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नोटिस का जवाब खून से

67   वर्षीय राजेंद्र व्यास मुंबई की ग्रांट रोड के एम.एस. अली मार्ग स्थित भारतनगर परिसर की सोसायटी में अपने परिवार के साथ रहते थे. वह मुंबई की एक मिल में नौकरी करते थे लेकिन मिल बंद हो जाने के कारण उन का झुकाव शेयर बाजार की तरफ हो गया था.

परिवार सुखी और संपन्न था. सोसायटी के लोगों में उन की इज्जत, मानसम्मान और प्रतिष्ठा थी. परिवार में उन की पत्नी सुरेखा व्यास के अलावा 2 बेटियां कीर्ति और शेफाली थीं. उन का कोई बेटा नहीं था, लेकिन उन्हें इस का कोई गम नहीं था. वह अपनी दोनों बेटियों को बेटों जैसा ही प्यार, दुलार करते थे. उन्होंने उन का पालनपोषण भी बेटों की तरह ही किया था.

राजेंद्र व्यास ने दोनों बेटियों को बेटों की तरह शिक्षित कर उन्हें उन के पैरों पर खड़ा किया था. बड़ी बेटी कीर्ति व्यास एमबीए, एलएलबी करने के बाद एक अच्छी पोस्ट पर काम कर रही थी. छोटी बेटी शेफाली भी एक मल्टीनैशनल कंपनी में नौकरी करती थी. सुरेखा गृहिणी के साथसाथ एक अच्छी मां थीं. उन्हें दोनों बेटियों से गहरा प्यार था.

परिवार में किसी चीज की कोई कमी नहीं थी, दिन हंसीखुशी से बीत रहे थे. लेकिन इस साल मार्च महीने में उन के परिवार में एक ऐसी घटना घटी, जिस से पूरे परिवार में मातम छा गया था.

16 मार्च, 2018 की रात राजेंद्र व्यास और उन के परिवार पर भारी थी. उस दिन उन की बेटी कीर्ति सुबह पौने 9 बजे घर से औफिस जाने के लिए निकली थी और देर रात तक वापस नहीं लौटी. सुबह औफिस जाते समय वह किसी बात को ले कर थोड़ा परेशान जरूर थी, लेकिन उस ने परेशानी की वजह किसी से शेयर नहीं की थी. मां सुरेखा के पूछने पर उस ने मुसकरा कर बात टाल दी थी. मां ने भी इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया था.

इंतजार की काली रात

दोपहर 12 बजे सुरेखा ने घर पर लगे वाईफाई का पासवर्ड जानने के लिए कीर्ति को फोन किया. लेकिन कीर्ति ने फोन रिसीव नहीं किया. उस का फोन कभी स्विच्ड औफ तो कभी आउट औफ कवरेज आ रहा था.

कई बार फोन करने के बाद भी जब कीर्ति का फोन नहीं लगा तो उन्होंने यह सोचा कि हो सकता है उस ने अपना फोन बंद कर रखा हो. क्योंकि कीर्ति कंपनी में एक बड़ी पोस्ट पर थी.

ऊपर से मार्च का महीना कंपनी की सालाना क्लोजिंग का होता है. वह किसी मीटिंग वगैरह में भी व्यस्त हो सकती थी. उन्होंने सोचा कि यदि वह मीटिंग में होगी तो मीटिंग के बाद खुद ही फोन कर लेगी. पर पूरा दिन बीत गया, न तो कीर्ति का फोन आया और न ही उस ने कोई मैसेज भेजा.

कीर्ति का पूरा परिवार तब परेशान हो गया, जब शेफाली अपने औफिस से घर लौट आई, जबकि कीर्ति का कहीं पता नहीं था. दोनों का औफिस आनेजाने का समय लगभग एक ही था. कीर्ति अपने समय की पाबंद थी.

इसके अलावा वह औफिस से 1-2 बार घर में फोन कर के घर वालों का हालचाल जरूर पूछ लिया करती थी. इस के अलावा अगर उसे देर से आना होता तो इस की जानकारी वह घर वालों को दे दिया करती थी.

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लापता हुई कीर्ति

जैसेजैसे समय और रात गहरी होती जा रही थी, वैसेवैसे परिवार वालों का दिल बैठता जा रहा था. काफी समय निकल जाने के बाद भी जब कीर्ति घर नहीं पहुंची और न ही उस का कोई फोन आया तो घर वालों ने कीर्ति की कंपनी में फोन कर के उस के बारे में पूछा. वहां से पता चला कि कीर्ति तो आज औफिस आई ही नहीं थी.

यह सुन कर घर में कोहराम मच गया. परिवार के अलावा जिसे भी कीर्ति के औफिस न पहुंचने की खबर मिली, सब स्तब्ध रह गए. घर वालों के अलावा जानपहचान वाले भी कीर्ति की तलाश में लग गए. ऐसी कोई जगह नहीं बची, जहां कीर्ति को नहीं खोजा गया. कीर्ति के साथ काम करने वाले लोग भी घर वालों के साथ मिल कर उसे ढूंढ रहे थे.

सभी यह सोच कर परेशान थे कि कीर्ति सुबह पौने 9 बजे अपनी ड्यूटी के लिए निकली थी तो वह अपने औफिस न पहुंच कर कहां चली गई. सभी का मन किसी अनहोनी को ले कर अशांत था. वह रात कीर्ति के घर वालों के लिए बड़ी बेचैनी भरी गुजरी.

सुरेखा और उन की बेटी शेफाली के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे. पिता राजेंद्र व्यास की हालत भी ठीक नहीं थी. सोसायटी वाले और उन के नातेरिश्तेदार उन्हें धीरज बंधा कर पुलिस के पास जाने की सलाह दे रहे थे.

28 वर्षीय कीर्ति व्यास ने अपनी पढ़ाई पूरी कर जब सर्विस की कोशिश की तो उस की योग्यता के आधार पर उसे बड़ी आसानी से अंधेरी पश्चिम लोखंडवाला स्थित एक जानीमानी कंपनी बीब्लंट (सैलून) में नौकरी मिल गई.

इस कंपनी की सीईओ और एमडी दोनों मशहूर फिल्म अभिनेत्री शबाना आजमी और जावेद अख्तर के बेटे फरहान अख्तर की पूर्वपत्नी अनुधा भवानी अख्तर थीं.

इस कंपनी का फिल्मी सितारों और बड़ेबड़े उद्योगपतियों के बीच एक बड़ा नाम है. यहां हेयर कटिंग और ब्यूटी के लिए आने वालों को 3 हजार से ले कर 10 हजार रुपए तक देने पड़ते हैं. इस कंपनी की दिल्ली, कोलकाता और चेन्नै सहित कई महानगरों में 50 से अधिक शाखाएं हैं, कंपनी का हेडऔफिस मुंबई में है.

यह कंपनी बड़े फिल्मी सितारों, उद्योगपतियों, टीवी कलाकारों आदि की हेयरकटिंग और ब्यूटी ड्रेसिंग का काम तो करती ही है, इस के अलावा टीवी और फिल्मों का फाइनैंस और ऐक्टिंग की कोचिंग क्लासें भी चलाती है.

यहां कोचिंग में आने वालों को 6 महीने की कोचिंग दी जाती है, जिस की फीस 3 लाख से ले कर 8 लाख रुपए के बीच होती है. कंपनी का सालाना टर्नओवर कई करोड़ का होता है.

बीब्लंट की फाइनैंस मैनेजर और लीगल एडवाइजर थी कीर्ति

इस कंपनी में कीर्ति व्यास लगभग 5 साल पहले आई थी. उस ने अपनी मेहनत और जिम्मेदारी से कंपनी के सीईओ और एमडी का दिल कुछ महीनों में ही जीत लिया था. कंपनी में उस की नियुक्ति फाइनैंस मैनेजर के पद पर हुई थी, लेकिन थोड़े ही दिनों में उसे कंपनी का लीगल एडवाइजर भी बना दिया गया था. कीर्ति की मेहनत से कंपनी को काफी लाभ हुआ था और टर्नओवर भी बढ़ गया था.

कंपनी के काम के प्रति वह जिम्मेदार और पाबंद तो थी ही, साथ ही वह वहां के कर्मचारियों के प्रति भी सख्त थी. काम में किसी भी प्रकार की ढिलाई या लापरवाही उसे जरा भी पसंद नहीं थी. कंपनी की लीगल एडवाइजर और फाइनैंस मैनेजर होने के नाते वह किसी भी प्रकार का निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र थी. कंपनी के भले के लिए वह हर उस शख्स के प्रति सख्त थी जो लापरवाह रहता था. वह यह नहीं देखती थी कि कोई सीनियर है या जूनियर.

कीर्ति व्यास को गायब हुए अब तक 24 घंटे से अधिक हो चुके थे, लेकिन उस की कोई खबर नहीं मिली थी. घर वालों के सामने अब सिर्फ पुलिस के पास जाने का रास्ता बचा था. लाचार और मजबूर हो कर कीर्ति के पिता राजेंद्र व्यास अपने नातेरिश्तेदारों और कंपनी के कुछ लोगों के साथ थाना डी.बी. मार्ग पहुंचे. उन्होंने थानाप्रभारी से मिल कर उन्हें सारी बातें बताईं. थानाप्रभारी ने उन की बातें सुनने के बाद कीर्ति के अपहरण का मामला दर्ज करवा दिया.

मामला एक हाईप्रोफाइल कंपनी की अधिकारी से जुड़ा हुआ था, इसलिए थानाप्रभारी किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहते थे. उन्होंने अपने अधिकारियों के अलावा पुलिस कंट्रोल रूम को मामले की जानकारी दे दी. थानाप्रभारी ने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर मामले की जांच तेजी से शुरू कर दी.

पुलिस ने कीर्ति के घर से ले कर औफिस तक सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, कीर्ति के फोन की काल डिटेल्स हासिल कर उस की कंपनी के सभी कर्मचारियों के बयान लिए. लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात रहा.

