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SBI की चेतावनी : ये 5 गलतियां की तो अकाउंट हो जाएगा खाली

एसबीआई ने एक बार फिर से अपने ग्राहकों को चेतावनी दी और कहा, अगर आपने ये गलतियां की तो आपके अकाउंट से पैसे गायब हो सकते हैं. आपको बता दें कि पिछले दिनों औनलाइन बैंक फ्रौड की बढ़ती वारदातों के बाद एसबीआई की तरफ से अपने ग्राहकों को जागरूक किया गया है.

हाल ही में हैकर्स ने डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड का डाटा हैक कर कौसमौस बैंक से 90 करोड़ रुपये गायब कर दिए. ऐसे में आपको और भी ज्यादा सचेत रहने की जरूरत है. इस सभी को ध्यान में रखते हुए एसबीआई ने अपने ग्राहकों के लिए एडवाइजरी जारी की है. देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक ने अपने ट्विटर हैंडल के माध्यम से अपने ग्राहकों को जानकारी दी है. ग्राहकों को यह जानकारी देने के पीछे बैंक का मकसद ग्राहकों को किसी भी प्रकार के औनलाइन फ्रौड से बचाना है.

इन 5 बातों का रखें ध्यान

– एसबीआई की तरफ से कहा गया है कि बैंक आपकी गोपनीय जानकारी जैसे यूजर आई डी, पिन, पासवर्ड, सीवीवी, ओटीपी, वीपीए आदि कभी नहीं पूछता. यदि आपसे कोई इस बारे में जानकारी मांगता है तो उसे कभी नहीं बताएं.

– आप कभी भी औनलाइन ट्रांजेक्शन पब्लिक प्लेस जैसे रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड या भीड़भाड़ वाली जगह पर नहीं करें. साथ ही यह भी ध्यान रखें कि कभी भी औनलाइन ट्रांजेक्शन करने के लिए फ्री वाई-फाई का प्रयोग न करें. ऐसा करने से आपकी गोपनीय जानकारी लीक हो सकती है.

– एसबीआई खाताधारकों को कभी भी अपने बैंक अकाउंट की डिटेल अपने मोबाइल में सेव करके नहीं रखनी चाहिए. न ही ऐसी डिटेल को किसी पेपर आदि पर लिखकर फोटो के माध्यम से फोन में रखना चाहिए. बैंक के खो जाने की स्थिति में कोई भी इसका दुरुपयोग कर सकता है.

– एसबीआई ग्राहकों को कभी भी अपना एटीएम या क्रेडिट कार्ड दूसरे व्यक्ति को नहीं देना चाहिए. यदि आपने किसी दुकान पर शापिंग की है तो अपनी आंखों के सामने ही भुगतान करने के लिए कार्ड को स्वैप कराए. अगर आप इसे अपने सामने स्वैप नहीं कराते हैं तो इसे हैक किया जा सकता है या इसका क्लोन तैयार किया जा सकता है.

– एसबीआई खाताधारकों को अपने बैंकिंग ट्रांजेक्शन से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर नहीं करनी चाहिए. कभी भी ऐसा करने पर आप आसानी से हैकर्स के निशाने पर आ सकते हैं.

वीडियो: जब महिला टेनिस खिलाड़ी ने मैच के दौरान कोर्ट पर बदली टी-शर्ट

अमेरिकी ओपन के रेफरियों पर लैंगिक भेदभाव करने का आरोप लगा है. मामला फ्रांस की टेनिस खिलाड़ी एलिजा कार्नेट से जुड़ा हुआ है. यूएस ओपन के पहले दौर के मैच के दौरान कोर्ट पर ही एलिजा कार्नेट का अपनी शर्ट बदलने की घटना पर नया विवाद पैदा हो गया है और यूएस टेनिस एसोसिएशन (यूएसटीए) का मानना है कि चेयर अंपायर का इस फ्रांसीसी खिलाड़ी को चेतावनी देना गलत था. बहुत तेज गर्मी के कारण दस मिनट तक कोर्ट से बाहर जाने की अनुमति दी गई. ऐसे ही ब्रेक के दौरान कार्नेट ने पसीने से तर अपनी शर्ट बदल दी थी, वह फिर से खेल शुरू होने से पहले तेजी से शर्ट बदलकर कोर्ट पर पहुंची लेकिन उन्होंने उसे उल्टा पहन लिया.

कार्नेट को इसका अहसास नहीं था लेकिन उनके पुरूष मित्र ने इस तरफ उनका ध्यान आकर्षित किया. ऐसी स्थिति में कार्नेट ने बेसलाइन के पीछे खड़े होकर अपनी शर्ट निकाली और फिर उसे सीधा करके पहन लिया. चेयर अंपायर क्रिस्टियन रस्क ने इसके बाद कार्नेट को चेतावनी दी. फ्रांसीसी खिलाड़ी इस मैच में स्वीडन की योहाना लार्सेन से 4-6 6-3 6-2 से हार गयी थी. कार्नेट ने बाद में संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘निश्चत तौर पर जब मैंने तेजी से शर्ट बदली और उन्होंने मुझे आचार संहिता के उल्लंघन की चेतावनी दी तो मैं हैरान थी. मुझे इसकी उम्मीद नहीं थी. मैंने उन्हें बताया कि यह बहुत अजीब है.’ यूएसटीए भी कार्नेट से सहमत लगता है. यूएस ओपन के आयोजक यूएसटीए ने बयान में कहा, ‘‘हमने यह सुनिश्चित करने के लिए अपनी नीति को स्पष्ट किया है कि आगे ऐसा नहीं होगा. सौभाग्य से उसे केवल चेतावनी दी गयी तथा किसी तरह की सजा या जुर्माना नहीं लगाया गया.’

रस्क के फैसले की सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना हो रही है. इनमें तीन बार के ग्रैंडस्लैम चैंपियन एंडी मर्रे की मां जूडी भी शामिल हैं. यूएस ओपन में दो बार की उप विजेता विक्टोरिया अजारेंका ने भी चेयर अंपायर के फैसले की आलोचना की. अजारेंका ने कहा, ‘‘अगर मैं अपनी भावनाओं को व्यक्त करती हूं तो उन्हें ब्लीप बजाकर काट दिया जाएगा, क्योंकि मुझे लगता है कि यह हास्यास्पद था. उसने (कार्नेट ने) कुछ भी गलत नहीं किया. यह किसी भी तरह से अपमानजनक नहीं था. उसने शर्ट गलत पहन ली थी और इसलिए उसे बदला. मुझे नहीं लगता कि इस पर बहस होनी चाहिए थी. मुझे खुशी है कि उन्होंने माफी मांग ली है और उम्मीद है आगे ऐसा नहीं होगा.’

महिलाएं पेशेवर टेनिस मैचों के दौरान कोर्ट पर बमुश्किल ही कपड़े बदलती हैं जबकि पुरूष हर समय अपनी शर्ट बदलते रहते हैं. मंगलवार को ही 13 बार के ग्रैंडस्लैम चैंपियन नोवाक जोकोविच गर्मी से राहत पाने के लिये चेंजओवर के समय शर्ट निकालकर बैठे रहे. महिला टेनिस टूर डब्ल्यूटीए ने भी अंपायर की चेतावनी को ‘अनुचित’ करार दिया. उसने कहा कि कार्नेट ने जो कुछ किया उससे उसे रोकने के लिए कोई नियम नहीं है. डब्ल्यूटीए ने कहा, ‘‘एलिजा ने कुछ भी गलत नहीं किया.’

एक बेहतरीन हौरर कौमेडी

महत्वाकांक्षी औरत पुरुषों के लिए कितनी खतरनाक हो सकती है, इसी बात को निर्माता दिनेश विजन और निर्देशक अमर कौशिक ने अपनी हौरर कौमेडी फिल्म ‘‘स्त्री’’ में पेश किया है. यूं तो फिल्म की कहानी एक ऐसी भूतनी की है, जो कि लोगों के घरों के दरवाजे पर रात्रि में दस्तक देती है. पुरुष के कपड़े उतरवाकर उसे उठाकर ले जाती है. सैकड़ों वर्षों से हमारे देश की औरतें भूतनी या चुड़ैल के नाम पर प्रताड़ित की जाती रही हैं. पर अंत में यह फिल्म कहती है कि उसे प्यार व इज्जत चाहिए.

bollywood stree movie review in hindi

फिल्म की कहानी मध्यप्रदेश के चंदेरी नामक छोटे शहर की है. जहां हर वर्ष मंदिर में चार दिन की पूजा होती है. और हर वर्ष इन चार दिन की हर रात एक ‘स्त्री’ आती है और लोगों के शरीर के कपड़े फेंक कर उन्हे उठा ले जाती है. हर वर्ष लोग अपने घरों की दीवारों पर लिखवाते हैं-‘ओ स्त्री कल आना’. हर किसी का मानना है कि एक भूतनी यह काम करती है. इसी गांव मे एक दर्जी का बेटा और सिलाई में निपुण विकी (राज कुमार राव) अपने दोस्तों बिट्टू (अपराशक्ति खुराना) और जना (अभिषेक बनर्जी) के साथ रहता है.

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विकी खुद को मौर्डन युवक मानता है और वह भूम प्रेत आदि में यकीन नही करता. उधर इसी शहर के ‘रूद्र पुस्तक सेंटर’ के मालिक रूद्र (पंकज त्रिपाठी) खुद को ज्ञानी मानते हैं और भूतनी से बचने के उपाय लोगों को बताते रहते हैं. मंदिर में पूजा शुरू होने से पहले एक लड़की आकर विकी से अपने लिए तीन दिन में लहंगा सिलकर देने के लिए कहती है. उसकी अदा पर विकी मोहित हो उससे प्यार कर बैठते हैं. लड़की रात में मंदिर में पूजा के समय मिलने की बात कह देती है. विकी मंदिर में जाता है. पर लड़की आरती खत्म होने के बाद मंदिर से बाहर विकी से मिलती है.

