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नौकरीपेशा 5 करोड़ लोगों को ईपीएफओ की तरफ से झटका

अगर आप भी नौकरी करते हैं तो कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) का यह फैसला पढ़कर आपको झटका लग सकता है. ईपीएफओ के इस फैसले से 5 करोड़ नौकरीपेशा लोगों की जेब पर असर पड़ेगा. ईपीएफओ ने अपने क्षेत्रीय कार्यालयों से फाइनेंशियल ईयर 2017-18 के लिए 5 करोड़ अंशधारकों के खातों में 8.55 प्रतिशत ब्याज डालने को कहा है. यह वित्त वर्ष 2012-13 के बाद सबसे कम है.

आचार संहिता के कारण नहीं हुई थी लागू

ईपीएफओ की तरफ से 120 से अधिक क्षेत्रीय कार्यालयों को लिखे गए पत्र के अनुसार लेबर मिनिस्ट्री ने कहा है कि केंद्र सरकार ने 2017-18 के लिए अंशधारकों के भविष्य निधि खातों में 8.55 प्रतिशत ब्याज देने को मंजूरी दी है. आपको बता दें कि वित्त मंत्रालय ने पिछले वित्त वर्ष में ईपीएफ पर 8.55 प्रतिशत ब्याज देने को मंजूरी दी थी. लेकिन कनार्टक चुनाव के कारण आचार संहिता लगे होने से इसे लागू नहीं किया जा सका.

21 फरवरी को मिली थी मंजूरी

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श्रम मंत्री की अध्यक्षता वाला ईपीएफओ के केंद्रीय न्यासी बोर्ड ने 21 फरवरी 2018 को हुई बैठक में 2017-18 के लिए 8.55 प्रतिशत ब्याज देने का फैसला किया था. मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय की मंजूरी के लिए यह सिफारिश भेजी थी. हालांकि वित्त मंत्रालय की सहमति से इसे क्रियान्वित नहीं किया जा सका और बाद में 12 मई को होने वाले कर्नाटक चुनाव से पहले आचार संहिता लगे होने के कारण इसमें और देरी हुई.

पीएफ अकाउंट के आधार पर लोन

इससे पहले ईपीएफओ ने 2016-17 के लिए 8.65 प्रतिशत ब्याज दिया था. वहीं 2015-16 में यह 8.8 प्रतिशत, 2014-15 और 2013-14 में 8.75 प्रतिशत था. वर्ष 2012-13 में ईपीएफओ ने 8.5 प्रतिशत ब्याज दिया था. इससे पहले महीने की शुरुआत में खबर आई थी कि नए प्लान अनुसार पीएफ अकाउंट के आधार पर आसान शर्तों पर होम लोन, औटो लोन और एजुकेशन लोन मिल सकता है.

दरअसल सेंट्रल बोर्ड औफ ट्रस्टीज (CBT) की बैठक में प्रस्ताव मिला कि ईपीएफओ फाइनेंशियल सर्विसेज एन्टिटी (FSE) की तरह काम कर सकता है. बैठक के दौरान ईपीएफओ को फाइनेंशियल संस्था बनाने का प्रस्ताव मिला था. उम्मीद की गई कि अगर ईपीएफओ ऐसा करता है तो इससे पीएफ अंशधारकों को ज्यादा रिटर्न मिल सकता है.

इंस्टाग्राम लेकर आया म्यूट फीचर

अगर आप भी इंस्टाग्राम इस्तेमाल करते हैं तो आपके लिए एक खुशखबरी है. इंस्टाग्राम आपके लिए एक नया फिचर लेकर आया है. इंस्टाग्राम ने एक लंबे इंतजार के बाद म्यूट का फीचर लौन्च कर दिया है. इंस्टाग्राम म्यूट की मदद से आप उन लोगों को म्यूट कर सकते हैं, जिन्हें आप अनफौलो नहीं करना चाहते हैं लेकिन उनके पोस्ट से परेशान हैं. म्यूट करने के बाद आप बिना अनफौलो किए अनचाहे पोस्ट से छुटकारा पा सकते हैं.