वह मामले को जितना सुलझाने की कोशिश कर रहे थे, उतना ही वह उलझता जा रहा था. जैसेजैसे समय बढ़ता जा रहा था, वैसेवैसे उन के वरिष्ठ अधिकारियों का दबाव भी बढ़ता जा रहा था. पुलिस अपने तरीके से मामले की जांच तो कर ही रही थी, लेकिन कीर्ति के घर वाले भी उस की तलाश में गलियों और उपनगरों में कीर्ति के पोस्टर ले कर भटक रहे थे.

वह उपनगरों के अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों की खाक छान रहे थे. कीर्ति के हजारों पोस्टर छपवा कर मुंबई के गलीमोहल्लों के साथ सभी सार्वजनिक जगहों और वाहनों पर चिपकवा दिए गए. प्रिंट और इलैक्ट्रौनिक मीडिया का भी सहारा लिया गया. लेकिन आशा की कोई किरण नजर नहीं आई.

सूरज हर दिन निकलता था. रात हर रोज होती थी. मगर कीर्ति के घर वालों का दर्द कम होने का नाम नहीं ले रहा था.

घर वालों का धैर्य जवाब देने लगा

जैसेजैसे कीर्ति व्यास के मामले को ले कर समय निकलता जा रहा था, वैसेवैसे कीर्ति के परिवार वालों का सब्र टूटता जा रहा था. जब एक महीने से अधिक का समय हो गया तो उन का धैर्य टूट गया. स्थानीय पुलिस से उन का भरोसा उठ चुका था. वे अपने परिवार के साथ पुलिस कमिश्नर दत्तात्रेय पड़सलगीर से मुलाकात कर मामले को क्राइम ब्रांच को सौंपने का निवेदन किया.

पुलिस कमिश्नर दत्तात्रेय पड़सलगीर इस मामले पर पहले से ही नजर बनाए हुए थे, उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए जौइंट पुलिस कमिश्नर संजय सक्सेना और डीसीपी (क्राइम) दिलीप सावंत को मामले की जांच की जिम्मेदारी सौंप दी. क्राइम ब्रांच ने मामले की गहनता से जांच शुरू कर दी. अब तक इस संबंध में फेसबुक, वाट्सऐप और ट्विटर पर काफी कुछ कहासुना जा चुका था.

बीब्लंट की मालिक सीईओ अनुधा भवानी अख्तर और बीब्लंट कंपनी को जानने वाले लोगों ने ट्वीट कर के कीर्ति के विषय में जानकारी देने की अपील के साथसाथ पुलिस की जांच पर तमाम प्रश्नचिह्न खड़े किए थे. यह हाईप्रोफाइल केस एक तरह से क्राइम ब्रांच की प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया था.

क्राइम ब्रांच यूनिट-2 के सीनियर पीआई प्रशांत राजे ने सहायक पीआई अर्जुन जगदाले, एपीआई सचिन माने, संतोष कदम, हैडकांस्टेबल संजीव गुडेवार, हृदयनाथ मिश्रा, प्रशांत सिढमे, प्रमोद शिर्के और राजेश सोनावाले के साथ इस मामले की कडि़यों को जोड़ना शुरू किया.

उन्होंने अपनी जांच की शुरुआत उन्हीं सूत्रों से की, जिन पर स्थानीय पुलिस कर चुकी थी. उन्होंने कीर्ति के घर वालों के बयान और कीर्ति के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स का बारीकी से अध्ययन किया तो जांच में कई खामियां नजर आईं.

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कीर्ति के घर वालों के बयान के अनुसार कीर्ति सुबह सवा 9 बजे की विरार लोकल ट्रेन से ग्रांट रोड से अंधेरी जाया करती थी. लेकिन घटना वाले दिन सुबह उसे लेने के लिए उस की इमारत के नीचे ब्राउन कलर की एक फोर्ड ईकोस्पोर्ट्स कार आई थी, जिस के कांच पर काले रंग की फिल्म चढ़ी हुई थी. इस से अंदर बैठे लोग दिखाई नहीं दे रहे थे. यह कार कीर्ति की कंपनी की मैनेजर खुशी सेजवानी की थी.

लेकिन उन्होंने जांच टीम को जो बयान दिया था, वह विश्वसनीय नहीं था. उन्होंने कहा था कि वह उस दिन कंपनी के अकाउंटेंट सिद्धेश तम्हाणकर के साथ ग्रांट रोड अपने एक व्यक्तिगत काम से आई हुई थी.

लौटते समय उन्होंने कीर्ति को यह सोच कर अपने साथ लिया कि वह भी उन के साथ औफिस चली चलेगी. उस के साथ रहने से रास्ते का टाइम भी पास हो जाएगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

रोड जाम होने के कारण कीर्ति ने यह कह कर उन की कार छोड़ दी कि वह औफिस के लिए लेट हो जाएगी. जबकि सीसीटीवी कैमरे की फुटेज में ऐसा कुछ नहीं था. उस समय रोड साफ था.

जांच में यह भी पता चला कि उस दिन कीर्ति का मोबाइल फोन वरली के भारतनगर में बंद हुआ था. जिस समय उस का फोन बंद हुआ, उसी समय खुशी सेजवानी और सिद्धेश तम्हाणकर के फोन की लोकेशन भी भारतनगर में पाई गई.

पुलिस को इस बात पर शक हो गया कि जब वह ट्रेन से गई थी तो उस का मोबाइल वरली में क्या कर रहा था. और उन दोनों का फोन उस के साथ क्यों था. इन सब सवालों के जवाब के लिए सिद्धेश तम्हाणकर और खुशी सेजवानी को क्राइम ब्रांच के औफिस बुलाया गया. लेकिन वे पुलिस के सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए, जिस से पुलिस को उन पर शक हो गया.

खुल गया हत्या का राज

संदेह पुख्ता करने के लिए पुलिस ने खुशी सेजवानी की फोर्ड ईकोस्पोर्ट्स कार को कब्जे में ले कर जांच के लिए सांताक्रुज की फोरैंसिक लैब में भेज दिया. परीक्षण में कार की डिक्की के अंदर खून के कुछ धब्बे पाए गए, जिस का डीएनए किया गया तो वह कीर्ति के डीएनए से मैच हो गया.

इस के बाद तो उन दोनों पर शक की कोई गुंजाइश नहीं बची. अब स्थिति साफ हो चुकी थी. पुलिस ने खुशी सेजवानी और सिद्धेश से पूछताछ की तो उन्होंने कीर्ति की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली. उस की हत्या की उन्होंने जो कहानी बताई, वह दिल दहला देने वाली थी—

27 वर्षीय सिद्धेश तम्हाणकर अपने पूरे परिवार के साथ परेल, मुंबई के लालबाग में रहता था. उस के पिता सीताराम तम्हाणकर नौकरी से रिटायर हो चुके थे. पूरे परिवार की जिम्मेदारी सिद्धेश के ऊपर थी. परिवार वालों का वह एकलौता सहारा था.

वह कंपनी में अपना काम ठीक से नहीं करता था. कंपनी के काम के बजाय उस का मन इधरउधर अधिक रहता था. कंपनी के सारे अकाउंट की जिम्मेदारी उस की थी, लेकिन वह अपनी जिम्मेदारी के प्रति जरा भी गंभीर नहीं था.

कीर्ति व्यास के काम को देखते हुए बीब्लंट कंपनी ने कीर्ति को जो जिम्मेदारियां दी थीं, वह उन का बड़ी ईमानदारी से पालन करती थी. अपने दूसरे सहयोगियों को भी वह कंपनी के प्रति निष्ठावान बनने की सलाह देती थी. वह खुद तो मेहनत करती ही थी, दूसरे कर्मचारियों से भी मेहनत करवाती थी जिस से कंपनी के कई लोग उस से खुश नहीं थे.

सिद्धेश तम्हाणकर भी उन्हीं में से एक था लेकिन कीर्ति को इस की कोई परवाह नहीं थी. कीर्ति ने 5 सालों में बीब्लंट कंपनी में अपनी एक खास जगह बना ली थी, जबकि कंपनी के अंदर 10-15 सालों से काम कर रहे लोग ऐसी जगह नहीं बना पाए थे. मेहनत की वजह से कीर्ति को कंपनी के कई अधिकार मिल गए थे. कंपनी की सीईओ और एमडी उस से काफी प्रभावित थीं.

कंपनी के सारे लोगों से कीर्ति का व्यवहार मधुर व सरल था. बाहर से आनेजाने वाले लोग भी कीर्ति को भरपूर मानसम्मान देते थे. लेकिन सिद्धेश तम्हाणकर के साथ ऐसा नहीं था, क्योंकि कीर्ति ने जब कंपनी का काम संभाला था, तब से सिद्धेश तम्हाणकर की मनमानी पर रोक लग गई थी.

कीर्ति ने पहले तो सिद्धेश तम्हाणकर की काम के प्रति लापरवाही पर उसे कई बार समझाया, लेकिन सिद्धेश पर उस की बातों का कोई असर नहीं हुआ. उस का रवैया पहले जैसा रहा. वह कंपनी के कामों पर ध्यान नहीं देता था.

जलन बन गई ज्वाला

सरकार ने जब से जीएसटी लगाई तो सिद्धेश की परेशानी और ज्यादा बढ़ गई. क्योंकि जीएसटी की गणना उस की समझ से परे थी. पहले तो थोड़ीबहुत लापरवाही चल जाती थी, लेकिन जीएसटी में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं थी. काम सही ढंग और समय से पूरा करना ही पड़ता था.

जीएसटी की कम समझ होने के कारण सिद्धेश के अकाउंट में बहुत सारी गलतियां तो होती ही थीं, काम भी समय से नहीं हो पाता था. इस से कंपनी के नुकसान के साथसाथ बदनामी का भी डर था. चेतावनी के बाद भी सिद्धेश ने जब अपने काम में सुधार नहीं किया तो कीर्ति ने उसे कंपनी से निकालने का नोटिस दे दिया.

