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प्रेमिका से शादी के लिए मां बाप से खूनी दुश्मनी

28 अप्रैल, 2018 को दिल्ली के कंट्रोल रूम को सूचना मिली कि जाकिर नगर की गली नंबर 7 में रहने वाले शमीम अहमद का दरवाजा अंदर से बंद है. काफी आवाजें देने के बावजूद भी उन के कमरे से कोई प्रतिक्रिया नहीं हो रही.

चूंकि यह मामला दक्षिणपूर्वी दिल्ली के थाना जामिया नगर के अंतर्गत आता है, इसलिए पुलिस कंट्रोल रूम से वायरलेस द्वारा यह सूचना थाना जामिया नगर को दे दी गई. सूचना मिलते ही थानाप्रभारी संजीव कुमार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंच गए. वहां पर शमीम अहमद के बेटे अब्दुल रहमान के अलावा आसपास के लोग भी जमा थे.

अब्दुल रहमान ने पुलिस को बताया कि कल रात खाना खाने के बाद उस के अम्मीअब्बू अपने कमरे में सोने के लिए चले गए थे, जबकि वह दूसरे कमरे में सो गया था. रोजाना उस के अम्मीअब्बू ही सुबह पहले उठते थे. वही उसे जगाते भी थे, लेकिन आज वह अभी तक नहीं उठे. मैं ने काफी देर दरवाजा खटखटाया इस के बावजूद भी अंदर से कोई आवाज नहीं आ रही. वहां मौजूद पड़ोसियों ने भी अब्दुल रहमान की हां में हां मिलाई.

अब्दुल रहमान की बात सुनने के बाद थानाप्रभारी संजीव कुमार ने भी दरवाजा खटखटाया लेकिन वास्तव में अंदर कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो उन्हें भी शक होने लगा. तब उन्होंने लोगों की मौजूदगी में दरवाजा तोड़ दिया. दरवाजा तोड़ने के बाद जैसे ही पुलिस अंदर घुसी तो पहले कमरे में ही फर्श पर शमीम अहमद और उन की पत्नी तसलीम बानो की लाशें पड़ी थीं.

रहस्यमय मौतें

अम्मी और अब्बू की लाशें देख कर रहमान दहाडें़े मार कर रोने लगा. पड़ोसी भी हतप्रभ थे कि दोनों की मौत कैसे हो गई. उन के शरीर पर किसी चोट आदि का निशान भी नहीं था. दोनों की मौत कैसे हुई उस समय इस का पता लगाना संभव नहीं था. थानाप्रभारी संजीव कुमार ने इस मामले की जानकारी डीसीपी चिन्यम बिश्वाल को दे दी. साथ ही क्राइम इन्वैस्टीगेशन टीम को भी मौके पर बुलवा लिया.

थानाप्रभारी ने मौकामुआयना किया तो पता चला कि उस दरवाजे पर औटोमैटिक लौक लगा हुआ था, जो अंदर और बाहर दोनों तरफ से बंद हो जाता था. उन के कमरे में सवा 5 लाख रुपए की नकदी के अलावा ज्वैलरी भी मिली. इस से वहां पर लूट की संभवना नजर नहीं आई. कमरे में 2 लोग सो रहे थे, दोनों की ही संदिग्ध मौत हो गई थी.

ऐसा भी नहीं था कि उन की मौत कमरे में मौजूद किसी जहरीली गैस की वजह से हुई हो क्योंकि जब कमरे का दरवाजा तोड़ा गया था तो उस समय कमरे में किसी जहरीली गैस आदि की स्मैल भी नहीं आ रही थी. यानी उस समय कमरे में पर्याप्त मात्रा में औक्सीजन थी. लग रहा था कि उन दोनों के खाने में कोई जहरीली पदार्थ मिला दिया गया होगा.

बहरहाल इन दोनों की मौत कैसे हुई यह पोस्टमार्टम के बाद ही पता लग सकता था. लिहाजा थानाप्रभारी ने जरूरी काररवाई कर के दोनों लाशों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. डीसीपी चिन्मय बिश्बाल ने भी घटनास्थल का दौरा किया. अब्दुल रहमान शमीम अहमद का इकलौता बेटा था. वही उन के साथ रहता था, इसलिए पुलिस ने अब्दुल रहमान से कहा कि जब तक इस केस की जांच पूरी न हो जाए वह दिल्ली छोड़ कर कहीं न जाए.

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2-3 दिन बाद पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिल गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया था कि उन की मौत दम घुटने की वजह से हुई थी. यानी किसी ने उन का दम घोट कर हत्या की थी. पुलिस इस बात का पता लगाने में जुट गई कि उन का कातिल कौन है.

उधर मृतकों का बेटा अब्दुल रहमान थाने और डीसीपी औफिस के चक्कर काट कर अपने मातापिता के हत्यारे का पता लगा कर उसे गिरफ्तार करने की मांग कर रहा था. जबकि पुलिस अलगअलग तरीके से जांच कर केस को खोलने की कोशिश में लगी थी.

