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धार्मिक स्थल, अंधश्रद्धा और अदालत का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने पुरी के जगन्नाथ मंदिर में गैरहिंदुओं को भी प्रवेश दिए जाने की सलाह दी है. उस ने ऐसा आदेश नहीं दिया है कि मंदिर के प्रबंधन को यह सलाह माननी जरूरी है. सवाल यह उठता है कि क्या सुप्रीम कोर्ट को इस पचड़े में पड़ने की जरूरत थी. जगन्नाथपुरी के मंदिर, किसी मसजिद या गुरुद्वारे में भक्तलोग अंधश्रद्धावश ही जाते हैं. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अगर गए थे तो यही सोच कर कि वे पद पा कर अब दलित होने का धब्बा खो चुके होंगे और उन का स्वागत होगा पर सुप्रीम कोर्ट उन के प्रवेश को भी सुनिश्चित नहीं कर पाई.

धर्मनिरपेक्ष राज्य में अंधश्रद्धा के मामलों में न तो सरकारों को पड़ना चाहिए और न अदालतों को. कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी हो, तो बात दूसरी है, वरना उन का दखल हमेशा उलटा पड़ता है. सरकार ने सिख मामलों में एक बार जम कर दखल दिया था जिस का नतीजा निकला कि खालिस्तान आंदोलन खड़ा हो गया. राजीव गांधी ने शाहबानो और राममंदिर के मामलों में दखल दिया. इस का नतीजा यह रहा कि बाबरी मसजिद तोड़ दी गई और भारतीय जनता पार्टी को धर्म पर आधारित सरकार बनाने का रास्ता मिल गया.

जगन्नाथपुरी मंदिर में अन्य धर्मों व नीची जातियों के लोग नहीं जा पाते, तो इस से वे अपनी जेब बचाते ही हैं. दलित अगर वहां जाएंगे तो पाएंगे कुछ नहीं, बल्कि जो उन की जेब में होगा उसे भी वे चढ़ा आएंगे. दूसरे मंदिरों की तरह इस मंदिर में भी चढ़ावे पर जोर है. मंदिर में प्रवेश करते ही पंडे घेर लेते हैं, जो कभी प्रसाद खरीदने के नाम पर तो कभी दर्शन कराने के नाम पर वसूली करते हैं.

हिंदू, उस पर से ऊंची जाति के हों, चढ़ावा न चढ़ाएं तो उन के साथ दलित व गैरहिंदू से भी ज्यादा बुरा बरताव किया जाता है. पंडों की भारी संख्या, जो मंदिर के चारों ओर मंडराती रहती है, इस बात का सुबूत है कि यह मंदिर भक्तों के लिए नहीं, पंडेपुजारियों के लिए है. ऐसे में अगर सुप्रीम कोर्ट इस में दूसरों को भी प्रवेश की सलाह दे रहा है तो असल में वह पंडों की जेबें भरने का काम कर रहा है.

सुप्रीम कोर्ट को तो अपीलकर्ता को फटकार लगानी चाहिए कि जहां कुछ मिलना ही नहीं, वहां जाने की जिद करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे खटखटाए ही क्यों जा रहे हैं.

इस अभिनेत्री की जांघे देखकर घायल हो गए थे रामगोपाल वर्मा

फिल्म निर्देशक रामगोपाल वर्मा ने बॉलीवुड में कई बेहतरीन फिल्में दी हैं. लेकिन इन फिल्मों से ज्यादा सुर्खियां उन्होंने अपने विवादास्पद बयानों से बटोरी हैं. अक्सर कोई न कोई विवादित बयान देकर सुर्खियां बटोरनेवाले रामगोपाल वर्मा एक बार फिर अपनी एक फेवरेट हीरोइन को लेकर दिए गए बयान की वजह से चर्चा में हैं.

रामगोपाल वर्मा की मानें तो एक अभिनेत्री की खूबसूरत जांघे देखकर वो इस कदर घायल हो गए थे कि उन्हें उस हीरोइन से प्यार हो गया था. इतना ही नहीं, उस अभिनेत्री की जांघे देखकर ही वो बॉलीवुड इंडस्ट्री में आये.

रामगोपाल वर्मा ने उस हीरोइन को लेकर ये खुलासा किया है अपनी ऑटोबायोग्राफी ‘गन्स एंड थाइज – द स्टोरी ऑफ माय लाइफ’ में. इस ऑटोबायोग्राफी में किए गए खुलासे के मुताबिक रामगोपाल वर्मा ने अमिताभ बच्चन के हाथ में गन देखी और इस अभिनेत्री की खूबसूरत जांघे देखी, तब उन्होंने फिल्मों में आने के बारे में सोचा और बॉलीवुड में अपना पहला कदम रखा. इस अभिनेत्री की जांघे रामगोपाल वर्मा को न सिर्फ घायल कर गई बल्कि ये उनके लिए प्रेरणादायक भी साबित हुई. क्योंकि उसी से प्रेरित होकर रामू ने बॉलीवुड में अपनी एक खास पहचान बनाई.

