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बैंक किन स्थितियों में आपसे वसूलेगा जीएसटी चार्ज, पढ़ें पूरी खबर

बैंकों द्वारा ग्राहकों को दी जा रही सेवाओं पर जीएसटी लगाने को लेकर जारी भ्रम के बीच अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड व कस्टम ने सोमवार को नोट जारी कर स्थिति को स्पष्ट किया है. इसमें साफ तौर पर बताया गया है कि बैंक किन सेवाओं के लिए किस स्थिति में जीएसटी वसूल सकते हैं. बैंकिंग सुविधा पर जीएसटी में यह विवाद तब सामने आया जब वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग और राजस्व विभाग के मुफ्त सेवाओं पर जीएसटी लगाए जाने को लेकर अलग-अलग मत सामने आए.

इसके बाद अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड व कस्टम ने आगे आकर विभिन्न वित्तीय सेवाओं के लिए जीएसटी लगाने पर भ्रम दूर किया. विभाग की ओर से सवाल-जवाब के रूप में जारी नोट में कहा गया है कि बैंकों द्वारा ग्राहकों को दी जा रही मुफ्त सेवाओं जैसे एटीएम, चेक बुक या स्टेटमेंट इत्यादि पर जीएसटी नहीं लगेगा. लेकिन मुफ्त सेवा के अतिरिक्त दी जाने वाली सभी सेवाओं पर जीएसटी लगाया जाएगा.

एटीएम के ज्यादा इस्तेमाल पर

ग्राहकों को प्रति माह बैंकों द्वारा 3-5 एटीएम निकासी मुफ्त दी जाती है. इस पर किसी तरह का जीएसटी नहीं लगाया जाएगा, लेकिन इस मुफ्त निकासी से इतर होने वाली निकासी टैक्स के दायरे में रहेगी.

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शुल्क देकर चेकबुक लेने पर

ग्राहकों को बैंक से मिलने वाली मुफ्त चेकबुक या फ्री बैलेंस स्टेटमेंट पर जीएसटी नहीं लगेगा. लेकिन मुफ्त सुविधा से इतर कोई ग्राहक बैंक शुल्क देते हुए चेकबुक या अपना स्टेटमेंट प्राप्त करता है तो उस पर जीएसटी देय होगा.

क्रेडिट कार्ड के लेट पेमेंट पर

टैक्स विभाग ने कहा है कि क्रेडिट कार्ड के बकाए का देरी से भुगतान करने पर ग्राहकों से जीएसटी वसूला जाएगा. नोट में कहा गया कि देरी से भुगतान की स्थिति में क्रेडिट कार्ड के आउटस्टैंडिंग पर लगने वाले ब्याज के साथ जीएसटी भी वसूला जाएगा.

म्यूचुअल फंड के एक्जिट लोड पर

किसी म्यूचुअल फंड के लौकइन पीरियड से पहले ही उसे बेचकर बाहर निकलने वाले ग्राहकों को एक्जिट लोड के रूप में शुल्क देना होता है. इस शुल्क पर भी जीएसटी वसूला जाएगा, क्योंकि इसके तहत मिलने वाली राशि को नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) माना जाएगा.

लोन को दूसरे बैंक के अधिग्रहण पर

किसी बैंक के लोन को यदि अन्य बैंक में स्थानांतरित किया जाता है तो इस पर ट्रांजेक्शन प्रोसेसिंग फीस वसूली जाती है. इस फीस पर भी जीएसटी देय होगा. हालांकि लोन पर लगने वाले ब्याज को इस तरह की फीस और जीएसटी से छूट होगी.

ईएमआई चूकने पर

तय समय-सीमा के भीतर ईएमआई भुगतान में चूक होने पर अतिरिक्त ब्याज शुल्क लगाया जाता है. सीजीएसटी एक्ट 2017 के सेक्शन 15(2) के तहत इस तरह के शुल्क पर ग्राहक को जीएसटी भी देना होगा.

यहां जीएसटी लगाने का विरोध

विमानन कंपनियों के वैश्विक संघ अंतरराष्ट्रीय वायु परिवहन संघ (आईएटीए) ने अंतरराष्ट्रीय हवाई टिकटों पर जीएसटी लगाने के लिए भारत की आलोचना की है. आईएटीए के महानिदेशक और सीईओ अलेक्जेंद्र डी जुनियाक ने कहा कि हमें सरकारों के साथ कड़ाई से बात करनी चाहिए. सरकारें हमारे द्वारा बनाए गए वैश्विक नियमों की अनदेखी कर रही हैं, जो अस्वीकार्य है. भारत सुयंक्त राष्ट्र की संस्था अंतरराष्ट्रीय नागर विमानन संगठन (आईसीएओ) के प्रस्तावों का उल्लंघन कर ऐसे टिकटों पर जीएसटी लगा रहा है.

भारतीय महिला क्रिकेट टीम से फिर हुआ भेदभाव, फैंस हुए नाराज

यूं तो भारत में महिला और पुरुषों की बराबरी के बारे में तरह तरह की बातें होती रहतीं हैं. कई पुरुष भारतीय क्रिकेटर्स भी जोर शोर से इसका समर्थन करते हैं. लेकिन क्रिकेट में ही महिलाओं और पुरुषों में कितना भेदभाव होता है इसको लेकर सोशल मीडिया पर भारतीय क्रिकेट फैंस ने शोर मचा दिया. दरअसल जब महिला टीम इंडिया ने मलेशिया में चल रहे टी20 महिला एशिया कप में मेजबान टीम को केवल 27 रन पर समेट पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की तो कप्तान मिताली राज को उनकी 97 रनों की पारी पर उन्हें प्लेयर औफ द मैच का खिताब दिया गया. लेकिन उसमें दी गई पुरस्कार राशि भारतीय फैंस को नागवार गुजरी और उन्होंने अपना गुस्सा सोशल मीडिया पर जाहिर कर दिया.

इस मैच में मिताली के 69 गेंदों पर खेली 97 रनों की पारी की बदौलत भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए तीन विकेट के नुकसान पर 169 रन बनाए. जिसके जवाब में मलेशिया की टीम केवल 27 रनों पर सिमट गई. मिताली को इस पारी के लिए प्लेयर औफ द मैच चुना गया और इसकी तस्वीर मिताली जब सोशल मीडिया पर शेयर कर दी. फोटो में ईनामी राशि देखकर फैंस नाराज हो गए इस चेक में मिताली को केवल 250 डौलर की राशि ईनाम में दी गई थी. जबकि हाल ही में खत्म हुए आईपीएल में पुरुष खिलाड़ियों पर ईनामों के माध्यम से पैसा बरसाया गया था.