इस दौरान थानाप्रभारी संजीव कुमार ने अब्दुल रहमान से भी 2 बार पूछताछ की थी. लेकिन उस से कोई क्लू नहीं मिल सका था. उन के यहां जिनजिन रिश्तेदारों या परिचितों का आनाजाना था, पुलिस ने उन्हें भी थाने बुला कर पूछताछ की.

इतना ही नहीं पुलिस ने उन पेशेवर हत्यारों को भी उठा लिया जो उस समय जेल से बाहर थे. लेकिन उन से भी कोई जानकारी नहीं मिली. इधर मामले को ले कर पुलिस भी परेशान थी. घटना के 3 सप्ताह बाद पुलिस ने अब्दुल रहमान को एक बार फिर थाने बुलाया. थाना प्रभारी और इंसपेक्टर भारत कुमार की टीम ने उस से फिर पूछताछ की. सख्ती से की गई पूछताछ में अब्दुल रहमान ने अपना मुंह खोलते हुए कहा कि अपने मांबाप का हत्यारा मैं ही हूं. मैं ने ही अपने दोस्तों के साथ उन की हत्या की थी.

उस की बात सुन कर एक बार तो पुलिस भी आश्चर्यचकित रह गई कि वह अपने मांबाप का एकलौता बेटा था तो ऐसी क्या बात हो गई कि घर के इसी चिराग ने अपने मांबाप का ही खून कर दिया. पुलिस ने अब्दुल रहमान से मांबाप की हत्या करने की वजह जानने के लिए पूछताछ की तो उस ने उन की हत्या की जो कहानी बताई वह हैरान करने वाली थी.

फेसबुक की दोस्त बनी महबूबा

अब्दुल रहमान अपने मांबाप की इकलौती संतान था. पिता शमीम अहमद और मां तसलीम बानो ने उसे हमेशा अपनी पलकों पर बिठा कर रखा था. वह उस की हर फरमाइश पूरी करते थे. मांबाप का लाडला अब्दुल रहमान पढ़ाई में भी होशियार था. उस का माइंड क्रिएटिव था इसलिए उस ने एनिमेशन में डिप्लोमा किया. मांबाप चाहते थे कि उन के बेटे की कहीं अच्छी जगह नौकरी लग जाए. शमीम अहमद ने करीब डेढ़ साल पहले उस की शादी कर दी थी, लेकिन किसी वजह से उस की पत्नी से नहीं बनी. दोनों के विचारों में विरोधाभास था, इसलिए उस ने पत्नी को तलाक दे दिया.

इस के बाद फेसबुक के माध्यम से अब्दुल रहमान की दोस्ती कानपुर की रहने वाली एक लड़की से हो गई. यह दोस्ती इतनी गहरी हो गई कि दोनों ही एकदूसरे को दिलोजान से चाहने लगे. यहां तक कि दोनों शादी के लिए भी तैयार हो गए.

लड़की ने कह दिया कि वह उस के लिए अपने घर वालों तक को छोड़ने के लिए तैयार है. अब बात अब्दुल रहमान को फाइनल करनी थी. वह तो तैयार था लेकिन उसे उम्मीद थी कि शायद उस के घर वाले कानपुर वाली उस की दोस्त से शादी करने के लिए तैयार नहीं होंगे.

फिर भी अब्दुल रहमान ने अपने मातापिता से कानपुर वाली अपनी दोस्त के बारे में बताया और कहा कि वह उस से शादी करना चाहता है. शमीम अहमद ने साफ कह दिया कि वह अपनी बिरादरी की लड़की के साथ ही उस की शादी करना पसंद करेंगे. इसलिए कानपुर वाली उस लड़की को वह भूल जाए. उस के साथ उस की शादी नहीं हो सकती.

मांबाप पर भारी पड़ी प्रेमिका

पिता ने जितनी आसानी से भुला देने वाली बात कही थी, वह अब्दुल रहमान के लिए उतनी आसान नहीं थी. बहरहाल घर वालों की बातों को दरकिनार करते हुए वह अपनी उस फेसबुक फ्रेंड के संपर्क में बना रहा. इतना ही नहीं वह उस से मिलने भी जाता था.

इसी दौरान घर वालों ने अब्दुल रहमान की दूसरी शादी कर दी. घर वालों के दबाव में उस ने शादी कर जरूर ली थी लेकिन उस के दिल में तो उस की कानपुर वाली प्रेमिका बसी हुई थी.

दूसरी शादी हो जाने के बाद भी वह अपनी प्रेमिका को नहीं भूला था. वह एक काल सेंटर में नौकरी करता था, इसलिए प्रेमिका को महंगे गिफ्ट आदि देने और उस से मिलने के लिए कानपुर जाता रहता था. वह अब्दुल रहमान पर शादी के लिए दबाव डाल रही थी. वह भी सोचता था कि यदि प्रेमिका ही उस की पत्नी बन जाए तो उस का जीवन हंसीखुशी से बीतेगा. लेकिन इस काम में सब से बड़ी रुकावट उस के मांबाप ही थे.

