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पंजाब नेशनल बैंक और रोटोमैक घोटाले के बाद अब 3200 करोड़ रुपए के टीडीएस घोटाले की खबरें सामने आ रही हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक देश में करीब 447 कंपनियां ऐसी हैं जिन्होंने अपने कर्मचारियों की सैलरी में से टीडीएस का पैसा तो काट लिया, लेकिन उसे सरकार तक नहीं पहुंचाया और कंपनी के फायदे के लिए उन पैसों का इस्तेमाल किया.
अब आप लोग सोच रहे होंगे कि अगर कंपनी आपकी सैलरी में से टैक्स के पैसे काट रही है तो वह उसे जमा कराए या ना कराए, यह आपकी चिंता का विषय नहीं है, लेकिन आपको बता दें कि कंपनी द्वारा आपके टैक्स का पैसा आयकर विभाग को ना देने के कारण आप भी कानूनी पचड़ों में फंस सकते हैं.
दरअसल, आपके वेतन में से पैसे काटने के बाद अगर वह इनकम टैक्स डिपार्टमेंट तक नहीं पहुंचाए जा रहे हैं तो आपके फौर्म 16 और 26एएस में उपलब्ध जानकारियां बेमेल हो जाएंगी, जिसके कारण आपके ऊपर मुकदमा भी हो सकता है. आयकर विभाग आपको डिमांड नोटिस भेज सकता है. दरअसल, जो टैक्स का पैसा आपके वेतन में से कटता है, उसकी जानकारी फौर्म 16 में होती है और जितना पैसा टीडीएस के रूप में आयकर विभाग को दिया जाता है उसकी जानकारी फौर्म 26एएस में होती है और इन दोनों फौर्म्स की जानकारी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पास उपलब्ध होती है.
ऐसे में विभाग इस बात का आसानी से पता लगा सकता है कि आप टैक्स दे रहे हैं या नहीं. आप डरिए नहीं, आपकी कंपनी टीडीएस के पैसे आयकर विभाग को भेज रही है या नहीं इसका पता लगाने का भी एक तरीका है.
एक खबर के मुताबिक कोई भी कंपनी तिमाही के आधार पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में टीडीएस फाइल करती है. कंपनी के पास टीडीएस फाइल करने के लिए एक तिमाही खत्म होने के बाद करीब एक महीने तक का वक्त होता है. जैसे कि, एक तिमाही अगर 30 जून 2018 में खत्म हो रही है तो कंपनी के पास टीडीएस फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2018 होगी. आपको बता दें कि 31 मार्च को खत्म होने वाली तिमाही के लिए टीडीएस फाइल करने की आखिरी तारीख 31 मई होती है, क्योंकि 1 अप्रैल से नया वित्त वर्ष शुरू होता है.
जैसे ही टीडीएस फाइल करने की आखिरी तारीख निकलती है, कर्मचारियों को फौर्म 26एएस चैक करना चाहिए. इससे उन्हें पता चलता रहेगा कि कंपनी उनकी सैलरी में से काटे गए पैसे आयकर विभाग में जमा करा भी रही है या नहीं. वैसे तो टीडीएस रिटर्न की सारी जानकारी दो दिनों के अंदर आपके फौर्म 26एएस में अपडेट कर दी जाती है, लेकिन इसे 10 दिन बाद चैक करना ही सही होगा.
आपको बता दें कि फौर्म 26एएस किसी कर्मचारी का वार्षिक टैक्स क्रेडिट स्टेटमेंट होता है, जिसे आयकर विभाग की ओर से जारी किया जाता है. आप अपना 26एएस फौर्म TRACES वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं. यह पासवर्ड द्वारा सुरक्षित फौर्म होता है. इसमें कर्मचारी का नाम, पैन नंबर, कितना पैसा टीडीएस के तौर पर कटा, कितना जमा किया गया, इस तरह की सारी जानकारी उपलब्ध होती हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि टीडीएस जमा करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को समय-समय पर अपने फौर्म चैक करते रहना चाहिए.
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भारतीय टीम को 2011 विश्व कप में विजेता बनाने वाले कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी को गेमिंग प्लेटफार्म ड्रीम-11 और ‘स्निकर्स’ चौकलेट का ब्रांड एम्बेसडर बनाया गया है. इसकी घोषणा सोमवार को की गई. गेमिंग प्लेटफार्म ड्रीम-11 पर दो करोड़ से ज्यादा खेल के प्रशंसक हैं जो ‘फैंटेसी क्रिकेट, फुटबाल, कबड्डी और एनबीए’’ जैसे खेल खेलते हैं.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ‘‘ड्रीम-11 के यूजर धोनी की तरह ही खेल (क्रिकेट) के धुरंधर बनना चाहते हैं. यह देखते हुए धोनी इसके ब्रांड एम्बेसडर के लिए बिल्कुल उचित है.’’
धोनी ने कहा, ‘‘ मैं ड्रीम-11 से जुड़ कर काफी खुश हूं क्योंकि यह खेल के लाखों प्रशंसकों को फैसला लेने, टीम का गठन और खेल का अनुभव लेने का मौका देगा.’’
वैसे तो टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी अपने ‘शांत दिमाग’ के लिए मशहूर हैं, लेकिन वह आक्रामक भी हो सकते हैं. ऐसा उन्होंने साबित कर दिखाया है. दरअसल, इस रूप में उनका एक वीडियो वायरल हो चुका है. वह ‘कैप्टन कूल’ की छवि से बाहर निकल आए हैं. गुस्से में वह भोजपुरी बोलते सुने जा रहे हैं.
धोनी‘स्निकर्स’ के एक विज्ञापन में योद्धाओं वाली पोशाक में दिख रहे हैं. वह कहते हैं- आओ अपनी जांघों पर हाथ रखकर कसम खाएं….आज उनके छक्के छुड़ा देंगे… हमका चाही बदला… हम कौनो के माही-वाही नाहीं… ई है हमरी तलवार…’ इस विज्ञापन में दिखाया गया है कि धोनी को जोरों की भूख लगी है और जिसके चलते उनके दिमाग की शांति खो गई है.