रामगोपाल वर्मा न सिर्फ इस अभिनेत्री की जांघों के प्रति आकर्षित हुए, बल्कि उनकी खबूसूरती देखकर उनसे प्यार कर बैठे. रामू की मानें तो उनका यह प्रेमाकर्षण था. जिसे लेकर वो काफी उत्साहित थे लेकिन यह भावना उनके दिल में सिर्फ और सिर्फ इस अभिनेत्री के लिए आई थी. इस अभिनेत्री के प्रति रामगोपाल वर्मा की दीवानगी किसी नशे से कम नहीं थी और वो इस दीवानगी का अकेले ही भरपूर आनंद भी उठाते थे.

इस ऑटोबायोग्राफी में उन्होंने यह भी खुलासा किया है कि इस अभिनेत्री का शादी करना उनके लिए कितना दुखदायी था. रामगोपाल वर्मा ने कहा कि उनके लिए किसी की रसोई में इस अभिनेत्री को चाय बनाते देखना बहुत निराशाजनक था. उन्होंने कहा कि एक आदमी ने एक परी को स्वर्ग से अपने घर की रसोई में ला दिया जिसके लिए वो उस इंसान को कभी माफ नहीं करेंगे.

चलिए अब हम आपको बताते हैं बॉलीवुड की उस कातिल हसीना के बारे में, जिसकी खूबसूरत जांघों ने रामगोपाल वर्मा को बना लिया था अपना शिकार. जानने के लिए देखें ये वीडियो.

क्या आपका बैंक है सबसे अच्‍छा?

क्‍या आप एक नया बैंक अकांउट ओपन करने का विचार कर रहे हैं ? तो हम आपको बता देना चाहते हैं कि सर्वश्रेष्‍ठ बैंक और सबसे अच्‍छे बैंक अकांउट का चयन करना कोई बहुत बड़ी बात नहीं है. आपके पैसे बचाकर ये आपकी फायनेंशियल कंडीशन को और भी अच्‍छा कर सकते हैं.

सबसे जरुरी बात यह है कि जिस किसी बैंक में आप अपने पैसे डाल रहे हैं, क्‍या वह पूरी तरह बैंक आपकी जरूरत के हिसाब से है? क्‍या वहां पर वो सारी सर्विसेज मिल रहीं हैं जो कि आपको चाहिए. यहां पर आपको ऐसी ही कुछ बातों के बारे में बता रहे हैं जो कि आपको एक उचित बैंक का चुनाव करने में सहायक होगी :

सर्विसेज

सबसे पहले तो यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आखिरकार आपको कौन सी सर्विस अपने बैंक से चाहिए. शायद आप कुछ इस प्रकार की प्रक्रियाओं के बारे में जानना चाहेंगे- ई-बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, डायरेक्‍ट डिपोजिट . इनके बारे में जानने के बाद ही आपको बैंक का चुनाव करना चाहिए.

स्‍थान

क्‍या आप कोई ऐसा बैंक चाहते हैं जो कि आपके घर के आस-पास हो? पता करें की आपका पसंदीदा बैंक आपके घर से कितना दूर और कितना पास है. क्‍या इसकी ब्रांच आपके ऑफिस और घर के आस-पास है? यह आपकी प्राथमिकता पर निर्भर करता है कि आप एक बड़े प्रसिद्ध बैंक में अपना अकाउंट ओपन करन चाहते हैं या फिर एक छोटे बैंक में. राष्‍ट्रीय बैंकों की पूरे देश में कई शाखायें होती हैं इसलिए आप बड़े बैंक में आसानी से अपना बैंक अकाउंट चालू करवा सकते हैं.

फीस

कुछ बैंक ऐसे होते हैं जो कि ई-बैंकिंग और कार्ड पेमेंट पर फीस लेते हैं लेकिन कुछ बैंक ऐसा नहीं करते हैं. बैंक सलेक्‍ट करने से पहले फीस की सभी गतिविधियों को जान और समझ लेना चाहिए. कुछ बैंक फ्री सर्विस की सुविधायें भी देते हैं फेस्टिवल सीजन में. तो वहीं कुछ बैंक अकाउंट में मिनिमम बैलेंस की भी डिमांड करते हैं तो कुछ नहीं. तो इन सब चीजों को ध्‍यान में रखते हुए ही बैंक का चुनाव करना चाहिए.

नेटवर्क

बैंक का चुनाव करने से पहले यह भी जान लेना चाहिए कि जिस बैंक में आप अपना अकांउट ओपन करने वाले हैं क्‍या उसका नेटवर्क सिर्फ किसी एक स्‍टेट और इंडिया भर में तो सीमित नहीं है. यानि कि ऐसे बैंक का चुनाव करें जो वर्ल्‍डवाइड काम करे उस बैंक का एटीएम और डेबिट कार्ड हर जगह उपयोगी हो और उसका चार्ज भी आपको पता होना चाहिए.

रेट्स

ऐसे बैंक को अपना साथी बनाइये जो इन्‍वेस्‍टमेंट करने में मदद करे और कम से कम मात्रा में ब्‍याज ले. तो वहीं ज्‍यादामात्रा में आपको ब्‍याज दे ताकि आपका और बैंक का बैलेंस सीट प्रापर मेंटेन रहे.