अब्दुल रहमान ने एक बार फिर से अपने मांबाप को मनाने की कोशिश की कि वह उस की कानपुर वाली दोस्त के साथ उस की शादी कर दें. लेकिन शमीम अहमद ने बेटे को न सिर्फ जम कर फटकार लगाई बल्कि हिदायत भी दी कि वह उस लड़की को भूल कर अपनी घरगृहस्थी में ध्यान लगाए.

अब्दुल रहमान की कोशिश नाकाम हो चुकी थी पर वह हारना नहीं चाहता था. आखिर उस ने भी एक सख्त फैसला ले लिया कि चाहे कुछ भी हो जाए वह अपनी प्रेमिका को दुलहन बना कर घर लाएगा. इस के लिए उस ने अपने मांबाप को रास्ते से हटाने का फैसला ले लिया. यानी प्रेमिका की खातिर उस ने मांबाप तक की हत्या करने की ठान ली.

इतना बड़ा काम वह खुद नहीं कर सकता था. इस बारे में उस ने दिल्ली के नांगलोई इलाके के रहने वाले अपने दोस्त नदीम खान (32) और गुड्डू से बात की. दोनों ढाई लाख रुपए में यह काम करने के लिए तैयार हो गए. तीनों ने शमीम अहमद और तसलीम बानो की हत्या करने की पूरी योजना बना ली.

योजना के अनुसार 27-28 अप्रैल की रात नदीम खान और गुड््डू जाकिर नगर इलाके में आ गए. अब्दुल रहमान के मातापिता जब खाना खा कर अपने कमरे में सोने के लिए चले गए तो रात 11 बजे के करीब अब्दुल रहमान ने फोन कर के अपने दोनों दोस्तों को घर बुला लिया. उन के घर आने के बाद अब्दुल रहमान उन्हें अपने मातापिता के कमरे में ले गया. उन के दरवाजे पर आटोमैटिक लौक लगा था जो दोनों तरफ से बंद हो जाता था.

इन लोगों ने मुंह पर तकिया रख कर एकएक कर दोनों का दम घोंट दिया और उन की लाशें बेड से उतार कर फर्श पर डाल दीं. इस के बाद अब्दुल रहमान ने दरवाजे को बंद कर दिया. अपना काम कर के नदीम खान और गुड्डू रात में ही वहां से चले गए.

अब्दुल रहमान अपने कमरे में आ गया. इस के बाद उसे रात भर नींद नहीं आई. सुबह होने पर उस ने मोहल्ले के लोगों को यह कह कर इकटठा कर लिया कि पता नहीं क्यों आज अम्मी और अब्बू दरवाजा नहीं खोल रहे.

अब्दुल रहमान से पूछताछ के बाद पुलिस ने नदीम खान को भी गिरफ्तार कर लिया जबकि गुड्डू फरार हो गया था. दोनों से पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें न्यायालय में पेश किया जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. पुलिस मामले की तफ्तीश कर रही है.

बरसाती नमी से सुरक्षित रहना है तो फौलो करें ये टिप्स

बारिश के मौसम में सीलन से फफूंद और बैक्टीरिया आदि पनपते हैं. बीमारियां फैलती हैं, दीवारें भद्दी और दुर्गंधित हो जाती हैं, प्लास्टर, पैंट निकलने लगता है. घर में सीलन की समस्या कहीं भी हो सकती है. सीलन कई कारणों से पैदा हो सकती है. घर बनाते समय खराब क्वालिटी के प्रोडक्ट्स का प्रयोग, दोषपूर्ण डैंपप्रूफ कोर्स, लीक करता पाइप, बारिश का पानी, छत पर ढलान की सही व्यवस्था न होना वगैरह सीलन की वजह बन सकते हैं.

सही वैंटिलेशन न होना भी सीलन की एक वजह हो सकता है. घर के रोजाना के काम जैसे कपड़े धोना, खाना पकाना, प्रैस करना जैसी गतिविधियां भी सीलन बढ़ा सकती हैं. छोटे बाथरूम या किचन जिन में खिड़की न हो या छोटे कमरों में गीले कपड़े सुखाए जाने पर भी बारिश के मौसम में सीलन बढ़ जाती है.

घर को बनाएं सीलनप्रूफ

– सुनिश्चित करें कि घर में कहीं भी पानी का जमाव न हो. पानी की निकासी होती रहे.

– सुनिश्चित करें कि खिड़कियों और दरवाजों के फ्रैम सीलबंद हैं या नहीं.

– यदि छत थोड़ी भी टपक रही हो तो तुरंत उस की मरम्मत कराएं.

– घर में वैंटिलेशन की सही व्यवस्था रखें. बाथरूम के शावर या रसोईघर से जब भाप बाहर नहीं निकल पाता तो उसे कमरे की दीवारें सोख लेती हैं और फिर उन में सीलन आ जाती है. अत: इस से बचने के लिए वैंटिलेशन का खयाल रखें. ऐग्जौस्ट फैन का प्रयोग करें.