पुरुषों के मामले में यह है बीसीसीआई का हाल

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दुनिया की सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड बीसीसीआई की ओर से आयोजित आईपीएल में हर साल काफी पैसा खिलाड़ियों को ईनामी राशि के तौर पर दिया जाता है. इस बार हर एक मैच में कई पुरस्कार दिए गए थे. जिसमें हर लीग मैच तक में परफेक्ट कैच, नई सोच अवार्ड, सुपर स्ट्राइकर, स्टाइलिश प्लेयर और मैन ऑफ द मैच अवार्ड दिए गए थे और हर एक अवार्ड में 1 लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी गई थी यानि एक मैच मे 5 लाख रुपये की पुरस्कार राशि. वहीं महिला एशिया कप जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में एक मैच में प्लेयर ऑफ मैच को मिले केवल 250 डॉलर यानि करीब 17000 रुपये.

यही भेदभाव फैंस को नाराज कर गया. उल्लेखनीय है कि इससे पहले बीसीसीआई ने आईपीएल में प्लेऑफ्स से पहले आईपीएल की ही तर्ज पर महिला खिलाड़ियों का एक टी20 मैच का आयोजन किया था जिसमें दर्शकों की काफी कम संख्या थी. इसकी भी फैंस ने उस मैच की कई बातों को लेकर आलोचना की थी. लेकिन उससे ज्यादा चर्चा इस बात की रही कि खिलाड़ियों के लिए उचित क्रिकेट किट का भी अभाव दिखा. टीम के ड्रेस के कलर से मैच करने के लिए खिलाड़ियों के हेलमेट और पैड पर उसी रंग का कपड़ा चढ़ा दिया गया था. जहां पुरुष क्रिकेटरों को एक छोटे से मैच के लिए भी प्रौपर किट के साथ सभी सुविधाएं दी जाती हैं, वहीं महिला क्रिकेटरों के साथ इस तरह का व्यवहार ना केवल हैरान करने वाला रहा और सोशल मीडिया पर उसे अपमानजनक भी करार दिया गया.

मिताली की पोस्ट पर लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी किसी ने कहा, “प्लेयर औफ द मैच दे रहे हो या भीख दे रहे हो.” तो किसी ने कहा कि क्या मजाक है. ये क्लब क्रिकेट नहीं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट है. बीसीसीआई पर भी लोगों ने अपना गुस्सा निकाला

उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी बीसीसीआई की और से तय किए गए पुरुष खिलाड़ियों और महिला खिलाड़ियों के सैलरी पैकेज की भी आलोचना होती रही है.

तो अब मिथुन चक्रवर्ती के बेटे मिमोह उर्फ महाअक्षय के विवाह की तैयारी शुरू

मशहूर अभिनेता मिथुन चकवर्ती व अभिनेत्री योगिता बाली के बेटे व अभिनेता महाअक्षय चक्रवर्ती उर्फ मिमोह के विवाह की तैयारियां जोर शोर से हो रही हैं. सूत्रों की माने तो मिमोह का ब्याह अभिनेत्री शीला शर्मा व निर्माता निर्देशक सुभाष शर्मा की बेटी व अभिनेत्री मदालसा शर्मा के संग होने जा रही है. सूत्रों के अनुसार इनकी शादी से पहले रोका की रश्म इस वर्ष की शुरुआत में मिथुन चक्रवर्ती के मुंबई के मढ़ आयलैंड स्थित बंगले पर गुप्तरूप से संपन्न हुई थी, जिसकी किसी को भनक नहीं लगी थी.

अभी भी शादी की तैयारी को गुप्त रखा जा रहा है. मगर मिमोह के करीबी सूत्रों के अनुसार यह शादी 7 जुलाई को मिथुन चक्रवर्ती के उटी वाले घर पर होगी. सूत्रों का दावा है कि मिमोह और मदालसा का यह प्रेम विवाह है. दोनों लंबे समय से डेटिंग करते आ रहे हैं, पर लोगों की नजरों से बचाकर.

मिमोह और मदालसा शर्मा इन दोनों के अभिनय का करियर बहुत अच्छे ढंग से परवान नहीं चढ़ पाया. मिमोह 2008 से अभिनय के क्षेत्र में कार्यरत हैं. अब तक वह ‘जिम्मी, ‘द मर्डरर, ‘हंटेड 3डी, ‘लूट, ‘राकी, ‘इनेमी’ और ‘इश्केदारियां’ जैसी असफल फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं.

जबकि मदालसा शर्मा ने 2009 में तेलगू फिल्म ‘‘फिटिंग मास्टर’’ से करियर शुरू किया था. उसके बाद वह 2011 में गणे आचार्य निर्देशित फिल्म ‘‘एजेंल’’ से हिंदी फिल्मों में कदम रखा था. मदालसा शर्मा अब तक ‘सम्राट एंड कंपनी, ‘पैसा हो पैसा’ तथा ‘दिल साला सनकी’हिंदी फिल्मों के अलावा तमिल, तेलगू, पंजाबी, कन्नड़ व जर्मन भाषा की 15 फिल्में कर चुकी हैं, मगर अभी तक अभिनेत्री के तौर पर उनकी कोई पहचान नहीं बन पायी. यानी कि मिमोह और मदालसा अभी तक स्टार नहीं बने हैं, इसके बावजूद दोनों अपने प्यार, रोका की रश्म के हो जाने व अब शादी की तैयारी को छिपा रहे हैं.

नागपुर में क्या संघ को सच्ची खरी सीख दे पाएंगे प्रणब मुखर्जी

पूर्व राष्ट्रपति और कांग्रेस नेता प्रणब मुखर्जी द्वारा आरएसएस प्रचारकों के दीक्षांत समारोह का निमंत्रण स्वीकार करने से कांग्रेस नेताओं की भृकुटियां तनी हुई हैं. प्रणब मुखर्जी की आलोचना शुरू हो गई है. अनेक लोग हैरत में भी हैं. कांग्रेस के कई नेताओं ने उन्हें नागपुर न जाने की सलाह दी है. इन नेताओं का कहना है पार्टी जिस विचारधारा के खिलाफ लड़ रही है, प्रणब मुखर्जी के नागपुर जाने से संघी विचारधारा को वैद्यता मिल जाएगी. हालांकि पूर्व कानून मंत्री एचआर भारद्वाज और पी. चिदंबरम जैसे कांग्रेसी नेताओं को मुखर्जी के नागपुर जाने में कोई बुराई दिखाई नहीं देती.

