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इन टिप्स को अपनाकर आप भी कर सकती हैं गुस्से को काबू

क्या आप ने ‘एंग्री बर्ड’ मूवी देखी है? इस में मुख्य पात्र को गुस्सा आता है, इसलिए वह पक्षियों की बस्ती से दूर सागर के किनारे रहता है. मगर जब वह अपने गुस्से पर नियंत्रण करना सीख जाता है तो बस्ती का हीरो बन जाता है. मूवी में यही सीख है कि गुस्सा किसी भी चीज का हल नहीं है.

यह सच है कि गुस्सा एक प्राकृतिक और सामान्य भावना है. यह इंसान की एक शारीरिक प्रतिक्रिया है. अगर यह कहें कि गुस्सा इंसान की खुशी और गम की तरह एक भावना है तो गलत नहीं होगा. लेकिन कभीकभी गुस्सा इतना बढ़ जाता है कि वह स्वयं की और आसपास के लोगों की खुशियों पर अपना प्रभाव डालने लगता है.

जीवन में खुशियां, परेशानियां आतीजाती रहती हैं. गुस्सा कर के रिश्तों में दरार न पैदा करें. यह पता लगाएं कि किन हालात में गुस्सा बढ़ता है. हालात और कारणों को समझें और उन से उपजी परेशानियों को दूर करने का प्रयास करें. गुस्से को दबाएं नहीं, बल्कि इस के कारणों को पहचानें और दूर करने का प्रयास करें. आप के गुस्से से किसी और का फायदा हो सकता है, लेकिन आप का सिर्फ नुकसान ही होगा. आप का गुस्सा आप का नुकसान. गुस्सा रिश्तों को बिगाड़ता है, गलतफहमियों को भी जन्म देता है. ठंडे दिमाग से ही चीजें सुलझती हैं. गुस्से का अंत पछतावे पर होता है. यह चारित्रिक दोष है.

यों शांत करें गुस्सा

जब भी गुस्सा आए, ये आसान टिप्स आजमा कर देखें, गुस्सा छूमंतर हो जाएगा:

– पानी पीएं.

– तय कर लें कि जिस बात पर आप को गुस्सा आया है, उस की प्रतिक्रिया आप 48 घंटे बाद देंगी. क्या चमत्कार होगा, आप देख कर स्वयं ही हैरान रह जाएंगी.

– जब भी गुस्सा आए, कोई गाना गाना शुरू कर दें या कोई म्यूजिकल इंस्ट्रूमैंट बजाएं.

– जब गुस्सा आ रहा हो अपने स्मार्टफोन का फायदा उठाएं, नोटिफिकेशन देखना शुरू कर दें. डिस्काउंट्स देखना शुरू कर दें. फिर देखिए आप का गुस्सा अपनेआप गायब होता चला जाएगा.

– एक आजमाया हुआ फार्मूला-उलटी गिनती यानी 100 से 0 तक उलटी गिनती मन ही मन शुरू कर दें.

– गुस्से के समय आई ऐनर्जी का यूज करें. लंबी सैर पर निकल सकती हैं तो निकल जाएं. लौटने तक खुद को अच्छा, खुश और शांत महसूस करेंगी.

– कमान से निकला तीर, मुंह से निकला शब्द कभी वापस नहीं आता. गुस्सा जब आए तो बोलें नहीं. लिखना शुरू कर दें. आप को बाद में लगेगा वाह, क्या राइटर हैं आप.

– गहरी सांसें लें

– बुजुर्गों से बातें करें. बच्चों के साथ खेलना शुरू कर दें.

– जिस जगह गुस्सा आ रहा हो, उस जगह से फौरन हट जाएं.

– खूब अच्छी नींद लें. सो कर उठने पर गुस्सा स्वत: शांत हो चुका होगा.

क्या कहती हैं हस्तियां

कई मशहूर हस्तियों ने भी क्रोध पर अपने विचार व्यक्त किए हैं:

– क्रोध के कारण की तुलना में उस के परिणाम कितने गंभीर होते हैं- मार्क्स औरलेस

– एक क्रोधित व्यक्ति अपना मुंह खोल लेता है और आखें बंद कर लेता है- कैटो

– अपने दुश्मनों को हमेशा खीझ भरे खत लिखें, उन्हें कभी भेजें नहीं- जोन्स फैलोज

– क्रोध वह तेजाब है जो किसी भी चीज, जिस पर वह डाला जाए, से ज्यादा उस पात्र को हानी पहुंचा सकता है, जिस में वह रखा है- मार्क ट्वेन.

अब जब गुस्से से सब से ज्यादा नुकसान गुस्सा करने वाले को ही पहुंचता है, तो अपना नुकसान क्यों करें? गुस्सा दूर करने के उपायों पर गौर करें, शांत रहें, प्रसन्न रहें. जो गुस्सा किसी काम का नहीं, फौरन उस से छुटकारा पा लें.

बाप का इश्क बेटी को ले डूबा

उत्तर प्रदेश के जिला वाराणसी के रहने वाले भालचंद्र सरोज अपने परिवार के साथ महानगर मुंबई के तालुका वसई के उपनगर नालासोपारा की साईं अपर्णा बिल्डिंग में लगभग 30 सालों से रह रहे थे. अपनी रोजीरोटी के लिए उन्होंने उसी बिल्डिंग के परिसर में किराने की दुकान खोल ली थी. परिवार में उन की पत्नी के अलावा एक बेटा संतोष सरोज था, जिस की शादी उन्होंने मालती नाम की लड़की से कर दी थी. संतोष की एक बेटी थी अंजलि. भालचंद्र सरोज का एक छोटा सा परिवार था, उन का जीवन हंसीखुशी के साथ व्यतीत हो रहा था. संतोष 10वीं जमात से आगे नहीं पढ़ सका था, इसलिए भालचंद्र ने उसे एक आटोरिक्शा खरीदवा दिया था. किराने की दुकान और आटो से जो कमाई होती थी, उस से उन की घरगृहस्थी आराम से चल रही थी.

अंजलि अपने मातापिता के अलावा दादादादी की भी लाडली थी. संतोष भले ही खुद नहीं पढ़लिख सका था, लेकिन बेटी को उच्चशिक्षा दिलाना चाहता था. इसीलिए उस ने अंजलि का दाखिला जानेमाने लोकमान्य तिलक इंगलिश स्कूल में करवा दिया था. परिवार में सब कुछ ठीकठाक चल रहा था. इसी दौरान एक ऐसी घटना घटी, जिस का दुख यह परिवार जिंदगी भर नहीं भुला सकेगा.

बात 24 मार्च, 2018 की है. संतोष सरोज की 5 वर्षीय बेटी अंजलि हमेशा की तरह उस शाम 7 बजे बच्चों के साथ खेलने के लिए बिल्डिंग से नीचे आई तो फिर वह वापस नहीं लौटी. वह बच्चों के साथ कुछ देर तक तो अपने दादा भालचंद्र सरोज की दुकान के सामने खेलती रही. फिर वहां से खेलतेखेलते कहां गायब हो गई, किसी को पता नहीं चला.

जब वह 8 बजे तक वापस घर नहीं आई तो उस की मां मालती को उस की चिंता हुई. जिन बच्चों के साथ वह खेलने गई थी, मालती ने उन से पूछताछ की तो उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर की. उसी दौरान संतोष घर लौटा तो मालती ने बेटी के गुम हो जाने की बात पति को बताते हुए उस का पता लगाने के लिए कहा.

संतोष बिल्डिंग से उतरने के बाद अंजलि को इधरउधर ढूंढने लगा. वहीं पर उस के पिता की दुकान थी. वह पिता की दुकान पर पहुंचा और उन से अंजलि के बारे में पूछा. पोती के गायब होने की बात भालचंद्र को थोड़ी अजीब लगी. उन्होंने बताया कि कुछ देर पहले तक तो वह यहीं पर बच्चों के साथ खेल रही थी. इतनी देर में कहां चली गई.

उन्हें भी पोती की चिंता होने लगी. वह भी दुकान बंद कर के बेटे के साथ उसे ढूंढने के लिए निकल गए. संभावित जगहों पर तलाशने के बाद भी जब वह नहीं मिली तो उन की चिंता और बढ़ गई.