– घरेलू डीह्यूमिडिफायर भी अच्छे विकल्प हैं. ये बाथरूम, गैरेज, कमरों, जहां कपड़े सुखाएं जा रहे हों, में प्रभावी होते हैं. ये छोटे आकार के होते हैं. अत: आसानी से कहीं भी रखे जा सकते हैं. कुछ घरेलू डीह्यूमिडिफायर में बैक्टीरिया और रोगाणुओं को मारने के लिए एक अतिरिक्त यूपी लैंप भी होता है. बहुतों में खराब गंध अवशोषित करने के लिए कार्बन फिल्टर भी होता है.

– सीपेज से बचाव हेतु बाहरी दीवारों पर वाटरपू्रफ कोट्स लगाना अच्छा रहता है. इस से बारिश का पानी और नमी का असर दीवारों पर नहीं होता. इसी तरह छत पर भी वाटरप्रूफ रूफ कोटिंग का इस्तेमाल करें ताकि पानी के सीपेज से बचाव हो सके.

– कई दफा दीवारों के निचले हिस्सों में सीलन के धब्बे नजर आने लगते हैं. इस की वजह ग्राउंड वाटर होता है, जो ऊपर चढ़ने लगता है. इस से बचने के लिए डैंपप्रूफ कोर्स की आवश्यकता पड़ती है. इस में ऐसा मैटीरियल प्रयुक्त होता है जो ग्रांउडवाटर की दीवारों के जरीए ऊपर चढ़ने और घर को नुकसान पहुंचाने से बचाता है.

बदलें किचन का स्टोरेज सिस्टम

– दालें, चावल व इस तरह की रोजाना इस्तेमाल में आने वाली खाने की चीजों को ट्रांसपेरैंट प्लास्टिक या कांच के कंटेनर्स में ही रखें. कंटेनर्स का ऐअर टाइट होना जरूरी है.

– यदि प्लास्टिक कंटेनर्स इस्तेमाल कर रही हैं तो ध्यान रखें कि उन की क्वालिटी अच्छी हो.

– कौफी, चाय की पत्ती, चीनी व खुशबूदार मसालों को नमी से बचाने के लिए छोटे कांच के जार ही इस्तेमाल करें. इन्हें समयसमय पर कुछ देर धूप में भी रखें.

– अचार स्टोर करने के लिए कांच के बड़े बाउल या चीनी मिट्टी के बरतन का इस्तेमाल करें.

– स्टील के कंटेनर्स का इस्तेमाल करती हैं तो इन की साफसफाई का ज्यादा ध्यान रखें. इन का इस्तेमाल आटा इत्यादि रखने के लिए करें.

– गरिमा पंकज द्वारा निकितालाद गुप्ता सीनियर डिजाइनर, बोनिटो के सुझावों पर आधारित

बेटियों के भविष्य के लिये सरकार ने लिया यह फैसला

केंद्र सरकार ने सुकन्या समृद्धि योजना में सालाना न्यूनतम जमा की सीमा 1,000 रुपये से घटाकर 250 रुपये कर दी है. अब अधिक से अधिक लोग इस योजना का लाभ उठा सकेंगे. इसके लिए सरकार ने सुकन्या समृद्धि खाता नियम, 2016 में संशोधन किया है. इस खाते को खोलने के लिए अब 250 रुपये ही जमा कराने की जरूरत होगी. साथ ही सालाना इस खाते में 1,000 रुपये के बजाय 250 रुपये जमा कराने की ही अनिवार्यता होगी.

2015-17 में सवा करोड़ खाते खुले थे

केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने 2018-19 के अपने बजट भाषण में कहा था कि जनवरी, 2015 में शुरू की गई सुकन्या समृद्धि खाता योजना काफी सफल रही है. नवंबर, 2017 तक देशभर में छोटी लड़कियों के नाम पर 1.26 करोड़ खाते खोले गए थे. इन खातों में 19,183 करोड़ रुपए जमा हुए थे. सुकन्या समृद्धि खाते पर ब्याज दरों को अन्य लघु बचत योजनाओं और पीपीएफ की तरह प्रत्येक तिमाही में संशोधित किया जाता है. जुलाई-सितंबर की तिमाही के लिए ब्याज दर 8.1 प्रतिशत तय की गई है. इस योजना के तहत किसी दस साल से कम उम्र की किसी भी लड़की के माता-पिता या कानूनी अभिभावक यह खाता खोल सकते हैं.

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डाकघर या बैंक में खोल सकते हैं खाता

सरकारी अधिसूचना के अऩुसार यह खाता किसी डाकघर शाखा या अधिकृत सरकारी बैंक की शाखा में खोला जा सकता है. इस खाते में जमा और परिपक्वता राशि पर आयकर कानून की धारा 80 सी के तहत कर की पूरी छूट मिलती है. अब इस खाते में न्यूनतम 250 रुपये जमा कराने की जरूरत होगी. खाते में सालाना अधिकतम डेढ़ लाख रुपये जमा कराए जा सकते हैं. एक महीने या वित्त वर्ष में कितनी बार भी इस खाते में पैसा जमा कराया जा सकता है.

