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किस बात पर मनोज बाजपेयी को आता है गुस्सा?

बौलीवुड में चंद समर्थ अभिनेताओं में मनोज बाजपेयी की गिनती होती है. ‘बैंडिट क्वीन’ से लेकर अब तक तमाम फिल्मों में उन्होंने अपने अभिनय का जलवा बिखेरा है. फिल्म‘सत्या’मे भीखू म्हात्रे और फिल्म ‘पिंजर’में राशिद का किरदार निभाकर उन्होंने राष्ट्रीय पुरस्कार भी हासिल किया. इसके बावजूद उनके हिस्से भी असफल फिल्मों की लंबी सूची है. मगर जब उनसे उनकी असफल फिल्मों को लेकर सवाल किया जाता है, तो वह विफर पड़ते हैं. अपनी फिल्मों की विफलता का सारा ढीकरा पत्रकारों की समझ के साथ ही वितरकों आदि पर डालते हैं.

हाल ही में जब फिल्म ‘‘सत्यमेव जयते’के प्रमोशन के समय मनोज बाजपेयी से हमारी खास मुलाकात हुई. तब हमने उनसे एक्सक्लूसिव बात करते हुए पूछा कि सिनेमा के बदलाव के इस दौर में ‘बुधिया सिंह’और ‘मिसिंग’जैसी फिल्मों को थिएटर क्यों नहीं मिल पाते. ऐसी फिल्मों को दर्शक पसंद क्यों नहीं करता हैं?

हमारे इस सवाल को सुनकर मनोज बाजपेयी तैश में आ जाते हैं. फिर वह कहते हैं.- ‘‘किसने कहा? क्या किसी दर्शक ने आपसे कहा कि वह इस तरह की फिल्म नहीं देखना चाहता? पत्रकारों को यह समझना पडे़गा कि वह फिल्मों के पैसे पर नजर रखेंगे या उसकी गुणवत्ता पर. मैंने 25 वर्षों से निर्णय कर रखा है कि मैं गुणवत्ता वाले सिनेमा ही करूंगा. वही करता आ रहा हूं. अब आपको तय करना है कि आप किसके साथ हैं? मेरे लिए तीन दिन का बाक्स आफिस कलेक्शन यह तय नहीं करता कि फिल्म कैसी है? मेरे लिए ‘बुधिया सिंह’ बहुत बेहतरीन फिल्म है. मेरी परफार्मेंस बहुत अच्छी है. ‘मिसिंग’ मेरे करियर की बहुत कठिन परफार्मेंस वाली फिल्म है. मुझे इस फिल्म का निर्माण व अभिनय करने में मजा आया. यदि आप फिल्म की सफलता को उसकी कमाई से तौलना चाहते हैं, तो जाइए, सबसे पहले वितरकों और एक्जीबिटरों के साठगांठ को तोड़िए. उनसे निपटिए कि वह छोटी फिल्मों को सही ढंग से रिलीज करें. उसके बाद मुझसे बात करिए.’’

तैश में आकर इस तरह की बाते करने वाले उत्कृष्ट अभिनेता मनोज बाजपेयी शायद यह भूल जाते हैं कि फिल्म निर्माण महज‘कला’नही है, बल्कि व्यवसाय भी है. हर फिल्म निर्माता फिल्म के प्रदर्शन से धन कमाना चाहता है. यदि फिल्में बाक्स आफिस पर कमाई नहीं करेंगी, तो नई फिल्में बनेगी किसके पैसे से?

मराठा आरक्षण आंदोलन की हिंसक आग

महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन अब हिंसक हो उठा है. आंदोलन की आग गांवों तक पहुंच चुकी है. शुरू में अहमदनगर, औरंगाबाद और इस के बाद मुंबई, पुणे, ठाणे औ कोल्हापुर में हिंसा भड़की. राज्य के विभिन्न हिस्सों में अब तक 6 लोग मारे जा चुके हैं. नवी मुंबई में पुलिस लाठीचार्ज से एक युवक मारा गया. काका साहेब दत्तात्रेय शिंदे नामक युवक ने जलसमाधि ले ली. प्रमोद होरे पाटिल ने फेसबुक पर ऐलान कर रेल के आगे कट कर आत्महत्या कर ली.

राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग के तहत आरक्षण की मांग को ले कर मराठा सड़कों पर हैं. अब तक ये लोग शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे लेकिन अचानक हिंसक हो उठे, आंदोलन से घबराई राज्य सरकार को तुरतफुरत पिछड़ा आयोग अध्यक्ष की नियुक्ति करनी पड़ी, सर्वदलीय बैठक बुलाई गई और विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने पर भी विचार करना पड़ा.

महाराष्ट्र में कोई भी दल मराठा आरक्षण का विरोध नहीं कर रहा. राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता शरद पवार आंदोलन में शामिल होते रहे हैं. शिवसेना  समर्थन कर रही है. भाजपा भी खिलाफ नहीं है. पिछड़ा समुदाय की भाजपा मंत्री पंकजा मुंडे ने तो यहां तक कह दिया था कि अगर उन्हें एक घंटे के लिए महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बना दिया जाए तो वह मराठा आरक्षण की फाइल पर साइन कर देंगी. इस पर शिवसेना प्रमुख उद्घव ठाकरे ने मांग कर दी कि पंकजा को मुख्यमंत्री बना दिया जाना चाहिए.