वैधता

अंत में आपको यही बताना चाहेंगे कि उन्‍हीं बैंक का चुनाव करें जो कि वैध हो और जिसे ज्‍यादा से ज्‍यादा लोग जानते हैं यह एक सुरक्षित सुझाव होगा. फेमस बैंकों का मिलना कोई मुश्किल काम नहीं है लेकिन ये बैंक भी फ्रॉड हो सकते हैं लेकिन इंश्‍योरेंस के माध्‍यम से आपका पैसा सुरक्षित रहेगा.

आज भी सचिन के नाम है वनडे क्रिकेट का यह रिकॉर्ड

क्रिकेट में जब भी वनडे क्रिकेट की बात होती है तो अक्सर सबसे ज्यादा रन, विकेट के आंकड़ों का ही जिक्र होता है. और जब भी बाउंड्री की बात होती है अक्सर छक्कों के रिकॉर्ड की ही बात होती है. लेकिन अमुमन एक मैच में छक्के से ज्यादा चौके लगाए जाते हैं. छक्के की बजाय चौके लगाना कम रिस्की होता है.

अगर वनडे क्रिकेट में सबसे ज्यादा चौके लगाने वाले बल्लेबाजों की बात करें तो यहां भी भारतीय बल्लेबाजों का दबदबा देखने को मिलता है. तो आइए जानते हैं वनडे क्रिकेट में सबसे ज्यादा चौके लगाने वाले बल्लेबाजों के बारे में.

सचिन तेंदुलकर (2016 चौके)

क्रिकेट में भगवान का दर्जा रखने वाले सचिन तेंदुलकर सबसे ज्यादा चौके मारने के लिस्ट में टॉप पोजीशन पर कब्जा जमाए हुए हैं. सबसे ज्यादा चौके जमाने वाले बल्लेबाजो में सचिन तेंदुलकर अपने प्रतिद्वंदी खिलाड़ियों को 500 चौकों के बड़े अंतर से पीछे छोड़ते हैं. सचिन तेंदुलकर दुनिया के एकलौते ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने वनडे क्रिकेट में दो हजार से ज्यादा चौके जमाए हैं.

सचिन तेंदुलकर ने भारत के लिए 463 वनडे मैचों में कुल 2016 चौके जमाए हैं. सचिन तेंदुलकर ने वनडे क्रिकेट में ज्यादातर समय नंबर 1 या 2 की पोजीशन पर बल्लेबाजी की है लेकिन करियर के शुरूआती दिनों में वो मध्यक्रम में बल्लेबाजी करते थे. यदि वो शुरू से ही एक सलामी बल्लेबाज के तौर पर खेलते तो शायद उनके चौकों की संख्या 2,500 के पार होती. वनडे क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर ने 49 शतक बनाने का कीर्तिमान बनाया.

सनथ जयसूर्या (1500 चौके)

अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से वनडे क्रिकेट में सलामी बल्लेबाजी की नई परिभाषा बनाने वाले खिलाड़ी हैं सनथ जयसूर्या. उन्होंने 445 वनडे मैचों में कुल 1500 चौके विरोधी गेंदबाजों को लगाए हैं. 2006 में नीदरलैंड के खिलाफ 157 रनों की पारी में सनथ जयसूर्या ने कुल 24 चौके जमाए थे. ये उनके द्वारा एक पारी में लगाए गए सबसे ज्यादा चौके थे.

कुमार संगाकारा (1385 चौके)

श्रीलंकाई विकेटकीपर बल्लेबाज कुमार संगाकारा ने श्रीलंका के लिए 404 वनडे मैच खेले जिनमें उनके बल्ले से 1385 चौके निकले. कुमार संगाकारा ही ऐसे खिलाड़ी हैं जो मध्यक्रम में बल्लेबाजी करते थे और उनको पावर प्ले में खेलने का मौका बहुत कम ही मिला है. अन्य बल्लेबाजों की तरह अगर उनको पावर प्ले में खेलने का मौका मिलता तो शायद उनके चौकों की संख्या और ज्यादा होती. 2013 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ खेली गई 169 रनों की अपनी पारी में कुमार संगाकारा ने 18 चौके जड़े थे.

रिकी पोंटिंग (1231चौके)

डॉन ब्रेडमैन के बाद ऑस्ट्रेलिया के सबसे बेहतरीन बल्लेबाज कहे जाने वाले रिकी पोंटिंग वनडे क्रिकेट में सबसे ज्यादा चौके लगाने वाले बल्लेबाजों की लिस्ट में शामिल हैं. ऑस्ट्रेलिया के अजेय टीम बनाने वाले कप्तान रिकी पोंटिंग ने 375 वनडे मैचों में कुल 1231 चौके लगाए हैं. 1998 में जिंबाब्वे के खिलाफ अपनी 145 रनों की पारी के दौरान रिकी पोंटिंग के बल्ले से 18 चौके निकले थे. यह एक पारी में उनके द्वारा लगाए गए सबसे ज्यादा चौके थे.

एडम गिलक्रिस्ट (1162 चौके)

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व विकेटकीपर और विस्फोटक सलामी बल्लेबाज एडम गिलक्रिस्ट को उनके आक्रमक अंदाज के लिए जाना जाता हैं. मैदान पर उतरने के साथ ही वह गेंदबाजों पर टूट पड़ते थे. उनके बल्ले से चौके और छक्के यूं निकलते थे मानों वो गेंदबाजों के साथ खेल रहे हो.