कई बार ऐसा होता है कि हम कुछ खास लोगों को चाहकर भी अनफौलो नहीं कर पाते हैं, उनके पोस्ट हमें अच्छे नहीं लगते. या परिवार, कौलेज या कुछ दोस्त ऐसे होते हैं, जो बार बार फालतू के पोस्ट करते हैं, जिन्हे देखने में आप जरा भी इंटरेस्टेड नहीं है. ऐसे में इंस्टाग्राम का यह म्यूट फीचर आपके लिए काफी मददगार साबित हो सकता है.

इस फीचर की मदद से इंस्टाग्राम पर अपनी फीड को अपने हिसाब से पर्सनलाइज्ड कर सकते हैं. हालांकि यह फीचर अभी सभी को नहीं मिल रहा है. अगले सप्ताह तक म्यूट गोल्बली लौन्च हो जाएगा. इसे एक्टिव करने के लिए अकाउंट के राइट साइट में दिख रहे तीन (…) पर क्लिक करके आप किसी को म्यूट कर सकते हैं.

सभी फौर्मेट से डिविलियर्स ने लिया सन्यास

दक्षिण अफ्रीकी खिलाड़ी एबी डिविलियर्स ने अपने संन्यास की खबर से पूरे क्रिकेट दुनिया को चौंका दिया है. दक्षिण अफ्रीका के क्रिकेट फैन को छोड़िए, इस समय भारत और दुनिया के दूसरे देशों में क्रिकेट फैन उनके इस फैसले से  निराश हैं. एबी डिविलियर्स इस समय सबसे कमाल की फौर्म में थे. इसका उदाहरण उन्होंने आईपीएल में दे दिया था. विराट के बाद वही ऐसे खिलाड़ी थे, जिसका बल्ला जमकर बोला. कई मैचों में उन्हीं की दम पर बेंगलुरु की टीम जीती.

हालांकि बेंगलुरु प्ले औफ में नहीं पहुंच पाई. लेकिन टीम के कप्तान विराट कोहली ने भले सभी बल्लेबाजों की क्लास लगाई हो, लेकिन उन्होंने एबीडी की तारीफ में जमकर कसीदे पढ़े थे. डिविलियर्स ने 12 मैचों में 480 रन बनाए. इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 174 से ज्यादा का रहा. इसमें सबसे शानदार पारी नाबाद 90 रनों की रही. डिविलियर्स लंबे समय से आईपीएल का हिस्सा रहे हैं. इस दौरान वह दिल्ली और बेंगलुरु टीम से खेले.

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अब उनके संन्यास के बाद ये सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या वह अगले साल आईपीएल का हिस्सा होंगे या नहीं. उनके भारतीय प्रशंसक ये जरूर चाहेंगे कि वह आईपीएल में खेलें. रिटायरमेंट की घोषणा करते हुए डिविलियर्स ने कहा है कि वह क्रिकेट के हर फौर्मेट से विदाई ले रहे हैं. वह सिर्फ घरेलू क्रिकेट खेलेंगे. इसमें वह अपनी टीम टाइटंस की ओर से खेलते दिखाई देंगे.

आईपीएल में वह खेलेंगे इस पर उन्होंने अभी कुछ भी साफ नहीं किया है. हालांकि उन्होंने इसे पूरी तरह नकारा भी नहीं है. ऐसे में भारतीय क्रिकेट फैंस चाहेंगे कि डिविलियर्स अगले साल भी आईपीएल का हिस्सा बनें और अपने शानदार शौट्स लोगों को दिखाएं.

IPL में रन बनाने में 10वें  नंबर पर हैं डिविलियर्स

आईपीएल के इतिहास में अब रन बनाने वाले खिलाड़ियों में एबी डिविलियर्स 10वें नंबर पर हैं. उन्होंने आईपीएल में अब तक 141 मैच खेले हैं. इसमें 129 पारियों में उन्होंने 3953 रन बनाए हैं. इसमें उन्होंने 3 शतक और 28 अर्धशतक जड़े हैं. उन्होंने 150.93 की स्ट्राइक रेट से रन बनाए हैं. गौर करने वाली बात ये है कि उनसे ऊपर जो 9 खिलाड़ी हैं, उन सभी की स्ट्राइक रेट डिविलियर्स से कम है.

