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प्र-पंचतंत्र

शूर्पणखा की नाक काट कर रामलक्ष्मण की जोड़ी ने कौन सा शौर्य दिखाया था, इस पर बहस की तमाम गुंजाइशें हैं. ठीक इसी तर्ज पर श्रीराजपूत करणी सेना की यह घोषणा है कि उस के शूरवीर राजस्थान की शिक्षामंत्री किरण माहेश्वरी की नाक के साथ कान भी काटेंगे.

इतने बड़े हादसे को अंजाम देने की वजह भी बड़ी सी ही है कि किरण माहेश्वरी ने राजपूतों की तुलना चूहों से यह कहते कर दी थी कि चुनाव आते देख चूहे बिलों से बाहर निकल रहे हैं. जवाब में करणी सेना ने उन के नाककान काटने की बात इशारों में कह डाली. इत्तफाक से इसी दौरान गुजरात में कुछ दलितों को राजपूतों ने महज इसलिए ठोंका था कि वे अपने नाम के आगे सिंह लगा रहे थे.

इन राजपूत वीरों की नजर में, दरअसल, शूद्र, नारी और मुसलमान कुछ हैं ही नहीं, इसलिए इन्हें बोलने से पहले अपने अंजाम के बारे में सोच लेना चाहिए.

कश्मीर में गिरी सरकार

भारतीय जनता पार्टी ने पीपुल्स डैमोक्रैटिक पार्टी को धता बता कर जम्मूकश्मीर की साझा सरकार आखिर गिरा दी है. महबूबा मुफ्ती और नरेंद्र मोदी दोनों श्रीनगर की सरकार को चलाने में घुटन महसूस कर रहे थे और यह टूट काफी दिनों से दिख रही थी. सरकार चलाना वैसे भी इस इलाके में आसान नहीं क्योंकि मुसलिम बहुमत वाला यह राज्य हिंदू भारत से अपनापन जोड़ नहीं पाया है और आम जनता अपनी धार्मिक मनमानी के लिए लगातार कुरबानियां देने को तैयार है.

अब लगता है कि भाजपा इस सुलगती आंच पर पैट्रोल डाल कर 2019 की खीर पकाना चाहती है. देशभर में हिंदूमुसलिम तनाव पैदा करने में भाजपा के कट्टर नेताओं को कश्मीर की साझा सरकार मानसिक स्पीड ब्रेकर नजर आ रही थी. अब कश्मीर में मनमाने काम कर के केंद्र सरकार यह जता सकेगी कि देखो, हम ने कश्मीर को कैसे काबू में रख रखा है और 2019 में हमें ही वोट दो ताकि जो कट्टर हिंदू धर्म को न माने उसे भी वही देखना पड़े जो कश्मीरी देख रहे हैं.

भाजपा ने 2014 के बाद सोचा था कि उस का एकछत्र राज आ गया है और अलग धर्मों, जातियों और क्षेत्रों के लोग अपनेआप नए चक्रवर्ती सम्राट के अश्वमेध घोड़े के आगे स्वयं को सुपुर्द कर देंगे. कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान में चुनाव व उपचुनावों में मिली हार ने साबित कर दिया है कि पौराणिक सरकार को बनाए रखने के लिए महाभारत का युद्ध तो लगातार जारी रखना पड़ेगा. जम्मूकश्मीर सरकार की बलि इसी कोशिश का पहला अनुष्ठान है.

अगर नरेंद्र मोदी और महबूबा मुफ्ती लेनेदेने की नीति में विश्वास रखते तो कोई कारण नहीं कि कश्मीर की जनता को मनाया नहीं जा सकता था. मुसलिम देश होने के कारण ही पाकिस्तान किसी का आदर्श नहीं बन जाता. बंगलादेश ने अपनी बंगाली संस्कृति को इसलामाबाद की मुसलिम सरकार से ज्यादा प्राथमिकता दी थी. पाकिस्तान को खुद सिंध, ब्लूचिस्तान और कई छोटे इलाकों को बांधे रखने में दिक्कत होती रहती है. सिर्फ धर्म के कारण कश्मीरी जनता भारत से विद्रोह नहीं कर सकती. जो गुस्सा कश्मीरियों को है उसे नरेंद्र मोदी को सुलझाने का अनूठा मौका मिला था जो उन्होंने गंवा दिया है.

अब कश्मीर तो जल ही सकता है, उस की आग का फायदा देशभर में हिंदूमुसलिम तनाव फैलाने में करा जाए तो आश्चर्य न होगा. विपक्षी दलों को ऐसी हालत में मुसलिम अल्पसंख्यकों का साथ देना होगा और भाजपा फिर उन पर हिंदू विरोधी आरोप जड़ कर 2019 में वोट बटोर सकती है. न देश की जनता के पास, न विपक्षी दलों के पास ऐसी किसी नीति का कोई ठोस बचाव है. वे यही उम्मीद कर सकते हैं कि अपने खुद के आर्थिक विकास में व्यस्त जनता के पास निरर्थक हिंदूमुसलिम विवाद में उलझने का समय और शक्ति नहीं होगी.

 

दिल का मामला या कोई बड़ी साजिश

हर साल बैसाखी के पर्व पर भारत से सिख व हिंदू श्रद्धालुओं का एक जत्था पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा पंजा साहिब ननकाना साहिब जाता है. वैसे समय समय पर गुरुओं के प्रकाशपर्व या गुरुपर्व पर श्रद्धालु पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारों के दर्शन, सेवा आदि करने जाते रहते हैं. पर 13 अप्रैल, 2018 की बैसाखी के पर्व का अपना एक विशेष महत्त्व होता है.

वहां जाने वाले श्रद्धालुओं में उस समय एक अजीब सा उत्साह होता है. जो जत्था पाकिस्तान जाता है, उस की तैयारियां और श्रद्धालुओं की बुकिंग का काम कई महीने पहले से ही शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की देखरेख में किया जाता है और जत्थे को सहीसलामत पाकिस्तान ले कर जाने और दर्शन करवा कर वहां से वापस भारत आने तक की जिम्मेदारी एसजीपीसी की ही होती है.

इस साल 12 अप्रैल को एसजीपीसी के कार्यकारी सदस्य गुरमीत सिंह की अगुवाई में 717 सदस्यों का जत्था गुरुद्वारा पंजा साहिब में बैसाखी का जश्न मनाने के लिए भारत से पाकिस्तान के लिए रवाना हुआ.

पाकिस्तान के पवित्र मंदिरों, गुरुद्वारों की यात्रा करने के बाद यात्री जत्था जब 21 अप्रैल को वापस भारतपाक बौर्डर पर पहुंचा तो पता चला कि जत्थे में एक यात्री कम है. इस मामले में जब छानबीन की गई तो पंजाब के होशियारपुर जिले के गढ़शंकर की एक सिख महिला किरनबाला जत्थे में नहीं थी. वह तीर्थयात्रा के दौरान गायब हो गई थी. उस समय ऐसा संभव नहीं था कि किरनबाला की तलाश की जाए, अत: जत्था किरनबाला के बिना ही अमृतसर लौट आया.

किरनबाला हुई लापता

बाद में पता चला कि जत्थे से अलग हो कर किरनबाला ने 16 अप्रैल, 2018 को लाहौर में एक मुसलमान युवक से विवाह कर लिया था. यात्रियों से पूछताछ के बाद पता चला कि पंजा साहिब से लाहौर लौटते समय रावी नदी के निकट से ही किरनबाला अचानक बस से गायब हा गई थी.

वह अपना सामान भी बस में ही छोड़ गई थी. उस समय इस बात की तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया था कि उस के मन में क्या खिचड़ी पक रही है.

किरनबाला एसजीपीसी के प्रतिनिधिमंडल की ओर से बतौर तीर्थयात्री 12 अपैल को पाकिस्तान रवाना हुई थी. वह भारतीय पासपोर्ट पर पाकिस्तानी वीजा के साथ गई थी, जो 21 अप्रैल तक वैध था.

बाद में उस ने इस्लामाबाद में पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय को चिट्ठी लिख कर अनुरोध किया कि मैं ने लाहौर के दारुल उलूम जामिया नईमिया में अपनी मरजी से इसलाम धर्म अपनाया है और लाहौर के हंजरवाल मुलतान रोड निवासी मोहम्मद आजम से निकाह कर लिया है. इसलिए मेरे वीजा की अवधि बढ़ाई जाए ताकि मैं अपने शौहर के साथ पाकिस्तान में रह सकूं.

आवेदन में उस का नाम आमना बीबी लिखा था. मंत्रालय ने उस की अरजी स्वीकार कर वीजा की अवधि 30 दिन के लिए बढ़ा दी. यह मामला पाकिस्तानी मीडिया में भी चर्चित हो गया.

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यह जानकारी मिलने के बाद एसजीपीसी और भारतीय सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया. सुरक्षा एजेंसियों को जांच के बाद पता चला कि किरनबाला को सिख जत्थे के साथ श्री हरमंदिर साहिब गुरुद्वारे के मैनेजर की सिफारिश पर जत्थे के साथ पाकिस्तान भेजा गया था. जब मैनेजर के बारे में पता किया गया तो जानकारी मिली कि वह छुट्टी ले कर कनाडा जा चुका है.