अंजलि के गायब होने की बात जब पड़ोस के लोगों को पता चली तो वे भी उसे खोजने लगे. वहां आसपास खुले गटर और नालों को देखने के बाद भी अंजलि का कहीं पता नहीं चला. बेटी की चिंता में मां मालती की घबराहट बढ़ती जा रही थी. चैत्र नवरात्रि होने की वजह से लोग यह भी आशंका व्यक्त कर रहे थे कि कहीं उसे तंत्रमंत्र की क्रियाएं करने वालों ने तो गायब नहीं कर दिया.

सभी लोग अंजलि की खोजबीन कर के थक गए तो उन्होंने पुलिस की मदद लेने का फैसला किया. लिहाजा वे रात करीब 11 बजे तुलीज पुलिस थाने पहुंच गए. थानाप्रभारी किशोर खैरनार से मिल कर उन लोगों ने उन्हें सारी बातें बताईं और अंजलि की गुमशुदगी दर्ज करवा दी. अंजलि का सारा विवरण दे कर उन्होंने उस का पता लगाने का अनुरोध किया. थानाप्रभारी ने अंजलि का पता लगाने का आश्वासन दे कर उन्हें घर भेज दिया.

थाने से घर लौटे सरोज परिवार का मन अशांत था. उन का दिल अपनी मासूम बच्ची को देखने के लिए तड़प रहा था. वह रात उन के लिए किसी कालरात्रि से कम नहीं थी. सुबह होते ही संतोष सरोज का परिवार फिर से अंजलि की खोज में निकल गया. उन्होंने उस की गुमशुदगी के पैंफ्लेट छपवा कर रेलवे स्टेशनों के अलावा बसस्टैंड और सार्वजनिक जगहों पर लगवा दिए.

उधर थानाप्रभारी किशोर खैरनार ने अंजलि की गुमशुदगी की जांच सहायक पीआई के.डी. कोल्हे को सौंप दी. के.डी. कोल्हे ने जब मामले पर गहराई से विचार किया, तो उन्हें लगा कि या तो बच्ची का फिरौती के लिए अपहरण किया गया है या फिर उसे किसी दुश्मनी या तंत्रमंत्र क्रिया के लिए उठा लिया गया है.

उन्होंने सरोज परिवार से भी कह दिया कि यदि किसी का फिरौती मांगने के संबंध में फोन आए तो वह उस से प्यार से बात करें और इस की जानकारी पुलिस को जरूर दे दें.

जांच के लिए पीआई के.डी. कोल्हे ने पुलिस की 6 टीमें तैयार कीं, जिस में उन्होंने एपीआई राकेश खासरकर, नितिन विचारे, शिवाजी पाटिल, एसआई भरत सांलुके, हैडकांस्टेबल सुरेश शिंदे, कांस्टेबल भास्कर कोठारी, महेश चह्वाण आदि को शामिल किया. सभी टीमें अलगअलग तरीके से मामले की जांच में जुट गईं.

पुलिस ने अंजलि के फोटो सहित गुमशुदगी का संदेश अनेक वाट्सऐप गु्रप में भेजा और उसे अन्य लोगों को भी भेजने का अनुरोध किया. पीआई के.डी. कोल्हे दूसरे दिन अपनी जांच की कोई और रूपरेखा तैयार करते, इस के पहले ही उन्हें स्तब्ध कर देने वाली एक खबर मिली.

खबर गुजरात के नवसारी रेलवे पुलिस की तरफ से आई थी. रेलवे पुलिस ने मुंबई पुलिस को बताया कि जिस बच्ची की उन्हें तलाश है, वह बच्ची मृत अवस्था में नवसारी रेलवे स्टेशन के बाथरूम में पड़ी मिली है. किसी ने गला काट कर उस की हत्या की है.

सूचना मिलते ही पुलिस की एक टीम अंजलि के परिवार वालों को ले कर तुरंत नवसारी रेलवे स्टेशन के लिए रवाना हो गई. नवसारी रेलवे पुलिस ने जब संतोष सरोज और उस के परिवार वालों को बच्ची की लाश दिखाई तो वे सभी दहाड़ मार कर रोने लगे, क्योंकि वह लाश अंजलि की ही थी.

जरूरी काररवाई पूरी कर के मुंबई पुलिस बच्ची के शव को अपने कब्जे में ले कर मुंबई लौट आई और उसे पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया. इधर जब अंजलि की हत्या की बात उस बिल्डिंग और आसपड़ोस के रहने वालों को पता लगी तो लोगों में आक्रोश फूट पड़ा.

देखते ही देखते पुलिस स्टेशन के सामने हजारों की भीड़ जमा हो गई. भीड़ पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करने लगी. भीड़ तब तक शांत नहीं हुई, जब तक एसएसपी राजतिलक रोशन, एसपी मंजुनाथ शिंगे और एएसपी जयंत वंजवले ने पुलिस थाने आ कर 24 घंटे के अंदर हत्यारे को गिरफ्तार करने का आश्वासन नहीं दिया.

मामले को तूल पकड़ते देख पुलिस के बड़े अधिकारियों की आंखों से नींद गायब हो गई थी. उन्होंने जांच टीम को शीघ्र से शीघ्र अंजलि के हत्यारों को गिरफ्तार करने का निर्देश दिए. पुलिस टीम ने अंजलि के परिवार और आसपास के लोगों से गहराई से पूछताछ करने के अलावा इलाके में लगे सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली. लोकमान्य तिलक स्कूल के एक सीसीटीवी कैमरे की फुटेज में अंजलि एक महिला के साथ नालासोपारा स्टेशन की तरफ जाते हुए दिखाई दी.

वह महिला कौन थी और कहां से आई थी, यह जानने के लिए पुलिस टीम ने उस का स्केच बनवा कर जब मामले की जांच की तो पता चला कि वह महिला कई बार अंजलि के स्कूल और उस के घर साईं अपर्णा बिल्डिंग के आसपास संदिग्ध अवस्था में दिखाई दी थी. जिस दिन अंजलि गायब हुई थी, उस दिन भी वह बिल्डिंग परिसर में आई थी.

पुलिस जांच का चक्र तेजी से घूम रहा था. उस महिला का स्केच पूरे शहर में चिपकवाने के अलावा जनपद के सभी पुलिस थानों को भी भेज दिया गया. इस के अलावा स्केच अंजलि के पिता संतोष सरोज को भी दिखाया गया.

स्केच देखते ही संतोष ने अपना सिर पीट लिया. उस ने कहा कि यह तो उस की प्रेमिका है. पुलिस ने संतोष को सीसीटीवी कैमरे में अंजलि के साथ जाने वाली उस महिला की फुटेज दिखाई तो संतोष ने कहा कि यह उस की प्रेमिका अनीता वाघेला है और यह नालासोपारा (पूर्व) के नगीनदास पाड़ा इलाके में रहती है.

बिना देर किए पुलिस टीम अनीता के घर पहुंच गई. वह घर पर ही मिल गई. पुलिस उसे हिरासत में ले कर थाने लौट आई. पुलिस ने जब उस से अंजलि की हत्या के बारे में पूछताछ की तो उस ने आसानी से अपना जुर्म स्वीकार कर लिया. अनीता से पूछताछ के बाद अंजलि की हत्या की जो कहानी सामने आई, वह प्यार में चोट खाई नागिन के प्रतिशोध वाली निकली—

22 साल की अनीता का रंग हालांकि बहुत साफ नहीं था, लेकिन कुदरत ने उसे कुछ इस तरह गढ़ा था कि जो भी उसे देखता, देखता ही रह जाता था. सांवले सौंदर्य की मालकिन अनीता के जिस्म की कसावट और फिगर देख मनचले गहरी सांसें लेते हुए फिकरे कसते थे. इस के अलावा अनीता खुले विचारों वाली महत्त्वाकांक्षी युवती थी.

आमतौर पर अनीता जैसी महत्त्वाकांक्षी युवतियां जो सपने देखती हैं, उन्हें किसी भी कीमत पर या कोई भी जोखिम उठा कर पूरा करने की कोशिश करती हैं.

यह अलग बात है कि इस के लिए उन्हें जो कीमत चुकानी पड़ती है, वह कभीकभी भारी पड़ जाती है. तब उन के पास हाथ मलने और अपनी नादानियों पर पछताने के सिवा कुछ नहीं रह जाता. यही हाल अनीता का हुआ था. वह आंख मूंद कर संतोष सरोज पर भरोसा कर के प्यार करने की भूल कर बैठी थी.