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उसी रात एक पुरुष को भूतनी /चुड़ैल उठा ले जाती है. उधर रूद्र इन तीनों दोस्तों को चंदेरी पुराण और स्त्री के पीछे की सच्चाई बताता है. उधर लड़की विकी से छिपकली की पूंछ सहित कई तरह को सामान मंगवाती है और विकी को लेकर सुनसान जंगल में जाती है. पर वह अचानक गायब हो जाती है. मगर कुछ देर बाद उसके दोस्त जना को भूतनी उठा ले जाती है. हर दिन शहर के हालात बिगड़ते जाते हैं. उधर वह लड़की विकी के साथ मिलकर उस भूतनी को खत्म करने की बात करती है. कहानी में कई मोड़ आते हैं. अंततः गायब हुए सभी पुरुष वापस आ जाते हैं. चार दिन बाद वह लड़की वापस चली जाती है. बस में उसका असली रूप सामने आ जाता है.

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फिल्म की कहानी व पटकथा ठीक ठाक है. फिल्म डराती नहीं है, मगर हंसाती जरुर है. मगर लेखक व निर्देशक दोनों कई जगह दुविधा में नजर आते हैं कि वह ‘स्त्री’ के माध्यम से अंध श्रद्धा को खत्म करने की बात करें या न करें. फिल्म में कुछ ह्यूमरस संवाद हैं, जो कि दर्शकों को हंसाते हैं. ज्ञानी यानी कि रूद्र के परदे पर आने से ही हंसी के पल पैदा होते हैं.

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जहां तक अभिनय का सवाल है, तो राज कुमार राव व श्रद्धा कपूर दोनों ने जानदार काम किया है. पर फिल्म के असली हीरो बनकर पंकज त्रिपाठी उभरते हैं. इंटरवल के बाद वह अकेले अपने बलबूते पर पूरी फिल्म को लेकर चलते हैं. पंकज त्रिपाठी के उम्दा अभिनय की तारीफ तो करनी ही पड़ेगी. अपराशक्ति खुराना व अभिषेक बनर्जी ठीक हैं.

दो घंटे सात मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘स्त्री’’ का निर्माण दिनेश विजन और राज एंड डीके ने मिलकर किया है. फिल्म के निर्देशक अमर कौशिक, पटकथा लेखक राज एंड डी के, संवाद लेखक सुमित अरोड़ा, संगीतकार सचिन जिगर, पार्श्व संगीतकार केतन सोधा, कैमरामैन अमलेंदु चैधरी तथा कलाकार हैं – राज कुमार, श्रद्धा कपूर,पंकज त्रिपाठी, अपराशक्ति खुराना, अभिषेक बनर्जी, विजय राज और मेहमान कलाकार नोरा फतेही व कृति सैनन.

आपकी तस्वीरों के लिए परफेक्ट हैं ये ऐप्स

जब से आजकल के युवाओं के बीच सेल्फी लेने का जुनून बढ़ा है, तब से अब तक धीरे-धीरे तमाम फोटो एडिटिंग एप्लीकेशन्स का सिलसिला भी जोरों-शोरों से शुरू हुआ है और बढ़ता गया है. यूं तो बाजार में आजकल शानदार कैमरा क्वालिटी वाले बहुत सारे स्मार्टफोन उपलब्ध हैं, लेकिन फिर भी फोटो क्लिक करने के बाद उसमें कई बार कोई न कोई कमी लगती ही है. अब ऐसे में आप और हम जैसे यूजर्स कोई ऐसे टूल की खोज करते हैं जिनसे कि फोटो की क्वालिटी को और अधिक बढ़ाया जा सके. इसके लिए आप विभिन्न फोटो एडिटिंग ऐप्स की मदद ले सकते हैं.

ये सारी ऐप्स एडिटिंग इफेक्ट्स वाली होती हैं, जो फोटो में तरह-तरह के बदलाव कर उसे और खूबसूरत बना देती हैं. तो आज हम आपको ऐसे ही कुछ फोटो एडिटिंग ऐप्स के बारे में बता रहे हैं जो डाउनलोड करने में भी मुफ्त हैं और इस्तेमाल करने में भी सबसे अच्छी हैं.

फोटो वन्डर : यह आपकी तस्वीरों को एडिट करने के लिए सबसे उत्तम ऐप्लीकेशन है. आपके तस्वीर की हर एक चीज इस ऐप की मदद से एडिट की जा सकती है. इस ऐप की मदद से आप अपनी तस्वीर में आपनी स्किन का रंग फेयर करने के अलावा चेहरे से डार्क सर्कल भी हटा सकते हैं. बिन मेक-अप वाली तस्वीरों का पूरा मेक-ओवर कर सकते हैं.

ब्यूटीप्लस : यह ऐप सबसे आसान ऐप है. इस ब्यूटीप्लस एप्लिकेशन में आपकी सेल्फी को और भी बेहतर किया जा सकता है क्योंकि इसमें ऑटोमैटिकली इन्हेन्स का उपयोग किया जाता है. यदि इसमें आप हाई क्वालिटी सेल्फी पर क्लिक करते हैं तो यह ब्यूटीप्लस, एडिटिंग की एक परफेक्ट एप्लिकेशन होती है. इसमें हेंड-फ्री शॉट्स की सुविधा भी दी जाती है. और इसकी मदद से आप अपने फोटो को फेसबुक, ट्विटर आदि पर भी शेयर कर सकते हैं.

कैंडी कैमरा : इस एप्लिकेशन के प्रयोग से भी आप सीधा ऐप से ही एक सुंदर फोटो क्लिक कर सकते हैं. इसके अलावा इस ऐप के प्रयोग से आप अपने सेल्फी को कई तरह से फिल्टर कर सकते हैं, साथ ही अपनी इमेज से मेकअप हटाना या लगाना चाहते हैं तो यह सुविधा भी इसमें उपलब्ध होती है.

कैंडी कैमरा फॉर सेल्फी में सेल्फी के लिए अनगिनत ब्यूटी टूल्स दिए गए हैं. इसमें एक साइलेंट कैमरा भी मौजूद होता है, जिसका उपयोग किसी भी खास मौके पर आराम से किया जा सकता है. बहुत सारी तस्वीरों का कोलाज बनाने के अलावा, तस्वीरों पर स्टीकर का उपयोग कर सकते हैं.

फोटो एडिटर प्रो : आपकी फोटो क्लिक करने के बाद इस खास ऐप के प्रयोग से आप, अपनी तस्वीर में कई खास तरह के इफेक्ट्स और फिल्टर्स जोड़ सकते हैं. इसके प्रयोग से फोटो को और भी बेहतर बनाया जाता है. फोटो को रोटेट और क्रॉप करने के अलावा कलर बैलेंसिंग और फनी-स्टीकर्स का उपयोग भी इसमें कर सकते हैं.

एडिटर प्रो में आकर्षक और खूबसूरत फोटो फ्रेम्स और कोलाज उपलब्ध होते हैं, जिनसे आप इमेज को और भी खूबसूरत बना सकते हैं.

कैमरा फोटो एडिटर : यह फोटो एडिटिंग के लिए .यह काफी प्रसिद्ध ऐप है. इस एप्लिकेशन के प्रयोग से आप आसानी से अपनी इमेज में कई बदलाव कर सकते हैं. ना केवल एफेक्ट्स लगा सकते हैं, बल्कि साथ ही फ्रेम और कोलाज से उसे और भी आकर्षक बना सकते हैं.

कैमरा फोटो एडिटर में भी मेकअप, क्रॉप, स्टीकर और बॉर्डर जैसे कई खास फीचर्स दिए गए हैं. साथ ही आप से अपनी आवश्यकतानुसार और भी स्टीकर और फ्रेम आदि खरीद सकते हैं. यह इंटरनेट के अलावा बिना इंटरनेट के भी आसानी से कार्य करता है. आपकी फोटो में बदलाव करने के बाद उन्हें सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर शेयर किया जा सकता है.

पिक्सआर्ट : ऊपर बताई गई ऐप्स की तरह ही पिक्सआर्ट में भी फोटो के रंग को बदलने के साथ-साथ उसमें फ्रेम एवं कोलाज भी बनाए जा सकते हैं. फोन में एंड्रॉयड यूज करने वालों के बीच यह कॉफी लोकप्रिय फोटो एडिटिंग ऐप है और प्रयोग में बेहद आसान भी है.

पिक्सआर्ट में फोटो एडिटिंग के लिए क्लोन टूल, क्रोप टूल, लेयर एडिटिंग, फोटो फिल्टर, कैमरा लेयर, मास्क और शेप मास्क आदि कई सारे टूल्स दिए गए हैं, जो किसी भी फोटो को बेहद आकर्षक बना सकते हैं. पिक्सआर्ट में भी आप फोटो एडिट करने के बाद उन्हें सीधे सोशल नेटवर्किंग साइट जैसे फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, ड्रोपबॉक्स और ईमेल पर शेयर भी कर सकते हैं.

ब्रैस्ट फीडिंग की सुविधाजनक तकनीकों को आप भी जानिए

नवजात पैदा होने के तुरंत बाद स्तनपान के लिए तैयार होता है. वह अपने व्यवहार से दर्शाता है कि वह स्तनपान करना चाहता है जैसे चूसने की कोशिश करना, अपने मुंह के पास उंगलियां लाना. पैदा होने के बाद पहले 45 मिनट से ले कर 2 घंटों के भीतर बच्चे का ऐसा व्यवहार देखा जा सकता है.

बच्चे के जन्म के बाद 6 सप्ताह स्तनपान के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण होते हैं. बच्चे को जन्म के बाद पहले 1 घंटे के अंदर स्तनों के पास रखें. हर 3-4 घंटे में बच्चे की जरूरत के अनुसार उसे स्तनपान कराएं. ऐसा करने से फीडिंग की समस्याएं कम होंगी, साथ ही आप इस से स्तनों में अकड़न की समस्या से भी बचेंगी.

कैसे करें शुरुआत

– एक आरामदायक नर्सिंग स्टेशन बनाएं और खुद को रिलैक्स रखें.

– स्तनपान कराते समय आरामदायक स्थिति में बैठें, जैसे आप कुरसी पर बैठ सकती हैं या बिस्तर पर बैठ कर तकिए का सहारा ले कर स्तनपान करा सकती हैं. बच्चे को अपने हाथों से सपोर्ट दें. इस दौरान ध्यान रखें कि आप के पैर सही स्थिति में हों. अगर आप बिस्तर पर हैं तो अपने पैरों के नीचे तकिया रखें. इसी तरह अगर कुरसी पर बैठ कर स्तनपान कराना चाहती हैं, तो फुटस्टूल का इस्तेमाल करें.