इस नोटिस से सिद्धेश बौखला गया. नौकरी जाने के बाद उस का और उस के परिवार का क्या होगा, सोच कर वह परेशान रहने लगा. कोई रास्ता न देख उस ने उसी कंपनी में काम करने वाली अपनी दोस्त खुशी सेजवानी से सलाह की.

बाद में वह कंपनी के सीईओ व एमडी अनुधा अख्तर के पास गया. लेकिन बात नहीं बनी. इस पर उस ने अपनी नौकरी जाने के डर से कीर्ति व्यास के प्रति एक खतरनाक निर्णय ले लिया था. उस ने सोचा कि क्यों न कीर्ति को ही खत्म कर दिया जाए. न रहेगा बांस और न बजेगी बांसुरी. उसे लग रहा था कि कीर्ति के न रहने से शायद उस की नौकरी भी रहे. इस काम में उस की मदद करने के लिए खुशी भी तैयार हो गई.

37 वर्षीय खुशी सेजवानी बीब्लंट कंपनी में कोचिंग क्लासेज के मैनेजर के पद पर काम करती थी. कंपनी में जितना महत्त्व कीर्ति का था, उतना ही महत्त्व खुशी का भी था. सेजवानी मुंबई सांताक्रुज पश्चिम के एस.बी. रोड स्थित एक अपार्टमेंट में अपने एकलौते बेटे के साथ रहती थी.

उस के पति एक कामयाब बिजनैसमैन थे. काम के सिलसिले में वह अकसर बाहर ही रहते थे. परिवार संभ्रांत और संपन्न था. घर पर नौकरनौकरानी थे. किसी भी चीज की कोई कमी नहीं थी. सिद्धेश और खुशी की गहरी दोस्ती थी. इतने बड़े अपराध में खुशी सेजवानी ने सिद्धेश का साथ क्यों दिया, पुलिस इस बात की जांच कर रही है.

अपराध की राह पर सिद्धेश और खुशी

16 मार्च, 2018 को सिद्धेश की नौकरी का आखिरी दिन था. इस के पहले कि कीर्ति कंपनी में आ कर सिद्धेश पर काररवाई करती, सिद्धेश और खुशी योजनानुसार अपनी कार ले कर कीर्ति के घर के पास पहुंच गए. फिर खुशी ने कीर्ति को फोन कर के कहा कि वह किसी काम से भारतनगर आई थी. काम खत्म हो जाने के बाद अब औफिस जा रही है. अगर उसे भी औफिस चलना हो तो आ जाए, साथसाथ चले चलेंगे.

कीर्ति औफिस जाने की तैयारी कर ही रही थी. खुशी का फोन आने के बाद उस ने उस के साथ चलने की हामी भर दी और फटाफट तैयार हो कर उस की गाड़ी में पहुंच गई.

गाड़ी खुशी सेजवानी चला रही थी, कीर्ति उस के बराबर में बैठ गई. सिद्धेश पीछे वाली सीट पर बैठा था. कुछ दूर चलने के बाद खुशी सेजवानी ने कीर्ति को मनाने की काफी कोशिश की कि वह सिद्धेश को दिया नोटिस वापस ले ले, लेकिन वह इस के लिए तैयार नहीं हुई. तब पीछे की सीट पर बैठे सिद्धेश ने कीर्ति के गले में सीट बेल्ट डाल कर हत्या कर दी.

कीर्ति की हत्या करने के बाद खुशी ने कार अपने घर पर ला कर खड़ी कर दी और उस पर कवर डाल कर दोनों औफिस चले गए. मगर कंपनी के काम में उन का मन नहीं लग रहा था. उस दिन खुशी सेजवानी 4 बजे ही अपने औफिस से घर के लिए निकल गई. कार में शव होने के कारण सिद्धेश भी शाम 5 बजे के करीब खुशी के घर पहुंच गया.

मौका देख कर वे कीर्ति की लाश कार से निकाल कर घर के अंदर ले गए. फिर उसे ठिकाने लगाने के मकसद से उन्होंने लाश के 3 टुकड़े किए. फिर उन्हें कार की डिक्की में डाल कर चेंबूर के माहुल इलाके में ले गए. वहां आगे जा कर उन्होंने कीर्ति की लाश के तीनों टुकड़े नाले में डाल दिए. फिर उन्होंने कार की अच्छी तरह धुलाई करा ली.

बाद में कीर्ति के घर वालों के साथ वे दोनों भी उस की तलाश करने का नाटक करने लगे.

सिद्धेश तम्हाणकर और खुशी सेजवानी से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने 5 मई, 2018 को उन की निशानदेही पर कीर्ति का बैग, मोबाइल फोन, कुछ नकदी भी बरामद कर ली. फिर उन दोनों के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 201, 341, 363, 364 और 34 के तहत रिपोर्ट दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया.

कथा लिखे जाने तक पुलिस कीर्ति के शव के टुकड़ों को काफी कोशिशों के बाद भी बरामद नहीं कर पाई थी. माना जा रहा है कि वे टुकड़े नाले में बह कर कहीं आगे निकल गए होंगे. फिर भी पुलिस की कोशिश जारी है.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

हनीट्रैप में शामिल ‘फ्रीडम 251’ मोबाइल कंपनी का मालिक

करीब सवा 2 साल पहले फरवरी, 2016 में मोहित गोयल अचानक सुर्खियों में आ गया था. कारण यह था कि मोहित ने ‘फ्रीडम 251’ नाम से दुनिया का सब से सस्ता स्मार्टफोन बेचने का दावा किया था. इस के लिए उस ने जो कंपनी बनाई थी, उस का नाम था रिंगिंग बेल्स. इस स्मार्टफोन की लौंचिंग भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने नई दिल्ली में आयोजित भव्य समारोह में की थी.

केवल 251 रुपए में स्मार्ट मोबाइल फोन देने की घोषणा से मोहित गोयल भारत के सब से अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी सहित दुनिया भर के बड़े उद्योगपतियों और मोबाइल फोन तथा दूरसंचार क्षेत्र की कंपनियों की नजर चढ़ गया था. इतने कम दाम में स्मार्ट मोबाइल फोन बेचने की घोषणा से मोहित गोयल और उस की कंपनी रिंगिंग बेल्स भारत के हर घर में उस समय चर्चा का विषय बन गई.

अखबारों में पूरे पेज के विज्ञापन दे कर 17 से 21 फरवरी, 2016 तक फ्रीडम 251 स्मार्टफोन की औनलाइन बुकिंग की घोषणा की गई. इतने सस्ते दामों पर मोबाइल लेने वालों की होड़ में लगातार बुकिंग का इतना दबाव बढ़ा कि कंपनी की वेबसाइट ही क्रश हो गई. उस समय करीब साढ़े 7 करोड़ मोबाइल फोन की बुकिंग औनलाइन हुई.

इस मोबाइल की लौंचिंग के समय कंपनी ने इस के सस्ता होने का गणित बताते हुए भले ही हरेक बुकिंगकर्ता को चरणबद्ध तरीके से फोन डिलीवर करने का वादा किया था, लेकिन कंपनी अपना यह वादा पूरा नहीं कर सकी. इस का सीधा सा कारण था कि दुनिया भर में सब से सस्ते स्मार्ट मोबाइल फोन की कीमत उस समय 2 हजार रुपए से ज्यादा पड़ती थी. ऐसे में मोहित गोयल की रिंगिंग बेल्स कंपनी कब तक और कितना घाटा उठा सकती थी. कंपनी की जमापूंजी भी कोई बहुत ज्यादा नहीं थी.

बाद में मोहित गोयल पर कई तरह के आपराधिक मामले दर्ज हुए, उसे गिरफ्तार भी किया गया. अब उसी मोहित गोयल का एक घिनौना चेहरा सामने आया है. दिल्ली पुलिस ने 10 जून को गैंगरेप की शिकार एक महिला को उस के 2 साथियों सहित हनीट्रैप में गिरफ्तार कर लिया.

इस महिला के साथ पकड़े गए उस के साथियों में रिंगिंग बेल्स कंपनी का एमडी मोहित गोयल भी शामिल था. महिला और उस के दोनों साथी गैंगरेप के मामले में आरोपियों के परिजनों से सौदेबाजी कर 30 लाख रुपए लेते हुए रंगेहाथ पकड़े गए. आरोपियों के घर वाले इस से पहले पीडि़त महिला के कहने पर उस के साथियों को एक करोड़ 10 लाख रुपए दे चुके थे.

होटल में किया गैंगरेप

गैंगरेप की इस कहानी को जाननेसमझने के लिए हमें दिल्ली से करीब 75 किलोमीटर दूर भिवाड़ी से शुरुआत करनी होगी. हरियाणा की सीमा पर स्थित राजस्थान के जिला अलवर की औद्योगिक नगरी भिवाड़ी में इसी 5 मई को पुलिस को बाईपास स्थित एक होटल में एक महिला से सामूहिक दुष्कर्म होने की सूचना मिली.

इस पर एडीशनल एसपी पुष्पेंद्र सिंह सोलंकी, डीएसपी सिद्धांत शर्मा और फूलबाग थानाप्रभारी विक्रांत शर्मा मौके पर पहुंचे. वहां पुलिस को एक युवती नशे की हालत में मिली. पुलिस ने उसी दिन देर शाम महिला को सिविल अस्पताल ले जा कर उस का मैडिकल कराया. पुलिस इस होटल से कुछ लोगों को पकड़ कर फूलबाग थाने ले गई, जहां उन से पूछताछ की गई.

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दूसरे दिन तबीयत सुधरने पर पीडि़त महिला ने पुलिस को बताया कि वह दिल्ली के जनकपुरी इलाके की रहने वाली है और इवेंट मैनेजमेंट का काम करती है. उस ने कुछ समय पहले दिल्ली के पीतमपुरा निवासी राकेश मंगल की पत्नी के जन्मदिन की पार्टी का इवेंट मैनेज किया था. इसी वजह से वह राकेश मंगल के संपर्क में थी.

घटना से कुछ दिन पहले राकेश मंगल ने उसे बताया था कि राजस्थान के अलवर में उन की एक कंपनी है. इस कंपनी में बड़ा इवेंट करना है. इस इवेंट की जिम्मेदारी संभालने के लिए राकेश ने उस महिला को राजी कर लिया.

