निशा के मांबाप के सामने खोल सकता है. ऐसा ही हुआ भी. हनी ने 7 जुलाई को जब निशा के घर वालों को निशा और रमेश के संबंधों की बात बता दी तो रमेश यह सहन नहीं कर सका.

रमेश ने उसी समय राजन के साथ मिल कर हनी को रास्ते से हटाने की योजना बना डाली. निशा को समझा कर उसे घर भेजते समय रमेश ने कहा, ‘‘तू चिंता मत कर, जल्द ही हनी की दर्दनाक चीखों की आवाज तेरे कानों को सुनाई देगी.’’

और फिर उसी शाम वह अपना फोन निशा के घर जा कर जबरदस्ती उसे दे आया. निशा की मां ने उस समय उसे बहुत डांटा था, पर वह वहां से भाग गया था. रमेश और राजन यह बात अच्छी तरह जानते थे कि हनी शाम को किस समय हवेली में चारा लेने जाता है.

दोनों दातर (दरांती) ले कर 8 जुलाई को हनी के पीछेपीछे पहुंच गए. हनी शाम 8 बजे जैसे ही हवेली से  घर जाने के लिए निकला दोनों ने उस का रास्ता रोक कर दोस्ताना लहजे में  कहा, ‘‘सौरी यार हनी, बेवजह तेरे साथ गरमागरमी कर ली, यार हमें माफ कर दे. हमें निशा से बात करने में कोई ऐतराज नहीं. तू कहे तो अभी के अभी तेरी निशा से बात करा दूं.’’

बात करतेकरते दोनों हनी को खेतों की तरफ ले गए. चलते हुए रमेश ने अपने उस फोन का नंबर मिलाया, जो वह निशा को दे आया था. उधर से जब निशा ने फोन उठाया तो रमेश ने कहा, ‘‘निशा, लो अपने पुराने साथी से बात करो.’’

हनी फोन अपने कान से लगा कर निशा से बातें करने लगा, तभी रमेश ने पीछे से दातर का एक भरपूर बार हनी के उस कान पर किया, जिस पर उस ने फोन लगा रखा था. एक ही वार में हनी का कान कट कर दूर जा गिरा और उस के मुंह से एक जोरदार चीख निकली.

इस के बाद रमेश और राजन ने यह कहते हुए हनी पर लगातार वार करने शुरू कर दिए कि ‘‘साले और कर निशा से बात.’’

हनी कटे हुए पेड़ की तरह जमीन पर गिर गया. कुछ ही देर में उस की मौत हो गई. हनी की हत्या कर के राजन और रमेश ने उस की लाश को घसीट कर पास वाली नहर में फेंक दिया और अपनेअपने घर चले गए.

पुलिस ने 11 जुलाई, 2017 को रमेश और राजन को हनी की हत्या के अपराध में गिरफ्तार कर अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया. रमेश की उम्र 17 साल और राजन की उम्र 15 साल थी. अब यह अदालत तय करेगी कि उन पर काररवाई कोर्ट में चलेगी या बाल न्यायालय में.

रिमांड के बीच पुलिस ने वह दातर बरामद कर लिया था, जिस से हनी की हत्या की गई थी. इस के बाद पुलिस ने रमेश और राजन को बाल न्यायालय में पेश कर बालसुधार गृह भेज दिया.

पुलिस ने पूछताछ के लिए निशा को भी थाने बुलाया था कि इस अपराध में उस की भी तो कोई भूमिका नहीं है? पर थाने आते ही वह डर के मारे बेहोश हो गई. पुलिस ने उसे अस्पताल में भरती कराया. उस की हालत में सुधार होने पर उस से पूछताछ की गई, पर वह बेकुसूर थी, इसलिए उसे घर भेज दिया गया.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. कथा में रमेश, राजन तथा निशा बदले हुए नाम हैं.

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पहली मई, 2017 को सोबरन सिंह अदालत के कटघरे में खड़ा था. उस दिन उस की जिंदगी का अहम फैसला होने वाला था. उस की आंखों में याचना थी. अपराध ऐसा था, जिसे सुन कर लोगों के रोंगटे खड़े हो जाएं. फिर भी उसे उम्मीद थी कि सामने डायस पर बैठे जज साहब उसे जीवनदान दे देंगे. आखिर गलती किस से नहीं होती. लेकिन उस ने जो किया था, उसे गलती नहीं, गुनाह कहते हैं. विवाह से ले कर जुर्म करने तक का घटनाक्रम किसी चलचित्र की तरह उस की आंखों के सामने घूम गया था. जब 15 साल पहले उस की शादी ममता से हुई तब वह बहुत खुश था. ममता उत्तर प्रदेश के जिला फर्रुखाबाद के गांव समसुइया निवासी सतीशचंद्र की बेटी थी.

शादी के बाद ममता अपनी ससुराल रूपपुर पहुंची तो घर खुशियों से भर उठा. बहू के आने पर बूढ़ी सास को राहत मिली थी, क्योंकि उन का बड़ा बेटा पन्नालाल पत्नी को ले कर अलग रहता था. वह छोटे बेटे सोबरन के साथ रहती थीं. आते ही ममता ने घर संभाल लिया. समय के साथ ममता 3 बेटियों और 2 बेटों की मां बनी.

घर में खुशहाली थी. सोबरन ठीकठाक कमाता था, इसलिए आराम से गुजारा हो रहा था. भाई पन्नालाल पड़ोस में ही रहता था, लेकिन उस से उस के संबंध अच्छे नहीं थे.

अचानक ममता को पति में बदलाव महसूस होने लगा. वह घर खर्च के लिए जो पैसे देता था, उस में कमी कर दी थी. पूछने पर कहता कि आजकल काम ठीक नहीं चल रहा है. कभी पैसे गिर जाने का बहाना बना देता. ममता की समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे?

ममता को लग रहा था कि कुछ गड़बड़ जरूर है. उस ने पता लगाया कि पति कहांकहां बैठता है. उसे पता चला कि वह गांव के कुछ आवारा और शराबी लोगों के साथ उठताबैठता है और उन्हीं के साथ ढाबे पर खापी कर आता है. ममता ने पति से कहा, ‘‘तुम अपनी कमाई शराब और ढाबे पर खाने में खर्च देते हो, मैं इन बच्चों को क्या खिलाऊं, यह घर कैसे चलाऊं?’’

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पत्नी की यह बात सोबरन को बहुत बुरी लगी. उस ने गुस्से में कहा, ‘‘तू कौन होती है, मुझ से सवाल करने वाली? मैं कमाता हूं, मेरी मरजी कि मैं अपनी कमाई किस तरह और किस पर खर्च करूं.’’

‘‘तुम अपनी कमाई शराब में उड़ा दो और बच्चे भूखे रहें, इस बात को मैं सहन नहीं कर सकती.’’ ममता ने कहा.

‘‘ओह, तो तू अब मुझ पर हुकुम चलाएगी.’’ कह कर सोबरन ममता पर टूट पड़ा. ममता हैरान रह गई. सोबरन ने पहली बार उस पर हाथ उठाया था. पत्नी की पिटाई कर के वह सीधे ठेके पर गया और नशे में झूमता हुआ घर लौटा. उस की इस हरकत से ममता और बच्चे सहम उठे थे.

