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ये सेंसर आपके फोन को बनाते हैं स्मार्ट..!

आजकल स्मार्टफोन्स में आने वाले तरह-तरह के सेंसर्स हमारे फोन, उसमें मौजूदा डाटा और वीडियो ऐप्स को और भी अधिक स्मार्ट और आधुनिक बनाते हैं. आप सेंसर को सीधा सीधा ऐसे समझ सकते हैं कि इलेक्ट्रानिक प्रोडक्ट में यदि कोई काम अपने आप हो जाता है, तो उसमें सेंसर का ही हाथ होता है. आपने कभी गौर किया होगा तो जब आप अपने मोबाइल से कौल करने के बाद उसे अपने कान के पास ले जाते हैं, तो उसकी स्क्रीन अपने आप बंद हो जाती है. दरअसल, इसमें भी सेंसर ही काम करता है.

हमारे फोन में कई तरह के सेंसर इस्तेमाल किए जाते हैं, जो अलग-अलग काम करते हैं. स्मार्टफोन में लगे कई तरह के सेंसर्स की मदद से विभिन्न प्रकार के ऐप आसानी से काम करते हैं. कुछ महत्वपूर्ण सेंसर हैं, जो लगभग सभी तरह के स्मार्टफोन में इस्तेमाल होते हैं-

स्मार्टफोन में इस्तेमाल होने वाले सेंसर्स

प्रोक्सिमिटी सेंसर: जब कोई वस्तु स्मार्टफोन के समीप होती है, तो यह सेंसर उसकी मौजूदगी का पता लगा लेता है. यह सेंसर मुख्य रूप से स्मार्टफोन के ऊपरी हिस्से में फ्रंट कैमरे के पास लगा होता है. आमतौर पर जब आप कौल आने या कौल करने के लिए स्मार्टफोन को कान के पास ले जाते हैं, तो यह सेंसर स्मार्टफोन के डिस्प्ले की लाइट को स्वत: औफ कर देता है.

एंबिएंट लाइट सेंसर: यह सेंसर स्मार्टफोन के डिस्प्ले की ब्राइटनेस को रोशनी के हिसाब से एडजस्ट तो करता ही है साथ ही डिस्प्ले की ब्राइटनेस को स्वत: कम या ज्यादा करने में भी मदद करता है.

एक्सीलरोमीटर और जाइरोस्कोप सेंसर: यह सेंसर मुख्य रूप से स्मार्टफोन किस दिशा में घूमा हुआ है, उसके बारे में बताता है. जब भी हम कोई वीडियो स्मार्टफोन में देख रहे होते हैं, तो उसे पोर्ट्रेट मोड की जगह लैंडस्केप मोड में में देखने के लिए अपना फोन घुमाते हैं तो एक्सीलरोमीटर और जाइरोस्कोप सेंसर की मदद से वीडियो फुल स्क्रीन पर आ जाता है. ध्यान रहे, यह सेंसर तभी काम करता है, जब आपने फोन में औटो-रोटेशन इनेबल किया हो. आपको बता दें कि स्मार्टफोन में रोटेशन के लिए दो सेंसर्स की जरूरत होती है, जिसमें एक्सीलरोमीटर इसके रेखीय त्वरण को और जाइरोस्कोप इसके घूर्णी कोण की गति को निंयत्रित करता है.

बायोमैट्रिक सेंसर: इसका इस्तेमाल आजकल लगभग सभी तरह के मिड रेंज और हाई रेंज के स्मार्टफोन्स में किया जा रहा है. इसकी मदद से स्मार्टफोन की सुरक्षा के लिए दिया गया फिंगरप्रिंट सेंसर काम करता है. यह सेंसर स्मार्टफोन में दर्ज किए गए अंगूठे या उंगली को स्कैन करके डाटा इकट्ठा कर लेता है. दूसरी बार, उसी अंगूठे या उंगली को इस सेंसर के पास रखा जाता है, तो वह इसकी जानकारी को इकट्ठा की गई जानकारी में मिलाकर सही अंगूठे या उंगली की पहचान कर लेता है. बायोमैट्रिक सेंसर में फिंगरप्रिंट के अलावा रेटिना स्कैनर भी आता है, जो फ्रंट कैमरे के साथ जुड़ा होता है. इसकी मदद से स्मार्टफोन के लौक को रेटिना के स्कैन की मदद से भी लौक-अनलौक किया जा सकता है.

डिजिटल कम्पास: इसमें मैग्नेटोमीटर सेंसर का इस्तेमाल किया जाता है, जो जमीन के चुंबकीय क्षेत्र के अनुसार काम करता है. इस सेंसर की मदद से स्मार्टफोन में इंस्टौल डिजिटल कम्पास सही दिशा के बारे में जानकारी देता है.