खुफिया एजेंसियों ने मैनेजर का भी रिकौर्ड खंगालना शुरू कर दिया कि उस की ओर से अब तक पाकिस्तान गए सिख श्रद्धालुओं के जत्थे में किनकिन लोगों की सिफारिश की गई है. कुछ केंद्रीय एजेंसियों और राज्य की खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों ने भी एसजीपीसी के कर्मचारियों से बात कर के तथ्य जुटाने की कोशिश की.

खुफिया एजेंसियों का अलर्ट

खुफिया एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही थीं कि किरनबाला ने जत्थे के साथ जाने के लिए अपने क्षेत्र के एसजीपीसी के सदस्यों से सिफारिश न करवा कर अमृतसर जिले के रहने वाले उस मैनेजर से ही क्यों सिफारिश करवाई. यह मैनेजर एक पूर्वमंत्री के पीए का अतिकरीबी था.

किरनबाला पंजाब में अपने 3 बच्चे छोड़ गई थी, जिन में 2 बेटे और एक बेटी है. लेकिन पाकिस्तान में मोहम्मद आजम से शादी करने के बाद वह अपने 3 बच्चों के होने से भी मुकर गई. उस ने पाकिस्तानी मीडिया से कहा कि उस के कोई बच्चा नहीं है.

अपने तीनों बच्चों को उस ने अपनी मौसी के बच्चे बताया. जबकि उस की सास और ससुर ने बताया कि किरनबाला वैसे तो 5 बच्चों की मां है. उस के एक बच्चे की मौत उस के जन्म के 4 दिन बाद ही हो गई थी, जबकि दूसरा बच्चा मृत पैदा हुआ था.

अपनी बात को साबित करने के लिए उस के ससुर तरसेम सिंह ने किरनबाला का आधार कार्ड, राशन कार्ड और किरनबाला के तीनों बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र, बीपीएल कार्ड और बेटी के साथ खोले गए बैंक खाते की प्रतियां भी दिखाईं.

पाकिस्तान जाते समय किरनबाला 12 साल की अपनी बड़ी बेटी को यह समझा कर गई थी कि वह 21 तारीख को लौट आएगी. तब तक वह अपने छोटे भाइयों का ध्यान रखे. उस ने बच्चों को यह भी समझाया था कि वह दादादादी की बात मानें और घर में किसी को तंग न करें.

किरनबाला की पृष्ठभूमि

किरनबाला का परिवार मूलरूप से पठानकोट के गांव शेरपुर का निवासी था. लेकिन उस के पिता मनोहरलाल लंबे समय से उत्तरी दिल्ली के मुखर्जीनगर इलाके में रहने लगे थे. किरन का जन्म पंजाब के होशियारपुर  के गढ़शंकर गांव में हुआ था. मातापिता के अलावा मायके में उस की एक छोटी बहन और छोटा भाई है. बहन की शादी हो चुकी है, जबकि भाई दिल्ली में पुरानी गाडि़यों की खरीदफरोख्त का काम करता है.

किरनबाला के ससुर तरसेम सिंह के मुताबिक, वह सन 1971 की जंग में भारतीय सेना में सेवा के दौरान जख्मी हो गए थे. इस के बाद वह वीआरएस ले कर घर लौट आए थे. सन 2005 में वह अपने बेटे को फौज में भरती कराने के लिए दिल्ली गए थे. दिल्ली प्रवास के दौरान उन के बेटे नरिंदर की किरनबाला से मुलाकात हो गई.

किरन का घर भरती केंद्र के पास ही था. उस वक्त किरनबाला 10वीं कक्षा में पढ़ती थी. इस दौरान कब उन के बेटे और किरन के बीच प्यार परवान चढ़ा, इस का पता परिजनों को भी नहीं लगा और फिर एक दिन उन का बेटा नरिंदर किरनबाला को साथ ले कर घर आ गया.

उस ने बताया कि किरन अपना घर छोड़ कर उस के साथ घर बसाने के लिए आई है और अब वह इस घर की बहू बन कर यहां रहेगी. उस समय किरन की उम्र 18 साल थी. शादी के बाद किरन ने 5 बच्चों को जन्म दिया, जिन में से 2 बच्चों की मौत हो गई थी और 3 बच्चे मौजूद हैं.

नरिंदर की सेना में भरती तो नहीं हो सकी पर उस ने एक गैस एजेंसी में डिलीवरीमैन का काम करना शुरू कर दिया था. वह थोड़ेथोड़े समय बाद दिल्ली जाया करता था. इसी बीच नवंबर, 2013 को एक दुर्घटना में नरिंदर की मौत हो गई.

बेटे की मौत के बाद नवंबर, 2013 में ही किरन घर छोड़ कर अपने मायके दिल्ली चली गई थी. अपने पोतीपोतों के बिना तरसेम का मन नहीं लग रहा था तो वह बहू और बच्चों को लेने के लिए दिल्ली चले गए और बाकायदा एग्रीमेंट कर के किरनबाला को अपने यहां ले आए.

उन्होंने कई बार किरनबाला से दूसरी शादी करने की भी बात कही और कहा कि वह खुद अपनी बेटी की तरह उस का कन्यादान करेंगे, लेकिन वह दूसरी शादी के लिए राजी नहीं हुई. लिहाजा अब उस का इस तरह घर छोड़ कर पाकिस्तान जाना और निकाह करना तरसेम सिंह की समझ में नहीं आ रहा था.

वहीं किरनबाला की सास कृष्णा कौर के मुताबिक, बेटे की मौत के बाद किरनबाला का चालचलन कुछ अच्छा नहीं रहा था. कई बार उन्होंने उसे रंगेहाथ पकड़ भी लिया था. इस बीच साल डेढ़ साल के लिए उस ने नंगल के करीब टाहलीवाल में एक फैक्ट्री में भी काम किया, लेकिन जब लोग उस के बारे में तरहतरह की बातें बनाने लगे तो उन्होंने उसे काम करने से मना कर दिया था.

किरन की बदल गई पहचान

तरसेम सिंह का कहना है कि अगर उन्हें जरा भी पता होता कि किरन के मन में ऐसा कुछ चल रहा है तो वह उसे किसी भी कीमत पर पाकिस्तान नहीं जाने देते. पाकिस्तान जाने के बाद 15 तारीख तक तो वह लगातार उन्हें फोन कर के बच्चों और परिवार का हाल जानती रही थी लेकिन एकाएक उस ने बच्चों व परिवार से मुंह मोड़ लिया.

इस के बाद 16 तारीख को उस ने तरसेम सिंह को फोन कर के कहा, ‘‘पिताजी, अब मैं लौट कर नहीं आऊंगी. मैं ने यहां इसलाम धर्म कबूल कर के मोहम्मद आजम नाम के शख्स से निकाह कर लिया है. और अब मेरा नाम आमना बीबी हो गया है.’’

तरसेम सिंह को लगा कि किरन मजाक कर रही है. इस पर उन्होंने उस से कहा, ‘‘क्यों मजाक करती हो बेटा. छोड़ो कोई बात नहीं, तुम यात्रा पूरी कर के जल्दी घर आ जाओ. बच्चे और हम सब तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं.’’

इस के बाद किरन का कोई फोन नहीं आया और न ही उस से कोई संपर्क हो सका था.

18 अप्रैल, 2018 को जब तरसेम सिंह को एक अंतरराष्ट्रीय संवाद एजेंसी के पत्रकार का फोन आया और उस ने भी वही बात दोहराई तो वह चकित रह गए.

तरसेम का मानना है कि किरन शायद पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई या आतंकी संगठनों की साजिश का शिकार हो सकती है. जिस तरह वह बात कर रही है और जो बोल रही है, उस से जाहिर है कि उस का ब्रेनवाश किया गया है. अब वह वही बोल रही है जो आईएसआई या आईएसआईएस के लोगों ने उसे सिखाया होगा.

लेकिन इतना सब होने के बावजूद अब भी वह बच्चों की खातिर किरनबाला को वापस लाना चाहते हैं ताकि वह किसी साजिश का शिकार हो कर नारकीय जीवन जीने को मजबूर न हो सके और बच्चे भी मां की देखभाल से महरूम न रहें.

तरसेम सिंह ने अंदेशा जताया कि शायद सोशल नेटवर्किंग साइट के जरिए वह पाकिस्तान के लोगों के संपर्क में आई होगी. इस के बाद वह शायद आईएसआई के हाथों में पड़ गई हो. यह भी हो सकता है कि उसे धर्म परिवर्तन या फिर से शादी करने के लिए मजबूर किया गया हो.

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किरनबाला ने फैक्ट्री में काम कर के बचाए अपने पैसों को अपने पास ही रखा था. पति की मौत के बाद मुआवजे के तौर पर मिले 25 हजार रुपए भी उसी के पास थे. इन्हीं पैसों से साल भर पहले उस ने एक स्मार्टफोन खरीदा था, जिस के बाद वह सोशल नेटवर्किंग साइटों से जुड़ी और सोशल नेटवर्क पर चैटिंग और वाइस काल में ऐसी डूबी कि ये कारनामा कर डाला.

वह घंटों तक फोन पर बातें करती रहती थी. जब उस के ससुर उस पूछते तो वह अपनी मां, भाई या किसी अन्य रिश्तेदार से बात करने की बात कह कर टाल देती थी.

तरसेम सिंह उसे फोन पर ज्यादा बात करने को ले कर टोकते थे, लेकिन उस ने कभी उन की एक नहीं सुनी और फोन पर उस की यह बातचीत लगातार बढ़ती ही चली गई.