उस दिन के बाद सोबरन किसी न किसी बात को ले कर ममता की पिटाई करने लगा. ममता पति की इस हरकत से परेशान रहने लगी. एक दिन वह अपनी बुआ सुदामा के घर गई, जो मैनपुरी के नगला पजावा में रहती थी. उस ने बुआ को सारी बात बताई तो सुदामा भी परेशान हो उठी. सुदामा का बेटा रजनेश भी वहीं था. उस ने कहा कि वह सोबरन जीजा को समझाएगा.

एक दिन रजनेश रूपपुर गया और सोबरन को समझाने की कोशिश की तो उस ने कहा, ‘‘अगर तुम्हें अपनी बहन और बच्चों की इतनी ही फिक्र है तो ले जाओ उन्हें अपने घर.’’

रजनेश की समझ में नहीं आ रहा था कि इस स्थिति में वह क्या करे? बहन के घर में कलह बढ़ रही थी और वह कुछ कर नहीं पा रहा था. आखिर सभी ने ममता और उस के बच्चों को उन के हालात पर छोड़ दिया.

ममता ने भी तय कर लिया कि सोबरन जिस हालत में रखेगा, वह उसी हालत में रहने की कोशिश करेगी. पर उस ने यह कभी नहीं सोचा था कि पति की इन हरकतों से जीवन में ऐसा तूफान आएगा कि सब तबाह हो जाएगा.

सोबरन दिनोंदिन शराब का आदी होता जा रहा था. नशा उसे वहशी बना रहा था. नशे में एक दिन उस ने पिता की झोपड़ी में आग लगा दी. उस समय झोपड़ी में उस के पिता और बच्चे सो रहे थे. गांव वालों ने बड़ी मुश्किल से आग बुझा कर उन्हें बाहर निकाला.

गांव वालों की नजर में सोबरन हिंसक और एक शराबी था. सभी उस से दूरियां बनाने लगे थे. गांव वालों की नफरत भी सोबरन को अपराधी बनने की ओर ले जा रही थी. उस के हिंसक स्वभाव की वजह से पत्नी और बच्चे घर में सहमे रहते थे.

सोबरन इतना क्रूर हो जाएगा, यह किसी ने नहीं सोचा था. 29 जून, 2014 की शाम को सोबरन नशे में लड़खड़ाता हुआ घर आया तो उस के डर से सभी बच्चे छिप गए.

ममता ने पति को धिक्कारा कि कुछ तो शरम करे, बच्चों को पेट भर खाना नहीं मिलता और वह है कि उसे पीने से ही फुरसत नहीं है. इस पर सोबरन ने गुस्से में ममता को एक थप्पड़ जड़ दिया. संयोग से उसी समय उस के पिता बाबूराम सामने आ गए तो सोबरन ने हंसते हुए कहा, ‘‘चल बापू, आज तू भी शराब पी ले. तू भी देख, इसे पीने पर कैसा मजा आता है.’’

इस के बाद बापबेटे ने मिल कर शराब पी और फिर किसी बात पर दोनों में झगड़ा होने लगा. नतीजतन दोनों में मारपीट शुरू हो गई. बेटे का गुस्सा देख कर बाबूराम डर गया और पत्नी के साथ बाहर चला गया.

सोबरन को लगा कि इतना पीने के बाद भी अभी नशा नहीं चढ़ा है. उस ने ममता से पैसे मांगे. ममता ने पैसे देने से मना कर दिया. वह उसे पीटने लगा. ममता क्या करती, उस ने सौ रुपए निकाल कर दे दिए. सोबरन उस समय जैसे दानव बन गया था. उस की नजर अपनी 11 साल की बेटी सपना पर पड़ी तो उसे पास बुला कर कहा, ‘‘ये पैसे अंदर रख दे.’’

सपना पैसे ले कर अंदर चली गई. पीछेपीछे सोबरन भी गया और सपना को पीटने लगा. बेटी को पिटता देख ममता डर गई और अकेली ही पड़ोसी के घर में जा छिपी. बाकी बच्चे एक चारपाई पर लेटे चादर के अंदर से सब देख रहे थे. सपना को बचाने वाला वहां कोई नहीं था.

सपना चीखचिल्ला रही थी, लेकिन सोबरन को उस पर तनिक भी दया नहीं आ रही थी. वह उसे पीटते हुए खेतों की ओर खींच कर ले गया. कुछ देर बाद सपना को गोद में लेकर लौटा और जमीन पर पटक दिया. सपना बेहोश थी. 7 साल की पूनम ने अपनी आंखों से अपनी बड़ी बहन को तड़पते देखा. उस ने देखा कि पिता ने किस तरह उस की गरदन पर पैर रख कर तब तक दबाए रखा, जब तक तड़पतड़प कर उस की सांसें बंद नहीं हो गईं. सपना की आंखों, कानों और मुंह से खून निकल रहा था. वह मर चुकी थी.

बेटी को मौत के घाट उतार कर भी सोबरन पर कोई असर नहीं हुआ. वह पूरी तरह बेखौफ था. वह छत पर गया और वहीं से ममता को आवाज दी कि सपना को बुखार है, आ कर उसे दवा दे दे.

यह सुन कर ममता भागी चली आई. वह नहीं जानती थी कि कसाई उसे भी हलाल करने को तैयार है. ममता के आते ही सोबरन उसे डंडे से पीटते हुए बाहर ले आया. बाहर ला कर उसे ईंट से मारा और नाले में डुबो दिया. इतने से भी मन शांत नहीं हुआ तो घसीट कर घर ले आया. तब तक ममता भी दम तोड़ चुकी थी.

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सोबरन को लगा कि दोनों मर चुकी हैं तो लाशों को एकएक कर के सीढि़यों से घसीटता हुआ छत पर ले गया और बड़े भाई पन्नालाल की छत पर डाल दिया. इस के बाद उस ने रात भर पूरे घर की सफाई की और खून के निशान मिटाए. सुबह होने पर उस ने बच्चों को धमकाया कि अगर उन्होंने किसी को कुछ बताया तो उन का भी यही हाल होगा.

इस के बाद सोबरन मोटरसाइकिल ले कर निकल गया. जाने से पहले 7 साल की बेटी पूनम से कहा कि वह तारीख पर कोर्ट जा रहा है. उस के जाते ही पूनम रोने लगी. उस के रोने की आवाज सुन कर पड़ोसी और मोहल्ले के लोग आ गए. रोतेरोते उस ने सारी बात उन लोगों को बताई तो लोगों ने छत पर जा कर देखा. वहां सचमुच मांबेटी की लाशें पड़ी थीं.

गांव के किसी आदमी ने रजनेश को फोन कर के सारी बात बता दी. बहन और भांजी की हत्या की खबर सुन कर रजनेश के पैरों तले से जमीन खिसक गई. मां को सारी बात बता कर वह तुरंत थाना करहल गया और थानाप्रभारी को सारी बात बताई.

हत्या का पता चलते ही थानाप्रभारी पुलिस टीम के साथ रूपपुर गांव पहुंच गए. वहां गांव वालों की भीड़ इकट्ठा थी. पुलिस ने पन्नालाल की छत से ममता और 11 साल की सपना की लाशें बरामद कर लीं.

ममता और सपना की बेरहमी से की हत्या से पूरा गांव सहमा था. दोनों के शरीर पर चोटों के निशान थे. जरूरी काररवाई कर के पुलिस ने दोनों लाशों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. घटना की चश्मदीद गवाह पूनम थी. पूछताछ के लिए पुलिस पूनम को अपने साथ थाने ले आई.