मूलरूप से गुजरात की रहने वाली अनीता वाघेला अपने मातापिता और भाईबहनों के साथ नालासोपारा (पूर्व) के नगीनदास पाड़ा इलाके में रहती थी. वह अपने और परिवार के लिए कैटरिंग का काम किया करती थी. उस की और संतोष सरोज की मुलाकात करीब 7 साल पहले नगीनदास पाड़ा के आटो स्टैंड पर हुई थी.

उस दिन वह अपने काम पर जाने के लिए काफी लेट हो रही थी. तब वह अपनी मंजिल तक संतोष के आटोरिक्शा से पहुंची थी. अनीता आटो से उतर कर चली तो गई लेकिन उस की शोख चंचल निगाहें, मुसकराता चेहरा संतोष के दिमाग में ही घूमता रह गया. उस की पहली ही झलक में संतोष अपना होशोहवास खो बैठा था, यह जानते हुए भी कि वह एक शादीशुदा और एक बच्ची का बाप है.

लेकिन वह यह सब भूल कर अनीता का सामीप्य पाना चाहता था. इस के लिए वह अकसर नगीनदास पाड़ा के आटो स्टैंड पर अनीता के आने का इंतजार करता था. वह दिख जाती तो वह मुसकराते हुए उस से अपने आटो में चलने की बात कहता. अनीता को तो किसी न किसी आटो से जाना ही था, लिहाजा वह संतोष के आग्रह पर उस के ही आटो में बैठ जाती.

2-4 बार संतोष के आटो से आनेजाने के बाद अनीता और संतोष के बीच बातों का सिलसिला शुरू हो गया. स्वयं को अविवाहित बता कर उस ने अनीता को अपने प्रभाव में ले लिया. बातों और मिलने का सिलसिला शुरू हो गया तो दोनों एकदूसरे के करीब आ गए. जब भी अनीता को संतोष के साथ कहीं घूमने के लिए जाना होता तो वह संतोष को बेझिझक फोन कर बुला लेती. इस तरह दोनों में गहरी दोस्ती हो गई.

दोस्ती का दायरा बढ़ा तो अनीता के मन में संतोष के प्रति प्यार का अंकुर फूट पड़ा. वह सरोज को अपने मनमंदिर में बैठा कर गृहस्थ जीवन के सुंदर सपने देखने लगी. जिस का संतोष ने भरपूर फायदा उठाया.

उस ने अनीता को शादी का लालच दे कर उस का अपनी पत्नी की तरह इस्तेमाल किया. 7 सालों में अनीता 2 बार गर्भवती भी हुई. लेकिन संतोष ने अपनी कोई न कोई मजबूरी बता कर उस का गर्भपात करवा दिया था.

7 सालों का समय कुछ कम नहीं होता. संतोष और अनीता के संबंधों की सारी जानकारी उस के परिवार वालों को हो चुकी थी. वे लोग अब उस पर शादी करने का दबाव बनाने लगे थे. अनीता भी अब और ज्यादा इंतजार नहीं करना चाहती थी.

वह भी अपने और संतोष के प्यार को रिश्ते का नाम देने के लिए दबाव बनाए हुए थी. वह उस से शादी कर के अपना एक घर बनाना चाहती थी. इस से संतोष की परेशानी बढ़ गई थी.

संतोष शादीशुदा और एक बच्ची का बाप था. वह अनीता की वजह से अपने परिवार की शांति भंग नहीं करना चाहता था. लेकिन जब पानी संतोष के गले तक आ गया तो मजबूरन उसे अनीता के सामने अपना मुंह खोलना पड़ा. अनीता को एक अच्छे माहौल में ले जा कर उस ने अपने शादीशुदा होने की बात बता दी.

उस ने कहा कि उस की शादी गांव और जाति के रस्मोरिवाज से बचपन में ही हो गई थी और अब वह एक बच्ची का पिता भी है.

ऐसे में अगर वह दूसरी शादी करेगा तो उस की ब्याहता का क्या होगा. उस ने साफ कह दिया कि अब वह दूसरी शादी नहीं कर सकता. लेकिन वह चाहे तो उस के साथ जीवन भर रह सकती है. उसे किसी भी तरह की परेशानी नहीं होने देगा.

यह जान कर अनीता सन्न रह गई. उसे लगा कि उस के ऊपर कोई पहाड़ गिर पड़ा. उसे लगा कि मानो उस का अस्तित्व ही खत्म हो गया. कुछ समय के लिए तो वह एक मूर्ति जैसी बन गई, लेकिन जब होश आया तो वह पागल सी हो गई थी. उस दिन अनीता और संतोष के बीच काफी कहासुनी और लड़ाईझगड़ा हुआ था.

संतोष की इस बात से अनीता काफी आहत हुई थी. उस के दिल में संतोष के प्रति नफरत हो गई. जाहिर सी बात है कोई भी लड़की तलाकशुदा या विधवा हो कर रह सकती है, लेकिन रखैल बन कर रहना पसंद नहीं करेगी.

काफी सोचनेविचारने के बाद अनीता ने यह तय किया कि बच्चे और प्यार का गम क्या होता है, अब वह संतोष को समझाएगी. जिस तरह से उस ने उस के 2-2 बच्चों का खून किया था, उस का बदला वह उसी तरह से चुकाएगी. तब उसे यह एहसास होगा कि बच्चा चाहे गर्भ में हो या गर्भ से बाहर, उसे खोने में कितना दर्द होता है.

अनीता ने संतोष की बेटी अंजलि के प्रति एक खतरनाक योजना बना कर उस के घर और स्कूल का पता लगा लिया और उस की अच्छी तरह रेकी की. पहले उस की योजना अंजलि को स्कूल से उठाने की थी, लेकिन स्कूल की चाकचौबंद सुरक्षा और अकसर मां के साथ होने के कारण उस का प्लान सफल नहीं हो सका.

इस के बाद उस ने संतोष के घर के पास से ही अंजलि को उठा लिया था. अंजलि को उठाने के पहले वह उस जगह पर आ कर बैठ जाती थी, जहां अंजलि बच्चों के साथ खेला करती थी.

मौका देख कर वह अंजलि को अपने पास बुला कर टौफी और चौकलेट दिया करती थी. 2-4 दिनों में जब अंजलि उस के काफी करीब आ गई तो वह उसे अपनी मीठीमीठी बातों में बहला कर अपने साथ ले कर चली गई.

अंजलि को पहले वह लोकमान्य तिलक स्कूल तक पैदल ले कर आई. फिर आटोरिक्शा से नालासोपारा रेलवे स्टेशन ले गई. वारदात को अंजाम देने के लिए उस ने अपने पास चाकू रख लिया था.

नालासोपारा स्टेशन से बोरीवली स्टेशन और फिर वहां से एक्सप्रेस ट्रेन पकड़ कर वह गुजरात के नवसारी रेलवे स्टेशन पहुंची. वहां मौका देख कर वह अंजलि को बाथरूम में ले गई और उस 5 वर्षीय बच्ची का गला काट कर हत्या कर दी.

अपने इंतकाम का बदला लेने के बाद अनीता सुबह की गाड़ी से अपने घर लौट आई थी. वह निश्चिंत थी कि पुलिस उस के पास तक नहीं पहुंच सकेगी. लेकिन पुलिस उस तक पहुंच ही गई.

अनीता वाघेला से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उस के विरुद्ध भादंवि की धारा 302, 362 के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे तलोजा जेल भेज दिया गया.

अंजलि सरोज की हत्या की कहानी जब लोगों के सामने आई तो उस के परिवार वालों को तो क्या पूरे इलाके के लोगों को एक धक्का सा लगा. एक मासूम बच्ची अपने पिता के इश्क की भेंट चढ़ गई थी.

कथा लिखे जाने तक अनीता वाघेला जेल में बंद थी. आगे की जांच पीआई के.डी. कोल्हे कर रहे थे.

6 टुकड़े करने के बाद मांगी 50 लाख की फिरौती

मूलरूप से मुजफ्फरपुर, बिहार के रहने वाले रामनाथ यादव सालों पहले काम की तलाश में दिल्ली आए थे. वह पढ़ेलिखे थे, इसलिए किसी अच्छी कंपनी में नौकरी ढूंढने लगे. जब उन के मनमुताबिक नौकरी नहीं मिली तो उन्होंने एक सीए के यहां नौकरी कर ली. नौकरी मिल गई तो वह अपने बीवीबच्चों को भी दिल्ली ले आए और परिवार के साथ पश्चिमी दिल्ली के नांगलोई रोड पर स्थित अग्रसेन पार्क में रहने लगे. उन के परिवार में पत्नी के अलावा 2 बेटियां और एक बेटा सचिन यादव था.