खाता 21 साल तक रहेगा वैध

योजना के तहत यह खाता खोलने की तारीख से 21 साल तक वैध रहेगा. उसके बाद यह परिपक्व होगा और और उस लड़की को इसका भुगतान किया जाएगा जिसके नाम पर खाता खोला गया है. खाता खोलने की तारीख से 14 साल तक इसमें राशि जमा कराई जा सकती है. उसके बाद खाते पर उस समय लागू दरों के हिसाब से ब्याज मिलेगा.

चुनाव से पहले व्हाट्सऐप में होंगे ये अहम बदलाव, कंपनी ने दी जानकारी

देश में फर्जी खबरें और अफवाहें फैलने के बाद सामने आर्इं हत्या की घटनाओं से आलोचना झेल रहे व्हाट्सऐप ने अब एक बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है. व्हाट्सऐप ने एक संदेश भेजने की सीमा पांच बार तक सीमित करने समेत देश में अपनी सेवाओं पर पाबंदी लगाने का एलान किया. विदेशों में संदेश भेजने की सीमा 20 है. इसका मतलब यह है कि भारत में संदेश भेजने को लेकर जो पाबंदी लगाई जा रही है वह वैश्विक स्तर पर निर्धारित मानदंडों के मुकाबले बेहद कड़ी है. कंपनी ने अगले साल होने वाले आम चुनाव से पहले व्हाट्सऐप के दुरुपयोग को रोकने पर चर्चा के लिए हाल ही में चुनाव आयोग और राजनीतिक संगठनों के साथ बातचीत भी की है.

व्हाट्सऐप ने चुनाव आयोग से कहा है कि वह अपने ‘मेसेज प्लेटफार्म’ के दुरुपयोग को रोकने के लिए चुनावों से पहले कई कदम उठाएगा. कंपनी ने कहा कि वह भारत में फर्जी खबर सत्यापन मौडल लाएगी, जिसका उपयोग दुनिया के दूसरे देशों में किया जा रहा है.

कंपनी ने बयान में कहा कि वह ऐप पर संदेश भेजने की सीमा को निर्धारित करने के लिए परीक्षण शुरू कर रहा है. इसके अलावा उसने कहा कि वह मीडिया संदेशों के बगल में दिखाई देने पर वाले क्विक फारवर्ड बटन को भी हटाएगा. व्हाट्सऐप ने ब्लाग पोस्ट में कहा कि भारत में उसके उपयोगकर्ता अन्य देशों के उपयोगकर्ताओं की तुलना में अधिक संदेश, तस्वीर और वीडियो भेजते हैं. इस बाबत हम संदेश भेजने की सीमा को निर्धारित करने के लिए एक परीक्षण शुरू कर रहे हैं. यह व्हाट्सऐप के हर उपयोगकर्ता पर लागू होगा.

एक सूत्र ने बताया कि व्हाट्सऐप ने चुनाव आयोग से कहा कि वह राज्यों में होने वाले चुनावों व आम चुनावों से पहले स्पैम संदेश तकनीक को लेकर सतर्क रहेगा. उसने कहा कि व्हाट्सऐप के अधिकारियों का एक दल भारत में है और अगले कुछ दिनों में नीति-निर्माताओं के साथ बैठक करेगा. कंपनी ने चुनाव आयोग से यह भी कहा है कि वह भारत में फर्जी खबर सत्यापन मौडल वेरिफिकैडो लाएगी. इसका मेक्सिको चुनाव में उपयोग किया गया है. ब्राजील में भी इसका उपयोग किया गया है. कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि व्हाट्सऐप को व्यक्तिगत और छोटे समूह के बीच बातचीत के लिए तैयार किया गया है और कंपनी ने हमेशा से उन संदेशों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है, जो व्यवस्था को चोट पहुंचाने की कोशिश करता है. वैसे संदेश भेजने वालों के ‘एकाउंट’ को बंद किया गया है.

इन वेबसाइट से रेलवे टिकट खरीदना आपको पड़ सकता है महंगा

अगर ट्रेन में यात्रा करने के लिए आप अक्सर मेक माई ट्रिप, यात्रा, पेटीएम और क्लियर ट्रिप जैसे पोर्टल से टिकट खरीदते हैं तो यह खबर आपके लिए है. इन वेबसाइट से टिकट बुक कराना अब पहले के मुकाबले महंगा हो सकता है. इंडियन रेलवे एंड कैटरिंग एंड टूरिज्म कौर्पोरेशन (IRCTC) दूसरे पोर्टल के माध्यम से टिकट बुकिंग कराने पर एक्सट्रा चार्ज लगाने का निर्णय लिया है.