रजनेश की ओर से सोबरन के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 201 के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया गया. पुलिस ने चश्मदीद गवाह पूनम के बयान दर्ज कर लिए. पूनम के दिल में क्रूर पिता के प्रति इतनी नफरत थी कि उस ने अपने बयान में बताया कि अब वह अपने पिता की शक्ल भी नहीं देखना चाहती. वह उसे फांसी पर लटका देखना चाहती है.

ममता और सपना की जघन्य हत्या ने पूरे परिवार को हिला कर रख दिया था. सोबरन को पुलिस ने उसी दिन गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के समय उस के चेहरे पर जरा भी शिकन नहीं थी. पूरे मामले की जांच कर 23 अगस्त, 2014 को थानाप्रभारी बलबीर सिंह ने सोबरन के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी.

इस के बाद मामले की सुनवाई शुरू हुई तो रजनेश ने तय कर लिया कि कुछ भी हो, वह सोबरन को जेल से बाहर नहीं आने देगा. सभी रिश्तेदार सोबरन से नफरत करने लगे थे. रजनेश ने मन लगा कर मुकदमे की पैरवी की. यही वजह थी कि सोबरन की जमानत अर्जी हाईकोर्ट तक खारिज हो गई.

दोहरे कत्ल का यह मामला अपर जिला जज एवं सत्र न्यायाधीश (प्रथम) गुरुप्रीत सिंह बावा की अदालत में पहुंचा. माननीय न्यायाधीश ने मामले को बहुत गंभीरता से लिया. पत्नी और बेटी के कातिल सोबरन के खिलाफ काफी मजबूत सबूत थे. कातिल की बेटी पूनम घटना की चश्मदीद गवाह थी, उस ने अदालत को घटनाक्रम बता दिया था. उस के बयान से ही पता चल रहा था कि वह अपने शराबी पिता से कितनी नफरत करती थी.

गवाहियां पूरी हो चुकी थीं. अगले दिन फैसला सुनाया जाना था. घर वाले चाहते थे कि सोबरन को फांसी हो. लगभग 3 साल तक मुकदमा चला. फैसले की तारीख अदालत ने तय कर दी थी. 1 मई, 2017 को फैसला सुनाया जाना था. मृतका ममता के मांबाप सुदामा के यहां नगला पजावा मैनपुरी आ गए थे. सभी के चेहरे पर चिंता की लकीरें थीं. पुलिस मुलजिम सोबरन को कोर्टरूम ले आई और उसे कटघरे में खड़ा कर दिया गया. वह काफी बेचैन लग रहा था.

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11 बजे माननीय न्यायाधीश गुरुप्रीत सिंह बावा अदालत में आए तो सन्नाटा सा छा गया. जज साहब ने अपना फैसला सुनाया. उन्होंने कहा कि मुलजिम ने जो अपराध किया है, वह समाज के लिए घातक है. अत: आरोपी सोबरन सिंह दया का पात्र नहीं है. अदालत ने उस के अपराध को अतिजघन्य माना और भारतीय दंड विधान की धारा 302 के अंतर्गत उसे फांसी की सजा दी.

अदालत के इस फैसले को सुन कर सोबरन फूटफूट कर रोने लगा. पुलिसकर्मियों ने उसे मुश्किल से शांत किया. इस फैसले से सोबरन के घर वालों और ममता के घर वालों ने राहत की सांस ली. सतीशचंद्र और तारावती अपनी बेटी और धेवती के कातिल को दी जाने वाली सजा से संतुष्ट हैं. बेटी और धेवती की याद में उन की आंखों में आंसू आ गए. उन्होंने सिर्फ इतना ही कहा, ‘‘जैसी करनी, वैसी भरनी.’’

सोबरन निचली अदालत के फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करेगा या नहीं, यह पता नहीं. पर यह फैसला समाज के लिए एक सबक  जरूर है.

दुनियाभर में लोकप्रिय होती हवाई सेवाएं और आमजन

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देश में ही नहीं, दुनियाभर में हवाई सेवाएं लोकप्रिय हो रही हैं. काश, ऐसा दिन आ जाए जब आप बिना प्रीबुक कराए, जैसे टैक्सी को हाथ हिला कर बुला सकते हैं, वैसे ही हवाई सेवा का उपयोग कर सकें. आजकल बड़ेबड़े हवाई अड्डे बनने लगे हैं जहां मीलों तक बाजारों व खानेपीने की दुकानों से गुजर कर पहुंचना पड़ता है. यह अड़चन हवाई सेवाओं का सुख छीन रही है.

विशाल हवाई अड्डों की जगह छोटे हवाई अड्डे और बड़े जहाजों की जगह छोटे हवाई जहाज शायद ज्यादा उपयोगी हों.

देश में दिल्ली और मुंबई के क्रमश: जेवर और नवी मुंबई में विशाल हवाई अड्डे बनाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है जहां पहुंचने में दिल्ली और मुंबई वालों को घंटों सड़कों पर ट्रैफिक से जूझना पड़ेगा. फिर आजकल सुरक्षा के नाम पर मनमाने कंट्रोल होने लगे हैं. आधे घंटे पहले हवाई जहाज में चढ़ा दिया जाता है. उतरते वक्त मीलों चलना पड़ता है. बैगेज का इंतजार करना पड़ता है.

मस्तमौलाओं के लिए हवाई सेवाएं भी क्यों नहीं मस्तमौला हो सकतीं. चाहे 4 सीटर प्लेन हों या 400 सीटर, जब चाहो जैसे चाहो, बैठो और पहुंचो. भारीभरकम हवाई जहाज इसलिए चल रहे हैं क्योंकि हवाई कंपनियां इतनी बड़ी हो गई हैं कि वे छोटे हवाई जहाजों के उद्योग को पनपने ही नहीं दे रही हैं. जहां जमीनी वाहनों में 400-500 यात्रियों को ले जाने वाली ट्रेनों से ले कर 2 जनों तक ले जाने वाली बाइक हैं, वहीं हवाई सेवाओं में छोटे वाहनों की भारी किल्लत है. छोटे हवाई जहाज तो लक्जरी आइटम हैं और उन को चलाना व खरीदना नीरव और ललित मोदियों के बस का ही है, जो जनता का पैसा लूट सकते हैं. होना तो यह चाहिए कि जम कर रिसर्च हो कि आम लोगों को हवा में उड़ने लायक ज्यादा व आसान सुविधाएं कैसे दी जाएं.

विज्ञान आवश्यकता के अनुसार खोज कर लेता है. मोबाइल और कंप्यूटर कभी बेहद महंगे होते थे पर आज एकदम सस्ते हो गए हैं. इतने सस्ते कि सरकार समझने लगी है कि मोबाइल नंबर ही आदमी की पहचान बन गया है. ऐसा ही हवाई सेवाओं के क्षेत्र में होना चाहिए और किसी भी शहर के ऊपर हवाई जहाज वैसे ही उड़ते नजर आने चाहिए जैसे चीलकबूतर उड़ते नजर आते हैं. यह संभव भी है. बस, बड़ी कंपनियों का कंट्रोल तो हटे.