राकेश मंगल 5 मई को महिला को अलवर स्थित अपनी कंपनी की साइट दिखाने और इवेंट के बारे में बताने के लिए कार में बैठा कर दिल्ली से अलवर के लिए ला रहा था. दिल्ली पार कर के जब गुड़गांव भी निकल गया तो मन टटोलने के लिए राकेश ने उस महिला से चायनाश्ते के बारे में पूछा.

महिला ने सुबह से भूखा होने के कारण चायनाश्ते की सहमति दे दी. इस पर राकेश मंगल ने कहा कि कुछ ही देर में भिवाड़ी आने वाला है. भिवाड़ी में कई अच्छे होटल हैं, वहां रुक कर चाय वगैरह पीएंगे.

राकेश मंगल ने भिवाड़ी में बाईपास स्थित एक होटल में चायनाश्ते के लिए गाड़ी रोक दी. इस होटल में राकेश मंगल के 4 साथी पहले से मौजूद थे. इन में राकेश के एक साथी विकास जिंदल ने होटल में पहले ही 3 कमरे बुक करा रखे थे. महिला को होटल में कमरे बुक होने का पता नहीं था.

महिला ने पुलिस को बताया कि राकेश मंगल और उस के साथियों ने कोल्डड्रिंक में नशीला पदार्थ मिला कर उसे पिला दिया, जिस से वह अचेत हो गई. इस के बाद 5 लोगों ने होटल के कमरे में उस से सामूहिक दुष्कर्म किया.

बाद में होश आने पर पीडि़त महिला ने अपनी सहेली को मोबाइल से मैसेज और लोकेशन भेज कर मदद की गुहार की. पीडि़ता की सहेली ने भिवाड़ी पुलिस से संपर्क कर मामले की जानकारी दी. इस के बाद पुलिस मौके पर पहुंच गई.

गिरफ्तार हुए पांचों आरोपी

भिवाड़ी पुलिस ने महिला के बयान के आधार पर फूलबाग थाने में मामला दर्ज कर लिया. पुलिस ने महिला से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में उसी दिन यानी 6 मई को पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. इन में दिल्ली के पीतमपुरा निवासी राकेश मंगल, फ्रैंड्स एनक्लेव नांगलोई के विष्णु बंसल, रामपुरा लौरेंस रोड के विकास जिंदल, रोहिणी निवासी संजय गर्ग और संदीप कौशिक शामिल थे. पुलिस ने पांचों आरोपियों का भी मैडिकल कराया. ये पांचों आरोपी आपस में दोस्त और संपन्न परिवारों से थे.

पुलिस ने पांचों आरोपियों को उसी दिन अलवर ला कर मजिस्ट्रैट के समक्ष पेश किया. मजिस्ट्रैट ने उन्हें एक दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया.

रिमांड अवधि पूरी होने पर 7 मई को पुलिस ने पांचों आरोपियों को भिवाड़ी के जुडीशियल मजिस्ट्रैट न्यायालय में पेश किया. मजिस्ट्रैट दीपिका सिंह ने पांचों आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में किशनगढ़बास उपकारागृह भेज दिया. दूसरी ओर पुलिस ने मजिस्ट्रैट के समक्ष पीडि़त महिला के धारा 164 के तहत बयान दर्ज करा दिए.

इस मामले में भिवाड़ी की फूलबाग थाना पुलिस ने आवश्यक जांचपड़ताल के बाद अदालत में चालान पेश कर दिया. पुलिस ने चालान में पांचों आरोपियों को गैंगरेप का दोषी माना. यह मामला अब अदालत में विचाराधीन है.

देखा जाए तो इस कहानी को यहां खत्म हो जाना चाहिए था. लेकिन इस हाईप्रोफाइल मामले की कहानी का अभी केवल मध्यांतर ही हुआ है. कहानी का अगला अध्याय अब दिल्ली में शुरू होगा. अभी तक आप के जेहन में यह सवाल तेजी से घूम रहा होगा कि गैंगरेप की इस कहानी में 251 रुपए में मोबाइल देने वाली कंपनी रिंगिंग बेल्स का एमडी मोहित गोयल तो सामने ही नहीं आया? आप को सवाल का जवाब आगे की कहानी में मिलेगा.

आरोपियों से मांगे 10 करोड़

दरअसल, इस मामले में चालान पेश होने के बाद नया मोड़ आ गया. पीडि़त महिला ने गैंगरेप का मामला वापस लेने या इस मामले में सुनवाई के दौरान बयान बदलने के लिए आरोपियों से 10 करोड़ रुपए मांगे थे. बाद में बिचौलियों के माध्यम से ढाई करोड़ में सौदा तय हो गया. इस समझौते के तहत बिचौलियों के माध्यम से पीडि़त महिला को एक करोड़ 10 लाख रुपए दे दिए गए थे. यह रकम बिचौलियों ने ली थी. पीडि़त महिला इस दौरान सामने नहीं आई थी.

बाकी रकम की दूसरी किस्त के रूप में 30 लाख रुपए 10 जून को दिल्ली में नेताजी सुभाष प्लेस इलाके में एक शौपिंग मौल में देने की बात तय हुई. इस बीच गैंगरेप के एक आरोपी के भाई ने नौर्थवेस्ट दिल्ली के नेताजी सुभाष प्लेस पुलिस थाने में इस बात की शिकायत कर दी. इस के साथ ही महिला और बिचौलियों से सौदेबाजी की बातचीत की रिकौर्डिंग, वाट्सऐप मैसेज व सीसीटवी कैमरे की रिकौर्डिंग भी पुलिस को सौंप दी.

इस शिकायत पर नौर्थवेस्ट के डिप्टी पुलिस कमिश्नर असलम खान के निर्देशन में एक टीम गठित कर आरोपियों को रंगेहाथ पकड़ने की योजना बनाई गई. पुलिस की योजना के मुताबिक गैंगरेप के आरोपियों के परिजनों ने इस मामले में बिचौलिए की भूमिका निभा रहे विकास मित्तल और मोहित गोयल से कहा कि दूसरी किस्त की रकम तब देंगे, जब गैंगरेप का मुकदमा दर्ज कराने वाली महिला हमें लिखित में यह शपथपत्र देगी कि गैंगरेप के लगाए गए आरोप झूठे हैं.

बिचौलियों से उस महिला को शपथपत्र लिखवाने के लिए साथ लाने की बात तय हो जाने पर डीसीपी असलम खान के नेतृत्व में पुलिस ने अपना जाल बिछा दिया. इस के तहत गैंगरेप के आरोपियों के परिजनों को 30 लाख रुपए से भरा बैग ले कर 10 जून को पहले से निर्धारित शौपिंग मौल में भेज दिया गया. इस मौल के आसपास पहले से पुलिस टीम सादा कपड़ों में तैनात थी.

महिला और उस के 2 साथी हुए गिरफ्तार

कुछ देर बाद एक महिला और 2 युवक उस शौपिंग मौल के औफिस में पहुंचे. उन्होंने गैंगरेप के आरोपियों के परिजनों से बात की. रेप के आरोपियों ने बैग में से रकम निकाल कर मेज पर रख दी ताकि उन्हें विश्वास हो जाए कि दूसरी किस्त का पूरा पैसा आ गया.

इसी दौरान दिल्ली पुलिस की टीम ने उस शौपिंग मौल के औफिस में छापा मारा. छापे के दौरान मेज पर नोटों की गड्डियों के ढेर पड़े मिले. वहां एक महिला और 2 युवक मौजूद थे.

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पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया. इन में वह महिला भी थी, जिस ने भिवाड़ी के फूलबाग थाने में गैंगरेप का मुकदमा दर्ज कराया था और पकड़े गए 2 युवकों में एक मोहित गोयल और दूसरा उस का रिश्तेदार विकास मित्तल था. इन में मोहित गोयल आजकल गाजियाबाद में और विकास मित्तल दिल्ली में रह रहा था.

दिल्ली पुलिस जब महिला और उस के दोनों साथियों को पकड़ कर ले जा रही थी तो गैंगरेप के आरोपियों के परिवारों की महिलाओं ने उस महिला की जम कर धुनाई कर दी. इन महिलाओं का कहना था कि यह महिला झूठा आरोप लगा कर हमारे परिवार वालों को जेल में बंद करवा चुकी है और झूठे मामले को खत्म करवाने के लिए हम से पैसे ऐंठ रही है.

बाद में थाने ले जा कर की गई पुलिस की पूछताछ में पता चला कि मोहित गोयल और विकास मित्तल गैंगरेप की पीडि़त महिला के सहयोगी थे. ये दोनों युवक महिला की ओर से भिवाड़ी में दर्ज कराए गए गैंगरेप के मामले में आरोपियों के घर वालों से सौदेबाजी की रकम लेने उस के साथ आए थे.

दिल्ली पुलिस उस समय हैरान रह गई, जब पूछताछ में यह बात सामने आई कि मोहित गोयल नाम का जो शख्स गिरफ्तार किया था, वह 251 रुपए में स्मार्ट मोबाइल फोन बेचने का दावा करने वाली कंपनी रिंगिंग बेल्स का मैनेजिंग डायरेक्टर था.

दिल्ली पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि विकास मित्तल ने एक कारोबारी से कर्ज के रूप में करोड़ों रुपए ले रखे थे. वह कारोबारी विकास पर रुपए वापस करने का दबाव बना रहा था. इसे ले कर उस का उस कारोबारी से कई बार विवाद भी हो गया था. इसे ले कर विकास परेशान था.

विकास मित्तल का पश्चिमी दिल्ली के पंजाबीबाग में रेस्तरां बार लाउंज है. इस लाउंज में बतौर इवेंट मैनेजर एक महिला काम करती थी. विकास ने इसी महिला के जरिए उस कारोबारी और उस के अन्य कारोबारी दोस्तों से हनीट्रैप के जरिए पैसा वसूलने की साजिश रची थी.