प्रणब मुखर्जी का कहना है कि उन के पास कई फोन और पत्र आए पर उन्होंने किसी को जवाब नहीं दिया और कहा कि उन्होंने जो कुछ कहना है वह नागपुर में ही कहेंगे.

आरएसएस ने 7 जून को नागपुर के रेशीम बाग मैदान पर आयोजित होने वाले संघ शिक्षा वर्ग के समापन समारोह में प्रणब मुखर्जी को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया गया है. कहा गया है कि  संघ द्वारा प्रशिक्षित अपने 700 प्रचारकों के लिए आयोजित कार्यक्रम में मुखर्जी अपना संबोधन देंगे.

कांग्रेस के नेताओं द्वारा प्रणब मुखर्जी के संघ के कार्यक्रम में जाने का विरोध निरर्थक है. पूर्व राष्ट्रपति ने आरएसएस का निमंत्रण स्वीकार कर अच्छा किया. अब उन के सामने देश के प्रथम नागरिक रहने के तौर पर यह बताने के लिए बड़ा अच्छा मौका है कि संघ की विचारधारा क्यों गलत है?

प्रणब मुखर्जी को बिना लागलपेट संघ को बताना चाहिए कि कोई भी लोकतांत्रिक देश सदियों पुराने धर्मग्रंथों के सहारे नहीं चलाया सकता. उन्हें साफसाफ कहना चाहिए कि संघ अगर भारतीय संविधान के बजाय मनुस्मृति के आधार पर देश, समाज को संचालित करना चाहता है तो यह नामुमकिन होगा. संघ को अपना हिंदुत्व त्यागना होगा, जिस में दूसरे धर्मों के प्रति घृणा, करोड़ों देवीदेवता, सैंकड़ों जातियां, उपजातियां, गौत्र, मंदिर, तीर्थ, दानदक्षिणा, धर्म का कारोबार, खोखले कर्मकांड और हवनयज्ञ व योग जैसे पाखंड तथा अंधविश्वास हैं.

मुखर्जी को स्पष्ट बताना चाहिए कि आज देश में मुसलमानों, दलितों, स्त्रियों के साथ जिस तरह का बर्बर बर्ताव हो रहा है वह उसी की संकीर्ण घृणित विचारधारा का प्रताप है. यह कितनी घातक है. व्यक्ति, समाज और देश के लिए. संघ के लिए दलित आज भी अछूत हैं. वे उस के हिंदुत्व के खांचे में फिट नहीं बैठते. कभी उन्हें घोड़ी पर बैठने से रोका जाता है, कभी मृत गाय की खाल उतारने पर जानवरों की तरह मारापीटा जाता है तो कभी मूंछें रखने पर.

प्रणब मुखर्जी को हिंदू राष्ट्रवाद की संकीर्णता की जगह भारतीय राष्ट्रवाद पर विस्तृत सीख देनी चाहिए. भारत हिंदू राष्ट्र क्यों बने, भारतीय राष्ट्र क्यों नहीं, जिस में दूसरे गैर हिंदू नागरिक भी रहते हैं. पूछना चाहिए कि संघ का इतिहास, उस के नेताओं की सोच और व्यवहार लोकतांत्रिक व्यवस्था वाले आधुनिक भारत के धर्मनिरपेक्ष संविधान और समाज के नए मूल्यों से बारबार टकराता क्यों है? संघ युवा दलित, पिछड़े युवाओं को मिले आरक्षण को खत्म क्यों करना चाहता है? क्या संघ की नजर में ये जातियां हिंदू नहीं हैं?

संघ के प्रचारक समाज में जा कर किस चीज का प्रचार करेंगे? संघ की उस सड़ीगली विचारधारा का जिस के कारण व्यक्ति का व्यक्ति, परिवार का परिवार, जाति की जाति परस्पर दुश्मन बन जाती हैं? संघ इसी विचारधारा के कारण ही समाज में नफरत और चुनावों के वक्त धार्मिक ध्रुवीकरण का कारण बनते हैं.

संघ और भाजपा नेता दलित बस्तियों में जा कर भोजन तो करते हैं पर छुआछूत और शोषण की पैरोकार वर्णव्यवस्था के खिलाफ मौन रहते हैं. संघ को बताना चाहिए कि कहने को वह हिंदुत्व को धर्म नहीं, जीवनशैली कहता है पर व्यवहार में दलित, मुस्लिम घृणा, गौहत्या, समान नागरिक संहिता, धर्मांतरण जैसे धार्मिक मुद्दों पर सक्रिय रहता है जो सांप्रदायिक तनाव की वजह बनते हैं. यह भी कहना चाहिए कि संघ भारत की उदार, तार्किक और नास्तिक विचारधारा और परंपरा का सम्मान क्यों नहीं करता? संघ की हां में हां नहीं मिलाने वाला राष्ट्रद्रोही कैसे हो जाता है?

पर 40 साल से राजनीति में रहे प्रणब मुखर्जी ऐसी खरीखरी सुनाएंगे नहीं. वह भारतीय राष्ट्रवाद की बात करेंगे. सामाजिक समरसता, बराबरी की बात कर सकते हैं. सीधेसीधे वह डिप्लोमेटिक तरीके से काम चलाएंगे. महात्मा गांधी की हत्या भले ही एक कट्टर हिंदू ने की थी पर गांधी स्वयं भी संघ के मूल्यों को स्वीकार करते थे. वह छुआछूत के तो विरोधी थे पर वर्णव्यवस्था के हिमायती थे. आज भी भाजपा में जितने नेता वर्णव्यस्था की वकालत करने वाले हैं, कांग्रेस में भी कम नहीं हैं इसलिए भाजपा और कांग्रेस दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं.

कांग्रेस और संघ पोषित भाजपा की विचारधारा में कोई अधिक फर्क नहीं है. जब तक कांग्रेस के लिए भाजपा चुनौती नहीं बनी तब तक कांग्रेस कट्टर हिंदूवादी पार्टी थी. 1980-1990 के दशक के बाद कांग्रेस का धर्मनिरपेक्षता ढोंग अधिक दिखने लगा.