सोशल नेटवर्किंग से जुड़ी मोहम्मद आजम से

किरनबाला की पड़ोसन और सहेली रही गिस्टी ने बताया था, ‘‘पति की मौत के बाद अपने मायके दिल्ली रहने के दौरान ही वह मोहम्मद आजम के संपर्क में आई थी.’’

किरन ने मुझे बताया था कि आजम दुबई में रहता है. पाकिस्तान जाने से पहले किरन ने अपने बैंक खाते से साढ़े 14 हजार रुपए निकलवाए थे. किरन फेसबुक पर ज्यादा सक्रिय थी. वह बिग लाइव, एक वीडियो आधारित सोशल नेटवर्क साइट पर भी बहुत सक्रिय थी.

किरन ने नरिंदर के साथ प्रेम विवाह करने के लिए हिंदू धर्म से सिख धर्म अपनाया था और अब मोहम्मद आजम से निकाह करने के लिए इसलाम धर्म को कबूल कर लिया. पाकिस्तान जाने से पहले वह दिल्ली के अस्पताल में अपने बीमार पिता को भी देखने गई थी.

किरन द्वारा यह कदम उठाने के बाद उस के बच्चे भी डरने लगे हैं. किरन की बेटी अपनी मां के धर्म परिवर्तन कर पुनर्विवाह करने पर काफी शर्मिंदा है. वह स्कूल जाना नहीं चाहती. वह कहती है कि बच्चे उसे तंग करते हैं और उस का मजाक उड़ाते हैं.

किरन की भूमिका संदेह के घेरे में

इस बीच होशियारपुर, महिलपुर और गढ़शंकर के सभी निर्वाचित और चुने गए एसजीपीसी सदस्यों ने किरन के लिए वीजा की सिफारिश करने से इनकार कर दिया. सुरिंदर सिंह भुलेवाल राथन, जंगबहादुर सिंह, रणजीत कौर और चरनजीत सिंह ने कहा कि उन्हें बैसाखी तीर्थयात्रा के लिए उस का कोई आवेदन नहीं मिला था.

तरसेम सिंह ने अब इस मामले में एसजीपीसी की भूमिका पर सवाल उठाए हैं. उन का कहना है कि इस मामले में एसजीपीसी उन की लगातार अनदेखी कर रही है. लिहाजा, इस की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए. उन्होंने मांग की है कि किरन को वीजा दिलाने के लिए मदद करने वालों, उस के नाम की सिफारिश करने वाले एसजीपीसी के अधिकारियों और अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया जाना चाहिए.

तरसेम सिंह ने होशियारपुर के एसएसपी को दी गई शिकायत में देश को बदनाम करने और धोखा देने के आरोप में किरनबाला के खिलाफ भी मामला दर्ज किए जाने की मांग की. उन्होंने आरोप लगाया है कि इस पूरे प्रकरण में पाकिस्तानी पुलिस भी शामिल रही है. किरन पाकिस्तानी पुलिस के संपर्क में थी.

तरसेम सिंह ने बताया कि नंगल के रहने वाले और पाकिस्तान जत्थे में गए नछत्तर सिंह से उन की फोन पर बात हुई थी. तरसेम के मुताबिक, नछत्तर ने उन्हें बताया था कि पाकिस्तान में प्रवेश करने के बाद से ही पाकिस्तानी पुलिस किरन के आसपास मंडरा रही थी. पाकिस्तानी पुलिस के अधिकारी और कर्मचारी थोड़ीथोड़ी देर में उस से बातचीत कर रहे थे.

नछत्तर का कहना था कि लाहौर पहुंचने के बाद जब जत्थे में शामिल महिलाओं व पुरुषों को अलगअलग कमरों में भेजा गया तो भी पाकिस्तानी पुलिस के कर्मचारी किरन से मिलते रहे थे. इस के बाद 15 अप्रैल तक लगातार किरन जत्थे के साथ रही और पाकिस्तान पुलिस ने उस से संपर्क बनाए रखा था. इस के बाद 16 अप्रैल को वह रुमाला लाने के बहाने से जत्थे से अलग हो कर गायब हो गई थी.

इस मामले की होनी चाहिए उच्चस्तरीय जांच

तरसेम सिंह ने एसएसपी को शिकायती पत्र दे कर किरन के वहां जाने, जत्थे में शामिल होने और वहां से गायब होने के मामले में एसजीपीसी के अधिकारियों और पदाधिकारियों पर संदेह जताते हुए मामले की जांच कराए जाने और संबंधित लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर कड़ी काररवाई किए जाने की मांग की है.

तरसेम सिंह ने किरनबाला को पाकिस्तान सरकार से तालमेल कर वापस लाए जाने की मांग को ले कर भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अविनाश राय खन्ना से भी मुलाकात की. खन्ना को दिए पत्र में तरसेम सिंह ने कहा है कि किरनबाला को पाकिस्तान से वापस ला कर परिवार को सौंपा जाए, ताकि उस के बच्चों की परवरिश सही ढंग से हो सके.

दूसरी ओर, किरनबाला उर्फ आमना बीबी ने पति मोहम्मद आजम के साथ लाहौर हाईकोर्ट में अब याचिका दायर की है. इस में बताया गया है कि उस ने दिल्ली में रहते हुए पहले फेसबुक के माध्यम से लाहौर निवासी मोहम्मद आजम से दोस्ती की थी और अब पाकिस्तान आ कर रजामंदी से इसलाम धर्म कबूल कर के उस ने निकाह भी कर लिया है. इसलिए पाकिस्तान सरकार उसे यहां की नागरिकता दे, यह उस का अधिकार है.

इस सब के बीच आमना बीबी बनने के बाद उस के पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने के वायरल वीडियो ने खुफिया एजेंसियों को सकते में डाल दिया है. इस से उस के ससुर तरसेम सिंह की इस बात को बल मिल रहा है कि कहीं वह आईएसआई की एजेंट तो नहीं बन गई. वीडियो फुटेज में किरनबाला अपने नए पाकिस्तानी पति मोहम्मद आजम के साथ कोर्ट के बाहर खड़ी दिखाई दी.

बहरहाल, यह दिल का मामला है या कोई बड़ी साजिश, कहा नहीं जा सकता. परंतु किरनबाला से आमना बीबी बनी पाकिस्तान की नई दुलहन के बारे में अब ताजा बात यह सामने आई है कि अपने फेसबुक के प्रेम और इसलाम धर्म के साथ वफादारी निभाते हुए उस ने लाहौर स्थित अपने घर में रोजे रखे. किरन वहां पर बच्चों से उर्दू भी सीख रही है और कुरआन शरीफ की आयतें भी याद कर रही है.

इन दिनों उस का पति काम के सिलसिले में सऊदी अरब चला गया है. पंजाब पुलिस और अन्य खुफिया एजेंसियां अब किरन के फेसबुक एकाउंट को स्कैन कर के गहनता से इस मामले की जांच कर रही हैं.

अल्लाह के नाम पर बेटी की कुर्बानी

रमजान का पवित्र महीना चल रहा था. मसजिद से सुबह की अजान हुई तो शबाना की आंखें खुल गईं. वह फटाफट सेहरी के लिए उठी तो देखा कि उस की 4 साल की बेटी रिजवाना बिस्तर पर नहीं थी. वहां केवल छोटी बेटी ही दिखी. शबाना ने सोचा कि रिजवाना को शायद टौयलेट आया होगा तो वह नीचे चली गई होगी.

उस ने रिजवाना को आवाज दी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. इस पर शबाना सोचने लगी कि रिजवाना कहां गई होगी. मेरे पास ही तो सो रही थी. शबाना अपनी बेटी को तलाश करने लगी. यह 8 जून, 2018 के तड़के की बात है.

राजस्थान में जोधपुर जिले के पीपाड़ शहर में सिलावटों का मोहल्ला है. इस मोहल्ले में नवाब अली अपने मामा मोहम्मद साजिद के घर में उन के साथ ही ऊपरी मंजिल पर रहता था. नवाब अली और मोहम्मद साजिद मिल कर मीट की दुकान चलाते थे. नवाब अली मूलरूप से पिचियाक गांव का रहने वाला था. वह अपनी बीवी शबाना और 4 साल की बेटी रिजवाना तथा एक छोटी बेटी के साथ मामा के मकान में रहता था.

जून महीने में राजस्थान में भीषण गरमी पड़ती है इसलिए नवाब अली अपनी बीवी और दोनों बेटियों के साथ छत पर सोया हुआ था. शबाना को जब बेटी रिजवाना नहीं मिली तो वह उसे देखने नीचे की मंजिल पर बने कमरे में गई.

कमरे का दृश्य देख कर शबाना की आंखें फटी रह गईं. वहां उस की मासूम रिजवाना खून में सनी पड़ी थी. उस के गले से खून बह रहा था. बेटी को रक्तरंजित हालत में देख कर शबाना रोने लगी. उस ने नब्ज देख कर बेटी के जिंदा होने का अनुमान लगाने की कोशिश की लेकिन उसे कुछ पता नहीं चला.

वह रोती हुई तेजी से सीढि़यां चढ़ कर छत पर पहुंची और वहां सो रहे पति नवाब अली को जगा कर नीचे वाले कमरे में खून से लथपथ पड़ी बेटी रिजवाना के बारे में बताया. इस पर नवाब अपनी बीवी के साथ नीचे वाले कमरे में आया और वहां खून फैला देख कर बीवी से कहा कि लगता है इस पर बिल्ली ने हमला किया है, इस से उस का गला कट गया है.