‘स्निकर्स’ चौकलेट के ब्रांड एम्बेसडर बनने के मौके पर बात करते हुए धोनी ने कहा, ‘‘मैं स्निकर्स से जुड़कर काफी रोमांचित हूं. यह चाकलेट हमेशा ही मेरी पसंदीदा रही है और ऐसा इसलिए नहीं है क्योंकि यह स्वाद में लाजवाब है बल्कि इसलिए भी क्योंकि यह हल्की भूख मिटाने के लिये परफेक्ट है.’’
टीम इंडिया के सबसे सीनियर खिलाड़ी धोनी उन महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में शामिल हैं, जिन्हें आज यानी कि 6 मार्च से श्रीलंका में शुरू हो रही टी- 20 त्रिकोणीय सीरीज के लिए भारतीय टीम से आराम दिया गया है. विराट कोहली की गैरमौजूदगी में रोहित शर्मा भारत की युवा टीम की अगुआई करेंगे, जिसमें घरेलू टूर्नामेंटों में प्रभावी प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को जगह दी गई है.
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कुछ दिनों पहले ही मशहूर फोटो शेयरिंग ऐप इंस्टाग्राम में नए फीचर्स जोड़े गए हैं. अब एक नई रिपोर्ट आई है जिसके अनुसार इंस्टाग्राम ऐप में अब वौयस कौलिंग और वीडियो कौलिंग का फीचर दिया जा सकता है.
रिपोर्ट के अनुसार वौयस कौलिंग और विडियो कौलिंग के लिए इंस्टाग्राम में APKs जोड़े गए हैं. हालांकि यह फीचर इंस्टाग्राम पर वाकई रोलआउट होगा इसकी पूरी जानकारी सामने नहीं आयी है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि Instagram अपने डायरेक्ट मैसेजिंग सिस्टम में ऑडियो और वीडियो कौलिंग लौन्च करने की तैयारी कर रहा है.
जनवरी 2018 में एक ब्लौग ने इंस्टाग्राम में कौलिंग बटन के बारे में जानकारी दी थी और अब नई रिपोर्ट में इस फीचर के आने की संभावना बढ़ते हुए नजर आ रही है. हालांकि इंस्टाग्राम ने आधिकारिक तौर पर इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी है. APKs में कौलिंग बटन का आइकन सार्वजनिक रूप से देखा जा सकता है, लेकिन यह अभी काम नहीं करता है. ऐसे में कंपनी के लिए आने वाले समय में इस फीचर के लौन्च से इनकार करना मुश्किल है.
हाल ही में इंस्टाग्राम ने Giphy GIF शेयरिंग फीचर को लौन्च किया था. इस फीचर को भी APK में स्पौट किया गया था. अब कौलिंग बटन भी APK में नजर आने के बाद नए फीचर के आने की उम्मीद जतायी जा रही है. वौयस और वीडियो कौलिंग के जरिए इंस्टाग्राम का मकसद स्नैपचैट से आगे निकलना है.
कुछ दिनों पहले यह भी खबर आयी थी कि इंस्टाग्राम स्क्रीनशौट लेने वाले लोगों का नाम बताएगी. रिपोर्ट में बताया गया था कि इंस्टाग्राम नया फीचर ला रहा है जो यूजर्स के स्टोरीज का स्क्रीनशौट लिए जाने पर उन्हें नोटिफिकेशन देगा. हालांकि इस फीचर को अभी डेवलप किया जा रहा है, इसे लौन्च होने में अभी समय लगेगा.
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लंबे समय से इंतजार के बाद सैमसंग का गैलेक्सी एस9 (S9) और गैलेक्सी एस9प्लस (S9+) स्मार्टफोन भारतीय बाजार में 6 मार्च को लौन्च होगा. इन फोन को कंपनी ने पिछले महीने मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस (एमडब्ल्यूसी) में अनवील किया था. सैमसंग के इन फ्लैगशिप डिवाइस की प्री-बुकिंग देश में 26 फरवरी से चल रही है.
गैलेक्सी एस9 और एस9प्लस का 64 GB वर्जन काले, नीले और बैंगनी रंग में बिक्री के लिए उपलब्ध होगा तथा दोनों डिवाइसों का 256 GB संस्करण केवल काले रंग में उपलब्ध होगा. अमेरिका में गैलेक्सी एस9 की कीमत 720 डौलर (करीब 47,000 रुपये) और एस9प्लस की कीमत 840 डौलर (करीब 54,000 रुपये) है.
फोन की बुकिंग 2000 रुपये में हो रही है. सैमसंग के नए फोन की प्री- बुकिंग औनलाइन स्टोर से हो रही है. भारतीय बाजार में इन डिवाइसों के कीमत की घोषणा अभी नहीं की गई है. गैलेक्सी एस9 और एस9प्स में क्वालकौम का स्नैपड्रैगन 845 प्रोसेसर है. एस9 में 3,000 एमएएच की तथा एस9प्लस में 3,500 एमएएच की बैटरी लगी है.
स्पेसिफिकेशन
गैलेक्सी एस9 और एस9 प्लस स्टोरेज के तीन वेरिएंट 64, 128 और 256 GB के होंगे. तीनों ही वेरिएंट की मेमारी को माइक्रोएसडी कार्ड के जरिए 400 GB तक बढ़ाया जा सकता है. Samsung Galaxy S9 में 5.9 इंच का क्वाडएचडी+ कर्व्ड सुपर एमोलेड 18.5:9 डिस्प्ले है. फोन में सुपर स्पीड ड्युल पिक्सल 12 MP का ऑटोफोकस सेंसर है.
8.5 मिलीमीटर की मोटाई वाले इस फोन का वजन 163 ग्राम है. सैमसंग गैलेक्सी एस9+ में 6.2 इंच का क्वाडएचडी+ कर्व्ड सुपर एमोलेड 18.5:9 डिस्प्ले है. फोन में 12 MP का ड्युल रियर कैमरा सेटअप है. फोन की मोटाई 8.5 मिलीमीटर और वजन 189 ग्राम है.