स्तनपान की कुछ तकनीकें

क्रैडल होल्ड: स्तनपान की इस तकनीक में आप बच्चे के सिर को अपनी बाजू से सहारा देती हैं. बिस्तर या कुरसी पर आराम से बैठ जाएं. अगर बिस्तर पर बैठी हैं तो तकिए का सहारा लें. अपने पैरों को आराम से किसी स्टूल या कौफी टेबल पर रख लें ताकि आप बच्चे पर झुकें नहीं.

बच्चे को अपनी गोद में इस तरह लें कि उस का चेहरा, पेट और घुटने आप की तरफ हों. अब अपनी बाजू को बच्चे के सिर के नीचे रखते हुए उसे सहारा दें. अपनी बाजू को आगे की ओर निकालते हुए उस की गरदन, पीठ को सहारा दें. इस दौरान बच्चा सीधा या हलके कोण पर लेटा हो.

यह तरीका उन बच्चों के लिए सही है, जो फुल टर्म में और नौर्मल डिलीवरी प्रक्रिया से पैदा हुए हैं. लेकिन जिन महिलाओं में सी सैक्शन हुआ हो, उन्हें इस तकनीक को नहीं अपनाना चाहिए, क्योंकि इस से पेट पर दबाव पड़ता है.

क्रौस ओवर होल्ड: इस तकनीक को क्रौस क्रैडल होल्ड भी कहा जाता है. यह क्रैडल होल्ड से अलग है. इस में आप अपनी बाजू से बच्चे के सिर को सपोर्ट नहीं करतीं.

अगर आप अपने दाएं स्तन से बच्चे को स्तनपान करा रही हैं, तो बच्चे को बाएं हाथ से पकड़ें. बच्चे के शरीर को इस तरह घुमाएं कि उस की छाती और पेट आप की तरफ हो. बच्चे के मुंह को अपने स्तन तक ले जाएं. यह तकनीक बहुत छोटे बच्चों के लिए सही है जो ठीक से लेट नहीं पाते.

क्लच या फुटबौल होल्ड: जैसाकि नाम से पता चलता है इस तकनीक में आप बच्चे को हाथों से ठीक वैसे पकड़ती हैं जैसे फुटबौल या हैंडबैग (उसी तरफ जिस तरफ से स्तनपान करा रही हैं).

बच्चे को अपनी बाजू के नीचे साइड में इस तरह रखें कि उस की नाक का स्तर आप के निपल पर हो. गोद में तकिया रख कर अपनी बाजू उस पर टिका लें और बच्चे के कंधे, गरदन और सिर को हाथ से सपोर्ट करें. सी होल्ड से बच्चे को निपल तक ले जाएं.

यह तकनीक उन महिलाओं के लिए अच्छी है जिन के बच्चे सिजेरियन से पैदा हुए हों.

रिक्लाइनिंग पोजिशन: बच्चे को इस तरह अपने पास लाएं कि उस का चेहरा आप की तरफ हो. उस के सिर को नीचे वाली बाजू से सपोर्ट करें और नीचे वाला हाथ उस के सिर के नीचे रखें.

अगर बच्चे को स्तन तक लाने के लिए थोड़ा ऊंचा करने की जरूरत हो तो छोटा सा तकिया या फोल्ड की हुई चादर उस के सिर के नीचे रखें. ध्यान रखें कि बच्चे को आप के निपल तक पहुंचने के लिए अपनी गरदन पर खिंचाव न लाना पड़े और न ही आप को झुकना पड़े.

अगर आप के लिए बैठना मुश्किल है, तो आप इस तरह से लेट कर बच्चे को स्तनपान करा सकती हैं. इस के अलावा जब आप रात या दिन में आराम कर रही हों, तो भी इस तरह बच्चे को लेटेलेटे स्तनपान करा सकती हैं.

स्तनपान कराने के बाद बच्चे को डकार दिलवाना बहुत जरूरी होता है. इस के लिए उस के पेट पर हलके से दबाव डालें. अगर 5 मिनट बाद भी बच्चे को डकार न आए और वह सहज लगे तो डकार दिलवाने की जरूरत नहीं है.

– डा. रीनू जैन, ऐग्जीक्यूटिव कंसलटैंट, ओब्स्टेट्रिक्स ऐंड गाइनोकोलौजी, जेपी हौस्पिटल, नोएडा

इसलिए अटूट होता है एक मां और बच्चे का संबंध

जब मिस वर्ल्ड का ताज किसी प्रतियोगी से सिर्फ एक प्रश्न दूर हो और उस प्रश्न के जवाब में प्रतियोगी एक मां को सब से ज्यादा सैलरी पाने का हकदार बताए और साथ ही मां की गरिमा को और बढ़ाते हुए यह भी कहे कि मां के वात्सल्य की कीमत कैश के रूप में नहीं, बल्कि आदर और प्यार के रूप में ही अदा की जा सकती है और जब उस के इस जवाब पर खुश हो कर विश्व भी अपनी सहमति की मुहर लगा कर उसे ‘ब्यूटी विद ब्रेन’ मानते हुए ‘मिस यूनिवर्स’ का ताज पहना देता है तो यकीनन उस की कही बात उस के ताज की ही तरह महत्त्वपूर्ण हो जाती है.

मानुषी छिल्लर के जवाब से शतप्रतिशत सहमत होने में संदेह की कोई गुंजाइश नहीं है. सचमुच मां का काम अतुल्य है. एक मां एक दिन में ही अपने बच्चे के लिए आया, रसोइया, धोबी, अध्यापिका, नर्स, टेलर, मोची, सलाहकार, काउंसलर, दोस्त, प्रेरक, अलार्मघड़ी और न जाने ऐसे कितने तरह के कार्य करती है, जबकि घर से बाहर की दुनिया में इन सब कार्यों के लिए अलगअलग व्यक्ति होते हैं.

एक विलक्षण शक्ति

मां बनते ही मां के कार्यक्षेत्र का दायरा बहुत विकसित हो जाता है, किंतु निश्चित रूप से मां को ‘संपूर्ण और सम्माननीय मां’ उस के वे दैनिक कार्य नहीं बनाते, बल्कि एक मां को महान उस की वह आंतरिक शक्ति बनाती है, जो उसे एक ‘सिक्स्थ सैंस’ के रूप में मिली होती है, जिस के बल पर मां बच्चे के अंदर इस हद तक समाहित हो जाती है कि अपने बच्चे की हर बात, हर पीड़ा, हर जरूरत, उस की कामयाबी और नाकामयाबी हर बात को बिना कहे केवल उस का चेहरा देख कर ही भांप लेती है.

मां का कर्तव्य केवल अपने बच्चों की जरूरतों को पूरा करना ही नहीं होता, बल्कि मां की और भी बहुत सी जिम्मेदारियां होती हैं. अपने बच्चों को समझना, जानना और उन पर विश्वास करना, उन का उचित मार्गदर्शन और चरित्र निर्माण कर के उन्हें एक अच्छा इंसान बनाना भी मां की जिम्मेदारियों में शामिल होता है.

जहां एक तरफ मां का भावनात्मक संबल किसी भी बच्चे का सब से बड़ा सहारा होता है, वहीं दूसरी तरफ मां के विश्वास और मार्गदर्शन में वह शक्ति होती है, जिस से वह अपने बच्चे को फर्श से अर्श तक पहुंचा सकती है.

बच्चे को योग्य बनाती है मां

जहां एक तरफ अब्राहम लिंकन की मां ने घोर आर्थिक तंगी के बावजूद अब्राहम लिंकन को चूल्हे के कोयले से अक्षर ज्ञान कराया और उन्हें अमेरिका के राष्ट्रपति के पद पर पदासीन होने योग्य बनाया, वहीं दूसरी तरफ जब महान वैज्ञानिक थौमस एडिसन को उन के स्कूल टीचर ने ‘ऐडल्ट चाइल्ड’ कह कर उन्हें हतोत्साहित किया तब उन की मां ने एडिसन से सचाई छिपा कर उन्हें स्कूल से निकाल लिया और घर पर स्वयं ही उन्हें शिक्षा देनी शुरू कर दी.

उस समय एडिसन की मां ने झूठ बोल कर विलक्षण प्रतिभा के धनी अपने बेटे एडिसन के कोमल मन को न केवल आहत होने से बचा लिया था, बल्कि उन्हें प्रोत्साहित कर उन के लिए एक महान वैज्ञानिक बनने का मार्ग भी प्रशस्त कर दिया था.

अब्राहम लिंकन और एडिसन की मांओं की ही तरह हमारे आसपास भी बहुत सी ऐसी मांएं होती हैं जो विपरीत हालात में अपने बच्चों का संबल बन कर उन्हें सफलता के शिखर तक ले जाती हैं.

कैसे बनाती है मां बेहतर तालमेल

अपने पति की ट्रांसफर की वजह से निहारिका को सत्र के बीच में अपने बेटे संकल्प का दूसरे शहर के स्कूल में दाखिल कराना पड़ा. वे नए शहर के एक बड़े स्कूल में संकल्प को प्रवेश परीक्षा दिलाने ले कर गईं.

संकल्प के प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण कर लेने के प्रति निहारिका पूरी तरह आश्वस्त थीं, किंतु उन्हें यह सुन कर जबरदस्त झटका लगा कि वह परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर सकता है. उसे संकल्प की काबिलीयत पर पूरा विश्वास था. अत: उस ने स्कूल प्रशासन से कहा कि वे उस की उत्तर पुस्तिका देखना चाहती हैं. विद्यालय प्रशासन ने उन्हें प्रिंसिपलरूम में बुला कर उत्तर पुस्तिका दिखाई.

निहारिका यह देख कर दंग रह गई कि सचमुच संकल्प ने अधिकांश सवालों के जवाब ही नहीं लिखे थे. उस ने प्रश्नवाचक निगाहों से संकल्प की ओर देखा तो उस ने धीरे से कहा, ‘‘मम्मा, मुझे प्रश्न समझ में नहीं आए.’’

मां की प्रश्नवाचक निगाह को बेटे का जवाब मिल गया था. निहारिका समझ गई थीं कि बेटा जवाब देने से इसलिए नहीं चूका कि उसे ज्ञान नहीं हैं, बल्कि इसलिए चूका कि शायद यहां प्रश्नपत्र बनाने का तरीका उस के पुराने विद्यालय से भिन्न है.