12 रुपये और टैक्स अतिरिक्त देना होगा

आईआरसीटीसी की तरफ से कहा गया कि अन्य सर्विस प्रोवाइडर की तरफ से टिकट बुक कराने पर 12 रुपये और इस पर टैक्स भी लगेगा. गौरतलब है कि IRCTC इंडियन रेलवे की सहायक कंपनी है और कैटरिंग, टूरिज्म और औनलाइन टिकटिंग औपरेशन हैंडल करती है. एक अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित खबर के अनुसार आईआरसीटी का आईपीओ आने से पहले यह कदम रेवेन्यू जुटाने के तरीके के रूप में देखा जा रहा है.

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इस कदम से सर्विस प्रोवाइडर नाखुश

हालांकि आईआरसीटीसी के इस कदम से सर्विस प्रोवाइडर नाखुश हैं. अभी तक IRCTC की तरफ से इन वेबसाइट से सालाना मेंटीनेंस चार्ज लिया जाता था. जिससे ग्राहक पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ता था. लेकिन अब प्रत्येक टिकट पर अलग से चार्ज लेने पर टिकट की कीमत बढ़ सकती है. आईआरसीटीसी के इस फैसले पर एक सर्विस प्रोवाइडर का कहना है कि रेलवे टिकट बुकिंग रेवेन्यू नेगेटिव है.

सर्विस प्रोवाइडर का कहना है कि पेमेंट गेटवे पर हमें जो शुल्क देनी पड़ती है. वह ग्राहकों से ली जाने वाली फीस से ज्यादा होती है. अगर यह बोझ ग्राहकों पर डाला गया तो टिकट बुकिंग के काम से हमें नुकसान होगा. कंपनियों का कहना है कि फीस बढ़ाने से उन्हें नुकसान होगा और आईआरसीटीसी की वेबसाइट के मुकाबले हम गैर-प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे.

इसके अलावा आईआरसीटीसी ने अपने सिस्टम को सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए भी खोलने का फैसला किया है. अब सर्विस प्रोवाइडर पीएनआर स्टेटस और अन्य पूछताछ की सेवाएं कस्टमर फैसिलिटीज मुहैया करा सकते हैं. एक अन्य सर्विस प्रवाइडर ने कहा कि एयरलाइंस के साथ आईआरसीटीसी का दूसरे तरह का करार है. एयरलाइंस की टिकट बुकिंग कराने पर आईआरसीटीसी से उन्हें कमीशन मिलता है. वहीं टिकट की बिक्री पर रेलवे हमसे चार्ज वसूलती है.

किराएदार ने किया रणबीर पर 50 लाख का मुकदमा

बौलीवुड अभिनेता रणबीर कपूर जहां एक तरफ फिल्म संजू की सफलता को लेकर बेहद खुश हैं वहीं दूसरी तरफ एक शख्स ने उनपर 50 लाख रुपये का केस दर्ज कराया है. गौरतलब है कि पुणे के ट्रम्प टावर में रणबीर कपूर की एक सम्पत्ति है, जिसे उन्होंने 2016 में किराये पर दे दिया था.  इसके बाद उनके किरायेदार ने इस सम्पत्ति को लेकर बने करार को लागू नहीं किये जाने पर न्यायालय में 50 लाख का दावा रणबीर कपूर पर ठोक दिया है साथ ही उन्हें 18 लाख का ब्याज भी देने को कहा है.

शीतल सूर्यवंशी का कहना है, उन्होंने 2 वर्ष के लिए रणबीर कपूर का अपार्टमेंट किराये पर लिया था लेकिन अब उन्हें समयावधि पूर्ण होने से पहले ही खाली करने के लिए कहा गया. जिसके बाद उन्हें और उनके परिवार को मानसिक त्रासदी का सामना करना पड़ा. उन्हें निकालने के लिए जो कारण दिया गया था उसमें यह बताया गया था कि रणबीर कपूर उस घर में शिफ्ट होने वाले है.

वहीं, रणबीर कपूर ने इन सभी आरोपों का खंडन किया है. उनका कहना है कि शीतल सूर्यवंशी ने घर उनकी इच्छा से खाली किया है और उन्होंने 3 महीने का किराया भी नहीं दिया था, जिसे उनके डिपॉजिट में से काट लिया गया था. उनका यह भी कहना है कि शीतल सूर्यवंशी से घर खाली करने के लिए उन्होंने यह नहीं कहा था कि वह वहां रहने आने वाले हैं. रणबीर कपूर ने उत्तर में यह भी कहा कि केस की अगली तारीख 28 अगस्त है.

ईशा देओल ‘केकवाक’ से करेंगी फिल्मों में कमबैक, यह होगा रोल

2015 के बाद से सिल्वर स्क्रीन से गायब रहने वाली अभिनेत्री ईशा देओल एक बार फिर फिल्म ‘केकवाक’ से कमबैक करने जा रही हैं. ईशा ने राम कमल मुखर्जी की 22 मिनट की लघु फिल्म ‘केकवाक’ से अपना बंगाली दुल्हन का लुक साझा किया. इसके लिए करीन पंजवानी ने उनका लुक संवारा है.