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बौलीवुड में शम्मी आंटी के रूप में मशहूर अदाकारा का 89 वर्ष की उम्र में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. वह अंतिम दिनों में अपने दत्तक पुत्र इकबाल रिजवी के साथ अंधेरी स्थित उनके घर में रह रही थीं. 24 अप्रैल 1929 में संजान, गुजरात में जन्मी शम्मी आंटी मूलतः पारसी थीं और उनका असली नाम नरगिस रबाड़ी था. उन्होंने मशहूर फिल्म निर्माता सुल्तान अहमद के साथ शादी की थी, पर उनका यह विवाह महज सात वर्ष ही टिक पाया था. शम्मी की पहली मित्रता स्व. नरगिस दत्त के साथ हुई थी. इसके अलावा आशा पारेख और वहीदा रहमान के साथ उनकी गहरी दोस्ती रही है.
उन्होंने 1949 से 1969 के बीच करीबन दो सौ फिल्मों में बतौर हीरोईन काम किया था. उनके करियर की कुछ सफलतम व चर्चित फिल्मों में ‘इल्जाम’, ‘पहली झलक’, ‘बंदिश’, ‘आजाद’, ‘हलकु’, ‘सन आफ सिंदबाद’, ‘राज तिलक’, ‘खजांची’, ‘घर संसार’, ‘आखिरी दांव’, ‘कंगन’, ‘भाई बहन’, ‘दिल अपना प्रीत पराई’, ‘हाफ टिकट’, ‘इशारा’, ‘जब जब फूल खिले’, ‘प्रीत ना जाने रीत’, ‘आमने सामने’, ‘उपकार’, ‘इत्तफाक’, ‘सजन’, ‘डोली’, ‘राजा साहब’ और ‘द बर्निंग ट्रेन’ का समावेश है.
1986 से उन्होंने टीवी सीरियलों में अभिनय करना शुरू किया था. उन्होंने ‘देख भाई देख’, ‘जबान संभाल के’, ‘श्रीमान श्रीमती’, ‘कभी ये कभी वे’, ‘फिल्मी चक्कर’ जैसे सीरियलों में अभिनय किया था.
शम्मी आंटी ने जनवरी 1949 में फिल्म ‘‘उस्ताद पेड़’’ में बेगम पारा व मुकरी के साथ सेकेंड लीड के रूप में अभिनय करते हुए अपने करियर की शुरुआत की थी. इस फिल्म के निर्देशक तारा हरीश थे और तारा हरीश की ही सलाह पर उन्हें अपना नाम नरगिस रबाड़ी से शम्मी करना पड़ा था. इस फिल्म के निर्माता शेख मुख्तार थे. शम्मी आंटी को उस वक्त प्रति माह पांच सौ रूपए मिलते थे. इस फिल्म के बाक्स आफिस पर सुपर हिट होते ही शम्मी आंटी की लाटरी लग गयी थी. इस फिल्म के अनुबंध पत्र के अनुसार शम्मी को हर दिन स्टूडियो आकर अभिनय की प्रैक्टिस करनी होती थी, फिर फिल्म की शूटिंग हो या न हो. इस फिल्म के बनने मे 18 माह का वक्त लग गया था. बहरहाल, ‘उस्ताद पेड़’ के हिट होने पर निर्देशक तारा हरीश ने शम्मी को मुकेश के साथ फिल्म ‘‘मल्हार’’ में हीरोईन बना दिया था. ‘मल्हार’ की सफलता के साथ ही शम्मी मशहूर अदाकारा बन गयी थीं, पर वह अभी भी शेख मख्तार के बैनर में भी काम कर रही थीं.
शम्मी की तीसरी फिल्म दिलीप कुमार और मधुबाला के साथ ‘‘संगदिल’’ थी, जो कि 1952 में प्रदर्शित हुई थी, पर इस फिल्म ने बाक्स आफिस पर पानी नहीं मांगा था. फिर शम्मी ने कुछ फिल्में वैम्प के किरदार वाली की थी. क्योंकि शम्मी को काम करना था, जिसके परिवार का खर्च चल सके. ज्ञातब्य है कि जब शम्मी की उम्र सिर्फ तीन वर्ष थी, तभी उनके पिता का देहांत हो गया था.
शम्मी ने महिपाल, मनहर देसाई, करन दीवान के साथ बतौर हीरोईन कई फिल्में की.
1970 में शम्मी ने फिल्मों में मां के किरदार निभाने शुरू किए. इसी दौरान उन्होंने उस वक्त के उभरते निर्देशक सुल्तान अहमद से शादी की. शम्मी से दोस्ती के चलते राजेश खन्ना, सुनील दत्त और आशा पारेख ने सुल्तान अहमद के निर्देशन में फिल्में की और यह फिल्में हिट हुई, पर शम्मी आंटी की गलती यह रही कि सुल्तान अहमद से विवाह करने के बाद उन्होंने दूसरे निर्देशकों के साथ फिल्में नही की, जिसका उन्हें बाद में काफी खामियाजा भुगतना पड़ा था. वैसे सुल्तान अहमद से सात वर्ष बाद ही तलाक लेने से पहले शम्मी आंटी ने अपने पति के साथ मिलकर ‘हीरा’ व ‘गंगा की सौगंध’ जैसी सुपर डुपर हिट फिल्मों का सह निर्माण किया था. सुल्तान अहमद के साथ शम्मी के अलग होने से नरगिस दत्त को काफी दुःख हुआ था और फिर नरगिस दत्त ने ही शम्मी को पति से अलग होने के सोहल दिन के अंदर फिल्म ‘‘द बर्निंग ट्रेन’’ में काम दिलवाया था.