पूरी प्लानिंग से रची थी साजिश

इस के बाद विकास ने उस इवेंट मैनेजर महिला से बात की और उसे 30-40 लाख रुपए देने का वादा कर के कारोबारियों पर गैंगरेप का आरोप लगाने के लिए राजी कर लिया. विकास ने एडवांस के तौर पर इस महिला को 4 लाख रुपए भी दे दिए. मोटी रकम मिलने के लालच में महिला विकास का साथ देने को तैयार हो गई. विकास ने कारोबारियों से रकम वसूलने के लिए अपने कजन और रिंगिंग बेल्स कंपनी के एमडी मोहित गोयल को तैयार कर लिया.

विकास मित्तल और मोहित गोयल के कहने पर इवेंट मैनेजर महिला ने दिल्ली से 5 लोगों को जमीन खरीदने के लिए भिवाड़ी चलने की बात तय की. तय कार्यक्रम के मुताबिक दिल्ली निवासी राकेश मंगल, विष्णु बंसल, विकास जिंदल, संजय गर्ग और संदीप कौशिक 5 मई को भिवाड़ी पहुंच गए. ये पांचों लोग एकदूसरे को जानने के अलावा इवेंट मैनेजर महिला से भी परिचित थे.

भिवाड़ी पहुंच कर आराम करने के बहाने इन्होंने होटल में कमरे किराए पर ले लिए. होटल में पांचों ने मौजमस्ती की. इस के बाद महिला ने उन पांचों पर गैंगरेप का आरोप लगा कर भिवाड़ी के फूलबाग थाने में रिपोर्ट दर्ज करा दी. इस रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने जांचपड़ताल कर 6 मई को पांचों लोगों को गिरफ्तार कर लिया.

दिल्ली पुलिस के सामने पूछताछ में जो बातें सामने आईं, उस के मुताबिक पांचों कारोबारियों की गिरफ्तारी होने पर विकास मित्तल और मोहित गोयल ने गैंगरेप के आरोपियों के परिजनों से संपर्क किया और महिला को कुछ रकम दे कर शिकायत वापस लेने की बात कही.

विकास के कहने पर महिला ने आरोपियों के परिजनों से 10 करोड़ रुपए मांगे. बाद में विकास और मोहित की मध्यस्थता से ढाई करोड़ में सौदा तय हो गया. यह रकम 3 किस्तों में देने की बात तय हुई.

महिला को 4 लाख दिए थे एडवांस में

पहली किस्त के रूप में आरोपियों के घर वालों ने बिचौलियों को एक करोड़ 10 लाख रुपए दे दिए थे. यह रकम देने की कैमरे में रिकौर्डिंग भी की गई. दूसरी किस्त में 10 जून को 30 लाख रुपए देने तय थे, तभी दिल्ली पुलिस ने जाल बिछा कर कथित पीडि़त महिला और उस के सहयोगी मोहित गोयल व विकास मित्तल को रकम लेते रंगेहाथ पकड़ लिया.

महिला ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि उसे विकास मित्तल ने 4 लाख रुपए दे कर योजना में शामिल किया था. उसे यह नहीं पता था कि गैंगरेप के आरोपियों से मोहित गोयल और विकास मित्तल ने कितने रुपए वसूले हैं. उसे 10 जून को शपथपत्र पर दस्तखत करने के लिए बुलाया गया था.

दिल्ली पुलिस ने महिला और उस के दोनों सहयोगियों को 11 जून को रोहिणी कोर्ट में पेश किया, जहां ड्यूटी महानगर दंडाधिकारी सुशील कुमार ने महिला को न्यायिक हिरासत में भेज दिया. बाकी 2 आरोपियों मोहित गोयल और विकास मित्तल को 2 दिन के पुलिस रिमांड पर सौंप दिया गया. रिमांड अवधि पूरी होने पर इन दोनों को भी जेल भेज दिया गया.

जांच में यह बात भी सामने आई कि दिल्ली का रेस्तरां बार लाउंज संचालक विकास मित्तल खुद को कई आईएएस अफसरों और राजनेताओं का नजदीकी बताता था. अधिकारियों और नेताओं से अपने अच्छे संबंधों के नाम पर वह गैंगरेप के आरोपियों के परिजनों को धमकाता था.

दिल्ली पुलिस को आशंका है कि विकास मित्तल और मोहित गोयल हाईप्रोफाइल हनीट्रैप रैकेट चलाते हैं. पुलिस को इन के खिलाफ फोन पर धोखाधड़ी की कई शिकायतें मिली हैं. पुलिस ने ऐसे पीडि़तों से लिखित में शिकायत मांगी है. लिखित में शिकायत मिलने पर शिकायतों की जांच की जाएगी.

दूसरी ओर अलवर जिले की भिवाड़ी पुलिस का कहना है कि चूंकि इस मामले में पहले ही चालान पेश हो चुका है, इसलिए दिल्ली में पीडि़ता की गिरफ्तारी और रकम के लेनदेन का इस केस से कोई ताल्लुक नहीं है. अब मामला अदालत में है. आगे जो भी काररवाई होगी, वह अदालत के आदेश पर ही होगी.

रिंगिंग बेल्स कंपनी का मैनेजिंग डायरेक्टर मोहित गोयल उत्तर प्रदेश के शामली शहर में गढ़ी पुख्ता के रहने वाले राजेश गोयल का बेटा है. शामली में सेंट आरसी कौन्वेंट स्कूल से पढ़ाई पूरी करने के बाद वह नोएडा चला आया था.

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नोएडा में उस ने एमिटी यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद सितंबर 2015 में मोहित ने रिंगिंग बेल्स कंपनी की स्थापना की. उसी दौरान नोएडा की रहने वाली धारणा से मोहित की शादी हो गई.

सस्ता स्मार्टफोन देने की घोषणा के बाद टूट पड़ा मुसीबतों का पहाड़

भारत में 251 रुपए का सब से सस्ता स्मार्ट मोबाइल फोन बेचने का आइडिया मोहित का ही था. इस आइडिया को मूर्तरूप देने के काम में उस की मदद एस्ट्रोफिजिसिस्ट अशोक चड्ढा ने की. मोहित ने अपनी कंपनी रिंगिंग बेल्स में अशोक चड्ढा को प्रेसीडेंट बनाया और नोएडा में औफिस खोला.

उस समय इन लोगों ने यह कह कर भी प्रचार किया कि इतना सस्ता मोबाइल डिजिटल इंडिया अभियान का हिस्सा है. इस में सरकार भी सहयोग कर रही है. इस मोबाइल को मेक इन इंडिया और स्टार्टअप इंडिया योजना का भी हिस्सा बताया गया.

बाद में मोहित गोयल की लोगों को 251 रुपए में स्मार्टफोन देने की योजना फेल हो गई. इस का सीधा सा कारण यह था कि मोबाइल की लागत बहुत ज्यादा आ रही थी और भरपाई कहीं से नहीं हो रही थी. अरबोंखरबों रुपए का घाटा सहन करने की कंपनी की क्षमता नहीं थी.

बाद में मोहित गोयल पर कई केस दर्ज हो गए. मोहित पर आरोप लगा कि उस ने मोबाइल फोन बेचने के लिए डिस्ट्रीब्यूटर बना दिए और उन से करोड़ों रुपए ले लिए. मोबाइल फोन की योजना फेल हो जाने पर डिस्ट्रीब्यूटर्स को पैसा नहीं लौटाया गया. भाजपा के ही वरिष्ठ नेता कीर्ति सोमैया ने इसे पोंजी स्कैम बताया था. रिंगिंग बेल्स के खिलाफ पुलिस में सैकड़ों शिकायतें पहुंची थीं.

पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले की जांचपड़ताल शुरू की तो कंपनी के प्रमोटर भूमिगत हो गए. इस बीच उत्तर प्रदेश पुलिस ने फरवरी 2017 में मोहित गोयल को गिरफ्तार कर लिया था. बाद में मोहित की जमानत 31 मई, 2017 को इलाहाबाद हाईकोर्ट से हुई थी. इस दौरान रिंगिंग बेल्स का नोएडा औफिस बंद हो गया था.

मोहित गोयल महत्त्वाकांक्षी रहा है. इसीलिए उस ने भारत में 251 रुपए के स्मार्ट मोबाइल फोन के नाम पर एक बार तहलका मचा दिया था. अभी तो उस के खिलाफ कई जांचें चल रही हैं. अपनी महत्त्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए वह इस तरह के हनीट्रैप के हथकंडे अपनाएगा, यह बात किसी ने सोची भी नहीं थी.

बच्चे को हैल्दी और ऐक्टिव बनाए रखने का राज हम से जानिए

बच्चों को भी साफसफाई और स्वस्थ आदतों के बारे में समझाना चाहिए. साफसुथरा रहने से वे न केवल स्वस्थ रहेंगे, बल्कि उन का आकर्षण और आत्मविश्वास भी बढ़ेगा. बचपन की आदतें हमेशा बनी रहती हैं इसलिए जरूरी है कि वे बचपन से ही हाइजीन के गुर सीखें.

ओरल हाइजीन

ओरल हाइजीन प्रत्येक बच्चे की दिनचर्या का एक प्रमुख अंग होना चाहिए. ऐसा करने से बच्चा कई बीमारियों जैसे कैविटी, सांस की बदबू और दिल की बीमारियों से बचा रहेगा.

क्या करें

– बच्चे ध्यान रखें कि रोजाना दिन में 2 बार कम से कम 2 मिनट के लिए अपने दांतों को ब्रश से साफ करें. खासतौर पर खाना खाने के बाद सफाई बहुत ही जरूरी है.

– बच्चे कम उम्र से ही रोजाना ब्रश और कुल्ला करने की आदत डालें.

– टंग क्लीनर से जीभ साफ करना सीखें.

– बच्चे के दांतों की नियमित रूप से जांच करवाएं.

बौडी हाइजीन

– बच्चे रोज नहाने की आदत डालें. रोज नहाने से शरीर तो साफ रहता ही है, मृत त्वचा भी निकल जाती है.