दरअसल मराठा आंदोलन का बीज 2016 में उस समय पड़ा जब अहमदनगर के कोपर्डी में एक मराठा लड़की की बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी. इस मामले 3 दलित युवक शामिल थे. घटना से राज्य भर के मराठा एकजुट हो गए और न्याय की मांग कर आंदोलन पर उतर पड़े. शुरू में स्थानीय स्तर पर लोग इकट्ठे हुए फिर धीरेधीरे प्रदर्शनों का दौर चल पड़ा.

आंदोलन जब जोर पकड़ने लगा तो अभियुक्तों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के अलावा 3 प्रमुख मांगें और उभर कर सामने आईं. वे थीं, दलित उत्पीड़न निरोधी कानून में संशोधन किया जाए, अन्य पिछड़ा वर्ग के अंतर्गत मराठा आबादी को आरक्षण दिया जाए तथा राज्य द्वारा किसानों से अनाज खरीदने के मूल्य यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढोतरी की जाए.

इन मांगों को समूचे मराठा युवकों का समर्थन मिलता गया. इस तरह मराठा आंदोलन आज सरकार की चूलें हिलाने में समर्थ दिख रहा है. असल में मराठा कृषि जातियां हैं जिन के पास खेती की जमीनें हैं और ये जातियां गांवों, कस्बों में एक तरह से दबंग और ताकतवर मानी जाती हैं. राणे, भोंसले, शिंदे, पवार, ठाकरे, जाधव, पाटिल, सालुंके जैसी जातियां राजनीतिक दबदबा रखती हैं और इन्हें राजनीतिक शक्ति का लाभ मिलता रहा था. महाराष्ट्र में करीब 32 प्रतिशत मराठा हैं.

अगर इतिहास में देखें तो 17वीं शताब्दी में ये लोग डेक्कन सल्लतन के सैनिकों की सेवा करते थे और फिर शिवाजी की सेना में सेवा कार्य करने लगे. असल में पिछले दशकों से कृषि की अनिश्चितता और खेती से होने वाले फायदे में कमी से मराठा युवकों में भयंकर बेरोजगारी फैली हुई है. कृषि में नुकसान के चलते अकेले महाराष्ट्र में पिछले वर्षों के दौरान करीब 20 हजार किसान आत्महत्या कर चुके हैं.

इन युवाओं के मन में सरकारी नौकरियों की चाह बढी है. सरकारी कार्यालयों में इन जातियों की संख्या बहुत कम है इसलिए प्रशासन में भागीदारी के लिए ये आंदोलनरत हैं. दूसरी दलित और पिछड़ी जातियां इन से संपन्नता और रुतबे में बराबरी पर आ गई या आगे निकल रही हैं. मराठों में जो रोजगार, संपन्नता और पदप्रतिष्ठा है वह कुछ ही कुलीन मराठों के हाथ में हैं. अभी तक मराठा आरक्षण को हेय नजर से देखा करते थे. उधर दलित और पिछड़ा समुदाय भी इस बात को ले कर चिंतित हैं कि मराठा समुदाय कहीं उन के हिस्से पर कब्जा न करे ले.

यह मामला गुजरात में पाटीदार, हरियाणा में जाट और आंध्रप्रदेश में कापू जातियों द्वारा पिछड़ा वर्ग में आरक्षण मांगने जैसा ही है पर इन जातियों को आरक्षण देना इतना आसान नहीं है. इस में कई कानूनी पेचीदगियां हैं. 1992 में इंदिरा साहनी केस में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि संविधान की धारा 16 के अंतर्गत नौकरी और शिक्षा में 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण नहीं दिया जाएगा. महाराष्ट्र में इस समय 52 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था है. अगर 16 प्रतिशत आरक्षण मराठों को दिया जाता है तो यह बढ कर 68 प्रतिशत हो जाएगा.

सरकार का भी कहना है कि मराठा आरक्षण का निदान संविधान संशोधन से होगा क्योंकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरक्षण का प्रतिशत तय किया हुआ है.

इरफान ने कहा, जिंदगी की कोई गारंटी नहीं, मैं अंधों की रेस में था…

बौलीवुड अभिनेता इरफान खान इन दिनों न्यूरो एंडोक्राइन ट्यूमर से जूझ रहे हैं. वह लंदन में अपना इलाज करवा रहे हैं. बीमार होने के बाद वह सोशल मीडिया पर भी कम ही नजर आते हैं. हालांकि उन्होंने अपनी फिल्म कारवां के पोस्टर और ट्रेलर अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किए थे. कैंसर का इलाज शुरू होने के बाद अब पहली बार इरफान खान ने अपना हेल्थ अपडेट शेयर किया है.