1985 में शम्मी ने इस्माइल श्राफ को निर्देशक लेकर फिल्म ‘‘पिघलता आसमान’’ का निर्माण शुरू किया था. शम्मी के साथ दोस्ती के चलते इस फिल्म में राजेश खन्ना हीरो थे. राजेश खन्ना की ही वजह से इस फिल्म में रेखा हीरोईन बन गयी थीं. मगर इस्माइल श्राफ व राजेश खन्ना के बीच काफी झगड़े हुए, अंततः एक दिन राजेश खन्ना ने यह फिल्म छोड़ दी थी. तब शम्मी आंटी ने शशि कपूर से बात की. शशि कपूर ने शम्मी आंटी से पारिश्रमिक राशि की बात किए बगैर फिल्म करने के लिए हामी भर दी थी. मगर इस्माइल श्राफ हर किसी से झगड़ते रहे. अंत में इस्माइल श्राफ को हटाकर शम्मी आंटी ने खुद ही निर्देशक के तौर पर इस फिल्म को पूरा किया था और फिल्म बुरी तरह से असफल हो गयी थी. एक मुलाकात में शम्मी आंटी ने कहा था- ‘‘इस्माइल श्राफ ने बहुत परेशान किया था. फिल्म बनते बनते इतनी गड़बड़ा गयी थी कि मुझे पता था कि इसे बाक्स आफिस पर सफलता नही मिलेगी. मुझे काफी आर्थिक नुकसान हुआ.’’
बाद में शम्मी आंटी ने अपनी मित्र आशा पारेख के साथ मिलकर ‘बाजे पायल’, ‘कोरा कागज’, ‘कंगन’, ‘कुछ पल साथ तुम्हारा’ जैसे सीरियलों का निर्माण भी किया. तो वहीं फिल्में भी करती रही. मगर 2008 से 2011 तक उन्हें एक भी फिल्म नहीं मिली थी. 2013 में प्रदर्शित बेला सहगल निर्देशित फिल्म ‘‘शिरीन फरहाद की तो निकल पड़ी’’ में वह बोमन ईरानी व फरहा खान के साथ पारसी औरत के किरदार में नजर आयीं थीं.
शम्मी आंटी मूलतः पारसी थीं, पर उन्हें किसी धर्म से परहेज नहीं था. वह भगवान श्री कृष्णा की भक्त थीं. उनके घर में सौ से अधिक भगवान गणेश की मूर्तियां हैं. वह विष्णु सहस्त्रनाम सुनना पसंद करती थीं.
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हर किसी को फोटो लेना और उसे अपने स्मार्टफोन में संजोकर रखना अच्छा लगता है. लेकिन कई बार हमारी छोटी सी गलती की वजह से हमारे फोन में सेव किया गया हमारा पसंदीदा फोटो या वीडियो डिलीट हो जाता है और हम चाहकर भी उसे रिकवर नहीं कर पातें. अगर आप भी इसलिए परेशान हैं क्योंकि गलती से आपकी पसंद का फोटो या वीडियो आपके मोबाइल से डिलीट हो गया है, तो अब परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि आज हम आपको उन ऐप्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें डाउनलोड करने के बाद आप अपने डिलीट कंटेंट को वापस से रिकवर कर सकेंगे.
डिस्कडिग्गर फोटो रिकवरी (DiskDigger Photo Recovery) : इस ऐप को गूगल प्ले स्टोर से आप डाउनलोड कर सकते हैं. ऐप के सारे फीचर्स मुफ्त में उपलब्ध हैं. यह ऐप सिर्फ डिलीट फोटोज को ही रिकवर करता है. ऐप की सबसे बड़ी खासियतों में से एक इसका बिना फोन को रूट किए कंटेंट को रिकवर करना है. हालांकि रूट न करने पर वो परिणाम आपको शायद न देखने को मिलें जो रूट करने के बाद मिलेगा. ऐप आपके डिलीट फोटो को वापस सेव और अपलोड करने का भी विकल्प देता है.
रिस्टोर ईमेज (Restore Image) : इस ऐप को आप फ्री में डाउनलोड कर सकते हैं. ऐप का इस्तेमाल करने के लिए आपको न तो फोन को रूट करने की जरूरत है और न ही डाटा रिस्टोर करने की. ऐप की मदद से आप तुरंत डिलीट फोटो को रिस्टोर कर सकते हैं. रिकवर कटेंट को आप एसडी कार्ड या फोन की मेमोरी में सेव कर सकते हैं. ऐप JPG और PNG दोनों फौर्मेट को स्पोर्ट करता है.
डम्पस्टर : अनडिलीट एण्ड रिस्टोर पिक्चर्स एण्ड वीडियो (Dumpster: Undelete & Restore Pictures and Videos) : इस ऐप की साइज 11 एमबी है. इसे भी आप गूगल प्ले स्टोर से फ्री में डाउनलोड कर सकते हैं. ऐप की सबसे बड़ी खासियतों में से एक इसका फोटो और वीडियो दोनों को रिकवर करना है. डिलीट कंटेंट को ऐप बहुत कम समय में रिकवर करता है. ऐप में कई प्रीमियंम फीचर्स भी दिए गए हैं, जिसकी मदद से आप अपने रिकवर कंटेंट को दूसरे यूजर्स से बचाकर सुरक्षित रख सकते हैं. इसके अलावा इसमें क्लाउड स्टोरेज का भी फीचर्स दिया गया है.
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बीते आखिरी दो हफ्ते कपूर परिवार के लिए आसान नहीं रहे. कपूर फैमिली ने अपने घर के सबसे प्यारे इंसान को बहुत जल्दी खो दिया. हाल ही में अर्जुन कपूर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से सौतेली मां श्रीदेवी के लिए एक फोटो शेयर की है, जिसके लोग उनकी तारीफ कर रहे हैं। श्रीदेवी के अकस्मात निधन ने कपूर परिवार बल्कि पूरा देश गमगीन हो गया.
श्रीदेवी के फैंस के साथ ही बौलीवुड जगत के दिग्गज सितारे भी श्रीदेवी के अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे. इस दुख की घड़ी में अभिनेता अर्जुन कपूर भी पिता बोनी कपूर और जाह्नवी और खुशी के साथ हमेशा साथ खड़े रहे. अर्जुन कपूर ने पूरे परिवार की अच्छे से केयर भी की. अर्जुन पिता बोनी कपूर की मदद के लिए दुबई भी पहुंचे और जब तक श्रीदेवी के अंतिम संस्कार के सारे इंतजाम देखने के लिए अर्जुन कपूर मुंबई में ही रहे.