‘संजू’ के नए पोस्टर में दिखा सोनम-रणबीर का क्रेजी अवतार

अभिनेता संजय दत्त की जिंदगी पर आधारित फिल्म ‘संजू’ इन दिनों काफी सुर्खियों में है. अब तक कई पोस्टर और एक टीजर रिलीज हो चुका है. फिल्म के हर एक पोस्टर में संजय दत्त के कई तरह के लुक को दिखाया गया है. इसमें रणबीर बिल्कुल संजय जैसे दिख रहे हैं, जिसे देखकर हर कोई हैरान है. इसी बीच अब ‘संजू’ का एक और पोस्टर रिलीज किया गया है.

इस पोस्टर को ‘संजू’ के निर्देशक राजकुमार हिरानी ने अपने औफिशियल ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया है. यह पोस्टर फिल्म के बाकि पोस्टर से थोड़ा हटकर है. इसमें रणबीर कपूर के साथ सोनम कपूर रोमांटिक अंदाज में नजर आ रही हैं. इस पोस्टर को शेयर करने के साथ ही उन्होंने लिखा-  ‘संजू’ की लव स्टोरी की एक तस्वीर, संजू का ट्रेलर आउट होने में केवल पांच दिन बाकी.’

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो, फिल्म में सोनम टीना मुनीम का किरदार निभाती नजर आएंगी. बताया जाता है कि टीना संजय की सबसे पहली गर्लफ्रेंड थीं. दरअसल संजय की डेब्यू फिल्म ‘रौकी’ की शूटिंग के दौरान ही दोनों काफी करीब आ गए थे.

बता दें यह फिल्म विधु विनोद चोपड़ा फिल्म्स और फौक्स स्टार स्टूडियो के बैनर तले बनाई गई है. अगर इस पोस्टर की बात करें तो यह पहली बार है जब रणबीर के अलावा कोई अन्य स्टार नजर आया है. बता दें, सोनम और रणबीर अपनी डेब्यू फिल्म ‘सांवरिया’ के दशक भर बाद इस फिल्म के लिए साथ आए हैं. यहां बता दें इस फिल्म में रणबीर और सोनम के अलावा परेश रावल, मनीषा कोइराला, विकी कौशल और दिया मिर्जा ने भी काम किया है. यह फिल्म इस साल 29 जून को रिलीज होने वाली है.

राहुल द्रविड़ और सौरव गांगुली ने आज के ही दिन रचा था इतिहास

भारतीय क्रिकेट की कई पारियां यादगार हैं, इन पारियों में एक पारी ऐसी है जिसमें भारतीय क्रिकेट के दो दिग्गज बल्लेबाजों ने एक खास रिकौर्ड बनाया था. बात 1999 की है जब इंग्लैंड में आईसीसी का वर्ल्डकप चल रहा था. टीम इंडिया की कप्तानी मोहम्मद अजहरुद्दीन के हाथों में थी. आज ही के दिन, यानि 26 मई को भारत और श्रीलंका के बीच मुकाबला होना था. टूर्नामेंट में टीम इंडिया इससे पहले दक्षिण अफ्रीका से हार चुकी थी लेकिन उसने जिम्बाब्वे और केन्या को हरा भी दिया था. इसके बाद श्रीलंका से मुकाबला अहम था.

इस मैच में सौरव गांगुली ने वनडे क्रिकेट का उस समय का सर्वाधिक व्यक्तिगत स्कोर बनाने का रिकौर्ड बनाया तो राहुल द्रविड़ ने भी शानदार 145 रन बनाए जो उस समय उनके वनडे करियर का सर्वश्रेष्ठ स्कोर था. हालाकि द्रविड़ ने उसी साल भारत में आकर अपना रिकौर्ड सुधारा और न्यूजीलैंड के खिलाफ 153 रन बनाए जो अंत तक उनका सर्वश्रेष्ठ निजी वनडे स्कोर रहा.