21 साल का सचिन कृष्णा मंदिर नजफगढ़ के पास स्थित बालाजी कारपेट की दुकान पर नौकरी करता था. रामनाथ ने सचिन की शादी कर दी थी. करीब 2 महीने पहले ही सचिन के बेटा हुआ था. घर में बच्चे की किलकारियां गूंजने से सभी खुश थे. लेकिन इसी साल मई के दूसरे सप्ताह में उन के घर में एक ऐसी घटना घटी, जिसे यह परिवार जिंदगी भर नहीं भुला सकेगा.

दरअसल 12 मई, 2018 को सुबह करीब साढ़े 7 बजे सचिन के मोबाइल पर किसी की काल आई. फोन पर बात करने के कुछ देर बाद वह किसी के साथ बाइक पर बैठ कर निकल गया. जब 2 घंटे बाद भी सचिन घर नहीं लौटा तो घर वालों ने उस का फोन नंबर मिलाया, पर उस का फोन स्विच्ड औफ मिला.

सचिन वैसे तो कभी भी अपना फोन बंद नहीं करता था, पर फोन बंद आने पर घर वालों ने सोचा कि शायद उस के फोन की बैटरी डाउन हो गई होगी.

उस के एकाध घंटे बाद उन्होंने फिर से सचिन का नंबर मिलाया. इस बार भी उस का फोन बंद ही मिला. घर वालों ने सोचा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि वह उधर से ही अपनी ड्यूटी पर चला गया हो. इस बात की पुष्टि करने के लिए रामनाथ यादव ने बालाजी कारपेट की दुकान का फोन मिलाया. वहां बात करने पर पता चला कि वह दुकान पर नहीं पहुंचा है.

यह जानकारी मिलने के बाद घर वालों का परेशान होना लाजिमी था. फिर तो उन्होंने उस के यारदोस्तों और जानपहचान वालों के पास फोन करने शुरू कर दिए.

रामनाथ यादव पूरे दिन इधरउधर बेटे को तलाशते रहे, लेकिन कहीं से भी उस के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं मिली. जवान बेटे के गायब होने के बात रामनाथ के परिचितों को पता लगी तो वह भी खोजने में उन की मदद करने लगे.

बीचबीच में घर वाले सचिन का फोन भी मिलाते रहे लेकिन उस का फोन बंद ही मिलता रहा. सचिन की पत्नी, मां और बहनों का तो रोरो कर बुरा हाल था. 12-13 मई की रात को घर के सभी लोगों की नींद गायब थी. सभी की निगाहें दरवाजे पर ही लगी हुई थीं.

कभीकभी तो उन के दिमाग में सचिन को ले कर तरहतरह के विचार आते. सभी लोग यह नहीं समझ पा रहे थे कि आखिर सचिन मोटरसाइकिल पर बैठ कर कहां चला गया. सचिन जिस युवक के साथ गया था, उसे कोई नहीं जानता था.

घर वाले सभी संभावित जगहों पर सचिन को ढूंढ चुके थे. इस के बावजूद भी 13 मई की पौ फटने के बाद वह फिर से सचिन की तलाश में जुट गए. चारों ओर से हताश होने के बाद जब उस का कहीं पता नहीं चला तो आखिर वह क्षेत्र के थाना हरिदासनगर पहुंच गए.

रामनाथ ने थानाप्रभारी को सचिन के गायब होने की बात बताई. थानाप्रभारी ने सचिन की गुमशुदगी दर्ज कर ली. उस की गुमशुदगी दर्ज करने के बाद उन्होंने वह सब जरूरी काररवाई की, जो किसी की भी गुमशुदगी दर्ज होने के बाद अमूमन की जाती है. मसलन सभी थानों को गुम हुए व्यक्ति का हुलिया भेजना, पैंफ्लेट छपवा कर सार्वजनिक स्थानों पर चिपकवाना आदि.

अपने स्तर से पुलिस भी सचिन का पता लगाने में जुट गई. सचिन 21 साल का युवक था, इस बात को देखते हुए इस बात की भी आशंका जताई जा रही थी कि कहीं उस का किसी के साथ कोई अफेयर तो नहीं चल रहा था.

हालांकि वह शादीशुदा था, लेकिन प्यारमोहब्बत के मामले में किसी का कुछ नहीं कहा जा सकता. इसलिए पुलिस उस के दोस्तों से यह जानने में लग गई कि कहीं उस का किसी लड़की के साथ कोई चक्कर तो नहीं था. दोस्तों ने थानाप्रभारी को बताया कि सचिन इस किस्म का नहीं था. और तो और वह किसी से फालतू बात तक नहीं करता था.

सचिन को गायब हुए 3 दिन बीत चुके थे, न तो पुलिस और न ही सचिन के घर वालों को उस के बारे में कोई जानकारी मिल पा रही थी. 15 मई को सचिन की बहन ने फिर सचिन का फोन नंबर मिलाने की कोशिश की तो उस दिन उस का नंबर मिल गया. इस से बहन बहुत खुश हुई. लेकिन फोन उस के भाई के बजाय किसी और ने उठाया. बहन ने जब सचिन के बारे में पूछा तो उस व्यक्ति ने कहा कि सचिन अभी टायलेट में है.

पास में रामनाथ यादव भी थे. बेटी से हो रही बातचीत को सुन कर उन्हें लगा कि सचिन के बारे में शायद जानकारी मिल गई है. इसलिए बेटी से फोन ले कर वह खुद बात करने लगे.

उन्होंने भी उस शख्स से बेटे के बारे में जानकारी हासिल करनी चाही, लेकिन वह शख्स उन्हें इधरउधर की बातें सुनाने लगा. उन्होंने जब पूछा कि वह कौन और कहां से बोल रहे हैं तो वह रामनाथ यादव से उलटीसीधी बातें करने लगा. इतना ही नहीं, वह उन्हें धमकी भी देने लगा. इस के बाद उस ने फोन काट दिया.

रामनाथ ने फिर से बेटे का नंबर मिलाया, लेकिन इस बार वह स्विच्ड औफ हो गया. वह घबरा गए कि जो शख्स उन से बात कर रहा था वह कौन था. कहीं ऐसा तो नहीं कि सचिन का किसी ने अपहरण कर लिया हो. वह घबराए हुए सीधे थाना हरिदासनगर पहुंचे और थानाप्रभारी को बात बताई.

थानाप्रभारी ने उसी समय अपने फोन से सचिन का नंबर मिलाया तो वह स्विच्ड औफ मिला. मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने सचिन यादव के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कर ली. इस के बाद पुलिस ने सचिन के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाने की काररवाई शुरू कर दी.

15 मई, 2018 को ही रामनाथ यादव के पास उन के बेटे सचिन के फोन से काल आई. अपने फोन स्क्रीन पर बेटे का नंबर देख कर रामनाथ यादव खुश हो गए. उन्होंने जैसे ही काल रिसीव की, तभी दूसरी ओर से किसी ने रौबदार आवाज में कहा, ‘‘तुम घबराओ मत, सचिन हमारे कब्जे में है. यदि तुम उसे सहीसलामत चाहते हो तो 50 लाख रुपए का इंतजाम कर लो, वरना सचिन की लाश कई टुकड़ों में मिलेगी.’’

‘‘देखो जी, मैं आप के आगे हाथ जोड़ कर विनती करता हूं कि मेरे बेटे को कुछ नहीं कहना. आप चाहे मेरा सब कुछ ले लो, मगर मेरे सचिन को मुझे दे दो.’’

‘‘हम भी तो यही कह रहे हैं कि यदि बेटा जिंदा चाहिए तो 50 लाख रुपए हमें दे दो.’’ अपहर्त्ता ने कहा.

‘‘देखिए साहब, मैं एक मामूली नौकरी वाला आदमी हूं. इतने पैसे तो पूरी उमर काम कर के भी नहीं कमा सकूंगा. मेरी प्राइवेट नौकरी है. इतने पैसे भला मैं कहां से लाऊंगा.’’ रामनाथ गिड़गिड़ाए.

‘‘यदि तुम्हारा बेटा अस्पताल के आईसीयू में भरती हो और डाक्टर इलाज के 50 लाख बता रहा हो तो बताओ उसे ऐसे ही मर जाने दोगे या बचाने की कोशिश करोगे?’’ उस शख्स ने सवाल किया.