अर्जुन कपूर ने फोटो शेयर करते हुए कैप्शन लिखा, वनडे एट अ टाइम. अर्जुन कपूर द्वारा शेयर की गई तस्वीर में अंग्रेजी में लिखीं लाइनों का अर्थ है, तुम बहादुर हो क्योंकि जिंदगी ने तुम्हें कारण दिए और तुम अभी भी चमक रहे हो और इसी तरह चमकते रहो. अर्जुन के द्वारा शेयर की गई फोटो में फैंस कमेंट कर अर्जुन की तारीफ कर रहे हैं.
एक यूजर ने कमेंट बौक्स में लिखा, ”अर्जुन तुम बहादुर इंसान हो. तुममे एक लीडर के गुण हैं. तालियां तुम्हारे लिए डियर अर्जुन.” वही एक अन्य यूजर ने कमेंट बौक्स में लिखा, ”अर्जुन जी, खुशी में तो हर इंसान साथ देता है लेकिन जिस तरह से आपने दुख में अपने पिता और बहनों का साथ दिया यह महान है, लव यू.” एक यूजर ने प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, ”जो दुख में साथ दे वहीं सच्चा इंसान हैं जो आप हो. अर्जुन सर बहुत अच्छा.”
कठिन समय में अर्जुन ने अपने परिवार का साथ दिया इस बात पर एक यूजर ने अर्जुन की तारीफ करते हुए लिखा, ”जिस तरह से आपने कठिन समय में अपने परिवार को संभाला और उन्हें बिल्कुल भी अकेला महसूस होने नहीं दिया. मैंने आपकी फिल्में देखी हैं, मैं आपका बहुत बड़ा फैन हूं. आप जिस तरह के इंसान हैं मैं उसका भी फैन हूं. मुझे उम्मीद है कि आपकी मां को आपपर गर्व हो रहा होगा कि उन्होंने आपके जैसे बेटे को जन्म दिया.”
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औस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम के उप-कप्तान डेविड वौर्नर और दक्षिण अफ्रीका के विकेटकीपर क्विंटन डि कौक के बीच हुई बहस का वीडियो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है. इस वीडियो में वौर्नर और डि कौक के बीच कहासुनी होती दिख रही है. जो भी इस वीडियो को देख रहा है, उसके मन में एक ही सवाल आ रहा है कि ऐसा क्या हुआ होगा, जिसके कारण दो दिग्गज खिलाड़ी आपस में भिड़ गए.
इस मामले पर औस्ट्रेलिया के कप्तान स्टीव स्मिथ ने सफाई दी है. मैच के बाद हुई प्रेस कौन्फ्रेंस में स्मिथ ने जानकारी दी कि डि कौक ने वौर्नर को लेकर काफी व्यक्तिगत हो गए थे. उन्होंने कहा, ‘डि कौक काफी व्यक्तिगत हो गए थे और उन्होंने वौर्नर को उकसाने का काम किया. जहां तक मैं जानता हूं तो हम लोग किसी के व्यक्तिगत मामलों में दखलअंदाजी नहीं करते हैं.’ उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति की व्यक्तिगत जिंदगी को लेकर कुछ नहीं कहना चाहिए, जो मजाक किया जाता है वह फील्ड तक ही सीमित रहना चाहिए.
David Warner is no saint but if he is this fired up, very likely that something nasty must have been said by Quinton de Kock. Will be interesting to know the whole story. #SAvAUSpic.twitter.com/uHpT7jUVUO
उन्होंने आगे कहा, ‘आप किसी की भी व्यक्तिगत जिंदगी के बारे में इस तरह से कुछ नहीं कह सकते. मेरे विचार से ऐसा नहीं किया जाना चाहिए. जाहिर है कि अब यह मामला अधिकारियों के हाथों में है. हमें खेल की मर्यादा को बरकरार रखना चाहिए. हम एक प्रतियोगी खेल का हिस्सा हैं. कुछ समय ऐसे होते हैं जब हमें कुछ बातों को पीछे खींच लेना चाहिए.’
इस वक्त औस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच टेस्ट सीरीज चल रही है. दोनों टीमों के बीच 1 मार्च से 5 मार्च के बीच पहला टेस्ट मैच खेला गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक मैच के चौथे दिन यानी रविवार को टी ब्रेक के दौरान वौर्नर और डी कौक के बीच कहासुनी हो गई थी.
इस घटना का जो वीडियो सामने आया है, उसमें वौर्नर काफी गुस्से में नजर आ रहे हैं और दोनों खिलाड़ियों के बीच हाथापाई की नौबत आते हुए भी दिखाई दे रही है. फिलहाल आईसीसी के अधिकारी इस मामले की जांच कर रहे हैं. बता दें कि पहले मैच में औस्ट्रेलिया की टीम दक्षिण अफ्रीका की टीम को 118 रनों से शिकस्त देने में कामयाब रही.
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पिछले साल नवंबर तक 33 करोड़ पैन धारकों में से 13.28 करोड़ लोगों ने अपने पैन को अपनी 12 अंकों वाली डिजिटल और जैविक पहचान आधारित आधार संख्या से जोड़ दिया था. पैन कार्ड को आधार से लिंक करना अनिवार्य कर दिया गया है. वैसे हो सकता है कि अब तक आपने भी पैन को आधार से लिंक कर लिया हो. मगर यदि आप इसके लिंक होने को लेकर शंशय में हैं या फिर एक बार फिर से सुनिश्चित करना चाहते हैं कि पैन आधार से लिंक हुआ भी है या नहीं तो आप इसे स्वयं चेक कर सकते हैं.
तो आइये आपको बताते हैं इसे चेक करने का तरीका.
इनकम टैक्स की वेबसाइट incometaxindiaefiling.gov.in के जरिए चेक करिए. होमपेज पर ही आपको ‘Link Aadhaar’ टैब दिखेगी. इसे क्लिक करें. नए खुले पेज पर आएग लिंक आधार के ऑप्शन को क्लिक करने से पहले सभी जरूरी सूचनाएं इसमें भर लें. पैन नंबर के कौलम में पैन और आधार के कौलम में 12 डिजिट का नंबर डाल दें. यदि नंबर अटैच नहीं होगा तो अगला मेसेज खुलेगा जिसमें इसके लिंकिंग को लेकर पुष्टि होगी. यदि आपका पैन पहले से ही लिंक होगा, तो वेबसाइट आपको लौगइन करने के लिए कहेगी.