गृहिणियों के लिए बड़े काम के हैं ये 5 आसान सेविंग टिप्स

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महिलाएं हर चीज में स्मार्ट होती हैं. फिर चाहे बात खाना बनाने की हो, पति को खुश करने की, बच्चों की हैल्थ का ध्यान रखने की हो या फिर उन्हें बेहतर ऐजुकेशन देने की. यहां तक कि वे घर और बाहर दोनों जगह बेहतर सामंजस्य बनाना भी जानती हैं. यही नहीं पुरुषों के मुकाबले महिलाएं सेविंग भी बेहतर तरीके से कर लेती हैं. इसीलिए हम महिलाओं के लिए लाए हैं कुछ आसान से सेविंग टिप्स, जिन के जरीए वे अपनी बचत को और बढ़ा सकती हैं.

छोटीछोटी बचत से पिग्गी बैंक भरें

हर महीने छोटीछोटी बचत कर उसे पिग्गी बैंक में जमा करें. इस से जहां एक तरफ आप कम खर्च में चीजों को मैनेज करना सीख पाएंगी वहीं दूसरी ओर जब आप की इस बचत से आप का पिग्गी बैंक भर जाएगा तो आप इस से महंगी चीज भी खरीद सकती हैं. मुसीबत के समय भी यह छोटी बचत आप के बड़े काम आ सकती है.

इस संबंध में दिल्ली के विकासपुरी इलाके में रहने वाली पूजा से बात की गई. उन्होंने बताया, शुरुआत में मुझे पति से बहुत कम पौकेटमनी मिलती थी जिस से मैं सिर्फ क्व100 ही हर महीना पिग्गी बैंक में डाल पाती थी. उस समय भले ही वे 100 रुपए थे, लेकिन जब मैं ने उस पिग्गी बैंक को 5 साल बाद तोड़ा तो मुझे बहुत खुशी हुई कि मैं ने इतनी छोटी सी बचत से 6 हजार जमा कर लिए. इसलिए यह न सोचें कि बचत छोटी है. भले ही आज वह रकम आप को छोटी लगे, लेकिन धीरेधीरे जमा हो कर वह बड़ी राशि में परिवर्तित हो जाएगी. इसलिए खर्च सोचसमझ कर करें.

डिस्काउंट औफर्स का फायदा उठाएं

डिस्काउंट औफर्स का फायदा उठाने में देर क्यों? फिर चाहे फोन रिचार्ज का मामला ही क्यों न हो. अनेक कंपनियां कभी अनलिमिटेड नैट तो कभी फ्री कौल्स का मजा लेने का मौका दे रही हैं. इन औफर्स का लुत्फ उठाइए. यही नहीं आप पूरे साल का टीवी व नैट का रिचार्ज एक ही बार करवा कर भी बचत कर सकती हैं.

अनावश्यक शौपिंग करने से बचें

आप की इनकम काफी अच्छीखासी है, लेकिन इस का मतलब यह नहीं कि आप हर वीकैंड शौपिंग पर निकल जाएं. न्यू ट्रैंड क्या आया है देखने के चक्कर में खरीदारी न करें. अनावश्यक चीजें खरीद कर आप अपने बजट को ही बिगाड़ेंगी. जब खरीदारी आवश्यक हो तभी शौपिंग करें और वह भी अच्छी लोकल मार्केट से ही.

समझदारी से बचत

औनलाइन शौपिंग के क्रेज में बिना सोचेसमझे और्डर न दें. दिल्ली के इंद्रलोक इलाके में रहने वाली सुष्मिता ने बताया कि पिछले साल अगस्त में उन के बेटे रोहित ने आईफोन खरीदने की जिद की. उस समय वह आईफोन औनलाइन क्व 43 हजार का मिल रहा था. वह जिद पर अड़ा था. लेकिन जब मैं ने उस से दीवाली पर आने वाली सेल की बात कह कर 1 महीना रुकने को कहा तो वह मान गया. तब दीवाली पर मैं ने औनलाइन सेल का फायदा उठा कर वही फोन 36 हजार में खरीद कर काफी बचत की.

बजट बना कर चलें

बजट बना कर डिसाइड कर लें कि इस महीने किन चीजों को खरीदना है और किन्हें नहीं खरीद कर भी काम चलाया जा सकता है.

एक कहावत है कि बूंदबूंद कर के ही घड़ा भरता है. इसी तरह छोटीछोटी बचत ही भविष्य में बड़ी पूंजी बन कर मुश्किल समय में आप के काम आ सकती है, तो बचत की शुरूआत करने में देर न करें.

निवेश में महिलाओं की भूमिका और समाज में बदलती औरतों की स्थिति

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अब समाज में औरतों की स्थिति पूरी तरह बदल रही है. अब वे घरपरिवार के साथसाथ कैरियर बनाने में भी रुचि लेने लगी हैं. यहां तक कि परिवार के अहम निर्णय लेने में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही हैं. ऐसे में वे भला इनवैस्टमैंट जैसे महत्त्वपूर्ण निर्णय लेने में पीछे कैसे रह सकती हैं.

क्यों जरूरी है महिलाओं का ऐक्टिव रोल

हम इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि पुरुषों के मुकाबले महिलाएं ज्यादा धैर्यवान और समझदार होती हैं. फिर बात चाहे घर चलाने की हो या फिर राशन की, वे चीजों को अच्छी तरह हैंडल करना जानती हैं. यहां तक कि उन्हें जो पौकेटमनी मिलती है वे उस में से भी बचत करना जानती हैं. जब इनवैस्टमैंट की बात आती है, तो उन की यही क्वालिटी काम आती है. कई शोधों के अनुसार पुरुषों के मुकाबले महिलाएं मल्टीटास्किंग भी होती हैं, जो उन्हें हर क्षेत्र में बेहतर साबित करने के लिए काफी है.

हमें कतई पता नहीं कि कब क्या हमारे साथ घटित हो जाए. खुद के जाने के बाद या फिर बच्चों के अलग होने पर आप को पता होना चाहिए कि कहांकहां पैसे इनवैस्ट किए गए हैं ताकि आप सही समय पर उन का इस्तेमाल कर पाएं और यह तभी संभव है जब महिलाएं इनवैस्टमैंट डिसीजन में अहम रोल अदा करें.

आर्थिक विनियोजन का महत्त्व

जिस तरह एक महिला अपने परिवार को स्वस्थ रखने के लिए उसे बैलेंस डाइट देती है उसी तरह उसे इनवैस्टमैंट करने पर भी ध्यान देना चाहिए. भले इनवैस्टमैंट छोटी हो या फिर बड़ी. यह आगे चल कर काफी फायदेमंद साबित होती है. अब यह इनवैस्टमैंट आप शेयर, ऋण, गोल्ड, रियल एस्टेट आदि में भी कर सकती हैं. यह आप पर निर्भर करता है कि आप किस में ज्यादा फायदा देख कर इनवैस्ट करना चाहती हैं. साथ ही, आप लंबे निवेश में होने वाले जोखिमों के लिए भी तैयार रहें.

आप को बता दें कि जिस में ज्यादा मुनाफा प्राप्त होता है उस में रिस्क भी उतना ही ज्यादा होता है, इसलिए अच्छी तरह प्लानिंग कर के और सोचसमझ कर ही इनवैस्ट करना चाहिए. शेयरों में पैसा लगाने से काफी मुनाफा मिलने के साथसाथ नुकसान की भी संभावना रहती है, क्योंकि कब शेयर के दाम घट जाएं कुछ कहा नहीं जा सकता. शेयरों में लगाए पैसे के डूबने के चांसेज ज्यादा रहते हैं जबकि एफडी वगैरा में इस तरह के चांसेज नहीं होते.