प्रिंसिपल ने निहारिका से कहा, ‘‘सौरी मैम, उत्तर पुस्तिका देख कर आप समझ गई होंगी कि संकल्प पढ़ाई में कमजोर है, इसलिए हम अपने स्कूल में उसे दाखिला नहीं दे पाएंगे.’’

अब निहारिका के सामने एक तरफ संकल्प द्वारा खाली छोड़ दी गई उत्तर पुस्तिका थी जिस के आधार पर विद्यालय उसे प्रवेश देने से इनकार कर रहा था, तो दूसरी तरफ एक मां का विश्वास था कि उस का बेटा अयोग्य नहीं है, क्योंकि वह उस की प्रतिभा से बहुत अच्छी तरह वाकिफ थी.

अंदरूनी प्रतिभा की पहचान

निहारिका ने प्रिंसिपल से कहा, ‘‘यह ठीक है सर कि मेरे बेटे ने सभी प्रश्न हल नहीं किए हैं और वह प्रवेश परीक्षा के मानदंड पर खरा नहीं उतर पाया है. अत: आप को इस बात का पूरा अधिकार है कि आप उसे अपने स्कूल में दाखिला न दें, लेकिन वह पढ़ाई में कमजोर है, मैं यह मानने को बिलकुल तैयार नहीं हूं और न ही मैं आप को ऐसा कहने दूंगी.’’

उन की बात सुन कर प्रिंसिपल हंस पड़े और बोले, ‘‘मैम, ऐसा मैं नहीं कह रहा हूं संकल्प की परफौर्मैंस कह रही है.’’

निहारिका ने उन से तर्क देते हुए कहा, ‘‘सर, आप 4 प्रश्नों के उत्तरों की परफौर्मैंस के आधार पर अगर मेरे बेटे को पढ़ाई में कमजोर कह सकते हैं तो उस की मां होने के नाते उस की आज तक ही हर परफौर्मैंस के आधार पर मैं यह कहती हूं कि मेरा बेटा बहुत ब्रिलिएंट है. अब आप बताएं कि यह कैसे सिद्ध होगा कि एक मां सही है यह उत्तर पुस्तिका.’’

निहारिका की बात सुन कर प्रिंसिपल बोले, ‘‘मैम, आप बिना बात अपना और हमारा समय बरबाद कर रही हैं.’’

मगर निहारिका नहीं मानीं. उन्होंने बड़ी विनम्रता से कहा, ‘‘सर, हो सकता है मेरी वजह से आप का कीमती समय बरबाद हो रहा हो पर एक मां होने के नाते अगर मैं इस समय अपने बेटे के पक्ष में नहीं बोली तो शायद मेरा बेटा अपना आत्मविश्वास खो देगा. आप प्रवेश न दें मुझे कोई शिकायत नहीं है पर जब तक मैं यह सिद्ध नहीं कर लूंगी कि मेरा बेटा कमजोर विद्यार्थी नहीं है मैं यहां से हरगिज नहीं जाऊंगी.’’

निहारिका की दृढ़ता देख कर प्रिंसिपल कुछ देर सोचते रहे, फिर बोले, ‘‘ठीक है, मैं संकल्प से कुछ प्रश्न पूछता हूं. देखता हूं वह कितनों के सही जवाब दे पाता है.’’

उस के बाद उन्होंने संकल्प से मैथ व सांइस के अनेक सवाल पूछे. संकल्प हर सवाल का सही जवाब देता गया. फिर उन्होंने उस से उस की हौबी और स्पोर्ट्स के सवाल पूछे. संकल्प ने उन के भी सही जवाब दिए.

निहारिका देख रही थीं कि हर सही जवाब के साथ संकल्प का आत्मविश्वास बढ़ता जा रहा था और प्रिंसिपल के चेहरे पर आश्चर्य के साथसाथ मुसकान भी फैलती जा रही थी.

उस के बाद प्रिंसिपल के व्यवहार में परिवर्तन आ गया. उन्होंने संकल्प की पीठ थपथपाते हुए कहा, ‘‘तुम लग तो ब्रिलिएंट रहे हो फिर तुम ने प्रश्न पूरे हल क्यों नहीं किए?’’

इस पर फिर उस ने सही जवाब दिया कि उसे प्रश्न समझ ही नहीं आए.

तब निहारिका ने कहा, ‘‘सर, निश्चय ही यहां के प्रश्न तैयार करने का ढंग संकल्प के पुराने स्कूल से अलग है, जिसे देख वह घबरा गया और ठीक से पेपर हल नहीं कर पाया. मगर अब तो आप ने स्वयं उस की परीक्षा ले ली, तो क्या आप अब भी इसे दाखिला नहीं देंगे?’’

प्रिंसिपल दुविधा में पड़ गए, क्योंकि अब उन्हें भी लगने लगा था कि संकल्प ने टैस्ट पेपर भले ही ठीक ढंग से हल नहीं किया पर वह है कुशाग्रबुद्धि. फिर उन्होंने प्रश्नवाचक दृष्टि से वाइस प्रिंसिपल की तरफ देखा कि क्या करना चाहिए?

काफी देर से निहारिका की बातें सुन रहे वाइस प्रिंसिपल ने कहा, ‘‘हिज मदर इज लुकिंग वैरी कौन्फिडैंट. हमें इन की बात पर भरोसा करना चाहिए और संकल्प को दाखिला देना चाहिए.’’

आत्मविश्वास की चमक

वसुंधरा का बेटा उत्कर्ष दूसरी कक्षा में पढ़ता था. उस के स्कूल में कक्षा का मौनिटर बनने के लिए बच्चों को स्कूल द्वारा दिए गए किसी एक विषय पर बोलना होता था. उन की वाक क्षमता तथा कुछ अन्य विशेषताओं के आधार पर सर्वश्रेष्ठ को मौनिटर चुना जाता था. उत्कर्ष ने भी प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था और उसे चुन लिए जाने की पूरी उम्मीद थी, किंतु वह चयनित नहीं हुआ.

उस दिन स्कूल से वापस आने के बाद उत्कर्ष वसुंधरा की गोद में सर रख कर जोरजोर से रोने लगा. पहले तो वसुंधरा घबरा गई पर फिर तुरंत मां की छठी इंद्रिय जागृत हो गई. उन्हें उत्कर्ष के रोने का कारण समझ में आ गया. उन्होंने उत्कर्ष से पूछा,  ‘‘क्या तुम मौनीटर नहीं चुने गए.’’

मां के मुंह से यह बात सुनते ही उत्कर्ष का रोना और तेज हो गया.

वसुंधरा ने उसे समझाते हुए कहा, ‘‘बेटा, हम जो चाहते हैं वह हमें मिलता जरूर है, पर यह जरूरी नहीं है कि वह पहली बार में ही मिल जाए. कुछ भी बनने या पाने के लिए हमें मेहनत करनी पड़ती है. एक बार असफल होने पर रोना या घबराना नहीं चाहिए, बल्कि अगली बार के लिए मेहनत करनी चाहिए. जब हम बिना घबराए और परेशान हुए पूरे मन से फिर से मेहनत करते हैं तो हमें हमारा लक्ष्य अवश्य हासिल हो जाता है.’’

अपनी मां के मुंह ये यह बात सुनते ही नन्हा उत्कर्ष अपने आंसू पोंछता हुआ पूछने लगा, ‘‘आप को कैसे मालूम?’’

अब वसुंधरा ने उस का हौसला बढ़ाते हुए कहा, ‘‘मैं तुम्हारी मां हूं, इसलिए मुझे पता है कि तुम जो चाहो वह कर सकते हो. बस तुम कोशिश करते रहो. देखना एक दिन तुम अपने स्कूल के हैड बौय भी बन जाओगे.’’

मां की बात सुन उत्कर्ष के चेहरे पर आत्मविश्वास की चमक आ गई. उस के मन में यह बात गहरे तक बैठ गई कि यदि वह कोशिश करेगा तो मौनीटर तो क्या हैड बौय तक बन जाएगा.

जगाती है सकारात्मक सोच

अगर संकल्प और उत्कर्ष दोनों की मांएं उन की असफलता पर नकारात्मक रूख अपनातीं तो स्थिति बिगड़ सकती थी. संकल्प के खराब अंक देख कर अगर उस समय निहारिका उसे डांटती और उस की नाकामयाबियां गिनाती हुई उसे वहां से घर ले आती तो यकीनन संकल्प का आत्मविश्वास डगमगा जाता और शायद घबरा कर अन्य स्कूलों में भी सही ढंग से प्रश्न हल नहीं कर पाता. किंतु अपने बच्चे की प्रतिभा पर पूर्ण विश्वास रखने की वजह से निहारिका ने न केवल संकल्प का आत्मविश्वास दृढ़ किया, बल्कि उसे स्कूल में दाखिला दिलवाने में भी कामयाब रही.

बच्चे का खराब परिणाम आने या उस की किसी प्रकार की असफलता पर जहां उसे डांटना व उस की कमियां गिनाना गलत है, वहीं दूसरों के सामने उस की झूठी तारीफ और उस की छोटी सी उपलब्धि को भी बहुत बढ़ाचढ़ा कर बखानने का परिणाम भी हानिकारक होता है.

बच्चे की असफलता पर चीखने और उसे कोसने के बजाय शांत रह कर असफलता के कारण को समझने और फिर उसे दूर करने की कोशिश में बच्चे की मदद करनी चाहिए.

बदल रही है मां की जिम्मेदारी

वक्त बदल रहा है और वक्त के साथ मां की जिम्मेदारियां भी बदल रही हैं. पहले मां के पास शिक्षा का ज्ञान नहीं होता था पर वह व्यावहारिक और सांस्कारिक ज्ञान देती रहती थी पर आज मां के पास व्यावहारिक और सांस्कारिक ज्ञान के साथसाथ शैक्षणिक ज्ञान भी है. आज मां अपने बच्चे को और बेहतर भविष्य दे सकती है, किंतु समयाभाव आज बहुत सी मांओं को उन के कर्त्तव्य पूरे करने से दूर कर रहा है, जिस का दुष्परिणाम समाज को भुगतना पड़ रहा है.

आज परिवेश बहुत तेजी से बदल रहा है, जिस की वजह से हर उम्र के बच्चों को अलगअलग प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. कई बार बच्चे अपनी समस्याओं को अपने मातापिता से शेयर नहीं करते हैं और अकेले उन से जूझते रहते हैं.