बैरोमीटर: यह सेंसर मूलरूप से स्मार्टफोन में इनबिल्ट जीपीएस चिप की मदद से काम करता है. इसकी मदद से ऊंचाई पर त्वरित गति से स्थान को लौक करके डाटा इकट्ठा किया जा सकता है.

वर्चुअल रियलिटी सेंसर: वर्चुअल रियलिटी सेंसर मूलरूप से स्मार्टफोन के कैमरे के साथ मिलकर रियलिटी ऐप्स के साथ काम करता है. यह सेंसर स्मार्टफोन में कैमरा ऐप्स की मदद से एनिमेटेड तस्वीर भी निकाल सकता है. इसी के साथ यह सेंसर कई तरह के मोबाइल गेम्स खेलने में भी मददगार है.

जीपीएस सेंसर: यह सेंसर आमतौर पर सभी स्मार्टफोन में इस्तेमाल किया जाता है. जीपीएस का मतलब होता है, ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम यानी भूमंडलीय स्थिति निर्धारण प्रणाली. इस सेंसर की मदद से डिवाइस की लोकेशन पता करने में मदद मिलती है. यह सेंसर कई तरह के सैटेलाइट के साथ जुड़कर काम करता है. इस सेंसर के लिए स्मार्टफोन में इंटरनेट कनेक्टिविटी होना जरूरी है. यानी अगर आपके स्मार्टफोन में इंटरनेट डाटा बंद होता है, तो यह सेंसर काम नहीं करेगा.

क्या करें अगर आपका जीमेल हो जाए हैक?

गूगल का ई मेल सर्विस जीमेल दुनिया में मेल के लिए इस्तेमाल किए जाने वाला सबसे बड़ा सर्विस है. लेकिन इतने यूजर्स होने के कारण ये हैकर्स की भी पसंदीदा जगह है. अगर आप जीमेल का इस्तेमाल कर रहे हैं और अचानक आपके अकाउंट में कुछ ऐसी हरकत होने लगे जिससे हैक होने का खतरा हो या फिर आपका अकाउंट ही हैक हो जाए तो ऐसे में आपको क्या करना चाहिए, इस बारें में आपको हम इस लेख में बताने जा रहे हैं

तो ये रहें वो तरीके जिसकी मदद से आप अपने अकाउंट को हैक होने से बचा सकते हैं.

– इसके लिए सबसे पहले आपको अपने गूगल अकाउंट के रिकवरी पेज पर जाना होगा.

– अगर आपको अपना पासवर्ड याद नहीं आ रहा है तो दूसरे सवालों का इस्तेमाल करें.

– रिकवरी ई मेल या फिर किसी फोन नंबर का इस्तेमाल करें.

– इसके बाद जी मेल आपको एक रिकवरी कोड भेजेगा जिससे आप अपने अकाउंट की पुष्टि कर सकते हैं.

– इन सब चीजों से काम न बनने पर आप सिक्योरिटी सवालों का सहारा लें. इससे आपको रिकवरी कोड मिल जाएगा. एक बार रिकवरी कोड मिलने पर आपको उस कोड को जीमेल में डालना होगा. जिसके बाद गूगल आपसे आपके अकाउंट का पासवर्ड बदलने को कहेगा.

– साइन इन होने के बाद जीमेल सिक्योरीटि चेक से होकर गुजरेगा. इस प्रक्रिया में आपको अपने सिक्योरिटी इंफोर्मेशन को बदलने का ध्यान रखना होगा.

बंद लैपटौप से करें अपना फोन चार्ज, यह है ट्रिक

कई बार जब हमारे फोन की बैटरी खत्म होती है तो उस समय हमारे पास लैपटौप तो होता है पर फोन का चार्जर नहीं. ऐसे में हम लैपटौप को औन करके अपना फोन चार्ज करते हैं. पर आप भी जानते होंगे कि बिना मतलब लैपटौप औन रखने का कोई मतलब नहीं है. क्या आप जानते हैं कि आप बंद कंप्यूटर या लैपटौप से भी मोबाइल चार्ज कर सकते हैं? आप में से कई लोग इसके बारे में नहीं जानते होंगे. तो चलिए आज आपको बताते हैं कि बंद लैपटौप से मोबाइल कैसे चार्ज किया जा सकता है.

बंद लैपटौप से करें मोबाइल चार्ज

ऐसा करने के लिए सबसे पहले जिस लैपटौप से आपको अपना फोन चार्ज करना है उसे औन करें. इसके बाद अपने कंप्यूटर या लैपटौप के ‘My Comuter’में जाएं. अब फाइल मैनेजर में जाएं. अब बाईं ओर सबसे ऊपर कोने में दिख रहे टिक या ‘Properties’ पर क्लिक करें.