इरफान ने एक समाचार पत्र को दिए इंटरव्यू में बताया कि मैंने अभी तक कीमोथेरपी की चार साइकल पूरी कर ली हैं और मुझे कुल 6 साइकल पूरी करनी है. तीसरी साइकल के बाद मेरा स्कैन हुआ था जिसकी रिपोर्ट पौजीटिव आई थी, लेकिन 6 साइकल पूरा होने के बाद होने वाला स्कैन सबसे अहम होगा. इसके बाद ही पता चलेगा कि क्या स्थिति है और ट्रीटमेंट किस दिशा में चल रहा है.

अपनी जिंदगी को लेकर इरफान ने कहा, लाइफ अपने अंदर कई राज छिपाकर रखती है. जिंदगी हमें बहुत सी चीजें देती है, लेकिन हम उन्हें समझने की कोशिश नहीं करते हैं. मैं मानता हूं कि मैं अंधों की रेस में था. जहां मुझे काफी कुछ मिल रहा था लेकिन मैं देख नहीं सका.

इरफान ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, जिंदगी की कोई गारंटी नहीं है. मेरा मन मुझसे लगातार ये कहता है कि मैं अपने माथे पर एक चिट लगा लूं और उसपर लिख दूं कि मुझे ये बीमारी है. जब आपको आने वाले समय का अंदाजा न हो तो ऐसे में आप चिंता करना छोड़ दें, आप प्लानिंग करना बंद कर दें.

इरफान कहते हैं, मेरे पास फिलहाल किसी फिल्म की स्क्रिप्ट नहीं है. अभी मेरी जिंदगी में कुछ तय नहीं है कि आगे क्या होगा. मैनें भविष्य के लिए कई प्लानिंग की थी, लेकिन जहां मैं आज जिस हालत में हूं ये कभी मैंने सोचा नहीं था. मुझे जीवन में बहुत कुछ मिला है. इन सबके लिए बस मेरे पास एक ही शब्द है, शुक्र‍िया. मुझे जीवन से कोई इच्छा नहीं है, मुझे कोई प्रार्थना अब नहीं करनी है.”

अपने करियर की इस पारी को विराट मानते हैं सबसे बेहतर

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली ने इंग्लैंड के खिलाफ पहले टेस्ट की पहली पारी में एक यादगार शतक लगाया. विराट ने दबाव के समय में 149 रन की पारी खेलते हुए अपने टेस्ट करियर का 22वां शतक लगाया. विराट ने अपनी इस पारी में 22 चौके और 1 छक्का लगाया. कई फैंस और क्रिकेट दिग्गज उनकी इस पारी को उनके करियर की सर्वश्रेष्ठ पारी मान रहे थे लेकिन कोहली ने साफ कर दिया है कि यह पारी उनके करियर की बेस्ट पारी नहीं है.

दूसरे दिन का खेल खत्म होने के बाद विराट कोहली ने कहा कि ये मेरे करियर की दूसरी सर्वश्रेष्ठ पारी है. पहले नंबर पर मैं औस्ट्रेलिया के खिलाफ एडिलेड में खेली पारी को रखता हूं. उस मैच में उन्होंने 141 रन की पारी खेली थी. विराट ने कहा कि जौनसन, रेयान हैरिस और पीटर सिडल जैसे खतरनाक गेंदबाजों के आगे बल्लेबाजी करना बहुत कठिन था. ये टेस्ट मैच विराट कोहली और जौनसन के बीच विवाद को लेकर भी सुर्खियों में रहा था.

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विराट ने कहा कि उस पारी की बेस्ट बात ये थी कि वह लक्ष्य का पीछा करते हुए खेली थी. मुझे साफ पता था कि हम लक्ष्य हासिल कर लेंगे, मेरे दिमाग में एक बार भी ये नहीं आया कि हम हार भी सकते हैं. जब कोई बल्लेबाज ऐसी मानसिकता में बल्लेबाजी करता है तो बहुत मजा आता है. वहीं इस पारी के बारे में विराट ने कहा कि उमेश और इशांत ने उनका अच्छा सहयोग दिया.

टीम इंडिया ने आखिरी 2 विकेट के लिए 92 रन जोड़े थे, जो उस परिस्थिति में काफी काम आए. विराट ने कहा कि मैं पुछल्ले बल्लेबाजों के प्रदर्शन से खुश हूं. हार्दिक भी अच्छी बल्लेबाजी कर रहा था लेकिन जिस तरह इशांत और उमेश ने मेहनत की वह सच में काबिले तारीफ है. इन दोनों की वजह से ही हम पहली पारी में इंग्लैंड के स्कोर के आसपास पहुंच पाए.

अब हाईटेक होगी ज्वेलरी शौपिंग

अब तक आपने जब भी आभूषण खरीदे होंगे उन्हें शीशे के सामने खड़े होकर जरूर देखा होगा कि वे आप पर कैसे लग रहे हैं. लेकिन अब आप जब ज्वेलरी खरेदेंगी तो आपको शीशा नहीं बल्कि आईपैड पर स्मार्ट एंड डिजिटल मिरर मिलेगा जिसमें आप एक नहीं पूरे स्टोर की ज्वेलरी अपने चेहरे पर टेस्ट कर सकेंगी.