बहरहाल, राजनीतिक नफानुकसान को हाशिए पर रख कर विचारों के आदानप्रदान का स्वागत किया जाना चाहिए. लोकतंत्र की यही खासियत है.

आईपीएल सट्टेबाजी में नया खुलास, 60 ट्रक पैसों की बात आई सामने

भारत में आईपीएल सट्टेबाजी का मामला गहराता जा रहा है. सबसे पहले अल जजीरा के वीडियों में भारतीय क्रिकेटरों का नाम लेने की बात आई ही थी कि मुंबई पुलिस के हाथ लगे एक बुकी सोनू जालान ने सट्टेबाजी में अरबाज खान का नाम ले लिया. इसके बाद पूछताछ में अरबाज खान ने भी सट्टेबाजी में पैसा लगाने की बात कबूली. इसके बाद अरबाज के अलावा कई और बौलीवुड हस्तियों के नाम भी सामने आए. हाल ही में क्रिकेट की सट्टेबाज़ी से जुड़ा एक एक्सक्लुसिव वीडियो सामने आया है.

इस वीडियो में सट्टेबाजी में अलग मुकाम रखने वाला सोनु जालान किसी से फोन पर बात कर रहा है.  सोनू जालान पिछले दिनों ही महाराष्ट्र पुलिस ने गिरफ्तार किया था जो अंडरवर्ल्ड सरगना दाउद इब्राहिम के संपर्क में रहता था. उसी ने पूछताछ के दौरान अरबाज खान का नाम सामने आया और पूछताछ में अरबाज ने आईपीएल में सट्टेबाजी की बात कबूल भी की. मामले की और भी गहराई से जांच चल रही है.

इस वीडियो में सोनु जालान किसी से फोन पर बात कर रहा है जिसमें वो बार बार एक ओर बड़े सट्टेबाज जूनियर कोलकाता का नाम ले रहा है. इसके साथ ही वो सट्टेबाजी में इस्तेमाल होने वाले पैसे की बंदरबाट पर भी बात कर रहा है. सोनू साफ बोल रहा है कि 60 ट्रक भरकर पैसा है, सबमें बांट दो. ठाणे पुलिस के हाथों ये वीडियो तब लगे जब वो सोनू जालान के मोबाइल और लैपटौप को खंगाल रही थी.

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सोनू के पुलिस के हाथ लगने के बाद ही भारतीय क्रिकेट में सट्टेबाजी के गहरी जड़ों का पता लगा. जांच और पूछताछ में पता चला है कि सोनू जालान, दाऊद इब्राहिम के खास और देश में कई बुकियों के नेटवर्क के सरगना जूनियर कोलकाता के सीधे संपर्क में था. उसकी मीटिंग क्रिकेट के लोगों से कराने की जिम्मेदारी सोनू की ही थी. सोनू के मोबाइल से ही कुछ तस्वीरें और जानकारी मिली है कि जूनियर कोलकाता के साथ रौबिन मौरिस  साल 2015 में 14 सितंबर को थाईलैंड में मिले थे. इनके मिलने के पीछे क्या कारण था. इसकी तलाश पुलिस कर रही है.

आईपीएल से 500 करोड़ का हुआ था कलेक्शन

सोनू के घर से ठाणे पुलिस ने एक डायरी बरामद की जिसके मुताबिक IPL के साल 2018 सीजन से सोनू का बैटिंग कलेक्शन तकरीबन 500 करोड़ का था. इसमें से अकेले फाइनल मैच का कलेक्शन तकरीबन 10 करोड रुपए थे. इस डायरी में देश विदेश के तकरीबन 30 बड़े बुकीज के नाम कोडवर्ड में लिखे पाए गए. सोनू सट्टे बाजार में होने वाली कमाई को हवाला के रास्ते मुंबई से दुबई और दुबई से कराची में अपने आकाओं तक पहुंचाता था. ठाणे पुलिस फिलहाल इस हवाला नेटवर्क को उजागर करने की कोशिश में जुटी है.

दुबई से भी जुड़े हैं सोनू के तार

बताया जा रहा है कि सोनू दाऊद इब्राहिम के पाकिस्तान में कारोबार देखने वाले दो खास गुर्गे एहतशाम और डौक्टर के साथ सीधे संपर्क में था. भारत, पाकिस्तान, दुबई और खाड़ी देशों में सट्टे बाजार का पूरा कलेक्शन डौक्टर और एहतेशाम के पास जाता था और ये दोनों अनीस इब्राहिम और शकील को रिपोर्ट किया करते थे. इसके अलावा सोनू मालाड दुबई में दाऊद के बेहद करीबी रईस सिद्दीकी और अनिल कोठारी उर्फ अनिल टुंडा के साथ भी लगातार संपर्क में था. रईस और अनिल दोनों दुबई में डी कंपनी के लिए सट्टा औपरेट करते हैं. इनकी आपस में दुबई में कई बार मीटिंग भी हो चुकी है.

जूतों के बहाने किस पर निशाना साध गए अरविंद केजरीवाल

दिल्ली के बवाना इलाके की एक जनसभा को संबोधित करने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल गए तो कुछ लोगों ने उन्हें काला कपड़ा दिखाने की हिमाकत कर डाली जिस से भड़क कर उन्होंने दोटूक कहा कि भाजपाई अपनी औकात में रहें, नहीं तो ऐसे जूते पड़ेंगे कि उन्हें अपनी शक्ल भी याद नहीं रहेगी.

इस भड़कने के पीछे की एक अहम वजह दिल्ली में लगने वाले डेढ़ लाख सीसीटीवी कैमरे भी हैं जिस की फाइल उपराज्यपाल ने अटका रखी है. भाजपाइयों को जूते मारने की धौंस के तुरंत बाद उन्होंने यह भी कहा कि अब दिल्ली की जनता एलजी के घर पहुंचेगी तो सहज समझा जा सकता है कि दरअसल, वे किस से क्या कहना चाह रहे थे.