खास बात यह है कि आप इनवैस्ट चाहे कहीं भी करें, आप में धैर्य होना बहुत जरूरी है, क्योंकि एकदम मुनाफा नहीं मिल सकता जैसे अगर आप ने छोटी उम्र से इनवैस्टमैंट शुरू कर दी है तो फिर घाटा होने पर भी रिकवरी की संभावना ज्यादा रहती है, क्योंकि आप के पास नौकरी करने के ज्यादा साल जो बचे होते हैं, जबकि बड़ी उम्र में घाटा हो तो रिकवर करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

इनवैस्टमैंट ऐक्सपर्ट की मदद लें

आप एकदम से मुनाफा कमाने के चक्कर में कहीं नुकसान न उठा बैठें, इसलिए इनवैस्टमैंट ऐक्सपर्ट की मदद लें, क्योंकि वह आप को इनवैस्टमैंट के बारे में ज्यादा अच्छी तरह समझा पाएगा. वह यह आप को अच्छी तरह बता देगा कि कहां पैसा लगाना फायदेमंद होने के साथसाथ ज्यादा सेफ भी है और आप मुसीबत के समय कैसे कम घाटे में उस का फायदा उठा सकती हैं, क्योंकि हर इंसान अपने भविष्य को सेफ करने के लिए ही इनवैस्ट करता है. आप सलाह द्वारा ज्यादा टैक्स भरने से भी बच जाएंगी. तो फिर इनवैस्टमैंट करने से पहले ऐक्सपर्ट की सलाह लेना न भूलें.

खर्च और बचत का अनुपात

अकसर परिवार में बच्चे मस्ती के लिए देखादेखी फालतू चीजों पर खर्च करने की जिद कर बैठते हैं, जबकि पेरैंट्स भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सेविंग करना चाहते हैं. ऐसे में सब से पहले दोनों में तालमेल बैठा कर चलने के साथसाथ अपने फाइनैंशियल गोल पर फोकस करना भी जरूरी है ताकि जरूरतें भी पूरी हो सकें और आप बचत भी कर पाएं. जैसे बोनस के पैसों से पति कार खरीदने की सोच रहे हैं और आप विदेश घूमने की बात कर रही हैं, तो ऐसे में जब आप दोनों के बीच तालमेल होगा तो आप सोचसमझ कर इस पैसे को इनवैस्ट करने के बारे में सोचेंगे जो आप के भविष्य को सुरक्षित बनाएगा.

लक्ष्य बना कर इनवैस्ट करें

आप का काम परिवार में सिर्फ हर सदस्य को खुश रखने के लिए उस की पसंद की डिशेज बनाना, किट्टी पार्टियां करने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आप परिवार के फाइनैंशियल निर्णयों में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएं, क्योंकि आप का परिवार में अहम स्थान जो है. इसलिए आप भविष्य के बारे में जैसे बच्चों की हायर ऐजुकेशन और शादी आदि पर होने वाले खर्च, अचानक परिवार में किसी के बीमार होने पर होने वाले खर्च या फिर रिटायरमैंट के बाद कैसे आप अपने परिवार की जरूरतों को पूरा कर पाएंगी इन सब को ध्यान में रख कर इनवैस्ट करें.

इनवैस्टमैंट का एक बेहतर तरीका

म्यूचुअल फंड भी है, जिस में आप के द्वारा निर्धारित राशि एक निश्चित समय पर एनईएफटी द्वारा आप के अकाउंट से अपनेआप निवेश के तौर पर कट जाएगी और फिर यह राशि आप को बेहतर भविष्य देने के काम आएगी. इस में अपना अहम रोल निभाएं, क्योंकि आप ऐसा करने में बेहतर जो हैं.

– श्यामली बासु, सीनियर वाइस प्रैसिडैंट ऐंड हैड-प्रोडक्ट्स ऐंड मार्केर्टिंग, एचडीएफसी ऐसेट मैनेजमैंट कंपनी लिमिटेड

लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं और इन का एचडीएफसी एएमसी से कोई सरोकार नहीं है, इन्हें निवेश सलाह के तौर पर न लें. किसी भी निवेश से पहले उस से जुड़े जोखिम स्वयं जांचेंपरखें. म्यूचुअल फंड में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं. निवेश से पहले उस से जुड़े दस्तावेज ध्यान से पढ़ें.

‘इश्कबाज’ के प्रौड्यूसर ने 16वीं मंजिल से कूदकर कर दी जान

VIDEO : इस तरह बनाएं अपने होंठो को गुलाबी

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एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से लगातार जिस तरह की खबरें आ रही हैं उसे देखते हुए हर कोई यही कहता दिख रहा है कि 2018 इस इंडस्ट्री के लिए सही नहीं है. 2018 का यह साल हादसे का साल बन गया है. ऐसा इसलिए क्योंकि श्रीदेवी के निधन के बाद अब इंडस्ट्री से एक और बुरी खबर आयी है. इश्कबाज के फैंस के लिए यह बेहद ही बुरी खबर है.

टीवी सीरियल ‘इश्कबाज’ के प्रौड्यूसर संजय बैरागी ने एक बिल्डिंग की 16वीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली. बताया जा रहा है कि वह आर्थिक तंगी से गुजर रहे थे और पिछले काफी वक्त से परेशान थे, जिसका उन्होंने सुइसाइड नोट में भी जिक्र किया है.

पुलिस के मुताबिक, संजय बैरागी ने शुक्रवार की शाम जनकल्याण नगर में सिलिकौन वैली बिल्डिंग से कूदकर अपनी जान दे दी. पहले कहा जा रहा था कि संजय को कार्डिऐक अरेस्ट हुआ जिसके बाद उन्होंने अपना संतुलन खो दिया और गिर पड़े लेकिन शुरुआती जांच में खुलासा हुआ कि उन्होंने आत्महत्या की है.

बताया जा रहा है कि जिस दिन यह हादसा हुआ, संजय अपने दोस्तों और परिजनों के साथ होली खेलने गए थे. उन्होंने सोशल मीडिया पर इसके फोटोज भी शेयर किए थे.

शिवाय सिंह ओबेरौय का किरदार निभाने वाले नकुल मेहता ने भी इस घटना के बारे में कुछ भी बात करने से इनकार कर दिया. फिलहाल शो की टीम को इसकी असली वजह नहीं पता. शो की टीम इस हादसे से पूरी तरह से हिल गई है.

बहरहाल, छोटे पर्दे के ऐसे कई कलाकार हैं जो शूटिंग के दौरान अपनी जान गंवाने से बचे हैं. ईइये जानते हैं उनके बारें में-

जिज्ञासा सिंह

थपकी प्यार की मैं टाइटल किरदार की भूमिका निभाने वाली जिज्ञासा सिंह एक्सीडेंट हो गया है. उनके आगे के तीन दांत टूट गए हैं. मुंह के अंदर टांके भी आए हैं.

रश्मि देसाई

रश्मि देसाई का एक्सीडेंट दिल से दिल तक के सेट पर हुआ था.