दरअसल पीसी ज्वेलर ने रियल टाइम ‘औगमेंटेड रियलिटी ज्वेलरी बाइंग एक्सपीरियंस’ की शुरुआत की घोषणा की है. पीसीजे एक स्टार्ट अप कम्पनी स्टाइलडोटमे के साथ मिलकर आईपैड में ‘मिरर’ पर ‘एआर एक्सपीरियंस’ दे रहा है. ये एक ऐसा प्लेटफार्म है, जो उपयोगकर्ताओं को वास्तव में ज्वेलरी पहने बिना ही रियल टाइम में वर्चूअली आभूषण पहनने का अवसर देता है. साथ ही खरीदारी करने से पहले ही विशेषज्ञों से तुरंत फैशन सलाह भी दिलाता है.

कान की बालीयों के कलेक्शन के माध्यम से ब्राउज करने के लिए, सभी ग्राहकों को आईपैड में ‘स्मार्ट मिरर’ में देखना है. जो ग्राहकों की उम्र के अनुसार हजारों बालियों की डाइनैमिक रेंज की डिजाइन दिखाएगी. एक ग्राहक वर्चूअली रियल टाइम में आभूषण पहन सकता है, साथ ही आभूषणों को छूकर, अपने कानों पर रियल टाइम में ट्राइ कर सकता है. वह अलग-अलग एंगल्स से गतिशील रूप से कान की बाली देख सकती है,

साथ ही वह न केवल उस दुकान में उपलब्ध, बल्कि देश के सभी कंपनी स्टोरों में उपलब्ध बालियों को देख सकती हैं. इससे उनके पास एक आभूषण के कई विकल्प मौजूद होंगे.तो तैयार हो जाइए 21वीं-सेंचुरी का खरीदारी अनुभव लेने के लिए यानी कि ज्वेलरी को जरा हाईटेक तरीके से खरीदने के लिए.

इसमें ग्राहकों को खुद खरीदने या आईपैड पर और्डर करने के लिए आभूषणों को चुनने में सुविधा देने के लिए प्राइस रेंज, संग्रह और श्रेणियों का ध्यान रखा गया है”. बता दें कि अभी दिल्ली-एनसीआर में इसकी शुरुआत की गई है और जल्द ही अन्य स्थानों पर भी एआर प्लेटफार्म को शुरू कर दिया जाएगा. इसका उद्देश्य मौल, मूवी थिएटर, हवाई अड्डे और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर स्टोरों से परे ब्रांड को लाने और निकट भविष्य में ग्राहकों तक पहुंचने का है.”

अब सिर्फ 60 दिन ही उड़ान भर पाएगी यह एयरलाइन

जेट एयरवेज के यात्रियों के लिए बुरी खबर है. एयरलाइन में वेतन कटौती और विभिन्न विभागों में छंटनी की आशंकाओं को लेकर जेट एयरवेज के पायलट और प्रबंधन के बीच विवाद बढ़ गया है. जेट एयरवेज ने कर्मचारियों से कहा है उसके लिए कंपनी को दो महीने से ज्यादा चला पाना मुमकिन नहीं है. पायलट समुदाय में मौजूद सूत्रों ने यह जानकारी दी. हालांकि, जेट एयरवेज ने 60 दिन से आगे एयरलाइन का कामकाज जारी नहीं रह पाने संबंधी खबरों को “गलत और दुर्भावनापूर्ण” बताया और हिस्सेदारी बेचने के लिए बातचीत की खबरों को भी खारिज किया.

एयरलाइन में हैं 16 हजार से ज्‍यादा कर्मचारी

सूत्रों ने कहा कि जेट एयरवेज ने कर्मचारियों को बताया कि कैप्टन के लिये एक वर्ष का नोटिस पीरियड भी खत्म कर दिया जाएगा. वर्तमान में जेट एयरवेज में 16,000 से ज्यादा कर्मचारी हैं. विमानन कंपनी ने कहा कि वह लागत खर्च को कम करने के लिए जरूरी कदम उठा रही है.

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नरेश गोयल के साथ हुई थी बैठक

पायलट सुमदाय के सूत्रों ने बताया कि इस हफ्ते की शुरुआत में कंपनी के शीर्ष प्रबंधन के साथ पायलट समेत अन्य कर्मचारियों की बैठक हुई थी. इसमें उन्हें बताया कि जेट एयरवेज की वित्तीय हालत खराब है और लागत को कम करने के लिए उनका सहयोग मांगा गया है. प्रस्तावित कदमों में वेतन कटौती भी शामिल है. इस बैठक में जेट एयरवेज के चेयरमैन नरेश गोयल, सीईओ विनय दुबे और डिप्टी सीईओ अमित अग्रवाल समेत अन्य लोग मौजूद रहे.

बस 60 दिन चल पाएगी कंपनी

सूत्रों के अनुसार, प्रबंधन ने बैठक में कहा कि अगर लागत को कम करने के लिए कदम नहीं उठाए गए तो कंपनी के पास 60 दिन से ज्यादा समय तक परिचालन करने के लिए पैसा नहीं है. जेट एयरवेज ने बंबई शेयर बाजार को बताया कि लागत को कम करने के साथ-साथ अधिक राजस्व के लिए कुछ कदम उठाए जा रहे हैं. जेट एयरवेज ने यह जानकारी बंबई शेयर बाजार द्वारा मीडिया में आई खबरों पर स्पष्टीकरण के जवाब में दी है. खबरों में कहा गया था कि विमानन कंपनी के लिए 60 दिन से ज्यादा परिचालन करना संभव नहीं है.