अब सामने खुली विंडो में ‘Device Manager’ पर क्लिक करें.

इसके बाद ‘Device Manager’ पर क्लिक करें.

अब सामने खुली विंडो पर आपको कई सारे विकल्प दिखाआ देंगे. इनमें से आपको ‘ USB Root Hub’ वाले विकल्प पर क्लिक करना है.

अब आपके सामने एक नई विंडो खुलेगी जिसमें ‘USB Root Hub’ की Properties वाली एक बौक्स खुलेगी. इसमें आपको सबसे अंत में दिख रहे ‘Power Management’ पर क्लिक करना है.

फिर ‘Allow The Computer To Turn Off This Device To Save The Power’ के विकल्प पर पहले से Tick लगा होगा उसे हटा दें और Ok पर क्लिक करें. ऐसा करने से आप लैपटौप या कंप्यूटर बंद होने पर भी आसानी से मोबाइल यूएसबी केबल के जरिए मोबाइल चार्ज कर सकते हैं.

‘भारत’ में हुई तब्बू की एंट्री

कई सुपरस्टार्स को सिल्वर स्क्रीन पर एक साथ देखने का अपना ही मजा है. बौलीवुड में इनदिनों कई मल्टीस्टारर फिल्में बनाई जा रही है, इन्ही फिल्मों में से एक है सलमान खान की फिल्म ‘भारत’. इस फिल्म में सलमान के साथ प्रियंका चोपड़ा नजर आएंगी. ये जोड़ी 10 साल बाद बड़े पर्दे पर दिखेगी. सलमान और प्रियंका को एक साथ देखने की एक्साइटमेंट खत्म हुई नहीं थी कि मेकर्स ने इस फिल्म में दिशा पाटनी का भी नाम जोड़ दिया.

लेकिन अब इस फिल्म को लेकर एक्साइटमेंट का लेवल एक कदम और आगे बढ़ गया है. क्योंकि इस फिल्म में सलमान, प्रियंका और दिशा के बाद अब बौलीवुड की बेहतरीन अदाकारा तब्बू का नाम भी जुड़ गया है. जी हां,फिल्म के निर्माता अली अब्बास जफर ने हाल ही में अपने सोशल अकाउंट पर तब्बू की खूबसूरत तस्वीर शेयर करते हुए यह साझा किया है कि तब्बू उनकी फिल्म ‘भारत’ में शामिल होने वाली हैं और तब्बू के साथ काम करने के लिए वो बहुत उत्सुक हैं. गौरतलब है कि तब्बू और सलमान पिछली बार साल 2014 में फिल्म ‘जय हो’ में नजर आए थे. लेकिन तब्बू और प्रियंका को हमने इससे पहले कभी किसी फिल्म में साथ में नहीं देखा है.

अली अब्बास जफर और सलमान ने इससे पहले ‘सुलतान’ और ‘टाइगर जिंदा है’ में भी साथ काम किया है. बात की जाए फिल्म ‘भारत’ की तो यह फिल्म साउथ कोरियन फिल्म ‘An Ode To My Father’ की आफिशियल रीमेक है. ‘भारत’ को सलमान के जीजा और एक्टर, प्रोड्यूसर और डायरेक्टर अतुल अग्निहोत्री प्रोड्यूस कर रहे हैं.

‘भारत’ की शूटिंग की तैयारियां शुरू हो गई हैं और इसे यूरोप के अलावा भारत की कई जगहों पर फिल्माया जाएगा. इस फिल्म का ज्यादातर हिस्सा पंजाब में शूट होगा. कहा जा रहा है कि सलमान इस फिल्म में 18-19 साल के लड़के के रोल में भी दिखेंगे जो कहानी के साथ बड़ा होता जाएगा और 60 की उम्र तक भी पहुंचेगा. इस रोल के लिए सलमान प्रोस्थेटिक मेकअप का भी सहारा लेंगे, जो उन्हें पर्सनली पसंद नहीं है मगर, उनका कहना है कि प्रोस्थेटिक मेकअप के लिए यह उनकी पहली और आखरी फिल्म होगी. वैसे, इस फिल्म में कामेडियन सुनील ग्रोवर भी दिखाई देंगे.