शबाना की चीखपुकार सुन कर नवाब अली के मामा मोहम्मद साजिद के परिवार वाले भी जाग गए. शबाना पति के साथ खून से लथपथ बेटी को अस्पताल ले गई. अस्पताल में डाक्टरों ने चैकअप के बाद बच्ची को मृत घोषित कर दिया. नवाब अली ने बच्ची पर बिल्ली के हमले की बात कह कर अस्पताल में डाक्टरों को संतुष्ट कर दिया और बेटी का शव घर ले आया.

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तब तक सूरज का उजाला नजर आने लगा था. नवाब की मासूम बेटी की मौत होने का पता चलने पर मोहल्ले के लोग भी एकत्र हो गए. नवाब ने मोहल्ले वालों को भी बेटी पर बिल्ली के हमले की बात बताई, लेकिन यह बात लोगों के गले नहीं उतरी. इस बीच किसी आदमी ने पुलिस को सूचना दे दी.

पुलिस मौके पर पहुंच गई. पुलिस ने जब बच्ची की लाश का निरीक्षण किया तो उस के शरीर पर कहीं भी बिल्ली के पंजों के निशान नहीं दिखे.

गला भी किसी धारदार हथियार से काटा हुआ दिख रहा था, इसलिए पुलिस को शक हो गया कि यह हत्या का मामला है. पुलिस ने लाश पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल भिजवा दी.

पुलिस ने बच्ची की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए जोधपुर से विधिविज्ञान प्रयोगशाला की टीम को मौके पर बुलाया, लेकिन इन से भी पुलिस को कोई ऐसे सबूत नहीं मिले, जिस से हत्यारे तक पहुंचा जा सके. पुलिस ने डाक्टरों के पैनल से बच्ची के शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया.

पुलिस इस बात से भी आश्चर्यचकित थी कि जब कमरे में बच्ची के मातापिता सो रहे थे तो फिर गला रेतने के समय उन्हें रिजवाना के चीखनेचिल्लाने की आवाज सुनाई क्यों नहीं पड़ी. मां के पास सो रही रिजवाना नीचे वाले कमरे में कैसे पहुंची. पुलिस को इस बात के भी कोई सबूत नहीं मिले कि हत्यारा बाहर से आया था, क्योंकि घर के दरवाजे बंद थे.

मासूम बच्ची की हत्या से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई. शबाना की तरफ से पुलिस ने अज्ञात आदमी के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया. जोधपुर एसपी (ग्रामीण) राजन दुष्यंत राजन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) खींवसिंह भाटी और पुलिस उपाधीक्षक सेठाराम बंजारा ने भी मौके पर पहुंच कर जांचपड़ताल की.

एसपी राजन दुष्यंत ने मौकामुआयने के बाद थाने में पुलिस अधिकारियों के साथ इस मामले पर चर्चा की. उन्हें लगा कि रिजवाना की हत्या में परिवार के ही किसी सदस्य का हाथ रहा होगा.

परिवार वालों ने जब रिजवाना का शव दफना दिया तो पुलिस नवाब अली और उस के मामा मोहम्मद साजिद को पूछताछ के लिए थाने ले आई. दोनों से अलगअलग पूछताछ की गई.

पूछताछ में नवाब अली ने अपनी बेटी रिजवाना की हत्या की जो लोमहर्षक कहानी सुनाई, उसे सुन कर पुलिस अफसर भी स्तब्ध रह गए.

नवाब अली कुरैशी ने पुलिस को बताया कि रमजान के महीने में अल्लाह को खुश करने के लिए वह अपनी सब से प्यारी चीज की कुरबानी देना चाहता था. वह बेटी रिजवाना को बहुत प्यार करता था, इसलिए उसे ही कुरबान कर दिया. नवाब जिस छुरी से बकरे काटता था, उसी से उस ने अपनी बेटी को हलाल कर दिया.

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26 साल के नवाब ने पुलिस को बताया कि मैं नमाजी हूं. बेटी को कुरबान कर के अल्लाह को खुश करना चाहता था. वह कई दिनों से अपने ननिहाल में थी. मैं ने रिजवाना को ननिहाल से बुलवा लिया.

7 जून को उसे बाजार ले गया और शहर में घुमायाफिराया. उसे मिठाई, फ्रूट, चौकलेट आदि खिलाए और उस की पसंद की चीजें दिलवाईं. उस के बाद मैं घर आ गया. रात को रिजवाना अपनी मां शबाना के साथ छत पर सोई थी, मैं भी पास में ही सोया था.

आधी रात बाद मैं रिजवाना को चुपके से उठा कर नीचे के कमरे में ले गया. वहां उसे कलमा सुनाया. फिर अपनी गोद में बिठा कर बकरा काटने वाली छुरी से धीरेधीरे उस का गला रेत दिया.

बेटी को हलाल करने से मेरी पैंट खून से सन गई तो मैं ने कपड़े बदले. फिर छुरी और खून से सने कपड़े छिपा कर रख दिए और वापस छत पर आ कर सो गया. मुझे नींद नहीं आ रही थी, पर मैं सोने का नाटक कर रहा था.

बाद में जब शबाना मुझे बेटी की लाश के पास ले गई तो मैं ने बेटी पर बिल्ली के हमले की बात कह कर मामले को दूसरा रूप देने की कोशिश की लेकिन बाद में पुलिस आ गई और मेरी मंशा पूरी नहीं हो सकी.

पुलिस ने बेटी की हत्या के आरोप में नवाब अली कुरैशी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया और वहां से उसे जेल भेज दिया गया. दूसरी ओर इसलाम से जुड़े लोगों ने आरोपी के बयान और कृत्य को धर्मविरोधी बताया. इन का कहना था कि इसलाम में इंसान का कत्ल हराम है. यह कृत्य सरासर धर्म के खिलाफ है.

11 दूल्हों को लूटने वाली दुल्हन

6 मई, 2018 का दिन था. सुबह के यही कोई 11 बज रहे थे. उत्तराखंड के जिला हरिद्वार के थाना पीरान कलियर के थानाप्रभारी देवराज शर्मा अपने औफिस में बैठे थे. तभी किसी व्यक्ति ने उन्हें फोन कर के कहा, ‘‘सर, मेरा नाम अशोक है और मैं धनौरी कस्बे में रहता हूं. मैं एक मामले में आप से बात करना चाहता हूं.’’

‘‘बताइए क्या मामला है?’’ थानाप्रभारी ने कहा.

‘‘सर, मेरे साथ एक धोखाधड़ी हुई है.’’ अशोक ने बताया.

‘‘किस तरह की धोखाधड़ी हुई है आप के साथ?’’ थानाप्रभारी ने पूछा.

‘‘सर, दरअसल बात यह है कि गत 2 मई, 2018 को ज्वालापुर के रहने वाले मेरे एक परिचित तथा उस के दोस्त मुकेश ने मेरी शादी रीता से कराई थी, जो जिला कोटद्वार के पौड़ी की रहने वाली थी. इस शादी के लिए मैं ने 2 लाख रुपए में अपनी प्रौपर्टी गिरवी रख कर लोन लिया था.’’ अशोक बोला.

‘‘इस के बाद क्या हुआ?’’ थानाप्रभारी देशराज शर्मा ने पूछा.

‘‘सर, इस शादी में मुकेश बिचौलिया था. उस ने मेरी शादी कराने के एवज में मुझ से 50 हजार रुपए नकद लिए थे. मुकेश ने मुझ से कहा था कि रीता एक गरीब घर की लड़की है. उस के पिता महेंद्र उस की शादी में ज्यादा रकम खर्च नहीं कर सकते. वह साधारण तरीके से शादी कर के बेटी के हाथ पीले करना चाहते हैं.’’ अशोक ने बताया.

‘‘क्या तुम ने मुकेश और महेंद्र से भी संपर्क किया था?’’ शर्मा ने पूछा.

‘‘नहीं सर, इस बीच हमारी बात सिर्फ मुकेश के माध्यम से ही चलती रही और महेंद्र से केवल उस दिन मुलाकात हुई थी, जिस दिन वह वरवधू को आशीर्वाद देने के लिए आया था. मुकेश ने यह शादी 2 अप्रैल को हरिद्वार की रोशनाबाद कोर्ट में कराई थी. इस के बाद मुकेश व महेंद्र हम से कभी नहीं मिले. शादी के 2 दिन बाद ही रीता हमारे घर से सोनेचांदी की सारी ज्वैलरी और नकदी ले कर भाग गई. रीता को हम ने कोटद्वार, ज्वालापुर, बिजनौर आदि कई जगहों पर तलाश किया, मगर हमें उस का कुछ भी पता नहीं चल सका. अब मुकेश का फोन  भी बंद है.’’ अशोक ने बताया.

‘‘तुम्हारी बातों से लग रहा है कि तुम शादी कराने वाले ठगों के गिरोह के चक्कर में फंस गए हो. इसीलिए उन्होंने अपने फोन भी बंद कर लिए हैं. अगर दुलहन रीता ठीक होती तो वह जेवर सहित क्यों भागती?’’ थानाप्रभारी बोले.

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‘‘आप ठीक कह रहे हैं सर, अब मैं इन जालसाजों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराना चाहता हूं.’’ अशोक ने कहा.

‘‘ठीक है तुम धनौरी पुलिस चौकी चले जाओ. वहां के चौकी इंचार्ज रंजीत सिंह तोमर से मिल कर तुम अपनी रिपोर्ट दर्ज करा सकते हो.’’ थानाप्रभारी ने बताया.