आर्यन पंडित

नागिन 2′ में करनवीर वोहरा के कजिन ब्रदर रौकी का किरदार निभाने वाले एक्टर आर्यन पंडित के साथ सेट पर बड़ा हादसा हो गया. आर्यन के हाथ में चोट लगने के बाद उन्हें फौरन अस्पताल ले जाया गया.

करिश्मा तन्ना

नागार्जुन-एक योद्धा’ की शूटिंग के दौरान करिश्मा तन्ना एक हादसे का शिकार हो गईं. दरअसल टीवी शो की शूटिंग करते हुए साड़ी पहनना करिश्मा तन्ना के लिए बेहद अजीब स्थिति हो गई, जब वह जमीन पर पड़े तारों में उलझ कर गिर पड़ीं.

कुशाल टंडन

बेहद शो की शूटिंग के दौरान लगी आग में कुशाल के हाथ जल गए थे. उन्होंने जेनिफर की जान भी आग से बचाई थी.

श्वेता बसु

चंद्रनंदनी लीड एक्ट्रेस श्वेता बसु शू‌टिंग के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गईं. श्वेता सीढ़ियों से उतर रही थीं और उनका पैर फिसल गया. इसके चलते वो लुढ़कती हुई नीचे आ गईं. इससे उनके सिर में चोट लग गई और आंखों में भी सूजन आ गई.

एयर एशिया दे रहा है 90% तक की छूट, जानिए पूरी स्कीम

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घूमने-फिरने का शौक रखने वाले लोगों के लिए एक अच्छी खबर है.  मलेशियाई विमानन कंपनी एक बड़ा औफर लेकर आयी है. जी हां, मलेशियाई कंपनी एयर एशिया ने अपने ग्राहकों को फ्लाइट के टिकटों पर बंपर छूट देने का ऐलान किया है. एयर एशिया ने अपने ‘बिग सेल’ स्‍कीम के जरिये फ्लाइट टिकट पर 90 फीसदी तक की छूट दे रही है. इसके अलावा कंपनी अपने बिग मेंबर्स को गिफ्ट्स तथा अन्य सुविधाएं भी दे रही है. स्कीम से जुड़ी जानकारियां एयर एशिया की अधिकारिक वेबसाइट airasia.com पर उपलब्‍ध है.

बता दें कि एयर एशिया का यह बिग सेल औफर सिर्फ उन लोगों के लिए है जिन्होंने कंपनी का बिग लौयल्टी मोबाइल ऐप पर डाउनलोड कर रखा है. एयर एशिया के मुताबिक बिग लौयल्टी स्कीम एयर एशिया के बिग मेंबर्स के लिए एक तरह का रिवार्ड प्रोग्राम है. कंपनी की ओर से यह औफर सीमित समय 11 मार्च तक है. आप 11 मार्च या उससे पहले टिकट की बुकिंग कर 3 सितंबर से 28 मई 2019 तक यात्रा कर सकते हैं.

अपने नए औफर को लेकर एयर एशिया ने कहा कि नए औफर में हवाई यात्रा के किरायों में तकरीबन 90 प्रतिशत की छूट देने का फैसला किया गया है. इसके अलावा बिग मेंबर्स के लिए एक्सक्लुसिव औफर्स, गिफ्ट्स और भी बहुत सारे फायदे देने की योजना है. एयर एशिया ने कहा कि उपभोक्ता बिग सेल में भाग लें और हर महीने फ्लाइट टिकट के 90 प्रतिशत खर्चे बचाने के लिए एयर एशिया के फाइनल कौल सेल का इंतजार करें.

वेबसाइट में कहा गया है कि इसमें बिग मेंबर्स को एक बिग मेंबर आईडी जारी की गई है जिससे वे बिग लौयल्टी के अंतर्गत बिग प्वाइंट्स हासिल कर सकेंगे. एयर एशिया से 120 एक्साइटिंग डेस्टिनेशन्स को उड़ान भरने के लिए बिग प्वाइंट्स का इस्तेमाल किया जा सकता है.

रिलायंस जियो दे रहा अतिरिक्त 10 जीबी डाटा, जानें प्रक्रिया

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टेलीकौम कंपनी रिलायंस जियो चुनिंदा यूजर्स को 10GB अतिरिक्त डाटा औफर कर रही है. यह एड-औन बेनिफिट 30 मार्च 2018 तक उपलब्ध होगा. यह जियो के प्राइम सब्सक्रिप्शन खत्म होने से एक दिन पहले की तारिख है. जियो के इस औफर के बाद आइडिया भी औफर लेकर आई है.

जियो की औफर डिटेल्स

जियो द्वारा दिए जा रहे इस अतिरिक्त डाटा का लाभ करंट प्लान खत्म होने के बाद भी उठाया जा सकता है. जियो समय-समय पर यूजर्स को अपने साथ बनाए रखने के लिए औफर्स पेश करता रहता है. हाल ही में कंपनी ने 398 रुपये या उससे अधिक का रिचार्ज करने पर 799 रुपये तक का कैशबैक औफर किया था. फिलहाल, अन्य टेलिकौम कंपनियों के प्लान की तुलना में जियो के सबसे सस्ते सस्ते प्लान हैं. उम्मीद है की कंपनी 30 मार्च के बाद प्राइम मेम्बरशिप के औफर भी पेश कर सकती है.

कंपनी 399 रुपये से अधिक का रिचार्ज करवाने पर 400 रुपये से अधिक का कैशबैक दे रही है. इसी के साथ कंपनी का पेटीएम, फ्रीरिचार्ज, मोबिक्विक आदि वौलेट्स के साथ टाई-अप भी है. इसमें अलग-अलग रिचार्ज पर अलग-अलग औफर मिल रहा है.

हालांकि, आपको बता दें, एक रिपोर्ट के अनुसार अतिरिक्त 10GB डाटा कुछ यूजर्स को ही मिलेगा. इस अतिरिक्त डाटा को ग्राहक दुकान या कस्टमर केयर से हासिल नहीं कर सकते हैं. लेकिन, कुछ उपयोगकर्ताओं का कहना है कि उन्हें यह डाटा 1299 से टोल-फ्री कौल करके मिला है.

टेलिकौम कंपनियां दे रहीं अन्य औफर

आपको बता दें, जियो को टक्कर देने के लिए अन्य टेलिकौम कंपनियां अलग-अलग औफर लेकर आ रही हैं. स्मार्टफोन सेगमेंट में अपना कस्टमर बेस बढ़ाने के इरादे से भारती एयरटेल और वोडाफोन मिलकर सैमसंग के फोन पर कैशबैक औफर्स दे रही हैं. यह कैशबैक औफर सैमसंग गैलेक्सी की जे सीरीज डिवाइसेज पर उपलब्ध है. कैशबैक अधिकतम 1500 रुपये का होगा.

एयरटेल जिन स्मार्टफोन्स पर यह स्कीम दे रहा है उनमें गैलेक्सी जे2 (2017), गैलेक्सी जे5 प्राइम, गैलेक्सी जे7 प्राइम और गैलेक्सी जे7 प्रो शामिल हैं. इन स्मार्टफोन्स की कीमत 6990 रुपये से 19900 रुपये के बीच में है. वहीं, इस औफर के तहत वोडाफोन जिन स्मार्टफोन पर कैशबैक देगा उनमें गैलेक्सी जे2प्रो जिसकी कीमत 8490 रुपये, गैलेक्सी जे7 नेक्स्ट जिसकी कीमत 10490 रुपये और गैलेक्सी जे7 जिसकी कीमत 16900 रुपये है.