मैं नहीं चाहता की टेस्ट में टौस की परंपरा हो खत्म : सौरव गांगुली

क्रिकेट में इन दिनों टौस होने की प्रक्रिया को लेकर विवाद चल रहा है. कुछ लोगों का मानना है कि टौस से मेजबान टीम को फायदा होता है. इसे खत्म करने या न करने को लेकर आधिकारिक तौर पर विचार किया जाना है. इसी बीच भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने सोमवार को कहा कि वह टेस्ट क्रिकेट में टौस खत्म करने के विचार से सहमत नहीं हैं. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) की योजना टेस्ट में टौस की प्रथा खत्म करने की है और पहले बल्लेबाजी या गेंदबाजी करने का फैसला मेजबान टीम के ऊपर छोड़ने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है.

इस विचार के विरोध में भारतीय टीम के दो पूर्व कप्तानों, बिशन सिंह बेदी और दिलीप वेंगसरकर ने आवाज उठाई थी और अब गांगुली ने भी इन दोनों की बातों को समर्थन किया है. गांगुली ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, “यह देखना होगा की यह प्रयोग लागू होता या नहीं. व्यक्तिगत तौर पर हालांकि मैं टेस्ट में टौस को खत्म करने के समर्थन में नहीं हूं.”

प्रस्ताव के आने के बाद क्रिकेट जगत इसके पक्ष और विपक्ष में बंटा हुआ है. औस्ट्रेलिया के दो पूर्व कप्तान स्टीव वौ और रिकी पोंटिंग ने हालांकि इसका समर्थन किया है. वहीं वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाज माइकल होल्डिंग और पाकिस्तान के पूर्व कप्तान जावेद मियांदाद का मानना है कि इससे प्रतिस्पर्धा में इजाफा होगा. हाल के दिनों में हालांकि इसकी आलोचना हुई है क्योंकि टास जीतने पर घरेलू टीम को काफी फायदा होते देखा गया है. गांगुली ने कहा, ‘‘अगर घरेलू टीम टास हार जाती है तो उसे फायदा नहीं मिलता है.’’

अगर टौस हटाया जाता है तो आईसीसीसी अपनी 140 साल पुरानी परंपरा को खत्म कर देगी. इस विचार को आईसीसी की नई सीमिति ने पेश किया था जिसमें कई पूर्व अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी, कोच और एलिट पेनल के अंपायर शामिल हैं. भारत के पूर्व कप्तान अनिल कुंबले की अध्यक्षता वाली समिति मुंबई में इसी महीने के अंत में होने वाली बैठक में इस पर चर्चा करेगी. मुंबई में 28 और 29 मई को होने वाली बैठक में टौस की प्रांसगिकता और निष्पक्षता पर चर्चा की जाएगी और इस पर विचार किया जाएगा कि क्या अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को टौस को अलविदा कह देना चाहिए ताकि दोनों टीमों में से कोई फायदे में नहीं रहे?

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एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘टेस्ट क्रिकेट से मूल रूप से जुड़े टौस को खत्म किया जा सकता है. आईसीसी क्रिकेट समिति इस पर चर्चा करने के लिये तैयार है कि क्या मैच से पहले सिक्का उछालने की परंपरा समाप्त की जाए जिससे कि टेस्ट चैंपियनशिप में घरेलू मैदानों से मिलने वाले फायदे को कम किया जा सके.’’

मेजबान टीम को मिलता है अनुचित लाभ?

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सिक्का उछालने यानि टौस की परंपरा इंग्लैंड और औस्ट्रेलिया के बीच 1877 में खेले गए पहले टेस्ट मैच से ही चली आ रही है. इससे यह तय होता है कि कौन सी टीम पहले बल्लेबाजी या गेंदबाजी करेगी. सिक्का घरेलू टीम का कप्तान उछालता है और मेहमान टीम का कप्तान ‘हेड या टेल’ कहता है. हाल में इसकी प्रासंगिकता पर सवाल उठाए जाने लगे हैं. आलोचकों का मानना है कि टौस में मेजबान टीमों को अनुचित लाभ मिलता है.

रिपोर्ट ने पैनल के सदस्यों को भेजे गये पत्र उद्धृत करते हुए लिखा है, ‘‘टेस्ट पिचों की तैयारियों में घरेलू टीमों के हस्तक्षेप के वर्तमान स्तर को लेकर गंभीर चिंता है और समिति के एक से अधिक सदस्यों का मानना है कि प्रत्येक मैच में मेहमान टीम को टौस पर फैसला करने का अधिकार दिया जाना चाहिए. हालांकि समिति में कुछ अन्य सदस्य भी हैं जिन्होंने अपने विचार व्यक्त नहीं किए.’’