एडम गिलक्रिस्ट ने ऑस्ट्रेलिया के लिए 287 वनडे मैच खेले, इन 287 वनडे मैचों में उनके बल्ले से कुल 1162 चौके निकले. एडम गिलक्रिस्ट द्वारा पुल और हुक शॉट के जरिये लगाए गए चौके आज भी दर्शकों के दिमाग में तरोताजा हैं. एडम गिलक्रिस्ट ने वनडे में 1162 चौकों के अलावा 149 छक्के भी लगाए हैं.

वीरेन्द्र सहवाग (1132 चौके)

वनडे क्रिकेट में सौ से ऊपर का स्ट्राइक रेट रखने वाले भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज वीरेन्द्र सहवाग चौके लगाने के मामले में गांगुली को पीछे छोड़ देते हैं. वीरेन्द्र सहवाग ने 251 वनडे मैचों में 1132 चौके लगाए हैं. अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी के लिए मशहूर वीरेन्द्र सहवाग द्वारा प्वाइंट के ऊपर लगाए गए चौके शायद ही कोई फिल्डर रोक पाया हो.

वीरेन्द्र सहवाग ने वनडे क्रिकेट में दो दोहरा शतक लगाया था. सहवाग ने इस पारी में कुल 25 चौके लगाए थे, जो उनके द्वारा एक पारी में लगाए गए सबसे ज्यादा चौके हैं.

सौरव गांगुली (1122 चौके)

भारत के पूर्व कप्तान और गॉड ऑफ ऑफसाइड के नाम से मशहूर रहे सौरव गांगुली सबसे ज्यादा चौके लगाने वाले बल्लेबाजों में हैं. वनडे क्रिकेट में सौरव गांगुली ने सचिन तेंदुलकर के साथ मिलकर पारी की शुरूआत करने की जिम्मेदारी निभाई. सौरव गांगुली ने अपने वनडे करियर में 311 मैच खेले जिनमें उनके नाम 1122 चौके लगाए हैं.

अपनी शानदार कवर ड्राइव के लिए मशहूर रहे सौरव गांगुली जब भी आक्रमक अंदाज में होते थे, उनकी बल्लेबाजी में चार चांद लग जाते थे. वनडे क्रिकेट में 1122 चौके के अलावा उन्होंने 190 छक्के भी लगाए हैं. 1999 में न्यूजीलैंड के खिलाफ ग्वालियर वनडे में सौरव गांगुली ने 153 रनों की पारी के दौरान 18 चौके जमाए थे, जो उनके द्वारा एक पारी में लगाए गए सबसे ज्यादा चौके हैं.

मुझे बच्चेदानी की टीबी हो गई. फिर 18 महीनों तक टीबी की दवा चली. लेकिन अभी भी मुझे पीरियड्स के दिनों में काफी दर्द होता है. आप की क्या राय है.

सवाल
मैं 45 वर्षीय महिला हूं. 26 साल की उम्र में मेरा विवाह हो गया था. गृहस्थ जीवन ठीकठाक चल रहा था कि अचानक मुझे बच्चेदानी की टीबी हो गई. फिर 18 महीनों तक टीबी की दवा चली. उस के बाद डाक्टर ने यह कह कर कि मेरा रोग दूर हो गया है दवा बंद कर दी. लेकिन अभी भी मुझे पीरियड्स के दिनों में काफी दर्द होता है और योनी से सफेद डिस्चार्ज आता है. बीच में जब कभी ऐंटिबायोटिक दवा ले लेती हूं तो कुछ दिनों तक आराम रहता है, पर कुछ समय बाद समस्या वापस आ जाती है. डाक्टर से मैं ने बच्चेदानी निकालने का आपरेशन करने की इच्छा व्यक्त की तो उन्होंने साफ मना कर दिया. आप की क्या राय है?

जवाब
अच्छा होगा कि आप किसी योग्य और अनुभवी गाइनैकोलौजिस्ट से मिलें, अपनी जांच कराएं और डाक्टर के जरूरी समझने पर पैल्विस यानी पेट के निचले भाग का अल्ट्रासाउंड कराएं.

योनी से सफेद रंग का डिस्चार्ज आने, पीरियड्स के दिनों में दर्द उठने और ऐंटिबायोटिक दवा लेने के बाद तुरंत आराम मिलने का यह मतलब भी हो सकता है कि आप को बारबार इन्फैक्शन हो रहा है.

यदि योनी में इन्फैक्शन होने की पुष्टि हो तो डाक्टर से सलाह कर अपने पति का भी उचित इलाज करवाएं. यह सावधानी बरते बिना आप को यह इन्फैक्शन बारबार होता रह सकता है.

जहां तक पहले बच्चेदानी की टीबी की बात है, तो 18 महीने के सफल उपचार के बाद उस की पुनरावृत्ति होने का खतरा लगभग न के बराबर है.