श्रीलंका ने टौस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया. जिसे श्रीलंका के चामिंडा वास ने पहले ओवर में ही सदगोपन रमेश को बोल्ड आउट कर सही साबित करने की कोशिश भी की लेकिन इसके बाद पहले तीन ओवर में संभलकर खेलने के हाद गांगुली और राहुल द्रविड़ ने श्रीलंकाई गेंदबाजों को कोई मौका नहीं दिया. चौथे ओवर में दोनों ने एक एक चौका मारा और इसके बाद चुनिंदा शौट्स लगाते हुए दस ओवर में ही टीम का स्कोर 67 तक पहुंचा दिया. तब तक दोनों ने ही एक भी छक्का नहीं लगाया था.

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लेकिन 15वें ओवर तक राहुल द्रविड़ ने केवल 43 गेंदों पर अपना अर्धशतक पूरा कर लिया वही सौरव अपनी पारी धीरे-धीरे बढ़ा रहे थे. दोनों ने 17 ओवर में भारत के 100 रन पूरे किए. जबकि सौरव ने 23वें ओवर में 68 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा कर लिया. 27वें ओवर में भारत के 150 रन पूरे होने के बाद 32वें ओवर में सौरव गांगुली ने भारत के लिए पारी का पहला छक्का लगाया. 35वें ओवर में ही टीम का स्कोर 200 पार कराने के बाद राहुल द्रविड़ ने पहले 36वें ओवर में अपना शतक पूरा किया. इसके 39वें ओवर में अपना शतक पूरा कर लिया.

दोनों की जुगल बंदी ने रच दिया था इतिहास

इसके बाद तो दोनों ने खुल कर खेलना शुरु कर दिया. पहले 41 वें ओवर में 250 रन, इसके बाद 45वें ओवर में ही दोनों ने टीम को स्कोर 300 पार करा दिया जिसके अगले ओवर में ही राहुल रन आउट हो गए और दोनों के बीच सबसे बड़ी पार्टनरशिप का रिकौर्ड बना गया. उन्होंने 17 चौकों और एक छक्के की मदद से कुल 145 रन बनाए. उस समय तक गांगुली राहुल से आगे निकल कर अपना स्कोर 150 पार कर चुके थे.

इसके बाद भारत के विकेट गिरते रहे लेकिन गांगुली रन बनाते रहे. अंत में आखिरी ओवर की पांचवी गेंद पर सौरव आउट हो गए लेकिन उन्होंने कपिल देव का 175 रनों का रिकौर्ड तोड़ डाला. सौरव 183 रन बनाकर आउट हुए. हालाकि सौरव गैरी कर्स्टन के 188 रनों के रिकौर्ड को नहीं तोड़ पाए थे. लेकिन वे भारत के सबसे ज्यादा निजी स्कोर बनाने वाले बल्लेबाज जरूर बन गए.

अजहर जडेजा का रिकौर्ड टूटा था तब

इसे मैच में सौरव और द्रविड के बीच उस समय का, किसी भी विकेट के लिए सबसे बड़ी वनडे साझेदारी का रिकौर्ड बना. दोनों ने भारत के ही मोहम्मद अजहरुद्दीन और अजय जडेजा के 275 रनों कार रिकौर्ड तोड़ा जो दोनों ने 1997-98 के सत्र में बनाया था. दोनों ही इस मैच में खेले थे. भारत का भी यह उस समय तक का सबसे बड़ा स्कोर था. जो कि 2007 के विश्वकप में ही टूटा था.

उत्तर प्रदेश उपचुनाव : जिन्ना बनाम गन्ना

उत्तर प्रदेश में कैराना लोकसभा और नूरपुर विधानसभा का उपचुनाव है. दो सीटों के लिये हो रहा यह चुनाव भाजपा बनाम विपक्षी एकता है. यहां भाजपा के खिलाफ पूरा विपक्ष एकजुट है. यहां उत्तर प्रदेश के राजनीतिक भविष्य की एक तस्वीर भी बनेगी. 2 सीटों के उपचुनावों के बाद मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के विधानसभा चुनाव हैं. जहां भाजपा सत्ता में है और उसे सत्ता विरोधी मतों का नुकसान उठाना पड़ेगा.