2016 की काउंटी में टौस नहीं किया गया था

काउंटी चैंपियनशिप में 2016 में टौस नहीं किया गया और यहां तक कि भारत में भी घरेलू स्तर पर इसे हटाने का प्रस्ताव आया था लेकिन उसे नकार दिया गया था. इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) ने दावा किया कि इस कदम के बाद मैच लंबे चले तथा बल्ले और गेंद के बीच अधिक प्रतिस्पर्धा देखने को मिली.

आईसीसी क्रिकेट समिति में पूर्व भारतीय कप्तान और कोच अनिल कुंबले, एंड्रयू स्ट्रास, माहेला जयवर्धने, राहुल द्रविड़, टिम मे, न्यूजीलैंड क्रिकेट के मुख्य कार्यकारी डेविड वाइट, अंपायर रिचर्ड केटलबोरोग, आईसीसी मैच रेफरी प्रमुख रंजन मदुगले, शौन पोलाक और क्लेरी कोनोर हैं.

1 जून से 50 हजार तक महंगी हो जाएंगी इस कंपनी की कारें

हुंदई मोटर इंडिया (HMIL) के विभिन्न मौडलों के दाम जून से दो फीसदी तक बढ़ जाएंगे. हालांकि, कंपनी ने कहा है कि उसकी हाल में पेश एसयूवी क्रेटा के दाम नहीं बढ़ाए जाएंगे. कंपनी का कहना है कि उत्पादन लागत बढ़ने की वजह से उसे यह कदम उठाना पड़ रहा है. फिलहाल हुंदई एंट्री लेवल की इयौन से लेकर एसयूवी टुस्कौन तक बेचती है. इयौन की दिल्ली शोरूम में कीमत 3.3 लाख रुपये है जबकि टुस्कौन का दाम 25.44 लाख रुपये है.

नहीं बढ़ेगी एसयूवी क्रेटा की कीमत

एचएमआईएल के निदेशक (सेल्स एंड मार्केटिंग) राकेश श्रीवास्तव ने कहा, ‘हम अभी तक जिंस कीमतों में बढ़ोतरी, ईंधन की कीमतों में इजाफे के कारण ढुलाई में बढ़ोतरी और कुछ कलपुर्जों पर सीमा शुल्क में वृद्धि का बोझ खुद उठा रहे थे. लेकिन अब हमको कुछ बोझ को उपभोक्ताओं पर डालना होगा. जून से हम अपने विभिन्न उत्पादों की कीमत दो प्रतिशत तक बढ़ रहे हैं.’ कंपनी ने कहा है कि एसयूवी क्रेटा के 2018 के संस्करण के दाम नहीं बढ़ेंगे.

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शुरुआती कीमत 9.44 रुपये

आपको बता दें कि हुंदई ने क्रेटा एसयूवी को सोमवार को ही पेश किया है. इसकी दिल्ली में एक्स शोरूम कीमत 9.44 से 15.03 लाख रुपये तक है. यह क्रेटा का अपडेटेड वेरिएंट है. क्रेटा के नए वेरिएंट में इलेक्ट्रिक सनरूफ, 6- वे पावर ड्राइवर सीट, क्रूज कंट्रोल और वायरलैस फोन चार्जिंग समेत कई फीचर्स मौजूद हैं. इस तरह दो प्रतिशत के हिसाब से हुंदई की कारों की कीमत में 7 हजार से लेकर 50 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी होगी.

लौन्चिंग के मौके पर हुंदई के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ वाई के कू ने कहा, ‘2015 में पेश होने के बाद से क्रेटा एसयूवी श्रेणी में एक स्थापित ब्रांड बनी हुई है. हमें भरोसा है कि नई क्रेटा अपनी श्रेणी में नए मानक बनाएगी.’ क्रेटा के पेट्रोल वेरिएंट की दिल्ली में एक्स-शोरूम कीमत 9.43 लाख से 13.59 लाख रुपये के बीच है. वहीं डीजल वेरिएंट 9.99 लाख से 15.03 लाख रुपये तक है.

पिता की मौत ने सचिन को बना दिया महान

23 मई 1999 का दिन सचिन तेंदुलकर की जिंदगी का बेहद खास दिन है. इसी दिन सचिन तेंदुलकर ने अपने वनडे करियर का 22वां शतक जड़ा था. यह सचिन तेंदुलकर के करियर का सबसे यादगार शतक था. इस शतक को जड़ने के बाद सचिन तेंदुलकर की आंखों में आंसू थे. सचिन ने अपने इस शतक को अपने पिता को समर्पित किया था. सचिन की बेहतरीन पारी के लिए पूरा देश उन्हें सलाम कर रहा था. स्टेडियम में लोग पोस्टर और बैनर लेकर आए थे, जिनपर लिखा था- हम तुम्हारे साथ हैं सचिन… भारत तुम्हारे साथ है सचिन.