– बच्चे नहाते समय शरीर के विभिन्न भागों जैसे हाथों, पैरों, पंजों, जोड़ों, बगलों, कमर, नाभि, घुटनों आदि को अच्छी तरह साफ करें.

– अपना अंडरवियर रोज बदलें और नहा कर साफ कपड़े पहनें.

– बच्चे सप्ताह में 2 बार बालों को शैंपू से धोने की आदत डालें ताकि बालों से तेल और गंदगी अच्छी तरह निकल जाए.

हैंड हाइजीन

– बच्चे में हाथ धोने की आदत डालें. उन्हें पता होना चाहिए कि हाथ धोने में थोड़ा समय लगता है. हाथ धोना रोगाणुओं को फैलने से रोकने और बीमार पड़ने से बचाने का सब से महत्त्वपूर्ण तरीका है.

– बच्चे नियमित रूप से हाथ धोना सीखें. खासतौर पर खाना खाने के बाद और पहले, छींकने या खांसने के बाद, खेलने के बाद, वाशरूम इस्तेमाल करने के बाद.

– वे हाथ धोते समय साबुन, हैंडवाश और पानी का सही इस्तेमाल करना सीखें.

फुट हाइजीन

बच्चों को पता होना चाहिए कि पैरों को साफसुथरा रखना भी बेहद जरूरी है. गंदे पैरों से न केवल तेज दुर्गंध आती है, बल्कि दाद और दूसरे संक्रमणों का भी खतरा बढ़ जाता है.

– बच्चों को दिन में 2 बार पैर साफ करने की आदत डालनी चाहिए. उंगलियों के बीच के हिस्सों को अच्छी तरह पोंछ कर सुखाएं, क्योंकि उंगलियों के बीच की जगह के गीला रहने पर फंगस हो सकता है.

टौयलेट हाइजीन

– बच्चों को शौच करने का सही तरीका पता होना चाहिए. हमेशा आगे से पीछे की ओर धोएं. पीछे से आगे की ओर धोने से संक्रमण का खतरा हो सकता है, यह उन्हें पता होना चाहिए.

– बच्चों को टौयलेट के बाद फ्लश करने की आदत डालनी चाहिए.

– बच्चे यह ध्यान रखें कि संक्रमण से बचने के लिए हर बार टौयलेट से आने के बाद हाथ धोना बहुत ही जरूरी है.

नेल हाइजीन

– बच्चे अपने नाखूनों को साफसुथरा रखना सीखें, क्योंकि गंदे नाखूनों में रोगाणु पनपते हैं, जिन से वे बीमार हो सकते हैं.

– बच्चे दांतों से नाखून काटने की आदत न डालें. उन्हें पता होना चाहिए कि दांतों से नाखून काटने से मैल और रोगाणु पेट में जा कर उन्हें बीमार बना सकते हैं.

स्लीप हाइजीन

– बच्चे 8-10 घंटे की गहरी नींद सोने की आदत डालें. उन्हें पता होना चाहिए कि यदि वे पूरी नींद सोएंगे तो उन का शारीरिक और मानसिक विकास अच्छी तरह होगा.

– हमेशा नाइट सूट पहन कर सोने की आदत डालें ताकि आरामदायक कपड़ों में गहरी नींद सो पाएं.

– बच्चे अपने बिस्तर को साफसुथरा रखना सीखें. कम से कमसप्ताह में 2 बार चादर जरूर बदलें.

– उन्हें रात को ब्रश कर के हाथपैरों को अच्छी तरह धोने के बाद ही बिस्तर पर जाना सिखाएं.

– बच्चे रात में सोेने से पहले पेशाब जाने की आदत डालें ताकि रात में उठने पर नींद डिस्टर्ब न हो.

फूड हाइजीन

– हाथों और मुंह को पोंछने के लिए साफ कपड़े का इस्तेमाल करना सीखें.

– बच्चे फल आदि खाने से पहले उन्हें साफ पानी से अच्छी तरह धोना सीखें.

सराउंडिंग हाइजीन

– बच्चे जूतेचप्पलों को यहांवहां न रख हमेशा शू रैक में रखना सीखें.

– बच्चे कूडे़ या और किसी बेकार सामान को डस्टबिन में डालना सीखें.

– अपने कपड़ों को तह कर के अलमारी में रखने की आदत डालें.

– डा. के.के. गुप्ता (सरोज सुपर स्पैश्यलिटी हौस्पिटल) और डा. आशु साहनी (जेपी हौस्पिटल) से गरिमा पंकज द्वारा की गई बातचीत पर आधारित

अनचाहे बालों से छुटकारा पाने के ये टिप्स आप के लिए ही हैं

कोई भी महिला अपनी त्वचा पर अनचाहे बाल नहीं चाहती. वह चाहती है कि हमेशा उस की त्वचा सौफ्ट और निखरीनिखरी दिखे. इस के लिए वह हर वह तरीका अपनाती है जो उसे सूझता है. भले ही उस में कितना भी दर्द क्यों न हो. लेकिन अब मार्केट में लेटैस्ट टैक्नीक के साथसाथ ऐडवांस हेयर रिमूवल क्रीम्स भी आ गई हैं जिन का रिजल्ट बैस्ट होने के साथसाथ उन्हें यूज करने पर दर्द भी नहीं होता और स्किन भी मिनटों में चमकने लगती है.

हेयर रिमूवल क्रीम ही क्यों

पहले महिलाएं शरीर के अनचाहे बालों को हटाने के लिए प्यूनिक स्टोन, शेविंग या फिर प्लकर वगैरा का सहारा लेती थीं, जिन से स्किन को नुकसान पहुंचने के साथसाथ बाल भी जड़ से नहीं निकलने के कारण उन्हें संतोषजनक परिणाम नहीं मिल पाता था और उन्हें फिर जल्दीजल्दी इन का सहारा लेना पड़ता था. लेकिन अब मार्केट में आसानी से हेयर रिमूवल क्रीम्स उपलब्ध हैं, जिन्हें प्रयोग करना तो आसान है ही, साथ ही रिजल्ट भी बैस्ट मिलता है.

खास गुणों से भरपूर

हेयर रिमूवल क्रीम खरीदने से पहले उस के तत्वों के बारे में जरूर जानकारी लें. प्राकृतिक व आयुर्वेदिक तत्वों से बनी क्रीम ही खरीदें.

ऐडवांस हेयर रिमूवल क्रीम्स अनचाहे बालों को हटाने के साथसाथ त्वचा की कोमलता बनाए रखने में भी मददगार हैं. जोजोबा औयल जैसे तत्वों के गुणों से भरपूर ये क्रीम्स त्वचा का रूखापन दूर कर उसे मौइश्चराइज्ड भी रखती हैं. इतना ही नहीं, इन के इस्तेमाल से स्किन टोन भी इंप्रूव होती है.

सैंसिटिव एरिया रहे सेफ

ये क्रीम्स डर्मेटोलौजिस्ट द्वारा टैस्टिड होने के कारण सैंसिटिव एरिया को कोई नुकसान नहीं पहुंचातीं और मिनटों में काम करना शुरू कर देती हैं यानी बैस्ट रिजल्ट के साथसाथ टाइम सेविंग और पार्लर जाने के झंझट से भी मुक्ति. त्वचा को सुंदर बनाना अपने हाथ में.

बरतें थोड़ी सावधानी

आप क्रीम को जहांजहां अप्लाई करना चाहती हैं वहां फिंगर से नहीं बल्कि स्पैटुला की मदद से लगाएं और ज्यादा देर तक लगा कर न छोड़ दें, क्योंकि ज्यादा देर लगा रहने से सैंसिटिव एरिया के रैड होने का डर रहता है. ये क्रीम्स 3 से 6 मिनट में अपना रिजल्ट दिखा देती हैं, इसलिए इन्हें ज्यादा देर लगाने की जरूरत ही नहीं पड़ती. जब हेयर रिमूव हो जाएं तो सौफ्ट व साफसुथरे टौवेल से उन जगहों को साफ कर पानी से धो लें और फिर खुद महसूस करें त्वचा में अंतर.

चाहे वर्किंग हो या नौनवर्किंग हर महिला चाहती है कि उस की स्किन सौफ्ट हो व उस पर अनचाहे बाल न हों. आजकल खानपान व हारमोंस का बैलेंस बिगड़ने से चेहरे व शरीर के अन्य भागों पर बाल उगने की समस्या आम हो गई है, जिन्हें देख परेशान होना लाजिम है, क्योंकि ये हमारे कौन्फिडैंस को लूज जो करते हैं. ऐसे में हेयर रिमूवल क्रीम्स बैस्ट औप्शन हैं. इन का इस्तेमाल कर आप बारबार अपनी स्किन को छूने पर मजबूर हो जाएंगी.

नवाजुद्दीन संग दिखने वाली ‘मिस्ट्री गर्ल’ का हुआ खुलासा..!

बौलीवुड अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी अपनी शानदार एक्टिंग को लेकर चर्चा में रहते हैं. इसबार उनकी जबरदस्त एक्टिंग के दम पर वेब सीरीज ‘सेक्रेड गेम्स’ भी लगातार काफी सुर्खियां बटोर रहा है. लेकिन इस शो से हटकर नवाजुद्दीन की एक तस्वीर ने सोशल मीडिया पर हंगामा मचा दिया है और इसमें लिखे कैप्‍शन ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है. नवाजुद्दीन ने अपने इंस्टाग्राम पर एक विदेशी लड़की के साथ फोटो ​शेयर की है और कैप्‍शन में लिखा, ‘ये लड़की मेरे रोम-रोम में है.’

नवाजुद्दीन सिद्दीकी के साथ इस ‘मिस्‍ट्री गर्ल’ के दिखने के बाद कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. उनकी इस तस्वीर को लेकर इंटरनेट पर कई तरह की बातें शुरू हो गयी है. उनकी यह तस्वीरे यूरोप में ​होने के संकेत देती हैं.

अगर आप भी इस मिस्ट्री गर्ल की मिस्ट्री जानना चाहते हैं तो अब ज्यादा परेशान ना होइए, क्योंकि यह लड़की कौन है इसका राज खुल गया है. बता दें कि नवाजुद्दीन संग दिख रही यह लड़की इटालियन अभिनेत्री वैलेंटाइया कोर्टी हैं.