उत्तर प्रदेश में सपा-लोकदल दोनो सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं. कांग्रेस और बसपा इनको समर्थन दे रहे हैं. कैराना और नूरपूर दोनों ही सीटों पर भाजपा का कब्जा रहा है. अब भाजपा के लिये इनको जीतना किसी चुनौती से कम नहीं है. विपक्ष के एकजुट होने से भाजपा की हालत खराब हो रही है. ऐसे में विकास की बात करने वाली भाजपा एक बार फिर से हिन्दू – मुसलिम मुद्दों को उठाने के लिये ‘जिन्ना’ की तस्वीर विवाद को हवा दे रही है.

विपक्ष एक जुट होकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों की बात कर रहा है. भाजपा गन्ना किसानों पर सवालों के जवाब देने की जगह पर जिन्ना की बात कर रही है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दलित और मुसलिम वोटर सबसे अधिक हैं. सहारनपुर कांड होने के बाद से दलित भाजपा से नाराज चल रहा है. वह भाजपा के पक्ष में वोट नहीं करने जा रहा है. दूसरी तरफ मायावती अपनी बसपा पार्टी के लोगों को भाजपा के खिलाफ विपक्ष के प्रत्याशी को वोट देने की बात कह चुकी हैं. देखने वाली बात यह है कि मायावती की यह अपील कितनी कारगर होती है.

अगर कैराना और नूरपुर में विपक्ष को सफलता मिलती है तो उत्तर प्रदेश में 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की मजबूत घेराबंदी हो सकेगी. उत्तर प्रदेश की राजनीति में पहली बार विपक्ष भाजपा के खिलाफ लांमबद हुआ है. अब इस के टेस्ट का समय है. गोरखपुर और फूलपुर की हार के बाद भाजपा पूरी तरह से सतर्क है. विपक्षी एकता को तोड़ने के लिये वह हिन्दू-मुसिलम राग गा रही है. भाजपा को लगता है कि अगर वोट का धार्मिक धुव्रीकरण हो सका तो ही वह जीत पायेगी. इस लिये वह विपक्षी एकता को दिखा कर हिन्दुओं को डराने का काम रही है.

भाजपा विपक्ष के गन्ना किसानों के मुद्दे पर चुप है. उसे लगता है कि इससे उसकी राह सरल नहीं होगी. भाजपा अलीगढ़ के एएमयू छात्रसंघ में लगी जिन्ना की तस्वीर को चुनावी अस्त्र की तरह प्रयोग कर रही है. सच बात यह है कि वह मुद्दा पूरी तरह से बेमकसद था. छात्रसंघ के लोग कह चुके हैं कि अगर सरकार कहे तो वह जिन्ना की तस्वीर हटाने को तैयार हैं. भाजपा को जिन्ना की तस्वीर को हटाने से मतलब नहीं है, उसे केवल जिन्ना के नाम पर धार्मिक धुव्रीकरण करना है.

पश्चिम उत्तर प्रदेश के उपचुनावों में गन्ना बनाम जिन्ना का मामला क्या रंग दिखाता है यह तो चुनाव परिणाम बतायेंगे पर सीधी टक्कर में भाजपा परेशान है. उसके लिये अच्छी बात यही है कि उसके प्रत्याशियों को सहानुभूति वोट मिलने की उम्मीद है. वोट के धार्मिक धुव्रीकरण के लिये सबसे सरल यह है कि यहां दोनों उपचुनाव में विपक्ष ने मुसलिम उम्मीदवार ही चुनाव मैदान में उतारे हैं. जिससे भाजपा के लिये वोट के धर्मिक धुव्रीकरण की राह सरल हो गई है.