जीमेल से जुड़ीं कई तकनीक और तरकीब

आज के दौर में ई-मेल (Email) के लिए आउटलुक, याहू, हौटमेल जैसे माध्यम भी मौजूद हैं लेकिन गूगल के जीमेल (Gmail) की लोकप्रियता किसी से छिपी नहीं है. जीमेल से जुड़ीं कई तकनीक और तरकीब हैं, जिनकी मदद से आप मेलिंग को और सरल व सुविधाजनक बना सकते हैं. बता दें कि जीमेल यूजर के लिए मुफ्त मेल सेवा है. जिसकी शुरुआत अप्रैल 2004 में हुई थी.

आइए जानें ऐसे ही टिप्स और ट्रिक्स के बारे में जो जीमेल करने के आपके अनुभव को बना देंगे पहले से ज्यादा बेहतर:

ई-मेल को करें शेड्यूल

क्या आपको पता है कि ट्वीट और फेसबुक पोस्ट की तरह आप जीमेल को भी शेड्यूल कर सकते हैं. इसके लिए https://www.boomeranggmail.com/ बूमरेंग जीमेल की मदद लेनी होगी. इसमें आप अपना ई-मेल ड्राफ्ट कर आगे भेजने की समयसीमा तय कर सकते हैं. यह फीचर जी-मेल में पहले से नहीं आता. जैसा कि हमने पहले बताया, आपको बूमरेंग जीमेल इंस्टाल करना होगा.

एकसाथ एक से ज्यादा एकाउंट का इस्तेमाल

यह फीचर ज्यादातर Gmail यूजर को नहीं पता होता और वे अलग-अलग ब्राउजर में परेशान होते रहते हैं. इसके लिए आपको प्रोफाइल आइकन पर जाना होगा, जो ऊपर की तरफ दायीं ओर दिया रहता है. इसमें ‘एड एकाउंट’ विकल्प पर टैप करना होगा. यहां आईडी और पासवर्ड डालकर एक से ज्यादा एकाउंट मैनेज किए जा सकते हैं. इस तरह एक टैब से दूसरे टैब में जाकर कई एकाउंट मैनेज किए जा सकते हैं.

गूगल कैलेंडर

अगर आप रोजाना जीमेल का इस्तेमाल करते हैं और दिन-तारीख याद नहीं रखते तो यह फीचर काम का साबित हो सकता है. गूगल कैलेंडर फीचर को आप जीमेल एकाउंट में जोड़ सकते हैं. यह जीमेल लैब्स का फीचर है. इसके लिए आपको सेटिंग – लैब्स में जाना होगा. नीचे जाकर गुगल कैलेंडर गैजेट में जाकर उसे एनेबल करना होगा. इसके बाद आपको ‘सेव चेंजेस’ पर क्लिक करना होगा. इसे ऐलाउ करने के बाद गूगल कैलेंडर गैजेट आपके इनबौक्स में दिखना शुरू हो जाएगा.

गैर-जरूरी टैब को हटाना

Gmail में अगर आप प्राइमरी, सोशल, प्रमोशन, अपडेट्स और फोरम जैसे अनचाहे टैब हटाना चाहते हैं तो उसके लिए भी समाधान है. आप सेटिंग – इनबौक्स – कैटिगरीज में जाकर जिन टैब को हटाना चाहते हैं, टैप कर हटा सकते हैं.

जीमेल में नोटिफिकेशन को औन करना

इस ट्रिक के जरिए जीमेल यूजर को उनकी गतिविधियों  के बारे में नोटिफिकेशन मिलते रहते हैं. इसे एक्टीवेट करने के लिए ‘सेटिंग – जनरल – डेस्कटौप नोटिफिकेशन’ को सक्रिय करना होता है. जरूरत पड़ने पर इसे आसानी से औफ भी किया जा सकता है.

जब भेजनी हो बड़ी फाइलें

Gmail में डेटा भेजने की सीमा 25 एमबी है, यदि इससे ऊपर डेटा भेजना है तो विकल्प मौज़ूद है. आप गूगल ड्राइव के जरिए 10 जीबी तक की फाइल भेज सकते हैं, जिसके लिए आपको कोई अतिरिक्त चार्ज देने की जरूरत नहीं है. गूगल ड्राइव पर क्लिक करें, फाइल चुनें और उसे ई-मेल के जरिए अटैच कर संबंधित रिसीवर को भेज दें.

पहले से लिखे जवाब भेजने हों तो, करें ये काम

जीमेल में अगर आप किसी को खास तौर से पहले से लिखे जवाब देना चाहते हैं तो विकल्प है. इसके लिए ‘सेटिंग – लैब्स – एनेबल कान्ड रिस्पौन्सेस’ में जाना होगा. इस फीचर के जरिए आप अपने पहले से लिखे जवाब रिस्पौन्स के तौर पर दे पाएंगे.