इस तरीके के इस्तेमाल से आपको यह भी पता चल जाएगा कि यह पहले से लिंक है या नहीं. UIDPAN<12-अंकों का आधार नंबर><10-अंकों का PAN> इस टेक्स्ट में 12 संख्या वाला यह नंबर आपका आधार नंबर है जबकि दूसरा आपका पैन कार्ड नंबर है.
जिन लोगों की यह लिंकिंग पहले ही हो चुकी है, उन्हें यह एसएमएस आएगा- इनकम टैक्स विभाग के डाटा बेस में आधार संख्या XXXX पैन संख्या XXXX से पहले से ही लिंक है. हमारी सेवाओं का इस्तेमाल करने के लिए शुक्रिया.
अगर आपने अभी तक पैन कार्ड को आधार से लिंक नहीं किया है तो घबराईये नहीं क्योंकि पैन कार्ड (PAN) को आधार नंबर से जोड़ने की समय सीमा बढ़ा दी गई है, यह तारीख 31 मार्च कर दी गई है. सरकार ने तीसरी बार यह सीमा बढ़ाते हुए कहा था कि हमारी जानकारी में आया है कि कुछ करदाताओं ने अभी तक पैन को आधार से नहीं जोड़ा है. इसी वजह से यह तारीख बढ़ा दी गई है.
वैसे अब चूंकि 31 मार्च का समय नजदीक ही है इसलिए बेहतर होगा कि आधार से पैन की लिंकिंग कर लें और समय बीतने का जोखिम न लें. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने आधार और पैन कार्ड को लिंक करने के लिए दो नंबरों की सुविधा दी है. इसके लिए एक निश्चित फौर्मेट में एसएमएस भेजना होगा. यदि पहले ही लिंक कर चुके हैं लेकिन कोई संशय बरकरार है तो भी उपरोक्त तरीकों से चेक कर लें.
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5 जून की रात के 10 बजने को थे. ग्वालियर के कंपू थाना इलाके के टोटा की बजरिया में रहने वाले जिला विशेष शाखा के आरक्षक समीर ढींगरा ने अपने पड़ोसी मनोज श्रीवास्तव के बेटे संजू की बाइक अपने घर के सामने खड़ी देखी तो वह बुदबुदाने लगे, ‘सारी जगह छोड़ कर इस लड़के को सिर्फ मेरे ही दरवाजे पर बाइक खड़ी करने को जगह मिलती है.’
बाइक को हटवाने के लिए पहले उन्होंने संजू को आवाज दी, लेकिन जब उस ने कोई रिस्पौंस नहीं दिया तो उन्होंने संजू के मोबाइल पर फोन किया. स्क्रीन पर समीर अंकल का नंबर देख संजू समझ गया कि उन्हें सड़क किनारे खड़ी अपनी स्कौर्पियो घर के भीतर रखनी होगी, इसीलिए बाहर खड़ी बाइक को हटाने के लिए फोन किया है.
समीर को हालांकि पुलिस की नौकरी में 20 साल हो गए थे, लेकिन पुलिस महकमे में आरक्षक को इतनी पगार नहीं मिलती कि वह स्कौर्पियो जैसी लग्जरी कार खरीद सके. लेकिन समीर की बात और थी, उस की महत्त्वाकांक्षाएं ऊंची थीं. उस का अपना शानदार मकान था, साथ ही 2 लग्जरी कारें भी.
दरअसल, समीर के आर्थिक दृष्टि से मजबूत होने की वजह यह थी कि वह पिछले कई सालों से प्रौपर्टी के कारोबार में जुड़ा था. इस कारोबार में उस ने अपने साझेदारों के साथ मिल कर करोड़ों रुपए कमाए थे. बस दुख की बात यह थी कि उस ने दौलत तो खूब कमाई थी, लेकिन उसे पारिवारिक सुख नहीं मिला था.
पिता के निधन के बाद तमाम कठिनाइयों से जूझते हुए समीर को पुलिस महकमे में आरक्षक की नौकरी मिल गई थी. इस के साथ ही उस ने साझेदारी में प्रौपर्टी का कारोबार भी कर लिया था.
इसी बीच उस के बहनोई का सड़क हादसे में निधन हो गया था. पति की मौत के बाद उस की बहन गीता आहूजा और भांजी को अकेलेपन का बोझ न सहना पड़े, इसलिए समीर बहन और भांजी को अपने साथ ले आया था और उन दोनों को अपने साथ घर में ही रख लिया था. भांजी पढ़लिख कर कुछ बन जाए, इसलिए उस ने उस का दाखिला बनारस के एक अच्छे स्कूल में करवा दिया था.
समीर के बारे में अच्छी बात यह थी कि वह सभी से सौहार्दपूर्ण संबंध रखता था, साथ ही दूसरों की मदद के लिए भी तैयार रहता था. धार्मिक मामलों में भी उस की काफी रुचि थी. वह ऐसे किसी भी आयोजन के लिए पैसे देता रहता था.
5 साल पहले समीर की दोनों किडनी खराब हो चुकी थी. डाक्टरों ने उसे इस बात के संकेत दे दिए थे कि उस का जीवन ज्यादा लंबा चलने वाला नहीं है. यह जान कर उसे तगड़ा झटका लगा था. उसे यह चिंता सताने लगी थी कि दुनिया से जाने के बाद उस की मां, बहन और भांजी का क्या होगा. समीर को इस बात का कतई आभास नहीं था कि इस से पहले ही कोई उस की जान लेने के लिए तैयार बैठा है.
बहरहाल, समीर अंकल का फोन आने पर संजू अपनी बाइक हटाने के लिए जैसे ही घर के बाहर आया, वह यह देख कर हक्काबक्का रह गया कि समीर पर 2 युवक गोलियां चला रहे हैं. गोली चलने की आवाज सुन कर आसपास के लोग भी घर से बाहर निकल आए.