ईकौमर्स क्षेत्र की प्रतिस्पर्धा ग्राहकों को देगी दूरसंचार जैसी राहत

देश का ईकौमर्स बाजार इन दिनों सुर्खियां बटोर रहा है. इस की वजह देश की औनलाइन कारोबार करने वाली प्रमुख कंपनी फ्लिपकार्ट का बिकना है. फ्लिपकार्ट देश के लिए जानापहचाना नाम बन चुका था और औनलाइन खरीदारों में यह कंपनी काफी लोकप्रिय बनी हुई थी. फ्लिपकार्ट का अमेरिकी कंपनी वालमार्ट ने अधिग्रहण कर लिया है. दोनों कंपनियों के बीच 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा में सौदा हुआ. इस सौदे के तहत वालमार्ट फ्लिपकार्ट के 77 फीसदी शेयर खरीदेगी. वालमार्ट की भारतीय ईकौमर्स बाजार में घुसने की यह लंबी हसरत पूरी हुई है. इस सौदे की खबर के बाद ईकौमर्स क्षेत्र में खलबली मच गई है. चीनी कंपनी अलीबाबा भी भारत में ईबैंकिंग क्षेत्र की प्रमुख कंपनी पेटीएम तथा स्नैपडील के जरिए अपनी स्थिति मजबूत करने की फिराक में है.

वालमार्ट के इस सौदे से सब से ज्यादा परेशान औनलाइन कंपनी अमेजन है. उसे मालूम है कि वालमार्ट भारतीय बाजार में उस के लिए सब से बड़ी चुनौती देने वाली है. वालमार्ट और फ्लिपकार्ट के बीच अधिग्रहण संबंधी सौदा होने से पहले ही अमेजन भारत में 500 करोड़ डौलर के निवेश की घोषणा कर चुकी है. बहरहाल, इस सौदे से बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और ईकौमर्स मार्केट में नई क्रांति आएगी. इस का सीधा लाभ ग्राहकों को मिल सकता है. बड़ी कंपनियों के बीच बाजार में बने रहने की प्रतिस्पर्धा बढ़ने से वे ग्राहकों को लुभाने के लिए औफर देंगी.

महानगरों के ग्राहक आज की भागमभाग जिंदगी में औनलाइन कौमर्स पर काफी हद तक निर्भर हो गए हैं. इस स्थिति को वालमार्ट समझता है और उस ने भारतीय कंपनी के अधिग्रहण के जरिए भारतीय ईमार्केट पर कब्जा करने का रास्ता अख्तियार किया है. उम्मीद यह है कि ईकौमर्स क्षेत्र में भी ग्राहकों को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बीच की कारोबारी प्रतिस्पर्धा का उसी तरह से फायदा मिलेगा जैसा भारतीय उपभोक्ता दूरसंचार क्षेत्र में उठा रहे हैं. इस के साथ ही, सरकारी तंत्र भी कर संग्रहण को ले कर सतर्क हो गया है और वह अब वोडाफोन के समय बनी स्थिति को दोहराना नहीं चाहता है.

हवाहवाई सफर : कैसे सुधरेंगी एयरलाइंस कंपनियां

हवाई यात्राओं में अकसर हवाई जहाजों का घंटों देर से उड़ान भरना या हवाईर्जहाज में तकनीकी खराबी आने के कारण फ्लाइट कैंसिल होना आम बात है. मौसम या प्राकृतिक कारणों से फ्लाइट कैंसिल होना तो समझा जा सकता है पर एयरपोर्टों पर घंटों बेकार घूमना जेल के समान ही है. मजेदार बात यह है कि एयरलाइंस, जो यात्रियों की कठिनाइयों के बारे में अब बिलकुल निष्ठुर हो गई हैं, और थोड़ी देर से आने या थोड़ा सामान ज्यादा होने पर पिघलती नहीं, अपनी गलती के लिए ‘वी रिगरेट टू अनाउंस…’ के अलावा कुछ नहीं कहतीं. इन पर नकेल कसने के लिए सरकार अब एयरलाइंस पर फाइन लगाने की भी सोच रही है और इंतजार कर रहे यात्रियों को खाने, रहने, घर लौटने आदि के पैसे दिलवाने की सोच रही है. यात्रियों को अचानक फ्लाइट कैंसिल होने पर जो कठिनाई होती है, उस का अंदाजा लगाना आसान नहीं है. अब चूंकि एयरलाइनों को यात्रियों को नो फ्लाइ लिस्ट में डालने तक का प्रावधान बन गया है जिस से वे किसी भी एयरलाइन के जहाज में यात्रा नहीं कर पाएंगे, फाइन या मुआवजा देने का नियम सही लगता है.

कठिनाई यह है कि आज सेवा देने वाले एकतरफा नियमों, कैसे भी नियम हों, की आड़ में बच निकलते हैं. ग्राहकों में कुछ ही ऐसे होते हैं जो अदालतों में जा पाते हैं और सेवा देने वाले की नाक में दम कर देते हैं. एयरलाइंस पर नकेल कसी जानी चाहिए क्योंकि अब वे जरा सा ज्यादा वजन, बीच की या किनारे की सीट, लैगरूम वाली सीट आदि के लिए भी पैसे चार्ज करने लगी हैं. वे हर दी जाने वाली विशेष सुविधा को कमाई का साधन बनाने लगी हैं. सो, असुविधा के लिए उन्हें हर्जाना भी यात्रियों को देना चाहिए.

पर होगा क्या, सारी कंपनियां एकजुट हो जाएंगी और सरकार को मजबूर कर देंगी कि वह ऐसा कोई कदम न उठाए कि पहले से लड़खड़ाती चल रही हवाई कंपनियों को नुकसान होने लगे. जब इन कंपनियों को हजारों यात्रियों को लानालेजाना होता है तो वे निष्ठुर हो जाती हैं. अमेरिका, जहां ग्राहक को राजा माना जाता था, में सीट पर बैठे यात्री को जबरन मारतेपीटते उतारने के कई मामले बहुप्रचारित हुए पर फिर भी एयरवेज कंपनियों का रवैया वैसे का वैसा ही है. एयरलाइंस कंपनियां जानती हैं कि उन के बिना न जनता रह सकती है, न सरकार. आज कंपनियां राजा बन गई हैं. वे नीतियों को बदल सकती हैं, वे तो शासकों को बदलने की ताकत भी रखती हैं. जनता चाहे वोटर के रूप में हो या ग्राहक के रूप में, खुद के बनाए शासक या धन्नासेठ की गुलाम बनने को मजबूर है.

एयरलाइंस पर बनने वाले नए नियम तब ही कारगर हो सकते हैं जब वे सब पर लागू हों. रेलों, बसों, बिजली कंपनियों, मोबाइल कंपनियों, बैंकों किसी को भी न छोड़ें, और यह तो संभव ही नहीं है. ऐसे में क्या होगा, नतीजा आप निकालें.