तकलीफों के बीच कौमेडी को जन्म देने वाला ही असली कलाकार है : सुनील ग्रोवर

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स्टैंडअप व टीवी में कौमेडी के अलावा सुनील ग्रोवर फिल्मों में भी कई सशक्त भूमिकाएं निभा चुके हैं. 6 साल पहले सायलैंट कौमेडी वाले सीरियल ‘गुटरगूं’ से चर्चा में आए सुनील ग्रोवर को मशहूर व्यंग्यकार जसपाल भट्टी की खोज माना जाता है. पर उन्हें रातोंरात स्टार बनाया कपिल शर्मा के शो ने. इस शो में उन के द्वारा किए गए महिला के किरदार गुत्थी ने उन्हें स्टार बना दिया. हालांकि बाद में कपिल शर्मा के साथ उन का विवाद हुआ और वे इस शो से अलग हो गए. कपिल शर्मा से अलगाव के बाद सुनील ग्रोवर नया कौमेडी शो ले कर भी आए, पर वैसी सफलता नहीं मिली.

2017 में वे फिल्म ‘कौफी विथ डी’ में पत्रकार की मुख्य भूमिका में नजर आए. इस से पहले वे फिल्म ‘बागी’ में श्रद्धा कपूर के पिता के किरदार सहित कुछ दूसरी फिल्में भी कर चुके हैं. फिलहाल वे स्टेज शो व इवैंट में ही ज्यादा व्यस्त हैं. 2017 में फोर्ब्स पत्रिका की सौ सैलिब्रिटीज की सूची में स्टैंडअप कौमेडियन सुनील ग्रोवर 77वें नंबर पर हैं.

स्टैंडअप कौमेडियन बनने को ले कर वे बताते हैं, ‘‘मैं पंजाब व हरियाणा सीमा पर स्थित डवाली गांव से हूं. वहां से चंडीगढ़ अभिनय की ट्रेनिंग लेने गया. फिर दिल्ली आ गया. दिल्ली से मुंबई. दिल्ली में एक समाचार चैनल में नौकरी भी की. मुंबई में अभिनेता बनने के लिए काफी संघर्ष किया. फिर मैं विज्ञापनों से जुड़ गया. कुछ फिल्मों में अपनी आवाज भी दी. उस से पहले मैं ने चंडीगढ़ के ड्रामा स्कूल से ड्रामा की ट्रेनिंग ली. वहां मैं ने कई गंभीर विषयों या दारूण कथा बयां करने वाले नाटकों में अभिनय किया.

‘‘जसपाल भट्टी के साथ मैं हास्य के लाइव शो किया करता था यानी चंडीगढ़ में थिएटर पर लोगों को रुलाना और स्टेज पर हंसाना, यही मेरा विरोधाभासी काम था तो 2 विषयों को ले कर मेरी ट्रेनिंग बहुत अच्छी हुई. मैं दोनों चीजें कर रहा था. मुझे यह नहीं पता था कि मेरे कैरियर की शुरुआत कहां से किस रूप में होगी. मिमिक्री मैं बहुत किया करता था. फिर मैं ने एक फिल्मी चैनल पर एक कार्यक्रम ‘लल्लन’ किया. कौमेडी में पहचान बन गई. फिर कपिल शर्मा के शो से मुझे काफी शोहरत मिली.

‘‘जहां तक स्टैंडअप कौमेडियन बनने का सवाल है, तो स्टैंडअप कौमेडियन बनने के लिए हमारे देश में कोई इंस्टिट्यूट तो है नहीं. हमें खुद ही यह कला अपने अंदर विकसित करनी पड़ी. वास्तव में चंडीगढ़ में जसपाल भट्टी से मेरी मुलाकात हुई थी. उन्होंने मेरा पहला औडिशन लिया था. उन से मैं ने ह्यूमर के बारे में बहुतकुछ सीखा. उन से मैं ने सीखा कि क्राफ्टेड ह्यूमर क्या होता है. उन की सीख का ही परिणाम है कि मैं लोगों के चेहरों पर मुसकान लाने में कामयाब हो पाया हूं.’’

अभिनय को कैरियर बनाने की वजह को ले कर सुनील कहते हैं, ‘‘मेरे दिमाग, मेरे शरीर में अभिनय था. बचपन से ही बड़ा बनना चाहता था- डाक्टर, इंजीनियर या पायलट वगैरह. एक जीवन में ये सब बन नहीं सकता था. पर कलाकार के तौर पर मैं सबकुछ बन सकता हूं, इसलिए मैं ने अभिनय को चुना. लेकिन मैं लोगों के लिए हास्य का डाक्टर हूं. लोगों को मेरे हंसाने से फायदा होता है. हमारे हंसाने से उन्हें तनाव से मुक्ति मिलती है तो मुझे खुशी होती है कि मेरा योगदान किसी न किसी रूप में समाज के लिए हो रहा है.’’

वे आगे कहते हैं, ‘‘पहले हमें लगता था कि हम अभिनय का यह काम अपने लिए कर रहे हैं. मकान, गाड़ी खरीदनी है वगैरहवगैरह. फिर समझ आया कि हम इस दुनिया में इसलिए आए हैं कि समाज में जा कर लोगों के चेहरों पर मुसकान ला सकें.’’

कपिल शर्मा के शो से अलग होने के विवाद व नए शो को ले कर उन का कहना है, ‘‘वह शो मैं ने नहीं बनाया था. पर कपिल शर्मा के शो से अलग होने पर जब मैं बेरोजगार था, तब मुझे यह शो मिला था. पर चला नहीं, क्योंकि बहुत बेकार शो था. हालांकि हम सभी ने मेहनत की थी.’’

टीवी से दूर होने पर उन का मानना है, ‘‘मुझे इस का कोई गम नहीं है. जब आप किसी प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं तो एक यात्रा चलती रहती है. नएनए शो आते हैं. वे कुछ समय बाद बंद हो जाते हैं. हम दूसरे शो के साथ जुड़ते हैं. यह सब चलता रहता है, लेकिन एक वक्त ऐसा आता है जब आप महसूस करते हैं कि आप को इस पर नए सिरे से विचार करने के लिए, जिंदगी में उस की जरूरत को समझने के लिए समय चाहिए. इसलिए आप कुछ समय के लिए उस से दूरी बना लेते हैं.’’

वे कहते हैं, ‘‘सच कहूं तो कई माह से टीवी से दूर रहते हुए भी मैं दोस्तों, रिश्तेदारों, प्रशंसकों के उन सवालों के जवाब देने में व्यस्त रहा, जिन्हें मैं खुद नहीं समझ सका. पर मेरी समझ में यह आया कि टीवी ने मुझे लोगों के बीच ढेर सारा प्यार, मानसम्मान बख्शा है. मुझे उस वक्त गर्व का एहसास होता है जब लोग मुसकरा कर मेरा स्वागत करते हैं. कपिल शर्मा का कौमेडी शो छोड़ने के बाद मैं ने ढेर सारे इवैंट किए और बहुत यात्राएं कीं. इन इवैंट और यात्राओं के दौरान मैं ने महसूस किया कि मेरे आसपास कितना प्यार है. फिर मेरी समझ आया कि मुझे अपने प्रशंसकों के लिए टीवी पर शो करते रहना चाहिए.’’