अनचाहे कौल से हैं परेशान तो अपनाएं ये तरीका

स्मार्टफोन के जरिए हम अपने परिजनों और दोस्तों से तकनीकी तौर संपर्क में रहते हैं. लेकिन मोबाइल नंबर निजी होने के बावजूद यह जाने-अनजाने किसी अनचाहे लोगों के हाथ लग जाता है. ऐसे में कई बार हमें स्पैम कौल, टेलीमार्केटिंग कौल या परेशान करने वाले तत्वों के फोन कौल का सामना करना पड़ता है. अच्छी बात यह है कि आपको अनचाहे कौल से परेशान होने की जरूरत नहीं है. आप उन्हें ब्लौक कर सकते हैं.

लगभग सभी एंड्रायड फोन बिल्ट इन कौल ब्लौकिंग फीचर के साथ आते हैं. लेकिन यह प्रक्रिया हर कंपनी के स्मार्टफोन में थोड़ी अलग हो सकती है. शाओमी, लेनोवो और सैमसंग जैसे स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों ने अपने सौफ्टवेयर में इस प्रक्रिया को लेकर आमूल-चूल बदलाव भी किए हैं.

संभव है कि आपके पास जो फोन हो, उसके लिए प्रक्रिया थोड़ी अलग हो. लेकिन अंतर बहुत बड़ा नहीं होगा. आइए हम आपको लोकप्रिय एंड्रायड स्मार्टफोन में नंबर ब्लौक करने की प्रक्रिया के बारे में बताते हैं.

अगर आप गूगल पिक्सल या नेक्सस 6पी जैसे स्टौक एंड्रायड हैंडसेट में किसी नंबर को ब्लौक करना चाहते हैं तो इसके दो तरीके हैं-

– फोन ऐप को खोलें. इसके बाद रीसेंट कौल्स वाले सेक्शन में जाएं. इसके बाद किसी भी नंबर को लंबे समय तक दबाएं रखें और ब्लौक नंबर को सेलेक्ट करें.

– दूसरा तरीका भी फोन ऐप से जुड़ा है. फोन ऐप को खोलें. आपको दायीं तरफ टौप में तीन डौट वाला आइकन नज़र आएगा. इस पर टैप करें और सेटिंग्स में जाएं. यहां मेन्यू में से “कौल ब्लौकिंग” को चुनें और उस नंबर को डाल दें जिसे ब्लौक करना है.

संभव है कि आपके पास सैमसंग फोन हो. इस कंपनी के एंड्रायड फोन में किसी नंबर को ऐसे ब्लौक करें..

– फोन ऐप खोलें.

– उस नंबर को चुनें जिसे ब्लौक करना है. इसके बाद टॉप में दायीं तरफ नजर आ रहे है तीन डौट को चुनें.

– इसके बाद आप ब्लौक नंबर को चुनें.

शाओमी स्मार्टफोन पर नंबर ब्लौक करने की सुविधा स्टौक एंड्रायड वाली ही है. इसमें आपको रीसेंट कौल्स वाले सेक्शन में जाना होगा. इसके बाद किसी भी नंबर लंबे समय तक दबाएं रखें और ब्लौक नंबर को सेलेक्ट करें.

अगर आपके एंड्रायड फोन में इन-बिल्ट कौल ब्लौकिंग फीचर नहीं है. या फिर आप इस फीचर को ढूंढ नहीं पा रहे हैं तो आपके पास किसी फोन नंबर को ब्लौक करने का एक और तरीका भी है. आप गूगल प्ले स्टोर से किसी भी थर्ड-पार्टी कौल ब्लौकिंग ऐप (मिस्टर नंबर ऐप, कौल ब्लौकर ऐप या कौल्स ब्लैकलिस्ट ऐप) को डाउनलोड कर सकते हैं.

हमें नहीं लगता कि हमें कुछ बदलने की जरूरत है : कोहली

भारतीय कप्तान विराट कोहली ने अपनी कप्तानी में अब तक खेले 38 मैचों में हर बार अंतिम एकादश में बदलाव किया है. जब उनसे पूछा गया कि क्या अगला टेस्ट ऐसा होगा जिसमें वह अंतिम एकादश में बदलाव करेंगे तो उन्होंने कहा कि हमें नहीं लगता कि कुछ बदलने की जरूरत है.

उन्होंने कहा कि सभी खिलाड़ी फिट हैं. अश्विन ने अच्छी वापसी की है. उनका अभ्यास सत्र अच्छा रहा. वह अच्छा कर रहे हैं. जहां तक बदलाव की बात है तो यह सिर्फ हमेशा बदलाव के लिए नहीं होता है. कई बार खिलाड़ी चोटिल होते हैं, जिन्हें ध्यान में नहीं रखा जाता. चीजों को जिस तरह से देखा जा रहा है वह सही है, लेकिन हमें कुछ भी बदलने की जरूरत नहीं है.

भारतीय कप्तान ने कहा कि खिलाड़ी अपने अनुभव का फायदा उठाएंगे और अतिरिक्त मेहनत करेंगे जो उन्होंने ट्रेंट ब्रिज में की थी. शायद चार साल पहले हम बढ़त लेने के बाद उसे आगे नहीं बढ़ा पाए थे. 2014 में भारत 1-0 की बढ़त लेने के बाद तीन टेस्ट मैच यहां हारा था. विराट ने कहा कि अभी हम बहुत रोमांचक स्थिति में हैं. जब आप 0-2 पर होते हैं तो सभी सोचते हैं कि क्लीन स्वीप होने जा रहा है, लेकिन हम आगे बढ़ने जा रहे हैं. हमने महत्वपूर्ण मौकों पर निर्दयी, निरंतर और उन मौकों पर फायदा उठाने की आपस में बात की. हमने नॉटिंघम में ऐसा ही किया. हमें लक्ष्य हासिल करने के लिए यही दो बार और करना होगा. हमें एक जीत से संतुष्ट नहीं होना होगा. अगर नॉटिंघम में हमने कड़ी मेहनत की तो आगे और कठिन होने वाला है क्योंकि इंग्लैंड दमदार वापसी करना चाहेगा.