कई बार डांट के डर से बच्चे अपनी समस्याओं को शेयर नहीं करते. अत: यह बहुत आवश्यक है कि मां अपने बच्चे में इतना विश्वास जगाए रखे कि वह हर कदम पर और हर हालात में उस के साथ है ताकि बच्चा भयवश उस से अपनी परेशानी न छिपाए.

आज बच्चों की सुरक्षा भी एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न बन कर खड़ा है. यह असुरक्षा छोटीबड़ी हर उम्र की लड़कियों और अब तो लड़कों के लिए भी व्याप्त हो चुकी है. किशोरवय बच्चों में आक्रोश भरता जा रहा है और वे बिना सोचेसमझे कोई भी कदम उठाते चले जा रहे हैं. उन्हें संभालने और संयमित परवरिश का भार मां के ही कंधों पर है और समय के साथसाथ वह न केवल बढ़ता जा रहा है, बल्कि मां की और जागरूकता मांग रहा है.

जिस समय एक औरत एक मां की भूमिका निभा रही होती है ठीक उसी समय वह एक पत्नी, एक बहू, एक बेटी, एक बहन, एक पड़ोसी और कई बार केवल एक इंसान की भूमिका में भी अपने बच्चों के समक्ष होती है.

बच्चे हरेक के साथ अपनी मां के व्यवहार को बहुत बारीकी से देखते हैं. उन्हें मां की कोई बात बहुत अच्छी तो कई बार कुछ व्यवहार बहुत खराब भी लगता है. किंतु उस की वे कोई प्रतिक्रिया नहीं देते, क्योंकि मां की बातों का विरोध करना उन्हें नहीं आता पर उस के आधार पर मां के लिए उपजी भावना उन के अंदर एक जगह बना लेती है.

दिवंगत भूतपूर्व राष्ट्रपति डा. ऐपीजे अब्दुल कलाम ने कहा था कि किसी भी राष्ट्र के निर्माण में मां के योगदान की भूमिका तय कर दी गई है, इसलिए हर मां को यह बात समझनी चाहिए कि उस की जिम्मेदारी केवल अपने बच्चे को पालपोस कर खिलापिला कर बड़ा कर देने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उसे एक अच्छा नागरिक बनाना भी उस का ही कर्तव्य है, क्योंकि जब वह एक बच्चे का पालनपोषण कर रही होती है तो उस समय वह साथ ही साथ राष्ट्र के भविष्य का भी निर्माण कर रही होती है.

अब घर बैठे मिनटों में वैक्स करना हुआ आसान

आप को फ्रैंड की बर्थडे पार्टी में जाना हो और आप यह सोचसोच कर परेशान हो रही हों कि बिना हेयर रिमूव किए कैसे पार्टी में जाऊं, इस से तो मेरी पूरी ड्रैस की शोभा ही बिगड़ जाएगी. अभी मेरे पास इतना टाइम भी नहीं है कि पार्लर से अपौइंटमैंट लूं और अगर लिया भी तो टाइम खराब होने के साथसाथ जल्दबाजी में ज्यादा पैसे भी देने पड़ेंगे तो ऐसे में आप परेशान न हों बल्कि वीट कोल्ड वैक्स स्ट्रिप्स से कुछ ही मिनटों में बनें खूबसूरत.

पार्लर जैसी फिनिशिंग घर में ही

ये आप को बिलकुल पार्लर जैसी फिनिशिंग देने के साथसाथ आपकी स्किन को स्मूदनैस व मौइश्चर देने का काम करेगी.

हौट वैक्स की जलन से छुटकारा

बौडी पर हौट वैक्स से हेयर रिमूव कराने से हर कोई डरता है, क्योंकि इस प्रक्रिया में गरम वैक्स की वजह से जलने का डर भी रहता है. लेकिन कोल्ड वैक्स स्ट्रिप्स यूज करने में ईजी है. इस के लिए आप को बस स्ट्रिप्स को आराम से ओपन कर के हेयरी एरिया पर अप्लाई कर के हेयर की दिशा में पुल करना है. इस से दर्द भी न के बराबर होता है और बाल जड़ से भी निकल जाते हैं.

खास बात यह है कि स्ट्रिप्स का साइज अच्छाखासा है, जिस से काफी बड़ा एरिया कवर हो जाता है और आप को महीने भर तक इस की जरूरत महसूस नहीं होती. यह 1.5 एमएम के छोटे बालों को भी निकालने में सक्षम है.

आप इस की हर स्ट्रिप तब तक यूज कर सकती हैं जब तक यह अपनी चिपचिपाहट न खो दे. आप हेयर रिमूवल के बाद परफैक्ट फिनिश वाइप से बची वैक्स को भी आसानी से हटा सकते हैं.

टेनिंग रिमूव करने में कारगर

सिर्फ हेयर ही नहीं बल्कि टेनिंग रिमूव करने के साथसाथ ये डैड सैल्स को भी हटाने का काम करता है. ये 20 स्ट्रिप्स पैक जिस की कीमत क्व174 और 8 स्ट्रिप्स पैक जिस की कीमत क्व90 है में उपलब्ध है.

इसे ड्राई, नौर्मल और सैंसिटिव स्किन को ध्यान में रख कर डिजाइन किया गया है. इस्तेमाल करते वक्त यह ध्यान रखें कि सनबर्न व कटी हुई स्किन पर इसे अप्लाई न करें.

तो फिर तैयार हैं न घर पर वैक्स करने के लिए.

धरी रह गई झूठी आन, बान और शान

उत्तर प्रदेश के जिला फिरोजाबाद के थाना सिरसागंज का एक गांव है नगला नाथू. 23 अप्रैल, 2018 की रात 11 बजे गांव का ही एक आदमी गांव में आयोजित एक कार्यक्रम से दावत खा कर अपने घर जा रहा था.

जब वह मुन्नीलाल झा के घर के पास से गुजर रहा था तो उसे झाडि़यों में किसी लड़की के कराहने की आवाज सुनाई दी. उस ने पास जा कर देखा तो खून से लथपथ एक युवती कराह रही थी. उस व्यक्ति ने पूछा कौन है, लेकिन युवती की ओर से कोई जवाब नहीं आया.

उस व्यक्ति ने आसपास के लोगों को जानकारी दी, तो लोग अपनेअपने घरों से निकल आए. उन्होंने जब झाडि़यों में देखा तो वे उस लड़की को पहचान गए. वह मुन्नीलाल की 19 वर्षीय बेटी किरन थी.

जब लोगों ने मुन्नीलाल को यह सूचना देनी चाही तो देखा मुन्नीलाल के दरवाजे पर ताला लगा था. सभी परेशान थे कि किरन की यह हालत किस ने की है? उसी दौरान किसी ने इस की सूचना पुलिस को दे दी. कुछ ही देर में थानाप्रभारी सिरसागंज रविंद्र कुमार दुबे पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए.

पुलिस को किरन अपने घर के बाहर चबूतरे के कोने पर झाडि़यों में लहूलुहान अवस्था में तड़पती मिली. पुलिस किरन को उपचार के लिए सरकारी ट्रामा सेंटर फिरोजाबाद ले गई.

उस समय उस के परिवार का कोई भी व्यक्ति साथ नहीं था. केवल पड़ोस की एक महिला साथ थी. उस की हालत गंभीर थी, इसलिए डाक्टरों ने उसे आगरा के लिए रेफर कर दिया. लेकिन आगरा ले जाते समय रास्ते में ही किरन ने दम तोड़ दिया.

पुलिस ने चौकीदार राजकुमार की तरफ से भादंवि की धारा 302, 120बी के अंतर्गत रिपोर्ट दर्ज कर काररवाई शुरू कर दी. पुलिस को यह मामला औनर किलिंग का लग रहा था. थानाप्रभारी ने मामले की जानकारी एसएसपी डा. मनोज कुमार को दी तो वह भी मौके पर पहुंच गए. उन्होंने थानाप्रभारी को मृतका के घर वालों का पता लगाने के निर्देश दिए.

पुलिस ने किरन की लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी. उस समय रिश्तेदारों की बात तो छोडि़ए, मोहल्ले का कोई भी व्यक्ति शव के पास नहीं था. लावारिस हालत में शव ऐसे ही पड़ा था.

काफी समय बाद मृतका की बड़ी बहन सीमा, जोकि विधवा है, के ससुराल वाले वहां आ गए. पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने शव उन के हवाले कर दिया. उन्होंने अपने गांव वरनाहल ले जा कर उस का अंतिम संस्कार कर दिया.

मुन्नीलाल और परिवार वालों को तलाशने के लिए एसएसपी मनोज कुमार ने पुलिस की 3 टीमों का गठन किया. एसपी (देहात) महेंद्र सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीमों ने संभावित स्थानों पर दबिश दी लेकिन उन का पता नहीं चला.

घटना के तीसरे दिन पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर मुन्नीलाल को करहल रोड पर स्थित दिहुली चौराहे के निकट से सीओ अजय चौहान और थानाप्रभारी रविंद्र कुमार दुबे ने हिरासत में ले लिया. वह फरार होने के लिए वहां किसी वाहन का इंतजार कर रहा था.

थाने ला कर जब उस से उस की बेटी किरन की हत्या के बारे में पूछताछ की गई तो उस ने कहा कि बेटी ने उस का जीना हराम कर दिया था. ऐसे हालात में उस के सामने यह कदम उठाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था. अपनी बेटी की हत्या करने की उस ने जो कहानी बताई, इस प्रकार निकली.

गांव नगला नाथ निवासी मुन्नीलाल अहमदाबाद में प्राइवेट नौकरी करता था. उस की पत्नी की कई साल पहले मौत हो चुकी थी. मुन्नीलाल के 2 बेटियां सीमा व किरन और 3 बेटे गौरव, आकाश व राज थे. बड़े बेटे गौरव की मृत्यु पहले ही हो चुकी थी.

उस की विधवा पत्नी भी गांव में ही परिवार के साथ रहती है. बड़ी बेटी सीमा की शादी जिला मैनपुरी के गांव बरनाहल में हो गई थी. जब उस के बेटे बड़े हुए तो वह भी मजदूरी करने लगे. बेटों के काम करने पर घर का खर्चा आसानी से चलने लगा.

किरन जब जवान हुई तो उस के घर से कुछ दूर रहने वाले अवनीश से उसे प्यार हो गया. दोनों जब तक एकदूसरे को देख नहीं लेते, उन्हें चैन नहीं मिलता था. धीरेधीरे उन का प्यार परवान चढ़ने लगा.