थीम जोड़ना

अगर आप हर दिन जीमेल को एक ही रंग व डिज़ाइन में देखकर बोर हो चुके हैं तो यह तरकीब काम आएगी. इसके लिए आप ‘सेटिंग – थीम्स – सेट थीम’ में जाएं और मनचाही थीम से अपने जीमेल को सजा सकते हैं.

ऐसे लगाएं पता कि आपके एकाउंट को किसी और ने तो नहीं चलाया

अगर आपको शंका है कि आपके जीमेल एकाउंट को किसी ने खोला है, किसी ने सेंध मारने की कोशिश की है. तो आप जांच सकते हैं. मुख्य पेज में नीचे की ओर ‘लास्ट एकाउंट एक्टिविटी’ का विकल्प होता है. यहां डिटेल में जाकर आप ब्राउजर, आईपी एड्रेस और समय आदि की जानकारी ले सकते हैं.

जीमेल के इनबौक्स में मैसेज की संख्या

आम तौर पर जीमेल इनबौक्स में 50 मैसेज दिखते हैं. अगर आप इनकी संख्या बढ़ाना चाहते हैं और एक बारे में ज्यादा मैसेज देखना चाहते हैं तो उसके लिए भी तरकीब है. ‘सेटिंग – जनरल – मैक्सिमम पेज साइज’ पर जाएं. यहां आप पेज के हिसाब से मैसेज की संख्या को घटा और बढ़ा सकते हैं.

जीएसटी काउंसिल की अहम बैठक आज, इन मुद्दों पर होगी बात

जीएसटी काउंसिल की 29वीं बैठक शनिवार (4 अगस्‍त) को है. इसकी अध्‍यक्षता केंद्रीय वित्‍त मंत्री पीयूष गोयल करेंगे. इसमें सीमेंट, एसी और बड़े टेलीविजन सेट पर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरें कम होने की संभावना है. बड़ा फैसला यह हो सकता है पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाए, जिससे तेल की कीमतों में राहत मिलेगी.

बैठक से एक दिन पहले शुक्रवार को सुशील मोदी की अगुवाई वाले मंत्री स्तरीय समूह ने ‘कैशबैक’ के माध्यम डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इसके तहत रूपे कार्ड और भीम एप के जरिये डिजिटल भुगतान करने वालों को कैश बैक की सुविधा उपलब्ध होगी. मोदी ने यह भी कहा था कि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी दायरे में लाने पर विचार चल रहा है.

जेटली ने सीमेंट सस्‍ता होने की जताई थी उम्‍मीद

केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने हाल में कहा था कि राजस्व बढ़ने पर आने वाले समय में सीमेंट, एसी और बड़े टेलीविजन सेट पर जीएसटी दरें कम होंगी. केवल विलासिता और अहितकर उत्पाद ही कर की सबसे ऊंची 28 प्रतिशत की दर के दायरे में रह जाएंगे. जेटली ने अपने फेसबुक पेज पर एक लेख में कहा था कि जीएसटी से पहले की कर प्रणाली में घरों में इस्तेमाल होने वाले ज्यादातर सामान पर 31 प्रतिशत कर लगता था. उन्होंने उसे ‘कांग्रेसी विरासत कर’ का नाम दिया.

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जीएसटी राशि का 20% कैशबैक मिलेगा

मंत्री समूह के ‘कैशबैक’ के माध्यम डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन देने के प्रस्ताव को मंजूरी के बाद ग्राहक अगर रूपे कार्ड या भीम यूपीआई का उपयोग कर भुगतान करते हैं, उन्हें कुल जीएसटी राशि का 20 प्रतिशत ‘कैशबैक’ मिलेगा. इसकी अधिकतम सीमा 100 रुपये होगी. मंत्रियों के समूह की सिफारिशों को विचार के लिये आज जीएसटी परिषद के समक्ष रखा जाएगा.

बैठक में ये मुद्दे अहम

  • बिस्किट, चावल, बर्तन, चना, दलिया पर जीएसटी स्‍लैब घटाने पर फैसला सभंव.
  • छोटे-मझोले कारोबारियों की जीएसटी रिटर्न फाइलिंग से जुड़ी परेशानियों के समाधान पर फैसला संभव.
  • जीएसटी रजिस्ट्रेशन की सुविधा पैन इंडिया देने, सिंगल जीएसटी आईडी से पूरे देश में कारोबार करने, टर्नओवर की सीमा बढ़ाने और तिमाही रिटर्न पर हर माह टैक्स भरने से राहत अपील की सुविधा पर काउंसिल फैसला ले सकता है.

सौरव गांगुली का ये रिकौर्ड आज तोड़ सकते हैं विराट कोहली

टीम इंडिया और इंग्लैंड के बीच बर्मिंघम के एजबेस्टन में खेला जा रहा पहला टेस्ट रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया है. जीत के लिए 194 रनों का लक्ष्य हासिल करने के लिए टीम इंडिया ने 110 रनों पर 5 विकेट खो दिए हैं. उसे जीत के लिए 84 रनों की और जरूरत है. क्रीज पर उसकी आखिरी उम्मीद विराट कोहली और दिनेश कार्तिक हैं. कोहली 43 रन बनाकर एक बार फिर से क्रीज पर जम चुके हैं. क्रीज पर उनका टिका रहना ही टीम इंडिया के जीत की गारंटी होगी. इसके साथ ही वह इंग्लैंड की धरती पर एक नया रिकौर्ड बना देंगे.