ईशा ने अपना यह लुक शेयर करते हुए कहा, “मुझे सही दिखने में लगभग तीन घंटे लग गए. मेरे निर्देशक राम कमल को धन्यवाद, जो हर विवरण को लेकर बहुत खास थे.”

इससे पहले लंदन में हेमा मालिनी ने अपनी बेटी की कमबैक शार्ट फिल्म केकवाक का पहला पोस्टर जारी किया था. पोस्टर में ईशा एक कुक की ड्रेस में नजर आ रही हैं. फिल्म का यह फर्स्ट लुक स्टोरी और ईशा के स्टारडम को लेकर सवाल जगाता है.

‘केकवाक’ आभ्रा चक्रवर्ती द्वारा सह-निर्देशित और दिनेश गुप्ता, शेलेंद्र कुमार, अरित्रा दास द्वारा निर्मित है. टेलीविजन अभिनेता तरुण मल्होत्रा और अनिंदिता चटर्जी इससे बौलीवुड में डेब्यू कर रहे हैं. यह कामकाजी महिलाओं के जीवन पर आधारित फिल्म है. यह लघुफिल्म अक्टूबर में रिलीज होगी. यह देखना दिलचस्प होगा कि ईशा कमबैक मूवी के साथ दर्शकों का दिल जीत पाती है या नहीं.

क्या आपको पता है सचिन तेंदुलकर का सपना, चलिये बताते हैं

क्रिकेट के भगवान यानी सचिन तेंदुलकर ने अपने दिल की बात करते हुए बताया कि उनका सपना क्या है. सचिन ने तेंदुलकर ग्लोबल एकेडमी की शुरुआत पर कहा कि उनका सपना है कि युवा भारतीय प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आधुनिक प्रशिक्षण की सुविधाएं मिल पाए. इस एकेडमी में उन बच्चों पर ध्यान दिया जाएगा जो अमीर परिवारों से नहीं आते हैं. हम उन सब को वह सुविधा देने की कोशिश करेंगे जो वह पैसों की वजह से हासिल नहीं कर पाते.

सचिन की इस एकेडमी में प्रतिभावान खिलाड़ियों को 100 प्रतिशत स्कौलरशिप दी जाएगी. सचिन की ये एकेडमी मुंबई सहित कई देशों में खुलने वाली है. जब सचिन से पूछा कि काउंटी क्लब के साथ ही करार क्यों किया गया तो उन्होंने कहा कि जब मैं खेलता और जब भी ब्रिटेन में होता था तो मिडिलसेक्स क्लब में ही प्रैक्टिस करता था. मुझे वहां की सुविधा के बारे में पहले से जानकारी थी और जब वह एकेडमी का प्लान लेकर मेरे पास आए तो मैंने तुरंत हां कर दी.

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मुंबई में सचिन की एकेडमी में मानसून के बाद नंवबर में पहली बार शिविर लगेगा. सचिन ने कहा कि हम पहला शिविर मुंबई में ही लगाना चाहते थे लेकिन मानसून की वजह से ऐसा मुमकिन नहीं है इसलिए अब हम नंवबर में इसका आयोजन करने की सोच रहे हैं.

आपको बता दें कि मिडिलसेस्ट काउंटी क्लब ने इंग्लैंड को कई महाम बल्लेबाज दिए हैं, जिनमें एंड्रयू स्ट्रौस, माइक गैटिंग, डेनिस कौम्पटन, माइक ब्रियर्ली शामिल है. अब इस क्लब ने युवाओं को ट्रेनिंग देने के लिए पूरे कार्यक्रम तैयार कर लिया है.

सरकारी कानून के बीच फंस सकती है बजाज की यह नई कार

बजाज औटो सितंबर या अक्‍टूबर में अपनी नई गाड़ी क्‍यूट (Qute) लौन्‍च्‍ा करने वाली है, लेकिन यह गाड़ी एक्‍सप्रेस-वे पर नहीं चल पाएगी. देश में quadricycle कैटगरी की यह पहली गाड़ी है, लेकिन मिनिस्‍ट्री औफ रोड एंड ट्रांसपोर्ट द्वारा 6 अप्रैल 2018 को नोटिफाई किए गए ‘मैक्सिमम स्‍पीड औफ मोटर व्‍हीकल’ में quadricycle कैटगरी को भी शामिल किया गया है. जिसमें अलग-अलग सड़कों पर quadricycle कैटगरी के व्‍हीकल की मैक्सिमम स्‍पीड लिमिट भी तय की गई है. इसमें स्‍पष्‍ट तौर पर कहा गया है कि quadricycle कैटगरी के व्‍हीकल एक्‍सप्रेस-वे पर नहीं चल पाएंगे.