वे चोरीछिपे मुलाकात भी करने लगे. हालांकि दोनों की जाति अलगअलग थी. इस के बावजूद उन्होंने शादी करने का फैसला कर लिया था. एक बार किरन ने उस से पूछा भी लिया, ‘‘अवनीश, वैसे मैं जातपांत में विश्वास नहीं करती, पर समाज से डर कर तुम मुझे कहीं भूल तो नहीं जाओगे?’’

इस पर अवनीश ने उस के होंठों पर हाथ रख कर उसे चुप कराते हुए कहा, ‘‘किरन, दो सच्चे प्रेमियों को मिलने से दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती. हमारे प्यार के बीच चाहे कितने भी व्यवधान आएं, मैं वादा करता हूं कि तुम्हारा हर तरह से साथ दूंगा. मैं जिंदगी भर तुम्हारा साथ नहीं छोड़ूंगा.’’

किरन और अवनीश अपने भावी जीवन के सपने देखते. जमाने से बेखबर वे अपने प्यार में मस्त रहते थे. पर गांवदेहात में प्यारमोहब्बत की बातें ज्यादा दिनों तक नहीं छिप पातीं. यदि किसी एक व्यक्ति को भी इस की भनक लग जाती है तो कानाफूसी से बात पूरे मोहल्ले में ही नहीं बल्कि गांव भर में फैल जाती है.

किसी तरह किरन के घर वालों को भी पता चल गया कि उस का अवनीश के साथ चक्कर चल रहा है. लिहाजा उस के पिता ने उसे समझाया कि वह उस लड़के से मिलनाजुलना बंद कर दे. पर उस के सिर पर तो प्यार का भूत सवार था. ऐसे में पिता के समझाने का उस पर कोई फर्क नहीं पड़ा.

उधर अवनीश के घर वालों ने भी उसे समझाया पर उस पर भी कोई असर नहीं हुआ. यानी दोनों की मुलाकातों का सिलसिला चलता रहा. वह पहले से अब ज्यादा सतर्क जरूर हो गए थे. मुन्नीलाल तो अहमदाबाद में काम करता था. वह कभीकभार घर आता था. किरन अपनी विधवा भाभी, भाई आकाश व राज के साथ रहती थी.

घर वालों की बंदिशें लगाने के बाद भी प्रेमी युगल छिपछिप कर मिलते रहे. उन के मिलने का यह सिलसिला निरंतर चलता रहा. इस के चलते दोनों परिवारों में तल्खी बढ़ती गई. 22 मार्च, 2018 को मुन्नीलाल गांव आया हुआ था. उस ने जब अवनीश को अपने घर के पास चक्कर काटते देखा तो उस का खून खौल उठा.

वह अवनीश को सबक सिखाना चाहता था, इसलिए उस ने किरन पर दबाव डाल कर थाना सिरसागंज में अवनीश, उस के 2 भाइयों चिंटू व धर्मवीर, जगदीश और मनीष के खिलाफ किरन के साथ छेड़छाड़ की रिपोर्ट दर्ज करा दी. घर वालों के दबाव में किरन ने रिपोर्ट तो लिखा दी, लेकिन उस ने आरोपियों के खिलाफ बयान नहीं दिया.

गांव वालों ने दोनों पक्षों में समझौता कराने का भरसक प्रयास किया, लेकिन मुन्नीलाल ने समझौता करने से साफ मना कर दिया. एक दिन किरन ने अवनीश से मुलाकात कर बता दिया कि उस के पिता ने रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए उसे मजबूर कर दिया था, पर वह अभी भी उस से प्यार करती है और करती रहेगी. यानी किरन का अपने प्रेमी से मिलना बंद नहीं हुआ.

किरन अवनीश से मिलती तो उस पर जल्दी शादी करने के लिए दबाव डालती. अवनीश ने कहा कि वह उस से शादी को तैयार है लेकिन जो मुकदमा लिखा दिया है, उसे वापस ले लो. इस के बाद किरन ने अपने घर वालों पर अवनीश के साथ शादी कराने का दबाव बनाना शुरू कर दिया.

चूंकि अवनीश दूसरी बिरादरी का था, इसलिए किरन के घर वालों ने साफ कह दिया कि उस के साथ शादी नहीं हो सकती. पर किरन अपनी जिद पर अड़ी रही. उस ने साफ कह दिया कि वह छेड़खानी के मुकदमे में अवनीश और उस के भाइयों के खिलाफ गवाही नहीं देगी और अगर अवनीश के साथ उस की शादी नहीं की तो वह अपनी जान दे देगी.

इस बात ने आग में घी का काम किया. मुन्नीलाल समझ गया कि किरन की जिद से मोहल्ले में उन की बदनामी हो रही है. तब उस ने अपने बेटे आकाश के साथ योजना बना कर एक खौफनाक निर्णय ले लिया. इसी बात को ले कर किरन का घटना की रात को पिता व भाई आकाश से काफी झगड़ा हुआ.

उस झगड़े में इश्क का जुनून किरन के सिर चढ़ कर बोलने लगा. उस ने इस बात की भी चिंता नहीं की कि उस का अंजाम क्या होगा. किरन के तेवर देख कर बापबेटे गुस्से में भर गए लेकिन उन्होंने उस समय उस से कुछ नहीं कहा.

रात को किरन जब चारपाई पर गहरी नींद में सो गई तो मुन्नीलाल ने उस पर कुल्हाड़ी से प्रहार किया. वह चीखी तो आकाश ने उसे ईंट से मारना शुरू किया.

कुल्हाड़ी और ईंट के वार से वह बेहोश हो गई. वह उसे चारपाई पर ही जलाना चाहते थे पर वह फिर से चीख पड़ी. कहीं पड़ोसी न आ जाएं, इसलिए उन्होंने उसे उठा कर बाहर चबूतरे के पास झाडि़यों में फेंक दिया और घर के सभी लोग ताला लगा कर फरार हो गए.

रात में गांव वालों ने किरन की चीखपुकार की आवाज सुनी तो उन्होंने सोचा कि मुन्नीलाल शायद किरन को पीट रहा है. क्योंकि किरन के किस्से की पूरे मोहल्ले को जानकारी थी. इस के कुछ देर बाद आवाज आनी बंद हो गई तो लगा कि उन का झगड़ा अब बंद हो गया है.

पुलिस ने मुन्नीलाल से पूछताछ के बाद उस के घर से खून सनी चारपाई व ईंट भी कब्जे में ले ली. बाद में मुन्नीलाल की निशानदेही पर कुल्हाड़ी भी बरामद हो गई. हत्या में शामिल उस के बेटे आकाश के बारे में जानकारी नहीं मिल सकी. पुलिस ने मुन्नीलाल से विस्तार से पूछताछ के बाद उसे न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया.

अवनीश की भाभी कविता ने बताया कि किरन शादी करने के लिए अवनीश पर दबाव डाल रही थी. उस से कहा गया कि हम शादी के लिए तैयार हैं, लेकिन पहले मामले में राजीनामा कर ले. लेकिन किरन का पिता राजीनामा नहीं होने दे रहा था. घटना वाले दिन अवनीश के घर वाले राजीनामे के लिए जब किरन को थाने ले जाने लगे तो मुन्नीलाल व उस का बेटा आकाश तैयार नहीं हुए.

कविता ने बताया कि घटना वाले दिन मुन्नीलाल दोपहर को यही कोई बारहएक बजे पटिया पर कुल्हाड़ी पैनी कर रहा था. इसे गांव के कई लोगों ने देखा था. लोग समझे कि लकड़ी काटने के लिए धार लगा रहा है. लेकिन क्या पता था कि वह अपनी बेटी को मारने के लिए धार लगा रहा था.

बहरहाल, झूठी शान दिखाने के चक्कर में मुन्नीलाल बेटी के कत्ल के आरोप में जेल चला गया और एक प्रेम कहानी का दर्दनाक अंत हो गया. कथा लिखे जाने तक आकाश को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर सकी थी.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

पोर्न के साइडइ फैक्ट्स के बारे में आप भी जान लीजिए

पोर्न आज के दौर में एक बड़ी इंडस्ट्री बन गया है, जिस का सालाना टर्नओवर अरबों डौलर का है. विश्व के अधिकतर लोगों ने कभी न कभी पोर्न फिल्में देखी होंगी. भारत में युवाओं में पोर्न देखने का चलन बढ़ता जा रहा है. इस का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारत पिछले 2-3 वर्षों में सब से ज्यादा पोर्न देखने वाले देशों में 10वें से तीसरे स्थान पर आ गया है.

24 साल की नेहा मल्टीनैशनल कंपनी में काम करती है. उसे काम के सिलसिले में विदेश जाना पड़ता है. वह अभी अविवाहित है. पोर्नोग्राफी के बारे में पूछे गए सवाल पर वह कहती है, ‘‘दूसरी लड़कियों का तो मुझे पता नहीं लेकिन मेरा जब मूड होता है, पोर्न मूवी देखती हूं ़ कई बार हम पार्टी भी करते हैं. नाइटपार्टी में अगर बौयज हैं तो कुछ न कुछ हो सकता है. ऐसे में मैं पार्टी से पहले पोर्न देखती हूं. मुझे इस में कोई बुराई नजर नहीं आती. यह मेरे जीवन का निजी हिस्सा है. मैं कभी किसी के साथ इस विषय पर कोई बात नहीं करती, अपनी सहेलियों से भी नहीं.’’

अति तो किसी भी चीज की बुरी होती है. पोर्न की लत किसी नशे की तरह है, जो आसानी से पीछा नहीं छोड़ती. पोर्न देखने में उतनी बुराई नहीं पर पोर्न का एडिक्शन होना बुरा होता है. यह सामाजिक, शारीरिक और मानसिक हर रूप में जीवन पर बुरा प्रभाव डालता है. एक रिसर्च में पाया गया कि जो व्यक्ति ज्यादा पोर्न फि ल्में देखते हैं, उन का दिमाग सिकुड़ जाता है.