‘‘देखिए जी, मैं क्या दुनिया का हर बाप बेटे को बचाने की कोशिश करेगा लेकिन जब डाक्टर द्वारा मांगी गई वह रकम उस के बूते के बाहर की होगी तो वह हाथ खड़े कर देगा. क्योंकि यह उस की मजबूरी होगी.’’ रामनाथ यादव बोले.

‘‘बहरहाल, अब तुम देख लो कि तुम्हें पैसा प्यारा है या बेटा.’’ अपहर्त्ता ने एक तरह से धमकी दी.

‘‘देखिए साहब, मैं गरीब आदमी हूं. इतने पैसे मेरे पास नहीं हैं.’’ रामनाथ यादव ने मजबूरी जताई, ‘‘मैं अपनी हैसियत के अनुसार दे सकता हूं.’’

दोनों तरफ से बात होती रही और अंत में 4 लाख रुपए में बात तय हो गई. अपहर्त्ता ने फिरौती की रकम एशिया की सब से बड़ी आजादपुर सब्जीमंडी में ले कर आने को कहा.

फिरौती मांगने पर यह स्पष्ट हो गया कि सचिन का अपहरण कर लिया गया है और इस समय वह अपहर्त्ताओं के कब्जे में हैं. घर वाले और अन्य लोग सचिन के सहीसलामत होने की कामना करने लगे. अपहर्त्ता से रामनाथ की फोन पर जो बातचीत हुई थी, उस के बारे में उन्होंने पुलिस को भी बता दिया. फिर तो पुलिस भी सक्रिय हो गई.

अब पुलिस ने उस फोन नंबर पर जांच केंद्रित कर दी, जिस नंबर से फिरौती की काल आई थी. उधर अपहर्त्ता की जो 4 लाख रुपए की डील फाइनल हुई थी, पुलिस ने योजना बना कर रामनाथ को पैसे ले कर आजादपुर मंडी भेजा.

पुलिस टीम भी सादा कपड़ों में रामनाथ के इधरउधर रही. लेकिन अपहर्त्ता वहां पैसे लेने नहीं आया और न ही उस ने इस के लिए रामनाथ को फिर से फोन किया. इस से यही लगा कि अपहर्त्ता को पुलिस के मौजूद होने की भनक लग गई थी.

पुलिस की टैक्निकल सर्विलांस टीम ने बताया कि अपहर्त्ता ने उत्तरी दिल्ली के मजनूं का टीला इलाके से फोन कर के फिरौती मांगी थी. पुलिस मजनूं का टीला इलाके में पहुंच गई. फोन की लोकेशन के आधार पर पुलिस मजनूं के टीला से हरियाणा के पानीपत शहर पहुंची, लेकिन किडनैपर्स वहां भी नहीं मिले. पकड़े जाने के भय से वे बिहार भाग गए.

दिल्ली पुलिस की टीम भी पीछा करते हुए बिहार चली गई और उस ने 20 मई की रात को बिहार में एक जगह दबिश डाल कर भूषण कुमार सिंह उर्फ वरुण को हिरासत में ले लिया. उस से सचिन यादव के बारे में पूछताछ की गई तो उस ने बताया कि सचिन तो दिल्ली में ही है.

दिल्ली में वह किस जगह पर है, पूछने पर भूषण ने बताया कि वह अब जीवित नहीं है. बल्कि उन्होंने उस की हत्या कर लाश के टुकड़े गटर में डाल दिए हैं.

यह बात सुन कर पुलिस टीम को धक्का लगा. पुलिस ने भूषण से पूछताछ की तो उस ने बताया कि इस मामले में उस के साथ विक्की कुमार भी शामिल था. करीब 2 घंटे की मशक्कत के बाद पुलिस ने विक्की कुमार को भी बिहार से ही गिरफ्तार कर लिया. ये दोनों आपस में सालेबहनोई थे.

दोनों आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर ले कर टीम दिल्ली लौट आई. दिल्ली के कोर्ट में पेश करने के बाद थानाप्रभारी ने दोनों आरोपियों से पूछताछ की तो उन्होंने अपहरण की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार निकली.

भूषण कुमार सिंह और विक्की कुमार दोनों ही बिहार के रहने वाले थे. दोनों काम की तलाश में बिहार से दिल्ली आए थे. ये दोनों उसी शोरूम पर ठेके पर काम करते थे, जहां सचिन नौकरी करता था. पर वहां सचिन की नौकरी लग जाने के बाद शोरूम मालिक ने इन दोनों को काम से हटा दिया था.

इन के वहां से हट जाने के बाद भी सचिन की उन से फोन पर बातचीत होती रहती थी. करीब 2 महीने पहले सचिन के घर बेटा हुआ तो उस ने इस खुशी में कुछ लोगों को घर पर पार्टी दी थी. इस पार्टी में उस ने भूषण और विक्की को भी बुलाया था.

भूषण और विक्की तो सचिन से इस बात की रंजिश रखते थे कि उस के शोरूम पर नौकरी पर लगने के बाद उन दोनों की छुट्टी हो गई थी. इस के लिए वह सचिन को ही दोषी मानते थे. इस बात का सचिन को आभास नहीं हुआ. वह तो उन्हें अपना दोस्त ही समझता था, तभी तो उस ने बेटा पैदा होने पर दोनों को अपने घर पार्टी में बुलाया था.

सचिन का रहनसहन देख कर भूषण और विक्की समझने लगे कि सचिन अमीर बाप का बेटा है. उसी दिन उन्होंने सचिन को सबक सिखाने की ठान ली. उन्होंने सोचा कि यदि किसी तरह सचिन का अपहरण कर लिया जाए तो इस के बदले में मोटी फिरौती मिल सकती है. इस के बाद उन्होंने सचिन का अपहरण करने की योजना बना ली.

योजना बनाने के बाद उन्होंने 12 मई, 2018 को सुबह करीब साढ़े 7 बजे सचिन को फोन किया और भूषण मोटरसाइकिल ले कर सचिन के घर के पास पहुंच गया. चूंकि सचिन उस की योजना से अनजान था और वह उस पर विश्वास करता था, इसलिए वह उस के साथ मोटरसाइकिल पर बैठ कर चला गया.

मोटरसाइकिल से वह सचिन को दिल्ली के ओल्ड खयाला रोड पर प्रेमनगर स्थित एक कमरे पर ले गया. वह कमरा उस ने 2 दिन पहले ही किराए पर लिया था. भूषण और विक्की ने वहां उसे नशे की गोली मिली कोल्डड्रिंक पीने को दी.

जब सचिन अर्द्धबेहोशी की हालत में हो गया तो उन दोनों ने गला दबा कर उस की हत्या कर दी. हत्या करने के बाद उन्होंने उस का मोबाइल फोन स्विच्ड औफ कर के अपने कब्जे में ले लिया और लाश टांड पर छिपा दी.

इस के बाद वे लाश को ठिकाने लगाने के उपाय खोजने लगे. लाश को वे बाहर ले कर नहीं जा सकते थे लिहाजा उन्होंने 21 वर्षीय सचिन की लाश के 6 टुकड़े किए और उन टुकड़ों को गटर में डाल दिया.

लाश ठिकाने लगा कर वे निश्चिंत हो गए थे. फिर उन्होंने सचिन का फोन प्रयोग करते हुए उस के घर वालों से फिरौती मांगनी शुरू कर दी. जिस में वे सफल नहीं हो सके.

उन्हें शक हो गया कि मामला पुलिस तक पहुंच गया है. पुलिस कभी भी उन के पास पहुंच सकती है, लिहाजा दोनों बिहार भाग गए पर दिल्ली पुलिस उन्हें वहीं से गिरफ्तार कर लाई.

दोनों अभियुक्तों से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उन की निशानदेही पर खयाला रोड, प्रेमनगर के गटर से भारी मशक्कत के बाद सचिन के शरीर के सभी टुकड़े बरामद कर लिए, जिन्हें पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए राव तुलाराम अस्पताल भेज दिया.

अभियुक्त भूषण कुमार सिंह उर्फ वरुण और विक्की कुमार को गिरफ्तार कर पुलिस ने न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया. पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इस मामले में इन दोनों के अलावा कहीं कोई तीसरा तो शामिल नहीं था.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

फोन के कौन्टैक्ट में UIDAI का नंबर, गूगल ने मांगी माफी…

देश भर के हजारों मोबाइल यूजर्स शुक्रवार (3 अगस्‍त) को अपने फोन में आधार नंबर लागू करनेवाली एजेंसी यूआईडीएआई का टौल फ्री नंबर देखकर हैरान रह गए. इसके तुरंत बाद लोगों की निजता से जुड़ी चिंताएं सोशल मीडिया पर ट्रेंड की जाने लगीं. इसके बाद यूआईडीएआई और दूरसंचार कंपनियों ने इस घटना में अपनी भूमिका होने से इनकार किया.