कैब में सफर के दौरान इन बातों को कभी न करें नजरअंदाज

आज कैब की सेवाओं के कारण आम आदमी के लिए सफर करना आसान हो गया है. जहां पहले औटो का इंतजार और लोगों से खचाखच भरी बस का सफर इंसान को थका देता था, वहीं आज कैब ने इन मुश्किलों को दूर कर दिया है. सब से बड़ी बात यह है कि एक कौल करने पर मिनटों में कैब आप के दरवाजे पर आ कर खड़ी हो जाती है. आप का अनमोल समय नष्ट नहीं होता और किराया भी उतना ही जितना आप अफोर्ड कर पाएं. लेकिन कई बार कैब ड्राइवरों द्वारा महिलाओं और लड़कियों के साथ दुष्कर्म और छेड़छाड़ के मामले उन की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर देते हैं. चाहे कितने भी दावे क्यों न कर लिए जाएं. पर सचाई यही है कि आज भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं. उन के साथ कब और कहां क्या घट जाए कुछ पता नहीं. कैब में सफर के दौरान कुछ महिलाओं के साथ क्याक्या हादसे हुए और उन्होंने कैसा महसूस किया आइए जानते हैं:

अनहोनी की संभावना: कामकाजी नेहा जैसे ही कैब में बैठी उसे अल्कोहल और पान की गंध महसूस हुई. फिर कुछ देर बाद ड्राइवर ने गाड़ी एक सुनसान जगह रोक दी. पूछने पर बोला कि पैट्रोल खत्म हो गया है. जहां उस ने गाड़ी रोकी थी वहां काफी अंधेरा था और अपराध के लिए वह जगह बदनाम थी. फिर उस ड्राइवर ने अपने दोस्त को फोन पर कहा कि गाड़ी में एक औरत है. यह सुन कर उस महिला की कंपकंपी छूट गई. उस ने तुंरत अपनी दोस्त को फोन कर उसी जगह आने को कहा जहां गाड़ी खड़ी थी. नेहा आज भी इस घटना को याद कर सहम जाती है कि अगर ड्राइवर के दोस्त से पहले उस की दोस्त वहां न आई होती तो पता नहीं उस के साथ क्या होता.

आधी रात में छेड़खानी: घटना बैंगलुरु इलाके के रिंग रोड की है. बैंगलुरु में एक कैब चालक ने एक महिला के साथ छेड़खानी की. कैब कंपनी से जुड़े एक कैब चालक ने बैंगलुरु में एक 23 वर्षीय महिला को न सिर्फ परेशान किया, बल्कि रास्ते भर उस से कथित रूप से छेड़छाड़ भी करता रहा. उस महिला ने यह भी कहा कि उस कैब चालक ने उसे गाड़ी में कैद करने के लिए गेट लौक कर दिया. उस आधी रात में महिला के मोबाइल की बैटरी भी खत्म हो गई थी, जिस की वजह से वह किसी से सहायता मांगने में भी असमर्थ हो गई. यहां तक कि कैब के ऐप में एसओएस औप्शन को भी ऐक्टिवेट नहीं कर पाई.

गलती नहीं मानी: नोएडा में उबेर कैब के एक ड्राइवर ने एक महिला की कार में टक्कर मार दी. जब उस महिला ने इस बात पर नाराजगी जताई तो गलती मानने के बजाय वह उस महिला को मारनेपीटने लगा और उस के साथ अश्लील हरकतें करने लगा. अपनी सुरक्षा खुद: 24 वर्षीय उत्कर्षा, जो फैशन डिजाइनर है, का कहना है कि रात 9 बजे के बाद घर से बाहर रहना महिलाओं के लिए भयानक है. आप को नहीं पता कि आप के साथ खड़ा या आप को घूर रहा इंसान आप के साथ कब क्या कर दे. औटो या कैब लेना भी आजकल खतरे से खाली नहीं है. उस का कहना है कि वह हमेशा अपने साथ पैपरस्प्रे जरूर रखती है, क्योंकि यह सुरक्षा के लिए जरूरी है. वह पुलिस पर निर्भर नहीं रह सकती, क्योंकि ज्यादातर हैल्पलाइन नंबर काम ही नहीं करता.

डर का माहौल: निकता कैब में सफर के दौरान काफी भयभीत रहती है. उसे लगता है कि उस के साथ पता नहीं कब क्या हो जाए. ड्राइवर का मिरर से घूरते रहना उसे अंदर तक दहला देता है.

सुरक्षा की कमी: पुष्पा का कहना है कि कैब में सब से बड़ी सेफ्टी की समस्या होती है. कंपनी की ओर से पिक ऐंड ड्रौप के लिए जो कैब दी जाती है उस में सेफ्टी के लिए सिक्युरिटी गार्ड तैनात किए जाने चाहिए. दिल्ली, एनसीआर में 56% कैब ड्राइवर शराब पी कर गाड़ी चलाते हैं. यह खुलासा

एक सर्वे में किया गया है. सर्वे में यह भी खुलासा हुआ कि ऐप बेस्ड टैक्सी, रेडियो टैक्सी, कालीपीली टैक्सी को संचालित करने वाली कंपनियां कभी अपने ड्राइवरों की चैकिंग नहीं करतीं. सर्वे के मुताबिक 90% ड्राइवरों की कभी चैकिंग नहीं होती. ऐसे में यात्रियों के लिए यह कहां तक सुरक्षित है, इस का जबाव सरकार से पूछना चाहिए. चाहे कैब हो या फिर कोई अन्य सार्वजनिक परिवहन, इन में से किसी के भी इस्तेमाल के दौरान सतर्कता जरूरी है. अगर कैब में सफर के दौरान कुछ बातों का ध्यान रखें तो अनहोनी से बचा जा सकता है. मसलन:

– कैब की सेवाएं लेते वक्त गाड़ी का परमिट जरूर देख लें. – कैब बुक कराते वक्त गाड़ी ड्राइवर का नाम, पता, फोन नंबर जरूर पता कर लें ताकि जरूरत पड़ने पर उस से संपर्क किया जा सके.