यदि व्यक्ति के दिमाग का स्ट्रेटम छोटा है तो उसे ज्यादा नुकसान हो सकता है. इसी अध्ययन में यह भी पता चला है कि पोर्न फिल्में देखने वाला व्यक्ति अपनी निजी जिंदगी में भी उसी तरह सैक्स करना चाहता है, लेकिन अकसर ऐसा हो नहीं पाता क्योंकि पोर्न फिल्मों को जानबूझ कर ज्यादा भड़काऊ और आकर्षक बनाया जाता है. वैसा करना आम आदमी के बस की बात नहीं. इस का नुकसान यह होता है कि व्यक्ति को कभी संतुष्टि नहीं मिल पाती. व्यक्ति के स्वभाव में क्रूरता और उग्रता आ जाती है जिस से वह चिड़चिड़ा हो जाता है.

पोर्न से दूर होते दोस्त और परिवार

नेहा ने बताया कि हम दोस्तों से भले ही हर बात शेयर करते हों पर यह नहीं बताते कि हम पोर्न देखते हैं. असल में पोर्न के शिकार युवा दोस्तों से दूरी बनाने लगते हैं. वे हमेशा नया पोर्न देखने का लिए प्रयासरत रहते हैं.

पोर्न न देखने का कारण बताते शिविका बताती है, ‘‘पोर्न देखने से सैक्स की जानकारी होती है क्योंकि जिंदगी में सैक्स का काफी महत्त्व है. हमारे समाज में सैक्स पर खुल कर बात नहीं होती है. सैक्स में सावधानी और संयमकी बहुत जरूरत है. पोर्न देखने वाले युवा एकाकी स्वभाव के होते हैं.’’

ऐसे युवा परिवार में भी अलगथलग रहने की कोशिश करते हैं. वे अपने पेरैंट्स से दूर होते जाते हैं. धीरेधीरे वे अपने भाईबहन से भी दूर होने लगते हैं. वे हमेशा एकांत की तलाश में रहते हैं. अब मोबाइल, लैपटौप और कंप्यूटर पर इस की सुविधा होने से पोर्न देखना आसान हो गया है. आज मोबाइल पर सब से ज्यादा पोर्न देखा जाता है. युवा अपने मोबाइल इसी कारण दूसरों से दूर रखते हैं. कई बार किसी को दूसरी फिल्में या फोटो भेजने की जगह पर पोर्न फिल्में गलती से चली जाती हैं जिस से इमेज खराब होती है.

सेहत और पढ़ाई पर प्रभाव   

युवावस्था कैरियर बनाने के लिहाज से सब से अहम होती है. इस दौरान युवाओं का पोर्न की तरफ आकर्षित होना कैरियर पर बुरा प्रभाव डालता है. मनोविज्ञानी बताते हैं कि इसे देखने वाले युवाओं का मन भटक  जाता है. वे हमेशा इस के प्रभाव में रहते हैं. ऐसे में उन का कैरियर खराब हो जाता है. आमिर खान की फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ में यह दिखाया गया है कि साथी अपने ही दोस्तों का ध्यान पढ़ाई से हटाने के लिए होस्टल में उन्हें पोर्न किताबें दे देते थे जिस से साथी के नंबर कम आएं या वह फेल हो जाए.

पोर्न देखने वाले ज्यादातर युवा अप्राकृतिक सैक्स के आदी हो जाते हैं. वैसे मैडिकली यह बुरा नहीं है पर अगर सही तरह और हाईजीन का ध्यान रख कर नहीं किया जाएगा तो यह हैल्थ की नजर से खराब होता है.

सैक्स जीवन पर असर

लगातार पोर्न देखने से व्यक्ति अपने पार्टनर से वैसी ही उम्मीद रखने लगता है जैसा पोर्न फिल्मों में दिखाया जाता है लेकिन इसे हकीकत में उतारना मुमकिन नहीं होता. इस का नुकसान यह होता है कि व्यक्ति का अपने पार्टनर के प्रति अलगाव पैदा होने लगता है. जब लड़कियां ऐसे पोर्न देखती हैं और शादी के बाद उन्हें ऐसे हालात नहीं मिलते तो उन का वैवाहिक जीवन खराब होने लगता है.

पोर्न देखने से सैक्स को ले कर विकृत नजरिया बन जाता है. शादी के बाद तमाम लड़कियों को यह शिकायत होती है कि उन के पति ने अप्राकृतिक सैक्स की डिमांड की या जोरजबरदस्ती की. औक्सिटौसिन दिमाग में पाया जाने वाला एक शक्तिशाली हार्मोन है जिसे ‘लव हार्मोन’ भी कहा जाता है. यह हार्मोन पुरुष और महिलाओं दोनों को बंधन में बांधने में मदद करता है. अगर सैक्स पोर्न फिल्मों की तरह किया जाए तो यह हार्मोन काम नहीं करता जिस का असर रिश्तों पर पड़ता है.

सैक्स को पोर्न फिल्मों की तरह करने वाले व्यक्ति फोरप्ले ठीक ढंग से नहीं कर पाते. फोरप्ले के दौरान जोड़े चरम सुख लेते हैं जिस से उन में काफी निकटता आती है पर पोर्न वाली मानसिकता के कारण यह कहीं खो जाती है.

कुछ लोग उत्तेजित होने के लिए पोर्न का सहारा लेने लगते हैं और धीरेधीरे यह उन की आदत बन जाती है. इस का नुकसान यह होता है कि व्यक्ति प्राकृतिक तौर पर उत्तेजित होने में नाकाम होने लगता है जिस का आगे चल कर नुकसान होता है. अवैध संबंधों के लिए पोर्न काफी हद तक जिम्मेदार है. ज्यादा पोर्न देखने वाले लोग अकसर किसी के साथ अवैध संबंध बनाने के बारे में सोचते रहते हैं जो समाज के लिए काफी नुकसानदेह साबित हो रहा है और कई बार मर्यादा तारतार होने की भी आशंका रहती है. पोर्न देखने का यह सब से बड़ा नुकसान है.

फर्जी विश्वविद्यालयों का जाल कहीं कर न दे कैरियर चौपट

मेरठ के आशीष शर्मा के पिता की तमन्ना थी कि उन का बेटा इंजीनियर बने. लेकिन आशीष इंजीनियरिंग की प्रवेशपरीक्षा में उतना अच्छा रैंक हासिल नहीं कर पाया, जिस से उस का ऐडमिशन किसी अच्छे इंजीनियरिंग कालेज में हो सके और वह एमिटी जैसी डीम्ड यूनिवर्सिटी में ऐडमिशन के लिए मोटी फीस जुटाने में समर्थ नहीं था.

आखिरकार उस ने उत्तर प्रदेश के एक प्राइवेट इंजीनियरिंग कालेज में कंप्यूटर साइंस विषय में दाखिला ले लिया. आशीष अपनी मनपसंद फैकल्टी पा कर खुश था, लेकिन उस की खुशी तब काफूर हो गई जब 3 महीने बाद उसे पता चला कि वहां पढ़ाने वाले योग्य शिक्षकों की कमी है.

कुछ ऐसा ही दिल्ली की सीमा गर्ग के साथ भी हुआ, जिस ने दिल्ली के एक इंजीनियरिंग कालेज की आर्किटैक्चर फैकल्टी में दाखिला लिया था. दाखिले के 2 महीने बाद ही उसे पता चला कि वहां पढ़ाने वाले कुछ विषयों के शिक्षक ही नहीं हैं, जिस वजह से उस के साथ पढ़ने वाले कुछ छात्रों ने कालेज छोड़ने का मन बना लिया.

और तो और, वह जिस विश्वविद्यालय में पढ़ रही है, उस को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं है. उस ने अपने एक साल का नुकसान कर फिर से अगले सत्र के लिए प्रवेशपरीक्षा दी और अच्छी रैंक आने पर जम्मू के एनआईटी कालेज में नाम दर्ज करवाया. इस तरह सीमा का न केवल एक साल बरबाद हुआ, बल्कि उसे करीब डेढ़ लाख रुपए का नुकसान भी हुआ.

बिचौलियों का चक्कर

मणिपुर की मोली ऐमोल मैडिकल की पढ़ाई के लिए बीते 2 वर्षों से प्रवेश परीक्षाएं दे रही थी, लेकिन उसे सफलता नहीं मिल पाई. इसी दौरान उस के पिता की मुलाकात एक बिचौलिए से हुई, जिस ने 30 लाख रुपए में कर्नाटक के किसी मैडिकल कालेज में उस का दाखिला करवाने का आश्वासन दिया. साथ ही, उस ने कालेज की भी काफी प्रशंसा की और प्लेसमैंट की गारंटी दी.

सत्र की शुरुआत के 2 महीने बाद भी उस ने स्टाफ कोटे से दाखिले का भरोसा दिलाया. पितापुत्री दोनों उस की बातों में आ गए, लेकिन जब उन्होंने कालेज के बारे में दूसरे लोगों से पूछताछ की तो मालूम हुआ कि बिचौलिए द्वारा किए गए सारे वादे झूठे थे. इस तरह वे पैसे गंवाने और कैरियर खराब होने से बच गए.

एक ऐसा ही मामला दक्षिणी कश्मीर का है, जहां एक शिक्षक इमरान खान गाय पर निबंध नहीं लिख पाया और उस की नौकरी चली गई. इसे सरकारी स्कूलों की शिक्षा का गिरा स्तर कहें या फर्जीवाड़े के शिकार हुए शिक्षक की हकीकत.

डिगरियों का फर्जीवाड़ा

दिल्ली सरकार के पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर की फर्जी डिगरी को ले कर भी हंगामा मचा था. कानून और बीएससी की डिगरी फर्जी होने के आरोप में उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया था. उन्होंने बीएससी की डिगरी राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय और कानून की डिगरी भागलपुर (बिहार) के तिलका मांझी विश्वविद्यालय से हासिल की थी. कुछ ऐसा ही मामला बिहार के कुछ शिक्षकों का भी सामने आया था.

फर्जी डिगरी के कारण करीब 2 हजार से अधिक शिक्षकों ने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया. ऐसा पटना हाईकोर्ट द्वारा जारी किए गए एक आदेश के कारण हुआ. पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन नरसिम्हा रेड्डी और सुधीर सिंह की खंडपीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता रंजीत पंडित और अन्य जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए आदेश में सख्ती से कहा था कि फर्जी शैक्षणिक योग्यता वाले शिक्षक कानूनी कार्यवाही से बचने के लिए खुद ही नौकरी छोड़ सकते हैं.