इसके बाद देर रात गूगल ने एक बयान जारी कर कहा कि यह गलती उनकी तरफ से हुई है. गूगल ने अपने बयान में कहा कि ‘2014 में भारत के लिए इस्‍तेमाल होने वाले मोबाइल निर्माताओं को एंड्रायड रिलीज के सेटअप विजर्ड में अनजाने में UIDAI हेल्‍पलाइन नंबर और 112 हेल्पलाइन नंबर कोड किए गए थे और तब से वहीं हैं. क्योंकि नंबर एक यूजर की कौन्‍टैक्‍ट लिस्‍ट में होते हैं, ऐसे में नई डिवाइस पर भी वह नंबर आ जाता है.’

गूगल ने पूरे प्रकरण के लिए मांगी माफी

गूगल ने इस पूरे प्रकरण के लिए अपनी गलती मानी और इसके लिए ‘माफी’ मांगते हुए कहा कि यह एंड्रायड डिवाइसेज में किसी तरह के अनधिकृत पहुंच का मामला नहीं हैं. यूजर्स अपने डिवाइसेज से मैनुअली इस नंबर पर को डिलीट कर सकते हैं. गूगल ने यह भी कहा कि वह अगले कुछ सप्‍ताह में सेटअप विजर्ड की नई रिलीज में इसे दुरुस्‍त कर लेगा.

Google ने यह दिया बयान

गूगल की सफाई आने के बावजूद कुछ सवाल हैं जो अभी भी बरकरार हैं. जैसे- 112 इमरजेंसी नंबर 2017 में लौन्‍च हुआ तो 2014 की कोडिंग में उसे कैसे डाला जा सकता है. एक यूजर का दावा है कि उसने अमेरिका में फोन खरीदा और वहीं के औपरेटर का इस्‍तेमाल किया, इसके बावजूद उसके फोन में UIDAI का नंबर मौजूद था.

कोहली बने टेस्ट रैंकिंग में नंबर 1 खिलाड़ी, स्टीव स्मिथ को पछाड़ा

भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली स्टीव स्मिथ को पछाड़ कर पहली बार आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में नंबर एक बल्लेबाज बन गए हैं. स्टीव स्मिथ को 929 अंकों के साथ दूसरा और इंग्लैंड के कप्तान जो रूट को 865 अंकों के साथ तीसरा स्थान मिला है. आईसीसी ने रविवार को टेस्ट, वनडे और टी-20 फौर्मेट के लिए टीम और खिलाड़ियों की रैंकिंग जारी की.

आपकी जानकारी के लिए बता कि विराट यह उपलब्धि हासिल करने वाले सातवें भारतीय क्रिकेटर हैं. उनसे पहले सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, गौतम गंभीर, सुनील गावस्कर, वीरेंद्र सहवाग और दिलीप वेंगसरकर यह गौरव हासिल कर चुके हैं. विराट आईसीसी वनडे बल्लेबाजी रैंकिंग में भी टौप पर हैं. उनके 911 रेटिंग अंक हैं.

विराट को एजबेस्टन टेस्ट ने दिलाई बढ़त:  विराट ने एजबेस्टन टेस्ट में बेहतर प्रदर्शन की बदौलत यह उपलब्धि पाई. उन्होंने पहली पारी में 149 और दूसरी में 51 रन बनाए. विराट के अब आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में 934 अंक हो गए हैं. आईसीसी टेस्ट बल्लेबाजों की रैंकिंग में विराट के अलावा टौप-10 में सिर्फ एक और भारतीय चेतेश्वर पुजारा हैं. वे 791 रेटिंग अंक के साथ छठे नंबर पर हैं.

सात साल बाद कोई भारतीय टौप पर पहुंचाः विराट कोहली आईसीसी टेस्ट बल्लेबाजों की रैंकिंग में पहली बार टौप पर पहुंचे. उनसे पहले टेस्ट रैंकिंग में टौप पर पहुंचने वाले भारतीय बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर थे. उन्होंने जून, 2011 में यह मुकाम हासिल किया था.

गावस्कर से आगे निकले विराटः विराट ने टेस्ट रैंकिंग में शीर्ष पर पहुंचने के साथ ही आलटाइम रेटिंग में हमवतन सुनील गावस्कर को पीछे छोड़ दिया. गावस्कर के 916 रेटिंग अंक हैं. विराट आलटाइम रेटिंग में अब 14वें स्थान पर पहुंच गए.

एली नहीं अब ईशा संग इश्क फरमा रहे हैं हार्दिक पांड्या

भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार औलराउंडर हार्दिक पांड्या मैदान पर लंबे शॉट लगाने के लिए जाने जाते हैं. पर, मैदान से बाहर वह अपनी लव लाइफ को लेकर भी काफी सुर्खियां में रहते हैं.

कुछ समय पहले तक उनका अफेयर स्वीडिश मूल की अभिनेत्री एली अबराम के साथ चल रहा था, लेकिन अब उनका नाम बौलीवुड फिल्म अभिनेत्री ईशा गुप्ता के साथ जोड़ा जा रहा है.

एक रिपोर्ट के अनुसार ईशा के साथ हार्दिक का प्यार दिनोदिन परवान चढ़ता जा रहा है. मुंबई का यह क्रिकेटर भी ईशा की दिवानगी में पूरी तरह से खो गया है. हालांकि अभी दोनों के बीच बात शादी तक नहीं पहुंची है.

यह माना जा रहा है कि ईशा तो इस रिश्ते को शादी के अंजाम तक पहुंचना चाह रही हैं लेकिन अभी हार्दिक इस बंधन में बंधने के मूड में नहीं हैं.

सूत्रों के मुताबिक एली अबराम के साथ हार्दिक के अलगाव की वजह भी शादी थी. एली अफेयर को शादी में बदलना चाहती थी जबकि हार्दिक अभी अपना पूरा ध्यान करियर पर लगाना चाह रहे थे. इस कारण दोनों के बीच झगड़े शुरू हो गए और आखिरकार दोनों का रिश्ता भी खत्म हो गया.

ऐेसे में यह देखना काफी दिलचस्प होगा कि हार्दिक का ईशा के साथ रोमांस भी क्या सिर्फ टाइमपास है या यह रिश्ता किसी अंजाम तक पहुंचेगा.

इस बारे में जब ईशा से सवाल पूछा गया तो उन्होंने हार्दिक के साथ अपने रिश्ते से इंकार नहीं किया. वहीं, उन्होंने शादी के बार में कहा कि अभी वह खुद शादी नहीं करना चाहती हैं. ईशा ने कहा कि वह जब भी शादी करेगी, तब सभी को इसकी जानकारी देंगी.

कहीं आप भी सिलेंडर लेते वक्त डिलीवरी शुल्क तो नहीं देते

पेट्रोलियम मंत्रालय ऐसी गैस एजेंसियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है, जो उपभोक्ताओं के घर तक सिलेंडर पहुंचाए बिना भी डिलीवरी चार्ज वसूली करती हैं. मंत्रालय इन पर भारी जुर्माना लगाने के साथ ही आवंटन रद्द करने पर विचार कर रहा है.

दरअसल, एलपीजी सिलेंडर का आवंटन करने वाली गैस एजेंसियां आपके घर तक इसे पहुंचाने के लिए डिलीवरी चार्ज भी लेती हैं. अगर आपने एजेंसी या गोदाम पर जाकर सिलेंडर लिया है तो एजेंसी को यह चार्ज लौटाना होगा, लेकिन अधिकतर एजेंसियां ऐसा नहीं करती हैं. इसके खिलाफ बढ़ती शिकायतों को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय कड़ी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है.

पेट्रोलियम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि किसी एजेंसी के खिलाफ घर तक सिलेंडर नहीं पहुंचाने के बावजूद डिलीवरी चार्ज लेने की शिकायत मिलती है तो उसका लाइसेंस तक रद्द हो सकता है. घरेलू एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन के अनुसार, जो उपभोक्ता डिस्ट्रीब्यूटर के परिसर (एजेंसी या गोदाम) से सिलेंडर लेते हैं, उनसे डिलीवरी चार्ज नहीं ले सकते. अगर कोई एजेंसी चार्ज लेती है, तो उस पर एलपीजी मार्केटिंग डिसिप्लिन गाइडलाइन के तहत कड़ी कार्रवाई की जा सकती है.