लोगों ने देखा कि समीर खून से लथपथ सड़क पर पड़ा छटपटा रहा है. जब तक पड़ोसी कुछ समझ पाते, तब तक हमलावर अंधेरे का लाभ उठा कर सफेद रंग की गाड़ी से भाग खड़े हुए थे. पड़ोस में रहने वाले लोगों ने फोन कर के इस घटना की सूचना कंपू थाने को दे दी.
संयोग से थानाप्रभारी महेश शर्मा थाने में ही मौजूद थे. उन्होंने मामला दर्ज करवा कर इस की सूचना एसपी डा. आशीष, एएसपी अभिषेक तिवारी और सीएसपी शैलेंद्र जादौन को दे दी. इस के साथ ही वह पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. थोड़ी देर बाद एसपी डा. आशीष, एएसपी अभिषेक तिवारी और सीएसपी शैलेंद्र जादौन भी वहां आ गए.
फोरैंसिक टीम को भी मौकाएवारदात पर बुला लिया गया था. समीर को 315 बोर के कट्टे से काफी नजदीक से गोली मारी गई थी. समीर की मां और बहन भी घर से बाहर आ गई थीं और बिलखबिलख कर रो रही थीं.
इस बीच डा. आशीष ने समीर की मां को पहचान लिया. उन्हें याद आया कि 1 जून को जब वह अपने औफिस में बैठे थे, तब यह वृद्ध महिला उन के पास शिकायत ले कर आई थी, जिस में लिखा था कि उस के बेटे के साझीदार बेईमानी पर उतर आए हैं. उन्होंने उस का काफी पैसा हड़प लिया है. इस मामले में एसपी ने उचित काररवाई की थी.
घटनास्थल से सारे साक्ष्य एकत्र करने के बाद पुलिस ने समीर की लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी. सीएसपी श्री जादौन और टीआई श्री शर्मा ने समीर के पड़ोस में रहने वालों से पूछताछ की तो पता चला कि उस की दोनों किडनी खराब हो चुकी थीं. डाक्टरों ने उसे बता दिया था कि इस स्थिति में वह ज्यादा दिन जीवित नहीं रह पाएगा. तभी से वह काफी मायूस रहने लगा था.
पुलिस के लिए हैरानी की बात यह थी कि जब समीर की जिंदगी चंद दिनों की बची थी तो फिर ऐसी कौन सी वजह थी कि उस की हत्या कर दी गई. पूछताछ में पुलिस को पता चला कि हत्यारे ने समीर को काफी करीब से गोली मारी थी. इस से यह बात साफ हो गई कि समीर की हत्या रेकी करने के बाद किराए के बदमाशों से कराई गई थी.
छानबीन में पुलिस को पता चला कि समीर पुलिस की नौकरी के साथ प्रौपर्टी का कारोबार भी करता था. उस ने अपनी मां गंगादेवी के नाम से गंगादेवी बिल्डर प्राइवेट लिमिटेड नाम से फर्म बना रखी थी. इस फर्म में उस की मां गंगादेवी, बहन गीता आहूआ और परिवार के एक सदस्य पंकज गुगनानी 51 प्रतिशत के साझेदार थे. शेष में उस के जिगरी दोस्त महेश जाट की पत्नी सुनीता जाट, पिता प्रीतम जाट और मोहम्मद फारुख सहित कुछ अन्य लोग साझेदार थे.
पुलिस ने हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए समीर के आधा दरजन साझेदारों से गहन पूछताछ की. लेकिन हत्या की हकीकत सामने नहीं आई. क्राइम ब्रांच में तैनात कांस्टेबल महेश जाट समीर का खास दोस्त था. जब उस के बारे में समीर की मां से पूछा गया तो उन्होंने दो टूक कहा कि महेश ऐसा काम नहीं कर सकता.
पुलिस इस हत्या की गुत्थी सुलझाने में लग गई. उस ने कई बिंदुओं पर गौर किया और गंगादेवी के इनकार करने के बावजूद टीआई महेश शर्मा ने महेश जाट को थाने बुला कर सीधे सवाल किया कि फुटेज में जो जीप दिख रही है, वह किस की है? महेश ने देख कर बताया, ‘‘यह तो दीपक जाट के भाई जगमोहन किरार की है.’’
इसी क्लू से तेजतर्रार थानाप्रभारी ने सारा मामला सुलझा लिया. सुपारी किलिंग कराने वाले महेश जाट ने ही 2 लाख रुपए में समीर को ठिकाने लगाने की सुपारी दी थी. इस में बोनस औफर यह था कि जिस की गोली समीर को लगेगी, उसे पैसे के साथ एक बुलेट मोटरसाइकिल भी तोहफे में दी जाएगी. पुलिस को पूछताछ में यह भी पता चला कि समीर की हत्या करने के बाद घटनास्थल से भागते सतवीर उर्फ जग्गू किरार ने महेश जाट को फोन कर के कहा था, ‘‘मामा काम हो गया.’’
इसी वजह से पुलिस का ध्यान समीर के सब से करीबी लोगों पर जा रहा था. पुलिस ने समीर के साझेदारों को बुला कर उन से फिर पूछताछ की. लेकिन कुछ खास पता नहीं चला तो सभी को घर भेज दिया गया. 10 जून की रात में क्राइम ब्रांच की टीम ने बिरलानगर से बेताल किरार, सतवीर किरार और शिवम जाट को उठा लिया.