पुलिस ने शुरू की जांच

इस के बाद अशोक धनौरी पुलिस चौकी पहुंचा और चौकी इंचार्ज रंजीत तोमर से मिल कर खुद के ठगे जाने की घटना सिलसिलेवार बता दी. अशोक की तहरीर पर चौकी इंचार्ज ने लुटेरी दुलहन रीता उर्फ पूजा, बिचौलिए मुकेश तथा रीता के तथाकथित बाप महेंद्र के खिलाफ भादंवि की धाराओं 420, 417, 406 तथा 120 बी के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया.

थानाप्रभारी ने चौकी प्रभारी रंजीत तोमर को ही इस केस की जांच करने के निर्देश दिए और इस केस की जानकारी सीओ (रुड़की) स्वप्न किशोर सिंह को भी दे दी.

7 मई की शाम को एसपी (देहात) मणिकांत मिश्रा और सीओ स्वप्न किशोर सिंह थाना पीरान कलियर पहुंचे. उन्होंने इस ठग गिरोह को पकड़ने के लिए थानाप्रभारी देशराज शर्मा व चौकी प्रभारी रंजीत तोमर के साथ मीटिंग की.

मीटिंग में उन्होंने इस केस को खोलने के संबंध में कुछ दिशानिर्देश देते हुए कहा कि यह गिरोह अब जल्द ही आसपास के क्षेत्र में शादी के लिए किसी नए व्यक्ति को शिकार बनाएगा. आप अपने मुखबिरों को सतर्क कर दें.

एसपी (देहात) मणिकांत मिश्रा ने थानाप्रभारी के नेतृत्व में एक टीम बनाई. इस टीम में एसआई रंजीत तोमर, चरण सिंह चौहान, अहसान अली, कांस्टेबल अरविंद, ब्रजमोहन, महिला कांस्टेबल सुषमा आदि को शामिल किया गया.

इस के बाद थानाप्रभारी और चौकी इंचार्ज ने अपने मुखबिरों को भी सतर्क कर दिया और उन ठगों की तलाश में जुट गए. उन्होंने मुकेश के फोन नंबर को भी सर्विलांस पर लगा दिया. उन्हें तलाश करतेकरते 7 दिन बीत चुके थे. मगर अभी तक उन के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली थी.

17 मई, 2018 को एसआई रंजीत सिंह तोमर को एक मुखबिर ने उन ठगों के बारे में एक महत्त्वपूर्ण जानकारी दी. एसआई रंजीत तोमर ने इस सूचना से थानाप्रभारी और सीओ स्वप्न किशोर सिंह को भी अवगत करा दिया.

मुखबिर ने बताया था कि गैंग के सदस्य हरिद्वार के टिबड़ी इलाके में हैं. यह गिरोह कल रात ही राजस्थान के जयपुर शहर के रहने वाले संजय को शिकार बना कर लौटा है. रीता ने संजय से 2 दिन पहले ही शादी की थी. वह यहां से कहीं जाने की तैयारी में है.

पुलिस क्षेत्राधिकारी स्वप्न सिंह ने पुलिस टीम को तुरंत टिबड़ी जाने के निर्देश दिए. पुलिस टीम ने मुखबिर द्वारा बताई गई जगह पर दबिश दी तो वहां पर मुकेश उर्फ यादराम, उस के बेटे अरुण, भोपाल और रीता उर्फ पूजा को गिरफ्तार कर लिया. थाने ला कर जब उन से पूछताछ की गई तो शादी कर के लूट का धंधा चलाने वाले इस गैंग की कहानी सामने आई, जो इस प्रकार निकली—

रीता उर्फ पूजा मूलरूप से जिला बिजनौर के कस्बा अफजलगढ़ की रहने वाली थी. उस का भाई राजू और पिता कृपाल सिंह गांव में खेतीबाड़ी करते थे. सन 2002 में पिता ने उस की शादी झाड़पुर निवासी पवन से कर दी. बाद में रीता 2 बेटों और एक बेटी की मां बनी. रीता के गलत चालचलन की वजह से सन 2013 में पवन ने उसे छोड़ दिया और बच्चों सहित उस से अलग रहने लगा था.

जिस्मफरोशी से आई ठगी के धंधे में

रीता की बदचलनी की वजह से पति से संबंध टूट जाने की बात उस के मायके वालों को भी पता चल गई थी इसलिए उस के मायके वालों ने भी उस से नाता तोड़ लिया था. रीता के भाई राजू का एक दोस्त था मुकेश जो कि बिजनौर के नरैना गांव का रहने वाला था. पति द्वारा छोड़े जाने के बाद रीता ने मुकेश के साथ अपनी नजदीकियां बढ़ा ली थीं.

मुकेश उस वक्त ज्वालापुर के कड़च्छ मोहल्ले में रहता था. साथसाथ रहने पर दोनों के नाजायज संबंध बन गए. मुकेश रीता के जरिए कमाई करना चाहता था, लिहाजा उस ने उसे जिस्मफरोशी के धंधे में धकेल दिया. वह उसे धंधा करने के लिए रात को होटलों में भेजता. 2 सालों तक उन का यह धंधा चलता रहा.

सन 2015 में मुकेश ने सोचा कि होटलों में जिस्मफरोशी के धंधे में पुलिस के छापे आदि का डर रहता है. पकडे़ जाने पर जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है. इसलिए मुकेश ने रीता से सलाह कर के यह धंधा बदलने का विचार किया.

उस ने रीता से कहा कि वह उसे गरीब घर की लड़की बता कर उस की शादी ऐसे अमीर परिवार के युवकों से करा दिया करेगा, जिन की शादी नहीं हो रही हो. शादी के बाद वह उस परिवार के जेवर व नकदी ले कर रफूचक्कर हो जाया करेगी.

रीता को मुकेश की यह सलाह पसंद आ गई और उन्होंने अपने इस नए धंधे को अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया.

इस के बाद उन दोनों ने कुछ ऐसे लोगों को ढूंढना शुरू कर दिया जो किसी कारण से अपनी शादी बिरादरी में या अन्य कहीं नहीं कर पा रहे थे. शादी के समय मुकेश अधेड़ व्यक्ति भोपाल को रीता के बाप के रूप में पेश करता था. उसे फिल्मी स्टाइल में रीता के बाप का अभिनय करते हुए कन्यादान जैसी रस्में पूरी करनी होती थीं. इस काम के एवज में मुकेश उसे 2 हजार रुपए प्रति शादी देता था.

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मुकेश पहले तो किसी अमीर व्यक्ति से रीता की शादी करवाता, उस के बाद रीता अपने कथित पति के घर के जेवर व नकदी ले कर एकदो दिन में ही वहां से फुर्र हो जाती थी.

मुकेश व रीता के जालसाजी के इस धंधे में अकसर मुकेश का बेटा अरुण भी शामिल रहता था. मुकेश उसे भी ठगी की रकम में से हिस्सा देता था. शादी के नाम पर ठगी करने की लगभग 10 घटनाओं को वह अंजाम दे चुके थे. इस गिरोह में मुकेश का बेटा अरुण रीता का भाई बनता था. जबकि ज्वालापुर की लाल मंदिर कालोनी का रहने वाला भोपाल लड़की का फरजी पिता बनता था.

रीता ने बताया कि अब तक वह गरीब लड़की बन कर उत्तर प्रदेश, राजस्थान व हरियाणा के 11 लोगों से शादी का नाटक कर के ठग चुकी है. वह यह धंधा पिछले 3 सालों से कर रही थी. ठगी के कुछ शिकार लोग लोकलाज के चलते पुलिस तक नहीं गए थे.

जिन लोगों ने पुलिस से शिकायत की थी तो पुलिस उन लोगों के पास तक नहीं पहुंच सकी. क्योंकि पुलिस को उन लोगों का पता मालूम नहीं था.

रीता ने बताया कि सन 2017 में उस ने हरियाणा के जिला करनाल निवासी 2 युवकों को ठगा था. उन के यहां से भी वह लाखों रुपए की ज्वैलरी और नकदी ले कर रफूचक्कर हो गई थी. पिछले साल उस ने शिवदासपुर गांव तेलीवाला के युवक एस. कुमार को ठग कर उस के लगभग 50 हजार रुपए और जेवरों पर हाथ साफ किया था.

गत 24 अप्रैल, 2017 को मुकेश ने उस की शादी मुजफ्फरनगर जिले के गांव गुर्जरहेड़ी निवासी संदीप शर्मा से कराई थी. शादी के 2 दिन बाद ही वह रात को 3 बजे संदीप शर्मा के परिवार का मालपानी समेट खिसक गई थी.

मुकेश था आदतन अपराधी

कुछ महीने पहले ही मुकेश ने उस की शादी बिजनौर के सोनू के साथ कराई थी. उस शादी में भी वह 2 दिन बाद घर के जेवर व नकदी ले कर फरार हो गई थी. सोनू ने इस की शिकायत पुलिस से की तो एसआई मीनाक्षी गुप्ता को इस की जांच सौंपी गई. इस प्रकरण में मुकेश ने सोनू के घर वालों को वधू का नाम नेहा बताया था.