– कैब ड्राइवर को उसी रास्ते से चलने को कहें जो रास्ता आप को पता हो. अगर रास्ता आप को पता न भी हो तो उसे इस बात का पता न चलने दें कि आप को रास्ता पता नहीं है. टैक्नोलौजी का इस्तेमाल कर अपने फोन के माध्यम से नैविगेशन के जरीए सही रास्ते की लोकेशन पता करें और ड्राइवर को उसी रास्ते से चलने को कहती रहें. – सफर के दौरान अपने फोन को अपने हाथ में ही रखें और ध्यान रहे कि फोन पूरा चार्ज हो ताकि आप को अपने परिचितों से कौंटैक्ट करने में परेशानी न हो. हो सके तो घर से चार्ज बैंक साथ ले कर चलें ताकि बैटरी खत्म होने पर तुरंत चार्ज किया जा सके.

– अगर आप को लगे कि कैब ड्राइवर आप के साथ कुछ गलत करना चाह रहा था पर कर नहीं पाया, तो कैब से उतरते ही इस बात की सूचना तुरंत आप उक्त कंपनी को दें ताकि बाद में अन्य महिला के साथ कोई समस्या न आए. – वैसे तो ज्यादातर कैब में जीपीएस ट्रैकर लगे होते हैं, अगर न लगे हों तो आप अपने फोन से ही जीपीएस लोकेशन अपने परिचितों को लगातार भेजती रहें ताकि उन्हें पता चल सके कि आप कहां तक पहुंच चुकी हैं, घर से कितनी दूर हैं.

– आप कैब के सफर के दौरान अपने दोस्तों और घरवालों से बात करती रहें ताकि ड्राइवर को लगे कि आप अपने परिचितों के संपर्क में बनी हुई हैं. – सफर के दौरान अपने बैग में पैपरस्प्रे जरूर रखें.

– कैब में सफर करते वक्त आप को नींद न आए, इस के लिए आप अपने परिचितों से फोन पर बातें करती रहें. – अगर कैब में आप के साथ और भी कोई यात्री सफर कर रहा हो तो उस की भी जानकारी आप अपने परिचितों को देना न भूलें.

खुद बनें अपनी बौडीगार्ड जानकार मानते हैं कि किसी भी हादसे के लिए 3 चीजें जरूरी होती हैं पहला अपराधी, दूसरा शिकार और तीसरा मौका. इन में से अगर एक भी न हो तो हादसा नहीं होगा. इन में से सब से आसान लेकिन जरूरी है मौका देने से बचना. फिर आता है खुद को शिकार बनने देने और अपराधी से निबटना. जानें कि अपराधी को मौका देने से कैसे बच सकती हैं आप?

– आत्मविश्वास से भरपूर दिखें. – आप की बौडी लैंग्वेज से कौन्फिडैंस झलकना चाहिए.

– जमीन में सिर झुका कर चलने के बजाय अलर्ट और जागरूक दिखते हुए सामने देखते हुए चलें.

– अगर किसी इलाके के या रास्ते के बारे में पता नहीं है, तो अनजान लोगों को यह न बताएं. – कभी अनजान लोगों से लिफ्ट न लें, भले ही कितनी ही मजबूरी क्यों न हो.

– टै्रफिक के उलटी दिशा यानी सड़क के उस ओर चलें कि ट्रैफिक आप को सामने से आता दिखे. ऐसे में पीछे से हमला नहीं हो सकेगा.

– अगर कोई पीछा करता दिखता है तो जो भी घर सामने दिखे उस की कौलबैल बाजा दें और उन्हें सारी स्थिति के बारे में बताएं, झिझकें नहीं. रात हो या दिन अपनी सूझबूझ से खुद को बचाने की कोशिश करें.

जब कोई आप का पीछा करे, तो इन सुझावों पर करें अमल

सितंबर, 2016, दिल्ली में एक 21 वर्षीय लड़की की दिन में चाकू मार कर हत्या कर दी गई. हत्यारा कई महीनों से उसे स्टौक कर रहा था. पिछले साल ही अक्तूबर में 24 वर्षीय ब्यूटीशियन की हत्या कर दी गई थी. यह हत्यारा भी कई दिनों से स्टौक कर रहा था. पिछले ही साल चेन्नई में भी ऐसी 3 घटनाएं घटीं. इसी साल बैंगलुरु में नववर्ष पर मास मोलेस्टेशन की घटना के साथ एक अन्य स्त्री के साथ भी उस के घर के पास ही उसी रात छेड़छाड़ की घटना हुई. इन घटनाओं की सीसीटीवी की क्लिपिंग्स देखते ही देखते वायरल हो गईं. महिलाओं के साथ होेने वाले अपराध एक बार फिर सब के सामने आ गए. पुलिस ने कहा कि बैंगलुरु वाली महिला को स्टौक किया जा रहा था. ऐडवोकेट मृणालिनी देशमुख निर्भया केस के बाद वर्मा कमेटी द्वारा बनाए नियम की तरफ इशारा करते हुए कहती हैं, ‘‘स्टौकिंग वह आरंभिक अवस्था है, जिस का अंत शारीरिक शोषण या रेप हो सकता है. महिलाओं का चोरी से पीछा करने वालों को सख्त प्रतिक्रिया देनी चाहिए. उन्हें स्टौकिंग के खिलाफ फौरन शिकायत दर्ज करवानी चाहिए. उस के बाद पुलिस की ड्यूटी है कि वे उन्हें बुला कर सख्त चेतावनी दे ताकि फिर यह हरकत न दोहराई जाए.’’

सचेत रहें

महिलाओं के अधिकारों के लिए काम करने वाली समाजसेविका शर्मिला खेर बताती हैं, ‘‘नैशनल क्राइम रिकौर्ड्स ब्यूरो के अनुसार स्टौकर हमेशा परिचित होता है. वह आप का डेली रूटीन जानता है. अत: महिलाओं को हमेशा सचेत, चौकन्ना रहना चाहिए. स्टौकर से निबटने के लिए उस का सामना करना चाहिए. यदि वह कौल या मैसेज कर रहा है, तो उसे बता दें कि उस की कौल्स रिकौर्ड हो रही हैं और मैसेज पुलिस डायरी में जा रहे हैं. यदि वह सामने है तो चिल्लाएं, लोगों से हैल्प के लिए कहें. महिलाओं को अपने इंट्यूशन पर भरोसा करना चाहिए. यदि आप अपने आसपास एक आम चेहरा अकसर देखें तो उस से पूछताछ करें, उस की फोटो लें, सोशल नैटवर्क साइट्स पर पोस्ट कर दें ताकि लोग जान लें.’’