बौलीवुड लाईफ की रिपोर्ट के अनुसार, अब निर्माताओं ने फिल्म में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए इटालियन अभिनेत्री वैलेंटाइया कोर्टी (Valentia Corti) को शामिल किया है. हालांकि उनके किरदार के बारे में कोई खुलासा नहीं किया गया है. इसकी भी जानकारी नहीं दी गई है कि वे शो में नवाज के आपोजिट दिखेंगी या नहीं. हालांकि नवाजुद्दीन सिद्दिकी ने चुप्‍पी साध रखी है. ऐसे में अफवाहों का बाजार गर्म है.

बता दें, नेशनल स्‍कूल औफ ड्रामा के स्‍टूडेंट रह चुके नवाजुद्दीन सिद्दिकी ने अनुराग कश्‍यप की साल 2007 की फिल्‍म ‘ब्‍लैक फ्राइडे’ से बड़ा ब्रेक मिला था. गैंग्‍स औफ वासेपुर में उनका किरदार सुपरहिट रहा था. अब सेक्रेड गेम्‍स उनकी एक्टिंग की वजह से सफलता की नई ऊंचाइयां छू रहा है.

अब 5 लाख तक का इलाज होगा मुफ्त, सरकार ने बनाई योजना

तत्कालीन भारत सरकार ने अपनी महत्‍वाकांक्षी आयुष्‍मान भारत हेल्‍थ इंश्‍योरेंस स्‍कीम का फायदा पाने वालों की लिस्‍ट तैयार कर ली है. इसके तहत सबसे ज्‍यादा फायदा यूपी, पश्चिम बंगाल, मध्‍य प्रदेश और बिहार के लोगों को होने वाला है. इसकी वजह है कि लिस्‍ट में लाभार्थियों की सबसे ज्‍यादा संख्‍या इन्‍हीं राज्‍यों से है. आयुष्‍मान भारत- नेशनल हेल्‍थ प्रोटेक्‍शन मिशन (AB-NHPM) द्वारा प्रस्‍तावित बिड डौक्‍युमेंट से मिली जानकारी के मुताबिक, इस स्‍कीम के लिए सरकार लगभग 12 करोड़ फैमिली कार्ड प्रिन्‍ट कराएगी, जिनकी लाभार्थियों को हैंड डिलीवरी की जाएगी.

गांवों में आयुष्‍मान पखवाड़ा प्रोग्राम के तहत हेल्‍थ वर्कर्स लोगों के घर जाकर उन्‍हें ये कार्ड सौपेंगे. इन 12 करोड़ कार्ड्स में से सबसे ज्‍यादा लगभग 1.18 करोड़ कार्ड उत्‍तर प्रदेश के लोगों को उपलब्‍ध कराए जांएगे. हालांकि यह आंकड़ा अभी प्रस्‍तावित है और वास्‍‍तविक आंकड़ा बाद में सामने आएगा.

क्‍या है आयुष्‍मान भारत स्‍कीम

बता दें कि आयुष्‍मान भारत स्‍कीम की घोषणा बजट 2019 के दौरान की गई थी. इस स्‍कीम के तहत देश के 10 करोड़ परिवारों को 5 लाख रुपए तक के फ्री हेल्थ इंश्योरेंस की सुविधा दी जाएगी. इसमें लगभग सभी गंभीर बीमारियों का इलाज कवर होगा. कोई भी व्यक्ति (विशेष रूप से महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग) इलाज से वंचित न रह जाए, इसके लिए स्कीम में फैमिली साइज और उम्र पर कोई सीमा नहीं लगाई गई है.

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इस स्कीम में हौस्पिटलाइजेशन से पहले और बाद के खर्च को भी शामिल किया गया है. हर बार हौस्पिटलाइजेशन के लिए ट्रांसपोर्टेशन अलाउंस का भी उल्लेख किया गया है, जिसका भुगतान लाभार्थी को किया जाएगा. इलाज देश के किसी भी सरकारी या प्राइवेट अस्पताल में कैशलेस इलाज कराया जा सकेगा. इस स्‍कीम से लगभग 50 करोड़ लोगों को फायदा पहुंचेगा.

क्‍या होगा कार्ड में

फैमिली कार्ड्स में स्‍कीम का लाभ पाने वालों के नाम मौजूद होंगे, साथ ही इसके साथ एक लेटर भी होगा जिसमें आयुष्‍मान स्‍कीम के सभी फीचर्स की जानकारी मौजूद होगी. फैमिली कार्ड लाभार्थियों की पहचान प्रक्रिया को आसान बनाने का एक जरिया भी होंगे. हालांकि इसके लिए अन्‍य डौक्‍युमेंट्स की भी जरूरत होगी. बिड डौक्‍युमेंट के मुताबिक, हालांकि इन्‍फौर्मेशन लेटर और फैमिली कार्ड की डिलीवरी में दो साल का वक्‍त लग सकता है लेकिन लेटर न होने पर भी किसी भी नामित परिवार को स्‍कीम का फायदा देने से इंकार नहीं किया जाएगा.

…फिर हौलीवुड में जलवा बिखेरती दिखेंगी प्रियंका चोपड़ा!

प्रियंका चोपड़ा बौलीवुड की पहली ऐसी अदाकारा हैं, जिन्होंने हौलीवुड टीवी सीरीज में ना सिर्फ काम किया बल्कि नाम भी कमाया है. प्रियंका ने अमेरिकन टीवी सीरीज क्वांटिको में काम करके हौलीवुड में अपनी पकड़ काफी मजबूत कर ली है. टीवी सीरीज ही नहीं बल्कि प्रियंका ने वहां कुछ फिल्मों में भी काम किया है. हौलीवुड में सक्रिय रहने के बावजूद प्रियंका का नाता बौलीवुड से नहीं टूटा. इन दिनों प्रियंका की झोली में बौलीवुड की दो बड़ी फिल्में ‘भारत’ और ‘द स्काइ इज पिंक’ हैं.

बौलीवुड में वापसी करने के बाद अब खबर है कि प्रियंका एक बार फिर एक इंटरनेशनल वेब सीरीज करने वाली हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक, वेब सीरीज के लिए प्रियंका की बातचीत अमेरिका के जाने-माने प्रोडक्शन हाउस के साथ चल रही है. ऐसी खबरें आ रही हैं कि प्रियंका यूट्यूब पर एक ट्रैवल आधारित सीरीज करेंगी. इस फिक्शन सीरीज को दुनिया के सबसे बड़े औनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफौर्म पर लौन्च किया जाएगा.

sarita magazine

आपको बता दें कि, प्रियंका चोपड़ा कई सालों बाद सलमान खान के साथ उनकी फिल्म ‘भारत’ में नजर आएंगी. इसी महीने की 23 जुलाई से फिल्म की शूटिंग भी शुरू होने वाली है. इस फिल्म का निर्देशन अली अब्बास जफर कर रहे हैं. जबकि इस फिल्म में सलमान और प्रियंका के अलावा दिशा पटानी, तब्बू और सुनील ग्रोवर अहम भूमिकाओं में नजर आने वाले हैं. ये फिल्म अगले साल ईद के मौके पर रिलीज की जाएगी.

लैपटौप खरीदने जा रहे हैं? ये हैं 5 शानदार विकल्प

बाजार में रोज नई तकनीक के साथ नए-नए प्रोडक्ट आ रहे हैं. ऐसे में अगर आप नया लैपटौप खरीदने की सोच रहे हैं, तो उसके स्क्रीन साइज, डिजाइन, रैम, हार्ड डिस्क की क्षमता को बिल्कुल भी अनदेखा न करें. साथ ङी लेपटौप खरीदने से पहले इस बात का खास ख्याल रखें कि लैपटौप में रैम की क्षमता जितनी अधिक होगी, प्रोसेसर उतनी ही तेजी से आपके डाटा को प्रोसेस करता है. प्रोसेसर के बेहतर होने पर ही आप बेहतरीन तरीके से सारे काम कर पाते हैं. इन दिनों बाजार में इन सभी खूबियों से लैस कई लैपटौप मौजूद हैं, तो आइये जानें इनके बारें में.

डेल G3 15 और डेल G3 17

डेल ने गेमिंग यूजर्स को ध्यान में रखकर जी सीरीज के चार लैपटौप लौन्च किए हैं. G3 15 अब तक का सबसे पतला लैपटौप है. इसमें 15 इंच का डिस्प्ले है, जबकि G317 में 17 इंच का डिस्प्ले दिया गया है. इन सभी लैपटौप में Nvidia GeForce GTX 1050 और 1060 Max-Q  ग्राफिक्स कार्ड लगे हुए हैं. इनमें 8वीं जेनरेशन का इंटेल कोर i7 प्रोसेसर लगा है. डेल G5 15 और डेल G7 15 में 15 इंच का डिस्प्ले है. दोनों ही लैपटौप में Nvidia GTX 1060 GPUs का ग्राफिक्स है. डेल G5 में 8वीं जेनरेशन तक का इंटेल कोर i7 प्रोसेसर मौजूद है, जबकि डेल G7 में 8वीं जेनरेशन तक का इंटेल कोर i9 प्रोसेसर उपलब्ध है. G7 15 में 4के डिस्प्ले का विकल्प है.

एसर स्विफ्ट 5

यह काफी पतला और हल्का लैपटौप है, जो विंडोज 10 होम पर चलता है. इसमें 14 इंच फुल-एचडी (1920×1080 पिक्सल) IPS-प्रो डिस्प्ले है. इसमें 8 जीबी DDR4 रैम के साथ 8th जेनरेशन इंटेल कोर i7 प्रोसेसर दिया गया है. इसमें 512 जीबी SSD स्टोरेज है और इसकी बैटरी 4670mAh की है. इसकी बौडी मैग्नीशियम-लिथियम अलौय से बनी हुई है. इसके अन्य फीचर्स में विंडोज हैलो फिंगरप्रिंट सेंसर, एक USB Type-C (3.1) पोर्ट, दो USB 3.0 पोर्ट और एक backlit की-बोर्ड दिया गया है. इसकी कीमत 79,999 रुपये है.