पूछताछ में मुकेश ने भी बताया कि पहले उस की रीता के भाई राजू से गहरी दोस्ती थी. करीब 5 साल पहले जब रीता की बदचलनी की वजह से उस के भाई व बाप ने उस से नाता तोड़ लिया था तो वह उस के साथ रहने लगी थी. पहले वह दोनों कोटद्वार के कौडि़यों कैंप मोहल्ले में रहा करते थे. इस के बाद वह ज्वालापुर के मोहल्ला कड़च्छ में रहने लगे.

ठगी की रकम से डबल हिस्सा लेने के लिए मुकेश ने अपने बेटे अरुण को भी इस गैंग में शामिल कर लिया था. पुलिस को मुकेश के बारे में पता चला कि वह आपराधिक प्रवृत्ति का इंसान है. कोटद्वार के लकड़ी पड़ाव में सन 2011 में हुए डबल मर्डर में भी वह शामिल था.

सन 2013 में एडीजे कोर्ट कोटद्वार से उसे आजीवन कारावास की सजा हो चुकी थी. आरोपी की अपील माननीय उच्च न्यायालय उत्तराखंड, नैनीताल में विचाराधीन है. वर्तमान में मुकेश जमानत पर था.

इस गिरोह के गिरफ्तार होने की सूचना पर एसएसपी कृष्ण कुमार और एसपी (देहात) मणिकांत मिश्रा भी थाने पहुंच गए. एसएसपी ने प्रैस कौन्फ्रैंस आयोजित कर मीडिया को इस शातिर गैंग के बारे में जानकारी दी.

पुलिस ने अभियुक्तों के पास से 35 हजार रुपए नकद, चांदी के गहने, मंगलसूत्र, बिछुए आदि बरामद किए. पूछताछ के बाद चारों अभियुक्तों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया.

केस की जांच एसआई रंजीत तोमर कर रहे थे. एसआई तोमर आरोपियों के शिकार सभी लोगों से संपर्क कर आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य इकट्ठा कर रहे थे, जिस से उन्हें कोर्ट से उचित सजा मिल सके.

– पुलिस सूत्रों पर आधारित.

फिट रहने के लिए खाएं हैल्दी

हर महिला अपने परिवार को खुश देखना चाहती है और इस के लिए वह अपनी हर खुशी को कुरबान करने के लिए तैयार भी रहती है. एक महिला की प्राथमिकता होती है कि वह खाने में जो भी सर्व करे पौष्टिकता से भरपूर हो. इसी कड़ी में दिल्ली प्रैस द्वारा आईटीसी आशीर्वाद सर्वगुण संपन्न कार्यक्रम का आयोजन 29 मई, 2018 को दिल्ली के सुभाषनगर के सैक्टर 17 में किया गया. इस कार्यक्रम को उपस्थित लोगों ने काफी सराहा.

कार्यक्रम की शुरुआत ऐंकर अंकिता मंडल ने हैल्दी व फिट रहने के गुणों पर प्रकाश डालते हुए आशीर्वाद आटे की खासीयत बताते हुए की. उन्होंने अपने कई ऐक्टिविटीज द्वारा महिलाओं में जोश भरा है.

29 मई को हुए इवैंट में उन्होंने रोटी मेकिंग की ऐक्टिविटी करवाई. यह ऐक्टिविटी सुनने में जितनी मजेदार है उतनी ही करने में भी. इस में रैंडमली 3 महिलाओं को बुलाया गया जिस में उन्हें आशीर्वाद सलैक्ट आटे से रोटी बनानी थी. प्रतियोगिता में सिर्फ रोटी बनाना ही उद्देश्य नहीं था बल्कि दिखने में बेहतर होने के साथसाथ टैस्टी व सौफ्ट भी होनी थी. वैसे तो तीनों ही प्रतिभागियों- दीपाली, प्रियंका सेठी और अंजू ने इस में बैस्ट परफौर्म किया लेकिन विजेता वही रोटी रही जो आशीर्वाद सलैक्ट आटे से बनी थी.

इस के बाद शैफ सैशन शुरू हुआ, जिस में शैफ निधि चौहान चड्ढा ने आशीर्वाद शुगर रिलीज कंट्रोल आटे से आटा ग्रेनोला डस्ट बना कर शुगर के मरीजों के लिए बेहतर डिश प्रस्तुत की.

शैफ की हैल्दी डिश की तारीफ करते हुए न्यूट्रिशनिस्ट आशु आर्या ने बताया कि आज हमारा खानपान इतना खराब हो गया है जिस की वजह से हम जल्दीजल्दी बीमार हो जाते हैं और डायबिटीज और ब्लडप्रैशर तो कौमन प्रौब्लम बन गई है. ऐसे में आशीर्वाद मल्टीग्रेन आटा हमारे शरीर की कमियों को दूर कर हमें स्वस्थ रखने का काम करता है. सिर्फ यही नहीं बल्कि आप खुद को फिट रखने के लिए थोड़ीथोड़ी देर में खाएं व पानी भरपूर पीते रहें. फिर देखिए आप की खुद की बौडी में बदलाव.

इस के बाद पौपुलर दीवा प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिस में दोनों प्रतिभागियों को आशीर्वाद पौपुलर आटा के साथ कुछ इनग्रीडिऐंट्स दिए गए थे, जिन से उन्हें 15 मिनट में डिश बनानी थी. इस में कमिका आहूजा ने हैल्दी काठी रोल बना कर प्रथम पुरस्कार जीता. रितू मल्होत्रा ने इटैलियन स्पैगैथी बना कर द्वितीय पुरस्कार जीता.

इस प्रतियोगिता के बाद रैसिपी कौंटैस्ट के विनर्स की घोषणा की गई, जिस में जय भारती ने आटा शुगरफ्री बरफी बना कर प्रथम पुरस्कार जीता, वहीं पूजा राघव ने आटा चाप बना कर द्वितीय पुरस्कार और हेमलता ने आटा कबाब बना कर तृतीय पुरस्कार जीता. इवैंट को सभी ने खूब ऐंजौय किया.

अंत में सभी को गुड्डी बैग्स दिए गए. आगामी इवैंट्स दिल्ली व नोएडा में आयोजित किए जाएंगे.

स्लिमट्रिम दिखना चाहती हैं तो ये टिप्स आप के लिए ही हैं

अगर आप वजन कम करने की बारबार कोशिश करती हैं पर असफल रहती हैं तो चिंता न करें, अपनी कोशिशों में थोड़ा सा बदलाव कर के देखिए, आप को मनचाहा परिणाम दिखेगा. स्लिम और फिट रहना चाहती हैं तो इन बातों पर ध्यान अवश्य दें:

– ईमानदारी से यह बात स्वीकारें कि वजन ज्यादा होने के 2 कारण होते हैं- पहला हम जंक फूड खाते रहते हैं और दूसरा हम वर्कआउट नहीं करते. इसलिए कैलोरीज बाहर निकलने के बजाय शरीर में इकट्ठी होती चली जाती है. इस बात पर विश्वास करें कि हम टैक्नोलौजी के गुलाम हो गए हैं. ज्यादा ऐक्टिव होने का प्रण लें. घर के काम करती रहें, कम से कम दिन में 10 हजार कदम चलने से शुरुआत करें. कम दूरी के लिए स्कूटी, बाइक प्रयोग न करें.

– फिटनैस का कोई शौर्टकट नहीं है. जिम जाएं, सीखें और वेट  ट्रेनिंग की प्रैक्टिस करें. पर्सनल ट्रेनर लेने से हिचकें नहीं, क्योंकि वही आप की सामर्थ्य को देख कर आप से जिम फ्लोर पर सही ऐक्सरसाइज करवा पाएगा. वह आप को और अच्छी तरह ट्रेन करता हुआ उत्साहित करता रहेगा. आप जब एक अच्छे कोच के साथ काम करती हैं तो आप की डाइट और वर्कआउट पर भी वह उचित ध्यान देता है. आप बहुत कुछ सीखती हैं.

– अपने आहार में प्रोटीन ज्यादा लें. 60% भारतीयों में प्रोटीन की कमी रहती है. प्रोटीन लेने से ज्यादा देर तक आप को पेट भरा हुआ लगता है. आप ज्यादा अच्छी ऐक्सरसाइज कर पाएंगी, जिस से आप अपने उद्देश्य को अच्छी तरह पूरा कर पाएंगी.

– बिस्तर पर जाने के बाद अपना दिमाग फोन में न उलझाएं. सोने के समय हाथ में फोन लेने से आप का सोने का समय प्रभावित हो सकता है और आप को पता भी नहीं चलेगा कि आप की नींद डिस्टर्ब करने में फोन का बड़ा हाथ है. एक बार आप सोने के लिए लेट गईं, तो अपना फोन एक तरफ रख दें और केवल सोने पर अपना ध्यान केंद्रित करें.

– इंस्टाग्राम फिटनैस एक झूठ होता है. इस में सच बहुत कम होता है. अच्छे स्वास्थ्य का ध्यान रखें. आप अपनी तरफ से कोशिश करें, किसी फिटनैस मौडल की नकल न करें. उन में से काफी स्टेराइड लेती हैं और आप को इस से दूर ही रहना है. शांत रहें और वास्तविक जीवन में जाएं. ये मौडल सालों से फिटनैस की ट्रेनिंग ले रही होती हैं और अधिकांश मौडल सालभर स्टेराइड लेती हैं. इस बात को समझें कि उन की फिगर ही उन की पहचान है. 2 महीने में किसी मौडल जैसी फिगर पाने की आशा न करें. वैसी फिगर पाने में सालों लगते हैं. सोशल मीडिया पर दिखने वाले मौडल्स की नकल में अपनी ऐनर्जी न लगाएं.