टीवी के कौमेडी शो बहुत कम चल पाते हैं,  इस सवाल पर वे मानते हैं, ‘‘हर फिल्म भी सुपरहिट नहीं होती. मेरी राय में एक कलाकार को अपने यकीन के अनुसार लगातार काम करते रहना चाहिए. हम अपने अनुभवों के आधार पर जो ठीक समझते हैं, वही बनाते हैं. हमें नहीं पता होता कि कौन सी बात दर्शकों को पसंद आएगी. इसलिए हरदम कुछ नया करने का प्रयास करते हैं. आज का दर्शक बहुत समझदार है. कई बार हम हंसते हैं और समझते हैं कि वे इसे नहीं समझ पाए, मगर दर्शक हमें गलत साबित कर देते हैं. आखिरकार, हम हर शो अपने देश के लोगों के लिए ही बनाते हैं.’’

कौमेडी करना कितना आसान या मुश्किल है, इस बाबत सुनील कहते हैं, ‘‘कौमेडी सब से ज्यादा कठिन काम है. कौमेडी वही कर पाते हैं, जो हर लमहे में ह्यूमर तलाशते हैं. वे अपने आसपास के माहौल से कौमेडी निकाल लेते हैं. हर इंसान की जिंदगी में कुछ न कुछ तकलीफें होती हैं. उन तकलीफों के बीच खुश रह कर कौमेडी को जन्म देने वाला ही असली हास्य कलाकार है. अच्छे हास्य के लिए अच्छे लेखक व माहौल की जरूरत होती है.’’

लोगों को हंसाना जरूरी क्यों मानते हैं. इस पर सुनील का कहना है, ‘‘डाक्टर व मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि मुसकराहट एक कला है. मुसकराहट का ही अगला पायदान है, हंसना और हंसाना. हंसना तो वायरल की तरह है. एक इंसान हंसता है, तो उसे देख कर दूसरे को भी हंसी आ ही जाती है. हंसी तो जीने का टौनिक है. तनाव व दिल की बीमारी से छुटकारा पाने का आसान तरीका है हंसना और हंसाना. इसलिए, मेरी राय में हर इंसान को हंसाते रहना चाहिए.’’

महिला तैराक का वीडियो बनाने वाले प्रशांत कर्माकर ने कहा, ‘मेरे खिलाफ हुई साजिश’

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भारतीय पैरालंपिक समिति (पीसीआइ) से निलंबित किए गए अर्जुन अवौर्ड विजेता और पैरा तैराकी प्रशिक्षक प्रशांत कर्माकर ने पीसीआई के उपाध्यक्ष गुरुचरण सिंह व पैरा तैराकी अध्यक्ष विरेंद्र कुमार डबास पर आरोप लगाए हैं कि उन्होंने अपनी निजी दुश्मनी के कारण यह सब साजिश की है.

कर्माकर की इनसे लंबी लड़ाई रही है. उन्होंने कहा कि 2002 एशियन खेलों व 2006 एशियन व कौमनवेल्थ खेलों में मेरा नाम शामिल नहीं किया गया था. जब मैंने इसकी शिकायत की तो 2010 कौमनवेल्थ व एशियन खेलों में खेलने का मौका मिला और पदक जीते. इसी तरह 2014 एशियन खेलों में मैंने देश के लिए पदक जीते. 2011 में मुझे 2012 लंदन ओलंपिक की तैयारी के लिए भारत सरकार ने पैसा दिया लेकिन पीसीआइ के कोषाध्यक्ष गुरुचरण सिंह ने मुझे पैसा नहीं दिया. जबकि पीसीआइ महासचिव ने गुरुचरण सिंह को पत्र लिख कर मेरे पैसे देने को कहा था.

कर्माकर ने कहा कि कुछ लोग पीसीआइ के माध्यम से विदेश गए हैं और वापस भारत नहीं आए. इस तरह के भ्रष्टाचार के खिलाफ मैंने पीसीआइ में आवाज उठाई है और इन सब भ्रष्टाचार में यह लोग शामिल है. इन्होंने एक खिलाड़ी के 30 हजार रुपये खाए तो मैंने पत्र लिखा था कि खिलाड़ी के पैसे क्यों नहीं दिए गए. कर्माकर ने कहा कि वैसे वीडियो रिकौर्डिंग मैंने नहीं की थी बल्कि उस खिलाड़ी के पिता ने वीडियो बनाया है.

बता दें कि भारतीय पैरालंपिक समिति (पीसीआइ) ने प्रशांत कर्माकर को पिछले साल जयपुर में हुई 16वीं राष्ट्रीय पैरा तैराकी चैंपियनशिप के दौरान महिला पैरा तैराकों का वीडियो बनाने, गलत आचरण और मारपीट का दोषी पाते हुए तीन साल के लिए निलंबित कर दिया था.

कर्माकर ने कथित तौर पर अपने एक सहयोगी को प्रतियोगिता के दौरान महिला तैराकों की फिल्म बनाने के लिए कहा. इन तैराकों के परिजनों ने इस पर आपत्ति जतायी जिसके बाद इस सहयोगी ने पीसीआई में पैरा तैराकी के चेयरमैन वीके डबास से कहा कि कर्माकर ने उन्हें तैराकों की फिल्म बनाने के निर्देश दिए थे.

पीसीआई ने दावा किया कि कर्माकर को भी अपने ट्राइपोड कैमरा से महिला तैराकों का वीडियो बनाते हुए पकड़ा गया था. पीसीआई ने कहा, ‘‘कर्माकर को चेयरमैन ने बुलाया तो उन्होंने गुस्से में चेयरमैन और पीसीआई के अन्य पदाधिकारियों से कहा कि उन्होंने उनके साथी को वीडियो बनाने से क्यों रोका. उन्हें बताया कि इस पर तैराकों के परिजनों ने आपत्ति जतायी थी.’’

विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘‘कर्माकर ने पीसीआई पदाधिकारियों से लिखित आपत्ति दिखाने के लिए कहा. परिजनों ने तुरंत ही लिखित शिकायत की. कर्माकर ने डबास और हरियाणा के महिपाल सिंह आर्य के साथ बहस की और कहा कि वह अर्जुन पुरस्कार विजेता है तथा उन्होंने तैराकों की वीडियो रिकौर्डिंग डिलीट करने से इंकार कर दिया.’’

इस 37 वर्षीय तैराक को पुलिस ने हिरासत में लिया था, लेकिन वीडियो और फोटो डिलीट करने पर सहमति जताने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया था.

आपको बता दें कि राष्ट्रीय पैरा तैराकी चैंपियनशिप पिछले साल 31 मार्च से तीन अप्रैल तक जयपुर में हुई थी. अर्जुन अवौर्ड के अलावा ध्यानचंद खेल पुरस्कार, भीम अवौर्ड और कोलकाता श्री अवौर्ड पाने वाले प्रशांत ने 2006, 2010 व 2014 एशियन गेम्स में पदक जीते थे. कोलकाता के रहने वाले और हरियाणा खेल विभाग में कार्यरत प्रशांत 2016 रियो पैरा ओलंपिक में तैराकी टीम के कोच थे.

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