एचपी पवेलियन पावर

पवेलियन पावर नोटबुक Nvidia GeForce GTX 1050 ग्राफिक्स कार्ड और लेटेस्ट 7वीं जेनरेशन क्वाड कोर इंटेल प्रोसेसर से लैस है. इसे एचपी ने खास तौर पर क्रिएटिव प्रोफेशनल लोगों के लिए लौंट किया है.  इसमें 15.6-इंच फुल-एचडी (1920×1080 pixels) IPS डिस्प्ले है. इस डिवाइस में फुल-एचडी आईपीएस डिस्प्ले के साथ ‘B&O प्ले’ और एचपी ‘आडियो बूस्ट’ द्वारा आडियो भी दिया गया है. नोटबुक में 128जीबी पेरीफेरल कम्पोनेंट इंटरकनेक्ट एक्सप्रेस (PCIe), सोलिड-स्टेट स्टोरेज डिवाइस (SSD) और 1 टीबी हार्ड डिस्क ड्राइव स्टोरेज जैसी विशेषताएं हैं. इसकी शुरुआती कीमत 77,999 रुपये है.

आसुस जेनबुक फ्लिप S UX370UA

आसुस जेनबुक फ्लिप S UX370UA कन्वर्टिबल लैपटौप में 8वीं जेनरेशन इंटेल कोर i7 प्रोसेसर और 16 जीबी LPDDR3 रैम है. इसका वजन 1.1 किलोग्राम है और यह 11.2mm पतला है. आसुस का यह प्रीमियम लैपटौप मेटल फिनिशिंग वाला और स्टैंडर्ड एल्युमिनियम एलौय की तुलना में 50 फीसदी ज्यादा मजबूत है. इसमें 300 निट्स ब्राइटनेस और फुल एचडी (1920×1080 पिक्सल) रिजोल्यूशन के साथ 13.3 इंच एंटी ग्लेयर, टचस्क्रीन डिस्प्ले दिया गया है. इस विंडोज 10 लैपटौप में 1.8GHz इंटेल कोर i7-8550 प्रोसेसर, इंटेल UHD ग्राफिक्स GPU और 512 जीबी SSD है. वीडियो कौल के लिए वीजीए कैमरा, फिंगरप्रिंट सेंसर और एक 2-सेल लिथियम-आयन बैटरी दी गई है. इसकी कीमत 82,000 रुपये है.

गूगल पर लगा 5 अरब डालर का भारी जुर्माना

यूरोपीय आयोग ने गूगल पर बुधवार को रिकार्ड 4.34 अरब यूरो (5 अरब डालर) का जुर्माना लगाया है. यह जुर्माना गूगल पर यूरोपीय आयोग ने अपने सर्च इंजन के प्रभुत्व को मजूबत करने के लिए अवैध रूप से एंड्रायड मोबाइल डिवाइसों से प्रयोग को लेकर लगाया है. प्रौद्योगिकी दिग्गज ने कहा कि इसके खिलाफ वह अपील करेगी. आयोग के मुताबिक, गूगल ने साल 2011 से एंड्रायड डिवाइस निर्माताओं और मोबाइल नेटवर्क सेवा प्रदाताओं पर सामान्य इंटरनेट सर्च में अपनी प्रमुख स्थिति के मद्देनजर अवैध रूप से रोक लगा रखी थी.

आदेश में कहा गया कि गूगल को 90 दिनों के अंदर अपने आचरण को प्रभावी रूप से बदलना होगा या अतिरिक्त जुर्माना का सामना करना होगा. इस आदेश पर गूगल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुंदर पिचाई ने कहा कि कंपनी अयोग के फैसले के खिलाफ अपील करेगी.

इस फैसले के तुरंत बाद पिचाई ने एक ब्लौग पोस्ट में लिखा, “लगातार नवाचार, व्यापक पसंद, और गिरती कीमतें तेज प्रतिस्पर्धा का मजबूत सबूत है. एंड्रायड ने इसे सक्षम किया है और हर किसी के लिए व्यापक विकल्प और पसंद पैदा किया है.”

गूगल के सीईओ के मुताबिक, इस तथ्य की अनदेखी की गई है कि एंड्रायड फोन्स आईओएस फोन्स का मुकाबला करते हैं.

पिचाई ने लिखा, “एंड्रायड ने हजारो फोन निर्माताओं और मोबाइल नेटवर्क प्रदाताओं को कितना अधिक च्वाइस दिया है, जो एंड्रायड फोन बनाते और बेचते हैं. दुनिया भर के लाखों ऐप डेवलपर्स ने एंड्रायड के साथ अपना उद्यम तैयार किया है और अरबों ग्राहक अब नवीनतम एंड्रायड स्मार्टफोन को खरीदने और उसका प्रयोग करने में सक्षम हैं.”

आयुक्त मार्गेट वेस्टेगर जो प्रतिस्पर्धा नीति की प्रभारी भी हैं. उनके मुताबिक यह मामला गूगल द्वारा लगाए गए तीन तरह के प्रतिबंधों का है, जो इसने एंड्रायड डिवाइस निर्माताओं और नेटवर्क औपरेटरों पर लगाए हैं, ताकि एंड्रायड डिवाइस का ट्रैफिक गूगल के सर्च इंजन को ही जाए और किसी अन्य को नहीं.

वेस्टेगर ने कहा, “इस तरीके से गूगल ने एंड्रायड का इस्तेमाल सर्च इंजन में अपना प्रभुत्व बढ़ाने के लिए किया है. इसके कारण प्रतिद्वंद्वियों को नवाचार करने और प्रतिभा के आधार पर प्रतिस्पर्धा करने के मौके से वंचित कर दिया है. उन्होंने यूरोपीय उपभोगकर्ताओं को महत्वपूर्ण मोबाइल क्षेत्र में प्रभावी प्रतिस्पर्धा के लाभों से वंचित किया है. यह ईयू के एंटी-ट्रस्ट नियमों के तहत अवैध है.”

विशेष रूप से गूगल ने गूगल ऐप स्टोर (प्ले स्टोर) का लाइसेंस निर्माताओं को जारी करने के लिए यह पूर्व शर्त लगाई है कि वे गूगल के सर्च ऐप और ब्राउसर ऐप (क्रोम) को प्री-इंस्टाल करें. अपने ऐप को प्रीइंस्टाल करवाने के लिए गूगल ने बड़े निर्माताओं और मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटरों को भुगतान भी किया है.

एक बार फिर महंगी होने जा रही है टाटा की कारें, 4 महीने में दूसरी बार बढ़े दाम

अगर आप भी कार खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं तो इसे जल्द हकीकत में बदल डालिए. जी हां, होंडा और हुंदई के बाद टाटा मोटर्स ने भी अपनी कारों की कीमतों में इजाफा करने की घोषणा की है. टाटा मोटर्स (Tata Motors) अगस्त से अपने यात्री वाहनों के विभिन्न मौडलों की कीमत 2.2 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है. कीमत बढ़ने का कारण निर्माण लागत में बढ़ोतरी को बताया जा रहा है. इससे पहले भी टाटा ने अप्रैल में वाहनों की कीमत में तीन प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की थी. इस हिसाब से टाटा मोटर्स की तरफ से चार महीने में दूसरे बार कीमतों में इजाफा किया जा रहा है.

वाहन बिक्री में नहीं आएगी गिरावट

कंपनी को उम्मीद है कि कीमतों में इजाफा करने के बावजूद भी उसकी वाहन बिक्री में कमी नहीं आएगी. टाटा के पैसेंजर व्हीकल कारोबार इकाई के अध्यक्ष मयंक पारीक ने बताया कि हम लागत कटौती पर काम कर रहे हैं, लेकिन परेशानी यह है कि हम पर निर्माण लागत बढ़ने का दबाव है. इसलिए हम अगस्त से यात्री वाहनों की कीमत बढ़ाएंगे. पारीक ने कहा कि कंपनी ने अप्रैल में भी कीमतों में इजाफा किया था, लेकिन हमारी उत्पादन लागत बढ़ना जारी है.

मौडल के हिसाब से बढ़ेंगे दाम

एक सवाल के जवाब में पारीक ने कहा कि हम 2 प्रतिशत से 2.2 प्रतिशत तक कीमत बढ़ाएंगे. यह अप्रैल में बढ़ाई गई 3 फीसदी कीमत से अलग होगी. उन्होंने कहा कि कीमतों में यह इजाफा सभी तरह के मौडलों में होगी, जो हर मौडल के हिसाब से अलग होगी. उत्पादन लागत बढ़ने से होंडा और हुंदई पहले ही अपने वाहनों की कीमत बढ़ाने की घोषणा कर चुकी हैं.

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हुंदई ग्रैंड आई 10 भी महंगी होगी

हुंदई मोटर इंडिया ने मंगलवार को पसंदीदा हैचबैक ग्रैंड आई 10 (Grand i10) के दाम 3 प्रतिशत तक बढ़ाने की घोषणा की हैं. हुंदई की तरफ से दिए गए बयान में कहा गया कि उत्पादन की लागत बढ़ने से यह कदम उठाना पड़ रहा है. ग्रैंड आई 10 (Grand i10) की संशोधित कीमत अगस्त 2018 से लागू होगी. हुंदई इस साल दिवाली पर एक नई कौम्पैक्ट कार पेश करने की तैयारी कर रही है. हुंदई आई10 की कीमत में 15 हजार से 23 हजार रुपये तक का इजाफा होगा.

पिछले दिनों होंडा कार्स इंडिया ने भी वाहनों के दामों में 10 से 35 हजार रुपये तक के इजाफे की घोषणा की है. कंपनी की तरफ से बताया गया था कि कारों की नई कीमतें 1 अगस्त से प्रभावी होगी. होंडा की तरफ से हाल ही में लौन्च की गई अमेज की कीमत में भी इजाफा किया जाएगा.

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