– आप वजन कम कर के फिटनैस पर ध्यान देना चाहती हैं, तो उन लोगों के आसपास रहें, जो फिटनैस को गंभीरतापूर्वक लेते हैं. अनुभवी और ट्रेंड दोस्तों से इस पर बात करती रहें. विश्वास कीजिए, आप को फायदा होगा. फिटनैस के शौकीन अपने दोस्त को अपना वजन कम करने का संकल्प बताएं. उस से कहें कि वह आप की मदद करे. फिर देखिए फिटनैस का शौकीन दोस्त आप की कैसे मदद करेगा. ऐंजौय करतेकरते स्लिम और फिट होते जाने का मजा लें.

– एक समय तय करें. व्यावहारिक रूप से सोच कर अव्यावहारिक डैडलाइन न सैट करें. जैसे यह न सोचें कि 2 हफ्ते में 15 किलोग्राम वजन कम करना है. यह निरर्थक है. इस से आप की निराशा ही बढ़ेगी और फिटनैस का सारा उत्साह खत्म हो जोएगा, क्योंकि यह अव्यावहारिक है.

आप का कैरियर भी संवार सकता है आप का फिगर

मौडलिंग और ऐक्टिंग में ही नहीं आज के दौर में और भी बहुत से ऐसे कैरियर औप्शन हैं जहां लड़कियां अपनी बौडी के जरीए कमाई कर रही हैं. सैल्स गर्ल, औरकैस्ट्रा डांसर, वेटर, लेडीज बाउंसर, रिसैप्शनिस्ट, मसाज गर्ल, टैलीकौलिंग, डांस आर्टिस्ट, लेडी बौडी बिल्डर जैसे बहुत सारे रास्ते हैं. इन में कुछ पेशेवर हैं तो कुछ गैर पेशेवर.

गैरपेशेवर वह काम है जो समाज में खूब होता है पर एक वर्ग इस की आलोचना भी करता है. अगर यह काम गैरकानूनी तरह से न किए जाए तो कानून भी इसे गलत नहीं मानता है. इन कैरियर्स में लड़कियां अपने शरीर का प्रयोग पैसा कमाने के लिए करती है. हर लड़की अपने क्षेत्र में ऐक्सपर्ट होती है. उस के लिए उस की बौडी ही उस का टेलैंट होती है.

शरीर बना रहा कैरियर

लड़कियों ने शरीर को अपने कैरियर का रास्ता बना लिया है. आज के दौर में प्रचार के लिए सब से अधिक महिलाओं को जरीया बनाया जा रहा है. ऐसे में महिलाओं के लिए कैरियर के औप्शन खुल गए हैं. स्टेज शो में भले ही महिला को गाना न आता हो वह केवल डांस कर के ही कमाई करने लगी है.

शादियों में औरकैस्ट्रा डांसर से ले कर खाना परोसने वाली वेटर तक के काम में लड़की को प्राथमिकता दी जा रही है. अब शादी में दुल्हन की सहेली के रूप में उसे साथ ले कर पंडाल में ऐंट्री करने के लिए लड़कियों का होना जरूरी होता है. सहेली के गैटअप में लड़कियां वैडिंग इवेंट मैनेजर ले कर आते हैं.

इवेंट प्लानर शिप्रा आशीष कहती हैं कि आज हर इवेंट में ऐंट्री सब से अहम होने लगी है. यही वह समय होता है जब सब से स्पैशल व्यक्ति पहली बार अंदर आ रहा होता है. इस पल को खास बनाने की चाहत सब को होती है. एक छोटे से बच्चे का पहला जन्मदिन था. उस की और मां की ऐंट्री एकसाथ होनी थी. मां ने जो गाउन पहना था उस के साथ बच्चे को लेना मुश्किल था. बेबी वाकर में बच्चे को ले कर चलने में वह स्पैशल फील नहीं आ रहा था. ऐसे में एक खूबसूरत लड़की को बुलाया गया जो बच्चे को गोद में ले कर मां के साथ चलते हुए समारोह में आती है. इस तरह के कई औफर लड़कियों के लिए कैरियर बन रहे हैं.

म्यूजिक और डांस बड़ा जरीया

म्यूजिक और डांस बड़ा जरीया है कैरियर का जिस में लड़कियां अपने शरीर का सब से अधिक प्रयोग कर रही हैं. आज के दौर में गायक कितना भी सुरीला क्यों न गाता हो, स्टेज पर या फिर डांस वीडियो पर उस के साथ थिरकने के लिए लड़कियों का होना जरूरी होता है. पंजाबी, हरियाणवी, भोजपुरी गानों में गाने वाले से अधिक थिरकने वाले की डिमांड बढ़ गई है.

हरियाणा की सपना चौधरी अपने एक स्टेज शो का क्व8 लाख लेती हैं. इसी तरह से भोजपुरी की गायिका और स्टेज पर डांस करने वाली निशा की भी खूब डिमांड है. स्टेज और डांस के क्षेत्र में कम बजट वाले लोग भी लड़कियों को बुलाते हैं.

भोजपुरी म्यूजिक इंडस्ट्री में सब से अधिक डांसर की डिमांड बढ़ी है. इस में काम करने के लिए किसी तरह की ज्यादा टे्रनिंग की जरूरत नहीं होती है. केवल स्टेज पर अच्छे से थिरकना आता हो. अब यहां यह बात कोई मुद्दा नहीं रह गई कि डांसर ने क्या पहना हुआ है.

जो फिट वह हिट

मौडलिंग के सहारे अपना कैरियर बना रही पूनम कहती हैं, ‘‘मैं ऐक्टिंग के लिए मुंबई आई थी. वहां काम नहीं मिला. अपना खर्च चलाने के लिए मैं ने मौडलिंग करनी शुरू कर दी. मेरी फिगर अच्छी थी तो ऐसे औफर आने लगे.

जब एक वीडियो में केवल आंख मार कर प्रिया प्रकाश लाखों दिलों तक पहुंच सकती है तो साफ है कि लड़कियां अपने शरीर और अदाओं के सहारे कैसे कैरियर बना सकती हैं. पैसा कमाने के लिए आज शरीर सब से बड़ी पूंजी बन गई है. असल में जब शरीर का नाम लिया जाता है तो केवल गलत धारणा ही मन में आती है. शरीर का प्रयोग करना मतलब शरीर बेचना नहीं होता है.

अगर लड़की की बौडी अच्छी है तो वह किसी भी क्षेत्र में कैरियर बना सकती है. कई लड़कियों को अब महिला सैलिब्रिटी के साथ सुरक्षा के लिए बौडी गार्ड के रूप में भी रखा जाने लगा है. यह भी एक तरह का रोजगार बन गया है. अब ऐसे सुरक्षा चक्र की मांग लगातार बढ़ने लगी है.

बौडी बिल्डिंग के क्षेत्र में काम कर रही अर्चना तिवारी कहती हैं, ‘‘आज महिलाएं अपने शरीर को ले कर जागरूक हैं, क्योंकि यही उन की सब से बड़ी पूंजी है. ऐसे में वे फिटनैस के लिए पूरी मेहनत करती हैं. जिम जाने की ही बात नहीं, लड़कियां बौडी बिल्डिंग के क्षेत्र में भी आ रही हैं जहां बौडी को शो करना ही पड़ता है.’’

पीछे छोड़ रहीं उम्र का असर फिटनैस का ही नतीजा है कि औरतें उम्र के असर को पीछे छोड़ रही हैं. इस की एक प्रमुख वजह भी है. बौडी से जुडे़ कैरियर में जब तक बौडी सुंदर और फिट होती है तभी तक डिमांड में होती है. ऐसे में हर कोई उम्र को पीछे छोड़ने की चाहत में रहती है ताकि कैरियर लंबा चल सके. तमाम गृहिणियां 40 की उम्र के पार भी इतनी सुंदर दिखती हैं कि उन की उम्र का पता ही नहीं चल पाता है.

पहले फिल्म अभिनेत्रियों को जल्द ही रिटायर होना पड़ता था. अब वे भी खुद को फिट रख कर 50 के पार तक अपना जलवा बिखेरती हैं. माधुरी दीक्षित, जूही चावला, काजोल जैसी प्रमुख महिलाओं को देख कर सीख ली जाती है. आज के समय में सब से अधिक सौंदर्य प्रतियोगिताएं मिसेज को ले कर हो रही हैं. केवल बड़े शहरों में ही नहीं छोटे शहरों में भी यह चलन बढ़ रहा है.

सोशल मीडिया के प्रभावी होने के बाद अवसर और भी बढ़ गए हैं. वीडियो से ले कर छोटेबड़े विज्ञापनों और डांस शोज में ऐसी सुंदर महिलाओं की मांग बढ़ रही है. एकदूसरे को देख कर प्रेरणा भी मिलती है. इस के साथ ही साथ समाज का नजरिया भी बदल रहा है. आज आगे बढ़ रही औरतों पर पाबंदियां कम हो रही हैं. उन्हें घरपरिवार से सहयोग भी मिलने लगा है.

अब अपने शरीर का उपयोग कर के पैसा कमाने के अवसर बढ़ रहे हैं. यह जरूर है कि एक बड़ा वर्ग अभी भी पाबंदी के दायरे में है. जहां बंदिशें टूटी हैं वहां औरतों के पास अपने को साबित करने के मौके मिले हैं. औरतों ने अपने को साबित भी किया है. खुद को साबित करने की होड़ में वे आगे निकल रही हैं. जरूरत इस बात की है कि वे इस काम को पूरे आत्मविश्वास के साथ करें. आलोचनाओं की परवाह न करें. तभी अपने कैरियर का मजबूत निर्माण कर सकती हैं.