धमकी भरे मैसेज और कौल से खौफ में भाजपा के विधायक

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के विधायक मोबाइल मैसेज और वाट्सएप कौल से खौफ में हैं. धमकी भरे मैसेज और कौल में विधायकों से रंगदारी मांगी जा रही है. आश्चर्य की बात यह है कि ऐसे विधायकों की संख्या बढ़ती जा रही है. विधायक इस कदर खौफ में हैं कि वह अब समय बेसमय फोन उठाने से बचने लगे हैं. ऐसे विधायकों की संख्या 22 हो गई है. धमकियों का सिलसिला जारी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस विभाग और डीएम को विधायकों की सुरक्षा को सख्त करने का संदेश दिया है. उत्तर प्रदेश के पुलिस विभाग ने इसको गंभीरता से लेकर स्पेशल टास्क फोर्स, एटीएस और दूसरी खुफिया एजेंसियों को जांच का काम सौप दिया है. शुरुआती जानकारी में फोन से पाकिस्तान और माफिया दाउद का संबंध सामने आ रहा है.

विधायकों में बढ़ते खौफ को लेकर विपक्ष ने योगी सरकार की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिये हैं. पूर्व मुख्यमंत्री और सपा नेता अखिलेश यादव ने कहा कि ‘प्रदेश में भय का माहौल और भी बढ़ गया है. जहां विधायकों से खुलेआम रंगदारी मांगी जा रही हो, रिटायर डीजीपी के घर डकैती जैसी घटना घट जाये, वहां आम आदमी का अंदाजा लगाया जा सकता है. प्रदेश में कानून व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है.’ रंगदारी के लिये आने वाले मैसेजों में विधायकों को 10 लाख देने के लिये कहा जा रहा है. पुलिस अभी तक किसी भी शिकायत की तह तक नहीं पहुंच पाई है.

माफिया दाउद का नाम रंगदारी मांगने की घटना में आने के बाद विधायकों में खौफ है. कुछ लोगों का मानना है कि योगी राज में भाजपा विधायक बहुत परेशान हैं. उनकी बात सुनी नहीं जा रही. अब इस मामले के चर्चा में आने के बाद पुलिस और डीएम विधायक की बात सुनने लगे हैं. दूसरे कुछ विधायक भी इसकी आड़ में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना चाह रहे हैं. इस मामले में राजनीतिक मुद्दे भी हैं. पाकिस्तान और दाउद का नाम लेकर कैराना और नूरपुर के विधानसभा उपचुनावों में इस बहाने तुष्टीकरण करने की जुगत भी दिखाई दे रही है.

सीमापार और पाकिस्तान से लड़ाई के लिये तैयार विधायक केवल फोन संदेश से ही खौफ में आ गये यह समझने वाली बात है. रंगदारी के तौर पर दाउद केवल 10 लाख की डिमांड करेगा यह सोचने वाली बात है. सरकार को पूरे मामले का पर्दाफाश करना चाहिये. जब तक दूध का दूध और पानी का पानी नहीं होगा विधायकों पर खौफ बढ़ता रहेगा. विधायकों में फैले इस खौफ से प्रदेश सरकार के भरेासे और इकबाल पर असर पडा रहा है.

तो 19 नवंबर को रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण बधेंगे शादी के बंधन में

तमाम विवादों के बाद ‘पद्मावत’ प्रदर्शित हो गयी. इस बात को लगभग चार माह हो गए, मगर दीपिका पादुकोण के पास एक भी फिल्म नही है. तो क्या वह घर पर खाली बैठी है? वास्तव में दीपिका पादुकोण को एक तरफ नई फिल्मों के आफर नहीं मिल रहे हैं, तो दूसरी तरफ वह अपनी निजी जिंदगी के लिए खुद को वक्त दे रही हैं. सूत्र बताते हैं कि दीपिका पादुकोण अपने प्रेमी रणवीर सिंह के साथ समय बिताने के अलावा अपनी शादी की तैयारियों में ही समय गुजार रही हैं.