23 मई 1999 वर्ल्ड कप में केन्या के खिलाफ सचिन तेंदुलकर ने नाबाद 140 रनों की पारी खेली थी. इस पारी में सचिन ने 101 गेंदों में 12 चौकों और तीन छक्‍कों के साथ140 रनों की पारी खेलकर भारत को 94 रनों से जीत दिलाई थी. सचिन तेंदुलकर की यह पारी इसलिए भी बेहद खास है, क्योंकि पिता की मौत के बाद चंद दिनों बाद ही सचिन ने यह यादगार पारी खेली थी.

दरअसल, 1999 में वर्ल्ड कप इंग्लैंड में खेला जा रहा था. भारत दक्षिण अफ्रीका से अपना पहला मैच हार चुका था. टीम इंडिया को अगला मैच जिंब्बावे से खेलना था. जिंब्बावे से हार का मतलब था कि भारत पिछड़ जाएगा. देश की उम्मीदें सचिन तेंदुलकर से बंधी हुई थी, लेकिन जिंब्बावे साथ मैच से पहले ही सचिन तेंदुलकर के घर से एक बेहद बुरी खबर आई.

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खबर थी कि सचिन तेंदुलकर के पिता रमेश तेंदुलकर का निधन हो गया है. सचिन की पत्नी अंजलि ने खुद इंग्लैंड आकर उन्हें यह दुखद खबर सुनाई थी. यह खबर सुनते ही सचिन मुंबई के लिए रवाना हो गए. पिता की मौत की खबर से सचिन बुरी तरह से टूट गए थे. अब जिंब्बावे के साथ होने वाले मैच का हिस्सा सचिन नहीं थे और इस मैच में भारत को हार का सामना करना पड़ा था.

जिंब्बावे से हारने के बाद भारत पर वर्ल्ड कप से बाहर होने का खतरा मंडराने लगा था. इधर, भारत में सचिन अपने पिता की मौत से गहरे सदमे थे. सभी को यही लग रहा था कि शायद अब सचिन इस वर्ल्ड कप का हिस्सा नहीं बनेंगे. भारत का अगला मैच केन्या से होना था. अगर भारत इस मैच को हारता तो वह विश्व कप के सफर से बाहर हो जाता.

सचिन तेंदुलकर अभी भारत में ही थे, लेकिन अपने पिता के अंतिम संस्कार के बाद उन्होंने एक ऐसा फैसला लिया, जिसके बाद उन्हें महान सचिन तेंदुलकर कहने से कोई इंकार नहीं कर सकता था. सचिन तेंदुलकर पिता के अंतिम संस्कार के बाद सीधे इंग्लैंड के लिए रवाना हो गए. उन्होंने केन्या के खिलाफ मैच खेला और इस मैच में शानदार शतक जड़कर भारत तो वर्ल्ड कप में बनाए रखा.

केन्या के खिलाफ शतक जड़ने के बाद सचिन तेंदुलकर ने आसमान की तरफ अपने बल्ले को दिखाया और अपने पिता को याद किया. सचिन की आंखें नम थी और उन्होंने अपने इस शतक को अपने पिता को समर्पित कर दिया. जिस वक्त सचिन ने अपना शतक पूरा किया ना सिर्फ उनकी आंखें नम थी, बल्कि दर्शकों की आंखों में भी आंसू आ गए थे.

पिता की मौत के बाद सचिन तेंदुलकर का देश के लिए खेलने ने उन्हें महान बना दिया. बता दें कि सचिन अपने कई इंटरव्यूज में इस बात का जिक्र कर चुके हैं कि उनकी मां ने ही उन्हें पिता की मौत के बाद इंग्लैंड जाकर वर्ल्ड कप खेलने के लिए प्रेरित किया था. इस मैच में भारत ने मैच में दो विकेट पर 329 रन का विशाल स्‍कोर बनाया और मैच 94 रन से जीता.

एसबीआई को हुआ 3 महीने में 7718 करोड़ का नुकसान

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को बीते वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में 7,718.17 करोड़ रुपये का एकल शुद्ध घाटा हुआ है. वसूली में फंसे कर्जों (NPA) के लिए नुकसान के ऊंचे प्रावधान करने के कारण इतना बड़ा घाटा हुआ. इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में देश के इस सबसे बड़े बैंक ने 2,814.82 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया था. दिसंबर 2017 को समाप्त तीसरी तिमाही में बैंक को 2,416.37 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था. बैंक की तरफ से मंगलवार को शेयर बाजार में बताया गया कि जनवरी- मार्च तिमाही में उस की कुल आय बढ़कर 68,436.06 करोड़ रुपये पर पहुंच गई.

पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 57,720.07 करोड़ रुपये थी. इस अवधि में बैंक का सकल एनपीए बढ़कर कर्ज के 10.91 प्रतिशत के बराबर हो गया, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 6.90 प्रतिशत था. इस दौरान बैंक का शुद्ध एनपीए बढ़कर 5.73 प्रतिशत पर पहुंच गया, जो एक साल पहले समान तिमाही में 3.71 प्रतिशत था. बैंक के अनुसार विभिन्न शुल्कों से कमाई वित्त वर्ष 2016-17 की चौथी तिमाही के 7,434 करोड़ रुपये से बढ़कर 2017-18 की चौथी तिमाही में 8,430 करोड़ रुपये हो गई.

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एसबीआई की तरफ से जनवरी से मार्च 2018 की तिमाही में हुए घाटे के तीन बड़े कारण बताए हैं. बैंक के अनुसार ट्रेडिंग से कम आमदनी और बौन्ड यील्ड्स के बढ़ने के कारण मार्केट टू मार्केट में बड़े घाटे ने उसे तिमाही में शुद्ध घाटे की तरफ धकेला. बैंक की तरफ से यह भी बताया गया कि वेतन वृद्धि एवं ग्रेच्युटी की लिमिट बढ़ने से भी इन मदों में ज्यादा प्रावधान करने पड़े. चौथी तिमाही में एसबीआई का एनपीए 1.99 लाख करोड़ से बढ़कर 2.2 लाख करोड़ रुपये हो गया.

इससे पहले देश के सबसे बड़े बैंक ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत वित्त वर्ष 2017-18 में अपने ग्राहकों से वसूले गए कुल एटीएम व्यवहार शुल्क की जानकारी देने से साफ इंकार कर दिया था. यह शुल्क एटीएम उपयोग के तय मुफ्त अवसर खत्म होने के बाद वसूला जाता है. मध्यप्रदेश के नीमच निवासी सामाजिक कार्यकर्ता चन्द्रशेखर गौड़ ने बताया था कि उन्होंने आरटीआई अर्जी दायर कर एसबीआई से 31 मार्च को समाप्त ​वित्त वर्ष में उसके द्वारा अपने ग्राहकों से वसूले गए एटीएम व्यवहार शुल्क की ​तिमाही आधार पर जानकारी मांगी थी.

शादियों में कलाकारों के नाचने के सख्त खिलाफ हैं जौन अब्राहम

आम तौर पर हर भारतीय फिल्मकार एक ही रट लगाए रहता है कि दर्शक सिर्फ मनोरंजन के लिए ही फिल्में देखता है. ‘विक्की डोनर’, ‘मद्रास कैफे’के बाद अब ‘परमाणुः ए स्टोरी आफ पोखरण’के निर्माता व अभिनेता जौन अब्राहम भी मानते हैं कि भारतीय दर्शक सिनेमा में मनोरंजन देखना चाहता है. पर वह इरानी फिल्मकार माजिद मजीदी के इस कथन से भी सहमत नजर आते हैं कि भारतीय फिल्मकार मनोरंजन के नाम पर भारत की गलत छवि विदेशो में पेश कर रहे हैं.

जब हमने जौन अब्राहम से माजिद मजीदी के कथन का जिक्र किया, तो ‘‘सरिता’’ पत्रिका से एक्सक्लूसिव बात करते हुए जौन अब्राहम ने कहा- ‘‘जब हम हर फिल्म में सिर्फ नाच गाना दिखाएंगे, तो विदेशों में हमारी इन फिल्मों को देखकर लोग यही सोचेंगे कि हम सिर्फ नाच गाना ही करते रहते हैं. इसलिए ‘मद्रास कैफे’ और‘परमाणु’जैसी फिल्में बननी चाहिए. वास्तव में इंसान दिन भर काम कर, कई तरह की समस्याओं से जूझने के बाद जब घर पहुंचता हैं, तो डिप्रेस्ड हो जाता है. उस वक्त उन्हें मनोरंजन की चाहत होती है. इसलिए हर किसी का अपना नजरिया होता है.

मेरा मानना है कि यदि हम लोग एक ही तरह की फिल्म बनाते रहेंगे, तो बाहर उसकी गलत छवि तो जाएगी ही. मैं आपको बताता हूं. जब मैं अमरीका के लौस एंजिल्स जाता हूं, तो वह लोग सबसे पहले बौलीवुड बोलते हैं. पर मैं बौलीवुड की जगह भारतीय फिल्म इंडस्ट्री कहता हूं. फिर वह कहते हैं कि ‘सांग एंड डांस’तो वह सही कहते हैं. क्योंकि हम अपनी फिल्मों में सिर्फ यही देते हैं. तो जब तक हम मरेंगे नहीं, तब तक नाचते रहेंगे. हमारे फिल्मी हीरो तो शादियों में भी नाचते हैं. हर जगह नाचते हैं. पैसे के लिए किसी की भी शादी में नाचने चले जाते हैं.’’