पाइये फोन हैंग होने की समस्या से छुटकारा

आप भी अगर अपने फोन के बार बार हैंग होने से परेशान हैं तो जरूर कुछ गलतियां कर रहे हैं. इसलिए फोन हैंग होने पर बस इन पांच बातों का ध्यान रखें और देखें कि किस तरह से आपका फोन आपको बिना तंग किये मक्खन की तरह चलता है.

सबसे पहले आप अपने फोन से उन सारी चीजों को डिलीट कर दें जिनकी जरूरत नहीं पड़ती. इसके अलावा फोन की सेटिंग्स में जा कर स्टोरेज पर क्लिक करें, नीचे कैश डाटा (Cache data) का विकल्प आता है, उसे भी साफ कर दें. समय समय पर ये करते रहना चाहिए, ताकि फोन में अनावश्यक चीजे स्टोर ना हो.

अगर आपके फोन में कई सारी ऐपलीकेशन हैं तो बेहतर होगा कि उनमें से कुछ को एक्सटर्नल मेमोरी में ट्रांस्फर कर दें. इससे इंटर्नल मेमोरी में जगह बनती रहेगी. चाहें तो ऐप्लीकेशन इंस्टौल करते वक्त सीधे एक्सटर्नल मेमोरी मे ही डालें. सेटिंग्स में जाकर स्टोरेज पर जाएं, वहां एसडी कार्ड का विकल्प चुनें. यह सुविधा उन्हीं के लिए है जिनके फोन में दोनों मेमोरी होती हैं.

इसके अलावा हमेशा फोन में गाने, वीडियो, तस्वीरें और बाकी डाटा एक्सटर्नल मेमोरी में ही सेव करें. अगर ये इंटर्नल में हैं भी तो इन्हें एक्सटर्नल में डाल दें. अगर आप एक्सटर्नल मेमोरी को डीफौल्ट मेमोरी चुन लेंगे तो वे खुद ब खुद उसी में जाएंगी और आपको बार बार मेहनत नहीं करनी पड़ेगी.

फैक्ट्री रीसेट का विकल्प तभी इस्तेमाल करें जब सारे तरीके अपनाकर थक चुके हों. ये वेबसाइट, ऐप्स और ब्राउजर से आने वाले उस सारे डाटा को हटा देगा जिसकी जरूरत नहीं पड़ती. चूंकि ये सारी ही ऐप्स, फोन नंबर, फोटो, गाने हटा देता है इसलिए इसे आम तौर पर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. लेकिन अगर आप ऐसा करने वाले हैं तो बेहतर है कि पहले सारी चीजें कहीं और सेव कर लें. चाहें तो एसडी कार्ड में ट्रांस्फर कर लें.

फोन के साथ साथ अपना सारा जरूरी डाटा ईमेल, गूगल ड्राइव या क्लाउड पर सेव करते रहें. ये जिंदगी भर के लिए सुरक्षित हो जाएगा और अगर फोन खराब भी हो जाए या कुछ डिलीट हो जाए तो चिंता की बात नहीं रहेगी. ईमेल में सेव करने के बाद उस डाटा को फोन से हटा दें ताकि मेमोरी में जगह बन जाए.

फोन चार्ज करते समय ध्यान दें कि उसे रातभर लगाकर ना सोए, उसकी बैटरी 15% पर ही चार्जिंग में लगा दें और हफ्ते में एक बार फोन को स्वीच्ड आफ करके ही चार्ज करें.

इन सब उपाय को अपनाने के बाद आप काफी हद तक फोन हैंग होने की समस्या से छुटकारा पा सकेंगे.

सेंसर्स बनाते हैं फोन को स्मार्ट, जानिए इसके बारे में

स्मार्टफोन्स में आने वाले सेंसर्स हमारे फोन, उसमें मौजूदा डाटा और वीडियो ऐप्स को और भी अधिक स्मार्ट और आधुनिक बनाते हैं. आप सेंसर को सीधा सीधा ऐसे समझ सकते हैं कि इलेक्ट्रानिक प्रोडक्ट में यदि कोई काम अपने आप हो जाता है, तो उसमें सेंसर का ही हाथ होता है. कुछ महत्वपूर्ण सेंसर हैं, जो लगभग सभी तरह के स्मार्टफोन में इस्तेमाल होते हैं-

स्मार्टफोन में इस्तेमाल होने वाले सेंसर्स

प्रोक्सिमिटी सेंसर: जब कोई वस्तु स्मार्टफोन के समीप होती है, तो यह सेंसर उसकी मौजूदगी का पता लगा लेता है. यह सेंसर मुख्य रूप से स्मार्टफोन के ऊपरी हिस्से में फ्रंट कैमरे के पास लगा होता है. आमतौर पर जब आप कौल आने या कौल करने के लिए स्मार्टफोन को कान के पास ले जाते हैं, तो यह सेंसर स्मार्टफोन के डिस्प्ले की लाइट को स्वत: औफ कर देता है.

एंबिएंट लाइट सेंसर: यह सेंसर स्मार्टफोन के डिस्प्ले की ब्राइटनेस को रोशनी के हिसाब से एडजस्ट तो करता ही है साथ ही डिस्प्ले की ब्राइटनेस को स्वत: कम या ज्यादा करने में भी मदद करता है.

एक्सीलरोमीटर और जाइरोस्कोप सेंसर: यह सेंसर मुख्य रूप से स्मार्टफोन किस दिशा में घूमा हुआ है, उसके बारे में बताता है. जब भी हम कोई वीडियो स्मार्टफोन में देख रहे होते हैं, तो उसे पोर्ट्रेट मोड की जगह लैंडस्केप मोड में में देखने के लिए अपना फोन घुमाते हैं तो एक्सीलरोमीटर और जाइरोस्कोप सेंसर की मदद से वीडियो फुल स्क्रीन पर आ जाता है. ध्यान रहे, यह सेंसर तभी काम करता है, जब आपने फोन में औटो-रोटेशन इनेबल किया हो. आपको बता दें कि स्मार्टफोन में रोटेशन के लिए दो सेंसर्स की जरूरत होती है, जिसमें एक्सीलरोमीटर इसके रेखीय त्वरण को और जाइरोस्कोप इसके घूर्णी कोण की गति को निंयत्रित करता है.

बायोमैट्रिक सेंसर: इसका इस्तेमाल आजकल लगभग सभी तरह के मिड रेंज और हाई रेंज के स्मार्टफोन्स में किया जा रहा है. इसकी मदद से स्मार्टफोन की सुरक्षा के लिए दिया गया फिंगरप्रिंट सेंसर काम करता है. यह सेंसर स्मार्टफोन में दर्ज किए गए अंगूठे या उंगली को स्कैन करके डाटा इकट्ठा कर लेता है. दूसरी बार, उसी अंगूठे या उंगली को इस सेंसर के पास रखा जाता है, तो वह इसकी जानकारी को इकट्ठा की गई जानकारी में मिलाकर सही अंगूठे या उंगली की पहचान कर लेता है. बायोमैट्रिक सेंसर में फिंगरप्रिंट के अलावा रेटिना स्कैनर भी आता है, जो फ्रंट कैमरे के साथ जुड़ा होता है. इसकी मदद से स्मार्टफोन के लौक को रेटिना के स्कैन की मदद से भी लौक-अनलौक किया जा सकता है.

डिजिटल कम्पास: इसमें मैग्नेटोमीटर सेंसर का इस्तेमाल किया जाता है, जो जमीन के चुंबकीय क्षेत्र के अनुसार काम करता है. इस सेंसर की मदद से स्मार्टफोन में इंस्टौल डिजिटल कम्पास सही दिशा के बारे में जानकारी देता है.

जीपीएस सेंसर: यह सेंसर आमतौर पर सभी स्मार्टफोन में इस्तेमाल किया जाता है. जीपीएस का मतलब होता है, ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम यानी भूमंडलीय स्थिति निर्धारण प्रणाली. इस सेंसर की मदद से डिवाइस की लोकेशन पता करने में मदद मिलती है. यह सेंसर कई तरह के सैटेलाइट के साथ जुड़कर काम करता है. इस सेंसर के लिए स्मार्टफोन में इंटरनेट कनेक्टिविटी होना जरूरी है. यानी अगर आपके स्मार्टफोन में इंटरनेट डाटा बंद होता है, तो यह सेंसर काम नहीं करेगा.

बैरोमीटर: यह सेंसर मूलरूप से स्मार्टफोन में इनबिल्ट जीपीएस चिप की मदद से काम करता है. इसकी मदद से ऊंचाई पर त्वरित गति से स्थान को लौक करके डाटा इकट्ठा किया जा सकता है.

वर्चुअल रियलिटी सेंसर: वर्चुअल रियलिटी सेंसर मूलरूप से स्मार्टफोन के कैमरे के साथ मिलकर रियलिटी ऐप्स के साथ काम करता है. यह सेंसर स्मार्टफोन में कैमरा ऐप्स की मदद से एनिमेटेड तस्वीर भी निकाल सकता है. इसी के साथ यह सेंसर कई तरह के मोबाइल गेम्स खेलने में भी मददगार है.

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