सिलेंडर में जुड़ा होता है दाम

गैस सिलेंडर की कीमत में होम डिलीवरी का चार्ज भी पहले से शामिल होता है. लिहाजा जब आप एलपीजी सिलेंडर गैस एजेंसी के दफ्तर या गोदाम से खुद जाकर लेते हैं तो आपको सिलेंडर की कुल कीमत से करीब 20 रुपये कम चुकाने पड़ेंगे. लेकिन सभी गैस एजेंसियां खुद आकर सिलेंडर लेने वाले से भी यह चार्ज वसूल रही हैं.

अब कभी लेट नहीं होगी आपकी ट्रेन, जानिए कैसे

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने 15 अगस्त को नए टाइम टेबल को जारी करने के निर्देश दिए हैं. नए टाइम टेबल में रेलवे की समस्त प्रीमियम ट्रेनें राजधानी, शताब्दी, दुरंतो, तेजस, हमसफर, अंत्योदय, गतिमान सहित गरीबरथ का समयपालन 100 फीसदी होगा. लेकिन प्रीमियम ट्रेनों की रफ्तार की कीमत मेल-एक्सप्रेस व पैसेंजर ट्रेनों को चुकानी होगी.

तकनीकी रूप से टाइम टेबल में उक्त ट्रेनें राइट टाइम होंगी, लेकिन हकीकत में इनका ट्रेवलिंग टाइम (यात्रा का समय) 15 से 30 मिनट बढ़ जाएगा. रेल मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि नए टाइम टेबल को लेकर रेलवे बोर्ड व जोनल रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों की अंतिम बैठक इस हफ्ते हो गई है. इसमें यह फैसला किया गया है कि सभी प्रीमियम ट्रेनों का समयपालन 100 फीसदी होगा. इसके लिए अधिकतम 130 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार पर दौड़ाया जाएगा.

गतिमान एक्सप्रेस 160 किलोमीटर (दिल्ली-आगरा) पर चलेगी. इन ट्रेनों की निगरानी डिविजन स्तर पर डीआरएम व जोनल स्तर पर चीफ पैसेंजर ट्रेन मैनेजर करेंगे. जिससे प्रीमियम ट्रेनें समय टाइम चलें और गंतव्य कभी देर नहीं पहुंचेगी.

जीपीएस डिवाइव लगेंगे

रेल मंत्रालय इंजनों में जीपीएस डिवाइस लगाकर ट्रेनों की सेक्शन (दो स्टेशन के बीच) स्पीड बढ़ाएगा. इससे कंट्रोल रूम से ट्रेन की वास्तविक स्थिति और गति का आकलन किया जा सकेगा. ड्राइवर को दो स्टेशनों के बीच कितनी देर में ट्रेन में पहुंचनी चाहिए इसे रनिंग टाइम पर खरा उतरना होगा. इससे ड्राइवर की कौशल क्षमता का विकास होगा.

ट्रेनों का समय पालन 95 फीसदी होगा

नए टाइम टेबल में लगभग चार हजार से अधिक मेल-एक्सप्रेस व पैसेंजर ट्रेनों का समयपालन 95 फीसदी तय किया है. रेलवे ने इसके लिए उनका ट्रेवल टाइम बढ़ा दिया है. इसमें ट्रैक की क्षमता 110 किलोमीटर प्रति घंटा, पायलट ट्रेन भी 110 किलोमीटर प्रतिघंटा से चलाएगा. लेकिन ट्रेन का चार्टिंग टाइम 105 किलोमीटर प्रति घंटा पर दिखाया जाएगा. इस प्रकार गंतव्य तक पहुंचने पर ट्रेन 15 मिनट से 30 मिनट तक देरी से पहुंचने के बावजूद राइट टाइम होंगी. इस प्रकार मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों का समयपालन 95 फीसदी होगा.

‘मिनिमम बैलेंस टर्म’ के नाम पर बैंक हुए मालामाल, वसूले 5 हजार करोड़ रुपये

क्या आपको पता है कि इस साल बैंको ने आपकी जेब से धीरे धीरे पैसे निकाल कर मोटी कमाई की है. अगर नहीं तो आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि यह बिल्कुल सच है. जी हां, बैंक आपके अकाउंट से अक्सर बैलेंस कम बताकर जो पैसे काट रहे हैं, उससे वह खुद को मालामाल कर रहे हैं. सार्वजनिक क्षेत्र के 21 बैंकों और निजी क्षेत्र के तीन प्रमुख बैंकों ने बीते वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान खाते में न्यूनतम राशि नहीं रख पाने को लेकर उपभोक्ताओं से 5,000 करोड़ रुपये वसूले हैं. बैंकिंग आंकड़ों में यह बात सामने आयी है.

इस मामले में जुर्माना वसूलने में भारतीय स्टेट बैंक शीर्ष रहा है. इसने कुल 24 बैंकों द्वारा वसूले सम्मिलित 4,989.55 करोड़ रुपये जुर्माने का लगभग आधा 2,433.87 करोड़ रुपये वसूले हैं. उल्लेखनीय है कि एसबीआई को बीते वित्त वर्ष में 6,547 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ है. यदि बैंक को यह अतिरिक्त आय नहीं होती, तो उसका नुकसान और ऊंचा रहता.

इसके बाद एचडीएफसी बैंक ने 590.84 करोड़ रुपये, एक्सिस बैंक ने 530.12 करोड़ रुपये और आईसीआईसीआई बैंक ने 317.60 करोड़ रुपये वसूले हैं.

एसबीआई ने 2012 तक खाते में न्यूनतम राशि नहीं रखने पर जुर्माना वसूला था. उसने यह व्यवस्था एक अक्टूबर, 2017 से फिर शुरू की है. भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार बैंकों को सेवा-अन्य शुल्क वसूलने का अधिकार है. यदि आप एसबीआई के ग्राहक हैं और आपके खाते में यह न्यूनतम राशि नहीं है, तो बैंक आपसे दंड वसूलता है. उदाहरण के लिए मैट्रो शहरों में न्यूनतम राशि 3,000 रुपये हैं और यदि आपके खाते में 75 फीसदी यानी 750 रुपये से कम राशि है, तो आप पर 50 रुपये की पेनल्टी और जीएसटी लगाया जाएगा.

यदि आपके लिए एमएबी बनाए रखना कठिन हो रहा है, तो आप बेसिक बचत खाता भी खुलवा सकते हैं. भारतीय रिजर्व बैंक के निर्देशानुसार, सभी बैंकों के लिए इस सेवा को मुहैया कराना अनिवार्य है. इस खातें को आप सहयोगी खाते के रूप में भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

इस खाते में आपको कोई न्यूनतम औसत राशि और न्यूनतम राशि रखने की जरूरत नहीं होती और इस खाते पर सामान्य बचत खाते जितनी ही ब्याज मिलती है. उल्लेखनीय है कि छात्रों, वरिष्ठ नागिरकों और नौकरीपेशा लोगों के लिए न्यूनमत राशि बरकरार रखना काफी कठिन हो जाता है. जिन लोगों के पास 3-5 खाते हैं, उन्हें हर खाते के लिए इसे बनाए रखना होता है. इस लिए एक प्रमुख खाते के साथ एक या दो जीरो बैलेंस बचत खाता खुलवाया जा सकता है.

दर्शकों को कब क्या पसंद आ जाए, कह नहीं सकते : इशिता दत्ता

तेलगू फिल्म से टीवी और फिर फिल्मों की तरफ रुख करने वाली अदाकारा इशिता दत्ता की पहचान टीवी सीरियल ‘‘बाजीगर’’ से बनी थी. इस सीरियल में उनके पति के किरदार में वत्सल सेठ थे, जो कि अब निजी जीवन में भी उनके पति बन चुके हैं. टीवी सीरियल के बाद जब इशिता दत्ता ने अजय देवगन के साथ फिल्म ‘दृश्यम’ से बौलीवुड में कदम रखा, तब भी उन्हे अच्छी शोहरत मिली.

मगर उसके बाद फिल्म ‘‘फिंरगी’’ ने उनके करियर पर सवालिया निशान लगा दिया. फिर नवंबर 2017 में उन्होंने वत्सल सेठ के संग शादी कर ली. अब वह फिल्म ‘लश्तम पश्तम’’ को लेकर चर्चा में हैं. जो कि दिवंगत अभिनेता ओम पुरी के  अभिनय से सजी अंतिम फिल्म है.