कुछ ऐसा ही फर्जी डिगरी का मामला राजस्थान में तब आया जब मंडूकला स्थित जोधपुर नैशनल विश्वविद्यालय के दस्तावेजों की जांच स्पैशल औपरेशन गु्रप (एसओजी) द्वारा की गई. इस में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए. विश्वविद्यालयों के चेयरमैन सहित तमाम संचालकों ने करीब 10 हजार फर्जी डिगरियों की बंदरबांट की थी. रिकौर्ड में उन तमाम विद्यार्थियों के एनरौलमैंट नंबर तक नहीं पाए गए. जबकि विद्यार्थियों की मार्कशीट में एनरौलमैंट नंबर हैं.

इस के अतिरिक्त फर्जीवाड़े से संबंधित कई महत्त्वपूर्ण दस्तावेज भी हाथ लगे. एसओजी द्वारा रजिस्ट्रार और वीसी से पूछताछ में उन्होंने स्वीकार किया कि विश्वविद्यालय ने करीब 10 हजार डिगरियां बेची हैं. हालांकि इन की संख्या दोगुनी से भी ज्यादा हो सकती है. इस बड़ी धांधली को देखते हुए राजस्थान सरकार ने जोधपुर विश्वविद्यालय को ही बंद करने का मन बना लिया है.

झूठे दावों का जाल

नए सत्र की शुरुआत होते ही देशभर की पत्रपत्रिकाएं नएनए कालेजों और विश्वविद्यालयों के विज्ञापनों से भर जाते हैं. शिक्षा विभाग की वैबसाइट पर कई तरह के प्रलोभनों वाले विज्ञापन आने लगते हैं. कालेज प्रबंधन कौलसैंटरों के जरिए सीधे विद्यार्थियों और अभिभावकों से संपर्क साधने लगते हैं. इन में कई तरह के प्रलोभन दिए जाते हैं और सुविधाएं गिनाई जाती हैं, लेकिन वे विश्वविद्यालय की संबद्घता के बारे में ठोस और संतोषजनक जानकारी नहीं देते हैं.

अकसर युवा उच्चपढ़ाई जैसे एमबीए, बीबीए, एमसीए, बीई, बीटैक, एमटैक, एमबीबीएस जैसे कोर्स करने के लिए बगैर जांचपड़ताल किए ही चमकदमक, हाईफाई ऐक्टिविटी वाले स्टाफ, हाईटैक सुविधाओं वाले कौन्फ्रैंस रूम, स्टडीरूम, लाइब्रेरी, लैबोरैटरी, मल्टीनैशनल कंपनियों में प्लेसमैंट के दावे आदि की गिरफ्त में आ जाते हैं. उन्हें इस की असली हकीकत का पता तब चलता है जब उन की पढ़ाई का सत्र शुरू हो चुका है.

कई बार तो इस का पता पढ़ाई बीचबीच में अटकने और सत्र के समय पर पूरा नहीं होने से होता है. लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी होती है. यूजीसी की कोशिशों के बावजूद  पिछले 10 वर्षों में करीब 90 हजार विद्यार्थी फर्जी विश्वविद्यालयों के शिकार बन चुके हैं.

देश में कुल 712 ऐसे विश्वविद्यालय हैं जिन्हें यूजीसी से मान्यता प्राप्त है. इन में 330 राज्य स्तरीय विश्वविद्यालय हैं, जबकि 128 विश्वविद्यालयों को डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त है. केंद्रीय विश्वविद्यालयों के तौर पर

46 विश्वविद्यालय हैं. प्राइवेट विश्वविद्यालयों की संख्या 208 है. इन सभी की पूरी जानकारी यूजीसी की वैबसाइट पर उपलब्ध है, जहां से फर्जी विश्वविद्यालयों के बारे में मालूम किया जा सकता है.

अब खास बात यह है कि इन फर्जी विश्वविद्यालयों से बचा कैसे जाए? इन की पहचान किस तरह से की जाए? हालांकि पिछले दिनों यूजीसी द्वारा जारी की गई सूची में पाया गया कि कइयों के पते तक गलत थे और कई किराए के मकान में चलाए जा रहे थे.

मनमानी फीस वसूलते संस्थान

फर्जी विश्वविद्यालयों के जाल में फंस चुके भुक्तभोगियों का कहना है कि प्राइवेट कालेजों के झांसे में एक बार आ गए, तो बगैर नुकसान के नहीं निकल सकते. फर्जी विश्वविद्यालयों के प्रशासक धौंस जमा कर समयसमय पर फीस वसूलते रहते हैं.

उन की आमदनी का स्रोत कुकुरमुत्ते की तरह उग आए प्राइवेट कालेज, कोचिंग इंस्टिट्यूट, पत्राचार के जरिए पढ़ाई करवाने वाली दूरस्थ शिक्षा और औनलाइन पढ़ाई की वैबसाइट्स हैं. ये प्रवेश लेने वाले हर छात्र के हिसाब से फीस वसूलते हैं और खुद को यूजीसी द्वारा मान्यता प्राप्त बताते हैं, जबकि उस ने मान्यता के लिए केवल आवेदन किया होता है. यह एक तरह से शिक्षा माफिया द्वारा बुने गए जाल की तरह ही होता है, जिस में कसबे, शहरों से ले कर महानगरों तक मुनाफाखोर फैले हैं. इस धंधे में तथाकथित संस्थाएं और एनजीओ भी शामिल हैं. उन्हें किसी न किसी राजनीतिक दल या राजनेता का संरक्षण प्राप्त होता है. कुछ रिटायर प्रशासनिक अधिकारी भी कानूनी और कागजी प्रक्रिया पूरी करने में अप्रत्यक्षतौर पर इन की मदद करते हैं.

अधिकांश छात्र अच्छे अंक न आने की वजह से फर्जीवाड़े में फंस जाते हैं. वे भावनात्मक स्तर पर देश की मुख्यधारा में घटित विविध घटनाओं की रौ में बह कर शौर्टकट तरीका अपनाते हैं.

दिल्ली की तंग गलियों में चलने वाले कोचिंग इंस्टिट्यूट द्वारा प्रोफैशनल कोर्स करवाने और अच्छी नौकरी दिलवाने का भरोसा दिया जाता है. उन शिक्षण संस्थानों को यूजीसी की मान्यता प्राप्त न होने पर भी वे भविष्य सुधारने का दावा करते हैं. कइयों के दावे तो काफी हैरतअंगेज होते हैं. वे परीक्षाओं में फेल होने के बावजूद बीए, एमए, एमकौम की डिगरी घर बैठे दिलवाने के दावे करते हैं.

इन दिनों इस क्षेत्र में औनलाइन पढ़ाई की सैकड़ों वैबसाइट्स हैं, जो प्राइवेट या सीमित दायरे की क्षमता वाले विश्वविद्यालयों के अतिरिक्त विदेशी विश्वविद्यालयों से डिगरी दिलाने का भरोसा देते हैं. हैरानी की बात तो यह है कि बीएड और फिजियोथेरैपी जैसे नियमितरूप से पढ़े जाने वाले कोर्स भी डिस्टेंस मोड में चल रहे हैं.

कैसे लगे लगाम

कुल मिला कर देश में फर्जी डिगरियां बेचना एक उद्योग बन चुका है. यूजीसी महज सूची जारी कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेता है. फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची तो केवल बानगी मात्र है, जो जांच के बाद सामने आई है.

बड़ा सवाल यह है कि इस तरह के फर्जीवाड़े को रोका क्यों नहीं जा रहा है. क्या यह एक तरह से कमीशनखोरी का अवैध खेल नहीं है? भारतीय दंड संहिता की धारा 144 और आपराधिक दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 188 के तहत फर्जी डिगरियां बांटने वाली संस्थाओं को बंद किया जा सकता है.

बहरहाल, आप यदि फर्जी विश्वविद्यालयों के जाल में फंसने से बचना चाहते हैं तो लुभावने वादों वाले विज्ञापनों, सुनीसुनाई बातों और देखादेखी से बचना जरूरी है. शैक्षिक संस्थानों की मौजूदा रैंकिंग जाननी जरूरी है, लेकिन सिर्फ इसी आधार पर दाखिला लेने का फैसला करना भी भूल हो सकती है. इस बात की कोई गारंटी नहीं होती कि बेहतर रैंकिंग वाले कालेज से आप की सफलता सुनिश्चित होगी. विशेषज्ञों का मानना है कि अभिभावकों को कालेज तलाश करने में अधिक ध्यान छात्र की जरूरत, उस की योग्यता और कमजोरियों पर देना चाहिए.

साथ ही, इस बात का भी ध्यान रखें कि जिस कालेज या यूनिवर्सिटी में दाखिला ले रहे हैं वह मान्यताप्राप्त है या नहीं? कालेज में दाखिले का कटऔफ प्रतिशत क्या है? कालेज में छात्रों की संख्या और उन के बैकग्राउंड के बारे में जानना जरूरी है. कालेज की वैबसाइट के अलावा उस की सोशल मीडिया प्रजैंस पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए, जहां से आप को पता चल पाएगा कि वहां के छात्र किन चीजों से खुश या नाखुश हैं.

कालेज परिसर में रहने के इंतजाम क्या हैं. क्या ये मुख्यतौर पर आवासीय या नियमित आनेजाने वालों का कैंपस है? फैकल्टी की विस्तृत जांचपड़ताल करें, योग्य और स्थायी शिक्षकों के बारे में तो जानकारी होनी चाहिए. मौजूदा छात्रों और हाल में ग्रैजुएट हुए लोगों से बातचीत कर भी अहम जानकारी मिल जाती है. प्रोफैशनल कालेज के पिछले कुछ वर्षों का प्लेसमैंट रिकौर्ड और इंटरर्नशिप देने वाली कंपनियों की लिस्ट से उस की रैंकिंग का अंदाजा लगाया जा सकता है.

अभिभावकों को चाहिए कि कालेज की बुनियादी जानकारी जुटाएं. संबंधित कालेज में दी जाने वाली स्कौलरशिप के बारे में भी पता करें. कालेज में पढ़ाई के लिए मिलने वाले एजुकेशन लोन की जानकारी मिलने से भी सरकार की सुविधाओं के साथसाथ उस की विश्सनीयता का पता चलता है. इस तरह अच्छे से रिसर्च कर फर्जी कालेज और विश्वविद्यालय के जाल में फंसने से बच सकते हैं.

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