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दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह के अति करीबी सूत्रों के अनुसार दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह की शादी के कार्यक्रम इसी साल के अंत में 18 नवंबर से बीस नवंबर के बीच संपन्न होंगे. सूत्रों का दावा है कि 19 नवंबर को मुंबई में ही काफी भव्य समारोह में यह शादी संपन्न होगी.

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सूत्रों का दावा है कि दीपिका पादुकोण के मुंबई के प्रभादेवी वाले घर पर दीपिका के पिता प्रकाश पादुकोण ने हाल ही में रणवीर सिंह के माता पिता के साथ बैठक कर शादी से जुड़े मसलों पर विस्तार से बात कर सारे कार्यक्रम तय किए.

हनीमून मनाने ग्रीस जा रही हैं सोनम

आनंद आहुजा के संग शादी करने के बाद हनीमून पर जाने की बजाय सोनम कपूर आहुजा पहले फ्रांस में ‘कौन्स इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल’’ में रेड कारपेट पर शिरकत करने के लिए चली गयी थी. यहां पर उनकी अदाओं का हर कोई कायल हो गया. इसके बाद जब वह वहां से वापस लौटी तो अपनी फिल्म ‘‘वीरे दी वेडिंग’’ को प्रमोट करने में व्यस्त हो गयी. व्यस्तता इतनी थी कि उन्हें शादी के बाद अपने पति के साथ समय बिताने का ना तो ज्यादा समय मिल पाया और ना ही वह हनीमून पर जा पाईं.

लेकिन अब खबर है कि एक जून को ‘वीरे दी वेडिंग’के प्रदर्शन के बाद सोनम अपने पति आनंद आहुजा के संग हनीमून मनाने के लिए ग्रीस जाने वाली हैं. हनीमून के लिए ग्रीस जाने की बात सोनम कपूर ने खुद इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट कर स्वीकार की है. इस वीडियो में उन्होंने अपने फ्रेंड्स और रिलेटिव्स को शादी में आए वेडिंग गिफ्ट के लिए थैंक्यू भी कहा.

सूत्र दावा कर रहे हैं कि हनीमून से वापस आने के बाद सोनम अपनी नई फिल्म‘‘जोया फैक्टर’’की शूटिंग शुरू करेंगी.

माइक्रोवेव खरीदते समय ना करें ये गलतियां

माइक्रोवेव अब लगभग सभी घरों में एक जरूरी होम एप्लायंसेज के रूप में देखा जाने लगा है. इसने रसोई के कई कामों को पहले से कहीं ज्यादा आसान बना दिया है. समय की कमी की वजह से आजकल कामकाजी और शहरी जिंदगी में ओवन या माइक्रोवेव की जरूरत बढ़ती जा रही है, लेकिन सही माइक्रोवेव के लिए सही चयन की आवश्यकता होती है. ऐसे में अगर आप माइक्रोवेव लेने जा रही हैं या उसे खरीदनें का सोच रही हैं तो इसके लिए कुछ बातों को जान लेना आपके लिए बेहद जरूरी है.

माइक्रोवेव के प्रकार

सोलो/कन्वेंशनल माइक्रोवेव: यह माइक्रोवेव छोटा होता है और आसानी से आपरेट किया जा सकता है. इसे बेकिंग और ग्रिलिंग को छोड़कर डिफ्रास्टिंग फूड और खाना गर्म करने जैसे बेसिक कामों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. इसे खरीदते समय ध्यान रखें कि इसके अंदर रखा खाना अच्छी तरह से दिखे. बनावट ऐसी हो कि आप इसे आसानी से साफ कर सकें. सोलो माइक्रोवेव की कीमत फिलहाल बाजार में साइज और अलग-अलग कंपनियों के आधार पर करीब 4,500 से 8,000 रुपये के बीच है.

ग्रिल माइक्रोवेव

यह सोलो माइक्रोवेव से बिल्कुल अलग बेकिंग, ग्रिलिंग और टोस्टिंग जैसे कई काम करता है. फिलहाल यह बाजार में करीब 5,000 से 15,000 रुपये की कीमत में मिल जाता है.