पहले टेस्ट में विराट कोहली अब तक 301 बौल खेल चुके हैं. एक टेस्ट में सबसे ज्यादा बौल खेलने वाले भारतीय कप्तानों की श्रेणी में वह इस समय तीसरे नंबर पर हैं. एक टेस्ट में कप्तान के तौर पर सबसे ज्यादा बौल मंसूर अली खान पटौदी ने खेली थीं. उन्होंने 1967 के दौरे में लीड्स टेस्ट में एक टेस्ट मैच में 554 बौल खेली थीं.

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दूसरे नंबर पर सौरव गांगुली हैं. उन्होंने 2002 में नौटिंघम टेस्ट में 308 बौल खेली थीं. अब तीसरे नंबर पर कोहली हैं, जो इस टेस्ट मैच में अब तक 301 बौल खेल चुके हैं. इस टेस्ट में वह सौरव गांगुली का रिकौर्ड तोड़ सकते हैं. इसके साथ ही वह टीम इंडिया की जीत भी पक्की कर सकते हैं.

यहां पर ध्यान देने वाली बात ये है कि 2014 के दौरे में विराट कोहली ने पूरे दौरे में 288 बौल खेल पाई थीं. इस दौरे में पहले ही टेस्ट में उन्होंने कमाल कर दिया है. 2014 का विराट का दौरा सबसे खराब दौरा माना जाता है, लेकिन इस बार लगता है कि वह उस दौरे को अतीत बना चुके हैं.

2014 के दौरे में विराट कोहली ने पूरे दौरे में 288 बौल खेली थीं. इसमें उन्होंने 10 पारियों में 134 रन बनाए थे. इस दौरे में वह अकेले टीम इंडिया के खेवनहार बने हुए हैं. बाकी की पूरी टीम इंडिया की बल्लेबाजी बुरी तरह फ्लौप रही.

मुझे निगेटिव भूमिका निभाने की इच्छा है: इशिता दत्ता

हिंदी फिल्म ‘दृश्यम’ से अभिनय करियर की शुरुआत करने वाली अभिनेत्री इशिता दत्ता झारखण्ड के जमशेदपुर की हैं. फिल्मों में आने की प्रेरणा उन्हें उनकी बहन और अभिनेत्री तनुश्री दत्ता से मिली. स्वभाव से हंसमुख और नम्र इशिता ने हिंदी फिल्मों के अलावा तेलगू और कन्नड़ फिल्मों में भी काम किया है. इसके अलावा उन्होंने कई हिंदी धारावाहिकों में भी काम किया है.

काम के दौरान इशिता अभिनेता वत्सल सेठ से मिलीं और शादी की. अभी इशिता फिल्म ‘लस्टम पस्टम’ में मुख्य भूमिका निभा रही हैं. उनसे बात करना रोचक था पेश है कुछ अंश.

इस फिल्म को करने की खास वजह बताएं, आप कितनी उत्साहित हैं?

इसे करते हुए दो साल बीत गए हैं. मुझे इसकी कहानी सुनते ही पसंद आ गयी थी और उसी दिन स्क्रीन टेस्ट भी हो गया था. इसमें मैं एक यंग मदर की भूमिका निभा रही हूं. ये किरदार सबसे अलग था और मैं हर फिल्म में अलग-अलग भूमिका निभाना चाहती हूं, ताकि मैं ग्रो कर सकूं.

क्या इस तरह की यंग मदर की भूमिका निभाने से आपको टाइपकास्ट होने का डर नहीं?

मुझे ऐसा नहीं लगता, पहली फिल्म में मैंने एक बेटी की भूमिका निभाई थी, तो काफी लोगों ने मुझे कहा था कि आप ग्लैमरस रोल छोड़कर ऐसी भूमिका क्यों कर रही हो, पर मुझे कोई ऐतराज नहीं था. मेरे लिए प्रोजेक्ट और चरित्र काफी माइने रखता है. उससे मैं कितना सीखूंगी, इसे मैं देखती हूं. आजकल सबकुछ बदल रहा है. मेरी भूमिकाएं भी बदली है. आगे मैं एक फिल्म में पुलिस की भूमिका निभा रही हूं.

फिल्मों में आने की प्रेरणा कहां से मिली?

मुझे प्रेरणा अपनी बहन तनुश्री से मिली. मैं पढ़ाई के लिए मुंबई आई थी और उसी दौरान मौडलिंग, निर्देशक और कौस्टयूम डिजाइनर का काम करती रही. तब पता नहीं था कि मैं फिल्मों में काम करुंगी, लेकिन तनुश्री को लग रहा था कि मैं अभिनय कर सकती हूं. मुझे थोडा डर था, क्योंकि हमारे परिवार में दीदी के अलावा कोई भी फिल्म इंडस्ट्री से नहीं था. इसलिए सफलता मिलेगी या नहीं ये मन में था, लेकिन दीदी ने मुझे समझाया कि मैं कोशिश कर सकती हूं, ताकि बाद में कोई रिग्रेट मेरी जिंदगी में न रह जाय. मैंने कोशिश की, फिल्में व टीवी सिरियल्स मिलें और आज मैं खुश हूं.