इन तीनों को हिरासत में ले कर जब सख्ती से पूछताछ की गई तो तीनों टूट गए. उन्होंने मान लिया कि समीर ढींगरा की हत्या का मास्टरमाइंड समीर का जिगरी दोस्त महेश जाट है. उस ने ही गैंगस्टर हरेंद्र राणा के साथी दीपक जाट के भाई सतवीर को सुपारी दी थी. इस अहम जानकारी के बाद पुलिस ने महेश जाट को भी गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में समीर ढींगरा की हत्या की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार थी—
महेश और समीर ढींगरा एक ही महकमे में कार्यरत होने की वजह से पिछले 22 सालों से जिगरी दोस्त थे और दोनों मिल कर पिछले 10 सालों से प्रौपर्टी खरीदने और बेचने का काम कर रहे थे. इन दोनों ने अशोक गोयल की 42 बीघा जमीन खरीद कर उस में 300 प्लौट काट कर बेचे थे. इस कारोबार में महेश का शातिर दिमाग और समीर का पैसा चल रहा था. महेश ने वहां बड़ेबड़े 20 प्लौट बेच दिए थे. लेकिन उस ने समीर के हिस्से का पैसा नहीं दिया था. अलबत्ता उस ने डेढ़ करोड़ में से कुछ रकम अशोक गोयल को जरूर दे दी थी.
इस जमीन में पौवर औफ अटार्नी में समीर की मां गंगादेवी के हस्ताक्षर थे. जिस की वजह से उन की मरजी से ही रजिस्ट्री हो सकती थी. दरअसल, जब समीर को लगा कि महेश की नीयत में खोट आ गया है तो उस ने उस जमीन की बिक्री के लिए ऐसी व्यवस्था करा दी थी कि उस की मां के बगैर जमीन की बिक्री न हो सके. इसी वजह से महेश उन प्लौटों की रजिस्ट्री उन के नाम नहीं करवा पा रहा था, जिन से उस ने एडवांस लिया था. एडवांस देने वाली पार्टी उस पर रजिस्ट्री के लिए दबाव बना रही थी.
दूसरी ओर अशोक गोयल भी समीर के व्यवहार और लेनदेन से काफी खुश थे, इसलिए वह उस के पक्ष में ही बोलते थे. मां के नाम से पंजीकृत फर्म का 12 करोड़ रुपए का चैक समीर अशोक गोयल को दे चुका था, लेकिन समीर के साझेदार महेश ने अपने हिस्से में 2 करोड़ की हेराफेरी कर दी थी. इस बात को ले कर दोनों जिगरी दोस्तों में जम कर तकरार हुई. यहां तक कि दोनों ने एकदूसरे को कानूनी नोटिस तक दे दिए थे.
महेश जाट ने बिना समीर को बताए सिटी सैंटर में 85 लाख रुपए की एक आलीशान कोठी खरीद ली थी. महेश की इस हरकत से समीर के दिल में महेश के लिए प्यार कम और नफरत ज्यादा हो गई. इसी के चलते महेश ने टेकनपुर प्रौपर्टी में पार्टनर जगमोहन किरार उर्फ जग्गू को प्रलोभन दिया कि जिस प्लौट का उस ने उसे एडवांस दिया है, उस की रजिस्ट्री मुफ्त में कर देगा लेकिन इस के एवज में उस के साझीदार समीर ढींगरा को निपटाना होगा.
जगमोहन की बहन बिरलानगर में रहती थी. आरोपी बेताल किरार भी वहीं पास में रहता था. जगमोहन ने बेताल से कहा कि कट्टे से अचूक गोली मारने वाले लड़के ढूंढो. बेताल ने शुभम जाट और सतबीर जाट को तलाश कर के सुपारी के रूप में 1-1 लाख तय किए.
जगमोहन ने पूछताछ में बताया कि महेश पिछले एक पखवाड़े से समीर को निपटाने की जुगत में लगा था. कुछ दिनों पहले भी उस ने रेलवे स्टेशन के नजदीक समीर को ठिकाने लगाने की योजना बनाई थी. लेकिन संयोग से समीर बच निकला था. समीर की हत्या के बाद पुलिस को 2 बदमाशों को भागते देखने की बात बताने वाले संजू श्रीवास्तव के पिता मनोज श्रीवास्तव ने समीर की रेकी की थी और सतबीर को फोन कर के बता दिया था कि वह अपनी स्कौर्पियो उठाने आ गया है.
मनोज के फोन के बाद ही सतबीर और शुभम समीर को गोली मारने पहुंचे. वहां पहुंच कर गोली सतबीर ने चलाई. समीर को मौत के घाट उतारने के बाद वे जगमोहन की बोलेरो में बैठ कर वहां से फरार हो गए. पुलिस पड़ताल में यह भी पता चला कि जिस वक्त सतबीर और शुभम समीर ढींगरा को जान से मारने गए, उस वक्त महेश जाट घटनास्थल के करीब ही मौजूद था और सारे घटनाक्रम पर नजर रख रहा था.
समीर ढींगरा को मौत के घाट उतारने के बाद जगमोहन उर्फ जग्गू किरार अलीगढ़ भाग गया था. वहां जा कर उस ने बड़े ही सुनियोजित ढंग से खुद को अवैध कट्टा और कारतूस रखने के जुर्म में गिरफ्तार करवा दिया था. पुलिस उसे जेल भेज चुकी थी. उस की मंशा थी कि किसी भी तरह पुलिस उस तक न पहुंच पाए.
महेश जाट कितना बड़ा मास्टरमाइंड था, इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि समीर की हत्या सतबीर जाट और शुभम जाट के हाथों करवाने के बाद वह मृतक की मां गंगादेवी और बड़ी बहन को दिलासा देने उन के घर पहुंच गया, क्योंकि उसे लगता था कि इस मामले में उस का नाम नहीं आएगा. वह एक हफ्ते तक बेखटके समीर के घर आताजाता रहा. लेकिन उसे यह मालूम नहीं था कि अपराध चाहे कितनी भी चालाकी से क्यों न किया गया हो, एक न एक दिन उस का राज खुल ही जाता है.
कथा लिखे जाने तक समीर ढींगरा की हत्या के आरोप में पुलिस ने महेश जाट सहित सतबीर, शुभम जाट, बेताल किरार, मनोज श्रीवास्तव और जगमोहन किरार को गिरफ्तार कर के मजिस्ट्रेट के सामने पेश कर दिया था, जहां से सभी को जेल भेज दिया गया था.
बहरहाल, समीर नहीं रहा. उस के न रहने से जहां उस की बूढ़ी मां गंगादेवी की दुनिया उजड़ गई, वहीं विधवा बहन गीता आहूजा का सहारा भी छिन गया.