कंवेक्शन माइक्रोवेव: इस माइक्रोवेव का उपयोग बारबेक्यू सहित बाकी सभी खाना पकाने के कामों में किया जा सकता है. किसी भी खाने को बेहतर बनाने के लिए माइक्रोवेव उसे समान रूप से गर्म करता है. यह सोलो माइक्रोवेव और ग्रिल माइक्रोवेव की तुलना में अधिक महंगा है. यह आपको 9,000 से 25,000 रुपये तक की कीमत में मिल जाएगा.

कन्वेंशनल VS कंवेक्शन

कन्वेंशनल माइक्रोवेव ओवन हौट माइक्रोवेव्स यानी तरंगे पैदा करता है, जो खाने को गर्म करने के लिए ग्लास और स्टील के कंटेनरों से गुजरती हैं. ये बेसिक माइक्रोवेव टेक्नोलाजी को रेडिएंट हीट के साथ जोड़ती हैं और ओवन में रखे खाने को गर्म करने के लिए गर्म हवा छोड़ती है. दूसरी ओर कंवेक्शन माइक्रोवेव के पास गर्म हवा को ओवन में फैलाने के लिए एक हीटिंग एलिमेंट के साथ फैन भी होता है, जिसकी वजह से खाना एकसमान पकता है. इन तीनों माइक्रोवेव में से सोलो माइक्रोवेव और कंवेक्शन माइक्रोवेव फिलहाल बाजार में सबसे लोकप्रिय हैं.

माइक्रोवेव के जरूरी फीचर

आटोमेटिक सेंसर: आटोमेटिक सेंसर वाले माइक्रोवेव ओवन खाना पूरी तरह से पकने या गर्म होने के बाद स्वतः बंद हो जाते हैं. यह खाने को अधिक गर्म होने से रोकता है.

कंट्रोल पैनल: मैकेनिकल और टच कंट्रोल पैनल के साथ माइक्रोवेव खरीदना बेहतर होता है. टच कंट्रोल पैनल को सावधानी से संभालना पड़ता है, क्योंकि इसके फेल होने की संभावना होती है. ज्यादातर कंपनियों ने अपने माइक्रोवेव के लिए मैकेनिकल कंट्रोल पैनल उपलब्ध कराने शुरू कर दिए हैं.

चाइल्ड सेफ्टी लौक: यह एक जरूरी फीचर है. माइक्रोवेव ओवन खरीदते समय उन लोगों को इसे ध्यान में रखना चाहिए, जिनके परिवार में छोटे बच्चे हैं. ओवन में इलेक्ट्रिक लौक सिस्टम ओवन से होने वाली किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचाता है.

पावर रेटिंग

बड़े आकार वाले माइक्रोवेव आमतौर पर 1000-1600 वाट बिजली की खपत करते हैं, जबकि छोटे साइज वाले 800-1000 वाट की खपत करते हैं. खरीदने से पहले यह जरूर सुनिश्चित कर लें कि उस कंपनी का सर्विस सेंटर आपके शहर में है या नहीं. इसी के साथ आजकल कई स्टार्स वाले माइक्रोवेव बाजार में उपलब्ध है. जितना ज्यादा स्चार रहेगा बिजली की खपत उतनी ही कम होगी. ऐसे में आपके लिए 5 स्टार वाला माइक्रोवेव लेना बेहतर है.

माइक्रोवेव का आकार

माइक्रोवेव का आकार लोगों के हिसाब से चुना जा सकता है, जिनके लिए भोजन बनाया जाना है. मान लीजिए कि आपके परिवार में दो-तीन सदस्य हैं, तो एक छोटे आकार वाला माइक्रोवेव (18-20 लीटर) सबसे अच्छा होगा. इसी तरह बड़े परिवार के लिए खाना पकाना हो, तो हाई पावर के साथ एक बड़े माइक्रोवेव की आवश्यकता होगी. इस वर्ग के लिए बड़े आकार वाले माइक्रोवेव (23-28 लीटर) बाजार में सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं.

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