सभी तेज गेंदबाजों से इनकार          

भारतीय कप्तान ने साफ किया कि अगर पिच जोहानिसबर्ग टेस्ट की तरह होती तो हमें पूर्ण तेज गेंदबाजी आक्रमण का इस्तेमाल करने में कोई दिक्कत नहीं होती, लेकिन हमें नहीं लगता कि यह यह पिच उसकी तरह है. मुझे नहीं लगता कि सिर्फ तेज गेंदबाजों को खिलाना सही विकल्प होगा. यहां पर हमने जब पिछला मैच खेला था तो दूसरी पारी में स्पिनरों ने विकेट लिए थे. सतह बहुत मजबूत है और अगर पैरों के निशान बनने पर स्पिनर इसमें काफी बड़ा रोल निभा सकते हैं.

खुले दिमाग से खेलें बल्लेबाज

पिच पर उछाल को लेकर बल्लेबाजी में बदलाव के सवाल पर कोहली ने कहा कि उनके बल्लेबाज इस पिच पर खुले दिमाग से खेलें. मुझे नहीं लगता कि किसी बल्लेबाज को खेल मे बदलाव की जरूरत है. हम किसी भी बात पर अड़ना नहीं चाहते हैं. अगर विकेट अलग-अलग व्यवहार कर रहे हैं तो आपको लचीला होना होगा.

100 गेंदों के फॉर्मेट में नहीं खेलेंगे

विराट कोहली ने इससे पहले एक साक्षात्कार में कहा कि व्यावसायिक पहलू के कारण क्रिकेट की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है. इसके साथ ही उन्होंने इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड द्वारा प्रस्तावित 100 गेंद के प्रारूप की भी निंदा की. तीनों प्रारूप में भारतीय टीम के कप्तान कोहली ने कहा, ‘मैं पहले ही बहुत… मैं यह नहीं कहूंगा कि परेशान हूं, लेकिन कई बार इतना ज्यादा क्रिकेट लगातार खेलने से परेशान हो ही जाते हैं. मुझे लगता है कि व्यावसायिक पहलू का असर क्रिकेट की गुणवत्ता पर पड़ रहा है जिससे मैं दुखी हूं.’ इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड 100 गेंद का नया प्रारूप शुरू करने जा रहा है जिसकी सभी निंदा कर रहे हैं.

कोहली ने कहा कि वह एक और प्रारूप का हिस्सा नहीं बनेंगे. उन्होंने कहा, ‘जो लोग इससे जुड़े हैं, उनके लिए यह काफी रोमांचक है, लेकिन मैं एक और प्रारूप नहीं खेल सकता. मैं किसी भी नए प्रारूप के लिए प्रयोग का जरिया नहीं बनना चाहता. मैं विश्व एकादश का हिस्सा नहीं बनना चाहता जो 100 गेंद का प्रारूप लांच करेगा. मुझे आईपीएल खेलना पसंद है. मैं बिग बैश लीग भी देखता हूं क्योंकि आपके भीतर इससे प्रतिस्पर्धी भावना बढ़ती है. मुझे लीग से गुरेज नहीं, लेकिन प्रयोग गंवारा नहीं है.’ उन्होंने कहा, ‘काउंटी क्रिकेट मुझे बहुत पसंद है. इस बार नहीं खेल सका लेकिन भविष्य में जरूर खेलूंगा.’

तेल में उछाल से इस साल महंगाई और बढ़ेगी

रिजर्व बैंक ने आशंका जताई है कि इस साल महंगाई में और इजाफा हो सकता है. आरबीआई ने बुधवार को जारी 2017-18 की सालाना रिपोर्ट में कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और तेल बाजार में मांग व आपूर्ति में हो रहे बदलाव का प्रभाव देश के व्यापार घाटे पर होने वाला है.

आरबीआई ने सरकार को महंगाई के मोर्चे पर चेताते हुए कहा कि आने वाले दिनों में महंगाई ऊपर जाने की आशंका है और इसके लिए तैयारी और सावधानी दोनों की जरूरत है. उसने महंगाई पर काबू पाने के लिए तत्काल कदम उठाने की सलाह देते हुए कहा कि वर्तमान में देश का व्यापार घाटा पांच साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचकर 18 अरब डॉलर हो गया है.

इसी तरह बीते जुलाई में थोक महंगाई सूचकांक की दर बढ़कर 5.09% पहुंच गई थी, जबकि सब्जियों-फलों की कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई थी. साल 2017 की जुलाई में यह दर महज 1.88% पर थी. खुदरा महंगाई की दर भी 2017 के मध्य से लगातार बढ़ रही है और वर्तमान में यह 5% के आसपास बनी हुई है.