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जब हमने जौन अब्राहम से पूछा कि उद्योगपतियों की शादी में जाकर नाचने को वह कितना जायज मानते हैं?’ तो जौन अब्राहम ने बिना लाग लपेट के कहा- ‘‘जो नाचने जाते हैं, मैं उन पर कुछ कमेंट नही कर सकता. हर किसी का अपना एक नजरिया होता है. पर मैं किसी की शादी में नाचने नहीं जाता. शायद आमिर खान भी नहीं जाते. पर पूरी फिल्म इंडस्ट्री यह काम करती है. मेरा मानना है कि हम कलाकार हैं. हमारा काम रचनात्मक है. हमें परदे पर आना चाहिए, शादियों में नाचना नहीं चाहिए. खैर, मुझे तो शादियों में जाकर नाचना अच्छा नहीं लगता. यदि मैं किसी शादी में नाचने पहुंच जाउंगा, तो मुझे रात भर नींद नहीं आएगी. लोगों ने मुझे कई बार सलाह दी. मैंने कई बार करोड़ों रुपए छोड़ दिए, पर शादी में नाचने नहीं गया.’’

पेट्रोल-डीजल के दाम छू रहे आसमान

पेट्रोल-डीजल की कीमतें मौजूदा समय में आसमान छू रही हैं. कर्नाटक चुनाव को देखते हुए तेल कंपनियों ने 19 दिन का प्राइस रिवीजन नहीं किया था, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. 14 मई के बाद से ही पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी लगातार जारी है.

सोमवार को दिल्ली में पेट्रोल 76.61 रुपए और डीजल 67.82 रुपए प्रति लीटर तो वहीं मुंबई में पेट्रोल की कीमत 84.44 रुपए प्रति लीटर और डीजल 72.21 है. पेट्रोल और डीजल की कीमतों ने कई पुराने रिकौर्ड तोड़ दिए हैं. पिछले आठ दिनों में पेट्रोल के दाम में 1.61 रुपए जबकि डीजल की कीमत में 1.64 रुपए का इजाफा किया गया है.

कहा जा रहा है कि कीमतें अभी और बढ़ सकती हैं. देखते हैं कि पेट्रोल के दाम आसमान क्यों छू रहे हैं और कैसे तय होती है इनकी कीमत :

तो इसलिए तेल में लग रही आग

कच्चे तेल की कीमत और पेट्रोल-डीजल की बढती मांग इसकी मुख्य वजह है. कच्चे तेल की कीमत हालांकि अभी 70 डालर प्रति बैरल है. याद होगा कि 2013-14 में यह रेट 107 डालर प्रति बैरल तक पहुंच गया था. उस वक्त जब कीमतें सरकारी नियंत्रण से मुक्त हो गईं तो इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा. हालांकि इंडियन बास्केट के कच्चे तेल की कीमत घटी है, पर वहीं कई तरह के टैक्स के चलते देश में पेट्रोल-डीजल महंगा होता चला जा रहा है.

किस तरह होती है किमत तय

सबसे पहले खाड़ी या दूसरे देशों से तेल खरीदते हैं, फिर उसमें ट्रांसपोर्ट खर्च जोड़ते हैं. क्रूड आयल यानी कच्चे तेल को रिफाइन करने का व्यय भी जोड़ते हैं. केंद्र की एक्साइज ड्यूटी और डीलर का कमीशन जुड़ता है. राज्य वैट लगाते हैं और इस तरह आम ग्राहक के लिए कीमत तय होती है.

चार साल में 12 बार बढ़ीं कीमतें

बीते चार साल में सरकार ने कम से कम एक दर्जन बार ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी यानी उत्पाद शुल्क में इजाफा किया है. इतना ही नहीं 4 मई से अबतक लगातार आठवीं बार कीमतों में बढ़ोतरी हुई है. नतीजतन मौजूदा सरकार को पेट्रोल पर मनमोहन सिंह की सरकार के कार्यकाल में 2014 में मिलने वाली एक्साइज ड्यूटी के मुकाबले 10 रुपये प्रति लीटर ज्यादा मुनाफा होने लगा. इसी तरह डीजल में सरकार को पिछली सरकार के मुकाबले 11 रुपये प्रति लीटर ज्यादा मिल रहे हैं.

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