आपने टीवी पर ‘बाजीगर’ जैसे लोकप्रिय सीरियल किए. आपको काफी लोकप्रियता मिली. क्या वह लोकप्रियता फिल्मों में भी रही?

ऐसा हुआ. टीवी पर मुझे जो दर्शकों का प्यार मिला, मुझे जो पहचान मिली उसका फायदा मेरी फिल्म ‘दृश्यम’ में मिला था. मुझे ‘दृश्यम’ करने का सबसे ज्यादा गर्व है. यह एक ऐसी फिल्म है, जिसे लोग आज से 20 साल बाद ही नहीं 50 साल बाद भी देखना पसंद करेंगे. पर मुझे यकीन है कि मेरे करियर में बहुत ग्रोथ होना बाकी है, जो कि होगी.

मगर कपिल शर्मा के साथ असफल फिल्म ‘फिरंगी’ करने का अफसोस होगा?

बिलकुल नहीं. मेरे लिए ‘फिरंगी’ मेरी बहुत बेहतरीन फिल्म है. ‘फिरंगी’ के समय कपिल शर्मा की मीडिया में ईमेज बहुत गड़बड़ा गयी थी. उनकी जिंदगी व करियर में ऐसी चीजें हुई, जिससे मीडिया ने ऐसी खबरें फैला रखी थी कि दर्शक बहुत नाराज थे, जिसका असर फिल्म पर पड़ा. यह आम कामेडी फिल्मों से हटकर बनी थी. निजी जीवन में कपिल शर्मा बहुत ही अच्छे इंसान हैं. जब समय खराब होता है, तो उसका असर फिल्म की सफलता पर पड़ता ही है.

दूसरी बात यह है कि टीवी पर कपिल शर्मा की जो इमेज बन चुकी थी, उसी इमेज में लोग उन्हें फिल्म ‘फिरंगी’ में देखना चाहते थे. जबकि हम लोगों ने फिल्म ‘फिरंगी’ में कपिल शर्मा को कपिल शर्मा की ही तरह दिखाया. जैसे कि मैं कभी नहीं चाहती कि हर फिल्म में मैं ‘दृश्यम’ की लड़की की तरह नजर आउं. वैसे ही कपिल शर्मा ने फिल्मों में कुछ हटकर काम करने की कोशिश की.

टीवी पर जब हम एक किरदार को पांच छह साल तक निभाते हैं, तो लोग हमें सिर्फ उसी किरदार में देखना चाहते हैं. आज भी लोग तुलसी को तुलसी ही बुलाते हैं. इसी तरह लोग कपिल शर्मा को भी हमेशा फनी जोन में ही देखना चाहते हैं. जबकि फिल्म ‘फिरंगी’ में वह सामान्य रूप से नजर आए. लोगों ने पसंद नहीं किया. दर्शकों को कब क्या पसंद आ जाए, कह नहीं सकते.

फिल्म ‘‘लश्तम पश्तम’’ को लेकर क्या कहेंगी?

मानव भल्ला निर्देशित यह एक अलग तरह की फिल्म है. इस तरह का किरदार मैंने पहली बार निभाया है. यह डायना का किरदार है, जो कि दुबई में अपनी बेटी के साथ रहती है. अकेली औरत है. उसकी जिंदगी में बहुत कुछ घट चुका है. यह किरदार बड़ा निराला है, पर निगेटिव किरदार नहीं है. परिस्थितियों ने उसे चिड़चिड़े स्वभाव का बना दिया है. वह बहुत ज्यादा कड़वा बोलती है. एक दिन उसकी जिंदगी में एक लड़का आता है और फिर उसकी जिंदगी बदल जाती है.

इंसान अपनी जिंदगी इतना कड़वा क्यों हो जाता है?

देखिए, संसार में हर इंसान की जिंदगी में उतार चढ़ाव आते हैं. उस उतार चढ़ाव के वक्त जरा सा संतुलन बिगड़ते ही बुरे परिणाम सामने आते हैं. पर ऐसा कोई इंसान नहीं जिसकी जिंदगी में बुरा वक्त नहीं आता. इन दिनों मेरे परिवार में कई लोग बीमार चल रहे हैं. फिर भी मैं काम कर रही हूं, मातम नहीं मना रही हूं. लोग दो चार दिन में स्वस्थ हो जाएंगे. जिंदगी के उतार चढ़ाव के साथ हमें सदैव आगे बढ़ते जाना चाहिए. बैठकर हालात को कोसना नहीं चाहिए. इंसान को धैर्य रखने की जरूरत है. बुरे दिन के बाद अच्छे दिन आते ही हैं.

इसके अलावा क्या कर रही हैं?

सनी देओल की फिल्म ‘ब्लैक’ कर रही हूं, जिसमें मेरे हीरो सिंपल कापड़िया के बेटे करण कापड़िया हैं. मैं इसमें एक्शन करते हुए नजर आउंगी. फिल्म की पचास प्रतिशत शूटिंग हो गयी है. बाकी कुछ समय में होगी. फिलहाल इसी फिल्म के लिए मैं मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग ले रही हूं.

मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग तो आपको फिल्म में एक्शन दृश्य करने के अलावा निजी जीवन में भी मददगार होगी?

जी हां! मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग लेते हुए मुझे अहसास हुआ कि हर लड़की को मार्शल आर्ट सीखना चाहिए. इससे लड़की/औरत खुद को सुरक्षित रखना सीख जाती है. इसके साथ उसकी सेहत अच्छी रहती है.

किस तरह के किरदार निभाना चाहती हैं?

मुझे निगेटिव किरदार निभाना है. मेरा मानना है कि करियर में निगेटिव व कामेडी किरदार निभाना बहुत कठिन होता है. एक कलाकार के तौर पर मैं निरंतर कुछ अलग करती रहना चाहती हूं.

आपके शौक क्या हैं?

पेंटिंग्स बनाना, कुकिंग करना व फिल्में देखना. इन दिनों मैं ढोकला सहित दूसरी गुजराती डिशेस बनाना सीख रही हूं. मुझे पार्टी में जाना पसंद नहीं है. मैं अपना ज्यादा से ज्यादा समय परिवार के साथ बिताना पसंद करती हूं.

किस तरह की पेंटिंग्स बनाती हैं?

मैंने बीच में पेटिंग बनाना छोड़ दिया था. लेकिन पिछले एक वर्ष  से पुनः पेंटिंग बनाना शुरू किया है. अब तक कम से कम 15 पेंटिंग्स बना चुकी हूं. मुझे बादल या आकाश की पेंटिग बनाना अच्छा लगता है. अब धीरे धीरे मैंने पोट्रेट बनाना शुरू किया है. मैं अपने आपको बहुत अच्छा चित्रकार नहीं मानती. मैंने अभी तक पेंटिंग की प्रदर्शनी लगाने की भी नहीं सोची है. एक दिन मेरे पापा ने कहा था कि वह मेरी पेटिंग को सिर्फ पांच सौ रूपए मे खरीदना चाहेंगे.

अब आप शादीशुदा और अभिनेत्री हैं. ऐसे में परिवार से किस तरह का सपोर्ट मिल रहा है?

बहुत ज्यादा सपोर्ट मिल रहा है. मेरे पिता चाहते थे कि मैं इंजीनियर बनूं, पर उन्होंने मुझ पर इस बात के लिए दबाव नहीं डाला. जब मैंने अभिनय करना शुरू किया, तो उन्होंने सपोर्ट किया. मेरे माता पिता हमेशा कहते हैं कि जिसमें खुशी हो वही काम करो. मेरे घर पर सभी पढ़ाकू हैं. पर मैं केमिस्ट्री में फेल हो गयी, तो मुझे दुःख हुआ, मगर मेरे पिता ने गले लगाते हुए कहा कि कोई बात नहीं. जिंदगी में यह सब होता रहता है. अब अगली बार ज्यादा मेहनत कर लेना. इसी तरह ससुराल में मुझे पूरा सपोर्ट मिल रहा है.

सोशल मीडिया पर कितना सक्रिय हैं?

मैं बहुत ज्यादा सक्रिय नही हूं. इंस्टाग्राम पर फोटो डालती रहती हूं. अपने प्रशंसकों से बातें करती रहती हूं. सोशल मीडिया की वजह से दबाव बढ़ा है.

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