नोटबंदी लक्ष्य पाने में सफल रही : केंद्र

आरबीआई की रिपोर्ट के बाद सरकार ने बुधवार को कहा कि नवंबर 2016 में की गई नोटबंदी का लक्ष्य काफी हद तक हासिल हुआ है. इससे कालेधन पर अंकुश लगाने में मदद मिली है.

आर्थिक मामलों के सचिव एससी गर्ग ने कहा कि नोटबंदी से कालेधन पर अंकुश, आतंकवादियों को वित्त पोषण, डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देना और नकली नोट को समाप्त करने जैसे मकसद काफी हद तक पूरे हुए हैं. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि देश में अब कहीं भी नकदी की समस्या नहीं रह गई है.

हालांकि आरबीआई के आंकड़े को लेकर विपक्ष ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया. आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि नोटबंदी से लोग बहुत ज्यादा प्रभावित हुए, लेकिन इससे क्या हासिल हुआ? पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि मेरा पहला सवाल यह है कि कालाधन कहां गया. दूसरा यह कि क्या योजना इसलिए लाई गई थी कि कुछ लोग कालेधन को सफेद कर सकें.

सियासत : राजस्थान में नई इबारत लिखने को तैयार कांग्रेस

कर्नाटक में सरकार बनाने में कामयाब होने के बाद कांग्रेस की निगाहें अब राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ पर हैं. इन तीनों राज्यों में साल के आखिर तक विधानसभा चुनाव होने हैं.

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जहां भाजपा सरकार के कुशासन, भ्रष्टाचार और पिछड़े दलित आदिवासियों को सताने के चलते चर्चा में हैं, वहीं राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार कुशासन व भ्रष्टाचार के साथ ही गुटबाजी और पार्टी हाईकमान से टकराव के चलते सुर्खियों में है.

कांग्रेस हाईकमान ने राजस्थान की बाजी जीतने के लिए पार्टी के युवा और अनुभवी नेता सचिन पायलट को आगे किया है. गुर्जर समुदाय से होने के साथ ही वे नौजवानों में भी काफी मशहूर हैं.

वसुंधरा राजे की राजसी बैकग्राउंड और संघ से दूरी के चलते राज्य में लगातार उन का जमीनी आधार कमजोर हुआ है. सिर्फ राज्य सरकार ही नहीं, बल्कि केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार के खाते में भी उपलब्धियों के नाम पर कुछ खास नहीं है.

ठोस उपलब्धियों की कमी में अब भारतीय जनता पार्टी सरकार जातीय व धार्मिक तनाव पैदा कर वोटों का ध्रुवीकरण करने में लगी है. लेकिन भाजपा की नीतियों के चलते राज्य में जाट, गुर्जर और राजपूत समुदाय उस से दूरी बना रहे हैं.

साल 2013 में वसुंधरा राजे ने भारी बहुमत से सरकार बनाई थी. तब राजस्थान की जनता ने उन पर विश्वास जताते हुए 45.2 फीसदी वोटों के साथ 163 सीटों पर जीत दिलाई थी. दिसंबर, 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 33.1 फीसदी वोट और 21 सीटें ही मिली थीं. उस के बाद भाजपा को लोकसभा चुनाव में भी भारी बहुमत मिला था.

राजस्थान की जनता को यह उम्मीद थी कि इस बार केंद्र व राज्य की भाजपा सरकारें जनता की उम्मीदों पर खरी उतरेंगी, लेकिन बीते साढ़े 4 साल में वसुंधरा सरकार ने जनता की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. राज्य में जातीय तनाव के साथ कानून व्यवस्था की हालत पतली रही है. किसान, मजदूर, कारोबारी और मध्य तबका परेशान रहा है.

सचिन पायलट कहते हैं, ‘‘भाजपा के मंत्री और विधायक काम के चलते नहीं बल्कि अल्पंसख्यकों पर बेबुनियाद आरोप लगा कर चर्चा में रहे हैं. गोमांस के नाम पर मुसलिमों की हत्या और किसानों पर  लाठीचार्ज से वसुंधरा राजे का दामन दागदार हुआ है. किसानों की खुदकुशी और फसल की कीमत तय करने की मांग को ले कर राज्य में किसान आंदोलन खड़ा हुआ है.

‘‘वसुंधरा सरकार ने किसानों की मांग पर सुनवाई करने के बजाय उन पर पुलिसिया कार्यवाही कर के आंदोलन को कुचलने की साजिश रची. अब जब चुनाव नजदीक आ रहे हैं तो भाजपा धार्मिक और जातीय भावनाओं को भड़का कर गोलबंदी करने में जुट गई है.’’

राजस्थान की जमीनी राजनीति से मिल रहे संकेतों को कांग्रेस पढ़ने में कामयाब रही है. वसुंधरा सरकार के कुशासन के खिलाफ कांग्रेस ने कमर कस ली है.

अलवर और अजमेर लोकसभा सीट व मांडलगढ़ विधानसभा सीट कांग्रेस ने बड़े अंतर से भाजपा से छीन ली थी. उपचुनावों में मिली जीत से यह कहा जा रहा है कि कांग्रेस राजस्थान में भाजपा के खिलाफ विकल्प बन गई है.