क्‍या हैं quadricycle के नए नियम

मिनिस्‍ट्री औफ रोड एंड ट्रांसपोर्ट के नोटिफिकेशन में कहा गया है कि quadricycle कैटगरी के व्‍हीकल एक्‍सप्रेस-वे पर नहीं चलेंगे, जबकि 4 लेन या उससे अधिक लेन वाले हाईवे पर ये व्‍हीकल 60 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक स्‍पीड पर नहीं चल पाएंगे. म्‍युनिस्पिल लिमिट (शहरों) वाली सड़कों और अन्‍य सड़कों पर quadricycle व्‍हीकल की मैक्सिमम स्‍पीड 50 किमी प्रति घंटा निर्धारित की गई है. इससे अधिक स्‍पीड होने पर ट्रैफिक पुलिस इन व्‍हीकल चालकों के खिलाफ ओवर स्‍पीड की कार्रवाई कर सकती है.

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क्‍या है quadricycle कैटगरी

quadricycle यू‍रोपियन व्‍हीकल कैटगरी है, जो चार पहिया माइक्रो कार के रूप में जानी जाती है, जिसका वजन, पावर और स्‍पीड की मैक्सिमम लिमिट है. भारत में अभी इस कैटगरी की कोई कार नहीं है. बजाज औटो ने इस कैटगरी की Qute कार को बजाज औटो ने 2012 के दि‍ल्‍ली औटो शो में RE60 के नाम से पेश कि‍या था. भारत में quadricycle को मंजूरी नहीं होने के कारण यह मार्केट में नहीं उतर सकी थी. जून 2018 में केंद्र सरकार ने quadricycle की अलग कैटगिरी की घोषणा की है.

ग्रीन कार का दावा

कंपनी का दावा है कि‍ बाजार में मौजूद कि‍सी भी कार से यह 37 फीसदी हल्‍की है. हल्‍की होने की वजह से ईंधन बचाती है. यह शहरों की सड़कों को ध्‍यान में रखकर बनाई गई है. यह गाड़ी कम जगह लेती है और आसानी से मुड़ जाती है. इसकी माइलेज एक लीटर में 36 कि‍लोमीटर है और कि‍सी अन्‍य छोटी कार के मुकबले 37 फीसदी कम कार्बन का उत्‍सर्जन करती है. यह एक कि‍लोमीटर पर केवल 66 ग्राम CO2 छोड़ती है. इसमें वो सभी सेफ्टी फीचर्स हैं जो इस सेगमेंट की कारों में होते हैं. इस कार का टर्निंग रेडि‍यस केवल 3.5 मीटर है.

धोनी के कप्तान बताए जाने पर लोगों ने लिये बीसीसीआई के मजे

बीसीसीआई की वेबसाइट में अचानक एक गलती हो गई जिसकी वजह से वह सोशल मीडिया पर ट्रोल हो गई. गुरूवार रात को बीसीसीआई की वेबसाइट पर भारत के पूर्व कप्तान एमएस धोनी की प्रोफाइल में गलती हो गई. साइट ने गलती से धोनी की प्रोफाइल में उन्हें टीम इंडिया का कप्तान बता दिया. बाद में बीसीसीआई ने अपनी गलती सुधार तो ली, लेकिन इससे लोगों को उसे ट्रोल करने का मौका मिल गया और कई मजेदार कमेंट भी कर डाले. इसे संयोग ही कहेंगे कि यह कारनामा ऐसे वक्त पर हुआ जब धोनी के वनडे से संन्यास लेने की अटकलों की सफाई दी जा रहीं थी.

गुरुवार रात को बीसीसीआई की साइट पर एमएस धोनी की प्रोफाइल में उनके नाम के नीचे और उनकी मुस्कुराती हुई तस्वीर के बगल में ‘कैप्टन, टीम इंडिया’ लिखा दिखाई देने लगा. लेकिन इसके बाद बीसीसीआई ने अपनी गलती को सुधार भी लिया लेकिन मामला सोशल मीडिया में जम कर चला और लोगों ने अपने कमेंट्स भी खूब दिए.

बहुत पहले ही संन्यास ले चुके हैं धोनी

उल्लेखनीय है कि धोनी ने टेस्ट क्रिकेट से ही संन्यास 2014 में ले लिया था. इसके बाद 2017 के शुरुआत में ही उन्होंने एक साथ ही वनडे और टी20 मैचों की भारतीय कप्तानी भी छोड़ दी थी. लेकिन तब से उन्होंने वनडे और टी 20 में बतौर बल्लेबाज और विकेटकीपर खेलना जारी रखा है. इस समय वे टीम के अहम खिलाड़ी के रूप में मौजूद हैं. कप्तानी छोड़ने के बाद धोनी का टीम में सम्मान कम होने के बजाए बढ़ता ही गया. वे इस दौरान साथी खिलाड़ियों के लिए मेन्टौर की भूमिका भी निभा चुके हैं. कप्तान विराट कोहली भी धोनी की सलाह को खासा महत्व देते हैं. कोच रवि शास्त्री भी धोनी का कई बार बचाव कर चुके हैं.

हाल ही में धोनी आलोचकों के निशाने पर आए जब इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के आखिरी दो मैचों में उनकी बल्लेबाजी काफी धीमी रही. दूसरे वनडे में धोनी ने 59 गेंदों पर 37 रन बनाए तो तीसरे वनडे में वे 66 गेंदों में केवल 42 रन ही बना सके थे.

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