कई महिलाएं स्टौकर्स से परेशान हो कर सिस्टम तक पहुंचने की कोशिश करती भी हैं, पर कुछ खास फायदा नहीं होता है. एक एनजीओ के कार्यकर्ता अनवर अली कहते हैं, ‘‘कई महिलाएं छेड़खानी या ऐसे केस में परेशान हो कर हमारे पास आती हैं. जब वे पुलिस के पास जाती हैं. वे अकसर रजिस्टर कर लेते हैं और महिलाओं से ऐसी शरारतों की तरफ ध्यान न देने के लिए कहते हैं. इस से ऐसे लोगों को और ज्यादा सैक्सुअल अपराध करने की राह मिल जाती है.’’

किसी भी महिला का यदि कोई पीछा, फोन, मैसेज या ब्लैंक कौल्स करता है, तो वह स्टौकिंग का दोषी है.

कैसे लें सहायता

क्या हैल्पलाइन नंबर सचमुच काम करते हैं?

यदि आप को स्टौक किया जा रहा है और अगर आप मुंबई पुलिस की महिला और शिशु हैल्पलाइन नंबर 103 को कौल करने की कोशिश कर रही हैं, तो संभवतया आप की कौल लोकल पुलिस स्टेशन पर डाइवर्ट कर दी जाएगी. मुंबई के एक समाचारपत्र ने इसे टैस्ट भी किया.

पुलिस औफिसर ने जवाब दिया, ‘‘यह हैल्पलाइन बच्चों, सीनियर सिटीजन सब के लिए है, सिर्फ महिलाओं के लिए नहीं और यदि यह स्टौकिंग या मोलेस्टिंग की बात है तो आप पास के पुलिस स्टेशन जाएं. हम आप की सहायता नहीं कर पाएंगे, क्योंकि यहां साइबर क्राइम नहीं देखे जाते.’’

अनन्या जैन 1 हफ्ते से अनजान नंबर से आने वाली कौल्स से परेशान थी. वे लोकल पुलिस स्टेशन गईं. वे बताती हैं, ‘‘एक रात एक व्यक्ति मुझ से फोन पर अश्लील बातें करने लगा. वह कई नंबरों से फोन कर मुझे परेशान कर रहा था. पहले मैं ने उसे बहुत डांटा फिर महसूस किया कि मुझे उकसा कर उसे मजा आ रहा है. जब मैं ने साइबर सैल डिपार्टमैंट में फोन किया, तो उन्होंने मुझे रात 12 बजे लोकल पुलिस स्टेशन जा कर शिकायत करने के लिए कहा जबकि मैं विशेषरूप से महिला पुलिस अधिकारी को बता चुकी थी कि मैं अकेली रहती हूं और यह कोईर् पास में ही हो सकता है. अगले दिन जब मैं पुलिस स्टेशन गई, तो उन्होंने उस का नंबर लिया और मुझे उस का फोन उठाने से मना किया. महिला इंस्पैक्टर ने तो हद कर दी, उस ने कहा कि वह सिर्फ फोन पर धमकियां दे रहा है. अभी तक उस ने तुम्हारा रेप नहीं किया है.’’

मृणालिनी कहती हैं, ‘‘यदि आप स्टौकर को ब्लौक कर के स्वयं को सुरक्षित समझते हैं, तो यह आप की भूल है.’’

कितना करें नजरअंदाज

एमसीसी कौलेज मुलुंड की स्टूडैंट वर्षा गुप्ता कहती हैं, ‘‘स्टौकिंग विशेषरूप से शहर में अकेले रहने वाली लड़कियों के लिए बहुत आम है. कूरियर, फूड डिलिवरी वाले, गार्ड्स आदि के पास हमारे फोन नंबर आसानी से आ जाते हैं. हर 15 दिनों में मेरे पास अलगअलग नंबरों से अश्लील मैसेज आते हैं. इन्हें इग्नोर करना ही मुझे सब से आसान लगता है.’’

अकसर महिलाओं को अपने आसपास के लोगों से सपोर्ट नहीं मिलती है. 30 वर्षीय सीमा बंसल का कहना है, ‘‘मैं अंधेरी में किराए पर अकेली रहती थी और पास के किराना स्टोर से सामान लिया करती थी. कुछ दिनों बाद वह दुकानदार मुझे कभी भी फोन करने लगा और वक्तबेवक्त डोरबैल बजाने लगा. बिल्डिंग सैक्रेटरी ने उस के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाने में मेरी मदद की. पुलिस ने उसे डरायाधमकाया. उस के बाद वाचमैन की गैरमौजूदगी में बिल्डिंग में आ कर गंदगी फैलाने लगा. मेरी सोसायटी के लोगों ने मुझे ही कौंप्लैक्स छोड़ कर जाने के लिए कहा, क्योंकि मैं अकेली लड़की थी, जिस की वजह से ये सब हो रहा था.’’

एक उच्चपदस्थ महिला पुलिस अधिकारी बताती हैं, ‘‘ऐसे मामलों में इंडियन पीनल कोड की धारा 354 और 354डी के अंतर्गत एफआईआर दर्ज करवाई जा सकती है. यह उन महिलाओं के लिए है, जिन्हें शारीरिक रूप से या एसएमएस या सोशल मीडिया अथवा फोन पर स्टौक किया जा रहा है. कई लड़कियां शिकायत करने के लिए सामने भी नहीं आना चाहतीं, क्योंकि उन्हें डर रहता है कि उन का परिवार उन्हें ही गलत समझ सकता है.’’

स्टौकर को कैसे पहचानें

– आंकड़ों के अनुसार 80% तक स्टौकर कोई आप का जानने वाला होता है. ध्यान रखें कि काम पर जाते या वापस आते समय कोई आप का पीछा तो नहीं कर रहा. प्रतिदिन एक ही रास्ते से न आएंजाएं.

– स्टौकर का मुख्य उद्देश्य आप को डराना भी है. अत: डरने के बजाय खतरा महसूस करते ही मदद मांगें. शारीरिक रूप से नुकसान पहुंचाए जाने की प्रतीक्षा न करें.

– स्टौकर आप तक पहुंचने का हर संभव प्रयास करेगा. चाहे शारीरिक रूप से या वर्चुअल वर्ल्ड द्वारा. लगातार मैसेज या कौल्स भी कर कसता है. जब भी आप अकेले सफर कर रही हों, वह आप के आसपास भी हो सकता है, सतर्क रहें सुरक्षित रहें.

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