कांग्रेस हाईकमान ने राजस्थान में सचिन पायलट के लिए रास्ता और भी आसान करने के लिए राज्य के प्रमुख नेता अशोक गहलोत को पार्टी में संगठन महासचिव की अहम जिम्मेदारी सौंपी है.

विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस राज्य में गुटबाजी के डर को खत्म करने की पूरी कोशिश कर रही है. पार्टी आलाकमान ने एक तरह से सचिन पायलट का रास्ता साफ कर दिया है. पार्टी ने अशोक गहलोत को अखिल भारतीय कांग्रेस समिति में जगह दी है.

मतलब, केंद्रीय संगठन में बुला कर उन्हें राजस्थान से दूर कर दिया गया है. इसी तरह पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह को ओडिशा व सांसद राजीव सातव को गुजरात का एआईसीसी प्रभारी बना कर राज्य में गुटबाजी को खत्म करने की कोशिश की गई है.

सचिन पायलट कहते हैं कि सिर्फ राजस्थान में ही नहीं, बल्कि कांग्रेस पूरे देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जबरदस्त टक्कर देगी.

राहुल गांधी की अगुआई की तारीफ करते हुए सचिन पायलट कहते हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी एकमात्र शख्स हैं जो साल 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मुकाबला कर सकते हैं और भाजपा को सत्ता से हटा सकते हैं. भाजपा सवालों के जवाब देने से भाग रही है, लेकिन राहुल गांधी उसे जवाबदेह बनाने के लिए मजबूर कर रहे हैं.

सचिन पायलट का कहना है, ‘‘राहुल गांधी भाजपा की सभी नाकामियों को ले कर लगातार हमला कर रहे हैं और इस से विपक्षी ताकतों को ताकत और विश्वास मिल रहा है. सही समय आने पर भाजपा विरोधी सभी ताकतें एकजुट हो जाएंगी.’’

‘100 बौल क्रिकेट’ पर भड़के विराट, कहा नहीं बनूंगा इसका हिस्सा

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली ने इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) द्वारा प्रस्तावित 100 गेंदों वाले क्रिकेट टूर्नामेंट को लेकर चिंता व्यक्त की है. ईसीबी ने टी-20 टूर्नामेंट से इतर ‘100 गेंदों के क्रिकेट’ टूर्नामेंट के आयोजन का निर्णय लिया है. पुरुष और महिला दोनों वर्गो में इस टूर्नामेंट का अयोजन किया जाएगा जिसमें आठ-आठ टीमें हिस्सा लेंगी.

विराट का मानना है कि क्रिकेट के इस नए प्रारूप से खेल की गुणवत्ता में कमी आएगी जिस कारण वह चिंतित हैं. विराट ने कहा, “इस टूर्नामेंट की प्रक्रिया में शामिल लोगों को लिए यह बहुत रोमांचक होगा, लेकिन मैं क्रिकेट के एक अन्य प्रारूप के बारे में सोच भी नहीं सकता. आज के समय में जब इतनी ज्यादा क्रिकेट खेली जा रही है, यह नया टूर्नामेंट खिलाड़ियों के ऊपर अतिरिक्त भार डालेगा. मैं समझता हूं व्यापारिक पहलू क्रिकेट की गुणवत्ता पर भारी पड़ रहा है और मैं इसे लेकर चिंतित हूं.”

उन्होंने यह भी कहा कि वह टी-20 क्रिकेट का समर्थन करते हैं लेकिन ईसीबी के नए प्रयोग से इत्तेफाक नहीं रखते. विराट ने कहा, “वास्तव में मैं नहीं चाहता कि मुझे क्रिकेट के किसी नए प्रारूप में शामिल किया जाए. मैं उस वर्ल्ड-11 का हिस्सा नहीं बनना चाहता जो 100 गेंदों के टूर्नामेंट का आयोजन करे. मुझे इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में खेलना पसंद है, मुझे बिग बैश लीग (बीबीएल) देखना भी अच्छा लगता है क्योंकि आप शीर्ष स्तरीय विपक्षी का सामना करते हैं और एक क्रिकेटर के रूप में आप यही चाहते हैं. मैं हर लीग के समर्थन में हूं लेकिन किसी प्रयोग का नहीं.”

विराट ने आगे कहा, “अगर आप फर्स्ट-क्लास क्रिकेट को महत्व नहीं देंगे, तो लोग खेल के सबसे लंबे प्रारूप में खेलने का उत्साह खो देंगे. टी-20 लीग की बढ़ती लोकप्रियता के कारण क्रिकेट बोर्ड को घरेलू क्रिकेट को अधिक महत्व देने की जरूरत है क्योंकि अगर सुविधा और खेल का स्तर आगे बढ़ेगा तो उत्सुकता बनी रहेगी.”

उन्होंने अगले वर्ष जुलाई में शुरू होने वाले वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप के बारे में कहा, “मैं समझता हूं कि टेस्ट चैम्पियनशिप से टेस्ट क्रिकेट आगे बढ़ेगा. इससे हर सीरीज में दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर होगी और टूर्नामेंट में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिलेंगे. मैं इस चैम्पियनशिप के लिए बहुत उत्सुक हूं.”

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