क्या आउटसाइडर को काम मिलना मुश्किल होता है?

संघर्ष सभी को करना पड़ता है. मेरे लिए उतना नहीं था, क्योंकि मेरी बहन यहां काम कर रही थी. इसलिए रहने की जगह, वित्तीय सहायता, सही गाइडेंस सब दीदी से मिला. ये सही है कि आउटसाइडर को अच्छा काम मिलना मुश्किल होता है.

छोटे शहर से बड़े शहर में आकर काम करना कितना मुश्किल था?

मुश्किल होता है, क्योंकि कल्चर में बहुत अधिक विभिन्नता होती है, लेकिन बड़े शहर में काम करने की बहुत अधिक सहूलियत होती है. आजकल तो ये बहुत ट्रांसपेरेंट हो गया है. हर किसी को काम मिलता है. काम बहुत है और आज के यूथ के लिए अच्छा समय है.

रिजेक्शन को आप कैसे लेती हैं?

रिजेक्शन रोज होता है. जिस दिन मुझे लिया गया, उस दिन भी रिजेक्शन हुए ही होंगे. ऐसा मैं सोचती हूं और समस्या नहीं होती. कभी-कभी बुरा लगता है.

आपके जीवन का टर्निंग प्वाइंट क्या था?

धारावाहिक ‘एक घर बनाऊंगा’ मेरे जीवन की खास शो था, उसे करने के बाद मैंने बहुत कुछ सीखा था. फिल्मों की अगर बात करें, तो फिल्म ‘दृश्यम’ से मेरी पहचान हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में बनी.

फिल्मों में अन्तरंग दृश्य के लिए आप कितनी सहज होती हैं?

अगर कहानी की मांग हो, तो करने में कोई बुराई नहीं. आजकल कई ऐसे शाट्स इस तरह शूट किये जाते है कि वे नेचुरल लगते है. मैंने अपना कोई दायरा नहीं बनाया है. जैसी कहानी आती है, उसी हिसाब से मैं अपने आपको तैयार कर लेती हूं.

कास्टिंग काउच का कभी सामना करना पड़ा?

मुझे कभी नहीं करना पड़ा, पर मैं जानती हूं कि इंडस्ट्री में ये होता है. मैं उन युवाओं को जो इंडस्ट्री में आकर कुछ करना चाहते हैं, उनसे ये कहना चाहती हूं कि यहां कुछ भी शार्टकट नहीं होता. अगर आप प्रतिभावान हैं, तो आपको काम अवश्य मिलेगा.

आपके यहां तक पहुंचने में परिवार का सहयोग कितना रहा है?

परिवार में सभी इंजिनियर और डाक्टर हैं. इसके बावजूद हमें अपने मन के अनुसार काम करने की पूरी आजादी मिली है और मेरे पति वत्सल सेठ भी बहुत सहयोग देते हैं. उनके लिए मेरा काम काफी महत्व रखता है. मैं चाहती थी कि मेरा पति मेरे काम को समझने वाला हो और वे ऐसे ही हैं. पति ही नहीं बल्कि उनका पूरा परिवार मेरे काम को सम्मान देता है.

आपका ड्रीम प्रोजेक्ट क्या है?

मुझे निगेटिव भूमिका निभाने की इच्छा है. काजोल और प्रियंका चोपड़ा की नकारात्मक भूमिका मुझे बहुत पसंद है. निर्देशक इम्तियाज अली और आर माधवन के साथ काम करने की इच्छा है.

कितनी फैशनेबल और फूडी हैं?

मेरे लिए फैशन आरामदायक कपड़े का होना है. जींस और टी शर्ट मुझे बहुत पसंद है. मुझे इंडियन ड्रेस पहनना बहुत पसंद है. साड़ी और सूट्स मैं अधिकतर पहनती हूं. मुझे खाने में थोड़ी परहेज करना पड़ता है, पर मुझे स्वादिष्ट भोजन पसंद है. मुझे खाना बनाना आता है. मेरे पति गुजराती हैं, उनके लिए मैंने ढोकला बनाना सीखा है.

अभी जिंदगी कितनी बदली है?

फिल्मों में आने के बाद जिंदगी काफी बदली है. ये ग्लैमर वर्ल्ड है. जब लोग मेरे अभिनय की तारीफ करते हैं, तो बहुत खुशी मिलती है. मैं सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहने लगी हूं.

महिलाओं के साथ अत्याचार और रेप की घटनाएं आम हो चली है, इसके लिए आप किसे जिम्मेदार मानती हैं?

कानून का ढीलापन ही इसे बढ़ावा देता है. किसी को कानून का डर नहीं. हमारे देश में सख्त कानून व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि 2 साल 3 साल की बच्चियों के साथ रेप करने से वे डरे. अपराधी की रूह कापें. रेप ही नहीं ‘ईवटीजिंग’ पर भी कानून मजबूत होना चाहिए. इसके अलावा स्कूल में इस बारें में बातचीत करना जरुरी है.

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